Category: Madhya Pradesh

  • नमकीन-ड्राई फ्रूट पैकेटों में छिपाकर हो रही थी डोडा चूरा तस्करी, जबलपुर पुलिस ने किया बड़े नेटवर्क का खुलासा

    नमकीन-ड्राई फ्रूट पैकेटों में छिपाकर हो रही थी डोडा चूरा तस्करी, जबलपुर पुलिस ने किया बड़े नेटवर्क का खुलासा


    मध्यप्रदेश। जबलपुर में पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में डोडा चूरा तस्करी के एक कथित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार आरोपी मादक पदार्थ की तस्करी के लिए बेहद अनोखा तरीका अपनाते थे। वे नमकीन और ड्राई फ्रूट के पैकेटों में डोडा चूरा भरकर उसकी सप्लाई करते थे ताकि सामान्य जांच के दौरान किसी को संदेह न हो। इस मामले में एक महिला सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि नेटवर्क से जुड़े एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक उन्हें सूचना मिली थी कि मालवा क्षेत्र से डोडा चूरा लाकर महाकौशल क्षेत्र के विभिन्न जिलों में सप्लाई किया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम लगातार निगरानी कर रही थी। इसी दौरान 8 जून को कटंगी थाना क्षेत्र के पड़रिया गांव में वाहन चेकिंग के दौरान एक ट्रक को रोकने का प्रयास किया गया। पुलिस का दावा है कि ट्रक चालक स्टॉपर तोड़कर भाग निकला, जिसके बाद टीम ने उसका पीछा किया और करीब पांच किलोमीटर दूर वाहन को रोक लिया।

    पुलिस के अनुसार ट्रक चालक ने प्रारंभिक पूछताछ में वाहन में रासायनिक खाद भरी होने की जानकारी दी थी। हालांकि तलाशी के दौरान ट्रक के केबिन में रखी कुछ बोरियों ने पुलिस का ध्यान आकर्षित किया। जब इन बोरियों की जांच की गई तो उनमें नमकीन और ड्राई फ्रूट के पैकेट मिले। पैकेटों को खोलने पर कथित तौर पर उनके भीतर डोडा चूरा बरामद हुआ।

    पुलिस ने ट्रक से कुल 73 पैकेट जब्त किए, जिनमें लगभग 18 किलो 130 ग्राम डोडा चूरा मिला। बरामद सामग्री के संबंध में पूछताछ के दौरान ट्रक चालक और उसके सहयोगी ने कुछ अन्य लोगों के नाम बताए। इसके बाद पुलिस ने उनकी निशानदेही पर शहर के विभिन्न इलाकों में छापेमारी की।

    जांच के क्रम में पुलिस एक संदिग्ध के घर पहुंची। घर की तलाशी में कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली, लेकिन बाहर खड़ी कार की जांच के दौरान उसी तरह के पैकेट बरामद किए गए। पुलिस का कहना है कि कार से 6 किलो 628 ग्राम डोडा चूरा, 50 हजार रुपए नकद और एक तौल मशीन जब्त की गई। अधिकारियों का मानना है कि तौल मशीन का उपयोग कथित तौर पर मादक पदार्थ की पैकिंग और बिक्री में किया जाता था।

    इसके बाद पुलिस ने एक महिला आरोपी के घर भी दबिश दी, जहां से कथित रूप से डोडा चूरा बरामद हुआ। पूछताछ में महिला ने पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दीं, जिनके आधार पर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं एक अन्य संदिग्ध, जिसे पुलिस इस नेटवर्क का प्रमुख सदस्य मान रही है, अभी फरार बताया जा रहा है। उसकी तलाश के लिए अलग-अलग स्थानों पर दबिश दी जा रही है।

    अधिकारियों के अनुसार सभी आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था तथा इसकी पहुंच किन-किन क्षेत्रों तक थी। साथ ही अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    पुलिस का दावा है कि महाकौशल क्षेत्र में डोडा चूरा तस्करी के खिलाफ यह अब तक की महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक है। हालांकि मामले से जुड़े सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और आगे की जांच के बाद ही हो सकेगी।

  • नकली सोने पर 43 लाख का गोल्ड लोन! PNB में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा, 15 लोगों पर FIR दर्ज

    नकली सोने पर 43 लाख का गोल्ड लोन! PNB में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा, 15 लोगों पर FIR दर्ज


    मध्यप्रदेश। जबलपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की सदर शाखा से जुड़ा एक बड़ा बैंकिंग फर्जीवाड़ा सामने आया है। बैंक प्रबंधन की शिकायत के आधार पर पुलिस ने दो अधिकृत गोल्ड वैल्यूअर्स सहित 15 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि बैंक में नकली सोना गिरवी रखकर उसे असली बताने की रिपोर्ट तैयार की गई और उसके आधार पर करीब 43 लाख रुपए का गोल्ड लोन स्वीकृत करा लिया गया। मामले के सामने आने के बाद बैंकिंग व्यवस्था और गोल्ड लोन प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं।

    पुलिस के अनुसार यह कथित फर्जीवाड़ा दिसंबर 2023 से अक्टूबर 2024 के बीच किया गया। शिकायत में कहा गया है कि बैंक द्वारा अधिकृत गोल्ड वैल्यूअर ने कुछ ग्राहकों के साथ मिलकर नकली आभूषणों को असली सोना प्रमाणित किया। बैंक ने वैल्यूअर की रिपोर्ट पर भरोसा करते हुए गोल्ड लोन स्वीकृत कर दिया और संबंधित आभूषण बैंक के लॉकर में सुरक्षित रख दिए गए।

    जानकारी के मुताबिक बैंक ने न्यू रामनगर स्थित एक ज्वेलरी कारोबारी को गोल्ड वैल्यूअर के रूप में अधिकृत किया था। आरोप है कि उन्होंने बैंक में आए कई ग्राहकों के नकली सोने को अपनी जांच रिपोर्ट में असली बताया, जिसके आधार पर लोन स्वीकृत हुए। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि एक अन्य अधिकृत वैल्यूअर ने भी एक मामले में कथित रूप से नकली आभूषणों को असली प्रमाणित किया।

    मामले का खुलासा तब हुआ जब गोल्ड लोन लेने वाले कई खाताधारकों ने निर्धारित अवधि के बाद भी अपनी किस्तें जमा नहीं कीं। बैंक की ओर से नोटिस जारी किए गए, लेकिन अपेक्षित जवाब नहीं मिलने पर अधिकारियों को संदेह हुआ। इसके बाद लॉकर में रखे गए गिरवी आभूषणों की दोबारा जांच कराई गई। जांच में कथित तौर पर सामने आया कि जिन आभूषणों के आधार पर लोन स्वीकृत किए गए थे, उनमें से कई नकली थे।

    इसके बाद बैंक प्रबंधन ने पूरे मामले की आंतरिक जांच शुरू की और फरवरी 2026 में पुलिस को लिखित शिकायत सौंपी। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाने जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है।

    कैंट थाना पुलिस के मुताबिक शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब सभी आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा बैंक को हुए नुकसान की वास्तविक राशि कितनी है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस तरह के अन्य मामले भी सामने आए हैं।

    बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्ड लोन प्रक्रिया में वैल्यूअर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह बैंकिंग व्यवस्था में विश्वास को प्रभावित करने वाला गंभीर मामला माना जाएगा। हालांकि मामले में दर्ज आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

    फिलहाल पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है और उनकी तलाश जारी है। बैंक प्रबंधन भी मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रहा है। पूरे घटनाक्रम पर अब जांच एजेंसियों और बैंक अधिकारियों की नजर बनी हुई है।

  • उज्जैन के ईदगाह क्षेत्र में वाहनों पर फिर हमला, एक रात में 6 कारों समेत कई गाड़ियों के कांच फूटे

    उज्जैन के ईदगाह क्षेत्र में वाहनों पर फिर हमला, एक रात में 6 कारों समेत कई गाड़ियों के कांच फूटे


    मध्यप्रदेश। उज्जैन के ईदगाह क्षेत्र में खड़े वाहनों में तोड़फोड़ की लगातार सामने आ रही घटनाओं ने स्थानीय रहवासियों की चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार देर रात अज्ञात लोगों ने क्षेत्र में खड़ी छह कारों और एक मैजिक वाहन को निशाना बनाते हुए उनके कांच फोड़ दिए। घटना के बाद इलाके में भय और नाराजगी का माहौल है। प्रभावित लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि पिछले करीब एक महीने से वाहन मालिक लगातार ऐसी वारदातों का सामना कर रहे हैं।

    स्थानीय रहवासी आशीष अटोदिया के अनुसार मंगलवार रात करीब 10 बजे जब वे घर से बाहर निकले और अपनी गाड़ी की स्थिति देखी, तो उसमें तोड़फोड़ पाई गई। आसपास खड़ी अन्य गाड़ियों की जांच करने पर पता चला कि कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया है। इनमें स्विफ्ट डिजायर, वैगनआर, क्विड और सोनेट जैसी कारें शामिल हैं। कुछ वाहनों के साइड ग्लास तो कुछ के पीछे के कांच तोड़े गए हैं। घटना से वाहन मालिकों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ सुरक्षा को लेकर भी चिंता सताने लगी है।

    रहवासियों के मुताबिक एक दिन पहले भी एक मैजिक वाहन पर ईंट फेंककर हमला किया गया था। क्षेत्र में रहने वाले लोगों का कहना है कि ईदगाह के पास लगभग 20 से 25 परिवार अपनी गाड़ियां नियमित रूप से खड़ी करते हैं। इनमें से करीब 10 से 12 वाहनों को अलग-अलग दिनों में नुकसान पहुंचाया जा चुका है। इससे पहले एक ऑल्टो कार और एक मैजिक वाहन भी तोड़फोड़ की घटनाओं का शिकार हो चुके हैं। पिछले दो-तीन दिनों में इस तरह की घटनाओं में अचानक बढ़ोतरी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

    स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि कुछ लोग क्षेत्र में वाहनों के खड़े होने का विरोध कर रहे हैं। रहवासियों का दावा है कि पहले भी कुछ व्यक्तियों द्वारा यहां वाहन पार्क नहीं करने की बात कही गई थी। हालांकि तोड़फोड़ की घटनाओं के पीछे कौन लोग हैं और उनकी मंशा क्या है, इसका अभी तक कोई स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    घटनास्थल के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद आरोपियों की पहचान नहीं हो सकी है। रहवासियों के अनुसार जिन स्थानों पर वाहन खड़े किए जाते हैं, वे कैमरों के ब्लाइंड स्पॉट में आते हैं। इसी वजह से फुटेज में संदिग्ध गतिविधियां रिकॉर्ड नहीं हो पाई हैं। लोगों का मानना है कि यदि कैमरों की संख्या बढ़ाई जाए या उनका एंगल बदला जाए तो भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।

    स्थानीय नागरिकों ने बताया कि इससे पहले भी एक वाहन मालिक द्वारा पुलिस में शिकायत की गई थी, लेकिन आरोपियों तक पहुंचने में सफलता नहीं मिली। अब एक साथ कई वाहनों को नुकसान पहुंचने के बाद क्षेत्र के रहवासी सामूहिक रूप से चिमनगंज मंडी थाने में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं। साथ ही पुलिस से क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ाने, सीसीटीवी निगरानी मजबूत करने और दोषियों की जल्द पहचान कर कार्रवाई करने की मांग भी की जा रही है।

    रहवासियों का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह की घटनाओं पर रोक नहीं लगी तो लोगों में असुरक्षा की भावना और बढ़ सकती है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर महाकाल दरबार में विशेष पूजन, भाजपा कार्यकर्ताओं ने की राष्ट्र समृद्धि की कामना

    मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर महाकाल दरबार में विशेष पूजन, भाजपा कार्यकर्ताओं ने की राष्ट्र समृद्धि की कामना


    मध्यप्रदेश। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा विशेष धार्मिक अनुष्ठान और पूजन-अर्चन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री के स्वस्थ, दीर्घायु और यशस्वी जीवन के साथ देश की प्रगति, समृद्धि और जनकल्याण की कामना की गई।

    महाकाल मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम में सांसद अनिल फिरोजिया, बाल योगी उमेश नाथ, भाजपा नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, नगर निगम अध्यक्ष कलावती यादव सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की।

    कार्यक्रम के दौरान भगवान महाकाल का विधि-विधान से पूजन किया गया। साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों के तहत 108 जाप का आयोजन भी किया गया। श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं ने राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य, सामाजिक समरसता और विकास की निरंतरता के लिए प्रार्थना की।

    भाजपा के मीडिया प्रभारी दिनेश जाटवा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 12 वर्षों का कार्यकाल पूरा किया है। इस अवसर को उपलब्धियों और जनसेवा के संकल्प के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित विशेष पूजा का उद्देश्य देश के विकास और जनकल्याण के लिए प्रार्थना करना है।

    उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय में देश ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। सरकार की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से गरीब कल्याण, आधारभूत संरचना के विस्तार, डिजिटल सेवाओं के विकास, महिला सशक्तिकरण, राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता जैसे क्षेत्रों में कार्य किए गए हैं। इन्हीं उपलब्धियों के उपलक्ष्य में भाजपा कार्यकर्ताओं ने महाकाल के दरबार में आकर आभार व्यक्त किया और राष्ट्र की निरंतर प्रगति की कामना की।

    धार्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुए इस आयोजन में कार्यकर्ताओं ने भगवान महाकाल के जयकारे लगाए और देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। मंदिर परिसर में पूरे समय श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित नेताओं ने कहा कि जनता के विश्वास और सहयोग से देश विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है।

    उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक है और राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण अवसरों पर यहां विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता रहा है। इसी परंपरा के तहत भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर यह धार्मिक आयोजन किया।

    कार्यक्रम का समापन राष्ट्र की उन्नति, समाज के कल्याण और नागरिकों के सुख-समृद्धि की मंगलकामनाओं के साथ हुआ।

  • मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर कांग्रेस का मौन सत्याग्रह, लोकतंत्र पर हमले का लगाया आरोप

    मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर कांग्रेस का मौन सत्याग्रह, लोकतंत्र पर हमले का लगाया आरोप


    मध्यप्रदेश। राज्यसभा चुनाव को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में जारी हलचल के बीच कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को उज्जैन में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मौन प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। पार्टी ने नामांकन निरस्त किए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंताजनक बताया।

    उज्जैन के टॉवर चौक स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष आयोजित इस मौन प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। दोपहर एक बजे शुरू हुए कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष रवि राय, कांग्रेस नेता अजित सिंह, महिला कांग्रेस, सेवा दल, यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई, आईटी सेल, ब्लॉक अध्यक्ष, ब्लॉक प्रभारी, पार्षद और अन्य संगठनात्मक इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताया। नेताओं का कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सर्वोपरि होती है तथा किसी भी उम्मीदवार के नामांकन से जुड़े निर्णयों में सभी संवैधानिक प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

    नेता प्रतिपक्ष रवि राय ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से न केवल पार्टी के उम्मीदवार को चुनावी प्रक्रिया से बाहर किया गया, बल्कि कांग्रेस के विधायकों के मतदान अधिकार भी प्रभावित हुए। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि नामांकन पत्र में किसी प्रकार की तकनीकी या प्रक्रियागत कमी थी तो उसे नियमानुसार दूर करने का अवसर दिया जा सकता था।

    कांग्रेस नेता अजित सिंह ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देख रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि नामांकन निरस्त किए जाने के पीछे सुनियोजित प्रयास हो सकते हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    प्रदर्शनकारियों ने डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की बात कही। कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिया कि यदि उनकी मांगों पर उचित विचार नहीं किया गया तो पार्टी आगे भी विभिन्न लोकतांत्रिक माध्यमों से विरोध दर्ज कराएगी।

    राज्यसभा चुनाव के इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है। एक ओर कांग्रेस चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है, वहीं दूसरी ओर निर्वाचन संबंधी प्रक्रियाओं और नियमों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।

    फिलहाल उज्जैन में हुआ यह मौन प्रदर्शन कांग्रेस के उस व्यापक विरोध अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके माध्यम से पार्टी नामांकन निरस्त किए जाने के फैसले के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज करा रही है।

  • जेल कॉलोनी हत्याकांड का खुलासा: फॉरेंसिक सबूतों ने खोली साजिश की परतें, दोषियों को मिली फांसी

    जेल कॉलोनी हत्याकांड का खुलासा: फॉरेंसिक सबूतों ने खोली साजिश की परतें, दोषियों को मिली फांसी


    मध्यप्रदेश। भोपाल की एक सुरक्षित मानी जाने वाली जेल कॉलोनी में वर्ष 1996 में हुई नाबालिग बालिका की हत्या का मामला मध्य प्रदेश के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। प्रारंभिक जांच में यह एक रहस्यमयी घटना प्रतीत हो रही थी, लेकिन पुलिस की पड़ताल, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक साक्ष्यों ने धीरे-धीरे पूरे घटनाक्रम से पर्दा उठा दिया। अंततः अदालत ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए दोषियों को फांसी की सजा सुनाई।

    घटना के बाद जब पुलिस ने जांच शुरू की तो आसपास रहने वाले लोगों से पूछताछ की गई। इसी दौरान कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं, जिन्होंने जांच को नई दिशा दी। प्रत्यक्ष और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को जोड़ते हुए पुलिस ने संदिग्धों से पूछताछ की और उनके बयानों में कई विरोधाभास पाए।

    जांच आगे बढ़ने पर एक महत्वपूर्ण बरामदगी ने मामले को स्पष्ट करने में बड़ी भूमिका निभाई। पुलिस को ऐसी वस्तु मिली जिसने घटनास्थल और आरोपियों के बयानों के बीच संबंध स्थापित किया। इसके बाद संदिग्धों से गहन पूछताछ की गई, जिसमें महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।

    फॉरेंसिक जांच इस मामले की सबसे अहम कड़ी साबित हुई। वैज्ञानिक परीक्षणों के दौरान घटनास्थल और बरामद सामग्री से मिले साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट में ऐसे प्रमाण मिले जिन्होंने अपराध की गंभीरता और आरोपियों की संलिप्तता को मजबूत आधार प्रदान किया। विशेषज्ञों की राय और वैज्ञानिक परीक्षणों के निष्कर्षों ने जांच एजेंसियों को अदालत में मजबूत केस प्रस्तुत करने में मदद की।

    जांच में यह भी सामने आया कि अपराध के बाद कथित रूप से सबूतों को छिपाने और घटनाक्रम को भ्रमित करने की कोशिश की गई थी। हालांकि पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित कर उनकी वैज्ञानिक जांच कराई, जिससे मामले की कई महत्वपूर्ण कड़ियां जुड़ती चली गईं।

    मामला अदालत पहुंचने पर अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान, बरामद सामग्री, वैज्ञानिक रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। अदालत ने सभी तथ्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और विश्वसनीय हैं। न्यायालय ने अपने निर्णय में अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों को अत्यंत गंभीर माना।

    18 फरवरी 1997 को सत्र न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। बाद में मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय में भी हुई, जहां निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा गया। न्यायालय ने इसे दुर्लभतम श्रेणी अर्थात ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामलों में शामिल माना।

    यह मामला आज भी इस बात का उदाहरण माना जाता है कि जटिल आपराधिक मामलों में वैज्ञानिक जांच, फॉरेंसिक साक्ष्य और सुसंगत पुलिस पड़ताल किस प्रकार न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत आधार प्रदान कर सकती है। साथ ही यह भी दर्शाता है कि गंभीर अपराधों में न्यायालय साक्ष्यों के आधार पर कठोरतम दंड देने से पीछे नहीं हटता।

  • बिजली बिल अपडेट के नाम पर रिटायर्ड अधिकारी से साइबर ठगी, खाते से उड़ाए लाखों रुपए

    बिजली बिल अपडेट के नाम पर रिटायर्ड अधिकारी से साइबर ठगी, खाते से उड़ाए लाखों रुपए


    मध्यप्रदेश। इंदौर में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर आम नागरिकों को निशाना बनाते हुए ऑनलाइन ठगी की वारदात को अंजाम दिया है। इस बार ठगों के जाल में जिला पंजीयक कार्यालय से सेवानिवृत्त अधिकारी फंस गए। बिजली बिल अपडेट नहीं होने और कनेक्शन काटने की चेतावनी देकर साइबर ठगों ने उनके मोबाइल में कथित रूप से एप डाउनलोड करवाए और बैंक खाते से बड़ी राशि निकाल ली। मामले की शिकायत मिलने के बाद कनाड़िया थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार संचार नगर निवासी रमेश कुंबारे, जो जिला पंजीयक कार्यालय से सेवानिवृत्त हैं, इस साइबर ठगी का शिकार हुए हैं। घटना 2 जून की रात की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक उनकी पत्नी ज्योति के मोबाइल नंबर पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को बिजली विभाग का कर्मचारी बताते हुए अपना नाम राकेश बताया।

    फोन पर उसने कहा कि मई माह का बिजली बिल विभाग के सिस्टम में अपडेट नहीं हुआ है। साथ ही उसने व्हाट्सएप पर भी संदेश भेजा। इसके बाद रमेश कुंबारे ने उसी नंबर पर संपर्क कर बताया कि बिजली बिल का भुगतान पहले ही किया जा चुका है और भुगतान संबंधी संदेश भी उनके पास मौजूद है।

    आरोप है कि कॉल करने वाले व्यक्ति ने उन्हें विश्वास में लेते हुए कहा कि विभाग के रिकॉर्ड में भुगतान दिखाई नहीं दे रहा है। उसने यह भी कहा कि यदि तुरंत अपडेट नहीं कराया गया तो बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा। इसके बाद कथित रूप से दो मोबाइल एप डाउनलोड करने और 12 रुपए का अपडेट शुल्क जमा करने की बात कही गई।

    ठग ने व्हाट्सएप पर एक फॉर्म भेजा और उसे खोलने के लिए कहा। शिकायत के अनुसार जैसे ही फॉर्म खोला गया, मोबाइल स्क्रीन कुछ समय के लिए बंद हो गई। शुरुआत में इसे तकनीकी समस्या समझा गया, लेकिन बाद में जब मोबाइल दोबारा चालू किया गया तो उसमें ‘Electricity Online Customer Support’ नाम के दो एप डाउनलोड मिले।

    कुछ ही देर बाद मोबाइल पर बैंक खाते से राशि कटने के संदेश आने लगे। पहले 24 हजार 500 रुपए की निकासी का संदेश मिला। जब खाते की जानकारी जांची गई तो पता चला कि खाते से कई अलग-अलग ट्रांजेक्शन किए जा चुके हैं। शिकायत के अनुसार 25-25 हजार रुपए के तीन ट्रांजेक्शन के अलावा 24 हजार और 68 हजार रुपए की राशि भी खाते से निकाल ली गई।

    घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। कनाड़िया थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर साइबर ठगों की पहचान और रकम के ट्रांजेक्शन से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस और साइबर विशेषज्ञ लगातार लोगों को सलाह देते हैं कि बिजली बिल, केवाईसी अपडेट, बैंक सत्यापन या किसी अन्य सेवा के नाम पर आने वाले संदिग्ध कॉल और लिंक से सावधान रहें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में एप डाउनलोड न करें और न ही स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस की अनुमति दें। थोड़ी सी सावधानी साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय साबित हो सकती है।

  • IET हॉस्टल बवाल: 17 में से सिर्फ 8 छात्रों ने भरी पेनाल्टी, बाकी को रिजल्ट का इंतजार

    IET हॉस्टल बवाल: 17 में से सिर्फ 8 छात्रों ने भरी पेनाल्टी, बाकी को रिजल्ट का इंतजार


    मध्यप्रदेश। इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET) हॉस्टल में हाल ही में हुए उत्पात और तोड़फोड़ के मामले में प्रशासन की कार्रवाई जारी है। हॉस्टल में अनुशासनहीनता और विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में चिन्हित किए गए 17 छात्रों में से अब तक केवल 8 छात्रों ने ही निर्धारित पेनाल्टी राशि जमा कराई है। शेष छात्रों द्वारा पेनाल्टी जमा नहीं किए जाने के कारण उनके परिणाम रोक दिए गए हैं।

    विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार संबंधित छात्रों पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया था। यह निर्णय हॉस्टल परिसर में हुई तोड़फोड़, अनुशासनहीन व्यवहार और संस्थान की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटना के बाद लिया गया था। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक छात्र निर्धारित पेनाल्टी जमा नहीं करेंगे, तब तक उनके परीक्षा परिणाम जारी नहीं किए जाएंगे।

    गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले IET हॉस्टल में फाइनल ईयर के छात्रों द्वारा कथित रूप से जमकर उत्पात मचाया गया था। घटना के दौरान छात्रों ने हॉस्टल परिसर में हंगामा किया, अनुशासनहीन गतिविधियां कीं और कई जगहों पर तोड़फोड़ कर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। वायरल हुए वीडियो में हॉस्टल परिसर में अव्यवस्था और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के दृश्य सामने आए थे, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की थी।

    प्रारंभिक जांच के बाद प्रशासन ने 17 छात्रों की पहचान की और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाए। संबंधित छात्रों को हॉस्टल खाली करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही जिन छात्रों की परीक्षाएं शेष थीं, उन्हें परीक्षा में शामिल होने से भी रोक दिया गया था।

    इस बीच हॉस्टल में हुए नुकसान की भरपाई और मरम्मत का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। टूटे हुए दरवाजों, खिड़कियों, कांच और अन्य क्षतिग्रस्त हिस्सों को दुरुस्त किया जा रहा है ताकि हॉस्टल को दोबारा सामान्य स्थिति में लाया जा सके। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि संस्थान की संपत्ति की सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखना सभी छात्रों की जिम्मेदारी है।

    सूत्रों के अनुसार जिन छात्रों को परीक्षा देने से रोका गया था, उनके लिए विशेष परीक्षा आयोजित करने पर भी विचार किया जा रहा है। संभावना है कि यह परीक्षा 15 जून के आसपास आयोजित की जाए, हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है।

    वहीं कुछ अभिभावकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क कर आर्थिक कठिनाइयों का हवाला दिया है और पेनाल्टी जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। इस संबंध में IET के डायरेक्टर प्रतोष बंसल ने कहा है कि पेनाल्टी जमा करना अनिवार्य है और इसके बाद ही संबंधित छात्रों को उनका परिणाम उपलब्ध कराया जाएगा।

    फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन अनुशासनात्मक कार्रवाई और हॉस्टल की मरम्मत दोनों मोर्चों पर काम कर रहा है। आने वाले दिनों में पेनाल्टी जमा करने वाले छात्रों की संख्या बढ़ने और परीक्षा कार्यक्रम को लेकर स्पष्टता आने की संभावना है।

  • कोर्ट में कथित फर्जीवाड़े के दो मामले उजागर, महिला डॉक्टर समेत दो आरोपियों पर एफआईआर

    कोर्ट में कथित फर्जीवाड़े के दो मामले उजागर, महिला डॉक्टर समेत दो आरोपियों पर एफआईआर


    मध्यप्रदेश। इंदौर में जिला न्यायालय से जुड़े दो अलग-अलग मामलों ने न्यायिक प्रक्रिया में दस्तावेजों की सत्यता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों मामलों में अदालत को कथित रूप से भ्रामक जानकारी और दस्तावेज प्रस्तुत करने के आरोप सामने आए हैं। न्यायालय के निर्देश पर एमजी रोड थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पहला मामला एक महिला डॉक्टर से जुड़ा है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने एक आपराधिक प्रकरण में आरोपी की जमानत के लिए ऐसी संपत्ति को आधार बनाया, जिसका विक्रय पहले ही किया जा चुका था। पुलिस के अनुसार शिकायत शासन की ओर से अली असलम अंसारी निवासी एमटीएच कम्पाउंड द्वारा दर्ज कराई गई है।

    एफआईआर के मुताबिक डॉक्टर आसमा (30), निवासी मैजेस्टिक नगर, खजराना ने एक मामले में जमानतदार के रूप में अपनी संपत्ति के दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए थे। बाद में दस्तावेजों की जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि संबंधित संपत्ति पहले ही किसी अन्य व्यक्ति को बेची जा चुकी थी। आरोप है कि इसके बावजूद उसी संपत्ति को आधार बनाकर आरोपी गुलाब की जमानत लेने का प्रयास किया गया।

    मामले की सुनवाई के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) इंदौर रवि कुमार साहू ने उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड का परीक्षण किया। प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने इसे गंभीर मानते हुए 5 जून 2026 को संबंधित जमानतदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और दस्तावेजों की वैधानिक स्थिति की पड़ताल की जा रही है।

    दूसरा मामला एक जब्त वाहन को छुड़ाने के प्रयास से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार आरोपी अनिल पुत्र सीताराम सिसोदिया, निवासी जगजीवनराम नगर ने स्वयं को वाहन से संबंधित अधिकार रखने वाला व्यक्ति बताते हुए न्यायालय में दस्तावेज प्रस्तुत किए। आरोप है कि उसने वाहन स्वामी शिवनारायण पुत्र शंकर सिंह गौर के नाम से दस्तावेज पेश कर सुपुर्दगी आदेश प्राप्त करने का प्रयास किया।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी ने कथित रूप से वाहन मालिक के नाम से तैयार सुपुर्दगीनामा न्यायालय में जमा किया, जिस पर शिवनारायण के हस्ताक्षर दर्शाए गए थे। पहचान के लिए आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए। हालांकि दस्तावेजों की जांच के दौरान कथित विसंगतियां सामने आने पर मामला उजागर हो गया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार दोनों मामलों में दर्ज शिकायतों और न्यायालय के आदेश के आधार पर जांच की जा रही है। दस्तावेजों की सत्यता, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका तथा कथित फर्जीवाड़े के पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों की विश्वसनीयता न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार होती है। ऐसे मामलों में यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी या भ्रामक जानकारी सामने आती है तो यह न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने वाला गंभीर विषय माना जाता है। फिलहाल दोनों मामलों में पुलिस जांच जारी है और जांच के निष्कर्षों का इंतजार किया जा रहा है।

  • कबड्डी टूर्नामेंट में विवाद ने लिया हिंसक रूप, युवक से मारपीट का वीडियो वायरल

    कबड्डी टूर्नामेंट में विवाद ने लिया हिंसक रूप, युवक से मारपीट का वीडियो वायरल


    मध्यप्रदेश। इंदौर के चिमनबाग कबड्डी ग्राउंड पर आयोजित एक कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। प्रतियोगिता से एक टीम को बाहर किए जाने के फैसले को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते मारपीट में बदल गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। एमजी रोड थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं दूसरे पक्ष की ओर से भी पुलिस को शिकायत आवेदन दिया गया है, जिसके आधार पर पूरे मामले की जांच की जा रही है।

    पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार फरियादी यश टिकलिया (21) निवासी आदर्श बिजासन नगर, परदेशीपुरा ने शिकायत दर्ज कराई है कि वह अपने साथियों अनिकेत बांगर और ऋषभ मेहरा के साथ 9 जून की देर रात करीब 12:15 बजे चिमनबाग कबड्डी ग्राउंड पर मौजूद था। इसी दौरान मयंक गौड़ और रोहन मेहरा वहां पहुंचे और संस्था वैष्णवी की टीम को टूर्नामेंट से बाहर किए जाने के संबंध में जानकारी मांगने लगे।

    शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बातचीत के दौरान दोनों युवकों और आयोजन समिति से जुड़े लोगों के बीच बहस शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। जब यश ने इसका विरोध किया तो स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। शिकायतकर्ता के अनुसार इसके बाद दोनों आरोपियों ने उसके साथ हाथ-मुक्कों से मारपीट की।

    मौके पर मौजूद अन्य खिलाड़ियों और दर्शकों ने बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद मामला शांत हुआ, लेकिन घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच टूर्नामेंट के संचालन और विवाद के कारणों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई।

    घटना के बाद यश टिकलिया ने एमजी रोड थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मयंक गौड़ और रोहन मेहरा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और उपलब्ध वीडियो फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों की भी पड़ताल की जाएगी।

    पुलिस ने यह भी बताया कि दूसरे पक्ष की ओर से भी शिकायत आवेदन प्राप्त हुआ है। ऐसे में दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति जानने का प्रयास किया जा रहा है। जांच के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    खेल प्रतियोगिताओं के दौरान खिलाड़ियों और आयोजकों के बीच विवाद की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं, लेकिन खेल भावना को बनाए रखना सभी पक्षों की जिम्मेदारी होती है। फिलहाल चिमनबाग कबड्डी ग्राउंड की यह घटना पुलिस जांच का विषय बनी हुई है और सभी की नजरें जांच के निष्कर्ष पर टिकी हैं।