Category: Madhya Pradesh

  • मूंग खरीदी पर सियासत और सिस्टम दोनों सवालों के घेरे में सरकार को हजारों करोड़ की चपत किसानों की मांग अब भी अधूरी

    मूंग खरीदी पर सियासत और सिस्टम दोनों सवालों के घेरे में सरकार को हजारों करोड़ की चपत किसानों की मांग अब भी अधूरी


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के कई जिलों से किसान समर्थन मूल्य पर पूरी मूंग खरीदे जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। नर्मदापुरम के सेठानी घाट से बड़ी संख्या में किसान पैदल मार्च करते हुए भोपाल पहुंचे और मुख्यमंत्री निवास तक अपनी आवाज पहुंचाई। किसानों का कहना है कि उनकी पूरी उपज की सरकारी खरीदी सुनिश्चित की जाए ताकि उन्हें बाजार में कम कीमत पर फसल बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े।

    किसानों के बढ़ते दबाव के बीच राज्य सरकार ने मूंग खरीदी का दायरा बढ़ाने की बात कही लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा आर्थिक तथ्य भी सामने आया है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में लक्ष्य से अधिक मूंग खरीदी के कारण सरकार को लगभग 3346 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। यानी हर वर्ष औसतन 1115 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ राज्य सरकार पर पड़ा है। इस नुकसान में खरीदी परिवहन भंडारण और बाद में बाजार में बिक्री के दौरान होने वाला घाटा शामिल है।

    मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि वह केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए खरीदी कोटे से अधिक मात्रा में मूंग खरीदती रही है जिससे आर्थिक दबाव लगातार बढ़ा है। इसी कारण राज्य सरकार ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को कई बार पत्र लिखकर प्रदेश के लिए खरीदी का कोटा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने की मांग की है। सरकार का तर्क है कि जिन राज्यों में मूंग की सरकारी खरीदी बहुत कम होती है वहां का अप्रयुक्त कोटा मध्य प्रदेश को दिया जाना चाहिए ताकि किसानों को राहत मिल सके और कुल राष्ट्रीय सीमा भी प्रभावित न हो।

    हालांकि केंद्र सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश को पहले से मिले कोटे का भी पूरा उपयोग नहीं हो पाया है। केंद्र के अनुसार 16 जुलाई तक निर्धारित कोटे का केवल दो प्रतिशत ही खरीदा गया था। ऐसे में पहले उपलब्ध लक्ष्य के अनुरूप खरीदी पूरी करने के बाद ही अतिरिक्त कोटे पर विचार किया जा सकता है। इसी मुद्दे को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच लगातार पत्राचार जारी है।

    आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा मूंग खरीदी करने वाला राज्य है। वर्ष 2023-24 में प्रदेश के लिए 2.76 लाख मीट्रिक टन खरीदी की स्वीकृति मिली और पूरी मात्रा खरीदी गई। वर्ष 2024-25 में 3.31 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 2.90 लाख मीट्रिक टन खरीदी हुई जबकि वर्ष 2025-26 में 3.51 लाख मीट्रिक टन की स्वीकृति के बावजूद 4.20 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदी गई जो निर्धारित लक्ष्य से काफी अधिक रही।

    दूसरी ओर राजस्थान महाराष्ट्र कर्नाटक हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में स्वीकृति मिलने के बावजूद वास्तविक खरीदी काफी कम रही। कई राज्यों में उत्पादन की तुलना में सरकारी खरीदी तीन प्रतिशत से भी कम रही जबकि मध्य प्रदेश में हर वर्ष कुल उत्पादन का लगभग 20 से 22 प्रतिशत हिस्सा समर्थन मूल्य पर खरीदा जाता है। यही वजह है कि प्रदेश पर अतिरिक्त आर्थिक भार भी अधिक पड़ रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर खरीदी नीति में संतुलित बदलाव करें तथा वास्तविक उत्पादन के आधार पर कोटा तय किया जाए तो किसानों को भी राहत मिलेगी और सरकार पर अनावश्यक वित्तीय बोझ भी कम होगा। फिलहाल मूंग खरीदी का मुद्दा किसानों सरकार और केंद्र के बीच सबसे बड़ी कृषि चुनौती बनकर सामने आया है।

  • मध्य प्रदेश में बारिश का रेड जोन तैयार तीन मौसमी सिस्टम से अगले चार दिन आफत की आशंका बैतूल में दीवार गिरने से मजदूर की मौत

    मध्य प्रदेश में बारिश का रेड जोन तैयार तीन मौसमी सिस्टम से अगले चार दिन आफत की आशंका बैतूल में दीवार गिरने से मजदूर की मौत


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार बारिश का दौर शुरू हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार इस समय मानसून ट्रफ साइक्लोनिक सर्कुलेशन और शियर जोन जैसे तीन मजबूत मौसमी सिस्टम एक साथ सक्रिय हैं जिसके कारण अगले चार दिनों तक पूरे प्रदेश में झमाझम बारिश होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इन सिस्टमों के संयुक्त प्रभाव से कई जिलों में भारी से अति भारी वर्षा हो सकती है। इसके चलते प्रशासन को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    राजधानी भोपाल में गुरुवार सुबह से लगातार रुक रुककर बारिश हो रही है। वहीं इंदौर ग्वालियर जबलपुर रीवा सतना और कई अन्य जिलों में भी गरज चमक के साथ बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग ने बताया है कि अगले चौबीस घंटों में कुछ इलाकों में चार इंच से अधिक बारिश हो सकती है जिससे नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है।

    बारिश के बीच बैतूल जिले से एक दुखद हादसा भी सामने आया है। गंज थाना क्षेत्र में देर रात हुई तेज बारिश के दौरान रेलवे की बाउंड्री वॉल पास बनी एक झोपड़ी पर गिर गई। हादसे के समय झोपड़ी में सो रहे 27 वर्षीय मजदूर राहुल उइके मलबे में दब गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उनके साथी शनि सिंह को मामूली चोटें आई हैं। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचे तथा स्थिति का जायजा लिया।

    मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए अलग अलग स्तर के अलर्ट जारी किए हैं। धार देवास बुरहानपुर हरदा और नर्मदापुरम में अति भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उज्जैन शाजापुर सीहोर बड़वानी खरगोन खंडवा रायसेन सागर बैतूल छिंदवाड़ा पांढुर्णा और सिवनी में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इन जिलों में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

    लगातार हो रही बारिश का असर प्रदेश के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है। बालाघाट में कई नदी नाले उफान पर हैं और ग्रामीण इलाकों के कई मार्ग बंद हो गए हैं। बैहर परसवाड़ा मार्ग पर पेड़ गिरने से यातायात बाधित हुआ। ग्वालियर और अन्य शहरों में भी जलभराव की स्थिति बनने लगी है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय किया जा रहा है।

    मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार वर्तमान मौसमी सिस्टम दो अगस्त तक सक्रिय बने रहेंगे। इस दौरान प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में तेज बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए क्योंकि लगातार वर्षा से नदी नालों में अचानक जलस्तर बढ़ सकता है। किसानों के लिए यह बारिश फायदेमंद मानी जा रही है लेकिन शहरी क्षेत्रों में जलभराव और ग्रामीण इलाकों में आवागमन प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना और अनावश्यक जोखिम से बचना बेहद जरूरी होगा।

  • जली लाश के पीछे छिपा था खौफनाक सच फोरेंसिक एक्सपर्ट के एक सुराग ने पहुंचाया पुलिस को कातिल तक

    जली लाश के पीछे छिपा था खौफनाक सच फोरेंसिक एक्सपर्ट के एक सुराग ने पहुंचाया पुलिस को कातिल तक


    इंदौर । इंदौर में बैंककर्मी पलक केशव हत्याकांड ने यह साबित कर दिया कि किसी भी आपराधिक मामले में फोरेंसिक विज्ञान की भूमिका कितनी अहम होती है। जिस घटना को शुरुआती तौर पर आग लगने से हुई दुर्घटना माना जा रहा था वही मामला फोरेंसिक विशेषज्ञों की सतर्कता और वैज्ञानिक जांच के कारण हत्या में बदल गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले ही विशेषज्ञों ने पुलिस को स्पष्ट संकेत दे दिए थे कि युवती की मौत आग से नहीं बल्कि पहले उसकी हत्या की गई और बाद में सबूत मिटाने के लिए शव को जलाया गया।

    हरदा जिले के टिमरनी की रहने वाली पलक इंदौर में किराए के मकान में रहकर बैंक में नौकरी कर रही थी। 25 जुलाई को उसका जला हुआ शव कमरे में मिला था। शुरुआती जांच में यह माना गया कि आग लगने से उसकी मौत हुई है लेकिन जब शव पोस्टमार्टम के लिए एमवाय अस्पताल पहुंचा तो फोरेंसिक विशेषज्ञों ने शरीर पर मौजूद चोटों और जलने के निशानों का बारीकी से परीक्षण किया। जांच में सामने आया कि सिर गर्दन और चेहरे पर गंभीर चोटें थीं जबकि शरीर पर आग से हुए निशान मृत्यु के बाद के थे। इससे साफ हो गया कि पहले हत्या की गई और बाद में आग लगाकर इसे हादसे का रूप देने की कोशिश की गई।

    फोरेंसिक विशेषज्ञों के इस इनपुट के बाद पुलिस ने जांच का पूरा फोकस बदल दिया। तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस दतिया निवासी मयंक शाक्य तक पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पिछले पांच वर्षों से पलक के संपर्क में था और उससे शादी करना चाहता था। हालांकि पलक ने शादी से इनकार कर दिया था क्योंकि उसके परिवार ने उसके लिए दूसरा रिश्ता तय कर दिया था।

    आरोपी के मुताबिक वह दतिया से इंदौर पलक से मिलने पहुंचा था। दोनों पहले सराफा चौपाटी गए और वहां साथ में समय बिताया। कमरे पर लौटने के बाद जब उसने एक बार फिर शादी का प्रस्ताव रखा तो पलक ने साफ मना कर दिया। इसी बात पर दोनों के बीच विवाद हुआ और गुस्से में आकर आरोपी ने पहले पलक का गला घोंट दिया। हत्या के बाद उसने शव के ऊपरी हिस्से पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी ताकि घटना को दुर्घटना साबित किया जा सके। इतना ही नहीं उसने रसोई में गैस चूल्हे के पास शव रखकर हादसे जैसा माहौल बनाने का प्रयास भी किया और अपने जले हुए कपड़े साथ लेकर वहां से फरार हो गया।

    एमवाय अस्पताल के फोरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ बजरंग कुमार सिंह ने बताया कि ऐसे मामलों में पोस्टमार्टम के दौरान मिलने वाले छोटे से छोटे संकेत भी जांच की दिशा बदल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संवेदनशील मामलों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी पोस्टमार्टम के समय जरूरी होनी चाहिए ताकि चिकित्सकों और जांच एजेंसियों के बीच तत्काल समन्वय स्थापित हो सके और अपराध की तह तक जल्दी पहुंचा जा सके।

    पलक हत्याकांड एक बार फिर यह साबित करता है कि आधुनिक फोरेंसिक तकनीक अपराधियों को कानून से बचने नहीं देती। वैज्ञानिक जांच और पुलिस की सतर्कता के कारण इस मामले का खुलासा बेहद कम समय में हो गया और आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच गया। यह घटना समाज के लिए भी एक संदेश है कि रिश्तों में अस्वीकार को स्वीकार करना सीखना जरूरी है क्योंकि जुनून और हिंसा केवल जीवन ही नहीं बल्कि कई परिवारों की खुशियां भी छीन लेती है।

  • दतिया उपचुनाव में लोकतंत्र का महापर्व मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें सड़क के मुद्दे पर विरोध के बीच दोनों दलों ने किया जीत का दावा

    दतिया उपचुनाव में लोकतंत्र का महापर्व मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें सड़क के मुद्दे पर विरोध के बीच दोनों दलों ने किया जीत का दावा


    दतिया । दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए गुरुवार सुबह सात बजे से मतदान शांतिपूर्ण माहौल में शुरू हुआ। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं और लोगों ने लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। शुरुआती घंटों में ही 16.33 प्रतिशत मतदान दर्ज होने से चुनाव को लेकर लोगों की सक्रिय भागीदारी साफ दिखाई दी। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मतदाता समय से पहले मतदान केंद्रों पर पहुंच गए जिससे पूरे जिले में चुनावी माहौल उत्साहपूर्ण बना रहा।

    हालांकि मतदान के बीच एक स्थान पर स्थानीय समस्या भी प्रमुख मुद्दा बनकर सामने आई। बसई क्षेत्र के लखनपुर गांव के ग्रामीणों ने मुख्य सड़क निर्माण की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार कर दिया और सड़क नहीं तो वोट नहीं के नारे लगाए। ग्रामीणों का कहना था कि लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सूचना मिलने पर प्रशासन हरकत में आया और एसडीएम अशोक अवस्थी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया जिसके बाद लगभग पचास ग्रामीणों ने मतदान में हिस्सा लिया।

    चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी अपने अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने मतदान करने के बाद दावा किया कि जनता इस बार भाजपा के अहंकार को जवाब देगी और कांग्रेस ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगी। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि बसई क्षेत्र में कांग्रेस के पोलिंग एजेंट को बूथ के भीतर प्रवेश नहीं करने दिया गया। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग भी की।

    वहीं भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने मतदान से पहले मां पीतांबरा पीठ पहुंचकर दर्शन किए और दतिया के विकास युवाओं के रोजगार तथा भयमुक्त वातावरण की कामना की। इसके बाद उन्होंने अपने मतदान केंद्र पर पहुंचकर पोलिंग एजेंटों से मुलाकात की और विश्वास जताया कि जनता विकास के पक्ष में मतदान कर रही है तथा भाजपा को भरपूर समर्थन मिलेगा।

    जिले में कुल 291 मतदान केंद्र बनाए गए हैं जहां दो लाख बीस हजार चार सौ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने स्वतंत्र निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। संवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं जबकि सेक्टर मोबाइल दल लगातार क्षेत्र में गश्त कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मंजीत सिंह चावला ने कई मतदान केंद्रों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। वहीं कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि सभी मतदान केंद्रों पर निर्धारित समय पर मतदान शुरू हुआ और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संचालित की जा रही है। प्रशासन ने मतदाताओं से निर्भय होकर मतदान करने की अपील भी की।

    दतिया उपचुनाव में शुरुआती मतदान प्रतिशत और मतदाताओं के उत्साह ने संकेत दिया है कि लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण अवसर पर जनता अपने अधिकार का उपयोग करने के लिए पूरी तरह जागरूक है। अब सभी की नजर मतदान समाप्त होने के बाद आने वाले नतीजों पर टिकी हुई है जो यह तय करेंगे कि दतिया की जनता ने किस पर अपना भरोसा जताया है।

  • एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, 3 मजबूत सिस्टम एक्टिव, 17 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, 3 मजबूत सिस्टम एक्टिव, 17 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून फिर से पूरी तरह सक्रिय हो गया है। प्रदेश के ऊपर मानसून ट्रफ, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और शियर जोन जैसे तीन मजबूत मौसम सिस्टम सक्रिय हैं। इनके प्रभाव से अगले चार दिनों तक विशेष रूप से मालवा-निमाड़ क्षेत्र सहित कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है।

    मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए उज्जैन और सागर संभाग समेत 17 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। कुछ इलाकों में अगले 24 घंटे के दौरान 4 इंच या उससे अधिक वर्षा होने की संभावना जताई गई है।

    5 जिलों में अति भारी बारिश की चेतावनी
    आईएमडी भोपाल के अनुसार धार, देवास, बुरहानपुर, हरदा और नर्मदापुरम जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जहां अति भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा उज्जैन, शाजापुर, सीहोर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, रायसेन, सागर, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और सिवनी में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सतना सहित प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है।

    2 अगस्त तक बना रहेगा असर
    मौसम विभाग का कहना है कि वर्तमान मानसूनी सिस्टम 2 अगस्त तक सक्रिय रहेंगे। इस दौरान कई जिलों में लगातार तेज बारिश और कुछ स्थानों पर अति भारी वर्षा हो सकती है। बुधवार को रतलाम, बालाघाट, पचमढ़ी और भोपाल समेत कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की गई।

    अब भी सामान्य से 16% कम बारिश
    बारिश का दौर तेज होने के बावजूद प्रदेश में अब तक सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, मध्य प्रदेश में अब तक औसतन 14.1 इंच (359.3 मिमी) बारिश हुई है, जबकि इस समय तक 16.9 इंच (428.9 मिमी) वर्षा होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में फिलहाल करीब 16 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है। क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी मध्य प्रदेश में 15 प्रतिशत और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, अगले कुछ दिनों तक जारी रहने वाले तेज बारिश के दौर से इस कमी में सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • गुरूकुल परम्परा और नवीन तकनीक से गढ़ेंगे भविष्य का मध्य प्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    गुरूकुल परम्परा और नवीन तकनीक से गढ़ेंगे भविष्य का मध्य प्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति इसकी गुरू परम्परा है। जब गुरूकुल के संस्कार आधुनिक विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की अतिरिक्त क्षमता से जुड़ेंगे, तब हमारी ऐसी पीढ़ी तैयार होगी, जो ज्ञान में श्रेष्ठ, चरित्र में उत्कृष्ट और राष्ट्र निर्माण के प्रति एकनिष्ठ होगी। यही विकसित मध्य प्रदेश और विकसित भारत की सबसे बड़ी नींव है। विकसित भारत का सपना आधुनिक शिक्षा और अत्याधुनिक कक्षाओं से ही पूरा होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार देर शाम ‘गुरु पूर्णिमा महोत्सव’ के अवसर पर उज्जैन के माधव विज्ञान महाविद्यालय में आयोजित ‘महर्षि सांदीपनि गुरू पर्व’ समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय हमारी पुरातन गुरूकुल शिक्षा पद्धति का नूतन एवं आधुनिक स्वरूप है। इन विद्यालयों के माध्यम से एक बेहतर कल की ओर बढ़ रहे हैं। इन विद्यालयों से हम अपने लाखों विद्यार्थियों का एक सुनहरा भविष्य गढ़ रहे हैं। उन्होंने शिक्षा, संस्कार, तकनीक और सांस्कृति चेतना के अद्भुत समन्वय का संदेश देकर कहा कि मध्यप्रदेश में विकसित हो रहे सांदीपनि विद्यालय भविष्य के भारत के निर्माण की आधारशिला सिद्ध होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस मौके पर उज्जैन जिले के लिए कुल 587.23 करोड़ रुपये की लागत के विभिन्न श्रेणी के 9 बड़े विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। उन्होंने बीते तीन वर्ष तक बोर्ड परीक्षाओं में लगातार शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम देने वाले 6 प्राचार्यों को सांदीपनि अलंकरण से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा विभाग में नव नियुक्त 7500 प्राथमिक शाला शिक्षकों में से 10 शिक्षकों को प्रतीकात्मक रूप से नियुक्ति पत्र प्रदान किए।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर केंद्रित ‘मिशन बुनियाद’ का शुभारंभ किया। यह मिशन प्रदेश के 8 जिलों के 500 शासकीय स्कूलों में चलाया जाएगा। इसमें कक्षा में 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को एआई से पर्सनली पढ़ाया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘सर्वांग’ एवं ‘श्रीकृष्ण विद्यांजलि’ नामक दो पुस्तिकाओं का विमोचन किया। उन्होंने नेशनल मीन्स कम मेरिट में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का भी सम्मान किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में भव्य गीता भवन बनाने का संकल्प लिया है। आज उज्जैन में गीता भवन का लोकार्पण नागरिकों के लिए कई प्रकार से सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। यह शिक्षा विभाग का गीता भवन है। नगर निगम और उज्जैन विकास प्राधिकरण के भी अलग-अलग गीता भवन बनाए जाएंगे। सिंहस्थ: 2028 की तैयारियों के साथ ही इंदौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन सिटी के विकास कार्य भी निरंतर जारी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सभी विभागों में नई भर्तियों की शुरुआत की है। विगत दो साल में पुलिस विभाग में 18 हजार से अधिक पदों पर भर्ती करने का निर्णय लिया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग में 10 हजार शिक्षकों की भर्ती का काम पूरा हुआ है। आज 3 संभागों के लगभग 1000 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मिले हैं। उन्होंने कहा कि ये शिक्षक महर्षि सांदीपनि के वंशज के रूप में जाने जाएंगे। शिक्षक भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता के भाव से बच्चों को शिक्षित करेंगे।

    उन्होंने कहा कि आज शासकीय विद्यालयों के ऐसे प्राचार्यों को, जिन्होंने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में तीन साल तक शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम दिया है, उन्हें सम्मानित किया गया है। प्रदेश के ऐसे सभी स्कूलों के प्राचार्यों को एक लाख रुपये की सम्मान राशि और प्राध्यापकों के साथ स्कूल में विकास कार्यों के लिए 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इससे स्कूल शिक्षा में और बेहतरी का एक सकारात्मक संदेश जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जबलपुर में एकमात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी है। दूसरी की महती आवश्यकता महसूस हो रही है। इसलिए अब उज्जैन में ही नवीन धनवन्तरी चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। प्रदेश सरकार स्कूल से लेकर विदेशों में पढ़ाई तक हर स्तर पर सहायता करने के लिए तैयार है। मध्य प्रदेश, पूरे देश का इकलौता राज्य है, जो 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को डॉक्टर बनाने के लिए उनकी फीस के रूप में 70 से 80 लाख रुपये तक खर्च कर रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने बच्चों की पढ़ाई के लिए एआई आधारित मिशन बुनियाद अंतर्गत नई शिक्षा योजना की शुरुआत कर दी है। यह प्रदेश की शिक्षा पद्धति में एक नये युग के आरंभ जैसा है।

    उन्होंने कहा कि ‘गुरु पूर्णिमा महोत्सव’ के अवसर पर प्रदेशभर में 60 नए सांदीपनि विद्यालयों की सौगात मिली है। इनमें 39 स्कूल शिक्षा विभाग और 21 जनजातीय कार्य विभाग के हैं। हमारे सर्वसुविधायुक्त सांदीपनि विद्यालय भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का स्मरण कराते हैं। पहले और दूसरे चरण में सांदीपनि विद्यालयों के निर्माण पर हमारी सरकार करीब 25 हजार 500 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्यों के लिए हमारे पास धन की कोई कमी नहीं है। अब निजी स्कूलों के विद्यार्थी भी बड़े पैमाने पर हमारे सांदीपनि विद्यालयों में प्रवेश ले रहे हैं, लेकिन पहले सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक पढ़ चुके विद्यार्थियों को मौका दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अवन्तिका नगरी (उज्जैन) दुनिया की 7 पवित्र नगरियों में से एक है, जहां बाबा महाकाल विराजे हैं। जन्म-मृत्यु सब बाबा महाकाल के हाथों में है। उज्जैन ज्ञान-विज्ञान और इतिहास की धरती है।

    उन्होंने गुरू की महत्ता बताते हुए कहा कि माता-पिता प्रथम गुरू होते है। जीवन में माता-पिता से हम कभी भी ऊऋण नहीं हो सकते हैं। गुरु की महिमा ऐसी है कि उसे भगवान से भी श्रेष्ठ माना गया है। लेकिन सांदीपनि गुरु ने अपने परम शिष्य (भगवान श्रीकृष्ण) को जगतगुरू के रूप में देखा। उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में ही भगवान श्रीकृष्ण को पुस्तकीय ज्ञान से कहीं अधिक यथार्थ कर्मवाद की शिक्षा मिली।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा ज्ञान कदम-कदम पर अपनी परीक्षा मांगता है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से सदैव मनुष्यों को आगे बढ़ने और हिम्मत से काम करने की प्रेरणा देता है। पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवत्गीता के 18वें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने मानव जीवन के रहस्य, प्रकृति प्रेम और योग के महत्व का विस्तार से वर्णन किया है।

  • MP सरकार का बड़ा फैसला: किसानों से 60% मूंग खरीदेगी सरकार, खाद की ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल स्थगित

    MP सरकार का बड़ा फैसला: किसानों से 60% मूंग खरीदेगी सरकार, खाद की ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल स्थगित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन और खाद वितरण व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। किसान प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी जाने वाली मूंग की मात्रा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। साथ ही, किसानों की सुविधा के लिए स्लॉट बुकिंग और उपार्जन की समय-सीमा भी बढ़ा दी गई है। वहीं, खाद वितरण के लिए लागू की गई ई-टोकन व्यवस्था को फिलहाल स्थगित कर उसकी समीक्षा कराने का फैसला लिया गया है।

    कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बैठक के बाद बताया कि भारत सरकार की प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) के तहत कुल उत्पादन का अधिकतम 25 प्रतिशत उपार्जन किए जाने का प्रावधान है। इसी के अनुरूप पहले प्रत्येक पात्र किसान से उसकी उपज का 25 प्रतिशत खरीदने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, किसानों की मांग और व्यावहारिक परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने प्रत्येक पात्र किसान से उसकी मूंग उपज का 60 प्रतिशत तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का निर्णय लिया है।

    उन्होंने बताया कि नर्मदापुरम, हरदा और सीहोर जैसे प्रमुख मूंग उत्पादक जिलों में यह औसतन लगभग तीन क्विंटल प्रति एकड़ के बराबर उपार्जन होगा।

    सरकार ने उपार्जन प्रक्रिया में अधिक से अधिक किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी है। इसी प्रकार, मूंग खरीदी की अंतिम तिथि भी 10 अगस्त के बजाय अब 20 अगस्त निर्धारित की गई है।

    बैठक में किसानों ने खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं भी उठाईं। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है। समिति ई-टोकन प्रणाली की समीक्षा कर सरकार को अपनी अनुशंसाएं देगी, जिनके आधार पर आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि समिति की रिपोर्ट आने तक खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था स्थगित रहेगी और किसानों को पूर्व की व्यवस्था के अनुसार खाद उपलब्ध कराया जाएगा।

    बैठक में सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री कृष्णा गौर सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं किसान प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

    प्रमुख निर्णय

    • प्रत्येक पात्र किसान से मूंग उपज का 25 प्रतिशत के स्थान पर 60 प्रतिशत तक उपार्जन।
    • निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू।
    • स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त।
    • मूंग उपार्जन की अंतिम तिथि 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त।
    • खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल स्थगित।
    • कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति करेगी ई-टोकन प्रणाली की समीक्षा।
    • समिति की अनुशंसा मिलने तक खाद का वितरण पुरानी व्यवस्था के अनुसार जारी रहेगा।

  • मुख्‍यमंत्री बोले- पृथ्वी पर यदि कहीं बाघ इंसानों के सबसे नजदीक रहते हैं तो वह भोपाल है

    मुख्‍यमंत्री बोले- पृथ्वी पर यदि कहीं बाघ इंसानों के सबसे नजदीक रहते हैं तो वह भोपाल है


    बाघों की धरती पर संरक्षण का नया संकल्प: मध्य प्रदेश ने एक हजार टाइगर की ओर बढ़ाए कदम

    भोपाल । देश में सर्वाधिक बाघों वाले राज्य मध्य प्रदेश ने अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर वन्यजीव संरक्षण की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को नए संकल्प के साथ दोहराया। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश बाघ संरक्षण के क्षेत्र में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

    उन्‍होंने कहा, वर्ष 2022 की गणना में 785 बाघों वाला मध्य प्रदेश अब आगामी गणना में एक हजार बाघों के आंकड़े के करीब पहुंचने की उम्मीद कर रहा है। इस अवसर पर रातापानी टाइगर रिजर्व का लोगो जारी किया गया, पेंच एडवांस्ड वॉर्निंग सिस्टम का लोकार्पण हुआ तथा वन्यजीव संरक्षण को मजबूत बनाने वाली अनेक पहलें सामने आईं।

    बाघ संरक्षण में अग्रणी बना मध्य प्रदेश
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश आज देश में बाघ संरक्षण का सबसे मजबूत केंद्र बनकर उभरा है। प्रदेश की वन संपदा, संरक्षित क्षेत्र और वन विभाग के समर्पित प्रयासों ने बाघों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया है। वर्ष 2022 की बाघ गणना में प्रदेश में 785 बाघ दर्ज किए गए थे और वर्तमान प्रयासों को देखते हुए अगली गणना में यह संख्या एक हजार के करीब पहुंचने की संभावना है। उन्होंने इसे वन विभाग, स्थानीय समुदायों और जनभागीदारी की बड़ी उपलब्धि बताया।

    वन्यजीव संरक्षण को नई तकनीक और नई पहचान
    समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और संरक्षण कार्यों के लिए उपलब्ध कराए गए विशेष वाहनों का लोकार्पण किया। उन्होंने रातापानी टाइगर रिजर्व के आधिकारिक लोगो का अनावरण किया तथा पेंच एडवांस्ड वॉर्निंग सिस्टम का शुभारंभ किया। जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण पर आधारित पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया गया। सक्रिय वन्यजीव प्रबंधन से जुड़े वृत्तचित्रों के टीजर जारी कर संरक्षण अभियानों को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।

    प्रकृति संरक्षण भारतीय संस्कृति का मूल विचार
    मुख्यमंत्री ने गुरु पूर्णिमा के अवसर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पर्व अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाली भारतीय परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत सदियों से प्रकृति के प्रति सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना को जीवन का आधार मानता आया है। वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पेड़ों में जीवन होने का विचार भारतीय ज्ञान परंपरा में बहुत पहले से स्वीकार किया गया था। प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण की यही भावना आज भी हमारी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।

    भोपाल के आसपास बाघों की विशेष मौजूदगी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पृथ्वी पर यदि कहीं बाघ मानव आबादी के सबसे निकट सुरक्षित रूप से निवास करते हैं तो वह भोपाल और उसके आसपास का क्षेत्र है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार बाघों के साथ-साथ नदियों में घड़ियालों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रही है। पहले प्रदेश में छोड़े गए घड़ियाल दूसरे राज्यों की ओर चले जाते थे, अब ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं जिससे उनका सुरक्षित संरक्षण मध्य प्रदेश में ही सुनिश्चित हो सके। हाथियों की आवाजाही से होने वाली जनहानि को रोकने के लिए किए गए प्रयासों के भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

    वन विभाग के कार्यों की सराहना
    मुख्यमंत्री ने ओरछा स्थित माता महालक्ष्मी मंदिर की भव्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि शासन के सभी विभाग महत्वपूर्ण हैं, फिर भी वन विभाग के साथ काम करने में उन्हें विशेष संतोष मिलता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार अन्य राज्यों के साथ वन्यजीवों के आदान-प्रदान और संरक्षण सहयोग को भी बढ़ावा दे रही है, जिससे जैव विविधता के संरक्षण को नई गति मिल रही है।

    सम्मानित हुए वन संरक्षण के प्रहरी
    इस अवसर पर वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन ने कहा कि अच्छा जंगल वही है, जहां बाघ, बाघिन और उनके शावक सुरक्षित हों। उन्होंने कहा कि बाघों का संरक्षण प्रकृति, जल स्रोतों और मानव जीवन की सुरक्षा से सीधे जुड़ा है। समारोह में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वन कर्मियों, वन सुरक्षा समितियों, ईको विकास समितियों, ग्राम वन समितियों तथा विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित किया गया।

    इसके अलावा राज्य वन्य प्राणी बोर्ड के पद्मश्री सम्मानित सदस्यों का अभिनंदन भी किया गया। कार्यक्रम में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। समारोह में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • भोपाल में तीसरे दिन गरमाया किसान आंदोलन: पुलिस से टकराव, बैरिकेडिंग पर चढ़े प्रदर्शनकारी, सरकार और विपक्ष आमने-सामने

    भोपाल में तीसरे दिन गरमाया किसान आंदोलन: पुलिस से टकराव, बैरिकेडिंग पर चढ़े प्रदर्शनकारी, सरकार और विपक्ष आमने-सामने


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किसानों का आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी तेज बना रहा। मूंग की सरकारी खरीदी, ई-टोकन व्यवस्था में सुधार, न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और अन्य मांगों को लेकर बड़ी संख्या में किसान मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने के लिए जुटे। हालांकि पुलिस ने एम्प्री के पास वीर सावरकर सेतु पर भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें रोक दिया। प्रशासन ने बसों की चार परतों वाली बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों का रास्ता बंद कर दिया, लेकिन कुछ किसान बैरिकेड पर चढ़ गए और बाद में बसों पर भी चढ़कर विरोध जताया। पुलिस ने समझाइश देकर उन्हें नीचे उतारा जिसके बाद किसान वहीं धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।

    प्रदर्शन के दौरान कई किसानों ने अर्धनग्न होकर विरोध दर्ज कराया और अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाया। कुछ प्रदर्शनकारी सड़क पर लेट गए तो कई किसानों ने सरकार की सद्बुद्धि के लिए हवन और यज्ञ किया। आंदोलन स्थल पर किसानों ने सड़क किनारे ही दाल-बाटी बनाकर भोजन किया। रातभर आंदोलन में डटे रहने के बाद कई किसान वहीं खुले आसमान के नीचे आराम करते भी नजर आए। आंदोलन में युवाओं की भागीदारी भी देखने को मिली और बड़ी संख्या में Gen Z युवाओं ने किसानों के समर्थन में प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

    किसानों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत और महंगाई के बावजूद उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। उनका आरोप है कि मूंग खरीदी की मौजूदा व्यवस्था और ई-टोकन प्रणाली के कारण बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह जाते हैं। प्रदर्शनकारी सरकार से इन समस्याओं का स्थायी समाधान और एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं।

    आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर यातायात रोक दिया। इसका असर होशंगाबाद रोड, नर्मदापुरम रोड और आसपास के इलाकों में देखने को मिला जहां लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति को देखते हुए भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने नर्मदापुरम रोड स्थित सभी सरकारी और निजी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने बताया कि किसानों से संवाद के लिए मंत्रियों की एक समिति बनाई गई है जो आंदोलनकारियों से बातचीत कर उनकी मांगों पर चर्चा करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सकारात्मक सुझावों का स्वागत करती है लेकिन यह भी जरूरी है कि आंदोलन के कारण आम जनता को अनावश्यक परेशानी न हो।

    वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हजारों किसान अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें रोकने में लगी हुई है। उन्होंने किसानों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।

    राजधानी में जारी यह आंदोलन अब केवल किसानों की मांगों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि प्रदेश की राजनीति का भी प्रमुख मुद्दा बन गया है। अब सभी की नजर सरकार और किसान नेताओं के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी है, जिससे इस गतिरोध का समाधान निकलने की उम्मीद की जा रही है।

  • शादी से मना करना पड़ा भारी: दतिया से इंदौर पहुंचा प्रेमी, बैंककर्मी युवती की हत्या कर आग लगाकर हादसा दिखाने की साजिश

    शादी से मना करना पड़ा भारी: दतिया से इंदौर पहुंचा प्रेमी, बैंककर्मी युवती की हत्या कर आग लगाकर हादसा दिखाने की साजिश


    इंदौर । इंदौर में बैंककर्मी युवती की हत्या के मामले में पुलिस ने ऐसा खुलासा किया है जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया है। पांच साल पुराने प्रेम संबंध का अंत बेहद दर्दनाक तरीके से हुआ जब शादी से इनकार करने पर प्रेमी ने अपनी ही प्रेमिका की गला घोंटकर हत्या कर दी और बाद में सबूत मिटाने के लिए शव पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। पुलिस ने आरोपी को दतिया से गिरफ्तार कर लिया है और पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।

    मामला इंदौर के खजराना थाना क्षेत्र के तपेश्वरी बाग का है जहां 26 वर्षीय पलक केशव किराए के कमरे में रहती थीं और एक निजी बैंक में कार्यरत थीं। शनिवार रात उनके कमरे से जला हुआ शव बरामद होने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। शुरुआती जांच में घटना को हादसा मानने की आशंका जताई जा रही थी लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि युवती की मौत आग से नहीं बल्कि दम घुटने के कारण हुई थी जिसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी।

    जांच के दौरान पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और मोबाइल कॉल डिटेल्स का विश्लेषण किया। इससे पता चला कि घटना से एक दिन पहले दतिया निवासी मयंक शाक्य पलक से मिलने उसके कमरे पर आया था। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को दतिया से हिरासत में लिया और पूछताछ में उसने हत्या की बात स्वीकार कर ली।

    पुलिस के अनुसार मयंक और पलक पिछले करीब पांच वर्षों से एक-दूसरे के संपर्क में थे। दोनों के बीच प्रेम संबंध था और मयंक शादी करना चाहता था लेकिन पलक इसके लिए तैयार नहीं थीं। इसी बात को लेकर दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। घटना वाले दिन भी दोनों के बीच इसी मुद्दे पर कहासुनी हुई जो देखते ही देखते हिंसक रूप ले गई। गुस्से में आरोपी ने पलक का गला घोंट दिया जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    हत्या के बाद आरोपी ने अपराध को छिपाने की पूरी कोशिश की। उसने कमरे में पेट्रोल छिड़ककर शव को आग लगा दी ताकि मामला दुर्घटना या आग लगने की घटना जैसा दिखाई दे। इतना ही नहीं उसने किचन का गैस बर्नर भी खुला छोड़ दिया जिससे पुलिस को भ्रमित किया जा सके। हालांकि वैज्ञानिक जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने उसकी पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया।

    जब दो दिन तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला और आसपास के लोगों को संदेह हुआ तो उन्होंने दरवाजा तोड़कर अंदर देखा। कमरे के भीतर जला हुआ शव मिलने के बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने सबूत जुटाए और जांच के बाद हत्या की पुष्टि हुई।

    फिलहाल आरोपी को इंदौर लाकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ते हुए यह भी पता लगाने में जुटी है कि हत्या की योजना पहले से बनाई गई थी या विवाद के दौरान अचानक वारदात को अंजाम दिया गया। इस घटना ने एक बार फिर रिश्तों में बढ़ती हिंसा और अस्वीकार किए जाने की मानसिकता से उपजने वाले गंभीर अपराधों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।