Category: Madhya Pradesh

  • इंदौर की रेशम केंद्र गौशाला में भूख-प्यास से 20 गायों की मौत, कांग्रेस ने सरकार से की जांच की मांग

    इंदौर की रेशम केंद्र गौशाला में भूख-प्यास से 20 गायों की मौत, कांग्रेस ने सरकार से की जांच की मांग


    इंदौर । मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में गोवंश संरक्षण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। शहर के रेशम केंद्र स्थित गौशाला में करीब 20 गायों की मौत हो गई जिसे कांग्रेस ने सरकार की लापरवाही और गोवंश संरक्षण नीति की असफलता करार दिया है। मृत गायों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किया गया है, जिसमें कई गायों के शव जमीन पर पड़े हुए दिखाई दे रहे हैं, जिनकी हालत बेहद दयनीय है। कांग्रेस का आरोप है कि ये गायें भूख और प्यास के कारण मरी हैं क्योंकि उन्हें पर्याप्त चारा और पानी नहीं मिला था।

    कांग्रेस नेताओं ने इस घटना को गंभीर लापरवाही और राज्य सरकार की नाकामी का परिणाम बताया। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा गोवंश संरक्षण की जो योजनाएं बनाई गई हैं वे अब तक प्रभावी साबित नहीं हुई हैं। कांग्रेस ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री को एक ईमेल भेजकर मामले की तत्काल जांच की मांग की है। ईमेल में यह भी कहा गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और गौशाला की व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए।

    कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह घटना केवल लापरवाही का परिणाम नहीं है, बल्कि यह सरकार की गोवंश प्रेम की राजनीति की असफलता को भी उजागर करती है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि यदि गौशालाओं में सही प्रबंधन होता और सरकार की ओर से पर्याप्त संसाधन मुहैया कराए जाते, तो इस प्रकार की घटनाएं नहीं होतीं। गौशाला में गायों की यह मौत न केवल इंदौर बल्कि पूरे राज्य में एक बड़ा मुद्दा बन गई है। गौवंश संरक्षण को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। वहीं अब देखना यह है कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या इस बार गोवंश संरक्षण की नीति में सुधार किया जाएगा।

  • इंदौर पानी त्रासदी: सिर्फ ‘ट्रेलर’, देश के छह बड़े शहरों में भी दूषित पानी से बढ़ रही स्वास्थ्य आपातस्थिति

    इंदौर पानी त्रासदी: सिर्फ ‘ट्रेलर’, देश के छह बड़े शहरों में भी दूषित पानी से बढ़ रही स्वास्थ्य आपातस्थिति


    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से 20 लोगों की मौत और कई गंभीर बीमारियों की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। यह मामला सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य प्रमुख शहरों में भी दूषित पानी पीने से नागरिकों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इंदौर की यह त्रासदी एक चेतावनी की तरह है, जिससे पता चलता है कि कई शहरों में पानी की गुणवत्ता पर नियंत्रण की व्यवस्था गंभीर रूप से कमजोर है।

    इंदौर हादसे की जांच में सामने आया कि देश के सात बड़े शहर पानी की गुणवत्ता मानकों पर फेल हो गए हैं।

    इन शहरों में गुजरात का गांधीनगर, तेलंगाना का हैदराबाद, उत्तर प्रदेश का ग्रेटर नोएडा, मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल, और हरियाणा के रोहतक और झज्जर शामिल हैं। गांधीनगर में दूषित पानी के कारण टाइफाइड के 108 मामले दर्ज किए गए, और दो लोगों की मौत भी हुई। हैदराबाद में छह सैंपल में से चार में सीवेज, कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और औद्योगिक वेस्ट पाए गए।
     इसके चलते नगर निगम ने जमीन के नीचे के पानी पर रोक लगा दी है।

    दूषित पानी के सेवन से आम लोगों में दस्त, उल्टी, हैजा, टाइफाइड और डायरिया जैसी गंभीर बीमारियां देखी जा रही हैं।

    कुछ मामलों में गिलियन बैरे सिंड्रोम जैसे न्यूरोलॉजिकल रोग भी सामने आए हैं। इसके मुख्य लक्षणों में लगातार दस्त और उल्टी, तेज बुखार और कमजोरी, चक्कर आना या पेशाब कम होना, शरीर या आंखों में पीलापन और बच्चों एवं बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन के संकेत शामिल हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर इन शहरों में पानी की शुद्धता पर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई, तो यह केवल स्वास्थ्य आपात स्थिति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर सामाजिक और आर्थिक संकट भी पैदा कर सकता है। नागरिकों को साफ और सुरक्षित पानी सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम और राज्य सरकारों की ओर से तत्काल कदम उठाना बेहद जरूरी है।

    इंदौर की घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि दूषित पानी सिर्फ एक शहर की समस्या नहीं है, बल्कि देश के कई शहरों में स्वास्थ्य सुरक्षा की गंभीर चुनौती बन गई है। इसलिए प्रशासन को अब निष्क्रियता छोड़कर, सख्त निरीक्षण और त्वरित सुधार लागू करना होगा, ताकि लोगों की जान और स्वास्थ्य सुरक्षित रहे।

  • भोपाल में 1101 ट्रैक्टरों की भव्य रैली, CM मोहन यादव ने किसानों को हरी झंडी दिखाकर किया ‘कृषक कल्याण वर्ष’ का शुभारंभ

    भोपाल में 1101 ट्रैक्टरों की भव्य रैली, CM मोहन यादव ने किसानों को हरी झंडी दिखाकर किया ‘कृषक कल्याण वर्ष’ का शुभारंभ




    भोपाल।
    भोपाल में रविवार का दिन किसानों के नाम रहा, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कोकता बायपास स्थित आरटीओ कार्यालय के पास से 1101 ट्रैक्टरों की भव्य रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस ऐतिहासिक मौके पर मुख्यमंत्री खुद ट्रैक्टर की स्टेयरिंग संभालते नजर आए और रैली में शामिल होकर किसानों के साथ कदम से कदम मिलाया। उनके साथ कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना और विधायक रामेश्वर शर्मा भी ट्रैक्टर पर सवार रहे। सैकड़ों ट्रैक्टरों की कतार और किसानों का उत्साह राजधानी की सड़कों पर एक अलग ही दृश्य रच रहा था।

    रैली को रवाना करने से पहले कोकता बायपास क्षेत्र ‘बोल बम’ और भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को संबोधित करते हुए इतिहास और आस्था का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक हजार साल पहले महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को तोड़ने का प्रयास किया था, लेकिन आज वही सोमनाथ मंदिर फिर से अपने वैभव में भोलेनाथ के जयकारों से गूंज रहा है।

    उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके संकल्प से सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ। साथ ही मुख्यमंत्री ने अयोध्या में भगवान राम मंदिर निर्माण को 500 वर्षों के संघर्ष का परिणाम बताया।

    ट्रैक्टर रैली के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह पिछले वर्ष पूरे प्रदेश में ‘उद्योग और रोजगार वर्ष’ मनाया गया था, उसी तर्ज पर अब सरकार ने पूरे साल को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। यह केवल एक दिन या एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सालभर किसानों के हित में योजनाबद्ध और निरंतर प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि इस वर्ष के अंत तक किसानों की आय, खेती की लागत और उत्पादन से जुड़े कई ठोस और सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि कृषक कल्याण वर्ष केवल कृषि विभाग तक सीमित नहीं रहेगा। अब प्रदेश के 16 विभाग मिलकर किसानों के लिए काम करेंगे, ताकि खेती से जुड़े हर पहलू को मजबूत किया जा सके।

    उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर इस समय लगभग 16 प्रतिशत की गति से बढ़ रही है और इसे और आगे ले जाने के लिए किसानों की आय बढ़ाने तथा लागत घटाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने रैली के दौरान कहा कि हेलिकॉप्टर से आते समय जहां नजर गई, वहां ट्रैक्टर ही ट्रैक्टर दिखाई दे रहे थे। यह तो सिर्फ झांकी है, आने वाले समय में किसान कल्याण की तस्वीर और भी बड़ी होगी।

    रैली के बाद मुख्यमंत्री जंबूरी मैदान पहुंचे, जहां ‘कृषक कल्याण वर्ष-2026’ के राज्य स्तरीय कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों को सरकार की आगामी योजनाओं, कार्यक्रमों और कार्ययोजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य खेती को केवल परंपरागत कार्य न मानकर उसे लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक आधारित रोजगार का माध्यम बनाना है।

    कृषक कल्याण वर्ष-2026 के तहत सरकार का विशेष फोकस उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों पर रहेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और वानिकी को एकीकृत करते हुए जिला स्तरीय क्लस्टर आधारित विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती, डिजिटल सेवाओं, उच्च उत्पादकता और कृषि प्रसंस्करण के माध्यम से किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। एग्री-टेक, ड्रोन सेवाएं, एफपीओ प्रबंधन, हाइड्रोपोनिक्स और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में ग्रामीण युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि और समृद्ध ग्रामीण क्षेत्र मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इसी कारण राज्य सरकार लगातार कृषि बजट में बढ़ोतरी कर रही है। समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीदी, सोयाबीन उत्पादकों के लिए भावांतर योजना, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, मुख्यमंत्री कृषि उन्नति योजना और रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना जैसी कई योजनाएं पहले से संचालित हैं।

    कृषक कल्याण वर्ष-2026 के माध्यम से इन सभी योजनाओं को और प्रभावी बनाया जाएगा।

    इस भव्य ट्रैक्टर रैली और कार्यक्रम के चलते भोपाल की कई सड़कों पर यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया। कोकता बायपास, मिसरोद-सलैया क्षेत्र, खजूरी कला, पटेल नगर चौराहा, प्रेस्टीज कॉलेज के आसपास और जंबूरी मैदान तक जाने वाले मार्गों पर विशेष ट्रैफिक प्लान लागू रहा। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की कि वे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें।

    कुल मिलाकर, 1101 ट्रैक्टरों की यह रैली केवल एक शक्ति प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी थी कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों को केंद्र में रखकर विकास की नई कहानी लिखने जा रही है। ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के जरिए सरकार का लक्ष्य अन्नदाता के सम्मान, आय वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देना है।

  • भोपाल में इनर व्हील क्लब राइज का 41वां जिला सम्मेलन ‘सिनर्जी’: अभिषेक बच्चन मुख्य अतिथि, महिलाओं और समाज के विकास पर होगी जोरदार रणनीति

    भोपाल में इनर व्हील क्लब राइज का 41वां जिला सम्मेलन ‘सिनर्जी’: अभिषेक बच्चन मुख्य अतिथि, महिलाओं और समाज के विकास पर होगी जोरदार रणनीति


    भोपाल। भोपाल में रविवार को इनर व्हील क्लब ऑफ भोपाल राइज का 41वां जिला सम्मेलन “सिनर्जी” आयोजित किया गया, जिसमें बॉलीवुड अभिनेता अभिषेक बच्चन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम होटल सयाजी में हुआ, जिसकी मेजबानी क्लब ने की। सम्मेलन का उद्देश्य पिछली छह महीनों की उपलब्धियों का मूल्यांकन करना और आने वाले छह महीनों के लिए रणनीति तय करना है।

    भोपाल राइज की प्रेसिडेंट रुखसाना मोहसिन ने बताया कि इनर व्हील क्लब दुनिया के प्रमुख महिला स्वैच्छिक संगठनों में से एक है, जो पिछले एक शताब्दी से समाज सेवा और सामुदायिक कल्याण में सक्रिय है। सम्मेलन में सदस्य अपने अनुभव साझा करेंगे, नए सामाजिक प्रोजेक्ट्स पर चर्चा करेंगे और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए आगे की योजना बनाएंगे।

    इस आयोजन में अभिषेक बच्चन ने उपस्थित सदस्यों को प्रेरित करते हुए कहा कि समाज सेवा और सामुदायिक योगदान केवल एक पहल नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा होना चाहिए। सम्मेलन का नाम “सिनर्जी” इस बात का प्रतीक है कि सामूहिक प्रयास और सहयोग से ही सामाजिक बदलाव संभव है।

    सम्मेलन के दौरान इनर व्हील डिस्ट्रिक्ट-304 की पिछली छह महीनों की उपलब्धियों की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, महिलाओं और बच्चों के लिए किए गए विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों का विवरण शामिल था। इसके साथ ही आगामी छह महीनों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा होगी, जिसमें नए प्रोजेक्ट्स, सामाजिक जागरूकता अभियान और स्थानीय समुदायों के लिए विकासात्मक गतिविधियां शामिल होंगी।

    यह जिला सम्मेलन न केवल क्लब की उपलब्धियों का जश्न है, बल्कि आने वाले समय में महिलाओं और समाज के विकास के लिए नई पहल और दिशा तय करने का मंच भी साबित होगा।

  • छिंदवाड़ा में मवेशी विवाद हत्या: रिश्तेदारों ने लाठी-कल्हाड़ी से पीटकर की हत्या, तीन आरोपी गिरफ्तार

    छिंदवाड़ा में मवेशी विवाद हत्या: रिश्तेदारों ने लाठी-कल्हाड़ी से पीटकर की हत्या, तीन आरोपी गिरफ्तार


    नई दिल्ली ।छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव क्षेत्र में मवेशी चराने को लेकर मामूली विवाद ने एक सगे परिवार में भयावह घटना का रूप ले लिया। सोमाटेकड़ी (टाटरवारा) गांव के 65 वर्षीय लखनलाल यादव अपने खेत में अपने ही रिश्तेदारों के मवेशी चराने के विरोध में बहस में उलझ गए। मृतक का आरोप था कि रिश्तेदारों के मवेशी उनकी फसल को नुकसान पहुंचा रहे थे, जिस पर विवाद बढ़ गया।बात इतनी गंभीर हो गई कि मृतक के सगे रिश्तेदार धनलाल यादव, ज्ञानचंद यादव और राजकुमार राजा यादव ने गुस्से में आकर लखनलाल पर कुल्हाड़ी और डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमला इतना जानलेवा था कि वह मौके पर ही दम तोड़ बैठे।

    घटना की सूचना मिलते ही जुन्नारदेव थाना पुलिस सक्रिय हुई और महज तीन घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त दो कुल्हाड़ी और एक डंडा भी जब्त किया गया।पुलिस ने घटना स्थल का पंचनामा तैयार कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और फॉरेंसिक जांच के लिए साक्ष्य एकत्र करना शुरू किया। आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

    स्थानीय लोग इस घटना से स्तब्ध हैं। मामूली विवाद के कारण रिश्तेदारों के बीच इतनी हिंसा होना गांव में चर्चा का विषय बन गया है। पुलिस ने बताया कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है और आरोपी पहले ही हत्या के गंभीर अपराध के तहत जेल भेज दिए गए हैं।यह घटना यह संदेश देती है कि खेत और मवेशी जैसे मामूली झगड़े भी कभी-कभी अनियंत्रित होने पर जानलेवा परिणाम दे सकते हैं। पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि विवाद को आपसी बातचीत और समझौते के जरिए हल करें, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

  • इंदौर की मौत के बाद ग्वालियर निगम हुआ सक्रिय: 140 शिकायतों का निराकरण, 1200 ट्यूबवेल की सफाई, कंट्रोल रूम भी बनाया

    इंदौर की मौत के बाद ग्वालियर निगम हुआ सक्रिय: 140 शिकायतों का निराकरण, 1200 ट्यूबवेल की सफाई, कंट्रोल रूम भी बनाया


    नई दिल्ली ।मध्यप्रदेश के ग्वालियर में पानी की समस्या अब गंभीर रूप लेती जा रही है। इंदौर में दूषित पानी से मौत की घटना के बाद नगर निगम ने सक्रिय कदम उठाना शुरू किया है। शहर के कई इलाकों से गंदे पानी की शिकायतें आ रही थीं, जिनके समाधान के लिए जनता ने सीएम हेल्पलाइन CM Helpline का सहारा लिया।1 जनवरी से अब तक सीएम हेल्पलाइन में 140 शिकायतें दर्ज की गई हैं, जिनमें से अधिकांश मामलों का समाधान कर दिया गया है। नगर निगम कमिश्नर संघप्रिय सिंह ने बताया कि शिकायतों के निराकरण के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है, जिससे काम में तेजी लाई जा रही है।

    कुल 2600 ट्यूबवेलों में से अब तक 1200 की सफाई पूरी हो चुकी है और शेष ट्यूबवेलों की सफाई भी जल्द ही पूरी की जाएगी। इसके अलावा पानी की टंकियों की सफाई भी लगातार जारी है।शहर में कुछ स्थानों पर गंदे पानी की समस्या पुरानी और क्षतिग्रस्त सीवर तथा पेयजल लाइनों की वजह से उत्पन्न हो रही है। ऐसे 56 स्थानों की लाइनों को बदला जाएगा। नगर निगम ने इन इलाकों को चिन्हित किया है और हर क्षेत्र के लिए विशेष प्लान तैयार किया जा रहा है ताकि समस्या का स्थायी समाधान किया जा सके।

    नगर निगम की टीम ने बताया कि फिलहाल 124 शिकायतों वाले स्थानों पर समस्या का समाधान कर दिया गया है और बाकी 16 पर काम चल रहा है। निगम ने जनता से अपील की है कि यदि किसी क्षेत्र में अब भी गंदे पानी की समस्या है तो वे सीधे सीएम हेल्पलाइन या नगर निगम कंट्रोल रूम से संपर्क करें।इस कदम से यह स्पष्ट है कि ग्वालियर नगर निगम पानी की समस्या को गंभीरता से ले रहा है। यह भी ध्यान रखा जा रहा है कि समस्या के कारण आने वाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को रोका जा सके।

    शहरवासियों के लिए राहत की बात यह है कि समस्या का निराकरण सिस्टमेटिक और तेज़ी से किया जा रहा है। कंट्रोल रूम के माध्यम से शिकायतों का ट्रैक रखा जा रहा है और हर इलाके का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है।ग्वालियर नगर निगम की यह पहल यह संदेश देती है कि नागरिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के प्रति प्रशासन सचेत है और तकनीकी एवं प्रबंधन उपायों के जरिए तेजी से कार्रवाई की जा रही है।

  • ग्वालियर में स्ट्रीट डॉग का तांडव, कोचिंग जा रहे मासूम पर हमला, 10 दिन में 872 लोग डॉग बाइट के शिकार

    ग्वालियर में स्ट्रीट डॉग का तांडव, कोचिंग जा रहे मासूम पर हमला, 10 दिन में 872 लोग डॉग बाइट के शिकार


    ग्वालियर । ग्वालियर में शनिवार सुबह कोचिंग जा रहे आठ वर्षीय मासूम अहिम पर अचानक एक स्ट्रीट डॉग ने हमला कर दिया। बच्चे की जांघ को जबड़े में दबाकर कुत्ते ने सड़क पर घसीटना शुरू किया। आसपास के लोग और राहगीर तुरंत मौके पर पहुंचे और बच्चे को डॉग के चंगुल से छुड़ाया। घायल मासूम को तुरंत जेएएच अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी जांघ पर टांके लगाए।

    घटना माधौगंज थाना क्षेत्र के लक्कड़खाना नाले के पास हुई। बच्चे के पिता दीन मोहम्मद ने बताया कि हमला करने वाला कुत्ता मानसिक रूप से अस्वस्थ है और लंबे समय से इलाके में घूम रहा है। इसके झुंड ने पहले भी कई लोगों पर हमला किया, लेकिन नगर निगम से शिकायत के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    अहिम पर हमला इतने अचानक हुआ कि बच्चे को कोई तैयारी नहीं थी। कुत्ते ने उसकी जांघ को जबड़े में दबाकर सड़क पर घसीटा। मौके पर पहुंचे लोगों ने कुत्ते को भगाया और बच्चे को सुरक्षित किया। अब अहिम गहरे सदमे और डर में है।

    ग्वालियर में डॉग बाइट का डर:
    पिछले कुछ दिनों में शहर में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है। सिर्फ 1 जनवरी से 10 जनवरी 2026 तक 872 लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो चुके हैं। आंकड़े बताते हैं कि बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सभी को डॉग बाइट की घटनाओं में शामिल किया गया।

    जयारोग्य अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 तक 18,993, जबकि 2025 में 8,606 डॉग बाइट के मामले सामने आए। इस तरह केवल दो साल में कुल 27,593 लोग कुत्तों के काटने से प्रभावित हुए।

    नगर निगम का कहना है कि रोजाना करीब 40 कुत्ते पकड़े जाते हैं और 25 कुत्तों की नसबंदी की जाती है। शहर में केवल एक एबीसी सेंटर है, जो बिरला नगर पुल के नीचे संचालित होता है। इसके बावजूद आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रण से बाहर है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरनाक स्थिति है। शहर के गलियों, मोहल्लों और चौराहों तक डॉग बाइट का डर आम हो गया है।

    नगर निगम से जनता की मांग है कि आवारा कुत्तों की संख्या कम करने और नसबंदी पर विशेष ध्यान दिया जाए।

    ग्वालियर में इस तरह की घटनाएं आवारा कुत्तों के असंगठित झुंडों की वजह से लगातार बढ़ रही हैं। इस घटना ने एक बार फिर नगर निगम की सुरक्षा व्यवस्था और सक्रियता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते प्रभावी कदम उठाएगा और शहरवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
    यह घटना बच्चों की सुरक्षा, नगर निगम की जवाबदेही और आवारा कुत्तों के नियंत्रण की आवश्यकता को उजागर करती है। ग्वालियरवासियों की चिंता बढ़ती जा रही है, और समय रहते कदम न उठाए जाने पर हालात और गंभीर हो सकते हैं।

  • जबलपुर में गोहलपुर पुलिया का चौड़ीकरण: 80 फीट चौड़ी होगी, 3.50 करोड़ का प्रोजेक्ट जाम मुक्त आवागमन के लिए मंजूर

    जबलपुर में गोहलपुर पुलिया का चौड़ीकरण: 80 फीट चौड़ी होगी, 3.50 करोड़ का प्रोजेक्ट जाम मुक्त आवागमन के लिए मंजूर


    जबलपुर । जबलपुर में 7 किलोमीटर लंबे ओवरब्रिज के पास हर दिन यात्रियों को जाम का सामना करना पड़ता था। मुख्य वजह थी ओवरब्रिज के लगभग 100 मीटर आगे बनी गोहलपुर नाले की संकरी पुलिया, जो केवल 30 फीट चौड़ी थी। लंबी प्रतीक्षा और यातायात जाम को देखते हुए महापौर जगत बहादुर सिंह ‘अन्नू’ ने बीते शनिवार को पुलिया का औचक निरीक्षण किया और क्षेत्रीय जनता की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करते हुए इसके चौड़ीकरण को हरी झंडी दे दी।

    नगर निगम प्रशासन ने बताया कि गोहलपुर पुलिया का चौड़ीकरण 3 करोड़ 50 लाख रुपए की लागत से किया जाएगा। वर्तमान 30 फीट चौड़ी पुलिया को बढ़ाकर 80 फीट चौड़ा किया जाएगा, जिससे यातायात में गति बढ़ेगी और दुर्घटनाओं का खतरा कम होगा। महापौर ने कहा कि मार्च 2026 तक काम शुरू हो जाएगा और जुलाई 2026 तक इसे पूरा कर जनता को समर्पित किया जाएगा।

    पुलिया चौड़ीकरण से न केवल वाहनों का दबाव कम होगा, बल्कि मानसून के दौरान जलभराव की समस्या और संकरे रास्ते से होने वाली असुविधा भी समाप्त होगी। यह प्रोजेक्ट शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

    इस पहल का राजनीतिक महत्व भी रहा है। कांग्रेस के क्षेत्रीय विधायक लखन घनघोरिया ने विधानसभा में इस पुलिया को लेकर सवाल उठाए थे और कहा था कि ओवरब्रिज तो बना दिया गया, लेकिन नाले के पुलिया पर ध्यान नहीं दिया गया। अब महापौर और नगर निगम प्रशासन ने इसे चुनौती मानते हुए समाधान के लिए ठोस कदम उठाए हैं।

    गोहलपुर पुलिया के चौड़ीकरण से कटनी-सिहोरा-पनागर-अधारताल की ओर जाने वाले यात्रियों को ढाई से तीन घंटे तक जाम का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही स्थानीय व्यापार और आवागमन भी सुगम बनेगा।

    यह परियोजना शहर की यातायात प्रणाली में स्थायी सुधार लाने के साथ-साथ नागरिकों की सुविधा को प्राथमिकता देने का उदाहरण भी है।

    नया चौड़ा पुल केवल वाहनों के लिए नहीं, बल्कि पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहनों के लिए भी सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करेगा। नगर निगम ने पुलिया के आसपास के मार्गों की सुरक्षा और व्यवस्थित निर्माण के लिए विशेष निगरानी रखने की बात कही है।

    इस तरह गोहलपुर पुलिया का चौड़ीकरण न केवल जबलपुर के सबसे लंबे ओवरब्रिज के आसपास के जाम की समस्या को समाप्त करेगा, बल्कि शहर की विकास योजना और नागरिक सुविधा में भी एक नया मील का पत्थर साबित होगा।

  • भोपाल में 30 हजार किसान निकालेंगे ट्रैक्टर रैली, ट्रैफिक डायवर्शन और जाम से बचने के लिए देखें रूट प्लान

    भोपाल में 30 हजार किसान निकालेंगे ट्रैक्टर रैली, ट्रैफिक डायवर्शन और जाम से बचने के लिए देखें रूट प्लान


    भोपाल । आज भोपाल में कृषि कल्याण वर्ष का शुभारंभ होने जा रहा है, जिसमें 30 हजार से अधिक किसान भाग लेंगे। इस कार्यक्रम का आयोजन जम्बूरी मैदान में होगा, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हरी झंडी दिखाकर इसकी शुरुआत करेंगे। इस आयोजन में 1101 ट्रैक्टरों और 800 से 900 बसों के माध्यम से किसान प्रदेशभर से पहुंचेंगे। ऐसे में राजधानी भोपाल में भारी ट्रैफिक और मार्गों पर बदलाव होने की संभावना है, जिससे जाम और यात्रा में परेशानी हो सकती है।

    ट्रैफिक डायवर्शन की जानकारी

    जम्बूरी मैदान जाने वाले मार्गों पर भारी वाहनों की एंट्री रोक दी गई है, और कई मुख्य सड़कें डायवर्ट की जाएंगी। खासतौर पर उन रास्तों पर ज्यादा दबाव रहेगा, जो ट्रैक्टर रैली और किसानों के वाहन ले जा रहे होंगे। इसके अलावा, परीक्षार्थियों के लिए विशेष मार्ग व्यवस्था की गई है, ताकि वे बिना किसी रुकावट के अपनी परीक्षा में शामिल हो सकें।

    मुख्य रूट डायवर्शन और वैकल्पिक मार्ग

    भोपाल मिसरोद-सलैया क्षेत्र 11 मील बायपास रोड, खजूरी कला, पटेल नगर चौराहा, प्रेस्टीज कॉलेज के सामने लाइन अप। भोपाल फंदा ब्लॉक-बैरासिया रोड खजूरी सड़क, मोबारकपुर बायपास, लांबाखेड़ा बायपास चौराहा, चोपड़ा कला बायपास चौराहा, अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के सामने लाइन अप। रायसेन और विदिशा से आने वाले ट्रैक्टर संबंधित मार्गों से होते हुए प्रेस्टीज कॉलेज के सामने लाइन अप करेंगे।

    जम्बूरी मैदान पार्किंग

    जन सामान्य जीप/कार/दो पहिया वाहन गोविन्दपुरा टर्निंग, महात्मा गांधी चौराहा, सेंट जेवियर स्कूल के सामने। वीआईपी वाहन: गोविन्दपुरा टर्निंग, महात्मा गांधी चौराहा, अयप्पा मंदिर, गैस गोदाम, सेंट जेवियर स्कूल के सामने। मीडिया वाहन गोविन्दपुरा टर्निंग, महात्मा गांधी चौराहा, जम्बूरी मैदान पानी की टंकी के पास।

    ऑप्शनल मार्ग

    बोर्ड ऑफिस, गोविन्दपुरा टर्निंग, अन्नानगर, सद्भावना चौराहा, महात्मा गांधी चौराहा, सेंट जेवियर स्कूल, अवधपुरी तिराहा तक मार्ग पर अत्यधिक यातायात रहेगा। इसके अलावा, पटेल नगर बायपास, आनंद नगर, रत्नागिरी तिराहा, पिपलानी पेट्रोल पंप तक मार्ग पर भी भारी दबाव रहेगा।

    विशेष मार्ग व्यवस्था
    परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के लिए पिपलानी चौराहा से पटेल नगर चौराहा तक विशेष मार्ग व्यवस्था की गई है। वहीं, भारी वाहनों के लिए भोपाल-बाईपास खजूरी सड़क से 11 मील तक पर डायवर्जन लागू होगा।

    किसान रैली में शामिल होने वाले जिलों की सूची

    भोपाल से 601, विदिशा से 250 और रायसेन से 250 ट्रैक्टर रैली में शामिल होंगे। इसके अलावा, द्वितीय कार्यक्रम सभा और कृषि कल्याण वर्ष के शुभारंभ में 30,000 किसान भाग लेंगे। इसमें भोपाल से 12,000, सिहोर और रायसेन से 6,000-6,000, विदिशा से 4,000, राजगढ़ और नर्मदापुरम से 1,000-1,000 किसान शामिल होंगे।
  • MP में शीतलहर का कहर जारी, नए पश्चिमी विक्षोभ के कारण 7 जिलों में अलर्ट

    MP में शीतलहर का कहर जारी, नए पश्चिमी विक्षोभ के कारण 7 जिलों में अलर्ट


    भोपाल । मध्य प्रदेश में ठंड का असर लगातार बढ़ता जा रहा है, और अब सर्दी का सितम और ज्यादा बढ़ने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो गया है, जिसके कारण अगले दो दिनों तक कड़ाके की ठंड बनी रहेगी। सुबह के समय घने कोहरे के कारण विजिबलिटी में कमी आ रही है, जिससे यात्रा करना और भी कठिन हो रहा है। कई जिलों में धूप भी अब बेअसर हो गई है, और ठंड का प्रकोप और ज्यादा महसूस किया जा रहा है।

    मौसम विभाग ने 7 जिलों ग्वालियर, चंबल, रीवा समेत अन्य इलाकों में शीतलहर का अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा, 20 से अधिक जिलों में घना कोहरा रहने की संभावना है। शनिवार को खजुराहो सबसे ठंडा शहर रहा, जहां न्यूनतम तापमान 3.6°C दर्ज किया गया। वहीं दतिया में 4.6°C, राजगढ़ में 4.4°C, शिवपुरी में 4°C, नौगांव में 5°C और रीवा में 5.5°C तापमान रहा।

    मौसम का हाल

    प्रदेश के प्रमुख शहरों में भी ठंड का असर देखने को मिला है। इंदौर का तापमान 6.9°C, भोपाल का 7°C और ग्वालियर का 5.9°C दर्ज किया गया। जबलपुर में हालांकि थोड़ा राहत का मौसम रहा, जहां तापमान 9.4°C था। प्रदेश के 25 शहरों में रात का तापमान 10°C से नीचे रहा।पश्चिमी विक्षोभ के कारण अगले दो दिन ठंड का कहर और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। जनवरी में हो रही यह रिकॉर्ड ठंड ने नवंबर और दिसंबर के तापमान के रिकॉर्ड भी तोड़ दिए हैं, और लोग ठंड से राहत पाने के लिए परेशान हो गए हैं।