Category: Madhya Pradesh

  • खंडवा: 28 खिलाड़ियों का राष्ट्रीय स्तर पर चयन, विद्यालय ने खेलों में रचा इतिहास

    खंडवा: 28 खिलाड़ियों का राष्ट्रीय स्तर पर चयन, विद्यालय ने खेलों में रचा इतिहास


    नई दिल्ली। खंडवा में आयोजित 28 से 30 अप्रैल 2026 की क्षेत्रीय खेलकूद प्रतियोगिता में पीएम केंद्रीय विद्यालय खंडवा के विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। विद्यालय के 80 छात्रों ने खो-खो, कबड्डी, शतरंज, टेबल टेनिस, लॉन टेनिस, योग और ताइक्वांडो जैसी विभिन्न स्पर्धाओं में भाग लिया।

    कबड्डी में दोहरी स्वर्ण जीत
    14 आयु वर्ग और 17 आयु वर्ग की बालक कबड्डी टीमों ने स्वर्ण पदक जीतकर विद्यालय का नाम रोशन किया। वहीं 17 आयु वर्ग की बालिका खो-खो टीम ने कांस्य पदक हासिल किया।

    व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भी चमके खिलाड़ी

    शतरंज में आर्यन सोलंकी ने रजत पदक
    लॉन टेनिस में आराध्य जोशी ने रजत पदक
    टेबल टेनिस में आरव दुबे को रजत, प्रिंसी पटेल और नंदिनी दीलावरे को कांस्य
    योग में दिकांश जमरा ने कांस्य
    ताइक्वांडो में कई खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया
    शूटिंग में अश्विनी चौहान ने रजत पदक हासिल किया

    28 खिलाड़ियों का राष्ट्रीय चयन
    उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर कुल 28 खिलाड़ियों का चयन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए हुआ है। इनमें कबड्डी, लॉन टेनिस, टेबल टेनिस, शूटिंग और योग के खिलाड़ी शामिल हैं।
    कबड्डी से अंश कामटे, मोहम्मद मिस्बाह, तनिष्क पारखे, टेबल टेनिस से आरव दुबे और अन्य प्रमुख खिलाड़ी चयनित हुए हैं।

    विद्यालय में उत्साह का माहौल
    विद्यालय प्राचार्य धनीराम पटेल, उप प्राचार्य हरेंद्र प्रसाद, योग शिक्षक नितिन पाटीदार और खेल प्रशिक्षक बेनी प्रसाद बघेल सहित सभी शिक्षकों ने खिलाड़ियों की उपलब्धि पर खुशी जताई।

     खेल प्रतिभा का उभरता केंद्र
    पीएम केंद्रीय विद्यालय खंडवा ने एक बार फिर साबित किया है कि सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर छात्र राष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा का परचम लहरा सकते हैं।

  • महादेवगढ़ मंदिर में बंगाली परिवार ने की महाकाल की भव्य महाआरती

    महादेवगढ़ मंदिर में बंगाली परिवार ने की महाकाल की भव्य महाआरती


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के खंडवा स्थित महादेवगढ़ मंदिर में एक विशेष धार्मिक आयोजन के तहत बंगाली परिवार ने महाकाल की भव्य महाआरती की। इस अवसर पर पूरा मंदिर परिसर भक्ति, मंत्रोच्चार और दीपों की रोशनी से आलोकित हो उठा।

    महाकाल की आराधना में उमड़ी श्रद्धा
    आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से महाआरती में भाग लिया और “अखंड भारत” की कामना करते हुए देश की एकता और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

     बंगाली परिवार की सक्रिय भागीदारी
    इस धार्मिक आयोजन में बंगाली परिवार के कई सदस्य शामिल रहे, जिनमें सुनीता सोनोने, दिव्या लेंडे, आशा मराठा, मीता विश्वास, डॉ. टी.के. विश्वास, रीता राय, शिवानी घोष, रितिका घोष, जय घोष, पारितोष घोष, डॉ. पी. कुमार, डॉ. पी.के. मलिक और सुशांत राय प्रमुख रूप से मौजूद थे।

    भक्ति के साथ सामाजिक संदेश भी
    इस आयोजन ने केवल धार्मिक आस्था को ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का संदेश भी दिया। श्रद्धालुओं ने मिलकर देश की खुशहाली और शांति की कामना की।

     आस्था और एकता का संगम
    महादेवगढ़ मंदिर में हुआ यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बनकर सामने आया, जिसमें भक्तिभाव और राष्ट्रीय एकता का सुंदर संगम देखने को मिला।

  • मध्यप्रदेश में बंद परिवहन निगम पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को फिर नोटिस

    मध्यप्रदेश में बंद परिवहन निगम पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को फिर नोटिस


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में वर्षों से बंद पड़े राज्य सड़क परिवहन निगम को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार को पुनः नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला जनहित याचिका के रूप में सामने आया है, जिसमें राज्य में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की गंभीर स्थिति को उजागर किया गया है।

     21 साल से बंद परिवहन सेवा पर सवाल
    यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता बीएल जैन द्वारा दायर की गई थी। इसमें कहा गया है कि लगभग 21 वर्षों से राज्य का परिवहन निगम बंद पड़ा है, जिसके कारण लोगों को यात्रा के लिए निजी बसों और असुरक्षित साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

     ग्रामीण इलाकों में हालात गंभीर
    याचिका में बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बसों की कमी के कारण लोग मालवाहक वाहनों में यात्रा करने को मजबूर हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। कई मामलों में जानमाल की हानि भी हो चुकी है।

     पहले भी नोटिस, लेकिन जवाब नहीं
    कोर्ट ने पहले भी सितंबर 2024 में राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब देने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए दोबारा नोटिस जारी किया है।

    सरकारी जिम्मेदारी पर उठे सवाल
    याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि सुरक्षित और सुलभ परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की मूल जिम्मेदारी है, ठीक वैसे ही जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं। केरल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा गया कि वहां सरकारी परिवहन निगम सफलतापूर्वक चल रहे हैं और लाभ में भी हैं।

     घोषणाओं के बावजूद ठोस कदम नहीं
    याचिका में यह भी कहा गया कि राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर सार्वजनिक परिवहन सेवा शुरू करने की घोषणाएं की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई जमीन पर नहीं दिखी।

     सार्वजनिक परिवहन पर बढ़ा दबाव
    मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की यह सख्ती राज्य में बंद परिवहन व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ रही है। अब सभी की नजर सरकार के जवाब और आगामी कदमों पर टिकी है।

  • झाबुआ में बनेगा DAVV का मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज में अस्थायी संचालन की तैयारी

    झाबुआ में बनेगा DAVV का मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज में अस्थायी संचालन की तैयारी


    नई दिल्ली। इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय अब आदिवासी बहुल झाबुआ जिले में अपना मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय को इसके लिए राज्य सरकार द्वारा भूमि आवंटित कर दी गई है, जिससे परियोजना को औपचारिक रूप से मंजूरी मिल चुकी है।

    इंजीनियरिंग कॉलेज में अस्थायी संचालन की योजना

    कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई के अनुसार, जब तक मेडिकल कॉलेज का नया भवन तैयार नहीं होता, तब तक अस्थायी रूप से इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में ही मेडिकल शिक्षा शुरू करने का प्रस्ताव है। इसके लिए विश्वविद्यालय ने अनुमति के लिए आवेदन किया है और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।

     झाबुआ जिला अस्पताल बनेगा टीचिंग हॉस्पिटल

    योजना के तहत झाबुआ जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के टीचिंग हॉस्पिटल के रूप में विकसित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार अस्पताल में लगभग 250 बेड पहले से उपलब्ध हैं, और इसे 300 बेड क्षमता तक बढ़ाया जाएगा, जो 100 मेडिकल सीटों के लिए आवश्यक मानक है।

    परियोजना की लागत और विकास योजना

    मेडिकल कॉलेज की आधारभूत संरचना तैयार करने में शुरुआती तौर पर करीब 350 से 400 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। हालांकि अस्पताल पहले से उपलब्ध होने के कारण लागत अपेक्षाकृत नियंत्रित रहेगी।

    शासन की मंजूरी पर टिकी आगे की प्रक्रिया

    विश्वविद्यालय ने उम्मीद जताई है कि इस महीने के भीतर अनुमति से जुड़ा निर्णय आ सकता है। यदि मंजूरी मिलती है तो झाबुआ में मेडिकल शिक्षा की शुरुआत अस्थायी ढांचे से ही कर दी जाएगी।

     आदिवासी क्षेत्र के लिए बड़ा बदलाव

    झाबुआ जैसे आदिवासी क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज की स्थापना से न सिर्फ चिकित्सा शिक्षा का विस्तार होगा, बल्कि स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं में भी बड़ा सुधार आने की उम्मीद है।

    शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों में नई शुरुआत

    देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की यह पहल मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में उच्च चिकित्सा शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 62 IPS अफसरों के तबादले, 19 जिलों के SP बदले गए

    मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 62 IPS अफसरों के तबादले, 19 जिलों के SP बदले गए


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए 62 IPS अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। यह सूची देर रात गृह विभाग द्वारा जारी की गई, जिसमें ADG, DIG, SP और DCP स्तर तक के अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    यह फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और डीजीपी कैलाश मकवाणा के बीच हुई उच्च स्तरीय चर्चा के बाद लिया गया।

     सिंगरौली और सिवनी में कार्रवाई के बाद बदलाव

    हाल ही में हुए बैंक डकैती कांड के बाद सिंगरौली के तत्कालीन SP मनीष खत्री को हटा दिया गया है और उन्हें AIG PHQ भोपाल भेजा गया है। वहीं सिवनी में सामने आए हवाला कांड के बाद SP सुनील कुमार मेहता को हटाकर इंदौर में DCP की जिम्मेदारी दी गई है।

    19 जिलों में बदले गए SP

    इस बड़े फेरबदल में प्रदेश के 19 जिलों जैसे भिंड, शिवपुरी, रीवा, सागर, धार, मुरैना, छतरपुर, खंडवा, नीमच, पांढुर्णा, आगर मालवा, अनूपपुर, मऊगंज, डिंडौरी, मंदसौर, दतिया, सीहोर, सिंगरौली और दमोह में नए पुलिस अधीक्षक नियुक्त किए गए हैं।

     DIG और SP स्तर पर बड़ा रोटेशन

    कई वरिष्ठ अधिकारियों को DIG पद पर पदोन्नति दी गई है। रीवा, धार, झाबुआ और ग्वालियर सहित कई जिलों में तैनात अधिकारियों को अब राज्य मुख्यालय या अन्य रेंज में जिम्मेदारी दी गई है। इस बदलाव में पुलिस अधीक्षक स्तर के कई अधिकारी सीधे DIG या वरिष्ठ पदों पर पहुंचे हैं, जिससे पुलिस संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

    क्यों किया गया इतना बड़ा फेरबदल?

    सूत्रों के अनुसार, यह कदम कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने, लंबित मामलों में तेजी लाने और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। हाल के दिनों में कुछ जिलों में हुई आपराधिक घटनाओं को भी इस बदलाव का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    कुछ पद अभी खाली, जल्द आ सकती है नई सूची

    बुरहानपुर और सागर जैसे कुछ जिलों में अभी SP और IG स्तर के पद खाली हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही एक और तबादला सूची जारी हो सकती है जिसमें इन पदों को भी भरा जाएगा।

     पुलिस व्यवस्था में नई सर्जरी

    मध्यप्रदेश सरकार का यह बड़ा कदम प्रशासनिक सख्ती और सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 62 IPS अधिकारियों के तबादले से राज्य की पुलिस व्यवस्था में एक नया संतुलन और नई रणनीति देखने को मिल सकती है।

  • मध्यप्रदेश में दिव्यांगजनों के लिए ऐतिहासिक कदम: पहली बार बनेगी राज्य स्तरीय समग्र नीति

    मध्यप्रदेश में दिव्यांगजनों के लिए ऐतिहासिक कदम: पहली बार बनेगी राज्य स्तरीय समग्र नीति


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के लगभग 10 लाख दिव्यांगजनों के लिए पहली बार एक व्यापक और समग्र नीति बनाने का निर्णय लिया है। इस नीति का उद्देश्य सभी विभागों जैसे सामाजिक न्याय, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा और अन्य के काम को एक ही ढांचे में लाना है, ताकि लाभार्थियों को योजनाओं का समान और प्रभावी लाभ मिल सके। इस नीति के लागू होने के बाद दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग विभागों की योजनाओं में एकरूपता आएगी और सभी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी।

     180 दिन में तैयार होगा ड्राफ्ट

    सरकार ने इस नीति का प्रारंभिक मसौदा 180 दिनों के भीतर तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए जिम्मेदारी दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के आयुक्त को सौंपी गई है।

    आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया के अनुसार, यह प्रदेश में पहली बार होगा जब दिव्यांगजनों के लिए कोई समग्र नीति तैयार की जाएगी। अभी तक विभिन्न विभाग अलग-अलग योजनाएं चला रहे थे, जिससे लाभ में असमानता की स्थिति बनी हुई थी।

    सभी हितधारकों से होगा संवाद

    नीति को प्रभावी और वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए सरकार व्यापक स्तर पर संवाद करेगी। इसमें विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों, विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं और दिव्यांगजनों से सीधे सुझाव लिए जाएंगे। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों, शहरी इलाकों और आदिवासी अंचलों विशेषकर अलीराजपुर, झाबुआ और बड़वानी जैसे जिलों में जाकर जमीनी स्थिति का अध्ययन किया जाएगा।

     विभागों के बीच समन्वय होगा मजबूत

    अभी तक दिव्यांगजनों के लिए सामाजिक न्याय, शिक्षा, एमएसएमई और एनआरएलएम जैसे विभाग अलग-अलग योजनाएं चला रहे हैं। नई नीति के बाद इन सभी विभागों का काम एकीकृत ढांचे में होगा, जिससे योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होगा।

     नई पहल: अध्ययन और वैश्विक मॉडल का उपयोग

    नीति निर्माण के दौरान तेलंगाना और त्रिपुरा जैसे राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जाएगा। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मॉडल और विशेषज्ञों की राय को भी शामिल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि यह नीति सिर्फ कागजी न होकर जमीनी स्तर पर बदलाव लाने वाली साबित हो।

    आवास और पुनर्वास पर विशेष फोकस

    प्रस्तावित नीति में 18 वर्ष से अधिक आयु के मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संभाग स्तर पर 100 बिस्तरों वाले विशेष आश्रय गृह बनाने का सुझाव भी शामिल है। इससे पुनर्वास और देखभाल की व्यवस्था मजबूत होगी।

     डेटा और भविष्य की जरूरतें

    प्रदेश में 2011 की जनगणना और UDID के अनुसार करीब 10 लाख दिव्यांगजन दर्ज हैं। आगामी जनगणना में यह संख्या बढ़ सकती है क्योंकि अब 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को शामिल किया जाएगा, जिससे योजनाओं की जरूरत और अधिक व्यापक हो जाएगी।

    समान अवसरों की ओर बड़ा कदम

    यह नीति मध्यप्रदेश में दिव्यांगजनों के जीवन में समान अवसर, बेहतर सुविधाएं और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि यह सही ढंग से लागू होती है, तो यह देश के लिए एक मॉडल पॉलिसी भी बन सकती है।

  • MP के सांसदों को दक्षिण में झटका: तमिलनाडु-केरल में BJP को हार का सामना

    MP के सांसदों को दक्षिण में झटका: तमिलनाडु-केरल में BJP को हार का सामना

    नई दिल्ली। पांच राज्यों के चुनाव में जहां बीजेपी को कई जगहों पर सफलता मिली, वहीं मध्य प्रदेश के लिए दक्षिण भारत से निराशाजनक खबर सामने आई है। एमपी कोटे से राज्यसभा सांसद एल. मुरुगन और जॉर्ज कुरियन को क्रमशः तमिलनाडु और केरल में हार का सामना करना पड़ा।

    केरल में जॉर्ज कुरियन तीसरे नंबर पर

    केरल की कांजीरापल्ली सीट से चुनाव लड़ रहे जॉर्ज कुरियन मुख्य मुकाबले से बाहर नजर आए। उन्हें करीब 26,984 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे। इस सीट पर सीधा मुकाबला एलडीएफ और यूडीएफ के बीच रहा। कांग्रेस के उम्मीदवार रोनी के. बेबी ने 56,646 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि दूसरे स्थान पर डॉ. एन. जयराज रहे। करीब 29 हजार वोटों के बड़े अंतर से हार ने यह साफ कर दिया कि भाजपा इस सीट पर प्रभाव नहीं बना पाई।

    तमिलनाडु में मुरुगन को कड़ी टक्कर, पर जीत नहीं

    तमिलनाडु की अविनाशी (SC) सीट पर एल. मुरुगन ने जोरदार मुकाबला किया, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके। उन्हें करीब 68,836 वोट मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे। इस सीट पर बड़ा उलटफेर करते हुए तमिलगा वेत्री कड़गम के उम्मीदवार कमाली एस. ने 84,209 वोटों के साथ जीत दर्ज की। वहीं द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे। यह मुकाबला इसलिए भी खास रहा क्योंकि इसमें विजय की पार्टी का प्रभाव साफ तौर पर देखने को मिला।

     क्षेत्रीय राजनीति का असर भारी

    तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम गठबंधन और क्षेत्रीय पहचान की राजनीति का असर साफ नजर आया। वहीं केरल में परंपरागत रूप से मजबूत एलडीएफ और यूडीएफ के बीच भाजपा अपनी जगह नहीं बना सकी।

    कौन हैं ये दोनों नेता?

    एल. मुरुगन केंद्र सरकार में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री हैं और तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। वे दलित चेहरे के रूप में पार्टी के अहम नेता माने जाते हैं।

    वहीं जॉर्ज कुरियन केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण और मत्स्य पालन राज्य मंत्री हैं और केरल में भाजपा के पुराने चेहरों में शामिल हैं। उन्हें ईसाई समुदाय और पार्टी के बीच सेतु माना जाता है।

     दक्षिण में चुनौती बरकरार

    तमिलनाडु और केरल के नतीजे यह संकेत देते हैं कि दक्षिण भारत में भाजपा को अभी भी मजबूत पकड़ बनाने के लिए लंबा रास्ता तय करना है। क्षेत्रीय दलों और स्थानीय मुद्दों के सामने राष्ट्रीय चेहरों की रणनीति पूरी तरह सफल नहीं हो सकी।

  • नारद जयंती पर ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण और मीडिया’ का संदेश, डॉ. मयंक चतुर्वेदी ने रखा राष्ट्रीय दृष्टिकोण

    नारद जयंती पर ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण और मीडिया’ का संदेश, डॉ. मयंक चतुर्वेदी ने रखा राष्ट्रीय दृष्टिकोण


    करैरा । मध्य प्रदेश में शिवपुरी जिले के करैरा स्थित श्री रामराजा गार्डन में नारद जयंती के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रीय स्तर की वैचारिक दिशा देखने को मिली। युगल किशोर शर्मा (जिला ब्यूरो प्रमुख हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी)के संयोजन में हुए इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में भोपाल से पधारे प्रसिद्ध लेखक व विचारक डॉ. मयंक चतुर्वेदी (क्षेत्रीय संपादक हिन्दुस्थान समाचार न्यूज़ एजेंसी) ने अपने संबोधन से कार्यक्रम को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य प्रदान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ नारद जी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मंच पर विशिष्ट अतिथि ब्रह्मेन्द्र गुप्ता (उपयुक्त विकास), विकाश खण्ड शिक्षा अधिकारी मुकेश शर्मा, धैर्यवर्धन शर्मा (प्रवक्ता, भाजपा मध्यप्रदेश) सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे, अध्यक्षता समाजसेवी सुरेश बंधु ने की।

    सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर राष्ट्रीय दृष्टि
    अपने उद्बोधन में डॉ. मयंक चतुर्वेदी ने ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण और मीडिया’ विषय पर विस्तार से विचार रखते हुए कहा कि भारत की संस्कृति केवल परंपरा नहीं, बल्कि ज्ञान और विज्ञान का जीवंत स्रोत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत कभी निष्क्रिय नहीं रहा, बल्कि उसने सदैव विश्व कल्याण की दिशा में मार्गदर्शन किया है। उन्होंने आदि शंकराचार्य का उदाहरण देते हुए कहा कि अल्पायु में ही उन्होंने भारत को वैचारिक रूप से एकजुट कर चार धामों की स्थापना कर सांस्कृतिक पुनर्जागरण का मार्ग प्रशस्त किया। डॉ. चतुर्वेदी ने यह भी रेखांकित किया कि भारत ने सदियों तक बाहरी आक्रमणों का सामना करते हुए अपनी सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखा, जो आज भी समाज की मूल शक्ति है।
    विशिष्ट अतिथि ब्रह्मेन्द्र गुप्ता ने देवर्षि नारद को समाज जागरण का प्रतीक बताते हुए कहा कि संवाद और सूचना का सही उपयोग समाज को दिशा देता है। मीडिया की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में समाज की अपेक्षाएँ पत्रकारिता और न्याय व्यवस्था से जुड़ी हैं। मीडिया ही वह सेतु है जो समाज की समस्याओं और वास्तविकताओं को शासन तक पहुँचाता है, इसलिए उसकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। वहीं धैर्यवर्धन शर्मा ने चाणक्य और चन्द्रगुप्त मौर्य के उदाहरणों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में विचार और नेतृत्व की भूमिका को समझाया।
    इस अवसर पर समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाले समाजसेवियों और संस्थाओं को सम्मानित किया गया,जिसमें मुख्य रूप से गौ सेवा,शिक्षा और साहित्य, खेल, रोजगार और समाज सेवा के क्षेत्र में सेवा प्रदान करने वाले लोगों का सम्मान किया गया। जिसे डॉ. चतुर्वेदी ने एक अनुकरणीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और नई पीढ़ी को प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध कवि प्रमोद भारती ने किया, जबकि अंत में सुनील भार्गव ने वंदेमातरम गीत के साथ समारोह का समापन कराया।
  • खंडवा में बीजेपी कार्यकर्ताओं का जोरदार जश्न, पीएम मोदी की तस्वीरों के साथ बांटी गई झालमुड़ी, गूंजा शहर

    खंडवा में बीजेपी कार्यकर्ताओं का जोरदार जश्न, पीएम मोदी की तस्वीरों के साथ बांटी गई झालमुड़ी, गूंजा शहर

    मध्य प्रदेश के खंडवा में चुनावी रुझानों के बीच भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में बढ़त के संकेत सामने आते ही राजनीतिक माहौल पूरी तरह बदल गया। सुबह से ही पार्टी कार्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं की हलचल तेज थी और जैसे-जैसे नतीजों के रुझान स्पष्ट होते गए, वैसे-वैसे उत्साह भी बढ़ता गया। पूरे क्षेत्र में एक अलग ही ऊर्जा और जोश देखने को मिला, जहां कार्यकर्ता लगातार अपडेट पर नजर बनाए हुए थे।

    जैसे ही विभिन्न क्षेत्रों से पार्टी की बढ़त के संकेत मजबूत हुए, खंडवा में माहौल उत्सव में बदल गया। कार्यकर्ताओं ने अपनी खुशी का इजहार अनोखे अंदाज में किया और एक-दूसरे को बधाइयां देना शुरू कर दिया। इस दौरान प्रधानमंत्री की तस्वीरों को सामने रखकर कार्यकर्ताओं ने सम्मान और खुशी व्यक्त की। साथ ही झालमुड़ी बांटकर जीत की खुशी को साझा किया गया, जिससे माहौल और भी जीवंत हो गया।

    इस जश्न के दौरान आतिशबाजी ने पूरे आसमान को रोशन कर दिया और हर तरफ रंगीन रोशनी का नजारा देखने को मिला। पार्टी के झंडे लहराते हुए कार्यकर्ताओं ने लगातार नारेबाजी की और अपने उत्साह को खुलकर व्यक्त किया। सड़कें और पार्टी कार्यालय के आसपास का क्षेत्र कुछ समय के लिए पूरी तरह से उत्सव स्थल में बदल गया, जहां हर कोई इस खुशी के पल को जी रहा था।

    इस मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक-दूसरे को बधाई दी और इस बढ़त को जनता के विश्वास का परिणाम बताया। नेताओं का कहना था कि यह रुझान इस बात का संकेत है कि लोगों ने विकास और नेतृत्व पर भरोसा जताया है और यही कारण है कि पार्टी को यह समर्थन मिल रहा है।

    कार्यकर्ताओं ने इसे सिर्फ एक राजनीतिक सफलता नहीं, बल्कि जनता के विश्वास की जीत के रूप में देखा। उनका मानना था कि यह परिणाम उनके काम और जनता के बीच बने भरोसे का नतीजा है। जश्न के दौरान माहौल इतना उत्साहित था कि हर कोई इस पल को यादगार बनाने में जुटा हुआ था।

    खंडवा में यह उत्सव देर तक चलता रहा और लोग एक-दूसरे को बधाइयां देते रहे। चुनावी रुझानों ने जहां राजनीतिक हलचल को बढ़ाया, वहीं खंडवा में इसने एक बड़े सामूहिक जश्न का रूप ले लिया, जो लंबे समय तक लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहेगा।

  • ऋषि गालव विश्वविद्यालय के भूमिपूजन के साथ CM डॉ. मोहन यादव ने फूंका ज्ञान क्रांति का शंखनाद, मध्य प्रदेश बनेगा देश का एजुकेशन हब!

    ऋषि गालव विश्वविद्यालय के भूमिपूजन के साथ CM डॉ. मोहन यादव ने फूंका ज्ञान क्रांति का शंखनाद, मध्य प्रदेश बनेगा देश का एजुकेशन हब!


    मध्य प्रदेश
    की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी ग्वालियर अब ज्ञान और कौशल के नए वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्वालियर की इस पावन धरा पर ‘ऋषि गालव विश्वविद्यालय’ का विधि-विधान से भूमिपूजन कर प्रदेश के शिक्षा जगत में एक नए अध्याय की शुरुआत की है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्वालियर की वीरता, विद्वता और कला की त्रिवेणी का स्मरण करते हुए कहा कि एक विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाला केंद्र नहीं होता, बल्कि वह राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होता है। ऋषि गालव के नाम पर स्थापित होने वाला यह संस्थान हमारी भावी पीढ़ियों को आधुनिक तकनीक के साथ-साथ हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और संस्कारों से भी जोड़ेगा, ताकि वे राष्ट्र निर्माण के अग्रदूत बन सकें।

    मुख्यमंत्री ने मध्य भारत शिक्षा समिति के संस्थापक सदाशिव गणेश गोखले के महान योगदान की सराहना करते हुए कहा कि पराधीनता के कठिन समय में वर्ष 1941 में जो दीया एक छोटे से स्कूल के रूप में जलाया गया था, वह आज चार महाविद्यालयों, पांच विद्यालयों और एक खेल अकादमी के रूप में एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। वर्तमान में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षित कर रही यह संस्था अब विश्वविद्यालय के रूप में भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के संगम का केंद्र बनेगी। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे नागरिकों का निर्माण करना है जो न केवल तकनीकी रूप से दक्ष हों, बल्कि चरित्रवान, नवाचारी और समाज के प्रति पूर्णतः उत्तरदायी भी हों। सरकार और समाज के सामूहिक प्रयासों का यह अनूठा उदाहरण प्रदेश के शैक्षणिक ढांचे को नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा।

    शिक्षा प्रणाली में बदलाव की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने नई शिक्षा नीति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और इसी को आधार मानकर प्रदेश में कई क्रांतिकारी नवाचार किए गए हैं। अब दीक्षांत समारोहों में औपनिवेशिक काल के काले कोट के स्थान पर भारतीय वेशभूषा और साफे की परंपरा को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही, विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को ‘कुलगुरु’ का गौरवपूर्ण संबोधन दिया गया है, जो हमारी गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति सम्मान को दर्शाता है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि शिक्षा में अमीर-गरीब का भेद समाप्त होना चाहिए और सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से चरित्र निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    मध्य प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा के लोकतंत्रीकरण के लिए निरंतर कार्यरत है, जिसके तहत प्रदेश के सभी 55 जिलों में ‘पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना की जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने गुमनाम नायकों और महान क्रांतिकारियों के सम्मान में तात्या टोपे विश्वविद्यालय, क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय और रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों की स्थापना की है, ताकि युवा पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरित हो सके। उन्होंने विश्वास जताया कि ग्वालियर का यह नया विश्वविद्यालय अगले वर्ष गुरु पूर्णिमा तक अपना कार्य प्रारंभ कर देगा और ग्वालियर न केवल मध्य भारत, बल्कि पूरे देश में शिक्षा के एक प्रमुख केंद्र (एजुकेशन हब) के रूप में नई चमक बिखेरेगा। यह संस्थान राष्ट्रवाद की भावना से ओतप्रोत होकर छात्रों के भीतर योग्यता और दक्षता का नया संचार करेगा।