Category: Madhya Pradesh

  • जेपी अस्पताल में डॉक्टरों का फूटा गुस्सा, वेतन और स्टाइपेंड के लिए भूख हड़ताल जारी, तीन महीने की सैलरी और पांच महीने का भुगतान अटका

    जेपी अस्पताल में डॉक्टरों का फूटा गुस्सा, वेतन और स्टाइपेंड के लिए भूख हड़ताल जारी, तीन महीने की सैलरी और पांच महीने का भुगतान अटका


    भोपाल। भोपाल के जयप्रकाश जिला अस्पताल यानी जेपी अस्पताल में वेतन और स्टाइपेंड के भुगतान को लेकर डॉक्टरों का विरोध तेज हो गया है। बकाया राशि नहीं मिलने और वेतन में कथित कटौती से नाराज तीन डॉक्टर 21 अक्टूबर से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। गुरुवार को भी उनका आंदोलन जारी रहा और वे रातभर अस्पताल परिसर में डटे रहे। डॉक्टरों का कहना है कि भुगतान का भरोसा मिलने के बावजूद उनके खाते में पूरी राशि नहीं आई है। ऐसे में उन्होंने बकाया भुगतान और वेतन में कटौती के कारणों को स्पष्ट करने की मांग उठाई है।

    अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष बरथरे के मुताबिक वे बुधवार से भूख हड़ताल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बुधवार सुबह सिविल सर्जन की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने पहुंचा था। प्रतिनिधिमंडल ने एक महीने का वेतन जारी करने की बात कही थी। डॉक्टरों को उम्मीद थी कि इससे उनकी आर्थिक परेशानी कुछ कम होगी लेकिन जब उन्होंने खाते में आई राशि की जांच की तो भुगतान पूरा नहीं मिला। उनका आरोप है कि एक महीने का वेतन जारी करने की बात कहे जाने के बावजूद खाते में कम राशि आई है। इसी वजह से उनकी नाराजगी और बढ़ गई।

    इस आंदोलन में शामिल पीजी छात्र डॉ. शुभम कश्यप की परेशानी भी गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार उनका पांच महीने का स्टाइपेंड अब तक बकाया है। उनका कहना है कि उन्हें एक महीने का स्टाइपेंड भी नहीं मिला है। इसके अलावा पिछले तीन साल में स्टाइपेंड बढ़ने के बाद मिलने वाला एरियर भी लंबित है। लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों ने मांग की है कि उनके बकाया भुगतान की स्थिति स्पष्ट की जाए और लंबित राशि जल्द जारी की जाए।

    डॉक्टरों के मुताबिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष बरथरे और पीजीएमओ ऑर्थोपेडिक्स डॉ. रविंद्र पाल का करीब तीन महीने का वेतन बकाया होने की शिकायत है। वहीं डॉ. शुभम कश्यप पांच महीने के स्टाइपेंड और एरियर का इंतजार कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वेतन और स्टाइपेंड समय पर मिलना जरूरी है क्योंकि इससे उनकी रोजमर्रा की जरूरतें और आर्थिक जिम्मेदारियां जुड़ी होती हैं। भुगतान में लगातार देरी होने से उनके सामने मुश्किलें खड़ी हो रही हैं।

    डॉक्टरों ने यह भी सवाल उठाया है कि जब एक महीने का वेतन देने की बात कही गई थी तो खाते में पूरी राशि क्यों नहीं पहुंची। वे चाहते हैं कि भुगतान में देरी और कथित कटौती के पीछे के कारणों की जानकारी दी जाए। उनका कहना है कि जब तक बकाया राशि और भुगतान संबंधी शिकायतों पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलता तब तक उनका विरोध जारी रह सकता है।

    फिलहाल जेपी अस्पताल में तीन डॉक्टरों की भूख हड़ताल ने वेतन और स्टाइपेंड भुगतान की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से भुगतान में देरी और कथित कटौती को लेकर आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी डॉक्टरों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं और लंबित भुगतान का समाधान कब तक हो पाता है।

  • शिवपुरी में नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल का भव्य विसर्जन समारोह, आकर्षक झांकियों और बच्चों की प्रस्तुतियों ने जीता दिल

    शिवपुरी में नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल का भव्य विसर्जन समारोह, आकर्षक झांकियों और बच्चों की प्रस्तुतियों ने जीता दिल


    शिवपुरी: में श्री नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल की ओर से नवरात्रि के समापन पर देवी प्रतिमा विसर्जन समारोह भव्य रूप से आयोजित किया गया। माधव चौक चौराहे पर सजाए गए मंच से विभिन्न स्थानों से आईं देवी प्रतिमाओं की झांकियों और आकर्षक विमानों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में बच्चों की नृत्य प्रस्तुतियों, डांडिया, गरबा, योग प्रदर्शन और बाहर से आए कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। चल झांकियों का भी भव्य प्रदर्शन किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में शहरवासियों ने भाग लेकर धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन का आनंद लिया।

    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आईटीबीपी शिवपुरी के डीआईजी राजीव लोचन शुक्ला उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता शिवपुरी के डीएफओ सुधांशु यादव ने की। समारोह की शुरुआत अतिथियों और समिति के सदस्यों द्वारा माता की आरती तथा भगवान श्रीगणेश की वंदना के साथ हुई। इसके बाद समिति अध्यक्ष तरुण अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया। आयोजन में पहुंचे अतिथियों का समिति के सदस्यों ने स्वागत किया।

    समारोह में महामंडलेश्वर पुरुषोत्तम दास जी महाराज, प्रहलाद भारती, मंशापूर्णी माता मंदिर की महंत मंजू दीक्षित, सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती प्रसाद शुक्ल, राजू बाथम, डीपीसी दफेदार सिंह और महेंद्र सिंह वशिष्ठ विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। समिति के संरक्षकों रामविलास गुप्ता, अमन गोयल, राजेश कोचेटा और हरज्ञान प्रजापति सहित अन्य सदस्यों का भी स्वागत किया गया।

    आयोजन में सहयोग देने वाले प्रायोजकों को सम्मानित किया गया। इनमें सुमत गुप्ता, पुरुषोत्तम दास गर्ग, विनायक सेठ, उमा देवी शर्मा और सुषमा पांडेय शामिल रहे। हम फाउंडेशन की ओर से साधना गुप्ता, साधना शर्मा और अर्चना माहेश्वरी का भी सम्मान किया गया। विशेष सहयोगी के रूप में पटेल एंड संस के भूपेंद्र रावत का योगदान रहा।

    माधव चौक पर बनाए गए मंच से गुजरने वाले सभी विमान, झांकी मंडलों और समाजसेवी संस्थाओं का नवदुर्गा मंडल की ओर से शॉल, श्रीफल और माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। देवी के स्वागत के लिए विभिन्न समितियों ने शहर के अलग-अलग स्थानों पर निःशुल्क हलवा-चना, शरबत, खिचड़ी और सब्जी-पूड़ी का वितरण किया। इस दौरान शहरवासियों ने प्रसादी ग्रहण की और आयोजन में सहभागिता की।

    सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने मंच पर नृत्य और योग की प्रस्तुतियां दीं। डांडिया और गरबा कार्यक्रम में भी प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। नृत्य प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रियंका व्यास, नेत्रा जोशी, टीना गुप्ता और दीपा बंसल शामिल रहीं। बाहर से आए कलाकारों ने भी विशेष प्रस्तुतियां दीं। मंच पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से धार्मिक उत्सव का माहौल बना रहा।

    कार्यक्रम के संचालन में मणिका शर्मा, वरुण राजौरिया, शिखा मंगल और भोपाल की एंकर नम्रता शुक्ला की भूमिका रही। आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष तरुण अग्रवाल, संयोजक संदीप वशिष्ठ, स्वागत अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र गुप्ता, सह स्वागत अध्यक्ष बृजेश शर्मा, उपाध्यक्ष रामलखन मुढ़ौतिया और वरुण राजौरिया सहित समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने योगदान दिया। सचिव अरुण शर्मा, सह सचिव हर्षित मंगल, कोषाध्यक्ष हृदेश गोयल, सह कोषाध्यक्ष रवि पाराशर, मंच प्रभारी संकेत शुक्ला और सह मंच प्रभारी देवेंद्र जैन खतौरा सहित अन्य सदस्य भी आयोजन की व्यवस्थाओं में शामिल रहे।

    कार्यक्रम संयोजक संदीप वशिष्ठ ने जिला पुलिस प्रशासन, नगरपालिका, विद्युत विभाग और शहर की धर्मप्रेमी जनता के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने शहरवासियों को दशहरा पर्व की शुभकामनाएं भी दीं। आयोजन के अंत में माता की महाआरती की गई और भावपूर्ण विदाई के साथ विसर्जन समारोह संपन्न हुआ।

    मुख्य समारोह से पहले नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल ने क्षत्रिय समाज की बाइक रैली और दशहरा मिलन चल समारोह का स्वागत किया था। दोपहर में खटीक समाज की काली माता रैली तथा शाम को पंजाबी परिषद और श्री नरसिंह मंदिर उत्सव समिति की ओर से निकाली गई राम बारात का भी स्वागत किया गया।

  • सीएम के सामने बदले मंच के समीकरण, रावण के 9 सिर पर सवाल और अफसर को मकान नहीं, एमपी के ये किस्से चर्चा में

    सीएम के सामने बदले मंच के समीकरण, रावण के 9 सिर पर सवाल और अफसर को मकान नहीं, एमपी के ये किस्से चर्चा में


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में दशहरे के आयोजनों के दौरान कुछ ऐसे दिलचस्प नजारे सामने आए जिन्होंने राजनीति से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था तक को चर्चा में ला दिया। कहीं मुख्यमंत्री के सामने भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के साथ हुई एक घटना ने सियासी गलियारों में तंज का मौका दिया तो कहीं रावण के पुतले में दस की जगह नौ सिर लगाए जाने पर सवाल उठे। वहीं हरदा में पूर्व मंत्री कमल पटेल का भाषण उस समय चर्चा में आ गया जब बीच कार्यक्रम में उनके पास फोन पहुंच गया। इन घटनाओं के बीच नए जिले में पदस्थ एक आईएएस अधिकारी को सरकारी आवास नहीं मिलने का मामला भी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता नजर आया।

    भोपाल में दशहरे के एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंच की ओर जा रहे थे। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा मुख्यमंत्री की अगवानी कर रहे थे और उन्हें आगे लेकर बढ़ रहे थे। इसी दौरान मध्य प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा ने मुख्यमंत्री से हाथ मिलाया। लेकिन मुलाकात ज्यादा देर नहीं चल सकी। रामेश्वर शर्मा मुख्यमंत्री को आगे बढ़ने का इशारा करते दिखाई दिए और इसी दौरान वीडी शर्मा को धक्का लगने के बाद वह एक तरफ हो गए। इस घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने इस पर राजनीतिक अंदाज में टिप्पणियां कीं। हालांकि इस दृश्य से किसी की राजनीतिक हैसियत या इरादे के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा लेकिन घटना चर्चा का विषय जरूर बन गई।

    दूसरा दिलचस्प मामला ग्वालियर जिले के डबरा का है जहां दशहरे पर रावण के पुतले को लेकर चूक सामने आई। रावण को दशानन कहा जाता है और उसके दस सिरों की पहचान धार्मिक कथाओं में खास महत्व रखती है। लेकिन यहां पुतले में दस की जगह नौ सिर ही लगाए गए थे। जब इस गलती पर लोगों का ध्यान गया तो आयोजन से जुड़े लोगों ने दसवां सिर भी लगा दिया। इसके बावजूद मामला पूरी तरह नहीं संभला क्योंकि नए सिर का आकार भी चर्चा का कारण बन गया। इस छोटी सी चूक ने दशहरे के आयोजन को लोगों के बीच हास्य और सवालों का विषय बना दिया।

    हरदा में दशहरा उत्सव के दौरान पूर्व मंत्री कमल पटेल अपने भाषण को लेकर सुर्खियों में रहे। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच उन्होंने जोशीले अंदाज में अपनी बात रखी। भाषण के दौरान उन्होंने भारत माता का अपमान करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान राम का वंशज तथा अवतारी पुरुष बताया। इसी बीच एक युवक उनके पास फोन लेकर पहुंचा। कमल पटेल ने भाषण रोककर फोन पर बात करना शुरू कर दिया। इस घटनाक्रम पर भी लोगों ने चुटकी ली और सवाल उठाया कि आखिर भाषण के बीच फोन आने की वजह क्या थी। हालांकि फोन आने के कारण का स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया।

    इसी बीच प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा एक और मामला सामने आया। बताया गया कि नए जिले में पदस्थ एक आईएएस अधिकारी को रहने के लिए सरकारी आवास उपलब्ध नहीं हो सका। उन्हें बताया गया कि पहले पदस्थ अधिकारी ने भी करीब दो साल रेस्ट हाउस में रहकर समय बिताया था और परिवार को साथ नहीं रख पाए थे। यह स्थिति नए जिलों में सरकारी कार्यालयों और अधिकारियों की तैनाती के साथ जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की चुनौती को सामने लाती है। कुल मिलाकर दशहरे के इन किस्सों ने प्रदेश में राजनीतिक घटनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर नई चर्चा छेड़ दी।

  • मध्यप्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव का ऐलान, 26 अक्टूबर से नामांकन और 12 नवंबर को वोटिंग, जानिए कब होगी मतगणना

    मध्यप्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव का ऐलान, 26 अक्टूबर से नामांकन और 12 नवंबर को वोटिंग, जानिए कब होगी मतगणना


    भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की एक रिक्त सीट पर उपचुनाव की तारीख घोषित कर दी गई है। केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट पर 12 नवंबर 2026 को मतदान कराया जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग ने गुरुवार 22 अक्टूबर को चुनाव कार्यक्रम जारी किया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतदान के दिन ही शाम 5 बजे मतगणना भी होगी। इस चुनाव को लेकर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ने की संभावना है। राज्यसभा की यह सीट मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है जबकि उनका कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक निर्धारित था। ऐसे में अब उपचुनाव के जरिए इस सीट पर नए सदस्य का चयन किया जाएगा।

    निर्वाचन आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक चुनाव प्रक्रिया 26 अक्टूबर से शुरू होगी। इसी दिन उपचुनाव की अधिसूचना जारी की जाएगी और उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे। नामांकन जमा करने की अंतिम तारीख 2 नवंबर निर्धारित की गई है। इसके बाद 3 नवंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी। उम्मीदवारों को नाम वापस लेने के लिए 5 नवंबर तक का समय दिया जाएगा। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 12 नवंबर को मतदान होगा और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना की जाएगी। आयोग के कार्यक्रम के अनुसार चुनाव प्रक्रिया 16 नवंबर तक पूरी की जानी है।

    एल मुरुगन मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य बनने से पहले तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वे सितंबर 2021 में पहली बार तमिलनाडु से राज्यसभा पहुंचे थे। इसके बाद 3 अप्रैल 2024 को वे मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था लेकिन 14 अक्टूबर 2026 से उनकी राज्यसभा सदस्यता समाप्त हो गई। उनके इस्तीफे के बाद मध्यप्रदेश से राज्यसभा की एक सीट रिक्त हो गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद से भी इस्तीफा दिया था जिसे स्वीकार कर लिया गया।

    मध्यप्रदेश में राज्यसभा की कुल 11 सीटें हैं। मुरुगन के इस्तीफे से पहले इनमें से 8 सीटें भाजपा और 3 सीटें कांग्रेस के पास थीं। अब एक सीट खाली होने के कारण प्रदेश से राज्यसभा में भाजपा के 7 सदस्य और कांग्रेस के 3 सदस्य रह गए हैं। उपचुनाव के जरिए रिक्त सीट भरी जाएगी। इस चुनाव में विधानसभा की संख्या और राजनीतिक दलों के विधायकों का समर्थन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्यसभा के लिए होने वाले इस चुनाव में आम जनता सीधे मतदान नहीं करती बल्कि निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं।

    मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं। यदि सभी विधायक मतदान करते हैं और कोई मत अवैध नहीं होता है तो एक राज्यसभा सीट के चुनाव में जीत के लिए आवश्यक मतों का कोटा 116 होगा। ऐसे में चुनाव के दौरान विधायकों का समर्थन निर्णायक माना जाएगा। राजनीतिक दलों को उम्मीदवार के चयन के साथ अपने विधायकों का समर्थन सुनिश्चित करने पर भी ध्यान देना होगा। हालांकि उम्मीदवार कौन होगा और चुनाव में किस तरह की रणनीति अपनाई जाएगी इसे लेकर अंतिम तस्वीर आगे स्पष्ट होगी।

    फिलहाल चुनाव आयोग की घोषणा के बाद राज्यसभा उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। 26 अक्टूबर को अधिसूचना जारी होने के बाद नामांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। 2 नवंबर तक उम्मीदवार अपना पर्चा दाखिल कर सकेंगे और 5 नवंबर तक नाम वापस लेने का मौका रहेगा। इसके बाद 12 नवंबर को मतदान और मतगणना के साथ चुनाव परिणाम सामने आएगा। इस उपचुनाव से मध्यप्रदेश की राज्यसभा में रिक्त प्रतिनिधित्व पूरा होगा।

  • मोहन यादव ने मुंबई में किया बड़ा ऐलान, बीना से आष्टा तक फैलेगा पेट्रोकेमिकल उद्योग, 2040 तक देश को ट्रिलियन डॉलर इंडस्ट्री बनाने का लक्ष्य

    मोहन यादव ने मुंबई में किया बड़ा ऐलान, बीना से आष्टा तक फैलेगा पेट्रोकेमिकल उद्योग, 2040 तक देश को ट्रिलियन डॉलर इंडस्ट्री बनाने का लक्ष्य


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में बड़े निवेश की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुंबई में आयोजित इंडिया केम 2026 के उद्घाटन सत्र में बताया कि बीना में 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल परियोजना विकसित की जाएगी। इस परियोजना से हर साल 22 लाख टन से अधिक पेट्रोकेमिकल उत्पाद तैयार करने का लक्ष्य है। इससे प्लास्टिक पैकेजिंग फार्मा टेक्सटाइल और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों को जरूरी कच्चा माल उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। साथ ही प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री के मुताबिक ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद मध्यप्रदेश में करीब 12 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को मुंबई के बॉम्बे एग्जिबिशन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय इंडिया केम 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल भी मौजूद रहे। इस आयोजन में देश और विदेश के रसायन पेट्रोकेमिकल पॉलिमर तथा एग्रोकेमिकल उद्योगों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान रसायन उद्योग से संबंधित रिपोर्ट और शोध सामग्री का विमोचन भी किया गया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योगों की स्थापना के लिए बिजली पानी जमीन और औद्योगिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। बीना की परियोजना के साथ विजयपुर में गेल के गैस प्रसंस्करण ढांचे और सीहोर जिले के आष्टा में गेल इंडिया की पेट्रोकेमिकल परियोजना का भी उल्लेख किया गया। इन परियोजनाओं से प्रदेश में पेट्रोकेमिकल और उससे जुड़े उद्योगों के विकास की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। सरकार का प्रयास है कि बड़े उद्योगों के साथ छोटे और मध्यम उद्यमों को भी विकास के अवसर मिलें।

    प्रदेश में प्लास्टिक और पॉलिमर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए रायसेन जिले के तामोट में 121 एकड़ और ग्वालियर के बिलोवा में 93 एकड़ क्षेत्र में प्लास्टिक पार्क विकसित किए गए हैं। इन पार्कों के जरिए संबंधित क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहित करने की योजना है। इसके अलावा पीएम मित्रा पार्क के माध्यम से टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार उद्योगों के लिए सरल और पारदर्शी व्यवस्था बनाने के साथ बिजली पानी और जमीन जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    डॉ. यादव ने देश के रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग की विकास संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में इस क्षेत्र का बाजार करीब 120 अरब डॉलर का था जो अब दोगुने से अधिक हो चुका है। उन्होंने वर्ष 2040 तक भारत के रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को एक ट्रिलियन डॉलर का उद्योग बनाने के लक्ष्य में मध्यप्रदेश की भागीदारी की बात कही। वैश्विक तनाव कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के बीच घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने को महत्वपूर्ण बताया गया।

    कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने रसायन उद्योग में सुरक्षा गुणवत्ता और कारोबार सुगमता पर जोर दिया। उन्होंने खतरनाक रसायनों के सुरक्षित संचालन के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने और गुणवत्ता नियंत्रण मानकों को लागू करने से जुड़े प्रयासों की जानकारी दी। साथ ही छोटे और मध्यम उद्योगों पर इन नियमों के प्रभाव को ध्यान में रखने की जरूरत बताई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्यों के बीच निवेश आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। उन्होंने महाराष्ट्र में रसायन उद्योग की भूमिका और नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजनाओं का भी उल्लेख किया।

    बीना की प्रस्तावित परियोजना से मध्यप्रदेश में पेट्रोकेमिकल आधारित उद्योगों के लिए नई संभावनाएं बन सकती हैं। हालांकि निवेश प्रस्तावों को वास्तविक उत्पादन और रोजगार में बदलने के लिए परियोजना का क्रियान्वयन जरूरी होगा। आने वाले समय में इसकी प्रगति प्रदेश के औद्योगिक विकास पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।

  • बड़ा तालाब संरक्षण के नाम पर जमीन छिनने का डर, भोपाल में किसानों की पदयात्रा, BIZ-1 और BIZ-2 जोन हटाने की मांग

    बड़ा तालाब संरक्षण के नाम पर जमीन छिनने का डर, भोपाल में किसानों की पदयात्रा, BIZ-1 और BIZ-2 जोन हटाने की मांग


    नई दिल्ली। भोपाल मास्टर प्लान के नए ड्राफ्ट को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध तेज होने लगा है। प्रस्तावित योजना में 66 गांवों की कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव किए जाने की आशंका से किसान चिंतित हैं। किसानों का आरोप है कि खेती की जमीन को रिवरफ्रंट फॉरेस्ट ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल करने का प्रस्ताव उनकी आजीविका पर असर डाल सकता है। इसी मुद्दे को लेकर किसानों ने अपनी जमीन बचाने और प्रस्तावित बदलावों पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए पदयात्रा शुरू की। किसान मुगालिया छाप से नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के संयुक्त संचालक कार्यालय तक पहुंचकर ज्ञापन देना चाहते थे लेकिन पुलिस ने नीलबड़ में बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक लिया। पुलिस की ओर से पहले से व्यवस्था किए जाने की वजह यह बताई गई कि पिछली बार किसान भोपाल शहर तक पहुंच गए थे।

    किसानों की मुख्य मांग है कि उनकी कृषि भूमि का उपयोग पहले की तरह खेती के लिए ही सुरक्षित रखा जाए। उनका कहना है कि जिस जमीन पर किसान वर्षों से खेती कर रहे हैं उसी से उनके परिवारों का भरण पोषण होता है। यदि इन जमीनों को दूसरी आरक्षित श्रेणियों में शामिल कर दिया गया तो खेती करने और भविष्य में जमीन का उपयोग करने को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है। किसानों का कहना है कि जमीन केवल संपत्ति नहीं बल्कि उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। इसलिए मास्टर प्लान में कोई भी बदलाव करने से पहले प्रभावित ग्रामीणों की बात सुनी जानी चाहिए।

    किसान अनोखी सिंह पटेल ने आरोप लगाया कि बड़ा तालाब के संरक्षण के नाम पर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि का लैंडयूज बदलने का प्रस्ताव किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि वे बड़ा तालाब के संरक्षण के महत्व को समझते हैं लेकिन इसके नाम पर कृषि भूमि के उपयोग में बदलाव करने से पहले स्थानीय लोगों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि वर्षों से खेती कर रहे परिवारों के भविष्य को लेकर स्पष्टता होना जरूरी है। इसी वजह से किसान प्रस्तावित ड्राफ्ट में किए गए बदलावों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराना चाहते हैं।

    किसानों के मुताबिक वर्ष 1995 के मास्टर प्लान में संबंधित जमीनों का भू-उपयोग कृषि निर्धारित था। इसके बाद वर्ष 2031 के मास्टर प्लान के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट में भी कृषि उपयोग का प्रावधान रखा गया था। हालांकि बाद में वह मास्टर प्लान निरस्त हो गया। अब मौजूदा ड्राफ्ट में बड़ा तालाब के आसपास की कृषि भूमि के उपयोग में बदलाव की आशंका को लेकर किसान विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि नई योजना तैयार करते समय पुराने प्रावधानों और किसानों की आजीविका पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

    किसानों ने भोजताल संरक्षण जोन-1 यानी BIZ-1 और जोन-2 यानी BIZ-2 को हटाने की मांग भी उठाई है। किसान अनोखी सिंह पटेल के मुताबिक खेती उनकी आय का प्रमुख स्रोत है और कृषि भूमि का उपयोग कृषि के लिए ही बनाए रखना जरूरी है। किसानों का कहना है कि यदि उनकी जमीनों को दूसरी श्रेणियों में शामिल किया जाता है तो उनके सामने भविष्य में कई तरह की व्यावहारिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि प्रस्तावित बदलावों पर पुनर्विचार किया जाए और उनकी आपत्तियों का उचित समाधान निकाला जाए।

    किसानों का एक बड़ा सवाल ग्रामसभाओं में सहमति लेने को लेकर भी है। उनका आरोप है कि वर्ष 2031 के मास्टर प्लान की प्रक्रिया के दौरान नए ड्राफ्ट को तैयार करने में पंचायतों से सहमति लेने का आश्वासन दिया गया था लेकिन मौजूदा प्रस्ताव में संबंधित गांवों की सहमति नहीं ली गई। किसान चाहते हैं कि पहले सभी 66 गांवों में ग्रामसभाएं आयोजित की जाएं और प्रस्तावित भू-उपयोग पर विस्तार से चर्चा हो। उनका कहना है कि किसानों की समस्याएं और आपत्तियां सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए। फिलहाल मास्टर प्लान को लेकर किसानों की चिंता बनी हुई है और वे अपनी मांगों को संबंधित विभाग तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

  • शिवपुरी के अकाझिरी गांव में बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर भाई को पीटा, बाइक से घसीटने का आरोप

    शिवपुरी के अकाझिरी गांव में बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर भाई को पीटा, बाइक से घसीटने का आरोप

    शिवपुरी जिले के कोलारस अनुविभाग के रन्नौद थाना क्षेत्र के अकाझिरी गांव में बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर एक युवक के साथ मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि चार युवकों ने पीड़ित के साथ गाली-गलौज की, लाठी-डंडों से हमला किया और उसे बाइक से घसीटते हुए बस स्टैंड तक ले गए। घटना में युवक घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    घटना 20 अक्टूबर 2026 की रात करीब आठ बजे की बताई गई है। अकाझिरी गांव का रहने वाला युवक अपनी बड़ी बहन के साथ रामलीला देखने जा रहा था। इसी दौरान पानी की टंकी के पास गांव के ही राम गुप्ता, मोनू ओझा, कृष्णा ओझा और ज्योतिष ओझा मिल गए। शिकायत के अनुसार, चारों ने युवक की बहन के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ शुरू कर दी।

    बहन के साथ हो रही इस हरकत का युवक ने विरोध किया। आरोप है कि विरोध करने पर चारों युवक नाराज हो गए और उन्होंने पीड़ित के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। इसके बाद लाठी-डंडों से उसकी पिटाई की गई। घटना के दौरान युवक को गंभीर चोटें आईं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हमलावर उसे राम गुप्ता की बाइक से घसीटते हुए बस स्टैंड तक ले गए, जिससे उसकी चोटें और बढ़ गईं।

    पीड़ित के मुताबिक, मारपीट के बाद आरोपियों ने उसे पुलिस में शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी भी दी। घटना के बाद घायल युवक को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार किया जा रहा है। मामले में बहन के साथ कथित छेड़छाड़ और भाई के साथ मारपीट, दोनों आरोपों को लेकर पुलिस कार्रवाई कर रही है।

    पीड़ित की शिकायत के आधार पर पुलिस ने राम गुप्ता, मोनू ओझा, कृष्णा ओझा और ज्योतिष ओझा के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और आरोपियों की तलाश जारी है। घटना में शामिल लोगों की भूमिका, मारपीट की परिस्थितियों और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    अकाझिरी गांव में हुई इस घटना के बाद मामला पुलिस के संज्ञान में है। फिलहाल पुलिस की जांच शिकायत में दर्ज आरोपों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है। आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज होना जांच की शुरुआती कार्रवाई है। मामले में आरोपों की पुष्टि और आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।

  • MP में निकायों में सामान खरीदी में बड़ी गड़बडी… कहीं 2 लाख का कचरा वाहन तो 6 लाख में!

    MP में निकायों में सामान खरीदी में बड़ी गड़बडी… कहीं 2 लाख का कचरा वाहन तो 6 लाख में!


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के नगरीय निकायों (Urban Local Bodies) में सरकारी सामान की खरीदी में कीमतों के भारी अंतर का मामला सामने आया है। कहीं कचरा वाहन (Garbage Vehicle) दो लाख रुपये में खरीदा गया, तो कहीं उसी वाहन के साथ चार डस्टबिन (Four Dustbins) के लिए छह लाख रुपये खर्च किए गए। एलईडी लाइट और केमिकल की खरीदी में भी कीमतों में बड़ा अंतर सामने आया है। इन मामलों को लेकर नगरीय विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे (Additional Chief Secretary Sanjay Dubey) ने अधिकारियों को फटकार लगाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग निकायों की खरीदी और उन पर खर्च की गई राशि की जानकारी जुटा रहा है।

    इस साल अनियमितताओं की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। कुछ दिन पहले भौरी स्थित सुंदरलाल पटवा नगरीय विकास प्रशिक्षण संस्थान में नगरीय निकायों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई थी। इस बैठक का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें संजय दुबे खरीदी में कीमतों के अंतर और कथित अनियमितताओं को लेकर अधिकारियों को चेतावनी देते सुनाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी यह न समझें कि उनकी गतिविधियों पर किसी की नजर नहीं है। विभाग को पता है कि किस निकाय ने क्या खरीदा और किस दर पर खरीदा।


    दो लाख का वाहन, दूसरे निकाय में छह लाख खर्च

    संजय दुबे ने उदाहरण देते हुए बताया कि एक नगरीय निकाय ने कचरा वाहन दो लाख रुपये में खरीदा, जबकि दूसरे निकाय ने उसी वाहन के साथ चार डस्टबिन के लिए छह लाख रुपये खर्च किए। उन्होंने कुछ निकायों में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत वाले वाहन खरीदे जाने का भी जिक्र किया। सवाल उठाया कि जिन निकायों में पर्याप्त वार्ड तक नहीं हैं, वहां इतने महंगे वाहनों की जरूरत क्यों पड़ी।


    एलईडी लाइट की कीमत में भी भारी अंतर

    मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम के अतिरिक्त प्रबंध संचालक अंशुमान राज ने भी खरीदी की दरों में अंतर के उदाहरण दिए। उन्होंने बताया कि एसडीएम के पद पर रहते हुए उन्हें 200 एलईडी बल्ब की खरीदी पर 60 लाख रुपये खर्च किए जाने की शिकायत मिली थी। उन्होंने 60 वॉट की एलईडी लाइट का उदाहरण देते हुए बताया कि एक स्थान पर इसकी कीमत 306 रुपये थी, जबकि भोपाल में इसकी कीमत 11,800 रुपये दर्ज की गई। इसी तरह फिनोलिक डिसइन्फेक्टेंट (कीटाणुनाशक) की कीमत में भी असामान्य अंतर बताया गया। एक स्थान पर इसकी कीमत पांच रुपये प्रति लीटर, जबकि दूसरी जगह 33,500 रुपये लीटर में खरीदी की गई हैं।


    250 करोड़ रुपये बचाने की संभावना

    अंशुमान राज के अनुसार, सरदारपुर नगरीय निकाय ने 2,500 लीटर डिसइन्फेक्टेंट 1.35 लाख रुपये में खरीदा था। उन्होंने कहा कि यदि नगरीय निकाय औसत दरों पर खरीदी करें, तो विभाग करीब 250 करोड़ रुपये की बचत कर सकता है।


    2500 यूजर आईडी-पासपर्ड लीक होने की जानकारी

    प्रजेटेंशन में साइबर सुरक्षा से जुड़ी एक गंभी चिता भी सामने आई। नगरीय प्रशासन विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि गुगल पर पासवर्ड सर्कुलेट हो रहे थे। मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एमपीएसईडीसी) में अतिरिक्त प्रबंध निदेशक ने बताया कि 2500 यूजर आईडी पासवर्ड लीक हुए। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि कुछ कंम्प्यूटरों में इन्फो-स्टीलर मैलवेयर मौजूद होने की आशंका हैं। अधिकारियों को सुरक्षा जांच कराने, एंटीवायरस का उपयोग करने की सलाह दी गई। साथ ही सरकारी और कार्यालयीन कंप्यूटरों पर अनधिकृत टोरेंट डाउनलोड, संदिग्ध ई-मेल और फिशिंग वेबसाइटों से बचने को कहा गया हैं।


    इस साल शिकायतों पर कार्रवाई की चेतावनी

    संजय दुबे ने कहा कि पिछले साल उन्होंने ऐसे मामलों पर अधिक ध्यान नहीं दिया था, लेकिन इस साल अनियमितताओं की शिकायतें मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। विभाग अलग-अलग निकायों की खरीदी और उनकी दरों की जानकारी एकत्र कर रहा है। हालांकि, सामने आए उदाहरणों में बताई गई कीमतों के अंतर के कारणों और संबंधित खरीदी में किसी अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस संबंध में संजय दुबे से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

  • MP Weather: 11 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 24 अक्टूबर से फिर सक्रिय होगा नया सिस्टम

    MP Weather: 11 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 24 अक्टूबर से फिर सक्रिय होगा नया सिस्टम


    भोपाल। मध्यप्रदेश में अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में भी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक, 24 अक्टूबर से एक नया सिस्टम सक्रिय होने के कारण प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में मौसम बदलेगा। वहीं, अगले दो दिन इंदौर संभाग के जिलों के साथ नर्मदापुरम क्षेत्र में भी बारिश होने की संभावना है। आंधी-बारिश के बीच प्रदेश के कई शहरों में रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। अनूपपुर के अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 15.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

    11 जिलों में बारिश के साथ 40 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

    मौसम केंद्र (IMD) के अनुसार, गुरुवार को प्रदेश के 11 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इनमें इंदौर, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, देवास, हरदा, नर्मदापुरम और बैतूल शामिल हैं। इन जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है।

    15 जिलों में हुई बारिश, गैरतगंज में सवा इंच पानी गिरा

    मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात प्रदेश के 15 जिलों में बारिश दर्ज की गई। इनमें धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा, हरदा, देवास, उज्जैन, आगर-मालवा, राजगढ़, भोपाल, रायसेन, गुना, सागर, सीहोर और रतलाम शामिल हैं।

    इस दौरान सबसे ज्यादा बारिश रायसेन जिले के गैरतगंज में दर्ज की गई, जहां करीब सवा इंच पानी गिरा। खंडवा में एक इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। सीहोर में हवा की रफ्तार 37 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई।

    गुरुवार को भी इंदौर, सीहोर और शाजापुर में दोपहर बाद तेज बारिश का दौर देखने को मिला। भोपाल में दिनभर बादल छाए रहे और रात में कई इलाकों में बूंदाबांदी हुई।

    अमरकंटक में पारा 15.8 डिग्री, अगले चार दिन में और गिरेगा तापमान

    आंधी-बारिश के असर से प्रदेश के कई शहरों में रात का तापमान नीचे आया है। मौसम विभाग के मुताबिक, बीती रात अनूपपुर के अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 15.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रीवा में पारा 16 डिग्री, पचमढ़ी में 16.6 डिग्री, मंदसौर में 16.8 डिग्री और दतिया में 17 डिग्री सेल्सियस रहा।

    मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले चार दिन में प्रदेश के न्यूनतम तापमान में दो डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट हो सकती है। दूसरी ओर, दिन में गर्मी का असर भी बना हुआ है। भोपाल, राजगढ़, खरगोन, खंडवा, उज्जैन, खजुराहो, नर्मदापुरम और मंदसौर में अधिकतम तापमान 34.4 से 35.8 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।

    3 अक्टूबर को विदा हो चुका मानसून, फिर भी जारी है बारिश

    मध्यप्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को ही विदा हो गया था। इस बार एक ही दिन में पूरे प्रदेश से मानसून की वापसी हो गई थी। इसके बावजूद सक्रिय मौसमी सिस्टम के कारण बारिश का सिलसिला जारी है।

    पिछले एक सप्ताह से प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के कई जिलों में आंधी-बारिश का असर देखने को मिल रहा है। पिछले छह दिनों में कई जिलों में तेज बारिश भी दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को भी प्रदेश के 11 जिलों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना है, जबकि 24 अक्टूबर से सक्रिय होने वाला नया सिस्टम महीने के आखिरी सप्ताह में भी मौसम को प्रभावित कर सकता है।

  • दिग्विजय सिंह की सनातन यात्रा पर सियासी संग्राम तेज, चंदा चोरी के आरोप और बैलेट पेपर की मांग से गरमाई राजनीति, भाजपा सांसद ने उठाए सवाल

    दिग्विजय सिंह की सनातन यात्रा पर सियासी संग्राम तेज, चंदा चोरी के आरोप और बैलेट पेपर की मांग से गरमाई राजनीति, भाजपा सांसद ने उठाए सवाल


    उज्जैन।  मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या तक निकाली जा रही सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के दूसरे दिन राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। बुधवार को तराना रोड स्थित श्री साईं कुंज कॉलोनी से शुरू हुई यात्रा में दिग्विजय सिंह समर्थकों के साथ पैदल चलते नजर आए। हाथ में डंडा लेकर चल रहे दिग्विजय सिंह ने चंदा चोरी और वोट चोरी के मुद्दे उठाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि चंदा चोरी करने वालों को पकड़ा जाए और जेल भेजा जाए। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई।

    दिग्विजय सिंह की यह यात्रा करीब 950 किलोमीटर लंबी है और लगभग 70 दिनों में अयोध्या स्थित राम मंदिर पहुंचने का कार्यक्रम है। यात्रा के दूसरे दिन पिंगलेश्वर जोड़ नहारिया जोड़ सायराखेड़ी और देवनखेड़ी होते हुए ताजपुर जोड़ तक पहुंचने की योजना थी। इसके बाद भोजन और विश्राम के लिए रुकने तथा शाम को देवास जिले के सिंदूरिया गांव में पड़ाव डालने का कार्यक्रम प्रस्तावित था। दिग्विजय सिंह ने इस यात्रा को शिव धाम से राम धाम तक की यात्रा बताया। इस दौरान उन्होंने समर्थकों के साथ बम-बम भोले का उद्घोष किया जबकि समर्थकों ने जय सियाराम के नारे लगाए। उन्होंने कहा कि सनातनी परंपरा में माता सीता का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    यात्रा को लेकर मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने भी टिप्पणी की थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि राम मंदिर के निर्माण के समय वैसा उत्साह दिखाई नहीं दिया जैसा अब मंदिर के चंदे पर सवाल उठाते हुए नजर आ रहा है। इस बयान पर प्रतिक्रिया पूछे जाने पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्हें छोड़ दीजिए मैं उन्हें जानता भी नहीं। उनके इस जवाब के बाद यात्रा को लेकर चल रही बयानबाजी एक बार फिर चर्चा में आ गई।

    दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय ने यात्रा को धार्मिक आस्था और स्वाभिमान से जुड़ा अभियान बताया। उनके मुताबिक चढ़ावे की कथित चोरी और धर्म के नाम पर धोखाधड़ी जैसी घटनाओं से सनातन धर्म को मानने वाले लोगों के स्वाभिमान को ठेस पहुंचती है। यात्रा के जरिए इन्हीं मुद्दों को उठाकर लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। यात्रा प्रभारी चंदर सिंह सोंधिया के अनुसार यात्रा में स्थायी रूप से शामिल होने के लिए अब तक करीब तीन हजार लोगों ने पंजीकरण कराया है जबकि अलग-अलग स्थानों पर हजारों लोग इससे जुड़ रहे हैं।

    दिग्विजय सिंह ने राम जन्मभूमि के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा है कि मामले में छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई लेकिन बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। उन्होंने वोट चोरी और नोट चोरी के मुद्दे भी उठाए हैं। यात्रा के दौरान पर्चे बांटने और राष्ट्रपति के नाम रिपोर्ट पेश करने की बात भी कही गई है। दिग्विजय सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य अपनी बात जनता तक पहुंचाना और न्याय की मांग करना है। उन्होंने अपनी अनुपस्थिति में यात्रा से जुड़े संवाद की जिम्मेदारी अमृता राय को सौंपने की बात भी कही है।

    दूसरी ओर उज्जैन से भाजपा सांसद अनिल फिरोजिया ने इस यात्रा पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक नौटंकी बताया। उन्होंने कहा कि सनातन का ध्वज भगवा है लेकिन यात्रा में भगवा ध्वज दिखाई नहीं दे रहा। उन्होंने तिरंगे का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देश का मान सम्मान और अभिमान है। सांसद ने दिग्विजय सिंह को संत के बजाय राजनेता बताते हुए कांग्रेस के पुराने रुख और भगवान राम से जुड़े विवादों का भी जिक्र किया। इस तरह यात्रा के धार्मिक उद्देश्य और उसके राजनीतिक मायनों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।