Category: Madhya Pradesh

  • ‘वनवासी’ शब्द को लेकर झाबुआ में सियासी बवाल, कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

    ‘वनवासी’ शब्द को लेकर झाबुआ में सियासी बवाल, कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन


    झाबुआ झाबुआ में गुरुवार को आदिवासी अस्मिता को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया। नई दिल्ली में आयोजित ‘जनजातीय गर्जना’ रैली के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा आदिवासियों के लिए ‘वनवासी’ शब्द के इस्तेमाल पर आदिवासी कांग्रेस सड़क पर उतर आई। जिला मुख्यालय के राजवाड़ा चौक पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन किया और गृहमंत्री का पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन का नेतृत्व आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने किया।

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि आदिवासी समाज की पहचान और अस्तित्व को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। डॉ. विक्रांत भूरिया ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जानबूझकर ‘आदिवासी’ शब्द से परहेज कर रही है और ‘वनवासी’ जैसे शब्दों के जरिए समाज को सीमित दायरे में दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी केवल जंगलों में रहने वाला समुदाय नहीं, बल्कि इस देश के मूल निवासी हैं, जिनकी अपनी संस्कृति, परंपरा और गौरवशाली इतिहास है।

    डॉ. भूरिया ने कहा कि जल, जंगल और जमीन से आदिवासियों को दूर करने की साजिश लंबे समय से चल रही है। अब भाषा और शब्दों के माध्यम से भी उनकी पहचान बदलने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों को बड़े औद्योगिक घरानों के हवाले करना चाहती है और आदिवासी समाज को केवल मजदूर बनाकर रखना चाहती है।

    उन्होंने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय विश्व आदिवासी दिवस पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने उसे समाप्त कर आदिवासी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। डॉ. भूरिया ने कहा कि आज आदिवासी समाज शिक्षा और प्रशासनिक क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। समाज के लोग डॉक्टर, इंजीनियर, कलेक्टर और आईपीएस जैसे बड़े पदों तक पहुंच रहे हैं। ऐसे में उन्हें ‘जंगली’ या ‘वनवासी’ जैसे शब्दों से संबोधित करना अपमानजनक है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    प्रदर्शन के दौरान प्रशासन ने शुरुआती दो बार पुतला दहन रोकने का प्रयास किया, लेकिन कार्यकर्ता पीछे नहीं हटे। तीसरी कोशिश में कार्यकर्ताओं ने अमित शाह का पुतला जलाकर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान राजवाड़ा चौक पर काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही।

    कार्यक्रम में जसवंत सिंह भाबर, नटवर डोडियार, नरवेश अमलियार सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और आदिवासी समाज के लोग मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने गृहमंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि आदिवासी समाज की पहचान और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल जारी रहा, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

  • जिपं CEO के आदेश पर जनपद CEO की ‘कैंची’! 10 महीने से अधिकारों के लिए भटक रहीं उप सरपंच

    जिपं CEO के आदेश पर जनपद CEO की ‘कैंची’! 10 महीने से अधिकारों के लिए भटक रहीं उप सरपंच


    भोपाल । भोपाल की अर्रावती ग्राम पंचायत में सरपंच पद के प्रभार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उप सरपंच सविता चौहान ने जनपद CEO पर जिला पंचायत CEO के आदेश को पलटने और 10 महीने तक अधिकार नहीं देने के आरोप लगाए हैं। मामला अब पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल तक पहुंच गया है।

    भोपाल जिले की ग्राम पंचायत अर्रावती में सरपंच पद के प्रभार को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक गलियारों से निकलकर राजनीतिक स्तर तक पहुंच गया है। पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के बंगले तक पहुंची इस शिकायत ने पंचायत व्यवस्था और प्रशासनिक अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उप सरपंच सविता चौहान ने आरोप लगाया है कि जिला पंचायत CEO के स्पष्ट आदेश के बावजूद उन्हें आज तक सरपंच के पूर्ण अधिकार नहीं दिए गए।

    पूरा मामला अगस्त 2025 से शुरू हुआ, जब अर्रावती के तत्कालीन सरपंच गंगाराम अहिरवार के खिलाफ बैरसिया थाने में आपराधिक मामला दर्ज हुआ। प्रकरण दर्ज होने के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया। पंचायत राज अधिनियम के अनुसार सरपंच का प्रभार उप सरपंच को सौंपा जाना था। इसी नियम के तहत जिला पंचायत CEO इला तिवारी ने 14 अगस्त 2025 को जनपद CEO देवेशकुमार सराठे को आदेश जारी कर सविता चौहान को सरपंच पद का प्रभार देने के निर्देश दिए थे।

    आरोप है कि आदेश जारी होने के बाद भी जनपद CEO ने शुरुआत में प्रभार देने में देरी की। बाद में औपचारिक रूप से चार्ज तो सौंप दिया गया, लेकिन सरपंच के अधिकार और वित्तीय शक्तियां नहीं दी गईं। सविता चौहान का कहना है कि पिछले 10 महीनों से वे अधिकारों के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन ही मिला।

    मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब पंचायत के खातों और बिल भुगतान को लेकर सवाल उठने लगे। सविता चौहान ने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना लाखों रुपए के बिल पास किए गए। इतना ही नहीं, बाद में पंचों के सम्मेलन आयोजित किए गए और इसी प्रक्रिया के बीच लेखरात अहिरवार को सरपंच घोषित कर दिया गया। चौहान का कहना है कि यह फैसला जिला पंचायत CEO के आदेश के खिलाफ है और जनपद CEO को ऐसा करने का अधिकार नहीं था।

    उप सरपंच सविता चौहान अपने पति धनवीर सिंह और समर्थकों के साथ पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल से मिलने पहुंचीं। उन्होंने मंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर उन्हें नियमानुसार अधिकार दिलाने की मांग की। जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामले में जनपद CEO की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। जिला पंचायत सदस्य विनय मेहर ने कहा कि जब वरिष्ठ अधिकारी नियमों के तहत सविता चौहान को प्रभार दे चुके हैं, तब किसी दूसरे व्यक्ति को सरपंच घोषित करना नियम विरुद्ध है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और जिला पंचायत CEO इला तिवारी ने जांच के आदेश दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सामने आता है और आखिर पंचायत व्यवस्था में आदेशों के टकराव का जिम्मेदार कौन माना जाएगा।

  • ईदगाहों में उमड़ी भीड़, लोगों ने अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी

    ईदगाहों में उमड़ी भीड़, लोगों ने अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी


    नई दिल्ली। Rewa के अतरैला थाना क्षेत्र में गुरुवार को इटमा पुल के नीचे एक बड़ा हादसा टल गया। यहां नदी के तेज बहाव में फंसे एक अधेड़ व्यक्ति को ग्रामीणों ने रस्सियों के सहारे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। रेस्क्यू का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें लोग जान जोखिम में डालकर मदद करते दिखाई दे रहे हैं।

    जानकारी के मुताबिक घायल की पहचान रामउजागर प्रजापति (45) निवासी इटमा के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह किसी काम से नदी किनारे गए थे। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वे नदी के गहरे हिस्से में जा गिरे। वहां मौजूद लोहे की सरिया उनके पैर में घुस गई, जिससे वह दर्द से तड़पते हुए पानी के बीच फंस गए।

    घटना की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम तक पहुंचते ही हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीआरएफ की पांच सदस्यीय टीम को मौके के लिए रवाना किया गया। टीम का नेतृत्व उपनिरीक्षक विकास कुमार पाण्डेय कर रहे थे।

    हालांकि, एसडीआरएफ के पहुंचने से पहले ही स्थानीय ग्रामीणों ने साहस और सूझबूझ दिखाते हुए रेस्क्यू शुरू कर दिया। लोगों ने रस्सियों के सहारे नदी में उतरकर घायल तक पहुंच बनाई और काफी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

    घायल को प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि समय रहते रेस्क्यू हो जाने से बड़ा हादसा टल गया। वहीं, स्थानीय लोगों की बहादुरी और तत्परता की इलाके में जमकर सराहना हो रही है।

  • रीवा में जान जोखिम में डालकर बचाई जिंदगी, तेज बहाव से निकाला व्यक्ति

    रीवा में जान जोखिम में डालकर बचाई जिंदगी, तेज बहाव से निकाला व्यक्ति


    नई दिल्ली। Rewa के अतरैला थाना क्षेत्र में गुरुवार को इटमा पुल के नीचे एक बड़ा हादसा टल गया। यहां नदी के तेज बहाव में फंसे एक अधेड़ व्यक्ति को ग्रामीणों ने रस्सियों के सहारे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। रेस्क्यू का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें लोग जान जोखिम में डालकर मदद करते दिखाई दे रहे हैं।

    जानकारी के मुताबिक घायल की पहचान रामउजागर प्रजापति (45) निवासी इटमा के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह किसी काम से नदी किनारे गए थे। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वे नदी के गहरे हिस्से में जा गिरे। वहां मौजूद लोहे की सरिया उनके पैर में घुस गई, जिससे वह दर्द से तड़पते हुए पानी के बीच फंस गए।

    घटना की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम तक पहुंचते ही हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीआरएफ की पांच सदस्यीय टीम को मौके के लिए रवाना किया गया। टीम का नेतृत्व उपनिरीक्षक विकास कुमार पाण्डेय कर रहे थे।

    हालांकि, एसडीआरएफ के पहुंचने से पहले ही स्थानीय ग्रामीणों ने साहस और सूझबूझ दिखाते हुए रेस्क्यू शुरू कर दिया। लोगों ने रस्सियों के सहारे नदी में उतरकर घायल तक पहुंच बनाई और काफी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

    घायल को प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि समय रहते रेस्क्यू हो जाने से बड़ा हादसा टल गया। वहीं, स्थानीय लोगों की बहादुरी और तत्परता की इलाके में जमकर सराहना हो रही है।

  • मशहूर उर्दू शायर डॉ. बशीर बद्र का निधन, 91 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

    मशहूर उर्दू शायर डॉ. बशीर बद्र का निधन, 91 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

    भोपाल। “उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए…” अपनी शायरी से करोड़ों दिलों को छूने वाले मशहूर उर्दू शायर डॉ. बशीर बद्र अब इस दुनिया में नहीं रहे। आधुनिक गजल को नई पहचान देने वाले बद्र साहब ने 91 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। उनके निधन से साहित्य और कला जगत में गहरा शोक व्याप्त है।

    डॉ. बशीर बद्र ने गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे भोपाल के ईदगाह हिल्स स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) और उम्र संबंधी कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे।

    उनके निधन की खबर फैलते ही देश-विदेश में फैले उनके चाहने वालों, साहित्य प्रेमियों और शायरी के प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई। वरिष्ठ साहित्यकारों और शायरों ने उनके निधन को उर्दू अदब की दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

    डॉ. बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और वहीं से पीएचडी भी पूरी की। बाद में वे मेरठ कॉलेज में उर्दू विभागाध्यक्ष रहे और लंबे समय तक शिक्षण एवं साहित्य सेवा से जुड़े रहे।
    डॉ. बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और वहीं से पीएचडी भी पूरी की। बाद में वे मेरठ कॉलेज में उर्दू विभागाध्यक्ष रहे और लंबे समय तक शिक्षण एवं साहित्य सेवा से जुड़े रहे।

    बशीर बद्र ने उर्दू गजल को आम लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी शायरी में मोहब्बत, तन्हाई, जिंदगी और रिश्तों की सादगी भरी गहराई दिखाई देती थी। उनकी नर्म लहजे वाली गजलें और मखमली आवाज आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। उनके जाने से उर्दू शायरी की दुनिया में एक ऐसा खालीपन पैदा हुआ है, जिसे भर पाना शायद कभी संभव नहीं होगा।

  • उज्जैन में माहौल बिगाड़ने की कोशिश? घर के गेट पर मिला मांस, CCTV खंगाल रही पुलिस

    उज्जैन में माहौल बिगाड़ने की कोशिश? घर के गेट पर मिला मांस, CCTV खंगाल रही पुलिस


    उज्जैन। उज्जैन के आगर रोड स्थित गांधी नगर क्षेत्र में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया जब एक घर के बाहर मांस का टुकड़ा मिलने की घटना सामने आई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हो गए।

    जानकारी के अनुसार, गांधी नगर निवासी स्नेहलता गुप्ता सुबह घर की साफ-सफाई करने के बाद कुछ देर के लिए अंदर गई थीं। जब वे वापस बाहर आईं तो उन्होंने देखा कि घर के मुख्य गेट के पास मांस का टुकड़ा रखा हुआ है। इस पर उन्होंने तुरंत आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद इलाके में भीड़ जमा हो गई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

    स्थानीय लोगों ने इसे संदिग्ध और आपत्तिजनक घटना बताते हुए आरोप लगाया कि किसी ने जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश की है। कुछ लोगों ने इसे बकरीद या ईद के मौके पर शरारती तत्वों की हरकत करार देते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की।

    घटना की सूचना मिलते ही चिमनगंज थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की और पूरे क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि मांस का टुकड़ा वहां किसने और किस उद्देश्य से रखा।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय इनपुट के आधार पर जल्द ही सच्चाई सामने लाई जाएगी।

    घटना के बाद इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है।

    वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे और लोगों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच में जुटी हुई है और इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

  • नागदा में राज्यपाल का अचानक आगमन: पत्नी की तबीयत बिगड़ने के बाद पहुंचे घर

    नागदा में राज्यपाल का अचानक आगमन: पत्नी की तबीयत बिगड़ने के बाद पहुंचे घर


    उज्जैन। कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत अचानक मुंबई से सीधे उज्जैन जिले के नागदा स्थित अपने निजी निवास पहुंच गए, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई। हालांकि बाद में स्पष्ट हुआ कि उनका यह दौरा पूरी तरह पारिवारिक कारणों से जुड़ा हुआ है।

    जानकारी के अनुसार राज्यपाल की पत्नी अनीता गहलोत की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। बताया जा रहा है कि उनका ब्लड प्रेशर काफी बढ़ गया, जिसके बाद चिकित्सकीय स्थिति को देखते हुए परिवार ने तुरंत राज्यपाल को सूचना दी। इसके बाद थावरचंद गहलोत मुंबई से सीधे नागदा के लिए रवाना हो गए।

    नागदा पहुंचने पर सबसे पहले उन्होंने अपनी पत्नी को स्थानीय चौधरी अस्पताल में डॉक्टरों को दिखाया, जहां प्राथमिक जांच के बाद उन्हें घर पर ही आराम करने और निरंतर डॉक्टरों की निगरानी में रहने की सलाह दी गई। फिलहाल अनीता गहलोत का इलाज उनके निवास पर ही चल रहा है और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।

    राज्यपाल के अचानक नागदा पहुंचने के बाद उनके निवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई और प्रशासनिक अमला भी सतर्क हो गया। चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी पत्नी की सेहत पर नजर बनाए हुए है।

    हालांकि इसी बीच कर्नाटक की राजनीति में चल रहे संभावित बदलावों को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे और संभावित नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच राज्यपाल का बेंगलुरु से बाहर होना राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रहा है।

    सूत्रों के अनुसार कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और आज दोपहर तक बड़े फैसले की संभावना जताई जा रही है। डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के नाम पर सहमति बनने की भी चर्चा है, हालांकि अंतिम निर्णय कांग्रेस विधायक दल की बैठक में लिया जाएगा।

    इसी बीच बताया गया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात के लिए समय मांगा था, लेकिन उनके नागदा में होने के कारण यह मुलाकात संभव नहीं हो पाई। ऐसे में अब चर्चा है कि मुख्यमंत्री अपना इस्तीफा ई-मेल या राजभवन के अधिकारियों के माध्यम से भी सौंप सकते हैं, जैसा कि नियमों में प्रावधान है।

    हालांकि इन तमाम राजनीतिक अटकलों के बीच राज्यपाल के करीबी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि उनका नागदा आना पूरी तरह निजी और पारिवारिक कारणों से जुड़ा हुआ है और इसका किसी भी राजनीतिक घटनाक्रम से कोई संबंध नहीं है।

    फिलहाल स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है, जबकि नागदा स्थित निवास पर सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

  • उज्जैन में बातचीत के दौरान खूनी विवाद: युवक की चाकू मारकर हत्या, CCTV में कैद वारदात

    उज्जैन में बातचीत के दौरान खूनी विवाद: युवक की चाकू मारकर हत्या, CCTV में कैद वारदात


    उज्जैन । उज्जैन के महाकाल थाना क्षेत्र अंतर्गत नलिया बाखल इलाके में बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात एक दिल दहला देने वाली वारदात ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। यहां बातचीत के दौरान हुए मामूली विवाद ने इतना उग्र रूप ले लिया कि एक युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान मोहित के रूप में हुई है।

    घटना रात करीब 11 बजे से 12 बजे के बीच की बताई जा रही है, जब कुछ युवक इलाके में आपस में बातचीत कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इसी दौरान एक अन्य युवक वहां पहुंचा और अचानक एक युवक को थप्पड़ मार दिया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई और देखते ही देखते विवाद मारपीट में बदल गया।

    स्थिति इतनी तेजी से बिगड़ी कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही एक युवक ने चाकू निकालकर हमला कर दिया। इस हमले में मोहित गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायल मोहित को उसके दोस्त तत्काल चरक अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। मोहित की मौत की खबर जैसे ही परिजनों तक पहुंची, वे गुस्से से भर उठे और बड़ी संख्या में लोग थाने पहुंच गए। स्थानीय लोगों ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग करते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की।

    इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें कई युवक आपस में झगड़ते और हाथापाई करते नजर आ रहे हैं। फुटेज के आधार पर पुलिस जांच को और तेज कर दिया गया है।

    महाकाल थाना पुलिस ने मामले में हत्या का प्रकरण दर्ज कर लिया है। शुरुआती जांच में प्रशांत और चीनू सहित कुछ अन्य युवकों के नाम सामने आए हैं। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जब्त कर ली है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग स्थानों पर दबिश दी जा रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले का पूरा खुलासा किया जाएगा। फिलहाल पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

    यह घटना एक बार फिर शहर में बढ़ते आपसी विवादों और हिंसा की गंभीरता को उजागर करती है, जहां एक छोटा-सा विवाद भी जानलेवा साबित हो रहा है।

  • शिवपुरी में संजीवनी क्लीनिक विवाद: जांच के डर से डॉक्टर का इस्तीफा, दूसरा छुट्टी पर

    शिवपुरी में संजीवनी क्लीनिक विवाद: जांच के डर से डॉक्टर का इस्तीफा, दूसरा छुट्टी पर


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में संजीवनी क्लीनिकों में फर्जी डॉक्टर नियुक्ति के शक के बाद शुरू हुई जांच ने स्वास्थ्य विभाग में हलचल बढ़ा दी है। जैसे ही सीएमएचओ द्वारा डॉक्टरों के दस्तावेजों की जांच के लिए कमेटी गठित की गई, वैसे ही कई जगहों पर तैनात डॉक्टरों की गतिविधियां संदिग्ध हो गईं।

    जानकारी के अनुसार, मनियर संजीवनी केंद्र में पदस्थ डॉ. आकाश चांदेलकर ने 20 मई को अचानक इस्तीफा दे दिया और उसके बाद से उनका मोबाइल भी बंद आ रहा है। वहीं हवाई पट्टी स्थित संजीवनी क्लीनिक में पदस्थ डॉ. मोहर सिंह ने पहले पारिवारिक कारणों का हवाला देकर छुट्टी ली, लेकिन उनके अवकाश आवेदन में अलग-अलग कारण सामने आने के बाद स्थिति और संदिग्ध हो गई है।

    इसके अलावा एक अन्य क्लीनिक में पदस्थ डॉक्टर भी अचानक अवकाश पर चले गए हैं, जिससे पूरे नेटवर्क पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब स्वास्थ्य विभाग अन्य सभी संजीवनी क्लीनिकों में तैनात डॉक्टरों के दस्तावेजों की गहन जांच कर रहा है।

    सीएमएचओ डॉ. संजय ऋषीश्वर ने साफ कहा है कि यदि जांच में दस्तावेजों में किसी भी तरह की गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा सामने आता है, तो संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल मामले की जांच जारी है और स्वास्थ्य विभाग पूरे सिस्टम की समीक्षा कर रहा है ताकि नियुक्तियों की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

  • शिवपुरी में ट्रैफिक का सख्त एक्शन: बिना नंबर प्लेट 25 वाहन जब्त

    शिवपुरी में ट्रैफिक का सख्त एक्शन: बिना नंबर प्लेट 25 वाहन जब्त

    शिवपुरी  शिवपुरी शहर में यातायात पुलिस ने नियम उल्लंघन के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बुधवार देर शाम विशेष अभियान चलाया। इस अभियान के तहत बिना नंबर प्लेट वाले दोपहिया वाहनों पर कार्रवाई की गई और कुल 25 बाइक व स्कूटी को जब्त कर यातायात थाने लाया गया।

    अभियान शहर के प्रमुख चौराहों पर चलाया गया, जहां पुलिस ने जांच के दौरान कई ऐसे वाहन पकड़े जो बिना नंबर प्लेट के सड़कों पर दौड़ रहे थे। कार्रवाई के दौरान यह भी सामने आया कि इनमें से कई वाहन नाबालिग और स्कूली बच्चों द्वारा चलाए जा रहे थे, जो यातायात नियमों का गंभीर उल्लंघन है।

    यातायात प्रभारी रणवीर सिंह यादव ने बताया कि पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि बिना नंबर प्लेट के वाहन दुर्घटना या किसी आपराधिक घटना की स्थिति में पहचान के लिए बड़ी समस्या पैदा करते हैं, इसलिए इस तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    पुलिस ने जब्त किए गए सभी वाहनों के चालकों को यातायात थाने बुलाकर नंबर प्लेट लगाने के निर्देश दिए और आवश्यक समझाइश देने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे और नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    इस कार्रवाई के बाद शहर में वाहन चालकों के बीच सतर्कता बढ़ गई है और यातायात नियमों के पालन को लेकर पुलिस की सख्ती का संदेश स्पष्ट रूप से गया है।