Category: Madhya Pradesh

  • झुकते मकान को देख लोगों ने रोका रास्ता उज्जैन में महाकाल जाने वाले मार्ग पर बड़ा हादसा टला

    झुकते मकान को देख लोगों ने रोका रास्ता उज्जैन में महाकाल जाने वाले मार्ग पर बड़ा हादसा टला


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में सोमवार शाम एक बड़ा हादसा होते होते टल गया जब महाकाल मंदिर जाने वाले व्यस्त मार्ग पर स्थित एक तीन मंजिला मकान अचानक भरभराकर गिर गया। इस घटना का लाइव वीडियो भी सामने आया है जिसने पूरे इलाके में दहशत फैला दी लेकिन राहत की बात यह रही कि स्थानीय लोगों की सतर्कता और सूझबूझ के चलते किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

    यह घटना गेबी हनुमान क्षेत्र की है जो महाकाल मंदिर जाने वाले प्रमुख रास्तों में से एक माना जाता है। इस मार्ग से रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु गोपाल मंदिर, शिप्रा नदी और महाकाल मंदिर की ओर जाते हैं। ऐसे में यहां किसी भी तरह का हादसा बेहद गंभीर हो सकता था।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शाम करीब 6 बजे से ही मकान में दरारें और झुकाव साफ नजर आने लगा था। स्थानीय लोगों ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत सड़क पर आवाजाही रोक दी और लोगों को उस क्षेत्र से दूर कर दिया। करीब 7 बजे मकान पूरी तरह ढह गया। अगर उस समय ट्रैफिक चालू रहता तो यह हादसा कई जिंदगियां लील सकता था।

    मकान मालिक मनोज भावसार और अली अजगर सहित अन्य रहवासियों ने आरोप लगाया है कि पास में पोकलेन मशीन से चल रही तोड़फोड़ के कारण मकान कमजोर हो गया था। उनका कहना है कि पिछले एक महीने से मकान की नींव में पानी भरने की समस्या भी बनी हुई थी जिसकी शिकायत कई बार की गई लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    वहीं नगर निगम का पक्ष इससे अलग है। निगम अधिकारियों का कहना है कि ढाबा रोड क्षेत्र में मार्ग चौड़ीकरण के तहत जर्जर भवन को पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ हटाया जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि पूरी कार्रवाई बैरिकेडिंग और अधिकारियों की निगरानी में की जा रही थी ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।

    घटना के बाद पुलिस और नगर निगम की टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई और इलाके को पूरी तरह घेर लिया गया। मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया है ताकि रास्ता जल्द से जल्द बहाल किया जा सके। सीएसपी के अनुसार इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है जो कि सबसे बड़ी राहत की बात है।

    यह घटना एक बार फिर शहरी क्षेत्रों में जर्जर इमारतों और निर्माण कार्यों की निगरानी पर सवाल खड़े करती है। हालांकि इस मामले में स्थानीय लोगों की जागरूकता ने बड़ी त्रासदी को टाल दिया लेकिन प्रशासन के लिए यह एक चेतावनी भी है कि ऐसे मामलों में समय रहते ठोस कदम उठाना कितना जरूरी होता है।

  • गैस संकट पर फूटा छात्रों का गुस्सा नर्मदापुरम में कलेक्ट्रेट के बाहर चूल्हा जलाकर किया विरोध

    गैस संकट पर फूटा छात्रों का गुस्सा नर्मदापुरम में कलेक्ट्रेट के बाहर चूल्हा जलाकर किया विरोध

    नर्मदापुरम । मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में रसोई गैस की किल्लत और कथित कालाबाजारी को लेकर छात्रों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बड़ी संख्या में छात्र सोमवार रात करीब 10 बजे अचानक कलेक्ट्रेट गेट पर पहुंच गए और वहां अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्र अपने साथ सब्जी पोहा और चूल्हा लेकर आए थे और उन्होंने मौके पर ही खाना बनाना शुरू कर दिया जिससे प्रशासन भी हैरान रह गया।

    छात्रों का आरोप है कि शहर में एलपीजी सिलेंडर की भारी कमी है और इसका फायदा उठाकर कुछ लोग खुलेआम कालाबाजारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि जो सिलेंडर सामान्य रूप से करीब 900 रुपये में मिलता है उसे 3500 से 4000 रुपये तक में बेचा जा रहा है। इस वजह से किराए के कमरों में रहने वाले और सीमित संसाधनों में पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए रोजमर्रा का जीवन बेहद कठिन हो गया है।

    प्रदर्शन की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और तहसीलदार सरिता मालवीय तथा शक्ति तोमर मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों को समझाने की कोशिश की और तत्काल राहत के तौर पर दीनदयाल रसोई योजना के तहत भोजन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी रखा लेकिन छात्रों ने इसे साफ तौर पर ठुकरा दिया। उनका कहना था कि उन्हें मुफ्त भोजन नहीं बल्कि उचित कीमत पर गैस सिलेंडर चाहिए ताकि वे खुद अपना खाना बना सकें और सम्मानजनक तरीके से रह सकें।

    प्रदर्शन के दौरान यह बात भी सामने आई कि अधिकांश छात्र बाहरी जिलों से आकर यहां रह रहे हैं और उनके पास स्थानीय गैस एजेंसियों के कनेक्शन नहीं हैं। यही वजह है कि वे नियमित आपूर्ति से वंचित हैं और मजबूरी में महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने को मजबूर हो रहे हैं।

    करीब एक घंटे तक चले इस विरोध के दौरान प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत हुई। तहसीलदार ने आश्वासन दिया कि जिन छात्रों के पास जिले के गैस कनेक्शन हैं वे अगले दिन अपनी बुक और डीएससी नंबर के साथ आएं उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा।इसी बीच स्थानीय कांग्रेस नेता Faizan ने आगे आकर छात्रों के भोजन की निजी व्यवस्था करने की बात कही जिसके बाद माहौल थोड़ा शांत हुआ और छात्रों ने प्रदर्शन समाप्त करने का फैसला लिया।

    हालांकि छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गैस की किल्लत दूर नहीं की गई और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वे और बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। यह घटना न केवल प्रशासन के लिए चुनौती बन गई है बल्कि शहर में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

  • अजय सिंह को नहीं राज्यसभा में दिलचस्पी गोविंद सिंह की दो टूक क्रॉस वोटिंग पर भी जताई चिंता

    अजय सिंह को नहीं राज्यसभा में दिलचस्पी गोविंद सिंह की दो टूक क्रॉस वोटिंग पर भी जताई चिंता


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं और इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गोविंद सिंह का बड़ा बयान सामने आया है जिसने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि पार्टी को ऐसे नेताओं को राज्यसभा भेजना चाहिए जिनका मजबूत जनाधार हो ताकि संगठन को मजबूती मिल सके और कार्यकर्ताओं में विश्वास बना रहे।

    डॉ गोविंद सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय पार्टी हाईकमान के हाथ में होगा लेकिन उनकी राय में जमीनी पकड़ रखने वाले नेताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके इस बयान को कांग्रेस के भीतर चल रही रणनीतिक चर्चाओं से जोड़कर देखा जा रहा है जहां उम्मीदवार चयन को लेकर मंथन जारी है।

    इसी दौरान जब पूर्व नेता अजय सिंह के राज्यसभा जाने की संभावना पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा कि अजय सिंह की इसमें कोई खास रुचि नहीं है। इस बयान ने अटकलों पर विराम लगा दिया और यह संकेत भी दिया कि पार्टी नए चेहरों या अलग समीकरणों पर विचार कर सकती है।

    क्रॉस वोटिंग के खतरे को लेकर भी डॉ गोविंद सिंह ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी लगातार विधायकों और वरिष्ठ नेताओं से संवाद कर रहे हैं ताकि किसी भी तरह की असंतोष की स्थिति न बने और पार्टी एकजुट होकर चुनाव में उतरे। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इस तरह के चुनावों में सतर्कता बेहद जरूरी होती है।

    वहीं भारतीय जनता पार्टी की ओर से भी इस बयान पर प्रतिक्रिया आई है। बीजेपी के मीडिया विभाग प्रमुख आशीष अग्रवाल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह उनके लिए आत्मचिंतन का विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब तक राज्यसभा भेजे गए नेताओं का जनाधार नहीं था और क्रॉस वोटिंग की आशंका कांग्रेस के आंतरिक हालात को दर्शाती है।

    अगर राज्यसभा की वर्तमान स्थिति की बात करें तो मध्य प्रदेश में कुल 11 सीटें हैं जिनमें से 8 पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है जबकि 3 सीटें इंडियन नेशनल कांग्रेस के पास हैं। इस साल तीन सीटें खाली हो रही हैं जिनमें से दो बीजेपी और एक कांग्रेस के हिस्से की है। इनमें से एक सीट पर वर्तमान में दिग्विजय सिंह का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। इसी दिन बीजेपी के सुमेर सिंह सोलंकी का कार्यकाल भी खत्म होगा जबकि एक अन्य सदस्य जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल जून 2026 में पूरा होगा।

    राज्यसभा चुनाव को लेकर बढ़ती हलचल यह संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश की राजनीति और अधिक दिलचस्प हो सकती है। कांग्रेस जहां अपने उम्मीदवार को लेकर रणनीति बना रही है वहीं बीजेपी भी अपने समीकरण साधने में जुटी हुई है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि पार्टियां किन चेहरों पर दांव लगाती हैं और क्या चुनाव बिना किसी अप्रत्याशित घटनाक्रम के संपन्न हो पाता है या नहीं।

  • MP में फिर बदलेगा मौसम, तीन दिन आंधी-बारिश की चेतावनी, आज 34 जिलों में अलर्ट

    MP में फिर बदलेगा मौसम, तीन दिन आंधी-बारिश की चेतावनी, आज 34 जिलों में अलर्ट

    भोपाल। मध्य प्रदेश में एक बार फिर मौसम में बदलाव होने जा रहा है। प्रदेश में आंधी-बारिश का नया सिस्टम सक्रिय हो गया है, जिसके चलते अगले तीन दिनों तक खासतौर पर उत्तर और पूर्वी हिस्सों में मौसम बदला हुआ रहेगा। मौसम विभाग, भोपाल ने 9 अप्रैल तक तेज आंधी, बारिश और गरज-चमक का अलर्ट जारी किया है। मंगलवार को भोपाल और ग्वालियर सहित कुल 34 जिलों में चेतावनी दी गई है।

    इन जिलों में ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, भोपाल, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा, उज्जैन, रतलाम, नीमच, मंदसौर, निवाड़ी, टीकमगढ़, सागर, दमोह, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर शामिल हैं। मौसम विभाग के अनुसार 8 और 9 अप्रैल को भी ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग के जिलों में इस सिस्टम का असर बना रहेगा।

    प्रदेश में तेज हवाएं भी चलेंगी। कुछ जिलों में हवा की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि अन्य क्षेत्रों में यह 30 से 40 किमी प्रतिघंटा रहने का अनुमान है। आमतौर पर दोपहर के बाद मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। वहीं, 11 अप्रैल को उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिसका प्रभाव मध्य प्रदेश के मौसम पर भी पड़ सकता है।

    इससे पहले 4 से 6 अप्रैल के बीच प्रदेश में मौसम की तेज गतिविधियां देखी गई थीं। 4 अप्रैल को 14 जिलों में ओलावृष्टि हुई थी, जबकि 39 जिलों में तेज आंधी और बारिश दर्ज की गई। इसके बाद रविवार और सोमवार को भी कई स्थानों पर बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रहा। मौसम विभाग ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि कुछ इलाकों में आंधी की रफ्तार 50 से 60 किमी प्रतिघंटा तक जा सकती है, जबकि बाकी जगहों पर यह 30 से 40 किमी प्रतिघंटा रहेगी।

    आमतौर पर अप्रैल और मई को प्रदेश में भीषण गर्मी के महीने माना जाता है, लेकिन इस बार मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मार्च के दूसरे पखवाड़े में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था, लेकिन महीने के आखिरी दिनों में पश्चिमी विक्षोभ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल के पहले पखवाड़े में भी मौसम का यही मिला-जुला असर जारी रहने की संभावना है।

  • भोजशाला मामले में HC ने की सुनवाई… हिन्दु पक्ष का दावा- 1935 के बाद हुए अवैध कब्जे

    भोजशाला मामले में HC ने की सुनवाई… हिन्दु पक्ष का दावा- 1935 के बाद हुए अवैध कब्जे


    इंदौर।
    धार (Dhar) स्थित ऐतिहासिक भोजशाला (Historic Bhojshala Complex) परिसर को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर बेंच में सोमवार को सुनवाई हुई। हिंदू पक्ष (Hindu side) के वकील विष्णु शंकर जैन (Vishnu Shankar Jain) ने इसे 10वीं शताब्दी की ऐतिहासिक धरोहर बताते हुए दावा किया कि 1935 के बाद यहां अवैध गतिविधियां शुरू हुईं। उन्होंने एएसआई सर्वे और स्तंभों की मूर्तिकला को साक्ष्य के रूप में पेश किया। अदालत ने कहा है कि वह मामले की नियमित सुनवाई करेगी। सभी पक्षों को विस्तार से सुना जाएगा। मंगलवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।


    हिंदू पक्ष ने 10वीं से 11वीं शताब्दी की ऐतिहासिक धरोहर बताया

    हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अपना पक्ष रखते हुए भोजशाला को 10वीं से 11वीं शताब्दी की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर बताया। इसके पक्ष में उनकी ओर से कई तर्क पेश किए गए। विष्णु शंकर जैन ने 1935 में लगाए गए एक अहम बोर्ड का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस समय परिसर के ऐतिहासिक तथ्यों को स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया था।


    1935 के बाद से हुई विवादित गतिविधियों की शुरुआत

    विष्णु शंकर जैन ने दावा किया कि सन 1935 के बाद से इस परिसर पर अवैध कब्जों और विवादित गतिविधियों की शुरुआत हुई। इन विवादित गतिविधियों ने विवाद को जन्म दिया। समूचा विवाद 1935 के बाद के बाद का है। विष्णु शंकर जैन ने एएसआई की सर्वे रिपोर्टों को भी अदालत के सामने रखा। इसके साथ ही उन्होंने स्तंभों पर उकेरी गई मूर्तिकला और ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कई महत्वपूर्ण तथ्य पेश किए।


    अदालत की दो-टूक, सभी पक्षों को देंगे पूरा मौका

    हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है। अत: इसमें सभी पक्षों को सुना जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होगा और हर पक्ष को अपनी दलीलें रखने का पूरा मौका दिया जाएगा। मामले में मंगलवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।


    1935 से पहले भी होती थी पूजा

    महाराजा भोज सेवा संस्थान की ओर से हाईकोर्ट वकील श्रीष दुबे ने बताया कि सोमवार से इंदौर बेंच में फाइनल सुनवाई की शुरुआत हुई है। विष्णु शंकर जैन की ओर से दोपहर ढाई बजे से साढ़े जार बजे तक बहस चली है। यह बहस कल फिर ढाई बजे से शुरू होगी। विष्णु शंकर जैन की बहस अभी बाकी है यह कल भी चलेगी। विष्णु शंकर जैन की ओर से पिटिशन के पक्ष में दलीलें रखी गईं। हिंदू पक्ष की ओर से बताया गया है कि यहां 1935 से पहले भी पूजा होती थी।

  • पति की उम्र 40 साल… MP HC ने 19 साल की पत्नी को प्रेमी के साथ रहने की दी इजाजत

    पति की उम्र 40 साल… MP HC ने 19 साल की पत्नी को प्रेमी के साथ रहने की दी इजाजत


    ग्वालियर।
    जगह मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की ग्वालियर बेंच (Gwalior Bench)। 19 साल की महिला (19-year-Old Woman) कोर्टरूम के अंदर है। बाहर उसके माता-पिता, पति और प्रेमी खड़े हैं। अंदर हो रही सुनवाई का हर कोई बेसब्री से इंतजार कर रहा है। अदालत के सामने महिला ने ‘साथ रहने के अधिकार’ का इस्तेमाल करते हुए कहा- “मैं बालिग हूँ। मैं अपनी मर्ज़ी से जी रही हूँ। मैं अपने पति या अपने माता-पिता के साथ नहीं रहना चाहती।” जानिए क्या है मामला और इसे लेकर क्यों चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    पति, दूसरे आदमी ने अवैध रूप से पत्नी को रखा
    दरअसल मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच में अवधेश नामक शख्स ने हेबियस कॉर्पस पिटीशन दायर की थी। आसान शब्दों में कहें, तो किसी व्यक्ति को कोर्ट के सामने पेश करो।ये याचिका पति ने अपनी पत्नी के खिलाफ दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि उसकी पत्नी को अनुज कुमार नामक युवक ने अवैध रूप से अपने पास रखा हुआ है। कोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने महिला को खोजकर एक वन-स्टॉप सेंटर में रखा और बाद में अदालत के सामने पेश किया। सुनवाई के दौरान माता-पिता, पति और लवर मौजूद थे।


    पति के बीच 21 साल का अंतर, लवर के साथ रहूंगी

    सुनवाई के दौरान जजों ने महिला से उसकी इच्छा पूछी, तो उसने साफ शब्दों में कहा- वह बालिग है और अपनी मर्जी से रह रही है। उसने जोर देते हुए कहा- वह अपने पति या माता-पिता के साथ नहीं रहना चाहती। महिला ने कोर्ट को बताया- उसकी शादीशुदा जिंदगी ठीक नहीं चल रही है। अपने और पति के बीच 21 साल के उम्र के अंतर का जिक्र करते हुए कहा- यह रिश्ता संतुलित नहीं था। महिला ने अपने पति पर प्रताड़ना के आरोप भी लगाए और कहा कि वह अपने प्रेमी अनुज कुमार के साथ रहना चाहती है।


    काउंसलिंग के बाद भी महिला का फैसला रहा अटल

    कोर्ट ने महिला को काउंसलिंग के लिए भेजा, ताकि वह अपने फैसले पर दोबारा विचार कर सके। हालांकि काउंसलिंग के बाद भी महिला अपने फैसले पर अडिग रही। उसके लवर ने भी कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह महिला की देखभाल करेगा और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने कहा कि जब यह क्लियर हो गया कि महिला को किसी प्रकार की अवैध हिरासत में नहीं रखा गया है, तो याचिका का आधार ही खत्म हो जाता है। कोर्ट ने महिला को वन-स्टॉप सेंटर से रिहा कर प्रेमी के साथ जाने की अनुमति दे दी।

    6 महीने तक महिला को मिली सुरक्षा
    हालांकि, कोर्ट ने महिला की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए छह महीने तक निगरानी का निर्देश भी दिया। “शौर्य दीदी” नामित अधिकारी इस दौरान महिला के संपर्क में रहेंगे और उसकी सुरक्षा व भलाई सुनिश्चित करेंगे।

    आपको बताते चलें कि हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी एक मामले में कहा था कि यदि एक शादीशुदा आदमी किसी बालिग महिला के साथ उसकी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो इसे अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि सामाजिक नैतिकता और कानून अलग-अलग हैं और अदालतें नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती हैं।

  • MP: HC का बड़ा फैसला… मैटरनिटी लीव के लिए 80 दिन की कार्य अवधि की अनिवार्यता पर लगाई रोक

    MP: HC का बड़ा फैसला… मैटरनिटी लीव के लिए 80 दिन की कार्य अवधि की अनिवार्यता पर लगाई रोक


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि सरकारी संस्थानों (Government Institutions) में काम करने वाली महिला कर्मचारियों (Women Employees) को मैटरनिटी लीव (Maternity Leave) का लाभ पाने के लिए 80 दिनों की अनिवार्य कार्य अवधि की शर्त पूरी करने की जरूरत नहीं है। जस्टिस विशाल धगत की पीठ ने कहा कि ये नियम केवल निजी कार्यस्थलों पर लागू होती है, न कि राज्य सरकार के प्रतिष्ठानों पर।

    कोर्ट ने कहा, मैटरनिटी लीव का लाभ उठाने के लिए 12 महीनों में 80 दिन काम करने की अनिवार्य शर्त राज्य सरकार के प्रतिष्ठानों पर लागू नहीं होगी। राज्य अपने नागरिकों की भलाई के लिए उपाय करने के लिए बाध्य है। यह आदेश राज्य सरकार पर लागू होगा और मातृत्व अवकाश का लाभ उठाने के लिए पिछले 12 महीनों में 80 दिन काम करने की अनिवार्य शर्त राज्य सरकार को छोड़कर अन्य प्रतिष्ठानों पर अधिनियम के अनुसार लागू होगी।

    बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने कहा, राज्य का कर्तव्य है कि वह सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय प्रदान करें। सामाजिक न्याय में स्वास्थ्य और परिवार के कल्याणकारी उपाय शामिल हैं। भारत के संविधान के अनुच्छेद 38 के अनुसार, राज्य को जनता के कल्याण को बढ़ावा देने की कोशिश करनी चाहिए और भारत के संविधान के अनुच्छेद 39 में कहा गया है कि राज्य को अपनी नीति श्रमिकों, पुरुषों और महिलाओं, विशेष रूप से कम उम्र के बच्चों के स्वास्थ्य और शक्ति की सुरक्षा की दिशा में लगानी चाहिए। भारत के संविधान के अनुच्छेद 39ए के अनुसार, राज्य को समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करना भी आवश्यक है।


    क्या है मामला?

    यह मामला एक गेस्ट टीचर ने दायर किया गया था, जिसे साल 2023 में मैटरनिटी लीव तो दिया गया था, लेकिन अधिनियम की धारा 5(2) का हवाला देते हुए मानदेय देने से मना कर दिया गया था। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता 26 सप्ताह के पेड़ लीव की हकदार है। अदालत ने साफ किया कि इस अवधि के लिए उसे पूरा वेतन दिया जाए, जबकि बाकी अवकाश अवधि को बिना वेतन के माना जा सकता है।

  • अशोकनगर में डैम में नहाते समय 3 नाबालिग दोस्तों की डूबने से मौत

    अशोकनगर में डैम में नहाते समय 3 नाबालिग दोस्तों की डूबने से मौत


    अशोकनगर। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के नई सराय थाना क्षेत्र में सोमवार को तीन नाबालिग दोस्तों की डैम में डूबने से मौत हो गई। यह हादसा तब हुआ जब दोस्त नहाने और मौज-मस्ती के लिए डैम पहुंचे थे, लेकिन थोड़े समय में यह खुशी एक बड़े हादसे में बदल गई।

    जानकारी के अनुसार, कुल छह दोस्त डैम में गए थे। शुरू में सभी किनारे के पास पानी में थे, लेकिन कुछ समय बाद तीन किशोर धीरे-धीरे गहरे पानी की ओर चले गए। इनमें से किसी को भी तैरना नहीं आता था। अचानक पानी की गहराई बढ़ने के कारण तीनों संतुलन खो बैठे और डूबने लगे। साथ मौजूद अन्य दोस्त उन्हें बचाने की कोशिश में थे, लेकिन पानी की गहराई और घबराहट के कारण वे खुद बाहर निकल आए। इसके बाद उन्होंने गांव लौटकर परिजनों को घटना की जानकारी दी।

    घटना की खबर मिलते ही ग्रामीण और पुलिस मौके पर पहुंचे। गहरे पानी और सीमित संसाधनों के कारण ग्रामीण खुद से शवों को नहीं निकाल सके। इसके बाद एसडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। टीम ने घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद तीनों किशोरों के शव डैम से बाहर निकाले।

    मृतकों की पहचान मयंक (16) पुत्र अवधेश रघुवंशी, देव (16) पुत्र राकेश रघुवंशी और ओम (15) पुत्र सतीश रघुवंशी के रूप में हुई है। सभी तीनों अजलेश्वर गांव के रहने वाले थे। घटना ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया, परिजन गहरे सदमे में हैं। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और प्रारंभिक जांच में डूबने से मौत की पुष्टि की है। मामले की आगे की जांच जारी है।

  • उमरिया में गैंगरेप मामले में पांच गिरफ्तार, आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल

    उमरिया में गैंगरेप मामले में पांच गिरफ्तार, आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल


    उमरिया। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में एक नाबालिग किशोरी के साथ हुए गंभीर गैंगरेप मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। कोतवाली थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है।

    जानकारी के अनुसार, यह घटना 29 मार्च को मढ़ीवाह क्षेत्र में हुई थी। पीड़ित किशोरी अपने परिचित युवक के साथ जिला मुख्यालय से लगभग 6 किलोमीटर दूर गई थी। वहां पास के जंगल में पहले से मौजूद आरोपियों ने सुनसान इलाके का फायदा उठाकर वारदात को अंजाम दिया। विरोध करने पर किशोरी के साथ आए युवक को भी पीटा गया।

    घटना के तुरंत बाद दोनों पीड़ितों ने किसी तरह वहां से निकलकर घर लौटे। भय और मानसिक आघात के कारण मामला तुरंत सामने नहीं आ सका। लगभग पांच दिन बाद पीड़ित परिवार ने हिम्मत जुटाकर कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश तेज कर दी। त्वरित कार्रवाई में मनीष बैगा, विशाल बैगा, हरिपाल बैगा और सूरज बैगा सहित एक नाबालिग आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

    सोमवार को सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।सोमवार को एसडीओपी पुन्नू सिंह परस्ते ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस पूरी तत्परता के साथ आरोपियों की तलाश में जुट गई थी और उन्हें शीघ्र गिरफ्तार किया गया। मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।

  • किसानों के समर्थन में कांग्रेस का प्रदेशव्यापी आंदोलन 9 अप्रैल को, कलेक्टर कार्यालयों का करेगी घेराव

    किसानों के समर्थन में कांग्रेस का प्रदेशव्यापी आंदोलन 9 अप्रैल को, कलेक्टर कार्यालयों का करेगी घेराव


    भोपाल। मध्य प्रदेश में किसानों की समस्याओं को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने बड़ा आंदोलन करने का ऐलान किया है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के आह्वान पर 9 अप्रैल को सभी जिला मुख्यालयों पर कलेक्टर कार्यालयों का घेराव किया जाएगा।

    प्रदेश किसान कांग्रेस अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान ने भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने किसानों को बिचौलियों के भरोसे छोड़कर उनके साथ “क्रूर विश्वासघात” किया है।

    गेहूं खरीदी और बोनस पर आरोप

    कांग्रेस का दावा है कि विधानसभा चुनाव के दौरान किसानों को गेहूं खरीदी के लिए 2,700 रुपये प्रति क्विंटल देने का वादा किया गया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद केवल 40 रुपये बोनस दिया गया। पड़ोसी राज्य राजस्थान में किसानों को अधिक बोनस मिलने का उदाहरण देते हुए कांग्रेस ने मध्य प्रदेश सरकार की आलोचना की।

    खरीदी में देरी और बारदाने की कमी पर सवाल

    सरकार द्वारा खरीदी की तारीखें तीन बार बढ़ाने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम में 10 अप्रैल तथा अन्य संभागों में 15 अप्रैल से खरीदी शुरू करने के निर्णय पर भी आलोचना की गई। कांग्रेस ने बारदाने (जूट बैग) की कमी पर भी सरकार को जिम्मेदार ठहराया। जरूरत 10 करोड़ बारदानों की थी, जबकि समय पर केवल 2.60 करोड़ के लिए आवेदन किया गया।

    ओलावृष्टि प्रभावित किसानों के लिए मुआवजे की मांग

    1 अप्रैल को हुई ओलावृष्टि से सीहोर, विदिशा समेत 17 जिलों में फसलें बर्बाद हुई हैं। कांग्रेस ने मांग की कि प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये मुआवजा दिया जाए।

    कांग्रेस की प्रमुख मांगें:-

    – ओलावृष्टि प्रभावित किसानों को 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा
    – गेहूं की खरीदी तुरंत शुरू कर 2,700 रुपये प्रति क्विंटल का वादा पूरा किया जाए
    – खरीदी में देरी से डिफॉल्टर हुए किसानों का दंडात्मक ब्याज माफ किया जाए

    आंदोलन की चेतावनी

    कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि खरीदी और बारदाने की व्यवस्था तुरंत नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। साथ ही केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के भोपाल स्थित निवास के सामने उपवास की भी योजना है।