Category: Madhya Pradesh

  • MP: पांचवें बच्चे का जन्म सुनकर दंग रह गईं मैहर कलेक्टर…. प्रसूता को दी समझाइश

    MP: पांचवें बच्चे का जन्म सुनकर दंग रह गईं मैहर कलेक्टर…. प्रसूता को दी समझाइश


    मैहर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मैहर की कलेक्टर (Maihar: Collector) IAS बिदिशा मुखर्जी (IAS Bidisha Mukherjee) इन दिनों अपने सख्त और संवेदनशील तेवरों के लिए चर्चा में हैं. हाल ही में जब वे मैहर के सिविल अस्पताल (Maihar Civil Hospital) का औचक जायजा लेने पहुंचीं, तो वहां का नजारा देख वह खुद को रोक नहीं पाईं और एक ‘सुपर वुमेन’ की तरह समाज की कुरीतियों पर दहाड़ती नजर आईं. पांचवें बच्चे का जन्म सुनकर दंग रह गईं…

    अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को जब यह पता चला कि एक महिला ने अपने पांचवें बच्चे को जन्म दिया है, तो वे दंग रह गईं. उन्होंने महिला के पास जाकर बड़ी ही आत्मीयता, लेकिन दृढ़ता के साथ उसे समझाइश दी कि आज के महंगाई के दौर में इतने बच्चों का पालन-पोषण, उनकी अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना कितना चुनौतीपूर्ण है. कलेक्टर ने महिला से सीधे सवाल किया कि आखिर इतने बड़े परिवार का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा?

    ​
    अस्पताल में उनके इस तेवर ने वहां मौजूद कर्मचारियों और मरीजों के परिजनों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया. यह पूरा घटनाक्रम समाज की उस गहरी सोच पर प्रहार करता है जहां आज भी ‘पुत्र प्राप्ति’ या अन्य सामाजिक कारणों से लगातार बच्चे पैदा किए जाते हैं।


    महिला सशक्तिकरण का दिया उदाहरण

    कलेक्टर ने समाज को आईना दिखाते हुए कहा कि आज जमाना बदल गया है. उन्होंने उदाहरण दिया कि “आज मध्य प्रदेश में 31% कलेक्टर महिलाएं हैं, हमारी पूरी टीम महिलाओं की है. फिर यह भेदभाव क्यों?”


    ग्राउंड स्टाफ को फटकार

    उन्होंने केवल महिला को ही नहीं टोका, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के अमले और मैदानी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी कड़े सवाल दागे. कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आखिर परिवार नियोजन को लेकर जागरूकता अभियान कहां है? उन्होंने साफ शब्दों में निर्देश दिए कि विभाग सिर्फ कागजों पर काम न करे, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों को छोटे परिवार के फायदों और मातृ स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूक करे।

    कलेक्टर ने अस्पताल में मिल रहे भोजन की क्वालिटी की भी जांच की और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए यह भी स्वीकार किया कि मैहर एक नया जिला है और यहां महिला रोग विशेषज्ञ, नेफ्रोलॉजिस्ट और ऑर्थोपेडिक सर्जन जैसे विशेषज्ञों की कमी एक बड़ी चुनौती है, जिसे दूर करने के लिए वे निरंतर प्रयास कर रही हैं।

  • राजा रघुवंशी हत्याकांड… भाई गोविन्द बोला- सोनम इंदौर आई तो उनके घर में नहीं रहेगी

    राजा रघुवंशी हत्याकांड… भाई गोविन्द बोला- सोनम इंदौर आई तो उनके घर में नहीं रहेगी


    इंदौर।
    राजा रघुवंशी हत्याकांड (Raja Raghuvanshi murder case) की मुख्य आरोपी सोनम (Sonam) को मेघालय कोर्ट ने जमानत (Meghalaya court Grants Bail) दे दी है। राजा के परिवारवालों का आरोप है कि जमानत मिलने में सोनम के भाई गोविंद ने भी उसकी मदद की है। अब इस मामले में गोविंद का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि अगर राजा का परिवार हाई कोर्ट जाना चाहता है तो उन्हें जाना चाहिए। वहीं ये पूछे जाने पर कि क्या वह सोनम की जमानत का विरोध करते है, उन्होंने कहा कि कानून के हिसाब से जो हुआ सही हुआ। इसी के साथ उन्होंने ये भी साफ किया है कि सोनम इंदौर आ भी गई तो उनके घर में नहीं रहेगी।

    गोविंद ने कहा, मुझे भी पता चला है कि सोनम को जमानत मिल गई है, लेकिन ऑर्डर की कॉपी आना बाकी है। मुझे भी मीडिया के जरिए पता चला कि बेल मिल गई है। हमारे पास अभी तक कोई प्राइवेट वकील नहीं है। सरकार द्वारा नियुक्त वकील अभी इस केस में लगे हुए हैं। । मुझे नहीं पता कि वह कब रिहा होंगी, कहां रहेंगी या शिलांग में होंगी या नहीं।

    सोनम की जमानत करवाने के आरोपों पर गोविंद ने कहा, मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया है। जेल में सोनम से मिलने से पहले मैंने राजा के भाई को साफ-साफ बता दिया था कि मुझे कुछ कागजी कार्रवाई करनी है। मैंने उन्हें पहले ही साफ-साफ बता दिया था। गोविंद ने कहा, हम सोनम को अभी घर में नहीं रखेंगे। यह संभव नहीं है। सोनम की जमानत पर उन्होंने कहा, यह एक कानूनी फैसला है और कानून के हिसाब से जो हुआ, सही हुआ। अगर यह सरकार का फैसला है, तो मैं इस बारे में कुछ नहीं कहूंगा। उन्होंने आगे कहा, अगर मेरे माता-पिता उसे घर लाना चाहते हैं, तो मैं घर पर नहीं रहूंगा।


    सीबीआई जांच की मांग

    इससे पहले सोनम को जमानत मिलने पर राजा के परिवार ने असंतोष जताया और मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की। राजा की भावुक मां उमा ने कहा कि सोनम उनके बेटे के हत्याकांड की कथित तौर पर मुख्य साजिशकर्ता है और उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि आखिर उसे जमानत कैसे मिल गई। उन्होंने कहा कि मेघालय पुलिस ने पिछले नौ महीने में इस मामले की अच्छी तरह जांच की, ‘लेकिन यह उनकी समझ से परे है कि महीने-दो महीने में खेल अचानक कैसे बदल गया?’ राजा की मां ने कहा, हम सरकार से एक ही मांग करते हैं कि हत्याकांड के शिकार मेरे बेकसूर बेटे को इंसाफ मिले। मुझे इस मामले में सीबीआई जांच चाहिए। राजा के बड़े भाई विपिन ने कहा कि उनका परिवार सोनम को जमानत देने के निचली अदालत के फैसले को मेघालय हाई कोर्ट में चुनौती देगा।

    10 महीने से जेल में बंद थी सोनम
    विपिन ने जांच में ‘हेर-फेर’ का संदेह जताते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ने उन्हें अब तक न तो चार्जशीट की कॉपी दी है, न ही उन्हें से ठीक से देखने का मौका मिला है। अधिकारियों ने बताया कि अपने पति राजा रघुवंशी की साजिशन हत्या में शामिल होने के आरोप में सोनम को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से नौ जून 2025 को गिरफ्तार किया गया था और वह 10 महीने से अधिक समय तक शिलांग के जिला कारागार में न्यायिक हिरासत के तहत बंद थी।

    राजा रघुवंशी का परिवार ट्रांसपोर्ट के कारोबार से जुड़ा है। उनकी सोनम से शादी 11 मई को इंदौर में हुई थी और वे 20 मई को हनीमून के वास्ते मेघालय के लिए रवाना हुए थे। हनीमून के दौरान 23 मई को लापता राजा रघुवंशी का शव दो जून को पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा क्षेत्र (जिसे चेरापूंजी भी कहा जाता है) में एक झरने के पास गहरी खाई में पाया गया था। राजा रघुवंशी हत्याकांड में शामिल होने के आरोप में उनकी पत्नी सोनम के साथ ही इस महिला के कथित प्रेमी राज कुशवाह और कुशवाह के तीन दोस्तों को भी गिरफ्तार किया गया था।

  • मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी का कहर, भोपाल में मंगलवार रहा सीजन का सबसे गर्म दिन

    मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी का कहर, भोपाल में मंगलवार रहा सीजन का सबसे गर्म दिन

    भोपाल। मध्य प्रदेश में गर्मी लगातार रिकॉर्ड तोड़ रही है। राज्य का प्रमुख पर्यटन स्थल खजुराहो इस समय सबसे ज्यादा तप रहा है, जहां मंगलवार को तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल में भी पारा 43.6 डिग्री तक पहुंच गया, जो पिछले 10 वर्षों में दूसरा सबसे अधिक और इस सीजन का सबसे गर्म दिन रहा।

    मौसम में बदलाव का कारण सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन है, जिसकी वजह से राज्य के उत्तरी क्षेत्रों ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग में तापमान में हल्की गिरावट देखने को मिली है। हालांकि, बुधवार को प्रदेश के 15 जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। इनमें ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, विदिशा, सागर, रायसेन, मंडला और छिंदवाड़ा शामिल हैं।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) भोपाल केंद्र के अनुसार, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, पन्ना, सतना और रीवा में दिन के समय लू का प्रभाव रहेगा, जबकि शाम के बाद मौसम में बदलाव के संकेत हैं। इन इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। इसके अलावा मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, बालाघाट, सिवनी और बैतूल में भी वर्षा की संभावना जताई गई है।

    भीषण गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेष रूप से दोपहर 12 से 3 बजे के बीच बिना जरूरी काम के घर से बाहर न निकलने की चेतावनी दी गई है, क्योंकि इस समय लू का असर सबसे ज्यादा रहता है। भोपाल सहित कई शहरों में गर्मी का प्रभाव अभी जारी रहने वाला है।

    मंगलवार को खजुराहो के अलावा कई शहरों में तापमान 44 डिग्री के पार दर्ज किया गया। सीधी में 44.6 डिग्री और श्योपुर में 44 डिग्री तापमान रहा। वहीं रायसेन में 43.8, उमरिया में 43.5, खंडवा में 43.4, मुरैना में 43.3, मंडला में 43.2 और रतलाम-दमोह में 43 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल 43.6 डिग्री के साथ सबसे गर्म रहा, जबकि इंदौर में 42.2, जबलपुर में 42.7 और ग्वालियर व उज्जैन में 41 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

  • किसान कल्याण योजना की 14वीं किस्त टली, 85 लाख किसानों को अब मई का इंतजार

    किसान कल्याण योजना की 14वीं किस्त टली, 85 लाख किसानों को अब मई का इंतजार


    मध्य प्रदेश के लाखों किसानों के लिए किसान कल्याण योजना की अगली किस्त का इंतजार और लंबा हो गया है। राज्य के करीब 85 लाख किसान इस योजना के तहत मिलने वाली 14वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, लेकिन अब यह साफ होता दिख रहा है कि भुगतान की तारीख आगे खिसक गई है।

    पहले उम्मीद की जा रही थी कि किसानों के खातों में यह राशि अप्रैल महीने में किसी विशेष अवसर या त्योहार के आसपास पहुंच जाएगी। लेकिन महीने के अंत तक भी कोई आधिकारिक संकेत न मिलने से किसानों की उम्मीदों को झटका लगा है। अब माना जा रहा है कि यह भुगतान मई महीने में किया जा सकता है।

    इस देरी के पीछे मुख्य कारण प्रशासनिक प्रक्रियाओं और डेटा सत्यापन को बताया जा रहा है। लाभार्थियों की सूची को अंतिम रूप देने और बैंकिंग प्रक्रिया को पूरा करने में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। इसी वजह से किस्त जारी करने की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित हो गई है और इसे अगले महीने तक आगे बढ़ा दिया गया है।

    किसानों के बीच अब यह भी चर्चा तेज हो गई है कि क्या इस बार दो किस्तों की राशि एक साथ जारी की जा सकती है। अगर सरकार ऐसा निर्णय लेती है, तो किसानों को 2000 रुपये की बजाय 4000 रुपये तक की राशि एक साथ मिल सकती है। खेती के महत्वपूर्ण सीजन को देखते हुए यह राशि किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है, क्योंकि इस समय बीज, खाद और अन्य कृषि खर्चों में तेजी से बढ़ोतरी होती है।

    इस योजना के तहत किसानों को हर साल कुल 6000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन बराबर किस्तों में उनके बैंक खातों में सीधे भेजी जाती है। यह सहायता केंद्र की किसान सम्मान निधि योजना के अतिरिक्त होती है, जिससे किसानों को कुल मिलाकर एक निश्चित आर्थिक सहारा मिलता है।

    हालांकि इस बार की देरी ने किसानों की चिंता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि प्रक्रिया पूरी होते ही भुगतान जल्द जारी कर दिया जाएगा। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने बैंक खाते की जानकारी अपडेट रखें, ताकि किसी भी तकनीकी समस्या की वजह से भुगतान अटक न जाए।

    विशेष रूप से यह भी जरूरी बताया जा रहा है कि आधार लिंकिंग और डीबीटी सुविधा सक्रिय हो, क्योंकि इन्हीं तकनीकी प्रक्रियाओं के जरिए राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजी जाती है। कई बार मामूली गलतियों के कारण भी भुगतान में देरी हो जाती है।

    फिलहाल किसानों की नजर अब मई महीने पर टिकी हुई है, जब इस किस्त के जारी होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह इंतजार भले ही थोड़ा लंबा हो गया हो, लेकिन किसानों को उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें उनकी लंबित राशि प्राप्त हो जाएगी और खेती के कामों में उन्हें राहत मिलेगी।

  • सतना में सुरक्षा में बड़ी चूक वन स्टॉप सेंटर से तीन लड़कियां फरार पहले भी घर से भाग चुकी थीं

    सतना में सुरक्षा में बड़ी चूक वन स्टॉप सेंटर से तीन लड़कियां फरार पहले भी घर से भाग चुकी थीं


    सतना । मध्यप्रदेश के सतना शहर से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है जहां जवाहर नगर स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर से तीन नाबालिग लड़कियां देर रात खिड़की तोड़कर फरार हो गईं। यह मामला सामने आते ही प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    जानकारी के अनुसार तीनों बालिकाओं को बाल कल्याण समिति के आदेश पर वन स्टॉप सेंटर में अस्थायी आश्रय दिया गया था। इनमें से एक लड़की उत्तर प्रदेश के बिजनौर की रहने वाली बताई जा रही है जबकि अन्य दो सतना जिले के पौराणिक टोला और रामपुर बघेलान क्षेत्र से हैं। ये सभी पहले भी अपने घरों से भाग चुकी थीं जिसके बाद उन्हें सुरक्षा और देखरेख के लिए सेंटर में रखा गया था।

    बताया जा रहा है कि जिस डोरमेट्री में तीनों रह रही थीं वहां की खिड़की को उन्होंने रात के समय तोड़ दिया और एक-एक कर बाहर निकल गईं। इसके बाद वे सेंटर परिसर से बाहर निकलने में सफल हो गईं। हैरानी की बात यह है कि सेंटर में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं और मुख्य द्वार पर चौकीदार की तैनाती भी रहती है इसके बावजूद लड़कियों का इस तरह भाग जाना सुरक्षा में बड़ी चूक की ओर इशारा करता है।

    प्राथमिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि सेंटर के पीछे स्थित मैदान की ओर से तीनों ने भागने का रास्ता चुना। पीछे की दिशा में सीएम राइज स्कूल मैदान होने के कारण वहां निगरानी अपेक्षाकृत कम थी और इसी का फायदा उठाकर वे फरार हो गईं।

    घटना की जानकारी मिलते ही सेंटर की अधीक्षिका नीता श्रीवास्तव ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। इसके बाद सिटी कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने अलग-अलग टीमें गठित की हैं जो संभावित स्थानों पर लड़कियों की तलाश कर रही हैं। रेलवे स्टेशन बस स्टैंड और शहर के अन्य प्रमुख स्थानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

    इसके साथ ही स्मार्ट सिटी और रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं ताकि लड़कियों की मूवमेंट का पता लगाया जा सके। पुलिस उनके परिजनों और परिचितों से भी संपर्क कर रही है जिससे यह अंदाजा लगाया जा सके कि वे किन संभावित ठिकानों पर जा सकती हैं।

    यह घटना केवल एक फरारी का मामला नहीं है बल्कि यह बालिकाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह भी खड़ा करती है। जिस जगह को सुरक्षित आश्रय माना जाता है वहीं से इस तरह नाबालिगों का भाग जाना चिंता का विषय है। अब देखना होगा कि पुलिस कितनी जल्दी इन लड़कियों को सुरक्षित ढूंढ पाती है और साथ ही प्रशासन इस घटना से सबक लेकर सुरक्षा व्यवस्था को कितना मजबूत करता है।

  • 1 से 30 मई तक बीजेपी का मेगा प्रशिक्षण अभियान ,नई कार्यसमिति जल्द राम नगरी ओरछा में होगी अहम बैठक

    1 से 30 मई तक बीजेपी का मेगा प्रशिक्षण अभियान ,नई कार्यसमिति जल्द राम नगरी ओरछा में होगी अहम बैठक


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है जहां भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को और मजबूत बनाने के लिए बड़ा रोडमैप तैयार किया है। राजधानी भोपाल स्थित पार्टी कार्यालय में हुई अहम बैठक में आने वाले दिनों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बैठक में प्रदेश स्तर के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए और संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने पर जोर दिया गया।

    इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में 1 मई से 30 मई तक व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जाएंगे। इन प्रशिक्षण सत्रों में पार्टी कार्यकर्ताओं को कुल 11 अलग-अलग विषयों पर प्रशिक्षित किया जाएगा। उनका कहना था कि भाजपा की कार्यप्रणाली में नियमित प्रशिक्षण का विशेष महत्व है और इसी के माध्यम से कार्यकर्ताओं को विचारधारा संगठनात्मक कौशल और जनसंपर्क के तरीकों में दक्ष बनाया जाता है।

    बैठक में डॉ. मोहन यादव सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे जिन्होंने इस अभियान को सफल बनाने के लिए अपने सुझाव भी दिए। इसके अलावा राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश प्रदेश प्रभारी डॉ महेन्द्र सिंह और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल समेत अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी प्रशिक्षण महाअभियान की रूपरेखा को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    इस पूरी प्रक्रिया के बीच सबसे महत्वपूर्ण घोषणा प्रदेश कार्यसमिति को लेकर सामने आई। हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट संकेत दिए कि नई प्रदेश कार्यसमिति की सूची जल्द जारी की जाएगी। यह कार्यसमिति आगामी समय में पार्टी के संगठनात्मक फैसलों और राजनीतिक रणनीति का केंद्र होगी। कार्यसमिति के गठन को लेकर कार्यकर्ताओं और नेताओं में उत्सुकता भी बढ़ गई है क्योंकि इसमें शामिल नाम भविष्य की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

    खास बात यह है कि नई कार्यसमिति के गठन के बाद उसकी पहली बैठक ऐतिहासिक स्थल ओरछा में आयोजित की जाएगी। यह बैठक भगवान राम के दरबार में आयोजित करने की योजना है जिससे इसे सांस्कृतिक और वैचारिक महत्व भी दिया जा रहा है। पार्टी इसे केवल एक संगठनात्मक बैठक नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक और प्रेरणादायक शुरुआत के रूप में देख रही है।

    निगम मंडलों में नियुक्तियों को लेकर भी प्रदेश अध्यक्ष ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कई बार सभी की सहमति एक नाम पर नहीं बन पाती इसलिए प्रक्रिया में समय लगता है लेकिन सरकार और संगठन योग्य और काबिल लोगों को ही जिम्मेदारी देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध और मतभेद हर युग में रहे हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है।

    कुल मिलाकर देखा जाए तो भाजपा ने मध्यप्रदेश में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है। मई का महीना पार्टी के लिए बेहद अहम रहने वाला है जिसमें प्रशिक्षण अभियान के साथ-साथ नई कार्यसमिति का गठन और उसकी पहली बैठक राजनीतिक रूप से कई संकेत देने वाली होगी।

  • हाईकोर्ट सुनवाई से पहले सरकार का मास्टरस्ट्रोक ,विशेष अधिवक्ताओं को हटाया अब दिग्गज वकील संभालेंगे मोर्चा

    हाईकोर्ट सुनवाई से पहले सरकार का मास्टरस्ट्रोक ,विशेष अधिवक्ताओं को हटाया अब दिग्गज वकील संभालेंगे मोर्चा


    जबलपुर । मध्यप्रदेश में लंबे समय से सुर्खियों में बना ओबीसी 27 प्रतिशत आरक्षण मामला एक बार फिर नए मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। हाईकोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई से ठीक पहले राज्य सरकार ने अपनी कानूनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए दो विशेष अधिवक्ताओं को मामले से अलग कर दिया है। इस फैसले ने न सिर्फ कानूनी हलकों में हलचल मचा दी है बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

    जानकारी के मुताबिक राज्यपाल की मंजूरी से पहले नियुक्त किए गए विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह अब इस मामले में सरकार का पक्ष नहीं रखेंगे। सरकार की ओर से जारी नई अधिसूचना में साफ कर दिया गया है कि इन दोनों को इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब मामला अपने निर्णायक चरण की ओर बढ़ रहा है और हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है।

    इस घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर चलती प्रक्रिया के बीच यह बदलाव क्यों किया गया। क्या सरकार अपनी कानूनी तैयारी को और मजबूत करना चाहती है या फिर अब तक की रणनीति से संतुष्ट नहीं थी। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस बदलाव के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं की गई है लेकिन संकेत यही मिल रहे हैं कि सरकार इस मामले को लेकर कोई भी जोखिम लेने के मूड में नहीं है।

    अब इस केस में सरकार की ओर से देश के वरिष्ठ और अनुभवी कानून अधिकारी पैरवी करते नजर आएंगे। हाईकोर्ट में सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज और मध्यप्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह रखेंगे। इन दिग्गज नामों की एंट्री से साफ है कि सरकार ने इस केस को पूरी ताकत के साथ लड़ने का मन बना लिया है और वह अदालत में हर पहलू को मजबूती से प्रस्तुत करना चाहती है।

    गौरतलब है कि ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का मुद्दा लंबे समय से न्यायालय में लंबित है और इसका सीधा असर प्रदेश की भर्ती प्रक्रियाओं पर पड़ रहा है। हजारों अभ्यर्थी इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि यह मामला उनके भविष्य से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सरकार की ओर से किया गया यह बड़ा बदलाव आने वाले फैसले की दिशा पर भी असर डाल सकता है।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुनवाई से पहले वकीलों की टीम बदलना एक रणनीतिक कदम हो सकता है जिससे सरकार अपने पक्ष को अधिक प्रभावी तरीके से रख सके। वहीं विपक्ष और कुछ विश्लेषक इसे सवालों के घेरे में भी देख रहे हैं और इसे सरकार की पिछली रणनीति पर अविश्वास के तौर पर पेश कर रहे हैं।

    अब सभी की नजरें हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं जहां यह तय होगा कि यह नया दांव सरकार के लिए कितना कारगर साबित होता है। आने वाले दिनों में यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि राजनीतिक रूप से भी और ज्यादा गर्माने वाला है।

  • उज्जैन यूनिवर्सिटी में दहशत का साया नई बिल्डिंग पर लिखी धमकी ने बढ़ाई चिंता सुरक्षा पर उठे सवाल

    उज्जैन यूनिवर्सिटी में दहशत का साया नई बिल्डिंग पर लिखी धमकी ने बढ़ाई चिंता सुरक्षा पर उठे सवाल


    उज्जैन । मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित सम्राट विक्रम विश्वविद्यालय एक अजीब और चिंताजनक घटना के बाद सुर्खियों में आ गया है जहां शिक्षा के माहौल के बीच अचानक दहशत का साया छा गया है विश्वविद्यालय की कृषि अध्ययनशाला की नई बिल्डिंग में अज्ञात शरारती तत्वों की हरकत ने छात्रों और स्टाफ दोनों को भयभीत कर दिया है

    करीब 17 करोड़ की लागत से तैयार इस नई इमारत को हाल ही में शैक्षणिक गतिविधियों के लिए शुरू किया गया था लेकिन अब यह बिल्डिंग एक सनसनीखेज घटना की वजह से चर्चा में है बताया जा रहा है कि सुबह जब लोग परिसर पहुंचे तो मुख्य द्वार पर लाल रंग से लिखे शब्दों ने सभी को हैरान कर दिया गेट पर बड़े अक्षरों में तुम सब मरोगे लिखा हुआ था जिसे देखकर मौके पर मौजूद लोगों के बीच हड़कंप मच गया

    सिर्फ यही नहीं बल्कि गेट के पास कुछ संदिग्ध सामान भी रखा हुआ मिला जिसमें एक मटकी लाल कपड़ा और अन्य वस्तुएं शामिल थीं इन चीजों को देखकर कई लोगों ने तंत्र क्रिया जैसी आशंका जताई हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन इस तरह का दृश्य देखकर छात्रों और कर्मचारियों में डर का माहौल बनना स्वाभाविक था

    घटना की जानकारी मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन तुरंत सक्रिय हुआ और सबसे पहले मौके से उस संदिग्ध सामान को हटाया गया साथ ही दीवार पर लिखे धमकी भरे शब्दों को भी मिटा दिया गया विभागाध्यक्ष ने इस पूरी घटना को असामाजिक तत्वों की शरारत बताया है और उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दे दी गई है

    इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहा है क्योंकि जिस स्थान पर यह घटना हुई वहां सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगे हैं ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो गया है कि यह हरकत किसने और कब की छात्रों का कहना है कि अगर परिसर में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम होते तो शायद ऐसी घटना को रोका जा सकता था

    करीब 1100 छात्रों और स्टाफ के बीच इस घटना के बाद भय का माहौल है कई छात्र अब अकेले उस बिल्डिंग की ओर जाने से भी हिचकिचा रहे हैं शिक्षा का माहौल जहां सुरक्षित और सकारात्मक होना चाहिए वहां इस तरह की घटनाएं चिंता बढ़ाने वाली हैं

    प्रशासन अब पूरे मामले की जांच में जुट गया है और यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इसके पीछे कौन लोग हैं और उनका उद्देश्य क्या था साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो

    यह घटना सिर्फ एक शरारत नहीं बल्कि एक गंभीर चेतावनी भी हो सकती है जो यह संकेत देती है कि शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा को लेकर और अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है फिलहाल सभी की नजरें जांच के नतीजों पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस रहस्य से पर्दा उठेगा

  • दिल दहला देने वाली सुबह: रात तक हंसी-ठिठोली, सुबह फंदे पर झूलता मिला पति-पत्नी का शव

    दिल दहला देने वाली सुबह: रात तक हंसी-ठिठोली, सुबह फंदे पर झूलता मिला पति-पत्नी का शव


    सागर । मध्यप्रदेश के सागर जिले से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है जहां एक पति और पत्नी ने एक साथ अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली इस घटना ने न केवल परिवार बल्कि पूरे मोहल्ले को गहरे सदमे में डाल दिया है मामला शाहगढ़ थाना क्षेत्र के नगर परिषद के वाल्मीकि वार्ड का है जहां रहने वाले 45 वर्षीय उत्तम अहिरवार और उनकी 42 वर्षीय पत्नी हरिबाई का शव उनके ही घर में फांसी के फंदे पर लटका हुआ मिला

    हैरानी की बात यह है कि जिस दंपती ने यह खौफनाक कदम उठाया वह कुछ घंटों पहले तक पूरी तरह सामान्य नजर आ रहे थे बताया जा रहा है कि घटना वाली रात दोनों अपने घर के बाहर पड़ोसियों के साथ बैठे थे बातचीत कर रहे थे और माहौल पूरी तरह सामान्य था किसी को भी इस बात का अंदेशा नहीं था कि यह उनकी जिंदगी की आखिरी रात साबित होगी

    सुबह जब घर के अंदर से कोई हलचल नहीं हुई तो परिजनों और आसपास के लोगों को शक हुआ दरवाजा खोलकर देखा गया तो अंदर का दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला था पति और पत्नी दोनों फंदे पर झूल रहे थे यह दृश्य देखते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई

    घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई जिसके बाद शाहगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवों को नीचे उतारकर पंचनामा कार्रवाई की और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया प्रारंभिक जांच में किसी तरह का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है जिससे यह घटना और भी ज्यादा रहस्यमयी बन गई है

    मृतक दंपती के भतीजे ने पुलिस को घटना की जानकारी दी वहीं उनके बेटे को भी सूचना दी गई जो उस समय सागर में मौजूद था परिवार के लोग इस घटना से पूरी तरह टूट चुके हैं और किसी को समझ नहीं आ रहा कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि दोनों ने एक साथ इतना बड़ा कदम उठा लिया

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है आत्महत्या के पीछे की वजह जानने के लिए परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं कोई मानसिक दबाव या पारिवारिक विवाद तो इसकी वजह नहीं बना

    इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि हमारे आसपास रहने वाले लोग कितनी चुपचाप अपने अंदर संघर्ष झेल रहे होते हैं और हमें इसकी भनक तक नहीं लगती एक सामान्य दिखने वाली जिंदगी के पीछे छिपे दर्द का अंदाजा लगाना अक्सर मुश्किल हो जाता है फिलहाल पूरे मामले का सच पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही सामने आ पाएगा लेकिन इस दर्दनाक घटना ने इलाके में गहरा सन्नाटा जरूर छोड़ दिया है

  • पन्ना में स्वास्थ्य व्यवस्था फेल प्रसव पीड़ा में तड़पती महिला को अस्पताल में मिला ताला

    पन्ना में स्वास्थ्य व्यवस्था फेल प्रसव पीड़ा में तड़पती महिला को अस्पताल में मिला ताला

    पन्ना । मध्यप्रदेश के पन्ना जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान बंद अस्पताल के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यह घटना न केवल सिस्टम की कमजोरी को उजागर करती है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की हकीकत भी सामने लाती है।

    जानकारी के अनुसार घटना कल्दा क्षेत्र की है जहां ग्राम सकतरा निवासी वंदना वर्मा को सोमवार रात अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तुरंत 108 एम्बुलेंस को सूचना दी और भारी बारिश व तेज हवाओं के बीच महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कल्दा पहुंचाया गया। लेकिन वहां पहुंचने के बाद जो दृश्य सामने आया उसने सभी को हैरान कर दिया।

    अस्पताल के मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ था और वहां कोई डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं था। तेज बारिश और असहनीय दर्द के बीच परिजन अस्पताल के बाहर खड़े होकर मदद की गुहार लगाते रहे। उन्होंने बार बार डॉक्टरों और स्टाफ को फोन किया लेकिन किसी ने कॉल उठाना तक जरूरी नहीं समझा।

    इस बीच महिला की हालत बिगड़ती जा रही थी और हर मिनट की देरी जोखिम बढ़ा रही थी। ऐसे में मजबूरी में परिजनों को बड़ा फैसला लेना पड़ा और गर्भवती महिला को करीब 27 किलोमीटर दूर सलेहा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। गनीमत रही कि एम्बुलेंस समय रहते वहां पहुंच गई और महिला को इलाज मिल सका।

    पीड़िता के परिजनों ने इस घटना पर गहरा आक्रोश जताया है। उनका कहना है कि वे अस्पताल इस उम्मीद से पहुंचे थे कि समय पर इलाज मिलेगा लेकिन वहां ताला लटका मिला जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई। उनका कहना है कि अगर समय पर दूसरे अस्पताल नहीं ले जाते तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था।

    यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है खासकर उन क्षेत्रों में जहां लोगों की निर्भरता पूरी तरह सरकारी अस्पतालों पर होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी लापरवाही न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि यह सीधे तौर पर लोगों की जान से जुड़ा मामला है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।