Category: Madhya Pradesh

  • ED की बड़ी कार्रवाई: नगर निगम के पूर्व सहायक राजस्व अधिकारी की 1.06 करोड़ की संपत्ति कुर्क, आय से अधिक संपत्ति का आरोप

    ED की बड़ी कार्रवाई: नगर निगम के पूर्व सहायक राजस्व अधिकारी की 1.06 करोड़ की संपत्ति कुर्क, आय से अधिक संपत्ति का आरोप


    इंदौर । प्रवर्तन निदेशालय ED ने इंदौर में आय से अधिक संपत्ति आनुपातिक संपत्ति मामले में बड़ी कार्रवाई की है। नगर निगम में पदस्थ रहे पूर्व सहायक राजस्व अधिकारी राजेश परमार और उनके परिजनों की कुल 1 करोड़ 6 लाख रुपए की संपत्ति कुर्क की गई है। यह कार्रवाई ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की जा रही जांच के दौरान की गई है।

    ED की जांच में यह तथ्य सामने आया कि 2007 से 2022 के बीच राजेश परमार ने अपनी आय से अधिक 175 प्रतिशत संपत्ति अर्जित की थी। इस दौरान उन्होंने अपनी आय और संपत्ति के संबंध में कोई पुख्ता दस्तावेज या प्रमाण पेश नहीं कर सके।कुर्क की गई संपत्ति में एक रहवासी मकान, प्लॉट, फ्लैट और कृषि भूमि शामिल है।

    ED ने इस कार्रवाई के बाद संबंधित संपत्तियों को जब्ती में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति निर्माण के खिलाफ सरकार की नीतियों और ED की सख्ती को दर्शाती है। अब जांच एजेंसी यह देखेगी कि संपत्ति का स्रोत कहां से आया और क्या कोई अन्य संदिग्ध लेन-देन जुड़ा है।

  • मप्र का डिण्डौरी जिला जल अभावग्रस्त घोषित, 30 जून तक नलकूप एवं हैंडपंप खनन पर प्रतिबंध

    मप्र का डिण्डौरी जिला जल अभावग्रस्त घोषित, 30 जून तक नलकूप एवं हैंडपंप खनन पर प्रतिबंध

    डिण्डौरी। मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में अल्प वर्षा के कारण ग्रीष्म ऋतु के दौरान संभावित पेयजल संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए संपूर्ण डिण्डौरी जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है।

    इस संबंध में कलेक्टर ने सोमवार को आदेश जारी किया है। यह आदेश 10 फरवरी 2026 से 30 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगा। आदेश के तहत जिले के समस्त सार्वजनिक जल स्रोतों से पानी का उपयोग केवल पेयजल एवं दैनिक घरेलू आवश्यकताओं के लिए ही किया जा सकेगा। सिंचाई, निर्माण कार्यों एवं किसी भी प्रकार की व्यवसायिक गतिविधियों के लिए पानी का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही विद्युत अथवा डीजल से जल लिफ्ट करना भी वर्जित किया गया है। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में निजी नलकूप एवं हैंडपंप खनन पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि, अत्यावश्यक परिस्थितियों में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की अनुशंसा के आधार पर अनुमति दी जा सकेगी।

    आदेश के पालन को सुनिश्चित करने हेतु पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया गया है कि जिले के समस्त थाना प्रभारियों को सूचित कर प्रतिबंधित कार्यों में जल उपयोग करने वालों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्यवाही की जाए। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण में सहयोग करें तथा निर्धारित अवधि में नियमों का पालन कर पेयजल संकट से निपटने में प्रशासन का साथ दें।

  • भोपाल में प्रोफेसर की खुदकुशी: 'बीमारी से तंग आ गया हूं…' सुसाइड नोट लिख फंदे पर झूले शैलेंद्र, पत्नी भी लड़ रही कैंसर से जंग

    भोपाल में प्रोफेसर की खुदकुशी: 'बीमारी से तंग आ गया हूं…' सुसाइड नोट लिख फंदे पर झूले शैलेंद्र, पत्नी भी लड़ रही कैंसर से जंग


    भोपाल। राजधानी के रातीबड़ इलाके में एक निजी कॉलेज के प्रोफेसर द्वारा सुसाइड करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात 32 वर्षीय प्रोफेसर शैलेंद्र सिंह ठाकुर ने अपने किराए के कमरे में फांसी लगाकर जीवनलीला समाप्त कर ली। बुधवार सुबह जब परिजनों ने उन्हें फंदे पर लटका देखा तो इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस को मौके से एक भावुक सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें मृतक ने अपनी बीमारी और मानसिक पीड़ा का जिक्र किया है।

    मूल रूप से सीहोर जिले के आष्टा गोपालपुर के रहने वाले शैलेंद्र पिछले 6 महीनों से भोपाल की गोल्डन सिटी में किराए से रह रहे थे और रातीबड़ के ही एक प्राइवेट कॉलेज में अध्यापन कार्य कर रहे थे। पुलिस के अनुसार शैलेंद्र के कमरे से मिले सुसाइड नोट में लिखा है मैं अपनी बीमारी से बहुत तंग आ चुका हूं… इसलिए अब जीना नहीं चाहता। मैं आप सभी से बहुत प्यार करता हूं कृपया अपना ध्यान रखें और स्वस्थ रहें।

    हैरानी की बात यह है कि परिजनों ने शैलेंद्र को किसी भी तरह की ‘गंभीर’ बीमारी होने से इनकार किया है। भाई के मुताबिक शैलेंद्र अक्सर मामूली मौसमी बीमारियों जैसे सर्दी-जुकाम और उसके बाद होने वाली शारीरिक कमजोरी से परेशान रहते थे। हालांकि पुलिस जांच में एक और दुखद पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि शैलेंद्र की पत्नी ‘बच्चेदानी के कैंसर’ से जूझ रही हैं और पिछले एक साल से उनका इलाज चल रहा है। वर्तमान में पत्नी अपने मायके में रहकर उपचार करा रही हैं जिसे लेकर शैलेंद्र काफी समय से गहरे तनाव में थे।

    जांच अधिकारी SI गब्बर सिंह ने बताया कि पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अब इस मामले की जांच मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक परिस्थितियों के नजरिए से भी कर रही है। यह घटना दर्शाती है कि कभी-कभी छोटी दिखने वाली शारीरिक समस्याएं और अपनों की बीमारी का बोझ एक व्यक्ति को भीतर से कितना कमजोर कर सकता है।

  • दीनदयाल उपाध्याय: एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया नमन

    दीनदयाल उपाध्याय: एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया नमन


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके आदर्शों को देश-प्रदेश की प्रगति की प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि जब विश्व में साम्यवाद और समाजवाद की विचारधाराएँ व्यापक रूप से प्रभावी थीं तब दीनदयाल जी ने भारतीय सनातन विचारधारा को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत कर एकात्म मानववाद और अंत्योदय की कल्याणकारी दृष्टि दी। यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को निरंतरता प्रदान करने का एक प्रभावी प्रयास था।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता तथा समर्थ भारत निर्माण के चिंतक थे। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चिंतक संगठनकर्ता और भारतीय जनसंघ के सह संस्थापक रहे। दीनदयाल जी का मानना था कि स्वतंत्रता तभी सार्थक होती है जब वह हमारी संस्कृति की अभिव्यक्ति का साधन बने। उनके विचारों ने समाज के अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति के जीवन में उजास लाने का मार्ग प्रशस्त किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव लालघाटी स्थित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दीनदयाल जी के विचार भारतीय मानस को सशक्त राष्ट्र और समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं। इस अवसर पर उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के निकट विकसित ‘नमो वन’ का अवलोकन किया और रुद्राक्ष का पौधा रोपा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दीनदयाल जी के विचारों के अनुरूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीब किसान युवा और महिलाओं के कल्याण के साथ सभी को प्रगति के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार भी इसी दिशा में निरंतर सक्रिय है और विश्व में देश का प्रभाव बढ़ रहा है।

    डॉ. यादव ने यह भी बताया कि पुण्यतिथि पर केश शिल्पियों को उपलब्ध कराई जा रही किट दीनदयाल जी के अंत्योदय के विचारों को व्यावहारिक रूप देने का सार्थक प्रयास है। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग भोपाल महापौर मालती राय रविंद्र यति सहित अन्य जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।

  • धार में दर्दनाक सड़क हादसा: ट्राले ने बाइक सवार दो युवकों को रौंदा, जन्मदिन पार्टी जा रहे थे मौके पर ही मौत

    धार में दर्दनाक सड़क हादसा: ट्राले ने बाइक सवार दो युवकों को रौंदा, जन्मदिन पार्टी जा रहे थे मौके पर ही मौत


    धार। मध्य प्रदेश के धार जिले के कुक्षी थाना क्षेत्र में मंगलवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे ने दो परिवारों को अंधेरे में डुबो दिया। कुक्षी मनावर रोड पर ग्राम लोहारी के पास तेज रफ्तार ट्राले ने बाइक सवार दो युवकों को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों युवक घटनास्थल पर ही दम तोड़ गए।

    मृतकों की पहचान कुक्षी के एक होटल में काम करने वाले युवकों के रूप में हुई है। दोनों दोस्त बाइक से लोहारी गांव की ओर जा रहे थे, जहां वे एक साथी की जन्मदिन की पार्टी में शामिल होने वाले थे। रात के अंधेरे में ट्राले ने उनकी बाइक को चपेट में ले लिया और वे गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास के ग्रामीणों ने घटना की सूचना पुलिस को दी।

    हादसे के बाद ट्राला चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। कुक्षी पुलिस की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और एंबुलेंस की मदद से दोनों शवों को कुक्षी सिविल अस्पताल लाया गया। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शवों का पंचनामा कर मर्ग दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा की चुनौतियों और तेज रफ्तार वाहनों के खतरों को उजागर करता है। स्थानीय लोग सड़क पर तेज रफ्तार ट्रालियों की आवाजाही पर रोक की मांग कर रहे हैं। वहीं परिवारों में शोक की लहर है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

  • भोपाल नगर निगम की नई भयानक योजना: पानी की लाइन के ऊपर शौचालय निर्माण, भागीरथपुरा जैसी जल त्रासदी का खतरा

    भोपाल नगर निगम की नई भयानक योजना: पानी की लाइन के ऊपर शौचालय निर्माण, भागीरथपुरा जैसी जल त्रासदी का खतरा


    भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा में जल त्रासदी के बाद अब तक 35 लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन इस हादसे ने भोपाल नगर निगम को कोई सबक नहीं सिखाया। शहर के एक गैस पीड़ित इलाके में नगर निगम द्वारा पानी की पाइपलाइन के ऊपर शौचालय निर्माण का मामला सामने आया है, जो एक नई आपदा को जन्म दे सकता है।

    बताया जा रहा है कि जिस जगह से पीने के पानी की पाइपलाइन गुजर रही है, उसी के ऊपर शौचालय बनाया जा रहा है। यदि पाइपलाइन लीक हो जाती है, तो शौचालय का पानी सीधे पाइपलाइन में मिल जाएगा। इससे न केवल पानी दूषित होगा, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए यह एक गंभीर संकट भी बन सकता है। साथ ही यह सवाल भी उठता है कि अगर पाइपलाइन में गड़बड़ी हो, तो उसे कैसे ठीक किया जाएगा, जब ऊपर शौचालय का निर्माण चल रहा हो।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यह निर्माण कार्य सीधे मानवीय जीवन को जोखिम में डालने वाला है। वे निगम से मांग कर रहे हैं कि तुरंत इस निर्माण को रोका जाए और पाइपलाइन की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने मामले पर कहा कि लोकल इंजीनियर ने टेक्निकल एनालिसिस किया होगा। उन्होंने कहा कि विषय संज्ञान में आया है और अधिकारियों से चर्चा की जाएगी। हालांकि अभी तक निगम की ओर से कोई ठोस कदम नहीं दिख रहा है।

    भागीरथपुरा जैसी त्रासदी के बाद भी नगर निगम की इस उदासीनता पर सवाल उठ रहे हैं। यदि जल्द ही सुधार नहीं किया गया, तो भोपाल में भी जल संकट और बीमारी फैलने जैसी स्थिति बन सकती है। नागरिकों का कहना है कि पानी की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी गई तो नुकसान भारी हो सकता है।

  • सूदखोरी के जाल में उलझकर बीजेपी नेता ने गंवाई जान, कांग्रेस नेता पर मौत से पहले लगाए गंभीर आरोप

    सूदखोरी के जाल में उलझकर बीजेपी नेता ने गंवाई जान, कांग्रेस नेता पर मौत से पहले लगाए गंभीर आरोप


    खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जहाँ भारतीय जनता पार्टी के नेता जितेंद्र चौधरी उर्फ जीतू ने सूदखोरी और कर्ज के दबाव में आकर आत्महत्या कर ली। आरोप है कि एक पूर्व कांग्रेस पार्षद और उनके परिवार द्वारा लगातार दी जा रही प्रताड़ना से तंग आकर जीतू ने यह आत्मघाती कदम उठाया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बीजेपी नेता ने कांग्रेस नेता के घर जाकर ही जहरीला पदार्थ खा लिया।

    50 लाख का हिसाब और जानलेवा धमकी जानकारी के मुताबिक खंडवा के लवकुश नगर निवासी जितेंद्र चौधरी मंगलवार सुबह बड़गांव भीला रोड स्थित पूर्व कांग्रेस पार्षद गणेश सकरगाये के घर पहुंचे थे। मामला करीब 50 लाख रुपये के लेनदेन के हिसाब-किताब का था। बताया जा रहा है कि ब्याज की रकम चुकाने में असमर्थता जताने पर कांग्रेस नेता ने उन्हें कथित तौर पर गंभीर परिणाम भुगतने और उनका घर बिकवाने की धमकी दी। इस मानसिक दबाव को जीतू सहन नहीं कर पाए और उन्होंने वहीं जहरीला पदार्थ गटक लिया।

    अस्पताल में इलाज के दौरान मौत तबीयत बिगड़ते देख गणेश सकरगाये और उनके साथियों ने आनन-फानन में जीतू को एक निजी अस्पताल पहुँचाया जहाँ से उन्हें गंभीर हालत में जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। अस्पताल के आईसीयू वार्ड में संघर्ष करने के बाद आखिरकार जितेंद्र चौधरी ने दम तोड़ दिया। मौत से पहले दिए गए अपने बयान में जीतू ने स्पष्ट रूप से गणेश सकरगाये पर सूदखोरी और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि कर्ज और बढ़ते ब्याज के कारण वे पिछले काफी समय से तनाव में थे।

    पुलिस जांच में जुटी मोघट थाना पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस के पास अब मृतक का मृत्यु पूर्व बयान मौजूद है जिसे जांच का मुख्य आधार बनाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लेनदेन के दस्तावेजों और कॉल डिटेल्स की जांच की जा रही है। इस घटना के बाद शहर के सियासी गलियारों में भी तनाव देखा जा रहा है क्योंकि मामला सत्ताधारी दल के नेता और विपक्ष के पूर्व पार्षद के बीच के विवाद से जुड़ा है।

  • मध्य प्रदेश का महाबजट तैयार, 4.70 लाख करोड़ के करीब आकार; 18 फरवरी को विधानसभा में होगा पेश

    मध्य प्रदेश का महाबजट तैयार, 4.70 लाख करोड़ के करीब आकार; 18 फरवरी को विधानसभा में होगा पेश


    भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार इस बार राज्य का बजट आकार करीब 4.70 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है जो पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के 4.21 लाख करोड़ रुपये के बजट से लगभग 12 प्रतिशत अधिक होगा। बजट 18 फरवरी को विधानसभा में उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा पेश किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश की आर्थिक दिशा और विकास की प्राथमिकताएं स्पष्ट होंगी।

    बजट पेश करने से पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बजट का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया। बैठक में विकास योजनाओं वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति पर विशेष चर्चा हुई। सरकार इस बार राजकोषीय घाटा नियंत्रित रखने पर खास जोर दे रही है ताकि राज्य की वित्तीय स्थिति संतुलित और मजबूत बनी रहे। वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ करने के साथ-साथ विकास की रफ्तार बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती और प्राथमिकता दोनों है।

    सूत्रों के मुताबिक इस बार पूंजीगत व्यय कैपिटल एक्सपेंडिचर में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। इसका सीधा असर बुनियादी ढांचे के विकास पर पड़ेगा। सड़क पुल सिंचाई परियोजनाएं शहरी अधोसंरचना शिक्षा संस्थानों का विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण पर बड़े निवेश की तैयारी है। सरकार का मानना है कि पूंजीगत निवेश बढ़ने से रोजगार के अवसर सृजित होंगे और निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।

    विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से प्रारंभ हो रहा है। इस दौरान बजट प्रस्तुति के अलावा विभिन्न विभागों से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत विषयों पर चर्चा होगी। यह बजट मोहन यादव सरकार का तीसरा प्रमुख बजट माना जा रहा है जिससे जनता और विभिन्न वर्गों को काफी उम्मीदें हैं।

    सरकार के संकेत हैं कि इस बजट में किसान कल्याण योजनाओं को मजबूती दी जाएगी। कृषि क्षेत्र में तकनीकी सुधार सिंचाई विस्तार और समर्थन मूल्य से जुड़ी व्यवस्थाओं पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। इसके अलावा महिला सशक्तिकरण लाड़ली बहना जैसी योजनाओं के लिए प्रावधान बढ़ने की संभावना है। युवाओं के लिए कौशल विकास स्टार्टअप प्रोत्साहन और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी लाने जैसे कदम भी बजट का हिस्सा बन सकते हैं।

    ग्रामीण विकास पेयजल बिजली और आवास योजनाओं के लिए भी पर्याप्त राशि आवंटित किए जाने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि यह बजट विकास और वित्तीय अनुशासन के संतुलन का मॉडल पेश करेगा और प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में अहम भूमिका निभाएगा। अब निगाहें 18 फरवरी पर टिकी हैं जब विधानसभा में इस ‘महाबजट का औपचारिक ऐलान होगा।

  • पीएम आवास पर अफसरशाही का ताला, टूटी झोपड़ियों में सिमटा बैगा परिवारों का सपना

    पीएम आवास पर अफसरशाही का ताला, टूटी झोपड़ियों में सिमटा बैगा परिवारों का सपना


    शहडोल । शहडोल संभाग के अनूपपुर जिले के बरगंवा अमलाई नगर परिषद क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना की हकीकत सवालों के घेरे में है। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य गरीब वंचित और आदिवासी परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराना है लेकिन वार्ड क्रमांक 1 2 और 5 में रहने वाले बैगा आदिवासी परिवार आज भी जर्जर झोपड़ियों में जीवन बिताने को मजबूर हैं। बारिश में टपकती छत गर्मी में झुलसाती धूप और सर्दियों में हाड़ कंपा देने वाली ठंड इनके लिए रोजमर्रा की नियति बन चुकी है। योजनाओं की फाइलों में दर्ज नाम और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी यहां साफ दिखाई देती है।

    इन्हीं परिवारों में से एक हैं राम प्रसाद बैगा जो अपनी बुजुर्ग मां के साथ एक टूटी-फूटी झोपड़ी में रहते हैं। दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह दो वक्त की रोटी जुटाने वाले राम प्रसाद वर्षों से प्रधानमंत्री आवास के लिए आवेदन कर रहे हैं। नगर परिषद से लेकर जिला मुख्यालय तक कई बार चक्कर काट चुके हैं लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है। उनकी वृद्ध मां की आंखों में एक ही सपना है मौत से पहले अपने सिर पर एक पक्की छत देखना। लेकिन समय बीतता जा रहा है और उनका सपना अब भी अधूरा है।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में ऐसे प्रभावशाली और संपन्न लोगों को भी पीएम आवास का लाभ मिल चुका है जिनके पास पहले से पक्के मकान वाहन और अन्य संसाधन मौजूद हैं। जबकि वास्तविक जरूरतमंद बैगा परिवार सूची में नाम होने के बावजूद लाभ से वंचित हैं। इससे योजना की पारदर्शिता और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। बैगा समाज के लोगों का कहना है कि उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से कई बार शिकायत की लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। अब वे संभागीय मुख्यालय तक गुहार लगा रहे हैं फिर भी अफसरशाही की चुप्पी उनकी उम्मीदों को तोड़ रही है।

    प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य समाज के सबसे कमजोर वर्ग को सम्मानजनक जीवन देना है लेकिन बरगंवा अमलाई में यह उद्देश्य अधूरा नजर आ रहा है। जिन परिवारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए वे आज भी असुरक्षित और अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं। सवाल यह है कि क्या योजना का लाभ सही मायनों में जरूरतमंदों तक पहुंचेगा या फिर कागजों में ही सीमित रह जाएगा। बैगा परिवारों की पथराई आंखें आज भी अपने हक की छत का इंतजार कर रही हैं।

  • डॉक्टर बनने की चाहत और सिलेबस का भारी तनाव; भोपाल GMC की छात्रा की बाथरूम में मिली लाश, पीजी इंचार्ज का बड़ा खुलासा

    डॉक्टर बनने की चाहत और सिलेबस का भारी तनाव; भोपाल GMC की छात्रा की बाथरूम में मिली लाश, पीजी इंचार्ज का बड़ा खुलासा


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) में एक बार फिर मानसिक तनाव और पढ़ाई के दबाव ने एक उभरते हुए करियर को हमेशा के लिए शांत कर दिया। आलीराजपुर जिले की रहने वाली एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा रोशनी ने कोहेफिजा स्थित एक निजी पीजी (पेइंग गेस्ट) के बाथरूम में एसिड पीकर आत्महत्या कर ली। मंगलवार सुबह जब रोशनी अपने कमरे से बाहर नहीं निकली और सहेलियों के बार-बार बुलाने पर भी कोई जवाब नहीं मिला, तब इस खौफनाक वारदात का खुलासा हुआ।

    घटना की जानकारी मिलते ही आलीराजपुर से भोपाल पहुंचे पिता वंतर सिंह कलेश की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि रोशनी बचपन से ही मेधावी थी और उसका सपना एक सफल डॉक्टर बनने का था। नीट परीक्षा में 400 से अधिक अंक हासिल कर उसने अपनी मेहनत के दम पर गांधी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था। पिता के अनुसार, रोशनी पिछले कुछ दिनों से घर पर ही थी और शनिवार को ही उन्होंने खुद उसे भोपाल जाने वाली ट्रेन में बैठाया था। हालांकि रोशनी ने बातों-बातों में पढ़ाई के दबाव का जिक्र किया था, लेकिन वह हमेशा हिम्मत दिखाते हुए कहती थी, “पापा, मैं संभाल लूंगी, मैं पढ़ लूंगी।” किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि पढ़ाई का यह बोझ उसकी जान ले लेगा।

    दूसरी ओर, पीजी की संचालक करुणा नायर के बयानों ने मामले में एक नया मोड़ दे दिया है। संचालक का दावा है कि रोशनी जब दो दिन पहले घर से लौटी थी, तभी से वह अपनी सहेलियों के सामने सुसाइड करने की बातें कर रही थी। मंगलवार सुबह जब वह कॉलेज के लिए तैयार होकर बाहर नहीं निकली, तो सहेलियों ने गार्ड को बुलाकर दरवाजा तुड़वाया। भीतर का नजारा भयावह था; रोशनी बाथरूम में बेसुध पड़ी थी और पास ही एसिड की खाली बोतल पड़ी मिली। उसे तुरंत हमीदिया अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है कि एसिड पीने के कारण अंदरूनी अंगों के बुरी तरह जल जाने से उसकी मृत्यु हुई।

    गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन कविता एन. सिंह ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए बताया कि रोशनी एक ‘डे-स्कॉलर’ छात्रा थी और अक्टूबर में ही उसने कॉलेज में प्रवेश लिया था। प्रारंभिक जांच और मोबाइल संदेशों से यह संकेत मिले हैं कि रोशनी को मेडिकल का सिलेबस समझने में कठिनाई हो रही थी। वह कड़ी मेहनत कर रही थी, लेकिन उसे लग रहा था कि वह विषयों को ठीक से समझ नहीं पा रही है। इसी ‘एकेडमिक स्ट्रेस’ के कारण वह गहरे अवसाद में चली गई थी। पुलिस अब इस मामले की हर पहलू से बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या तनाव का कारण सिर्फ पढ़ाई थी या इसके पीछे कुछ और भी वजहें छिपी हैं।