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  • एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन ने दोनों राज्यों के साझा विकास व सांस्कृतिक समन्वय को दी नई दिशा :मोहन यादव

    एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन ने दोनों राज्यों के साझा विकास व सांस्कृतिक समन्वय को दी नई दिशा :मोहन यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि काशी विश्वनाथ की पावन नगरी वाराणसी में एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन का मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के लिए सौभाग्य का विषय है। इस आयोजन ने निर्यात सहयोग, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक पर्यटन को नई दी है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को सम्मेलन के बाद वाराणसी में मीडिया से संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन मुख्यतः एक जिला-एक उत्पाद, जीआई टैग उत्पादों, निर्यात योग्य उत्पादों, पारंपरिक शिल्प और क्षेत्रीय विशेषताओं को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने पर केंद्रित रहा। दोनों राज्यों के विशिष्ट उत्पादों को प्रोत्साहन देते हुए उनके ब्रांडिंग, विपणन एवं निर्यात को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया। औद्योगिक सहयोग, निवेश संवर्धन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं पर्यटन विकास को नई गति प्रदान करने के उद्देश्य से विचार-विमर्श हुआ।

    उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों ने परस्पर समन्वय और सहयोग से समृद्धि और विकास की दिशा में लंबी छलांग लगाने का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस सम्मेलन की सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार माना तथा उत्तर प्रदेश के मंत्रीद्वय नंद गोपाल गुप्ता “नंदी” तथा राकेश सचान को धन्यवाद दिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण का दोनों राज्यों से अटूट संबंध है। भगवान श्रीराम ने अवतार के बाद जहां वनवास का लंबा समय मध्य प्रदेश के क्षेत्रों में गुजारा। भगवान भी मथुरा के बाद श्रीकृष्ण शिक्षा ग्रहण करने उज्जैन पधारे। इसके साथ ही मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर धार्मिक आस्था के कई केन्द्र विद्यमान हैं। धार्मिक आस्था की इस समानता को देखते हुए दोनों राज्यों के बीच धार्मिक सर्किट विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।


    विभिन्न औद्योगिक संगठनों एवं व्यापारिक संस्थाओं की रही सहभागिता

    उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य ओडीओपी, जीआई टैग, शिल्प, कृषि एवं फूड उत्पादकों, उद्योग जगत, निवेशकों, शिल्पकारों एवं नीति-निर्माताओं को एक वृहद एवं साझा मंच प्रदान करना था। कार्यक्रम में कुल लगभग 400 प्रतिभागियों की उपस्थिति रही। विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों की व्यापक सहभागिता ने कार्यक्रम को संवाद, सहयोग एवं अनुभवों की साझेदारी का एक सशक्त एवं प्रभावी मंच बनाया।

    सम्मेलन में कारीगरों, उद्यमियों और निर्यातकों को प्रत्यक्ष संवाद का मिला अवसर
    मुख्यमंत्री ने कहा विशुद्ध रूप से ओडीओपी उत्पादों के एक्सचेंज और आपसी सीख (Exchange & Learning Platform) के लिए अभिकल्पित किया गया था, जहां दोनों राज्यों के कारीगरों, उद्यमियों और निर्यातकों को प्रत्यक्ष संवाद का अवसर मिला। कार्यक्रम ओडीओपी एक्सचेंज आधारित प्रदर्शनी, राज्यों के बीच सहयोग, साझा ब्रांडिंग, संयुक्त निर्यात और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभरा।


    महत्वपूर्ण एमओयू हुए हस्ताक्षरित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सम्मेलन में मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच दो महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। पहला एमओयू श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास प्राधिकरण एवं श्री महाकाल मंदिर प्रबंधन समिति के मध्य हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत वाराणसी और उज्जैन में हुए विकास कार्यों से दोनों स्थानों पर धार्मिक पर्यटन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप दोनों शहरों की अर्थव्यवस्था में बदलाव आया है। इन समानताओं को देखते हुए बाबा विश्वनाथ और महाकाल मंदिर के प्रबंधन से संबंधित अनुभवों को साझा करने के उद्देश्य से यह एमओयू किया गया है। दूसरा एमओयू वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट की पहल को मजबूत करने, स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने तथा अंतर्राज्यीय सहयोग के माध्यम से आर्थिक विकास को गति प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया।


    विशेष प्रदर्शनी का आयोजन

    मुख्यमंत्री ने बताया कि सम्मेलन में ओडीओपी उत्पादों पर एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया। प्रदर्शनी में मध्य प्रदेश के 14 और उत्तर प्रदेश के 07 जिलों के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP)” उत्पादों का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में दोनों राज्यों के प्रदर्शकों द्वारा हस्तशिल्प, वस्त्र, खाय उत्पाद, जीआई टैग उत्पाद एवं अन्य स्थानीय विशिष्ट उत्पाद प्रदर्शित किए गए।


    सम्मेलन में दो समानांतर सत्रों का आयोजन

    उन्होंने बताया कि सम्मेलन में दो समानांतर सत्रों का आयोजन भी किया गया। जॉइंट आर्टिजन वर्कशॉप सम्मेलन में मध्य प्रदेश के चंदेरी एवं महेश्वरी ब्रांड के कारीगरों ने उत्तर प्रदेश के बनारसी सिल्क कारीगरों के साथ प्रत्यक्ष संवाद किया। पारंपरिक बुनकरी तकनीकों, डिज़ाइन नवाचारों साझा ब्रांडिंग रणनीतियों और संयुक्त खरीदार पहुंच, उन्नत पैकेजिंग, गुणवत्ता मानकों एवं निर्यात-उन्मुख उत्पाद विकास पर विचार-विमर्श किया गया। दूसरा समानांतर सत्र टूरिज्म राउंड टेबल सम्मेलन रहा। इसमें उत्तर प्रदेश एवं मध्यप्रदेश के पर्यटन विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, प्रमुख दूर ऑपरेटर्स तथा आईआरसीटीसी के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता की। यह पहल दोनों राज्यों में धार्मिक पर्यटन को संगठित करने, पर्यटक अनुभव को बेहतर बनाने तथा स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को सशक्त करने की दिशा में प्रभावी सिद्ध हुई।


    काशी विश्वनाथ धाम में महानाट्य विक्रमादित्य का 3, 4 और 5 अप्रैल को मंचन

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग और विक्रमादित्य शोध संस्थान का प्रयास है कि सम्राट विक्रमादित्य के जीवन से जुड़े विविध पहलु तथा उनका विराट व्यक्तित्व पूरे देश के लोगों के सामने आए। इस उद्देश्य से काशी विश्वनाथ धाम में महानाट्य विक्रमादित्य का 3, 4 और 5 अप्रैल को मंचन किया जा रहा है। इस नाट्य से विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, दयालुता, सुशासन और लोकतंत्र के प्रति उनकी गहरी आस्था बेहतर तरीके से सबके सामने आएगी। नाटक में हाथी, घोड़े, ऊंट और पालकी शामिल होंगी। इस नाटक में 300 से 400 कलाकार सम्राट विक्रमादित्य के तत्कालीन समय को जीवंत करेंगे। इस आयोजन में उत्तर प्रदेश सरकार का पूर्ण सहयोग हमें प्राप्त हो रहा है।

    दोनों राज्य सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी संयुक्त रूप से कार्य करने की ओर अग्रसर
    मुख्यमंत्री ने कहा कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना दोनों राज्यों में सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक गतिविधियों को जल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी संयुक्त रूप से कार्य करने की ओर अग्रसर हैं।


    सम्मेलन सांस्कृतिक समन्वय का एक प्रभावशाली मंच बना

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन दोनों राज्यों के लिए विकास और सांस्कृतिक समन्वय का एक प्रभावशाली मंच बना। इस सम्मेलन ने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच आपसी सहयोग को सुदृढ़ किया। इस पहल ने निवेश आकर्षण, रोजगार के नए अवसरों के सृजन, पारंपरिक शिल्पों के संरक्षण, निर्यात संवर्धन और पर्यटन विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश क्षेत्रीय संतुलित विकास को सशक्त करते हुए आर्थिक प्रगति के नए आयाम स्थापित करने की ओर अग्रसर होंगे।


    महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ की तैयारियों का निरीक्षण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाराणसी स्थित बीएलडब्ल्यू मैदान पहुँचकर आगामी 3 से 5 अप्रैल तक आयोजित होने वाले भव्य महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ की तैयारियों का सूक्ष्म निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थल की व्यवस्थाओं, मंच सज्जा और दर्शकों की सुविधाओं का जायजा लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। न्याय और शौर्य के प्रतीक महाराजा विक्रमादित्य के कालजयी इतिहास को जीवंत करने वाला यह आयोजन न केवल कला का उत्कृष्ट संगम है, बल्कि हमारी गौरवशाली विरासत के पुनरुद्धार का एक सशक्त माध्यम भी है।

  • कृषि बजट में 90 हजार करोड़ का प्रावधान, किसानों के कल्याण के लिए समर्पित है सरकार : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

    कृषि बजट में 90 हजार करोड़ का प्रावधान, किसानों के कल्याण के लिए समर्पित है सरकार : उप मुख्यमंत्री देवड़ा


    भोपाल ।
    मध्य प्रदेश में वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाते हुए राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में कृषि क्षेत्र के लिए 90 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो किसानों के कल्याण और कृषि विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    उपमुख्यमंत्री देवड़ा मंगलवार को नीमच जिले के जावद में मंडी प्रांगण में आयोजित चार दिवसीय जहर मुक्त जीरो बजट कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पूरे वर्ष कृषि और किसानों से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीकों और नई पद्धतियों से जोड़ने का प्रयास कर रही है।उपमुख्यमंत्रीदेवड़ा ने किसानों से आह्वान किया कि प्रशिक्षण शिविर में उन्होंने जो भी नई तकनीकें और अनुभव प्राप्त किए हैं, उन्हें अपनी खेती में लागू करें ताकि उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक और कम लागत वाली खेती की दिशा में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं।

    उपमुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसानों के हित में अनेक योजनाएं संचालित कर रही हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि आयुष्मान भारत के माध्यम से गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये तक के नि:शुल्क उपचार की सुविधा मिल रही है, वहीं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के जरिए किसानों के खातों में सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाई जा रही है।

    देवड़ा ने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्र में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करे तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना अवश्य साकार होगा। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन की सराहना करते हुए किसानों को आधुनिक तकनीक और ज्ञान के साथ खेती को और अधिक समृद्ध बनाने का संदेश दिया। समारोह में बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। इस अवसर पर विधायक ओमप्रकाश सखलेचा, दिलीप सिंह परिहार, अनिरूद्ध मारू सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • मप्र विस अध्यक्ष ने 2047 के विकसित भारत के लिए युवा विधायकों को दिलाए पांच संकल्प

    मप्र विस अध्यक्ष ने 2047 के विकसित भारत के लिए युवा विधायकों को दिलाए पांच संकल्प


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार हो सकता है, जब हमारे युवा विधायक अपने कर्तव्यों का निष्ठा और दूरदर्शिता के साथ पालन करें। इस तथ्य को रेखांकित करते हुए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के दो दिवसीय युवा विधायक सम्मेलन (राष्ट्रकुल संसदीय संघ भारत क्षेत्र जोन-6) के अंतिम सत्र में मंगलवार को विस अध्यक्ष ने युवा विधायकों को पांच संकल्प दिलाए।

    विधान सभा अध्यक्ष तोमर ने युवा विधायकों को संकल्प दिलाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विकसित भारत 2047 का विजन केवल सरकार का नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का संकल्प है। इस संकल्प को पूरा करने के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। सम्मेलन में लोकतंत्र में नागरिकों की भागीदारी एवं विकसित भारत 2047 में विधायकों की भूमिका पर विचार व्यक्त किये गये। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को साकार करने के लिए युवा विधायकों को समसामयिक परिस्थितियों में देश के प्रति समर्पण भाव से कार्य करना होगा। नेतृत्व विकास के लिए सकारात्मक सोच और अनुशासन से कार्य करना होगा।

    उन्होंने कहा कि युवा विधायक चुनौतियों का समाधान कर अपनी नेतृत्व क्षमता का नवाचार में उपयोग करें। युवा नेतृत्व समाज की सोच में परिवर्तन ला सकता है। सुशासन के क्षेत्र में प्रयास हों और विकास को जनआंदोलन बनाया जाये। लोकतंत्र की मजबूती के लिए नागरिकों का जागरूक होना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि युवा विधायकों ने टेक्नोलॉजी, स्वच्छता, सोलर एनर्जी, शिक्षा गुणवत्ता, अधोसंरचना, जनसंवाद और जनकल्याण पर विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने युवा विधायकों को सीख दी कि अध्ययन का विशेष महत्व होता है और विद्यार्थी भाव सदैव बना रहना चाहिए।


    युवा विधायकों के पांच संकल्प

    संकल्प–1: हम, युवा विधायक सम्मेलन में यह दृढ संकल्प लेते है कि लोकतंत्र की सशक्तता का मूल आधार नागरिकों की सक्रिय भागीदारी है। अत: एक मजबूत और समावेशी लोकतंत्र के निर्माण में हम युवा विधायक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेंगे।

    संकल्प–2: हम, युवा विधायक समाज की नई ऊर्जा, नवाचार और परिवर्तन की सोच का प्रतिनिधित्व करते हुये नागरिकों और शासन के बीच सेतु का कार्य करेगे, हम जनसरोकारों को समझकर आम जनता की समस्याओं को विधानसभा तक पहुँचायेंगे तथा पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी नीतियों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभायेंगे ताकि लोकतांत्रिक संस्थायें जनता के प्रति उत्तरदायी हो सके।

    संकल्प–3: हम, नागरिकों को जागरूक और सशक्त बनाने हेतु सतत्/सार्थक प्रयास करेंगे ताकि वे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भाग लें. तकनीक और नवाचार का उपयोग कर शासन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दीर्घकालिक नीतियाँ बनाने एवं युवाओं, महिलाओं और वंचित वर्गों की आवाज़ को सशक्त बनाने हेतु सक्रिय भूमिका निभायेंगे जिससे जनता और उनकी विधायिकाओं के बीच प्रभावी संपर्क स्थापित हो सके तथा सार्थक सहभागी शासन सुनिश्चित किया जा सके।

    संकल्प–4: हम युवा विधायक, राजनीतिक दबाव, संसाधनों की कमी, सामाजिक असमानताएँ और बदलती वैश्विक परिस्थितियों का सामना करते हुये ईमानदारी, प्रतिबद्धता और दूरदर्शिता के साथ कार्य करने के लिये दृढ संकल्पित रहेंगे, ताकि हमारे राष्ट्र की लोकतांत्रिक परम्परायें और मूल्य और अधिक गहरे तथा सशक्त बन सके।

    संकल्प–5: हम यह भी संकल्प लेते हैं कि हम स्वयं भी एक जागरूक नागरिक बनेंगे, विधायिकाओं में होने वाली बहसों और चर्चाओं में जनप्रतिनिधियों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु शोध एवं अनुसंधान सहायता को सुदृढ करेंगे. लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी निभाएँगे और ऐसे नेतृत्व का समर्थन करेंगे जो देश को विकसित भारत 2047 की दिशा में आगे बढ़ाए।

  • जनता की समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई: कलेक्टर बोले- लापरवाही बर्दाश्त नहीं

    जनता की समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई: कलेक्टर बोले- लापरवाही बर्दाश्त नहीं


    बैतूल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि आम जनता से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि शिकायतों के निराकरण में ढिलाई पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें निलंबन जैसे कदम भी शामिल हैं।

    मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित इस जनसुनवाई में बड़ी संख्या में नागरिक अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। कलेक्टर ने स्वयं सभी आवेदनों को गंभीरता से सुना और कई मामलों का मौके पर ही समाधान कराया। जिन प्रकरणों का तत्काल निराकरण संभव नहीं था, उनके लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की गई, ताकि शिकायतों का जल्द निपटारा हो सके।

    इस जनसुनवाई में कुल 83 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें सबसे अधिक मामले राजस्व, अतिक्रमण, रास्ते के विवाद और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े थे। कलेक्टर ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे प्राथमिकता के आधार पर इन मामलों का समाधान सुनिश्चित करें और लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा करें।

    जनसुनवाई के दौरान कुछ मामलों में लापरवाही सामने आने पर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर की और संबंधित पटवारी के निलंबन के निर्देश भी दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करना गंभीर लापरवाही है और ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

    कलेक्टर ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि वे क्षेत्र में सक्रिय रहकर समस्याओं का समाधान करें, ताकि लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम है। कुल मिलाकर, बैतूल में आयोजित इस जनसुनवाई ने प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करने का संदेश दिया है, जहां लापरवाही पर सख्ती और त्वरित समाधान को प्राथमिकता दी जा रही है।

  • युवा विधायक सम्मेलन में गरजे हेमंत कटारे: खाते में पैसे डालना नहीं, रोजगार देना ही सशक्तिकरण

    युवा विधायक सम्मेलन में गरजे हेमंत कटारे: खाते में पैसे डालना नहीं, रोजगार देना ही सशक्तिकरण


    भोपाल । भोपाल में आयोजित युवा विधायक सम्मेलन के दौरान मध्यप्रदेश विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने फ्रीबीज यानी मुफ्त योजनाओं को लेकर बड़ा और विवादित बयान दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि महिलाओं के खातों में सीधे पैसे डालना सशक्तिकरण नहीं है बल्कि यह विकसित भारत के लक्ष्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    कटारे ने मंच से कहा कि आज जनप्रतिनिधि सच बोलने से डरते हैं। वे इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि उनके बयान से कोई वर्ग नाराज न हो जाए लेकिन इस डर के कारण देशहित के मुद्दों पर खुलकर चर्चा नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि अगर हम नाराजगी के डर से ही घबराते रहेंगे तो देश की सेवा कैसे करेंगे।

    महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल खातों में 10 हजार रुपये डाल देने से महिलाएं सशक्त नहीं हो जातीं। हर महिला में अपनी क्षमता और कौशल होता है जिसे विकसित कर उसे आत्मनिर्भर बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यदि युवाओं को सशक्त बनाना है तो उन्हें रोजगार देना होगा न कि मुफ्त पैसा।

    कटारे ने अपने तर्क को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जब लोगों की जरूरतें बिना काम किए ही पूरी होने लगती हैं तो उनके अंदर काम करने की प्रेरणा कम हो जाती है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है लेकिन यदि आवश्यकताएं ही समाप्त कर दी जाएं तो नवाचार और कौशल विकास कैसे होगा।

    सरकारों को सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि यदि आर्थिक सहायता देनी ही है तो उसे शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में दिया जाना चाहिए। गरीबों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा और जरूरतमंदों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराना ज्यादा प्रभावी कदम होगा बजाय इसके कि सीधे नकद राशि बांटी जाए।

    इस दौरान हेमंत कटारे ने अफसरशाही और न्यायपालिका की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश में ब्यूरोक्रेसी की जवाबदेही तय नहीं है जबकि जनप्रतिनिधियों को हर पांच साल में जनता के सामने जवाब देना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि अधिकारियों और न्यायपालिका की भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

    अपने संबोधन के अंत में उन्होंने युवा विधायकों को नसीहत देते हुए कहा कि कोई भी बयान देने से पहले यह जरूर सोचें कि वह देश और जनता के हित में है या नहीं। उन्होंने कहा कि जनता ने जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारी दी है इसलिए उनके हर फैसले और बयान में जनहित सर्वोपरि होना चाहिए।

    कुल मिलाकर हेमंत कटारे का यह बयान फ्रीबीज और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर चल रही राष्ट्रीय बहस को और तेज कर सकता है जिसमें विकास और सामाजिक सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं।

  • सेवा भाव ही प्राथमिकता: राज्यपाल श्री पटेल ने सिकल सेल और टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा की

    सेवा भाव ही प्राथमिकता: राज्यपाल श्री पटेल ने सिकल सेल और टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा की


    भोपाल । भोपाल में राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि दीन-दुखियों की सेवा मानवता की सेवा है और इससे आत्मसंतोष मिलता है। उन्होंने जोर दिया कि मध्यप्रदेश को सिकल सेल और टी.बी. मुक्त बनाने के प्रयासों में सेवा भाव को सर्वोपरि रखना चाहिए।

    राज्यपाल श्री पटेल मंगलवार को लोकभवन में सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन 2047 एवं टी.बी. मुक्त भारत अभियान के तहत लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और आयुष विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में उपमुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल और आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    श्री पटेल ने सिकल सेल रोगियों को आयुष्मान योजना के तहत दी जाने वाली सुविधाओं और पात्रता की जानकारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने 0 से 40 वर्ष तक के व्यक्तियों की विशेष जांच, जांच शिविरों में आमजन को जानकारी देने और जिलेवार उपचार की समीक्षा पर जोर दिया।

    राज्यपाल ने टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों से सक्रिय सहयोग की अपील की। विशेषकर जनजातीय क्षेत्रों में टी.बी. रोगियों के पोषण आहार वितरण में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए। नि:क्षय मित्रों की संख्या बढ़ाकर पोषण आहार वितरण को मजबूत करने का भी मार्गदर्शन किया।

    खनन क्षेत्रों में निवासरत और कार्यरत व्यक्तियों की टी.बी. सघन जांच कराने का निर्देश भी राज्यपाल ने दिया। उन्होंने सिकल सेल कार्यक्रम के अंतर्गत जाँच लक्ष्य, जेनेटिक कार्ड वितरण, हाईड्राक्सी यूरिया की उपलब्धता, गर्भवती माताओं और शिशुओं का प्रबंधन, आयुष्मान कार्ड वितरण, दिव्यांगता प्रमाण पत्र वितरण और 125 दिवसीय जागरूकता अभियान की विस्तृत समीक्षा की।

    उपमुख्यमंत्री और लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। आयुष विभाग के प्रमुख सचिव श्री शोभित जैन ने जिलेवार दवा वितरण, घर-घर दवा वितरण, जाँच और अनुसूचित जनजाति बाहुल्य जिलों में विशेष प्रयासों की जानकारी दी।

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. सलोनी सिडाना ने राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की उपलब्धियों, सघन स्क्रीनिंग, 100 दिवसीय नि:क्षय अभियान, नि:क्षय मित्र और पोषण आहार वितरण की जानकारी साझा की। राज्यपाल के निर्देशानुसार अनुसूचित जनजाति छात्रावासों में विद्यार्थियों की टी.बी. जाँच, परामर्श और उपचार की प्रक्रिया भी साझा की गई।

    बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री दीपक खांडेकर, लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण के अपर मुख्य सचिव श्री अशोक कुमार बर्णवाल, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय प्रकोष्ठ की सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण एवं आयुष विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और लोकभवन के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

  • युवा विधायक सम्मेलन का समापन, उप सभापति बोले- युवाओं की सक्रियता से पूरा होगा विकसित भारत का सपना

    युवा विधायक सम्मेलन का समापन, उप सभापति बोले- युवाओं की सक्रियता से पूरा होगा विकसित भारत का सपना


    भोपाल । उप सभापति राज्यसभा हरिवंश सिंह ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेज गति से उभरती अर्थव्यवस्था है। भारत चुनौतियों से निपट कर नया इतिहास बना रहा है और आने वाली सदी भारत की होगी। इसके लिए सकारात्मक और दूरदर्शी सोच के साथ कार्य करना आवश्यक है। उप सभापति राज्यसभा सिंह मंगलवार को मप्र विधानसभा में आयोजित मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के दो दिवसीय युवा विधायक सम्मेलन (राष्ट्रकुल संसदीय संघ भारत क्षेत्र जोन-6) के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन में लोकतंत्र में नागरिकों की भागीदारी एवं विकसित भारत@2047 में विधायकों की भूमिका पर विचार व्यक्त किये गये।

    उप सभापति राज्यसभा सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि युवा देश का इतिहास, दिशा और भविष्य बदल सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत का सपना युवाओं की सक्रियता से ही पूरा होगा। भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में विकास की यही गति जारी रही तो वर्ष@2047 के पहले भी भारत विकसित राष्ट्र बन सकता है।

    विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा है कि विकसित भारत@2047 की परिकल्पना को साकार करने के लिए युवा विधायकों को समसामयिक परिस्थितियों में देश के प्रति समर्पण भाव से कार्य करना होगा। नेतृत्व विकास के लिए सकारात्मक सोच और अनुशासन से कार्य करना होगा। विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने युवा विधायकों को संकल्प दिलाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का विकसित भारत@2047 का विजन केवल सरकार का नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का संकल्प है। इस संकल्प को पूरा करने के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। युवा विधायक चुनौतियों का समाधान कर अपनी नेतृत्व क्षमता का नवाचार में उपयोग करें। युवा नेतृत्व समाज की सोच में परिवर्तन ला सकता है। सुशासन के क्षेत्र में प्रयास हों और विकास को जनआंदोलन बनाया जाये। लोकतंत्र की मजबूती के लिए नागरिकों का जागरूक होना अनिवार्य है। तोमर ने बताया कि युवा विधायकों ने टेक्नोलॉजी, स्वच्छता, सोलर एनर्जी, शिक्षा गुणवत्ता, अधोसंरचना, जनसंवाद और जनकल्याण पर विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने युवा विधायकों को सीख दी कि अध्ययन का विशेष महत्व होता है और विद्यार्थी भाव सदैव बना रहना चाहिए।

    कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसेासिएशन इंडिया रीजन के डॉ. राहुल कराड़ ने कहा कि हर विधानसभा में इस तरह के सम्मेलन किये जाना चाहिए। समाज का रूख बदलने में विधायकों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। विधायक अपने-अपने क्षेत्र के ब्रांड एम्बेसेडर होते है। उन्होंने ट्रेनिंग और एजुकेशन के साथ एआई के महत्व को भी बताया।

    सम्मेलन में विधानसभा के सात दशक पर केन्द्रित विधायिनी पत्रिका का विमोचन हुआ। विधायक डॉ. अभिलाष पाण्डेय, संतोष वरवडे, रामसिया भारती, छत्तीसगढ़ से श्रीमती विद्यावती सिदार, राजस्थान से थावर चंद सहित अन्य विधायकों ने विचार व्यक्त किये। दो दिवसीय सम्मेलन में तीन राज्यों के लगभग 40 विधायकों ने सम्मेलन में दिए गए विषयों पर अपने वक्तव्य दिए।

    कार्यक्रम में संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, पूर्व मंत्री अजय विश्नोई, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा, महापौर श्रीमती मालती राय सहित अन्य पदाधिकारी एवं युवा विधायक मौजूद थे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। अंत में विधानसभा के सचिव अरविन्द शर्मा ने आभार व्यक्त किया।

  • रतलाम में ड्रग्स नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई, एमडीएमए फैक्ट्री का भंडाफोड़, भारी मात्रा में नशीला पदार्थ जब्त

    रतलाम में ड्रग्स नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई, एमडीएमए फैक्ट्री का भंडाफोड़, भारी मात्रा में नशीला पदार्थ जब्त


    भोपाल । मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में पुलिस ने दो दिनों के भीतर लगातार बड़ी कार्रवाई करते हुए न केवल ड्रग तस्करों को पकड़ा, बल्कि एक संगठित सिंथेटिक ड्रग निर्माण नेटवर्क का भी पर्दाफाश किया है। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन में थाना रिंगनोद और पिपलोदा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एमडी और ब्राउन शुगर सहित भारी मात्रा में नशीला पदार्थ जब्त किया गया।

    पोल्ट्री फार्म की आड़ में चल रही थी एमडीएमए फैक्ट्री

    पुलिस मुख्यालय के अनुसार, मंगलवार को थाना पिपलोदा क्षेत्र के ग्राम बोरखेड़ा में छापेमारी कर अवैध एमडी (एमडीएमए) निर्माण फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया। यह फैक्ट्री एक पोल्ट्री फार्म की आड़ में संचालित की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब 175 किलोग्राम रासायनिक पदार्थ, 200 ग्राम तैयार एमडीएमए, गैस सिलेंडर, हीट गन, स्टोव सहित ड्रग निर्माण में उपयोग होने वाले उपकरण जब्त किए। जब्त सामग्री की कुल कीमत 24 लाख रुपए से अधिक आंकी गई है।

    मुख्य सरगना गिरफ्तार, अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़ाव

    इस मामले में मुख्य आरोपी जमशेद खान उर्फ जमशेद लाला उर्फ जमशेद सेठ को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह एक अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का सरगना है और उसके खिलाफ कई राज्यों में आपराधिक मामले दर्ज हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि ड्रग बनाने के लिए रसायनों की आपूर्ति राजस्थान के प्रतापगढ़ क्षेत्र से की जा रही थी। साथ ही घटना से पहले बड़ी मात्रा में एमडी की सप्लाई भी की जा चुकी थी।

    फोरलेन पर घेराबंदी कर 500 ग्राम एमडी जब्त

    इसी कार्रवाई के तहत एक अन्य मामले में पुलिस चौकी माननखेड़ा, थाना रिंगनोद ने मुखबिर सूचना के आधार पर फोरलेन रोड पर घेराबंदी की। इस दौरान बोलेरो पिकअप वाहन से 500 ग्राम एमडी ड्रग्स (कीमत लगभग 50 लाख रुपए) जब्त कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त बोलेरो वाहन (कीमत करीब 5 लाख रुपए) भी जब्त किया। इस कार्रवाई में कुल लगभग 55 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की गई।

    ब्राउन शुगर के साथ एक और आरोपी पकड़ा गया

    इसी दिन एक अन्य कार्रवाई में थाना रिंगनोद पुलिस ने 100 ग्राम ब्राउन शुगर (कीमत करीब 1 लाख रुपए) के साथ एक आरोपी को मोटरसाइकिल सहित गिरफ्तार किया। आरोपी से कुल 1 लाख 50 हजार रुपए की संपत्ति जब्त की गई।

    उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी रतलाम जिले में एमडीएमए निर्माण फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया जा चुका है। इससे साफ है कि क्षेत्र में संगठित ड्रग नेटवर्क सक्रिय रहा है, जिस पर मध्य प्रदेश पुलिस लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है।

  • मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश साझेदारी: धार्मिक पर्यटन और लघु उद्योगों पर सीएम डॉ. मोहन का जोर

    मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश साझेदारी: धार्मिक पर्यटन और लघु उद्योगों पर सीएम डॉ. मोहन का जोर


    भोपाल/वाराणसी । मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश सहयोग सम्मेलन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 31 मार्च को वाराणसी पहुंचे। उनका स्वागत उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नन्दी’ ने किया। इस अवसर पर सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान, खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री गिरीश यादव सहित वाराणसी के स्थानीय जनप्रतिनिधि और जिला अधिकारी उपस्थित रहे।

    सीएम डॉ. यादव ने बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन किए और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भ्रमण कर वहां के क्राउड फ्लो डिजाइन, इंफ्रास्ट्रक्चर और तीर्थयात्री प्रबंधन प्रणाली का अवलोकन किया। उन्होंने भीड़ प्रबंधन पर विशेष प्रस्तुतियां देखीं और मंदिर परिसर में अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

    मुख्यमंत्री ने मीडिया से कहा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का प्रबंधन बहुत प्रभावशाली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल और स्थानीय निवासियों के सहयोग ने इसे संभव बनाया। बाबा विश्वनाथ और बाबा महाकाल के माध्यम से धार्मिक पर्यटन को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

    धार्मिक पर्यटन और लघु उद्योगों पर विशेष फोकस करते हुए सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ओडीओपी योजना में उत्तर प्रदेश ने बेहतरीन काम किया है और मध्यप्रदेश भी इसे अपनाने और सुधारने पर काम कर रहा है। जैसे उत्तर प्रदेश में बनारसी साड़ी की विरासत रही, वैसे ही मध्यप्रदेश में चंदेरी और महेश्वरी साड़ी सहित अन्य लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    सीएम ने कहा कि बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर में भीड़ प्रबंधन जैसा मॉडल मध्यप्रदेश में सिंहस्थ के दौरान लागू किया जाएगा। उनका उद्देश्य बेहतर धार्मिक पर्यटन व्यवस्था सुनिश्चित करना और इससे आम लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने बताया कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के सफल प्रबंधन से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में सुधार आया है, और इसी मॉडल को मध्यप्रदेश में लागू किया जाएगा।

    दोनों राज्यों के बीच योजनाओं और जानकारियों के आदान-प्रदान के लिए एमओयू भी साइन किए जाएंगे। इसका उद्देश्य दर्शनार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और धार्मिक पर्यटन के माध्यम से रोजगार और आर्थिक समृद्धि बढ़ाना है। इसके अलावा, केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और सोलर ऊर्जा परियोजनाओं पर भी दोनों राज्य सहयोग कर रहे हैं।

    गरीबों और युवाओं के जीवन में सुधार लाने, लघु उद्योगों के उत्पादों को सही कीमत दिलाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए भी यह सम्मेलन महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर रिसर्च जारी है और बाबा विश्वनाथ धाम पर 3-5 अप्रैल को उनके जीवन पर आधारित महानाट्य का मंचन किया जाएगा, जिसमें करीब 400 कलाकार भाग लेंगे। डॉ. मोहन यादव ने जोर दिया कि अब समय कटुता का नहीं, सौहाद्र का है। दोनों राज्य मिलकर धार्मिक पर्यटन, लघु उद्योग और पर्यावरणीय परियोजनाओं के जरिए विकास की नई इबारत लिखेंगे।

  • 1 अप्रैल से महंगाई का डबल झटका: बिजली, प्रॉपर्टी, टोल और ATM सब महंगे

    1 अप्रैल से महंगाई का डबल झटका: बिजली, प्रॉपर्टी, टोल और ATM सब महंगे


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में नए वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल 2026 की शुरुआत आम जनता के लिए महंगाई का बड़ा झटका लेकर आ रही है। रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े कई अहम क्षेत्रों में बदलाव होने जा रहे हैं जिनका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। बिजली से लेकर प्रॉपर्टी खरीद तक और हाईवे पर सफर से लेकर एटीएम से पैसे निकालने तक लगभग हर क्षेत्र महंगा होने जा रहा है।

    सबसे पहले बात करें बिजली की तो 2026-27 के लिए नया टैरिफ लागू किया जा रहा है। बिजली दरों में औसतन 4.80 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि 100 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को राहत जारी रहेगी लेकिन जैसे-जैसे खपत बढ़ेगी बिल भी तेजी से बढ़ेगा। उदाहरण के तौर पर 400 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वालों को हर महीने औसतन 150 रुपए तक अधिक चुकाने पड़ सकते हैं।

    प्रॉपर्टी खरीदने वालों के लिए भी यह समय भारी पड़ने वाला है। राज्य में कलेक्टर गाइडलाइन दरों में औसतन 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। करीब 65 हजार स्थानों पर नई दरें लागू होंगी जिससे जमीन और मकान की रजिस्ट्री महंगी हो जाएगी। इसके साथ ही निर्माण सामग्री की बढ़ती लागत के कारण पक्के मकानों का निर्माण भी पहले से ज्यादा खर्चीला हो जाएगा।

    हाईवे पर सफर करने वाले लोगों को भी अब ज्यादा भुगतान करना होगा। नेशनल हाईवे पर टोल टैक्स में 5 से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। फास्टैग के सालाना पास की कीमत में भी करीब 75 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है जिससे रोजाना सफर करने वालों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

    बैंकिंग सेवाओं में भी बदलाव किए गए हैं। एटीएम से पैसे निकालना अब पहले से महंगा हो जाएगा। पहले की तरह महीने में पांच मुफ्त ट्रांजैक्शन की सुविधा जारी रहेगी लेकिन इसके बाद हर अतिरिक्त ट्रांजैक्शन पर करीब 23 रुपए तक शुल्क देना होगा। इस पर टैक्स भी अलग से लगेगा जिससे बार-बार पैसे निकालना महंगा सौदा साबित होगा।

    नगर निगम और स्थानीय निकायों ने कचरा प्रबंधन को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2026 के तहत अब कचरे को चार हिस्सों में अलग करना अनिवार्य होगा जिसमें गीला सूखा सैनिटरी और खतरनाक कचरा शामिल है। नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माना लगाया जाएगा जिससे लोगों को नई व्यवस्था के अनुसार खुद को ढालना पड़ेगा।

    रेलवे यात्रियों के लिए भी नियमों में बदलाव किया गया है। अब ट्रेन के निर्धारित समय से 8 घंटे के भीतर टिकट रद्द करने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा जबकि पहले यह सीमा 4 घंटे थी। 8 से 24 घंटे पहले टिकट कैंसिल करने पर करीब 50 प्रतिशत राशि वापस मिलेगी वहीं 24 से 72 घंटे पहले रद्द करने पर 75 प्रतिशत तक रिफंड मिलेगा। इसके अलावा यात्रियों को ट्रेन रवाना होने से आधे घंटे पहले तक क्लास अपग्रेड कराने की सुविधा भी दी जाएगी।

    कुल मिलाकर 1 अप्रैल से लागू होने वाले ये बदलाव आम आदमी के बजट को प्रभावित करेंगे। ऐसे में लोगों को अपनी आर्थिक योजना को नए सिरे से तैयार करना होगा ताकि बढ़ते खर्चों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।