Category: Madhya Pradesh

  • प्रदर्शन पड़ा भारी ,केन बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध, में 50 लोगों पर केस दर्ज

    प्रदर्शन पड़ा भारी ,केन बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध, में 50 लोगों पर केस दर्ज


    छतरपुर । मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहे प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। इस मामले में यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार समेत करीब 50 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। कार्रवाई के बाद इलाके में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

    जानकारी के अनुसार ग्राम ढोड़न में परियोजना के विरोध में प्रदर्शन किया जा रहा था जहां स्थिति उस समय बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई। पुलिस का आरोप है कि इस दौरान शासकीय कार्य में बाधा डाली गई कर्मचारियों के साथ अभद्रता की गई और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। इन आरोपों के आधार पर बमीठा थाने में गंभीर धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है।

    बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई की शुरुआत चंद्रनगर रेंजर की शिकायत के बाद हुई। मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया जब प्रदर्शन से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यह वीडियो कथित तौर पर अभिषेक परमार की ओर से अपलोड किया गया था जिसके आधार पर पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल अन्य लोगों की पहचान शुरू की। अब तक 15 से 20 लोगों की पहचान की जा चुकी है और आगे भी जांच जारी है।

    बमीठा थाना प्रभारी वाल्मीकि चौबे के मुताबिक वन परिक्षेत्र अधिकारी राजेंद्र तिवारी ने लिखित शिकायत दर्ज कराई थी जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। FIR में सरकारी कर्मचारी पर हमला शासकीय कार्य में बाधा डालना और लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की धारा 3 (1) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

    पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे भी आरोपियों की पहचान की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासन अलर्ट मोड में है और इलाके में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

    यह मामला अब सिर्फ कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि राजनीतिक रंग भी लेता नजर आ रहा है। एक ओर जहां प्रशासन इसे कानून के उल्लंघन का मामला बता रहा है वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी इसे अपने अधिकारों की आवाज बता रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।

  • राजगढ़ कुक्षी रोड पर सड़क हादसा: अनियंत्रित होकर पलटी बस, 14 लोग घायल

    राजगढ़ कुक्षी रोड पर सड़क हादसा: अनियंत्रित होकर पलटी बस, 14 लोग घायल


    कुक्षी । मध्य प्रदेश के राजगढ़ कुक्षी मार्ग पर शनिवार सुबह एक गंभीर सड़क हादसा हो गया। आंबासोटी घाट के पास एक निजी यात्री बस अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई, जिससे बस में सवार यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। इस दुर्घटना में 14 से अधिक लोग घायल हो गए।

    घाट पर नियंत्रण खोने से पलटी बस

    जानकारी के अनुसार, बस राजगढ़ से टांडा बाग होते हुए मनावर जा रही थी। सुबह करीब 9:30 बजे रिंगनौद के आगे टांडा घाट क्षेत्र में चालक ने बस पर नियंत्रण खो दिया, जिससे वह सड़क किनारे पलट गई। हादसे के तुरंत बाद चालक मौके से फरार हो गया।

    एक युवक की हालत गंभीर

    हादसे में संजय नामक युवक के दोनों पैर बस के नीचे दबकर बुरी तरह कुचल गए। घटना के बाद उनकी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। डॉक्टरों के मुताबिक, संजय की स्थिति गंभीर है और प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें रेफर किया गया है। उनकी पत्नी भी घायल हुई हैं और उनका इलाज जारी है।

    तुरंत शुरू हुआ राहत-बचाव कार्य
    घटना की सूचना मिलते ही रिंगनौद चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से राहत कार्य शुरू किया गया। बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकालकर तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।

    अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी

    पुलिस के अनुसार, कुल 14 यात्री घायल हुए हैं। इनमें से 7 को राजगढ़ के कंचन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जबकि बाकी 7 का इलाज टांडा के शासकीय अस्पताल में चल रहा है। सभी को सामान्य से मध्यम चोटें आई हैं। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है और फरार बस चालक की तलाश की जा रही है।

  • महू में चिप्स फैक्ट्री में बॉयलर ब्लास्ट, धमाके से मचा हड़कंप, बच्चे का चेहरा झुलसा

    महू में चिप्स फैक्ट्री में बॉयलर ब्लास्ट, धमाके से मचा हड़कंप, बच्चे का चेहरा झुलसा


    महू । मध्य प्रदेश के महू क्षेत्र के कोदरिया गांव में शनिवार सुबह एक आलू चिप्स फैक्ट्री में जोरदार धमाका हो गया। इस हादसे में बॉयलर फटने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना में फैक्ट्री परिसर में रहने वाला एक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया।

    गंभीर हालत में बच्चे को किया रेफर
    घायल बच्चे की पहचान शुभम, पिता जितेंद्र मकवाना के रूप में हुई है। धमाके के तुरंत बाद उसे महू के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर इंदौर रेफर कर दिया गया। बताया जा रहा है कि उसका चेहरा बुरी तरह झुलस गया है।

    धमाके की आवाज से दहला इलाका
    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विस्फोट इतना तेज था कि उसकी गूंज दूर तक सुनाई दी। धमाके के बाद बॉयलर से निकलती भाप ने हालात को और भयावह बना दिया, जिससे मौके पर मौजूद लोगों में घबराहट फैल गई। शुभम अपने परिवार के साथ इसी फैक्ट्री परिसर में रहता था, जहां उसके पिता भी काम करते हैं।

    अवैध फैक्ट्रियों पर उठे सवाल
    घटना के बाद स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में संचालित फैक्ट्रियों की वैधता पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कोदरिया और आसपास कई यूनिट बिना अनुमति के चल रही हैं, जिन पर प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। हादसे के बाद अब प्रशासनिक कार्रवाई और जांच पर सभी की नजर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते अवैध फैक्ट्रियों पर सख्ती की जाती, तो इस तरह की घटनाओं से बचा जा सकता था।

  • मैहर में दर्दनाक हादसा: तालाब में नहाने गई चार लड़कियां डूबीं, दो की मौत, दो की जान बची

    मैहर में दर्दनाक हादसा: तालाब में नहाने गई चार लड़कियां डूबीं, दो की मौत, दो की जान बची

    मैहर । मध्य प्रदेश के मैहर जिले में शनिवार सुबह एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां तालाब में नहाने गई चार लड़कियां डूब गईं। इस घटना में दो लड़कियों की मौत हो गई, जबकि दो को ग्रामीणों ने समय रहते बचा लिया।

    नहाने के दौरान हुआ हादसा

    कोतवाली थाना क्षेत्र के पटेहरा तालाब में यह घटना हुई। जानकारी के अनुसार, पटेहरा बीड़ी कॉलोनी की एक युवती और तीन नाबालिग किशोरियां सुबह नहाने के लिए तालाब पहुंची थीं। इसी दौरान एक किशोरी का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चली गई।

    बचाने की कोशिश बनी जानलेवा

    पहली किशोरी को बचाने के प्रयास में बाकी तीनों भी आगे बढ़ीं, लेकिन संतुलन बिगड़ने से चारों पानी में डूबने लगीं। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और दो लड़कियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हालांकि, दो की जान नहीं बचाई जा सकी।

    मृतकों की पहचान

    हादसे में जान गंवाने वाली लड़कियों की पहचान पूनम चौधरी (10) और आंचल चौधरी (20) के रूप में हुई है, जो पटेहरा बीड़ी कॉलोनी की निवासी थीं। दोनों के शवों को सिविल अस्पताल मैहर भेजा गया है। घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम दिव्या पटेल, तहसीलदार जितेंद्र पटेल और थाना प्रभारी महेंद्र सिंह चौहान मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    इलाके में पसरा मातम

    इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। एक छोटी सी चूक ने दो जिंदगियां छीन लीं, जिससे स्थानीय लोग स्तब्ध हैं।

  • इंदौर में स्विफ्ट कार बनी आग का गोला समय रहते बाहर निकला परिवार टला बड़ा हादसा

    इंदौर में स्विफ्ट कार बनी आग का गोला समय रहते बाहर निकला परिवार टला बड़ा हादसा


    इंदौर । मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में एक बड़ा हादसा होते होते टल गया जब रेडिसन चौराहा के पास बॉम्बे हॉस्पिटल रोड पर एक चलती मारुति स्विफ्ट कार में अचानक भीषण आग लग गई। इस घटना के दौरान कार में एक पूरा परिवार सवार था जिसमें पति पत्नी, उनकी बुजुर्ग मां और लगभग तीन साल की बच्ची शामिल थी।

    जानकारी के अनुसार जैसे ही कार आगे बढ़ रही थी तभी अचानक उसमें से धुआं निकलने लगा और कुछ ही पलों में आग की लपटें दिखाई देने लगीं। स्थिति को भांपते हुए चालक ने तुरंत सूझबूझ दिखाई और कार को सड़क किनारे रोक दिया। बिना देर किए पूरे परिवार ने समय रहते वाहन से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।

    घटना के दौरान सड़क से गुजर रहे राहगीरों ने भी तत्परता दिखाई। मौके पर मौजूद एक पानी के टैंकर चालक ने तुरंत स्थिति को समझते हुए आग बुझाने का प्रयास किया और पानी डालकर आग पर काफी हद तक काबू पाया। उनकी इस तेजी और सूझबूझ की वजह से आग और ज्यादा फैलने से रोक ली गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चपेट में आ गया। अगर परिवार समय रहते बाहर नहीं निकलता तो बड़ा नुकसान हो सकता था। घटना की सूचना मिलते ही विजयनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। एसीपी पराग सैनी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है हालांकि वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए जांच जारी है।

    इस घटना में राहत की बात यह रही कि किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई और पूरा परिवार सुरक्षित बच गया। स्थानीय लोगों और राहगीरों की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया। पुलिस अब मामले की विस्तृत जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि तकनीकी खराबी के अलावा कोई अन्य कारण तो जिम्मेदार नहीं था।

  • किसानों के पैसे पर हाथ साफ, 41 लाख के घोटाले में 4 गिरफ्तार, 35 लाख जमीन में छिपाए मिले

    किसानों के पैसे पर हाथ साफ, 41 लाख के घोटाले में 4 गिरफ्तार, 35 लाख जमीन में छिपाए मिले


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सहकारी समिति से जुड़े एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है, जहां करीब 41 लाख रुपए के गबन के मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह पूरा मामला ईटखेड़ी थाना क्षेत्र के अंतर्गत प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति रायपुर से जुड़ा है, जहां किसानों से वसूली गई रकम में भारी गड़बड़ी सामने आई।

    जानकारी के अनुसार 26 और 27 मार्च को किसानों से लगभग 41 लाख 94 हजार रुपए की ऋण वसूली की गई थी। लेकिन इस राशि को बैंक या समिति के खाते में जमा करने के बजाय उसमें हेरफेर कर दिया गया। 2 अप्रैल को जब मामले की शिकायत समिति के प्रशासक रामचरण सिलावट ने दर्ज कराई तो पूरे मामले की जांच शुरू हुई।

    पुलिस ने शिकायत के बाद विशेष टीम का गठन किया और जांच को आगे बढ़ाते हुए बड़े पैमाने पर सीसीटीवी फुटेज खंगाले। करीब 100 से अधिक कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच के बाद पुलिस को अहम सुराग मिले, जिसके आधार पर चार संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान चारों आरोपियों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।

    जांच में चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने जमीन में गाड़ी गई एक लोहे की पेटी से भारी मात्रा में नकदी बरामद की। बताया जा रहा है कि लगभग 35 लाख रुपए इसी तरह जमीन में छिपाकर रखे गए थे। इसके अलावा कुल 33 लाख 46 हजार 430 रुपए की नगद बरामदगी पुलिस ने की है।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस घोटाले में अभी और लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिसकी जांच जारी है। गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और नरेश नागर नाम के एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लेकर भी पूछताछ की गई है।

    इस पूरे मामले ने सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों की मेहनत की कमाई में हुई इस तरह की गड़बड़ी ने स्थानीय स्तर पर भी नाराजगी बढ़ा दी है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि गबन की योजना कितने समय से चल रही थी और इसमें किन किन लोगों की भूमिका रही है।

  • सतना के देवलहा बीट में आग का तांडव वनकर्मी बेहोश सैकड़ों पेड़ पौधे जलकर नष्ट

    सतना के देवलहा बीट में आग का तांडव वनकर्मी बेहोश सैकड़ों पेड़ पौधे जलकर नष्ट

    सतना । सतना जिले के वन मंडल अंतर्गत मझगवां रेंज के रोहनिया गांव के पास स्थित देवलहा बीट में अचानक भड़की भीषण आग ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया आग कक्ष क्रमांक पी 839 और पी 840 के जंगल में अज्ञात कारणों से शुरू हुई और देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया तेज हवाओं और सूखी झाड़ियों के कारण आग ने इतनी तेजी पकड़ी कि लगभग पंद्रह से बीस हेक्टेयर वन क्षेत्र इसकी चपेट में आ गया

    आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लपटें दस से बारह फीट तक ऊंची उठ रही थीं और दूर से ही धुएं का गुबार आसमान में फैलता नजर आ रहा था आसपास के ग्रामीणों में भी दहशत का माहौल बन गया वहीं वन विभाग को जैसे ही सूचना मिली पूरा अमला तत्काल मौके पर पहुंचा और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया

    प्रभारी रेंजर अभिषेक मिश्रा के अनुसार आग मुख्य रूप से लेंटाना और सूखी झाड़ियों में लगी थी लेकिन हवा की तेज रफ्तार और तुलसा की सूखी वनस्पतियों ने इसे और भड़काने का काम किया जिससे आग पर नियंत्रण पाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि आग तेजी से फैलते हुए बड़े हिस्से को अपनी चपेट में लेती चली गई

    आग बुझाने के लिए वन विभाग के करीब पच्चीस सुरक्षा श्रमिकों की टीम को मैदान में उतारा गया जिन्होंने फायर बीटर्स और लीफ ब्लोअर जैसे उपकरणों की मदद से लगातार सात घंटे तक संघर्ष किया यह एक कठिन और जोखिम भरा अभियान था जिसमें हर पल सतर्कता और साहस की जरूरत थी आखिरकार लंबी मशक्कत के बाद रात करीब आठ बजे आग पर काबू पाया जा सका

    इस दौरान आग की भीषण गर्मी और धुएं के कारण दो वनकर्मी रामकृष्ण पांडेय और गोविंद यादव बेहोश हो गए दोनों को तत्काल मझगवां के शासकीय चिकित्सालय ले जाया गया जहां उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया डॉक्टरों के अनुसार दोनों की हालत अब स्थिर है और लगभग तीन घंटे बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई

    इस घटना ने एक बार फिर जंगलों में बढ़ते आग के खतरे और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं गर्मी के मौसम में सूखी वनस्पतियां और तेज हवाएं ऐसी घटनाओं को और खतरनाक बना देती हैं वन विभाग के लिए यह एक चेतावनी भी है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और अधिक सतर्कता और मजबूत इंतजाम किए जाएं

    देवलहा का यह अग्निकांड न केवल वन संपदा के नुकसान की कहानी कहता है बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए कितनी बड़ी चुनौती सामने खड़ी है समय रहते ठोस कदम उठाना अब बेहद जरूरी हो गया है

  • एमपी में तेज गर्मी का कहर: पारा 43 डिग्री के पार, खजुराहो सबसे गर्म, आज 16 जिलों में लू का अलर्ट

    एमपी में तेज गर्मी का कहर: पारा 43 डिग्री के पार, खजुराहो सबसे गर्म, आज 16 जिलों में लू का अलर्ट

    भोपाल । मध्य प्रदेश में गर्मी ने अब अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। शुक्रवार को सीजन में पहली बार तापमान 43 डिग्री के पार पहुंच गया। सबसे अधिक तापमान 43.2 डिग्री सेल्सियस छतरपुर के खजुराहो में दर्ज किया गया। इसके अलावा प्रदेश के 9 शहरों में तापमान 42 डिग्री से ऊपर रहा।

    आज कई जिलों में लू की चेतावनी

    मौसम विभाग ने शनिवार के लिए 16 जिलों में हीट वेव यानी लू चलने की चेतावनी जारी की है। इनमें अलीराजपुर झाबुआ रतलाम धार रायसेन नर्मदापुरम बैतूल छिंदवाड़ा पांढुर्णा सिवनी मंडला बालाघाट निवाड़ी टीकमगढ़ छतरपुर और पन्ना शामिल हैं।

    स्कूलों के समय में बदलाव

    भीषण गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने स्कूलों के समय में बदलाव किया है। भोपाल में स्कूल अब सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक संचालित होंगे। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। इसके अलावा नर्मदापुरम ग्वालियर बालाघाट मैहर रतलाम छिंदवाड़ा नरसिंहपुर रायसेन डिंडोरी अनूपपुर और उमरिया में भी स्कूल नए समय अनुसार चलेंगे।

    कई शहरों में तापमान 42 डिग्री के पार

    शुक्रवार को प्रदेश के कई जिलों में तापमान तेजी से बढ़ा। उमरिया में 42.9 डिग्री टीकमगढ़-नौगांव में 42.8 डिग्री नौगांव में 42.6 डिग्री मंडला में 42.5 डिग्री दमोह गुना और दतिया में 42.2 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं सागर और सतना में 41.8 डिग्री छिंदवाड़ा में 41.6 डिग्री नर्मदापुरम और शाजापुर में 41.4 डिग्री जबकि सीधी नरसिंहपुर रीवा और मलाजखंड में 41.2 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    बड़े शहरों का हाल
    प्रदेश के प्रमुख शहरों में जबलपुर सबसे गर्म रहा जहां तापमान 42 डिग्री तक पहुंचा। भोपाल और ग्वालियर में 41.3 डिग्री इंदौर में 40.6 डिग्री और उज्जैन में 40.5 डिग्री दर्ज किया गया। खजुराहो सहित कई क्षेत्रों में लू के हालात भी बने रहे।

    लू से बचाव के लिए सलाह
    मौसम विभाग ने बढ़ती गर्मी को देखते हुए लोगों के लिए एडवायजरी जारी की है। इसमें दिनभर पर्याप्त पानी पीने शरीर को हाइड्रेट रखने और दोपहर के समय तेज धूप से बचने की सलाह दी गई है। साथ ही हल्के और सूती कपड़े पहनने तथा बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है।

  • MP: नीमच में ट्रैक पर रखे पत्थरों से टकराई रतलाम-उदयपुर ट्रेन, जोरदार धमाके से अटकी यात्रियों की सांसें …

    MP: नीमच में ट्रैक पर रखे पत्थरों से टकराई रतलाम-उदयपुर ट्रेन, जोरदार धमाके से अटकी यात्रियों की सांसें …


    नीमच।
    शुक्रवार शाम रतलाम से उदयपुर (Ratlam to Udaipur) जा रही ट्रेन के यात्रियों की सांसें उस वक्त अटक गईं, जब साजिश के तहत ट्रैक पर रखे गए भारी पत्थरों से ट्रेन टकरा गई। तेज रफ्तार ट्रेन के पहियों के नीचे पत्थरों के आने से हुए जोरदार धमाके (Loud bangs) और झटकों से पूरी बोगियां दहल उठीं। गनीमत रही कि ट्रेन की गति अधिक होने के कारण बड़ा हादसा टल गया और इंजन सुरक्षित रहा। घटना के बाद ट्रेन 12 मिनट तक ट्रैक पर खड़ी रही, जिससे यात्रियों में भारी दहशत फैल गई।


    क्या है पूरा मामला

    मिली जानकारी के अनुसार रतलाम से शाम 5:10 बजे रवाना हुई उदयपुर सिटी एक्सप्रेस (Udaipur City Express.) जैसे ही नीमच जिले (Neemuch district) के हरकिया खाल क्षेत्र से गुजर रही थी, तभी किसी अज्ञात शरारती तत्व द्वारा मुख्य ट्रैक पर रखे बड़े पत्थरों के ट्रेन से टकराकर चकनाचूर होने से तेज धमाका हुआ। आवाज इतनी जोरदार थी कि आसपास के लोग भी सहम गए।

    ट्रेन के अचानक झटके से रुकने और तेज धमाके की आवाज सुनकर अंदर बैठे यात्रियों में हड़कंप मच गया। लोग अपनी सीटों से नीचे गिर गए। महिला और बच्चे घबराकर रोने-चिल्लाने लगे। यात्रियों को लगा कि ट्रेन पटरी से उतर गई है या कोई बड़ा धमाका हुआ है।

    लोको पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया। इसके बाद सुरक्षा की जांच की गई। करीब 12 मिनट की मशक्कत और पटरी के मुआयने के बाद जब सब कुछ सामान्य पाया गया, तब जाकर ट्रेन को आगे रवाना किया गया। इस दौरान यात्रियों की सांसें हलक में अटकी रहीं।

    सूचना मिलते ही आरपीएफ और स्थानीय पुलिस प्रशासन अलर्ट हो गया है। ट्रैक पर पत्थर किसने रखे और इसके पीछे मंशा क्या थी? यह जांच का विषय है। घटना ने एक बार फिर रेल सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला जा रहा है ताकि साजिश रचने वालों की पहचान की जा सके।

  • शिक्षा से वंचित खमरिया 9 साल बाद भी स्कूल नहीं ग्रामीणों का गुस्सा बरकरार

    शिक्षा से वंचित खमरिया 9 साल बाद भी स्कूल नहीं ग्रामीणों का गुस्सा बरकरार


    कटनी । कटनी जिले की ढीमरखेड़ा तहसील के ग्राम खमरिया में शिक्षा को लेकर एक पुरानी घोषणा आज भी अधूरी पड़ी है। वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनदर्शन यात्रा के दौरान गांव में हाई स्कूल खोलने की घोषणा की थी, लेकिन नौ साल बीत जाने के बाद भी यह घोषणा जमीन पर उतरती नजर नहीं आई।

    तहसील मुख्यालय से करीब 28 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में हाई स्कूल की सुविधा नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। खासकर बेटियों की शिक्षा पर इसका अधिक प्रभाव पड़ रहा है, जिससे कई परिवारों को मजबूरी में बच्चों की पढ़ाई बीच में ही रोकनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने बार-बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    गांव में इस मुद्दे को लेकर आक्रोश इस कदर बढ़ा कि पिछले विधानसभा चुनाव में ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार तक कर दिया था। उस समय भाजपा प्रत्याशी और वर्तमान विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह ने गांव पहुंचकर लोगों को आश्वासन दिया था कि चुनाव जीतने के बाद स्कूल खोलना उनकी प्राथमिकता होगी।

    विधायक बनने के बाद उन्होंने इस मुद्दे को उठाते हुए कटनी से लेकर भोपाल तक कई बार पत्राचार किया। उन्होंने शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर मामला विधानसभा में भी उठाया। वहीं शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह भी पिछले कुछ वर्षों से लगातार शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखकर इस समस्या के समाधान की मांग करती रही हैं।

    स्थानीय जनप्रतिनिधियों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी अधिकारियों की सुस्ती पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इस तरह की लापरवाही से सरकार की छवि प्रभावित होती है और जनता का विश्वास कमजोर होता है।

    इस मामले पर विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि उन्होंने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है और हाल ही में शिक्षा मंत्री से मुलाकात के बाद आश्वासन मिला है कि आगामी नए शैक्षणिक सत्र में खमरिया में हाई स्कूल शुरू कर दिया जाएगा।

    वहीं शिक्षा विभाग के जबलपुर संभाग के संयुक्त संचालक अरुण इंगले ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था, लेकिन अब जिला शिक्षा अधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री की घोषणा पूरी क्यों नहीं हुई, इसकी जांच की जाएगी और जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा।

    यह मामला न केवल एक अधूरी सरकारी घोषणा का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी किस तरह बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि वर्षों से लंबित यह वादा कब तक हकीकत में बदलता है।