Category: Madhya Pradesh

  • पातालपानी-कालाकुंड के सफर का इंतजार खत्म होने वाला, बीकानेर से मेंटेन होकर इंदौर पहुंचा रैक; ट्रायल के बाद शुरू होगी ट्रेन

    पातालपानी-कालाकुंड के सफर का इंतजार खत्म होने वाला, बीकानेर से मेंटेन होकर इंदौर पहुंचा रैक; ट्रायल के बाद शुरू होगी ट्रेन


    इंदौर। 15 अगस्त का लॉन्ग वीकेंड गुजर चुका है लेकिन इंदौर और आसपास के पर्यटकों के लिए बारिश के मौसम की सबसे खास सैर यानी पातालपानी-कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन अब तक शुरू नहीं हो सकी है। इस समय पातालपानी का झरना पूरे वेग से बह रहा है। पहाड़ घने हरे रंग में ढके हैं और घाटियों में बादलों का खूबसूरत डेरा नजर आ रहा है। ऐसे मौसम में पर्यटक इस ऐतिहासिक ट्रेन के शुरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। रेलवे भी अब ट्रेन संचालन की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गया है। हेरिटेज ट्रेन का पूरा रैक मेंटेनेंस के बाद बीकानेर से इंदौर पहुंच चुका है और रविवार सुबह यह लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन पहुंचा।

    अब रेलवे इस रैक को महू के रास्ते पातालपानी ले जाएगा। वहां क्रेन की मदद से कोचों को ट्रैक पर उतारा जाएगा। इसके बाद कोचों को इंजन के साथ जोड़कर उनकी अलाइनमेंट और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। इन तैयारियों के बाद रेलवे की ओर से ट्रायल रन किया जाएगा। ट्रायल के दौरान रैक की स्थिति के साथ ट्रैक संचालन व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों को परखा जाएगा। यदि सभी व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई जाती हैं तो यात्री संचालन की अनुमति दी जाएगी। रेलवे की मौजूदा तैयारी अगले सप्ताह शनिवार से हेरिटेज ट्रेन शुरू करने की है।

    इस साल ट्रेन के शुरू होने में हुई देरी की मुख्य वजह रैक का मेंटेनेंस बताया जा रहा है। आमतौर पर मानसून के दौरान पातालपानी और कालाकुंड का इलाका पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बन जाता है। बारिश के साथ यहां की प्राकृतिक खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। पहाड़ों से गिरते झरने घने जंगल घुमावदार रेल ट्रैक और बादलों से घिरी घाटियां इस सफर को रोमांचक बना देती हैं। यही वजह है कि हेरिटेज ट्रेन के संचालन का इंतजार हर साल पर्यटकों को रहता है।

    पिछले साल हेरिटेज ट्रेन का संचालन 26 जुलाई से शुरू होकर 16 नवंबर 2025 तक हुआ था। इस बार अगस्त का आधा महीना बीत जाने के बाद भी यात्री सेवा शुरू नहीं हो पाई। ऐसे में अब रैक के इंदौर पहुंचने के बाद उम्मीद बढ़ी है कि जल्द ही ट्रायल रन पूरा कर ट्रेन को यात्रियों के लिए शुरू किया जा सकता है। हालांकि अंतिम तारीख रेलवे की ओर से आधिकारिक घोषणा और ट्रायल के बाद ही स्पष्ट होगी।

    पातालपानी-कालाकुंड रेलखंड सिर्फ पर्यटन के लिहाज से ही नहीं बल्कि इतिहास के लिहाज से भी बेहद खास है। करीब 155 साल पुराने इस रेलखंड की शुरुआत वर्ष 1870 में इंदौर रियासत के महाराजा तुकोजीराव होलकर द्वितीय की पहल से हुई थी। वर्ष 1878 तक होलकर स्टेट रेलवे के तहत इसका निर्माण पूरा हो गया था। बाद में यह रेलखंड राजपुताना-मालवा रेलवे का हिस्सा बना। समय के साथ आसपास की कई मीटरगेज रेल लाइनों को ब्रॉडगेज में बदल दिया गया लेकिन पहाड़ी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह रेलखंड अपनी पुरानी पहचान के साथ सुरक्षित रहा।

    रेलवे ने इस ऐतिहासिक ट्रैक को संरक्षित रखते हुए 25 दिसंबर 2018 को पहली बार हेरिटेज ट्रेन शुरू की थी। पातालपानी से कालाकुंड तक करीब 9.5 किलोमीटर का यह सफर छोटा जरूर है लेकिन रोमांच से भरपूर है। इस मार्ग में चार सुरंगें करीब 24 तीखे मोड़ छह बड़े और 35 छोटे पुल आते हैं। ट्रेन जैसे ही पहाड़ों के बीच आगे बढ़ती है एक तरफ घने जंगल और पहाड़ दिखाई देते हैं जबकि दूसरी ओर गहरी घाटियां सफर को रोमांचक बना देती हैं।

    मानसून के दौरान इस पूरे रेलखंड का नजारा बेहद आकर्षक हो जाता है। पातालपानी का झरना तेज बहाव के साथ नजर आता है और चारों ओर हरियाली छा जाती है। घाटियों में तैरते बादल और घुमावदार ट्रैक यात्रियों के लिए यादगार अनुभव बनते हैं। अब मेंटेन रैक के इंदौर पहुंचने के बाद पर्यटकों की नजर रेलवे के ट्रायल रन और आधिकारिक संचालन तारीख पर टिकी है। अगर तकनीकी और सुरक्षा जांच तय मानकों के अनुसार पूरी होती है तो अगले शनिवार से पातालपानी-कालाकुंड की खूबसूरत हेरिटेज ट्रेन एक बार फिर पटरी पर दौड़ती नजर आ सकती है।

  • शादी में आई नहीं, परिवार से संपर्क भी नहीं था, फिर भी दहेज केस में आरोपी बनी साध्वी; कोर्ट ने आरोप किए निरस्त

    शादी में आई नहीं, परिवार से संपर्क भी नहीं था, फिर भी दहेज केस में आरोपी बनी साध्वी; कोर्ट ने आरोप किए निरस्त


    इंदौर । इंदौर में दहेज प्रताड़ना के एक मामले में अदालत ने ऐसा फैसला सुनाया है जिसने पुलिस जांच और आरोप तय करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मामले में शिकायतकर्ता महिला के पति की बहन को भी दहेज प्रताड़ना का आरोपी बनाया गया था जबकि बचाव पक्ष के मुताबिक वह महिला वर्ष 1980 में ही बाल साध्वी के रूप में सांसारिक जीवन छोड़ चुकी थी। वैराग्य अपनाने के बाद उसका अपने परिवार से लंबे समय तक कोई संपर्क नहीं रहा। यहां तक कि वह शिकायतकर्ता की शादी में भी शामिल नहीं हुई थी। इसके बावजूद एरोड्रम पुलिस ने उसे मामले में आरोपी बनाकर चालान कोर्ट में पेश कर दिया।

    मामला अदालत पहुंचने के बाद साध्वी समेत अन्य आरोपियों ने कार्रवाई को चुनौती दी। अपर सत्र न्यायालय ने 13 अगस्त को निचली अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों का रिकॉर्ड देखा और उन्हें निरस्त कर दिया। अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया जिससे यह साबित हो कि साध्वी जेठ या जेठानी ने शिकायतकर्ता को दहेज के लिए प्रताड़ित किया था। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि कथित प्रताड़ना कब कहां और किस तरह हुई इसका स्पष्ट आधार रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं है।

    मामला उस समय सामने आया जब शिकायतकर्ता महिला ने एरोड्रम थाने में दहेज प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में पति के राजस्थान में रहने वाले भाई भाभी और उसकी बहन को भी आरोपी बनाया गया। परिवार की ओर से पुलिस को यह जानकारी दिए जाने का दावा किया गया कि संबंधित रिश्तेदारों का शिकायतकर्ता से कोई संपर्क नहीं रहा था। इसके बावजूद पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और आरोपियों के खिलाफ चालान कोर्ट में पेश कर दिया।

    इसके बाद प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने चालान के आधार पर आरोप तय कर दिए। इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए बचाव पक्ष ने अपर सत्र न्यायालय का रुख किया। आरोपी पक्ष की ओर से एडवोकेट महेंद्र मौर्य ने अदालत में तर्क दिया कि पति की बहन ने वर्ष 1980 में ही बाल साध्वी के रूप में वैराग्य अपना लिया था। सांसारिक जीवन छोड़ने के बाद वह परिवार से अलग रही और उसका शिकायतकर्ता से कोई नियमित संपर्क नहीं था।

    बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि संबंधित साध्वी शिकायतकर्ता की शादी में शामिल तक नहीं हुई थी। ऐसे में शादी के समय दहेज को लेकर किसी तरह की मांग या प्रताड़ना में उसकी भूमिका होने का सवाल ही नहीं उठता। इसी तरह मामले में आरोपी बनाए गए जेठ और जेठानी भी राजस्थान में रहते थे और वे भी शिकायतकर्ता की शादी में शामिल नहीं हुए थे। बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि पुलिस ने शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता और प्रत्येक आरोपी की व्यक्तिगत भूमिका की पर्याप्त जांच किए बिना ही कार्रवाई आगे बढ़ाई।

    मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश मनीष लोवंशी की अदालत में हुई। कोर्ट ने केस रिकॉर्ड और उपलब्ध सामग्री का परीक्षण करने के बाद पाया कि साध्वी जेठ और जेठानी द्वारा शिकायतकर्ता को दहेज के लिए प्रताड़ित किए जाने का कोई ठोस प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं है। अदालत के सामने यह स्पष्ट नहीं हो सका कि कथित आरोपियों ने शिकायतकर्ता को कब कैसे और कहां दहेज के लिए प्रताड़ित किया।

    अदालत ने माना कि केवल आरोप लगाए जाने के आधार पर आरोप तय करने के लिए पर्याप्त ठोस आधार जरूरी है। रिकॉर्ड में आरोपियों की कथित भूमिका को लेकर पर्याप्त सामग्री नहीं मिलने के कारण निचली अदालत द्वारा आरोप तय करने में त्रुटि हुई। इसके बाद अपर सत्र न्यायालय ने साध्वी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ तय किए गए आरोपों को निरस्त कर दिया।

    यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें अदालत के सामने आरोपी महिला की सामाजिक और पारिवारिक स्थिति से जुड़े तथ्य भी सामने आए। वर्ष 1980 में वैराग्य अपना चुकी साध्वी के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया गया जबकि बचाव पक्ष के अनुसार वह शिकायतकर्ता की शादी में शामिल नहीं हुई थी और लंबे समय से परिवार से अलग जीवन जी रही थी। अदालत के फैसले ने फिलहाल उसके खिलाफ तय आरोपों को खत्म कर दिया है और मामले में आरोपियों की वास्तविक भूमिका के लिए ठोस साक्ष्य की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

  • बारिश में रोज 2 से 4 सांपों का रेस्क्यू, 12 फीट के सांप से आधे घंटे चला मुकाबला; नाग पंचमी पर इंदौर में कड़ी निगरानी

    बारिश में रोज 2 से 4 सांपों का रेस्क्यू, 12 फीट के सांप से आधे घंटे चला मुकाबला; नाग पंचमी पर इंदौर में कड़ी निगरानी


    इंदौर । इंदौर में बारिश का मौसम शुरू होते ही सांपों के घरों और रिहायशी इलाकों में निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कभी घर के कमरे में सांप दिखाई देता है तो कभी कार ऑफिस गार्डन या किसी खाली जगह पर उसके निकलने की सूचना मिलती है। ऐसे में जब भी किसी के घर या आसपास सांप दिखाई देता है तो लोगों के बीच घबराहट फैल जाती है। लेकिन 65 वर्षीय कैलाशनाथ ऐसे लोगों के लिए मदद का भरोसा बन चुके हैं। पिछले 53 वर्षों से सांपों का रेस्क्यू कर रहे कैलाशनाथ आज भी फोन आते ही अपना सामान उठाकर मौके की ओर निकल पड़ते हैं। समय दिन का हो या रात के 2 या 3 बजे का उनका प्रयास रहता है कि जरूरतमंद तक जल्द पहुंचा जा सके।

    कैलाशनाथ ने महज 12 साल की उम्र में हाथ में छड़ी लेकर सांप पकड़ना शुरू किया था। उन्होंने अपने माता पिता को सांप पकड़ते हुए देखा और धीरे धीरे इसी काम को सीखते चले गए। समय के साथ उन्होंने सांपों की अलग अलग प्रजातियों को पहचानने और उन्हें बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से पकड़ने का अनुभव हासिल किया। आज उम्र 65 वर्ष हो चुकी है लेकिन सांपों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का उनका सिलसिला जारी है। बारिश के दिनों में उन्हें रोजाना करीब 2 से 4 सांपों के रेस्क्यू के लिए फोन आ रहे हैं।

    कैलाशनाथ के अनुसार इंदौर में बारिश के दौरान रोजाना करीब 40 सांपों के निकलने की सूचनाएं सामने आ सकती हैं। इनमें ज्यादातर सांप जहरीले नहीं होते। उनके और उनके समुदाय के अन्य लोगों का काम सांपों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ना है। उनका कहना है कि सांप को देखकर घबराने के बजाय लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि ज्यादातर घटनाओं में सांप खुद इंसान पर हमला नहीं करता बल्कि खतरा महसूस होने पर प्रतिक्रिया करता है।

    कैलाशनाथ के रेस्क्यू करियर में कई ऐसे मामले भी आए हैं जिन्हें वे आज तक नहीं भूल पाए हैं। किला मैदान में एक बार करीब 12 फीट लंबा सांप मिला था। आकार बड़ा होने के कारण वह आसानी से काबू में नहीं आ रहा था। उसे सुरक्षित पकड़ने में करीब 30 मिनट तक प्रयास करना पड़ा। कैलाशनाथ बताते हैं कि लगातार कोशिश के दौरान उनकी सांस तक फूल गई थी लेकिन आखिरकार सांप को सुरक्षित तरीके से काबू में कर लिया गया और बाद में उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया गया।

    कैलाशनाथ कहते हैं कि सांप देखकर ज्यादातर लोग डर जाते हैं और ऐसे समय में उन्हें किसी अनुभवी व्यक्ति की जरूरत होती है। उनका कहना है कि लोगों की परेशानी उनके लिए सबसे पहले है इसलिए रात के 2 या 3 बजे भी फोन आए तो वे मौके पर पहुंचने की कोशिश करते हैं। उनके लिए समय देखकर काम करना संभव नहीं है। उनका सबसे बड़ा संदेश यही है कि सांप दिखने पर उसे छेड़ने या मारने की कोशिश न करें बल्कि प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना दें।

    सांप को पकड़ने के लिए कैलाशनाथ परिस्थिति के अनुसार अलग अलग उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। यदि सांप एक जगह बैठा हो या धीरे धीरे आगे बढ़ रहा हो तो छड़ी की मदद से उसके शरीर को नियंत्रित किया जाता है। इसके बाद उसे सावधानी से पकड़कर सुरक्षित थैली में रखा जाता है। अगर सांप तेजी से भाग रहा हो तो कैचर का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं यदि सांप किसी छेद बिल या सामान के पीछे छिपा हो तो आसपास की चीजों को धीरे धीरे हटाकर उसे बाहर आने दिया जाता है और फिर सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जाता है। उनके मुताबिक सबसे ज्यादा खतरा तब पैदा होता है जब लोग खुद सांप को पकड़ने या डंडे से दबाने की कोशिश करते हैं।

    सांप के काटने की स्थिति में भी लोगों को झाड़ फूंक और घरेलू नुस्खों से बचने की जरूरत है। काटे गए स्थान पर रस्सी या कपड़ा कसकर बांधना घातक हो सकता है। घाव को काटना या जहर चूसने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को शांत रखते हुए बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल ले जाना जरूरी है।

    इधर नाग पंचमी को देखते हुए इंदौर वन विभाग ने भी निगरानी बढ़ा दी है। सांपों के प्रदर्शन और उन्हें लेकर घूमने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए तीन दल बनाए गए हैं। नवलखा भंवरकुआं रिंग रोड और आसपास के इलाकों की जिम्मेदारी कोमल पालीवाल को दी गई है। राजबाड़ा विजय नगर और शहरी क्षेत्र की निगरानी आशीष यादव संभालेंगे। वहीं अन्नपूर्णा लाबरिया भेरू और आसपास के क्षेत्रों की जिम्मेदारी महेश सोनगरा को दी गई है। वन विभाग की टीमें शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी निगरानी करेंगी। ऐसे में नाग पंचमी के दौरान सांपों के साथ किसी भी तरह का प्रदर्शन या उन्हें लेकर घूमने की गतिविधि सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।

  • आज से बदलेगा बारिश का नक्षत्र, मघा में बरसेंगे बादल; कई क्षेत्रों में भारी वर्षा के योग का ज्योतिषीय अनुमान

    आज से बदलेगा बारिश का नक्षत्र, मघा में बरसेंगे बादल; कई क्षेत्रों में भारी वर्षा के योग का ज्योतिषीय अनुमान


    भोपाल । सोमवार 17 अगस्त से वर्षा मघा नक्षत्र में प्रवेश करेगी और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका प्रभाव 31 अगस्त तक देखने को मिल सकता है। ज्योतिष मठ संस्थान के ज्योतिषाचार्य एवं भविष्यवक्ता पंडित विनोद गौतम के अनुसार सिंह राशि में आने वाला मघा नक्षत्र बारिश के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवधि में मध्यप्रदेश समेत कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश के योग बन सकते हैं। उन्होंने बताया कि मघा नक्षत्र में वर्षा के स्वामी मंगल माने जाते हैं और इसके चलते बारिश का स्वरूप कई जगह अलग अलग हो सकता है। कुछ क्षेत्रों में खंड वर्षा देखने को मिल सकती है जबकि कुछ स्थानों पर तेज बारिश होने के योग बन सकते हैं।

    ज्योतिषाचार्य के मुताबिक मघा नक्षत्र का वाहन चातक यानी पपीहा माना गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस नक्षत्र को वर्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके प्रभाव से कई स्थानों पर पर्याप्त बारिश होने के साथ कुछ इलाकों में सामान्य से अधिक वर्षा भी हो सकती है। खास बात यह है कि जिन क्षेत्रों में अब तक अपेक्षाकृत कम बारिश हुई है वहां भी इस अवधि में वर्षा के योग बनने की बात कही गई है। ऐसे में मघा नक्षत्र का यह दौर किसानों और जलस्रोतों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मघा नक्षत्र को लेकर प्रचलित लोक कहावत ‘मघा देगा अघा’ भी बारिश की इसी विशेषता की ओर संकेत करती है। इसका अर्थ माना जाता है कि मघा नक्षत्र में होने वाली बारिश से तालाब ताल तलैया और अन्य जलस्रोत पानी से भर सकते हैं। पंडित विनोद गौतम ने एक अन्य लोक कहावत ‘मघा न बरसे भरे ना खेत माता न परसे भरे ना पेट’ का उल्लेख करते हुए बताया कि भारतीय लोक परंपरा में मघा की बारिश का संबंध सीधे खेती और जल उपलब्धता से जोड़ा गया है। इस दौरान होने वाली बारिश का असर खेतों और जलस्रोतों पर दिखाई देने की मान्यता है।

    हालांकि बारिश के स्वरूप को लेकर ज्योतिषीय अनुमान एक समान नहीं होते। कुछ क्षेत्रों में बारिश सामान्य रह सकती है जबकि कुछ जगहों पर तेज वर्षा के दौर बन सकते हैं। इसलिए मघा नक्षत्र के दौरान अलग अलग स्थानों पर बारिश की स्थिति में अंतर रहने की संभावना बताई गई है। मौसम की वास्तविक स्थिति के लिए वैज्ञानिक मौसम पूर्वानुमान और मौसम विभाग की चेतावनियों को प्राथमिक आधार माना जाना चाहिए।

    पंडित गौतम ने 28 अगस्त को होने वाले पूर्ण चंद्र ग्रहण का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार एक पखवाड़े के भीतर सूर्य और चंद्र ग्रहण का होना ज्योतिषीय दृष्टि से प्राकृतिक घटनाओं और भूकंप जैसी परिस्थितियों से जोड़कर देखा जाता है। उन्होंने 28 अगस्त के चंद्र ग्रहण के प्रभाव से देश और दुनिया में प्राकृतिक घटनाओं की आशंका के योग बताए हैं। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ऐसी बातें ज्योतिषीय मान्यताओं और परंपरागत गणनाओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित मौसम या भूकंप पूर्वानुमान नहीं माना जाता है।

    कुल मिलाकर 17 अगस्त से शुरू हो रहा मघा नक्षत्र 31 अगस्त तक बारिश के लिहाज से चर्चा में रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस अवधि में कई स्थानों पर अच्छी और कहीं तेज बारिश के योग बन सकते हैं। वहीं किसानों और आम लोगों के लिए वास्तविक बारिश की स्थिति जानने के लिए स्थानीय मौसम विभाग के अपडेट और आधिकारिक चेतावनियों पर नजर रखना अधिक उपयोगी रहेगा।

  • नर्सिंग छात्रों का फूटा गुस्सा, छह साल से अटके भविष्य को लेकर भोपाल में धरना; बोले लिखित आश्वासन के बिना नहीं हटेंगे

    नर्सिंग छात्रों का फूटा गुस्सा, छह साल से अटके भविष्य को लेकर भोपाल में धरना; बोले लिखित आश्वासन के बिना नहीं हटेंगे


    भोपाल । भोपाल के नीलम पार्क में सोमवार को नर्सिंग छात्रों का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। मध्यप्रदेश के अलग अलग जिलों से पहुंचे हजारों B.Sc. Nursing और GNM के छात्र छात्राओं ने राज्य स्तरीय धरना देकर अपनी लंबित समस्याओं को लेकर नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नर्सिंग शिक्षा से जुड़ी अनियमितताओं और न्यायिक प्रक्रिया के कारण उनका भविष्य पिछले करीब छह साल से अधर में है। समय पर परीक्षाएं नहीं होने डिग्री और रजिस्ट्रेशन नंबर जारी नहीं होने तथा छात्रवृत्ति में देरी ने विद्यार्थियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

    सुबह से ही नीलम पार्क में छात्रों का पहुंचना शुरू हो गया था। हाथों में पोस्टर लेकर पहुंचे विद्यार्थियों ने सरकार से उनकी समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की। छात्रों का कहना है कि उन्होंने नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के लिए वर्षों मेहनत की लेकिन परीक्षा डिग्री और रजिस्ट्रेशन जैसी जरूरी प्रक्रियाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं। इसका सीधा असर उनकी आगे की पढ़ाई नौकरी और करियर पर पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जिन विद्यार्थियों ने अपनी पढ़ाई और प्रशिक्षण में समय लगाया है उन्हें अब अपने भविष्य को लेकर लगातार अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।

    छात्रों ने कॉलेजों की मान्यता से जुड़े विवाद को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि किसी कॉलेज को मान्यता देना या उसकी वैधता की जांच करना विद्यार्थियों की जिम्मेदारी नहीं है। यदि किसी संस्थान को नियमों के विपरीत मान्यता दी गई है या मान्यता प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित शासन प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन की तय होनी चाहिए। विद्यार्थियों का कहना है कि व्यवस्था की किसी गलती का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।

    प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने साफ कर दिया कि वे केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने मांगों के समाधान को लेकर सरकार से लिखित आश्वासन देने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित आश्वासन नहीं मिलता तब तक आंदोलन जारी रखने पर वे अड़े रहेंगे। प्रदर्शन में मनोज रजक समेत कई छात्रों ने सरकार से तत्काल निर्णय लेकर विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने की अपील की।

    नर्सिंग छात्रों की प्रमुख मांगों में मामले की जल्द सुनवाई और छात्रों के हित में समाधान शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने नर्सिंग मामले की स्पेशल बेंच के माध्यम से जल्द सुनवाई कराने की मांग की है। इसके साथ ही B.Sc. Nursing और GNM के सभी श्रेणियों के विद्यार्थियों की परीक्षाएं बिना देरी एक साथ कराने की मांग रखी गई है। इसमें suitable और unsuitable विद्यार्थियों के साथ ग्वालियर क्षेत्र के 56 कॉलेजों के विद्यार्थी भी शामिल हैं।

    छात्रों ने बैच 2020-21 के विद्यार्थियों को दिसंबर 2026 तक डिग्री और रजिस्ट्रेशन नंबर उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई है। इसके अलावा छात्रवृत्ति से जुड़ी समस्याओं का तत्काल निराकरण करने और नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता से जुड़ी अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है। विद्यार्थियों का कहना है कि सरकार को पूरे मामले में जल्द ठोस कदम उठाना चाहिए ताकि वर्षों से परीक्षा डिग्री और रजिस्ट्रेशन का इंतजार कर रहे हजारों छात्रों को राहत मिल सके और उनका करियर आगे बढ़ सके।

  • भोपाल मेट्रो में बड़ा बदलाव, सुबह 11:30 से शुरू होगी सेवा; छुट्टियों में रात 8:30 बजे तक दौड़ेगी ट्रेन

    भोपाल मेट्रो में बड़ा बदलाव, सुबह 11:30 से शुरू होगी सेवा; छुट्टियों में रात 8:30 बजे तक दौड़ेगी ट्रेन


    भोपाल । भोपाल मेट्रो अब नई समय सारणी के साथ यात्रियों की सुविधा को और बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ गई है। सोमवार से भोपाल मेट्रो का नया शेड्यूल लागू हो गया है। इसके तहत यात्रियों को सप्ताह के सभी दिनों में हर 15 मिनट के अंतराल पर मेट्रो सेवा उपलब्ध होगी। नई व्यवस्था के मुताबिक सोमवार से शनिवार तक मेट्रो कुल 62 फेरे लगाएगी जबकि रविवार और सार्वजनिक अवकाश के दिनों में ट्रेनों के 70 फेरे संचालित किए जाएंगे। मेट्रो के नए समय को इस तरह तय किया गया है कि यात्रियों को पूरे परिचालन समय के दौरान नियमित अंतराल पर ट्रेन मिल सके।

    नए शेड्यूल के अनुसार सुभाष नगर स्टेशन से पहली मेट्रो सुबह 11:30 बजे रवाना होगी। यह ट्रेन एम्स की ओर जाएगी। वहीं एम्स स्टेशन से पहली मेट्रो दोपहर 12 बजे सुभाष नगर के लिए रवाना होगी। सोमवार से शनिवार तक मेट्रो सेवा सुबह 11:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक उपलब्ध रहेगी। सुभाष नगर स्टेशन से इन दिनों आखिरी मेट्रो शाम 7 बजे रवाना होगी जबकि एम्स स्टेशन से अंतिम ट्रेन शाम 7:30 बजे चलेगी। इस अवधि में दोनों दिशाओं को मिलाकर कुल 62 फेरे लगाए जाएंगे।

    रविवार और सार्वजनिक अवकाश के दिनों में यात्रियों को मेट्रो की सुविधा एक घंटे ज्यादा समय तक मिलेगी। इन दिनों सेवा सुबह 11:30 बजे शुरू होकर रात 8:30 बजे तक जारी रहेगी। सुभाष नगर से आखिरी मेट्रो रात 8 बजे रवाना होगी जबकि एम्स स्टेशन से अंतिम मेट्रो रात 8:30 बजे चलेगी। रविवार और सार्वजनिक छुट्टियों पर दोनों दिशाओं में कुल 70 ट्रिप संचालित किए जाएंगे। इस तरह छुट्टी वाले दिनों में मेट्रो से सफर करने वाले लोगों को अतिरिक्त समय और ज्यादा ट्रिप का फायदा मिलेगा।

    भोपाल मेट्रो का संचालन अब दोनों ट्रैक पर किया जा रहा है। नई समय सारणी में ट्रेनों के बीच 15 मिनट का समान अंतराल रखा गया है। इससे यात्रियों को ट्रेन के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। खासकर नियमित रूप से मेट्रो का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों के लिए यह बदलाव काफी उपयोगी माना जा रहा है। यात्री अपनी यात्रा की योजना नई टाइमिंग के अनुसार आसानी से बना सकेंगे।

    मेट्रो प्रबंधन ने यात्रियों के लिए स्टेशन पहुंचने और सुरक्षा जांच से जुड़ी व्यवस्था को भी स्पष्ट किया है। पहली मेट्रो के निर्धारित प्रस्थान समय से करीब 15 मिनट पहले यात्रियों के लिए स्टेशन खोले जाएंगे। इससे यात्रियों को स्टेशन में प्रवेश करने सुरक्षा जांच पूरी करने और प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। टिकटिंग की सुविधा भी निर्धारित प्रवेश और निकास द्वार पर उपलब्ध रहेगी।

    सुभाष नगर स्टेशन पर गेट नंबर 3 केंद्रीय विद्यालय स्टेशन पर गेट नंबर 3 बोर्ड ऑफिस स्टेशन पर गेट नंबर 3 एमपी नगर स्टेशन पर गेट नंबर 3 रानी कमलापति स्टेशन पर गेट नंबर 2 डीआरएम ऑफिस स्टेशन पर गेट नंबर 3 अलकापुरी स्टेशन पर गेट नंबर 3 और एम्स स्टेशन पर गेट नंबर 1 पर मैनुअल टिकटिंग की सुविधा उपलब्ध रहेगी। नई टाइमिंग और नियमित 15 मिनट के अंतराल से भोपाल मेट्रो सेवा के इस्तेमाल को आसान बनाने की कोशिश की गई है। अब यात्रियों को सप्ताह के अधिकांश दिनों में तय अंतराल पर ट्रेन मिलेगी जबकि रविवार और सार्वजनिक अवकाश पर अतिरिक्त परिचालन समय का लाभ भी मिलेगा।

  • मौसम 17 अगस्त 2026: MP में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    मौसम 17 अगस्त 2026: MP में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    मध्य प्रदेश । 17 अगस्त 2026 को मध्य प्रदेश में मानसून का असर एक बार फिर तेज दिखाई दे सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। खासतौर पर पूर्वी मध्य प्रदेश में मौसम अधिक सक्रिय रहने के संकेत हैं जहां 17 अगस्त को बहुत भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग ने पूर्वी मध्य प्रदेश के लिए 17 अगस्त को Very Heavy Rain का अलर्ट जारी किया है। इसके बाद भी 18 और 19 अगस्त को भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।

    मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में भी बारिश से राहत मिलने के संकेत हैं। IMD के अनुसार पश्चिमी मध्य प्रदेश में 15 से 17 अगस्त के बीच अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। वहीं पूरे मध्य प्रदेश में 15 से 21 अगस्त के दौरान कई क्षेत्रों में व्यापक बारिश का दौर बने रहने की संभावना जताई गई है। ऐसे में 17 अगस्त को बारिश का असर केवल एक-दो जिलों तक सीमित रहने के बजाय राज्य के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे सकता है।

    राजधानी भोपाल की बात करें तो 17 अगस्त को आसमान में बादल छाए रहने के साथ बारिश की संभावना बनी हुई है। स्थानीय पूर्वानुमान में सोमवार को बादल और बीच-बीच में बारिश की स्थिति बताई गई है। तापमान में भी बहुत ज्यादा बढ़ोतरी के संकेत नहीं हैं। ऐसे में राजधानी में मौसम सुहावना रहने के साथ कुछ इलाकों में तेज बारिश भी हो सकती है।

    इंदौर में भी 17 अगस्त को मौसम पूरी तरह साफ रहने की उम्मीद नहीं है। IMD के शहर आधारित पूर्वानुमान के अनुसार इंदौर में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं और बारिश या गरज-चमक की संभावना बनी रहेगी। अधिकतम तापमान करीब 26 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 22 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। ऐसे में शहरवासियों को दिन के दौरान अचानक बारिश के लिए तैयार रहना होगा।

    पूर्वी मध्य प्रदेश में मौसम का असर ज्यादा गंभीर हो सकता है। IMD के चेतावनी बुलेटिन में 17 अगस्त को बहुत भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति का संकेत दिया गया है। बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने और सड़कों पर आवाजाही प्रभावित होने की संभावना रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में पानी भरने तथा नदी नालों के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी पर भी नजर रखना जरूरी होगा। ऐसे मौसम में लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेने की सलाह दी जाती है।

    देश के स्तर पर भी 17 अगस्त को मानसून काफी सक्रिय रहने का अनुमान है। IMD के अनुसार 15 से 21 अगस्त के बीच कई राज्यों में व्यापक बारिश की स्थिति बन सकती है। पूर्वी और मध्य भारत के अलावा देश के कुछ अन्य हिस्सों में भी भारी बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। इसका असर सड़क और रेल यातायात के साथ स्थानीय जनजीवन पर पड़ सकता है।

    कुल मिलाकर 17 अगस्त को मध्य प्रदेश में मौसम राहत और चुनौती दोनों लेकर आ सकता है। भोपाल और इंदौर में बादल और बारिश की संभावना है जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का खतरा बना हुआ है। तेज बारिश के दौरान बिजली चमकने और हवाओं की स्थिति को देखते हुए खुले मैदानों में जाने से बचना और पेड़ों के नीचे खड़े न होना बेहतर रहेगा। मौसम विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार आने वाले दिनों में भी बारिश का दौर जारी रह सकता है इसलिए स्थानीय मौसम चेतावनियों पर नजर रखना जरूरी होगा।

  • सागर में हथियार की तलाश में पहुंची पुलिस को अलमारी में मिले नोटों से भरे 4 बैग, 3 करोड़ से ज्यादा नकदी बरामद

    सागर में हथियार की तलाश में पहुंची पुलिस को अलमारी में मिले नोटों से भरे 4 बैग, 3 करोड़ से ज्यादा नकदी बरामद

    सागर। सागर शहर के तिली क्षेत्र में रविवार को हथियार की तलाश में पहुंची पुलिस उस समय हैरान रह गई, जब तलाशी के दौरान एक अलमारी से नकदी से भरे चार बैग बरामद हुए। बैगों में 500 रुपये के नोटों की गड्डियां भरी थीं। पुलिस के अनुसार, बरामद नकदी की रकम 3 करोड़ रुपये से अधिक है। देर रात तक इलेक्ट्रॉनिक मशीन से नोटों की गिनती की जाती रही।

    मामला गोपालगंज थाना क्षेत्र का है। पुलिस को शिकायत मिली थी कि स्थानीय निवासी सौरभ अहिरवार ने सोशल मीडिया पर पिस्टल के साथ तस्वीर पोस्ट की है। इसके बाद घर में अवैध हथियार होने की आशंका पर पुलिस की विशेष टीम ने तिली स्थित उसके मकान पर तलाशी की।

    बंद अलमारी खोलते ही मिले नकदी से भरे बैग

    पुलिस के मुताबिक, तलाशी के दौरान कमरे में रखी एक बंद अलमारी को पंचनामा तैयार कर खुलवाया गया। अलमारी के भीतर चार भारी बैग रखे मिले। जब बैग खोले गए तो उनमें 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियां देखकर पुलिस अधिकारी भी चौंक गए।

    मामले की सूचना मिलते ही एसपी अनुराग सुजानिया और एएसपी नरेंद्र सोलंकी समेत वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। बरामद रकम इतनी अधिक थी कि नोटों की गिनती के लिए इलेक्ट्रॉनिक करेंसी काउंटर मशीन मंगानी पड़ी।


    देर रात तक होती रही नोटों की गिनती

    पुलिस के अनुसार, नोटों की गिनती दोपहर बाद शुरू हुई और रात करीब 12 बजे तक चलती रही। शुरुआती गिनती में अकेले एक बैग से करीब 1.33 करोड़ रुपये मिलने की बात सामने आई है। चारों बैगों की कुल रकम 3 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।

    पूरी कार्रवाई में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पुलिस ने नोटों की बरामदगी और गिनती की वीडियोग्राफी भी कराई।

    रिश्तेदार के पैसे होने का दावा

    पूछताछ में परिवार के सदस्यों ने पुलिस को बताया कि बरामद रकम भोपाल निवासी उनके रिश्तेदार रमेश अहिरवार की है। परिजनों का दावा है कि करीब आठ महीने पहले रमेश ने यह रकम अमानत के तौर पर यहां रखी थी।

    हालांकि पुलिस इस दावे की पुष्टि के लिए दस्तावेज और रकम के स्रोत की जांच कर रही है। पुलिस को आशंका है कि मामले में हवाला कारोबार या बेनामी और अघोषित संपत्ति का कोण भी हो सकता है।

    40 लाख के प्लॉट की भी जानकारी जुटा रही पुलिस

    स्थानीय स्तर पर यह भी जानकारी सामने आई है कि परिवार के रहन-सहन में हाल के दिनों में अचानक बदलाव आया था। पुलिस को सौरभ द्वारा हाल में करीब 40 लाख रुपये का प्लॉट खरीदे जाने की जानकारी भी मिली है। अब पुलिस इस संपत्ति की खरीद और बरामद नकदी के बीच किसी संबंध की भी जांच कर रही है।

    मामले की सूचना आयकर और राजस्व विभाग को दे दी गई है। पुलिस और संबंधित विभाग अब बरामद रकम के वैध स्रोत, उसके मालिकाना हक और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। हथियार की तलाश में शुरू हुई कार्रवाई अब करोड़ों रुपये की नकदी के स्रोत की जांच तक पहुंच गई है।

  • भोपाल में सजेगा अनुभव और हुनर का मंच, MCU के अभ्युदय 2026 में पीयूष मिश्रा समेत 50 पूर्व छात्र करेंगे संवाद

    भोपाल में सजेगा अनुभव और हुनर का मंच, MCU के अभ्युदय 2026 में पीयूष मिश्रा समेत 50 पूर्व छात्र करेंगे संवाद


    भोपाल । भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सोमवार से तीन दिवसीय सत्रारंभ कार्यक्रम अभ्युदय 2026 का आगाज होने जा रहा है। इस बार आयोजन को मैं और मेरा विश्वविद्यालय थीम के साथ खास रूप दिया गया है। कार्यक्रम के पहले दिन 18 अगस्त को बॉलीवुड और रंगमंच के चर्चित अभिनेता लेखक गीतकार और गायक पीयूष मिश्रा विद्यार्थियों से रूबरू होंगे। वह सुबह 10:30 बजे विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे।

    अभ्युदय 2026 को इस बार केवल नए सत्र के स्वागत कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया है बल्कि इसे विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों के बीच संवाद का बड़ा मंच बनाया गया है। विश्वविद्यालय के मीडिया हेड डॉ. पवित्र श्रीवास्तव के अनुसार आयोजन की सबसे खास बात यह रहेगी कि एमसीयू के करीब 35 वर्षों के इतिहास में पढ़कर निकले लगभग 50 पूर्व विद्यार्थी पहली बार एक साथ सत्रारंभ कार्यक्रम में शामिल होंगे। अलग अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके ये पूर्व छात्र नए विद्यार्थियों से सीधे संवाद करेंगे और उन्हें पढ़ाई के साथ करियर की दिशा समझने में मदद करेंगे।

    कार्यक्रम के दौरान पूर्व विद्यार्थियों के लिए दस अलग अलग संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में पूर्व छात्र अपने विद्यार्थी जीवन के अनुभव संघर्ष और सफलता की कहानियां साझा करेंगे। साथ ही मीडिया और संचार के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच रोजगार और करियर की नई संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। इससे नए विद्यार्थियों को यह समझने का मौका मिलेगा कि विश्वविद्यालय में हासिल की गई शिक्षा को व्यावहारिक दुनिया में किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

    अभ्युदय 2026 की एक और खासियत इसका अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव है। इस बार एमसीयू के पूर्व विद्यार्थी अमेरिका ब्रिटेन कनाडा ऑस्ट्रेलिया दुबई सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका सहित सात देशों से कार्यक्रम से जुड़ेंगे। विदेशों में अपनी पेशेवर पहचान बनाने वाले ये पूर्व छात्र भी नए विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे। इनमें प्रिंट मीडिया टेलीविजन डिजिटल मीडिया मीडिया मैनेजमेंट विज्ञापन जनसंपर्क प्रशासन और राजनीति जैसे अलग अलग क्षेत्रों में काम कर रहे पूर्व विद्यार्थी शामिल हैं।

    पहले दिन पीयूष मिश्रा की मौजूदगी भी विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण रहेगी। अभिनेता के साथ साथ लेखक गीतकार और गायक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाने वाले पीयूष मिश्रा युवाओं के बीच अपने अनुभव साझा करेंगे। उनका रचनात्मक सफर और रंगमंच से लेकर सिनेमा तक का अनुभव विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक हो सकता है। उनके संवाद के जरिए विद्यार्थियों को रचनात्मक क्षेत्रों में करियर की चुनौतियों और संभावनाओं को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

    तीन दिनों तक चलने वाले अभ्युदय 2026 का समापन 20 अगस्त को होगा। समापन समारोह के मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद रजनीश होंगे। खास बात यह है कि वह भी एमसीयू के पूर्व विद्यार्थी रहे हैं। ऐसे में आयोजन का समापन भी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों और वर्तमान विद्यार्थियों के बीच जुड़ाव की भावना को मजबूत करने वाला होगा।

    कुल मिलाकर अभ्युदय 2026 नए विद्यार्थियों के लिए केवल सत्रारंभ कार्यक्रम नहीं बल्कि अनुभवों से सीखने और करियर की नई दिशाओं को समझने का अवसर बनने जा रहा है। वरिष्ठ कलाकारों से संवाद और देश विदेश में सक्रिय पूर्व छात्रों की मौजूदगी के जरिए विश्वविद्यालय इस आयोजन को अपने 35 वर्षों के सफर और भविष्य की संभावनाओं से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।

  • जहां दावत बनी खूनी साजिश और नदी का नाम पड़ा हलाली: जानिए जगदीशपुर किले की 300 साल पुरानी रहस्यमयी कहानी

    जहां दावत बनी खूनी साजिश और नदी का नाम पड़ा हलाली: जानिए जगदीशपुर किले की 300 साल पुरानी रहस्यमयी कहानी


    भोपाल । भोपाल से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित जगदीशपुर का ऐतिहासिक किला मध्यप्रदेश के उन विरासत स्थलों में शामिल है जहां इतिहास की कई परतें आज भी दिखाई देती हैं। कभी जगदीशपुर के नाम से पहचाने जाने वाले इस स्थान ने करीब तीन सौ साल पहले मध्य भारत की राजनीति की दिशा बदल दी थी। इसी किले से दोस्त मोहम्मद खान ने अपनी सत्ता की शुरुआत की थी और आगे चलकर यही सत्ता भोपाल रियासत की नींव बनी। आज सदियां बीत जाने के बाद भी जगदीशपुर एक बार फिर राजनीतिक और ऐतिहासिक चर्चा के केंद्र में है। 19 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में ऐतिहासिक चमन महल में हुई विशेष कैबिनेट बैठक ने इस स्थान को फिर सुर्खियों में ला दिया।

    इतिहास के अनुसार जगदीशपुर किले का निर्माण 17वीं शताब्दी में देवड़ा चौहान राजपूत शासकों ने कराया था। उस समय यह क्षेत्र जगदीशपुर के नाम से जाना जाता था। बैरसिया पर अधिकार जमाने के बाद अफगान सरदार दोस्त मोहम्मद खान की नजर जगदीशपुर पर थी। इतिहासकारों के मुताबिक उसने यहां के राजपूत शासक नरसिंह देवड़ा को थाल यानी बाणगंगा नदी के किनारे संधि वार्ता और दावत के लिए बुलाया। दावत के दौरान दोस्त मोहम्मद खान किसी बहाने वहां से बाहर निकला और इसके बाद अचानक हमला कर दिया गया।

    कहा जाता है कि नदी किनारे झाड़ियों में पहले से छिपे सैनिकों ने राजपूतों पर हमला बोल दिया। अचानक हुए इस हमले में बड़ी संख्या में राजपूत सैनिक मारे गए और दोस्त मोहम्मद खान ने जगदीशपुर पर कब्जा कर लिया। इसके बाद उसने इसी स्थान को अपनी पहली राजधानी बनाया और जगदीशपुर का नाम बदलकर इस्लामनगर कर दिया। यही सत्ता आगे चलकर भोपाल रियासत में तब्दील हुई और करीब ढाई सौ वर्षों तक यहां नवाबों और बेगमों का शासन रहा।

    जगदीशपुर की कहानी से एक बेहद चर्चित लोककथा भी जुड़ी है। कहा जाता है कि उस नरसंहार में इतना रक्त बहा कि थाल यानी बाणगंगा नदी का पानी लाल हो गया था। इसी वजह से आगे चलकर इस नदी का नाम हलाली पड़ गया। हालांकि इस प्रसंग को इतिहास और लोकमान्यता के संदर्भ में अलग-अलग तरीके से देखा जाता है लेकिन यह कहानी आज भी जगदीशपुर के इतिहास का एक अहम हिस्सा मानी जाती है।
    जगदीशपुर की कहानी से एक बेहद चर्चित लोककथा भी जुड़ी है। कहा जाता है कि उस नरसंहार में इतना रक्त बहा कि थाल यानी बाणगंगा नदी का पानी लाल हो गया था। इसी वजह से आगे चलकर इस नदी का नाम हलाली पड़ गया। हालांकि इस प्रसंग को इतिहास और लोकमान्यता के संदर्भ में अलग-अलग तरीके से देखा जाता है लेकिन यह कहानी आज भी जगदीशपुर के इतिहास का एक अहम हिस्सा मानी जाती है।

    इस ऐतिहासिक स्थल का संबंध गिन्नौरगढ़ और रानी कमलापति की कहानी से भी जुड़ा है। गिन्नौरगढ़ गोंड साम्राज्य की अंतिम शासक रानी कमलापति की राजधानी थी। पति निजाम शाह की हत्या के बाद रानी ने दोस्त मोहम्मद खान से मदद मांगी थी। इसके बाद बदले राजनीतिक समीकरणों ने दोस्त मोहम्मद खान की ताकत बढ़ाई और जगदीशपुर उसकी सत्ता का प्रमुख केंद्र बन गया।

    समय के साथ इस स्थान का नाम इस्लामनगर हो गया लेकिन वर्ष 2023 में राज्य सरकार ने इसका मूल नाम जगदीशपुर बहाल कर दिया। यहां मौजूद चमन महल आज भी इस ऐतिहासिक दौर की भव्यता को अपने भीतर समेटे हुए है। मुगल और राजपूत स्थापत्य शैली के मेल से बने इस महल के मेहराबदार बरामदे नक्काशीदार झरोखे खुले आंगन फव्वारे और बाग-बगीचे बीते दौर की शाही विरासत की कहानी कहते हैं। परिसर में रानी महल विशाल परकोटे बुर्ज और पुराने प्रवेश द्वार भी मौजूद हैं जो उस समय की सैन्य व्यवस्था और स्थापत्य कला की झलक देते हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इस ऐतिहासिक परिसर को संरक्षित स्मारक घोषित किया है।

    आज जगदीशपुर सिर्फ एक किला नहीं बल्कि भोपाल की सत्ता के उदय राजनीतिक संघर्ष लोककथाओं और स्थापत्य विरासत को अपने भीतर समेटे इतिहास का जीवंत दस्तावेज है। इसकी दीवारों और खंडहरों में करीब तीन सदियों पुराने सत्ता संघर्ष की गूंज आज भी महसूस की जा सकती है।