Category: Madhya Pradesh

  • गलत सूचना के आधार पर कार्रवाई का आरोप: कटनी स्टेशन पर मानव तस्करी शक में उतारे गए बच्चों पर विवाद

    गलत सूचना के आधार पर कार्रवाई का आरोप: कटनी स्टेशन पर मानव तस्करी शक में उतारे गए बच्चों पर विवाद


    कटनी। मध्यप्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर 167 मुस्लिम बच्चों और उनके 8 शिक्षकों को मानव तस्करी के संदेह में ट्रेन से उतारे जाने का मामला अब बड़ा विवाद बन गया है। यह घटना 11 अप्रैल 2026 की बताई जा रही है, जब पटना–पुणे एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 17609) के स्लीपर कोच S2, S3 और S4 में यात्रा कर रहे बच्चों को अचानक रोक लिया गया। इस कार्रवाई के बाद मामला न केवल प्रशासनिक स्तर पर, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय भी बन गया है।

    मानव तस्करी के संदेह में रोकी गई ट्रेन, बच्चों को उतारा गया

    जानकारी के अनुसार, ट्रेन जब शाम करीब 6:30 बजे कटनी जंक्शन पर पहुंची, तभी पुलिस और संबंधित एजेंसियों ने मानव तस्करी की आशंका जताते हुए कार्रवाई की। इस दौरान 6 से 15 वर्ष की उम्र के लगभग 167 बच्चों को उनके 8 शिक्षकों के साथ ट्रेन से उतार लिया गया। इसके बाद सभी को कटनी और जबलपुर स्थित बाल कल्याण समिति (CWC) केंद्रों में भेज दिया गया।

    मुस्लिम परिषद का आरोप बिना ठोस जांच हुई कार्रवाई

    इस घटना को लेकर मुस्लिम परिषद ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिषद का कहना है कि पूरी कार्रवाई बिना किसी ठोस साक्ष्य और पर्याप्त प्रारंभिक जांच के की गई, और तुरंत एफआईआर दर्ज कर दी गई। परिषद ने इसे गलत सूचना पर आधारित कार्रवाई बताते हुए कहा कि इससे बच्चों और उनके परिजनों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ी।

    बच्चों के वैध दस्तावेज होने का दावा

    प्रतिनिधिमंडल ने यह भी दावा किया है कि सभी बच्चों के पास वैध आरक्षित टिकट मौजूद थे और वे अपने परिजनों की लिखित सहमति के साथ शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से महाराष्ट्र के लातूर जा रहे थे। परिषद के अनुसार, बच्चों की यात्रा पूरी तरह कानूनी और शैक्षणिक उद्देश्य से जुड़ी थी।

    ‘साजिश’ का आरोप, पहले भी रोके जाने का दावा

    मुस्लिम परिषद ने अपने ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया है कि यह पूरी घटना एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकती है। परिषद का कहना है कि शंभू रजत नामक व्यक्ति ने इससे पहले भी इन बच्चों को पटना, मिर्जापुर और सतना रेलवे स्टेशनों पर रोकने का प्रयास किया था, लेकिन वहां के अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें आगे यात्रा की अनुमति दे दी थी।

    प्रतिनिधिमंडल की मांग बच्चों की सुरक्षित वापसी

    इस मामले को लेकर मुस्लिम समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने मऊगंज के कांग्रेस विधायक राहुल सिंह से मुलाकात की और प्रशासनिक कार्रवाई पर नाराजगी जताई। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि सभी बच्चों को या तो सम्मानपूर्वक उनके घरों तक वापस भेजा जाए या फिर उन्हें उनके मदरसों तक सुरक्षित पहुंचाया जाए।

    मामला बढ़ा, प्रशासन पर निगाहें

    घटना के बाद से ही प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। वहीं, दूसरी ओर बाल कल्याण समितियों में रखे गए बच्चों की स्थिति को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। मामला अब केवल एक सुरक्षा कार्रवाई न रहकर सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है, जिस पर सभी पक्षों की नजर बनी हुई है।

  • स्टेट हाईवे-22 पर अवरोध: Madhya Pradesh में पेड़ गिरने से ट्रैफिक रुका, चालकों ने अपनाया वैकल्पिक रास्ता

    स्टेट हाईवे-22 पर अवरोध: Madhya Pradesh में पेड़ गिरने से ट्रैफिक रुका, चालकों ने अपनाया वैकल्पिक रास्ता


    नरसिंहपुर। मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में मंगलवार को उस समय यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई जब स्टेट हाईवे 22 पर करेली-गाडरवारा मार्ग के बीच करेली शुगर मिल के पास एक विशाल इमली का पेड़ अचानक सड़क पर गिर गया। इस घटना के चलते मुख्य मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
    अचानक गिरे पेड़ से हाईवे पर थमा यातायात
    जानकारी के अनुसार, यह घटना दिन के समय हुई जब सड़क पर वाहनों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी थी। तभी अचानक सड़क किनारे खड़ा विशाल इमली का पेड़ गिरकर सीधे मार्ग के बीचोंबीच आ गिरा। पेड़ के गिरते ही स्टेट हाईवे 22 पर पूरी तरह से यातायात रुक गया और स्थिति जाम में बदल गई।
    एक किलोमीटर लंबी वाहनों की कतार, यात्रियों को परेशानी
    पेड़ गिरने के कारण सड़क के दोनों ओर भारी वाहनों की लगभग एक किलोमीटर लंबी कतार लग गई। ट्रक, बसें और अन्य छोटे-बड़े वाहन घंटों तक फंसे रहे। इस दौरान यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और कई लोग गर्मी व जाम के कारण परेशान नजर आए।
    वैकल्पिक मार्ग से निकले वाहन
    स्थिति गंभीर होती देख कई वाहन चालकों ने वैकल्पिक मार्ग का सहारा लिया। चालकों ने बघुवार से बटेसरा मार्ग होकर अपने गंतव्य की ओर जाना शुरू किया, जिससे कुछ हद तक दबाव कम हुआ। हालांकि, मुख्य मार्ग बंद रहने से आवागमन पर असर लगातार बना रहा।
    पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे
    घटना की सूचना मिलते ही करेली पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने यातायात को डायवर्ट करने के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था भी संभाली। वहीं स्थानीय लोगों की मदद से सड़क पर गिरे पेड़ को हटाने का काम शुरू किया गया।
    जनहानि नहीं, राहत की बात
    इस पूरे घटनाक्रम में राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार की जनहानि या बड़ा नुकसान नहीं हुआ। हालांकि, पेड़ के गिरने से यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई और यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा।
    जल्द बहाल होगा यातायात
    स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की टीम मिलकर पेड़ हटाने के कार्य में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही मार्ग को साफ कर यातायात पूरी तरह बहाल कर दिया जाएगा।

  • अनूपपुर में हाथियों का आतंक जारी: 113 दिनों से डेरा, फसलों और घरों को नुकसान

    अनूपपुर में हाथियों का आतंक जारी: 113 दिनों से डेरा, फसलों और घरों को नुकसान


    अनूपपुर। छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में जंगली हाथियों का उत्पात लगातार जारी है। पिछले 113 दिनों से तीन हाथियों का एक झुंड क्षेत्र में लगातार विचरण कर रहा है, जबकि एक अन्य अकेला हाथी पिछले 16 दिनों से अलग-अलग इलाकों में सक्रिय है। अब सोमवार सुबह मरवाही-अनूपपुर सीमा पर एक और दंतैल हाथी की दस्तक ने ग्रामीणों और वन विभाग की चिंता और बढ़ा दी है। हाथियों के लगातार मूवमेंट से दर्जनों गांवों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

    113 दिनों से डेरा जमाए हाथियों का झुंड, गांवों में बढ़ा खतरा

    जानकारी के अनुसार तीन हाथियों का समूह पिछले लगभग चार महीनों से अनूपपुर जिले के जंगलों में डटा हुआ है। यह झुंड दिनभर घने जंगलों में रहता है और शाम ढलते ही भोजन की तलाश में रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर लेता है। जैतहरी और अनूपपुर वन परिक्षेत्र के कई गांव इन हाथियों के सीधे प्रभाव में आ चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रात होते ही घरों के आसपास हलचल बढ़ जाती है, जिससे लोग भयभीत रहते हैं।

    मकानों को नुकसान, खेतों की फसलें बर्बाद

    हाथियों के उत्पात से सबसे ज्यादा नुकसान ग्रामीणों को हुआ है। कई मकानों की दीवारें ढहा दी गई हैं, जबकि बाड़ियों में लगी धान, केला, कटहल और महुआ की फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं। ग्रामीणों की महीनों की मेहनत कुछ ही घंटों में तबाह हो रही है, जिससे आर्थिक संकट भी गहरा रहा है।

    घर के आंगन में घुसा हाथी, परिवार में मचा हड़कंप

    खांडा बांध क्षेत्र में मोहन सिंह के घर में उस समय दहशत फैल गई जब एक हाथी रात में सीधे आंगन में घुस आया। हाथी ने वहां रखी धान की फसल खाना शुरू कर दिया। घर के अंदर मौजूद महिलाएं और बच्चे डर के मारे चीखने लगे। गश्त कर रही वन विभाग की टीम और स्थानीय लोगों ने पटाखे फोड़कर किसी तरह हाथी को जंगल की ओर खदेड़ा और परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला।

    वन विभाग का नुकसान, सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित

    वन परिक्षेत्राधिकारी विवेक मिश्रा ने बताया कि हाथियों के झुंड ने कुकुरगोड़ा और पड़रिया पंचायत में कई घरों को नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा चोलना बीट में वन विभाग के 40 से अधिक आरसीसी पोल और लगभग 100 मीटर लंबी फेंसिंग तार को भी हाथियों ने तोड़ दिया है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो गई है।

    16 दिनों से अकेला हाथी भी सक्रिय

    जिला मुख्यालय से करीब 8 किलोमीटर दूर पोंड़ी और खांडा के जंगलों में एक अकेला हाथी पिछले 16 दिनों से डेरा डाले हुए है। यह हाथी भी लगातार मूवमेंट में है और आसपास के गांवों के लिए खतरा बना हुआ है।

    सीमा पर नया दंतैल हाथी, 48 घंटे में घुसने की आशंका

    सोमवार सुबह छत्तीसगढ़ के कटघोरा वन मंडल से होते हुए एक नया दंतैल हाथी मरवाही के माडाकोट पहाड़ तक पहुंच गया है। आशंका जताई जा रही है कि अगले 24 से 48 घंटों में यह हाथी भी अनूपपुर जिले की सीमा में प्रवेश कर सकता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।

    वन विभाग की अपील, ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह

    वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में अलर्ट जारी करते हुए ग्रामीणों से रात में घर से बाहर न निकलने और हाथियों के करीब न जाने की सख्त हिदायत दी है। गश्ती दल लगातार हाथियों की लोकेशन पर नजर बनाए हुए हैं और हालात पर निगरानी रखी जा रही है।

  • Umaria में सेंट्रल स्कूल का निरीक्षण: कलेक्टर ने नए भवन की जमीन देखी

    Umaria में सेंट्रल स्कूल का निरीक्षण: कलेक्टर ने नए भवन की जमीन देखी


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में मंगलवार को प्रशासनिक गतिविधि तेज हो गई जब कलेक्टर राखी सहाय ने केंद्रीय विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ वर्तमान स्कूल की स्थिति देखी, बल्कि प्रस्तावित नए भवन के लिए स्वीकृत भूमि का भी जायजा लिया।
    अचानक निरीक्षण से स्कूल में हलचल
    कलेक्टर के अचानक पहुंचने से विद्यालय परिसर में हलचल मच गई। उन्होंने प्राचार्य और स्टाफ के साथ बैठक कर बच्चों की पढ़ाई, पेयजल व्यवस्था, बैठने की सुविधा और अन्य मूलभूत जरूरतों की जानकारी ली।
    उन्होंने निर्देश दिए कि गर्मी और बारिश के मौसम में बच्चों को किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए कक्षाओं की छत पर सफेद चादर लगाने की व्यवस्था की जाए, ताकि तापमान नियंत्रित रहे।
    नए भवन की जमीन का निरीक्षण
    निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने नए भवन के लिए स्वीकृत भूमि का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि भूमि से संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और अब निर्माण कार्य की जिम्मेदारी केंद्रीय विद्यालय संगठन के टेंडर प्रक्रिया पर निर्भर है। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जबलपुर संभागीय आयुक्त से समन्वय कर निर्माण प्रक्रिया में तेजी लाएं ताकि स्कूल भवन जल्द बन सके।
    सुविधाओं में सुधार के निर्देश
    छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर ने कई अहम निर्देश दिए। उन्होंने स्कूल में वाटर कूलर और वाटर फिल्टर लगाने के साथ-साथ हर महीने पानी की गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित करने को कहा।
    इसके अलावा पीएचई विभाग को बोरवेल के पानी को टंकी में संग्रहित कर आरओ सिस्टम के माध्यम से शुद्ध करने की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए।
    खेल और बुनियादी ढांचे पर जोर
    कलेक्टर ने विद्यालय में खेल गतिविधियों की स्थिति की भी समीक्षा की और उन्हें और बेहतर बनाने पर जोर दिया। उन्होंने स्कूल को जोड़ने वाली सड़क की मरम्मत के लिए नगर पालिका अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के बाद उन्होंने आरआई ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का भी दौरा किया और वहां की व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
  • टेंडर प्रक्रिया पूरी, फिर भी रुका काम: पार्षद ने उठाए सवाल, अधिकारियों पर निष्क्रियता का आरोप

    टेंडर प्रक्रिया पूरी, फिर भी रुका काम: पार्षद ने उठाए सवाल, अधिकारियों पर निष्क्रियता का आरोप


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के डिंडोरी जिले में मंगलवार सुबह स्थानीय समस्याओं से नाराज लोगों का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा। वार्ड क्रमांक-1 सुबखार के निवासियों ने जबलपुर–अमरकंटक मुख्य मार्ग पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।
    कलेक्टर को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े लोग
    प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि वे जिला कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका आरोप है कि पिछले कई वर्षों से क्षेत्र की समस्याओं पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
    पूर्व भाजपा विधायक दुलीचंद उरैती भी प्रदर्शन में शामिल रहे और उन्होंने आरोप लगाया कि वार्ड की सड़क, घाट, सीवरेज लाइन और अन्य विकास कार्य लंबे समय से अटके हुए हैं।
    10 साल से अधूरी समस्याएं, लोगों में नाराजगी
    स्थानीय लोगों का कहना है कि इमली कुटी से जबलपुर मार्ग तक सड़क निर्माण, मुक्तिधाम रोड, डैम घाट के पास स्नान घाट और सीवरेज लाइन जैसी मूलभूत सुविधाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि दो साल से लगातार आवेदन देने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई।
    मौके पर प्रशासन, समझाइश के बाद खुला जाम
    स्थिति बिगड़ती देख पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। नायब तहसीलदार और नगर पालिका अमले ने लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी कलेक्टर के आने की मांग पर अड़े रहे।
    बाद में एसडीएम राम बाबू देवांगन मौके पर पहुंचे और वार्ड का निरीक्षण किया। उनकी समझाइश और जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त कर सड़क जाम खोल दिया गया।
    पार्षद का आरोप टेंडर होने के बावजूद काम रुका
    भाजपा पार्षद भागीरथ उरैती ने कहा कि सड़क कायाकल्प योजना के तहत कार्य की स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद काम शुरू नहीं हो सका। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण विकास कार्य अटका हुआ है।
    प्रशासन ने दिया जल्द कार्रवाई का भरोसा
    एसडीएम ने आश्वासन दिया है कि सभी लंबित कार्यों की समीक्षा कर जल्द निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा, ताकि क्षेत्र के लोगों को राहत मिल सके।

  • विधायक-मंत्री पर मनमानी का आरोप: पूर्व विधायक ने जनप्रतिनिधियों की अनदेखी पर जताई नाराजगी

    विधायक-मंत्री पर मनमानी का आरोप: पूर्व विधायक ने जनप्रतिनिधियों की अनदेखी पर जताई नाराजगी


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के मंडला जिले में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम सियासी बयानबाजी का मंच बन गया। नैनपुर जनपद के इंद्री गांव में सोमवार को हुए इस आयोजन में 130 जोड़ों का विवाह तो संपन्न हुआ, लेकिन कई जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी ने विवाद खड़ा कर दिया।

    मंच से उठे सवाल, जनपद सदस्यों की अनुपस्थिति पर नाराजगी

    कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री देव सिंह सैयाम ने मंच से ही व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि यह जनपद स्तर का कार्यक्रम होने के बावजूद जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य तक मौजूद नहीं हैं।
    उन्होंने जनपद सीईओ को भी सलाह देते हुए कहा कि वे किसी भी राजनीतिक दबाव में आए बिना निष्पक्ष तरीके से काम करें।

    विधायक-मंत्री पर लगाए भेदभाव के आरोप

    सैयाम ने बिना नाम लिए स्थानीय विधायक और प्रदेश की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी कार्यक्रमों में भेदभाव किया जा रहा है और सभी जनप्रतिनिधियों को समान सम्मान नहीं दिया जा रहा। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर जनप्रतिनिधि की भागीदारी जरूरी है, लेकिन यहां कुछ लोगों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।

    पुराने कार्यक्रम का भी किया जिक्र

    पूर्व मंत्री ने पिछले साल टिकरवारा में हुए सामूहिक कन्यादान कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए कहा कि उस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मौजूद थे, लेकिन उन्हें मंच पर जगह नहीं दी गई। उन्होंने इसे व्यक्तिगत उपेक्षा बताते हुए कहा कि जिस योजना की शुरुआत उन्होंने मंत्री रहते की थी, उसी में उन्हें दरकिनार किया गया।

    सरपंचों की समस्याओं को भी उठाया

    अपने संबोधन में सैयाम ने सरपंचों की परेशानियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से कई सरपंच आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और सामग्री भुगतान के लिए उन्हें अपनी जमीन तक बेचनी पड़ी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिले में पहले के कार्यकाल के दौरान करीब डेढ़ करोड़ रुपए वापस चले गए, जिन्हें अब तक वापस नहीं लाया जा सका है।

    130 जोड़ों का हुआ विवाह, सरकार ने दी सहायता

    विवाद के बीच कार्यक्रम में 130 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया। नवविवाहितों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता और गृहस्थी का सामान भी प्रदान किया गया।

  • स्वास्थ्य विभाग अनजान: डिग्री का खेल उजागर, असली-नकली डॉक्टर का चौंकाने वाला मामला

    स्वास्थ्य विभाग अनजान: डिग्री का खेल उजागर, असली-नकली डॉक्टर का चौंकाने वाला मामला


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी व्यवस्थाओं की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ही एमबीबीएस डिग्री के आधार पर दो अलग-अलग लोग वर्षों से सरकारी डॉक्टर बनकर काम कर रहे हैं। इनमें से एक असली डॉक्टर है, जबकि दूसरा बिना मेडिकल पढ़ाई के ही 15 साल से मरीजों का इलाज करता रहा और हैरानी की बात यह है कि विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।
    बालाघाट से शुरू हुई जांच, खुलने लगे राज
    पूरे मामले की परतें बालाघाट जिले से खुलनी शुरू हुईं। यहां बिरसा के सरकारी अस्पताल में पदस्थ एक डॉक्टर की पहचान को लेकर संदेह पैदा हुआ। जांच में सामने आया कि संबंधित डॉक्टर कभी अस्पताल में तो कभी अपने गांव में निजी क्लीनिक चलाते हैं। स्थानीय लोगों ने पुष्टि की कि वे बिना किसी बोर्ड या आधिकारिक पहचान के घर के पास मरीजों का इलाज करते रहे हैं।
    दस्तावेजों में बड़ा खेल, अलग-अलग जगहों का जिक्र
    जब उनके दस्तावेजों की जांच की गई, तो कई विसंगतियां सामने आईं। कहीं उनका गृह जिला रीवा बताया गया, तो कहीं मुरैना और बालाघाट। इतना ही नहीं, उनके पास केवल प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन पाया गया, जबकि परमानेंट रजिस्ट्रेशन का रिकॉर्ड गायब था।
    देवास में मिला असली डॉक्टर
    जांच टीम ने देवास में पदस्थ दूसरे डॉक्टर से संपर्क किया। उन्होंने अपनी ओरिजिनल एमबीबीएस डिग्री और परमानेंट रजिस्ट्रेशन दिखाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बालाघाट में उपयोग की जा रही डिग्री उनकी ही है, लेकिन उस व्यक्ति को वे नहीं जानते। इससे साफ हो गया कि एक ही डिग्री की कॉपी का इस्तेमाल कर कोई दूसरा व्यक्ति सरकारी नौकरी कर रहा है।
    मेडिकल काउंसिल ने किया खुलासा
    मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल में जांच के दौरान यह पुष्टि हुई कि परमानेंट रजिस्ट्रेशन नंबर एक ही व्यक्ति के नाम पर दर्ज है और वह देवास में कार्यरत डॉक्टर का है। इससे बालाघाट वाले डॉक्टर की स्थिति पूरी तरह संदिग्ध हो गई है।
    जिम्मेदार अधिकारी भी अनजान
    बालाघाट के सीएमएचओ ने माना कि उन्हें हाल ही में इस मामले की शिकायत मिली है और जांच जारी है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं थी।
    विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में बड़ी चूक को दर्शाता है। अगर समय रहते जांच नहीं हुई, तो ऐसे कई और फर्जी डॉक्टर सिस्टम में सक्रिय हो सकते हैं।
    बड़ा सवाल मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़?
    सबसे गंभीर बात यह है कि जिस व्यक्ति के पास असली डिग्री नहीं है, वह वर्षों से मरीजों का इलाज करता रहा। इससे न केवल मरीजों की जान जोखिम में पड़ी, बल्कि पूरे स्वास्थ्य सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ गए हैं।

  • शादी में आया मासूम नाले में गिरा: ग्रामीण पुलिस ने कराया पोस्टमार्टम, जांच शुरू

    शादी में आया मासूम नाले में गिरा: ग्रामीण पुलिस ने कराया पोस्टमार्टम, जांच शुरू


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के दुगलई गांव में एक दर्दनाक हादसे ने खुशियों के माहौल को मातम में बदल दिया। मामा के यहां शादी में शामिल होने आए 15 वर्षीय दिव्यांश इनवाती की नाले में डूबने से मौत हो गई। घटना सोमवार शाम की है, जिसके बाद पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई।

    शादी की खुशियां पल भर में बदलीं गम में

    जानकारी के अनुसार, टाकाबर्रा निवासी दिव्यांश अपने माता-पिता और बहन के साथ 14 अप्रैल को मामा के यहां शादी समारोह में शामिल होने दुगलई आया था। 20 अप्रैल को माता-पिता और बहन वापस लौट गए, जबकि दिव्यांश मामा के यहां ही रुक गया था। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह फैसला उसके लिए जानलेवा साबित होगा।

    दोस्तों के साथ गया था नाले पर

    सोमवार दोपहर दिव्यांश अपने हमउम्र दोस्तों के साथ बकरियां चराने नाले की ओर गया था। इसी दौरान बकरियां दूर चली गईं, जिन्हें वापस लाने के लिए एक दोस्त वहां से चला गया। मौके पर मौजूद दिव्यांश और उसका साथी रोहित नाले में नहाने लगे।

    गहरे पानी में गया, नहीं बच सकी जान

    नहाते समय अचानक दिव्यांश गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। साथी रोहित ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका। घबराकर वह गांव पहुंचा और परिजनों को सूचना दी। जब तक परिवार के लोग मौके पर पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

    परिजनों ने निकाला शव, पुलिस को दी सूचना

    परिजनों ने ग्रामीणों की मदद से नाले से दिव्यांश का शव बाहर निकाला और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। रात अधिक होने के कारण उसी दिन पोस्टमार्टम नहीं हो सका।

    अगले दिन हुआ पोस्टमार्टम, जांच जारी

    मंगलवार को जिला अस्पताल में पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम किया गया और शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो पाएगी।

    सावधानी की जरूरत, बार-बार हो रहे ऐसे हादसे

    गर्मी के मौसम में नदियों और नालों में नहाने के दौरान इस तरह के हादसे लगातार सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को बिना निगरानी के जल स्रोतों के पास नहीं जाने देना चाहिए, क्योंकि गहराई का अंदाजा न होने से ऐसे हादसे हो सकते हैं।

  • 5 दमकल वाहनों ने पाया काबू: Junnardeo में आग से भारी नुकसान

    5 दमकल वाहनों ने पाया काबू: Junnardeo में आग से भारी नुकसान


    नई दिल्ली। छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव में सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात एक बड़ी आगजनी की घटना सामने आई, जहां एक किराना दुकान में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया और अंदर रखा लगभग सारा सामान जलकर खाक हो गया। गनीमत रही कि समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे आसपास की दुकानों और मकानों को बचा लिया गया।

     अचानक भड़की आग, मच गया हड़कंप
    घटना देर रात की है, जब लोगों ने दुकान से उठती लपटें देखीं। आग तेजी से फैलती गई और कुछ ही देर में पूरी दुकान धू-धू कर जलने लगी। स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग इतनी विकराल थी कि उस पर काबू पाना संभव नहीं हो सका।

     5 दमकल वाहन, 3 घंटे की मशक्कत
    सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। आग बुझाने के लिए एक-दो नहीं बल्कि 5 दमकल वाहनों को लगाना पड़ा। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया जा सका।
    दमकल कर्मियों ने लगातार पानी की बौछार कर आग को फैलने से रोका, जिससे आसपास की दुकानें और मकान सुरक्षित बच गए।

    लाखों का नुकसान, कारण अज्ञात
    इस हादसे में दुकान मालिक को लाखों रुपए के नुकसान का अनुमान है, क्योंकि दुकान में रखा लगभग पूरा सामान जल गया। हालांकि, फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट या अन्य तकनीकी कारणों की आशंका जताई जा रही है।

    जांच में जुटी पुलिस और प्रशासन
    घटना की सूचना के बाद पुलिस और संबंधित विभाग ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।

     समय रहते टला बड़ा हादसा
    यदि आग समय रहते नियंत्रित नहीं होती, तो यह आसपास की कई दुकानों और मकानों को अपनी चपेट में ले सकती थी। स्थानीय लोगों और दमकल टीम की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया।

  • Satna में टक्कर के बहाने चेन स्नेचिंग, डायल-112 को चकमा देकर UP की ओर फरार आरोपी

    Satna में टक्कर के बहाने चेन स्नेचिंग, डायल-112 को चकमा देकर UP की ओर फरार आरोपी


    नई दिल्ली। सतना जिले के चित्रकूट क्षेत्र में मंगलवार तड़के एक फिल्मी अंदाज में चेन स्नैचिंग की वारदात सामने आई। बगदरा घाटी में 4-5 बदमाशों ने दो गाड़ियों से पीछा करते हुए कार को टक्कर मारकर रोकने की कोशिश की और मौका मिलते ही युवक के गले से सोने की चेन झपटकर फरार हो गए। वारदात के बाद आरोपी पुलिस को चकमा देकर उत्तर प्रदेश की ओर भाग निकले।
     घाटी में पीछा, टक्कर मारकर रुकवाने की कोशिश

    जानकारी के मुताबिक, रैपुरा निवासी प्रदीप कुमार अपने तीन दोस्तों के साथ सीधी से चित्रकूट लौट रहे थे। जब उनकी कार बगदरा घाटी से गुजर रही थी, तभी पीछे से आई दो संदिग्ध गाड़ियों ने उनकी कार को टक्कर मारकर रोकने की कोशिश की। हालांकि, खतरा भांपते हुए प्रदीप ने घाटी में वाहन नहीं रोका और सीधे गोदावरी मोड़ तक पहुंच गए।

     गाड़ी रुकते ही झपटी चेन

    जैसे ही पीड़ित गोदावरी मोड़ पर रुके, दोनों संदिग्ध गाड़ियां भी वहां पहुंच गईं। एक वाहन के पास आते ही उसमें सवार बदमाश ने झटके से प्रदीप के गले से सोने की चेन छीन ली और तुरंत फरार हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों गाड़ियों में 4 से 5 आरोपी सवार थे, जिन्होंने पूरी वारदात को बेहद तेजी से अंजाम दिया।

     पुलिस को चकमा देकर बॉर्डर पार

    घटना के तुरंत बाद पीड़ित ने डायल-112 पर सूचना दी। पुलिस ने जानकीकुंड अस्पताल के पास घेराबंदी की, लेकिन बदमाश पुलिस को चकमा देकर फरार हो गए।

    बताया जा रहा है कि आरोपी मध्यप्रदेश की सीमा पार कर उत्तर प्रदेश में दाखिल हो गए। पीड़ित पक्ष ने भी अपनी कार से उनका पीछा किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।

     CCTV और वीडियो के आधार पर जांच तेज

    इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें आरोपी वाहन भागते नजर आ रहे हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और वाहनों के नंबर के आधार पर आरोपियों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।

     हाईवे पर बढ़ती वारदातें, सुरक्षा पर सवाल

    इस तरह की घटनाओं ने हाईवे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और सीमा पार समन्वय के जरिए कार्रवाई की जा रही है।