Category: Madhya Pradesh

  • इंस्टाग्राम कॉल और सीक्रेट चैट से चलाता था गैंग, लाखों का माल बरामद

    इंस्टाग्राम कॉल और सीक्रेट चैट से चलाता था गैंग, लाखों का माल बरामद


    ग्वालियर । ग्वालियर पुलिस ने शहर में सक्रिय एक हाईटेक चोरी गिरोह का पर्दाफाश कर बड़ी सफलता हासिल की है। इंदरगंज थाना पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए करीब 94 लाख 25 हजार रुपए मूल्य का चोरी का माल बरामद किया है। बरामदगी में सोना, चांदी, नकदी और चोरी के पैसों से खरीदी गई एक कार शामिल है। पुलिस इसे वर्ष 2026 की सबसे बड़ी रिकवरी मान रही है।

    इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि गिरोह का मास्टरमाइंड विवेक प्रजापति कंप्यूटर इंजीनियरिंग का छात्र रहा है। पुलिस के अनुसार, जल्दी और अधिक पैसा कमाने की चाह में उसने अपराध का रास्ता चुना और तकनीक का इस्तेमाल करते हुए एक संगठित गिरोह तैयार कर लिया। गिरोह के सदस्य बेहद सुनियोजित तरीके से सूने मकानों को निशाना बनाते थे और पुलिस की निगरानी से बचने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लेते थे।

    मामले की शुरुआत 5 मई 2026 को हुई थी, जब इंदरगंज क्षेत्र निवासी अजय शंकर मित्तल के घर में चोरी की बड़ी वारदात हुई। मकान सूना होने का फायदा उठाकर चोरों ने ताला तोड़ा और लाखों रुपए के जेवरात तथा अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए। शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने में सफलता हासिल की।

    जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरोह का सरगना विवेक प्रजापति अपने साथियों और परिजनों से संपर्क करने के लिए सामान्य फोन कॉल या मैसेजिंग एप का इस्तेमाल नहीं करता था। वह इंस्टाग्राम कॉल और सीक्रेट चैट फीचर का उपयोग करता था, ताकि उसकी बातचीत को ट्रैक करना मुश्किल हो सके। गिरफ्तारी के बाद भी उसने करीब 48 घंटे तक पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन उसके साथी फरहान खान से मिली जानकारी ने पूरे नेटवर्क की परतें खोल दीं।

    आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस पनिहार टोल प्लाजा के आगे बीहड़ क्षेत्र में पहुंची, जहां चोरी का माल जमीन में गाड़कर और पत्थरों के नीचे छिपाकर रखा गया था। यहां से बड़ी मात्रा में सोना और चांदी बरामद की गई। पुलिस ने चोरी के गहने खरीदने के आरोप में एक सराफा कारोबारी विवेक सोनी को भी गिरफ्तार किया है।

    सीएसपी रोबिन जैन के मुताबिक अब तक गिरोह के कई सदस्य पुलिस गिरफ्त में आ चुके हैं। इनमें मास्टरमाइंड विवेक प्रजापति, फरहान खान, आकाश माहौर, मयूर राठौर, एक नाबालिग आरोपी और चोरी का माल खरीदने वाला सुनार शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लगभग 300 ग्राम सोना, साढ़े 14 किलो चांदी तथा चोरी की रकम से खरीदी गई आई-20 कार जब्त की है।

    पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य संभावित अपराधों और नेटवर्क की जांच कर रही है। माना जा रहा है कि आरोपियों ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में कई अन्य वारदातों को भी अंजाम दिया हो सकता है।

  • देवास में दर्दनाक हादसा, टूटे बिजली तार की चपेट में आने से युवक की मौत

    देवास में दर्दनाक हादसा, टूटे बिजली तार की चपेट में आने से युवक की मौत


    देवास । देवास जिले के विजयागंज मंडी क्षेत्र स्थित बरखेड़ा गांव में बिजली विभाग की कथित लापरवाही एक युवक की जान पर भारी पड़ गई। खेत में चरी काटने गए 22 वर्षीय युवक की टूटे हुए बिजली तार की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है, वहीं परिजनों ने बिजली कंपनी के अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

    मृतक की पहचान अरुण मालवीय (22) के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार मंगलवार शाम अरुण अपने खेत पर चरी काटने गया था। इसी दौरान खेत के ऊपर से गुजर रही विद्युत लाइन का तार अचानक टूटकर नीचे आ गिरा और वह उसकी चपेट में आ गया। करंट लगने से अरुण की मौके पर ही मौत हो गई।

    परिजनों का कहना है कि खेत के ऊपर से गुजरने वाली बिजली लाइन के तार लंबे समय से नीचे झूल रहे थे और किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई थी। इस संबंध में कई बार बिजली कंपनी और संबंधित अधिकारियों को शिकायत भी की गई थी, लेकिन डेढ़ से दो वर्षों के दौरान समस्या का समाधान नहीं किया गया। परिवार का आरोप है कि यदि समय रहते तारों की मरम्मत कर दी जाती तो यह हादसा टाला जा सकता था।

    घटना का पता तब चला जब काफी देर तक अरुण का मोबाइल फोन नहीं उठा। चिंतित परिजन और ग्रामीण उसे तलाशते हुए खेत पहुंचे, जहां वह बिजली तार की चपेट में आने के बाद जमीन पर पड़ा मिला। इसके बाद उसे तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    युवक की असामयिक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव के लोगों में भी बिजली विभाग के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जर्जर और झूलते बिजली तारों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।

    पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल की शवगृह में रखवाया गया था। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। जांच के दौरान पुलिस हादसे के सभी पहलुओं की पड़ताल करेगी।

    यह घटना एक बार फिर बिजली लाइनों के रखरखाव और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए तथा क्षेत्र में झूल रहे बिजली तारों को तत्काल दुरुस्त कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • देवास में युवक ने फांसी लगाकर दी जान, सुबह पत्नी ने देखा तो मचा हड़कंप

    देवास में युवक ने फांसी लगाकर दी जान, सुबह पत्नी ने देखा तो मचा हड़कंप


    देवास । देवास शहर के जवाहर नगर क्षेत्र में बुधवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां 26 वर्षीय युवक ने कथित रूप से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। युवक का शव घर में फंदे पर लटका मिला। घटना का पता उस समय चला जब सुबह उसकी पत्नी की नींद खुली और उसने पति को फांसी के फंदे पर झूलते देखा। यह दृश्य देखकर वह घबरा गई और तुरंत परिजनों को सूचना दी।

    मृतक की पहचान अजय जाटव (26) के रूप में हुई है। वह जवाहर नगर क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रह रहा था और मूल रूप से उत्तर प्रदेश का निवासी था। परिजनों के अनुसार अजय पिछले तीन वर्षों से एक निजी कंपनी में हेल्पर के रूप में कार्यरत था। उसके परिवार में पत्नी और एक छोटा बेटा है।

    घटना की जानकारी मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और अजय को तत्काल जिला अस्पताल लेकर गए। हालांकि अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की अचानक मौत से परिवार में मातम का माहौल है और परिजन गहरे सदमे में हैं।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अजय ने अपनी पत्नी की साड़ी से फंदा बनाकर यह कदम उठाया। हालांकि उसने आत्महत्या जैसा कठोर फैसला क्यों लिया, इसका कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट भी बरामद नहीं होने की जानकारी सामने आई है।

    सूचना मिलने पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शव का पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस परिजनों, परिचितों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है, ताकि आत्महत्या के पीछे की वजह का पता लगाया जा सके।

    फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया।

  • लोकायुक्त के भीतर कथित रिश्वतखोरी का खुलासा, सिस्टम की पारदर्शिता पर बहस तेज

    लोकायुक्त के भीतर कथित रिश्वतखोरी का खुलासा, सिस्टम की पारदर्शिता पर बहस तेज


    जबलपुर। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली लोकायुक्त संस्था खुद गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। एक स्टिंग ऑपरेशन में लोकायुक्त संगठन के कुछ कर्मचारियों पर रिश्वत लेकर ट्रैप मामलों को कमजोर करने और आरोपियों को राहत पहुंचाने की कथित डील करते हुए सामने आने का दावा किया गया है। इस खुलासे ने उस व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जिसका काम भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है।

    स्टिंग ऑपरेशन के दौरान रिपोर्टर ने रिश्वत लेते पकड़े गए सरकारी कर्मचारियों के रिश्तेदार बनकर लोकायुक्त के कर्मचारियों से संपर्क किया। बातचीत में कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर ऐसे तरीके बताए, जिनके जरिए ट्रैप मामलों की जांच को प्रभावित किया जा सकता है। इनमें वॉयस सैंपल की प्रक्रिया को प्रभावित करना, जांच को वर्षों तक लंबित रखना और गवाहों को मैनेज करने जैसे दावे शामिल हैं।

    भोपाल लोकायुक्त में पदस्थ टेक्नीशियन अमित विश्वकर्मा के साथ हुई मुलाकात में कथित तौर पर यह दावा किया गया कि जांच को आरोपी की सेवानिवृत्ति तक लंबा खींचा जा सकता है, जिससे पेंशन और अन्य सेवा लाभों पर तत्काल प्रभाव न पड़े। बातचीत के दौरान वॉयस सैंपल को प्रभावित करने और जांच प्रक्रिया को धीमा करने के लिए लाखों रुपये की मांग किए जाने का भी दावा किया गया।

    स्टिंग में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में आरोपी को पहले से यह बताया जा सकता है कि उसे वॉयस सैंपल के दौरान क्या बोलना है और क्या नहीं। कथित तौर पर गवाहों को भी प्रभावित करने की बात कही गई, ताकि जांच की दिशा बदली जा सके। इस पूरी प्रक्रिया के लिए 3 लाख से 5 लाख रुपये तक की डील की चर्चा सामने आई।

    सागर में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल यशवंत सिंह के साथ हुई बातचीत में भी जांच को प्रभावित करने, भाषा और बोलने के तरीके में बदलाव कर वॉयस सैंपल को कमजोर करने तथा फॉरेंसिक रिपोर्ट पर असर डालने जैसे दावे किए गए। उन्होंने कथित तौर पर जांच को कई महीनों तक टालने और दस्तावेजों को मैनेज कराने की बात भी कही।

    वहीं, लोकायुक्त के अन्य कर्मचारियों के नाम भी सामने आए, जिन पर कथित तौर पर आरोपियों और अधिकारियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने के आरोप लगे हैं। एक अन्य कर्मचारी ने तो कथित रूप से 3 लाख रुपये में पूरा मामला “मैनेज” करने का दावा करते हुए पहले किस्त के रूप में रकम देने की बात कही।

    यह खुलासा इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि लोकायुक्त जैसी संस्था पर आम लोगों का भरोसा भ्रष्टाचार के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई के लिए टिका होता है। यदि जांच एजेंसियों के भीतर ही ऐसे नेटवर्क सक्रिय हैं, तो इससे न्यायिक प्रक्रिया और भ्रष्टाचार विरोधी अभियान दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

    अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन आरोपों और स्टिंग में सामने आए तथ्यों पर क्या कार्रवाई होती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे तंत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता पर व्यापक बहस खड़ी कर सकता है।

  • 31 खदानों का 16 करोड़ का ठेका, बीच में रेत माफिया सक्रिय होने के आरोप

    31 खदानों का 16 करोड़ का ठेका, बीच में रेत माफिया सक्रिय होने के आरोप


    जबलपुर। जबलपुर जिले में पिछले सात महीनों से रेत खदानों की नीलामी नहीं होने का खामियाजा सरकार और आम जनता दोनों को भुगतना पड़ रहा है। नवंबर 2025 से जिले की वैध रेत खदानें बंद पड़ी हैं, जिसके चलते सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। दूसरी ओर इस स्थिति का सबसे अधिक फायदा अवैध खनन माफियाओं को मिल रहा है, जिन्होंने नर्मदा समेत अन्य नदियों में रेत उत्खनन का समानांतर कारोबार खड़ा कर लिया है।

    जिले में नर्मदा, हिरण और गौर नदी क्षेत्र में करीब 42 रेत खदानें स्थित हैं, जिनमें से 31 खदानों को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की स्वीकृति प्राप्त है। राज्य सरकार ने इन खदानों के लिए लगभग पांच लाख घनमीटर रेत उत्खनन का टेंडर जारी किया था। इसके बदले करीब 16.5 करोड़ रुपये की लीज राशि निर्धारित की गई थी, लेकिन ऊंची प्रीमियम दर और अधिक उत्खनन लक्ष्य के कारण किसी भी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई। लगातार तीन बार टेंडर प्रक्रिया दोहराने के बावजूद खदानों का आवंटन नहीं हो सका।

    खनिज कारोबार से जुड़े जानकारों का कहना है कि वर्तमान बाजार परिस्थितियों में इतनी बड़ी राशि और निर्धारित शर्तों के साथ खदानों का संचालन आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं है। यही कारण है कि ठेकेदारों ने दूरी बनाए रखी। अब खनिज विभाग नई रणनीति पर काम कर रहा है। विभाग खदानों की संख्या, उत्खनन की मात्रा और प्रीमियम दरों में कमी कर टेंडर को व्यावहारिक बनाने की तैयारी कर रहा है। जानकारी के अनुसार पांच लाख घनमीटर की सीमा घटाकर करीब साढ़े तीन लाख घनमीटर करने पर विचार किया जा रहा है।

    उधर वैध खदानों के बंद होने से अवैध खनन का नेटवर्क लगातार मजबूत हुआ है। रात के अंधेरे में पोकलेन, जेसीबी और हाईवा जैसे भारी वाहनों की मदद से नर्मदा और उसकी सहायक नदियों से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है। कई स्थानों पर नदी की धाराओं को प्रभावित कर अस्थायी रास्ते और पुल तक बनाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रातभर ट्रैक्टर और हाईवा के जरिए अवैध परिवहन खुलेआम चलता है, लेकिन प्रभावी रोक नहीं लग पा रही।

    इसका असर रेत बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। वैध आपूर्ति ठप होने से रेत की उपलब्धता कम हो गई है और कीमतों में भारी उछाल आया है। वर्तमान में जबलपुर में एक हाईवा रेत 28 से 30 हजार रुपये तक बिक रही है, जबकि पड़ोसी कटनी जिले में इसकी कीमत 50 हजार रुपये प्रति हाईवा तक पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों का असर निर्माण कार्यों और रियल एस्टेट गतिविधियों पर भी पड़ रहा है।

    हालांकि प्रशासन अब सक्रिय नजर आ रहा है। जिला खनिज विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें बेलखाड़ू, बरगी, सिहोरा और चरगवां क्षेत्रों में लगातार कार्रवाई कर रही हैं। अवैध रूप से भंडारित रेत को जब्त कर नष्ट किया जा रहा है। वहीं भोपाल स्थित खनिज मुख्यालय ने भी जबलपुर की खदानों से संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा शुरू कर दी है। इसके बावजूद सवाल यही है कि जब तक वैध खदानों का संचालन शुरू नहीं होगा, तब तक अवैध खनन पर पूरी तरह लगाम लगाना बड़ी चुनौती बना रहेगा।

  • 14 साल बाद मांगी गई ₹3.33 लाख की वसूली, ट्रिब्यूनल ने मांगा जवाब

    14 साल बाद मांगी गई ₹3.33 लाख की वसूली, ट्रिब्यूनल ने मांगा जवाब


    जबलपुर। जबलपुर की 91 वर्षीय श्यामा देवी झा को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) से बड़ी राहत मिली है। अधिकरण ने उनकी पारिवारिक पेंशन से की जा रही 3.33 लाख रुपए की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है। आयुध निर्माणी विभाग ने कथित अधिक पेंशन भुगतान का हवाला देते हुए यह राशि वापस लेने का आदेश जारी किया था, लेकिन बुजुर्ग महिला ने इसे न्यायिक चुनौती देते हुए अधिकरण का दरवाजा खटखटाया। प्रारंभिक सुनवाई में अधिकरण ने मामले को गंभीर मानते हुए विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

    श्यामा देवी झा के पति शंभू दयाल झा आयुध निर्माणी में कार्यरत थे। सेवानिवृत्ति के बाद वे नियमित पेंशन प्राप्त कर रहे थे। वर्ष 2012 में उनके निधन के बाद पारिवारिक पेंशन का लाभ उनकी पत्नी श्यामा देवी को मिलने लगा। पिछले 14 वर्षों से उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत पेंशन मिल रही थी, लेकिन हाल ही में विभाग ने आदेश जारी कर दावा किया कि उन्हें अधिक भुगतान किया गया है और करीब 3 लाख 33 हजार रुपए की राशि की वसूली की जाएगी।

    विभाग के इस फैसले ने बुजुर्ग महिला के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया। याचिका में कहा गया कि 91 वर्ष की उम्र में पेंशन ही उनका एकमात्र सहारा है और इसी राशि से उनका जीवन-यापन चलता है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि यदि किसी प्रकार का अधिक भुगतान हुआ भी है तो उसमें उनका कोई दोष नहीं है। उन्होंने न तो कोई गलत जानकारी दी और न ही किसी प्रकार की तथ्यात्मक जानकारी छिपाई। ऐसे में 14 साल बाद वसूली की कार्रवाई न केवल अनुचित है बल्कि मानवीय दृष्टि से भी न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती।

    मामले में श्यामा देवी की ओर से अधिवक्ता आकाश सिंघई ने पक्ष रखा। उन्होंने अधिकरण के समक्ष दलील दी कि विभागीय त्रुटि का भार एक वृद्ध पेंशनभोगी पर नहीं डाला जा सकता। सुनवाई के दौरान अधिकरण ने प्रथम दृष्टया इन तर्कों को उचित माना और वसूली आदेश के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी।

    CAT के आदेश के बाद फिलहाल श्यामा देवी की पारिवारिक पेंशन से किसी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी। अधिकरण ने संबंधित विभाग को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब अगली सुनवाई में विभाग का पक्ष सामने आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।

    यह मामला उन हजारों पेंशनभोगियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके खिलाफ वर्षों बाद अधिक भुगतान के नाम पर रिकवरी की कार्रवाई की जाती है। फिलहाल बुजुर्ग महिला को राहत मिलने से उनके परिवार ने संतोष जताया है और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा व्यक्त किया है।

  • राज्यसभा रेस में कमलनाथ का नाम सबसे आगे, सियासी हलचल तेज

    राज्यसभा रेस में कमलनाथ का नाम सबसे आगे, सियासी हलचल तेज


    मध्यप्रदेश  मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया 8 जून तक पूरी होनी है। इनमें से दो सीटें भारतीय जनता पार्टी के पास हैं, जबकि एक सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दावा है।इसी एक सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर जबरदस्त सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। दिल्ली से लेकर भोपाल तक बैठकों का दौर जारी है और अगले दो दिनों में उम्मीदवारों के नाम तय होने की संभावना जताई जा रही है।

    कमलनाथ रेस में सबसे आगे, दिल्ली का फैसला निर्णायक
    सूत्रों के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ राज्यसभा उम्मीदवारों की दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। हालांकि अंतिम निर्णय पार्टी हाईकमान करेगा, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी की भूमिका अहम होगी। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पहले ही तीसरी बार राज्यसभा जाने से इनकार कर चुके हैं, लेकिन पार्टी नेतृत्व यदि चाहे तो उनके नाम पर भी अंतिम निर्णय संभव है।

    जातीय समीकरणों पर भी कांग्रेस का फोकस
    इस बार कांग्रेस केवल वरिष्ठता नहीं, बल्कि जातीय संतुलन को भी ध्यान में रखकर उम्मीदवार तय करने की रणनीति बना रही है। पार्टी OBC, SC, ST और सामान्य वर्ग से संतुलित प्रतिनिधित्व देने पर विचार कर रही है। इस सूची में पूर्व मंत्री अरुण यादव, सज्जन सिंह वर्मा, कमलेश्वर पटेल समेत कई नामों पर चर्चा चल रही है।

    पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी भी चर्चा में
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी हालांकि सार्वजनिक रूप से राज्यसभा की रेस से खुद को अलग बता चुके हैं, लेकिन पार्टी के अंदर उनकी सक्रियता और दिल्ली नेतृत्व से संपर्क को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के अनुसार संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के स्तर पर भी उनके नाम को लेकर समर्थन की बात सामने आ रही है।

    दिल्ली में होगा अंतिम फैसला
    कर्नाटक में नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के बाद कांग्रेस मुख्यालय में उच्चस्तरीय बैठक होने की संभावना है। इसी बैठक में मध्यप्रदेश राज्यसभा उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लग सकती है। पार्टी रणनीति यह भी है कि आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सभी वर्गों को साधते हुए उम्मीदवारों का चयन किया जाए।

    मध्यप्रदेश में राज्यसभा सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर घमासान तेज है। कमलनाथ सबसे आगे जरूर माने जा रहे हैं, लेकिन अंतिम निर्णय पूरी तरह दिल्ली नेतृत्व के हाथ में है। जातीय समीकरण और राजनीतिक संतुलन इस फैसले में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

  • भोपाल में बड़ी समीक्षा बैठक: जल जीवन मिशन को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य, केंद्र से मिलेंगे 5000 करोड़

    भोपाल में बड़ी समीक्षा बैठक: जल जीवन मिशन को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य, केंद्र से मिलेंगे 5000 करोड़


    भोपाल । डॉ. मोहन यादव ने राजधानी भोपाल में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि प्रदेश में पेयजल आपूर्ति में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि जल प्रबंधन को केवल ट्यूबवेल आधारित व्यवस्था से आगे बढ़ाकर सतत जल स्रोतों की दिशा में मजबूत किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में जल जीवन मिशन का लक्ष्य मार्च 2028 तक हर घर तक नल से जल पहुंचाना है। इसके लिए केंद्र सरकार से लगभग 5000 करोड़ रुपये की सहायता मिलने जा रही है, जिससे योजनाओं को नई रफ्तार मिलेगी।

    प्रदेश में 80% कार्य पूरा, 1.11 करोड़ परिवारों को मिला नल कनेक्शन
    बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश में जल जीवन मिशन का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। अब तक 1 करोड़ 11 लाख से अधिक परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं। राज्य के 14,200 गांवों को ‘हर घर जल’ घोषित किया गया है। दिसंबर 2023 से अब तक 16.50 लाख नए नल कनेक्शन जोड़े गए हैं, जबकि 15,238 नए नलकूप और हैंडपंप स्थापित किए गए हैं। उज्जैन संभाग सहित 11 जिलों में 100 प्रतिशत कार्य पूरा होने की उपलब्धि भी दर्ज की गई है।

    सीएम का सख्त संदेश: “सिर्फ आंकड़ों में नहीं, जमीन पर दिखे काम”
    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेताया कि योजनाओं की प्रगति केवल रिपोर्टों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा—“हवा में मत रहिए, जमीन पर काम दिखना चाहिए।” उन्होंने विशेष रूप से सीवेज प्रबंधन पर ध्यान देने की बात कही और इंदौर में गंदगी की स्थिति को लेकर असंतोष भी जताया। उन्होंने कहा कि अब राज्य में जल संरक्षण के लिए तालाब, सरोवर निर्माण और जल रिचार्जिंग को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि भूजल स्तर स्थिर रहे और ट्यूबवेल पर निर्भरता घटे।

    नई योजना: जल निगम का नाम बदलेगा, सीवेज पर भी फोकस
    सरकार ने निर्णय लिया है कि मध्यप्रदेश जल निगम का नाम बदलकर “जल एवं सीवेज प्रबंधन निगम” किया जाएगा। इससे स्पष्ट होगा कि संस्था अब केवल पेयजल नहीं, बल्कि सीवेज प्रबंधन पर भी समान रूप से काम करेगी। इसके साथ ही इंदौर और इंदौर जैसे मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों के लिए सतही जल प्रबंधन योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

    नवाचार और जनभागीदारी पर जोर
    बैठक में बताया गया कि राज्य ने बोरवेल सुरक्षा के लिए कानून बनाकर देश में उदाहरण पेश किया है। साथ ही सौर और पवन ऊर्जा आधारित जल परियोजनाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। जल संरक्षण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले गांवों और पंचायतों को सम्मानित किया जाएगा। अक्टूबर 2026 में राज्य स्तरीय जल उत्सव आयोजित करने की योजना भी तैयार है।

    वैज्ञानिक सहयोग और तकनीकी सुधार
    जल प्रबंधन में वैज्ञानिक सहयोग के लिए MAPCAST की विशेषज्ञता ली जाएगी। साथ ही 155 प्रयोगशालाओं को NABL प्रमाणन मिल चुका है, जिससे पानी की गुणवत्ता जांच प्रणाली मजबूत हुई है।

    प्रदेश सरकार का फोकस अब केवल जल आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक जल संरक्षण, सीवेज प्रबंधन और शहरी जल योजना पर भी है। केंद्र और राज्य के संयुक्त प्रयासों से जल जीवन मिशन को तय समय सीमा में पूरा करने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है।

  • पन्ना-अजयगढ़ मार्ग पर ट्राला ने बाइक को मारी टक्कर: 14 वर्षीय नाबालिग की मौत, बड़ा भाई गंभीर घायल

    पन्ना-अजयगढ़ मार्ग पर ट्राला ने बाइक को मारी टक्कर: 14 वर्षीय नाबालिग की मौत, बड़ा भाई गंभीर घायल


    मध्य प्रदेश । पन्ना जिले के पन्ना-अजयगढ़ मुख्य मार्ग पर मंगलवार को दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। दहलान चौकी के पास तेज रफ्तार ट्राला ने बाइक सवार दो सगे भाइयों को जोरदार टक्कर मार दी, जिसमें 14 वर्षीय नाबालिग की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में बड़ा भाई गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है।

    इलाज के लिए जा रहे थे पन्ना, रास्ते में हुआ हादसा
    जानकारी के अनुसार, केवट पुरवा (दहलान चौकी क्षेत्र) निवासी राम प्रताप केवट के पुत्र अनिल केवट (14) और राम सजीवन केवट (23) बाइक से पन्ना जा रहे थे। बताया गया कि बड़े भाई को कान में दर्द की समस्या थी, जिसके इलाज के लिए वे अस्पताल जा रहे थे। इसी दौरान दहलान चौकी के पास सामने से आ रहे तेज रफ्तार ट्राला ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।

    मौके पर मौत, अस्पताल में घायल का इलाज जारी
    टक्कर इतनी भीषण थी कि 14 वर्षीय अनिल केवट ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। घायल राम सजीवन को स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।

    ट्राला चालक फरार, वाहन जब्त
    दुर्घटना के बाद ट्राला चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और ट्राला को जब्त कर लिया। पुलिस ने मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

    गांव में मातम, पुलिस जांच जार
    इस दर्दनाक हादसे के बाद केवट पुरवा गांव में शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस का कहना है कि आरोपी चालक की तलाश तेज कर दी गई है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।

  • पन्ना में NHM स्वास्थ्यकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल: नियमितीकरण की मांग पर स्वास्थ्य सेवाएं ठप, मरीज परेशान

    पन्ना में NHM स्वास्थ्यकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल: नियमितीकरण की मांग पर स्वास्थ्य सेवाएं ठप, मरीज परेशान


    मध्य प्रदेश । पन्ना जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर 2 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस हड़ताल के चलते जिलेभर में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं और अस्पतालों का ऑनलाइन व ऑफलाइन कामकाज ठप पड़ गया है।

    ऑनलाइन-ऑफलाइन कामकाज पूरी तरह बंद
    संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के अनुसार, हड़ताल के पहले ही दिन से कर्मचारियों ने सार्थक ऐप पर उपस्थिति दर्ज करना और दैनिक रिपोर्टिंग का कार्य बंद कर दिया है। साथ ही स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़े सभी ऑनलाइन डेटा एंट्री कार्य भी पूरी तरह रोक दिए गए हैं। इसके कारण ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में व्यवस्था चरमरा गई है और मरीजों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

    मरीजों की परेशानी बढ़ी, CHO और स्टाफ ने रोका काम
    हड़ताल में शामिल CHO, संविदा डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के काम बंद करने से अस्पतालों में आने वाले मरीजों को जांच और उपचार में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं बाधित होने से लोगों को दूर-दराज के अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।

    नियमितीकरण की मांग पर अड़ा संघ
    संघ के जिला अध्यक्ष नरेंद्र तिवारी ने बताया कि कर्मचारियों से लंबे समय से नियमितीकरण का वादा किया जा रहा है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनका कहना है कि जब तक नियमितीकरण की मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    चरणबद्ध आंदोलन से अनिश्चितकालीन हड़ताल तक
    कर्मचारियों ने 25 मई को काली पट्टी बांधकर विरोध शुरू किया था और ज्ञापन भी सौंपा था। लेकिन सरकार की ओर से कोई समाधान न मिलने पर अब आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल दिया गया है।

    भोपाल घेराव की चेतावनी
    संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं की गईं तो 8 जून को प्रदेशभर के हजारों कर्मचारी भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे।