Category: Madhya Pradesh

  • दर्द से तड़प रहे युवक को इंजेक्शन देने के बाद नहीं आया होश, एमवाय अस्पताल में मौत से मचा हड़कंप, परिजनों ने उठाए इलाज पर सवाल

    दर्द से तड़प रहे युवक को इंजेक्शन देने के बाद नहीं आया होश, एमवाय अस्पताल में मौत से मचा हड़कंप, परिजनों ने उठाए इलाज पर सवाल


    इंदौर । इंदौर में गर्म दाल से झुलसे 30 वर्षीय युवक की एमवाय अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। युवक की मौत के बाद परिजनों ने इलाज के दौरान इंजेक्शन दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि दर्द से परेशान युवक को इंजेक्शन लगाने के बाद होश नहीं आया और बाद में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल युवक की मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही चल सकेगा।

    एमआईजी पुलिस के मुताबिक मृतक आकाश वर्मा पुत्र कन्हैयालाल वर्मा सोमनाथ की चाल का निवासी था। रविवार को वह घर में गर्म दाल से झुलस गया था। हादसे में उसके पैर बुरी तरह जल गए थे। इसके बाद परिजन उसे उपचार के लिए एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे जहां उसे भर्ती किया गया। परिवार के लोगों को उम्मीद थी कि इलाज के बाद उसकी हालत में सुधार होगा लेकिन कुछ दिनों बाद उसकी मौत की खबर से परिवार में शोक छा गया।

    परिजनों और रिश्तेदारों के अनुसार आकाश का परिवार एमआईजी मेन रोड पर दाल पकवान की दुकान चलाता है। दुकान के लिए दाल घर पर ही उबाली जाती है। रविवार को आकाश ऊपर बने कमरे से गर्म दाल लेकर नीचे आ रहा था। इसी दौरान वह गर्म दाल की चपेट में आ गया और उसके पैर झुलस गए। हादसे के बाद परिवार के लोग उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार शुरू किया गया।

    परिवार का आरोप है कि मंगलवार रात आकाश दर्द के कारण चिल्ला रहा था। इसी दौरान डॉक्टरों ने उसे एक इंजेक्शन लगाया। परिजनों के मुताबिक इंजेक्शन दिए जाने के बाद आकाश को होश नहीं आया। बुधवार रात चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की मौत के बाद परिवार ने उपचार के तरीके को लेकर सवाल उठाए और इंजेक्शन दिए जाने के बाद उसकी हालत बिगड़ने की आशंका जताई। हालांकि फिलहाल यह साबित नहीं हुआ है कि इंजेक्शन और युवक की मौत के बीच कोई सीधा संबंध था। इस संबंध में चिकित्सकीय जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।

    पुलिस ने परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों को ध्यान में रखते हुए मामले में मर्ग कायम किया है। शव का पोस्टमार्टम कराया गया है ताकि मौत के कारणों का पता लगाया जा सके। जांच के दौरान उपचार से जुड़े तथ्यों और अन्य परिस्थितियों की पड़ताल की जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत किस वजह से हुई। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

    इसी बीच इंदौर के खुड़ैल क्षेत्र से भी एक अन्य मौत का मामला सामने आया है। तिल्लोर खुर्द निवासी 46 वर्षीय अजय पुत्र दयाशंकर की एमवाय अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। पुलिस के अनुसार अजय ने जहर खा लिया था और परिजन बुधवार को उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे थे। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले में भी पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

    दोनों घटनाओं के बाद पुलिस मौतों से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। आकाश वर्मा के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है। वहीं इलाज के दौरान लापरवाही के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

  • इंदौर में आबादी के करीब पहुंचा घायल तेंदुआ, सिर-मुंह पर चोट देखकर ग्रामीणों में चिंता, रालामंडल की पहाड़ियों से आने की आशंका

    इंदौर में आबादी के करीब पहुंचा घायल तेंदुआ, सिर-मुंह पर चोट देखकर ग्रामीणों में चिंता, रालामंडल की पहाड़ियों से आने की आशंका


    इंदौर इंदौर के पास खुड़ैल थाना क्षेत्र में क्रिसेंट वॉटर पार्क के नजदीक बुधवार सुबह घायल हालत में तेंदुआ दिखाई देने से आसपास के इलाके में चिंता का माहौल बन गया। तेंदुआ एक रहवासी मकान के पास बैठा नजर आया। ग्रामीणों के मुताबिक उसके सिर और मुंह पर चोट के निशान थे और वह सुस्त हालत में दिखाई दे रहा था। सूचना मिलने के बाद पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और इलाके में तेंदुए की तलाश शुरू कर दी। हालांकि वन विभाग के अधिकारियों की ओर से अब तक तेंदुए की मौजूदगी और उसके घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह क्रिसेंट वॉटर पार्क के पास हरिओम ठाकुर के मकान के नजदीक लोगों ने तेंदुए को बैठे देखा। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ सामान्य रूप से सक्रिय नहीं दिख रहा था। उसके चेहरे और सिर पर चोट के निशान नजर आ रहे थे। इस स्थिति को देखते हुए आशंका जताई गई कि वह किसी दूसरे वन्यजीव के साथ संघर्ष के दौरान घायल हुआ होगा। हालांकि चोट लगने की वास्तविक वजह की पुष्टि नहीं हुई है। तेंदुए को आबादी के नजदीक देखने के बाद आसपास के लोगों में चिंता बढ़ गई और पुलिस तथा वन विभाग को इसकी सूचना दी गई।

    सूचना मिलते ही संबंधित टीमें मौके पर पहुंचीं और आसपास के क्षेत्र में उसकी तलाश शुरू की। तेंदुआ कुछ समय बाद वहां से भाग गया था। ऐसे में वन विभाग की टीम उसकी मौजूदगी का पता लगाने के लिए सर्चिंग कर रही है। ग्रामीणों को आशंका है कि घायल होने के कारण तेंदुआ किसी खेत या झाड़ियों में छिपा हो सकता है। यदि वह आसपास के रहवासी क्षेत्र में मौजूद है तो लोगों और मवेशियों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए उसकी लोकेशन का पता लगाना और स्थिति की पुष्टि करना जरूरी माना जा रहा है।

    हरिओम ठाकुर के मुताबिक यह पहली बार नहीं है जब उनके फार्म हाउस के आसपास तेंदुआ दिखाई दिया हो। उन्होंने बताया कि 8 अक्टूबर को भी एक तेंदुआ उनके फार्म हाउस में घुस आया था और वहां मवेशियों का शिकार किया था। उस समय ग्रामीणों ने उसे भगाया था। अब दोबारा मकान के पास तेंदुआ दिखाई देने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में तेंदुए की आवाजाही को देखते हुए वन विभाग को सतर्कता बढ़ाने और लोगों को जरूरी जानकारी देने की आवश्यकता है।

    ठाकुर के अनुसार उनके मकान के पास रालामंडल की पहाड़ियां स्थित हैं। उनका मानना है कि पहाड़ियों से तेंदुआ आसपास के खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पहाड़ी क्षेत्र और आसपास के इलाके के बीच पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। फिलहाल खेतों में पानी देने का समय है और किसान सुबह तथा देर शाम तक खेतों में काम करते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को डर है कि यदि घायल तेंदुआ खेतों या रास्तों के आसपास मौजूद रहा तो किसी अप्रिय घटना की आशंका बढ़ सकती है।

    इस घटना के बाद अब वन विभाग की सर्चिंग पर नजर है। सबसे जरूरी है कि तेंदुए की वास्तविक स्थिति और उसके घायल होने की पुष्टि की जाए। तब तक स्थानीय लोगों को सतर्क रहने और तेंदुए के नजदीक जाने या उसे घेरने की कोशिश नहीं करने की जरूरत है। वन विभाग की टीम के सामने चुनौती तेंदुए का पता लगाने के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी है।

  • शिवपुरी में सहायक प्राध्यापक की पत्नी ने लिव-इन संबंधों को लेकर किया हंगामा, दोनों पक्षों ने थाने में दर्ज कराई शिकायत

    शिवपुरी में सहायक प्राध्यापक की पत्नी ने लिव-इन संबंधों को लेकर किया हंगामा, दोनों पक्षों ने थाने में दर्ज कराई शिकायत

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी में एक कॉलेज के सहायक प्राध्यापक के कथित लिव-इन संबंधों को लेकर विवाद सामने आया है। प्रोफेसर कॉलोनी स्थित एक आवास पर पहुंची उनकी पत्नी ने पति के एक महिला सहकर्मी के साथ रहने पर आपत्ति जताई। इस दौरान करीब तीन घंटे तक दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना रहा। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और बाद में संबंधित लोगों को थाने ले गई। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

    यह मामला शिवपुरी के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, श्रीमंत माधवराव सिंधिया पीजी कॉलेज में पदस्थ सहायक प्राध्यापक चेतन्य राजपूत और उनकी महिला सहकर्मी राजवती किरार से जुड़ा है। ग्वालियर निवासी प्रीति राजपूत का आरोप है कि उनके पति चेतन्य राजपूत कॉलेज में पदस्थ अविवाहित सहायक प्राध्यापक राजवती किरार के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं। इसी बात को लेकर वह प्रोफेसर कॉलोनी स्थित आवास पर पहुंचीं और दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया।

    प्रीति राजपूत का दावा है कि उनके पति और महिला सहकर्मी का एक बच्चा भी है। उन्होंने अपने नौ वर्षीय बेटे का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उनके पति ने उन्हें और बच्चे को छोड़ दिया है। प्रीति का कहना था कि उनका पति संबंधित आवास के अंदर मौजूद है, लेकिन बाहर नहीं आ रहा है। इसी बात को लेकर मौके पर विवाद की स्थिति बनी रही। हालांकि, बच्चे के संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

    हंगामे की सूचना मिलने के बाद डायल-112 और महिला थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस की मौजूदगी में भी काफी देर तक गतिरोध बना रहा। करीब तीन घंटे बाद पुलिस दोनों पक्षों को थाने ले गई, जहां उनके बीच हुए विवाद से संबंधित शिकायतें सामने आईं। इस दौरान मामला केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ आरोप लगाते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की।

    प्रीति राजपूत ने अपने पति चेतन्य राजपूत और महिला सहायक प्राध्यापक राजवती किरार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने लिव-इन संबंधों और कथित धोखाधड़ी को लेकर जांच की मांग की। साथ ही, उन्होंने संबंधित बच्चे का डीएनए परीक्षण कराने की मांग भी उठाई है। यह मांग उनकी शिकायत का हिस्सा है। फिलहाल डीएनए परीक्षण कराए जाने या बच्चे की जैविक पहचान के संबंध में किसी निष्कर्ष की जानकारी सामने नहीं आई है।

    दूसरी ओर, सहायक प्राध्यापक राजवती किरार ने भी शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रीति राजपूत उनके घर में जबरन घुसीं और उनके साथ बदतमीजी की। इस तरह दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग शिकायतें सामने आने के बाद पुलिस के सामने आरोपों की जांच करने और घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की जिम्मेदारी है।

    कॉलेज के प्राचार्य पवन श्रीवास्तव ने चेतन्य राजपूत और राजवती किरार के साथ रहने की बात की पुष्टि की है। हालांकि, उन्होंने बताया कि घटना के समय वह बाहर थे और उन्हें प्रोफेसर कॉलोनी में हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी नहीं थी। वहीं, फिजिकल थाना प्रभारी अविनाश राठौड़ के अनुसार, दोनों पक्षों से प्राप्त शिकायतों की जांच की जा रही है।

    फिलहाल इस मामले में पुलिस जांच जारी है। शिकायतों में लगाए गए आरोपों की पुष्टि और विवाद से जुड़े अन्य तथ्यों का स्पष्ट होना जांच के बाद ही संभव होगा।

  • इंदौर में कांग्रेस को घेरने की तैयारी में BJP, 23 अक्टूबर से 5 नवंबर तक अभियान, कैलाश विजयवर्गीय ने विदेशी ताकतों पर साधा निशाना

    इंदौर में कांग्रेस को घेरने की तैयारी में BJP, 23 अक्टूबर से 5 नवंबर तक अभियान, कैलाश विजयवर्गीय ने विदेशी ताकतों पर साधा निशाना


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर जारी सियासी बहस के बीच भाजपा ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के आरोपों का जवाब देने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी 23 अक्टूबर से 5 नवंबर तक लोकतंत्र बचाओ भीड़तंत्र हटाओ अभियान चलाएगी। इसके तहत पदयात्रा से लेकर प्रबुद्धजन गोष्ठी और युवा संवाद तक कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भाजपा का कहना है कि इन गतिविधियों के जरिए चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस तथा इंडी गठबंधन की ओर से उठाए जा रहे सवालों का जवाब जनता तक पहुंचाया जाएगा।

    भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के मुताबिक कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों से संवैधानिक संस्थाओं के प्रति लोगों के विश्वास को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। पार्टी इसी मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है। भाजपा का आरोप है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाकर भ्रम फैलाने का काम कर रहा है। हालांकि चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर विपक्ष की आपत्तियों पर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बहस जारी है। भाजपा इस अभियान के माध्यम से अपना पक्ष जनता के सामने रखने की कोशिश करेगी।

    अभियान की तैयारियों को लेकर बुधवार रात इंदौर में बैठक आयोजित की गई। इसमें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समेत पार्टी के कई जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में अभियान की रूपरेखा और अलग-अलग कार्यक्रमों की जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई। भाजपा ने तय किया है कि अभियान को केवल राजनीतिक सभाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा बल्कि विभिन्न वर्गों के लोगों से संवाद कर पार्टी अपनी बात पहुंचाएगी।

    सुमित मिश्रा ने बताया कि अभियान के तहत 1 नवंबर को लोकतंत्र बचाओ भीड़तंत्र हटाओ पदयात्रा निकाली जाएगी। हालांकि पदयात्रा का शुरुआती स्थान और रूट अभी तय नहीं किया गया है। इसके अलावा प्रबुद्धजनों की गोष्ठी आयोजित होगी जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों को शामिल करने की योजना है। युवाओं के साथ संवाद और छात्रों के लिए प्रतिस्पर्धाएं भी आयोजित की जाएंगी। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के साथ बातचीत के जरिए भी अभियान का संदेश लोगों तक पहुंचाने की तैयारी है।

    बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि श्रीलंका फ्रांस बांग्लादेश और नेपाल सहित कई देशों में अशांति का माहौल देखने को मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी ताकतें भारत को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहतीं और देश के विकास में बाधा डालने की कोशिश कर रही हैं। विजयवर्गीय ने कहा कि भाजपा की लड़ाई केवल किसी एक राजनीतिक दल या संस्था तक सीमित नहीं है बल्कि उन ताकतों के खिलाफ भी है जो उनके मुताबिक भारत की प्रगति को रोकना चाहती हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अभियान के जरिए विपक्ष के कथित षड्यंत्र को जनता के सामने रखें।

    अभियान को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए भाजपा ने अलग-अलग टोलियां भी बनाई हैं। नगर स्तरीय टोली के संयोजक सुधीर कोल्हे को बनाया गया है जबकि महेश कुकरेजा कैलाश पीपले हरप्रीत सिंह बक्शी मुकेश मंगल नेहा शर्मा और दीपक बागवान को जिम्मेदारी दी गई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस की टोली में आलोक दुबे वरुण पाल रितेश शर्मा और नितीन शर्मा शामिल हैं। पदयात्रा की जिम्मेदारी विधायक रमेश मेंदोला मधु वर्मा गोलू शुक्ला पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय स्वप्निल कोठारी और अक्षय कांति बम को सौंपी गई है। वहीं राष्ट्र चिंतन संवाद टोली में सांसद शंकर लालवानी सहित कई नेताओं को शामिल किया गया है।

    भाजपा का यह अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब चुनाव आयोग की भूमिका और एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। अब देखना होगा कि अभियान के दौरान भाजपा अपने तर्कों को जनता तक किस तरह पहुंचाती है और विपक्ष इन कार्यक्रमों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

  • कन्या भोज के बाद इंदौर में बवाल, बच्चियों पर पैसे चोरी का आरोप लगाकर मारपीट की शिकायत, शिक्षिका ने दी सफाई

    कन्या भोज के बाद इंदौर में बवाल, बच्चियों पर पैसे चोरी का आरोप लगाकर मारपीट की शिकायत, शिक्षिका ने दी सफाई


    इंदौर । इंदौर में कन्या भोज के लिए गईं सात बच्चियों से कथित मारपीट और उन्हें फ्लैट में बंधक बनाकर रखने का मामला सामने आया है। घटना शहनाई रेसीडेंसी की बताई जा रही है जहां परिजनों की शिकायत के बाद एमआईजी पुलिस ने 62 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षिका अनिता मोहता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। परिजनों का आरोप है कि बच्चियों को कन्या भोज और उपहार देने के बहाने फ्लैट में ले जाया गया और वहां चोरी का आरोप लगाकर उनके साथ मारपीट की गई। वहीं शिक्षिका ने इन आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि मंदिर में रखे रुपए गायब होने के बाद उन्होंने बच्चियों से केवल पूछताछ की थी और किसी के साथ मारपीट नहीं की।

    परिजनों के मुताबिक बच्चियां कन्या पूजन के लिए शहनाई रेसीडेंसी गई थीं। वहां अलग-अलग फ्लैट में कन्या भोज और पूजन का कार्यक्रम चल रहा था। बच्चियों को खाना और उपहार मिलने की उम्मीद थी लेकिन कुछ समय बाद जब वे घर नहीं लौटीं तो परिवार के लोग परेशान हो गए। उनकी तलाश करते हुए परिजन सोसाइटी पहुंचे। उनका आरोप है कि बच्चियां एक फ्लैट से रोते हुए नीचे आईं और उन्होंने अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया। परिवार का दावा है कि बच्चियों को करीब चार घंटे तक फ्लैट में रोके रखा गया और उनके साथ मारपीट की गई। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि बच्चियों से वीडियो बनवाकर उनसे रुपए लेने की बात कहलवाई गई। उन्होंने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।

    दूसरी ओर रिटायर्ड शिक्षिका अनिता मोहता ने परिजनों के आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि बच्चियां खुद उनके फ्लैट पर आई थीं और उन्होंने खाना मांगा था। इसके बाद उन्होंने बच्चियों को अंदर बैठाया और उनके लिए दाल चावल बनाने लगीं। शिक्षिका के मुताबिक बच्चियों ने बताया था कि वे सोसाइटी के दूसरे फ्लैट से आ रही हैं। बाद में उन्हें मंदिर में रखे रुपए और लिफाफे गायब होने की जानकारी मिली। अनिता का दावा है कि जब बच्चियां दोबारा उनके पास आईं तो उन्होंने रुपए के बारे में पूछा। इस दौरान बच्चियों ने एक बच्ची की ओर इशारा किया और पूछताछ में रुपए लेने की बात सामने आई। शिक्षिका ने कहा कि उन्होंने बच्चियों को नहीं पीटा और न ही उन्हें बंधक बनाया। उनके अनुसार वे खुद बच्चियों को नीचे छोड़ने गई थीं।

    सोसाइटी के कुछ रहवासियों और सुरक्षा कर्मियों के मुताबिक बच्चियां दोपहर करीब 12 बजे परिसर में पहुंची थीं। वे अलग-अलग फ्लैट में कन्या पूजन के लिए गई थीं जहां उन्हें रुपए और उपहार दिए गए। रहवासियों ने बताया कि बच्चियां हर साल कन्या पूजन के लिए सोसाइटी आती हैं। हालांकि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मामले में मेडिकल जांच की जानकारी भी सामने आई है। परिजनों ने बच्चियों के हाथ-पैरों और गालों पर चोट के आरोप लगाए थे लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट में मारपीट से लगी किसी चोट की पुष्टि नहीं हुई। वहीं सीसीटीवी फुटेज को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। परिजनों का कहना है कि परिसर में कैमरे लगे हैं जबकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक संबंधित फ्लैट और उसी मंजिल पर कैमरे नहीं थे।

    पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज कर बच्चियों के बयान लिए हैं। अब जांच में शिकायतों और शिक्षिका के पक्ष के साथ उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की जाएगी। फिलहाल घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। इसलिए मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

  • शिवपुरी पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, पुनीत वाजपेयी बने सिटी कोतवाली प्रभारी, 19 अधिकारियों के तबादले

    शिवपुरी पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, पुनीत वाजपेयी बने सिटी कोतवाली प्रभारी, 19 अधिकारियों के तबादले


    शिवपुरी जिले में पुलिस विभाग में प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 19 निरीक्षक और उप निरीक्षक स्तर के अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया ने 21 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया। आदेश के अनुसार, सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। इस फेरबदल में कई थानों के प्रभारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं, जबकि कुछ अधिकारियों को उनके वर्तमान पदों से हटाकर पुलिस लाइन भेजा गया है।

    तबादला सूची में सबसे प्रमुख बदलाव शिवपुरी सिटी कोतवाली के थाना प्रभारी पद पर हुआ है। निरीक्षक पुनीत वाजपेयी, जो इससे पहले कोलारस थाने की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, उन्हें अब कोतवाली का नया थाना प्रभारी नियुक्त किया गया है। वहीं, कोतवाली के मौजूदा थाना प्रभारी निरीक्षक रोहित दुबे को उनके पद से हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया गया है। इस बदलाव के बाद कोतवाली की जिम्मेदारी पुनीत वाजपेयी संभालेंगे।

    कोलारस थाने में भी नए प्रभारी की नियुक्ति की गई है। निरीक्षक जितेंद्र चंदेलिया को पुलिस लाइन से स्थानांतरित कर कोलारस थाना प्रभारी बनाया गया है। इससे पहले वह पुलिस लाइन में पदस्थ थे। अब उन्हें थाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस नियुक्ति के साथ कोलारस में थाना प्रभारी का दायित्व बदल गया है।

    पोहरी थाने की कमान निरीक्षक मनीष कुमार धाकड़ को सौंपी गई है। वह भी पुलिस लाइन से स्थानांतरित होकर पोहरी पहुंचेंगे। वहीं, पोहरी के मौजूदा थाना प्रभारी निरीक्षक रवि चौहान को बैराड़ थाने की जिम्मेदारी दी गई है। इस तरह पोहरी और बैराड़ थानों में भी प्रभारियों की अदला-बदली की गई है।

    उप निरीक्षक स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। अरविंद छारी को कोतवाली से स्थानांतरित कर दिनारा थाना प्रभारी बनाया गया है। वहीं, दिनारा में पदस्थ उप निरीक्षक रविंद्र कुशवाह को कोतवाली भेजा गया है। इन नियुक्तियों के जरिए दोनों अधिकारियों की नई पदस्थापना तय की गई है।

    तबादला आदेश में कुछ अधिकारियों को वर्तमान जिम्मेदारियों से हटाकर पुलिस लाइन भेजने के निर्देश भी शामिल हैं। इनमें कोतवाली से रोहित दुबे, बम्हारी से सुनील राजपूत, बैराड़ से सुरेशचंद्र शर्मा और मायापुर से अनिल भारद्वाज के नाम शामिल हैं। इसके अलावा भटनावर चौकी से सीमा धाकड़ और सीहोर से जूली तोमर को भी उनके वर्तमान प्रभार से हटाकर पुलिस लाइन भेजा गया है।

    जारी जानकारी के अनुसार, इस पूरी तबादला सूची में 11 निरीक्षकों और 8 उप निरीक्षकों के नाम शामिल हैं। आदेश में सभी संबंधित अधिकारियों को बिना देरी किए अपने नए पदस्थापना स्थल पर आमद दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस फेरबदल के तहत जिले के कई थानों और पुलिस इकाइयों में जिम्मेदारियां बदली गई हैं। नई नियुक्तियों के बाद संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र का प्रभार संभालना होगा।

  • जेपी अस्पताल में डॉक्टरों का फूटा गुस्सा, वेतन और स्टाइपेंड के लिए भूख हड़ताल जारी, तीन महीने की सैलरी और पांच महीने का भुगतान अटका

    जेपी अस्पताल में डॉक्टरों का फूटा गुस्सा, वेतन और स्टाइपेंड के लिए भूख हड़ताल जारी, तीन महीने की सैलरी और पांच महीने का भुगतान अटका


    भोपाल। भोपाल के जयप्रकाश जिला अस्पताल यानी जेपी अस्पताल में वेतन और स्टाइपेंड के भुगतान को लेकर डॉक्टरों का विरोध तेज हो गया है। बकाया राशि नहीं मिलने और वेतन में कथित कटौती से नाराज तीन डॉक्टर 21 अक्टूबर से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। गुरुवार को भी उनका आंदोलन जारी रहा और वे रातभर अस्पताल परिसर में डटे रहे। डॉक्टरों का कहना है कि भुगतान का भरोसा मिलने के बावजूद उनके खाते में पूरी राशि नहीं आई है। ऐसे में उन्होंने बकाया भुगतान और वेतन में कटौती के कारणों को स्पष्ट करने की मांग उठाई है।

    अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष बरथरे के मुताबिक वे बुधवार से भूख हड़ताल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बुधवार सुबह सिविल सर्जन की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने पहुंचा था। प्रतिनिधिमंडल ने एक महीने का वेतन जारी करने की बात कही थी। डॉक्टरों को उम्मीद थी कि इससे उनकी आर्थिक परेशानी कुछ कम होगी लेकिन जब उन्होंने खाते में आई राशि की जांच की तो भुगतान पूरा नहीं मिला। उनका आरोप है कि एक महीने का वेतन जारी करने की बात कहे जाने के बावजूद खाते में कम राशि आई है। इसी वजह से उनकी नाराजगी और बढ़ गई।

    इस आंदोलन में शामिल पीजी छात्र डॉ. शुभम कश्यप की परेशानी भी गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार उनका पांच महीने का स्टाइपेंड अब तक बकाया है। उनका कहना है कि उन्हें एक महीने का स्टाइपेंड भी नहीं मिला है। इसके अलावा पिछले तीन साल में स्टाइपेंड बढ़ने के बाद मिलने वाला एरियर भी लंबित है। लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों ने मांग की है कि उनके बकाया भुगतान की स्थिति स्पष्ट की जाए और लंबित राशि जल्द जारी की जाए।

    डॉक्टरों के मुताबिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष बरथरे और पीजीएमओ ऑर्थोपेडिक्स डॉ. रविंद्र पाल का करीब तीन महीने का वेतन बकाया होने की शिकायत है। वहीं डॉ. शुभम कश्यप पांच महीने के स्टाइपेंड और एरियर का इंतजार कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वेतन और स्टाइपेंड समय पर मिलना जरूरी है क्योंकि इससे उनकी रोजमर्रा की जरूरतें और आर्थिक जिम्मेदारियां जुड़ी होती हैं। भुगतान में लगातार देरी होने से उनके सामने मुश्किलें खड़ी हो रही हैं।

    डॉक्टरों ने यह भी सवाल उठाया है कि जब एक महीने का वेतन देने की बात कही गई थी तो खाते में पूरी राशि क्यों नहीं पहुंची। वे चाहते हैं कि भुगतान में देरी और कथित कटौती के पीछे के कारणों की जानकारी दी जाए। उनका कहना है कि जब तक बकाया राशि और भुगतान संबंधी शिकायतों पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलता तब तक उनका विरोध जारी रह सकता है।

    फिलहाल जेपी अस्पताल में तीन डॉक्टरों की भूख हड़ताल ने वेतन और स्टाइपेंड भुगतान की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से भुगतान में देरी और कथित कटौती को लेकर आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी डॉक्टरों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं और लंबित भुगतान का समाधान कब तक हो पाता है।

  • शिवपुरी में नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल का भव्य विसर्जन समारोह, आकर्षक झांकियों और बच्चों की प्रस्तुतियों ने जीता दिल

    शिवपुरी में नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल का भव्य विसर्जन समारोह, आकर्षक झांकियों और बच्चों की प्रस्तुतियों ने जीता दिल


    शिवपुरी: में श्री नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल की ओर से नवरात्रि के समापन पर देवी प्रतिमा विसर्जन समारोह भव्य रूप से आयोजित किया गया। माधव चौक चौराहे पर सजाए गए मंच से विभिन्न स्थानों से आईं देवी प्रतिमाओं की झांकियों और आकर्षक विमानों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में बच्चों की नृत्य प्रस्तुतियों, डांडिया, गरबा, योग प्रदर्शन और बाहर से आए कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। चल झांकियों का भी भव्य प्रदर्शन किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में शहरवासियों ने भाग लेकर धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन का आनंद लिया।

    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आईटीबीपी शिवपुरी के डीआईजी राजीव लोचन शुक्ला उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता शिवपुरी के डीएफओ सुधांशु यादव ने की। समारोह की शुरुआत अतिथियों और समिति के सदस्यों द्वारा माता की आरती तथा भगवान श्रीगणेश की वंदना के साथ हुई। इसके बाद समिति अध्यक्ष तरुण अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया। आयोजन में पहुंचे अतिथियों का समिति के सदस्यों ने स्वागत किया।

    समारोह में महामंडलेश्वर पुरुषोत्तम दास जी महाराज, प्रहलाद भारती, मंशापूर्णी माता मंदिर की महंत मंजू दीक्षित, सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती प्रसाद शुक्ल, राजू बाथम, डीपीसी दफेदार सिंह और महेंद्र सिंह वशिष्ठ विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। समिति के संरक्षकों रामविलास गुप्ता, अमन गोयल, राजेश कोचेटा और हरज्ञान प्रजापति सहित अन्य सदस्यों का भी स्वागत किया गया।

    आयोजन में सहयोग देने वाले प्रायोजकों को सम्मानित किया गया। इनमें सुमत गुप्ता, पुरुषोत्तम दास गर्ग, विनायक सेठ, उमा देवी शर्मा और सुषमा पांडेय शामिल रहे। हम फाउंडेशन की ओर से साधना गुप्ता, साधना शर्मा और अर्चना माहेश्वरी का भी सम्मान किया गया। विशेष सहयोगी के रूप में पटेल एंड संस के भूपेंद्र रावत का योगदान रहा।

    माधव चौक पर बनाए गए मंच से गुजरने वाले सभी विमान, झांकी मंडलों और समाजसेवी संस्थाओं का नवदुर्गा मंडल की ओर से शॉल, श्रीफल और माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। देवी के स्वागत के लिए विभिन्न समितियों ने शहर के अलग-अलग स्थानों पर निःशुल्क हलवा-चना, शरबत, खिचड़ी और सब्जी-पूड़ी का वितरण किया। इस दौरान शहरवासियों ने प्रसादी ग्रहण की और आयोजन में सहभागिता की।

    सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने मंच पर नृत्य और योग की प्रस्तुतियां दीं। डांडिया और गरबा कार्यक्रम में भी प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। नृत्य प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रियंका व्यास, नेत्रा जोशी, टीना गुप्ता और दीपा बंसल शामिल रहीं। बाहर से आए कलाकारों ने भी विशेष प्रस्तुतियां दीं। मंच पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से धार्मिक उत्सव का माहौल बना रहा।

    कार्यक्रम के संचालन में मणिका शर्मा, वरुण राजौरिया, शिखा मंगल और भोपाल की एंकर नम्रता शुक्ला की भूमिका रही। आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष तरुण अग्रवाल, संयोजक संदीप वशिष्ठ, स्वागत अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र गुप्ता, सह स्वागत अध्यक्ष बृजेश शर्मा, उपाध्यक्ष रामलखन मुढ़ौतिया और वरुण राजौरिया सहित समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने योगदान दिया। सचिव अरुण शर्मा, सह सचिव हर्षित मंगल, कोषाध्यक्ष हृदेश गोयल, सह कोषाध्यक्ष रवि पाराशर, मंच प्रभारी संकेत शुक्ला और सह मंच प्रभारी देवेंद्र जैन खतौरा सहित अन्य सदस्य भी आयोजन की व्यवस्थाओं में शामिल रहे।

    कार्यक्रम संयोजक संदीप वशिष्ठ ने जिला पुलिस प्रशासन, नगरपालिका, विद्युत विभाग और शहर की धर्मप्रेमी जनता के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने शहरवासियों को दशहरा पर्व की शुभकामनाएं भी दीं। आयोजन के अंत में माता की महाआरती की गई और भावपूर्ण विदाई के साथ विसर्जन समारोह संपन्न हुआ।

    मुख्य समारोह से पहले नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल ने क्षत्रिय समाज की बाइक रैली और दशहरा मिलन चल समारोह का स्वागत किया था। दोपहर में खटीक समाज की काली माता रैली तथा शाम को पंजाबी परिषद और श्री नरसिंह मंदिर उत्सव समिति की ओर से निकाली गई राम बारात का भी स्वागत किया गया।

  • सीएम के सामने बदले मंच के समीकरण, रावण के 9 सिर पर सवाल और अफसर को मकान नहीं, एमपी के ये किस्से चर्चा में

    सीएम के सामने बदले मंच के समीकरण, रावण के 9 सिर पर सवाल और अफसर को मकान नहीं, एमपी के ये किस्से चर्चा में


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में दशहरे के आयोजनों के दौरान कुछ ऐसे दिलचस्प नजारे सामने आए जिन्होंने राजनीति से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था तक को चर्चा में ला दिया। कहीं मुख्यमंत्री के सामने भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के साथ हुई एक घटना ने सियासी गलियारों में तंज का मौका दिया तो कहीं रावण के पुतले में दस की जगह नौ सिर लगाए जाने पर सवाल उठे। वहीं हरदा में पूर्व मंत्री कमल पटेल का भाषण उस समय चर्चा में आ गया जब बीच कार्यक्रम में उनके पास फोन पहुंच गया। इन घटनाओं के बीच नए जिले में पदस्थ एक आईएएस अधिकारी को सरकारी आवास नहीं मिलने का मामला भी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता नजर आया।

    भोपाल में दशहरे के एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंच की ओर जा रहे थे। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा मुख्यमंत्री की अगवानी कर रहे थे और उन्हें आगे लेकर बढ़ रहे थे। इसी दौरान मध्य प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा ने मुख्यमंत्री से हाथ मिलाया। लेकिन मुलाकात ज्यादा देर नहीं चल सकी। रामेश्वर शर्मा मुख्यमंत्री को आगे बढ़ने का इशारा करते दिखाई दिए और इसी दौरान वीडी शर्मा को धक्का लगने के बाद वह एक तरफ हो गए। इस घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने इस पर राजनीतिक अंदाज में टिप्पणियां कीं। हालांकि इस दृश्य से किसी की राजनीतिक हैसियत या इरादे के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा लेकिन घटना चर्चा का विषय जरूर बन गई।

    दूसरा दिलचस्प मामला ग्वालियर जिले के डबरा का है जहां दशहरे पर रावण के पुतले को लेकर चूक सामने आई। रावण को दशानन कहा जाता है और उसके दस सिरों की पहचान धार्मिक कथाओं में खास महत्व रखती है। लेकिन यहां पुतले में दस की जगह नौ सिर ही लगाए गए थे। जब इस गलती पर लोगों का ध्यान गया तो आयोजन से जुड़े लोगों ने दसवां सिर भी लगा दिया। इसके बावजूद मामला पूरी तरह नहीं संभला क्योंकि नए सिर का आकार भी चर्चा का कारण बन गया। इस छोटी सी चूक ने दशहरे के आयोजन को लोगों के बीच हास्य और सवालों का विषय बना दिया।

    हरदा में दशहरा उत्सव के दौरान पूर्व मंत्री कमल पटेल अपने भाषण को लेकर सुर्खियों में रहे। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच उन्होंने जोशीले अंदाज में अपनी बात रखी। भाषण के दौरान उन्होंने भारत माता का अपमान करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान राम का वंशज तथा अवतारी पुरुष बताया। इसी बीच एक युवक उनके पास फोन लेकर पहुंचा। कमल पटेल ने भाषण रोककर फोन पर बात करना शुरू कर दिया। इस घटनाक्रम पर भी लोगों ने चुटकी ली और सवाल उठाया कि आखिर भाषण के बीच फोन आने की वजह क्या थी। हालांकि फोन आने के कारण का स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया।

    इसी बीच प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा एक और मामला सामने आया। बताया गया कि नए जिले में पदस्थ एक आईएएस अधिकारी को रहने के लिए सरकारी आवास उपलब्ध नहीं हो सका। उन्हें बताया गया कि पहले पदस्थ अधिकारी ने भी करीब दो साल रेस्ट हाउस में रहकर समय बिताया था और परिवार को साथ नहीं रख पाए थे। यह स्थिति नए जिलों में सरकारी कार्यालयों और अधिकारियों की तैनाती के साथ जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की चुनौती को सामने लाती है। कुल मिलाकर दशहरे के इन किस्सों ने प्रदेश में राजनीतिक घटनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर नई चर्चा छेड़ दी।

  • मध्यप्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव का ऐलान, 26 अक्टूबर से नामांकन और 12 नवंबर को वोटिंग, जानिए कब होगी मतगणना

    मध्यप्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव का ऐलान, 26 अक्टूबर से नामांकन और 12 नवंबर को वोटिंग, जानिए कब होगी मतगणना


    भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की एक रिक्त सीट पर उपचुनाव की तारीख घोषित कर दी गई है। केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट पर 12 नवंबर 2026 को मतदान कराया जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग ने गुरुवार 22 अक्टूबर को चुनाव कार्यक्रम जारी किया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतदान के दिन ही शाम 5 बजे मतगणना भी होगी। इस चुनाव को लेकर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ने की संभावना है। राज्यसभा की यह सीट मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है जबकि उनका कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक निर्धारित था। ऐसे में अब उपचुनाव के जरिए इस सीट पर नए सदस्य का चयन किया जाएगा।

    निर्वाचन आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक चुनाव प्रक्रिया 26 अक्टूबर से शुरू होगी। इसी दिन उपचुनाव की अधिसूचना जारी की जाएगी और उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे। नामांकन जमा करने की अंतिम तारीख 2 नवंबर निर्धारित की गई है। इसके बाद 3 नवंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी। उम्मीदवारों को नाम वापस लेने के लिए 5 नवंबर तक का समय दिया जाएगा। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 12 नवंबर को मतदान होगा और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना की जाएगी। आयोग के कार्यक्रम के अनुसार चुनाव प्रक्रिया 16 नवंबर तक पूरी की जानी है।

    एल मुरुगन मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य बनने से पहले तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वे सितंबर 2021 में पहली बार तमिलनाडु से राज्यसभा पहुंचे थे। इसके बाद 3 अप्रैल 2024 को वे मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था लेकिन 14 अक्टूबर 2026 से उनकी राज्यसभा सदस्यता समाप्त हो गई। उनके इस्तीफे के बाद मध्यप्रदेश से राज्यसभा की एक सीट रिक्त हो गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद से भी इस्तीफा दिया था जिसे स्वीकार कर लिया गया।

    मध्यप्रदेश में राज्यसभा की कुल 11 सीटें हैं। मुरुगन के इस्तीफे से पहले इनमें से 8 सीटें भाजपा और 3 सीटें कांग्रेस के पास थीं। अब एक सीट खाली होने के कारण प्रदेश से राज्यसभा में भाजपा के 7 सदस्य और कांग्रेस के 3 सदस्य रह गए हैं। उपचुनाव के जरिए रिक्त सीट भरी जाएगी। इस चुनाव में विधानसभा की संख्या और राजनीतिक दलों के विधायकों का समर्थन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्यसभा के लिए होने वाले इस चुनाव में आम जनता सीधे मतदान नहीं करती बल्कि निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं।

    मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं। यदि सभी विधायक मतदान करते हैं और कोई मत अवैध नहीं होता है तो एक राज्यसभा सीट के चुनाव में जीत के लिए आवश्यक मतों का कोटा 116 होगा। ऐसे में चुनाव के दौरान विधायकों का समर्थन निर्णायक माना जाएगा। राजनीतिक दलों को उम्मीदवार के चयन के साथ अपने विधायकों का समर्थन सुनिश्चित करने पर भी ध्यान देना होगा। हालांकि उम्मीदवार कौन होगा और चुनाव में किस तरह की रणनीति अपनाई जाएगी इसे लेकर अंतिम तस्वीर आगे स्पष्ट होगी।

    फिलहाल चुनाव आयोग की घोषणा के बाद राज्यसभा उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। 26 अक्टूबर को अधिसूचना जारी होने के बाद नामांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। 2 नवंबर तक उम्मीदवार अपना पर्चा दाखिल कर सकेंगे और 5 नवंबर तक नाम वापस लेने का मौका रहेगा। इसके बाद 12 नवंबर को मतदान और मतगणना के साथ चुनाव परिणाम सामने आएगा। इस उपचुनाव से मध्यप्रदेश की राज्यसभा में रिक्त प्रतिनिधित्व पूरा होगा।