Category: Madhya Pradesh

  • तिलक विवाद गरमाया: Bhopal में Lenskart स्टाफ को तिलक लगाकर जताया विरोध, बोले-‘अपमान नहीं सहेंगे’

    तिलक विवाद गरमाया: Bhopal में Lenskart स्टाफ को तिलक लगाकर जताया विरोध, बोले-‘अपमान नहीं सहेंगे’


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश की राजधानी Bhopal के न्यू मार्केट रोशनपुरा इलाके में Lenskart के शोरूम के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ। हिंदू उत्सव समिति के कार्यकर्ताओं ने कथित ड्रेस कोड विवाद को लेकर शोरूम का घेराव किया और कर्मचारियों को तिलक लगाकर तथा मंत्रोच्चार के साथ कलावा बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया।

     “सनातन प्रतीकों का अपमान नहीं सहेंगे”
    हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि देश में तिलक, कलावा और बिंदी जैसे धार्मिक प्रतीकों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी कंपनी ने इन पर रोक लगाने की कोशिश की, तो उसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने यहां तक कहा कि संगठन Lenskart के बहिष्कार की अपील कर रहा है और जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

     कर्मचारियों का दावा- “कोई रोक नहीं”
    प्रदर्शन के बीच शोरूम कर्मचारियों ने इन आरोपों को खारिज किया। एक कर्मचारी ने बताया कि उन्हें कभी भी तिलक या कलावा पहनने से नहीं रोका गया। उनका कहना है कि नवरात्रि जैसे अवसरों पर वे खुद इन धार्मिक प्रतीकों के साथ काम पर आते रहे हैं। कर्मचारियों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर चल रही बातें उनकी व्यक्तिगत अनुभव से मेल नहीं खातीं और उन्हें कंपनी की ओर से कोई दबाव महसूस नहीं हुआ।

    सोशल मीडिया से शुरू हुआ पूरा विवाद
    दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित पॉलिसी डॉक्यूमेंट से हुई। इसमें दावा किया गया कि कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से रोका गया है, जबकि हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई है। इसी मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और कई लोगों ने इसे भेदभावपूर्ण बताया।

     ‘ग्रूमिंग गाइड’ पर भी उठे सवाल
    सोशल मीडिया पर एक कथित ‘ग्रूमिंग गाइड’ भी वायरल हुई, जिसमें महिला कर्मचारियों के लिए बिंदी और क्लचर पर पाबंदी की बात कही गई थी। साथ ही कलावा या रिस्ट बैंड पर भी रोक का दावा किया गया।
    हालांकि, इन दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इससे विवाद और गहरा गया।

    कंपनी की सफाई
    विवाद बढ़ने के बाद Peyush Bansal ने सफाई देते हुए कहा कि कंपनी सभी धर्मों और उनकी मान्यताओं का सम्मान करती है। कर्मचारियों को अपने धार्मिक प्रतीक पहनने की पूरी स्वतंत्रता है।
    इसके बावजूद प्रदर्शन कर रहे संगठन कंपनी के जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आए और उन्होंने विरोध जारी रखने की बात कही है।

  • MP में पहली बार ‘वॉर्म नाइट’ का अलर्ट, रातें भी होंगी गर्म, कई शहरों में दिन का पारा 42 डिग्री के पार

    MP में पहली बार ‘वॉर्म नाइट’ का अलर्ट, रातें भी होंगी गर्म, कई शहरों में दिन का पारा 42 डिग्री के पार

    भोपाल। मध्य प्रदेश में इस सीजन पहली बार ‘वॉर्म नाइट’ की स्थिति बनने जा रही है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मंगलवार रात भोपाल सहित 9 शहरों में रात के समय भी गर्मी का असर बना रहेगा। वहीं, डिंडौरी जिले में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर समेत प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में दिन का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है।

    इन शहरों में रात भी देगी गर्मी का एहसास

    मंगलवार रात जिन शहरों में ‘वॉर्म नाइट’ का अलर्ट जारी किया गया है, उनमें भोपाल, सीहोर, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला और बालाघाट शामिल हैं। इससे पहले रविवार और सोमवार की रात भी भोपाल, छिंदवाड़ा, मंडला और नर्मदापुरम में गर्म रात दर्ज की गई थी।

    क्या होती है ‘वॉर्म नाइट’ की स्थिति?
    मौसम विभाग के अनुसार, ‘वॉर्म नाइट’ तब मानी जाती है जब रात का न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी अधिक हो। यदि यह तापमान सामान्य से 4.5 से 6.4 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो और दिन का तापमान 40 डिग्री या उससे ऊपर रहे, तो ऐसी स्थिति बनती है। यदि रात का तापमान सामान्य से 6.4 डिग्री से ज्यादा बढ़ जाए, तो उसे ‘सीवियर वॉर्म नाइट’ कहा जाता है। फिलहाल प्रदेश में ऐसी स्थिति नहीं बनी है।

    खजुराहो सबसे ज्यादा गर्म, 43°C पहुंचा पारा
    सोमवार को भी प्रदेश के कई इलाकों में भीषण गर्मी रही। छतरपुर के खजुराहो में सबसे अधिक 43 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। दतिया में 42.3 डिग्री, रतलाम और सीधी में 42.2 डिग्री तापमान रहा। इसके अलावा रीवा और श्योपुर में 42 डिग्री, रायसेन में 41.6 डिग्री, नौगांव में 41.5 डिग्री और नरसिंहपुर में 41.4 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के प्रमुख शहरों में ग्वालियर सबसे गर्म रहा, जहां पारा 42.5 डिग्री तक पहुंचा। भोपाल में 39.8 डिग्री, इंदौर और उज्जैन में 39.5 डिग्री तथा जबलपुर में 38.5 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।

    दिन में बादल, कहीं बारिश और गरज-चमक

    रविवार और सोमवार को प्रदेश के कई जिलों में मौसम बदला हुआ नजर आया। खरगोन, इंदौर, सीहोर, सागर, अशोकनगर, आगर-मालवा, नर्मदापुरम, गुना, सतना, मुरैना, हरदा, खंडवा, बड़वानी, उज्जैन और बैतूल में बारिश के साथ गरज-चमक देखने को मिली। भोपाल में सुबह देर से धूप निकली।

    मौसम में बदलाव की वजह क्या है?

    पिछले तीन दिनों से प्रदेश के पूर्वी हिस्से में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन सक्रिय है, जिसके कारण बादल छाए रहे और कुछ हिस्सों में आंधी-बारिश भी हुई। मौसम विभाग के अनुसार, 23 अप्रैल को पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो सकता है, हालांकि इसका असर मध्य प्रदेश में सीमित रहने की संभावना है।

  • मप्र के मुख्यमंत्री आज तमिलनाडु के चुनावी दौरे पर, भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में करेंगे प्रचार

    मप्र के मुख्यमंत्री आज तमिलनाडु के चुनावी दौरे पर, भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में करेंगे प्रचार


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज मंगलवार को तमिलनाडु के एक दिवसीय चुनावी दौरे पर रहेंगे। वे तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करेंगे।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, डॉ. मोहन यादव दोपहर 1:00 बजे भोपाल से कोयंबटूर के लिए रवाना होंगे और वहां से रासिपुरम विधानसभा क्षेत्र पहुंचकर पार्टी की बैठक लेंगे और स्थानीय प्रत्याशी के समर्थन में कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। इसके बाद वे सायं 4:30 बजे अविनाशी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी डॉ. एल. मुरूगन के समर्थन में चुनाव प्रचार करेंगे। वे यहां जनसभा को संबोधित कर पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों से वोट की अपील करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव सायं 6:15 बजे कोयंबटूर से भोपाल के लिए वापस रवाना होंगे।

  • मप्रः ग्वालियर के शक्ति दीदी नवाचार को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार

    मप्रः ग्वालियर के शक्ति दीदी नवाचार को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में महिला सशक्तिकरण की नई इबारत लिखने वाले “शक्ति दीदी” नवाचार को अब प्रदेश स्तर पर बड़ी पहचान मिलने जा रही है। राज्य शासन ने इस अनूठी पहल को “मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार” के लिए चयनित किया है।

    आज मंगलवार को भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासनिक अकादमी में आयोजित भव्य समारोह में ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के तहत कलेक्टर रुचिका चौहान, सहायक आपूर्ति अधिकारी सौरभ जैन और सहायक संचालक (महिला एवं बाल विकास) राहुल पाठक को संयुक्त रूप से एक लाख रुपये की नकद राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे।

    जनसम्पर्क अधिकारी हितेन्द्र सिंह भदौरिया ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्वालियर जिले को यह पुरस्कार “सामाजिक समावेश एवं सशक्तिकरण” कैटेगरी में दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुसार, समाज की अंतिम पंक्ति की महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कलेक्टर रुचिका चौहान ने 2 जनवरी 2025 को इस नवाचार का आगाज़ किया था।

    पेट्रोल पंपों पर कमान संभाल रहीं ‘शक्ति दीदियाँ’

    उन्होंने बताया कि “शक्ति दीदी” नवाचार के तहत जिले की ऐसी महिलाओं को चुना गया जो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर थीं, अपनों द्वारा उपेक्षित थीं या विधवा थीं। जिला प्रशासन ने इन महिलाओं को पेट्रोल पंपों पर ‘फ्यूल डिलीवरी वर्कर’ के रूप में सम्मानजनक रोजगार दिलाया। पिछले साल 2 जनवरी 2025 को महज पांच महिलाओं से शुरू हुआ यह कारवां मौजूदा अप्रैल माह तक 112 “शक्ति दीदियों” तक पहुँच गया है। शुरुआत में झिझक रहे पेट्रोल पंप संचालक अब इन महिलाओं की मेहनत और ईमानदारी देखकर स्वयं प्रशासन से “शक्ति दीदी” की मांग कर रहे हैं।

    शक्ति दीदियों की सुरक्षा व सुविधा का पूरा ध्यान

    जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, “शक्ति दीदी” नवाचार के तहत जिला प्रशासन द्वारा जरूरतमंद महिलाओं को पेट्रोल पंपों पर केवल सम्मानजनक रोजगार ही नहीं दिलाया गया है बल्कि उनकी सुरक्षा व सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने शक्ति दीदी नवाचार के लिये एक वॉट्सएप ग्रुप तैयार कराया है, जिस पर जिला प्रशासन, पुलिस, पेट्रो पंप के संचालक एवं शक्ति दीदी जुड़ी हैं। जिस पर शक्ति दीदी अपनी समस्याएं बता सकती हैं। साथ ही प्रशासनिक अधिकारी व संबंधित पुलिस थाने की पुलिस भी पेट्रोल पंपों पर लगातार गश्त कर शक्ति दीदियों को भरोसा दिलाती हैं कि आप सब बेखौफ होकर अपना काम करें। हम सब आपकी सुरक्षा के लिये 24 घंटे सजग हैं। पेट्रोल पंप पर महिला फ्यूल डिलेवरी वर्कर की ड्यूटी का समय प्रात: 9 बजे से सायंकाल 5 बजे तक रखा गया है।

    शक्ति दीदियों का कहना है – हमें सम्मान के साथ मिला रोजगार

    “शक्ति दीदी” बनी महिलाओं का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिले को महिला कलेक्टर देकर उनके दु:ख-दर्द को समझने वाला सहारा प्रदान किया है। महिलाएं कहती हैं कि इस नवाचार ने न केवल उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि समाज में हमारा मान-सम्मान भी बढ़ाया है।

  • आस्था पर शराब का साया, नर्मदा तट पर अवैध कारोबार से उठे बड़े सवाल

    आस्था पर शराब का साया, नर्मदा तट पर अवैध कारोबार से उठे बड़े सवाल


    मंडला । मध्य प्रदेश के मंडला में बहने वाली नर्मदा नदी के किनारे आज एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है जो आस्था और व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े करती है। यह वही पवित्र धरा है जहां हर दिन श्रद्धालु पूजा अर्चना और शांति की तलाश में पहुंचते हैं लेकिन अब इसी आस्था के केंद्र के आसपास अवैध शराब का कारोबार खुलेआम फलता फूलता नजर आ रहा है।

    कभी इस क्षेत्र की पवित्रता को बनाए रखने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट घोषणा की थी कि नर्मदा तट से पांच किलोमीटर के दायरे में शराब की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इस फैसले का उद्देश्य था कि आस्था और धार्मिक मर्यादाओं की रक्षा हो सके और नर्मदा किनारे का वातावरण स्वच्छ और पवित्र बना रहे। लेकिन आज यह घोषणा सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आती है।

    जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। नगर के पान ठेले छोटे दुकानों होटल और ढाबों पर खुलेआम शराब बेची जा रही है। न केवल बिक्री बल्कि लोगों को बैठाकर वहीं शराब पिलाई जा रही है। यह सब इतनी बेखौफी से हो रहा है जैसे नियम कानून का कोई अस्तित्व ही न हो।

    सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन को यह सब दिखाई नहीं दे रहा या फिर जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अवैध कारोबार लंबे समय से चल रहा है और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं ही की जाती हैं। कभी कभार छापेमारी होती है कुछ बोतलें जब्त होती हैं और फिर सब कुछ पहले जैसा शुरू हो जाता है।

    यह मामला सिर्फ कानून के उल्लंघन तक सीमित नहीं है बल्कि आस्था के साथ भी सीधा खिलवाड़ है। मंडला की पहचान ही नर्मदा तट की पवित्रता से जुड़ी हुई है। लोग यहां दूर दूर से आते हैं मोक्ष और शांति की कामना लेकर लेकिन जब इसी पवित्र स्थान पर शराब का कारोबार खुलेआम हो तो यह श्रद्धा को ठेस पहुंचाने वाला है।

    स्थिति यह दर्शाती है कि कहीं न कहीं सिस्टम कमजोर पड़ रहा है या फिर अवैध कारोबार करने वालों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें किसी का डर नहीं रह गया है। यह भी सवाल उठता है कि जिम्मेदारी किसकी है प्रशासन की स्थानीय पुलिस की या फिर समाज की जो सब कुछ देखकर भी चुप है।

    आज जरूरत सिर्फ खबर दिखाने की नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई की है। उन वादों को जमीन पर उतारने की है जो कभी जनता से किए गए थे। अगर समय रहते इस पर सख्ती नहीं की गई तो वह दिन दूर नहीं जब आस्था की यह नगरी अपनी पहचान खोने लगेगी।

    यह मामला केवल एक अवैध कारोबार का नहीं बल्कि आस्था कानून और व्यवस्था तीनों की परीक्षा है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार तंत्र इस चुनौती का सामना कैसे करता है और क्या नर्मदा तट की पवित्रता को फिर से स्थापित किया जा सकेगा या नहीं।

  • सिंगरौली में 15 करोड़ की दिनदहाड़े डकैती, सुरक्षा में 3 बड़ी चूक से बदमाश हुए फरार

    सिंगरौली में 15 करोड़ की दिनदहाड़े डकैती, सुरक्षा में 3 बड़ी चूक से बदमाश हुए फरार


    सिंगरौली । मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में हुई 15 करोड़ रुपए की सनसनीखेज बैंक डकैती ने सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। बैढ़न स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा में दिनदहाड़े पांच हथियारबंद बदमाश घुसे और करीब 10 किलो सोना व 20 लाख रुपए नकद लूटकर फरार हो गए। इस वारदात ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है और पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी कमलेश कुमार को गिरफ्तार किया है, जिसे आठ दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। हालांकि लूट का पूरा माल अभी बरामद नहीं हो सका है। पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी फंटूश उर्फ ननकी बिहार के नालंदा जिले का रहने वाला है जबकि अन्य आरोपी झारखंड और अन्य क्षेत्रों से जुड़े हैं। फरार आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की 10 विशेष टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।

    डकैती की घटना के पीछे सबसे बड़ी बात तीन गंभीर लापरवाहियां मानी जा रही हैं। पहली यह कि बैंक में शुरुआत से ही कोई सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं था। वर्ष 2018 में खुली इस शाखा में कभी गार्ड नहीं रखा गया। बैंक प्रबंधन ने खर्च कम करने के नाम पर यह व्यवस्था खत्म कर दी थी। इससे बदमाशों को वारदात को अंजाम देने में आसानी मिली।

    दूसरी बड़ी चूक पुलिस की प्रतिक्रिया में देरी को लेकर सामने आई है। घटना की सूचना मिलने के बावजूद पुलिस मौके पर करीब 20 मिनट की देरी से पहुंची जबकि थाना बैंक से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है। इस देरी का फायदा उठाकर आरोपी आसानी से फरार हो गए।

    तीसरी और अहम लापरवाही यह रही कि शहर के चेक पॉइंट्स को समय पर अलर्ट नहीं किया गया। सीसीटीवी फुटेज में बदमाशों को बाइक से शहर से बाहर जाते हुए देखा गया लेकिन वे मस्जिद तिराहा और अंबेडकर चौक जैसे प्रमुख चेक पॉइंट पार कर गए और किसी ने उन्हें नहीं रोका। इसके बाद वे बीजपुर रोड होते हुए छत्तीसगढ़ सीमा में प्रवेश कर गए।

    घटना के बाद बैंक के सुरक्षा इंतजामों की पोल और भी खुली जब यह सामने आया कि बैंक में लगा अलार्म सिस्टम भी सिर्फ औपचारिकता भर था। अलार्म बजने पर भी कोई त्वरित मदद नहीं मिलती क्योंकि वह पुलिस कंट्रोल रूम से जुड़ा नहीं है।

    इस बीच गिरफ्तार आरोपी कमलेश कुमार को रेलवे स्टेशन पर शक के आधार पर पकड़ा गया। उसके पास से 15 लाख 20 हजार रुपए और 61 ग्राम सोना बरामद हुआ। पूछताछ में उसने पहले पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की लेकिन सख्ती के बाद उसने डकैती में शामिल होने की बात कबूल कर ली।

    पुलिस अब अन्य फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है और पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई कर रही है। इस घटना ने न केवल बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था बल्कि पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • रिश्तों पर भारी पड़ा पैसा: बड़वानी के पिछोड़ी में बेटे ने पिता के सिर में मारी गोली

    रिश्तों पर भारी पड़ा पैसा: बड़वानी के पिछोड़ी में बेटे ने पिता के सिर में मारी गोली

    बड़वानी । मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले से एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है जिसने पिता-पुत्र के पवित्र रिश्ते को लहूलुहान कर दिया है। जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम पिछोड़ी में एक कलयुगी बेटे ने महज चंद रुपयों के लालच और विवाद में अपने ही पिता के सिर में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। जिस पिता ने बेटे के बेहतर भविष्य के लिए अपनी जमा-पूंजी दांव पर लगा दी उसी बेटे ने आवेश में आकर पिता की जीवनलीला समाप्त कर दी। सोमवार 20 अप्रैल की दोपहर हुई इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत और मातम का माहौल है।

    मिली जानकारी के अनुसार पुलिस को सोमवार दोपहर फोन के जरिए सूचना मिली थी कि ग्राम पिछोड़ी में एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस की टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने मौके का बारीकी से निरीक्षण किया और शव का पंचनामा तैयार कर मामले की जांच शुरू की। इस दौरान पुलिस को जो सच्चाई पता चली उसने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। इस जघन्य हत्याकांड की चश्मदीद गवाह कोई और नहीं बल्कि मृतक की पत्नी और आरोपी की मां गौरी बाई हैं।

    गौरी बाई ने रोते हुए पुलिस को बताया कि उनके 32 वर्षीय बेटे चंदन बडोले ने अपने 58 वर्षीय पिता जगन बडोले की हत्या की है। मां के अनुसार पिता और पुत्र के बीच पिछले कुछ समय से रुपयों के लेनदेन को लेकर तनाव चल रहा था। सोमवार को भी इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ। देखते ही देखते बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों के बीच मारपीट होने लगी। इसी बीच गुस्से में आपा खो चुके चंदन ने पास रखी पिस्तौल निकाली और सीधे अपने पिता के सिर पर गोली दाग दी। गोली लगते ही जगन बडोले लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

    शहर कोतवाली थाना प्रभारी बलजीत सिंह बिसेन ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती जांच और मृतक की पत्नी के बयानों से यह स्पष्ट है कि विवाद की मुख्य वजह पैसा थी। मृतक जगन बडोले ने पहले भी अपने बेटे चंदन को वेल्डिंग की दुकान चलाने और अन्य जरूरतों के लिए दो लाख रुपये दिए थे। बावजूद इसके चंदन की मांगें कम नहीं हो रही थीं। वह लगातार और पैसों के लिए अपने पिता पर दबाव बना रहा था। सोमवार को जब पिता ने और पैसे देने से मना किया तो आरोपी ने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दे दिया।

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा जहाँ की प्रारंभिक रिपोर्ट में भी सिर पर गंभीर चोट और गोली लगने के कारण मौत होने की पुष्टि हुई है। थाना प्रभारी बिसेन ने बताया कि आरोपी चंदन बडोले वारदात को अंजाम देने के बाद से ही फरार है। पुलिस की अलग-अलग टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और जल्द ही आरोपी को सलाखों के पीछे भेजने का दावा किया है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब रिश्तों के बीच लालच की दीवार खड़ी होती है तो वहां केवल खून और पछतावा ही शेष बचता है।

  • महिला आरक्षण को लेकर सियासी संग्राम, भोपाल में CM मोहन यादव का तीखा वार, हजारों बहनों ने निकाली पदयात्रा

    महिला आरक्षण को लेकर सियासी संग्राम, भोपाल में CM मोहन यादव का तीखा वार, हजारों बहनों ने निकाली पदयात्रा

    भोपाल । भोपाल की सड़कों पर रविवार को महिला आक्रोश और राजनीतिक संदेशों का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला जब ‘जन-आक्रोश महिला पदयात्रा’ में हजारों की संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों को कुचलने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और जरूरत पड़ी तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बहनों की इच्छा और अधिकार के खिलाफ जाने वालों को इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि महिला आरक्षण बिल का विरोध करना देश की आधी आबादी के साथ अन्याय है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो नेता महिलाओं के अधिकार की बात करते हैं वही अब उनके हक को कमजोर करने में लगे हैं। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से विपक्षी नेताओं पर आरोप लगाया कि उन्होंने महिलाओं की आकांक्षाओं को दबाने का काम किया है।

    सीएम डॉ. यादव ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारतीय समाज की परंपरा हमेशा से नारी शक्ति के सम्मान पर आधारित रही है। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि समाज सुधारकों ने महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है और आज भी वही विचारधारा आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बिना नारी शक्ति के किसी भी समाज का विकास संभव नहीं है और सरकार हमेशा महिलाओं के साथ खड़ी है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने हजारों महिलाओं का अभिवादन किया और कहा कि यह आक्रोश केवल विरोध नहीं बल्कि अपने अधिकारों के लिए उठी आवाज है जिसे पूरे देश तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि महिलाएं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रही हैं और यह देश की शक्ति का प्रतीक है।

    इस मौके पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने भी विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि महिला आरक्षण कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि महिलाओं का अधिकार था जिसे जानबूझकर रोका गया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका इस मामले में निराशाजनक रही है और यह कदम महिलाओं के सपनों पर चोट के समान है।

    कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने हाथों में स्लोगन लिखे पोस्टर लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। कई जगहों पर नारों और गीतों के माध्यम से महिलाओं ने अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। पूरे आयोजन के दौरान राजधानी की सड़कों पर एक अलग ही माहौल देखने को मिला जहां सामाजिक और राजनीतिक चेतना का संगम नजर आया।

    मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि सरकार हर स्तर पर महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और आगे भी इस दिशा में मजबूत कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा और अन्य मंचों पर महिलाओं के अधिकारों की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा। पूरा आयोजन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि महिलाओं की शक्ति और उनके अधिकारों की अभिव्यक्ति के रूप में सामने आया, जिसने भोपाल की सड़कों को जनआंदोलन के रंग में रंग दिया।

  • भोपाल और जबलपुर जेल में दो बंदियों ने फांसी लगाई सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    भोपाल और जबलपुर जेल में दो बंदियों ने फांसी लगाई सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की दो प्रमुख सेंट्रल जेलों में कैदियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाओं ने जेल प्रशासन की व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक घटना भोपाल केंद्रीय जेल की है और दूसरी जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय जेल की है। दोनों ही मामलों में पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

    भोपाल सेंट्रल जेल में हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक बंदी ने आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान गुड्डू आदिवासी के रूप में हुई है जो रायसेन जिले के बाड़ी क्षेत्र का रहने वाला था। वह वर्ष 2017 से जेल में बंद था और जेल परिसर की गौशाला में गौसेवक के रूप में कार्य कर रहा था। जानकारी के अनुसार उसने जेल परिसर में स्थित गौशाला क्षेत्र में पेड़ पर रस्सी का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। घटना की जानकारी मिलते ही जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए गांधी मेडिकल कॉलेज की मर्चुरी में भेजा गया है। गांधीनगर थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर आत्महत्या के कारण स्पष्ट नहीं हो पाए हैं।

    दूसरी घटना जबलपुर केंद्रीय जेल की है जहां एक विचाराधीन बंदी ने अस्पताल वार्ड के शौचालय में तौलिये से फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान गुड्डू उर्फ राजा विश्वकर्मा के रूप में हुई है जो संजीवनी नगर क्षेत्र का निवासी था। उसे वर्ष 2024 में विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार कर जेल में बंद किया गया था। जानकारी के अनुसार वह लंबे समय से शुगर और अन्य बीमारियों से भी पीड़ित था। घटना के समय वह जेल के अस्पताल खंड में भर्ती था और वहीं उसने यह कदम उठाया। जेल स्टाफ ने तुरंत डॉक्टर को बुलाया लेकिन जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया।

    घटना के बाद जेल प्रशासन ने संबंधित थाने को सूचना दी और सिविल लाइन थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। उप जेलर के अनुसार बंदी की स्थिति पर निगरानी रखी जा रही थी लेकिन अचानक हुई इस घटना ने सभी को चौंका दिया।

    दोनों मामलों में आत्महत्या के पीछे के कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हैं। पुलिस और जेल प्रशासन सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं जिनमें मानसिक स्थिति स्वास्थ्य समस्याएं और जेल के भीतर की परिस्थितियां शामिल हैं। लगातार दो जेलों में ऐसी घटनाएं सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों की निगरानी प्रणाली पर गंभीर बहस शुरू हो गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जेलों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और नियमित काउंसलिंग की व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • खेल का महाकुंभ उज्जैन में सम्पन्न, फिरोजिया ट्रॉफी फाइनल में CM की बड़ी घोषणाएं

    खेल का महाकुंभ उज्जैन में सम्पन्न, फिरोजिया ट्रॉफी फाइनल में CM की बड़ी घोषणाएं


    उज्जैन । उज्जैन शहर में आयोजित फिरोजिया ट्रॉफी 2026 का फाइनल मुकाबला बेहद रोमांच और उत्साह के बीच संपन्न हुआ। क्षीर सागर मैदान पर खेले गए इस फाइनल मैच में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया और दर्शकों को अंत तक रोमांच से बांधे रखा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

    कार्यक्रम में देर रात तक भारी संख्या में खेल प्रेमी मैदान में मौजूद रहे, जिससे शहर में क्रिकेट और खेल के प्रति गहरा जुनून देखने को मिला। फाइनल मुकाबला 12 से 19 अप्रैल तक चली इस प्रतियोगिता का समापन था, जिसमें दोनों टीमों के बीच जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर विजेता टीम के लिए 1 लाख रुपये और उपविजेता टीम के लिए 51 हजार रुपये की नगद राशि देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करते हैं और उनमें अनुशासन तथा टीम भावना को मजबूत बनाते हैं।

    सीएम ने उज्जैन में खेल सुविधाओं के विस्तार की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि नानाखेड़ा स्टेडियम, माधव नगर मैदान और दशहरा मैदान का आधुनिकरण किया जाएगा। इसके साथ ही क्षीरसागर मैदान को भी एक आधुनिक खेल स्टेडियम के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

    यह प्रतियोगिता पिछले 21 वर्षों से आयोजित की जा रही है और इसका आयोजन सांसद अनिल फिरोजिया द्वारा उनके स्वर्गीय पिता भूरेलाल फिरोजिया की स्मृति में किया जाता है। इस बार आयोजन में महिला क्रिकेट मैच और मातृशक्ति सम्मान समारोह भी आकर्षण का केंद्र रहे, जिससे कार्यक्रम को सामाजिक और सांस्कृतिक आयाम भी मिला।

    फाइनल मुकाबले के बाद पूरे आयोजन स्थल पर उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। खिलाड़ियों के प्रदर्शन और दर्शकों की भारी भागीदारी ने यह साबित किया कि उज्जैन में खेल संस्कृति लगातार मजबूत हो रही है।