Category: Madhya Pradesh

  • गंदे पानी से बड़वानी में बवाल: सीवरेज लीकेज पर सड़क पर उतरे पार्षद और रहवासी

    गंदे पानी से बड़वानी में बवाल: सीवरेज लीकेज पर सड़क पर उतरे पार्षद और रहवासी


    बड़वानी । मध्यप्रदेश के बड़वानी शहर में उस समय हालात बिगड़ गए जब कालका माता मंदिर क्षेत्र में सीवरेज और पेयजल लाइनों में लीकेज के चलते घरों तक गंदे और बदबूदार पानी की सप्लाई होने लगी। जैसे ही लोगों ने नलों से दूषित पानी निकलते देखा, पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया और वार्डवासियों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया। समस्या से नाराज कांग्रेस पार्षदों ने भी मोर्चा संभालते हुए सड़क पर धरना शुरू कर दिया और नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में सीवरेज लाइन का काम चल रहा था, लेकिन निर्माण कार्य के दौरान भारी लापरवाही बरती गई। धरना स्थल पर पहुंचे नगर पालिका के नेता प्रतिपक्ष राकेश सिंह जाधव ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सीवरेज कार्य के दौरान मुख्य पेयजल लाइन को नुकसान पहुंचा दिया गया, जिसके चलते यह स्थिति बनी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नियमों के अनुसार पेयजल और सीवरेज पाइपलाइन को साथ में नहीं डाला जा सकता, लेकिन यहां नियमों की अनदेखी करते हुए काम किया गया है।

    वार्ड नंबर 14 के पार्षद प्रतिनिधि हेमंत कुमावत ने भी प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि दूषित पानी की समस्या की जानकारी एक दिन पहले ही अधिकारियों को दे दी गई थी, लेकिन समय पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके चलते अब हालात ऐसे बन गए हैं कि क्षेत्र में महामारी और जलजनित बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ गया है। लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि जिम्मेदार अधिकारी शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहे और केवल आश्वासन देकर मामले को टालने की कोशिश कर रहे हैं।

    जैसे ही प्रदर्शन की सूचना प्रशासन तक पहुंची, नगर पालिका के इंजीनियर और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें भरोसा दिलाया कि समस्या का जल्द समाधान किया जाएगा। साथ ही संबंधित ठेकेदार को तत्काल लीकेज ठीक करने के निर्देश भी दिए गए। इसके बाद कुछ हद तक स्थिति शांत हुई, लेकिन लोगों का गुस्सा पूरी तरह ठंडा नहीं पड़ा है।

    पार्षदों और स्थानीय निवासियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन की टीम सुधार कार्य में जुटी हुई है, लेकिन यह घटना एक बार फिर शहरी विकास कार्यों में लापरवाही और निगरानी की कमी को उजागर करती है, जिससे आम नागरिकों को सीधे तौर पर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

  • कटनी के DAV स्कूल में भीषण आग कंप्यूटर लैब खाक सुरक्षा इंतजामों पर उठे गंभीर सवाल

    कटनी के DAV स्कूल में भीषण आग कंप्यूटर लैब खाक सुरक्षा इंतजामों पर उठे गंभीर सवाल

    कटनी । मध्यप्रदेश के कटनी में स्थित DAV पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल में बुधवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब अचानक स्कूल भवन से उठती आग की लपटों ने पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। कुछ ही मिनटों में स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कंप्यूटर लैब समेत कई कमरे जलकर राख हो गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी भी छात्र या स्टाफ की जान नहीं गई लेकिन नुकसान काफी बड़ा बताया जा रहा है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दोपहर के समय स्कूल भवन से अचानक धुआं उठता दिखाई दिया। शुरुआत में किसी को अंदाजा नहीं था कि यह आग इतनी तेजी से फैल जाएगी लेकिन देखते ही देखते कंप्यूटर लैब में आग ने विकराल रूप ले लिया। लैब में रखे दर्जनों कंप्यूटर फर्नीचर और जरूरी शैक्षणिक दस्तावेज पूरी तरह जलकर खाक हो गए। इससे स्कूल के संचालन और छात्रों के रिकॉर्ड पर भी बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    घटना की सूचना मिलते ही नगर निगम की दमकल टीम मौके पर पहुंची। पहले एक फायर ब्रिगेड वाहन भेजा गया लेकिन आग की तीव्रता को देखते हुए अतिरिक्त वाहन भी बुलाए गए। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और बड़े हादसे को टालने में सफलता हासिल की। यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया जाता तो यह और भी बड़े हिस्से को नुकसान पहुंचा सकती थी।

    इस हादसे ने स्कूल प्रशासन के सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। कई उपकरण या तो काम नहीं कर रहे थे या उनकी संख्या बेहद कम थी। इसी कारण आग तेजी से फैलती चली गई और उसे शुरुआती स्तर पर नियंत्रित नहीं किया जा सका।

    सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि आग लगने के दौरान आपातकालीन निकास व्यवस्था और बचाव प्रक्रिया भी प्रभावी नजर नहीं आई। स्टाफ के पास ऐसी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण या संसाधन नहीं थे जिससे स्थिति और बिगड़ सकती थी। हालांकि सौभाग्य से उस समय सभी छात्र सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए और कोई जनहानि नहीं हुई।

    प्राथमिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है लेकिन पुलिस और प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। कुठला थाना पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर सुरक्षा मानकों में कहां चूक हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

    यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि स्कूल जैसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इसके लिए नियमित निरीक्षण और अपडेटेड फायर सेफ्टी सिस्टम अनिवार्य हैं। अब देखना होगा कि इस हादसे के बाद प्रशासन क्या सख्त कदम उठाता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • ट्रैक्टर रैली के बाद रुका आंदोलन पर खत्म नहीं हुआ गुस्सा किसान बोले कागज पर भरोसा चाहिए

    ट्रैक्टर रैली के बाद रुका आंदोलन पर खत्म नहीं हुआ गुस्सा किसान बोले कागज पर भरोसा चाहिए


    हरदा ।मध्यप्रदेश के हरदा जिले में किसानों का उबाल फिलहाल दो दिनों के लिए थम जरूर गया है लेकिन हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। किसान जन क्रांति आंदोलन के तहत हजारों किसानों ने अपनी मांगों को लेकर जिस तरह से एकजुटता दिखाई उसने प्रशासन को भी सक्रिय होने पर मजबूर कर दिया। हालांकि बातचीत के बाद आंदोलन को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है लेकिन किसानों का साफ कहना है कि जब तक उन्हें लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा तब तक उनका भरोसा नहीं बनेगा।

    बुधवार को जिले में बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर रैली निकालते हुए कृषि उपज मंडी पहुंचे जहां उन्होंने MSP और गेहूं की स्लॉट बुकिंग में हो रही देरी समेत कई मुद्दों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि लंबे समय से वे इन समस्याओं से जूझ रहे हैं लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ठोस समाधान नहीं निकल पा रहा है। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने आंदोलन का रास्ता चुना और अपनी आवाज बुलंद की।

    प्रदर्शन के दौरान मौके पर पहुंचे दिवाकर नारायण पटेल ने किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। अधिकारियों और किसानों के बीच हुई चर्चा में यह सहमति बनी कि गेहूं स्लॉट बुकिंग की समस्या को अगले दो दिनों के भीतर सुधार लिया जाएगा। साथ ही अन्य मांगों पर भी सकारात्मक रुख अपनाने का भरोसा दिया गया।

    हालांकि किसानों ने स्पष्ट कर दिया कि अब वे केवल मौखिक आश्वासनों पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि पहले भी कई बार वादे किए गए लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव नहीं दिखा इसलिए इस बार सभी मांगों पर लिखित आश्वासन जरूरी है। इसी मांग के चलते आंदोलन को फिलहाल दो दिन के लिए स्थगित करने पर सहमति बनी है ताकि प्रशासन को समाधान लागू करने का समय मिल सके।

    जन क्रांति आंदोलन के संयोजक राजेंद्र पटेल ने साफ चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में लिखित आश्वासन नहीं दिया गया तो किसान फिर से सड़कों पर उतरेंगे और बिना किसी पूर्व सूचना के कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल एक जिले की नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के अधिकारों से जुड़ी है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि किसानों के मुद्दे अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहे बल्कि वे एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकते हैं। MSP और कृषि व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं लगातार किसानों की चिंता का कारण बनी हुई हैं और यदि समय रहते इनका समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज हो सकता है।

    फिलहाल प्रशासन के पास दो दिन का समय है जिसमें उसे अपनी प्रतिबद्धता साबित करनी होगी। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या किसानों को लिखित आश्वासन मिलेगा या फिर हरदा एक बार फिर बड़े आंदोलन का केंद्र बनेगा।

  • हर जरूरतमंद तक सम्मान के साथ मदद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 33 लाख हितग्राहियों को 200 करोड़ से ज्यादा पेंशन ट्रांसफर की

    हर जरूरतमंद तक सम्मान के साथ मदद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 33 लाख हितग्राहियों को 200 करोड़ से ज्यादा पेंशन ट्रांसफर की


    भोपाल । मध्यप्रदेश में सामाजिक सुरक्षा को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह स्पष्ट किया कि सरकार की पेंशन योजनाएं केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि भरोसे और संवेदनशीलता का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना ही सरकार का मूल उद्देश्य है और इसी सोच के साथ राज्य में विभिन्न पेंशन योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

    बुधवार को मंत्रालय से आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समग्र पेंशन योजना के तहत 33 लाख 45 हजार से अधिक हितग्राहियों के बैंक खातों में 200 करोड़ 71 लाख रुपए की पेंशन राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरित की। यह राशि मार्च के लिए अप्रैल माह में भुगतान के रूप में दी गई है। इस पहल ने यह संदेश दिया कि सरकार तकनीक और पारदर्शिता के जरिए जरूरतमंदों तक समय पर सहायता पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार निर्धन निराश्रित वृद्धजनों कल्याणी परित्यक्ता अविवाहित महिलाओं और दिव्यांगजनों के जीवन को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। उनके अनुसार यह पेंशन केवल आर्थिक सहयोग नहीं बल्कि आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने की प्रेरणा भी देती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर रही हैं।

    कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से जुड़े हितग्राहियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि सहायता समय पर सम्मान के साथ और पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे ताकि कोई भी नागरिक खुद को असहाय महसूस न करे।

    सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के अंतर्गत सबसे अधिक 32 लाख 5 हजार से ज्यादा हितग्राहियों को लाभ मिला है। इसके अलावा मुख्यमंत्री कन्या अभिभावक पेंशन योजना के तहत 62 हजार से अधिक और मानसिक रूप से अविकसित तथा बहु दिव्यांग सहायता योजना के तहत 77 हजार से अधिक हितग्राहियों को भी इस राशि का लाभ दिया गया है। सभी को प्रतिमाह 600 रुपए की दर से पेंशन प्रदान की जा रही है जिससे उनके दैनिक जीवन में आर्थिक सहारा मिलता है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वर्ष 2026-27 के बजट में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए 2 हजार 857 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है। यह दर्शाता है कि सरकार इस क्षेत्र को प्राथमिकता दे रही है और आने वाले समय में और अधिक लोगों को इसका लाभ मिलेगा। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे जबकि प्रदेशभर के कलेक्टर और कमिश्नर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

    इस पहल के जरिए सरकार ने एक बार फिर यह साबित किया है कि सामाजिक सुरक्षा केवल योजनाओं तक सीमित नहीं बल्कि यह एक संवेदनशील और जवाबदेह शासन की पहचान है जो हर जरूरतमंद के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए लगातार काम कर रहा है।

  • मॉनिटरिंग में ढिलाई नहीं चलेगी ,रीवा की जल और सीवरेज योजनाओं पर ,उप मुख्यमंत्री का बड़ा एक्शन

    मॉनिटरिंग में ढिलाई नहीं चलेगी ,रीवा की जल और सीवरेज योजनाओं पर ,उप मुख्यमंत्री का बड़ा एक्शन


    भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार शहरी विकास और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है और इसी कड़ी में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा शहर में चल रही जल प्रदाय योजना और सीवरेज सिस्टम के कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्रालय में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने कार्यों की प्रगति गुणवत्ता समय सीमा और वित्तीय प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सभी परियोजनाएं तय समय में हर हाल में पूरी हों।

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं का सीधा संबंध आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी से है इसलिए कार्यों में देरी या गुणवत्ता में कमी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से जल प्रदाय व्यवस्था से जुड़े लंबित कार्यों पर ध्यान केंद्रित करते हुए निर्देश दिए कि ओवरहेड वाटर टैंक का निर्माण और जल वितरण नेटवर्क का विस्तार आगामी वर्षा ऋतु से पहले हर स्थिति में पूरा किया जाए। उनका स्पष्ट कहना था कि यदि समय पर यह कार्य पूरे नहीं हुए तो नागरिकों को असुविधा होगी और सरकार की मंशा भी प्रभावित होगी।

    बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया कि कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए ताकि हर चरण पर प्रगति का आकलन किया जा सके और किसी भी समस्या का तत्काल समाधान निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि योजनाओं का क्रियान्वयन केवल कागजों तक सीमित न रहे बल्कि जमीनी स्तर पर उसकी गुणवत्ता और प्रभाव भी नजर आना चाहिए।

    उप मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों के दौरान आमजन को होने वाली असुविधाओं पर भी विशेष चिंता जताई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यों को इस तरह चरणबद्ध और सुनियोजित तरीके से किया जाए जिससे शहरवासियों की दैनिक जीवनचर्या प्रभावित न हो। साथ ही सुरक्षा के सभी मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर भी उन्होंने जोर दिया।

    सीवरेज सिस्टम की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शहरी स्वच्छता और जन स्वास्थ्य के लिए यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने शेष पाइपलाइन बिछाने और हाउस सर्विस कनेक्शन के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी के निर्माण कार्य को भी समय पर पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया। बैठक में अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय दुबे और आयुक्त संकेत भोंडवे सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे जिन्होंने परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और प्रगति की जानकारी दी।

    उप मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं शुरू करना नहीं बल्कि उन्हें तय समय में पूरा कर नागरिकों को उनका वास्तविक लाभ पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि मॉनिटरिंग और जवाबदेही में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं होनी चाहिए।

    यह समीक्षा बैठक स्पष्ट संकेत देती है कि राज्य सरकार अब शहरी विकास परियोजनाओं में गति और गुणवत्ता दोनों पर बराबर ध्यान दे रही है और जनता को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

  • जहां बहता था पानी वहां बस गई कॉलोनियां नहर पर कब्जे ने खड़ा किया बड़ा सवाल

    जहां बहता था पानी वहां बस गई कॉलोनियां नहर पर कब्जे ने खड़ा किया बड़ा सवाल


    विदिशा ।
    मध्य प्रदेश के विदिशा से सामने आया एक मामला इन दिनों प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक तंत्र दोनों पर सवाल खड़े कर रहा है यहां दशकों पुरानी एक सिंचाई नहर का अस्तित्व लगभग खत्म हो चुका है और जहां कभी किसानों के खेतों तक पानी पहुंचता था वहां अब कंक्रीट की कॉलोनियां खड़ी नजर आ रही हैं इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल किसानों की चिंता बढ़ाई है बल्कि सियासत को भी गरमा दिया है

    दरअसल दौलतपुरा और मदनखेड़ा इलाके में वर्षों पहले उद्वहन सिंचाई योजना के तहत एक नहर बनाई गई थी इस योजना का उद्देश्य था कि हर खेत तक पानी पहुंचे और किसानों की फसल सुरक्षित रहे लेकिन समय के साथ इस नहर की जमीन पर धीरे धीरे कब्जे होते चले गए और अब स्थिति यह है कि नहर का नामोनिशान तक मिटता जा रहा है

    स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां कभी पानी बहता था वहां अब पक्के निर्माण हो चुके हैं और आलीशान कॉलोनियां बस गई हैं केवल एक जर्जर ढांचा बचा है जो इस बात की गवाही देता है कि यहां कभी सिंचाई व्यवस्था मौजूद थी बाकी जमीन पूरी तरह कब्जे में जा चुकी है

    यह मामला अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है क्योंकि यह वही क्षेत्र है जहां से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संबंध है कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है कांग्रेस प्रवक्ता आनंद जाट ने आरोप लगाया कि किसानों के हितों की बात करने वाले नेता के जिले में ही किसानों की नहर गायब हो गई और जिम्मेदारों को इसकी भनक तक नहीं लगी

    उन्होंने यह भी कहा कि भू माफियाओं ने नहर की जमीन पर कब्जा कर लिया है और भाजपा सरकार उन्हें संरक्षण दे रही है कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल कार्रवाई कर कब्जा हटाया जाए और किसानों को उनका अधिकार वापस दिलाया जाए

    वहीं प्रशासन की ओर से कहा गया है कि यह मामला 40 से 50 साल पुराना है और पुराने दस्तावेजों को खंगालने में समय लग रहा है अधिकारियों के अनुसार जैसे जैसे रिकॉर्ड मिल रहे हैं उन्हें राजस्व विभाग को सौंपा जा रहा है ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके

    इस बीच राजस्व विभाग ने भी सक्रियता दिखाते हुए अब तक 11 लोगों को नोटिस जारी किए हैं जिन पर नहर की जमीन पर कब्जा करने का आरोप है तहसीलदार निधि लोधी ने बताया कि जांच जारी है और जल्द ही अवैध कब्जों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी

    यह मामला केवल जमीन के कब्जे तक सीमित नहीं है बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि सरकारी योजनाओं की निगरानी और संरक्षण कैसे किया जा रहा है यदि दशकों पुरानी एक महत्वपूर्ण सिंचाई व्यवस्था इस तरह खत्म हो सकती है तो अन्य योजनाओं की स्थिति क्या होगी

    अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इस नहर को कब्जामुक्त कर पाएगा और किसानों को उनका हक वापस मिल पाएगा या यह मामला भी केवल सियासी बयानबाजी और खबरों तक ही सीमित रह जाएगा

  • कुंडी खोलने की कोशिश पड़ी भारी ,जाली में फंसा हाथ ,रात भर तड़पता रहा चोर

    कुंडी खोलने की कोशिश पड़ी भारी ,जाली में फंसा हाथ ,रात भर तड़पता रहा चोर


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक बेहद अनोखी और हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है जहां चोरी करने पहुंचे एक शातिर चोर की किस्मत ने ऐसा पलटा खाया कि वह खुद ही जाल में फंस गया और पूरी रात उसी हालत में खड़ा रहने को मजबूर हो गया यह घटना अब इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे बदकिस्मती की मिसाल बता रहे हैं

    यह पूरा मामला शहर के महाराजपुरा थाना क्षेत्र के दीनदयाल नगर का है जहां मनोज कुशवाहा नाम का एक चोर निर्माणाधीन मकान में सरिया चोरी करने की नीयत से घुसा था देर रात जब वह मकान के अंदर पहुंचा तो उसने खिड़की की जाली के जरिए दरवाजा खोलने की कोशिश की लेकिन जैसे ही उसने अपना हाथ अंदर डाला वह जाली में बुरी तरह फंस गया

    शुरुआत में उसे लगा कि वह आसानी से हाथ निकाल लेगा लेकिन उसकी यह सोच जल्द ही गलत साबित हो गई उसने बार बार कोशिश की लेकिन हाथ बाहर नहीं निकल पाया धीरे धीरे उसकी परेशानी बढ़ती गई और हालत ऐसी हो गई कि उसे पूरी रात उसी स्थिति में खड़े रहना पड़ा

    रात भर दर्द और थकान से जूझते हुए चोर वहीं फंसा रहा और सुबह होने का इंतजार करता रहा सुबह जब मकान मालिक निर्माणाधीन घर पर पहुंचा तो सामने का नजारा देखकर वह हैरान रह गया उसने देखा कि एक व्यक्ति खिड़की की जाली में हाथ फंसाए खड़ा है और खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रहा है

    मकान मालिक ने तुरंत पुलिस को सूचना दी जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने किसी तरह चोर का हाथ जाली से बाहर निकाला और उसे हिरासत में ले लिया

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी इलाके में कई चोरी की वारदातों को अंजाम दे चुका है वह खासतौर पर निर्माणाधीन मकानों को निशाना बनाता था जहां से सरिया और अन्य सामान चोरी करता था पूछताछ के दौरान उसने कई घटनाओं को स्वीकार भी किया है

    फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और उसके द्वारा की गई अन्य चोरियों के बारे में जानकारी जुटाने के साथ साथ चोरी का सामान बरामद करने की कोशिश भी की जा रही है इस अजीब घटना के बाद पूरे इलाके में चर्चा का माहौल है लोग इसे लेकर तरह तरह की बातें कर रहे हैं कई लोग हंसी मजाक में कह रहे हैं कि चोरी करने गया था लेकिन खुद ही जाल में फंस गया

    यह घटना एक तरह से यह भी बताती है कि अपराध का अंत अक्सर बुरा ही होता है और कभी कभी हालात ऐसे बन जाते हैं कि अपराधी अपनी ही चाल में फंस जाता है फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है

  • भोपाल में अतिथि शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, वादों पर अमल न होने से नाराजगी, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

    भोपाल में अतिथि शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, वादों पर अमल न होने से नाराजगी, आंदोलन तेज करने की चेतावनी


    भोपाल। अतिथि शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे हजारों अतिथि शिक्षकों ने बुधवार को राजधानी भोपाल में जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने सरकार पर चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया और लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की। उन्होंने साफ कहा कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

    प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने गुरुजियों की तर्ज पर नीति लागू करने, सीधी भर्ती में बोनस अंक देने और वार्षिक अनुबंध के जरिए भविष्य सुरक्षित करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे शिक्षकों में गहरा असंतोष है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अतिथि शिक्षकों को न्याय दिलाने की बात कही थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई निर्णय सामने नहीं आया है।

    सरकार पर वादों से मुकरने का आरोप

    संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी रामचंद्र नागर और प्रदेश अध्यक्ष के.सी. पवार ने कहा कि सरकार वार्षिक अनुबंध लागू करने के अपने वादे से पीछे हटती नजर आ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 30 अप्रैल के बाद कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो करीब सवा लाख अतिथि शिक्षकों के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने यह भी मांग रखी कि सीधी भर्ती, प्रमोशन और ट्रांसफर से प्रभावित अनुभवी अतिथि शिक्षकों को रिक्त पदों पर प्राथमिकता के आधार पर समायोजित किया जाए।

    ई-अटेंडेंस और भुगतान में समस्याएं उठाईं

    प्रदेश सचिव रविकांत गुप्ता ने ई-अटेंडेंस प्रणाली में आ रही तकनीकी खामियों पर चिंता जताई। उनका कहना है कि कई बार तकनीकी कारणों से उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती, जिससे मानदेय कट जाता है। साथ ही कुछ मामलों में सितंबर महीने का भुगतान भी अभी तक लंबित है।

    भर्ती प्रक्रिया में अनुभव को लेकर उठे सवाल
    बी.एम. खान ने भर्ती प्रक्रिया में मौजूद विसंगतियों को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 से कार्यरत अतिथि शिक्षकों को उनके अनुभव का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। वर्तमान में स्कोर कार्ड में केवल 5 साल का अनुभव जोड़ा जा रहा है, जबकि इसे बढ़ाकर हर वर्ष 10 अंक (अधिकतम 100 अंक) किया जाना चाहिए। इसके अलावा 2008 और 2011 की पात्रता परीक्षाओं के अंक भी शामिल करने की मांग की गई। प्रांत अध्यक्ष तूफान शर्मा ने कहा कि अतिथि शिक्षक सभी आवश्यक योग्यताओं को पूरा करते हैं, इसलिए उनके अनुभव के आधार पर उन्हें न्याय मिलना चाहिए।

    मुख्य मांगें इस प्रकार हैं
    नियमितीकरण के लिए विशेष विभागीय पात्रता परीक्षा आयोजित कर कम से कम 30% पद अतिथि शिक्षकों के लिए आरक्षित किए जाएं।
    शिक्षक भर्ती में 50% पद अतिथि शिक्षकों के लिए तय हों, हर वर्ष 4 बोनस अंक (अधिकतम 20) दिए जाएं और पात्रता अंकों में 10% की छूट दी जाए।
    स्कोर कार्ड में हर वर्ष 10 अंक (अधिकतम 100) जोड़े जाएं और 50 दिन कार्य पूर्ण होने पर अनुभव अंक मिले, साथ ही 2011 संविदा परीक्षा के अंक भी जोड़े जाएं।
    12 महीने का वार्षिक अनुबंध लागू किया जाए और कार्यमुक्त होने पर समायोजन सुनिश्चित किया जाए।
    बीमा, पीएफ, स्वास्थ्य सुविधाएं और 13 आकस्मिक व 3 ऐच्छिक अवकाश प्रदान किए जाएं।
    ई-अटेंडेंस प्रणाली में सुधार कर काटे गए मानदेय का शीघ्र भुगतान किया जाए।
    तकनीकी समस्या होने पर ऑफलाइन उपस्थिति को मान्यता दी जाए।
    पुराने आश्वासनों को लागू करने की मांग तेज
    प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने कहा कि अतिथि शिक्षकों को लेकर पहले कई घोषणाएं की गई थीं और इस मुद्दे को राजनीतिक समर्थन भी मिला था। लेकिन अब उन वादों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे शिक्षकों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।

  • चंबल में मासूम पर मौत का हमला ,नहाने गई 7 साल की बच्ची को मगरमच्छ खींच ले गया

    चंबल में मासूम पर मौत का हमला ,नहाने गई 7 साल की बच्ची को मगरमच्छ खींच ले गया


    मुरैना । मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जहां चंबल नदी में नहाने गई एक मासूम बच्ची मगरमच्छ का शिकार हो गई इस घटना ने पूरे इलाके में भय और शोक का माहौल पैदा कर दिया है

    घटना चिन्नोनी थाना क्षेत्र के ग्राम वैदपुरा की बताई जा रही है जहां मंगलवार को विजय केवट की दो बेटियां रावी उर्फ सखी और राजकुमारी रोज की तरह नदी में नहाने गई थीं दोनों बहनें नदी किनारे खेलते और नहाते हुए समय बिता रही थीं तभी अचानक पानी में छिपे बैठे मगरमच्छ ने हमला कर दिया

    प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार मगरमच्छ ने सात वर्षीय रावी को अचानक अपने जबड़ों में जकड़ लिया और उसे गहरे पानी की ओर खींच ले गया पूरी घटना इतनी तेजी से हुई कि दूसरी बच्ची कुछ समझ ही नहीं पाई और घबराकर तुरंत घर की ओर भागी वहां पहुंचकर उसने परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी

    बेटी के साथ हुई इस भयावह घटना की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया परिजन और ग्रामीण तुरंत नदी किनारे पहुंचे लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी नदी में मगरमच्छ के हमले के बाद बच्ची का कोई पता नहीं चल पाया घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन भी मौके पर पहुंचा और तलाश अभियान शुरू किया गया

    ग्रामीणों का कहना है कि चंबल नदी में मगरमच्छों की मौजूदगी पहले से ही है लेकिन इसके बावजूद कई गांवों के लोग रोजमर्रा के कामों जैसे नहाने और कपड़े धोने के लिए नदी पर निर्भर हैं ऐसे में इस तरह की घटनाएं लगातार खतरे की घंटी बनकर सामने आ रही हैं

    इस दर्दनाक हादसे के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है हर कोई इस घटना से स्तब्ध है और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी किनारे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं और लोगों को जागरूक किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके

    पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और वन विभाग की टीम के साथ मिलकर मगरमच्छ की तलाश और क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है साथ ही प्रशासन द्वारा लोगों को नदी में न जाने की सलाह भी दी जा रही है यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि प्राकृतिक जल स्रोतों के आसपास सुरक्षा इंतजाम कितने जरूरी हैं खासकर उन इलाकों में जहां जंगली जीवों की मौजूदगी लगातार बनी रहती है

  • प्रेमिका की शादी के दिन युवक ने ली आखिरी सांस ,गुना में सुसाइड से मचा हड़कंप

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    गुना । मध्य प्रदेश के गुना से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जहां एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है 25 वर्षीय प्रद्युम्न सिंह सहरिया की मौत ने न केवल उसके परिवार को झकझोर कर रख दिया है बल्कि प्रेम संबंधों के जटिल पहलुओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं

    जानकारी के अनुसार प्रद्युम्न ने मंगलवार शाम नेशनल हाईवे के किनारे जहरीला पदार्थ निगल लिया था इसके बाद वह खुद ही बदहवास हालत में पुलिस चौकी पहुंचा और अपनी स्थिति के बारे में जानकारी दी पुलिस ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया लेकिन हालत गंभीर होने के कारण बुधवार तड़के इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई

    प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि इस आत्मघाती कदम के पीछे एक प्रेम संबंध की कहानी जुड़ी हुई है बताया जा रहा है कि प्रद्युम्न पहले से शादीशुदा था लेकिन करीब पांच साल पहले उसका एक युवती के साथ प्रेम संबंध शुरू हुआ था यह रिश्ता धीरे धीरे इतना गहरा हो गया कि उसने अपनी शादीशुदा जिंदगी से दूरी बना ली

    परिजनों के अनुसार प्रद्युम्न ने अपनी प्रेमिका के कहने पर करीब दो साल पहले अपनी पत्नी को छोड़ दिया था उसे उम्मीद थी कि अब वह अपनी प्रेमिका के साथ नई जिंदगी शुरू करेगा लेकिन हालात उसके मुताबिक नहीं रहे दोनों के बीच लगातार तनाव बना रहा और आखिरकार युवती ने उसके साथ रहने से इनकार कर दिया

    घटना ने तब और भी दुखद मोड़ ले लिया जब पता चला कि जिस दिन प्रद्युम्न की हालत अस्पताल में गंभीर बनी हुई थी उसी दिन उसकी प्रेमिका की शादी की रस्में बमोरी क्षेत्र में चल रही थीं इस संयोग ने इस पूरी घटना को और भी मार्मिक बना दिया

    स्थानीय लोगों के अनुसार प्रद्युम्न मानसिक रूप से काफी परेशान था और रिश्ते में आई दूरी को वह सहन नहीं कर पा रहा था हालांकि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घटना के पीछे और कोई कारण तो नहीं है

    यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि भावनात्मक तनाव और रिश्तों में असंतुलन व्यक्ति को किस हद तक प्रभावित कर सकता है जरूरत इस बात की है कि ऐसे मामलों में समय रहते संवाद और समझदारी से स्थिति को संभाला जाए फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और परिजनों के बयान भी लिए जा रहे हैं वहीं पूरे इलाके में इस घटना को लेकर शोक और चर्चा का माहौल बना हुआ है