Category: Madhya Pradesh

  • मध्य प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध

    मध्य प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है तथा इनके वितरण में किसी प्रकार की कमी या बाधा नहीं है।

    यह जानकारी शनिवार को प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने दी। उन्होंने बताया कि देश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से कार्य कर रही हैं और कच्चे तेल का भंडार भी पर्याप्त है, जिससे ईंधन आपूर्ति में किसी प्रकार की रुकावट नहीं आएगी।

    मंत्री राजपूत ने बताया कि प्रदेश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता की स्थिति सामान्य है और सभी ऑयल कंपनियों के पास पेट्रोल (एमएस) और डीजल (एचएसडी) का पर्याप्त भंडार मौजूद है। पेट्रोल पंपों पर भी ईंधन की किसी प्रकार की कमी नहीं है तथा कंपनी के डिपो से पेट्रोल और डीजल की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।


    रसोई गैस की उपलब्धता पर्याप्त

    मंत्री राजपूत ने बताया कि एलपीजी बॉटलिंग प्लांटों में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा गया है। उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी प्लांट अतिरिक्त समय तक कार्य कर रहे हैं, जिससे किसी भी स्थिति में रसोई गैस की उपलब्धता प्रभावित न हो।


    बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए विशेष व्यवस्था

    राजपूत ने बताया कि प्रदेश में ईंधन की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए सभी सप्लाई लोकेशन को अधिक समय तक संचालित किया जा रहा है, जिससे आपूर्ति को सुचारु बनाए रखते हुए स्थिति को सामान्य रखा जा सके।


    कालाबाजारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई

    मंत्री राजपूत ने बताया कि प्रदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिए निरंतर कार्रवाई की जा रही है। अब तक 2050 स्थानों पर जांच की गई है, जिसमें 2912 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए हैं और 9 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई है।


    पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने में तेजी

    उन्होंने बताया कि प्रदेश में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। लंबित अनुमतियों को शीघ्र प्रदान करने और नई अनुज्ञप्तियां 24 कार्यकारी घंटों में जारी करने के लिए संबंधित विभागों द्वारा कार्रवाई की जा रही है।

    मंत्री राजपूत ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में सीजीडी (City Gas Distribution) संस्थाओं द्वारा 2,14,980 घरेलू, 535 औद्योगिक और 661 वाणिज्यिक पीएनजी कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। विभिन्न प्रकार की अनुमतियां प्रदान करने के लिए सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

    ऑयल कंपनियों आईओसीएल (IOCL), बीपीसीएल (BPCL) और एचपीसीएल (HPCL) तथा सीजीडी संस्थाओं के बीच आवश्यक समन्वय स्थापित कर भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।

    मंत्री राजपूत ने आम नागरिकों से अपील की है कि प्रदेश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है, इसलिए किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि नागरिक आवश्यकतानुसार ही पेट्रोल और डीजल खरीदें तथा अनावश्यक संग्रह न करें। सरकार द्वारा प्रदेश में पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में आवेदन कर पीएनजी कनेक्शन लेने की भी अपील की गई है।

  • उज्जैनः पंचक्रोशी यात्रा 12 अप्रैल से, अधिकारियों ने मार्ग का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का लिया जायजा

    उज्जैनः पंचक्रोशी यात्रा 12 अप्रैल से, अधिकारियों ने मार्ग का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का लिया जायजा


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश के उज्जैन में पंचक्रोशी यात्रा 12 अप्रैल से प्रारंभ होगी। इसी के मद्देनजर शनिवार को वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने पंचक्रोशी यात्रा मार्ग का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

    सर्वप्रथम संभागायुक्त आशीष सिंह, डीआईजी नवनीत भसीन, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने पटनी बाजार स्थित नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर पूजन अर्चन किया और मंदिर परिसर में पानी की टंकी की सफाई, परिसर की साफ-सफाई , सीसीटीवी कैमरे, लाइट तथा एलईडी स्क्रीन की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

    इसके बाद अधिकारियों द्वारा बस से यात्रा कर उंडासा, पिंगलेश्वर, शनि मंदिर त्रिवेणी, करोहन, नलवा, अंबोदिया, पड़ाव व उप पड़ाव स्थलों का निरीक्षण किया गया। संभागायुक्त ने निर्देश दिए कि पड़ाव स्थलों के बीच भी कुछ-कुछ स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था की जाए तथा जो भी बड़े खुले कुएं रास्ते में आ रहे हैं अथवा जहां नवीन पुल-पुलियाओं का निर्माण चल रहा है वहां सुरक्षा की दृष्टि से बैरिकेडिंग की जाए। साथ ही रात में अतिरिक्त रोशनी की व्यवस्था की जाए।

    पिंगलेश्वर में रेलवे ओवरब्रिज के नीचे सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। अस्थाई शौचालयों, लाइट , पेयजल के लिए टैंकर की व्यवस्था पर्याप्त संख्या में की जाए। त्रिवेणी में श्रद्धालुओं के स्नान के लिए शावर्स लगाए जाएं।

    अंबोदिया में व्यवस्थाओं के संबंध में ली गई बैठक में कलेक्टर सिंह ने निर्देश दिए कि वर्तमान में सिंहस्थ महापर्व के अंतर्गत निर्माण कार्य प्रगतिरत हैं। पंचक्रोशी यात्रा के दौरान नये कार्य प्रारंभ न किये जाएं, वर्तमान में चल रहे कार्यों के तेज गति से पूर्ण करें। पंचक्रोशी यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। यात्रा मार्ग में कुछ स्थानों पर मुरम डाल कर समतलीकरण किया जाए। इसके अलावा जिन विभागों को यात्रा के संबंध में जो दायित्व सौंपे गए हैं, वे आगामी 05 अप्रैल तक सभी व्यवस्थाएं पूर्ण कर लें।

    पुलिस अधीक्षक शर्मा ने निर्देश दिए कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए। ड्यूटीरत अधिकारी व कर्मचारी अपनी शिफ्ट समाप्त होने पर रिलिवर के आने के पश्चात ही कर्तव्य स्थल छोड़ें, निर्धारित समय पर अपने कर्तव्य स्थल पर पहुंचे। श्रद्धालुओं के लिए यात्रा के सुखद अनुभव के लिए सभी मिलकर प्रयास करें।

  • सीएम डॉ. मोहन यादव की पहल, एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन से विकास का नया मॉडल तैयार

    सीएम डॉ. मोहन यादव की पहल, एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन से विकास का नया मॉडल तैयार


    भोपाल । मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच आर्थिक सांस्कृतिक और औद्योगिक सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से 31 मार्च 2026 को एमपी यूपी सहयोग सम्मेलन 2026 का आयोजन वाराणसी में किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में आयोजित यह सम्मेलन अंतरराज्यीय सहयोग को केवल नीतिगत स्तर तक सीमित न रखकर उसे व्यावहारिक और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

    इस सम्मेलन की शुरुआत काशी के प्रतिष्ठित काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के अध्ययन भ्रमण से होगी जहां तीर्थस्थल प्रबंधन क्राउड कंट्रोल और आधुनिक अधोसंरचना के सफल मॉडल का अवलोकन किया जाएगा। इस अनुभव के आधार पर मध्यप्रदेश में धार्मिक स्थलों के विकास और सुविधाओं के विस्तार की दिशा में ठोस रणनीति तैयार की जाएगी जिससे तीर्थ पर्यटन को और अधिक सुव्यवस्थित बनाया जा सके।

    सम्मेलन का प्रमुख फोकस ओडीओपी जीआई टैग उत्पादों पारंपरिक शिल्प कृषि और फूड उत्पादों को एकीकृत मंच प्रदान करना होगा। उत्तरप्रदेश की ओडीओपी पहल के अनुभवों से यह समझ विकसित की जाएगी कि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में कैसे प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है। दोनों राज्यों के उत्पादों को साझा ब्रांडिंग के तहत प्रस्तुत करने से निर्यात को बढ़ावा मिलने और मूल्य संवर्धन के नए अवसर खुलने की संभावना है।

    इस अवसर पर मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच कई महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे जिनके माध्यम से व्यापार औद्योगिक निवेश कौशल विकास और पर्यटन क्षेत्र में साझेदारी को औपचारिक रूप दिया जाएगा। यह समझौते केवल दस्तावेजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि जमीनी स्तर पर लागू कर उद्योगों उद्यमियों और शिल्पकारों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

    सम्मेलन में उद्योग जगत निवेशकों नीति निर्माताओं और शिल्पकारों को एक साझा मंच मिलेगा जहां वे निवेश अवसरों लॉजिस्टिक्स अधोसंरचना और नीतिगत प्रोत्साहनों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। वस्त्र हस्तशिल्प एमएसएमई खाद्य प्रसंस्करण और पर्यटन जैसे विविध क्षेत्रों की सहभागिता इस आयोजन को बहुआयामी बनाएगी और उद्योग सरकार समन्वय को नई मजबूती देगी।

    इसके साथ ही आयोजित प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं ओडीओपी उत्पादों जीआई टैग हस्तशिल्प और प्रमुख पर्यटन स्थलों को एकीकृत रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। यह प्रदर्शनी निवेशकों के लिए राज्य की संभावनाओं को समझने और उनसे जुड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगी।

    शिल्पकारों के लिए गंगा नर्मदा क्राफ्ट कॉरिडोर जैसी अभिनव पहल भी इस सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण रहेगी जिसमें चंदेरी और महेश्वरी शिल्पकार बनारसी कारीगरों के साथ मिलकर साझा ब्रांडिंग और बाजार विस्तार पर काम करेंगे। इससे पारंपरिक शिल्प को नई पहचान मिलने के साथ कारीगरों की आय और आजीविका में वृद्धि होगी।

    धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काशी उज्जैन चित्रकूट सर्किट पर भी विशेष चर्चा होगी जिसमें पर्यटन को एक संयुक्त उत्पाद के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जाएगी। इस पहल से दोनों राज्यों में पर्यटकों की संख्या बढ़ने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    कुल मिलाकर यह सम्मेलन निवेश निर्यात रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए विकास का एक नया मॉडल प्रस्तुत करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में यह पहल मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच सहयोग को दीर्घकालिक और परिणामदायी दिशा देने की ओर एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

  • झाड़-फूंक के बहाने महिला से ठगी, अश्लील फोटो खींच धर्म परिवर्तन का दबाव; आरोपी गिरफ्तार

    झाड़-फूंक के बहाने महिला से ठगी, अश्लील फोटो खींच धर्म परिवर्तन का दबाव; आरोपी गिरफ्तार


    रीवा।
     मध्‍यप्रदेश के रीवा जिले में झाड़-फूंक के बहाने महिला को फंसाकर उसकी अश्लील तस्वीरें खींचने और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का मामला सामने आया है। विरोध करने पर आरोपी ने कथित तौर पर तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर दीं। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

    घटना जवा थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार आरोपी अनीस मोहम्मद ने महिला को तंत्र-मंत्र से बीमारी ठीक करने का झांसा दिया और धीरे-धीरे उससे नजदीकियां बढ़ाईं। आरोप है कि उसने महिला को नशीली गोलियां खिलाकर उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें खींच लीं।

    बताया जा रहा है कि इसके बाद आरोपी महिला पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा। जब महिला ने इनकार किया तो आरोपी ने कथित तौर पर उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर दीं।

    मामले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने बताया कि आरोपी वर्ष 2022 से महिला के संपर्क में था। उसने झाड़-फूंक के बहाने विश्वास हासिल किया और बाद में फोटो खींचकर ब्लैकमेल करने लगा।

    पुलिस के मुताबिक आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। जांच जारी है।

  • MP में EMI मॉडल पर सरकार, नेता प्रतिपक्ष ने उठाए मुआवजा और कर्ज पर गंभीर सवाल

    MP में EMI मॉडल पर सरकार, नेता प्रतिपक्ष ने उठाए मुआवजा और कर्ज पर गंभीर सवाल

    भोपाल: मध्यप्रदेश में छिंदवाड़ा हादसे के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार की मुआवजा नीति और प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिंघार ने कहा कि प्रदेश में अब तक कोई समान कंपनसेशन पॉलिसी नहीं बनाई गई। उन्होंने बताया कि सरकार घोषणाएं तो कर देती है, लेकिन पीड़ित व्यक्ति को विभागों के चक्कर लगाते रहना पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को एक स्पष्ट और सरल मुआवजा नीति बनानी चाहिए, जिससे किसी दुर्घटना के पीड़ित परिवारों को तुरंत राहत मिल सके।

    सिंघार ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की सभा में शामिल न होने पर छिंदवाड़ा में अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की चेतावनी देने वाले पत्र जारी किए गए। इसके अलावा उन्होंने लाड़ली बहना योजना की राशि न मिलने की धमकी भी देने का आरोप लगाया। सिंघार ने कहा कि जिन टेंडरों में कमीशन मिलता है, उनके लिए सरकार तुरंत पॉलिसी बना देती है, लेकिन गरीब और पीड़ित परिवारों के लिए कोई ठोस नीति नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार ऐसे मामलों के लिए कोई सिंगल विंडो सिस्टम बनाएगी ताकि जनता को लगातार विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ें।

    एलपीजी गैस और व्यापारियों के मुद्दे पर भी सिंघार ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने एलपीजी गैस की अल्टरनेटिव पॉलिसी नहीं बताई और न ही यह स्पष्ट किया कि रिजर्व कितना है। इसके अलावा होटल व्यवसायियों और छोटे दुकानदारों के भविष्य और उनके व्यवसाय सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने सरकार की नीति पर सवाल खड़ा किया।

    सिंघार ने पिछले पांच वर्षों के आंकड़े पेश किए और बताया कि प्रदेश में 65 हजार से ज्यादा दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें 14,791 लोगों की मौत हुई। इस मामले में मध्यप्रदेश देश में दूसरे नंबर पर है। उनके अनुसार यह स्थिति सीधे तौर पर सरकार की विफलता को दर्शाती है।

    नेता प्रतिपक्ष ने मध्यप्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कर्ज लेने में माहिर हैं और प्रदेश को “EMI मॉडल” पर चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दो दशकों में भाजपा सरकार ने विकास के नाम पर लाखों करोड़ का कर्ज लिया, लेकिन सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में हालात जस के तस हैं। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष खत्म होने तक चौथी बार 2,500 करोड़ का कर्ज लिया गया और इस साल कुल कर्ज 91,500 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। सिंघार ने सवाल उठाया कि क्या सरकार ने तय कर लिया है कि प्रदेश को कर्ज में डुबोकर ही छोड़ेगी।

    सिंघार ने कहा कि जनता टैक्स पर टैक्स दे रही है, महंगाई झेल रही है, लेकिन सरकार बिना किसी रोडमैप और पारदर्शिता के कर्ज ले रही है। उन्होंने पूछा कि आखिर यह कर्ज किस योजना में लगा और इसका क्या परिणाम निकला। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को इसका जवाब देना होगा।

    सिंघार के अनुसार यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी है। उन्होंने प्रदेश सरकार को चेताया कि अब गरीबों और पीड़ित परिवारों के हितों को प्राथमिकता दी जाए और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

  • इंदौरः महू में दर्दनाक हादसा, कार में आग लगने से 4 वर्षीय बच्चे की जलकर मौत

    इंदौरः महू में दर्दनाक हादसा, कार में आग लगने से 4 वर्षीय बच्चे की जलकर मौत


    इंदौर । जिले के महू क्षेत्र में शनिवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे में चार वर्षीय बच्चे की कार में जलकर मौत हो गई। घटना सिमरोल थाना क्षेत्र की है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, चिराग नामक बच्चा अपने पिता संजय बढ़िया के साथ इंदौर-खंडवा रोड स्थित एक कार्यस्थल पर गया था। संजय, जो पेशे से मैकेनिक हैं, कार के बाहर काम में व्यस्त थे, जबकि बच्चा वाहन के अंदर बैठा हुआ था।
    इसी दौरान अचानक कार से धुआं उठने लगा और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी कार कुछ ही देर में जलकर खाक हो गई। मौके पर मौजूद लोगों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन लपटों की तीव्रता के कारण वे सफल नहीं हो सके।

    सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी। आग बुझाने के बाद कार के अंदर से बच्चे का जला हुआ शव बरामद किया गया। थाना प्रभारी कुलदीप खत्री के अनुसार, टीम के पहुंचने से पहले ही बच्चे ने दम तोड़ दिया था।

    प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए महू सिविल अस्पताल भेजा गया है। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है।

  • बीजेपी पार्षद पर हमला करने का आरोपः बिजली कर्मचारियों से मारपीट, गाड़ी में तोड़फोड़ से हड़कंप

    बीजेपी पार्षद पर हमला करने का आरोपः बिजली कर्मचारियों से मारपीट, गाड़ी में तोड़फोड़ से हड़कंप


    सिंगरौली । मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में एक बार फिर जनप्रतिनिधि की दबंगई का मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोतवाली थाना क्षेत्र के कचनी मोड़ पर हुई इस घटना ने बिजली विभाग के कर्मचारियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। आरोप है कि बीजेपी पार्षद संतोष शाह ने अपने साथियों के साथ मिलकर बिजली विभाग की मेंटेनेंस टीम पर हमला करवा दिया, जिसमें न केवल कर्मचारियों के साथ मारपीट की गई बल्कि विभागीय वाहन को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

    बताया जा रहा है कि बिजली विभाग की टीम नियमित मेंटेनेंस कार्य के लिए क्षेत्र में पहुंची थी। इसी दौरान किसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते हिंसक रूप ले बैठा। आरोप है कि पार्षद के इशारे पर मौजूद लोगों ने टीम को घेर लिया और उनके साथ अभद्रता करते हुए मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान विभाग की गाड़ी के शीशे तोड़ दिए गए और मौके पर अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    घटना के बाद किसी तरह कर्मचारी वहां से अपनी जान बचाकर निकले और सीधे कोतवाली थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे थे, लेकिन उनके साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया वह बेहद निंदनीय और अस्वीकार्य है। उन्होंने इस पूरे मामले में तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    इस घटना के बाद बिजली विभाग के कर्मचारियों में भारी रोष है। कर्मचारियों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि आरोपियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे काम बंद आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। इससे न केवल सिंगरौली जिले की बिजली व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, बल्कि आम जनता को भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि अब तक आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि ही कानून को हाथ में लेंगे तो आम कर्मचारियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।

    यह घटना न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकारी कामकाज में लगे कर्मचारियों को कई बार किस तरह के दबाव और जोखिम का सामना करना पड़ता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है, ताकि कर्मचारियों में विश्वास बहाल हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

  • मध्यप्रदेश में आग का कहरः खेतों से शहर तक भड़की लपटें, किसानों की मेहनत राख

    मध्यप्रदेश में आग का कहरः खेतों से शहर तक भड़की लपटें, किसानों की मेहनत राख


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में तापमान बढ़ने के साथ ही आगजनी की घटनाओं ने भयावह रूप लेना शुरू कर दिया है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से सामने आई घटनाओं ने न केवल प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि आमजन और खासकर किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। भोपाल से लेकर बैतूल, ग्वालियर, झाबुआ, छिंदवाड़ा और नर्मदापुरम तक आग ने ऐसा तांडव मचाया कि देखते ही देखते लाखों की संपत्ति जलकर खाक हो गई।

    भोपाल जिले के ग्राम कुठार में खड़ी गेहूं की फसल में अचानक आग भड़क उठी। तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैली और करीब 15 एकड़ में खड़ी फसल जलकर राख हो गई। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर पानी और ट्रैक्टर ट्रॉली की मदद से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक भारी नुकसान हो चुका था। किसानों की सालभर की मेहनत कुछ ही पलों में खत्म हो गई और वे अब मुआवजे की उम्मीद में प्रशासन की ओर देख रहे हैं।

    उधर ग्वालियर में एक इलेक्ट्रिक वाहन चलते-चलते आग की चपेट में आ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वाहन की बैटरी में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी और कुछ ही देर में पूरा वाहन धू-धू कर जलने लगा। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसने EV सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    झाबुआ जिले के रायपुरिया में एक खेत में लगे मोबाइल टावर में आग लगने से हड़कंप मच गया। टावर से उठती लपटों को देखकर आसपास के ग्रामीण और दुकानदार मौके पर इकट्ठा हो गए। आग में टावर पर लगे महंगे उपकरण और केबल जलकर नष्ट हो गए। पेटलावद से फायर ब्रिगेड पहुंची, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। क्षेत्र में स्थायी फायर ब्रिगेड की व्यवस्था न होने से लोगों में आक्रोश भी देखने को मिला।

    छिंदवाड़ा में छोटा तालाब क्षेत्र स्थित तिलक मार्केट में एक मशीनरी टूल्स की दुकान में देर रात आग लग गई। धुएं के गुबार से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही तीन दमकल वाहन मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। प्रारंभिक जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है।

    नर्मदापुरम के इटारसी में रेलवे स्टेशन के सामने स्थित एक भोजनालय में भी आग लगने की घटना सामने आई। स्थानीय लोगों की सतर्कता से तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई, जिसके बाद आग पर समय रहते नियंत्रण पा लिया गया। हालांकि आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है और पुलिस जांच कर रही है।

    सबसे भयावह स्थिति बैतूल जिले में देखने को मिली, जहां आग ने कई गांवों में तबाही मचा दी। शाहपुर ब्लॉक के सांगवानी गांव में 13 किसानों की करीब 20 एकड़ गेहूं की फसल जल गई। लगभग 300 क्विंटल गेहूं आग की भेंट चढ़ गया। सिलपटी गांव में भी 5 एकड़ फसल नष्ट हो गई। आग इतनी तेजी से फैली कि किसान अपनी जान बचाकर भागने को मजबूर हो गए। जिले के आठ गांवों में फैली इस आग ने किसानों को आर्थिक रूप से तोड़कर रख दिया है।

    लगातार बढ़ती इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि गर्मी के मौसम में आगजनी की रोकथाम के लिए ठोस और त्वरित उपायों की आवश्यकता है। प्रशासन द्वारा नुकसान का आंकलन किया जा रहा है, लेकिन प्रभावित लोग जल्द से जल्द राहत और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

  • जमाखोरी पर बड़ा एक्शन LPG जब्ती और FIR तेज मांग से पेट्रोल डीजल व्यवस्था पर दबाव

    जमाखोरी पर बड़ा एक्शन LPG जब्ती और FIR तेज मांग से पेट्रोल डीजल व्यवस्था पर दबाव


    भोपाल । मध्यप्रदेश में गैस सिलेंडर और पेट्रोल डीजल की आपूर्ति को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जमाखोरी और अनियमितताओं पर बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। राजधानी भोपाल सहित प्रदेशभर में अब तक 9 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है जबकि 2888 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए हैं। यह कार्रवाई आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत की गई है जिसका उद्देश्य जरूरी वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाना है।

    प्रशासन को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाया गया जिसमें अब तक 2046 स्थानों पर छापेमारी और निरीक्षण किया गया। इन कार्रवाइयों के दौरान बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर अवैध रूप से संग्रहित पाए गए जिन्हें तुरंत जब्त कर लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि राज्य में एलपीजी और पेट्रोल डीजल का कुल स्टॉक पर्याप्त है और आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं है।

    हालांकि दूसरी ओर जमीनी स्थिति कुछ जिलों में अलग नजर आ रही है। पेट्रोल और डीजल की सामान्य दैनिक बिक्री जहां लगभग 18548 लाख लीटर रहती है वहीं हाल के दिनों में कई जिलों में इसकी मांग 2 से 2.5 गुना तक बढ़ गई है। इस अचानक बढ़ी मांग के चलते कई पेट्रोल पंपों पर लंबी लंबी कतारें देखी गईं और कुछ स्थानों पर अस्थायी रूप से स्टॉक खत्म होने जैसी स्थिति भी बन गई। सप्लाई को सुचारू बनाए रखने के लिए वितरण केंद्रों पर अतिरिक्त समय तक काम किया जा रहा है ताकि मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाया जा सके।

    इसी बीच पेट्रोल पंप संचालकों के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है। पेट्रोलियम कंपनियों ने अब तक दी जाने वाली क्रेडिट सुविधा को बंद कर दिया है जिसके तहत पंप संचालकों को भुगतान के लिए एक सप्ताह का समय मिलता था। इस व्यवस्था के खत्म होने से कई पेट्रोल पंपों पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है और कुछ पंपों पर ईंधन की उपलब्धता संकट के स्तर तक पहुंच गई है।

    पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए मुख्य सचिव को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि तेल कंपनियां न तो उधारी की सुविधा दे रही हैं और न ही पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित कर रही हैं जिससे पंप संचालकों के सामने संचालन का संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश में कुल करीब 4500 पेट्रोल पंप संचालित हैं जिनमें से लगभग 260 केवल भोपाल में हैं। ऐसे में यदि सप्लाई और भुगतान की स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

    कुल मिलाकर एक तरफ प्रशासन जमाखोरी पर सख्ती दिखा रहा है तो दूसरी ओर बढ़ती मांग और बदली हुई सप्लाई व्यवस्था ने स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और तेल कंपनियां मिलकर इस संकट का समाधान कैसे निकालती हैं ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

  • सुसनेर से कुरावर जा रही बस बनी हादसे का शिकार तेज रफ्तार ने ली एक जान

    सुसनेर से कुरावर जा रही बस बनी हादसे का शिकार तेज रफ्तार ने ली एक जान


    शाजापुर । मध्यप्रदेश में लगातार बढ़ते सड़क हादसे एक बार फिर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं और ताजा मामला आगर मालवा जिले से सामने आया है जहां तेज रफ्तार का कहर एक और जान ले गया। सुसनेर से कुरावर जा रही एक निजी यात्री बस अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई जिससे मौके पर अफरा तफरी और चीख पुकार मच गई। इस दर्दनाक हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि एक दर्जन से अधिक यात्री घायल हो गए जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    जानकारी के अनुसार यह बस सुसनेर से कुरावर की ओर जा रही थी तभी बड़ागांव के पास चालक बस पर नियंत्रण खो बैठा और वाहन सड़क किनारे पलट गया। बस के पलटते ही यात्रियों में चीख पुकार मच गई और कई लोग अंदर ही फंस गए। आसपास के ग्रामीणों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया और स्थानीय लोगों की मदद से बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला गया।

    घटना के तुरंत बाद सभी घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को नलखेड़ा के अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो पाई है और पुलिस उसकी शिनाख्त करने में जुटी हुई है।

    हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में बस की तेज रफ्तार और चालक की लापरवाही को हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है हालांकि तकनीकी खराबी या अन्य कारणों की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

    इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में लगातार हो रहे ऐसे हादसे यह संकेत देते हैं कि यातायात नियमों का पालन और वाहनों की नियमित जांच बेहद जरूरी है। खासकर निजी बसों में ओवरस्पीडिंग और लापरवाही से वाहन चलाने की घटनाएं आम होती जा रही हैं जो यात्रियों की जान के लिए खतरा बन रही हैं।

    जरूरत इस बात की है कि प्रशासन सख्ती दिखाते हुए नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे और लोगों में भी सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए ताकि इस तरह के दर्दनाक हादसों को रोका जा सके। फिलहाल इस दुर्घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है और लोग घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।