Category: Madhya Pradesh

  • भोजशाला केस में मुस्लिम पक्ष की नई दलील… कहा- खिलजी के हमले में मंदिर तोड़ने के सबूत नहीं

    भोजशाला केस में मुस्लिम पक्ष की नई दलील… कहा- खिलजी के हमले में मंदिर तोड़ने के सबूत नहीं


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) में गुरुवार को मुस्लिम पक्ष (Muslim side) ने दलील दी कि भोजशाला परिसर (Bhojshala Complex) में सरस्वती मंदिर (Saraswati Temple) होने और अलाउद्दीन खिलजी की फौज के हमले में इसे गिरा कर मस्जिद बनाने का कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है। याचिकाकर्ता ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ ने हाई कोर्ट में दावा किया है कि भोजशाला परमार राजवंश के राजा भोज की ओर से साल 1034 में स्थापित सरस्वती मंदिर है। इसे मालवा क्षेत्र पर अलाउद्दीन खिलजी की फौज के हमले के दौरान 1305 में ढहाया गया था।

    संगठन ने यह दावा भी किया है कि विवादित परिसर में मस्जिद बनाने के लिए मंदिर के अवशेषों का पुनः उपयोग किया गया था। सुनवाई के दौरान धार की मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के वकील तौसीफ वारसी ने इंदौर पीठ के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी के समक्ष विस्तृत दलीलें पेश कीं।

    वारसी ने विभिन्न इतिहासकारों और अभिलेखीय स्रोतों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि 14वीं सदी की शुरुआत में अलाउद्दीन खिलजी की फौज के हमले के दौरान धार में किसी सरस्वती मंदिर को तोड़े जाने का कोई भी दस्तावेजी सबूत मौजूद नहीं है।


    खिलजी की जीत दर्ज लेकिन मंदिर तोड़ने का जिक्र नहीं

    मुस्लिम पक्ष के वकील ने वीडी महाजन, आरसी मजूमदार और अन्य देशी-विदेशी इतिहासकारों की पुस्तकों का हवाला देते हुए कहा कि खिलजी की फौज द्वारा 1305 के दौरान मालवा में जीत हासिल करना इतिहास में दर्ज है, लेकिन इनमें से कोई भी स्रोत इस सैन्य अभियान के दौरान किसी मंदिर को तोड़े जाने या किसी इमारत को मस्जिद में बदले जाने का उल्लेख नहीं करता।


    ब्रिटिश म्यूजियम में देवी अम्बिका की मूर्ति

    इतिहासकारों के अनुसार, 1305 में मालवा पर आक्रमण का नेतृत्व खिलजी के सेनापति और प्रशासक ऐन-उल-मुल्क मुल्तानी ने किया था। वारसी ने 2003 में ब्रिटिश उच्चायोग की ओर से मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री को भेजे कथित पत्र का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जिस मूर्ति को हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता भोजशाला की वाग्देवी (देवी सरस्वती) की प्रतिमा बता रहे हैं, वह जैन समुदाय की देवी अम्बिका की मूर्ति है।


    ASI के अलग-अलग जवाब

    वारसी ने ASI की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हुए यह भी कहा कि इस विभाग ने भोजशाला की धार्मिक प्रकृति को लेकर अलग-अलग मामलों में अलग-अलग जवाब दिए हैं। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की 2019 में दायर जनहित याचिका पर एएसआई का जवाब, ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ और कुलदीप तिवारी की 2022 में अलग-अलग पेश दो जनहित याचिकाओं पर दिए गए जवाब से अलग है।


    अब ASI की वीडियोग्राफी पर अलग-अलग दलीलें

    हाई कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 4 मई की तारीख तय की है। इस दिन मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से भोजशाला परिसर में एएसआई की वीडियोग्राफी के संबंध में दलीलें रखी जाएंगी। हाईकोर्ट इस स्मारक के धार्मिक स्वरूप को लेकर दायर चार याचिकाओं और एक रिट अपील पर 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रहा है। भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर एएसआई द्वारा संरक्षित है।

  • एमपी में तेज गर्मी के बीच मौसम ने बदली करवट, 17 जिलों में आज बारिश-ओले की चेतावनी

    एमपी में तेज गर्मी के बीच मौसम ने बदली करवट, 17 जिलों में आज बारिश-ओले की चेतावनी

    भोपाल। मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच अब मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रदेश में बारिश, ओले और तेज आंधी का दौर शुरू हो गया है। गुरुवार को भोपाल और ग्वालियर सहित 15 से अधिक जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश हुई, जबकि उमरिया और मुरैना में ओलावृष्टि भी दर्ज की गई।

    मौसम विभाग (IMD) ने शुक्रवार के लिए ग्वालियर समेत 17 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है। गुरुवार को सुबह से लेकर देर रात तक कई जिलों में मौसम बदला रहा। भोपाल, ग्वालियर, सतना, श्योपुर, टीकमगढ़, रायसेन, बालाघाट, छतरपुर, मुरैना, सागर, पन्ना, मैहर, उमरिया और रीवा में कहीं तेज आंधी-बारिश तो कहीं ओले गिरे। राजधानी भोपाल में तेज हवाओं के कारण कोलार रोड सहित कई इलाकों में पेड़ उखड़ गए। देर रात तक प्रदेशभर में मौसम का यही बदला हुआ रुख बना रहा।

    आज इन जिलों में बारिश के आसार
    शुक्रवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, सिवनी और बालाघाट में आंधी-बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, रीवा, मऊगंज, सतना, मैहर, पन्ना, कटनी, दमोह, जबलपुर, सागर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में फिलहाल गर्मी का असर बना रहेगा। हालांकि, शाम के समय कुछ इलाकों में तेज हवाएं चल सकती हैं।

    मई की शुरुआत में बदला ट्रेंड
    आमतौर पर मई में तेज गर्मी पड़ती है, लेकिन इस बार महीने के शुरुआती चार दिनों तक आंधी-बारिश का असर देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के अनुसार, 2 मई से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो रहा है, जिसका प्रभाव मध्य प्रदेश के मौसम पर भी पड़ सकता है।

  • MP: जबलपुर के बरगी डैम में डूबा पर्यटकों से भरा क्रूज…. 6 शव बरामद, रेस्क्यू जारी

    MP: जबलपुर के बरगी डैम में डूबा पर्यटकों से भरा क्रूज…. 6 शव बरामद, रेस्क्यू जारी


    जबलपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के जबलपुर (Jabalpur) के प्रमुख पर्यटन स्थल बरगी डैम (Bargi Dam) से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां नर्मदा नदी (Narmada River) के बैकवाटर में पर्यटकों से भरा एक क्रूज अचानक डूब गया. हादसे के वक्त क्रूज पर करीब 30 लोग सवार बताए जा रहे हैं।

    जब क्रूज नर्मदा के गहरे बैकवाटर में था, तभी अचानक मौसम बदला और तेज हवाएं चलने लगीं. पानी की ऊंची लहरों और तेज हवा के दबाव के कारण क्रूज अपना संतुलन खो बैठा और देखते ही देखते पानी में समा गया।

    हादसे के तुरंत बाद स्थानीय नाविकों और प्रशासन ने बचाव कार्य शुरू किया. अब तक करीब 15 लोगों को सुरक्षित पानी से बाहर निकाल लिया गया है। राहत और बचाव दल ने 6 शव बरामद किए हैं. अभी भी कुछ लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए गोताखोर और SDRF की टीमें जुटी हुई हैं।

    हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं. घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अचानक आए तूफान की वजह से क्रूज चालक को संभलने का मौका नहीं मिला. फिलहाल प्राथमिकता लापता लोगों को जल्द से जल्द ढूंढने की है।

    CM मोहन यादव की हादसे पर नजर

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस हादसे को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया. सूबे के मुखिया ने लिखा, ”आज जबलपुर में तेज आंधी-तूफान के कारण बरगी डैम में हुए दुखद क्रूज हादसे को लेकर स्थानीय प्रशासन एवं रेस्क्यू फोर्स का ऑपरेशन लगातार जारी है। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह , पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी , संभाग प्रभारी एसीएस, एडीजी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। त्वरित बचाव कार्य से 15 नागरिकों को सकुशल बचा लिया गया है. जो लापता हैं, उन्हें जल्द से जल्द ढूंढने का प्रयास किया जा रहा है। संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार पूर्ण संवेदनशीलता के साथ प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और हर संभव सहायता सुनिश्चित की जा रही है।


    4-4 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि इस हादसे में जो जनहानि हुई है, वह अत्यंत पीड़ादायक है. शोकाकुल परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं. मृतकों के परिवारजनों को राज्य शासन की ओर से 4-4 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।


    29 यात्रियों के टिकट किए गए थे जारी

    सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि बरगी बांध में क्रूज में कुल 29 यात्रियों के टिकट जारी किए गए थे. इनमें से 15 व्यक्तियों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 6 व्यक्तियों की मृत्यु की पुष्टि हुई है. शेष व्यक्तियों की तलाश एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है घटनास्थल पर जबलपुर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के साथ SDRF समेत अन्य बचाव दल मौजूद हैं और राहत व बचाव कार्य सतत रूप से संचालित किए जा रहे हैं।


    प्रशासन की लापरवाही उजागर

    बरगी डैम हादसे में प्रशासन की लापरवाही उजागर हुई है. दरअसल, मौसम विभाग ने जबलपुर में तेज हवाओं के चलने का येलो अलर्ट जारी किया था. 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाओं के चलने का अलर्ट था. इसके बावजूद नर्मदा नदी में क्रूज चलाने दिया गया. क्रूज जब नर्मदा नदी में था तब भी तेज हवायें चल रही थीं, इसके बावजूद क्रूज का संचालन जारी रहा. यही हादसे का कारण बना।


    लापता लोगों की तलाश जारी: मंत्री

    घटनास्थल पर पहुंचे BJP सरकार के मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि कलेक्टर समेत स्थानीय प्रशासन से चर्चा कर राहत और बचाव कार्य संबंधी आवश्यक निर्देश दिए हैं. एसडीआरएफ की टीम भी रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए मौके पर पहुंच चुकी है. इस मुश्किल घड़ी में हम सभी प्रभावित परिजनों के साथ हैं।


    कांग्रेस ने BJP सरकार को घेरा

    इस घटना के बाद मध्य प्रदेश में राजनीति तेज हो गई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, ”जबलपुर के बर्गी डैम में क्रूज पलटने से 4 लोगों की मौत की खबर बेहद दुखद और हृदयविदारक है. यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है. जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. मैं ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं, शोकाकुल परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।


    23 को बचाया, लापता का कोई सटीक आंकड़ा नहीं: IG

    बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे पर जानकारी देते हुए जबलपुर संभाग के आईजी प्रमोद वर्मा ने बताया कि अब तक कुल 23 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 4 शव बरामद हुए हैं. लापता लोगों का अभी कोई सटीक आंकड़ा सामने नहीं आया है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि 10 से 12 लोग अभी भी लापता हो सकते हैं।

    हैदराबाद से एक विशेष टीम जबलपुर पहुंच रही है, जिसके पास रात के अंधेरे में भी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं. भोपाल से भी एक टीम रात 10:30 बजे तक मौके पर पहुंच जाएगी. इसके अतिरिक्त, सेना की एक टुकड़ी भी बुलाई गई है ताकि बचाव कार्य रात भर जारी रखा जा सके।

    आईजी ने बताया कि रेस्क्यू टीम ने क्रूज के मलबे को काटकर एक व्यक्ति को जिंदा बाहर निकाला है. वर्तमान में SDRF और होमगार्ड की टीमें मौके पर तैनात हैं, वहीं NDRF की टीम भी जल्द पहुंचने वाली है. बचाए गए 22 लोगों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है और वे खतरे से बाहर हैं।

  • शुजालपुर से सीएम का ऐलान, किसानों को मिलेगा पूरा हक और संस्कृति रहेगी जीवंत

    शुजालपुर से सीएम का ऐलान, किसानों को मिलेगा पूरा हक और संस्कृति रहेगी जीवंत


    भोपाल । सीएम मोहन यादव ने कहा है कि जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही आत्मा की शुद्धि के लिए भक्ति और सत्संग आवश्यक है उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में धर्म और संस्कृति की धारा को निरंतर प्रवाहित रखने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है

    मुख्यमंत्री शुजालपुर के हाटकेश्वर धाम सेमली घाट में Pandit Kamal Kishor Nagar द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए जहां उन्होंने समाज को अध्यात्म और संस्कारों से जोड़ने पर जोर दिया उन्होंने कहा कि संत समाज ने हमेशा समाज को दिशा देने का काम किया है और नागर जी द्वारा संचालित गौसेवा और नशा मुक्ति अभियान का व्यापक प्रभाव समाज में दिखाई दे रहा है

    मुख्यमंत्री ने किसानों के योगदान को सराहते हुए कहा कि प्रदेश के किसानों ने अपनी मेहनत से गेहूं उत्पादन को दोगुना कर दिया है उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार किसानों के साथ खड़ी है और उनकी उपज का एक एक दाना खरीदा जाएगा राज्य सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के साथ 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस भी दिया जा रहा है जिससे किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ मिल रहा है

    उन्होंने बताया कि प्रदेश में गेहूं उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े मुख्यमंत्री ने इससे पहले शाजापुर जिले के शुजालपुर में उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया

    सीएम यादव ने अपने संबोधन में कहा कि संतानें केवल परिवार की पहचान नहीं बल्कि संस्कारों की धरोहर होती हैं यदि संतान संस्कारित हो तो उसमें ब्रह्मा विष्णु और महेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी आने वाली पीढ़ी को शिक्षा और संस्कार दोनों दें

    भारतीय संस्कृति को त्याग और दान की संस्कृति बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की कथा हमें सिखाती है कि जीवन में प्रेम सबसे बड़ा होता है उन्होंने कहा कि राज्य सरकार धार्मिक स्थलों के विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है और उज्जैन के पास जानापाव तथा सांदीपनि आश्रम सहित भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े सभी स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि Kashi Vishwanath Temple में स्थापित वैदिक घड़ी भारतीय संस्कृति की विरासत को आगे बढ़ाने का प्रतीक है जिसका हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने अवलोकन किया उन्होंने कहा कि प्रदेश में नई गोशालाएं बनाई जा रही हैं और उन्हें आधुनिक सुविधाओं से युक्त किया जा रहा है ताकि गौ संरक्षण के साथ किसानों की आय भी बढ़ाई जा सके

    कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा तभी संस्कृति और विकास दोनों का संतुलन बना रहेगा

  • खिड़की तोड़ भागीं नाबालिग, अब खुला बड़ा राज: एक फोन कॉल ने बढ़ाई पुलिस की चिंता

    खिड़की तोड़ भागीं नाबालिग, अब खुला बड़ा राज: एक फोन कॉल ने बढ़ाई पुलिस की चिंता


    सतना । सतना के वन स्टॉप सेंटर से तीन नाबालिग लड़कियों के फरार होने के मामले में अब जांच ने एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। शुरुआती तौर पर इसे केवल सुरक्षा में चूक माना जा रहा था, लेकिन अब सामने आए एक रहस्यमयी फोन कॉल ने पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध बना दिया है। पुलिस को शक है कि इस फरारी के पीछे किसी बाहरी व्यक्ति की मदद हो सकती है।

    जानकारी के मुताबिक, खिड़की तोड़कर भागने के कई घंटे बाद सोमवार रात करीब 9 बजे एक लड़की ने सतना रेलवे स्टेशन से अपने चाचा को फोन किया। फोन पर उसने सिर्फ इतना कहा कि वह देहरादून जा रही है। यह कॉल जैसे ही खत्म हुआ, मामला और उलझ गया। परिजनों ने तुरंत इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों और पुलिस को दी, लेकिन जब पुलिस ने उसी नंबर पर दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, तो मोबाइल बंद मिला।

    इस एक कॉल ने पुलिस की जांच की दिशा बदल दी। साइबर सेल की मदद से उस नंबर को सर्विलांस पर लिया गया, जिसमें लोकेशन सतना और जबलपुर के बीच ट्रेस हुई। पुलिस के अनुसार, फरार हुई लड़कियों के पास कोई मोबाइल फोन नहीं था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कॉल किसी अन्य व्यक्ति के फोन से किया गया था। यही वजह है कि अब इस मामले में बाहरी मददगार की भूमिका की आशंका मजबूत हो गई है।

    जांच में यह भी सामने आया है कि फरार होने के बाद तीनों किशोरियां पूरी रात एक स्कूल परिसर में छिपी रहीं। सुबह स्कूल खुलने से पहले वे वहां से निकल गईं और दिनभर शहर में इधर-उधर घूमती रहीं। इसके बाद रात में वे रेलवे स्टेशन पहुंचीं और वहां से ट्रेन पकड़ ली। इस पूरे घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इस बड़ी चूक के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले गार्ड को बर्खास्त कर दिया है। साथ ही, वन स्टॉप सेंटर की खिड़कियों को पक्की दीवार से बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो सके।

    फिलहाल पुलिस इस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है। खासतौर पर उस रहस्यमयी कॉल और मोबाइल नंबर के जरिए संभावित मददगार तक पहुंचने की कोशिश जारी है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की असली कहानी सामने आने की उम्मीद है।

  • बूंद-बूंद से बनी मिसाल: गोचा नदी स्टॉप डैम में लौटी जलधारा, ग्रामीणों ने रचा इतिहास

    बूंद-बूंद से बनी मिसाल: गोचा नदी स्टॉप डैम में लौटी जलधारा, ग्रामीणों ने रचा इतिहास


    भोपाल । मध्यप्रदेश में जल संरक्षण की दिशा में चल रहा जल गंगा संवर्धन अभियान अब एक जनआंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है। Mohan Yadav के नेतृत्व में 19 मार्च से 30 जून 2026 तक संचालित इस अभियान ने प्रदेश के गांवों में जल संरचनाओं के पुनर्जीवन को नई दिशा दी है। इसी कड़ी में Guna जिले के राघौगढ़ जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत मोररवास में एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहां जनसहभागिता ने असंभव को संभव कर दिखाया।

    मोररवास गांव के पास बहने वाली गोचा नदी पर बना स्टॉप डैम लंबे समय से अपनी उपयोगिता खो चुका था। वर्षा का पानी यहां रुकने के बजाय बहकर निकल जाता था, जिससे आसपास के ग्रामीणों और पशुधन को पानी का लाभ नहीं मिल पाता था। जल संकट धीरे-धीरे गंभीर होता जा रहा था और यह डैम केवल एक सूखी संरचना बनकर रह गया था। लेकिन ग्रामीणों ने हार नहीं मानी और सामूहिक प्रयासों से इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया।

    स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से महज 50 हजार रुपये की जनसहयोग राशि एकत्रित की गई। 6 से 11 अप्रैल के बीच बोरी बंधान का कार्य पूरा किया गया। यह छोटा सा प्रयास बड़ा बदलाव लेकर आया। अब स्टॉप डैम में पानी का ठहराव बढ़ गया है और जल संग्रहण की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। जहां पहले सूखा नजर आता था, वहीं अब पानी की सतह स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी है।

    इस पूरे अभियान की सबसे खास बात रही ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी। गांव के लोगों ने श्रमदान कर न केवल इस कार्य को पूरा किया, बल्कि जल संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाई। यह पहल केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बन गई है। हर व्यक्ति ने इसमें अपनी भूमिका निभाई और जल की हर बूंद को बचाने का संदेश दिया।

    इस प्रयास का सीधा लाभ अब पशुधन और वन्य जीवों को भी मिल रहा है। पहले जहां पानी के अभाव में मवेशियों को दूर-दूर तक भटकना पड़ता था, वहीं अब उन्हें स्थानीय स्तर पर ही पर्याप्त पानी उपलब्ध हो रहा है। इससे न केवल ग्रामीण जीवन आसान हुआ है, बल्कि पर्यावरण संतुलन को भी मजबूती मिली है।

    गोचा नदी स्टॉप डैम का यह सफल पुनर्जीवन पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरा है। यह उदाहरण बताता है कि यदि जनसहभागिता, सकारात्मक सोच और सामूहिक प्रयास हों, तो जल संकट जैसी बड़ी चुनौती का भी समाधान संभव है। जल गंगा संवर्धन अभियान के माध्यम से यह संदेश साफ है कि जब समाज और शासन मिलकर काम करते हैं, तो बदलाव निश्चित होता है।

  • धार सड़क हादसे के बाद पसरा मातम: 16 मृतकों का हुआ अंतिम संस्कार, सरकार ने की आर्थिक मदद की घोषणा

    धार सड़क हादसे के बाद पसरा मातम: 16 मृतकों का हुआ अंतिम संस्कार, सरकार ने की आर्थिक मदद की घोषणा


    भोपाल। मध्यप्रदेश के धार जिला में हुए भीषण सड़क हादसे के बाद गुरुवार को 16 मृतकों का उनके-अपने गांवों में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इनमें 9 लोग नयापुरा, 5 सेमलीपुरा और 2 रामपुरा के निवासी थे। हादसे के बाद तीनों गांवों में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

    यह दर्दनाक हादसा इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर चिकलिया फाटा के पास बुधवार रात हुआ। मजदूरों से भरा एक तेज रफ्तार पिकअप वाहन टायर फटने के कारण अनियंत्रित हो गया और कई बार पलटते हुए डिवाइडर पार कर सामने से आ रही स्कॉर्पियो से टकरा गया। इस दुर्घटना में 6 बच्चों सहित 16 लोगों की मौत हो गई।

    पुलिस के अनुसार, पिकअप में करीब 46 मजदूर सवार थे और वाहन लगभग 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहा था। हादसे के बाद स्थानीय लोगों और राहगीरों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया।

    इंदौर संभागायुक्त सुदाम खाड़े के मुताबिक, घायलों के इलाज के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। गंभीर रूप से घायल 7 लोगों को बेहतर उपचार के लिए इंदौर रेफर किया गया है, जबकि अन्य घायलों का इलाज जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में जारी है। धार के पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने बताया कि तेज रफ्तार और टायर फटने के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा, जिससे यह हादसा हुआ। गुरुवार सुबह सभी मृतकों का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिए गए।

    प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जताया दुख, सहायता राशि का ऐलान

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए की सहायता देने की घोषणा की।

    वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी घटना को हृदय विदारक बताते हुए मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए, गंभीर घायलों को 1-1 लाख रुपए और अन्य घायलों को 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी घायलों का नि:शुल्क इलाज कराने की बात कही गई है। प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत और उपचार व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • भोपाल में ठेका और आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन, न्यूनतम वेतन बढ़ाने की उठाई मांग, निकाली रैली

    भोपाल में ठेका और आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन, न्यूनतम वेतन बढ़ाने की उठाई मांग, निकाली रैली


    भोपाल । राजधानी भोपाल में ठेका, अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों ने गुरुवार को अपने वेतन और नौकरी की स्थिति को लेकर जोरदार आंदोलन किया। बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने नीलम पार्क क्षेत्र में रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया और पार्क में धरना देते हुए जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग के साथ सांकेतिक सामूहिक आत्मदाह की चेतावनी भी दी है।

    कर्मचारियों का कहना है कि राज्य सरकार ने न्यूनतम मजदूरी 12,425 रुपए से बढ़ाकर 16,769 रुपए प्रतिमाह तय की है, लेकिन यह उनके लिए पर्याप्त नहीं है। उनका तर्क है कि न्यूनतम वेतन कम से कम 26,000 रुपए प्रतिमाह होना चाहिए। साथ ही उनका आरोप है कि केंद्र सरकार के मानकों के बावजूद राज्य के कई विभागों में मजदूरों से 3 से 5 हजार रुपए प्रतिमाह पर काम कराया जा रहा है, जिससे असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

    कई विभागों में बेहद कम वेतन देने का आरोप

    प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि अलग-अलग विभागों में कार्यरत श्रमिकों को निर्धारित न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों, पावर प्लांट और सीमेंट उद्योगों में भी ठेका श्रमिकों को पूरी मजदूरी नहीं मिलने की बात कही गई है।

    कर्मचारियों के अनुसार स्कूलों, छात्रावासों और आयुष विभाग के अंशकालीन कर्मियों को 4 से 5 हजार रुपए मिलते हैं। ग्राम पंचायतों में चौकीदार, पंप ऑपरेटर और सफाईकर्मियों को 3 से 4 हजार रुपए, स्वास्थ्य विभाग के आउटसोर्स कर्मियों को 7 से 8 हजार रुपए, राजस्व विभाग के लोक यूथ सर्वेयरों को करीब 1 हजार रुपए, मध्यान्ह भोजन कार्यकर्ताओं को लगभग 4 हजार रुपए और मनरेगा मेट श्रमिकों को 2 हजार रुपए से भी कम भुगतान किया जाता है।

    सरकार से स्थायी समाधान और वेतन गारंटी की मांग

    अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने बताया कि अब तक 50 हजार से अधिक आवेदन सरकार को दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि ये कर्मचारी सरकार की योजनाओं को जमीन पर लागू करने में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन खुद ही न्यूनतम वेतन और स्थायी नौकरी से वंचित हैं। कर्मचारियों ने सरकार से न्यूनतम वेतन की गारंटी देने, इसे बढ़ाकर 26 हजार रुपए करने और आउटसोर्स व्यवस्था की समीक्षा कर स्थायी रोजगार देने की मांग की है।

  • बीजेपी विधायक पर गंभीर आरोप: महिला कांग्रेस पहुंची राज्यपाल के दरबार, विधायकी रद्द करने की मांग

    बीजेपी विधायक पर गंभीर आरोप: महिला कांग्रेस पहुंची राज्यपाल के दरबार, विधायकी रद्द करने की मांग


    भोपाल । भोपाल में सियासी हलचल उस वक्त तेज हो गई जब महिला कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने मंगूभाई पटेल से मुलाकात कर बीजेपी विधायक के खिलाफ गंभीर आरोपों को लेकर शिकायत दर्ज कराई। यह मामला चिंतामणि मालवीय से जुड़ा है, जिन पर एक बुजुर्ग महिला के घर पर कब्जा करने सहित अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

    महिला प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि उज्जैन में एक वृद्ध महिला की संपत्ति पर कथित रूप से अवैध कब्जा किया गया है। इस संबंध में उन्होंने दस्तावेज और एफिडेविट भी राज्यपाल को सौंपे हैं, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके और पीड़ित को न्याय मिल सके।

    प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित विधायक के खिलाफ पहले से ही यौन शोषण जैसे गंभीर मामलों में शिकायतें दर्ज हैं। ऐसे में उन्होंने राज्यपाल से मांग की कि इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विधायक की सदस्यता समाप्त की जाए। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों पर इस तरह के आरोप लोकतांत्रिक व्यवस्था और समाज के विश्वास को आहत करते हैं, इसलिए कड़ी कार्रवाई जरूरी है।

    मुलाकात के दौरान महिला कांग्रेस ने केवल इस मामले को ही नहीं उठाया, बल्कि महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी अपनी मांग रखी। उन्होंने लोकसभा और मध्यप्रदेश विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग दोहराई। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि जब तक महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, तब तक उनके मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाया नहीं जा सकेगा।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अब सभी की नजरें राज्यपाल के रुख और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला प्रदेश की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकता है।

  • किसानों के हित में बड़ा कदम: समर्थन मूल्य पर 2625 रुपए में खरीदी, तारीख बढ़ाकर 23 मई तक

    किसानों के हित में बड़ा कदम: समर्थन मूल्य पर 2625 रुपए में खरीदी, तारीख बढ़ाकर 23 मई तक


    भोपाल । भोपाल में किसानों को राहत देते हुए मोहन यादव ने गेहूं उपार्जन की अंतिम तिथि बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। पहले जहां यह प्रक्रिया 9 मई तक निर्धारित थी, अब इसे बढ़ाकर 23 मई कर दिया गया है। इस फैसले से उन किसानों को राहत मिलेगी जो किसी कारणवश अब तक अपनी उपज नहीं बेच पाए थे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी उपार्जन केंद्रों पर व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त और किसानों के अनुकूल हों, ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि उपार्जन प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि केंद्रों पर पीने के पानी, छायादार बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। साथ ही किसानों को यह सुविधा भी दी गई है कि वे अपने जिले के किसी भी उपार्जन केंद्र पर अपनी उपज बेच सकते हैं, जिससे उनकी सुविधा और विकल्प दोनों बढ़े हैं।

    गेहूं खरीदी को सुगम बनाने के लिए सरकार ने एफएक्यू मापदंडों में भी शिथिलता दी है, ताकि अधिक से अधिक किसानों की उपज खरीदी जा सके। इसके अलावा तौल प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, नेट कनेक्शन, कूपन और गुणवत्ता परीक्षण उपकरण जैसी व्यवस्थाएं भी केंद्रों पर उपलब्ध कराई गई हैं। उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा और छन्ना जैसी सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं, जिससे किसानों को बेहतर अनुभव मिल सके।

    राज्य सरकार किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद रही है, जिसमें 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस जोड़कर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। यह दर किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से तय की गई है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिए हैं कि वे स्वयं भी उपार्जन केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण कर सकते हैं, ताकि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके। इस कदम से प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी और अधिकारियों पर बेहतर काम करने का दबाव भी रहेगा।
    सरकार का यह फैसला किसानों के हित में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा और उपार्जन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं सुचारू रूप से संचालित हो सकेगी।