Category: Madhya Pradesh

  • आरक्षित वन घोषित करने की प्रक्रिया पर विवाद तेज बैतूल में जयस ने दर्ज कराई आपत्ति

    आरक्षित वन घोषित करने की प्रक्रिया पर विवाद तेज बैतूल में जयस ने दर्ज कराई आपत्ति


    बैतूल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में राजस्व भूमि को आरक्षित वन घोषित किए जाने की प्रक्रिया को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है यह मामला अब प्रशासन और आदिवासी संगठनों के बीच टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है जय आदिवासी युवा शक्ति जिसे आमतौर पर जयस के नाम से जाना जाता है ने इस पूरे मामले में गंभीर आपत्तियां दर्ज कराते हुए राजस्व और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं

    जयस का आरोप है कि जिले में बड़े पैमाने पर राजस्व भूमि को आरक्षित वन घोषित करने की प्रक्रिया में वैधानिक नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जा रहा है संगठन का कहना है कि जिन जमीनों को आरक्षित वन में शामिल किया जा रहा है वे सार्वजनिक उपयोग की भूमि हैं और इन पर स्थानीय समुदायों विशेष रूप से आदिवासी समाज का पारंपरिक अधिकार रहा है ऐसे में बिना उचित प्रक्रिया और स्थानीय लोगों की सहमति के इन जमीनों को वन क्षेत्र में शामिल करना न्यायसंगत नहीं है

    संगठन ने इस मामले को गंभीर मानते हुए महामहिम राज्यपाल के नाम कलेक्टर बैतूल को ज्ञापन सौंपा है जिसमें 456 वनखण्डों पर विधिक आपत्ति दर्ज कराई गई है ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि इस प्रक्रिया को तत्काल नहीं रोका गया तो इससे व्यापक स्तर पर सामाजिक और प्रशासनिक विवाद उत्पन्न हो सकता है

    जयस के प्रतिनिधियों का कहना है कि वन अधिकार कानून और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत स्थानीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना अनिवार्य है लेकिन वर्तमान प्रक्रिया में इन अधिकारों की अनदेखी की जा रही है जिससे आदिवासी समाज में असंतोष बढ़ रहा है उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है और प्रभावित लोगों को पर्याप्त जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है

    इस मुद्दे के सामने आने के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है हालांकि अभी तक संबंधित विभागों की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है लेकिन माना जा रहा है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच या पुनर्विचार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया जाना बेहद जरूरी होता है क्योंकि यह सीधे तौर पर स्थानीय समुदायों के अधिकारों और आजीविका से जुड़ा होता है यदि प्रक्रिया में पारदर्शिता और सहभागिता सुनिश्चित नहीं की जाती है तो इससे विवाद और अधिक गहरा सकता है

    कुल मिलाकर बैतूल में 456 वनखण्डों को लेकर उठा यह विवाद आने वाले समय में और तूल पकड़ सकता है यदि प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा समय रहते संतुलित और संवेदनशील समाधान नहीं निकाला गया तो यह मुद्दा व्यापक आंदोलन का रूप भी ले सकता है ऐसे में सभी पक्षों के बीच संवाद और कानूनी प्रक्रिया का पालन ही इस विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है

  • जनगणना 2027 को डिजिटल बनाने की दिशा में बैतूल आगे जिला स्तर पर ट्रेनिंग अभियान शुरू

    जनगणना 2027 को डिजिटल बनाने की दिशा में बैतूल आगे जिला स्तर पर ट्रेनिंग अभियान शुरू

    बैतूल । बैतूल जिले में भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित जनगणना 2027 को पूरी तरह डिजिटल स्वरूप में संपन्न कराने की दिशा में तैयारियां अब तेज रफ्तार पकड़ चुकी हैं इस महत्वाकांक्षी अभियान को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण प्रक्रिया शुरू कर दी है जिसके तहत फील्ड ट्रेनर्स को तकनीकी और प्रक्रियात्मक रूप से सक्षम बनाया जा रहा है

    इसी क्रम में जिले में 64 फील्ड ट्रेनर्स का जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है यह प्रशिक्षण न केवल जनगणना कार्य की मूलभूत समझ विकसित करने के लिए है बल्कि इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रभावी तरीके से लागू करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक ट्रेनर आगे प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को सटीक और स्पष्ट मार्गदर्शन दे सके

    प्रशिक्षण कार्यक्रम को दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है पहले चरण का आयोजन 24 मार्च से 26 मार्च तक किया जा रहा है जबकि दूसरा चरण 1 अप्रैल से 3 अप्रैल 2026 तक आयोजित होगा यह प्रशिक्षण प्रतिदिन सुबह 9 30 बजे से शाम 6 बजे तक पीएम श्री एम एल बी विद्यालय बैतूल में संचालित किया जा रहा है जहां प्रतिभागियों को गहन अभ्यास और व्यवहारिक जानकारी दी जा रही है

    यह पूरा कार्यक्रम जनगणना कार्य निदेशालय मध्यप्रदेश भोपाल से प्राप्त दिशा निर्देशों के अनुसार संचालित किया जा रहा है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि पूरे राज्य में एक समान गुणवत्ता और प्रक्रिया का पालन हो प्रशासन इस प्रशिक्षण को अत्यंत गंभीरता से ले रहा है क्योंकि यह आने वाली जनगणना की सफलता का आधार तैयार करेगा

    प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन प्रमुख जिला जनगणना अधिकारी और कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है वहीं अपर कलेक्टर और जिला जनगणना अधिकारी वंदना जाट भी इस पूरे अभियान की निगरानी कर रही हैं उनके निर्देशन में प्रशिक्षण को सुव्यवस्थित और परिणाममुखी बनाया गया है

    राज्य स्तर से मास्टर ट्रेनर अनामिका जैन और जिले के मास्टर ट्रेनर विनोद कुमार अडलक प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं वे ट्रेनर्स को डिजिटल उपकरणों के उपयोग डेटा संग्रहण की आधुनिक तकनीकों कानूनी प्रावधानों और जनगणना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दे रहे हैं

    प्रशिक्षण के दौरान विशेष रूप से जनगणना 2027 की रूपरेखा पर जोर दिया जा रहा है जिसमें डिजिटल डेटा एंट्री मोबाइल आधारित एप्लीकेशन का उपयोग और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसे विषय शामिल हैं इसके साथ ही प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट रूप से समझाया जा रहा है ताकि जमीनी स्तर पर कार्य में किसी प्रकार की त्रुटि न हो

    यह पहल न केवल प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाएगी बल्कि जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी तेज और सटीक बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी बैतूल में शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आने वाले समय में डिजिटल इंडिया के विजन को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा

  • MP: सागर में डॉक्टर ने खुद ही कार में आग लगाकर की थी पत्नी की हत्या…सहयोगी के साथ गिरफ्तार

    MP: सागर में डॉक्टर ने खुद ही कार में आग लगाकर की थी पत्नी की हत्या…सहयोगी के साथ गिरफ्तार


    सागर।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के सागर जिले (Sagar district) में पत्नी की हत्या कर उसे सड़क दुर्घटना का रूप देने की साजिश का पुलिस ने खुलासा करते हुए आरोपी पति और उसके दो सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार सानौधा थाना क्षेत्र (Sanodha Police Station area) के चनाटौरिया टोल टैक्स प्लाजा (Chanatoriya Toll Tax Plaza) के पास कार में आग लगने की घटना को पहले हादसा बताया गया था, लेकिन जांच के दौरान यह मामला हत्या का निकला। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गढ़ाकोटा निवासी आरोपी BAMS डॉक्टर अपनी पत्नी को कार में लेकर मौके पर पहुंचा था और घटना से पहले मायके पक्ष को फोन कर पत्नी को हार्ट अटैक आने की बात कही थी। बाद में कार में आग लगने को दुर्घटना बताया था। जली हुई कार से उसकी पत्नी का कंकाल मिला था।

    जांच में सामने आया कि आरोपी के किसी अन्य महिला से संबंध थे, जिसके चलते पति-पत्नी के बीच विवाद होता था। इसी प्रेम-प्रसंग के चलते डॉक्टर ने घर पर ही पत्नी का गला घोंटकर हत्या कर दी और सबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट कर दिए। इसके बाद उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर साजिश रची और घटना को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की।

    यूं खुली डॉक्टर के झूठ की पोल
    जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल पर माचिस की तीली और ज्वलनशील पदार्थ मिले थे, जबकि आरोपी डॉक्टर कार में CNG ब्लास्ट होने का दावा कर रहा था। हालांकि जांच में यह बात पूरी तरह झूठी निकली। क्योंकि जांच में पता चला कि CNG के टैंक में गैस थी ही नहीं और डॉक्टर पिछले दो दिनों से पेट्रोल का उपयोग कर रहा था। आरोपी द्वारा सीसीटीवी फुटेज डिलीट करना और बार-बार बयान बदलने की वजह से भी वह पुलिस जांच के घेरे में आ गया।

    आरोपी डॉक्टर और दो सहयोगी गिरफ्तार
    पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी डॉक्टर नीलेश कुर्मी सहित उसके सहयोगी रामकृष्ण कुर्मी और शुभम कुर्मी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी डॉक्टर ने इस अपराध में शामिल होने के लिए सहयोगियों को दो-दो लाख रुपए का लालच दिया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

  • किसानों के मुद्दों पर सिंघार का सरकार पर दबाव, गेहूं खरीदी 3000 रुपये करने की मांग

    किसानों के मुद्दों पर सिंघार का सरकार पर दबाव, गेहूं खरीदी 3000 रुपये करने की मांग

    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश के किसानों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर महत्वपूर्ण मांगें उठाई हैं। उन्होंने किसानों को आर्थिक राहत देने और उनकी परेशानियों को कम करने के लिए गेहूं खरीदी दर में वृद्धि तथा ऋण वसूली की समय-सीमा बढ़ाने की अपील की है।

    नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार उमंग सिंघार ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उन्होंने राज्य सरकार से गेहूं की खरीदी 3000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल मिल सके और वे आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें।

    सिंघार ने अपने पत्र में यह भी कहा कि प्रदेश के किसान वर्तमान में कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जिनमें बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और बाजार में मूल्य अस्थिरता प्रमुख हैं। इन परिस्थितियों में यदि सरकार किसानों को पर्याप्त समर्थन नहीं देती है तो उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो सकती है।

    इसके साथ ही उन्होंने किसानों पर बढ़ते ऋण के बोझ को ध्यान में रखते हुए ऋण वसूली की अंतिम तिथि 30 अप्रैल तक बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे किसानों को कुछ राहत मिलेगी और वे बिना दबाव के अपनी आर्थिक स्थिति को संभाल सकेंगे।

    सिंघार ने मुख्यमंत्री से यह भी आग्रह किया है कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आधार है और किसानों की समृद्धि के बिना समग्र विकास संभव नहीं है।

    राजनीतिक दृष्टि से भी इस पत्र को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर किसानों के मुद्दों को केंद्र में रखकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में इस विषय पर सरकार की प्रतिक्रिया और संभावित निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गेहूं खरीदी दर में वृद्धि की जाती है तो इसका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा, लेकिन इसके साथ ही राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर भी प्रभाव पड़ सकता है। वहीं ऋण वसूली की समय-सीमा बढ़ाने से किसानों को अल्पकालिक राहत मिल सकती है।

    इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि प्रदेश में किसानों के मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक और नीतिगत चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन मांगों पर किस प्रकार का निर्णय लेती है और किसानों को कितनी राहत मिल पाती है।

  • दिग्विजय सिंह का अयोध्या दौरा 26 मार्च को, रामलला के करेंगे दर्शन

    दिग्विजय सिंह का अयोध्या दौरा 26 मार्च को, रामलला के करेंगे दर्शन


    भोपाल । मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह 26 मार्च को अयोध्या की यात्रा पर जाएंगे। इस दौरान वे राम मंदिर अयोध्या में विराजमान रामलला के दर्शन करेंगे और हनुमानगढ़ी में भी पूजा-अर्चना करेंगे। राम मंदिर निर्माण के बाद यह उनका पहला अयोध्या दौरा होगा, जिसे लेकर राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही दृष्टिकोण से यह यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    दिग्विजय सिंह ने मंदिर निर्माण के दौरान एक संकल्प लिया था कि जब तक प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर पूर्ण रूप से तैयार नहीं हो जाता, तब तक वे अयोध्या जाकर दर्शन नहीं करेंगे। अब जब राम मंदिर का मुख्य निर्माण कार्य पूर्णता की ओर है, तो वे अपने उसी संकल्प को पूरा करने के लिए अयोध्या जा रहे हैं।

    उनकी यह यात्रा केवल एक धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि उनके व्यक्तिगत संकल्प और विश्वास को भी दर्शाती है। लंबे समय से राम मंदिर निर्माण को लेकर देशभर में चर्चा और भावनात्मक जुड़ाव रहा है, ऐसे में मंदिर निर्माण के बाद विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों के अयोध्या दौरे भी लगातार हो रहे हैं।

    अयोध्या, जो कि अयोध्या में स्थित है, हिंदू आस्था का एक प्रमुख केंद्र है और राम मंदिर निर्माण के बाद इसकी धार्मिक महत्ता और भी बढ़ गई है। यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। दिग्विजय सिंह का यह दौरा भी इसी क्रम में देखा जा रहा है, जहां वे व्यक्तिगत श्रद्धा के साथ भगवान श्रीराम के दर्शन करेंगे।

    राजनीतिक दृष्टि से भी यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि दिग्विजय सिंह लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं और उनके हर कदम पर राजनीतिक विश्लेषकों की नजर रहती है। हालांकि, उनके इस दौरे को व्यक्तिगत आस्था और संकल्प से जोड़कर देखा जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार अयोध्या प्रवास के दौरान वे मंदिर में पूजा-अर्चना कर देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। साथ ही वे हनुमानगढ़ी में भी दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे, जो अयोध्या का एक प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है।

    राम मंदिर का निर्माण देश के लिए एक ऐतिहासिक और भावनात्मक घटना रहा है और इसके पूर्ण होने के साथ ही अयोध्या एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। इस बीच, दिग्विजय सिंह का यह दौरा उनके व्यक्तिगत संकल्प की पूर्ति के साथ-साथ आस्था और श्रद्धा का भी प्रतीक बनकर सामने आया है।

  • पुलिस का सख्त अभियान, अवैध खनन करते पांच वाहन पकड़े

    पुलिस का सख्त अभियान, अवैध खनन करते पांच वाहन पकड़े


    मुरैना । मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में अवैध खनन के खिलाफ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। पुलिस ने अवैध रूप से रेत और पत्थर का खनन तथा परिवहन कर रहे पांच आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से पांच ट्रैक्टरट्रालियां जप्त की हैं। इस कार्रवाई से अवैध खनन माफिया में हड़कंप मच गया है।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक समीर सौरभ के निर्देशों पर की गई। उन्होंने जिले के सभी थाना प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अवैध खनन और परिवहन में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर उनके वाहनों को जप्त किया जाए।

    इसी क्रम में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में पुलिस द्वारा सघन अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान पुलिस टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर दबिश दी और रेत तथा पत्थर का अवैध परिवहन कर रहे ट्रैक्टर-ट्रालियों को पकड़ा। जांच के दौरान यह पाया गया कि इन वाहनों के पास खनन और परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज नहीं थे, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें जप्त कर लिया गया।

    पुलिस ने मौके से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो इन ट्रैक्टर-ट्रालियों के माध्यम से अवैध खनन सामग्री का परिवहन कर रहे थे। आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इन गतिविधियों के पीछे किसी बड़े नेटवर्क या माफिया गिरोह की संलिप्तता तो नहीं है।

    अधिकारियों का कहना है कि अवैध खनन न केवल शासन को राजस्व की हानि पहुंचाता है बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंचाता है। नदियों और खनिज संसाधनों के अनियंत्रित दोहन से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है, जिसका असर लंबे समय तक देखने को मिलता है।

    पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध खनन के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी थाना प्रभारी नियमित रूप से अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी रखें और ऐसी गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई करें।

    इस कार्रवाई से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया है कि प्रशासन अवैध खनन के खिलाफ पूरी तरह सख्त है और कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों ने भी इस कार्रवाई का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे क्षेत्र में अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा।

    पुलिस का यह अभियान न केवल अपराध नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है बल्कि पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के संतुलित उपयोग के लिए भी आवश्यक है। आने वाले समय में इस तरह की और भी कार्रवाई देखने को मिल सकती है, जिससे अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रयास किया जाएगा।

  • मुरैना में इनामी आरोपी गिरफ्तार, शादी समारोह में फायरिंग का था मामला

    मुरैना में इनामी आरोपी गिरफ्तार, शादी समारोह में फायरिंग का था मामला

    मुरैना । मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में पुलिस को एक महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। हत्या के प्रयास के एक मामले में चार माह से फरार चल रहे पांच हजार रुपये के इनामी आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में राहत का माहौल है, वहीं पुलिस की सक्रियता की भी सराहना की जा रही है।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार यह मामला करीब चार माह पूर्व का है, जब एक शादी समारोह के दौरान दो गुटों के बीच मामूली विवाद हो गया था। यह विवाद देखते ही देखते इतना बढ़ गया कि एक पक्ष ने फायरिंग कर दी। इस फायरिंग की घटना में एक हलवाई गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिससे समारोह में अफरा-तफरी मच गई थी।

    घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। घायल को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां उसका इलाज किया गया। पीड़ित की शिकायत के आधार पर पुलिस ने पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीम का गठन किया। इस दौरान लगातार दबिश दी गई और संभावित ठिकानों पर छापेमारी की गई। हालांकि आरोपी पुलिस से बचने के लिए लगातार स्थान बदल रहा था, जिससे उसकी गिरफ्तारी में समय लग रहा था।

    पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पांच हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था। लगातार तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस को आरोपी की लोकेशन के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इसके आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है, जिसमें मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना के दौरान प्रयुक्त हथियार कहां से आया और इसमें अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और अपराधियों पर नियंत्रण के लिए इस प्रकार की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि फरार आरोपियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

    इस घटना ने यह भी दर्शाया है कि मामूली विवाद किस तरह गंभीर अपराध का रूप ले सकता है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे विवादों से बचें और किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

    इस कार्रवाई से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया है कि कानून से बचना संभव नहीं है और अपराध करने वालों को अंततः गिरफ्तारी का सामना करना ही पड़ता है। मुरैना पुलिस की इस सफलता को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

  • महाकाल नगरी सजने को तैयार, सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क और ब्रिज निर्माण तेज

    महाकाल नगरी सजने को तैयार, सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क और ब्रिज निर्माण तेज


    उज्जैन । मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों को लेकर प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की परिकल्पना के अनुरूप इस महाआयोजन को भव्य और व्यवस्थित बनाने के लिए शहर में व्यापक स्तर पर विकास कार्य तेजी से किए जा रहे हैं।

    इसी कड़ी में विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। इसके साथ ही उज्जैन से इंदौर को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग को सिक्स लेन में विकसित करने की दिशा में भी तेजी से कार्य जारी है।

    शहर की आंतरिक सड़कों के चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए भी व्यापक योजनाएं लागू की जा रही हैं। प्रशासन का उद्देश्य है कि सिंहस्थ के दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके लिए यातायात पार्किंग सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं।

    सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों की समीक्षा के तहत संभाग आयुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने हरि फाटक ब्रिज क्षेत्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने एमपी आरडीसी द्वारा बनाए जा रहे फोरलेन ब्रिज के कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

    निरीक्षण के दौरान अतिक्रमण हटाने निर्माण स्थल के चयन मशीनों की उपलब्धता और कार्य की गति को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने निर्माण एजेंसियों को निर्देशित किया कि कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए और गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए।

    प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सिंहस्थ महापर्व के पहले सभी आवश्यक अधोसंरचनात्मक कार्य पूर्ण हो जाएं। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।

    सिंहस्थ महापर्व देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है जिसमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। ऐसे में शहर की आधारभूत संरचना को मजबूत करना और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल है।

    अधिकारियों का मानना है कि इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से न केवल सिंहस्थ के दौरान व्यवस्था बेहतर होगी बल्कि भविष्य में भी उज्जैन शहर को स्थायी रूप से बेहतर यातायात और सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

    प्रशासन की इस सक्रियता से यह स्पष्ट है कि सिंहस्थ 2028 को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के लिए हर स्तर पर ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। महाकाल नगरी उज्जैन आने वाले समय में न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि अधोसंरचना और सुविधाओं के मामले में भी एक नए स्वरूप में नजर आएगी।

  • जल गंगा संवर्धन अभियान को गति, प्रशासन ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

    जल गंगा संवर्धन अभियान को गति, प्रशासन ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश


    बैतूल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में जल संरक्षण को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए व्यापक स्तर पर कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने सभी शासकीय भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से स्थापित करने के निर्देश दिए हैं और स्पष्ट किया है कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

    मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने जल गंगा संवर्धन अभियान की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अभियान के तहत निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा में पूरा किया जाए और कार्य में तेजी लाई जाए। कलेक्टर ने कहा कि जल संरक्षण केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण दायित्व है।

    उन्होंने जिले के सभी एसडीएम जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और नगर निकायों के सीएमओ को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थापना सुनिश्चित करें। साथ ही उन्होंने कहा कि जहां भी संभव हो वर्षा जल संचयन के पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरीकों को अपनाया जाए ताकि अधिकतम जल संरक्षण किया जा सके।

    कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि शासकीय भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था केवल औपचारिकता न रह जाए बल्कि इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाए। इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग और निरीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि जिन विभागों या अधिकारियों द्वारा इस कार्य में लापरवाही बरती जाएगी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    बैठक में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों की प्रगति उपलब्धियों और चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि वे क्षेत्र में जनभागीदारी बढ़ाने के प्रयास करें और लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक बनाएं। उन्होंने कहा कि जल संकट की समस्या को केवल सरकारी प्रयासों से नहीं बल्कि सामूहिक सहभागिता से ही प्रभावी रूप से हल किया जा सकता है।

    उन्होंने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए नवाचारों को अपनाने पर भी जोर दिया। वर्षा जल संचयन तालाबों का पुनर्जीवन जल स्रोतों का संरक्षण और भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।

    कलेक्टर ने कहा कि यदि समय रहते जल संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में जल संकट और गंभीर हो सकता है। इसलिए यह आवश्यक है कि सभी विभाग मिलकर इस दिशा में समन्वित प्रयास करें।

    इस सख्त रुख के साथ बैतूल जिला प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जल संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी और इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह पहल न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करेगी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • महाकाल क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने की मुहिम तेज, 16 अवैध इमारतें ध्वस्त

    महाकाल क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने की मुहिम तेज, 16 अवैध इमारतें ध्वस्त


    उज्जैन । उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के आसपास अवैध अतिक्रमण के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए एक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। प्रशासन ने मंदिर क्षेत्र के समीप स्थित 16 अवैध मकानों को जमींदोज कर दिया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप की स्थिति बन गई। इससे पहले भी प्रशासन द्वारा 42 अवैध मकानों को हटाया जा चुका है, जिससे यह स्पष्ट है कि महाकाल क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए अभियान लगातार जारी है।

    आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई उज्जैन विकास प्राधिकरण की भूमि पर किए गए अवैध व्यावसायिक निर्माणों के खिलाफ की गई। प्रशासन को लंबे समय से इन निर्माणों की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद जांच कर इन्हें अवैध घोषित किया गया। इसके पश्चात नियमानुसार नोटिस जारी कर संबंधित लोगों को स्वयं अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन समय सीमा में पालन नहीं होने पर प्रशासन ने सख्त कदम उठाया।

    सुबह से ही शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में आधा दर्जन से अधिक पोकलेन और बुलडोजर मशीनों की सहायता से एक-एक कर अवैध इमारतों को ढहाया गया। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई।

    प्रशासन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल अवैध निर्माणों के खिलाफ है और इसे चरणबद्ध तरीके से आगे भी जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले महाकाल क्षेत्र के आसपास किसी भी प्रकार का अनधिकृत निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस क्षेत्र की गरिमा और सुव्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। जहां कुछ लोगों ने प्रशासन के इस कदम को उचित ठहराते हुए कहा कि इससे क्षेत्र की व्यवस्था सुधरेगी और अवैध गतिविधियों पर रोक लगेगी, वहीं प्रभावित लोगों ने इसे लेकर असंतोष भी जताया। हालांकि प्रशासन का कहना है कि सभी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए ही की गई है।

    महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है और यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर के आसपास सुव्यवस्थित और अतिक्रमण मुक्त वातावरण बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल है। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई से न केवल क्षेत्र का सौंदर्य बढ़ेगा बल्कि श्रद्धालुओं को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

    प्रशासन ने यह भी संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में महाकाल क्षेत्र में और भी व्यापक स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है। इसके लिए अवैध निर्माणों की पहचान की जा रही है और नियमानुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इस अभियान से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा।