Category: Madhya Pradesh

  • मेहनत और जज्बे को सलाम, 12वीं में सफल द्रोपदी से मंत्री ने किया संवाद

    मेहनत और जज्बे को सलाम, 12वीं में सफल द्रोपदी से मंत्री ने किया संवाद


    नई दिल्ली। मंडला जिले की दिव्यांग छात्रा द्रोपदी धुर्वे ने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 65% अंक हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे प्रदेश को गर्व का मौका दिया है। पैरों से लिखकर परीक्षा देने वाली द्रोपदी की इस प्रेरणादायक कहानी ने सभी का ध्यान खींचा, जिसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें फोन कर बधाई दी और उनके जज्बे की सराहना की। यह बातचीत उनकी सफलता की खबर सामने आने के बाद संभव हो सकी।

    “आपका साहस प्रेरणादायक है” केंद्रीय मंत्री ने दिया भरोसा

    द्रोपदी से यह बातचीत भाजपा नेता डॉ. विजय आनंद मरावी के माध्यम से कराई गई, जो उनके गांव पहुंचकर उनसे मिले। इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने फोन पर छात्रा से बात करते हुए कहा कि उनका संघर्ष और मेहनत समाज के लिए प्रेरणा है। उन्होंने द्रोपदी को हर संभव मदद का आश्वासन दिया और भविष्य में उनसे मिलने की इच्छा भी जताई।

    शारीरिक चुनौतियों के बावजूद हासिल की बड़ी सफलता

    करौंदा टोला निवासी द्रोपदी धुर्वे जन्म से दिव्यांग हैं। उनका एक हाथ नहीं है और दूसरा पूरी तरह विकसित नहीं हो पाया है। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और पैरों से लिखना सीखकर अपनी पढ़ाई जारी रखी। इसी लगन और मेहनत के दम पर उन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 65% अंक हासिल किए। इससे पहले भी वे 10वीं में अच्छा प्रदर्शन कर चुकी हैं।

    प्रदेश के लिए बनी प्रेरणा, हर किसी को दे रही संदेश

    द्रोपदी की यह उपलब्धि उन्हें पूरे जिले और प्रदेश में प्रेरणा का प्रतीक बना रही है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादों के सामने छोटी पड़ जाती हैं। अब हर कोई उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहा है और उनकी मेहनत को सलाम कर रहा है।

  • पीथमपुर में महिला श्रमिकों का उग्र प्रदर्शन ,न्यूनतम मजदूरी और सुविधाओं को लेकर कंपनी के खिलाफ मोर्चा

    पीथमपुर में महिला श्रमिकों का उग्र प्रदर्शन ,न्यूनतम मजदूरी और सुविधाओं को लेकर कंपनी के खिलाफ मोर्चा

    पीथमपुर । धार जिले के औद्योगिक नगर पीथमपुर में स्थित औद्योगिक क्षेत्र में उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब सैकड़ों महिला श्रमिक अचानक सड़क पर उतर आईं और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामला सेक्टर एक में स्थित दवा निर्माण कंपनी सिन्काम फार्मूलेशन से जुड़ा है जहां काम करने वाली महिलाओं ने कम मजदूरी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

    प्रदर्शन कर रही महिला श्रमिकों का कहना है कि उन्हें मध्यप्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी के अनुसार भुगतान नहीं किया जा रहा है। वर्तमान में उन्हें 8 घंटे की शिफ्ट के लिए मात्र 225 रुपए दिए जा रहे हैं जो उनके अनुसार बेहद कम है और जीवन यापन के लिए पर्याप्त नहीं है। इतना ही नहीं ओवरटाइम के नाम पर भी केवल 25 रुपए प्रति घंटा दिया जा रहा है जिसे लेकर महिलाओं में भारी नाराजगी है।

    महिला श्रमिकों ने आरोप लगाया कि कंपनी में ठेकेदारों के माध्यम से काम कराया जा रहा है और यही ठेकेदार उनका शोषण कर रहे हैं। उनका कहना है कि काम के दौरान उन्हें मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जातीं। कई महिलाओं ने यह भी बताया कि उन्हें ना तो भविष्य निधि यानी पीएफ का लाभ मिल रहा है और ना ही कर्मचारी राज्य बीमा यानी ईएसआईसी जैसी जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं। ऐसे में उनका सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा तंत्र पूरी तरह कमजोर बना हुआ है।

    प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने स्पष्ट कहा कि उन्हें सरकार द्वारा तय किए गए न्यूनतम वेतनमान के अनुसार भुगतान मिलना चाहिए। उनका कहना है कि वे लगातार मेहनत कर रही हैं लेकिन इसके बावजूद उन्हें उनके हक का पैसा नहीं मिल रहा है। इस स्थिति को लेकर अब उनका आक्रोश खुलकर सामने आ गया है।

    स्थिति को देखते हुए मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा लेकिन महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगी।

    यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे औद्योगिक क्षेत्र में काम कर रही महिला श्रमिकों की स्थिति को उजागर करता है। कम मजदूरी असुरक्षित कार्य वातावरण और सामाजिक सुरक्षा की कमी जैसे मुद्दे लंबे समय से उठते रहे हैं लेकिन अब महिलाएं खुलकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रही हैं।

    यदि समय रहते इस मामले का समाधान नहीं किया गया तो यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन और कंपनी प्रबंधन इस मुद्दे को किस तरह से सुलझाते हैं और क्या महिला श्रमिकों को उनका अधिकार मिल पाता है या नहीं।

  • सांप के हमले से बाल-बाल बचा युवक, ग्रामीणों ने उठाई प्रशिक्षण की मांग

    सांप के हमले से बाल-बाल बचा युवक, ग्रामीणों ने उठाई प्रशिक्षण की मांग


    नई दिल्ली। कटनी जिले के ढीमरखेड़ा क्षेत्र में रविवार रात एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जहां एक युवक को सोते समय जहरीले काले नाग ने तीन बार डस लिया। पीड़ित अरविंद पटेल (36) अपने छोटे बच्चे के साथ सो रहे थे, तभी यह घटना हुई। पहली बार डसने पर उन्हें लगा कि बच्चे का नाखून लगा है, लेकिन जब सांप ने लगातार दो बार और काटा, तो वे घबराकर उठ बैठे। शोर सुनकर परिवार के लोग जागे और घर के कोने में एक बड़ा काला सांप दिखाई दिया, जिससे पूरे घर में अफरा-तफरी मच गई।

    समय पर इलाज से टली बड़ी अनहोनी

    घटना के तुरंत बाद परिजन अरविंद को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उमरियापान ले गए, जहां समय रहते इलाज मिलने से उनकी जान बच गई। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर चिकित्सा मिलने के कारण उनकी स्थिति अब खतरे से बाहर है। इस दौरान ग्रामीणों ने बरेली निवासी सोनू गौर को बुलाया, जिन्होंने काफी मशक्कत के बाद सांप को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ दिया।

    सर्प मित्रों की कमी से बढ़ी चिंता

    इस घटना ने क्षेत्र में सर्प मित्रों की कमी और वन विभाग की निष्क्रियता को उजागर कर दिया है। जनपद सदस्य श्रीकांत पटेल ने कहा कि ढीमरखेड़ा इलाका जंगलों और खेतों से घिरा है, जहां गर्मी के मौसम में सांपों का रिहायशी इलाकों में आना आम हो जाता है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर कोई प्रशिक्षित टीम मौजूद नहीं है।

    ग्रामीणों की मांग स्थानीय युवाओं को मिले प्रशिक्षण

    ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से वन विभाग केवल आश्वासन दे रहा है कि युवाओं को सर्प पकड़ने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। फिलहाल सांप निकलने पर दूसरी जगहों से सपेरों को बुलाना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। ग्रामीणों ने कलेक्टर आशीष तिवारी से मांग की है कि स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर आपात स्थिति में त्वरित मदद की व्यवस्था की जाए।

    प्रशासन से जल्द समाधान की उम्मीद

    मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला वन मंडल अधिकारी (DFO) अजय मिश्रा से चर्चा की बात कही गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर एक प्रभावी व्यवस्था बनाई जाएगी, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

  • एमपी-छत्तीसगढ़ सीमा का पुल खस्ताहाल, भारी वाहनों से बढ़ा दबाव

    एमपी-छत्तीसगढ़ सीमा का पुल खस्ताहाल, भारी वाहनों से बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली। अनूपपुर जिले की सीमा पर ग्राम वेंकटनगर के पास तिपान नदी पर बना पुल अब खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाला यह अहम पुल 40 साल से ज्यादा पुराना हो चुका है और लगातार भारी वाहनों के दबाव से इसकी हालत बदतर हो गई है। अनूपपुर-बिलासपुर मुख्य मार्ग पर स्थित होने के कारण यहां रोजाना बड़ी संख्या में मालवाहक वाहन गुजरते हैं, जिससे किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।

    दो राज्यों की आर्थिक जीवनरेखा पर संकट

    यह पुल केवल आम लोगों के आवागमन के लिए ही नहीं, बल्कि औद्योगिक गतिविधियों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। कोयला खदानों से लेकर जैतहरी स्थित मोजरबेयर पावर प्लांट तक कच्चे माल की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। बिलासपुर और भिलाई से आने वाला लौह अयस्क और कोयला इसी पुल के जरिए मध्यप्रदेश के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचता है। ऐसे में इस पुल की खराब स्थिति से दो राज्यों की आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।

    सतह उखड़ी, सरिए बाहर खतरे की घंटी

    पुल की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि इसकी ऊपरी सतह पूरी तरह उखड़ गई है और कंक्रीट के अंदर से लोहे के सरिए बाहर दिखाई दे रहे हैं। रेलिंग और साइड वॉल कई जगह से टूट चुकी हैं, जिससे वाहन चालकों के लिए जोखिम और बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग केवल औपचारिक मरम्मत करता है, जो भारी ट्रैफिक के चलते कुछ ही दिनों में फिर खराब हो जाती है।

    1980 में रखी गई थी नींव, अब तक नहीं हुआ ठोस जीर्णोद्धार

    इस पुल की आधारशिला 1980 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने रखी थी और 1982 में इसका लोकार्पण हुआ था। चार दशक बीत जाने के बाद भी इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया है। स्थानीय नागरिक अब केवल मरम्मत नहीं, बल्कि नए और मजबूत पुल के निर्माण की मांग कर रहे हैं।

    अधिकारियों का आश्वासन जल्द शुरू होगा काम

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने सेतु निगम को पुल की स्थिति का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। विभाग का कहना है कि एक-दो दिनों में मरम्मत कार्य शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि, लोगों का कहना है कि अस्थायी मरम्मत के बजाय स्थायी समाधान जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी बड़ी जनहानि से बचा जा सके।

  • उमरिया में दर्दनाक हादसा, ट्रेन से कटकर युवक की मौत; घर में था शादी का माहौल

    उमरिया में दर्दनाक हादसा, ट्रेन से कटकर युवक की मौत; घर में था शादी का माहौल


    नई दिल्ली। उमरिया जिले में रविवार रात एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। चंदिया रोड रेलवे स्टेशन के पास एक युवक की ट्रेन से कटकर मौत हो गई। घटना रेलवे क्रॉसिंग के नजदीक हुई, जहां युवक का शव ट्रैक पर दो हिस्सों में मिला। सूचना मिलते ही चंदिया पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। इस हादसे के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

    ट्रैक पर मिला शव, पहचान के बाद परिजनों को दी सूचना

    मृतक की पहचान वार्ड क्रमांक 13 चंदिया निवासी सत्येंद्र सिंह (पिता सूर्यभान सिंह) के रूप में हुई है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आसपास के लोगों से पूछताछ की और शव की शिनाख्त कर परिजनों को सूचना दी। शव की हालत बेहद गंभीर थी, जिससे घटना की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    घर में शादी से पहले टूटी खुशियां

    इस हादसे का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि जिस दिन यह घटना हुई, उसके अगले ही दिन सत्येंद्र सिंह के घर में शादी का कार्यक्रम होना था। परिवार में खुशियों का माहौल था, लेकिन अचानक आई इस खबर ने सब कुछ मातम में बदल दिया। मृतक अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गया है, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

    मामले की जांच जारी

    चंदिया पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह हादसा था या किसी अन्य कारण से युवक ट्रेन की चपेट में आया। पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है।

  • मजदूरों की जिंदगी बदलेगी अब स्वास्थ्य रिकॉर्ड रहेगा ऑनलाइन सरकार देगी यूनिक हेल्थ पहचान

    मजदूरों की जिंदगी बदलेगी अब स्वास्थ्य रिकॉर्ड रहेगा ऑनलाइन सरकार देगी यूनिक हेल्थ पहचान


    भोपाल । मध्यप्रदेश में लाखों मजदूरों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में सरकार ने एक अहम और दूरगामी कदम उठाया है। अब प्रदेश के श्रमिकों के लिए यूनिक हेल्थ आईडी तैयार की जाएगी जिसके जरिए उनका पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा। इस पहल की जिम्मेदारी श्रम विभाग को सौंपी गई है और इसका उद्देश्य मजदूरों को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से उपलब्ध कराना है।

    इस नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक मजदूर को एक अलग पहचान संख्या दी जाएगी जो पूरी तरह यूनिक होगी। इस आईडी के माध्यम से मजदूरों की स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारी जैसे जांच रिपोर्ट इलाज का इतिहास और डॉक्टर की सलाह एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी। सबसे खास बात यह है कि यह रिकॉर्ड कहीं भी और कभी भी देखा जा सकेगा जिससे मजदूरों को बार बार दस्तावेज साथ रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    सरकार भविष्य में एक ऐसा ऑनलाइन हेल्थ बैंक भी तैयार करने जा रही है जिसमें मजदूरों की सभी मेडिकल रिपोर्ट सुरक्षित रखी जाएंगी। इससे इलाज के दौरान डॉक्टरों को सही जानकारी तुरंत मिल सकेगी और उपचार में देरी नहीं होगी। यह पहल खासतौर पर उन मजदूरों के लिए राहत लेकर आएगी जो काम के सिलसिले में बार बार शहर बदलते रहते हैं और जिनका रिकॉर्ड अक्सर बिखर जाता है।

    दरअसल अब तक देखा गया है कि मजदूरों की असमय मृत्यु या दुर्घटना के मामलों में उनके परिवारों को सरकारी सहायता पाने के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती है। दस्तावेजों की कमी और पहचान के अभाव में उन्हें दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। नई हेल्थ आईडी व्यवस्था इस समस्या को काफी हद तक खत्म कर सकती है क्योंकि सभी जरूरी जानकारी पहले से डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगी।

    प्रदेश में पहले से ही कई योजनाएं संचालित हैं जिनमें पंजीकृत मजदूरों को आर्थिक सहायता दी जाती है। सामान्य मृत्यु पर परिजनों को दो लाख रुपए और दुर्घटना में मृत्यु होने पर चार लाख रुपए तक की सहायता मिलती है। इसके अलावा महिला श्रमिकों को प्रसूति सहायता बच्चों को शिक्षा सहायता और विधवाओं को नियमित आर्थिक सहयोग जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं। लेकिन इन योजनाओं का लाभ लेने में रिकॉर्ड की कमी अक्सर बाधा बनती रही है।

    नई यूनिक हेल्थ आईडी को उसी मॉडल पर विकसित किया जा रहा है जिस पर देश में डिजिटल हेल्थ पहचान प्रणाली काम कर रही है लेकिन इसमें खास तौर पर मजदूरों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा। इसमें काम के दौरान होने वाली बीमारियों दुर्घटनाओं और नियमित स्वास्थ्य जांच का पूरा विवरण शामिल रहेगा जिससे उनकी सेहत पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी।

    सरकार का मानना है कि इस पहल से मजदूरों को न सिर्फ बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी बल्कि उन्हें समय पर आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी। यदि इस योजना को सही तरीके से लागू किया गया तो यह मजदूर वर्ग के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है और उनके जीवन में वास्तविक राहत ला सकती है।

  • सिंगरौली डकैती में सुरक्षा में बड़ी चूक, बैंक में नहीं था गार्ड

    सिंगरौली डकैती में सुरक्षा में बड़ी चूक, बैंक में नहीं था गार्ड


    नई दिल्ली। सिंगरौली में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की बैढ़न शाखा में हुई 15 करोड़ की सनसनीखेज डकैती के मामले में अब जांच के दौरान बड़ी लापरवाहियां सामने आई हैं। पांच हथियारबंद बदमाश दिनदहाड़े करीब 10 किलो सोना और 20 लाख रुपए नकद लूटकर फरार हो गए थे। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन चार अभी भी फरार हैं और लूटा गया पूरा माल भी बरामद नहीं हो सका है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में इस पूरे मामले में तीन बड़ी चूक सामने आई हैं, जिसने बैंक और पुलिस दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    पहली चूक बैंक में वर्षों से नहीं था सिक्योरिटी गार्ड

    जांच में सामने आया कि बैंक की इस शाखा में पिछले कई वर्षों से कोई सिक्योरिटी गार्ड तैनात ही नहीं था। 2018 में खुली इस ब्रांच में सुरक्षा के नाम पर सिर्फ सीसीटीवी कैमरे लगे थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उन्होंने कभी यहां गार्ड नहीं देखा। बैंक के जोनल अधिकारी ओंकार प्रसाद ने भी स्वीकार किया कि खर्च कम करने के चलते गार्ड की नियुक्ति बंद कर दी गई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी बड़ी रकम और सोने की सुरक्षा बिना गार्ड के कैसे छोड़ी गई।

    दूसरी चूक सूचना के बावजूद 20 मिनट देरी से पहुंची पुलिस

    डकैती की सूचना मिलने के बावजूद पुलिस को मौके पर पहुंचने में करीब 20 मिनट का समय लग गया, जबकि थाना मात्र डेढ़ किलोमीटर दूर था। अनुमान है कि सामान्य परिस्थितियों में यह दूरी 7-8 मिनट में तय की जा सकती थी। देरी के कारण बदमाशों को भागने का पर्याप्त समय मिल गया। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बदमाशों के हथियारबंद होने की जानकारी के चलते तैयारी में समय लगा।

    तीसरी चूक चेक पॉइंट पर नहीं रोके गए आरोपी

    घटना के बाद बदमाश बाइक से मस्जिद तिराहा, अंबेडकर चौक होते हुए शहर से बाहर निकल गए। इन रास्तों पर पुलिस के चेक पॉइंट मौजूद थे, लेकिन समय पर अलर्ट नहीं किया गया। आरोपी करीब 35 किलोमीटर का सफर तय कर छत्तीसगढ़ सीमा में प्रवेश कर गए। सवाल उठ रहा है कि वायरलेस सिस्टम के जरिए तत्काल सूचना क्यों नहीं दी गई, जिससे उन्हें रोका जा सकता था।

    अलार्म सिस्टम भी निकला बेअसर

    बैंक में लगा अलार्म सिस्टम भी महज औपचारिकता साबित हुआ। इसके स्विच मैनेजर, कैशियर और डिप्टी मैनेजर के पास थे, लेकिन इसे पुलिस कंट्रोल रूम से नहीं जोड़ा गया था। बैंक अधिकारियों का कहना है कि अलार्म बजाने पर भी तत्काल मदद नहीं मिलती, इसलिए इसका कोई खास उपयोग नहीं रहा।

    आरपीएफ की सतर्कता से पकड़ा गया एक आरोपी

    इस मामले में एक आरोपी कमलेश कुमार को रेलवे सुरक्षा बल की सतर्कता से पकड़ा गया। सिंगरौली-पटना ट्रेन में संदिग्ध गतिविधि के आधार पर उसे हिरासत में लिया गया। उसके पास से 15 लाख 20 हजार रुपए और 61 ग्राम सोना बरामद हुआ। पूछताछ में उसने पहले गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती के बाद डकैती में शामिल होने की बात कबूल कर ली। कोर्ट ने उसे 8 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है।

    अब भी फरार चार आरोपी, पुलिस कर रही तलाश

    पुलिस के अनुसार, अन्य आरोपी छत्तीसगढ़ की ओर भागे हैं। उनके फोटो आसपास के राज्यों में सर्कुलेट कर दिए गए हैं और जल्द गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है।

  • लापरवाही या भ्रष्टाचार ,लोकायुक्त की कार्रवाई से हिला शिक्षा विभाग, DEO सहित कई पर मामला दर्ज

    लापरवाही या भ्रष्टाचार ,लोकायुक्त की कार्रवाई से हिला शिक्षा विभाग, DEO सहित कई पर मामला दर्ज


    सिंगरौली । सिंगरौली जिले के शिक्षा विभाग में सामने आए करोड़ों रुपए के कथित घोटाले ने प्रशासनिक व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है लंबे समय से चल रही अनियमितताओं की शिकायतों के बाद अब लोकायुक्त ने सख्त कदम उठाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी समेत कई जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कर लिया है इस कार्रवाई को सरकारी तंत्र में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है

    पूरा मामला शिक्षा विभाग में विभिन्न मदों में की गई भारी भरकम खरीदी से जुड़ा है शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार करते हुए पद का दुरुपयोग किया और वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया जांच में सामने आया कि जिले की 558 शालाओं के लिए स्वच्छता और कीटाणुशोधन सामग्री की खरीदी की गई जिस पर करीब 97 लाख 67 हजार रुपए खर्च किए गए इसके अलावा 19 विद्यालयों के लिए वर्चुअल रियलिटी लैब स्थापित करने के नाम पर लगभग 4 करोड़ 68 लाख रुपए खर्च किए गए

    यही नहीं 61 विद्यालयों में विद्युत व्यवस्था उपकरण और सामान्य मरम्मत सामग्री की खरीदी पर भी करीब 3 करोड़ 5 लाख रुपए खर्च किए गए इन सभी खर्चों में टेंडर प्रक्रिया स्वीकृति और भुगतान को लेकर गंभीर सवाल उठे दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले कि कई जगहों पर निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया और वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता की कमी रही

    लोकायुक्त रीवा की टीम ने 15 अप्रैल 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय सिंगरौली पहुंचकर कार्रवाई की और खरीदी से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर लिए इन दस्तावेजों में टेंडर प्रक्रिया से जुड़े कागजात स्वीकृति आदेश सप्लाई रिकॉर्ड बिल और भुगतान संबंधी फाइलें शामिल हैं इन सभी दस्तावेजों के आधार पर अब पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस स्तर पर और किस तरह से अनियमितताएं की गईं

    इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी सूर्यभान सिंह सहायक संचालक शिक्षा राजधर साकेत जिला परियोजना समन्वयक रामलखन शुक्ल और सहायक परियोजना समन्वयक वित्त छविलाल सिंह सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 और भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है

    लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान प्रारंभिक रूप से अनियमितताएं सामने आई हैं जिसके आधार पर FIR दर्ज की गई है अब जब्त किए गए दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की परत दर परत जांच की जाएगी ताकि पूरे नेटवर्क और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके

    इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और इसे एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि सरकारी धन के दुरुपयोग को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा यह मामला आने वाले समय में और बड़े खुलासों की ओर इशारा कर रहा है और पूरे प्रदेश की नजर अब इस जांच पर टिकी हुई है

  • लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी, कलेक्टर ने योजनाओं की प्रगति जांची

    लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी, कलेक्टर ने योजनाओं की प्रगति जांची


    नई दिल्ली। सीधी जिले के कुसमी जनपद पंचायत अंतर्गत वस्तुआ गांव में सोमवार को कलेक्टर विकास मिश्रा ने विभिन्न विकास कार्यों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने खास तौर पर जल जीवन मिशन के तहत चल रही नल-जल योजना की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सभी कार्य तय समयसीमा में और गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने साफ कहा कि इस योजना का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

    कलेक्टर ने अधिकारियों और ठेकेदारों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कार्यों में देरी या गुणवत्ता में कमी पाई गई तो संबंधितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जल जीवन मिशन को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था मजबूत करना बेहद जरूरी है। इस दौरान अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग करने और कार्यों की प्रगति पर नजर रखने के निर्देश भी दिए गए।

    नदी-नालों की सफाई पर जोर, जल संरक्षण पर ध्यान

    निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने गांव में बहने वाले नदियों और नालों की साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल स्रोत स्वच्छ रहेंगे तो ही ग्रामीणों को शुद्ध पानी मिल सकेगा। साथ ही उन्होंने जल संरक्षण और स्वच्छता को प्राथमिकता देने पर जोर दिया, ताकि लंबे समय तक जल संकट की स्थिति न बने।

    जुलाई तक कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य, अधिकारी रहे मौजूद

    इस मौके पर एसडीएम शैलेश द्विवेदी और जनपद पंचायत सीईओ ज्ञानेंद्र मिश्रा सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने सभी निर्माण कार्यों को जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया और अधिकारियों को क्षेत्र में सक्रिय रहकर निगरानी करने के निर्देश दिए।

    जनसमस्याओं के समाधान पर दिया जोर

    कलेक्टर विकास मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे आम जनता की समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए जिला मुख्यालय तक न आना पड़े, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी अपने मुख्यालय पर ही समाधान करें।

  • स्कूल परिसर में आगजनी से नुकसान, प्रधानाध्यापक ने दर्ज कराई शिकायत

    स्कूल परिसर में आगजनी से नुकसान, प्रधानाध्यापक ने दर्ज कराई शिकायत


    नई दिल्ली। सतना शहर के महदेवा स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय की बगिया में आगजनी की गंभीर घटना सामने आई है। अज्ञात असामाजिक तत्वों ने स्कूल परिसर में आग लगा दी, जिससे सैकड़ों पेड़-पौधे जलकर नष्ट हो गए। इस घटना ने न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया, बल्कि स्कूल प्रशासन और स्थानीय लोगों को भी झकझोर दिया है। मामले में प्रधानाध्यापक आलोक त्रिपाठी ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

    छुट्टी के बाद दिया गया घटना को अंजाम

    जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम करीब 4:30 बजे स्कूल की छुट्टी होने के बाद स्टाफ परिसर से चला गया था। इसके बाद अज्ञात लोगों ने सुनसान का फायदा उठाकर बगिया में आग लगा दी। रविवार को अवकाश के दिन वार्ड पार्षद अच्छेलाल कोल ने परिसर में आग लगी देखी और तुरंत इसकी सूचना स्कूल के प्रधानाध्यापक को दी।

    मशक्कत के बाद बुझी आग, तब तक भारी नुकसान

    सूचना मिलते ही प्रधानाध्यापक और पार्षद मौके पर पहुंचे और काफी प्रयासों के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि, तब तक करीब एक सैकड़ा पेड़-पौधे पूरी तरह झुलस चुके थे। घटना को जानबूझकर अंजाम दिए जाने की आशंका जताई जा रही है।

    पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

    प्रधानाध्यापक आलोक त्रिपाठी के अनुसार, स्कूल परिसर में अब तक 2 हजार से अधिक पौधों का रोपण और संरक्षण किया गया है, जिनमें करीब 600 वृक्ष विकसित हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह की आगजनी की घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं, जिससे लगातार पर्यावरण को नुकसान हो रहा है।