Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल में नौका तिरंगा यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने युवाओं को संकल्प शक्ति और देश सेवा का संदेश दिया

    भोपाल में नौका तिरंगा यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने युवाओं को संकल्प शक्ति और देश सेवा का संदेश दिया


    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल में स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर आयोजित नौका तिरंगा यात्रा ने देशभक्ति के रंग को जल, धरती और आसमान तक पहुंचाया। प्रसिद्ध बोट क्लब पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यात्रा का शुभारंभ किया और खुद नौका में सवार होकर तिरंगा यात्रा में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग भी मौजूद रहे।

    कार्यक्रम के दौरान बोट क्लब का पूरा परिसर तिरंगे के रंगों से सजा दिखाई दिया। देशभक्ति गीतों के बीच युवाओं और खिलाड़ियों ने कयाकिंग तथा कैनोइंग के जरिए आकर्षक प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों ने केनो सलालम शो के माध्यम से तिरंगे को सलामी दी। आयोजन के दौरान तालाब के बीच फ्लोटिंग तिरंगा भी तैयार किया गया, जिसे कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण माना गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बोट क्लब पर आयोजित यह आयोजन देशभक्ति और उत्साह से भरा हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी क्षमता और सामर्थ्य के साथ विकास तथा समृद्धि के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने देश की उपलब्धियों और युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए उन्हें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की युवा आबादी उसकी बड़ी ताकत है। उन्होंने युवाओं से अपनी क्षमताओं का उपयोग देश की प्रगति के लिए करने का आह्वान किया। उनके मुताबिक खिलाड़ियों का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प और कौशल के सहारे लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

    उन्होंने नौका तिरंगा यात्रा को इसी संकल्प शक्ति का उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं और समय के साथ व्यक्ति को अपनी क्षमता तथा संकल्प के आधार पर आगे बढ़ना होता है। जल में खिलाड़ियों द्वारा किए गए प्रदर्शन को उन्होंने इसी भावना से जोड़ते हुए युवाओं की मेहनत और साहस की सराहना की।

    डॉ. यादव ने देश की सुरक्षा और सामर्थ्य का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सेनाएं अपने पराक्रम और क्षमता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कहा कि देश ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी क्षमता को मजबूत किया है और भारत दुनिया के सामने अपनी अलग पहचान बना रहा है।

    मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू होने से समानता की भावना मजबूत होगी। उनके अनुसार कानून के स्तर पर सभी नागरिकों के लिए समान व्यवस्था का उद्देश्य सामाजिक समानता को बढ़ावा देना है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश की एकता, विकास और सामर्थ्य को मजबूत करने का संदेश दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को आगे बढ़ाने की बात कही और नागरिकों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

    नौका तिरंगा यात्रा के दौरान खिलाड़ियों का प्रदर्शन, तिरंगे से सजा बोट क्लब और जल के बीच स्थापित फ्लोटिंग तिरंगा लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। आयोजन ने स्वतंत्रता दिवस से पहले भोपाल में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।

  • मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण मामले की हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी, अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा, हजारों अभ्यर्थियों की नजर

    मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण मामले की हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी, अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा, हजारों अभ्यर्थियों की नजर

    मध्य प्रदेश: में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC आरक्षण से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। अदालत ने मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस प्रकरण में न्यायालय के अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। फैसले का असर OBC वर्ग के अभ्यर्थियों और आरक्षण से जुड़े विभिन्न मामलों पर पड़ने की संभावना है।

    यह मामला वर्ष 2019 से न्यायिक प्रक्रिया में लंबित बताया जा रहा है। करीब सात साल से चल रहे इस प्रकरण के कारण OBC वर्ग के अभ्यर्थियों के बीच लगातार असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सुनवाई पूरी होने के बाद अब सभी पक्षों की निगाहें अदालत के निर्णय पर टिकी हैं।

    मामले की सुनवाई के दौरान OBC आरक्षण से संबंधित पक्षों ने अपनी दलीलें और तर्क न्यायालय के सामने रखे। OBC महासभा की ओर से भी इस प्रकरण को सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्ग के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला बताया गया है। संगठन का कहना है कि लंबे समय से लंबित रहने के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं।

    OBC महासभा के संस्थापक अध्यक्ष विजय कुमार ने कहा कि जबलपुर हाई कोर्ट में लंबित प्रकरण पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखा है। उनके अनुसार, OBC वर्ग से जुड़े पक्षकारों और अधिवक्ताओं ने मामले में अपनी बात रखी है। अब न्यायालय के निर्णय का इंतजार है।

    मामले से जुड़े पक्ष की ओर से दावा किया गया है कि लगभग 80 से 90 हजार OBC वर्ग के बच्चे और अभ्यर्थी इस प्रकरण से प्रभावित हैं। लंबे समय से आरक्षण व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण उनकी शैक्षणिक और रोजगार संबंधी संभावनाओं पर भी अनिश्चितता बनी हुई है।

    आरक्षण का मुद्दा मध्य प्रदेश में लंबे समय से राजनीतिक, सामाजिक और न्यायिक चर्चा का विषय रहा है। OBC वर्ग के लिए आरक्षण से संबंधित विभिन्न नियुक्तियों और शैक्षणिक अवसरों में स्थिति स्पष्ट होने को लेकर अभ्यर्थियों की नजर न्यायालय के निर्णय पर रहती है। ऐसे में फैसला सुरक्षित होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि आगे की स्थिति न्यायिक निर्णय से स्पष्ट होगी।

    OBC महासभा ने न्यायालय से जल्द फैसला सुनाए जाने की अपील की है। संगठन का कहना है कि मामले के लंबे समय से लंबित रहने के कारण अभ्यर्थियों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। फैसला आने के बाद आरक्षण से संबंधित कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्थिति साफ हो सकेगी।

    फिलहाल हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद निर्णय सुरक्षित रखा है। अदालत कब तक फैसला सुनाएगी, इसकी निश्चित तारीख की जानकारी सामने नहीं आई है। अंतिम निर्णय आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि OBC आरक्षण से जुड़े लंबित विवाद पर न्यायालय का रुख क्या रहता है और उसका अभ्यर्थियों पर किस प्रकार प्रभाव पड़ेगा।

    करीब सात वर्षों से चल रहे इस मामले में सुनवाई पूरी होना अपने आप में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब OBC वर्ग के अभ्यर्थियों, संगठनों और संबंधित पक्षों की निगाहें हाई कोर्ट के फैसले पर केंद्रित हैं। निर्णय आने के बाद ही आरक्षण व्यवस्था से जुड़े आगे के कदम और प्रभावित अभ्यर्थियों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • मंडला में GPF भुगतान के नाम पर 10 हजार रिश्वत मांगने वाला BEO कार्यालय का बाबू 5 हजार लेते गिरफ्तार

    मंडला में GPF भुगतान के नाम पर 10 हजार रिश्वत मांगने वाला BEO कार्यालय का बाबू 5 हजार लेते गिरफ्तार


    मध्य प्रदेश:
    के मंडला जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई करते हुए विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय नारायणगंज में पदस्थ एक बाबू को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान नोखे लाल डहेरिया के रूप में हुई है। आरोप है कि उसने कार्यालय में पदस्थ एक चौकीदार से उसके GPF खाते से राशि निकालने की प्रक्रिया के बदले रिश्वत की मांग की थी।

    जानकारी के अनुसार, चौकीदार दशरथ लाल बरमैया को व्यक्तिगत जरूरत के लिए अपने GPF खाते से एक लाख रुपये निकालने थे। इसके लिए उन्होंने संबंधित प्रक्रिया के तहत राशि स्वीकृत कराने के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि इसी काम को आगे बढ़ाने के एवज में कार्यालय के बाबू नोखे लाल डहेरिया ने उनसे दस हजार रुपये की मांग की।

    रिश्वत की मांग के बाद चौकीदार ने मामले की शिकायत जबलपुर लोकायुक्त पुलिस से की। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने मामले की जानकारी जुटाई और शिकायत की पुष्टि के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद आरोपी को रिश्वत लेते पकड़ने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की गई।

    लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, रिश्वत की पहली किस्त के तौर पर पांच हजार रुपये देने पर सहमति बनी। तय योजना के तहत फरियादी ने आरोपी बाबू को पांच हजार रुपये दिए। जैसे ही आरोपी ने रकम स्वीकार की, मौके पर मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे पकड़ लिया।

    कार्रवाई के दौरान लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत की रकम बरामद की और आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। गिरफ्तारी के बाद मामले से जुड़े दस्तावेज और अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है। लोकायुक्त टीम यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रिश्वत की मांग किस प्रक्रिया के लिए की गई थी और इस मामले में अन्य किसी कर्मचारी की भूमिका थी या नहीं।

    शिकायतकर्ता के अनुसार, उसे अपने GPF खाते से एक लाख रुपये की निकासी की आवश्यकता थी। सरकारी कर्मचारी के लिए GPF की राशि व्यक्तिगत आवश्यकताओं के समय महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता का माध्यम होती है। ऐसे में इस राशि से जुड़े काम के लिए कथित तौर पर रिश्वत की मांग किए जाने के आरोप ने कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।

    लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग से जुड़े कार्यालयों में भी भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों के लंबित वित्तीय और सेवा संबंधी कार्य निर्धारित नियमों के अनुसार किए जाने की व्यवस्था है। ऐसे मामलों में रिश्वत की शिकायत सामने आने पर जांच एजेंसियां शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करती हैं।

    मंडला में हुई इस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट होता है कि रिश्वत की शिकायत मिलने पर लोकायुक्त पुलिस ट्रैप कार्रवाई के जरिए आरोपों की जांच कर रही है। हालांकि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर होगा।

    फिलहाल लोकायुक्त पुलिस ने मामले में आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपी से पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि GPF राशि से संबंधित प्रक्रिया में किस स्तर पर अनियमितता हुई और रिश्वत की मांग के पीछे क्या परिस्थितियां थीं। मामले की जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • एनएचएम और आयुष्मान भारत को बड़ी राशि, भोपाल-विदिशा मार्ग निर्माण सहित वन समितियों के लिए कैबिनेट ने लिए अहम फैसले

    एनएचएम और आयुष्मान भारत को बड़ी राशि, भोपाल-विदिशा मार्ग निर्माण सहित वन समितियों के लिए कैबिनेट ने लिए अहम फैसले

    मध्य प्रदेश: में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जन-स्वास्थ्य, सड़क अधोसंरचना, वन प्रबंधन और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में कुल 47 हजार 990 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।

    कैबिनेट के फैसलों में स्वास्थ्य क्षेत्र को सबसे बड़ी प्राथमिकता मिली। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के निरंतर संचालन के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक कुल 44 हजार 515.13 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 28 हजार 83.47 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। यह केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के अनुपात में संचालित केंद्र प्रवर्तित योजना है। इसके तहत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, टीकाकरण, टीबी उन्मूलन, सिकल सेल, किशोर स्वास्थ्य और गैर-संचारी रोगों से जुड़े कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।

    इसके अलावा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और गैर-एसईसीसी हितग्राहियों से संबंधित योजना के संचालन के लिए 12 हजार 123 करोड़ 81 लाख रुपये मंजूर हुए हैं। इसका उद्देश्य पात्र लोगों को सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलेस उपचार उपलब्ध कराना तथा बीमारी के कारण होने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।

    स्वास्थ्य संस्थाओं की सुरक्षा और सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 1,159 करोड़ 58 लाख रुपये तथा जिला स्तरीय अमले से संबंधित योजना के लिए 654 करोड़ 84 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। जिला स्तरीय अमला योजना लंबे समय से स्वास्थ्य प्रशासन की व्यवस्था का हिस्सा रही है।

    सड़क अधोसंरचना के क्षेत्र में कैबिनेट ने भोपाल-विदिशा मार्ग के चार लेन निर्माण को मंजूरी दी है। 44.830 किलोमीटर लंबे मार्ग के निर्माण के लिए 1,757 करोड़ 55 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। परियोजना को हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल के आधार पर विकसित किया जाएगा।

    यह मार्ग भोपाल के भानपुर टी-जंक्शन से शुरू होकर सांची-सलामतपुर जंक्शन तक जाएगा। इसके निर्माण से भोपाल और विदिशा के बीच संपर्क बेहतर होने के साथ औद्योगिक गतिविधियों और क्षेत्रीय अधोसंरचना को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। मार्ग सांची जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन और सांस्कृतिक क्षेत्र से भी जुड़ा है।

    कैबिनेट ने भोपाल बायपास चार लेन मार्ग पर उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह की अनुमति भी दी है। 51.963 किलोमीटर लंबे मार्ग पर 19 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2031 तक शुल्क संग्रह की स्वीकृति दी गई है। आवश्यकता होने पर इसकी अवधि पांच वर्ष तक बढ़ाने के लिए लोक निर्माण विभाग को अधिकृत किया गया है।

    भोपाल बायपास भोपाल को इंदौर, रायसेन, विदिशा और नर्मदापुरम जिलों से जोड़ता है। इसके संचालन और रखरखाव से शहर के भीतर यातायात दबाव कम करने में मदद मिलती है। टोल से प्राप्त राशि राज्य राजमार्ग निधि में जमा की जाएगी और सड़क विकास व रखरखाव पर खर्च होगी।

    वन क्षेत्र में संयुक्त वन प्रबंधन समितियों से जुड़ी योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 918 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसका उद्देश्य वन संरक्षण और संवर्धन में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाना है। प्रावधानों के तहत काष्ठ बिक्री से प्राप्त राजस्व की 20 प्रतिशत राशि समितियों को दी जाती है, जबकि बांस विदोहन से प्राप्त शुद्ध लाभ का प्रावधानित हिस्सा श्रमिकों को दिया जाता है।

  • मध्य प्रदेश में 150 पशु चिकित्सा अधिकारियों ने ट्रांसफर नीति पर उठाए सवाल, जांच के बाद निर्णय का आश्वासन

    मध्य प्रदेश में 150 पशु चिकित्सा अधिकारियों ने ट्रांसफर नीति पर उठाए सवाल, जांच के बाद निर्णय का आश्वासन

    मध्य प्रदेश में करीब 150 पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ और सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों के तबादलों को लेकर विवाद सामने आया है। पशु चिकित्सकों ने ट्रांसफर नीति में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव को अभ्यावेदन सौंपा है। अधिकारियों की ओर से उन्हें अभ्यावेदनों की जांच के बाद उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया है।

    पशु चिकित्सकों का कहना है कि तबादलों के बाद कई अधिकारियों ने अभी नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग नहीं की है। इसका असर कई जिलों में पशु चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था पर पड़ रहा है। कुछ स्थानों पर चिकित्सकों की संख्या कम होने से पशुओं के इलाज और विभागीय कामकाज में परेशानी आने की बात कही गई है।

    तबादलों को लेकर सबसे बड़ा आरोप सार्थक ऐप में दर्ज जानकारी और उसके आधार पर तैयार सूची को लेकर है। चिकित्सकों का दावा है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में कुछ छुट्टियों को अनुपस्थिति के तौर पर दर्ज किया गया, जिससे सेवा संबंधी जानकारी प्रभावित हुई। उनका आरोप है कि इसी तरह की विसंगतियों के आधार पर कुछ अधिकारियों की पदस्थापना तय की गई।

    पशु चिकित्सकों ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानांतरण प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और मानवीय आधारों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। उनका कहना है कि कुछ अधिकारियों को 700 से 1300 किलोमीटर तक दूर भेज दिया गया, जबकि कुछ लोगों को कथित तौर पर तबादला सूची से बाहर रखा गया। इस कारण विभाग के भीतर समान अवसर और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं।

    महिला और पारिवारिक परिस्थितियों से जुड़े मामलों को लेकर भी चिकित्सकों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। सीहोर में पदस्थ रहीं पशु चिकित्सक रश्मि देवी चंद्राकर ने बताया कि उन्होंने अनूपपुर के आदिवासी क्षेत्र में करीब 11 वर्ष सेवाएं दी हैं। उनका दावा है कि नीति में तलाकशुदा महिलाओं के लिए यथासंभव अनुकूल स्थान पर पदस्थापना का प्रावधान होने के बावजूद उनका तबादला सिंगरौली किया जा रहा है।

    इसी तरह कुछ अन्य पशु चिकित्सकों ने बच्चों की पढ़ाई और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए तबादलों से होने वाली कठिनाइयों की जानकारी दी है। डॉ. राखी सिंह और डॉ. कमल सिंह का कहना है कि उनके बच्चों की पढ़ाई भोपाल में चल रही है और स्कूल तथा कोचिंग के बीच अचानक दूसरे स्थान पर जाना परिवार के लिए मुश्किल होगा।

    पशु चिकित्सक उदय सिंह माहेश्वरी ने भी अपने तबादले को नियमों के विपरीत बताया है। उनका कहना है कि वे सीहोर जिला पशु चिकित्सक संघ के अध्यक्ष हैं और उनके बच्चों की शिक्षा संबंधी जिम्मेदारियां भी उन पर हैं। करीब 700 किलोमीटर दूर तबादला होने से उनके सामने व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा हो गई हैं।

    चिकित्सकों ने यह आरोप भी लगाया कि कुछ तबादले प्रक्रिया के अंतिम समय में किए गए और नई जगह ज्वाइन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उनके अनुसार, इतनी कम अवधि में दूरस्थ जिलों में पहुंचना कई अधिकारियों के लिए मुश्किल है। कुछ मामलों में ऑनलाइन उपस्थिति और सेवा रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी के भौतिक सत्यापन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

    तबादलों के कारण कई जिलों में पद खाली होने की स्थिति बनने का दावा भी किया गया है। चिकित्सकों के अनुसार, कुछ स्थानों पर पहले से सीमित संख्या में अधिकारी तैनात थे और स्थानांतरण के बाद वहां पशु चिकित्सा सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

    विभागीय स्तर पर प्राप्त अभ्यावेदनों की जांच की जा रही है। जांच में स्थानांतरण प्रक्रिया, उपलब्ध रिकॉर्ड और चिकित्सकों की आपत्तियों का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद नियमों और तथ्यों के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाना है। फिलहाल पशु चिकित्सकों की नजर जांच के परिणाम और संभावित संशोधन पर बनी हुई है।

  • 12 राज्यों के युवाओं ने संसद यूथ पार्लियामेंट 2026 में लिया हिस्सा, सीएम यादव बोले लोकतंत्र मजबूत करें युवा

    12 राज्यों के युवाओं ने संसद यूथ पार्लियामेंट 2026 में लिया हिस्सा, सीएम यादव बोले लोकतंत्र मजबूत करें युवा

    मध्य प्रदेश। विधानसभा में गुरुवार को संसद यूथ पार्लियामेंट 2026 का आयोजन किया गया, जिसमें 12 राज्यों के 52 से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं से लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश देश का दिल है और भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। उन्होंने कहा कि देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है और ऐसे समय में विधानसभा भवन में आयोजित युवा संसद ने इसे मिनी इंडिया का स्वरूप दे दिया है। उनके अनुसार सदन कल्याणकारी नीतियों के निर्माण का महत्वपूर्ण स्थान है और युवाओं को इसकी कार्यप्रणाली को समझना चाहिए।

    डॉ. यादव ने युवा संसद में बेटियों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की बढ़ती भूमिका दिखाई देती है। उन्होंने महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का भी उल्लेख किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति में माताओं और बहनों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि समाज की प्रगति में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री ने वसुधैव कुटुम्बकम की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की सीख देती है। उन्होंने कहा कि देश को अनेकता में एकता, सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की भावना के साथ आगे बढ़ाने के लिए केवल विचार पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू करने के लिए संकल्प और सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समान कानून के मुद्दे पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सरकार की नजर में सभी नागरिकों के लिए कानून समान होना चाहिए। उन्होंने मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता से जुड़े विधायी प्रयासों और सुझाव प्रक्रिया का उल्लेख किया। उनके अनुसार विभिन्न जिलों और धर्मों के लोगों से इस विषय पर सुझाव लिए गए हैं।

    डॉ. यादव ने युवाओं से राजनीति को केवल चुनावी गतिविधि के रूप में नहीं देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य पेशेवर बनने के साथ राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। उनके अनुसार लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए शिक्षित और जागरूक युवाओं की भागीदारी आवश्यक है।

    मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने नेताजी सुभाषचंद्र बोस का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने आईसीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद नौकरी छोड़कर देश की स्वतंत्रता के आंदोलन में भाग लिया। उन्होंने युवाओं से देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का आह्वान किया।

    कार्यक्रम में उद्योग जगत से जुड़े वक्ताओं ने भी युवाओं की भूमिका और मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़े उद्योगों के साथ छोटी औद्योगिक इकाइयों में भी निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं। राजनीति और समाज सेवा को समर्पण और जिम्मेदारी वाला क्षेत्र बताते हुए युवाओं को समाज के लिए काम करने की प्रेरणा दी गई।

    युवा संसद में युवा सांसद की भूमिका निभाने वाले प्रतिभागियों ने भी प्रदेश में युवाओं से जुड़ी योजनाओं और शिक्षा के महत्व पर विचार रखे। कार्यक्रम में बताया गया कि वित्त वर्ष 2026-27 में खेल और युवा कल्याण के लिए 800 करोड़ रुपये से अधिक का बजट रखा गया है। प्रदेश में 274 सांदीपनि विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं और 200 नए विद्यालय स्थापित करने की योजना है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत और विकसित मध्य प्रदेश के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर युवाओं की आवश्यकता है। युवा संसद जैसे कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली समझने और सार्वजनिक जीवन में अपनी भूमिका तय करने का अवसर मिलता है।

  • मध्य प्रदेश के भिंड में नौ वर्षीय मासूम से गंभीर अपराध, पुलिस ने दर्ज किया केस और आरोपी की तलाश जारी।

    मध्य प्रदेश के भिंड में नौ वर्षीय मासूम से गंभीर अपराध, पुलिस ने दर्ज किया केस और आरोपी की तलाश जारी।


    मध्य प्रदेश के भिंड जिले के अंतर्गत आने वाले मैहगांव थाना क्षेत्र में एक नौ वर्षीय बालिका के साथ गंभीर अपराध की घटना सामने आई है। घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन हरकत में आया और पीड़िता को उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट तथा भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न सुसंगत और कठोर धाराओं के तहत आपराधिक मामला पंजीकृत कर लिया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, बालिका अपने 11 वर्षीय भाई के साथ वापस लौट रही थी। इसी दौरान 24 वर्षीय आरोपी अरविंद वाल्मीकि ने मदद का झांसा देकर दोनों बच्चों को अपनी दोपहिया वाहन पर बिठा लिया। आरोपी बच्चों को गांव के बाहरी इलाके में सुनसान झाड़ियों की ओर ले गया। वहां आरोपी ने मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया।

    घटना के दौरान जब बालिका के भाई ने विरोध करने और अपनी बहन की रक्षा करने का प्रयास किया, तो आरोपी ने उसके साथ मारपीट की। वारदात को अंजाम देने के पश्चात आरोपी दोनों बच्चों को मौके पर ही छोड़कर फरार हो गया। डरा हुआ बालक किसी प्रकार अपने घर पहुंचा और परिजनों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।

    घटना की सूचना मिलते ही परिजन तत्काल घटना स्थल पर पहुंचे और गंभीर रूप से घायल बालिका को इलाज के लिए पास के अस्पताल ले गए। परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया है। पुलिस प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों का गठन किया है, जो विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

    इसी जिले के सुरपुरा थाना क्षेत्र से जुड़े एक अन्य पुराने मामले में भी कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है। सुरपुरा में एक बालिका के साथ हुए अपराध के सह-आरोपी की जमानत याचिका को स्थानीय अदालत ने खारिज कर दिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों के साथ संभावित छेड़छाड़ की आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया।

    मध्य प्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस और न्यायपालिका द्वारा सख्त रुख अपनाया जा रहा है। भिंड पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मैहगांव मामले के आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके।

  • BJP अध्यक्ष नवीन की नई टीम में MP के इन 4 नेताओं को मिल सकती है जगह… सुगबुगाहट हुई तेज

    BJP अध्यक्ष नवीन की नई टीम में MP के इन 4 नेताओं को मिल सकती है जगह… सुगबुगाहट हुई तेज


    भोपाल।
    भाजपा (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (Nitin Navin) की नई टीम के गठन की कवायद के बीच मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से भी राष्ट्रीय संगठन में जगह पाने वाले संभावित चेहरों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खास बात यह है कि पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और सांसद विष्णुदत्त शर्मा (वीडी शर्मा) की हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से हुई मुलाकात के बाद उनके नाम को लेकर राजनीतिक हलकों में अटकलें और तेज हुई हैं। भाजपा के सामने राष्ट्रीय टीम में नए चेहरों को जगह देने के साथ सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की चुनौती है। ऐसे में मध्यप्रदेश से ब्राह्मण, ओबीसी, दलित और आदिवासी वर्ग के चेहरों को प्रतिनिधित्व देने पर विचार हो सकता है। संभावित नामों में वीडी शर्मा, राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार, सांसद गजेंद्र पटेल और वरिष्ठ नेता लालसिंह आर्य की चर्चा है। हालांकि, अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा और इसमें जातीय समीकरण के अलावा संगठन में पकड़, चुनावी प्रबंधन, अनुभव और राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता अहम होगी।


    पीएम से मुलाकात के बाद चर्चा तेज

    पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा का नाम संभावित दावेदारों में सबसे प्रमुख माना जा रहा है। वे लंबे समय तक मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं और संगठन को बूथ स्तर से लेकर चुनावी प्रबंधन तक संभालने का अनुभव रखते हैं। प्रदेश में भाजपा को लगातार मजबूत करने के दौर में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात ने भी उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाओं को हवा दी है। वीडी शर्मा के पक्ष में ब्राह्मण प्रतिनिधित्व के साथ संगठनात्मक अनुभव भी जाता है। यदि भाजपा राष्ट्रीय टीम में अनुभवी और संगठन को समझने वाले नेताओं को बड़ी भूमिका देने की रणनीति अपनाती है, तो उनका नाम मजबूत दावेदारों में रह सकता है।


    कविता पाटीदार : महिला और ओबीसी का समीकरण

    राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार भी राष्ट्रीय संगठन के लिए संभावित चेहरों में हैं। प्रदेश भाजपा संगठन में महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुकी पाटीदार के पास संगठन के साथ संसदीय राजनीति का अनुभव भी है। उनके नाम के साथ महिला और ओबीसी दोनों समीकरण जुड़ते हैं। भाजपा के लिए महिला मतदाताओं की बढ़ती राजनीतिक भूमिका को देखते हुए राष्ट्रीय टीम में किसी महिला नेता को प्रमुख जिम्मेदारी देना महत्वपूर्ण संदेश हो सकता है। वहीं ओबीसी प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी उनका नाम पार्टी के सामाजिक विस्तार की रणनीति में फिट बैठता है।


    गजेंद्र पटेल : आदिवासी चेहरे पर दांव

    राष्ट्रीय संगठन में आदिवासी प्रतिनिधित्व बढ़ाने की रणनीति बनी तो सांसद गजेंद्र पटेल का नाम भी महत्वपूर्ण हो सकता है। मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में संगठनात्मक और राजनीतिक काम का अनुभव रखने वाले पटेल इस वर्ग के प्रतिनिधि चेहरे के रूप में देखे जा सकते हैं। भाजपा के लिए आदिवासी राजनीति केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं है। मध्यप्रदेश के साथ आसपास के राज्यों में भी आदिवासी मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में राष्ट्रीय टीम में आदिवासी चेहरे को जगह देना पार्टी की व्यापक सामाजिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।


    लालसिंह आर्य : दलित प्रतिनिधित्व का विकल्प

    ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के वरिष्ठ नेता लालसिंह आर्य भी संभावित दावेदारों में शामिल हैं। वे भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चे की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं। राष्ट्रीय संगठन में उन्हें जिम्मेदारी मिलती है तो इससे दलित प्रतिनिधित्व का संदेश जाएगा। भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में दलित वोट महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में राष्ट्रीय टीम में इस वर्ग के अनुभवी चेहरे को प्रमुख भूमिका देना राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों लिहाज से उपयोगी हो सकता है।

    दतिया की हार के बाद संगठनात्मक प्रदर्शन भी कसौटी
    प्रदेश में हालिया दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर भी मंथन का दौर है। ऐसे में राष्ट्रीय टीम के लिए प्रदेश से चेहरों के चयन में केंद्रीय नेतृत्व संगठनात्मक प्रदर्शन, चुनावी प्रबंधन और नेताओं की स्वीकार्यता को भी ध्यान में रख सकता है। दतिया के नतीजे ने प्रदेश संगठन के सामने 2028 की तैयारियों को लेकर भी चुनौती बढ़ाई है। ऐसे में राष्ट्रीय जिम्मेदारी पाने वाले नेताओं की उपयोगिता केवल सामाजिक समीकरण तक सीमित नहीं होगी, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव में संगठन को मजबूत करने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।

  • MP: ग्वालियर में अवैध खनन को लेकर HC सख्त…. वेतन और बेटे की स्कूल फीस समेत अफसरों से पूछे तीखे सवाल

    MP: ग्वालियर में अवैध खनन को लेकर HC सख्त…. वेतन और बेटे की स्कूल फीस समेत अफसरों से पूछे तीखे सवाल


    ग्वालियर।
    ग्वालियर (Gwalior) के बिलौआ में अवैध खनन (Illegal mining) को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की ग्वालियर बेंच में सुनवाई हुई. इस दौरान अदालत ने अफसरों पर तीखे प्रहार किए. करीब ढाई घंटे तक कलेक्टर रुचिका चौहान (Collector Ruchika Chauhan) कोर्ट में रहीं, वहीं प्रभारी माइनिंग अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा की सैलरी और उनके बेटे के स्कूल की फीस को लेकर कोर्ट ने सीधा हिसाब मांगा गया।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में बिलौआ खदानों का ड्रोन वीडियो चलाया गया. जस्टिस ने वीडियो पॉज करवाकर कलेक्टर रुचिका चौहान से सीधे सवाल पूछे कि ”यह कौन सी जगह है? किसकी जमीन है? सर्वे नंबर क्या है? कितना क्षेत्र स्वीकृत है और कितनी खुदाई हो चुकी है?”


    जवाब न मिलने पर तल्खी

    जब तत्काल स्पष्ट जानकारी नहीं मिली तो कोर्ट ने 30 सितंबर तक का समय देते हुए कहा कि जितना समय चाहें ले लीजिए, लेकिन अगली सुनवाई पर एक-एक सवाल का स्पष्ट और सटीक जवाब देना होगा।


    10 साल का माल 1 साल में निकालने पर सवाल

    कोर्ट ने खनन की गति पर टिप्पणी करते हुए कहा, ”अगर 10 साल की लीज का माल 1 साल में ही निकाल लिया, तो बाकी 9 साल क्या करोगे?”


    51 हजार सैलरी, 9 लाख स्कूल फीस

    इसके बाद कोर्ट का रुख प्रभारी खनिज अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा की तरफ मुड़ा. कोर्ट ने माइनिंग अधिकारी से पूछा कि उनके बेटे की सिंधिया स्कूल में फीस कितनी है? जवाब मिला- ‘करीब 9 लाख रुपये साल.’ जब कोर्ट ने पूछा कि आपकी महीने की तनख्वाह कितनी है? तो उन्होंने बताया- ‘करीब 51 हजार रुपये महीना.’

    कोर्ट ने 51 हजार मासिक वेतन और 9 लाख सालाना फीस के अंतर पर सवाल उठाए, जिस पर माइनिंग अफसर ने सफाई दी कि बेटे की पढ़ाई का खर्च उनकी पत्नी के मामा उठाते हैं. इसको लेकर अदालत ने टिप्पणी की।

    वहीं, माइनिंग अफसर की ओर से लोकायुक्त के आदेश को ‘क्लीन चिट’ बताकर पेश करने की कोशिश की गई, लेकिन जज ने खुद आदेश पढ़ा और साफ किया कि FIR दर्ज होने के कारण लोकायुक्त ने केस बंद किया था, जिसे ‘दोषमुक्ति’ या ‘क्लीन चिट’ नहीं कहा जा सकता।

    दरअसल, इससे पहले हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने ग्वालियर के खनिज अधिकारी घनश्याम यादव को जिले में काम करने से रोक दिया था और उनके आचरण पर गंभीर टिप्पणी की थी. राज्य सरकार को निर्देश दिए कि ग्वालियर में तत्काल ईमानदार और सक्षम खनिज अधिकारी की पोस्टिंग की जाए, तब तक पूरे खनिज विभाग की जिम्मेदारी कलेक्टर संभालेंगे।

    इसके बाद सरकार ने भिंड में पदस्थ खनिज अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा को ग्वालियर भेजा तो उनकी नियुक्ति और पहले की पोस्टिंग को लेकर सवाल किए गए थे।


    AAG विवेक खेड़कर की खिंचाई

    सुनवाई के दौरान जब अपर महाधिवक्ता (AAG) विवेक खेड़कर ने माइनिंग अफसर का पक्ष रखने का प्रयास किया, तो अदालत ने उन पर भी कड़ा एतराज जताया. कोर्ट ने सख्त लहजे में टिप्पणी की कि अगर आप शासन का पक्ष छोड़कर अधिकारी का व्यक्तिगत बचाव करना चाहते हैं, तो फिर शासन का पक्ष छोड़ दीजिए। इस दौरान AAG कोर्ट में कई बार माफी मांगते और ‘सॉरी’ बोलते नजर आए. हाईकोर्ट ने मामले में विस्तृत अध्ययन और पूरी जानकारी के साथ 30 सितंबर को अगली रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

  • अब MP के पूर्वी हिस्से में बरसेंगे बदरा, जबलपुर-रीवा-शहडोल में कल से 3 दिन भारी बारिश, आज शिवपुरी-श्योपुर में अलर्ट

    अब MP के पूर्वी हिस्से में बरसेंगे बदरा, जबलपुर-रीवा-शहडोल में कल से 3 दिन भारी बारिश, आज शिवपुरी-श्योपुर में अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में अच्छी बारिश के बाद अब मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सक्रिय होने जा रहा है। शुक्रवार से जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग के जिलों में तीन दिन तक भारी बारिश का अलर्ट है। इससे पहले गुरुवार को शिवपुरी और श्योपुर में तेज बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, दोनों जिलों में अगले 24 घंटे में 4 इंच या इससे ज्यादा बारिश हो सकती है।

    वहीं प्रदेश के भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    खरगोन में 8.1 इंच बारिश
    पिछले 24 घंटे में खरगोन में प्रदेश में सबसे ज्यादा 8.1 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। खंडवा में 5.5 इंच और गुना में 4.6 इंच पानी गिरा। भोपाल में 70.6 मिमी यानी 2.8 इंच बारिश दर्ज हुई। इसके अलावा धार, राजगढ़, शिवपुरी, दतिया, उज्जैन, सीधी और इंदौर समेत प्रदेश के आधे से ज्यादा हिस्सों में तेज बारिश हुई।

    लो प्रेशर और मानसून ट्रफ एक्टिव
    मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में लो प्रेशर एरिया और मानसून ट्रफ सक्रिय है। दक्षिणी हिस्से से भी एक ट्रफ गुजर रही है। इसके प्रभाव से पिछले 48 घंटे से प्रदेश में बारिश का दौर जारी है और गुरुवार को भी इसका असर बना रहेगा। आने वाले दिनों में एक और लो प्रेशर एरिया सक्रिय होने की संभावना है। इसका असर खासतौर पर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में देखने को मिलेगा।

    पूर्वी MP में 19% तक कम बारिश
    प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में अब तक 19% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में सामान्य से 5% से 52% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पश्चिमी हिस्से के भी कई जिले पीछे
    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में भी सामान्य से 4% से 46% तक कम बारिश हुई है।

    सिर्फ 12 जिलों में औसत से ज्यादा पानी
    IMD के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के सिर्फ 12 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश हुई है। इनमें भोपाल, गुना, सीहोर, राजगढ़, ग्वालियर, अनूपपुर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, बड़वानी, खंडवा और खरगोन शामिल हैं।