Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल में नई आबकारी नीति लागू, शराब दुकानों को छोटे समूहों में बांटा गया

    भोपाल में नई आबकारी नीति लागू, शराब दुकानों को छोटे समूहों में बांटा गया


    नई दिल्ली। प्रदेश सरकार ने नई आबकारी नीति लागू कर दी है। इस नीति के तहत शराब दुकानों को बड़े ठेकेदारों के एकाधिपत्य से मुक्त कर छोटे-छोटे समूहों में बांटा गया है। भोपाल में कुल 87 शराब दुकानों को 20 ग्रुप्स में बांटा गया है, जिनके आवंटन की प्रक्रिया ई-टेंडर के जरिए की जा रही है।
    पहले की व्यवस्था और बदलाव:
    वित्तीय वर्ष 2025-26 में भोपाल की सभी दुकानों को सिर्फ 4 बड़े ग्रुप में बांटा गया था। इससे बड़े ठेकेदारों का दबदबा कायम था। इस बार नई नीति के तहत छोटे और नए लाइसेंसियों को भागीदारी का मौका मिलेगा। एकाधिपत्य समाप्त होने से पुराने ठेकेदारों में चिंता है और वे घाटे का प्रचार करके नए ठेकेदारों को हतोत्साहित करने की कोशिश कर रहे हैं।
    राजस्व और मुनाफा
    अंकड़ों के अनुसार, वर्तमान वर्ष 2025-26 में फरवरी के अंत तक प्रत्येक ग्रुप ने 50 करोड़ रुपए से अधिक मुनाफा कमाया है। इसके बावजूद बड़े ठेकेदार घाटे का प्रचार कर रहे हैं ताकि नए ठेकेदार सामने न आएं और भविष्य में बड़े ग्रुप बनाकर उनका एकाधिपत्य कायम रहे।
    ठेके की कीमतों में वृद्धि
    वित्तीय वर्ष 2024-25 में ठेके की नीलामी 1193 करोड़ रुपए से अधिक में हुई थी, जो टारगेट से 11% यानी 120 करोड़ रुपए ज्यादा थी। इस बार आरक्षित मूल्य 1432 करोड़ रुपए रखा गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20% अधिक है।

    भोपाल के प्रमुख समूहों की कीमतें

    पिपलानी समूह: 4 दुकानें – पिपलानी, अयोध्या नगर, रत्नागिरी तिराहा और पटेल नगर। नई कीमत 127.77 करोड़ रुपए, पहले 106.48 करोड़ रुपए।बाग सेवनिया समूह: 121.89 करोड़ रुपए, पहले 101 करोड़ रुपए।

    नीति का लाभ
    छोटे समूह बनाए जाने से ज्यादा बोलीदाता सामने आएंगे, जिससे सरकार को सीधे राजस्व में फायदा होगा। आबकारी विभाग के अनुसार, नई व्यवस्था से सरकार को लगभग 238 करोड़ रुपए अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। टेंडर फाइनल होने के बाद यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।

    नई आबकारी नीति से न केवल बड़े ठेकेदारों का एकाधिपत्य समाप्त होगा, बल्कि छोटे और नए लाइसेंसियों को भी व्यवसाय में भागीदारी का अवसर मिलेगा। ई-टेंडर के जरिए आवंटन से पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकार को अतिरिक्त राजस्व का लाभ मिलेगा।

  • मध्यप्रदेश में RTE प्रवेश 2026–27 की प्रक्रिया घोषित, ऑनलाइन आवेदन और लॉटरी से मिलेगा निजी स्कूलों में निशुल्क दाखिला

    मध्यप्रदेश में RTE प्रवेश 2026–27 की प्रक्रिया घोषित, ऑनलाइन आवेदन और लॉटरी से मिलेगा निजी स्कूलों में निशुल्क दाखिला

    मध्यप्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत सत्र 2026–27 के लिए निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश की प्रक्रिया 13 मार्च 2026 से शुरू होने जा रही है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने पूरी समय सारिणी जारी कर दी है। ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 28 मार्च 2026 निर्धारित की गई है और इच्छुक अभिभावक आरटीई पोर्टल www.rteportal.mp.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकेंगे।

    राज्य शिक्षा केन्द्र के संचालक हरजिंदर सिंह के अनुसार इस वर्ष भी चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से की जाएगी। 2 अप्रैल 2026 को लॉटरी निकाली जाएगी और उसी के आधार पर छात्रों को निजी विद्यालयों में सीट आवंटित की जाएगी। लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवेदकों को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के जरिए सूचना भेजी जाएगी। साथ ही चयन सूची पोर्टल पर भी उपलब्ध रहेगी।

    समय सारिणी के अनुसार 9 मार्च 2026 से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों और उनमें उपलब्ध सीटों की जानकारी पोर्टल पर प्रदर्शित कर दी जाएगी। इससे अभिभावकों को यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस स्कूल में कितनी सीटें उपलब्ध हैं। आवेदन करते समय पात्रता से संबंधित कोई एक आवश्यक दस्तावेज अपलोड करना अनिवार्य होगा।

    आवेदन प्रक्रिया के दौरान 13 से 28 मार्च के बीच त्रुटि सुधार का अवसर भी दिया जाएगा ताकि अभिभावक किसी गलती को समय रहते ठीक कर सकें। इसके अलावा 14 मार्च से 30 मार्च 2026 के बीच दस्तावेजों का सत्यापन संबंधित संकुल केन्द्र वाले स्कूल में अधिकृत अधिकारी से कराना होगा। आवेदक जिस श्रेणी या निवास क्षेत्र के आधार पर प्रवेश चाहते हैं उससे संबंधित मूल प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सत्यापन कराना अनिवार्य रहेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि लॉटरी से पहले दस्तावेज सत्यापन हो जाने से बाद में प्रवेश निरस्त होने की संभावना काफी कम हो जाएगी।

    यदि किसी अभिभावक को ऑनलाइन आवेदन में कोई कठिनाई आती है तो वे अपने विकासखंड के बीआरसी कार्यालय सर्व शिक्षा अभियान के जिला परियोजना कार्यालय विकासखंड स्रोत केन्द्र या जनशिक्षा केन्द्र कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आवेदन प्रक्रिया में अभिभावकों की हर संभव सहायता सुनिश्चित करें।

    प्रवेश के लिए आयु सीमा भी तय कर दी गई है। नर्सरी केजी 1 और केजी 2 के लिए बच्चे की आयु 3 वर्ष से 4 वर्ष 6 माह के बीच होनी चाहिए। कक्षा 1 में प्रवेश के लिए आयु 6 वर्ष से 7 वर्ष 6 माह तक निर्धारित की गई है। नर्सरी और केजी कक्षाओं के लिए आयु की गणना 31 जुलाई 2026 की स्थिति में तथा कक्षा 1 के लिए 30 सितंबर 2026 की स्थिति में की जाएगी।

    आरटीई के तहत यह प्रक्रिया उन परिवारों के लिए सुनहरा अवसर है जो अपने बच्चों को निजी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाना चाहते हैं लेकिन आर्थिक कारणों से ऐसा नहीं कर पाते। समय सीमा का ध्यान रखते हुए अभिभावकों को तय तिथियों के भीतर आवेदन और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित और उज्जवल बन सके।

  • साध्वी रंजना विवाद ने पकड़ा तूल: मिसरोद में पाटीदार समाज का प्रदर्शन, ‘जिहादी’ कहने वालों पर कार्रवाई की मांग

    साध्वी रंजना विवाद ने पकड़ा तूल: मिसरोद में पाटीदार समाज का प्रदर्शन, ‘जिहादी’ कहने वालों पर कार्रवाई की मांग


    मिसरोद । मिसरोद में साध्वी रंजना दीदी से जुड़े कार विवाद ने अब सामाजिक और राजनीतिक रंग ले लिया है। मंगलवार को पाटीदार समाज, ओबीसी मोर्चा और सकल हिंदू समाज के बैनर तले बड़ी संख्या में लोग पाटीदार समाज के मांगलिक भवन में एकत्र हुए और विरोध प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में महिलाओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। प्रदर्शन के दौरान “जय श्री राम” के नारे लगाए गए और बाद में एसीपी को कलेक्टर व कमिश्नर के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

     उनका कहना है कि मिसरोद थाने में उनके खिलाफ झूठे प्रकरण दर्ज किए गए हैं। ज्ञापन में मांग की गई कि दर्ज मामलों को समाप्त किया जाए, समाज की ओर से भी एफआईआर दर्ज की जाए और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष व सख्त कार्रवाई हो।

    पाटीदार संगठन के सदस्य अजय पाटीदार ने कहा कि समाज को “जिहादी” या “अराजक” कहना बेहद आपत्तिजनक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समाज को हिंदू समाज का हिस्सा नहीं माना जाएगा तो वे सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन पर विचार करने को मजबूर होंगे। इस बयान के बाद सभा स्थल पर माहौल कुछ देर के लिए और गरमा गया।

    समाज के प्रतिनिधियों ने पुलिस पर एकपक्षीय कार्रवाई का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि 25-26 फरवरी को मुख्य मार्ग पर साध्वी रंजना दीदी के वाहन से जुड़ा ओवरटेक को लेकर सामान्य विवाद हुआ था, जिसे बाद में गंभीर धाराओं में बदल दिया गया। समाज का दावा है कि घटनास्थल के सीसीटीवी कैमरों की जांच से पूरी सच्चाई सामने आ सकती है।

    मामले की पृष्ठभूमि में साध्वी रंजना दीदी द्वारा दर्ज एफआईआर शामिल है, जिसमें मारपीट, तोड़फोड़, छेड़छाड़ और जान से मारने की कोशिश जैसे आरोप लगाए गए हैं। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसकी पुलिस जांच कर रही है। इससे पहले विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने भी थाने के बाहर प्रदर्शन कर सख्त कार्रवाई की मांग की थी।

    फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष रूप से जारी है और तथ्य सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, पाटीदार समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा। यह मामला अब प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था और सामाजिक संतुलन, दोनों दृष्टि से संवेदनशील बन गया है। 

  • लुधियाना में दर्दनाक हादसा: खाना खाने जा रहे ड्राइवर को पिकअप ने रौंदा, मौके पर मौत; आरोपी गिरफ्तार

    लुधियाना में दर्दनाक हादसा: खाना खाने जा रहे ड्राइवर को पिकअप ने रौंदा, मौके पर मौत; आरोपी गिरफ्तार


    नई दिल्ली। Ludhiana के मोती नगर स्थित ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में सोमवार दोपहर एक तेज रफ्तार महिंद्रा पिकअप ने पैदल जा रहे ड्राइवर को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी चालक को गिरफ्तार कर वाहन को कब्जे में ले लिया।

    मृतक की पहचान राम प्रसाद पाटीदार के रूप में हुई है, जो मध्य प्रदेश का निवासी था और पिछले तीन वर्षों से ट्रांसपोर्ट कारोबारी रसील चंद के यहां ड्राइवर के रूप में कार्यरत था। जानकारी के मुताबिक 2 मार्च को दोपहर करीब 3 बजे राम प्रसाद पैदल ही खाना खाने के लिए जा रहा था। इसी दौरान ट्रांसपोर्ट नगर के पास अचानक तेज टक्कर की आवाज सुनाई दी।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिंद्रा पिकअप तेज और लापरवाही से चलाई जा रही थी। वाहन चालक ने सामने पैदल जा रहे राम प्रसाद को नहीं देखा और सीधे टक्कर मार दी। सिर और शरीर पर गंभीर चोटें लगने के कारण राम प्रसाद की मौके पर ही मौत हो गई।

    जांच अधिकारी ने बताया कि आरोपी चालक की पहचान गणेश कुमार निवासी गांव नड्ड, जिला सांबा, जम्मू-कश्मीर के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे मौके से ही हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक जांच में लापरवाही से वाहन चलाना हादसे की मुख्य वजह सामने आई है।

    थाना मोती नगर पुलिस ने शिकायतकर्ता के बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 281 और धारा 106(1) के तहत मामला दर्ज किया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की आगे की जांच जारी है।

    यह हादसा एक बार फिर शहर में लापरवाह ड्राइविंग पर सवाल खड़े करता है। पुलिस का कहना है कि दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

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  • सावधान! वेज बर्गर के नाम पर खिला दिया सूअर का मांस; सतना की पिज्जा शॉप पर ₹8 लाख का हर्जाना, 9% ब्याज भी देना होगा

    सावधान! वेज बर्गर के नाम पर खिला दिया सूअर का मांस; सतना की पिज्जा शॉप पर ₹8 लाख का हर्जाना, 9% ब्याज भी देना होगा

    मध्य प्रदेश के सतना जिले से फास्ट फूड के शौकीनों को सतर्क कर देने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ एक नामी मल्टीनेशनल पिज्जा कंपनी की ब्रांच को ग्राहक की धार्मिक भावनाओं को आहत करना और सेवा में गंभीर लापरवाही बरतना बेहद भारी पड़ गया है। जिला उपभोक्ता फोरम ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित पिज्जा कंपनी पर 8 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है। यह फैसला शहर की निवासी नैंसी तिवारी और उनके पति सूरज तिवारी द्वारा करीब डेढ़ साल तक लड़ी गई कानूनी लड़ाई के बाद आया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों की आस्था और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    यह विचलित कर देने वाली घटना 31 अक्टूबर 2024, दीपावली के पावन पर्व पर घटी थी। पीड़ित दंपति सिविल लाइन पन्ना नाका मार्ग स्थित इस मशहूर पिज्जा शॉप पर डिनर के लिए गए थे। उन्होंने पूरी तरह शाकाहारी (वेज) पिज्जा और बर्गर का ऑर्डर दिया था। जैसे ही उन्होंने बर्गर खाना शुरू किया, उन्हें स्वाद में गड़बड़ी महसूस हुई और अचानक तेज उल्टियां होने लगीं। जब उन्होंने बर्गर की बारीकी से जांच की, तो उनके होश उड़ गए; वेज बर्गर के नाम पर उन्हें सूअर का मांस Pork परोस दिया गया था। इस भयंकर चूक के बाद जब दंपति ने संचालक से शिकायत की, तो प्रबंधन ने अपनी गलती मानने के बजाय ग्राहकों की बात को अनसुना कर दिया, जिससे विवाद और बढ़ गया।

    न्याय की उम्मीद में पीड़ित परिवार ने पहले पुलिस और फिर जिला उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने सितंबर 2025 में एफआईआर दर्ज की थी। फोरम में अधिवक्ता करुणेश अरोरा ने मजबूती से साक्ष्य पेश किए, जिसके बाद 27 फरवरी 2026 को फोरम ने अपना अंतिम फैसला सुनाया। कोर्ट ने पिज्जा कंपनी को मानसिक संताप और सेवा में कमी का दोषी पाते हुए 8 लाख रुपये का मुआवजा, 10 हजार रुपये कानूनी खर्च और पूरी राशि पर 9 प्रतिशत ब्याज देने का आदेश दिया है। कंपनी को यह राशि एक माह के भीतर जमा करनी होगी, अन्यथा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

  • 230 अधिकारियों की कार्रवाई बेअसर! हटाए गए कब्जे के बाद फिर बस गई टपरियां, वन भूमि पर दोबारा अतिक्रमण

    230 अधिकारियों की कार्रवाई बेअसर! हटाए गए कब्जे के बाद फिर बस गई टपरियां, वन भूमि पर दोबारा अतिक्रमण


    नई दिल्ली। तीन साल से जारी अतिक्रमण के खिलाफ 27 फरवरी को प्रशासन ने 230 कर्मचारियों की मौजूदगी में कार्रवाई कर टपरियां हटाईं और जमीन पर गड्ढे खोदे थे। बावजूद इसके, कुछ ही दिनों में फिर से उसी जगह पर टपरियां बनाकर दोबारा कब्जा कर लिया गया।

    तीन साल से वन भूमि पर जारी अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने 27 फरवरी को बड़ी कार्रवाई करते हुए सख्त संदेश देने की कोशिश की थी, लेकिन हालात फिर वहीं के वहीं नजर आ रहे हैं। वन विभाग, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने उस दिन मौके पर पहुंचकर कब्जा हटाया था। कार्रवाई में वन विभाग के एसडीओ अनिल विश्वकर्मा, तहसीलदार कीर्ति प्रधान, एसडीओपी महेंद्र चौहान और थाना प्रभारी सुधाकर बारस्कर मौजूद रहे। करीब 230 वनकर्मी, पुलिस जवान और राजस्व अमले ने मिलकर अवैध कब्जे हटाए थे।

    कार्रवाई के दौरान अतिक्रमणकारियों द्वारा बनाई गई अस्थायी टपरियों को तोड़ा गया और जमीन को दोबारा खेती या कब्जे से बचाने के लिए बड़े-बड़े गड्ढे भी खोदे गए थे। प्रशासन का मकसद साफ था—वन भूमि को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कर भविष्य में दोबारा कब्जा न होने देना। उस समय अधिकारियों ने दावा किया था कि अब दोबारा यहां कब्जा नहीं होने दिया जाएगा और क्षेत्र की नियमित निगरानी की जाएगी।

    लेकिन कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद तस्वीर बदलती दिख रही है। उसी जमीन पर फिर से टपरियां खड़ी कर दी गई हैं। इससे साफ है कि अतिक्रमणकारियों के हौसले अब भी बुलंद हैं और प्रशासनिक सख्ती का असर लंबे समय तक नहीं टिक पाया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर लगातार निगरानी और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वन भूमि पर कब्जे का सिलसिला फिर से बढ़ सकता है।

    यह सवाल भी उठ रहा है कि जब इतनी बड़ी संयुक्त कार्रवाई की गई थी, तो उसके बाद क्षेत्र की निगरानी क्यों कमजोर पड़ गई। वन भूमि पर बार-बार कब्जा होना न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन दोबारा सख्ती दिखाता है या अतिक्रमण का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।

  • ग्वालियर: एटीएम में छल, मदद के नाम पर हो रही थी ठगी, पुलिस ने किया खुलासा

    ग्वालियर: एटीएम में छल, मदद के नाम पर हो रही थी ठगी, पुलिस ने किया खुलासा

    ग्वालियर के मुरार इलाके में एटीएम के भीतर चल रही एक चालाक ठगी का खुलासा हुआ है। सदर बाजार स्थित एक एटीएम में एक युवक लोगों की मदद करने का बहाना कर उनके कार्ड बदलता था। आज का दिन भी इस कहानी का नया अध्याय बन गया जब युवक को पकड़ लिया गया।

    पकड़े गए आरोपी की पहचान प्रदीप शिवहरे उर्फ पिंकू, निवासी कोटेश्वर के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार यह युवक एटीएम पर आने वाले ग्राहकों को मशीन चलाने में मदद करने का नाटक करता था। इस दौरान वह असली कार्ड की जगह दूसरा कार्ड थमा देता और किसी तरह पिन की जानकारी हासिल करने की कोशिश करता। इसके बाद वह मौके से खिसक जाता।

    हालांकि आज की घटना में पीड़ित ने समय रहते संदेह कर लिया। जैसे ही कार्ड बदलने की कोशिश हुई, पीड़ित ने विरोध किया और शोर मचाया। आसपास मौजूद लोग तुरंत सक्रिय हो गए और आरोपी को दबोच लिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और उसे हिरासत में ले लिया।

    पुलिस पूछताछ में आरोपी ने हैरान करने वाले खुलासे किए। उसके पास 100 से अधिक एटीएम कार्ड बरामद हुए हैं। ये कार्ड विभिन्न खाताधारकों के थे और सभी जब्त कर लिए गए। पुलिस अब इनके असली मालिकों की पहचान करने में जुटी हुई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह मामला केवल एक घटना तक सीमित नहीं था बल्कि यह एक संगठित ठगी का हिस्सा हो सकता है।

    ASP अनु बेनीवाल ने बताया कि आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अब तक कितने लोग इस ठगी का शिकार हो चुके हैं और क्या इस गिरोह में अन्य लोग भी शामिल हैं। गहन पूछताछ के जरिए पुलिस नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। इस दौरान अन्य बड़े खुलासे होने की संभावना भी जताई जा रही है।

    स्थानीय लोग इस घटना को लेकर काफी चौकन्ने हैं। उनका कहना है कि अब एटीएम पर सहायता लेने से पहले सतर्क रहना बेहद जरूरी हो गया है। वहीं पुलिस का भी कहना है कि लोगों को हमेशा अपने कार्ड और पिन की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और किसी अनजान व्यक्ति की मदद लेने से पहले सावधान रहना चाहिए।

    ग्वालियर में यह घटना लोगों के लिए चेतावनी का संदेश बन गई है कि मदद के बहाने ठगी की घटनाएं कहीं भी हो सकती हैं। यह मामला यह भी साबित करता है कि सतर्कता और सामूहिक चौकसी ही ऐसे अपराधों को रोक सकती है। अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और सभी संभावित शिकारों और संदिग्धों की पहचान कर रही है।

  • उज्जैन में पंच-परमेश्वर का भव्य नगर प्रवेश: संतों ने 200 साल पुरानी परंपरा के तहत होली उत्सव की तैयारियां शुरू कीं

    उज्जैन में पंच-परमेश्वर का भव्य नगर प्रवेश: संतों ने 200 साल पुरानी परंपरा के तहत होली उत्सव की तैयारियां शुरू कीं



    नई दिल्ली। उज्जैन की पवित्र नगरी में होली के अवसर पर शुक्रवार को श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा में पंच-परमेश्वर का भव्य नगर प्रवेश हुआ। करीब 10 साल बाद आयोजित इस पेशवाई में देशभर से आए संतों का ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के बीच जोरदार स्वागत किया गया। यह आयोजन 200 वर्षों से निरंतर निभाई जा रही परंपरा का हिस्सा है और इसे वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ मेले की तैयारियों से जोड़ा गया है।

    देशभर के प्रमुख अखाड़ों के पंच-परमेश्वर संतों के रूप में उज्जैन पहुंचे। भ्रमणशील मंडल के महंत दुर्गादास, महंत अद्वैतानंद, महंत राम नौमी दास, सचिव हंस मुनि, महंत कोठारी सत्यानंद, मुकामी राम मुनि और मुकामी देवी दास सहित निर्वाण संतों ने अखाड़े में प्रवेश किया। महंत सत्यानंद ने बताया कि आने वाले दिनों में और अधिक संत उज्जैन पहुंचेंगे, जो शहर और मेले की व्यवस्थाओं की जानकारी लेंगे।

    नगर प्रवेश के दौरान संतों ने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और देशभर में सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया। पेशवाई में शामिल साधु-संत और महंत पारंपरिक पोशाक और धार्मिक वाद्ययंत्रों के साथ नगर में यात्रा करते हुए दर्शकों का मन मोहते नजर आए। शहरवासियों ने अपने उत्साह और श्रद्धा के साथ संतों का स्वागत किया।

    उज्जैन में 4 मार्च को पंच-परमेश्वर और अन्य साधु-संतों के लिए होली उत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलेगा, जिसमें सभी संत पारंपरिक ढंग से हर्बल गुलाल और फूलों से होली खेलेंगे। इस दौरान भक्तजन भी मंदिर परिसर में उपस्थित रहकर होली का आनंद लेंगे।

    पंच-परमेश्वर परंपरा के अनुसार, अखाड़ों के सदस्य उन स्थलों का दौरा करते हैं, जहां कुंभ मेला आयोजित होने वाला होता है। उज्जैन में 2028 में सिंहस्थ मेला आयोजित होने के मद्देनजर संत आठ दिन तक यहां रहेंगे और साधु-संतों के लिए की जाने वाली व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। उज्जैन का कार्य पूर्ण होने के बाद वे नासिक रवाना होंगे, जहां भी कुंभ मेला आयोजित होगा।

    इस भव्य नगर प्रवेश से उज्जैन की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को और मजबूती मिली है। शहरवासियों में संतों के आगमन और होली उत्सव को लेकर उत्साह साफ देखा जा सकता है। पंच-परमेश्वर का यह नगर प्रवेश ना सिर्फ धार्मिक उत्सव है, बल्कि आने वाले सिंहस्थ मेले के सफल आयोजन की रूपरेखा तैयार करने का भी अवसर है।

    उज्जैन में पंच-परमेश्वर का भव्य स्वागत और होली उत्सव इस बात का प्रमाण है कि सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराएं आज भी देशभर में जीवित हैं। संतों के मार्गदर्शन में आगामी मेले की तैयारियों से श्रद्धालु और नगरवासी समान रूप से लाभान्वित होंगे।

  • जबलपुर में बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला: एलपीजी संचालित वाहनों में स्कूल बच्चों का सफर प्रतिबंधित

    जबलपुर में बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला: एलपीजी संचालित वाहनों में स्कूल बच्चों का सफर प्रतिबंधित



    नई दिल्ली। जबलपुर प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल 2026 से जिले में किसी भी एलपीजी से संचालित वाहन में स्कूली बच्चे सफर नहीं कर सकेंगे। इस आदेश का उद्देश्य स्कूल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संभावित दुर्घटनाओं को रोकना है।

    कलेक्टर ने स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिकों को निर्देश दिए हैं कि वे 1 अप्रैल से पहले अपने वाहनों की व्यवस्था वैकल्पिक और कानूनी रूप से मान्य वाहनों के माध्यम से करें। यदि तय समय के बाद भी कोई एलपीजी वाहन बच्चों को स्कूल ले जाने के लिए इस्तेमाल किया गया, तो प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत वाहन मालिक, स्कूल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

    जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निगरानी और पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) को आदेशित किया गया है कि वे स्कूल वाहनों का सत्यापन करें और एलपीजी वाहन संचालन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। इसके साथ ही सभी एसडीएमों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि जिले में कोई भी एलपीजी वाहन बच्चों को ले जाने के लिए इस्तेमाल न हो।

    पुलिस अधिकारियों को स्कूल समय के दौरान आकस्मिक निरीक्षण करने और किसी भी उल्लंघन की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और प्रशासन इसकी अनदेखी नहीं करेगा।

    जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के माध्यम से सभी स्कूल प्रबंधन को इस आदेश की जानकारी दी जाएगी। स्कूल संचालकों से कहा गया है कि वे इस आदेश का पालन सुनिश्चित करें और अपने वाहन संचालन की व्यवस्था तुरंत बदलें। डीईओ को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे स्कूलों में इस नियम के पालन की निगरानी करें और किसी भी तरह की लापरवाही की स्थिति में कड़ी कार्रवाई करें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि एलपीजी वाहन में बच्चों का सफर जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि गैस लीक, आग और तकनीकी खामियों के कारण हादसों की संभावना बढ़ जाती है। इस आदेश के माध्यम से प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए हर संभव उपाय किए जाएं।

    कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ नियम बनाना नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। सभी स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिक 1 अप्रैल तक वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।”

    इस आदेश से जबलपुर जिले के स्कूल परिवहन में एक बड़ा बदलाव आएगा और यह बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए राहत का संदेश लेकर आएगा। जिले में सभी अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन के सहयोग से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि एलपीजी वाहन में बच्चों का सफर पूरी तरह प्रतिबंधित रहे।

  • बम की अफवाह से थमी भोपाल की रफ्तार: एम्स से लेकर पासपोर्ट दफ्तर तक पुलिस का घेरा, 15 दिनों में दूसरी बार दहशत का साया

    बम की अफवाह से थमी भोपाल की रफ्तार: एम्स से लेकर पासपोर्ट दफ्तर तक पुलिस का घेरा, 15 दिनों में दूसरी बार दहशत का साया


    भोपालराजधानी भोपाल में सोमवार का दिन भारी अफरा-तफरी और दहशत के बीच गुजरा। सुबह उस वक्त पुलिस प्रशासन और आम जनता के हाथ-पांव फूल गए, जब शहर के चार अति-संवेदनशील संस्थानों-एम्स AIIMS, क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, रॉयल मार्केट स्थित जीपीओ GPO और निशातपुरा की एक यूनिवर्सिटी को बम से उड़ाने की धमकी भरा ईमेल मिला। इस धमकी ने सुरक्षा व्यवस्था की कड़ी परीक्षा ली, क्योंकि ईमेल भेजने वाले ने न केवल दोपहर 12:15 बजे ब्लास्ट होने का दावा किया था, बल्कि यह भी डरावनी चेतावनी दी थी कि परिसरों में ‘साइनाइड गैस’ वाले दो आईईडी IED रखे गए हैं। सूचना मिलते ही निशातपुरा, बागसेवनिया, कोतवाली और एमपी नगर पुलिस ने मोर्चा संभाला और आनन-फानन में हजारों लोगों से भरी इन इमारतों को खाली कराया गया।

    सुरक्षा के लिहाज से पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी और बाहरी लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया। बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड BDDS और डॉग स्क्वॉड की टीमों ने सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक इमारतों के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली। लगभग चार घंटे चले इस गहन तलाशी अभियान के बाद जब कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, तब जाकर पुलिस ने इसे एक ‘होक्स’ अफवाह घोषित किया और राहत की सांस ली। गौर करने वाली बात यह है कि निशातपुरा स्थित यूनिवर्सिटी को पिछले 15 दिनों में दूसरी बार इस तरह की धमकी मिली है; इससे पहले 19 फरवरी को भी संस्थान को निशाना बनाया गया था।

    पुलिस कमिश्नर संजय कुमार के अनुसार, सभी संस्थानों को भेजे गए ईमेल का कंटेंट और भाषा एक जैसी थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस शरारत के पीछे किसी एक व्यक्ति या गिरोह का हाथ है। जांच में यह भी सामने आया है कि देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के मिलते-जुलते ईमेल भेजे गए हैं। फिलहाल, साइबर क्राइम ब्रांच उस आईपी IP एड्रेस और ईमेल आईडी को ट्रैक करने में जुटी है जिससे ये मैसेज भेजे गए थे। हालांकि यह बम की धमकी महज एक अफवाह निकली, लेकिन इसने भोपाल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं जरूर पैदा कर दी हैं।