Category: Madhya Pradesh

  • सावन की शुरुआत पर बाबा महाकाल का अद्भुत दर्शन, पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब

    सावन की शुरुआत पर बाबा महाकाल का अद्भुत दर्शन, पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब


    उज्जैन। सावन मास के शुभारंभ के साथ ही विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। गुरुवार तड़के तीन बजे मंदिर के पट खुलते ही भगवान महाकाल की पारंपरिक भस्म आरती का आयोजन हुआ। सावन के पहले ही दिन बाबा महाकाल के दर्शन और भस्म आरती में शामिल होने के लिए देशभर से आए हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में जुटे। पूरा महाकाल धाम हर हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंज उठा।

    नियमों के अनुसार सबसे पहले भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध दही घी शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से विधिवत अभिषेक संपन्न हुआ। अभिषेक के बाद भगवान को भस्म अर्पित की गई और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक परंपरा के अनुसार महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया।

    भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल का भव्य राजा स्वरूप श्रृंगार किया गया। भगवान को भांग चंदन त्रिपुंड रजत चंद्र और सुगंधित गुलाब के पुष्पों से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही रजत मुकुट रजत शेषनाग मुकुट रुद्राक्ष की माला रजत मुंडमाला और आकर्षक पुष्पहार पहनाए गए। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

    भस्म आरती के दौरान गर्भगृह में विराजमान सभी देवी देवताओं का भी विधि विधान से पूजन किया गया। प्रथम घंटा बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया और कपूर आरती के साथ पूजा संपन्न हुई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और इस दिव्य दर्शन का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है।

    सावन के पहले दिन मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। सुबह से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं और प्रशासन की ओर से सुरक्षा तथा व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए गए। मंदिर समिति के अनुसार पूरे सावन माह में लाखों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए दर्शन व्यवस्था सुरक्षा और अन्य सुविधाओं को और अधिक मजबूत किया गया है ताकि भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान महाकाल मंदिर में प्रतिदिन विशेष पूजन अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा। सावन के पहले दिन बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन और भस्म आरती ने श्रद्धालुओं की आस्था को नई ऊर्जा प्रदान की और पूरे महाकाल धाम को शिवमय बना दिया।

  • दतिया उपचुनाव में सुबह 10 बजे तक 16.33% मतदान, वोटिंग को लेकर मतदाताओं में उत्साह

    दतिया उपचुनाव में सुबह 10 बजे तक 16.33% मतदान, वोटिंग को लेकर मतदाताओं में उत्साह

    दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए गुरुवार सुबह 7 बजे से मतदान शांतिपूर्ण माहौल में जारी है। मतदान को लेकर मतदाताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। सुबह 10 बजे तक 16.33 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। ग्रामीण इलाकों सहित कई मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें लगी रहीं। मतदान प्रक्रिया शाम 6 बजे तक जारी रहेगी।

    मतदान शुरू होने से पहले तीन मतदान केंद्रों पर ईवीएम से जुड़े उपकरणों में तकनीकी खराबी सामने आई। मतदान केंद्र क्रमांक 186 पर वीवीपैट, 108 पर बैलेटिंग यूनिट (BU) और 290 पर कंट्रोल यूनिट (CU) में समस्या आने पर मॉक पोल के दौरान सभी एजेंटों और कैमरों की मौजूदगी में उपकरण बदल दिए गए। इसके बाद निर्धारित समय पर मतदान शुरू कराया गया। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि तकनीकी खामी का समय रहते समाधान कर लिया गया था, जिससे मतदान प्रक्रिया प्रभावित नहीं हुई।

    इधर, बसई क्षेत्र के लखनपुर गांव में मुख्य सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने “सड़क नहीं तो वोट नहीं” का नारा लगाते हुए मतदान का बहिष्कार किया। सूचना मिलने पर एसडीएम अशोक अवस्थी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा की। समझाइश के बाद करीब 50 ग्रामीणों ने मतदान किया।

    कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने मतदान करने के बाद अपनी जीत का दावा करते हुए कहा कि जनता भाजपा के अहंकार का जवाब देगी। वहीं भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने मतदान से पहले पीतांबरा पीठ में दर्शन कर प्रदेश और दतिया के विकास, युवाओं को रोजगार तथा भयमुक्त वातावरण की कामना की। इसके बाद उन्होंने मतदान केंद्र क्रमांक 158 पहुंचकर पोलिंग एजेंटों से मुलाकात की और भाजपा के पक्ष में भारी मतदान होने का दावा किया।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र के 291 मतदान केंद्रों पर 2 लाख 20 हजार 400 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मंजीत सिंह चावला ने विभिन्न मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया। वहीं, जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि सभी केंद्रों पर मतदान शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संचालित हो रहा है। इस दौरान पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

  • भोपाल को मिली आधुनिक AC ई-बसों की सौगात, तीन रूटों पर शुरू हुई सेवा, सिर्फ ₹7 से करें आरामदायक सफर

    भोपाल को मिली आधुनिक AC ई-बसों की सौगात, तीन रूटों पर शुरू हुई सेवा, सिर्फ ₹7 से करें आरामदायक सफर


    भोपाल । राजधानी भोपाल की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। शहर की सड़कों पर पहली बार वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू हो गया है। टिकटिंग सॉफ्टवेयर की सफल टेस्टिंग और खाली बसों के ट्रायल रन के बाद गुरुवार सुबह से इन बसों में आम यात्रियों का सफर भी शुरू हो गया। शुरुआती चरण में तीन प्रमुख रूटों पर 10 एसी ई बसें चलाई जा रही हैं। सबसे खास बात यह है कि यात्रियों को एयर कंडीशनर सुविधा का लाभ लेने के लिए कोई अतिरिक्त किराया नहीं देना होगा। न्यूनतम किराया 7 रुपए और अधिकतम 40 रुपए निर्धारित किया गया है जो पहले से संचालित लाल सिटी बसों के बराबर ही है।

    नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन चिरायु हॉस्पिटल से डीबी मॉल मेट्रो स्टेशन होते हुए बैरागढ़ और चिचली तक तथा चिरायु हॉस्पिटल से डीबी मॉल मेट्रो स्टेशन होकर कोच फैक्ट्री तक किया जा रहा है। इसके अलावा कोलार से एमपी नगर के बीच भी तीन बसें चलाई जा रही हैं जिससे शहर के हजारों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

    ई बसों की शुरुआत से उन यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा जो रोजाना सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हैं। कोलार निवासी ममता जोशी ने बताया कि उन्होंने नयापुरा से एमपी नगर तक एसी बस में सफर किया और केवल 17 रुपए किराया लगा। उनके अनुसार सफर पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आरामदायक और सुविधाजनक रहा।

    इन इलेक्ट्रिक बसों में आधुनिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। पहली बार दिव्यांग यात्रियों के लिए हाइड्रोलिक डोर की व्यवस्था की गई है जिससे व्हीलचेयर या ट्राइसाइकिल के साथ आसानी से बस में चढ़ा और उतरा जा सकेगा। बस के भीतर इतनी जगह भी उपलब्ध कराई गई है कि दो व्हीलचेयर एक साथ खड़ी रह सकें। इसके अलावा प्रत्येक बस में छह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जिनकी निगरानी कंट्रोल रूम से की जाएगी ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    भोपाल की ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इन बसों का आकार भी विशेष रूप से तैयार किया गया है। नई इलेक्ट्रिक बसों की लंबाई करीब 9 मीटर है जबकि पुरानी सिटी बसें लगभग 12 मीटर लंबी थीं। कम लंबाई होने के कारण ये बसें संकरी सड़कों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में आसानी से संचालित हो सकेंगी और ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होगी।

    फिलहाल शहर में 30 इलेक्ट्रिक बसें पहुंच चुकी हैं जिनमें से पहले चरण में 10 बसों का संचालन शुरू किया गया है। दूसरे चरण में 10 और बसें सड़कों पर उतरेंगी जबकि 15 अगस्त को प्रदेश स्तरीय लोकार्पण कार्यक्रम के बाद सभी 30 बसें नियमित रूप से यात्रियों के लिए उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही अगले 10 से 12 दिनों में 20 और नई इलेक्ट्रिक बसें भोपाल पहुंचने की संभावना है जिससे शहर का इलेक्ट्रिक बस बेड़ा और मजबूत होगा।

    इन बसों के संचालन के लिए बैरागढ़ डिपो में आधुनिक चार्जिंग स्टेशन तैयार किए गए हैं जहां 11 चार्जिंग पॉइंट स्थापित किए गए हैं। इससे नियमित संचालन के दौरान बसों की चार्जिंग में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। नगर निगम का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के बढ़ते उपयोग से प्रदूषण में कमी आएगी और शहर के लोगों को सुरक्षित आरामदायक तथा पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी।

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोनम ने किया आत्मसमर्पण, अब तेज होगी राजा रघुवंशी हत्याकांड की सुनवाई

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोनम ने किया आत्मसमर्पण, अब तेज होगी राजा रघुवंशी हत्याकांड की सुनवाई


    इंदौर । इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मेघालय के शिलॉन्ग स्थित अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। कोर्ट में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को उसकी जमानत रद्द करते हुए तीन सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया था। निर्धारित समय सीमा पूरी होने से पहले ही सोनम ने अदालत पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया।

    सोनम के सरेंडर के बाद मृतक राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने मेघालय सरकार और जांच एजेंसियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद और मजबूत हुई है।

    इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा था कि हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट ने केवल तकनीकी आधार पर जमानत देकर गलती की थी। अदालत ने माना कि गिरफ्तारी के दौरान कारणों की जानकारी दिए जाने में यदि कोई सीमित कमी रही भी हो तो केवल उसी आधार पर आरोपी को जमानत देना उचित नहीं माना जा सकता।

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारण बताना आवश्यक है लेकिन इस मामले में यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी को पूरी तरह से जानकारी नहीं दी गई थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के आधार बिल्कुल न बताना और कुछ जानकारियों में तकनीकी कमी होना दोनों अलग-अलग परिस्थितियां हैं। इसलिए केवल प्रक्रिया संबंधी आपत्तियों के आधार पर जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

    सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि सोनम ने मजिस्ट्रेट के समक्ष गिरफ्तारी के कारणों और संबंधित दस्तावेज प्राप्त होने की पुष्टि की थी। यदि जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार की कमी भी हो तो कानून जांच एजेंसी को दोबारा कार्रवाई करने का अधिकार देता है। ऐसे में तकनीकी पहलुओं के आधार पर जमानत देना न्यायोचित नहीं माना जा सकता।

    जस्टिस एमएम सुंदरेशन और जस्टिस पीबी वरेले की पीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी है और आरोपी की मेरिट के आधार पर जमानत याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुकी हैं। इस चरण में आरोपी का जेल से बाहर रहना ट्रायल को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण अदालत ने हाईकोर्ट का जमानत आदेश रद्द करते हुए सोनम को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय पुलिस को यह भी निर्देश दिया है कि राजा रघुवंशी हत्याकांड की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में ट्रायल पूरा नहीं होता है तो आरोपी कानून के तहत दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकती है।

    सोनम के आत्मसमर्पण के साथ अब इस बहुचर्चित हत्याकांड की कानूनी प्रक्रिया एक नए चरण में पहुंच गई है। जांच एजेंसियों और पीड़ित परिवार की नजर अब इस बात पर टिकी है कि अदालत में सुनवाई तय समय सीमा के भीतर पूरी हो और मामले में न्यायिक प्रक्रिया जल्द अपने अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचे।

  • बस की टक्कर से ऑटो चालक की मौत करंट लगने से युवक ने तोड़ा दम फूड डिलीवरी बॉय ने उठाया आत्मघाती कदम

    बस की टक्कर से ऑटो चालक की मौत करंट लगने से युवक ने तोड़ा दम फूड डिलीवरी बॉय ने उठाया आत्मघाती कदम


    इंदौर । इंदौर में बुधवार रात और गुरुवार सुबह अलग-अलग इलाकों में हुई तीन दर्दनाक घटनाओं ने शहर को झकझोर दिया। एक ओर सड़क हादसे में ऑटो चालक की मौत हो गई तो दूसरी ओर पानी की मोटर चालू करते समय करंट लगने से एक युवक ने दम तोड़ दिया। वहीं लसूड़िया क्षेत्र में एक फूड डिलीवरी बॉय का शव फंदे पर लटका मिला। पुलिस ने तीनों मामलों में जांच शुरू कर दी है।

    पहली घटना तिलक नगर थाना क्षेत्र की है जहां निजी ट्रेवल्स की बस की टक्कर से 24 वर्षीय राजा गोयल की मौत हो गई। राजा अपने दोस्त मांझी के साथ बाइक से पिपल्याहाना स्थित एक दुकान पर सामान लेने गया था। देर रात लौटते समय तेज रफ्तार बस ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन डॉक्टरों ने राजा को मृत घोषित कर दिया जबकि उसके साथी का इलाज जारी है।

    मृतक राजा शांति नगर मूसाखेड़ी का रहने वाला था और पेशे से ऑटो चालक था। उसके परिवार में पत्नी ढाई साल का बेटा और बड़ा भाई हैं। पुलिस ने हादसे के बाद बस को जब्त कर चालक को हिरासत में ले लिया है। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

    दूसरी घटना आजाद नगर थाना क्षेत्र के इंदिरा एकता नगर की है। यहां 25 वर्षीय वसीम अपने घर में पानी की मोटर चालू कर रहा था। इसी दौरान अचानक उसे तेज करंट लग गया और वह जमीन पर गिर पड़ा। आसपास के लोग और परिजन उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन चिकित्सक उसकी जान नहीं बचा सके।

    वसीम भी ऑटो चालक था और अपने परिवार का मुख्य सहारा माना जाता था। उसके परिवार में दो छोटे बच्चे भाई और बहन हैं। पुलिस ने मामले में आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है और बिजली के करंट लगने की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।

    तीसरी घटना लसूड़िया थाना क्षेत्र की है जहां 22 वर्षीय रजनीश ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। रजनीश मूल रूप से कटनी जिले का रहने वाला था और करीब छह महीने पहले रोजगार की तलाश में इंदौर आया था। वह अपने बड़े भाई शुभम के साथ किराए के मकान में रहकर फूड डिलीवरी का काम करता था।

    बुधवार देर रात जब शुभम काम से वापस घर लौटा तो काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद मकान मालिक की मदद से कमरे का ताला तोड़ा गया। अंदर रजनीश का शव फंदे से लटका मिला। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

    पुलिस ने मृतक का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। ऐसे में आत्महत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस परिजनों और परिचितों से पूछताछ कर सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

    इन तीनों घटनाओं ने अलग-अलग परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। सड़क सुरक्षा बिजली उपकरणों के सुरक्षित उपयोग और मानसिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दे एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। पुलिस ने सभी मामलों में जांच जारी रखते हुए लोगों से सतर्कता बरतने और किसी भी तरह की परेशानी होने पर समय रहते मदद लेने की अपील की है।

  • आर्थिक संकट और मानसिक तनाव ने ली दो जिंदगियां इंदौर में मां बेटे की मौत ने झकझोर दिया पूरा शहर

    आर्थिक संकट और मानसिक तनाव ने ली दो जिंदगियां इंदौर में मां बेटे की मौत ने झकझोर दिया पूरा शहर


    इंदौर । इंदौर के परदेशीपुरा क्षेत्र से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है जहां आर्थिक तंगी और लंबे समय से मानसिक बीमारी से जूझ रहे मां और बेटे ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया था लेकिन इलाज के दौरान पहले बेटे और फिर मां की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है और एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य तथा आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवारों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    पुलिस के अनुसार 62 वर्षीय इंदिरा और उनके 35 वर्षीय बेटे संजय मंगलवार दोपहर अपने घर से करीब 100 मीटर दूर स्थित एक बगीचे में पहुंचे थे। वहीं दोनों ने जहरीला पदार्थ खा लिया। कुछ समय बाद स्थानीय लोगों ने उन्हें बेसुध हालत में देखा और परिजनों को सूचना दी। सूचना मिलते ही दोनों को तत्काल एमवाय अस्पताल पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों ने उनका उपचार शुरू किया। इलाज के दौरान बुधवार शाम संजय ने दम तोड़ दिया जबकि गुरुवार सुबह इंदिरा की भी मौत हो गई।

    परदेशीपुरा थाना पुलिस के मुताबिक प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों ने अपनी इच्छा से जहरीला पदार्थ खाया था। अस्पताल में होश आने पर दिए गए शुरुआती बयान में भी मां और बेटे ने किसी पर आरोप नहीं लगाया और स्वयं जहर खाने की बात स्वीकार की थी। पुलिस अब पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है ताकि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि की जा सके।

    परिजनों ने बताया कि इंदिरा के पति का कई वर्ष पहले निधन हो चुका था। इसके बाद वह अपनी बहन और उनके परिवार के साथ रह रही थीं। परिवार ही उनके रहने खाने और अन्य जरूरतों का पूरा खर्च उठाता था। बेटा संजय भी किसी प्रकार का रोजगार नहीं करता था और लंबे समय से घर पर ही रह रहा था। आर्थिक परेशानियों के साथ दोनों मानसिक बीमारी से भी पीड़ित थे जिसके चलते उनका इलाज बाणगंगा स्थित मानसिक चिकित्सालय में चल रहा था।

    रिश्तेदारों के अनुसार मंगलवार दोपहर एक परिचित ने सूचना दी कि मां और बेटा घर के पास बने बगीचे में बेहोश पड़े हैं। जब परिवार मौके पर पहुंचा तब दोनों की सांसें चल रही थीं। आसपास मौजूद लोगों की मदद से उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों को बचाया नहीं जा सका।

    पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं। मामले में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है और जहरीले पदार्थ के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी तरह की आपराधिक साजिश के संकेत नहीं मिले हैं लेकिन सभी तथ्यों की जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।

    यह घटना समाज के सामने मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक संकट जैसी गंभीर चुनौतियों को भी उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक आर्थिक दबाव और मानसिक बीमारी का समय पर उपचार तथा सामाजिक सहयोग न मिलने पर व्यक्ति गहरे अवसाद में जा सकता है। ऐसे मामलों में परिवार समाज और स्वास्थ्य संस्थाओं की समय पर मदद कई बार बड़ी त्रासदी को टाल सकती है।

  • वृद्धाश्रम में बुजुर्ग महिलाओं पर बरसी हैवानियत नाबालिग ने डंडे से पीटा वीडियो सामने आने के बाद मचा हड़कंप

    वृद्धाश्रम में बुजुर्ग महिलाओं पर बरसी हैवानियत नाबालिग ने डंडे से पीटा वीडियो सामने आने के बाद मचा हड़कंप


    इंदौर । इंदौर के एक वृद्धाश्रम से सामने आया मारपीट का वीडियो लोगों को झकझोर देने वाला है। वीडियो में एक नाबालिग लड़का वृद्ध महिलाओं पर डंडे से हमला करता दिखाई दे रहा है। बीच बचाव करने पहुंची अन्य महिलाओं के साथ भी उसने हाथापाई की। घटना सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन सक्रिय हो गया है तथा मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार नाबालिग की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं बताई जा रही है और इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    घटना शहर के मरीमाता पानी की टंकी के पास स्थित महाराणा प्रताप वेलफेयर सोसाइटी द्वारा संचालित वृद्धाश्रम की है। वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि करीब 14 वर्षीय लड़का हाथ में डंडा लेकर एक बुजुर्ग महिला पर लगातार हमला कर रहा है। जब आश्रम में मौजूद अन्य महिलाएं उसे रोकने की कोशिश करती हैं तो वह उनके साथ भी मारपीट करने लगता है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश फैल गया और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग उठने लगी।

    मामले की जानकारी मिलते ही बाणगंगा थाना पुलिस ने वृद्धाश्रम की संचालिका नीलम दुबे को पूछताछ के लिए थाने बुलाया। पुलिस ने उनसे पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो इसके लिए आवश्यक निर्देश दिए। फिलहाल पुलिस ने संचालिका को समझाइश देकर छोड़ दिया है जबकि पूरे मामले की जांच जारी है।

    एसीपी रुबीना मिजवानी के अनुसार पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि नाबालिग करीब पांच महीने पहले अपनी मां के साथ वृद्धाश्रम में रहने आया था। उसकी मां गंभीर रूप से झुलस गई थीं और कुछ समय बाद उनकी मृत्यु हो गई। मां के निधन के बाद से लड़का वहीं रह रहा था। पुलिस के अनुसार बुधवार को किसी बात को लेकर उसका एक बुजुर्ग महिला से विवाद हो गया जिसके बाद उसने गुस्से में डंडा उठाकर हमला कर दिया। वीडियो में यह भी दिखाई दे रहा है कि बीच बचाव करने वाले लोगों के साथ भी उसने आक्रामक व्यवहार किया।

    पुलिस का कहना है कि बच्चे की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं होने की जानकारी मिली है इसलिए उसके साथ संवेदनशील तरीके से कार्रवाई की जाएगी। सबसे पहले उसकी विशेषज्ञों द्वारा काउंसलिंग कराई जाएगी ताकि उसकी मानसिक और भावनात्मक स्थिति का सही आकलन किया जा सके। इसके साथ ही वृद्धाश्रम प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि उसे तत्काल बुजुर्गों से अलग रखा जाए ताकि किसी अन्य व्यक्ति की सुरक्षा को खतरा न हो।

    प्रशासन ने यह भी निर्णय लिया है कि नाबालिग को वृद्धाश्रम से हटाकर बाल संरक्षण से जुड़ी संस्था के सुपुर्द किया जाएगा जहां उसकी उचित देखभाल इलाज और काउंसलिंग की व्यवस्था की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि उसकी परिस्थितियों और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास की दिशा में काम करना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    इस घटना ने वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक संगठनों का कहना है कि ऐसे संस्थानों में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की नियमित निगरानी मानसिक स्वास्थ्य की जांच और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि बुजुर्ग सुरक्षित वातावरण में अपना जीवन व्यतीत कर सकें। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और वीडियो के आधार पर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

  • मूंग खरीदी विवाद ने बढ़ाई सियासी हलचल किसानों ने पूछा मुख्यमंत्री रहते बढ़ा कोटा अब कृषि मंत्री बनकर क्यों नहीं मिली राहत

    मूंग खरीदी विवाद ने बढ़ाई सियासी हलचल किसानों ने पूछा मुख्यमंत्री रहते बढ़ा कोटा अब कृषि मंत्री बनकर क्यों नहीं मिली राहत


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन भले ही फिलहाल समाप्त हो गया हो लेकिन इसके बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवालों का सिलसिला तेज हो गया है। प्रदेश के किसान अब यह जानना चाहते हैं कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और केंद्रीय कृषि मंत्री भी मध्य प्रदेश से ही आते हैं तो फिर समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का कोटा बढ़ाने में देरी क्यों हुई। किसानों का कहना है कि इसी मुद्दे को लेकर उन्हें तीन दिन तक राजधानी भोपाल में आंदोलन करना पड़ा जबकि समय रहते फैसला लिया जाता तो इस स्थिति से बचा जा सकता था।

    दरअसल मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र से समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का कोटा 4.54 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 8.06 लाख मीट्रिक टन करने का अनुरोध किया था। हालांकि केंद्र से अतिरिक्त कोटे की मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर पात्र किसानों से 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी करने का निर्णय लिया और आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश की।

    किसान संगठनों का आरोप है कि पहले भी ऐसे हालात बनते रहे हैं लेकिन उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केंद्र से बातचीत कर प्रदेश के लिए खरीदी का कोटा बढ़वाने में सफल रहते थे। इस बार ऐसा नहीं होने से किसानों में नाराजगी बढ़ी है। किसान स्वराज संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर मूंग उत्पादन होता है लेकिन खरीदी की सीमा तय होने के कारण किसानों को अपनी उपज का बड़ा हिस्सा खुले बाजार में कम कीमत पर बेचना पड़ता है जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

    भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों का असर किसानों पर नहीं पड़ना चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान निकाल लिया जाता तो किसानों को आंदोलन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। किसान संगठनों ने यह भी कहा कि सरकारों को राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर किसानों के हित में निर्णय लेने चाहिए।

    किसानों की नाराजगी के पीछे आर्थिक कारण भी हैं। इस वर्ष मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8768 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है जबकि खुले बाजार में किसानों को लगभग 5500 रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। शुरुआत में प्रति एकड़ केवल 1.20 क्विंटल मूंग ही समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही थी जबकि शेष उपज बाजार में कम दाम पर बेचनी पड़ रही थी। इससे प्रति एकड़ किसानों की आय में हजारों रुपए का अंतर आ रहा था और बड़े किसानों को लाखों रुपए तक का नुकसान होने की आशंका थी।

    इस पूरे विवाद के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश सरकार को भेजे अपने पत्र में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री आशा योजना के नियमों के अनुसार केंद्र अधिकतम 25 प्रतिशत उत्पादन ही समर्थन मूल्य पर खरीद सकता है। इसी आधार पर मध्य प्रदेश के लिए 4 लाख 54 हजार 580 मीट्रिक टन मूंग खरीदी की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में स्वीकृत कुल खरीदी का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा अकेले मध्य प्रदेश को दिया गया है जो किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे अधिक है।

    हालांकि प्रदेश सरकार का तर्क है कि मध्य प्रदेश देश में सबसे अधिक मूंग उत्पादन और खरीदी करने वाला राज्य है इसलिए अन्य राज्यों में उपयोग नहीं हो रहे कोटे का हिस्सा मध्य प्रदेश को दिया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके। फिलहाल सरकार द्वारा 60 प्रतिशत खरीदी की घोषणा के बाद आंदोलन थम गया है लेकिन किसानों का कहना है कि जब तक पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं जाएगी तब तक यह मुद्दा पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाएगा।

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    MadhyaPradesh, MoongProcurement, FarmersProtest, ShivrajSinghChouhan, MSP मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन भले ही फिलहाल समाप्त हो गया हो लेकिन इसके बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवालों का सिलसिला तेज हो गया है। प्रदेश के किसान अब यह जानना चाहते हैं कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और केंद्रीय कृषि मंत्री भी मध्य प्रदेश से ही आते हैं तो फिर समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का कोटा बढ़ाने में देरी क्यों हुई। किसानों का कहना है कि इसी मुद्दे को लेकर उन्हें तीन दिन तक राजधानी भोपाल में आंदोलन करना पड़ा जबकि समय रहते फैसला लिया जाता तो इस स्थिति से बचा जा सकता था।

    दरअसल मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र से समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का कोटा 4.54 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 8.06 लाख मीट्रिक टन करने का अनुरोध किया था। हालांकि केंद्र से अतिरिक्त कोटे की मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर पात्र किसानों से 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी करने का निर्णय लिया और आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश की।

    किसान संगठनों का आरोप है कि पहले भी ऐसे हालात बनते रहे हैं लेकिन उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केंद्र से बातचीत कर प्रदेश के लिए खरीदी का कोटा बढ़वाने में सफल रहते थे। इस बार ऐसा नहीं होने से किसानों में नाराजगी बढ़ी है। किसान स्वराज संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर मूंग उत्पादन होता है लेकिन खरीदी की सीमा तय होने के कारण किसानों को अपनी उपज का बड़ा हिस्सा खुले बाजार में कम कीमत पर बेचना पड़ता है जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

    भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों का असर किसानों पर नहीं पड़ना चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान निकाल लिया जाता तो किसानों को आंदोलन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। किसान संगठनों ने यह भी कहा कि सरकारों को राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर किसानों के हित में निर्णय लेने चाहिए।

    किसानों की नाराजगी के पीछे आर्थिक कारण भी हैं। इस वर्ष मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8768 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है जबकि खुले बाजार में किसानों को लगभग 5500 रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। शुरुआत में प्रति एकड़ केवल 1.20 क्विंटल मूंग ही समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही थी जबकि शेष उपज बाजार में कम दाम पर बेचनी पड़ रही थी। इससे प्रति एकड़ किसानों की आय में हजारों रुपए का अंतर आ रहा था और बड़े किसानों को लाखों रुपए तक का नुकसान होने की आशंका थी।

    इस पूरे विवाद के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश सरकार को भेजे अपने पत्र में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री आशा योजना के नियमों के अनुसार केंद्र अधिकतम 25 प्रतिशत उत्पादन ही समर्थन मूल्य पर खरीद सकता है। इसी आधार पर मध्य प्रदेश के लिए 4 लाख 54 हजार 580 मीट्रिक टन मूंग खरीदी की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में स्वीकृत कुल खरीदी का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा अकेले मध्य प्रदेश को दिया गया है जो किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे अधिक है।

    हालांकि प्रदेश सरकार का तर्क है कि मध्य प्रदेश देश में सबसे अधिक मूंग उत्पादन और खरीदी करने वाला राज्य है इसलिए अन्य राज्यों में उपयोग नहीं हो रहे कोटे का हिस्सा मध्य प्रदेश को दिया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके। फिलहाल सरकार द्वारा 60 प्रतिशत खरीदी की घोषणा के बाद आंदोलन थम गया है लेकिन किसानों का कहना है कि जब तक पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं जाएगी तब तक यह मुद्दा पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाएगा।

  • मूंग खरीदी को लेकर किसानों का शक्ति प्रदर्शन भोपाल की सड़कें हुईं जाम सरकार ने 60 प्रतिशत खरीदी का किया ऐलान

    मूंग खरीदी को लेकर किसानों का शक्ति प्रदर्शन भोपाल की सड़कें हुईं जाम सरकार ने 60 प्रतिशत खरीदी का किया ऐलान


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल बुधवार को किसानों के बड़े आंदोलन का केंद्र बनी रही। मूंग की शत प्रतिशत समर्थन मूल्य पर खरीदी और खाद वितरण में लागू ई टोकन व्यवस्था समाप्त करने जैसी मांगों को लेकर नर्मदापुरम संभाग से पैदल पहुंचे हजारों किसान राजधानी की सड़कों पर डटे रहे। आंदोलन के कारण शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई और कई प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग गया। दिनभर चले प्रदर्शन और सरकार के साथ बातचीत के बाद देर रात सरकार ने किसानों की प्रमुख मांगों पर सहमति जताई जिसके बाद आंदोलन धीरे धीरे समाप्त होने लगा और किसानों ने सड़कें खाली करना शुरू कर दीं।

    किसानों का कहना था कि मूंग की पूरी फसल समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए ताकि उन्हें बाजार में कम कीमत पर उपज बेचने की मजबूरी न हो। इसके अलावा खाद वितरण में लागू ई टोकन व्यवस्था को भी समाप्त करने की मांग उठाई गई। किसानों का आरोप था कि मौजूदा व्यवस्था के कारण समय पर खाद नहीं मिल पाती जिससे खेती प्रभावित होती है और उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

    आंदोलन के दौरान किसानों ने राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर डेरा डाल दिया। बाणगंगा चौराहे समेत कई स्थानों पर किसान देर रात तक जमे रहे। सरकार की ओर से मांगें स्वीकार करने की घोषणा के बाद भी प्रदर्शनकारी तत्काल हटने को तैयार नहीं हुए और लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही वापस लौटने की प्रक्रिया शुरू की।

    प्रदर्शन के दौरान किसानों और पुलिस के बीच धक्का मुक्की की स्थिति भी बनी। कुछ किसानों के कपड़े फट गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारी पहले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास पहुंचे जहां उन्होंने जोरदार नारेबाजी की। इसके बाद उनका जत्था मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ा। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए रोशनपुरा चौराहे से मुख्यमंत्री निवास तक भारी पुलिस बल तैनात किया गया। कई स्थानों पर बसों और डंपरों से बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद किए गए ताकि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

    आंदोलन के दौरान किसानों ने विरोध दर्ज कराने के लिए अलग अलग तरीके अपनाए। कुछ किसानों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया जबकि कई प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर ही दाल बाटी बनाकर भोजन तैयार किया। किसानों के समर्थन में बड़ी संख्या में युवा भी पहुंचे जिन्होंने सरकार को सद्बुद्धि देने की कामना करते हुए हवन किया। इस पूरे घटनाक्रम ने राजधानी का सामान्य जनजीवन प्रभावित कर दिया और लोगों को घंटों ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा।

    सरकार ने देर रात जारी बयान में किसानों की कई मांगें स्वीकार करने की घोषणा की। कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि प्रदेश सरकार अब 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी करेगी। नर्मदापुरम सीहोर और हरदा जैसे प्रमुख उत्पादक जिलों में लगभग तीन क्विंटल प्रति एकड़ मूंग खरीदी जाएगी। इसके साथ ही स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी गई है जबकि समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी की अंतिम तिथि 20 अगस्त निर्धारित की गई है। सरकार ने किसानों से आंदोलन समाप्त कर अपने घर लौटने की अपील भी की।

    सरकार की घोषणा के बाद अधिकांश किसानों ने देर रात वापस लौटना शुरू कर दिया और राजधानी की सड़कों पर यातायात धीरे धीरे सामान्य होने लगा। हालांकि किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि घोषित फैसलों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ तो भविष्य में आंदोलन फिर से तेज किया जाएगा।

  • शव यात्रा से सियासी संदेश तक एमपी की राजनीति में एक दिन में दिखे कई रंग बिजली संकट पर बवाल जलभराव पर टकराव और विजयवर्गीय के गीत के चर्चे

    शव यात्रा से सियासी संदेश तक एमपी की राजनीति में एक दिन में दिखे कई रंग बिजली संकट पर बवाल जलभराव पर टकराव और विजयवर्गीय के गीत के चर्चे

    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में गुरुवार को राजनीति प्रशासन और जनआक्रोश से जुड़ी कई घटनाओं ने पूरे दिन सुर्खियां बटोरीं। कहीं बिजली कटौती से परेशान लोगों ने ऊर्जा मंत्री के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया तो कहीं बारिश के बाद जलभराव को लेकर महापौर और नगर निगम कमिश्नर आमने सामने आ गए। वहीं कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक भावुक गीत भी राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया।

    शिवपुरी जिले के सिरसौद क्षेत्र में लंबे समय से बिजली कटौती से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब उन्होंने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाल दी। ग्रामीणों ने पहले मंत्री की प्रतीकात्मक अर्थी बनाई फिर उसके पास बैठकर मातम मनाया और बाद में अंतिम यात्रा निकालकर प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बिजली संकट को लेकर कई बार अधिकारियों और मंत्री तक शिकायत पहुंचाई गई लेकिन केवल आश्वासन मिले जबकि हालात जस के तस बने रहे। नाराज लोगों ने कहा कि जब समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो विरोध का यह तरीका अपनाना पड़ा।

    प्रद्युम्न सिंह तोमर अक्सर सफाई अभियान निरीक्षण और जनसंपर्क जैसे कार्यक्रमों को लेकर चर्चा में रहते हैं लेकिन इस बार विरोध प्रदर्शन ने बिजली व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बिजली व्यवस्था सुधारने पर उतना ही ध्यान दिया जाता जितना प्रचार और जनसंपर्क पर दिया जाता है तो शायद ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।

    उधर मुरैना में बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई। हालात का जायजा लेने पहुंचीं महापौर शारदा सोलंकी ने नगर निगम की तैयारियों पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों से पूछा कि बारिश से पहले नालों की सफाई क्यों नहीं कराई गई। निरीक्षण के दौरान महापौर और नगर निगम कमिश्नर के बीच तीखी बहस भी हुई। बताया गया कि कमिश्नर ने अपने तरीके से काम करने की बात कही जिस पर महापौर ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि यदि प्रशासन जनप्रतिनिधियों की बात नहीं मानेगा तो इसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की तैयारियों और प्रशासनिक समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए।

    इधर इंदौर में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया जिसमें वह जाने कहां गए वो दिन गीत गाते नजर आए। विजयवर्गीय पहले भी कई बार अपनी गायकी का शौक दिखा चुके हैं लेकिन इस बार उनके गीत को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हाल ही में उन्होंने एक कार्यक्रम में भाजपा संगठन के कुछ नेताओं के अच्छे समय का जिक्र करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा था कि शायद उनका भी अच्छा समय आ जाए। इसके बाद अब उनके गीत को भी उसी बयान से जोड़कर देखा जा रहा है हालांकि मंत्री की ओर से इस पर कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं की गई है।

    इसी बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज रही कि हाल ही में राजधानी भोपाल में हुए मूंग खरीदी आंदोलन के पीछे एक पूर्व मंत्री की रणनीति काम कर रही थी। हालांकि इस संबंध में किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

    इन घटनाओं ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में जनता की मूलभूत समस्याएं प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक गतिविधियां लगातार चर्चा के केंद्र में बनी हुई हैं।