Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल से चंदेरी और ओरछा अब आसमान के रास्ते सीएम ने लॉन्च की पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा

    भोपाल से चंदेरी और ओरछा अब आसमान के रास्ते सीएम ने लॉन्च की पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा


    भोपाल । मध्यप्रदेश में पर्यटन को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राजधानी भोपाल से पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा की शुरुआत की इस नई पहल के तहत भोपाल से ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के दो प्रमुख स्थलों चंदेरी और ओरछा को सीधे हवाई मार्ग से जोड़ा गया है

    स्टेट हैंगर से सेवा का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने यात्रियों को बोर्डिंग पास वितरित किए और इस योजना को प्रदेशवासियों के लिए एक बड़ी सौगात बताया उन्होंने कहा कि यह सेवा न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा देगी बल्कि यात्रियों का समय भी काफी बचाएगी जिससे लोग कम समय में ज्यादा स्थानों की यात्रा कर सकेंगे

    यह हेली सेवा सप्ताह में पांच दिन बुधवार से रविवार तक संचालित होगी जिससे पर्यटकों को लचीला विकल्प मिलेगा किराए की बात करें तो भोपाल से चंदेरी के लिए 5500 रुपये और भोपाल से ओरछा के लिए 6500 रुपये तय किए गए हैं वहीं 14500 रुपये के विशेष पैकेज में टैक्सी वीआईपी दर्शन प्रसाद और अन्य सुविधाएं शामिल की गई हैं जो यात्रियों को एक संपूर्ण और सुविधाजनक अनुभव प्रदान करेंगी

    इसके अलावा स्थानीय पर्यटकों और रोमांच के शौकीनों के लिए चंदेरी और ओरछा में 3500 रुपये में जॉय राइड की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है जिससे लोग इन ऐतिहासिक शहरों का हवाई दृश्य भी देख सकेंगे यह पहल खासतौर पर उन लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी जो कम समय में अनोखा अनुभव लेना चाहते हैं

    इस सेवा को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत संचालित किया जा रहा है जिसमें सुरक्षा और सुविधा दोनों का विशेष ध्यान रखा गया है यात्रियों के लिए 6 सीटों वाले आधुनिक हेलीकॉप्टर का उपयोग किया जा रहा है साथ ही होटल बुकिंग भोजन और स्थानीय भ्रमण के लिए गाइड की व्यवस्था पहले से तय रहेगी ताकि यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े

    बुकिंग के लिए यात्रियों को ऑनलाइन सुविधा भी दी गई है वे आसानी से IRCTC पोर्टल और फ्लायओला वेबसाइट के माध्यम से अपनी सीट आरक्षित कर सकते हैं जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सरल बनती है

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह सेवा भगवान परशुराम की जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों को समर्पित की गई है उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार धार्मिक स्थलों को हवाई सेवा से जोड़ने की दिशा में लगातार काम कर रही है ताकि श्रद्धालुओं को यात्रा में सुविधा मिल सके

    उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मध्यप्रदेश पहले ही एयर एम्बुलेंस सेवा शुरू कर देश में अग्रणी भूमिका निभा चुका है और अब हेली पर्यटन सेवा के जरिए राज्य को चारों दिशाओं से हवाई कनेक्टिविटी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है कुल मिलाकर यह पहल मध्यप्रदेश में पर्यटन के विकास के साथ साथ आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगी और राज्य को एक नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी

  • एमपी में 3 जिलों में लू का अलर्ट, 6 में बारिश की संभावना, रतलाम में पारा 44°C पहुंचा

    एमपी में 3 जिलों में लू का अलर्ट, 6 में बारिश की संभावना, रतलाम में पारा 44°C पहुंचा


    भोपाल। मध्य प्रदेश में तेज गर्मी के बीच मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। शनिवार को जहां लू जैसी गर्म हवाएं चलीं, वहीं कई जिलों में बादलों की आवाजाही भी बनी रही। रतलाम में तापमान रिकॉर्ड 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि राजधानी भोपाल में दिनभर बादल छाए रहे। रविवार को निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। इसके साथ ही 6 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    अप्रैल महीने में यह दूसरी बार है जब प्रदेश में मौसम बदलने के संकेत मिले हैं। इससे पहले 1 से 9 अप्रैल के दौरान पूरे राज्य में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर देखने को मिला था। इसके बाद तेज गर्मी ने जोर पकड़ लिया। अब करीब 10 दिन बाद मौसम विभाग, भोपाल ने फिर से बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है।

    पहली बार 44 डिग्री के पार पहुंचा तापमान

    इस सीजन में पहली बार प्रदेश का अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा है। मौसम विभाग के अनुसार, रतलाम में सबसे ज्यादा तापमान दर्ज किया गया। उमरिया में 43.8 डिग्री और मंडला में 43.2 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ।

    खजुराहो (छतरपुर) में 42.9 डिग्री, गुना में 42.8 डिग्री, दतिया में 42.6 डिग्री, दमोह और नौगांव में 42.5 डिग्री, जबकि टीकमगढ़ और सतना में तापमान 42.2 डिग्री सेल्सियस रहा। बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर सबसे गर्म रहा, जहां पारा 41.9 डिग्री तक पहुंचा। भोपाल में 41.4 डिग्री, जबलपुर में 41.7 डिग्री, इंदौर में 40.4 डिग्री और उज्जैन में 40.6 डिग्री दर्ज किया गया।

    तेज गर्मी से बचाव के लिए सलाह जारी

    गर्मी के बढ़ते असर को देखते हुए मौसम विभाग ने एडवायजरी भी जारी की है। लोगों को दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और खुद को हाइड्रेट रखने की सलाह दी गई है। दोपहर के समय तेज धूप में ज्यादा देर तक बाहर न रहने, हल्के और सूती कपड़े पहनने की भी अपील की गई है। खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को अतिरिक्त सावधानी बरतने के लिए कहा गया है।
  • MP: ग्वालियर में खुले पड़े सीवर चैंबर में गिरने से एक मजदूर की मौत

    MP: ग्वालियर में खुले पड़े सीवर चैंबर में गिरने से एक मजदूर की मौत


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में ग्वालियर (Gwalior) के झांसी रोड थाना क्षेत्र में दर्दनाक घटना सामने आई है. यहां खुले पड़े सीवर चैंबर (Open Sewer Chamber) में गिरने से एक मजदूर की जान चली गई. मृतक की पहचान सौरभ बाथम (Saurabh Batham) के रूप में हुई है, मजदूरी कर गुजारा करता था. स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सीवर चैंबर लंबे समय से खुला पड़ा था. बार-बार शिकायतों के बावजूद नगर निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की. ऐसे में सवाल है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी किस हादसे का इंतजार कर रहे थे?

    यह घटना झांसी रोड थाना क्षेत्र की गणेश कॉलोनी ओफो की बगिया की है. यहां शुक्रवार की शाम सनसनी फैल गई. एक खुले हुए सीवर चैंबर में संदिग्ध परिस्थितियों में एक युवक गिर गया. स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद सौरभ को बाहर निकाला. उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी- डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सौरभ शराब पीने का आदी था।

    आशंका जताई जा रही है कि नशे की हालत में वह खुले चैंबर को देख नहीं पाया और उसमें गिर गया. इस घटना के बाद इलाके में नगर निगम की लापरवाही को लेकर लोगों में आक्रोश है. स्थानीय लोगों का कहना है कि चैंबर लंबे समय से खुला पड़ा था, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया. अगर समय रहते चैंबर को ढका गया होता तो शायद सौरभ की जान बच जाती।

    घटना के बाद इलाके में गुस्सा फूट पड़ा है. स्थानीय लोगों ने नगर निगम के खिलाफ नाराजगी जताई और इसे लापरवाही बताया. वहीं इस मामले की सूचना मिलते ही झांसी रोड थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा होगा।

  • MP: नीमच में सनसनीखेज घटना… घर की छत पर बिना कपड़े-खाने के तड़पती मिली महिला

    MP: नीमच में सनसनीखेज घटना… घर की छत पर बिना कपड़े-खाने के तड़पती मिली महिला


    नीमच।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के नीमच जिले (Neemuch district) से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक 40 साल की महिला (40 Year Old Woman) को उसके ही घर की छत पर बेहद विचलित कर देने वाली स्थिति में पाया गया। सीमा सोनी नाम की यह महिला पिछले पांच महीनों से चिलचिलाती धूप में बिना कपड़ों के, एक गंदी चादर के सहारे जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी। जब महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम मौके पर पहुंची, तो उसकी हालत इतनी नाजुक थी कि वह मुश्किल से बोल पा रही थी। जब अधिकारियों ने उसे पुकारा तो उसके मुंह से सिर्फ एक शब्द निकला- खाना।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, पड़ोसियों और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सीमा पहले काफी मिलनसार स्वभाव की थी, लेकिन मानसिक बीमारी की चपेट में आने के बाद उसने खुद को दुनिया से अलग कर लिया था। कई लोगों को तो यह तक लगा कि वह कहीं बाहर चली गई है।


    कैसे हुआ खुलासा?

    विभाग की परियोजना अधिकारी दीपिका नामदेव ने बताया कि उन्हें वीडियो फुटेज और कॉल्स के जरिए इस भयावह स्थिति की सूचना मिली थी। जब टीम इंदिरा नगर भगवानपुरा इलाके में पहुंची, तो सीमा को गंभीर रूप से कुपोषित और डिप्रेशन की स्थिति में पाया गया। उन्हें तुरंत खाना और पानी दिया गया और फिर इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    दूसरी ओर, सीमा के पति अजीत सोनी ने इन आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि परिवार उनकी देखभाल कर रहा था। पति के अनुसार, सीमा साल 2016 से ही मानसिक बीमारी से जूझ रही हैं और उनका इलाज अहमदाबाद और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में कराया जा चुका है। उन्होंने छत पर रहने की बात को जायज ठहराते हुए तर्क दिया कि घर में निर्माण कार्य चल रहा था, जिस कारण उन्हें वहां रखा गया था। फिलहाल, प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सीमा की जान बचाना है।

  • एमपी बोर्ड सेकेंड एग्जाम का मौका 10वीं 12वीं के छात्रों के लिए आवेदन शुरू 7 मई से परीक्षा

    एमपी बोर्ड सेकेंड एग्जाम का मौका 10वीं 12वीं के छात्रों के लिए आवेदन शुरू 7 मई से परीक्षा


    भोपाल । मध्यप्रदेश में बोर्ड परीक्षा से जुड़े छात्रों के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है जहां मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 10वीं और 12वीं की द्वितीय परीक्षा को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी है इस फैसले के तहत उन छात्रों को बड़ा अवसर मिला है जो मुख्य परीक्षा में असफल रहे हैं या अपने अंकों में सुधार करना चाहते हैं

    बोर्ड द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार द्वितीय परीक्षा 7 मई 2026 से शुरू होगी इस परीक्षा में न केवल फेल हुए विद्यार्थी बल्कि वे छात्र भी शामिल हो सकेंगे जो अपने प्राप्त अंकों को बेहतर करना चाहते हैं यानी श्रेणी सुधार के इच्छुक छात्र भी इस मौके का लाभ उठा सकते हैं

    आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है छात्र एमपी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 22 अप्रैल 2026 तक आवेदन कर सकते हैं बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करना अनिवार्य होगा इसके बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा

    परीक्षा कार्यक्रम की बात करें तो 10वीं कक्षा की द्वितीय परीक्षा 7 मई से शुरू होकर 19 मई 2026 तक चलेगी वहीं 12वीं कक्षा की परीक्षा 7 मई से 25 मई 2026 तक आयोजित की जाएगी इस बार अनुमान लगाया जा रहा है कि करीब 5 लाख विद्यार्थी इस द्वितीय परीक्षा में शामिल हो सकते हैं जो इसे एक बड़ा आयोजन बनाता है

    बोर्ड का यह कदम उन छात्रों के लिए राहत भरा है जो किसी कारणवश मुख्य परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए थे अब उन्हें बिना एक साल गंवाए अपनी स्थिति सुधारने का अवसर मिल रहा है इससे छात्रों का शैक्षणिक वर्ष भी सुरक्षित रहेगा और उनके करियर पर नकारात्मक प्रभाव भी कम होगा

    शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की द्वितीय परीक्षा प्रणाली छात्रों के लिए सकारात्मक पहल है क्योंकि इससे उन्हें एक और मौका मिलता है अपनी तैयारी को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने का साथ ही यह व्यवस्था शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला और छात्र हितैषी बनाती है कुल मिलाकर मध्यप्रदेश बोर्ड की यह पहल हजारों छात्रों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आई है जो अपने परिणाम को सुधारना चाहते हैं या आगे की पढ़ाई में बिना रुकावट के बढ़ना चाहते हैं

  • एमपी सरकार का बड़ा ऐलान गेहूं बिक्री के लिए अब ज्यादा समय और ज्यादा सुविधा

    एमपी सरकार का बड़ा ऐलान गेहूं बिक्री के लिए अब ज्यादा समय और ज्यादा सुविधा


    भोपाल । मध्यप्रदेश के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत भरा फैसला सामने आया है जहां राज्य सरकार ने गेहूं उपार्जन को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि को बढ़ा दिया है अब किसान 30 अप्रैल 2026 तक गेहूं विक्रय के लिए स्लॉट बुक कर सकेंगे यह निर्णय किसानों को अधिक समय और सुविधा देने के उद्देश्य से लिया गया है जिससे वे बिना किसी जल्दबाजी के अपनी उपज को समर्थन मूल्य पर बेच सकें

    डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अवधि में 6 दिन की वृद्धि की है इसके साथ ही एक और अहम बदलाव करते हुए स्लॉट बुकिंग की क्षमता को भी बढ़ा दिया गया है पहले जहां एक स्लॉट में 1000 क्विंटल गेहूं की सीमा तय थी वहीं अब इसे बढ़ाकर 1500 क्विंटल कर दिया गया है इस फैसले से बड़े और मध्यम किसानों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है

    अब तक की स्थिति पर नजर डालें तो प्रदेश में गेहूं खरीदी का काम तेजी से चल रहा है आंकड़ों के मुताबिक अब तक 1 लाख 30 हजार 655 किसानों से 57 लाख 13 हजार 640 क्विंटल गेहूं की खरीदी की जा चुकी है इसके एवज में किसानों के खातों में 355 करोड़ 3 लाख रुपए का भुगतान भी किया जा चुका है यह भुगतान सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया है जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके

    वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने के लिए आगे आ रहे हैं अब तक 4 लाख 22 हजार 848 किसानों ने 1 करोड़ 82 लाख 96 हजार 810 क्विंटल गेहूं के विक्रय के लिए स्लॉट बुक कराए हैं इससे साफ है कि इस बार गेहूं उपार्जन को लेकर किसानों में उत्साह देखने को मिल रहा है

    राज्य सरकार ने खरीदी प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए प्रदेशभर में 3171 उपार्जन केंद्र स्थापित किए हैं इन केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं जैसे छायादार बैठने की व्यवस्था स्वच्छ पेयजल बारदाने तौल कांटे सिलाई मशीन कंप्यूटर इंटरनेट और गुणवत्ता परीक्षण उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं इसके अलावा उपज की सफाई के लिए पंखे और छनने की व्यवस्था भी की गई है ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े

    वर्ष 2026 27 के लिए सरकार ने गेहूं की खरीदी 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से करने का निर्णय लिया है इसमें केंद्र सरकार द्वारा तय 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य के साथ राज्य सरकार की ओर से 40 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस भी शामिल है इस मूल्य से किसानों को उनकी उपज का बेहतर लाभ मिलने की उम्मीद है

    इस वर्ष गेहूं उपार्जन के लिए 19 लाख 4 हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3 लाख 60 हजार अधिक है यह आंकड़ा दर्शाता है कि सरकार की योजनाओं पर किसानों का भरोसा बढ़ा है पिछले साल जहां लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था वहीं इस साल 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा गया है

    कुल मिलाकर सरकार का यह निर्णय किसानों के लिए राहत और सुविधा दोनों लेकर आया है जिससे उन्हें अपनी मेहनत की उपज का उचित मूल्य पाने में मदद मिलेगी और खरीदी प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बन सकेगी

  • शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर भोपाल में किया प्रदर्शन, TET अनिवार्यता का विरोध, बड़े आंदोलन की चेतावनी

    शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर भोपाल में किया प्रदर्शन, TET अनिवार्यता का विरोध, बड़े आंदोलन की चेतावनी


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार को शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। शिक्षकों ने एमपी नगर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।

    दशहरा मैदान में जुटी भारी भीड़

    भोपाल के भेल स्थित दशहरा मैदान में आयोजित मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा के तहत अलग-अलग जिलों से आए करीब 50 हजार से अधिक शिक्षकों ने हिस्सा लिया। भारी भीड़ के चलते पंडाल छोटा पड़ गया, जिससे कई शिक्षकों को पेड़ों की छांव में बैठना पड़ा।

    TET अनिवार्यता पर जताया विरोध
    संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य किए जाने का विरोध किया। उनका कहना है कि जो शिक्षक पहले से सेवा में हैं, उनसे दोबारा परीक्षा दिलवाना अनुचित है। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार परीक्षा लेना चाहती है तो शिक्षकों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया जाए और उन्हें अन्य कार्यों, जैसे जनगणना, में न लगाया जाए।
    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार को शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। शिक्षकों ने एमपी नगर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।

    दशहरा मैदान में जुटी भारी भीड़

    भोपाल के भेल स्थित दशहरा मैदान में आयोजित मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा के तहत अलग-अलग जिलों से आए करीब 50 हजार से अधिक शिक्षकों ने हिस्सा लिया। भारी भीड़ के चलते पंडाल छोटा पड़ गया, जिससे कई शिक्षकों को पेड़ों की छांव में बैठना पड़ा।

    TET अनिवार्यता पर जताया विरोध
    संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य किए जाने का विरोध किया। उनका कहना है कि जो शिक्षक पहले से सेवा में हैं, उनसे दोबारा परीक्षा दिलवाना अनुचित है। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार परीक्षा लेना चाहती है तो शिक्षकों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया जाए और उन्हें अन्य कार्यों, जैसे जनगणना, में न लगाया जाए।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ी चिंता 
    शिक्षकों का दावा है कि हालिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 90 से 95 प्रतिशत शिक्षक प्रभावित हुए हैं, खासकर वे जो पहले अध्यापक संवर्ग में थे और बाद में शिक्षक बने। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई शर्तें लागू करना न्यायसंगत नहीं है।

    सेवा गणना और पेंशन को लेकर नाराजगी

    संयुक्त मोर्चा ने आरोप लगाया कि सरकार नियुक्ति की मूल तारीख से सेवा की गणना नहीं कर रही, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। साथ ही TET अनिवार्यता से भविष्य में पेंशन और ग्रेच्युटी पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई। शिक्षकों ने आखिर में एमपी नगर एसडीएम एल.के खरे को ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की। इसके साथ ही दिन भर चला यह बड़ा प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया।

    जून में बड़े आंदोलन की चेतावनी

    अध्यापक संघ के अध्यक्ष भरत पटेल ने साफ कहा कि यदि सरकार ने मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो जून में राज्यव्यापी बड़ा आंदोलन किया जाएगा। बता दें कि इससे पहले 8 अप्रैल को जिला स्तर और 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर भी प्रदर्शन किए जा चुके हैं। उसी क्रम में भोपाल में यह राज्य स्तरीय आंदोलन आयोजित किया गया।

    शिक्षकों का दावा है कि हालिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 90 से 95 प्रतिशत शिक्षक प्रभावित हुए हैं, खासकर वे जो पहले अध्यापक संवर्ग में थे और बाद में शिक्षक बने। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई शर्तें लागू करना न्यायसंगत नहीं है।

    सेवा गणना और पेंशन को लेकर नाराजगी

    संयुक्त मोर्चा ने आरोप लगाया कि सरकार नियुक्ति की मूल तारीख से सेवा की गणना नहीं कर रही, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। साथ ही TET अनिवार्यता से भविष्य में पेंशन और ग्रेच्युटी पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई। शिक्षकों ने आखिर में एमपी नगर एसडीएम एल.के खरे को ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की। इसके साथ ही दिन भर चला यह बड़ा प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया।

    जून में बड़े आंदोलन की चेतावनी

    अध्यापक संघ के अध्यक्ष भरत पटेल ने साफ कहा कि यदि सरकार ने मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो जून में राज्यव्यापी बड़ा आंदोलन किया जाएगा। बता दें कि इससे पहले 8 अप्रैल को जिला स्तर और 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर भी प्रदर्शन किए जा चुके हैं। उसी क्रम में भोपाल में यह राज्य स्तरीय आंदोलन आयोजित किया गया।

  • सीहोर में खौफनाक वारदात, बेटे ने पिता को पीट पीटकर मार डाला घर में पसरा मातम

    सीहोर में खौफनाक वारदात, बेटे ने पिता को पीट पीटकर मार डाला घर में पसरा मातम


    सीहोर । मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने मानवीय रिश्तों की मर्यादा और विश्वास को पूरी तरह तार-तार कर दिया है। जिला मुख्यालय के समीपस्थ गंज क्षेत्र में शुक्रवार को एक बेटे ने अपने ही पिता की इतनी बेरहमी से पिटाई की कि उनकी जान चली गई। जिस आंगन में पिता की छांव में बच्चे सुरक्षित महसूस करते हैं उसी आंगन में एक बेटे का जल्लाद रूप देखकर पूरा इलाका दहल उठा है। यह घटना केवल एक हत्या नहीं बल्कि एक हसंते-खेलते परिवार के उजड़ने और सामाजिक ताने-बाने के बिखरने की एक दुखद कहानी है।

    मामला गंज क्षेत्र के कोली मोहल्ला का है जहाँ शुक्रवार का दिन एक सामान्य दिन की तरह शुरू हुआ था लेकिन शाम ढलते-ढलते यहाँ मातम पसर गया। पुलिस और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यहाँ रहने वाले सोनू शाक्य का अपने पिता सुभाष शाक्य के साथ किसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ। शुरुआत में यह बहस सामान्य लग रही थी लेकिन देखते ही देखते विवाद इतना उग्र हो गया कि सोनू अपना आपा खो बैठा। आवेश में आकर सोनू ने अपने वृद्ध पिता पर जानलेवा हमला बोल दिया।

    चश्मदीदों और परिजनों की मानें तो विवाद के दौरान सोनू के सिर पर खून सवार था। उसने अपने पिता की इतनी निर्दयता से पिटाई की कि वे लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े। चीख-पुकार सुनकर जब आसपास के लोग और परिवार के अन्य सदस्य वहाँ पहुंचे तो सुभाष शाक्य अचेत अवस्था में पड़े थे। घर में मौजूद माँ की स्थिति सबसे दयनीय थी जो अपनी आंखों के सामने अपने सुहाग को अपने ही बेटे के हाथों उजड़ते देख रही थी। वह बदहवास होकर रोती रही लेकिन गुस्से में अंधा हो चुका बेटा तब तक अनर्थ कर चुका था।

    स्थानीय लोग और परिजन आनन-फानन में गंभीर रूप से घायल सुभाष शाक्य को उठाकर जिला अस्पताल ले गए। रास्ते भर सबकी यही प्रार्थना थी कि वे बच जाएं लेकिन चोटें इतनी गहरी थीं कि डॉक्टरों का हर प्रयास विफल रहा। प्राथमिक परीक्षण के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल से आई मौत की खबर ने कोली मोहल्ले में सन्नाटा पसरा दिया। लोग यह यकीन नहीं कर पा रहे थे कि सोनू जैसा युवक ऐसी जघन्य वारदात को अंजाम दे सकता है।

    घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस सक्रिय हुई और तत्काल मौके पर पहुंचकर छानबीन शुरू की। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फरार होने की फिराक में लगे आरोपी पुत्र सोनू शाक्य को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त में है और उससे गहन पूछताछ की जा रही है। हालाँकि अभी तक हत्या के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है लेकिन प्राथमिक जांच में इसे पारिवारिक क्लेश और आवेश में किया गया अपराध माना जा रहा है।

    सीहोर की इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर युवा पीढ़ी में धैर्य की इतनी कमी क्यों होती जा रही है? पुलिस अब मोहल्ले वालों और परिवार के अन्य सदस्यों के बयान दर्ज कर रही है ताकि विवाद की उस जड़ तक पहुँचा जा सके जिसने एक बेटे को अपने ही पिता का कातिल बना दिया। फिलहाल सुभाष शाक्य का शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है और पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।

  • बंगाल में बदलाव की हुंकार सीएम मोहन यादव बोले जंगलराज से मुक्ति दिलाएगी भाजपा

    बंगाल में बदलाव की हुंकार सीएम मोहन यादव बोले जंगलराज से मुक्ति दिलाएगी भाजपा

    कोलकाता/भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान कोलकाता में भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में जोरदार चुनाव प्रचार किया। उन्होंने कमरहाटी क्षेत्र के वार्ड 24 और 112 में घर घर पहुंचकर लोगों से मुलाकात की और दुकानों पर जाकर आम नागरिकों से सीधे संवाद स्थापित किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में बदलाव और विकास के नाम पर भाजपा को समर्थन देने की अपील की।

    कोलकाता में जनसंपर्क अभियान के दौरान डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अब पश्चिम बंगाल की जनता ठहराव नहीं बल्कि विकास चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य विकास की दौड़ में पीछे छूटता जा रहा है जबकि देश के अन्य राज्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार बंगाल को फिर से प्रगति के रास्ते पर लाने के लिए भाजपा की सरकार बनना जरूरी है।

    उन्होंने कहा कि बंगाल अब जंगलराज से मुक्ति चाहता है और यहां की जनता बदलाव के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि आगामी चुनाव में जनता प्रचंड बहुमत से भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में लाने का मन बना चुकी है। उन्होंने भाजपा के चुनाव चिन्ह कमल को विकास और समृद्धि का प्रतीक बताते हुए लोगों से इसे चुनने का आग्रह किया।

    इस दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का भी जिक्र किया और कहा कि देश के कई राज्यों में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। मध्यप्रदेश का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां भी विकास की गति लगातार बढ़ी है और इसी मॉडल को बंगाल में भी लागू किया जा सकता है।

    जनसंपर्क के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय नागरिकों की समस्याएं भी सुनीं और भरोसा दिलाया कि भाजपा की सरकार बनने पर जनकल्याण योजनाओं को तेजी से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता की अपेक्षाओं को पूरा करना ही उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए मजबूत और स्थिर सरकार जरूरी है।

    डॉ. मोहन यादव का यह दौरा दो दिनों का बताया जा रहा है जिसमें वे विभिन्न क्षेत्रों में जनसभाएं और संपर्क अभियान चला रहे हैं। राजनीतिक रूप से यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके जरिए भाजपा बंगाल में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

  • एमपी में बड़ा बदलाव ,कॉलेजों की शिकायतें अब प्राचार्य नहीं, कलेक्टर और कमिश्नर करेंगे जांच

    एमपी में बड़ा बदलाव ,कॉलेजों की शिकायतें अब प्राचार्य नहीं, कलेक्टर और कमिश्नर करेंगे जांच


    भोपाल । मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश ने सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से जुड़ी शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया में अहम परिवर्तन करते हुए नया आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत अब प्राचार्य और क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक शिकायतों का निराकरण नहीं कर सकेंगे।

    नए निर्देशों के अनुसार कॉलेज और यूनिवर्सिटी से संबंधित सभी प्रकार की शिकायतों की जांच और समाधान का अधिकार अब जिला कलेक्टर और संभागीय कमिश्नर को दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी भी स्तर पर प्राप्त शिकायतों पर प्राचार्य या क्षेत्रीय अधिकारी स्वयं निर्णय नहीं लेंगे बल्कि उन्हें संबंधित कलेक्टर और कमिश्नर को भेजना अनिवार्य होगा।

    अब तक की व्यवस्था में कॉलेज प्राचार्य और क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक ही छात्रों शिक्षकों और अन्य संबंधित पक्षों से मिलने वाली शिकायतों की जांच करते थे और उनका समाधान भी उसी स्तर पर किया जाता था। लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह जिम्मेदारी उच्च प्रशासनिक अधिकारियों के पास चली गई है।

    विभाग का मानना है कि इस बदलाव से शिकायत निवारण प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ेगी। कई बार स्थानीय स्तर पर पक्षपात या दबाव की आशंका रहती थी जिसे देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। अब जिला और संभाग स्तर पर गठित कमेटी शिकायतों की जांच करेगी और उसी आधार पर कार्रवाई तय की जाएगी।

    सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अक्सर शैक्षणिक प्रशासनिक और अनुशासन से जुड़े कई तरह के मामले सामने आते हैं। इनमें छात्रों की समस्याएं शिक्षकों से जुड़े विवाद परीक्षा और मूल्यांकन से संबंधित शिकायतें शामिल होती हैं। नई व्यवस्था के तहत इन सभी मामलों को अब सीधे उच्च अधिकारियों के पास भेजा जाएगा।

    इस फैसले को उच्च शिक्षा प्रणाली को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि इससे प्राचार्यों की भूमिका सीमित हो जाएगी लेकिन विभाग को उम्मीद है कि इससे शिकायतों के निष्पक्ष समाधान में सुधार आएगा और छात्रों तथा शिक्षकों का भरोसा भी मजबूत होगा।