Category: Madhya Pradesh

  • ग्वालियर: कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर युवती से दरिंदगी, शादी का झांसा देकर साल भर तक किया शोषण

    ग्वालियर: कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर युवती से दरिंदगी, शादी का झांसा देकर साल भर तक किया शोषण


    ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के घाटीगांव क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहां एक युवक ने अपनी ही दूर की रिश्तेदार युवती को नशीली कोल्ड ड्रिंक पिलाकर हवस का शिकार बनाया। आरोपी यहीं नहीं रुका, बल्कि उसने शादी के ‘रंगीन सपने’ दिखाकर करीब एक साल तक युवती का शारीरिक शोषण किया। जब पीड़िता ने शादी के लिए दबाव बनाया, तो आरोपी ने न केवल इनकार कर दिया बल्कि उसे जान से मारने की धमकी भी दी।

    दोस्त के जन्मदिन के बहाने ले गया खेत

    पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, 21 वर्षीय पीड़िता घाटीगांव क्षेत्र की रहने वाली है। उसकी पहचान आरोन निवासी रामनिवास बंजारा से थी, जो रिश्ते में उसका दूर का भाई लगता था। जनवरी 2025 की घटना: आरोपी ने दोस्त के जन्मदिन का बहाना बनाकर युवती को साथ घूमने चलने के लिए राजी किया। भरोसे में आकर युवती उसकी बाइक पर बैठकर चली गई। नशीली कोल्ड ड्रिंक आरोपी उसे गांव से दूर एक सुनसान खेत में बनी झोपड़ी में ले गया। वहां उसने युवती को कोल्ड ड्रिंक पिलाई, जिसमें नशीला पदार्थ मिला था। युवती के बेहोश होते ही आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया।

    शादी का झांसा और सीक्रेट मोबाइल

    होश आने पर जब युवती ने विरोध किया, तो रामनिवास ने शादी का वादा कर उसे शांत करा दिया। आरोपी ने युवती को अपने जाल में फंसाए रखने के लिए एक अलग मोबाइल और सिम कार्ड भी दिया था, ताकि वे गुप्त रूप से बात कर सकें। जब भी युवती के माता-पिता घर से बाहर होते, आरोपी वहां पहुंचकर उसका शोषण करता रहा। यह सिलसिला करीब एक साल तक चलता रहा।

    धमकी मिलने पर खुला राज

    हाल ही में जब पीड़िता और उसके परिजनों ने रामनिवास पर शादी का दबाव बनाया, तो उसने अपना असली रंग दिखा दिया। आरोपी ने शादी से साफ इनकार करते हुए युवती को धमकी दी कि अगर उसने इस बारे में किसी को बताया या दोबारा फोन किया, तो वह उसे जान से मार देगा। डरी-सहमी पीड़िता ने आखिरकार हिम्मत जुटाई और परिजनों के साथ थाने पहुंचकर आपबीती सुनाई।

    पुलिस की कार्रवाई

    घाटीगांव थाना पुलिस ने पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपी रामनिवास बंजारा के खिलाफ दुष्कर्म  और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी फिलहाल फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं।

  • इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव: अध्यक्ष के लिए रोमांचक मुकाबला, उपाध्यक्ष और सह सचिव पद पर बड़ी जीत

    इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव: अध्यक्ष के लिए रोमांचक मुकाबला, उपाध्यक्ष और सह सचिव पद पर बड़ी जीत


    इंदौर । इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव परिणाम बुधवार देर रात घोषित किए गए। लंबे और रोमांचक मुकाबले के बाद अध्यक्ष पद पर मनीष यादव विजयी हुए। उपाध्यक्ष, सचिव और सह सचिव पदों पर भी नवनिर्वाचितों ने अपने मजबूत प्रदर्शन से जीत दर्ज की। चुनाव में कुल 1914 मतदाता शामिल हुए।

    अध्यक्ष पद का मुकाबला बेहद कड़ा और रोमांचक रहा। शुरुआत में गौरव श्रीवास्तव आगे चल रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, मनीष यादव ने 17वें राउंड में बढ़त बना ली और 20वें राउंड तक उसे बनाए रखा। अंततः मनीष यादव 512 वोटों के साथ 20 वोटों के अंतर से जीत गए। गौरव श्रीवास्तव को 492 वोट मिले। अन्य प्रत्याशियों में जीपी सिंह को 406, मनीष जैन को 282 और पवन जोशी को 95 मत मिले।

    उपाध्यक्ष पद पर अभिषेक तुगनावत ने शुरुआत से ही स्पष्ट बढ़त बनाए रखी और एकतरफा जीत दर्ज की। उन्हें 858 मत प्राप्त हुए, जबकि उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी अपूर्वा शुक्ला को 311, धर्मेंद्र साहू को 232, मधुसूदन यादव को 216 और भावना साहू को 162 वोट ही मिले।

    सचिव पद के चुनाव में तीन प्रमुख प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर रही। मतों की बार-बार अदला-बदली के बीच मनीष गडकर 652 वोट लेकर विजयी हुए। उनके प्रतिद्वंद्वी गोविंद राय को 582 और निलेश मनोरे को 533 मत प्राप्त हुए। सह सचिव पद पर अमित राज ने सबसे बड़ी जीत दर्ज की। उन्हें 1027 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी ज्ञानेंद्र शर्मा को 739 वोट ही मिल सके। एग्जीक्यूटिव मेंबर के रूप में राहुल पांचाल, तेजस जैन, अमन मालवीय, रश्मेंद्र सूर्यवंशी और अर्निक जैन चुने गए।

    परिणाम घोषित होते ही बार परिसर में समर्थकों ने जीत का जश्न मनाया। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने कहा कि वे अधिवक्ताओं की समस्याओं, सुविधाओं और हाईकोर्ट परिसर से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता से उठाएंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज द्विवेदी और मीडिया प्रभारी अजय मिश्रा के अनुसार, मतदान सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक हुआ। इसके बाद शाम 7 बजे से मतगणना शुरू हुई, जो देर रात करीब 1 बजे तक चली। इस चुनाव ने बार एसोसिएशन में नई ऊर्जा और उत्साह पैदा कर दिया है।

  • आयुष्मान योजना पर बड़ा फैसला: निजी अस्पतालों के इंपैनलमेंट को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज

    आयुष्मान योजना पर बड़ा फैसला: निजी अस्पतालों के इंपैनलमेंट को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज


    जबलपुर । मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों के इंपैनलमेंट को लेकर दायर की गई जनहित याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसले में साफ कहा कि राज्य सरकार का यह कदम आम जनता को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन निजी अस्पतालों को इंपैनलमेंट या नवीनीकरण की शर्तों से कोई आपत्ति है, वे स्वयं अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं, लेकिन जनहित याचिका के माध्यम से इस प्रक्रिया को चुनौती नहीं दी जा सकती।

    यह याचिका जबलपुर निवासी देवेंद्र दत्त द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आयुष्मान योजना के अंतर्गत निजी अस्पतालों के इंपैनलमेंट के लिए नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स NABH  सर्टिफिकेट को अनिवार्य किए जाने पर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ता का तर्क था कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 23 सितंबर और 10 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश छोटे और मध्यम स्तर के निजी अस्पतालों के हितों के खिलाफ हैं। याचिका में कहा गया था कि NABH सर्टिफिकेट की शर्तें जटिल और खर्चीली हैं, जिससे छोटे अस्पताल योजना से बाहर हो सकते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच प्रभावित होगी।

    हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है। ऐसे में यह आवश्यक है कि योजना से जुड़े अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा के मानक सुनिश्चित किए जाएं। NABH सर्टिफिकेशन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे अस्पतालों की सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन किया जा सकता है।

    कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सरकार को यह अधिकार है कि वह अपनी योजनाओं के लिए आवश्यक मानक तय करे। यदि किसी निजी अस्पताल को लगता है कि ये शर्तें उसके लिए अनुचित हैं या उसके अधिकारों का उल्लंघन करती हैं, तो वह व्यक्तिगत रूप से अदालत में याचिका दायर कर सकता है। लेकिन जनहित याचिका के माध्यम से पूरी नीति को चुनौती देना उचित नहीं है।

    इस फैसले को राज्य सरकार के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि आयुष्मान योजना में केवल उन्हीं अस्पतालों को शामिल किया जाना चाहिए, जो मरीजों को सुरक्षित, पारदर्शी और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं देने में सक्षम हों। NABH सर्टिफिकेशन को इसी दिशा में गुणवत्ता सुनिश्चित करने का एक मानक माना जा रहा है।

    वहीं, निजी अस्पतालों के एक वर्ग का मानना है कि NABH सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया महंगी और समय लेने वाली है, जिससे छोटे अस्पतालों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब ऐसे अस्पतालों को या तो तय मानकों को पूरा करना होगा या फिर व्यक्तिगत स्तर पर कानूनी विकल्प तलाशने होंगे।

    कुल मिलाकर, हाईकोर्ट का यह निर्णय आयुष्मान योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे योजना के लाभार्थियों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।

  • शहडोल में बीज भंडार में भीषण आगजनी: लाखों का धान जलकर खाक, हादसा या लापरवाही? भंडारण व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

    शहडोल में बीज भंडार में भीषण आगजनी: लाखों का धान जलकर खाक, हादसा या लापरवाही? भंडारण व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल


    शहडोल । जिले में किसानों की मेहनत और सरकारी व्यवस्था पर उस वक्त बड़ा सवाल खड़ा हो गया, जब कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत नर्सरहा स्थित बीज भंडार के धान गोदाम में भीषण आग लग गई। आग इतनी भयावह थी कि कुछ ही देर में गोदाम में रखा लाखों रुपये मूल्य का धान जलकर पूरी तरह खाक हो गया। धुएं के घने गुबार और उठती लपटों ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बना दिया, वहीं किसानों और स्थानीय लोगों में गहरी चिंता और आक्रोश भी देखने को मिला।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुरुवार को अचानक गोदाम से धुआं उठता दिखाई दिया और कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते धान से भरी बोरियां आग की चपेट में आ गईं। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया गया। घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू तो पा लिया गया, लेकिन तब तक गोदाम में रखा अधिकांश धान नष्ट हो चुका था।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर, एसडीएम सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने प्रारंभिक तौर पर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल आग लगने का कारण अज्ञात बताया जा रहा है, लेकिन जिस तरह से आग तेजी से फैली, उसने कई तरह के संदेह पैदा कर दिए हैं।

    इस घटना ने जिले की धान खरीदी और भंडारण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में शहडोल जिले में धान खरीदी को लेकर कई गड़बड़ियों के मामले सामने आ चुके हैं। कुछ दिन पहले ही धान की बोरियों से पत्थर और कंकड़ निकलने का मामला उजागर हुआ था, जिसने पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिया था। अब बीज भंडार में आग लगने की इस घटना ने संदेह को और गहरा कर दिया है।

    स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि यदि यह हादसा है तो सुरक्षा इंतजामों में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई, और यदि यह लापरवाही या किसी साजिश का नतीजा है तो इसके पीछे जिम्मेदार कौन है किसानों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि जलकर नष्ट हुआ धान आखिर किसका था और इसका असर उनकी भुगतान प्रक्रिया पर तो नहीं पड़ेगा।

    प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि आगजनी के कारणों की हर पहलू से जांच की जाएगी और यदि किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस घटना ने न केवल सरकारी भंडारण व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि किसानों के भरोसे को भी गहरी ठेस पहुंचाई है।

  • MP हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने में देरी, 4.8 लाख लंबित मामलों का निपटारा करने में लग सकते हैं 40 साल

    MP हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने में देरी, 4.8 लाख लंबित मामलों का निपटारा करने में लग सकते हैं 40 साल

    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर और खंडपीठ इंदौर व ग्वालियर में यदि वर्तमान 42 न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 75–85 न्यायाधीश नहीं की गई, तो वर्तमान में लंबित 4,80,592 मामले निपटाने में सिर्फ पांच या दस साल नहीं, बल्कि चार दशक से अधिक समय लग सकता है।

    लंबित मामलों की गंभीर स्थिति
    हालिया आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 तक न्यायाधीशों की संख्या औसतन 42–43 रही। इस अवधि में कुल 84,455 नए मामले दर्ज हुए, जबकि 90,045 मामलों का निपटारा हुआ, जिससे केवल 5,590 मामलों की शुद्ध कमी दर्ज हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गति के बावजूद लंबित मामलों का समाधान 39–40 वर्षों में ही संभव होगा।

    न्यायिक रिक्तियों का कारण
    1989–90 की एरियर कमेटी की रिपोर्ट और हालिया विश्लेषण यह स्पष्ट करते हैं कि उच्च न्यायालयों में मामलों के जमा होने का मुख्य कारण न्यायाधीशों की नियुक्तियों में देरी है। वर्तमान स्थिति दर्शाती है कि न्याय प्रक्रिया अत्यधिक धीमी होने पर संविधान द्वारा प्रदत्त न्याय तक त्वरित पहुँच (अनुच्छेद 39-ए) का अधिकार केवल औपचारिक बनकर रह जाएगा।

    न्यायाधीशों की आवश्यक संख्या और अनुशंसाएं
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपनी स्वीकृत क्षमता 53 से बढ़ाकर 85 न्यायाधीश करने की अनुशंसा की है। केंद्र और राज्य सरकार से अब तक वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति लंबित है।

    लक्ष्य यह है कि अगले पांच वर्षों में लंबित मामलों को खत्म करने के लिए प्रति माह 22,000–23,000 मामलों का निपटारा आवश्यक होगा। इसके लिए कम से कम 75 कार्यरत न्यायाधीश तुरंत नियुक्त किए जाने चाहिए।

    वर्ष 2026 में मुख्य न्यायाधीश सहित सात न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने वाले हैं। यदि नई नियुक्तियां समय पर नहीं होतीं, तो लंबित मामलों का बैकलाग फिर बढ़ सकता है।

    सुधार की दिशा
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुधार तभी स्थायी होगा जब

    न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई जाए

    विशेष बेंचों का गठन किया जाए

    आधुनिक डिजिटाइजेशन और प्रबंधन प्रणाली लागू की जाए

    साथ ही सरकार को अनुच्छेद 39-ए के तहत अपनी जवाबदेही निभाते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लानी होगी, ताकि आम जनता का न्यायपालिका पर भरोसा कायम रहे।

  • शोक संतप्त महाराष्ट्र: अजित पवार के निधन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने व्यक्त की गहरी संवेदना

    शोक संतप्त महाराष्ट्र: अजित पवार के निधन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने व्यक्त की गहरी संवेदना


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री श्री अजित पवार के आकस्मिक निधन पर गहन दु:ख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. श्री पवार को विनम्र श्रद्धांजलि देकर बाबा महाकाल से दिवंगत आत्मा की परम शांति की प्रार्थना की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व. श्री अजित पवार एक उदार छवि वाले महाराष्ट्र के जमीनी राजनेता थे। उन्होंने अलग-अलग सरकारों में महत्वपूर्ण विभागों के दायित्वों का पूरी जिम्मेदारी से निर्वहन करते हुए महाराष्ट्र के विकास में अमूल्य योगदान दिया। वे गरीब, वंचित और पिछड़ों के कल्याण के लिए सदैव समर्पित रहे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को जारी संदेश में कहा कि महाराष्ट्र के बारामती एयरपोर्ट में लैंडिंग के प्रयास के दौरान हुआ विमान हादसा हृदय विदारक है। इसमें श्री अजित पवार सहित पांच व्यक्तियों के निधन की सूचना मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व. श्री पवार उनके अच्छे मित्र थे। उनके निधन से मन व्यथित और पीड़ा से भरा हुआ है। श्री पवार का इस तरह से हम सबको छोड़कर चले जाना अविश्वनीय है। दु:ख की इस घड़ी में मध्यप्रदेश सरकार श्री अजित पवार के समर्थकों और शोकाकुल परिजन के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से प्लेन दुर्घटना में मृत सभी व्यक्तियों की आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजन को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।

  • अब तक 1.57 लाख ग्रामीण कृषकों को मात्र 5 रुपये में मिला नया विद्युत कनेक्शन

    अब तक 1.57 लाख ग्रामीण कृषकों को मात्र 5 रुपये में मिला नया विद्युत कनेक्शन


    भोपाल ।मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अपने कार्यक्षेत्र में ग्रामीण एवं कृषि उपभोक्ताओं को अब मात्र 5 रुपये में स्थायी घरेलू एवं कृषि पंप कनेक्शन उपलब्ध करा रही है। दिसंबर 2024 से यह योजना शुरू हुई है तब से अब तक इस योजना का लाभ 01 लाख 57 हजार 359 ग्रामीण कृषकों को मिल चुका है। इनमें से 58 हजार 711 घरेलू तथा 98 हजार 648 कृषि पंप कनेक्शन शामिल हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि घरेलू तथा कृषि पम्पों के कनेक्शनों की संख्या बढ़ाए जाने के लिये ऐसे कृषक जो विद्युत की उपलब्ध लाइन के समीप स्थित हैं उनको सुविधानुसार आसानी से स्थाई कृषि पंप कनेक्शन दिया जा रहा है।

    नवीन घरेलू एवं कृषि पंप के लिये स्थायी विद्युत कनेक्शन का आवेदन सरल संयोजन पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है। इसके लिए portal.mpcz.in पर मांगी गई आवश्यक जानकारी देनी होती है। अधिक जानकारी के लिए कंपनी के टोल फ्री नंबर 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

  • पीएम सूर्य घर योजना के तहत 29,275 उपभोक्ताओं को मिली 228 करोड़ से अधिक की सब्सिडी

    पीएम सूर्य घर योजना के तहत 29,275 उपभोक्ताओं को मिली 228 करोड़ से अधिक की सब्सिडी


    भोपाल ।मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा अपने क्षेत्रान्तर्गत आने वाले भोपाल, नर्मदापुरम्, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों में पीएम सूर्यघर योजना के तहत अब तक कुल 29 हजार 273 उपभोक्ता पंजीकृत हुए हैं। इन्हें 228 करोड़ से अधिक की राशि सब्सिडी के रूप में उनके खातों में जमा कराई जा चुकी है। कंपनी ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से संबंधित कार्यों की प्रगति की समीक्षा के दौरान रजिस्टर्ड उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उपरांत विद्युत वितरण कंपनी में रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर से ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाएं। देश के करोड़ों घरों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पीएम सूर्य घर योजना प्रारंभ की गई है। लोगों को इस योजना का लाभ मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा प्रदान किया जा रहा है। इस योजना के तहत एक किलोवॉट सोलर संयन्त्र लगाने पर 30 हजार रूपये, दो किलोवॉट सोलर संयन्त्र लगाने पर 60 हजार रुपए तथा तीन किलोवॉट या उससे अधिक के सोलर संयन्त्र स्थापना पर 78 हजार रुपए की सब्सिडी केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही है।

    गौरतलब है कि पीएम सूर्यघर योजना का शुभारंभ 13 फरवरी 2024 को हुआ था। तब से लेकर आज दिनांक तक हजारों बिजली उपभोक्ताओं को योजना से जोड़ा गया है। योजना में शामिल होने के लिए आनलाइन आवेदन करना होगा। जिसके लिए पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाइट https://www.pmsuryaghar.gov.in पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए कंपनी की वेबसाइट www.portal.mpcz.in अथवा उपाय एप, वॉट्सएप चेटबॉट व टोल फ्री नं, 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

    कंपनी ने कहा कि उपभोक्ताओं को समय पर सब्सिडी मिले इसके लिए वेंडर और उपभोक्ता दोनों को ध्यान रखना होगा कि उनके बैंक खाते में नाम, आधार कार्ड में नाम तथा बिजली बिल में नाम एक समान होना चाहिए। गौरतलब है कि 1 दिसंबर 2024 से स्थापित होने वाले प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत सौर संयंत्रों में केवल स्मार्ट मीटर ही लगाए जा रहे हैं, जो कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा एस.ओ.आर. रेट पर उपभोक्ताओं को प्रदान किए जा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं द्वारा सोलर वेंडर को किए जाने वाले भुगतान में लगभग 6 से 8 हजार रूपये तक की कमी परिलक्षित हो रही है।

  • पंजाब केसरी' लाला लाजपत राय की जयंती पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अर्पित की भावांजलि: राष्ट्र सदा कृतज्ञ रहेगा

    पंजाब केसरी' लाला लाजपत राय की जयंती पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अर्पित की भावांजलि: राष्ट्र सदा कृतज्ञ रहेगा


    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महान स्वाधीनता संग्राम सेनानी और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के स्तंभ रहे ‘पंजाब केसरी’ लाला लाजपत राय की जयंती पर उन्हें भावपूर्ण नमन किया है। बुधवार को भोपाल में जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने लाला जी के अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और उनके महान बलिदान को याद करते हुए कृतज्ञता व्यक्त की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाला लाजपत राय एक ऐसे महानायक थे, जिन्होंने अपनी अंतिम सांस तक मातृभूमि की रक्षा और स्वाधीनता के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा, “श्रद्धेय लाला लाजपत राय जी का बलिदान और उनके द्वारा दिया गया नेतृत्व भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है, जिसने गुलामी की बेड़ियों में जकड़े लाखों भारतीयों के भीतर आजादी की अलख जगाई और उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया।

    स्वतंत्रता संग्राम के लाल को सलाम

    लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी 1865 को हुआ था। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रसिद्ध ‘लाल-बाल-पाल’ लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल की तिकड़ी के प्रमुख सदस्य थे। मुख्यमंत्री ने उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक सुधारों का भी मार्गदर्शक रहा है।

    सांयकाल की लाठी और ब्रिटिश साम्राज्य का पतन डॉ. यादव ने उन ऐतिहासिक क्षणों को भी याद किया जब साइमन कमीशन के विरोध के दौरान लाला जी ने अंग्रेजों की लाठियां खाते हुए कहा था कि मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत की अंतिम कील साबित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके इन शब्दों ने भारतीय जनमानस में वह ऊर्जा भरी जिसने अंततः अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

    बलिदान के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता

    मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि आज का आत्मनिर्भर भारत उन्हीं महान बलिदानियों के सपनों का भारत है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे लाला लाजपत राय जैसे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लें और राष्ट्र सेवा के संकल्प के साथ आगे बढ़ें। डॉ. यादव ने ट्वीट और अन्य सोशल मीडिया माध्यमों से भी चित्र साझा कर ‘पंजाब केसरी’ को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

  • शिक्षा के क्षेत्र में नया अध्याय: 369 सांदीपनि विद्यालयों से संवरेगा प्रदेश का भविष्य, CM डॉ. यादव का बड़ा ऐलान

    शिक्षा के क्षेत्र में नया अध्याय: 369 सांदीपनि विद्यालयों से संवरेगा प्रदेश का भविष्य, CM डॉ. यादव का बड़ा ऐलान


    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और मूल्य-आधारित बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि साझा की है। बुधवार को जारी एक संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चे राष्ट्र की अनमोल पूंजी हैं और उनका भविष्य संवारना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 369 नए सांदीपनि विद्यालय प्रारंभ किए गए हैं, जो अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को भी आत्मसात करेंगे।

    सांदीपनि विद्यालय: आधुनिकता और परंपरा का संगम

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सांदीपनि विद्यालयों की परिकल्पना गुरुकुल शिक्षा पद्धति से प्रेरणा लेकर की गई है। अत्याधुनिक सुविधाएं इन विद्यालयों में केवल भवन ही नहीं, बल्कि बेहतर अधोसंरचना, स्मार्ट क्लास और कुशल मानव प्रबंधन शिक्षक सुनिश्चित किए गए हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा इसका उद्देश्य हर विद्यार्थी तक समावेशी और उच्च स्तरीय शिक्षा की पहुंच बनाना है, ताकि वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।

    शिक्षा का अधिकार 8.50 लाख बच्चों के लिए पुख्ता

    मुख्यमंत्री ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ RTE के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए कहा कि प्रदेश की सरकार हर बच्चे को अनिवार्य शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है। स्थायी प्रबंधन प्रदेश के 8.50 लाख से अधिक विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए सरकार ने स्थायी और पुख्ता इंतजाम किए हैं। समावेशी दृष्टिकोण आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों को भी मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए निजी स्कूलों में आरक्षण और सरकारी स्कूलों के उन्नयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री का संकल्प भविष्य संवारने में नहीं होगी कमी

    डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश की शिक्षा प्रणाली अब केवल साक्षरता तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि यह बच्चों के समग्र विकास और कौशल संवर्धन पर आधारित होगी। उन्होंने कुशल मानव प्रबंधन को शिक्षा की रीढ़ बताते हुए शिक्षकों की ट्रेनिंग और शैक्षणिक वातावरण में सुधार के लिए निरंतर कार्य करने की बात कही। मुख्यमंत्री के अनुसार, ये 369 सांदीपनि विद्यालय भविष्य में प्रदेश के शैक्षणिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल देंगे और मध्य प्रदेश को एक एजुकेशन हब के रूप में स्थापित करेंगे।