Category: Madhya Pradesh

  • गोद भराई समारोह में जा रहे दो भाइयों की सड़क हादसे में मौत: ट्रैक्टर की टक्कर से परिवार की खुशियां मातम में बदलीं

    गोद भराई समारोह में जा रहे दो भाइयों की सड़क हादसे में मौत: ट्रैक्टर की टक्कर से परिवार की खुशियां मातम में बदलीं


    मध्यप्रदेश । उज्जैन जिले में गुरुवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। भांजे के घर आयोजित गोद भराई समारोह में शामिल होने जा रहे दो सगे भाइयों की ट्रैक्टर की टक्कर से मौत हो गई, जबकि उनके साथ बाइक चला रहा पोता गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे की खबर मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और जिस घर में उत्सव की तैयारियां चल रही थीं, वहां मातम का माहौल छा गया।

    जानकारी के अनुसार मरंडवा गांव निवासी 80 वर्षीय पीरूलाल मोथलिया और उनके छोटे भाई 75 वर्षीय भागीरथ मोथलिया अपने पोते अभिषेक के साथ बाइक से उज्जैन जा रहे थे। अभिषेक बाइक चला रहा था। तीनों नागझिरी क्षेत्र में रहने वाले अपने भांजे के यहां आयोजित गोद भराई कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निकले थे। परिवार में इस कार्यक्रम को लेकर उत्साह का माहौल था, लेकिन रास्ते में हुए हादसे ने सब कुछ बदल दिया।

    बताया जा रहा है कि गांव से लगभग 25 से 30 किलोमीटर दूर मुख्य मार्ग पर पीछे से तेज रफ्तार में आए एक ट्रैक्टर ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार तीनों लोग सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने तत्काल घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की।

    अस्पताल ले जाते समय पीरूलाल मोथलिया ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। वहीं गंभीर रूप से घायल भागीरथ मोथलिया को उज्जैन के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान देर शाम उनकी भी मौत हो गई। हादसे में घायल अभिषेक का इलाज जारी है और उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। डॉक्टर उसकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    परिजनों ने बताया कि पीरूलाल मोथलिया खेती-किसानी का कार्य करते थे, जबकि भागीरथ मोथलिया मध्य प्रदेश विद्युत मंडल (एमपीईबी) से सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। परिवार सामाजिक और शासकीय क्षेत्र में भी सक्रिय रहा है। परिवार का एक सदस्य वर्तमान में उज्जैन में पटवारी के पद पर कार्यरत है।

    हादसे की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच गए। शुक्रवार सुबह दोनों मृतकों का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। अंतिम संस्कार के लिए दोनों शवों को उनके पैतृक गांव ले जाया गया, जहां पूरे गांव ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।

    पुलिस ने मामले में दुर्घटना का प्रकरण दर्ज कर लिया है और फरार ट्रैक्टर चालक की तलाश शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को दुर्घटना का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। एक परिवार जो खुशियों के समारोह में शामिल होने निकला था, वह कुछ ही पलों में अपनों को खोने के गहरे दुख में डूब गया।

  • रविवार को कुछ देर के लिए गायब हो जाएगी परछाई: 21 जून को दिखेगा ‘जीरो शैडो डे’, साल का सबसे बड़ा दिन भी होगा

    रविवार को कुछ देर के लिए गायब हो जाएगी परछाई: 21 जून को दिखेगा ‘जीरो शैडो डे’, साल का सबसे बड़ा दिन भी होगा


    मध्यप्रदेश । आसमान और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए 21 जून का दिन बेहद खास रहने वाला है। इस दिन उज्जैन सहित कर्क रेखा के आसपास स्थित क्षेत्रों में एक अनोखी खगोलीय घटना देखने को मिलेगी, जिसे ‘शून्य छाया दिवस’ यानी ‘जीरो शैडो डे’ कहा जाता है। इस दौरान कुछ क्षणों के लिए लोगों और वस्तुओं की परछाई लगभग गायब हो जाएगी। यह नजारा हर दिन देखने को नहीं मिलता, बल्कि पृथ्वी और सूर्य की विशेष स्थिति के कारण साल में चुनिंदा अवसरों पर ही दिखाई देता है।

    उज्जैन की जीवाजी वेधशाला के अनुसार यह दुर्लभ घटना 21 जून को दोपहर 12 बजकर 28 मिनट पर दिखाई देगी। इस समय सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध में अपनी अधिकतम उत्तरी स्थिति के करीब होगा और उसकी किरणें लगभग सीधी धरती पर पड़ेंगी। परिणामस्वरूप खड़ी वस्तुओं की छाया बेहद छोटी होकर लगभग शून्य हो जाएगी। वेधशाला में शंकु यंत्र के माध्यम से इस खगोलीय घटना का प्रत्यक्ष अवलोकन भी कराया जाएगा।

    21 जून को केवल जीरो शैडो डे ही नहीं, बल्कि वर्ष का सबसे बड़ा दिन भी माना जाता है। इस दिन सूर्य की स्थिति ऐसी होती है कि उत्तरी गोलार्द्ध में दिन की अवधि सबसे अधिक और रात सबसे छोटी होती है। उज्जैन में सूर्योदय सुबह 5:42 बजे और सूर्यास्त शाम 7:16 बजे होगा। यानी दिन की कुल अवधि 13 घंटे 34 मिनट रहेगी, जबकि रात केवल 10 घंटे 26 मिनट की होगी।

    खगोलविदों के अनुसार पृथ्वी अपनी धुरी पर लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है और सूर्य की परिक्रमा करती है। इसी कारण वर्षभर सूर्य की स्थिति बदलती हुई दिखाई देती है। 21 जून को सूर्य कर्क रेखा के सबसे निकट पहुंच जाता है। चूंकि उज्जैन कर्क रेखा के करीब स्थित है, इसलिए यहां सूर्य की किरणें लगभग लंबवत पड़ती हैं। यही वजह है कि दोपहर के समय परछाई सिकुड़कर लगभग समाप्त हो जाती है।

    इस खगोलीय घटना का वैज्ञानिक महत्व भी काफी बड़ा है। जीरो शैडो डे पृथ्वी की गति, उसकी धुरी के झुकाव और सूर्य की स्थिति को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। स्कूलों, कॉलेजों और विज्ञान प्रेमियों के लिए यह दिन एक प्राकृतिक प्रयोगशाला की तरह होता है, जहां खगोलीय सिद्धांतों को प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा जा सकता है।

    वैज्ञानिकों के अनुसार 21 जून के बाद सूर्य की आभासी गति दक्षिण दिशा की ओर दिखाई देने लगेगी, जिसे दक्षिणायन कहा जाता है। इसके साथ ही उत्तरी गोलार्द्ध में दिन धीरे-धीरे छोटे और रातें लंबी होने लगेंगी। आगामी 23 सितंबर को शरद विषुव के अवसर पर दिन और रात लगभग बराबर हो जाएंगे।

    इस तरह 21 जून केवल कैलेंडर का एक दिन नहीं, बल्कि प्रकृति और ब्रह्मांड के अद्भुत संतुलन को करीब से देखने और समझने का दुर्लभ अवसर भी है।

  • MP के 81 लाख किसानों को मिलेगी 1,634 करोड़ की सौगात: पीएम किसान की 23वीं किस्त कल जारी, शिवराज बोले- खरीफ से पहले बड़ी राहत

    MP के 81 लाख किसानों को मिलेगी 1,634 करोड़ की सौगात: पीएम किसान की 23वीं किस्त कल जारी, शिवराज बोले- खरीफ से पहले बड़ी राहत


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के लाखों किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना की 23वीं किस्त शुक्रवार, 20 जून को किसानों के खातों में पहुंच जाएगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर से देशभर के किसानों के लिए 23वीं किस्त जारी करेंगे। इसके तहत मध्यप्रदेश के 81.67 लाख किसानों के खातों में 1,634 करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की जाएगी।

    शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खरीफ सीजन की शुरुआत से ठीक पहले मिलने वाली यह आर्थिक सहायता किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे बीज, खाद और अन्य कृषि कार्यों के लिए किसानों को समय पर आर्थिक मदद मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से अब तक देशभर के किसानों को 22 किस्तों में लगभग 4.28 लाख करोड़ रुपए की सहायता सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचाई जा चुकी है।

    केंद्रीय मंत्री के अनुसार 23वीं किस्त के तहत देश के करीब 9 करोड़ किसानों के खातों में 18,800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि हस्तांतरित की जाएगी। इस अवसर को खास बनाने के लिए पूरे देश में “पीएम किसान उत्सव दिवस” मनाया जाएगा। कृषि विज्ञान केंद्रों, आईसीएआर संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और पंचायत स्तर तक विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अनुमान है कि लगभग 4 करोड़ किसान विभिन्न स्थानों से प्रधानमंत्री का संबोधन सुनेंगे और कार्यक्रमों में भाग लेंगे।

    पश्चिम बंगाल के किसानों को लेकर भी शिवराज सिंह चौहान ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पहले राज्य के किसानों को योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा था, लेकिन अब वहां के 44.42 लाख किसानों को भी पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ मिलेगा। इससे छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

    कृषि मंत्री ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर दलहन खरीदी को लेकर भी संकेत दिए। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने पीएम-आशा योजना के तहत उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और गुजरात को मूंग, उड़द और मसूर की खरीदी एमएसपी पर करने की अनुमति दे दी है। मध्यप्रदेश के मामले में राज्य सरकार के साथ चर्चा जारी है और जल्द ही इस संबंध में फैसला लिया जाएगा।

    इस दौरान मानसून और अल नीनो के संभावित प्रभाव पर भी चर्चा हुई। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मध्यप्रदेश के 16 जिलों में अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए विशेष कंटीजेंसी प्लान तैयार किया जा रहा है। कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने, वैकल्पिक खेती के विकल्प उपलब्ध कराने और बेहतर बीज उपलब्ध कराने की रणनीति पर काम चल रहा है।

    उन्होंने कहा कि यदि सामान्य से कम बारिश होती है या वर्षा में लंबा अंतराल आता है, तो किसानों को नुकसान से बचाने के लिए जिला स्तर पर विशेष योजनाएं लागू की जाएंगी। साथ ही पराली प्रबंधन को लेकर भी राज्यों को पहले से आवश्यक तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

    राजनीतिक सवालों पर भी शिवराज सिंह चौहान ने अपनी शैली में जवाब दिया। कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के सत्याग्रह से जुड़े सवाल पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत।” उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

    कुल मिलाकर, पीएम किसान की 23वीं किस्त किसानों के लिए आर्थिक राहत लेकर आ रही है, वहीं सरकार खरीफ सीजन, मानसून और संभावित मौसमीय चुनौतियों से निपटने के लिए भी व्यापक तैयारी में जुटी हुई है।

  • NEET-UG 2026 के लिए हाई अलर्ट: सेंटरों पर CCTV-जैमर, डॉक्टर और टाइम डिस्प्ले की व्यवस्था, छात्रों के लिए स्पेशल ट्रेन भी चलेगी

    NEET-UG 2026 के लिए हाई अलर्ट: सेंटरों पर CCTV-जैमर, डॉक्टर और टाइम डिस्प्ले की व्यवस्था, छात्रों के लिए स्पेशल ट्रेन भी चलेगी


    मध्यप्रदेश । देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए मध्य प्रदेश में व्यापक तैयारियां की गई हैं। 21 जून को आयोजित होने वाली इस परीक्षा को लेकर जिला प्रशासन, पुलिस और रेलवे समेत सभी संबंधित विभाग हाई अलर्ट पर हैं। प्रदेश के सभी परीक्षा केंद्रों पर CCTV कैमरे और सिग्नल जैमर लगाए जा रहे हैं, ताकि किसी भी प्रकार की नकल या तकनीकी गड़बड़ी की संभावना को खत्म किया जा सके।

    राजधानी भोपाल में इस बार 13,774 परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। इसके लिए 32 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। जिला कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने सभी केंद्र प्रभारियों के साथ वन-टू-वन बैठक कर परीक्षा प्रबंधन की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि कई बार एक जैसे नाम वाले केंद्रों के कारण अभ्यर्थी भ्रमित हो जाते हैं, इसलिए केंद्रों के नाम और लोकेशन स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएं। परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के लिए दिशा-सूचक बोर्ड भी लगाए जाएंगे।

    परीक्षार्थियों को समय का सही अंदाजा रहे, इसके लिए प्रत्येक केंद्र के बाहर बड़ी डिजिटल घड़ी लगाई जाएगी। वहीं किसी छात्र की तबीयत खराब होने की स्थिति में तुरंत उपचार उपलब्ध कराने के लिए डॉक्टर और मेडिकल टीम भी तैनात रहेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा के दौरान स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    भोपाल के अलावा छिंदवाड़ा में 4,303, गुना में 1,839, विदिशा में 1,709, नर्मदापुरम में 1,283 और अशोकनगर में 865 अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल होने की संभावना है। ग्वालियर में 25 केंद्रों पर करीब 5 हजार छात्र परीक्षा देंगे। यहां बायोमैट्रिक अटेंडेंस, CCTV निगरानी और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दोपहर 1 बजे के बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

    परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने इंदौर, भोपाल और रतलाम के बीच विशेष ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन 20 जून को संचालित होगी, जिससे विभिन्न शहरों से आने वाले छात्र समय पर अपने परीक्षा केंद्र तक पहुंच सकेंगे। ट्रेन में 13 स्लीपर, 2 जनरल और 2 एसएलआर कोच सहित कुल 17 कोच लगाए जाएंगे।

    जबलपुर में पहली बार परीक्षार्थियों के लिए विशेष बस सेवा शुरू की जा रही है। यहां 23 परीक्षा केंद्रों पर 10 हजार से अधिक छात्र परीक्षा देंगे। अभिभावकों के लिए शेड, बैठने की व्यवस्था, कूलर, पंखे और अस्थायी कैंटीन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। सभी केंद्रों पर 20 जून को सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं का ट्रायल भी किया जाएगा।

    प्रशासन का कहना है कि परीक्षा की गोपनीयता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रश्नपत्रों की आवाजाही बेहद सुरक्षित तरीके से होगी। सुरक्षा व्यवस्था में वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी रहेगी और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए विशेष कंट्रोल रूम भी सक्रिय रहेगा। कुल मिलाकर NEET-UG 2026 को लेकर प्रदेश में अभूतपूर्व तैयारियां की गई हैं, ताकि लाखों छात्रों का भविष्य तय करने वाली यह परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष, सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल में संपन्न हो सके।

  • MP के खिलाड़ियों को बड़ी सौगात: पुलिस में होगी सीधी भर्ती, 10 SI और 50 आरक्षक पदों पर मिलेगा मौका

    MP के खिलाड़ियों को बड़ी सौगात: पुलिस में होगी सीधी भर्ती, 10 SI और 50 आरक्षक पदों पर मिलेगा मौका


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी सौगात दी है। अब खेल मैदान में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी हासिल करने का सुनहरा अवसर मिलेगा। प्रदेश सरकार ने पुलिस विभाग में उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सीधी भर्ती से संबंधित नियमों में संशोधन करते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी है। इसके तहत उप निरीक्षक (SI) के 10 और आरक्षक के 50 पदों पर खिलाड़ियों की सीधी भर्ती की जाएगी।

    खास बात यह है कि वर्ष 2021 के बाद पहली बार खिलाड़ियों के लिए यह भर्ती प्रक्रिया दोबारा शुरू की जा रही है। सरकार का उद्देश्य खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना और उन्हें खेल उपलब्धियों के आधार पर सरकारी सेवा में अवसर प्रदान करना है। नए नियमों के अनुसार अब यह भर्ती प्रक्रिया नियमित रूप से हर वर्ष आयोजित की जाएगी।

    संशोधित नियम 2026 के तहत उप निरीक्षक (SI) पद के लिए केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी पात्र होंगे। ओलंपिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, विश्व कप और विश्व चैंपियनशिप जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले या पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सीधी भर्ती का अवसर मिलेगा। इन प्रतियोगिताओं में स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक हासिल करने वाले खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

    वहीं आरक्षक पद के लिए पात्रता का दायरा अपेक्षाकृत व्यापक रखा गया है। राष्ट्रीय खेलों और अधिकृत राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले खिलाड़ी आरक्षक भर्ती के लिए आवेदन कर सकेंगे। राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को इस योजना का लाभ मिलेगा। इसके अलावा जो खिलाड़ी SI पद की पात्रता पूरी करते हैं, उन्हें आरक्षक पद के लिए स्वतः पात्र माना जाएगा।

    सरकार का कहना है कि नियमों में किए गए संशोधन से चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और प्रभावी बनाया गया है। इससे खिलाड़ियों को खेल उपलब्धियों का उचित सम्मान मिलेगा और युवाओं में खेलों के प्रति रुचि भी बढ़ेगी।

    प्रदेश सरकार ने इस संशोधित नियम को राजपत्र में प्रकाशित कर दिया है, जिससे यह आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। इसके साथ ही पात्रता और चयन से जुड़े विस्तृत मापदंड भी निर्धारित कर दिए गए हैं।

    उल्लेखनीय है कि हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस भर्ती व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए प्रदेश में पुलिस भर्ती बोर्ड गठित करने की घोषणा भी की है। सरकार के अनुसार आगामी तीन वर्षों में पुलिस विभाग के 21 हजार से अधिक रिक्त पदों को भरा जाएगा। इनमें से लगभग 7,500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया इसी वर्ष शुरू होने की संभावना है।

    खेल जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि यह फैसला प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक साबित होगा और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

  • मानसून की देरी से बढ़ी किसानों की मुश्किलें: खरगोन में हाईवे जाम, बड़वानी में 36 लाख की केले की फसल बर्बाद

    मानसून की देरी से बढ़ी किसानों की मुश्किलें: खरगोन में हाईवे जाम, बड़वानी में 36 लाख की केले की फसल बर्बाद


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक में हो रही देरी अब किसानों के लिए गंभीर चिंता का कारण बन गई है। प्रदेश के कई जिलों में खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है, जबकि कहीं मौसम की मार किसानों की तैयार फसलों को तबाह कर रही है। शुक्रवार को खरगोन और बड़वानी से सामने आई तस्वीरों ने किसानों की परेशानी को और उजागर कर दिया।

    खरगोन जिले में जल संकट से परेशान किसानों ने नहर का पानी छोड़ने की मांग को लेकर खंडवा-बड़ौदा हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। सुबह करीब 11:30 बजे 200 से अधिक किसान बैलगाड़ियां लेकर सड़क पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसानों का कहना है कि क्षेत्र की वेदा, कुंदा और खारक नदियां लगभग सूख चुकी हैं, जिससे खेतों में सिंचाई का संकट गहरा गया है।

    प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि मृग नक्षत्र शुरू हुए करीब दो सप्ताह होने को हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में नमी नहीं बन पा रही है। अधिकांश किसानों ने खेतों की जुताई और अन्य तैयारियां पूरी कर ली हैं, लेकिन बारिश नहीं होने के कारण बुवाई शुरू नहीं हो पा रही है। किसानों को डर है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।

    दूसरी ओर बड़वानी जिले के खड़की क्षेत्र में मौसम की बेरुखी ने दो किसान भाइयों को भारी नुकसान पहुंचाया है। तेज आंधी और बारिश के कारण अंबाराम और गंगाराम की करीब 9 एकड़ में लगी केले की तैयार फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। बाजार में बिक्री के लिए तैयार लगभग 1500 केले के पौधे जमीन पर गिर गए।

    किसानों के अनुसार इस फसल पर करीब 14 लाख रुपए की लागत आई थी, जबकि कुल नुकसान 36 लाख रुपए तक पहुंच गया है। अचानक हुए इस भारी नुकसान का सदमा किसान अंबाराम सहन नहीं कर पाए और उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल राजपुर स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। पीड़ित किसानों ने प्रशासन से फसल सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है।

    प्रदेश में कम बारिश के कारण खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें जैसे सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर की बुवाई भी प्रभावित हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सफल बुवाई के लिए जमीन में पर्याप्त नमी जरूरी है। इसके लिए कम से कम 100 मिलीमीटर बारिश की आवश्यकता होती है। ऐसे में किसानों को जल्दबाजी में बोवनी करने से बचना चाहिए, क्योंकि पर्याप्त नमी नहीं होने पर बीज खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।

    मौसम विभाग के अनुसार 1 जून से अब तक मध्य प्रदेश में सामान्य से लगभग 39 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थिति और अधिक चिंताजनक बनी हुई है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण आने वाले दिनों में कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक यदि अगले कुछ दिनों में मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो खरीफ सीजन पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। फिलहाल प्रदेशभर के किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

  • भोपाल में 24 घंटे में बदली पटवारियों की ट्रांसफर लिस्ट, 46 में से 24 के तबादले रद्द होने पर उठे सवाल

    भोपाल में 24 घंटे में बदली पटवारियों की ट्रांसफर लिस्ट, 46 में से 24 के तबादले रद्द होने पर उठे सवाल


    भोपाल । राजधानी भोपाल में पटवारियों के तबादलों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कलेक्टर कार्यालय द्वारा 15 जून को जारी स्थानांतरण आदेश में जिन 46 पटवारियों का तबादला किया गया था, उनमें से 24 पटवारियों को महज 24 घंटे के भीतर राहत मिल गई। 16 जून को जारी संशोधित सूची में इन कर्मचारियों के नाम हटा दिए गए, जिससे उनके तबादले स्वतः निरस्त हो गए। इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार, 15 जून को जारी सूची में ऐसे पटवारियों को शामिल किया गया था जो लंबे समय से एक ही तहसील या क्षेत्र में पदस्थ थे। इनमें अधिकांश कर्मचारी हुजूर और कोलार तहसीलों में पांच से आठ वर्षों से कार्यरत थे। कुछ पटवारी अपनी गृह तहसील में भी पदस्थ थे। स्थानांतरण नीति के तहत लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों को दूसरे क्षेत्र में भेजने का प्रावधान है, जिसके तहत यह कार्रवाई की गई थी।

    हालांकि अगले ही दिन कैबिनेट बैठक के बाद स्थानांतरण की समय-सीमा बढ़ने के फैसले के बीच देर रात एक संशोधित सूची जारी की गई। इस नई सूची में 24 पटवारियों के नाम हटा दिए गए। सूत्रों के अनुसार संशोधित आदेश में शामिल अधिकांश कर्मचारी भी हुजूर और कोलार क्षेत्र से जुड़े हुए थे। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि प्रभावशाली संपर्कों और राजनीतिक पहुंच के चलते कुछ कर्मचारियों ने अपने नाम सूची से हटवा लिए।

    विवाद को और हवा तब मिली जब उन नामों को भी राहत मिलने की जानकारी सामने आई, जो पूर्व में एक चर्चित मीडिया स्टिंग ऑपरेशन में सामने आ चुके थे। इनमें निधि नेमा और किशोर सिंह दांगी के नाम प्रमुख रूप से शामिल बताए जा रहे हैं। इससे पूरे मामले को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं।

    स्थानांतरण से राहत पाने वाले कर्मचारियों में कई ऐसे नाम शामिल हैं, जो वर्ष 2015 से लेकर 2022 तक लगातार एक ही क्षेत्र में पदस्थ रहे हैं। इनमें सदाशिव गौंड, नरेंद्र रैकवार, केवल सिंह कौर, रेनु पटेल, बुजकिशोर नागर, अभिषेक शर्मा, मुकुल सराठे, दीक्षा शर्मा, संदीप शर्मा, प्रियंका सिंह, सौरभ सोलंकी, प्रदीप पटेल, पूजा ठाकुर, प्रियंका दुबे और अन्य कर्मचारी शामिल हैं।

    इस मामले में राजनीतिक प्रभाव की चर्चा भी जोरों पर है। संशोधित सूची से बाहर हुए 24 पटवारियों में से 20 हुजूर तहसील और 4 कोलार क्षेत्र से जुड़े बताए जा रहे हैं। ये दोनों क्षेत्र विधायक रामेश्वर शर्मा के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। वहीं बैरसिया क्षेत्र से केवल एक नाम हटने की जानकारी सामने आई है। इसी वजह से राजनीतिक हस्तक्षेप की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।

    स्थानांतरण नीति के तहत जिले में कुल कर्मचारियों के 20 प्रतिशत से अधिक तबादले नहीं किए जा सकते। भोपाल जिले में वर्तमान में 243 पटवारी पदस्थ हैं, जिसके अनुसार अधिकतम 47 तबादले संभव हैं। पहले 46 पटवारियों के तबादले किए गए और फिर संशोधित सूची जारी होने से कुल 76 स्थानांतरण संबंधी आदेशों की स्थिति बन गई। नीति विशेषज्ञों का मानना है कि निरस्त किए गए आदेश भी प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, इसलिए नियमों के पालन पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

    इसके अलावा आदेश जारी करने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ गई है। स्थानांतरण नीति की कंडिका-42 के अनुसार सभी आदेश ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से जारी किए जाने चाहिए। जबकि 15 जून का आदेश हस्ताक्षरित स्वरूप में जारी हुआ था और 16 जून का संशोधित आदेश ई-ऑफिस से निकाला गया। इतना ही नहीं, संशोधित आदेश में पूर्व आदेश को स्पष्ट रूप से निरस्त करने का उल्लेख भी नहीं किया गया है।

    अब इस पूरे मामले के सामान्य प्रशासन विभाग तक पहुंचने और उच्चस्तरीय जांच की संभावना जताई जा रही है। प्रशासनिक हलकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजरें संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

  • मंदसौर में मुहर्रम की पारंपरिक चौकी निकली, इमाम हुसैन की शहादत को किया याद

    मंदसौर में मुहर्रम की पारंपरिक चौकी निकली, इमाम हुसैन की शहादत को किया याद


    मध्यप्रदेश । मंदसौर शहर में मुहर्रम के पावन अवसर पर बुधवार रात पारंपरिक चौकी श्रद्धा, अनुशासन और अकीदत के साथ निकाली गई। इस धार्मिक आयोजन में हजारों की संख्या में मुस्लिम समाज के लोग शामिल हुए और हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश की। पूरे मार्ग पर धार्मिक वातावरण देखने को मिला, जहां लोगों ने शांति, भाईचारे और इंसानियत के संदेश को आत्मसात किया।

    इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम विशेष महत्व रखता है। यह महीना कर्बला की उस ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है, जिसमें हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी शहादत आज भी त्याग, सब्र, साहस और इंसानियत की मिसाल मानी जाती है। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मुहर्रम के दौरान विभिन्न धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।

    मंदसौर में भी वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार ताजियों के आयोजन से पहले चौकी निकाली जाती है। बुधवार रात यह चौकी शेखा चौक क्षेत्र से प्रारंभ हुई। धार्मिक जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरता हुआ बोराबाखल, सम्राट मार्केट और घंटाघर क्षेत्र पहुंचा। देर रात लगभग 12:30 बजे मंडी गेट पर चौकी का समापन हुआ। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं का उत्साह और अनुशासन देखने लायक था।

    चौकी के दौरान अखाड़ों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक करतब लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे। युवाओं ने अपनी कला, संतुलन और शारीरिक दक्षता का शानदार प्रदर्शन किया। विभिन्न प्रकार के पारंपरिक खेल और युद्धक कलाओं से जुड़े करतबों को देखने के लिए मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। दर्शकों ने इन प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

    आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पुलिस विभाग के अधिकारी और जवान पूरे मार्ग पर तैनात रहे। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी की और यातायात सहित अन्य व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखा। सुरक्षा व्यवस्था के चलते पूरा आयोजन बिना किसी व्यवधान के संपन्न हुआ।

    मुस्लिम समाज की ओर से भी स्वयंसेवकों की विशेष टीम तैनात की गई थी। इन स्वयंसेवकों ने भीड़ प्रबंधन, श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन और अन्य व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि मुहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि त्याग, सत्य और इंसानियत के मूल्यों को याद करने का अवसर भी है।

    चौकी के सफल आयोजन के साथ शहर में धार्मिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश भी देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने इमाम हुसैन की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया और समाज में शांति, एकता तथा मानवता के मूल्यों को मजबूत करने की अपील की।

  • मंदसौर में नीट परीक्षा की तैयारियां पूरी, 4 केंद्रों पर जैमर-सीसीटीवी और बायोमेट्रिक व्यवस्था रहेगी अनिवार्य

    मंदसौर में नीट परीक्षा की तैयारियां पूरी, 4 केंद्रों पर जैमर-सीसीटीवी और बायोमेट्रिक व्यवस्था रहेगी अनिवार्य


    मध्यप्रदेश । मंदसौर जिले में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के सफल और पारदर्शी आयोजन को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। गुरुवार को कलेक्टर अदिति गर्ग ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से परीक्षा केंद्रों के एग्जाम कोऑर्डिनेटर और संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि परीक्षा का आयोजन पूरी सतर्कता, पारदर्शिता और सुगमता के साथ किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

    जिले में इस वर्ष नीट परीक्षा चार प्रमुख केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। इनमें लाल बहादुर शास्त्री उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महारानी लक्ष्मीबाई शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय और राजीव गांधी शासकीय महाविद्यालय शामिल हैं। इन केंद्रों पर कुल 1,240 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे। प्रशासन ने सभी केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।

    कलेक्टर ने बताया कि विद्यार्थियों का प्रवेश सुबह 11 बजे से शुरू होगा, जबकि परीक्षा दोपहर 2 बजे से आयोजित होगी। परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए केंद्रों पर सुचारू प्रवेश व्यवस्था, बैठने की व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अभिभावकों के लिए भी अलग वेटिंग एरिया तैयार किया जाएगा, ताकि परीक्षा केंद्रों के बाहर अनावश्यक भीड़ न हो।

    परीक्षा की सुरक्षा और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। सभी परीक्षा कक्षों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से संचालित रहेंगे और कंट्रोल रूम से उनकी लगातार निगरानी की जाएगी। इसके अलावा प्रत्येक केंद्र पर बायोमेट्रिक ई-मशीनों के माध्यम से अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित की जाएगी। किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक गड़बड़ी या नकल की संभावना को रोकने के लिए सभी केंद्रों पर जैमर लगाए जाएंगे और उनकी कार्यशीलता की पूर्व जांच भी की जाएगी।

    बैठक में यह भी तय किया गया कि परीक्षा केंद्रों के 100 मीटर के दायरे में अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। वाहन पार्किंग की व्यवस्था भी निर्धारित स्थानों पर ही की जाएगी। दोपहर 1 बजे के बाद किसी भी बाहरी व्यक्ति को परीक्षा केंद्र परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मोटरसाइकिल पेट्रोलिंग दल भी तैनात रहेगा, जो लगातार केंद्रों के आसपास निगरानी करेगा।

    स्वास्थ्य विभाग को प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर मेडिकल स्टाफ और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा विद्युत विभाग को निर्बाध बिजली आपूर्ति और पावर बैकअप सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि परीक्षा के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी बाधा उत्पन्न न हो।

    कलेक्टर अदिति गर्ग ने सभी सेंटर कोऑर्डिनेटर और अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी भी केंद्र पर संसाधनों या व्यवस्थाओं की कमी दिखाई दे तो उसकी जानकारी तत्काल जिला प्रशासन को दी जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विद्यार्थियों की सुविधा, सुरक्षा और परीक्षा की निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा सभी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। प्रशासन का लक्ष्य परीक्षा को शांतिपूर्ण, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना है।

  • रास्ते के विवाद ने लिया हिंसक रूप, बुजुर्ग महिला को घसीटा; लाठी-डंडों से हुई मारपीट का वीडियो वायरल

    रास्ते के विवाद ने लिया हिंसक रूप, बुजुर्ग महिला को घसीटा; लाठी-डंडों से हुई मारपीट का वीडियो वायरल


    मध्यप्रदेश । सीहोर शहर में गणेश मंदिर के पास रास्ते और जमीन के अधिकार को लेकर हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। दो पक्षों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते मारपीट तक पहुंच गया, जिसमें लाठी-डंडे, लात-घूंसे और धक्का-मुक्की का दौर चला। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने इलाके में सनसनी फैला दी है।

    जानकारी के अनुसार, विवाद एक छोटे से जमीन के टुकड़े और उससे जुड़े रास्ते के उपयोग को लेकर शुरू हुआ था। दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई, लेकिन कुछ ही देर में मामला इतना बढ़ गया कि लोग एक-दूसरे पर हमला करने लगे। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि विवाद के दौरान किसी ने भी संयम नहीं बरता और देखते ही देखते पूरा क्षेत्र रणक्षेत्र में तब्दील हो गया।

    वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि दोनों पक्षों के लोग एक-दूसरे पर लाठी-डंडों और लात-घूंसों से हमला कर रहे हैं। मारपीट के दौरान महिलाओं और बुजुर्गों को भी नहीं बख्शा गया। वीडियो में एक बुजुर्ग महिला को घसीटते हुए देखा जा सकता है, जबकि कुछ लोग उन्हें बचाने का प्रयास करते नजर आते हैं। इस दौरान महिलाओं की चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल साफ दिखाई देता है।

    घटना के दौरान कई लोगों को चोटें आई हैं। वीडियो में एक युवक जमीन पर बेसुध अवस्था में पड़ा दिखाई देता है, जबकि आसपास मौजूद लोग हंगामे को देखते रहते हैं। कुछ लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन स्थिति इतनी तनावपूर्ण थी कि विवाद को तुरंत शांत नहीं कराया जा सका।

    सबसे चिंताजनक बात यह रही कि बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर मौजूद होने के बावजूद झगड़ा रोकने के बजाय अपने मोबाइल फोन से वीडियो बनाते रहे। इससे मारपीट का सिलसिला और लंबा चलता रहा। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने भी इस घटना पर चिंता जताई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद काफी समय से चल रहा था और दोनों पक्षों के बीच पहले भी तनातनी की स्थिति बन चुकी थी। हालांकि इस बार मामला पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस को जानकारी दी गई, जिसके बाद मामले की जांच शुरू की गई।

    पुलिस अब वायरल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान की जा रही है और जांच के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे विवादों को समय रहते सुलझाने की आवश्यकता है, ताकि छोटी-छोटी बातों पर हिंसा की नौबत न आए।

    फिलहाल क्षेत्र में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन घटना के बाद इलाके में तनाव और चर्चा का माहौल बना हुआ है। पुलिस मामले पर नजर बनाए हुए है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।