Category: Madhya Pradesh

  • एमपी में खुले बोरवेल पर सख्ती: अब जुर्माने के साथ होगी जेल, रेस्क्यू का पूरा खर्च भी वसूला जाएगा

    एमपी में खुले बोरवेल पर सख्ती: अब जुर्माने के साथ होगी जेल, रेस्क्यू का पूरा खर्च भी वसूला जाएगा


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में लगातार सामने आ रहे बोरवेल हादसों के बाद राज्य सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब खुले या अनुपयोगी बोरवेल को लापरवाही से छोड़ना जमीन मालिकों और ड्रिलिंग एजेंसियों के लिए महंगा साबित होगा। सरकार ने नई बोरवेल नीति और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू कर दी है, जिसके तहत बोरवेल की खुदाई से लेकर उसके बंद करने तक के नियम स्पष्ट कर दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माने के साथ जेल की कार्रवाई भी की जाएगी।

    नई व्यवस्था के अनुसार अब किसी भी नए बोरवेल की खुदाई से पहले संबंधित विभाग में पंजीयन और अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यदि बोरवेल खोदने के बाद उसमें पानी नहीं निकलता है या वह अनुपयोगी साबित होता है, तो जमीन मालिक को 90 दिनों के भीतर उसे मिट्टी, मुरम या कंक्रीट से स्थायी रूप से बंद करना होगा। इसके बाद बंद किए गए बोरवेल की तस्वीर पोर्टल पर अपलोड करना भी जरूरी होगा, ताकि प्रशासन इसकी पुष्टि कर सके।

    सरकार ने पहली बार बोरवेल सुरक्षा नियमों को लेकर कठोर दंडात्मक प्रावधान लागू किए हैं। यदि कोई व्यक्ति पहली बार खुले बोरवेल के मामले में दोषी पाया जाता है तो उस पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। दूसरी बार उल्लंघन करने पर 25 हजार रुपए का जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान रहेगा। यदि खुले बोरवेल के कारण कोई दुर्घटना होती है, तो संबंधित जमीन मालिक और ड्रिलिंग एजेंसी के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज की जाएगी।

    सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि दुर्घटना के बाद चलाए जाने वाले रेस्क्यू ऑपरेशन पर होने वाला पूरा खर्च भी दोषी व्यक्ति या संस्था से वसूला जाएगा। अक्सर बोरवेल हादसों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और प्रशासनिक अमले को कई घंटों या दिनों तक बचाव अभियान चलाना पड़ता है, जिस पर लाखों रुपए खर्च होते हैं। अब यह राशि सरकारी खजाने से नहीं बल्कि जिम्मेदार पक्ष से वसूली जाएगी।

    सरकार ने आम नागरिकों को भी निगरानी प्रक्रिया में शामिल किया है। इसके लिए ‘परख एप’ (PARAKH App) शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति खुले पड़े बोरवेल की फोटो अपलोड कर शिकायत दर्ज करा सकता है। यदि सरकारी जमीन पर खुला बोरवेल पाया जाता है और अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अफसरों पर भी कार्रवाई की जाएगी।

    नई नीति में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधाओं को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। जिन गांवों में नल-जल योजना नहीं पहुंची है और लोगों को निर्धारित मात्रा में पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है, वहां प्राथमिकता के आधार पर नए हैंडपंप और बोरवेल लगाए जाएंगे। इसके लिए प्रशासनिक प्रक्रिया की समय-सीमा भी तय कर दी गई है ताकि लोगों को लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।

    उज्जैन जिले के बड़नगर में दो वर्षीय भागीरथ देवासी की बोरवेल में गिरकर हुई मौत जैसे हादसों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। सरकार का मानना है कि नई नीति और सख्त नियमों से ऐसे दर्दनाक हादसों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय होगी।

  • मानसून की दस्तक में देरी से बढ़ी किसानों की चिंता, एमपी के 13 जिलों में आधा इंच भी बारिश नहीं

    मानसून की दस्तक में देरी से बढ़ी किसानों की चिंता, एमपी के 13 जिलों में आधा इंच भी बारिश नहीं


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में मानसून अब 22 से 24 जून के बीच प्रवेश कर सकता है। मानसून की इस देरी का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ रहा है, क्योंकि खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों की बोवनी प्रभावित होने लगी है। प्रदेश के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां तो देखने को मिली हैं, लेकिन बारिश की मात्रा खेती के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 17 जून के बीच मध्य प्रदेश में औसतन 41.6 मिमी यानी करीब 1.6 इंच बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस बार केवल लगभग 1 इंच बारिश ही दर्ज की गई है। इस तरह प्रदेश में सामान्य से करीब 37 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। स्थिति यह है कि प्रदेश के 13 जिलों में आधा इंच यानी 12.5 मिमी से भी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। इनमें बालाघाट, दमोह, कटनी, मैहर, रीवा, शहडोल, टीकमगढ़, बड़वानी, भिंड, दतिया, धार और खरगोन शामिल हैं। वहीं आलीराजपुर ऐसा जिला है जहां अब तक बारिश का आंकड़ा शून्य है।

    कम बारिश और मानसून की देरी के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर जैसी खरीफ फसलों की बुवाई समय पर नहीं हो पा रही है। शाजापुर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एसएस धाकड़ का कहना है कि सफल बोवनी के लिए कम से कम 4 इंच बारिश आवश्यक है। इतनी बारिश होने पर मिट्टी में पर्याप्त नमी बनती है, जिससे बीजों का अंकुरण बेहतर होता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि जल्दबाजी में बोवनी करने से बचें।

    दरअसल, मानसून के समय पर आने की उम्मीद में कई किसानों ने पहले ही सोयाबीन की बोवनी कर दी थी। अब बारिश नहीं होने से उनके बीज खराब होने का खतरा बढ़ गया है। यदि पर्याप्त नमी नहीं मिली तो किसानों को दोबारा बोवनी करनी पड़ सकती है, जिससे लागत और मेहनत दोनों बढ़ेंगी। हालांकि जिन किसानों के पास सिंचाई की व्यवस्था है, उन्हें कुछ राहत मिल सकती है।

    बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और बारिश का दौर देखने को मिला। भोपाल और राजगढ़ में आधा इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि बैतूल, गुना, इंदौर और छिंदवाड़ा में भी अच्छी बारिश हुई। बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई और मौसम सुहावना हुआ। बैतूल में तापमान एक दिन में करीब 10 डिग्री तक नीचे आ गया।

    मौसम विभाग ने गुरुवार को रतलाम, छिंदवाड़ा और बालाघाट में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। वहीं प्रदेश के 28 जिलों में आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में गर्मी और बारिश दोनों का मिला-जुला असर देखने को मिलेगा। किसानों और आम लोगों की निगाहें अब मानसून की वास्तविक एंट्री पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यही खरीफ सीजन और जल संसाधनों की स्थिति तय करेगा।

  • मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 29 IAS अधिकारियों के तबादले, भोपाल-रीवा को मिले नए कमिश्नर

    मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 29 IAS अधिकारियों के तबादले, भोपाल-रीवा को मिले नए कमिश्नर


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश सरकार ने एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत 29 आईएएस अधिकारियों के तबादले करते हुए कई महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियां की हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा जारी आदेश में भोपाल और रीवा संभाग के आयुक्तों सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। इस प्रशासनिक पुनर्संरचना को आगामी नीतिगत और प्रशासनिक चुनौतियों को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    सरकार ने भोपाल संभाग के आयुक्त संजीव सिंह और रीवा संभाग के आयुक्त बाबू सिंह जामोद को उनके पदों से हटाकर मंत्रालय में नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। अब कर्मवीर शर्मा को भोपाल संभाग का नया आयुक्त नियुक्त किया गया है, जबकि शैलेंद्र सिंह को रीवा संभाग की कमान सौंपी गई है। इन दोनों अधिकारियों की नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री सचिवालय में भी बड़ा बदलाव किया गया है। मुख्यमंत्री के सचिव आलोक कुमार सिंह को उनके पद से हटाकर पंजीयन महानिरीक्षक एवं अधीक्षक मुद्रांक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक गलियारों में इस बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मुख्यमंत्री सचिवालय को राज्य शासन की सबसे प्रभावशाली इकाइयों में गिना जाता है।

    इस फेरबदल में जबलपुर नगर निगम के अपर आयुक्त अरविंद कुमार शाह का नाम भी चर्चा में रहा। हाल ही में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के साथ विवाद के बाद उनका तबादला कर दिया गया है। हालांकि सरकार ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस निर्णय को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

    राज्य सरकार ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां भी सौंपी हैं। बाबू सिंह जामोद को नगरीय विकास एवं आवास विभाग का सचिव बनाया गया है। मुकेश चंद्र गुप्ता को जेल विभाग का प्रमुख सचिव, डॉ. ई. रमेश कुमार को राजस्व विभाग का प्रमुख सचिव तथा विवेक कुमार पोरवाल को खनिज साधन विभाग का प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया है।

    इस सूची में एक और महत्वपूर्ण नाम अमन वीर सिंह का है। पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस के पुत्र अमन वीर सिंह पर सरकार ने भरोसा जताते हुए उन्हें ओएसडी सह आयुक्त कोष एवं लेखा तथा पदेन अपर सचिव वित्त विभाग की जिम्मेदारी दी है। इससे पहले वे ऊर्जा विकास निगम में प्रबंध संचालक के रूप में कार्यरत थे।

    वित्त विभाग और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव किया गया है। अपर सचिव वित्त रोहित सिंह को मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम का प्रबंध संचालक बनाया गया है। उनके पास स्कूल शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। वहीं राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मुख्य कार्यपालन अधिकारी हर्षिका सिंह को बजट संचालक नियुक्त किया गया है।

    प्रशासनिक फेरबदल के दौरान शैलेंद्र सिंह की नियुक्ति भी चर्चा में रही। हाल ही में उनके ‘वॉश ऑन व्हील्स’ नवाचार को लेकर आईएएस एसोसिएशन के समूह में चर्चा और विवाद की स्थिति बनी थी। बाद में मुख्य सचिव ने उनके कार्यों की सराहना की थी। अब उन्हें नगरीय विकास विभाग के सचिव पद से हटाकर रीवा संभाग का आयुक्त बनाया गया है।

    इसके अलावा सरकार ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार भी सौंपे हैं। मनु श्रीवास्तव को कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी) का अतिरिक्त दायित्व दिया गया है। गुलशन बामरा को अनुसूचित जाति कल्याण विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, जबकि अनिरुद्ध मुखर्जी को पर्यावरण विभाग और एपको की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है।

    राज्य सरकार का यह व्यापक प्रशासनिक फेरबदल आने वाले समय में शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे आगामी रणनीतिक बदलावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

  • एमपी में UCC का ड्राफ्ट तैयार: लिव-इन में जन्मे बच्चों को मिलेगा संपत्ति में अधिकार, मानसून सत्र में आ सकता है कानून

    एमपी में UCC का ड्राफ्ट तैयार: लिव-इन में जन्मे बच्चों को मिलेगा संपत्ति में अधिकार, मानसून सत्र में आ सकता है कानून


    भोपाल । मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। उत्तराखंड के बाद अब मध्य प्रदेश भी इस महत्वपूर्ण सामाजिक और कानूनी सुधार को लागू करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हालिया बयान से संकेत मिले हैं कि आगामी मानसून सत्र में यूसीसी विधेयक विधानसभा में पेश किया जा सकता है। इसके लिए गठित समिति ने प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और विभिन्न वर्गों से सुझाव लेने की प्रक्रिया जारी है।

    सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय समिति ने यूसीसी का मसौदा तैयार किया है। समिति राज्यभर में जाकर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और नागरिक संगठनों से संवाद कर रही है। साथ ही सरकार ऑनलाइन माध्यम से भी लोगों की राय ले रही है ताकि कानून को व्यापक जनसमर्थन और सामाजिक स्वीकार्यता मिल सके।

    प्रस्तावित यूसीसी का ढांचा मुख्य रूप से विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर आधारित होगा। सरकार का उद्देश्य अलग-अलग समुदायों में लागू व्यक्तिगत कानूनों के कारण उत्पन्न होने वाली कानूनी जटिलताओं को समाप्त कर सभी नागरिकों के लिए एक समान व्यवस्था लागू करना है।

    ड्राफ्ट का सबसे चर्चित पहलू लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़ा है। प्रस्ताव के अनुसार लिव-इन संबंधों को कानूनी पहचान देने के साथ उनका पंजीकरण या घोषणा अनिवार्य की जा सकती है। यदि ऐसे संबंध टूटते हैं तो महिला को भरण-पोषण और आर्थिक सहायता का अधिकार मिलेगा। इसके अलावा इन संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों को भी पूर्ण कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाएगा। उन्हें माता-पिता की संपत्ति में वैधानिक उत्तराधिकार और अन्य कानूनी अधिकार प्राप्त होंगे, जिससे उनके अधिकारों को लेकर किसी प्रकार का विवाद न रहे।

    यूसीसी का एक प्रमुख उद्देश्य लैंगिक समानता सुनिश्चित करना भी है। प्रस्तावित कानून के तहत महिलाओं और पुरुषों को संपत्ति, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में समान अधिकार दिए जाएंगे। तलाक की प्रक्रिया को भी एक समान कानूनी ढांचे में लाने की तैयारी है। किसी भी धर्म के व्यक्ति द्वारा लिया गया तलाक तभी मान्य होगा जब उसका विधिवत पंजीकरण किया जाएगा। तलाक के बाद भरण-पोषण और गुजारा भत्ते के नियम भी सभी समुदायों के लिए समान होंगे।

    सरकार का दावा है कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित किए बिना नागरिकों के समान अधिकारों को मजबूत करेगा। संविधान के समानता संबंधी प्रावधानों और नीति निर्देशक तत्वों के अनुरूप इसे तैयार किया जा रहा है ताकि सभी नागरिकों को एक समान कानूनी संरक्षण मिल सके।

    हालांकि प्रस्तावित यूसीसी को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता देने के प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह व्यवस्था भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों से मेल नहीं खाती। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि आदिवासी समुदाय को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाता है तो इसे समान नागरिक संहिता कैसे कहा जा सकता है।

    इन तमाम बहसों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि सरकार यूसीसी को लेकर गंभीर है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं तो मानसून सत्र में यह विधेयक विधानसभा में पेश कर पारित कराया जा सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में यूसीसी मध्य प्रदेश की राजनीति और सामाजिक विमर्श का सबसे बड़ा विषय बनने जा रहा है।

  • भोपाल में दर्दनाक सड़क हादसा: आयशर की टक्कर से पेट्रोल पंप कर्मचारी की मौत, दो मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

    भोपाल में दर्दनाक सड़क हादसा: आयशर की टक्कर से पेट्रोल पंप कर्मचारी की मौत, दो मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया


    भोपाल । राजधानी भोपाल के खजूरी थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। नाइट ड्यूटी पूरी कर घर लौट रहे एक पेट्रोल पंप कर्मचारी की आयशर वाहन की टक्कर से मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतक अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गया है, जिनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान 30 वर्षीय नितेश यादव पुत्र अशोक यादव निवासी आमना खेड़ी के रूप में हुई है। नितेश भैंसा खेड़ी स्थित एक पेट्रोल पंप पर सेल्समैन के पद पर कार्यरत था। बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात वह अपनी नियमित ड्यूटी पर था। ड्यूटी समाप्त होने के बाद वह सुबह बाइक से अपने घर लौट रहा था।

    सुबह करीब 10:15 बजे जब नितेश खजूरी सड़क क्षेत्र के पास एक मोड़ से गुजर रहा था, तभी सामने से आ रहे एक आयशर वाहन ने उसकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि नितेश गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद आसपास के लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दुर्घटना के बाद आयशर चालक वाहन लेकर भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए उसे पकड़ लिया। इसके बाद चालक को पुलिस के हवाले कर दिया गया। सूचना मिलते ही खजूरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन को जब्त कर थाने में खड़ा कर लिया है।

    प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने आरोपी चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    नितेश यादव की निजी जिंदगी भी जिम्मेदारियों से भरी हुई थी। करीब छह वर्ष पहले उसकी शादी हुई थी और वह दो बच्चों का पिता था। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी मुख्य रूप से उसी के कंधों पर थी। उसकी अचानक मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। पोस्टमॉर्टम के बाद गुरुवार दोपहर शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।

    अस्पताल की मर्चुरी के बाहर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार के सदस्य और रिश्तेदार इस हादसे को लेकर स्तब्ध हैं। मोहल्ले और परिचितों में भी घटना को लेकर शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था और निगरानी बढ़ाने की मांग की है।

    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और लापरवाह ड्राइविंग के गंभीर खतरे की याद दिलाता है। एक पल की असावधानी ने न केवल एक युवक की जान ले ली, बल्कि उसके परिवार को जीवनभर का दुख दे दिया।

  • मनुआभान टेकरी कांड में बड़ा फैसला: नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के दोषियों को उम्रकैद, डीएनए साक्ष्यों ने दिलाई सजा

    मनुआभान टेकरी कांड में बड़ा फैसला: नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के दोषियों को उम्रकैद, डीएनए साक्ष्यों ने दिलाई सजा


    भोपाल । भोपाल के बहुचर्चित मनुआभान टेकरी दुष्कर्म एवं हत्या कांड में आखिरकार न्यायालय का बड़ा फैसला सामने आया है। विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल की अदालत ने मामले के दोनों आरोपियों अविनाश साहू और जस्टिन राज को दोषी ठहराते हुए शेष प्राकृतिक जीवन तक सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 8-8 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। इस फैसले के साथ वर्षों से चल रहे इस संवेदनशील मामले का महत्वपूर्ण कानूनी अध्याय समाप्त हुआ है।

    यह मामला वर्ष 2019 में सामने आया था और उस समय पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया था। घटना 30 अप्रैल 2019 की है, जब आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा अपनी 16 वर्षीय बुआ और उसके मित्र अविनाश साहू के साथ मनुआभान टेकरी घूमने गई थी। आरोप है कि टेकरी पर दोनों आरोपियों ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया और फिर पहचान छिपाने के उद्देश्य से पत्थर से उसका सिर कुचलकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने शव को लगभग 100 फीट गहरी खाई में स्थित एक गुफा में छिपा दिया था ताकि किसी को घटना की जानकारी न मिल सके।

    घटना के बाद आरोपी खुद को निर्दोष साबित करने के लिए छात्रा की तलाश का नाटक करते रहे। जब बालिका के लापता होने की सूचना पुलिस को मिली तो कोहेफिजा थाना पुलिस ने पूरी रात सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन शुरुआत में कोई सफलता नहीं मिली। जांच के दौरान पुलिस को अविनाश साहू के बयानों में लगातार विरोधाभास दिखाई दिया। संदेह गहराने पर पुलिस ने उससे गहन पूछताछ की, जिसके बाद उसने पूरी वारदात कबूल कर ली। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने खाई में छिपाया गया छात्रा का शव बरामद किया।

    जांच के दौरान पुलिस ने डीएनए रिपोर्ट, मेडिकल परीक्षण और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को एकत्रित किया। पॉक्सो एक्ट, दुष्कर्म, हत्या और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर अदालत में चालान पेश किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की सिफारिश भी की थी।

    हालांकि बाद में सीबीआई ने पुलिस की डीएनए रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए दोनों आरोपियों को क्लीन चिट देने का प्रयास किया और अदालत में क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। लेकिन अदालत ने सीबीआई की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया और उससे विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा। इसके बाद मामले का ट्रायल जारी रहा और उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान तथा वैज्ञानिक जांच रिपोर्टों का गहन परीक्षण किया गया।

    लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में सफल रहा है। न्यायालय ने माना कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोपियों की संलिप्तता को स्पष्ट रूप से साबित करते हैं। इसी आधार पर दोनों दोषियों को कठोर सजा सुनाई गई।

    यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ गंभीर अपराधों में वैज्ञानिक साक्ष्य और सतत न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से दोषियों को कानून के दायरे में लाया जा सकता है। प्रदेश के चर्चित मामलों में शामिल इस प्रकरण में आया फैसला न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों के विश्वास को भी मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

  • मानसून से पहले भोपाल की बड़ी पोल खुली! एक साल से धंसी सड़क नहीं हुई दुरुस्त, एमपी नगर में घुटनों तक भर रहा पानी

    मानसून से पहले भोपाल की बड़ी पोल खुली! एक साल से धंसी सड़क नहीं हुई दुरुस्त, एमपी नगर में घुटनों तक भर रहा पानी


    भोपाल  मानसून की आमद से पहले राजधानी भोपाल में तैयारियों की वास्तविक तस्वीर सामने आने लगी है। शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल एमपी नगर में एक साल पहले धंसी सड़क आज भी पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो सकी है। नतीजा यह है कि थोड़ी सी बारिश होते ही सड़क पर घुटनों तक पानी भर जाता है और हजारों वाहन चालकों व राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति तब है जब मानसून अभी पूरी तरह सक्रिय भी नहीं हुआ है।

    एमपी नगर स्थित बोर्ड ऑफिस चौराहे और एमपी नगर चौराहे के बीच की सड़क 17 जुलाई 2025 को अचानक धंस गई थी। जांच में सामने आया था कि यह सड़क एक पुराने नाले के ऊपर बनी हुई थी। शुरुआती स्तर पर सड़क की मरम्मत की गई, लेकिन कुछ ही दिनों बाद आसपास का हिस्सा भी कमजोर पड़ने लगा और फिर सड़क के दूसरे हिस्से में भी धंसाव की आशंका पैदा हो गई। इसके बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने स्थायी समाधान के लिए बड़े स्तर पर काम शुरू करने का निर्णय लिया।

    बताया जाता है कि जिस नाले के ऊपर सड़क बनी हुई है, वह लगभग 50 साल पुराना है। इसे मजबूत बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने रेलवे अंडरपास की तर्ज पर प्री-कास्ट तकनीक से नया स्ट्रक्चर तैयार करने की योजना बनाई। हालांकि यह परियोजना शुरुआत से ही बाधाओं में घिरी रही। दो बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन किसी एजेंसी ने काम में रुचि नहीं दिखाई। दोनों बार टेंडर निरस्त करने पड़े। तीसरी बार प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो सका।

    पिछले चार महीनों से चल रहे इस काम ने क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। ज्योति टॉकीज चौराहे से बोर्ड ऑफिस चौराहे तक आने-जाने वाले लोगों को रोज लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। सड़क की एक लेन बंद होने के कारण ट्रैफिक का दबाव दूसरी सड़कों पर बढ़ गया है। चेतक ब्रिज से आने वाले वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है।

    स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब बारिश होती है। हाल ही में हुई बारिश के दौरान निर्माणाधीन क्षेत्र में इतना पानी भर गया कि पैदल चलना मुश्किल हो गया। सड़क पर घुटनों तक पानी जमा हो गया और वाहन रेंगते हुए निकलते दिखाई दिए। कई कारें पानी में फंस गईं और लोगों को घंटों जाम तथा अव्यवस्था का सामना करना पड़ा।

    चिंता की बात यह है कि जिस नई तकनीक के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान खोजा जा रहा था, उसके बावजूद जलभराव की समस्या बरकरार दिखाई दे रही है। सड़क की जिस लेन का निर्माण कार्य पूरा बताया जा रहा है, वहां भी पानी भरने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे परियोजना की गुणवत्ता और प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।

    एमपी नगर जैसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक क्षेत्र में रोजाना लाखों लोगों की आवाजाही होती है। अनुमान है कि करीब पांच लाख लोग प्रतिदिन इस मार्ग का उपयोग करते हैं। ऐसे में सड़क निर्माण की धीमी गति और जलनिकासी व्यवस्था की खामियां नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी हैं। मानसून शुरू होने से पहले यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

  • भोपाल में इंजीनियरिंग की बड़ी चूक! फुटपाथ को ही रेलिंग लगाकर किया बंद, पैदल यात्रियों की बढ़ी परेशानी

    भोपाल में इंजीनियरिंग की बड़ी चूक! फुटपाथ को ही रेलिंग लगाकर किया बंद, पैदल यात्रियों की बढ़ी परेशानी


    भोपाल भोपाल में एक बार फिर खराब इंजीनियरिंग और बिना जमीनी हकीकत को समझे किए गए विकास कार्यों का मामला सामने आया है। शहर के ऐशबाग क्षेत्र में 90 डिग्री ब्रिज के बाद वार्ड क्रमांक 32 में बनाए गए फुटपाथ को इस तरह रेलिंग से घेर दिया गया है कि अब वह पैदल यात्रियों की सुविधा के बजाय उनके लिए परेशानी का कारण बन गया है। जिस फुटपाथ का निर्माण लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था, वह अब किसी बंद पिंजरे जैसा दिखाई दे रहा है।

    सड़क किनारे किए गए सौंदर्यीकरण कार्य के तहत लगभग तीन फीट ऊंची लोहे की जाली लगाई गई है। इस रेलिंग के कारण राहगीरों का सीधे फुटपाथ पर पहुंचना मुश्किल हो गया है। कुछ चुनिंदा स्थानों पर प्रवेश और निकास के लिए कट पॉइंट बनाए गए हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश स्थानों पर ठेला संचालकों और अन्य अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर रखा है। परिणामस्वरूप पैदल चलने वाले लोगों को फुटपाथ का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

    कई स्थानों पर स्थिति और भी विचित्र है। फुटपाथ के एक ओर तीन फीट ऊंची लोहे की रेलिंग है, जबकि दूसरी ओर पहले से बनी पक्की दीवार मौजूद है। ऐसे में पैदल यात्री बीच में फंसकर रह जाते हैं और उन्हें सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के नाम पर ऐसा डिजाइन तैयार किया गया है, जिसने मूल उद्देश्य को ही समाप्त कर दिया है।

    क्षेत्रवासियों ने सवाल उठाया है कि जब कोई भी सार्वजनिक परियोजना नागरिकों की सुविधा के लिए बनाई जाती है, तो उसकी डिजाइन और उपयोगिता का आकलन किए बिना मंजूरी कैसे दी जाती है। लोगों का कहना है कि बस या सार्वजनिक परिवहन से उतरने वाले यात्री सीधे फुटपाथ तक नहीं पहुंच सकते। इससे दुर्घटना की आशंका भी बढ़ जाती है। नागरिकों ने इसे सरकारी धन की बर्बादी और योजना निर्माण में गंभीर लापरवाही करार दिया है।

    मामले के सामने आने के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने भी संज्ञान लिया है। निगम के कार्यपालन यंत्री (ईई) एन.के. डेहरिया ने बताया कि संबंधित इंजीनियर से जानकारी मांगी गई है कि यह कार्य किस मद और किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत किया गया था। उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि फुटपाथ के उपयोग में लोगों को दिक्कत हो रही है तो आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने स्वयं स्थल निरीक्षण करने की बात भी कही है।

    वहीं वार्ड की पार्षद आरती अनेजा का कहना है कि क्षेत्र में अतिक्रमण और शराबियों के जमावड़े की समस्या को देखते हुए यह कदम उठाया गया था। ठेकेदार ने आश्वासन दिया था कि रेलिंग लगाने के बावजूद लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी, लेकिन मौके पर पहुंचकर देखने पर स्थिति अलग मिली। पार्षद ने स्पष्ट किया कि यदि वर्तमान डिजाइन लोगों के लिए असुविधाजनक है तो इसमें बदलाव कराया जाएगा।

    यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि विकास कार्यों में तकनीकी योजना और जमीनी जरूरतों के बीच तालमेल कितना जरूरी है। यदि परियोजनाएं नागरिकों की सुविधा बढ़ाने के बजाय मुश्किलें खड़ी करने लगें, तो उनकी उपयोगिता पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।

  • भोपाल में हाईटेंशन लाइन पर चढ़ा युवक, तारों पर चलता रहा; 57 मिनट की मशक्कत के बाद क्रेन से बचाया गया

    भोपाल में हाईटेंशन लाइन पर चढ़ा युवक, तारों पर चलता रहा; 57 मिनट की मशक्कत के बाद क्रेन से बचाया गया

    भोपाल । राजधानी भोपाल के एमपी नगर इलाके में गुरुवार सुबह एक हैरान कर देने वाला घटनाक्रम सामने आया, जब एक युवक अचानक हाईटेंशन बिजली के खंभे पर चढ़ गया और कुछ ही देर में बिजली के तारों पर चलता हुआ दिखाई दिया। इस खतरनाक दृश्य को देखकर मौके पर मौजूद लोगों की सांसें थम गईं। देखते ही देखते आसपास बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    घटना शासकीय प्रेस के सामने की बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक अचानक बिजली के पोल पर चढ़ गया और फिर हाईटेंशन लाइन तक पहुंच गया। कई मिनटों तक वह तारों के बीच चलता और इधर-उधर घूमता रहा। लोगों को डर था कि कहीं युवक करंट की चपेट में न आ जाए या संतुलन बिगड़ने से नीचे न गिर पड़े।

    घटना की सूचना मिलते ही एमपी नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने सबसे पहले इलाके को सुरक्षित कराया और लोगों को बिजली के खंभे तथा तारों से दूर रहने की सलाह दी। इसके बाद युवक को सुरक्षित नीचे उतारने के प्रयास शुरू किए गए। पुलिस, बिजली कंपनी और अन्य संबंधित विभागों के कर्मचारियों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।

    करीब 57 मिनट तक चले इस अभियान के दौरान युवक को लगातार समझाइश दी जाती रही। अधिकारियों ने धैर्य और सतर्कता के साथ उससे बातचीत की ताकि वह किसी भी तरह का जोखिम भरा कदम न उठाए। आखिरकार युवक को शांत कर नीचे आने के लिए तैयार किया गया और क्रेन की सहायता से उसे सुरक्षित जमीन पर उतार लिया गया। युवक के नीचे आते ही मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली।

    पुलिस जांच में युवक की पहचान 42 वर्षीय श्रवण कुमार निवासी हरदा के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार वह करीब पांच वर्ष पहले तक हरदा पोस्ट ऑफिस में अस्थायी कर्मचारी के रूप में कार्यरत था। एक आपराधिक मामले में नाम आने के बाद उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। तब से वह नौकरी में पुनर्बहाली के लिए लगातार प्रयास कर रहा था।

    बताया गया कि श्रवण कुमार गुरुवार सुबह हरदा से भोपाल पहुंचा था। वह एमपी नगर स्थित डाक विभाग के कार्यालय में अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी नौकरी बहाल करने की मांग रखना चाहता था। हालांकि, उसकी अधिकारियों से मुलाकात नहीं हो सकी। इससे निराश होकर वह कार्यालय से बाहर निकला और कुछ ही देर बाद बिजली के पोल पर चढ़ गया।

    इस घटना के दौरान पुलिस ने बिजली कंपनी को भी तत्काल सूचना दी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जब तक युवक सुरक्षित नीचे नहीं उतर जाता, तब तक लाइन चालू न की जाए। हालांकि राहत की बात यह रही कि उस समय लाइन मेंटेनेंस कार्य के कारण संबंधित बिजली लाइन पहले से ही बंद थी। इसी वजह से एक बड़ा हादसा टल गया।

    यह घटना न केवल प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण रही, बल्कि मानसिक तनाव और रोजगार संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों की स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। फिलहाल पुलिस युवक से पूछताछ कर रही है और पूरे मामले की जांच जारी है।

  • एमपी में मानसून की एंट्री 22–24 जून के बीच संभव, छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र के बाद पहुंचेगा

    एमपी में मानसून की एंट्री 22–24 जून के बीच संभव, छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र के बाद पहुंचेगा

     
    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून के लिए इंतजार अभी और बढ़ सकता है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, प्रदेश में मानसून 22 से 24 जून के बीच दस्तक दे सकता है। फिलहाल मानसून पश्चिमी तट पर 8 जून से ही रुका हुआ है और अभी तक मुंबई तक भी नहीं पहुंच पाया है। ऐसे में यह पहले छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में आगे बढ़ेगा, उसके बाद मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगा।

    इस बीच प्रदेश में भीषण गर्मी और हीटवेव का असर अगले कुछ दिनों तक बना रहेगा। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए अलर्ट जारी किया है। जून महीने में बारिश के आंकड़े भी कमजोर बने हुए हैं। 1 से 17 जून के बीच प्रदेश में औसतन 41.6 मिमी (करीब 1.6 इंच) बारिश होती है, लेकिन इस बार अब तक सिर्फ करीब 1 इंच बारिश ही दर्ज हुई है। यह सामान्य से लगभग 37 प्रतिशत कम है।

    सबसे खराब स्थिति अलीराजपुर जिले की है, जहां अब तक बारिश रिकॉर्ड ही नहीं की गई है, जिससे वहां आंकड़ा शून्य है। इसके अलावा बालाघाट, दमोह, कटनी, मैहर, रीवा, शहडोल, टीकमगढ़, बड़वानी, भिंड, दतिया, धार और खरगोन जैसे 13 जिलों में 12.5 मिमी (आधा इंच) से भी कम बारिश हुई है।

    वहीं, भोपाल एकमात्र ऐसा जिला है जहां अब तक सामान्य से बेहतर बारिश दर्ज हुई है। यहां 91.9 मिमी यानी साढ़े 3 इंच से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। आगर-मालवा, बुरहानपुर, देवास, गुना, हरदा, इंदौर, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, विदिशा, डिंडौरी, सतना और सीधी में 1 से ढाई इंच तक बारिश दर्ज हुई है।

    बुधवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी-बारिश का दौर जारी रहा। भोपाल और राजगढ़ में आधा इंच से ज्यादा बारिश हुई, जबकि बैतूल, गुना, इंदौर और छिंदवाड़ा में भी हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई। बारिश के चलते तापमान में गिरावट भी देखने को मिली। बैतूल में एक ही दिन में तापमान 10 डिग्री गिरकर 26.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

    अन्य जिलों में शिवपुरी-पचमढ़ी में 34 डिग्री, छिंदवाड़ा में 35.9 डिग्री, रायसेन में 26.6 डिग्री, सागर में 37 डिग्री, नर्मदापुरम में 37.2 डिग्री, श्योपुर-धार में 37.4 डिग्री और मंडला में 37.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

    प्रदेश के प्रमुख शहरों में भोपाल में 34.8 डिग्री, इंदौर में 37.2 डिग्री, उज्जैन में 39 डिग्री, जबलपुर में 39.3 डिग्री और ग्वालियर में 39.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ।

    मौसम विभाग ने गुरुवार को रतलाम, छिंदवाड़ा और बालाघाट में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। वहीं ग्वालियर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, विदिशा, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, जबलपुर, सिवनी, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर में आंधी-बारिश की संभावना जताई गई है।

    इसके अलावा भोपाल, इंदौर, उज्जैन, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, धार, खरगोन, शाजापुर, देवास, सीहोर, रायसेन, सागर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया और शहडोल में गर्मी का असर बना रहेगा।