Category: Madhya Pradesh

  • MP में एनालॉग पनीर पर सरकार की सख्ती, CM मोहन यादव बोले- अब चलेगा सिर्फ प्राकृतिक दूध का पनीर

    MP में एनालॉग पनीर पर सरकार की सख्ती, CM मोहन यादव बोले- अब चलेगा सिर्फ प्राकृतिक दूध का पनीर


    भोपाल। मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर को लेकर मोहन यादव सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने प्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री को प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ कहा है कि मध्य प्रदेश में प्राकृतिक दूध से तैयार होने वाले पनीर और दूसरे दुग्ध उत्पादों को ही प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार का जोर दूध उत्पादन बढ़ाने और प्राकृतिक दुग्ध उत्पादों के जरिए प्रदेश की अलग पहचान बनाने पर है। मुख्यमंत्री के इस ऐलान के बाद एनालॉग पनीर के निर्माण और बिक्री से जुड़े कारोबार पर कार्रवाई का रास्ता भी साफ हो गया है।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री जैसी गतिविधियों को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। सरकार इस तरह के उत्पादों को हतोत्साहित करेगी और प्राकृतिक दूध से बने पनीर को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम करेगी। उनका कहना है कि प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी सरकार आगे बढ़ रही है। प्राकृतिक दूध से तैयार उत्पादों को बढ़ावा देकर राज्य की अपनी पहचान बनाई जा सकती है।

    एनालॉग पनीर को लेकर देश के कई हिस्सों में पिछले कुछ समय से चर्चा चल रही है। सामान्य पनीर दूध से तैयार किया जाता है, जबकि एनालॉग पनीर में दूध के साथ या उसकी जगह वनस्पति वसा, प्रोटीन और दूसरे खाद्य घटकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे उत्पादों की संरचना और इस्तेमाल किए गए घटक सामान्य दूध से बने पनीर से अलग हो सकते हैं। इसी वजह से खाद्य गुणवत्ता और लेबलिंग को लेकर भी इस तरह के उत्पादों पर लगातार चर्चा होती रही है।

    मध्य प्रदेश सरकार के इस फैसले को प्राकृतिक दुग्ध उत्पादों को बढ़ावा देने की नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक दूध से बने उत्पादों की मजबूत संभावनाएं हैं और सरकार इन्हीं उत्पादों के आधार पर राज्य की पहचान को आगे बढ़ाना चाहती है। इसके लिए दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों और दुग्ध उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा सकता है।

    एनालॉग पनीर को लेकर हाल में मध्य प्रदेश से जुड़ा एक मामला भी सामने आया था। रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश की एक कंपनी के उत्पाद को रायपुर में जब्त किया गया था और उस पर एनालॉग पनीर होने का आरोप लगा था। हालांकि बाद में जांच रिपोर्ट में कंपनी को क्लीन चिट मिलने की बात सामने आई। इसके बावजूद एनालॉग पनीर को लेकर देशभर में बहस तेज हुई और खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता तथा उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने का मुद्दा सामने आया।

    सरकार के फैसले के बाद अब सबसे अहम सवाल यह है कि प्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री और निर्माण पर प्रतिबंध को किस तरह लागू किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा विभाग और संबंधित एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। बाजारों में बिकने वाले पनीर की जांच और उत्पादों की गुणवत्ता की निगरानी बढ़ाई जा सकती है। कारोबारियों के लिए भी यह जरूरी होगा कि वे उत्पाद की प्रकृति और उसमें इस्तेमाल सामग्री से जुड़े नियमों का पालन करें।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यह भी संकेत दिया है कि सरकार प्राकृतिक दूध के उत्पादन को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है। इससे किसानों और पशुपालकों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। अगर दूध उत्पादन बढ़ता है और प्राकृतिक दुग्ध उत्पादों की मांग को मजबूत बाजार मिलता है तो इसका फायदा ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है। फिलहाल एनालॉग पनीर पर सरकार के फैसले ने खाद्य बाजार में नई चर्चा छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इसके क्रियान्वयन को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • नर्सिंग छात्रों का हल्ला बोल! भोपाल में बिल्डिंग पर चढ़े छात्र, रिजल्ट और स्कॉलरशिप समेत 7 मांगों पर अड़े

    नर्सिंग छात्रों का हल्ला बोल! भोपाल में बिल्डिंग पर चढ़े छात्र, रिजल्ट और स्कॉलरशिप समेत 7 मांगों पर अड़े


    भोपाल। भोपाल में नर्सिंग छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नर्सिंग स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन NSO की ओर से 8 अगस्त से नर्सिंग काउंसिल के सामने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। बुधवार को प्रदर्शन के दौरान उस समय हंगामा बढ़ गया जब तीन छात्र पास की एक खाली बिल्डिंग पर चढ़ गए। छात्रों की प्रमुख मांग तत्काल रिजल्ट जारी करने की थी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और छात्रों को समझाने का प्रयास किया। काफी देर की समझाइश के बाद तीनों छात्र नीचे उतर आए।

    छात्रों का कहना है कि GNM और बीएससी नर्सिंग के परिणाम लंबे समय से लंबित हैं और इसकी वजह से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। संगठन ने मांग की है कि सभी लंबित रिजल्ट जल्द से जल्द घोषित किए जाएं और इसके बाद आगामी परीक्षाओं का कार्यक्रम भी जारी किया जाए। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा और परिणाम में देरी के कारण उनकी आगे की पढ़ाई और करियर से जुड़ी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

    प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में नर्सिंग छात्र नर्सिंग काउंसिल के सामने मौजूद रहे। छात्र नेता रवि परमार ने बताया कि तीन छात्र मांगों को लेकर पास की बिल्डिंग पर चढ़ गए थे। पुलिस और अन्य लोगों ने उन्हें समझाकर नीचे उतारा। इसके बाद भी छात्रों का धरना जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती तब तक आंदोलन जारी रखने की बात कही जा रही है।

    छात्रों की मांगों में केवल रिजल्ट और परीक्षाएं ही शामिल नहीं हैं। संगठन ने SC ST और OBC वर्ग के GNM बीएससी नर्सिंग पोस्ट बेसिक नर्सिंग MSc नर्सिंग और पैरामेडिकल छात्रों को स्कॉलरशिप देने की मांग की है। इसके साथ ही EWS आरक्षण के दायरे में आने वाले सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए भी पढ़ाई से जुड़ी स्कॉलरशिप योजना शुरू करने की मांग उठाई गई है। छात्रों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए शिक्षा जारी रखना मुश्किल होता है इसलिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था जरूरी है।

    NSO ने नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेजों को क्षेत्रीय यूनिवर्सिटीज से हटाकर दोबारा मेडिकल यूनिवर्सिटी जबलपुर से जोड़ने की मांग भी रखी है। संगठन का कहना है कि नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता और व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए इस दिशा में फैसला लिया जाना चाहिए। इसके अलावा नर्सिंग शिक्षा में कथित भ्रष्टाचार को खत्म करने और फैकल्टी मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने की मांग भी की गई है। छात्रों का तर्क है कि पारदर्शी व्यवस्था से भविष्य में शिक्षा और परीक्षा से जुड़े विवादों को कम किया जा सकता है।

    आंदोलन से जुड़े पोस्टर में छात्रों ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य मंत्री और रजिस्ट्रार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। संगठन ने आंदोलन को भूख हड़ताल से जोड़ने की बात भी कही है। छात्रों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और परिणाम तथा परीक्षाओं में देरी का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ रहा है। ऐसे में अब वे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन को और तेज करने की तैयारी में हैं।

    फिलहाल बिल्डिंग पर चढ़े तीनों छात्रों के सुरक्षित नीचे उतरने के बाद स्थिति सामान्य है लेकिन नर्सिंग छात्रों का धरना जारी है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित विभाग छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं और लंबित परिणामों तथा परीक्षाओं को लेकर कब तक कोई ठोस फैसला सामने आता है।

  • करोंद चौराहे पर तेज रफ्तार का तांडव! कई वाहनों को टक्कर के बाद जमकर बवाल, 4 B.Tech छात्र हिरासत में

    करोंद चौराहे पर तेज रफ्तार का तांडव! कई वाहनों को टक्कर के बाद जमकर बवाल, 4 B.Tech छात्र हिरासत में

    भोपाल। भोपाल के करोंद चौराहे पर बुधवार सुबह तेज रफ्तार कारों से जुड़े रोड रैश के बाद जमकर हंगामा हो गया। आरोप है कि तीन कारों में सवार युवक-युवतियों ने तेज गति से वाहन चलाते हुए रास्ते में कई गाड़ियों को टक्कर मार दी। हादसे में स्कूल स्टाफ की गाड़ियां भी चपेट में आ गईं। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों और कार सवारों के बीच विवाद बढ़ गया और देखते ही देखते मारपीट शुरू हो गई। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है। मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है।

    घटना सुबह करीब सात बजे की बताई जा रही है। छुट्टियों के बीच सागर पब्लिक स्कूल का स्टाफ बस और निजी वाहनों से स्कूल की ओर जा रहा था। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार में तीन कारें आती दिखाई दीं। इनमें SUV, Verna और Fronx शामिल थीं। आरोप है कि कारों की रफ्तार इतनी अधिक थी कि रास्ते में कई वाहनों को टक्कर लगती चली गई। सबसे पहले एक बैटरी ऑटो समेत दो वाहनों को टक्कर लगी। इसके बाद स्कूल स्टाफ की गाड़ियां भी इसकी चपेट में आ गईं।

    बताया जा रहा है कि एक वाहन में महिला स्टाफ मौजूद थी। आरोप है कि टक्कर के बाद कार में सवार युवकों ने महिला स्टाफ के साथ अभद्रता की। इस दौरान पीछे से आ रहे स्कूल के पुरुष कर्मचारियों ने विरोध किया तो उनकी गाड़ी को भी टक्कर मार दी गई। लगातार हो रहे विवाद और तेज रफ्तार वाहनों की वजह से करोंद चौराहे पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    रोड रैश के दौरान एक कार डिवाइडर से टकराकर रुक गई, जबकि दूसरी कार भी कुछ दूरी पर जाकर रुक गई। इसके बाद एक वाहन से तीन युवक और एक युवती बाहर निकले। आरोप है कि सड़क पर ही स्कूल स्टाफ से उनका विवाद फिर शुरू हो गया। इसी दौरान एक युवती द्वारा दूसरी कार के शीशे तोड़े जाने की बात भी सामने आई है। मामला बढ़ने पर आसपास मौजूद लोगों ने एक युवक और युवती को पकड़ लिया और उनके साथ मारपीट कर दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस ने इसकी भी जांच शुरू कर दी है।

    पीड़ित स्कूल स्टाफ ने पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि घटना के तुरंत बाद डायल-112 पर सूचना दी गई थी, लेकिन पुलिसकर्मी करीब एक घंटे तक मौके पर नहीं पहुंचे। स्टाफ का कहना है कि इस दौरान थाने से फोन कर लगातार घटना की लोकेशन पूछी जाती रही। बाद में करीब एक दर्जन लोग निशातपुरा थाने पहुंचे, जहां पुलिस ने उनके बयान दर्ज किए। हादसे में तीन लोगों को मामूली चोट आने की जानकारी सामने आई है।

    निशातपुरा थाना पुलिस के मुताबिक मामले में एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने चार आरोपियों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सभी आरोपी छात्र हैं और रायसेन रोड स्थित दो अलग-अलग कॉलेजों में बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल कार को जब्त कर लिया है।

    अब पुलिस सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है। जांच का अहम बिंदु यह भी है कि हादसे के समय कार कौन चला रहा था और तेज रफ्तार से वाहन चलाने, टक्कर मारने और बाद में हुए विवाद में किसकी क्या भूमिका थी। फिलहाल पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होने की बात कह रही है।

  • मध्य प्रदेश में आफत की बारिश! नदियों का जलस्तर बढ़ा, कई इलाकों में पानी घुसने से मचा हड़कंप

    मध्य प्रदेश में आफत की बारिश! नदियों का जलस्तर बढ़ा, कई इलाकों में पानी घुसने से मचा हड़कंप


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश में मानसून की सक्रियता के बीच लगातार बारिश ने कई इलाकों में हालात बिगाड़ दिए हैं। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में तेज बारिश के कारण नदियां और नाले उफान पर हैं, वहीं निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने लगी है। कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है और नदी किनारे स्थित मंदिरों तथा धार्मिक स्थलों में भी पानी पहुंचने की तस्वीरें सामने आई हैं। बारिश के बढ़ते असर को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं। मौसम के इस बदले मिजाज ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है और नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।

    विदिशा समेत कई जिलों में नदियों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई है। बेतवा नदी में पानी बढ़ने के बाद नदी किनारे के घाट और आसपास के क्षेत्रों में पानी पहुंचने की स्थिति बनी। कई धार्मिक स्थलों और मंदिरों के आसपास भी जलस्तर बढ़ने से श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हुई। नदी के उफान को देखते हुए प्रशासन की ओर से लोगों को नदी और तेज बहाव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। बारिश के दौरान नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंका बनी रहती है इसलिए स्थानीय लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

    मंडला और डिंडोरी जैसे जिलों में भी बारिश का असर देखने को मिला है। कई जगह सड़क और पुल-पुलियों के ऊपर से पानी बहने के कारण आवागमन प्रभावित हुआ। ग्रामीण इलाकों में बारिश का पानी खेतों और बस्तियों तक पहुंचने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बारिश के कारण प्रशासन की चुनौती भी बढ़ गई है क्योंकि कई इलाकों में राहत और बचाव कार्य के लिए टीमों को तैयार रखना पड़ रहा है। जलभराव वाले स्थानों पर बिजली व्यवस्था और यातायात को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

    प्रदेश में बारिश के साथ बाढ़ का खतरा इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि कई नदियों का जलस्तर आसपास के जिलों में होने वाली बारिश और बांधों से छोड़े जाने वाले पानी पर भी निर्भर करता है। ऐसे में किसी एक इलाके में बारिश कम होने के बावजूद नदी का पानी बढ़ सकता है। प्रशासन की ओर से लोगों को पुलों पर पानी होने की स्थिति में उसे पार नहीं करने और नदी किनारे पिकनिक या धार्मिक गतिविधियों के लिए जाने से बचने की सलाह दी जा रही है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को ऐसे स्थानों से दूर रखना जरूरी है।

    मौसम विभाग की बारिश संबंधी चेतावनियों के बीच आने वाले दिनों में भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। ऐसे में लोगों को स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी पर ध्यान देने और जलभराव वाले रास्तों से बचने की जरूरत है। फिलहाल मध्य प्रदेश में बारिश ने जहां किसानों को राहत दी है वहीं नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरे की स्थिति भी पैदा कर दी है। प्रशासन की निगरानी और लोगों की सतर्कता ही संभावित बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

  • दूषित पानी और संक्रमण से बच्चों की मौत का मामला गरमाया, दिग्विजय बोले- दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई

    दूषित पानी और संक्रमण से बच्चों की मौत का मामला गरमाया, दिग्विजय बोले- दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई


    भोपाल। बालाघाट जिले के आदिवासी विकासखंड बिरसा में बच्चों की मौत और बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने का मामला गंभीर होता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस पूरे मामले पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने कथित दूषित पानी और संक्रमण से पैदा हुई बीमारियों की राज्य स्तर पर जांच कराने तथा लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है। दिग्विजय सिंह ने मृत बच्चों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने और गंभीर रूप से बीमार बच्चों को बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट कराने की भी मांग रखी है।

    दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में दावा किया है कि बिरसा क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह के दौरान 11 आदिवासी बच्चों की बीमारी से मौत हुई है। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से अब तक सात बच्चों की मौत की पुष्टि किए जाने की बात पत्र में कही गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि चार अन्य बच्चों की मौत की जानकारी सामने नहीं लाई जा रही है। उनके मुताबिक बालाघाट जिला चिकित्सालय में 100 से अधिक बच्चों को भर्ती कराया गया है और इनमें कई बच्चों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है।

    बिरसा क्षेत्र के कई गांवों में बुखार और संक्रमण से लोग परेशान बताए जा रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने पत्र में कहा है कि मलेरिया, निमोनिया, सर्दी-खांसी और चर्म रोग जैसी बीमारियों का असर कई गांवों में देखने को मिल रहा है। जिला मुख्यालय से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित बोंदारी, कुंडेकसा और कोरका से जुड़े टोले-मजरों में बीमारी को लेकर डर का माहौल बताया गया है। पत्र के मुताबिक कई परिवारों में बच्चे तेज बुखार से जूझ रहे हैं।

    दिग्विजय सिंह ने आदिवासी नेता शुभम उईके के हवाले से जिला अस्पताल की स्थिति का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार अस्पताल का बच्चा वार्ड बीमार बच्चों से भर गया है। उन्होंने बोंदारी गांव के समारू धुर्वे के बच्चों साहिल और नामिन की निमोनिया से मौत का जिक्र करते हुए कहा कि बीमारी ने कई गरीब परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है। वहीं अन्य प्रभावित परिवारों के बच्चों की मौत का भी पत्र में उल्लेख किया गया है।

    इस मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रभावित परिवारों से मिलने और उपचार की व्यवस्था को लेकर अधिकारियों से चर्चा करने की बात भी सामने आई है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति में शामिल बैगा आदिवासी परिवारों के सामने बीमारी ने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। उन्होंने इसे केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और साफ पानी की उपलब्धता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव के साथ चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम प्रभावित गांवों का दौरा करे। उन्होंने संक्रमित क्षेत्रों में मेडिकल कैंप लगाकर बच्चों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही प्रत्येक मृत बच्चे के परिवार को मुख्यमंत्री सहायता कोष से 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग रखी है।

    दिग्विजय सिंह ने गंभीर रूप से बीमार बच्चों को जरूरत पड़ने पर एयरलिफ्ट कर नागपुर, रायपुर या भोपाल के बेहतर चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराने और उनका पूरा इलाज राज्य सरकार की ओर से कराने की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष और राज्य स्तरीय जांच के बाद यदि किसी विभाग या अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।

  • पीएम मित्र पार्क में 1200 करोड़ रुपए के निवेश से औद्योगिक विकास को मिलेगी गति

    पीएम मित्र पार्क में 1200 करोड़ रुपए के निवेश से औद्योगिक विकास को मिलेगी गति


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गुजरात के साथ मध्यप्रदेश के संबंधों को और प्रगाढ़ करते हुए अरविंद समूह द्वारा मध्यप्रदेश में भी अपनी इकाई स्थापित की जा रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप पीएम मित्र पार्क में अगले वर्ष तक उत्पादन प्रारंभ करने का लक्ष्य है। इससे प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अरविंद समूह द्वारा 3 स्थानों पर अपनी इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। इनमें देवास के निकट बरलाई, धार स्थित पीएम मित्र पार्क और इंदौर का बेटमा शामिल हैं। कंपनी इन स्थानों के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी कार्य कर रही है। इन औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से प्रदेश में युवाओं के लिये रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह बात बुधवार को गुजरात के अहमदाबाद में अरविंद लिमिटेड के वाइस चेयरमैन श्री कुलीन लालभाई से चर्चा के बाद कही।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुजरात और मध्यप्रदेश के बीच सहयोग से दोनों राज्यों के संबंध और अधिक प्रगाढ़ होंगे। औद्योगिक निवेश से एक ओर जहां प्रदेश के युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर उद्योगों से प्राप्त होने वाले कर राजस्व से राज्य के विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे। इससे प्रदेश के विकास को और गति मिलेगी। उन्होंने इस पहल के लिए अरविंद समूह को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

    मध्यप्रदेश में कंपनी के प्रस्तावित निवेश, पीएम मित्र पार्क में उद्योग की स्थापना, रोजगार सृजन, वस्त्र एवं परिधान (टेक्सटाइल) क्षेत्र में निवेश, औद्योगिक क्षेत्रों में जल के पुनः उपयोग तथा सिंहस्थ-2028 के लिए आधुनिक संचार व्यवस्था सहित विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान अपर मुख्य सचिव, उद्योग श्री नीरज मंडलोई, सचिव, उद्योग श्री जॉन किंसले तथा एमडी, एमपीआईडीसी श्री चंद्रमौली शुक्ला उपस्थित रहे।

    पीएम मित्र पार्क में 1200 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित

    अरविंद लिमिटेड द्वारा पीएम मित्र पार्क में लगभग 1200 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। इसके लिए कंपनी को 105 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। इंदौर में संचालित पेपकोन प्रायवेट लिमिटेड के साथ कंपनी के अनुबंध के तहत प्रतिवर्ष लगभग 70 लाख परिधानों का निर्माण किया जाता है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीएम मित्र पार्क में उद्योग की स्थापना और निवेश प्रक्रिया को गति देने पर चर्चा की। सीसीआईपी के अंतर्गत आवेदन प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने तथा शासन स्तर पर प्रस्ताव के त्वरित परीक्षण एवं अनुमोदन की दिशा में आवश्यक कार्यवाही पर भी विचार-विमर्श हुआ। वस्त्र एवं परिधान उद्योगों के लिए उपलब्ध निवेश प्रोत्साहनों की जानकारी भी दी गई। इनमें पूंजी अनुदान, ब्याज अनुदान, स्टॉम्प एवं पंजीयन शुल्क की प्रतिपूर्ति, ग्रीन इंडस्ट्रियलाइजेशन तथा अनुसंधान एवं विकास सुविधाओं के लिए सहायता सहित अन्य प्रावधान शामिल हैं।

    औद्योगिक क्षेत्रों में जल के पुनः उपयोग को मिलेगा बढ़ावा

    औद्योगिक क्षेत्रों में जल के पुनः उपयोग के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज समाधान की संभावनाओं पर भी विचार हुआ। मध्यप्रदेश में विकसित किए जा रहे 90 से अधिक औद्योगिक पार्कों में टेक्सटाइल, फार्मा एवं अन्य औद्योगिक क्लस्टरों में कॉमन जेडएलडी प्रणालियों की स्थापना की संभावनाओं पर चर्चा की गई। औद्योगिक पार्कों को निकटवर्ती नगर निगमों के एसटीपी से जोड़कर सर्कुलर वॉटर इकोनॉमी’ मॉडल विकसित करने के सुझाव पर भी विचार हुआ।

    सिंहस्थ-2028 में आधुनिक संचार व्यवस्था के उपयोग की तैयारी

    सिंहस्थ-2028 में मिशन-क्रिटिकल कम्युनिकेशन नेटवर्क के उपयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। अरविंद लिमिटेड एवं जेएम बक्सी समूह के संयुक्त उद्यम आर्य ऑम्निटॉक सॉल्यूशंस द्वारा मिशन-क्रिटिकल वायरलेस कम्युनिकेशन, वॉकी-टॉकी नेटवर्क, पीएमआरटी तथा सार्वजनिक सुरक्षा संचार समाधान उपलब्ध कराए जाते हैं।सिंहस्थ-2028 में पुलिस, सुरक्षा बल, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं एवं आयोजन प्रबंधन के लिए इस प्रकार के मिशन-क्रिटिकल कम्युनिकेशन नेटवर्क के उपयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जीआईएस-2027 के लिए किया आमंत्रित

    मुख्यमंत्री डॉ. न्हें ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस)-2027 में सहभागिता के लिए भी आमंत्रित किया।

    अरविंद लिमिटेड देश के प्रमुख टेक्सटाइल समूहों में शामिल है। वर्ष 1931 में स्थापित कंपनी का मुख्यालय अहमदाबाद में है। कंपनी डेनिम, परिधान, फैब्रिक्स एवं टेक्सटाइल वैल्यू चेन के क्षेत्र में कार्यरत है। समूह की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में 60 हजार से अधिक व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त है तथा कंपनी एक लाख से अधिक कपास उत्पादन करने वाले कृषकों से कच्चे माल की खरीद करती है।

  • MP में भारी बारिश का दौर, 4 जिलों में स्कूल बंद, कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात

    MP में भारी बारिश का दौर, 4 जिलों में स्कूल बंद, कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात


    भोपाल। मध्यप्रदेश में बारिश का दौर लगातार जारी है। मानसून सीजन का अब तक का सबसे स्ट्रॉन्ग सिस्टम बुधवार को भी एक्टिव रहेगा। इसका सबसे ज्यादा असर इंदौर संभाग में देखने को मिल सकता है। वहीं भोपाल और उज्जैन संभाग में कई जगह बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं और नदियां उफान पर हैं। बारिश को देखते हुए भोपाल, रायसेन, गुना और खंडवा में बुधवार को सभी स्कूल बंद रखने का फैसला लिया गया है।

    मौसम विभाग के मुताबिक इंदौर और उज्जैन संभाग के रतलाम, झाबुआ, धार, बड़वानी और इंदौर में भारी बारिश हो सकती है। अगले 24 घंटे में इन जिलों में 4 इंच या उससे ज्यादा बारिश होने की संभावना है। इससे बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है।

    527 बाढ़ प्रभावितों का रेस्क्यू
    प्रदेश में पिछले तीन दिनों से बारिश का दौर जारी है। मंगलवार को भोपाल समेत प्रदेश के आधे हिस्से में तेज बारिश हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य आपदा प्रबंधन के सिचुएशन रूम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बाढ़ प्रभावित इलाकों की स्थिति की समीक्षा की और प्रभावित लोगों से भी जानकारी ली। प्रदेश में अब तक 527 बाढ़ प्रभावित लोगों का रेस्क्यू किया जा चुका है।

    भोपाल में दो दिन में 8 इंच बारिश
    भोपाल में पिछले दो दिनों में करीब 8 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। सोमवार और मंगलवार को स्कूल बंद रखे गए थे। लगातार बारिश के कारण करीब 200 मकानों में ढाई फीट तक पानी भर गया। कई रास्तों पर घंटों आवाजाही बाधित रही। कई इलाकों में ट्रांसफॉर्मर और डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स तक पानी पहुंच गया। सुरक्षा को देखते हुए कुछ स्थानों पर बिजली आपूर्ति भी बंद करनी पड़ी।

    राजगढ़ में 9 इंच तक पानी गिरा
    पिछले 24 घंटे में राजगढ़ जिले के ब्यावरा में सबसे ज्यादा 9 इंच बारिश दर्ज की गई। खिलचीपुर में 8 इंच, जीरापुर में 7.7 इंच, राजगढ़ शहर में 4.4 इंच, नरसिंहपुर में 3.7 इंच, पचोर में 3.7 इंच और सारंगपुर में 3.6 इंच बारिश हुई।

    आगर-मालवा के सोयतकलां में 7.7 इंच और आगर शहर में 3.6 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई। शाजापुर के गुलाना में 3.8 इंच और शाजापुर शहर में 3.4 इंच, गुना के कुंभराज में 3.7 इंच, मंदसौर के गरोठ में 2.7 इंच तथा उज्जैन के महिदपुर और माकड़ोन में ढाई-ढाई इंच बारिश हुई।

    इंदौर क्षेत्र में लो प्रेशर और मानसून ट्रफ एक्टिव
    मौसम विभाग के अनुसार इंदौर क्षेत्र में लो प्रेशर एरिया और मानसून ट्रफ सक्रिय है। इसके अलावा दक्षिणी हिस्से से भी एक ट्रफ गुजर रही है। इन सिस्टम के प्रभाव से प्रदेश में पिछले 72 घंटे से बारिश हो रही है और बुधवार को भी इसका असर बना रहेगा।

    12 अगस्त के आसपास फिर बन सकता है लो प्रेशर
    मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में नया चक्रवातीय सिस्टम सक्रिय हुआ है। इसके प्रभाव से करीब 12 अगस्त के आसपास एक नया लो प्रेशर एरिया बनने की संभावना है। ऐसे में मध्यप्रदेश के लिए अगले चार दिन महत्वपूर्ण रहेंगे।

    खंडवा में रातभर बारिश, स्कूल बंद
    खंडवा में रातभर हुई मूसलधार बारिश के बाद प्रशासन ने बुधवार को स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है। लगातार बारिश और जलभराव की स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया। प्रदेश के अन्य प्रभावित जिलों में भी प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।

  • ट्विशा शर्मा मामले में गिरिबाला सिंह और समर्थ की न्यायिक हिरासत बढ़ी, 17 अगस्त तक चार्जशीट पेश करने का आदेश

    ट्विशा शर्मा मामले में गिरिबाला सिंह और समर्थ की न्यायिक हिरासत बढ़ी, 17 अगस्त तक चार्जशीट पेश करने का आदेश


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में गिरफ्तार सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे अधिवक्ता समर्थ सिंह की न्यायिक हिरासत फिर बढ़ गई है। मंगलवार को विशेष अदालत ने सुनवाई के दौरान मामले में 17 अगस्त तक चार्जशीट पेश करने के आदेश दिए हैं।

    एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा मौत मामले में मंगलवार को सीबीआई की विशेष अदालत में दोनों आरोपियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई। सुनवाई ड्यूटी मजिस्ट्रेट शोभना भलावे की अदालत में हुई। ट्विशा शर्मा पक्ष के अधिवक्ता शुभांग दीक्षित ने बताया कि दोनों आरोपियों की पिछली न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने वाली थी। सीबीआई ने इसे बढ़ाने के लिए आवेदन पेश किया और 19 अगस्त तक न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत 17 अगस्त तक बढ़ाने का आदेश दिया।

    अधिवक्ता शुभांग दीक्षित के अनुसार, सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और एजेंसी 19 अगस्त से पहले चार्जशीट पेश कर देगी। हालांकि अदालत ने सीबीआई को 17 अगस्त तक ही चार्जशीट पेश करने का निर्देश दिया है। यानी अब जांच एजेंसी को इसी तारीख तक चालान पेश करना होगा।

    अधिवक्ता दीक्षित ने बताया कि दोनों आरोपियों के मामले में 90 दिन की वैधानिक अवधि भी नजदीक है। समर्थ सिंह की गिरफ्तारी 21 मई को हुई थी, इसलिए उसकी 90 दिन की अवधि 19 अगस्त को पूरी होगी। वहीं गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी 27 मई को हुई थी, इसलिए उनकी 90 दिन की अवधि 25 अगस्त को पूरी होगी।

    अधिवक्ता दीक्षित ने बताया कि सीबीआई 17 अगस्त तक चार्जशीट पेश नहीं करती है तो आरोपियों की ओर से डिफॉल्ट बेल का आधार बन सकता है। उनका कहना है कि इसी वजह से संभावना है कि सीबीआई 17 अगस्त को ही चार्जशीट पेश कर दे।

    शुभांग दीक्षित ने बताया कि सीबीआई के अनुसार, उसकी जांच लगभग पूरी हो चुकी है। गिरिबाला सिंह की ओर से उच्च न्यायालय में जमानत आवेदन लंबित है और इस कारण केस डायरी का बड़ा हिस्सा उच्च न्यायालय भेजा गया है। इसी वजह से मंगलवार को चार्जशीट पेश नहीं हो सकी। हालांकि सीबीआई ने 17 अगस्त तक चार्जशीट पेश करने की बात कही है।

    इधर, सुनवाई के दौरान सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह की ओर से लीगल एड के तहत पेश होने वाले अधिवक्ता अदालत में उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद समर्थ सिंह की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता एनर्स जॉर्ज ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान गिरिबाला सिंह से उनकी ओर से पेश होने की अनुमति ली। गिरिबाला सिंह ने सहमति दी, जिसके बाद एनर्स जॉर्ज ने उनकी ओर से वकालतनामा दाखिल करने की अनुमति मांगी।

    अधिवक्ता शुभांग दीक्षित ने बताया कि गिरिबाला सिंह की जमानत अर्जी पहले से लंबित है। मंगलवार को भी सुनवाई में सीबीआई 11 अगस्त को अपना चालान प्रस्तुत करने वाली थी, लेकिन सीबीआई के अधिकारियों ने कहा कि कुछ मेडिकल व फॉरेंसिक रिपोर्ट का अभी पूरी तरह से अध्ययन व उसके आधार पर विवेचना चल रही है। इस कारण आगामी पेशी पर अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करेंगे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 17 अगस्त मुकर्रर की है, इससे संभव है कि सीबीआई 17 अगस्त को अपनी अंतिम स्टेटस रिपोर्ट पेश करेगी।

    हाईकोर्ट में जमानत पर भी टल गई सुनवाई

    वहीं, इधर गिरिबाला सिंह ने उम्र, स्वास्थ्य कारणों, अभी तक कोई ठोस अपराध सिद्ध नहीं होने और अपनी मां की सेवा जैसे विषयों को लेकर उच्च न्यायालय में जमानत की याचिका दायर की थी। जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी। अब 12 अगस्त को उच्च न्यायालय में सुनवाई होने की संभावना है। गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका का ट्विशा के परिजनों ने भी आवेदन देकर विरोध किया है। उनके आवेदन पर भी उच्च न्यायालय सुनवाई नहीं हो सकी है। संभवतः 12 अगस्त को दोनों पर सुनवाई हो। इससे पहले 25 जुलाई को भोपाल जिला अदालत ने गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज कर चुकी है। इसके बाद गिरिबाला ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

    उल्लेखनीय है कि 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स थाना क्षेत्र के बागमुगालिया एक्सटेंशन कॉलोनी स्थित अपनी ससुराल में ट्विशा शर्मा फांसी के फंदे पर लटकी मिली थी। नोएडा निवासी परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया था। उच्च न्यायालय के आदेश पर दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमार्टमम किया। परिजनों ने एक सप्ताह तक भोपाल में जमकर हंगामा, प्रदर्शन और आंदोलन किया, इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी है। अब सीबीआई की दिल्ली इकाई की टीम ही पूरे मामले की जांच कर रही है। दहेज हत्या के आरोप में ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह भोपाल केंद्रीय जेल में बंद हैं।

  • किसानों से भूमि अधिग्रहण पर उन्हें दिया जाएगा चार गुना मुआवजा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    किसानों से भूमि अधिग्रहण पर उन्हें दिया जाएगा चार गुना मुआवजा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार खेती और किसान के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने किसानों को भरोसा देते हुए कहा कि किन्हीं भी शासकीय योजनाओं के निर्माण के लिए कृषि भूमि का अधिग्रहण करने पर किसानों को एक-दो नहीं, पूरे चार गुना मुआवजा दिया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार शाम को मंत्रालय से भोपाल की करौंद कृषि उपज मंडी परिसर में हुए बलराम कृषि महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने किसानों से अपनी जमीन हर हाल में सुरक्षित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भूमि हमारी माता है। यह हमारा उदर-पोषण करती है। इसे किसी को न बेचें।

    मुख्यमंत्री ने किसानों से कहा कि आपके खेत सरकार के लिए देवस्थल है और आपका एक-एक दाना हमारे लिए प्रसाद के समान है। आपके पसीने की हरेक बूंद के सम्मान के लिए हमारी सरकार हमेशा आपके साथ है। उन्होंने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव किसानों की मेहनत, समर्पण और कृषि क्षेत्र में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मान देने का माध्यम है।

    मुख्यमंत्री ने वीसी से बलराम कृषि महोत्सव में मौजूद किसानों से संवाद भी किया। उन्होंने कहा कि आपकी खुशी हमारे लिए होली और सबसे बड़ी दिवाली है। उन्होंने किसानों से पूरे उत्साह के साथ बलराम कृषि महोत्सव में सहभागी बनने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। बीते 26 दिनों में यह प्रदेश का 14वां बलराम कृषि महोत्सव आयोजन है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द भोपाल मुख्यालय में भी एक बड़ा कृषि महोत्सव आयोजित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से “कवच” योजना शुरू की है। इससे सहकारी खातों की पुरानी गड़बड़ियां दूर कर पांच हजार किसानों को ऋण और विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाया गया है। किसानों को बिना ब्याज के ऋण और ऋण चुकाने के लिए पूरे 12 महीने का समय देने की व्यवस्था भी इस योजना में की गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश का किसान अपने परिश्रम से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। मध्य प्रदेश दलहन में पहले अन्न उत्पादन में देश में दूसरे, , तिलहन में दूसरे और दुग्ध उत्पादन में तीसरे स्थान पर है। जैविक खेती और जैविक कपास उत्पादन में प्रदेश पूरे देश में अव्वल है।

    उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय के साधन बढ़ाने, खेती की लागत घटाने तथा तकनीक और नवाचार के माध्यम से उत्पादन एवं आमदनी बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है। हमने प्रदेश में सिंचाई क्षमता को 100 लाख हैक्टेयर तक बढ़ाने, उद्यानिकी का रकबा 30 लाख हैक्टेयर करने तथा 10 हजार नई सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से फसल विविधीकरण अपनाने, उद्यानिकी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा पशुपालन एवं मछली पालन से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेती को सिर्फ अन्न उत्पादन का जरिया होने तक सीमित न रखकर इसे प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से जोड़कर किसानों की आय के नए रास्ते खोले जा रहे है।

    बलराम कृषि महोत्सव में स्थानीय विधायक विष्णु खत्री, तीरथ सिंह मीणा, गोपाल सिंह मीणा, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ जिलाधिकारीगण सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय किसान बंधु उपस्थित थे। विधायक रामेश्वर शर्मा और अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने मंत्रालय से ही बलराम कृषि महोत्सव में सहभागिता की।

  • मप्र: मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वतंत्रता दिवस पर भोपाल और विधानसभा अध्यक्ष तोमर ग्वालियर में करेंगे ध्वजारोहण

    मप्र: मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वतंत्रता दिवस पर भोपाल और विधानसभा अध्यक्ष तोमर ग्वालियर में करेंगे ध्वजारोहण


    – उप मुख्यमंत्री देवड़ा मंदसौर, उप मुख्यमंत्री शुक्ल रीवा और जिला मुख्यालयों पर मंत्रीगण करेंगे ध्वजारोहण

    भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वतंत्रता दिवस पर 15 अगस्त को राजधानी भोपाल में आयोजित राज्य-स्तरीय समारोह में ध्वजारोहण कर प्रदेशवासियों के नाम संदेश देंगे। इस अवसर पर राजधानी भोपाल सहित जिला मुख्यालयों पर विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां भी होंगी। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ग्वालियर में ध्वजारोहण करेंगे।

    सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मंगलवार को जारी आदेश के अनुसार, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा मंदसौर और उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल रीवा में ध्वजारोहण करेंगे। मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह खण्डवा, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय देवास, मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल नरसिंहपुर, मंत्री राकेश सिंह जबलपुर, मंत्री करन सिंह वर्मा सीहोर, मंत्री राव उदय प्रताप सिंह छिंदवाड़ा, मंत्री सम्पतिया उइके मंडला, मंत्री तुलसीराम सिलावट इंदौर, मंत्री एदल सिंह कंषाना मुरैना, मंत्री निर्मला भूरिया झाबुआ, मंत्री गोविंद सिंह राजपूत सागर, मंत्री विश्वास कैलाश सारंग खरगौन, मंत्री नारायण सिंह कुशवाह दतिया, मंत्री नागर सिंह चौहान अलीराजपुर, मंत्री प्रदुम्न सिंह तोमर शिवपुरी, मंत्री राकेश शुक्ला श्योपुर और मंत्री इन्दर सिंह परमार शाजापुर में ध्वजारोहण करेंगे।

    राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर टीकमगढ़, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी दमोह, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल अनूपपुर, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल उज्जैन, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल विदिशा, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नारायण सिंह पंवार राजगढ़, राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल रायसेन, राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी सतना, राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार छतरपुर और राज्यमंत्री राधा सिंह सिंगरौली में ध्वजारोहण करेंगी।

    रतलाम, शहडोल, नर्मदापुरम, धार, बालाघाट, पांढुर्णा, सिवनी, निवाड़ी, सीधी, बड़वानी, मउगंज, गुना, उमरिया, आगर-मालवा, हरदा, नीमच, अशोकनगर, कटनी, भिण्ड, पन्ना, बैतूल, डिण्डौरी, मैहर और बुरहानपुर जिले में संबंधित जिले के कलेक्टर ध्वजारोहण करेंगे।