Category: Madhya Pradesh

  • हादसे ने लिया उग्र रूप युवक की मौत के बाद पथराव और आगजनी से हाईवे पर हड़कंप

    हादसे ने लिया उग्र रूप युवक की मौत के बाद पथराव और आगजनी से हाईवे पर हड़कंप


    उज्जैन । मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में एक सड़क हादसा उस समय हिंसक रूप ले बैठा जब एक युवक की मौत के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने जमकर हंगामा कर दिया घटना गरोठ नेशनल हाईवे पर बीती रात की है जहां दिल्ली से उज्जैन महाकाल दर्शन के लिए आ रही एक मिनी बस और ट्रैक्टर के बीच जोरदार टक्कर हो गई इस हादसे में 21 वर्षीय युवक विजय सोलंकी की दर्दनाक मौत हो गई जबकि चार अन्य लोग घायल हो गए जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मिनी बस तेज रफ्तार में थी और तुलाहेड़ा टोल प्लाजा के पास उसने ट्रैक्टर को पीछे से टक्कर मार दी टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रैक्टर पलट गया और विजय सोलंकी उसके नीचे दब गया बताया जा रहा है कि वह करीब एक घंटे तक ट्रैक्टर के नीचे फंसा रहा और समय पर राहत नहीं मिलने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई इस हादसे में उसका साथी राजेश शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गया वहीं बस चालक शिवकुमार और यात्री बॉबी व धर्मेंद्र कुमार भी घायल हुए हैं गंभीर घायलों को निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है

    हादसे के बाद जैसे ही युवक की मौत की खबर गांव में फैली लोगों में आक्रोश फैल गया बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उन्होंने मिनी बस पर पथराव शुरू कर दिया देखते ही देखते गुस्सा इतना बढ़ गया कि बस में आग लगा दी गई आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी बस और उसमें रखा यात्रियों का सामान जलकर खाक हो गया हालांकि राहत की बात यह रही कि सभी यात्री समय रहते बस से बाहर निकल गए और उनकी जान बच गई बाद में उन्हें अन्य वाहनों के जरिए उज्जैन रवाना किया गया

    घटना के बाद ग्रामीणों ने हाईवे पर चक्काजाम कर दिया और टोल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की उनका आरोप था कि टोल प्लाजा पर मौजूद कर्मचारियों की लापरवाही के कारण राहत कार्य में देरी हुई और यदि समय पर मदद मिल जाती तो विजय सोलंकी की जान बचाई जा सकती थी इस आरोप ने स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया

    सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में करने की कोशिश की भारी पुलिस बल तैनात किया गया और समझाइश के बाद जाम खुलवाया गया प्रशासन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है

    यह घटना न केवल एक सड़क हादसे की त्रासदी को दर्शाती है बल्कि यह भी बताती है कि समय पर राहत और जिम्मेदारी की कमी कैसे हालात को और बिगाड़ सकती है एक तरफ जहां एक युवक की मौत ने परिवार को गहरे दुख में डाल दिया वहीं दूसरी ओर गुस्से की आग ने एक और नुकसान की तस्वीर सामने ला दी अब देखना होगा कि जांच के बाद सच्चाई क्या सामने आती है और जिम्मेदारी तय होती है या नहीं

  • TET नियम पर सियासत तेज दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र लाखों शिक्षकों को राहत की मांग

    TET नियम पर सियासत तेज दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र लाखों शिक्षकों को राहत की मांग


    भोपाल । मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है जब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर इस नियम पर दोबारा विचार करने की मांग की है उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा है कि यह निर्णय लाखों शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित कर रहा है इसलिए सरकार को संवेदनशीलता के साथ इस पर पुनर्विचार करना चाहिए

    दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि TET की अनिवार्यता को भूतलक्षी यानी पिछली तारीख से लागू करना न्यायसंगत नहीं है उन्होंने सुझाव दिया कि इसे भविष्यलक्षी प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए ताकि पहले से कार्यरत शिक्षकों पर अचानक कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े उनका कहना है कि जिन शिक्षकों ने वर्षों पहले नियुक्ति पाई है और लंबे समय से सेवा दे रहे हैं उनके लिए नए नियमों को अचानक लागू करना असमानता पैदा करता है

    इस फैसले के बाद राज्यभर में दो लाख से अधिक शिक्षकों के बीच चिंता का माहौल बन गया है खासतौर पर वे शिक्षक जो वर्ष 2009 से पहले नियुक्त हुए थे और जिनकी सेवा अवधि में अभी पांच साल से अधिक का समय शेष है उन्हें अब TET परीक्षा देना अनिवार्य किया गया है ऐसे में कई शिक्षकों को अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है

    दिग्विजय सिंह ने सरकार से यह भी मांग की है कि इस पूरे मामले में रिव्यू या क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने पर विचार किया जाए ताकि न्यायिक स्तर पर भी इस मुद्दे का समाधान निकल सके उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अंतिम निर्णय आने तक TET की अनिवार्यता को स्थगित रखा जाए ताकि शिक्षकों को मानसिक और पेशेवर दबाव से राहत मिल सके

    इस मुद्दे ने शिक्षा व्यवस्था के भीतर कई सवाल खड़े कर दिए हैं एक तरफ सरकार गुणवत्ता और मानकों को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठा रही है वहीं दूसरी ओर लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नीति को लागू करते समय संतुलन और व्यावहारिकता बेहद जरूरी होती है ताकि सुधार के प्रयासों का असर नकारात्मक न पड़े

    फिलहाल सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मांग पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है और क्या शिक्षकों को किसी तरह की राहत मिलती है या नहीं यह मुद्दा आने वाले समय में और ज्यादा चर्चा का विषय बन सकता है क्योंकि इससे सीधे तौर पर शिक्षा व्यवस्था और लाखों परिवारों का भविष्य जुड़ा हुआ है

  • तेज रफ्तार का कहर नर्मदापुरम हाईवे पर खड़े ट्रक से भिड़ी कार दो की दर्दनाक मौत

    तेज रफ्तार का कहर नर्मदापुरम हाईवे पर खड़े ट्रक से भिड़ी कार दो की दर्दनाक मौत


    नर्मदापुरम । मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में नेशनल हाईवे 46 पर शनिवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसे ने दो परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया सुबह करीब चार बजे हुई इस भीषण दुर्घटना में तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़े ट्रक से पीछे से जा टकराई टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया

    प्राप्त जानकारी के अनुसार कार नागपुर के हिंगनघाट क्षेत्र से शाजापुर जिले के बेरछा गांव की ओर जा रही थी वाहन में तीन लोग सवार थे जो अपने परिचित के घर जा रहे थे लेकिन रास्ते में नर्मदापुरम के निटाया क्षेत्र के पास यह हादसा हो गया बताया जा रहा है कि कार तेज रफ्तार में थी और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका जिसके चलते कार सीधे सड़क किनारे खड़े ट्रक में पीछे से घुस गई

    हादसा इतना भीषण था कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें बैठे लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला मौके पर ही विशाल बाड़कुरे निवासी हिंगनघाट नागपुर और ज्ञान सिंह मासोध निवासी बैतूल की मौत हो गई दोनों की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवारों में कोहराम मच गया वहीं तीसरा युवक रूपेश गहलोत गंभीर रूप से घायल हो गया जिसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया

    घटना की सूचना मिलते ही इटारसी से 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची आपातकालीन सेवा के कर्मचारियों ने बिना समय गंवाए राहत और बचाव कार्य शुरू किया ईएमटी विसराम अहिरवार ने घायल रूपेश को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया जिससे उसकी स्थिति कुछ हद तक स्थिर हो सकी इसके बाद एम्बुलेंस पायलट प्रशांत ने तेजी दिखाते हुए उसे सरकारी अस्पताल नर्मदापुरम पहुंचाया जहां उसका इलाज जारी है और डॉक्टर उसकी हालत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं

    हादसे के बाद पुलिस भी तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है साथ ही दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है प्रारंभिक तौर पर तेज रफ्तार और वाहन पर नियंत्रण खोना हादसे की मुख्य वजह मानी जा रही है

    यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार के खतरों की ओर इशारा करता है खासकर हाईवे पर जहां थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है सड़क किनारे खड़े वाहनों से टकराव के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं लेकिन इसके बावजूद सावधानी बरतने में अक्सर चूक हो जाती है

    नर्मदापुरम का यह हादसा न केवल एक दुखद घटना है बल्कि यह एक गंभीर चेतावनी भी है कि यात्रा के दौरान सतर्कता और गति नियंत्रण कितना जरूरी है जरा सी जल्दबाजी कई जिंदगियों को हमेशा के लिए बदल सकती है

  • सादगी का संदेश वाराणसी में सीएम डॉ मोहन यादव ने रोका काफिला और आम लोगों संग किया स्वाद का सफर

    सादगी का संदेश वाराणसी में सीएम डॉ मोहन यादव ने रोका काफिला और आम लोगों संग किया स्वाद का सफर


    भोपाल/वाराणसी । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने वाराणसी दौरे के दौरान ऐसा सहज और मानवीय रूप दिखाया जिसने लोगों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ दी आमतौर पर वीआईपी मूवमेंट और सख्त सुरक्षा घेरे में रहने वाले मुख्यमंत्री का यह अंदाज लोगों के लिए किसी सुखद आश्चर्य से कम नहीं था जब उनका काफिला एयरपोर्ट की ओर बढ़ रहा था तभी अचानक उन्होंने मिंट हाउस क्षेत्र में स्थित श्रीराम भंडार पर रुकने का निर्णय लिया यह फैसला न सिर्फ अप्रत्याशित था बल्कि इसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को उत्साहित कर दिया

    सीएम के काफिले के अचानक रुकने से पहले तो लोगों को समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है लेकिन जैसे ही उन्होंने मुख्यमंत्री को अपने बीच देखा माहौल पूरी तरह बदल गया लोग उत्साह से भर उठे और उनके साथ बातचीत करने के लिए आगे बढ़े इस दौरान मुख्यमंत्री ने बिना किसी औपचारिकता के स्थानीय लोगों से मुलाकात की उनकी बातें सुनी और पूरी आत्मीयता के साथ संवाद किया

    श्रीराम भंडार पर रुककर मुख्यमंत्री ने बनारस के प्रसिद्ध व्यंजनों का स्वाद लिया जिसमें कचौड़ी पूरी राम भाजी और जलेबी शामिल थीं उन्होंने बड़े चाव से इन पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया और स्थानीय स्वाद की सराहना की मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि भारत की असली पहचान उसकी विविधता में छिपी है हर राज्य हर शहर और हर गली का अपना अलग स्वाद और संस्कृति होती है यही विविधता हमारे देश को खास बनाती है

    उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय खान पान सिर्फ भोजन नहीं बल्कि उस क्षेत्र की संस्कृति और परंपरा का प्रतीक होता है ऐसे व्यंजन पीढ़ियों से लोगों की यादों और जीवनशैली का हिस्सा बने हुए हैं और इन्हें अनुभव करना किसी भी जगह को समझने का सबसे सरल और सजीव तरीका है

    मुख्यमंत्री के इस सहज व्यवहार ने वहां मौजूद लोगों को खासा प्रभावित किया कई लोगों ने उनके साथ तस्वीरें लीं तो कई ने सीधे संवाद कर अपनी बात रखी स्थानीय नागरिकों का कहना था कि मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें ऐसा बिल्कुल नहीं लगा कि वे किसी बड़े पद पर बैठे व्यक्ति से बात कर रहे हैं बल्कि ऐसा लगा जैसे वे अपने ही बीच के किसी व्यक्ति से मिल रहे हों

    सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं लोग मुख्यमंत्री के इस सरल और जमीन से जुड़े अंदाज की जमकर तारीफ कर रहे हैं कई यूजर्स ने इसे एक सकारात्मक संदेश बताया है कि सत्ता में रहते हुए भी आम जनता से जुड़ाव बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है

    यह घटना सिर्फ एक छोटे से ठहराव की कहानी नहीं है बल्कि यह दर्शाती है कि जब नेतृत्व में सादगी और संवेदनशीलता होती है तो वह सीधे लोगों के दिलों तक पहुंचती है सीएम मोहन यादव का यह कदम न केवल उनकी व्यक्तिगत छवि को मजबूत करता है बल्कि यह भी दिखाता है कि जनप्रतिनिधि और जनता के बीच की दूरी को कम करना संभव है अगर इरादा सच्चा हो

  • एमपी में 45 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी, कई जगह ओलावृष्टि की भी संभावना

    एमपी में 45 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी, कई जगह ओलावृष्टि की भी संभावना

    भोपाल। मध्य प्रदेश में साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) और टर्फ से बना मजबूत वेदर सिस्टम सक्रिय बना हुआ है, जिससे पूरे प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। पिछले चार दिनों से लगातार आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का असर देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को भी 20 से अधिक जिलों में इसी तरह का मौसम बना रहा।

    मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान भोपाल और ग्वालियर सहित 45 जिलों में तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार, प्रदेश के मध्य भाग से एक टर्फ लाइन गुजर रही है, जबकि दूसरी ऊपरी हिस्से में सक्रिय है। इसके अलावा पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्रों में दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी बने हुए हैं।

    कई जिलों में ओले-बारिश का अलर्ट
    इन सभी मौसम प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से प्रतिदिन 30 से 35 जिलों में मौसम परिवर्तन हो रहा है। शनिवार को जबलपुर, छतरपुर, पन्ना, दमोह और कटनी में ओलावृष्टि के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, भोपाल, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, शाजापुर, सीहोर, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, बैतूल, नर्मदापुरम, रायसेन, सागर, विदिशा, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, रीवा, सतना, मैहर, निवाड़ी और टीकमगढ़ में गरज-चमक के साथ आंधी और बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।

    तेज रफ्तार से चलेंगी हवाएं
    मौसम विभाग के मुताबिक, अगले चार दिनों यानी 7 अप्रैल तक प्रदेश में तेज हवाएं भी चलेंगी। कुछ इलाकों में हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि अन्य क्षेत्रों में यह 30 से 40 किमी प्रति घंटा के बीच रह सकती है।

    7 अप्रैल से नया सिस्टम होगा एक्टिव
    प्रदेश में मौसम की सक्रियता अभी जारी रहेगी। 7 अप्रैल से एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) प्रभावी होगा, जिसके कारण 10 अप्रैल तक कहीं आंधी तो कहीं बारिश का दौर बना रह सकता है।

    इसके बाद यह सिस्टम आगे बढ़ जाएगा और प्रदेश में गर्मी का असर बढ़ने लगेगा। अप्रैल के दूसरे सप्ताह से तापमान में तेजी आएगी और महीने के अंतिम सप्ताह में ग्वालियर, धार, खरगोन, बड़वानी और नौगांव-खजुराहो जैसे क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

    दतिया, मुरैना, श्योपुर, बड़वानी, खरगोन और धार में भी तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। दरअसल, अप्रैल के दौरान प्रदेश के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में गर्म हवाएं चलने लगती हैं, जिससे इन इलाकों में भीषण गर्मी का असर बढ़ जाता है।

  • MP: इंदौर में एक माह तक नहीं मिलेगा नया LPG कनेक्शन, अस्थायी रूप से बंद किया पोर्टल

    MP: इंदौर में एक माह तक नहीं मिलेगा नया LPG कनेक्शन, अस्थायी रूप से बंद किया पोर्टल


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) शहर में एलपीजी गैस कनेक्शन (LPG Gas Connection) लेने की प्रक्रिया फिलहाल अस्थायी रूप से प्रभावित हो गई है। खाद्य आपूर्ति विभाग (Food Supply Department) ने नए गैस कनेक्शन के लिए उपयोग में आने वाले ऑनलाइन पोर्टल को एक महीने के लिए बंद कर दिया है। इसके चलते अब नागरिकों को नए एलपीजी कनेक्शन के लिए आवेदन करने हेतु कम से कम एक माह तक इंतजार करना होगा।

    खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी मोहनलाल मारू ने बताया कि विभागीय स्तर पर कुछ तकनीकी और प्रक्रिया संबंधी कारणों के चलते पोर्टल को अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अवधि के दौरान ई-केवाईसी (e-KYC) की प्रक्रिया भी स्थगित रहेगी। एक महीने बाद जब पोर्टल फिर से शुरू किया जाएगा, तब ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी कर नए कनेक्शन जारी किए जाएंगे।


    घरेलू उपयोग के लिए 5 किलोग्राम वाले सिलेंडर

    अधिकारी मारू ने यह भी बताया कि जिन उपभोक्ताओं को तत्काल गैस की आवश्यकता है, उनके लिए विभाग द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। ऐसे लोगों को घरेलू उपयोग के लिए 5 किलोग्राम वाले छोटे गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि उन्हें किसी प्रकार की गंभीर असुविधा का सामना न करना पड़े। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक नियमित कनेक्शन देने की प्रक्रिया फिर से शुरू नहीं हो जाती।

    उन्होंने आगे कहा कि इस दौरान यदि किसी नागरिक को गैस संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या या परेशानी होती है, तो वे अपने नजदीकी गैस एजेंसी से संपर्क कर सकते हैं। विभाग की ओर से सभी एजेंसियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं, ताकि आम लोगों को यथासंभव राहत मिल सके।


    यह एक अस्थायी व्यवस्था

    पोर्टल बंद होने से शहर के कई लोगों को अस्थायी रूप से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, खासकर उन लोगों को जो नए कनेक्शन के लिए आवेदन करने की तैयारी में थे। हालांकि, विभाग का कहना है कि यह एक अस्थायी व्यवस्था है और जल्द ही सभी सेवाएं फिर सामान्य कर दी जाएंगी। खाद्य आपूर्ति विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस अवधि में धैर्य बनाए रखें और विभाग का सहयोग करें, ताकि आगामी समय में गैस कनेक्शन की प्रक्रिया को और अधिक सुगम और व्यवस्थित बनाया जा सके।

  • मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला… 489 मदिरा दुकानों के संचालन के लिए बनेगा निगम-मंडल

    मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला… 489 मदिरा दुकानों के संचालन के लिए बनेगा निगम-मंडल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में आबकारी विभाग के लिए गठित मंत्री-मंडलीय समिति की शुक्रवार को हुई वर्चुअल बैठक में 12 दौर की नीलामी प्रक्रिया के बाद शेष बची दुकानों की स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि नीलामी के बाद शेष 489 दुकानों के संचालन के लिए आबकारी विभाग स्वयं एक निगम/मंडल गठित कर इन दुकानों के संचालन की संभावना पर विचार करेगा।

    मंत्री-मंडल समिति में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव अमित राठौर और आबकारी आयुक्त दीपक कुमार सक्सेना मौजूद रहे।

    उप मुख्यमंत्री देवड़ा की अध्यक्षता में हुई बैठक में नीलामी के बाद शेष बची 489 मदिरा दुकानों को सीधे निगम/मंडल के माध्यम से संचालित करने के विकल्प पर चर्चा की गई। यह कदम शेष शराब दुकानों का निस्तारण करने और राजस्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

  • वाराणसी की पावन धरा पर महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का हुआ ऐतिहासिक मंचन

    वाराणसी की पावन धरा पर महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का हुआ ऐतिहासिक मंचन


    भोपाल।
    उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी) की पावन धरती पर शुक्रवार शाम को महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का ऐतिहासिक मंचन हुआ। महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ के भव्य मंचन और ओजस्वी प्रस्तुति से दर्शकों को हजारों वर्ष पुराने स्वर्णिम युग की यात्रा कराई।

    मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित इस महानाट्य का आरंभ सम्राट विक्रमादित्य के उस संकल्प से हुआ, जब वे विदेशी आक्रांताओं के चंगुल से मातृ भूमि को मुक्त कराने का प्रण लेते हैं। रंगमंच पर कलाकारों के सजीव अभिनय ने उस कालखंड को जीवंत कर दिया, जब शकों के आतंक से त्रस्त प्रजा की रक्षा के लिए एक महानायक का उदय हुआ था। विशाल और भव्य सेट, ऊंचे दुर्ग और उस दौर के राजसी वैभव को दर्शाते दृश्यों ने दर्शकों को से बांधे रखा। प्रकाश संयोजन और संगीत की स्वर लहरियों ने हर दृश्य को इतना प्रभावशाली बना दिया कि युद्ध के दृश्यों में जहाँ वीरता का सजीव आभास हुआ, वहीं सम्राट की न्यायप्रियता के प्रसंगों ने दर्शकों को गौरव की भावना से भर दिया।

    महानाट्य की सबसे बड़ी विशेषता इसका यथार्थवादी चित्रण था, जिसमें मदमस्त हाथियों, सरपट दौड़ते घोड़ों और ऊंटों के काफिलों के प्रयोग ने युद्ध के दृश्यों और राजसी वैभव को अभूतपूर्व भव्यता प्रदान की। हाथियों की चिंघाड़ और घोड़ो की टापों ने मंच पर रणभूमि का साक्षात दृश्य उपस्थित कर दिया, जिससे दर्शक रोमांचित हो उठे। लगभग 400 से अधिक कलाकारों ने आधुनिक लाइट-एंड-साउंड तकनीक के साथ सम्राट की न्यायप्रियता, अदम्य शौर्य और विक्रम संवत की स्थापना के प्रसंगों को बड़े प्रभावशाली रूप प्रस्तुत किया। मंच पर निर्मित ऊंचे दुर्ग और राजप्रासाद के सेट ने इतिहास को जीवंत कर दिया।

    महानाट्य में सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व के उन अनछुए पहलुओं को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया, जो उन्हें एक साधारण राजा से ‘चक्रवर्ती सम्राट’ बनाते हैं। वह दृश्य अत्यंत ह्रदय स्पर्शी था जब सम्राट अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए रात्रि के अंधकार में वेश बदलकर निकलते हैं। उनके द्वारा स्थापित ‘विक्रम संवत’ की प्रासंगिकता और भारतीय काल-गणना के महत्व को जिस सरल और साहित्यिक भाषा में संवादों के माध्यम से पिरोया गया, वह सराहनीय था। कलाकारों के संवादों में वह ओज और स्पष्टता थी, जिसने इतिहास को मंच पर साक्षात कर दिया। सम्राट का न्याय और ‘सिंहासन बत्तीसी’ के प्रसंगों ने यह संदेश दिया कि नेतृत्व केवल सत्ता का भोग नहीं, बल्कि त्याग और न्याय की वेदी पर खुद को समर्पित करना है।

    तीन दिवसीय महानाट्य की पहली गरिमामयी शाम में जनता और पर्यटक इस कदर उमड़े कि कार्यक्रम स्थल छोटा प्रतीत होने लगा नाटक के चरमोत्कर्ष पर पहुंचतें ही “जय महाकाल” और “सम्राट विक्रमादित्य” के जयकारों से आकाश गुंजायमान हो गया। यह महानाट्य केवल मंचन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक सशक्त माध्यम सिद्ध हुआ। अंतिम दृश्य में जब सम्राट का राज्याभिषेक हुआ और पुष्प वर्षा हुई, तो हर नागरिक का मस्तक गर्व से ऊंचा हो गया।

    इस अवसर पर मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश के मंत्रीगण अनिल, राजेश सचान, रविंद्र जायसवाल, महापौर अशोक तिवारी जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, राज्यसभा सदस्य बाल योगी उमेश नाथ. विधायक, स्थानीय जन-प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम की समाप्ति के बाद भी देर रात तक दर्शक उस जादुई वातावरण के प्रभाव में रहे। महानाट्य के सफल आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में भव्यता के साथ प्रस्तुत किया जाए, तो वह आज भी जनमानस को गौरवान्वित करता है। यह महानाट्य आने वाले समय में एक सांस्कृतिक मील का पत्थर साबित होगा।


    वाराणसी में तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के विशेष आकर्षण

    समारोह स्थल पर म.प्र. संस्कृति और पर्यटन विभाग द्वारा भव्य चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। प्रदर्शनी में ऋषियों वैदिक ज्ञान तथा सांस्कृतिक गौरव को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

    महानाट्य में 200 से अधिक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्य मंच से दर्शकों के बीच जाकर सम्राट विक्रमादित्य के जीवन का सजीव मंचन अत्यंत आकर्षक बना हुआ है। महानाट्य में तीन भव्य मंच बनाए गए हैं, जिनमें से एक मंच पर उज्जैन के महाकाल मंदिर की प्रतिकृति प्रदर्शित की गई, जो विशेष आकर्षण का केन्द्र बनी।

    महानाट्य में 18 घोड़े, दो रथ, चार ऊंट एक पालकी और एक हाथी के साथ जीवंत दृश्य से विक्रमादित्य का गौरव साकार हो रहा है। महानाट्य में आधुनिक सूचना संचार तकनीक का उपयोग कर युद्ध के दृश्य आतिशबाजी और प्राचीन परंपरा को अद्भुत ढंग से संजीव किया गया है। महानाट्य में सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से लेकर राजतिलक तक की गाथा विक्रम बेताल की कथा और सनातन धर्म के उत्थान की महाकाव्य कथा को प्रदर्शित किया जा रहा है।

  • सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन का संदेश देता है महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन का संदेश देता है महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य: मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सुशासन की उत्कृष्ट परंपरा के नायक सम्राट विक्रमादित्य के जीवन काल से हम सब परिचित हो रहे हैं। सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य उनके सुशासन का संदेश देता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी (काशी) में शुक्रवार को तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के मंचन पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कर्मस्थली काशी में इस महानाट्य के मंचन के अवसर पर यह कहना प्रासंगिक होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के सुशासन से राष्ट्र को दिए जा रहे योगदान के लिए वे अभिनंदन के पात्र हैं।

    इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समारोह का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज बदलते दौर में दो राज्यों के मध्य सांस्कृतिक संबंध को प्रगाढ़ करने के लिए यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण है। दोनों राज्य विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के आशीर्वाद से दोनों राज्यों को अंतरराज्यीय केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की सौगात मिली है। यह दोनों राज्यों में सिंचाई, कृषि उत्पादन और पेयजल प्रदाय में सहयोग करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। यह प्रधानमंत्री मोदी का सुशासन भी है, जिसके अंतर्गत राज्यों के बीच परस्पर सहयोग को बढ़ाने की दिशा में कार्य हो रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सुशासन के इस काल में सम्राट विक्रमादित्य के शासन काल में स्थापित सुशासन का स्मरण आना स्वभाविक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के स्वाभिमान के सम्राट विक्रमादित्य के राष्ट्र प्रेम, पराक्रम, न्यायप्रियता, प्रजा वात्सल्य और ज्ञान विज्ञान परम्परा की पुनर्स्थापना के गुणों की जानकारी युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए महानाट्य माध्यम बन रहा है।

    उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के युग का पुनर्स्मरण करने के लिए महानाट्य का मंचन किया जा रहा है। सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का पहले नई दिल्ली में भी मंचन हुआ है। इस नाटक में अनेक इंजीनियर, डॉक्टर, वकील और अन्य व्यवसायों से जुड़े प्रतिभाशाली व्यक्ति विभिन्न पात्रों के रूप में मंच पर भूमिका निभाते हैं। इससे प्रतिभाओं को तो मंच मिल ही रहा है, एक कुशल शासक के योगदान से देश के नागरिक भी परिचित हो रहे हैं। इस तरह यह महानाट्य लोकरंजन के साथ भारत के गौरवशाली इतिहास को भी आज जीवंत करने में माध्यम बना है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में भाइयों की तीन जोड़ियां प्रसिद्ध हुई हैं। इनमें भगवान श्रीराम और लक्ष्मण, भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के साथ सम्राट विक्रमादित्य और राजा भतृहरि की जोडी शामिल है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने एक करोड़ एक लाख रुपये का सम्राट विक्रमादित्य अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्रारंभ किया है। एक राष्ट्रीय सम्मान 21 लाख रुपये राशि का और तीन राज्य स्तरीय सम्मान 5-5 लाख रुपये राशि के स्थापित किए गए हैं। वर्ष 2024 में हुए विक्रमोत्सव को सर्वाधिक अवधि वाली धार्मिक- आध्यात्मिक फैस्टिवल का महाद्वीप स्तरीय वॉव अवार्ड भी मिला है। यही नहीं प्रतिष्ठित ईमैक्स ग्लोबल अवार्ड भी विक्रमोत्सव को प्राप्त हुआ है।


    विक्रमादित्य महानाट्य मंचन यादगार क्षण: योगी आदित्यनाथ

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विक्रमादित्य महानाट्य मंचन को यादगार क्षण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” के भाव को साकार करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा विश्वनाथ की इस धरा को बाबा महाकाल की धरा से नाट्य मंचन के माध्यम से जोड़ने का विशिष्ट कार्य किया है।

    योगी ने भाइयों की जोड़ी का जिक्र करते हुए कहा कि सम्राट विक्रमादित्य और राजा भरथरी की जोड़ी का उल्लेख है। महाराजा ने नाथ संप्रदाय में दीक्षा लेकर काशी की भूमि और चुनार के किले में साधना की थी। सम्राट विक्रमादित्य ने ही आज से दो हजार साल पहले अयोध्या नगरी की खोज की थी और महाराज लव के बाद सबसे पहले भगवान श्रीराम के मंदिर का निर्माण करवाया था। सम्राट विक्रमादित्य नीति शास्त्र और न्याय के पर्याय थे।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उज्जैन महाकाल की नगरी है और काशी पंचांग की नगरी है दोनों मिलकर नया इतिहास बनाते हुए प्रेम और सहयोग किया परंपरा मजबूती से आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ज्ञान परंपरा को उचित स्थान देकर पूरे विश्व में प्रतिष्ठित किया है। आज योग और आयुर्वेद की पूरी दुनिया में स्वीकार्यता बढ़ी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2024 में प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन किया गया। इसमें 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने मां गंगा में स्नान किया।


    मप्र के मुख्यमंत्री ने भेंट की वैदिक घड़ी
    मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ को वैदिक घड़ी भेंट की। यह घड़ी बाबा विश्वनाथ के मंदिर में वैदिक काल को वर्तमान में जनता के बीच पुनर्स्थापित करने में सहायक होगी। इस घड़ी में प्राचीन वैदिक परंपरा तथा आधुनिक ज्ञान विज्ञान का मिश्रण करके कल की अचूक गणना का समावेश किया गया है।

    इसके बाद वाराणसी की पावन धरा पर महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का ऐतिहासिक मंचन हुआ। समारोह में उत्तर प्रदेश के मंत्रीगण अनिल, राजेश सचान, रविंद्र जायसवाल, महापौर अशोक तिवारी जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, राज्यसभा सदस्य बाल योगी उमेश नाथ. विधायक, स्थानीय जन-प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।

  • विश्व काल-गणना के केंद्र के रूप में उज्जैन की भूमिका पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

    विश्व काल-गणना के केंद्र के रूप में उज्जैन की भूमिका पर विशेषज्ञों ने किया मंथन


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में महाकाल की पावन धरा उज्जैन में शुक्रवार को तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम” की शुरुआत हुई। सम्मेलन में देश-विदेश के प्रख्यात खगोलविदों, वैज्ञानिकों और शीर्षस्थ विद्वानों ने भारतीय काल-गणना की वैज्ञानिकता और उसकी प्राचीन श्रेष्ठता पर गहन मंथन किया।

    इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य उज्जैन की गौरवशाली पहचान को वैश्विक पटल पर पुनः स्थापित करना है। उज्जैन नगरी युगों तक विश्व के प्रधान मध्याह्न रेखा (प्राइम मेरिडियन) और काल-गणना का केंद्र रही है। विद्वानों ने एक स्वर में यह आह्वान किया कि अब समय आ गया है जब हम समय की वैश्विक अवधारणा के ‘भारतीयकरण’ की ओर बढ़ें और अपनी उस वैज्ञानिक विरासत को जीवंत करें, जो सदियों तक मानवता के लिए समय का बोध कराती रही है।

    सम्मेलन के प्रथम सत्र का मुख्य विषय “समय क्या है? इसका मापन कैसे हुआ तथा प्रधान मध्यान्ह (मेरेडियन) रेखा के रूप में उज्जैन का महत्व” रहा। सत्र का संचालन करते हुए आईआईटी गुवाहाटी के प्रो. तडीकोंडा वेंकट भारत ने समय के मूल स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राचीन भारत काल-गणना के क्षेत्र में संपूर्ण विश्व का मार्गदर्शक था। कालांतर में सांस्कृतिक संक्रमण के कारण हमारा यह अमूल्य ज्ञान पाश्चात्य पद्धतियों के अधीन हो गया। अब समय की मांग है कि हम आधुनिक विज्ञान और शोध के माध्यम से अपनी विरासत का पुनरुद्धार करें।

    राज्यसभा की एस. राधाकृष्णन पीठ के इतिहासविद् डॉ. एम.एल. राजा ने गर्व के साथ भारत को ‘काल-गणना का देवता’ निरूपित किया। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य जगत जिस कालखंड की सूक्ष्मता को समझने का प्रयास कर रहा है, वह भारतीय मनीषियों के लिए हजारों वर्ष पूर्व भी प्रत्यक्ष सत्य था। डॉ. राजा ने भारतीय कैलेंडर की वैज्ञानिकता सिद्ध करते हुए बताया कि हमारी पद्धति में लीप ईयर जैसी कोई विसंगति नहीं है; यह खगोलीय पिंडों की गति का शुद्ध गणित है। उन्होंने ‘एक राष्ट्र, एक संस्कृति और एक संवत’ का दूरगामी विचार प्रस्तुत करते हुए भारतीय साक्ष्यों को अकाट्य प्रमाणों के साथ विश्व के सम्मुख रखने की आवश्यकता पर बल दिया।

    काशी के प्रो. विनय कुमार पांडेय ने उज्जैन (अवंतिका) के शास्त्रीय और खगोलीय महत्व को नए आयाम दिए। उन्होंने स्कंद पुराण, नारद पुराण और सूर्य सिद्धांत जैसे ग्रंथों का उदाहरण देते हुए बताया कि “काल-गणना का वास्तविक मूल केन्द्र अवंतिका ही है।” उन्होंने कहा कि उज्जैन विश्व का वह अनूठा भौगोलिक स्थल है जहाँ श्मशान और शक्तिपीठ एक साथ विद्यमान हैं, जो इसे समय की उत्पत्ति और लय का केंद्र बनाते हैं।

    खगोलशास्त्री पं. कैलाशपति नायक ने समय के आध्यात्मिक और व्यावहारिक पक्ष को जोड़ते हुए कहा कि समय के चक्र को गति देने वाले स्वयं भगवान महाकाल हैं। उन्होंने पंचांग की महत्ता को रेखांकित करते हुए उज्जैन को पुनः समय के मानक केंद्र के रूप में स्थापित करने के इस प्रयास की मुक्त कंठ से सराहना की।

    सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव आधुनिक विज्ञान और प्राचीन परंपरा का अद्भुत समन्वय रहा। सीएसआईआर-एनपीएल के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा ने वर्तमान युग की परिशुद्ध समय मापन तकनीकों और एटॉमिक क्लॉक्स की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यदि नैनो सेकंड स्तर की सटीकता बनाए नहीं रखी जाए तो जीपीएस जैसी तकनीकों की सटीकता भी प्रभावित हो सकती है। डॉ. शर्मा ने यह महत्वपूर्ण तथ्य साझा किया कि आधुनिक विज्ञान की यह सूक्ष्म परिशुद्धता वास्तव में हमारी प्राचीन भारतीय गणना पद्धतियों में पहले से ही अंतर्निहित रही है। उन्होंने पारंपरिक भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर विशेष बल दिया।

    सम्मेलन का द्वितीय सत्र “काल चक्र: इनवॉल्यूशन एण्ड इवॉल्यूशन ऑफ सिविलाइजेशन इन टाइम एण्ड स्पेस” विषय पर केंद्रित रहा। सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज, चेन्नई के अध्यक्ष प्रो. एम.डी. श्रीनिवास और कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा कि भारतीय कालचक्र की अवधारणा केवल एक रेखीय गति नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित चक्रीय व्यवस्था है, जो नैतिक मूल्यों और पर्यावरणीय संतुलन को भी अपने भीतर समेटे हुए है। भारतीय ज्ञान परंपरा नवाचार को प्राचीन सिद्धांतों की पुनर्खोज के रूप में देखती है, जो ज्ञान की निरंतरता को बनाए रखते हुए उसे आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने का मार्ग प्रदान करती है।

    सम्मेलन के दोनों सत्रों में यह प्रतिपादित किया गया कि उज्जैन केवल आस्था और श्रद्धा का केंद्र नहीं है, बल्कि यह विश्व के समय चक्र का वैज्ञानिक उद्गम स्थल भी है। विद्वानों ने इस संकल्प को दोहराया कि भारत की समृद्ध काल-गणना परंपरा को आधुनिक अनुसंधान के साथ जोड़कर भविष्य के लिए और अधिक उपयोगी बनाया जाएगा। यह अंतर्राष्ट्रीय मंथन न केवल उज्जैन की ऐतिहासिक भूमिका को पुनः स्थापित करने में सफल रहेगा, बल्कि इसने आने वाले समय में भारत को काल-विज्ञान के क्षेत्र में पुनः ‘विश्व गुरु’ के रूप में प्रतिष्ठित करने का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।