Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल मास्टर प्लान-2047 पर व्यापारियों का मोर्चा, कन्वर्जन फीस 5% करने और सीलिंग रोकने की मांग, अब किसान भी उठाएंगे आवाज

    भोपाल मास्टर प्लान-2047 पर व्यापारियों का मोर्चा, कन्वर्जन फीस 5% करने और सीलिंग रोकने की मांग, अब किसान भी उठाएंगे आवाज


    भोपाल । भोपाल मास्टर प्लान-2047 के नए ड्राफ्ट को लेकर विरोध तेज होने लगा है। योजना पर आपत्तियां दर्ज कराने के लिए शुक्रवार को सबसे पहले व्यापारी शाहपुरा स्थित नगर तथा ग्राम निवेश यानी टीएंडसीपी कार्यालय पहुंचे। व्यापारियों ने व्यावसायिक भू-उपयोग कन्वर्जन फीस फ्लोर एरिया रेशियो यानी एफएआर और सीलिंग की कार्रवाई से जुड़े प्रावधानों पर सवाल उठाए। दूसरी ओर भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसान भी अपनी जमीन और खेती से जुड़े मुद्दों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराने की तैयारी में हैं। इससे मास्टर प्लान के प्रस्तावों पर व्यापारियों और किसानों की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है।

    व्यापारियों की प्रमुख मांग है कि कन्वर्जन फीस एकमुश्त और कुल पांच प्रतिशत तय की जाए। उनका कहना है कि निर्धारित फीस जमा करने के बाद उन्हें पूरा कमर्शियल एफएआर दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही पुराने बाजारों को राहत देने और सीलिंग की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई है। व्यापारियों का मानना है कि व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े नियम स्पष्ट और व्यावहारिक होने चाहिए ताकि कारोबारियों को अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

    व्यापारियों के बाद अब किसानों की आपत्तियां भी मास्टर प्लान के लिए अहम होने वाली हैं। भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसान शाहपुरा स्थित टीएंडसीपी कार्यालय पहुंचकर अपनी चिंताएं अधिकारियों के सामने रखेंगे। इससे पहले गुरुवार को नीलबड़ में किसानों ने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया था। किसानों का आरोप है कि नए ड्राफ्ट में 66 गांवों की कृषि भूमि को रिवरफ्रंट फॉरेस्ट ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल करने के प्रस्ताव से उनकी निजी जमीन खेती और आजीविका प्रभावित हो सकती है।

    किसानों के मुताबिक वर्ष 1995 के मास्टर प्लान में संबंधित जमीनों का भू-उपयोग कृषि रखा गया था। वर्ष 2031 के लिए तैयार किए गए पहले के मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में भी कृषि उपयोग का प्रावधान होने की बात कही जा रही है। अब नए ड्राफ्ट में बड़े तालाब के आसपास की कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसान चाहते हैं कि जमीन का उपयोग बदलने से पहले उनकी आपत्तियों और अधिकारों पर गंभीरता से विचार किया जाए। भारतीय किसान संघ के तहसील अध्यक्ष अखिलेश मीणा ने भी किसानों की ओर से कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराने की बात कही है।

    मास्टर प्लान में बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में निर्माण की सीमा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। किसानों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ इलाकों में आम लोगों के मकानों पर निर्माण संबंधी पाबंदियों की आशंका है जबकि एलडीआर में शामिल कुछ क्षेत्रों में निर्माण की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव है। आलोचकों का दावा है कि इससे प्रभावशाली लोगों के बंगलों और फार्म हाउस वाले इलाकों को फायदा मिल सकता है। हालांकि इन आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित नियमों निर्माण अनुमतियों और जमीन के रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।

    किसानों ने मेंडोरा मेंडोरी सेवनिया गौंड और केरवा वुड्स जैसे क्षेत्रों में भू-उपयोग और जमीन की सरकारी गाइडलाइन में बदलाव पर भी चिंता जताई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मेंडोरी के केरवा वुड्स क्षेत्र में कृषि भूमि की कलेक्टर गाइडलाइन वर्ष 2025-26 में एक करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर थी जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर तीन करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर हो गई। हालांकि सरकारी गाइडलाइन में बढ़ोतरी का अर्थ यह नहीं है कि वास्तविक बाजार मूल्य भी उसी अनुपात में बढ़ गया है।

    किसानों की मांग है कि भोजताल संरक्षण जोन-1 और जोन-2 से जुड़े प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाए और कृषि भूमि का उपयोग खेती के लिए सुरक्षित रखा जाए। उनका कहना है कि खेती ही उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है इसलिए जमीन के भविष्य से जुड़े फैसले लेते समय किसानों की सहमति और समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    टीएंडसीपी की संयुक्त संचालक इंदू त्रिपाठी के मुताबिक नियमानुसार 30 दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। प्राप्त आपत्तियों को ऑनलाइन पोर्टल पर डिजिटाइज किया जाएगा और इसके बाद संबंधित पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि व्यापारियों और किसानों की मांगों पर सुनवाई के दौरान क्या निर्णय सामने आते हैं और भोपाल के विकास की प्रस्तावित योजना में किन बदलावों पर विचार किया जाता है।

  • MP में 7 दिन से आंधी-बारिश का दौर, आज 5 जिलों में अलर्ट, रात का पारा 3 डिग्री तक गिरेगा

    MP में 7 दिन से आंधी-बारिश का दौर, आज 5 जिलों में अलर्ट, रात का पारा 3 डिग्री तक गिरेगा


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी आंधी और बारिश का सिलसिला थम नहीं रहा है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में पिछले 7 दिनों से बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को इंदौर संभाग के आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।

    मौसम विभाग के मुताबिक, 24 अक्टूबर से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। इसका असर 2 से 3 दिन बाद प्रदेश में दिखाई दे सकता है। फिलहाल साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण मौसम में बदलाव हो रहा है। गुरुवार को इंदौर, धार समेत पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश हुई। वहीं, भोपाल में दिनभर तेज धूप रहने के बाद शाम को बादल छा गए।

    प्रदेश में पहली बार रात का तापमान 14 डिग्री से नीचे
    मौसम में बदलाव के साथ प्रदेश में रात के तापमान में गिरावट आने लगी है। बीती रात इस सीजन में पहली बार न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। आने वाले दिनों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में और गिरावट होने का अनुमान है। रात का पारा 2 से 3 डिग्री तक लुढ़क सकता है।

    कटनी के करौंदी में प्रदेश का सबसे कम न्यूनतम तापमान 13.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अमरकंटक में 14.5, रीवा में 15, उमरिया में 15.4 और शहडोल के कल्याणपुर में 15.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। दिन के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। इंदौर और टीकमगढ़ में अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस से नीचे आ गया है।

    अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में बारिश के साथ बढ़ेगी ठंड
    मौसम विभाग के अनुसार, अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में भी प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश होने की संभावना है। 24 अक्टूबर से सक्रिय होने वाले पश्चिमी विक्षोभ का असर खासतौर पर उत्तर-पश्चिमी मध्य प्रदेश में दिखाई दे सकता है। इस दौरान रात के तापमान में भी गिरावट होने का अनुमान है। ऐसे में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में प्रदेश में बारिश के साथ ठंड का असर बढ़ सकता है।

  • शिकायत करने थाने जा रहा था परिवार, रास्ते में घेरकर मां-बहन और भाई को पीटा, शिवपुरी में 7 लोगों पर FIR दर्ज

    शिकायत करने थाने जा रहा था परिवार, रास्ते में घेरकर मां-बहन और भाई को पीटा, शिवपुरी में 7 लोगों पर FIR दर्ज


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में पुरानी रंजिश को लेकर एक ही परिवार के सदस्यों के साथ दो बार मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। खनियाधाना थाना क्षेत्र के बसंतपुर गांव में हुए इस घटनाक्रम में परिवार के पांच लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि पहले पिता और ताऊ के साथ लाठी-डंडों से मारपीट की गई। इसके बाद परिवार के लोग जब शिकायत करने थाने जा रहे थे तो रास्ते में उनकी मां बहन और भाई के साथ भी मारपीट की गई। घटना के बाद घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    शिकायतकर्ता सुनील लोधी उम्र 18 वर्ष के मुताबिक घटना 21 अक्टूबर की दोपहर करीब दो बजे की है। वह अपने ताऊ के बेटे अमित लोधी को इलाज के लिए शिवपुरी ले जा रहा था। इसी दौरान गांव में नीलेश लोधी के घर के सामने कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया। सुनील का आरोप है कि आनंद लोधी जनकराम लोधी राजकुमार लोधी और करन लोधी ने पुरानी रंजिश को लेकर गाली गलौज शुरू कर दी। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और मारपीट शुरू हो गई।

    सुनील की शिकायत के अनुसार इस दौरान राजकुमार और करन ने उसके पिता रमेश लोधी के साथ लाठी-डंडों से मारपीट की। वहीं आनंद और जनकराम ने उसके ताऊ हरभजन लोधी को निशाना बनाया। मारपीट में दोनों को सिर सहित शरीर के अलग-अलग हिस्सों में चोटें आईं। घटना के बाद परिवार के लोग घायलों को लेकर आगे की कार्रवाई करने और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी करने लगे।

    आरोप है कि परिवार के सदस्य जब पहली घटना की शिकायत करने थाने जा रहे थे तभी रास्ते में एक बार फिर विवाद हो गया। सुनील के मुताबिक प्रागीलाल लोधी रजभान लोधी और यशपाल लोधी ने उसकी मां सुमन ताई कुसमा बहन सोनम और भाई अभिषेक के साथ मारपीट की। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चारों को जमीन पर पटककर लात-घूंसों से पीटा गया। अचानक हुए इस हमले से परिवार के सदस्य घायल हो गए और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा।

    सुनील ने पुलिस को बताया कि बीच-बचाव के दौरान आरोपियों ने थाने में शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी भी दी। परिवार का आरोप है कि पुरानी रंजिश के चलते उन्हें निशाना बनाया गया और शिकायत करने जाने के दौरान दोबारा हमला किया गया। हालांकि घटना के सभी पहलुओं की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

    पुलिस ने शिकायत के आधार पर सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। अब मामले में आरोपों की जांच की जा रही है और घटना के दौरान मौजूद लोगों से जानकारी जुटाई जा सकती है। पुलिस की कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों घटनाओं में किसकी क्या भूमिका रही और विवाद की वास्तविक वजह क्या थी।

    बसंतपुर गांव की इस घटना में एक ही परिवार के सदस्यों के साथ दो बार मारपीट किए जाने के आरोप ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। फिलहाल घायलों का उपचार कराया गया है और पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

  • पहले प्यार और शादी का भरोसा फिर होटल में दुष्कर्म का आरोप, ग्वालियर में युवती की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को दबोचा

    पहले प्यार और शादी का भरोसा फिर होटल में दुष्कर्म का आरोप, ग्वालियर में युवती की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को दबोचा

    ग्वालियर । ग्वालियर में शादी का झांसा देकर युवती के साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। सिरोल थाना क्षेत्र में दर्ज इस मामले में पीड़िता ने आरोप लगाया है कि युवक ने पहले उससे प्रेम संबंध बनाए और शादी करने का भरोसा दिलाया। इसके बाद वह उसे बहाने से होटल ले गया जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पीड़िता के मुताबिक जब उसने घटना के बाद शादी की बात कही तो आरोपी अपने वादे से मुकर गया और उसे डराने धमकाने लगा। इसके बाद युवती ने पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है।

    पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान रोहित राजौरिया के रूप में हुई है जो सिरोल की फूटी कॉलोनी का निवासी बताया गया है। शिकायत में युवती ने आरोप लगाया कि रोहित ने लगातार शादी का भरोसा देकर उसका विश्वास जीता था। इसी भरोसे के चलते वह उसके साथ जाने के लिए तैयार हुई। पीड़िता के अनुसार 15 अक्टूबर को आरोपी उसे मंदिर जाने के बहाने कलारी चौराहा स्थित होटल सिरोल ले गया था।

    शिकायत के मुताबिक होटल में दोपहर करीब 11:30 बजे से 1 बजे के बीच आरोपी ने शादी का झांसा देकर युवती के साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता का आरोप है कि उस समय आरोपी ने शादी करने का भरोसा दिलाया था। हालांकि घटना के बाद जब उसने युवक से शादी करने के लिए कहा तो उसका रवैया बदल गया। आरोप है कि उसने शादी करने से इनकार कर दिया और युवती को डराने धमकाने लगा। इससे पीड़िता को महसूस हुआ कि उसके साथ धोखा हुआ है।

    इसके बाद युवती ने हिम्मत जुटाकर सिरोल थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच शुरू की। बुधवार देर रात आरोपी रोहित राजौरिया के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल आरोपी से पूछताछ की जा रही है ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जानकारी जुटाई जा सके।

    पुलिस अब पीड़िता के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। ऐसे मामलों में शिकायत के प्रत्येक पहलू की जांच करना और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करना जरूरी होता है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

    इस घटना ने एक बार फिर प्रेम संबंधों में शादी का झूठा भरोसा देकर धोखा देने के आरोपों से जुड़े मामलों को चर्चा में ला दिया है। पुलिस की ओर से फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी और पूछताछ की जानकारी सामने आई है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच में मिलने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।

  • शिवपुरी कोतवाली में कथित शराबखोरी और फायरिंग के मामले में टीआई रोहित दुबे लाइन अटैच, सात पुलिसकर्मी निलंबित

    शिवपुरी कोतवाली में कथित शराबखोरी और फायरिंग के मामले में टीआई रोहित दुबे लाइन अटैच, सात पुलिसकर्मी निलंबित

    शिवपुरी: में सिटी कोतवाली से जुड़े एक कथित घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग ने कार्रवाई की है। थाना प्रभारी टीआई रोहित दुबे को लाइन अटैच कर दिया गया है, जबकि उपनिरीक्षक प्रवीण त्रिवेदी समेत सात पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। यह मामला मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात का बताया जा रहा है, जब शहर में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला चल रहा था। घटनाक्रम में थाने के भीतर कथित रूप से शराब पीने, ताश खेलने, पुलिसकर्मियों के बीच विवाद और गोली चलने की बात सामने आई है। हालांकि, घटना से जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार-बुधवार की रात करीब एक बजे सिटी कोतवाली परिसर में स्थित पुराने महिला थाने के कमरों में कुछ पुलिसकर्मियों के मौजूद होने की बात कही गई है। इनमें हवलदार विनय सिंह जाटव, कोतवाली के चालक शरद यादव और दो अन्य आरक्षकों के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि इस दौरान पुलिसकर्मी शराब के नशे में ताश खेल रहे थे। इसी बीच ताश खेलने के दौरान कहासुनी हुई, जो बाद में विवाद में बदल गई।

    बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान शरद यादव के साथ मारपीट की गई। इसके बाद गुस्से में आकर उन्होंने अपनी लाइसेंसी बंदूक से गोली चला दी। हालांकि, गोली किसी व्यक्ति को नहीं लगी और किसी के हताहत होने की सूचना सामने नहीं आई। घटना के बाद विनय सिंह जाटव समेत कुछ पुलिसकर्मियों के कोतवाली परिसर से चले जाने की बात कही गई है। यह भी दावा किया गया कि शरद यादव उन्हें तलाश करते हुए माधव चौक तक पहुंचे थे। इन विवरणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मामले को लेकर विनय सिंह जाटव से संपर्क किए जाने पर उन्होंने ऐसी किसी घटना से इनकार करते हुए इसे अफवाह बताया। इस विरोधाभास के कारण घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं है। थाने के पुराने महिला थाना क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फुटेज की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि संबंधित समय पर परिसर में क्या हुआ था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फुटेज और निलंबन आदेश सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं।

    घटनाक्रम के दौरान टीआई रोहित दुबे की ड्यूटी माधव चौक पर बताई गई थी। आरोप है कि वह करीब दो घंटे तक निर्धारित स्थान पर मौजूद नहीं थे। मामले की जानकारी मिलने के बाद शिवपुरी की पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया सिटी कोतवाली पहुंचीं और स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद थाना प्रभारी को लाइन अटैच करने और सात पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की कार्रवाई की गई। विभागीय कार्रवाई का विस्तृत आधार और आरोपों की अंतिम स्थिति उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट नहीं है।

    निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में उपनिरीक्षक प्रवीण त्रिवेदी के अलावा गजेंद्र परिहार, देवेंद्र रावत, जितेंद्र रायपुरिया, विनय जाटव, शरद यादव और अवतार सिंह शामिल हैं। इस प्रकार कुल सात पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है। थाना प्रभारी रोहित दुबे को लाइन अटैच करने के पीछे स्टाफ पर नियंत्रण रखने में कथित विफलता और ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का मामला बताया गया है।

    रोहित दुबे का शिवपुरी में कोतवाली प्रभारी के रूप में यह दूसरा कार्यकाल बताया गया है। वह अशोकनगर से स्थानांतरित होकर शिवपुरी आए थे और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौर के कार्यकाल में उन्हें सिटी कोतवाली की जिम्मेदारी दी गई थी। इससे पहले एक जन आंदोलन के दौरान विवाद में आने के बाद उन्हें इस थाने से हटाया गया था। बाद में उन्हें फिर से कोतवाली प्रभारी बनाया गया। अब ताजा घटनाक्रम के बाद उन्हें दोबारा लाइन अटैच किया गया है। मामले में आरोपों की पुष्टि और घटनाक्रम की पूरी स्थिति जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

  • पुरानी रंजिश में पथराव और गोलियां चलने से मचा हड़कंप, ग्वालियर में मुख्य आरोपी उदय गुर्जर पकड़ा गया, बाकी की तलाश तेज

    पुरानी रंजिश में पथराव और गोलियां चलने से मचा हड़कंप, ग्वालियर में मुख्य आरोपी उदय गुर्जर पकड़ा गया, बाकी की तलाश तेज


    ग्वालियर । ग्वालियर के थाटीपुर थाना क्षेत्र के दुल्लपुर इलाके में पथराव और फायरिंग के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने बुधवार देर रात इस मामले के मुख्य आरोपी उदय गुर्जर को गिरफ्तार कर लिया। इस घटना के बाद इलाके में तनाव और दहशत का माहौल बन गया था। दोनों पक्षों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक संघर्ष में बदल गया था। आरोप है कि दोनों ओर से छतों पर चढ़कर पत्थर बरसाए गए और फायरिंग भी की गई। इस दौरान घरों के बाहर खड़े कई वाहनों के कांच टूट गए थे। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर रही है और घटना में शामिल अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।

    मामला 7 अक्टूबर का है जब दुल्लपुर इलाके में रहने वाले रघुवीर गुर्जर और रामवीर गुर्जर के परिवारों के बीच कहासुनी हो गई थी। दोनों परिवार एक दूसरे के आमने सामने रहते हैं। जानकारी के मुताबिक घर के पास खड़ी कार के नजदीक आग जलाने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। शुरुआत में मामूली दिखाई देने वाली यह कहासुनी कुछ ही देर में बढ़ गई और दोनों पक्षों के लोग आमने सामने आ गए। इसके बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई और पथराव शुरू हो गया।

    बताया गया है कि विवाद बढ़ने पर दोनों पक्षों के लोग अपने घरों की छतों पर पहुंच गए और एक दूसरे पर पत्थर फेंकने लगे। इस दौरान फायरिंग किए जाने की बात भी सामने आई थी। अचानक हुए इस घटनाक्रम से आसपास रहने वाले लोग घबरा गए। घरों के बाहर खड़े वाहनों को नुकसान पहुंचा और इलाके में अफरा तफरी का माहौल बन गया। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपियों की पहचान करने में जुट गई।

    पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई कि दोनों परिवारों के बीच पहले से ही विवाद चल रहा था। करीब चार महीने पहले भी दोनों पक्षों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था। उस मामले में एक पक्ष की शिकायत पर 11 लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज किया गया था। बाद में उदय गुर्जर का नाम भी इस मामले में जोड़ा गया था। बताया जा रहा है कि पुराने मामले में राजीनामा करने के लिए दबाव बनाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच रंजिश बढ़ गई थी। इसी पुरानी दुश्मनी के बीच 7 अक्टूबर को एक बार फिर विवाद भड़क गया।

    पुलिस ने अब उदय गुर्जर को गिरफ्तार कर लिया है। उससे पूछताछ के जरिए घटना की पूरी परिस्थितियों और अन्य आरोपियों की भूमिका का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। थाटीपुर थाना पुलिस इस मामले में शामिल अन्य लोगों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना के दौरान फायरिंग किसने की और हिंसा में किन लोगों की भूमिका रही।

    दुल्लपुर की यह घटना बताती है कि पुरानी रंजिश और मामूली विवाद किस तरह गंभीर हिंसा का रूप ले सकते हैं। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई पूछताछ तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। इलाके के लोगों को अब उम्मीद है कि आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई के बाद स्थिति सामान्य होगी और इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सकेगी।

  • दीपावली और छठ पर घर जाना होगा आसान, ग्वालियर-गांधीनगर समेत 4 ट्रेनों में स्लीपर कोच बढ़ाए, नई व्यवस्था लागू

    दीपावली और छठ पर घर जाना होगा आसान, ग्वालियर-गांधीनगर समेत 4 ट्रेनों में स्लीपर कोच बढ़ाए, नई व्यवस्था लागू


    ग्वालियर । दीपावली और छठ पूजा के दौरान ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने राहत देने वाला फैसला लिया है। त्योहारों के समय बढ़ती भीड़ और स्लीपर क्लास में सीटों की मांग को देखते हुए चार ट्रेनों के कोच कंपोजिशन में बदलाव किया गया है। इन ट्रेनों में थर्ड एसी इकोनॉमी कोच की संख्या घटाकर स्लीपर कोच बढ़ाए गए हैं। रेलवे के इस फैसले से उन यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है जो त्योहारों पर अपने घर जाने या दूसरे शहरों की यात्रा करने के लिए स्लीपर क्लास में टिकट बुक कराते हैं।

    रेलवे के अनुसार कोच व्यवस्था में बदलाव का उद्देश्य यात्रियों की जरूरत के हिसाब से सीटों की उपलब्धता बढ़ाना है। दीपावली और छठ पूजा के आसपास ग्वालियर और झांसी सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग गुजरात और महाराष्ट्र की ओर यात्रा करते हैं। त्योहारों के दौरान ट्रेनों में भीड़ बढ़ने से टिकटों की मांग भी काफी बढ़ जाती है। ऐसे में यात्रियों को कई बार वेटिंग टिकट लेकर सफर की योजना बनानी पड़ती है। स्लीपर कोच बढ़ने से इस श्रेणी में अतिरिक्त बर्थ उपलब्ध हो सकेंगी।

    रेलवे ने जिन ट्रेनों की व्यवस्था में बदलाव किया है उनमें ग्वालियर-गांधीनगर एक्सप्रेस और झांसी-बांद्रा स्पेशल शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इन दोनों ट्रेनों में नई कोच व्यवस्था 21 और 22 अक्टूबर से लागू की गई है। बाकी दो ट्रेनों के नाम और उनमें बदलाव लागू होने की तारीख की जानकारी संबंधित रेलवे सूचना से स्पष्ट होने पर ही बताई जा सकती है।

    त्योहारों के समय लंबी दूरी की ट्रेनों में स्लीपर क्लास की मांग अधिक रहती है। बड़ी संख्या में यात्री परिवार के साथ सफर करते हैं और किफायती किराए के कारण स्लीपर श्रेणी को प्राथमिकता देते हैं। यात्रियों की संख्या बढ़ने पर इसी श्रेणी में सीटों की कमी और वेटिंग की समस्या सामने आती है। ऐसे में एसी इकोनॉमी कोच घटाकर स्लीपर कोच बढ़ाने का फैसला यात्रियों की मांग के अनुरूप माना जा रहा है।

    हालांकि कोचों की संख्या में बदलाव का मतलब यह नहीं है कि हर ट्रेन में हर तारीख पर सीट मिलना सुनिश्चित हो गया है। यात्रियों को यात्रा से पहले संबंधित ट्रेन में उपलब्ध सीटों और टिकट की स्थिति की जांच कर लेनी चाहिए। साथ ही ट्रेन के कोच कंपोजिशन और यात्रा संबंधी ताजा जानकारी के लिए रेलवे के आधिकारिक आरक्षण माध्यमों पर भरोसा करना चाहिए।

    रेलवे का यह कदम त्योहारों के दौरान यात्रियों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए उठाया गया है। स्लीपर कोच में बर्थ बढ़ने से अधिक यात्रियों को आरक्षण मिलने की संभावना बनेगी और उन्हें यात्रा की योजना बनाने में कुछ राहत मिल सकती है।

  • ग्वालियर हादसे ने छीना बुढ़ापे का सहारा, 21 साल के पवन की मौत से टूटे पिता, बोले- बेटा चला गया अब कर्ज कैसे चुकाऊंगा

    ग्वालियर हादसे ने छीना बुढ़ापे का सहारा, 21 साल के पवन की मौत से टूटे पिता, बोले- बेटा चला गया अब कर्ज कैसे चुकाऊंगा


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के बाहर हुए भीषण सड़क हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में जान गंवाने वाले 21 वर्षीय पवन राठौर की कहानी बेहद दर्दनाक है। पिता विद्याराम राठौर ने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए अपना मकान गिरवी रख दिया था। दूसरों की जमीन बटाई पर लेकर खेती की ताकि बेटे की पढ़ाई जारी रह सके और वह भविष्य में परिवार का सहारा बन सके। लेकिन 17 अक्टूबर की रात मंदिर में दर्शन करने निकला पवन कभी वापस नहीं लौटा। हादसे में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है और 41 लोग घायल हुए हैं। बेटे को खोने के गम के साथ अब परिवार के सामने कर्ज चुकाने और आगे की जिंदगी चलाने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।

    विद्याराम राठौर बताते हैं कि हादसे वाली रात पवन के कुछ दोस्त पैदल शीतला माता मंदिर में दर्शन करने जा रहे थे। पवन ने भी उनके साथ जाने की इच्छा जताई। उसकी मां ने उसे जाने से मना किया लेकिन वह दोस्तों के साथ जाने की जिद करता रहा। आखिरकार परिवार ने उसे जाने की अनुमति दे दी। माता-पिता को जरा भी अंदाजा नहीं था कि दोस्तों के साथ मंदिर जाने का फैसला उनके बेटे की जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। जिस बेटे के लौटने का इंतजार था उसके बजाय परिवार को उसकी मौत की खबर मिली।

    पवन पढ़ाई में होशियार था और ग्वालियर में बीएचएमएस की पढ़ाई कर रहा था। पिता का सपना था कि बेटा डॉक्टर बनकर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारेगा। इसी उम्मीद में उन्होंने अपना मकान गिरवी रखा और दूसरों की जमीन पर बटाई से खेती करके परिवार का खर्च चलाया। पवन का बड़ा भाई विशाल राठौर भोपाल से बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। परिवार को उम्मीद थी कि दोनों बेटे पढ़ लिखकर अपने पैरों पर खड़े होंगे और माता-पिता को मेहनत भरी जिंदगी से राहत मिलेगी। अब पवन की मौत के बाद ये सपने अधूरे रह गए हैं।

    परिवार को पवन के दोस्तों ने बताया कि वह धार्मिक स्वभाव का था। मंदिर पहुंचने के बाद वह नहाकर दर्शन करने की बात कह रहा था। इसी दौरान चीनौर की ओर से ढलान वाले रास्ते पर एक तेज रफ्तार ट्रक बेकाबू होकर श्रद्धालुओं की भीड़ में घुस गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि पवन उछलकर पास की दुकान में जा गिरा और ट्रक उसके ऊपर चढ़ गया। हादसे में कई अन्य श्रद्धालुओं की भी जान चली गई।

    पवन की मौत के बाद परिवार में शोक के साथ नाराजगी भी है। परिजनों का आरोप है कि प्रतिबंधित रास्ते पर भारी ट्रक का मंदिर के पास तक पहुंचना पुलिस और प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है। बड़े भाई विशाल का कहना है कि रास्ता संकरा है और वहां बड़े ट्रक के प्रवेश पर रोक होनी चाहिए थी। उनके मुताबिक हादसे से पहले एक अन्य ट्रक भी उस रास्ते से गुजरा था। परिवार ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी। अब विद्याराम सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि उनके बड़े बेटे को नौकरी दिलाने में मदद की जाए ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति संभल सके और गिरवी रखे मकान का कर्ज चुकाया जा सके। जिस बेटे के भविष्य के लिए उन्होंने अपनी जमा पूंजी और घर दांव पर लगाया था वह अब उनके बीच नहीं है।

    इस हादसे की मजिस्ट्रियल जांच भी शुरू हो गई है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने जांच की जिम्मेदारी अपर कलेक्टर सीबी प्रसाद को सौंपी है और सात दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि प्रतिबंधित रास्ते पर भारी ट्रक कैसे पहुंचे और उस समय सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी थी। हादसे से पहले ट्रक को कथित तौर पर 200 रुपये लेकर प्रवेश देने का आरोप भी सामने आया है लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब पीड़ित परिवारों को जांच से जवाब और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की उम्मीद है।

  • पहले ट्रेडिंग ऐप पर दिखाया मुनाफा फिर अलग-अलग खातों में जमा कराए रुपए, इंदौर के व्यक्ति से 15 लाख की साइबर ठगी

    पहले ट्रेडिंग ऐप पर दिखाया मुनाफा फिर अलग-अलग खातों में जमा कराए रुपए, इंदौर के व्यक्ति से 15 लाख की साइबर ठगी


    इंदौर । इंदौर में शेयर बाजार में निवेश कर कम समय में मोटा मुनाफा कमाने की चाह एक व्यक्ति को भारी पड़ गई। लसूड़िया थाना क्षेत्र में ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर करीब 15 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि जालसाजों ने पहले वॉट्सऐप के जरिए पीड़ित से संपर्क किया और फिर उसे एक ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करवाकर निवेश के लिए तैयार किया। शुरुआत में ऐप पर जमा रकम और मुनाफा दिखाई दिया जिससे पीड़ित को भरोसा हो गया। इसके बाद अलग-अलग प्रक्रियाओं का हवाला देकर उससे कई किश्तों में रुपए जमा कराए गए। जब रकम वापस नहीं मिली तो उसे ठगी का अहसास हुआ। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    लसूड़िया पुलिस के मुताबिक स्कीम नंबर 78 में रहने वाले विश्वामित्र दुबे ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस को बताया कि एक सितंबर को उनके वॉट्सऐप पर अनजान नंबर से संपर्क किया गया था। फोन करने वाली युवती ने अपना नाम शिखा बताया और शेयर बाजार में निवेश के जरिए अच्छा मुनाफा कमाने की बात कही। युवती की बातों में आकर विश्वामित्र ने उसके बताए तरीके से मोबाइल में निफ्टी पीडब्ल्यूएम नाम का ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड कर लिया।

    पीड़ित के अनुसार ऐप में एक कस्टमर एजेंट भी मौजूद था जो उन्हें निवेश के लिए अलग-अलग बैंक खातों की जानकारी देता था। इन खातों में रुपए ट्रांसफर करने के बाद ऐप पर जमा राशि दिखाई देने लगती थी। इससे उन्हें लगा कि उनका पैसा ट्रेडिंग में लगाया जा रहा है। इसी दौरान उन्हें दो आईपीओ अलॉट होने का दावा भी किया गया। ऐप पर शेयर और आईपीओ से बड़ा लाभ होता दिखाए जाने के कारण पीड़ित को निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिला।

    मामले में ठगी का संदेह तब गहराया जब विश्वामित्र ने ऐप में दिखाई जा रही रकम को अपने बैंक खाते में वापस लेने की कोशिश की। आरोप है कि जालसाजों ने रुपए निकालने के लिए अलग-अलग प्रक्रियाओं का हवाला दिया और इसके नाम पर उनसे और रकम जमा करवाई। पीड़ित से कई किश्तों में अलग-अलग बैंक खातों में करीब 15 लाख रुपए ट्रांसफर कराए गए। इसके बावजूद उनकी रकम वापस नहीं आई।

    करीब दस दिन इंतजार करने के बाद भी जब पैसा खाते में नहीं पहुंचा तो विश्वामित्र को शक हुआ। इसके बाद उन्होंने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की जांच के बाद मामला लसूड़िया पुलिस को सौंपा गया। पुलिस ने फोन करने वाली युवती और संबंधित बैंक खाताधारकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

    अब पुलिस संबंधित बैंक खातों के लेनदेन और ट्रेडिंग ऐप से जुड़े विवरणों की जांच कर रही है ताकि इस पूरे मामले में शामिल लोगों की पहचान की जा सके। यह मामला ऑनलाइन निवेश के नाम पर होने वाली ठगी के उस तरीके की ओर इशारा करता है जिसमें शुरुआत में फर्जी मुनाफा दिखाकर लोगों का भरोसा जीता जाता है और बाद में रकम निकालने के नाम पर अतिरिक्त भुगतान मांगा जाता है। निवेशकों को ऐसे मामलों में सतर्क रहने की जरूरत है। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऐप डाउनलोड करने या अज्ञात बैंक खातों में पैसे भेजने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है।

  • 64 करोड़ की संपत्तियों की जांच के बीच हेड कॉन्स्टेबल का नया जमीन सौदा चर्चा में, वृद्धा की मौत से 4 दिन पहले रजिस्ट्री

    64 करोड़ की संपत्तियों की जांच के बीच हेड कॉन्स्टेबल का नया जमीन सौदा चर्चा में, वृद्धा की मौत से 4 दिन पहले रजिस्ट्री

    इंदौर । इंदौर में करोड़ों रुपए की संपत्तियों को लेकर जांच के घेरे में आए पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान का नाम अब 45 बीघा जमीन की रजिस्ट्री से भी जुड़ गया है। इंदौर उज्जैन हाईवे पर मगरखेड़ा गांव में स्थित इस जमीन की रजिस्ट्री में फिरोज खान गवाह के रूप में दर्ज हैं। जमीन को लेकर एक परिवार ने धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि 83 वर्षीय कस्तूरी बाई के अस्पताल की आईसीयू में भर्ती रहने के दौरान पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए जमीन की रजिस्ट्री कराई गई थी। रजिस्ट्री के चार दिन बाद ही वृद्धा की मौत हो गई। अब परिवार ने रजिस्ट्री को शून्य घोषित कराने के लिए अदालत का रुख किया है। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि होना बाकी है।

    दस्तावेजों के मुताबिक मगरखेड़ा गांव में कस्तूरी बाई के नाम दर्ज करीब 11.403 हेक्टेयर यानी 45 बीघा जमीन की रजिस्ट्री 27 अगस्त 2024 को श्याम इंफ्रा के सुमित जिंदल के नाम की गई थी। दस्तावेजों में जमीन का सरकारी मूल्यांकन करीब 8.97 करोड़ रुपए और बिक्री मूल्य 9 करोड़ रुपए दर्ज है। कस्तूरी बाई के पोते दीपक शर्मा का कहना है कि यह परिवार की पुश्तैनी संपत्ति है। परिवार के मुताबिक कस्तूरी बाई की तबीयत खराब होने पर उन्हें रतलाम से इंदौर के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसी दौरान जमीन से जुड़े दस्तावेजों और पावर ऑफ अटॉर्नी को लेकर विवाद हुआ। परिवार का आरोप है कि वृद्धा के आईसीयू में भर्ती रहने के दौरान ही जमीन की रजिस्ट्री करा दी गई। इसके बाद 2 सितंबर 2024 को कस्तूरी बाई की अस्पताल में मौत हो गई।

    इस जमीन की कीमत को लेकर भी बड़ा अंतर सामने आया है। परिवार और स्थानीय जानकारों का दावा है कि इंदौर उज्जैन रोड पर स्थित जमीन का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 150 करोड़ रुपए है। वहीं 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन के हिसाब से इस जमीन का मूल्य करीब 45 करोड़ 61 लाख रुपए बैठता है। स्थानीय लोगों और प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक आसपास सैटेलाइट टाउनशिप विकसित होने के कारण जमीन की बाजार कीमत सरकारी गाइडलाइन से कई गुना अधिक हो सकती है। हालांकि 150 करोड़ रुपए का आंकड़ा परिवार और स्थानीय जानकारों का अनुमान है।

    रजिस्ट्री के दस्तावेजों में फिरोज खान का नाम गवाह के तौर पर दर्ज है। दस्तावेजों के पेज 12 और 25 पर उनका नाम पता फोटो और हस्ताक्षर होने की बात सामने आई है। इस सौदे को लेकर एक और कारोबारी संबंध चर्चा में है। पावर ऑफ अटॉर्नी धारक रविकांत पंवार के बेटे युवराज पंवार स्पार्कवेव रियलिटी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में डायरेक्टर हैं। इसी कंपनी में फिरोज खान की पत्नी हिना खान भी डायरेक्टर बताई गई हैं। कंपनी का नाम लोकायुक्त की जांच में जमीनों की खरीद फरोख्त के मामलों में सामने आया है। इन संबंधों के कारण सौदे में फिरोज खान की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं लेकिन उनकी भूमिका और किसी कथित अनियमितता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    जमीन के नामांतरण को लेकर भी कानूनी विवाद सामने आया है। परिवार की अपील के बाद एसडीएम कोर्ट ने नामांतरण निरस्त कर दिया। आदेश में कहा गया कि नामांतरण की प्रक्रिया में गंभीर कमियां थीं। इनमें सिविल कोर्ट के यथास्थिति बनाए रखने और जमीन नहीं बेचने के अंतरिम आदेश के बाद नामांतरण किया जाना तथा संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलना शामिल है। हालांकि नामांतरण निरस्त होने से रजिस्ट्री अपने आप अमान्य नहीं होती। इसी कारण परिवार ने अब सिविल कोर्ट में रजिस्ट्री को शून्य घोषित करने की मांग की है।

    लोकायुक्त पुलिस पहले से फिरोज खान और उनसे जुड़े लोगों की संपत्तियों की जांच कर रही है। जांच में 64 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की 48 संपत्तियों का पता चलने की बात सामने आई है। लोकायुक्त डीएसपी सुनील तालान के मुताबिक मगरखेड़ा की जमीन के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि फिरोज खान और उनसे जुड़ी कंपनियों की इस सौदे में क्या भूमिका रही। दूसरी ओर पावर ऑफ अटॉर्नी कराने वाले रविकांत पंवार ने कहा कि वह कस्तूरी बाई के कानूनी सलाहकार थे। उन्होंने दावा किया कि कस्तूरी बाई अपनी जमीन परिवार को नहीं देना चाहती थीं। अब इस पूरे मामले में अदालत और जांच एजेंसियों की पड़ताल से ही विवादित रजिस्ट्री की वैधता और संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।