Category: Madhya Pradesh

  • मध्यप्रदेश में बाघों पर मंडरा रहा खतरा सबसे ज्यादा टाइगर होने के बावजूद बढ़ रही मौतें संरक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल

    मध्यप्रदेश में बाघों पर मंडरा रहा खतरा सबसे ज्यादा टाइगर होने के बावजूद बढ़ रही मौतें संरक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल


    मध्यप्रदेश । विश्व बाघ दिवस के अवसर पर जहां पूरे देश में बाघ संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है वहीं देश के सबसे बड़े टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश के सामने एक गंभीर चुनौती भी खड़ी नजर आ रही है। प्रदेश में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन उनके संरक्षण की राह पहले से अधिक कठिन होती जा रही है। जंगलों का घटता दायरा बढ़ती मानवीय गतिविधियां और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव अब बाघों के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। यही कारण है कि वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही प्रदेश में 29 बाघों की मौत दर्ज की गई है जिसने वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार एक जनवरी से 29 अप्रैल 2026 के बीच हुई 29 बाघों की मौतों में पांच मामलों में बिजली के करंट को कारण माना गया है। एक मामले में शिकार की पुष्टि हुई जबकि अन्य मौतें आपसी संघर्ष बीमारी कुएं में गिरने और अन्य प्राकृतिक कारणों से हुईं। करंट से मौत के अधिकांश मामले मंडला शहडोल उमरिया और सिवनी जैसे वन क्षेत्रों में सामने आए जहां खेतों के आसपास लगाए गए बिजली के तार वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।

    राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के आंकड़े भी मध्यप्रदेश के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं। वर्ष 2012 से 2025 के बीच पूरे देश में 1581 बाघों की मौत दर्ज की गई जिनमें अकेले 423 मौतें मध्यप्रदेश में हुईं। यह आंकड़ा बताता है कि देश में सबसे अधिक बाघों वाला राज्य होने के साथ साथ सबसे अधिक टाइगर मॉर्टेलिटी भी यहीं दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों की बढ़ती संख्या के साथ उनके लिए सुरक्षित आवास और प्राकृतिक कॉरिडोर का विस्तार भी उतना ही जरूरी है।

    वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार बाघों की सबसे अधिक मौतें आपसी क्षेत्रीय संघर्ष के कारण होती हैं। जब किसी जंगल में बाघों की संख्या बढ़ती है तो वे नए क्षेत्र की तलाश में जंगल से बाहर निकलने लगते हैं। ऐसे में उनका सामना खेतों गांवों और मानव बस्तियों से होता है जहां करंट वाले तार सड़क दुर्घटनाएं और अन्य खतरे उनका इंतजार कर रहे होते हैं। इसके अलावा अवैध शिकार और जहरीले पदार्थों का इस्तेमाल भी बाघों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है।

    आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025 मध्यप्रदेश के लिए सबसे घातक साबित हुआ जब पूरे वर्ष में 55 बाघों की मौत दर्ज की गई। इससे पहले वर्ष 2024 में 47 और वर्ष 2023 में 45 बाघों की मौत हुई थी। वहीं 2026 के केवल पहले चार महीनों में 29 मौतें दर्ज होना इस बात का संकेत है कि यदि प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह संख्या और बढ़ सकती है। औसतन हर चार दिन में एक बाघ की मौत होना संरक्षण व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है।

    राष्ट्रीय स्तर के आंकड़े यह भी बताते हैं कि अब बाघ केवल जंगलों के भीतर ही नहीं बल्कि उनके बाहर भी असुरक्षित हो गए हैं। लगभग आधी मौतें टाइगर रिजर्व के बाहर दर्ज हुई हैं। इतना ही नहीं बाघों की खाल और अन्य अंगों की अधिकांश बरामदगी भी संरक्षित क्षेत्रों के बाहर हुई है जिससे स्पष्ट होता है कि वन्यजीव अपराधियों की गतिविधियां अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी बाघ संरक्षण को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि केवल बाघों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है बल्कि उनके प्राकृतिक आवास और टाइगर कॉरिडोर को सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। उनका कहना है कि विकास परियोजनाओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन होना चाहिए ताकि जंगलों और वन्यजीवों पर अनावश्यक दबाव न बढ़े।

    वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे का मानना है कि बाघों की मौत रोकने के लिए वन विभाग को जमीनी स्तर पर निगरानी मजबूत करनी होगी। प्रशिक्षित वन अधिकारियों की संख्या बढ़ाने मुखबिर तंत्र को सक्रिय करने स्थानीय ग्रामीणों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने और वन्यजीव अपराधों में दोष सिद्धि की दर बढ़ाने की जरूरत है। उनका कहना है कि कानून का सख्ती से पालन और त्वरित कार्रवाई ही शिकारियों और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगा सकती है।

    विश्व बाघ दिवस पर मध्यप्रदेश के सामने सबसे बड़ा संदेश यही है कि केवल बाघों की संख्या बढ़ाना सफलता नहीं बल्कि उन्हें सुरक्षित जीवन देना ही वास्तविक संरक्षण है। यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे प्राकृतिक कॉरिडोर संरक्षित होंगे और मानव तथा वन्यजीवों के बीच संतुलन कायम रहेगा तभी टाइगर स्टेट की पहचान भविष्य में भी मजबूती के साथ कायम रह सकेगी।

  • दस साल बाद शुरू हुई पदोन्नति प्रक्रिया विवादों में गृह विभाग के अधिकारियों ने खोला मोर्चा नियमों के उल्लंघन का लगाया आरोप

    दस साल बाद शुरू हुई पदोन्नति प्रक्रिया विवादों में गृह विभाग के अधिकारियों ने खोला मोर्चा नियमों के उल्लंघन का लगाया आरोप


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में लगभग एक दशक बाद शुरू हुई शासकीय पदोन्नति प्रक्रिया अब बड़े विवाद का कारण बनती दिखाई दे रही है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी पदोन्नति नियम 2025 के क्रियान्वयन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। पहले वाणिज्यिक कर विभाग में नियमों के पालन को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं और अब गृह विभाग के अधिकारियों ने भी पदोन्नति प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि विभागीय स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई है और उनकी मनमानी व्याख्या कर बड़ी संख्या में पात्र अधिकारियों और कर्मचारियों को पदोन्नति से वंचित कर दिया गया है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो मामला न्यायालय तक ले जाने की तैयारी की जा रही है।

    शिकायत करने वाले अधिकारियों ने गृह विभाग की सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपते हुए कहा है कि पदोन्नति नियम 2025 के स्पष्ट प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। उनका आरोप है कि चयन प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों के बजाय अलग तरीके से पात्रता तय की गई जिससे सामान्य वर्ग और अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के हजारों कर्मचारी और अधिकारी प्रभावित हुए हैं। उनका कहना है कि यदि नियमों का सही तरीके से पालन किया जाता तो कई और अधिकारी पदोन्नत होने के पात्र होते।

    सबसे अधिक विवाद पुलिस विभाग में हुई पदोन्नतियों को लेकर सामने आया है। राज्य सरकार के अनुसार पुलिस विभाग में करीब 25 हजार पदोन्नतियां की गई हैं और इसे प्रशासनिक दृष्टि से बड़ी उपलब्धि माना गया है। मुख्यमंत्री भी सार्वजनिक मंचों से इस प्रक्रिया की सराहना कर चुके हैं। लेकिन अब कई अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि विभागीय अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी की और बाद में त्रुटियों की जानकारी होने के बावजूद उन्हें सुधारने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

    शिकायतकर्ताओं के अनुसार लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 की कंडिका 6 में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी चयन वर्ष की विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक समय पर नहीं हो पाती तो अगली बैठक में सबसे पहले उसी लंबित चयन वर्ष के लिए अलग चयन सूची तैयार की जानी चाहिए। इसके बाद वर्तमान और भविष्य की रिक्तियों के लिए नई चयन सूची बनाई जानी चाहिए। अधिकारियों का आरोप है कि अधिकांश विभागों ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया और वर्ष 2025 की रिक्तियों के लिए निर्धारित प्रक्रिया की बजाय बाद के वर्षों की गोपनीय चरित्रावली और अन्य अभिलेखों के आधार पर पदोन्नति आदेश जारी कर दिए।

    सामान्य प्रशासन विभाग ने 19 जून 2025 को पदोन्नति नियम लागू किए थे और 30 जून 2025 को जारी स्पष्टीकरण में यह भी स्पष्ट किया था कि अलग अलग चयन वर्षों के लिए किस अवधि की गोपनीय चरित्रावली को आधार बनाया जाएगा। विशेष पदोन्नति समिति के लिए वर्ष 2022 से 2023 और उससे पहले की निर्धारित अवधि की सीआर पर विचार किया जाना था जबकि अन्य चयन वर्षों के लिए अलग समय सीमा तय की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि इन दिशा निर्देशों का पालन नहीं होने से पूरी प्रक्रिया विवादों में आ गई है।

    पदोन्नति से वंचित अधिकारियों ने मांग की है कि पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा कर नियमों के अनुरूप संशोधित आदेश जारी किए जाएं ताकि किसी भी पात्र अधिकारी के साथ अन्याय न हो। उनका कहना है कि यदि विभाग समय रहते आवश्यक सुधार नहीं करता तो वे न्यायालय की शरण लेने को मजबूर होंगे।

    लंबे समय बाद शुरू हुई पदोन्नति प्रक्रिया से कर्मचारियों और अधिकारियों को जहां बड़ी उम्मीदें थीं वहीं अब उस पर उठ रहे सवाल प्रशासन के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार और संबंधित विभाग इस विवाद का किस तरह समाधान निकालते हैं इस पर हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों की नजर टिकी हुई है।

  • बाघों की दहाड़ से गूंजेगा मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को मिलेगी नई मजबूती

    बाघों की दहाड़ से गूंजेगा मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को मिलेगी नई मजबूती


    भोपाल । अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश ने एक बार फिर देश के टाइगर स्टेट के रूप में अपनी मजबूत पहचान दोहराई। भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने विश्वास जताया कि प्रदेश में बाघों की संख्या जल्द ही एक हजार के करीब पहुंच जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 की बाघ गणना के अनुसार मध्यप्रदेश में 785 बाघ दर्ज किए गए थे और जिस गति से संरक्षण कार्य चल रहे हैं उसे देखते हुए अगली गणना में यह आंकड़ा लगभग एक हजार तक पहुंच सकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वन्यजीव संरक्षण केवल पर्यावरण बचाने का अभियान नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला भी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश आज देश में बाघ संरक्षण का सबसे मजबूत केंद्र बन चुका है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पृथ्वी पर यदि कहीं बाघ इंसानों के सबसे निकट प्राकृतिक वातावरण में रहते हैं तो वह भोपाल और उसके आसपास का क्षेत्र है। यह प्रदेश के समृद्ध जंगलों और सफल वन प्रबंधन की पहचान है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है जिससे जंगलों का प्राकृतिक संतुलन बना रहे और वन्यजीव सुरक्षित वातावरण में अपना जीवन व्यतीत कर सकें।

    डॉ मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश सरकार केवल बाघों तक सीमित नहीं है बल्कि अन्य वन्यजीवों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की नदियों में घड़ियालों का संरक्षण और पुनर्वास अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। पहले प्रदेश में छोड़े गए घड़ियालों का अधिक लाभ दूसरे राज्यों को मिलता था लेकिन अब ऐसी रणनीति बनाई जा रही है जिससे घड़ियाल मध्यप्रदेश की नदियों में ही सुरक्षित रह सकें और उनकी संख्या लगातार बढ़े।

    गुरु पूर्णिमा के अवसर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है बल्कि अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति सदियों से प्रकृति के सम्मान और संरक्षण की शिक्षा देती आई है। महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पेड़ों में जीवन होने की अवधारणा भारत की प्राचीन संस्कृति का हिस्सा रही है और आज आधुनिक विज्ञान भी इस सत्य को स्वीकार कर चुका है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ओरछा स्थित माता महालक्ष्मी मंदिर की भव्यता की सराहना करते हुए कहा कि शासन के सभी विभाग महत्वपूर्ण हैं लेकिन वन विभाग के साथ काम करना उन्हें विशेष संतोष देता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार अन्य राज्यों के साथ वन्यजीवों के आदान प्रदान और संरक्षण को लेकर भी सकारात्मक पहल कर रही है। हाथियों की आवाजाही और उससे होने वाली जनहानि को कम करने के लिए किए गए प्रयासों के भी अच्छे परिणाम सामने आए हैं।

    इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक शुभरंजन सेन ने कहा कि स्वस्थ जंगल की सबसे बड़ी पहचान वहां सुरक्षित बाघ और उनके शावक होते हैं। उनका कहना था कि बाघों का संरक्षण केवल एक वन्यजीव की रक्षा नहीं बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र और मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी और स्थानीय समुदाय मिलकर इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण के लिए उपलब्ध कराए गए नए वाहनों का लोकार्पण किया और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। साथ ही विभागीय प्रकाशनों का विमोचन किया गया और वन्यजीव प्रबंधन पर आधारित वृत्तचित्रों के टीजर जारी किए गए। वन सुरक्षा समितियों ईको विकास समितियों ग्राम वन समितियों और उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन कर्मियों को सम्मानित भी किया गया। स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में भी देश में वन्यजीव संरक्षण का अग्रणी राज्य बने रहने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है।

  • भोपाल में किसान आंदोलन बना संघर्ष और परिवार की कहानी बेटियों ने खिलाया खाना पत्नी ने कहा खाली हाथ मत लौटना

    भोपाल में किसान आंदोलन बना संघर्ष और परिवार की कहानी बेटियों ने खिलाया खाना पत्नी ने कहा खाली हाथ मत लौटना


    भोपाल । भोपाल में जारी किसान आंदोलन अब केवल सरकारी नीतियों के विरोध तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह किसानों के संघर्ष उनके परिवारों की उम्मीदों और गांव की आर्थिक हकीकत की मार्मिक कहानी बन गया है। राजधानी के होशंगाबाद रोड पर हजारों किसान अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। इस आंदोलन के बीच कई ऐसे दृश्य सामने आए जिन्होंने हर किसी को भावुक कर दिया। कहीं दो बेटियां अपने किसान पिता के लिए घर का बना खाना लेकर पहुंचीं तो कहीं एक पत्नी ने अपने पति को साफ शब्दों में कह दिया कि इस बार मांगें मनवाकर ही घर लौटना।

    संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में निकली किसान क्रांति पैदल यात्रा नर्मदापुरम जिले के बरखेड़ा से शुरू होकर भोपाल पहुंची है। किसान मूंग की शत प्रतिशत सरकारी खरीदी खाद वितरण व्यवस्था में सुधार और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    आंदोलन के बीच कटारा हिल्स में रहने वाली प्रगति पटेल और उनकी बहन प्रकृति पटेल अपने पिता के लिए भोजन लेकर धरना स्थल पहुंचीं। दोनों भोपाल में पढ़ाई कर रही हैं। प्रगति ने कहा कि उन्होंने बचपन से अपने पिता को खेतों में मेहनत करते देखा है लेकिन मेहनत के अनुरूप उन्हें कभी उचित मूल्य नहीं मिला। उनका कहना था कि यदि किसान खेती करना छोड़ देगा तो देश की खाद्य व्यवस्था पर संकट खड़ा हो जाएगा। दोनों बहनों ने कहा कि अपने अधिकारों की लड़ाई में डरने का सवाल ही नहीं उठता और वे अपने पिता के संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ी हैं।

    हरदा से आए किसान अशोक गुर्जर ने बताया कि इस बार भीषण गर्मी में कड़ी मेहनत कर मूंग की फसल तैयार की लेकिन सरकार पूरी उपज खरीदने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि घर से निकलते समय उनकी पत्नी ने उन्हें सिर्फ एक बात कही कि इस बार मांगें पूरी कराकर ही वापस आना। चाहे जितना समय लगे लेकिन खाली हाथ मत लौटना। अशोक का कहना है कि गांव में किसान लगातार आर्थिक संकट से जूझ रहा है और खेती अब घाटे का सौदा बनती जा रही है।

    कई किसानों ने आंदोलन के दौरान अपनी आर्थिक परेशानियां भी साझा कीं। हरदा के किसान बृजेश जाट ने बताया कि मूंग की खेती में उन्होंने गेहूं की पूरी कमाई लगा दी लेकिन सीमित खरीदी की वजह से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि दो महीने से बच्चों की स्कूल फीस तक जमा नहीं कर पाए। फीस नहीं भरने पर स्कूल बस संचालकों ने बच्चों को बस में बैठाने से मना कर दिया और स्कूल प्रशासन ने भी चेतावनी दे दी। उनका कहना है कि किसान परिवार आज सम्मान और अस्तित्व दोनों की लड़ाई लड़ रहा है।

    वहीं किसान दीपक पटवारे ने बताया कि आठ दिन पहले उनके पिता का घुटना बदलने का ऑपरेशन हुआ था लेकिन इसके बावजूद वे आंदोलन में शामिल होने भोपाल पहुंचे। खुद कमर दर्द की समस्या से जूझ रहे दीपक बेल्ट बांधकर पैदल यात्रा कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके पास लगभग 200 क्विंटल मूंग की उपज है लेकिन सरकारी खरीदी सीमित होने से पूरी फसल बिक नहीं पा रही है। परिवार की जिम्मेदारियों और बच्चों की पढ़ाई के बावजूद उन्होंने आंदोलन को प्राथमिकता दी है।

    कई किसानों ने स्पष्ट कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ते हुए कठिनाइयों का सामना करना पड़े तो भी वे आंदोलन जारी रखेंगे। किसानों का मानना है कि यह केवल फसल की कीमत का मुद्दा नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और खेती की सुरक्षा की लड़ाई है।

    राजधानी भोपाल में जारी यह आंदोलन अब केवल नारों तक सीमित नहीं है बल्कि परिवार के त्याग संघर्ष और उम्मीदों की ऐसी तस्वीर बन गया है जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अब सभी की नजर सरकार और किसान संगठनों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हुई है।

  • बारिश ने पकड़ी रफ्तार बालाघाट से ग्वालियर तक झमाझम बरसात 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट प्रशासन सतर्क

    बारिश ने पकड़ी रफ्तार बालाघाट से ग्वालियर तक झमाझम बरसात 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट प्रशासन सतर्क


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है और प्रदेश के कई जिलों में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में सक्रिय मजबूत मानसूनी सिस्टम को देखते हुए 15 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। सबसे अधिक असर बालाघाट जिले में देखने को मिला जहां बीते 24 घंटे के दौरान करीब 3 इंच बारिश दर्ज की गई। लगातार हो रही वर्षा के कारण कई नदी नाले उफान पर पहुंच गए हैं और ग्रामीण क्षेत्रों के कई संपर्क मार्ग बंद करने पड़े हैं। प्रशासन लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील कर रहा है।

    मौसम विभाग के अनुसार बालाघाट सिवनी छिंदवाड़ा नर्मदापुरम और रायसेन जिलों में अति भारी बारिश की संभावना है। इन क्षेत्रों में अगले 24 घंटे के दौरान लगभग 4 इंच तक वर्षा हो सकती है। वहीं देवास सीहोर हरदा बैतूल पांढुर्णा सागर नरसिंहपुर दमोह जबलपुर और छतरपुर सहित अन्य जिलों में भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। विभाग ने बिजली गिरने तेज हवाएं चलने और जलभराव जैसी स्थितियों को लेकर भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश के ऊपर सक्रिय मानसून ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से यह मजबूत मौसम प्रणाली बनी हुई है। यह सिस्टम ओडिशा दक्षिण झारखंड और उत्तर छत्तीसगढ़ से होते हुए मध्यप्रदेश के पूर्वी और मध्य हिस्सों को प्रभावित कर रहा है। आने वाले दिनों में इसके धीरे धीरे कमजोर होकर अवदाब और फिर निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की संभावना है लेकिन तब तक प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    बालाघाट में लगातार दो दिनों से हो रही बारिश के कारण दैतबर्रा मंगलेगांव पुल टोंडिया नाला और थानेगांव का नाला पूरी तरह उफान पर हैं। सुरक्षा के लिहाज से कई मार्गों पर यातायात रोक दिया गया है। इसके बावजूद कुछ लोग जान जोखिम में डालकर नालों को पार करते दिखाई दिए। टोंडिया नाले का पानी एक ढाबे तक पहुंच गया जिससे स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं बैहर परसवाड़ा मार्ग पर पेड़ गिरने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।

    ग्वालियर में भी बुधवार सुबह हुई झमाझम बारिश ने कई दिनों से जारी उमस और गर्मी से लोगों को राहत दिलाई। वहीं भोपाल इंदौर उज्जैन रीवा सतना शहडोल धार खरगोन खंडवा बुरहानपुर रतलाम मंदसौर नीमच विदिशा राजगढ़ शिवपुरी मुरैना भिंड दतिया कटनी मंडला डिंडौरी सीधी सिंगरौली पन्ना टीकमगढ़ और निवाड़ी समेत कई जिलों में भी हल्की से मध्यम और कहीं कहीं तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आगामी दिनों में तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। किसानों को खेतों में सावधानी बरतने और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक प्रदेश में औसतन 13.6 इंच बारिश दर्ज की गई है जबकि इस समय तक लगभग 16.5 इंच वर्षा होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अभी भी करीब 17 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान सक्रिय मानसूनी सिस्टम के चलते आगामी चार दिनों में अच्छी बारिश होने से यह कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान सिस्टम का प्रभाव 1 अगस्त तक बना रहेगा। इस दौरान कई जिलों में अत्यधिक वर्षा होने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से नदी नालों के पास जाने से बचने जलभराव वाले इलाकों में सावधानी बरतने और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।

  • राजधानी भोपाल बना किसान आंदोलन का केंद्र सड़क पर हवन भोजन और अर्धनग्न प्रदर्शन सीएम हाउस की सुरक्षा कड़ी कई रास्ते बंद

    राजधानी भोपाल बना किसान आंदोलन का केंद्र सड़क पर हवन भोजन और अर्धनग्न प्रदर्शन सीएम हाउस की सुरक्षा कड़ी कई रास्ते बंद


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर किसान आंदोलन का केंद्र बन गई है। मूंग की सरकारी खरीदी ई टोकन व्यवस्था में सुधार न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और अन्य कृषि संबंधी मांगों को लेकर हजारों किसान दूसरे दिन भी आंदोलन पर डटे हुए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में चल रहे इस प्रदर्शन ने अब और उग्र रूप ले लिया है। सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर खींचने के लिए कई किसान अर्धनग्न होकर धरने पर बैठे हैं जबकि प्रदर्शन स्थल पर सद्बुद्धि यज्ञ का आयोजन कर सरकार से किसानों के हित में निर्णय लेने की प्रार्थना भी की गई।

    किसानों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई खेती की बढ़ती लागत और फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। मूंग की पूरी सरकारी खरीदी सुनिश्चित करने ई टोकन प्रणाली को पारदर्शी बनाने और सभी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ दिलाने की मांग लंबे समय से की जा रही है लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इसी वजह से किसानों ने राजधानी में डेरा डालकर आंदोलन को निर्णायक रूप देने का फैसला किया है।

    धरना स्थल पर किसानों का जीवन भी संघर्ष की मिसाल बन गया है। कई किसान पूरी रात खुले आसमान के नीचे रहे और सुबह जहां जगह मिली वहीं आराम करते नजर आए। दोपहर होते ही कई समूहों ने सड़क किनारे चूल्हे जलाए और दाल बाटी बनाकर सामूहिक भोजन किया। किसानों का कहना है कि वे लंबी लड़ाई के लिए तैयार होकर आए हैं और मांगें पूरी होने तक वापस नहीं लौटेंगे। उन्होंने प्रदेश के जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के नेताओं को भी प्रदर्शन स्थल पर आकर उनके साथ भोजन करने और उनकी समस्याएं सुनने का निमंत्रण दिया।

    आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। बड़ी संख्या में महिलाएं प्रदर्शन स्थल पर पहुंचीं और हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारे लिखे। उन्होंने किसानों के संघर्ष को परिवार और समाज की लड़ाई बताते हुए आंदोलन को अपना समर्थन दिया।

    सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए किसानों ने सद्बुद्धि यज्ञ भी किया। यज्ञ के माध्यम से उन्होंने प्रार्थना की कि सरकार किसानों की पीड़ा को समझे और उनकी जायज मांगों को जल्द स्वीकार करे। कई किसानों ने अपनी आर्थिक बदहाली का जिक्र करते हुए कहा कि खेती अब घाटे का सौदा बनती जा रही है और यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।

    किसानों के मुख्यमंत्री आवास घेराव के ऐलान को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। एम्स के पास वीर सावरकर सेतु सहित कई संवेदनशील स्थानों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और यातायात को दूसरे रास्तों से मोड़ा जा रहा है। इसके कारण होशंगाबाद रोड एम्स बंसल प्लाजा कटारा हिल्स और आसपास के क्षेत्रों में दिनभर जाम जैसी स्थिति बनी रही जिससे आम लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने नर्मदापुरम रोड क्षेत्र के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और यातायात पर दबाव कम हो।

    फिलहाल राजधानी में आंदोलन और प्रशासन दोनों आमने सामने की स्थिति में हैं। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी कर रहा है। अब प्रदेश की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार किसानों से बातचीत कर कोई समाधान निकालती है या आंदोलन और तेज होता है।

  • MP में फिर IAS अफसरों के तबादले, 3 जिलों को मिले नए कलेक्टर

    MP में फिर IAS अफसरों के तबादले, 3 जिलों को मिले नए कलेक्टर


    भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 8 अधिकारियों के तबादले किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत तीन जिलों के कलेक्टर बदले गए हैं, जबकि कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां और अतिरिक्त प्रभार सौंपे गए हैं। इस फेरबदल का सबसे ज्यादा असर छतरपुर, बालाघाट और रतलाम जिलों में देखने को मिला है।

    नई नियुक्तियों के तहत पार्थ जायसवाल (2015 बैच) को छतरपुर कलेक्टर पद से हटाकर शहडोल का कलेक्टर बनाया गया है। वहीं, मृणाल मीणा (2015 बैच) को बालाघाट से स्थानांतरित कर छतरपुर का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। कुमार सत्यम (2017 बैच), जो अब तक ग्वालियर में अपर कलेक्टर थे, उन्हें बालाघाट जिले की कमान सौंपी गई है।

    रतलाम कलेक्टर को मिली नई जिम्मेदारी
    मिशा सिंह (2016 बैच) को रतलाम कलेक्टर पद से हटाकर भोपाल में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में अपर आयुक्त बनाया गया है। इससे पहले जारी तबादला सूची में उनकी जगह अजय काटेसरिया को रतलाम कलेक्टर नियुक्त किया जा चुका है।

    अदिति गर्ग को स्किल डेवलपमेंट की जिम्मेदारी
    अदिति गर्ग (2015 बैच) को मंदसौर कलेक्टर पद से भोपाल बुलाकर मध्य प्रदेश स्किल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की परियोजना संचालक और मध्य प्रदेश राज्य कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण बोर्ड की मुख्य कार्यपालन अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही उन्हें एसएसआर ग्लोबल स्किल पार्क का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।

    अन्य अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां
    तबादला आदेश के अनुसार दिनेश जैन (2011 बैच) को खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में आयुक्त-सह-संचालक बनाया गया है। वहीं, गिरीश शर्मा (2011 बैच) को तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग में अपर सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि अंकित अस्थाना (2014 बैच) को कर्मचारी चयन मंडल, मध्य प्रदेश का संचालक नियुक्त किया गया है।

    स्वरोचिष सोमवंशी को मिला अतिरिक्त प्रभार
    राज्य सरकार ने स्वरोचिष सोमवंशी (2012 बैच) को उनके मौजूदा दायित्वों के साथ राज्य योजना आयोग के सदस्य सचिव तथा अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान, भोपाल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 24 जुलाई 2026 को जारी पूर्व पदस्थापन आदेशों में संशोधन करते हुए यह नई तबादला सूची तत्काल प्रभाव से लागू की गई है।

  • अपनी मांगों को लेकर भोपाल पहुंचे किसान, सड़क पर बनाई दाल-बाटी, सीएम हाउस का घेराव करने पर अड़े

    अपनी मांगों को लेकर भोपाल पहुंचे किसान, सड़क पर बनाई दाल-बाटी, सीएम हाउस का घेराव करने पर अड़े


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मूंग की फसल की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर पूरी खरीदी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। नर्मदापुरम, हरदा, सीहोर, रायसेन, विदिशा समेत मालवा और नर्मदापुरम संभाग के 19 किसान संगठनों के बैनर तले हजारों किसान भोपाल पहुंच गए हैं। प्रदर्शनकारी वीर सावरकर सेतु पर डटे हुए हैं, जहां उन्होंने सड़क किनारे कंडों पर दाल-बाटी बनाकर अपना विरोध दर्ज कराया।

    किसानों का कहना है कि लंबा आंदोलन जारी रखने के लिए वे अपने साथ भोजन की पूरी व्यवस्था लेकर आए हैं। सड़क किनारे कंडों पर बाटियां सेंकी जा रही हैं और दाल तैयार की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan और मुख्यमंत्री Mohan Yadav को भी दाल-बाटी खाने का आमंत्रण दिया है।

    किसानों के आंदोलन को देखते हुए कलेक्टर ने नर्मदापुरम रोड स्थित सभी सरकारी और निजी स्कूलों में आज अवकाश घोषित किया है। कलेक्टर के आदेश के बाद क्षेत्र के सभी स्कूल आज बंद रहेंगे। किसानों का बुधवार को मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच करने का दावा है। किसान मूंग की 100% सरकारी खरीद और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर भोपाल पहुंचे हैं। किसान नेताओं का कहना है कि वे मुख्यमंत्री निवास के सामने धरना देंगे और मांगें पूरी होने तक वापस नहीं लौटेंगे।

    ट्रैक्टर-ट्रॉली ही बना ठिकाना
    आंदोलन में शामिल किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में ही भोजन, बिस्तर और जरूरी सामान लेकर आए हैं। उनका कहना है कि पुलिस जहां रोकेगी या रात जहां होगी, वहीं ट्रॉली में रुक जाएंगे, लेकिन मांगें पूरी होने तक वापस नहीं लौटेंगे। आंदोलन के चलते भोपाल-नागपुर मार्ग पर यातायात भी प्रभावित हुआ है।

    सरकार ने बातचीत का दिया भरोसा
    किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने मंत्रालय में किसान प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी मांगों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मूंग खरीदी सहित किसानों के सभी मुद्दों पर सकारात्मक विचार किया जा रहा है और सरकार किसानों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है।

    क्या है किसानों की मुख्य मांग?
    किसान संगठनों का आरोप है कि सरकार की मौजूदा नीति के तहत प्रति एकड़ केवल 1 क्विंटल 20 किलो मूंग ही समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही है, जबकि एक एकड़ में औसतन 4 से 5 क्विंटल उत्पादन होता है। सरकार ने मूंग का MSP ₹8,668 प्रति क्विंटल तय किया है।

    खुले बाजार में भारी नुकसान
    खरीदी की सीमा तय होने के कारण किसानों को बची हुई उपज खुले बाजार में ₹4,000 से ₹5,500 प्रति क्विंटल के भाव पर बेचनी पड़ रही है। किसानों का दावा है कि इससे उन्हें हर क्विंटल पर ₹3,000 से ₹4,000 तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

    हनुमान चालीसा के साथ शुरू हुआ मार्च
    संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में आंदोलन की शुरुआत नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर धरना और हनुमान चालीसा के पाठ से हुई। तिरंगा हाथ में लेकर और “जय जवान, जय किसान” के नारे लगाते हुए किसान बुधनी होते हुए भोपाल पहुंचे। रास्ते में प्रशासन ने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन बातचीत से कोई समाधान नहीं निकल सका।

  • एमपी में मानसून ने पकड़ा जोर, 5 जिलों में अति भारी और 10 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

    एमपी में मानसून ने पकड़ा जोर, 5 जिलों में अति भारी और 10 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में सक्रिय मानसूनी सिस्टम के चलते बारिश का दौर तेज हो गया है। मौसम विभाग ने बुधवार को बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम और रायसेन में अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान 4 इंच या उससे अधिक बारिश होने की संभावना है। वहीं देवास, सीहोर, हरदा, बैतूल, पांढुर्णा, सागर, नरसिंहपुर, दमोह, जबलपुर और छतरपुर में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के ऊपर मानसून ट्रफ, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और पश्चिमी हिस्से में सक्रिय एक अन्य चक्रवाती सिस्टम के कारण मजबूत मौसमीय परिस्थितियां बनी हुई हैं। यह सिस्टम ओडिशा, दक्षिण झारखंड और उत्तर छत्तीसगढ़ से आगे बढ़ते हुए मध्य प्रदेश के पूर्वी और मध्य क्षेत्रों में व्यापक बारिश करा रहा है। आने वाले दिनों में इसके कमजोर होकर पहले अवदाब और फिर निम्न दाब क्षेत्र में बदलने की संभावना है।

    इन जिलों में भी होगी बारिश
    बुधवार को भोपाल, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, कटनी, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने का अनुमान है।

    मंगलवार को भी कई जिलों में बरसे बादल
    मंगलवार को प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। राजधानी भोपाल में दिनभर धूप और बादलों की आवाजाही के बीच रुक-रुककर बारिश होती रही, जबकि मुरैना समेत कई जिलों में तेज वर्षा रिकॉर्ड की गई। रात के समय भी कई इलाकों में मौसम सक्रिय बना रहा।

    अब तक 17% कम बारिश
    मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 13.6 इंच (345.9 मिमी) वर्षा हुई है, जबकि इस अवधि तक 16.5 इंच (418.4 मिमी) बारिश होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में फिलहाल 17 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है। पूर्वी हिस्से में 18 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, लगातार सक्रिय मानसून के कारण आने वाले दिनों में इस कमी के घटने की उम्मीद है।

    1 अगस्त तक रहेगा असर
    मौसम विभाग का कहना है कि वर्तमान मानसूनी सिस्टम का प्रभाव 1 अगस्त तक बना रहेगा। इस दौरान कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

  • मप्र में किसान आंदोन के बीच मूंग खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने की मांग, कृषि मंत्री ने शिवराज सिंह को लिखा पत्र

    मप्र में किसान आंदोन के बीच मूंग खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने की मांग, कृषि मंत्री ने शिवराज सिंह को लिखा पत्र


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में किसानों के आंदोलन के बीच ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। प्रदेश के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर प्रदेश के लिए तय मूंग खरीदी के लक्ष्य को 4.54 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 8.06 लाख मीट्रिक टन करने का अनुरोध किया है।

    कृषि मंत्री कंषाना ने अपने पत्र में लिखा है कि प्रदेश सरकार ने 14 मई और 3 जुलाई 2026 को ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन के लिए केंद्र सरकार को 8.06 लाख मीट्रिक टन खरीदी का प्रस्ताव भेजा था। इसके मुकाबले केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के लिए 4.54 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया है।

    उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग का रकबा करीब 14.30 लाख हेक्टेयर है। अनुमानित उत्पादकता 1410 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के आधार पर कुल उत्पादन करीब 20.16 लाख मीट्रिक टन होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कुल उत्पादन का 40 प्रतिशत यानी 8.06 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया जाना चाहिए।

    कृषि मंत्री के अनुसार, पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश के लिए 4.19 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदी का लक्ष्य तय किया था, जबकि प्रदेश में वास्तविक खरीदी 7.72 लाख मीट्रिक टन तक पहुंची थी। इस वर्ष मूंग उपार्जन का लाभ लेने के लिए 3.47 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है, लेकिन अब तक करीब 82 हजार किसानों से ही खरीदी हो सकी है।

    उन्होंने कहा कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का अधिकतम लाभ दिलाने और उन्हें भविष्य में दलहन उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने के लिए खरीदी सीमा बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने केंद्र से राष्ट्रीय स्तर पर तय लक्ष्य में अन्य मूंग उत्पादक राज्यों की बचत मात्रा का हिस्सा मध्यप्रदेश को देने की मांग की है।

    इससे पहले मध्य प्रदेश सरकार की मूंग खरीदी सीमा बढ़ाने की मांग पर केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने पहले जवाब दिया था कि ग्रीष्मकालीन सीजन 2025-26 में देशभर के लिए मंजूर 5.23 लाख मीट्रिक टन मूंग में से 4.54 लाख मीट्रिक टन यानी करीब 87 प्रतिशत मात्रा मध्य प्रदेश को दी गई है। केंद्र का कहना है कि यह प्रदेश को अब तक दिया गया सबसे बड़ा मूंग खरीदी कोटा है। पीएम-आशा योजना के तहत किसानों को एमएसपी का लाभ दिलाने के लिए केंद्र सरकार लगातार सहयोग कर रही है। इससे पहले वर्ष 2024-25 में मध्य प्रदेश में 4.19 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदी को मंजूरी दी गई थी।

    भोपाल में बीच सड़क पर डटे हजारों किसान, बुधवार को सीएम हाउस कूच

    इधर, प्रदेश में मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी की मांग को लेकर करीब दो हजार किसान भोपाल पहुंच गए हैं और होशंगाबाद रोड पर डटे हुए हैं। मुख्यमंत्री आवास घेरने जा रहे किसानों को मंगलवार शाम को पुलिस ने काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च- एडवांस मैटेरियल एंड प्रोसेसेज रिसर्च इंस्टीट्यूट के सामने रोक दिया, जिसके बाद वे सड़क पर ही बैठ गए।

    किसान नेताओं ने ऐलान किया है कि वे रात सड़क पर ही गुजारेंगे और बुधवार सुबह मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करेंगे। उनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, एडिशनल एसपी अनिल शर्मा ने कहा कि किसानों को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और यह किसानों का आखिरी पॉइंट तय किया गया है।

    संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में प्रदेश के 19 किसान संगठन इस आंदोलन में शामिल हैं। सोमवार को बरखेड़ा से शुरू हुई किसान क्रांति पैदल यात्रा मंगलवार को औबेदुल्लागंज, मंडीदीप और 11 मील होते हुए भोपाल पहुंची। रास्ते में कई जगह पुलिस ने किसानों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन किसान बैरिकेडिंग हटाते हुए आगे बढ़ते रहे।

    भोपाल में प्रवेश के बाद किसान हाथों में तिरंगा लेकर आगे बढ़े। इस दौरान वे लगातार ‘जय जवान-जय किसान’ के नारे लगाते रहे। किसानों के साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों का काफिला भी शहर में आगे बढ़ता रहा, लेकिन 11 मील बायपास पर पुलिस और किसानों के बीच बैरिकेडिंग को लेकर धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए बैरिकेड लगाए थे, लेकिन किसान बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ गए। इसके बाद किसान 11 मील से मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच कर गए। किसानों के साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहन भी चल रहे थे।

    भोपाल कूच में शामिल किसान लंबी लड़ाई की तैयारी के साथ पहुंचे हैं। वे ट्रैक्टर-ट्रॉली में सात दिन का राशन और पानी लेकर आए हैं। कई किसान दाल-बाटी भी बनाकर साथ लाए हैं। किसानों का कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा और वे किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं।

    मुख्यमंत्री ने अफसरों और कृषि मंत्री के साथ की बैठक

    किसान आंदोलन को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार देश शाम अपने निवास पर अधिकारियों और कृषि मंत्री के साथ बैठक की। बैठक में किसानों की मांगों और आंदोलन की स्थिति को लेकर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और जरूरी व्यवस्थाओं को लेकर निर्देश दिए।