Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल में 17 साल के किशोर की हत्या से सनसनी: दो करोड़ के लालच में वारदात का आरोप, शरीर का हिस्सा गायब

    भोपाल में 17 साल के किशोर की हत्या से सनसनी: दो करोड़ के लालच में वारदात का आरोप, शरीर का हिस्सा गायब


    भोपाल । भोपाल में 17 वर्षीय किशोर की हत्या के मामले ने सनसनी फैला दी है। पुलिस जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक किशोर को कथित तौर पर दो करोड़ रुपए कमाने के लालच में निशाना बनाया गया। पुलिस को आशंका है कि हत्या के बाद उसके शरीर के एक हिस्से को अलग कर कहीं भेजने की योजना बनाई गई थी। हालांकि इन आरोपों की पुलिस स्तर पर जांच और पुष्टि अभी जारी है।

    शाहजहांनाबाद थाना क्षेत्र का रहने वाला किशोर अपने परिवार का इकलौता बेटा था और मोती मस्जिद इकबाल मैदान समेत आसपास के इलाकों में फेरी लगाकर पेन और कॉपी बेचता था। उसकी कमाई से ही परिवार का गुजारा चलता था। छह अगस्त को वह इकबाल मैदान क्षेत्र से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की।

    करीब पांच दिन बाद 11 अगस्त को किशोर का शव छोटे तालाब से बरामद हुआ। शव की स्थिति खराब होने के कारण तत्काल पहचान नहीं हो सकी। बाद में कपड़ों और चप्पलों के आधार पर 14 अगस्त को परिजनों ने उसकी पहचान की। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच को आगे बढ़ाया।

    जांच के दौरान पुलिस ने रविवार को मुखबिर की सूचना पर एक नाबालिग संदेही को हिरासत में लिया। पूछताछ में कथित तौर पर किशोर की हत्या और उसके शरीर के एक हिस्से को अलग किए जाने से जुड़ी जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने जोहेब नेहा समेत कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है। करीब 13 लोगों से पूछताछ की जा रही है जिनमें कुछ नाबालिग भी शामिल बताए जा रहे हैं।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार जांच में यह बात सामने आई है कि कुछ लोगों ने नाबालिगों को कथित तौर पर यह लालच दिया था कि शरीर के एक विशेष अंग को विदेश भेजकर करोड़ों रुपए कमाए जा सकते हैं। इसी लालच में किशोर को मदद करने का भरोसा देकर सुनसान स्थान पर ले जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि हत्या के बाद शरीर के एक हिस्से को अलग किया गया और उसे दिल्ली के रास्ते विदेश भेजने की योजना बनाई गई थी। इस कथित सौदे में शामिल लोगों और इसके पीछे मौजूद नेटवर्क का पता लगाने के लिए पुलिस पूछताछ कर रही है।

    आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने रविवार रात कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी। छोटे तालाब और आसपास के इलाकों में भी तलाश अभियान चलाया गया लेकिन शव का लापता हिस्सा अभी बरामद नहीं हुआ है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित साजिश के पीछे कौन लोग हैं और क्या वास्तव में किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से इसका संबंध है।

    मामले में उस समय एक नया मोड़ आया जब एक अन्य 17 वर्षीय किशोर अपने परिजनों के साथ थाने पहुंचा। उसने आरोप लगाया कि संदिग्धों ने उसे भी निशाना बनाने की कोशिश की थी। किशोर के मुताबिक आरोपियों ने उसे पकड़कर गला दबाने की कोशिश की और हथियार दिखाए। वह किसी तरह उनके चंगुल से निकलकर भाग गया। उसने यह भी दावा किया कि आरोपी आपस में हत्या के बाद शरीर से संबंधित हिस्सा निकालने की बात कर रहे थे।

    फिलहाल पुलिस दोनों घटनाओं के बीच संबंध की जांच कर रही है। पुलिस का मुख्य फोकस आरोपों की पुष्टि करने के साथ शव के लापता हिस्से की बरामदगी और पूरी साजिश में शामिल लोगों की पहचान पर है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई और गिरफ्तारियां की जा सकती हैं।

  • MP के 11 जिलों में आज हैवी रेन अलर्ट, सीधी-मऊगंज-डिंडौरी में अति भारी बारिश की चेतावनी

    MP के 11 जिलों में आज हैवी रेन अलर्ट, सीधी-मऊगंज-डिंडौरी में अति भारी बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। बंगाल की खाड़ी से एक्टिव स्ट्रॉन्ग सिस्टम का असर अगले दो दिन प्रदेश के पूर्वी हिस्से यानी जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में रहेगा। इसके बाद सिस्टम पश्चिमी हिस्से के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग को प्रभावित करेगा।

    सोमवार को सीधी, मऊगंज और डिंडौरी में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में अगले 24 घंटे में 4 से 8 इंच तक बारिश होने का अनुमान है। वहीं सतना, पन्ना, दमोह, कटनी, शहडोल, अनूपपुर, जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला और बालाघाट में भारी बारिश की चेतावनी है।

    इन जिलों में भी बारिश के आसार
    भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, छिंदवाड़ा, मंडला, पांढुर्णा, रीवा, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    भोपाल-ग्वालियर-चंबल में 17 से 19 अगस्त तक असर
    मौसम विभाग के मुताबिक मौजूदा सिस्टम का असर भोपाल, ग्वालियर और चंबल संभाग में भी रहेगा। 17, 18 और 19 अगस्त को इन संभागों के कुछ जिलों में तेज बारिश का अलर्ट है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि 15 से 21 अगस्त तक पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। पूर्वी हिस्से में 15 से 19 अगस्त तक तेज बारिश होगी, जबकि इसके बाद पश्चिमी हिस्से में सिस्टम का असर बढ़ेगा।

    प्रदेश में अब तक 21.4 इंच बारिश
    मौसम केंद्र के अनुसार, प्रदेश में अब तक 544.4 मिमी यानी 21.4 इंच बारिश हो चुकी है। यह सामान्य बारिश 24.4 इंच (618.8 मिमी) से करीब 3 इंच कम है। प्रदेश में अब तक सामान्य से 12% कम बारिश हुई है। पूर्वी हिस्से में 18% और पश्चिमी हिस्से में 6% कम बारिश दर्ज की गई है।

    43 जिलों में 2% से 54% तक कम बारिश
    पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से 19% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में 2% से 54% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, अलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 1% से 48% तक कम बारिश हुई है।

    12 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    भोपाल, गुना, सीहोर, राजगढ़, ग्वालियर, अनूपपुर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, बड़वानी, खंडवा और खरगोन में अब तक औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • रक्षाबंधन पर भोपाल-रीवा यात्रियों को राहत, 25 से 31 अगस्त तक चलेंगी विशेष ट्रेनें और वंदे भारत में बढ़े कोच

    रक्षाबंधन पर भोपाल-रीवा यात्रियों को राहत, 25 से 31 अगस्त तक चलेंगी विशेष ट्रेनें और वंदे भारत में बढ़े कोच

    भोपाल:  रक्षाबंधन के दौरान घर जाने वाले यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मध्य प्रदेश में रेलवे ने अतिरिक्त यात्री सुविधाओं की तैयारी की है। भोपाल और रीवा के बीच 25 से 31 अगस्त तक अलग-अलग तारीखों में विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। इसके साथ ही रीवा और रानी कमलापति के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस में भी यात्रियों के लिए सीटों की संख्या बढ़ाई गई है।

    रेलवे की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, त्योहार के दौरान भोपाल-रीवा रेल मार्ग पर अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। गाड़ी संख्या 02155 भोपाल-रीवा विशेष ट्रेन 25 अगस्त की रात 10 बजकर 25 मिनट पर भोपाल से रवाना होगी और अगले दिन सुबह 7 बजकर 20 मिनट पर रीवा पहुंचेगी।

    इसकी वापसी सेवा गाड़ी संख्या 02156 के रूप में 26 अगस्त को शाम 6 बजकर 35 मिनट पर रीवा से रवाना होगी। ट्रेन अगले दिन सुबह 4 बजकर 30 मिनट पर भोपाल पहुंचेगी। इससे त्योहार के दौरान दोनों शहरों के बीच आने-जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।

    इसके अलावा गाड़ी संख्या 02189 भोपाल-रीवा विशेष ट्रेन 26 और 27 अगस्त को संचालित की जाएगी। यह ट्रेन दोनों तारीखों में रात 10 बजकर 25 मिनट पर भोपाल से रवाना होकर अगले दिन सुबह 7 बजकर 20 मिनट पर रीवा पहुंचेगी। इसकी वापसी सेवा गाड़ी संख्या 02190 के रूप में 27 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर रीवा से चलेगी और रात 9 बजे भोपाल पहुंचेगी।

    रक्षाबंधन के बाद 29 और 30 अगस्त को भी यात्रियों के लिए विशेष रेल सुविधा उपलब्ध रहेगी। गाड़ी संख्या 02154 रीवा से 29 अगस्त को शाम 6 बजकर 35 मिनट पर रवाना होकर अगले दिन सुबह 4 बजकर 30 मिनट पर भोपाल पहुंचेगी। वहीं गाड़ी संख्या 02180 भी 30 अगस्त को रीवा से भोपाल के लिए संचालित होगी।

    इसके बाद गाड़ी संख्या 02179 भोपाल-रीवा विशेष ट्रेन 31 अगस्त की रात 10 बजकर 25 मिनट पर भोपाल से रवाना होगी और अगले दिन सुबह 7 बजकर 20 मिनट पर रीवा पहुंचेगी। इन विशेष ट्रेनों के संचालन से त्योहार के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    विशेष ट्रेनों का मार्ग विदिशा, बीना, सागर, दमोह, कटनी मुड़वारा, मैहर और सतना से होकर रहेगा। इससे केवल भोपाल और रीवा के यात्रियों को ही नहीं, बल्कि मार्ग में आने वाले कई शहरों और कस्बों के यात्रियों को भी अतिरिक्त रेल सुविधा मिल सकेगी।

    इसके अलावा रीवा-रानी कमलापति-रीवा वंदे भारत एक्सप्रेस में भी यात्रियों की सुविधा के लिए बड़ा बदलाव किया गया है। 7 अगस्त से 24 अक्टूबर 2026 तक इस ट्रेन में 8 की जगह 16 कोच वाली रेक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    कोच की संख्या दोगुनी किए जाने से ट्रेन में उपलब्ध सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे त्योहारी सीजन में आरक्षित टिकट की मांग पूरी करने और यात्रियों को अतिरिक्त सीट उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    रेलवे ने यात्रियों से यात्रा से पहले ट्रेन के समय और ठहराव की जानकारी की पुष्टि करने की अपील की है। यात्रियों को स्टेशन, रेलवे की हेल्पलाइन 139 और रेल ऐप के माध्यम से ताजा जानकारी लेने की सलाह दी गई है। त्योहार के दौरान अतिरिक्त ट्रेनों और बढ़ी हुई क्षमता से भोपाल-रीवा मार्ग पर यात्रियों को आवागमन में राहत मिलने की उम्मीद है।

  • आजादी के 80वें पर्व पर स्वतंत्रता सेनानी जवाहर सिंह का निधन, रीवा में राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

    आजादी के 80वें पर्व पर स्वतंत्रता सेनानी जवाहर सिंह का निधन, रीवा में राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

    मध्य प्रदेश: के रीवा जिले में स्वतंत्रता दिवस का दिन एक ओर देशभक्ति के उत्सव और दूसरी ओर एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की अंतिम विदाई का गवाह बना। जवा तहसील के डोरी-भितरी गांव निवासी स्वतंत्रता सेनानी जवाहर सिंह का 15 अगस्त 2026 को निधन हो गया। जिस दिन देश आजादी का 80वां पर्व मना रहा था, उसी दिन गांव ने उस सेनानी को अंतिम विदाई दी, जिसने देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते हुए जेल की सजा भुगती थी।

    जवाहर सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 1932 के राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें छह महीने के कारावास की सजा हुई थी। इसके साथ ही उन पर 100 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के अन्य चरणों में भी योगदान दिया और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तथा नमक आंदोलन से जुड़े रहे।

    स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जेल जाने और आर्थिक दंड भुगतने के बावजूद जवाहर सिंह की देश के प्रति प्रतिबद्धता कम नहीं हुई। आजादी के बाद भी उन्होंने सामाजिक जीवन में अपनी जिम्मेदारियों को महत्व दिया और आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्षों और उसके मूल्यों के बारे में बताते रहे।

    उनके परिवार के अनुसार, जवाहर सिंह स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को अपने बच्चों और पोतों तक पहुंचाते रहे। उनका मानना था कि नई पीढ़ी को यह जानना चाहिए कि देश को स्वतंत्रता आसानी से नहीं मिली, बल्कि इसके लिए अनेक लोगों ने संघर्ष, त्याग और कठिनाइयों का सामना किया था।

    स्वतंत्रता सेनानी के रूप में मिलने वाली सम्मान निधि को लेकर भी जवाहर सिंह की सोच अलग रही। बताया जाता है कि उन्होंने शुरुआती दौर में सम्मान निधि लेने से इनकार कर दिया था। उनका विचार था कि शासन की राशि का उपयोग जनहित और देशहित के कार्यों में किया जाना चाहिए। बाद में उन्होंने इस उम्मीद के साथ सम्मान निधि स्वीकार की कि उनके परिवार को भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार के रूप में सम्मान और पहचान मिलती रहे।

    जवाहर सिंह के तीन पुत्र कमल नारायण सिंह, कमलाकर सिंह और प्रभाकर सिंह हैं। परिवार ने उनके जीवन से जुड़े स्वतंत्रता आंदोलन के अनुभवों और मूल्यों को आगे बढ़ाने की बात कही। उनके निधन के बाद परिवार के साथ क्षेत्र के लोगों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।

    15 अगस्त को उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया राजकीय सम्मान के साथ पूरी की गई। अंतिम यात्रा में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। उपस्थित लोगों ने पुष्पचक्र और पुष्प अर्पित कर स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पुलिस जवानों की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी।

    अंतिम संस्कार में सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह, राज्यसभा सांसद राजमणि सिंह पटेल, युवराज घनश्याम सिंह बसरेही, संचार निर्माण समिति अध्यक्ष प्रवल पाण्डेय, जवा तहसीलदार राजेश शुक्ला और अतरैला थाना प्रभारी विजय प्रताप सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे। जवाहर सिंह के बड़े पुत्र कमल नारायण सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी।

    जवाहर सिंह के अंतिम संस्कार में हजारों ग्रामीणों के शामिल होने की बात सामने आई। लोगों ने उनकी पार्थिव देह पर पुष्प अर्पित किए और अंतिम यात्रा में शामिल होकर श्रद्धांजलि दी। स्वतंत्रता दिवस के दिन गांव में तिरंगे और देशभक्ति के वातावरण के बीच शोक का माहौल भी दिखाई दिया।

    जवाहर सिंह का सार्वजनिक जीवन में भी क्षेत्र के कई प्रमुख लोगों से संपर्क रहा। बताया जाता है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से भी उनका संपर्क रहा था। स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भागीदारी और सामाजिक जीवन में सक्रियता ने उन्हें क्षेत्र में अलग पहचान दिलाई।

    जवाहर सिंह की अंतिम विदाई उस पीढ़ी को सम्मान देने का अवसर भी बनी, जिसने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा संघर्ष में बिताया। 15 अगस्त को जब देश आजादी का उत्सव मना रहा था, उसी दिन रीवा के डोरी-भितरी गांव ने एक स्वतंत्रता सेनानी को अंतिम सलामी देकर उनके योगदान को याद किया।

  • गोपाल भार्गव बोले बीजेपी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री, ‘भौंकने वालों’ वाले बयान से मध्य प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल

    गोपाल भार्गव बोले बीजेपी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री, ‘भौंकने वालों’ वाले बयान से मध्य प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल

    मध्य प्रदेश:  के पूर्व मंत्री और रहली विधानसभा क्षेत्र से लगातार नौ बार विधायक रहे गोपाल भार्गव का एक बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। रहली में वीर दुर्गादास राठौर जयंती समारोह के दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री जैसा है। इसी दौरान उन्होंने अपने आलोचकों पर भी तीखा तंज कसा।

    कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भार्गव ने कहा कि बीजेपी में प्रत्येक कार्यकर्ता का अपना महत्व है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पुराने प्रसंग का उल्लेख करते हुए कार्यकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, पार्टी में किसी कार्यकर्ता की अहमियत किसी पद या बाहरी प्रमाण से तय नहीं होती, बल्कि संगठन के प्रति उसकी भूमिका और योगदान महत्वपूर्ण होता है।

    इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि बीजेपी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री जैसा है। उनके इस बयान की चर्चा इसलिए भी तेज हुई क्योंकि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर उनके नाम से जुड़ा एक स्थानीय विवाद सामने आया था। इसी विवाद को उनके ताजा बयान से जोड़कर देखा जा रहा है।

    दरअसल, कुछ दिन पहले एक वीडियो सामने आया था, जिसमें एक व्यक्ति गोपाल भार्गव के गढ़ाकोटा स्थित निवास के बाहर लगे बोर्ड पर एक पर्चा चिपकाता दिखाई दिया था। इस पर्चे में भार्गव को ‘स्वघोषित मुख्यमंत्री’ कहकर निशाना बनाया गया था। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई थी।

    रहली के कार्यक्रम में भार्गव ने इसी तरह की आलोचनाओं का जवाब देते हुए हाथी और कुत्ते का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि हाथी अपनी चाल से आगे बढ़ता रहता है और उसके पीछे कुत्ते भौंकते रहते हैं। उनके बयान का आशय यह था कि आलोचना के बावजूद व्यक्ति को अपने रास्ते और काम से विचलित नहीं होना चाहिए।

    भार्गव ने अपने संबोधन में चींटियों और गन्ने का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने की कोशिश की कि सार्वजनिक जीवन में आलोचनाएं होती रहती हैं, लेकिन उन्हें अपनी जिम्मेदारी और लक्ष्य से प्रभावित नहीं होना चाहिए।

    बीजेपी कार्यकर्ताओं को मुख्यमंत्री के समान बताने वाला उनका बयान पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर उनकी सोच को भी सामने रखता है। उन्होंने कहा कि संगठन में कोई सेवक की भूमिका निभाता है तो कोई जनप्रतिनिधि के तौर पर जिम्मेदारी संभालता है। उनके अनुसार, पार्टी में हर स्तर के कार्यकर्ता का अपना महत्व है।

    गोपाल भार्गव का मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबा अनुभव रहा है। वह रहली विधानसभा सीट से लगातार नौ बार निर्वाचित हो चुके हैं और राज्य सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। लंबे राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण उनके सार्वजनिक बयानों पर राजनीतिक नजर बनी रहती है।

    इस बार भी उनके बयान के दो हिस्से सबसे अधिक चर्चा में हैं। पहला, बीजेपी के हर कार्यकर्ता को मुख्यमंत्री जैसा बताना और दूसरा, आलोचकों के लिए ‘भौंकने वालों’ वाली टिप्पणी करना। उनके समर्थक इसे कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने वाला बयान बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देख रहे हैं।

    फिलहाल बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, भार्गव ने अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं के महत्व और आलोचनाओं से प्रभावित न होने का संदेश दिया। स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ विवाद अब उनके बयान के कारण व्यापक राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

  • इंदौर में गड्ढा बंद करने पहुंची गैस कंपनी की टीम से विवाद, मारपीट के आरोपों पर आमने-सामने कंपनी और पार्षद

    इंदौर में गड्ढा बंद करने पहुंची गैस कंपनी की टीम से विवाद, मारपीट के आरोपों पर आमने-सामने कंपनी और पार्षद


    इंदौर । इंदौर के शीतल नगर में अवंतिका गैस लिमिटेड के कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट को लेकर विवाद सामने आया है। कंपनी के कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि 14 अगस्त की रात खुले गड्ढे को बंद करने पहुंची टीम के साथ पार्षद बालमुकुंद सोनी और उनके साथियों ने विवाद किया और मारपीट की। कंपनी का दावा है कि घटना में कर्मचारी मनोज के चेहरे पर गंभीर सूजन आ गई है और उसका जबड़ा तक नहीं खुल पा रहा है। दूसरे कर्मचारी खंटूस के भी डरे होने की बात सामने आई है। दूसरी ओर पार्षद बालमुकुंद सोनी ने मारपीट के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है और कहा है कि उन्होंने किसी कर्मचारी के साथ मारपीट नहीं की।

    कंपनी के सुपरवाइजर अर्जुन गुर्जर के मुताबिक 14 अगस्त की रात टीम को शीतल नगर में एक खुले गड्ढे को बंद करने के लिए भेजा गया था। कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर काम शुरू किया था। इसी दौरान पार्षद बालमुकुंद सोनी अपने कुछ साथियों के साथ वहां पहुंचे। आरोप है कि काम को लेकर पहले बहस हुई और इसके बाद कर्मचारियों के साथ गाली गलौज और मारपीट की गई।

    कंपनी के कर्मचारियों का आरोप है कि विवाद के दौरान उन्हें दोबारा क्षेत्र में दिखाई नहीं देने की धमकी भी दी गई। कर्मचारियों के मुताबिक उन्हें चेतावनी दी गई कि यदि वे फिर गड्ढा खोदने या काम करने आए तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। कंपनी का यह भी आरोप है कि जाते समय कर्मचारियों को धमकी दी गई कि यदि अवंतिका गैस की गाड़ी दोबारा क्षेत्र में दिखाई दी तो उसे आग लगा दी जाएगी। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    सुपरवाइजर अर्जुन गुर्जर का कहना है कि घटना के दौरान पुलिस को फोन किया गया था लेकिन तत्काल मौके पर पुलिस नहीं पहुंची। बाद में विवाद में शामिल बताए जा रहे लोग वहां से चले गए। कंपनी की ओर से पुलिस को शिकायत दिए जाने की बात कही गई है। कंपनी का दावा है कि शिकायत में आरोपियों के नाम बताए गए थे लेकिन बाद में दर्ज मामले में अज्ञात लोगों का उल्लेख किया गया। इसी वजह से पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

    कंपनी के मुताबिक मारपीट के बाद कर्मचारियों में डर का माहौल है। उनका कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में जरूरी गैस पाइपलाइन का काम करना हो और कर्मचारियों को सुरक्षा का भरोसा नहीं मिले तो काम करना मुश्किल हो जाता है। कंपनी ने यह भी कहा है कि पाइपलाइन से जुड़ा काम केवल सामान्य खुदाई नहीं है बल्कि गैस आपूर्ति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा मामला है।

    अवंतिका गैस का कहना है कि संबंधित पाइपलाइन कार्य के लिए उसके पास नगर निगम की अनुमति है। कंपनी के अनुसार बारिश के मौसम में कुछ स्थानों पर पाइपलाइन में लीकेज की आशंका को देखते हुए जरूरी काम किया जा रहा है। प्रभावित हिस्से में नई तकनीक के माध्यम से वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने की कोशिश भी की जा रही है ताकि उपभोक्ताओं को गैस सप्लाई में परेशानी न हो और किसी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके।

    वहीं पार्षद बालमुकुंद सोनी ने कंपनी के आरोपों से इनकार करते हुए पूरे विवाद की अलग तस्वीर पेश की है। उनका कहना है कि करीब 15 दिन पहले रेडिसन होटल के पास अवंतिका गैस कंपनी खुदाई कर रही थी। उन्होंने वहां से नर्मदा पाइपलाइन गुजरने की जानकारी कर्मचारियों को दी थी और खुदाई से मना किया था। पार्षद के मुताबिक इसके बावजूद खुदाई के कारण नर्मदा पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई जिसके चलते करीब 700 परिवारों को दो दिन तक पानी की परेशानी हुई। उनका दावा है कि प्रभावित परिवारों के लिए उन्होंने टैंकरों से पानी उपलब्ध कराया।

    सोनी के मुताबिक 14 अगस्त की रात उन्हें क्षेत्र में कंपनी के लोगों के पहुंचने की जानकारी मिली थी। उन्होंने पुलिस को सूचना देने के साथ कर्मचारियों को समझाने की कोशिश की कि वहां काम न किया जाए। उनका कहना है कि बाद में वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से चर्चा के बाद भी काम रोकने की सलाह दी गई। पार्षद का साफ कहना है कि उन्होंने या उनके साथियों ने किसी कर्मचारी के साथ मारपीट नहीं की।

    इस पूरे विवाद के बीच 23 जून को इंदौर में अवंतिका गैस की पाइपलाइन में हुए विस्फोट की घटना भी चर्चा में है। मंगल मॉल के पीछे जैन मंदिर के पास ड्रिलिंग के दौरान गैस पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के बाद धमाका हुआ था। इस घटना में कई लोग प्रभावित हुए थे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इस घटना ने गैस पाइपलाइन के आसपास खुदाई और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

    अब शीतल नगर का विवाद केवल मारपीट के आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है। पुलिस के सामने यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था। क्या कर्मचारियों के साथ मारपीट हुई थी या काम रोकने को लेकर विवाद बढ़ा था। क्या कर्मचारियों को धमकी दी गई और क्या संबंधित काम के लिए कंपनी के पास आवश्यक अनुमति थी। इन सभी सवालों का जवाब पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से सामने आएगा।

    कंपनी और पार्षद दोनों पक्षों के अलग अलग दावे सामने आने के बाद मामले में निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण हो गई है। यदि मारपीट और धमकी के आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। वहीं यदि विवाद की वजह पाइपलाइन या खुदाई से जुड़ी कोई वास्तविक समस्या थी तो उस पहलू की भी जांच जरूरी होगी। फिलहाल पुलिस की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

  • मध्य प्रदेश में सिंहस्थ परियोजनाओं की लेटलतीफी पर शिकायतें तेज, MPIDC की कार्यप्रणाली को लेकर उठे गंभीर सवाल

    मध्य प्रदेश में सिंहस्थ परियोजनाओं की लेटलतीफी पर शिकायतें तेज, MPIDC की कार्यप्रणाली को लेकर उठे गंभीर सवाल

    मध्य प्रदेश: में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ की तैयारियों के बीच उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी विकास परियोजनाओं में कथित प्रशासनिक देरी का मामला सामने आया है। आरोप है कि मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम से जुड़ी कुछ परियोजनाओं में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद तकनीकी स्वीकृति, सीमांकन और भुगतान जैसी प्रक्रियाएं लंबे समय तक अटकी रहीं। इस देरी को लेकर निर्माण एजेंसियों ने उच्च स्तर पर शिकायत की है।

    बताया गया है कि नीमच के चीताखेड़ा औद्योगिक पार्क और मंदसौर के बसई औद्योगिक पार्क से संबंधित परियोजनाओं में टेंडर आवंटन के बाद भी काम आगे बढ़ाने की जरूरी प्रक्रियाओं में देरी हुई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कई मामलों में छह महीने से एक वर्ष तक सीमांकन और अन्य स्वीकृतियां लंबित रहीं। इसके चलते निर्माण एजेंसियों के काम की गति प्रभावित हुई और साइट पर गतिविधियां रुकने की स्थिति बनी।

    मामले में विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में कार्यकारी निदेशक राजेश राठौर समेत संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोपों में यह भी कहा गया है कि कथित अवैध राशि या कमीशन की मांग पूरी नहीं होने के कारण कुछ फाइलों को आगे बढ़ाने में देरी की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के स्तर पर होना बाकी है।

    निर्माण एजेंसियों की ओर से यह मामला मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव कार्यालय तक पहुंचाया गया है। शिकायत में टेंडर आवंटन के बाद काम से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को रोके जाने और रनिंग बिलों के भुगतान में देरी का मुद्दा भी उठाया गया है। एजेंसियों का कहना है कि भुगतान अटकने से उनकी कार्यशील पूंजी प्रभावित हुई और परियोजनाओं की प्रगति पर सीधा असर पड़ा।

    मामला सामने आने के बाद MPIDC के प्रबंध निदेशक चंद्रमौली शुक्ला की ओर से दो अटकी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है, लेकिन पहले हो चुकी देरी के कारण निर्धारित समयसीमा पर सवाल बने हुए हैं।

    सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास से जुड़े काम किए जा रहे हैं। ऐसे में किसी भी परियोजना में लंबे समय तक देरी होने का असर आगे की समयसीमा पर पड़ सकता है। निर्माण कार्यों में देरी के कारण लागत बढ़ने की आशंका भी रहती है, जिसका प्रभाव अंततः परियोजना के बजट पर पड़ सकता है।

    शिकायत में पर्यावरण से जुड़े पहलुओं का भी उल्लेख किया गया है। निर्माण और पौधरोपण जैसे कार्यों के लिए उपयुक्त मौसम निकल जाने की स्थिति में संबंधित गतिविधियों की समयसीमा प्रभावित हो सकती है। मानसून के दौरान किए जाने वाले कार्यों में देरी होने पर आगे की योजना और संसाधन प्रबंधन पर भी दबाव बढ़ सकता है।

    अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल शिकायतों में लगाए गए आरोपों की जांच को लेकर है। यदि जांच में प्रशासनिक स्तर पर जानबूझकर देरी, नियमों की अनदेखी या किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। दूसरी ओर, यदि देरी प्रक्रिया संबंधी कारणों से हुई है तो विभाग को उसका स्पष्ट कारण सामने रखना होगा।

    सिंहस्थ 2028 मध्य प्रदेश के लिए धार्मिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से बड़ा आयोजन है। इसलिए इससे जुड़ी परियोजनाओं में पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही महत्वपूर्ण है। फिलहाल शिकायतों के बाद अटकी परियोजनाओं को गति देने के प्रयास शुरू हुए हैं और आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच में आरोपों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।

  • डेढ़ बजे राऊ में पुलिस की दबिश से मची भगदड़, जुआरी बाइक छोड़कर भागे; अड्डा संचालक की तलाश शॉर्ट डिस्क्रिप्शन

    डेढ़ बजे राऊ में पुलिस की दबिश से मची भगदड़, जुआरी बाइक छोड़कर भागे; अड्डा संचालक की तलाश शॉर्ट डिस्क्रिप्शन


    इंदौर । इंदौर के राऊ इलाके में शनिवार देर रात पुलिस की कार्रवाई से जुआरियों में भगदड़ मच गई। पुलिस टीम ने पेट्रोल पंप के पास कथित रूप से संचालित जुए के अड्डे पर करीब रात डेढ़ बजे दबिश दी। पुलिस की गाड़ियां देखते ही वहां मौजूद जुआरी अपनी बाइक और ताश के पत्ते मौके पर छोड़कर खेतों की ओर भाग गए। अंधेरा होने के कारण कई संदिग्ध पुलिस की पकड़ में नहीं आ सके। पुलिस टीम ने मौके पर खड़ी आधा दर्जन से ज्यादा बाइक जब्त की हैं और उन्हें थाने ले जाया गया है। पुलिस अब वाहनों के आधार पर फरार जुआरियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

    जानकारी के मुताबिक इंदौर जोन-1 के डीसीपी नरेंद्र रावत को राऊ इलाके में बड़े स्तर पर जुआ संचालित होने की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस अधिकारियों ने स्थानीय टीम को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद अलग अलग पुलिस टीमों को तैयार कर देर रात संदिग्ध स्थान पर भेजा गया। पुलिस को पेट्रोल पंप के आसपास जुआ चलाए जाने की जानकारी मिली थी। इसी सूचना के आधार पर टीम ने रात करीब डेढ़ बजे मौके पर पहुंचकर घेराबंदी शुरू की।

    पुलिस के पहुंचते ही वहां मौजूद लोगों को कार्रवाई की भनक लग गई। पुलिस की गाड़ियां देखकर जुआ खेल रहे लोग मौके से भागने लगे। कई जुआरी खेतों की तरफ दौड़ गए। रात का अंधेरा होने के कारण पुलिस के लिए खेतों में भागे लोगों का पीछा करना मुश्किल रहा। भागने के दौरान जुआरी अपनी बाइक तक मौके पर छोड़ गए। पुलिस को वहां ताश के पत्ते भी मिले हैं। इसके बाद पुलिस ने मौके पर मौजूद वाहनों को जब्त कर लिया।

    पुलिस अब जब्त की गई बाइकों के नंबर और दस्तावेजों के आधार पर उनके मालिकों की जानकारी जुटा रही है। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि मौके पर कौन कौन लोग मौजूद थे। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि जब्त वाहन वास्तव में जुआ खेलने आए लोगों के थे या किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत हैं। जांच के दौरान सामने आने वाली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक राऊ क्षेत्र में जिस स्थान पर कार्रवाई की गई वहां पिछले कुछ दिनों से जुआ संचालित होने की जानकारी मिल रही थी। बताया जा रहा है कि करीब एक सप्ताह से यहां लोगों की आवाजाही बढ़ी हुई थी। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गतिविधि के पीछे कौन लोग थे और कथित जुए का अड्डा किसके इशारे पर चल रहा था।

    इस कार्रवाई को हाल में इंदौर के दूसरे इलाकों में जुए के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक कुछ दिन पहले क्राइम ब्रांच ने लसूड़िया थाना क्षेत्र के महालक्ष्मी नगर में कार्रवाई करते हुए बड़ी संख्या में जुआरियों को पकड़ा था। उस कार्रवाई में करीब दो दर्जन लोगों के पकड़े जाने और बड़ी रकम बरामद होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद कथित तौर पर जुए से जुड़े कुछ लोगों ने राऊ इलाके में अपना नया ठिकाना बना लिया था। हालांकि इस कड़ी की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

    राऊ पुलिस की देर रात हुई कार्रवाई के बाद इलाके में जुआ संचालकों और जुआ खेलने वालों के बीच हड़कंप की स्थिति है। पुलिस अब जब्त बाइकों के जरिए फरार आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से भी संदिग्धों की पहचान की जा सकती है।

    फिलहाल पुलिस ने मौके से मिले वाहनों और ताश के पत्तों को जांच में शामिल किया है। पुलिस का कहना है कि फरार लोगों की पहचान और भूमिका सामने आने के बाद संबंधित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई से एक बात साफ है कि पुलिस को यदि किसी क्षेत्र में लंबे समय से जुआ संचालित होने की सूचना मिलती है तो वह देर रात भी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हट रही है।

  • इंदौर में चोरी की दो वारदातों से हड़कंप, घर से नकदी-जेवर और मोबाइल दुकान से 5 फोन समेत इलेक्ट्रॉनिक सामान चोरी

    इंदौर में चोरी की दो वारदातों से हड़कंप, घर से नकदी-जेवर और मोबाइल दुकान से 5 फोन समेत इलेक्ट्रॉनिक सामान चोरी


    इंदौर । इंदौर में चोरी की दो अलग-अलग वारदातों ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हीरानगर थाना क्षेत्र में चोर रात के समय एक किराए के मकान में घुस गए और परिवार के सोते रहने के दौरान अलमारी का लॉकर तोड़कर नकदी और जेवर लेकर फरार हो गए। वारदात की पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है जिसमें दो संदिग्ध नजर आ रहे हैं। पुलिस फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुटी है। दूसरी घटना राजेंद्र नगर क्षेत्र में सामने आई जहां चोरों ने एक मोबाइल दुकान को निशाना बनाया और मोबाइल फोन के साथ लैपटॉप तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान चोरी कर लिया।

    हीरानगर पुलिस ने श्याम नगर निवासी 39 वर्षीय अभिषेक हजारी की शिकायत पर चोरी का मामला दर्ज किया है। अभिषेक निजी कंपनी में काम करते हैं और घटना के समय परिवार के साथ घर में मौजूद थे। पुलिस के मुताबिक रात में चोर पहले घर के बाहर के दरवाजे तक पहुंचे। इसके बाद उन्होंने किचन की खिड़की को निशाना बनाया। खिड़की में शीशा नहीं लगा था। इसी वजह से चोर ने खिड़की के भीतर हाथ डालकर पास मौजूद दरवाजे की चिटकनी खोल ली और घर के अंदर दाखिल हो गया।

    घर में प्रवेश करने के बाद आरोपी उस कमरे तक पहुंचा जहां अलमारी रखी हुई थी। चोर ने अलमारी का लॉकर तोड़ दिया और उसमें रखी नकदी तथा कुछ जेवर निकाल लिए। पुलिस के मुताबिक अलमारी की दराज में लॉकर की चाबी भी मौजूद थी। हालांकि चोर ने लॉकर तोड़कर सामान निकाल लिया। घटना के दौरान परिवार के सदस्य घर के अंदर सो रहे थे लेकिन उन्हें चोरी की भनक तक नहीं लगी।

    सुबह घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। फुटेज में दो संदिग्ध चोर नजर आए हैं। पुलिस अब उनकी पहचान करने का प्रयास कर रही है। आरोपियों ने इलाके में दूसरे मकानों की भी रेकी की थी लेकिन कुछ जगह कुत्तों के भौंकने के कारण वे वहां ज्यादा देर नहीं रुके। पुलिस को आशंका है कि आरोपी इलाके की गतिविधियों से पहले से परिचित हो सकते हैं।

    फिलहाल फरियादी ने चोरी हुए सामान की पूरी सूची पुलिस को नहीं दी है। ऐसे में नकदी और जेवर की वास्तविक कीमत का आकलन अभी नहीं किया गया है। पुलिस का कहना है कि शिकायतकर्ता से जानकारी मिलने के बाद चोरी गए सामान का सही आंकड़ा सामने आएगा। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

    इसी तरह राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में भी चोरों ने एक मोबाइल दुकान में सेंध लगाई। पुलिस ने अफजल खान की शिकायत पर चोरी का मामला दर्ज किया है। अफजल की शिव स्कॉर्य नाम से दुकान बताई गई है। चोर दुकान से पांच मोबाइल फोन एक लैपटॉप और कई मोबाइल एक्सेसरीज ले गए। इसके अलावा ग्लास गार्ड एक एलसीडी और कैमरों का डीवीआर भी चोरी होने की जानकारी सामने आई है।

    मोबाइल दुकान में चोरी के बाद पुलिस ने आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू कर दी है। दुकान में लगे कैमरों का डीवीआर भी चोरी होने से पुलिस को जांच में अतिरिक्त चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आसपास की दुकानों और सड़कों पर लगे कैमरों के फुटेज से संदिग्धों की गतिविधियों का पता लगाया जा सकता है।

    लगातार सामने आ रही चोरी की घटनाओं के बीच पुलिस के सामने अब आरोपियों की पहचान कर उन्हें पकड़ने की चुनौती है। हीरानगर की घटना में सीसीटीवी फुटेज पुलिस के लिए अहम सुराग माना जा रहा है जबकि राजेंद्र नगर की वारदात में चोरी किए गए सामान और आरोपियों के आने जाने के रास्ते की जांच की जा रही है। पुलिस दोनों मामलों में अलग-अलग स्तर पर जांच कर रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इन वारदातों के पीछे एक ही गिरोह का हाथ है या अलग-अलग चोर सक्रिय हैं।

  • इंदौर में युवक की मौत से सनसनी, पुलिस ट्रेनिंग कर रही युवती से प्रेम की बात सामने आई; सुसाइड नोट नहीं मिला

    इंदौर में युवक की मौत से सनसनी, पुलिस ट्रेनिंग कर रही युवती से प्रेम की बात सामने आई; सुसाइड नोट नहीं मिला


    इंदौर । इंदौर के खुड़ैल थाना क्षेत्र में 27 वर्षीय युवक की मौत का मामला सामने आया है। युवक का शव देवगुराड़िया की मानसरोवर कॉलोनी स्थित उसके किराए के कमरे में मिला। मृतक की पहचान आयुष पिता उत्तम गोस्वामी के रूप में हुई है। वह मूल रूप से सागर का रहने वाला था और पिछले कुछ महीनों से इंदौर में रहकर निजी कंपनी में ड्राइवर का काम कर रहा था। शुरुआती पुलिस जांच में उसके इंदौर आने की वजह सागर की एक युवती से प्रेम संबंध होने की बात सामने आई है। युवती इंदौर में पुलिस ट्रेनिंग कर रही थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और मौत की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाने के लिए परिजनों और परिचितों से जानकारी जुटाई जा रही है।

    पुलिस के मुताबिक शनिवार को आयुष किसी का फोन नहीं उठा रहा था। लगातार संपर्क करने की कोशिश के बाद उसके मकान मालिक से बात की गई। मकान मालिक जब कमरे पर पहुंचा तो अंदर आयुष का शव मिला। घटना की जानकारी तत्काल पुलिस और परिवार को दी गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।

    जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आयुष पिछले कुछ महीनों से इंदौर में रह रहा था। उसके दोस्तों और परिचितों से पूछताछ में सामने आया कि सागर की रहने वाली एक युवती से उसका प्रेम संबंध था। बताया गया है कि युवती इंदौर में पुलिस ट्रेनिंग के लिए आई थी। इसके बाद आयुष भी इंदौर आने की जिद करने लगा था। परिवार के मुताबिक वह कुछ समय पहले इंदौर आया और यहां निजी कंपनी में ड्राइवर की नौकरी करने लगा।

    फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि युवक की मौत से पहले उसकी मानसिक स्थिति कैसी थी और पिछले कुछ दिनों में उसकी किन लोगों से बातचीत हुई थी। पुलिस उसके मोबाइल फोन और अन्य उपलब्ध जानकारी की भी जांच कर सकती है ताकि घटनाक्रम की पूरी कड़ी सामने आ सके। हालांकि शुरुआती जानकारी में प्रेम प्रसंग को वजह बताए जाने के बावजूद पुलिस ने अभी इसे मौत का अंतिम कारण नहीं माना है।

    आयुष के कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिलने की बात सामने आई है। ऐसे में पुलिस के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि घटना से पहले युवक के साथ क्या परिस्थितियां बनी थीं। उसके परिवार और दोस्तों के बयान भी जांच में अहम हो सकते हैं। पुलिस यह भी पता कर रही है कि क्या युवक किसी तनाव या अन्य व्यक्तिगत परेशानी से गुजर रहा था।

    आयुष अपने परिवार में चार बहनों का इकलौता भाई था। उसकी मौत की खबर मिलते ही सागर स्थित परिवार में मातम छा गया। परिजनों के लिए यह घटना इसलिए भी बेहद दुखद है क्योंकि परिवार को आयुष से भविष्य को लेकर कई उम्मीदें थीं। इंदौर में नौकरी करते हुए वह अपने जीवन को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा था।

    पुलिस मामले में हर संभावित पहलू की जांच कर रही है। प्रेम प्रसंग से जुड़ी जानकारी को भी इसी जांच का हिस्सा बनाया गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि युवती के साथ आयुष का संबंध किस तरह का था और क्या घटना से पहले दोनों के बीच किसी तरह की बातचीत या विवाद हुआ था। हालांकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच से सामने आने वाले तथ्यों का इंतजार करना होगा।

    फिलहाल खुड़ैल पुलिस ने मामला जांच में लिया है। पोस्टमार्टम और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का मुख्य उद्देश्य मौत की वास्तविक वजह और उससे पहले की परिस्थितियों को स्पष्ट करना है। वहीं परिवार और परिचितों से पूछताछ के बाद मामले से जुड़े कई और तथ्य सामने आने की उम्मीद है।