Category: Madhya Pradesh

  • महाकाल मंदिर को 111 किलो पीतल के नंदी का दान, जयपुर के भक्त ने अर्पित की श्रद्धा

    महाकाल मंदिर को 111 किलो पीतल के नंदी का दान, जयपुर के भक्त ने अर्पित की श्रद्धा


    उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धा और आस्था का एक और अनुपम उदाहरण देखने को मिला। जयपुर निवासी भक्त विपिन बंसल ने अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर भगवान महाकाल को 111 किलोग्राम वजन के पीतल के नंदी दान स्वरूप अर्पित किए। इस अवसर पर मंदिर समिति द्वारा दानदाता का विधिवत सम्मान किया गया।

    मंदिर प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जयपुर निवासी विपिन बंसल ने पुजारी राजेश शर्मा की प्रेरणा से भगवान महाकाल के चरणों में यह विशेष दान अर्पित किया। पीतल से निर्मित इन नंदी प्रतिमाओं का कुल वजन 111 किलोग्राम है, जो अपनी कलात्मकता और भव्यता के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।दान स्वीकार किए जाने के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने दानदाता विपिन बंसल को भगवान महाकाल का प्रसाद और दुपट्टा भेंट कर सम्मानित किया। मंदिर समिति के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने बताया कि दान में प्राप्त इन सुंदर पीतल के नंदी को मंदिर परिसर में उचित और सुरक्षित स्थान पर विधिवत स्थापित किया जाएगा, ताकि श्रद्धालु इनके दर्शन कर सकें।

    मंदिर समिति के अधिकारियों ने कहा कि महाकालेश्वर मंदिर में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु अपनी आस्था और विश्वास के अनुसार दान करते हैं। कोई सोने-चांदी के आभूषण अर्पित करता है, तो कोई नकद राशि या धार्मिक सामग्री भेंट करता है। भक्तों का मानना है कि भगवान महाकाल अपने भक्तों की सच्ची मनोकामनाएं अवश्य पूरी करते हैं, और उसी कृतज्ञता स्वरूप वे इस तरह के दान अर्पित करते हैं।जयपुर के भक्त द्वारा किया गया यह दान भी उसी अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी पीतल के नंदी के दान को सराहा और इसे भगवान महाकाल के प्रति भक्त की गहरी आस्था बताया।

    श्री महाकालेश्वर मंदिर, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां भक्तों द्वारा किए जाने वाले दान और सेवा कार्य भी इसकी महिमा को और बढ़ाते हैं। इस प्रकार के दान मंदिर की परंपराओं और आध्यात्मिक गरिमा को सशक्त बनाते हैं।

  • रविवार की भस्म आरती में राजा स्वरूप में दर्शन दिए भगवान महाकाल, भांग-चंदन व रजत आभूषणों से हुआ दिव्य श्रृंगार

    रविवार की भस्म आरती में राजा स्वरूप में दर्शन दिए भगवान महाकाल, भांग-चंदन व रजत आभूषणों से हुआ दिव्य श्रृंगार


    उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के भस्म आरती श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुई। सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही गर्भगृह में विराजित भगवान महाकाल सहित सभी प्रतिमाओं का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। जैसे ही मंदिर परिसर में घंटियों की ध्वनि गूंजी, पूरा वातावरण हर-हर महादेव के जयघोष से भक्तिमय हो उठा।भस्म आरती की शुरुआत जलाभिषेक से हुई। पंडे-पुजारियों ने भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया, इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से बाबा का विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम के मंत्रोच्चार के साथ भगवान को जल अर्पित किया गया, जिससे गर्भगृह में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।

    पूजन-अभिषेक के पश्चात भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। बाबा को भांग और चंदन अर्पित कर रजत चंद्र, मुकुट और आभूषणों से राजा स्वरूप में सजाया गया। त्रिशूल, त्रिपुंड और रुद्राक्ष की माला धारण कराकर भगवान को अलौकिक रूप प्रदान किया गया। मस्तक पर रजत चंद्र, भांग-चंदन और गुलाब के पुष्पों से विशेष सजावट की गई। इसके बाद कपूर आरती की गई, जिसकी लौ से पूरा गर्भगृह प्रकाशमान हो गया।आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढांककर परंपरानुसार भस्म रमाई गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के पश्चात भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इस क्षण को देखने के लिए श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ मौजूद रहे।

    भस्म अर्पण के पश्चात बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की माला अर्पित की गई। गुलाब के सुगंधित फूलों से सजे भगवान को ड्रायफ्रूट, फल, मिष्ठान और विशेष भोग अर्पित किया गया। श्रृंगार और भोग के बाद बाबा का स्वरूप अत्यंत मनोहारी और दिव्य नजर आया।भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उपस्थित रही। भक्तों ने नंदी मंडपम, गणेश मंडपम और मंदिर परिसर के विभिन्न स्थानों से बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कई श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भगवान महाकाल की आराधना में लीन दिखाई दिए।

    श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती विश्वभर में अपनी विशिष्ट परंपरा और आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। रविवार की इस भस्म आरती में राजा स्वरूप में सजे भगवान महाकाल के दर्शन ने श्रद्धालुओं के मन को शांति, श्रद्धा और भक्ति से भर दिया।

  • पचमढ़ी में बढ़ी पर्यटकों की संख्या विंटर वेकेशन से पहले होटल 60% तक फुल जिप्सी सफारी किराए में भी बढ़ोतरी

    पचमढ़ी में बढ़ी पर्यटकों की संख्या विंटर वेकेशन से पहले होटल 60% तक फुल जिप्सी सफारी किराए में भी बढ़ोतरी


    नर्मदापुरम । मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में इस साल विंटर वेकेशन के दौरान पर्यटकों की भारी संख्या आने की संभावना है। 24 दिसंबर से 2 जनवरी तक का समय पचमढ़ी में पीक सीजन के रूप में घोषित किया गया है। इस दौरान पर्यटकों के लिए कई नई घोषणाएं की गई हैं जिनमें जिप्सी सफारी और होटल किराए में बढ़ोतरी प्रमुख हैं।

    जिप्सी सफारी किराए में वृद्धि
    पचमढ़ी में पर्यटकों को अब जिप्सी सफारी के लिए पहले से अधिक किराया चुकाना होगा। अब प्रत्येक पर्यटन स्थल के लिए जिप्सी सफारी का किराया पुराने किराए से एक हजार रुपए अधिक होगा। यह बढ़ा हुआ किराया 2 जनवरी तक लागू रहेगा। इसी तरह टैक्सी किराए में भी बढ़ोतरी की गई है। टैक्सी संचालकों के अनुसार पीक सीजन के दौरान पर्यटकों को किसी भी पर्यटन स्थल पर जाने के लिए अतिरिक्त 1000 रुपए चुकाने होंगे।

    होटलों के किराए में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी

    पचमढ़ी में होटलों के कमरों के किराए में भी बढ़ोतरी की गई है। होटल संचालकों का कहना है कि 12 से 14 दिन पहले की गई एडवांस बुकिंग के चलते कई होटल पहले ही 60% तक बुक हो चुके हैं। पचमढ़ी में कुल 100 से अधिक छोटे-बड़े होटल हैं लेकिन बढ़ती भीड़ के कारण कमरों की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। इस समय होटलों में कमरे 2000 रुपए से शुरू हो रहे हैं और पीक सीजन के दौरान इनकी कीमत में और वृद्धि की संभावना है।

    नए साल की बुकिंग में तेजी

    नए साल के मौके पर पचमढ़ी में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। होटल और रिसॉर्ट्स में 31 दिसंबर और 1 जनवरी के लिए 60% से अधिक बुकिंग पहले ही हो चुकी है। शनिवार और रविवार को भी बड़ी संख्या में पर्यटक पचमढ़ी का रुख कर रहे हैं। नए साल के जश्न को लेकर पचमढ़ी में हलचल बढ़ गई है और पर्यटकों के बीच इस समय को मनाने का जोश है।

    सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
    पचमढ़ी में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। पिपरिया एसडीओपी को पचमढ़ी की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस दौरान अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है और रात में पेट्रोलिंग बढ़ाई जाएगी। जाम से निपटने के लिए विशेष पॉइंट चिन्हित किए जा रहे हैं जहां पर निगरानी के लिए कैमरे लगाए जाएंगे। इसके अलावा पचमढ़ी और पिपरिया थाना स्टाफ भी गश्त करता रहेगा।

    पचमढ़ी के प्रमुख पर्यटन स्थल

    पचमढ़ी में पर्यटकों को आकर्षित करने वाले कई प्रमुख स्थल हैं जिनमें प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक स्थल शामिल हैं पांडव गुफाएं यह स्थल पचमढ़ी के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को दर्शाता है मान्यता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान यहां समय बिताया।प्राकृतिक झरने पचमढ़ी में बी-फॉल रजत प्रपात करीब 350 फीट ऊंचा और अप्सरा विहार जैसे खूबसूरत झरने पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। धूपगढ़ पचमढ़ी का सबसे ऊंचा बिंदु है जहां से सूर्यास्त का दृश्य बेहद आकर्षक होता है। धार्मिक स्थल पचमढ़ी में स्थित चौरागढ़ और जटाशंकर मंदिर प्रमुख शिव मंदिर हैं जहां महाशिवरात्रि के दौरान भारी भीड़ उमड़ती है।
    इन प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ-साथ पचमढ़ी में शांति ठंडा मौसम और हरे-भरे जंगल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। पचमढ़ी में विंटर वेकेशन से पहले पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है और पीक सीजन के दौरान होटल और सफारी के किराए में भी वृद्धि की गई है। पर्यटकों के लिए सुरक्षा और अन्य सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है ताकि वे अपनी छुट्टियां बिना किसी समस्या के अच्छे से मना सकें। पचमढ़ी के प्रमुख पर्यटन स्थलों की सुंदरता और शांति इसे मध्य प्रदेश का एक प्रमुख पर्यटन स्थल बनाती है जहां हर साल सैलानियों का तांता लगा रहता है।

  • जबलपुर चर्च विवाद: ब्लाइंड बच्चों के धर्मांतरण के आरोप पर हंगामा, दो पक्षों में हाथापाई..

    जबलपुर चर्च विवाद: ब्लाइंड बच्चों के धर्मांतरण के आरोप पर हंगामा, दो पक्षों में हाथापाई..


    जबलपुर/मध्यप्रदेश के जबलपुर में शनिवार को एक चर्च में आयोजित कार्यक्रम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। गोरखपुर थाना क्षेत्र में स्थित चर्च में ब्लाइंड छात्र-छात्राओं के धर्मांतरण की सूचना मिलने के बाद हिंदू संगठन के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और जमकर हंगामा किया। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि चर्च में मौजूद लोगों और हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस के बाद हाथापाई तक हो गई।

    घटना की सूचना मिलते ही गोरखपुर थाना पुलिस और सीएसपी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की लेकिन काफी देर तक दोनों पक्षों में तनाव बना रहा। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों पक्षों को अलग किया और मामले की जांच शुरू कर दी है।जानकारी के अनुसार गोरखपुर क्षेत्र में जॉनसन स्कूल कैंपस के पीछे स्थित चर्च में क्रिसमस कार्यक्रम के नाम पर शहर के अलग-अलग छात्रावासों से करीब 70 दिव्यांग छात्र-छात्राओं को बुलाया गया था। चर्च के अंदर बच्चों से प्रार्थना कराई जा रही थी। इसी दौरान किसी ने हिंदू संगठनों को सूचना दी कि इन बच्चों को लालच देकर धर्मांतरण के उद्देश्य से लाया गया है।

    सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में हिंदू संगठन के कार्यकर्ता चर्च पहुंच गए और आरोप लगाने लगे कि दिव्यांग बच्चों को भोजन और अन्य सुविधाओं का लालच देकर उनका ब्रेनवॉश किया जा रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना था कि बच्चों को जिस छात्रावास से लाया गया वहां से किसी तरह की अनुमति नहीं ली गई।विवाद के दौरान पुलिस की मौजूदगी में ही दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू हो गई। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने अतिरिक्त बल बुलाया और स्थिति को संभाला।पुलिस ने मौके से एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में भी लिया है जिसके पास कोई पहचान पत्र नहीं था।

    हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बच्चों से बातचीत करने पर उन्होंने बताया कि उन्हें खाने-पीने का लालच देकर चर्च के कार्यक्रम में लाया गया था। संगठन के पदाधिकारी विकास खरे ने कहा कि बच्चों को बताया गया था कि वे सिर्फ क्रिसमस की तैयारी में शामिल होने जा रहे हैं लेकिन चर्च में कथित रूप से धार्मिक बातें कराई जा रही थीं और हनुमान चालीसा को गलत बताया गया। उनका दावा है कि हर साल 25 दिसंबर के आसपास इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।वहीं चर्च की ओर से महिला लीला जोसफ ने सभी आरोपों को खारिज किया है।उन्होंने बताया कि यह एक सामान्य ईशू कार्यक्रम था जिसमें ब्लाइंड बच्चों को अलग-अलग स्कूलों और क्षेत्रों-मेडिकल कॉलेज के पास सिविल लाइन और बायपास इलाके से-आमंत्रित किया गया था। उनका कहना है कि बच्चों को संबंधित संस्थाओं की अनुमति से ही लाया गया था और धर्मांतरण जैसा कोई उद्देश्य नहीं था।

    सीएसपी एमडी नगोतिया ने बताया कि फिलहाल सभी बच्चों को सुरक्षित रूप से उनके छात्रावास वापस भेज दिया गया है।पुलिस अब चर्च में कार्यक्रम आयोजित करने वालों और जिन दिव्यांग छात्रावासों से बच्चों को लाया गया था दोनों पक्षों से पूछताछ कर रही है। प्रारंभिक जांच में अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और यदि किसी भी पक्ष की ओर से कानून का उल्लंघन पाया जाता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इलाके में शांति बनी हुई है लेकिन पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

  • आईएएस सर्विस मीट के दूसरे दिन भी जोश बरकरार, बोट रेस से लेकर क्रिकेट-फुटबॉल तक दिखी अफसरों की टीम स्पिरिट

    आईएएस सर्विस मीट के दूसरे दिन भी जोश बरकरार, बोट रेस से लेकर क्रिकेट-फुटबॉल तक दिखी अफसरों की टीम स्पिरिट

    भोपाल /राजधानी भोपाल में चल रहे आईएएस सर्विस मीट के दूसरे दिन शनिवार को भी अधिकारियों और उनके परिजनों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। दिन की शुरुआत बड़े तालाब स्थित बोट क्लब में रोमांचक बोट रेस से हुई, जहां कड़ाके की ठंड के बावजूद आईएएस अधिकारियों ने पूरे जोश और टीम भावना के साथ भाग लिया। सुबह से ही आयोजन स्थल पर उत्सव जैसा माहौल नजर आया, जिसे डीजे की धुनों और गीत-संगीत ने और भी रंगीन बना दिया।बड़े तालाब में आयोजित इस बोट रेस में चार हाउस-रेड, ब्लू, ग्रीन और यलो-की टीमें शामिल रहीं। खास बात यह रही कि इस रेस में सिर्फ अधिकारी ही नहीं, बल्कि उनके परिजन भी सक्रिय रूप से शामिल हुए। प्रत्येक टीम में तीन वयस्क पुरुष, एक अनुभवी खिलाड़ी, एक महिला और एक बच्चा शामिल था। इसके अलावा टीम के साथ चार सपोर्ट सदस्य, एक गाइड और एक ड्रमर भी मौजूद रहे, जिससे रेस के दौरान तालमेल और उत्साह बना रहा।
    200 मीटर की दूरी वाली इस रेस में लहरों के बीच नावों की रफ्तार और टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा देखने लायक रही। रेस के दौरान तालाब किनारे मौजूद दर्शक लगातार तालियां बजाकर और जयकारे लगाकर टीमों का हौसला बढ़ाते नजर आए। अधिकारियों का कहना था कि इस तरह के आयोजन न सिर्फ तनाव से राहत देते हैं, बल्कि आपसी सहयोग और टीमवर्क की भावना को भी मजबूत करते हैं।दूसरे दिन की बोट रेस में कड़ा मुकाबला देखने को मिला। पहले दो मुकाबलों के बाद ब्लू और ग्रीन टीम के बीच निर्णायक रेस हुई। इस मुकाबले में ब्लू टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 52.33.01 सेकंड में रेस जीत ली। वहीं ग्रीन टीम ने भी पूरा दमखम लगाया, लेकिन वह 55.55.02 सेकंड के समय के साथ दूसरे स्थान पर रही। ब्लू टीम की जीत पर साथियों और समर्थकों ने तालियों और जयकारों के साथ जश्न मनाया।

    बोट रेस के बाद अधिकारी और उनके परिजन अरेरा क्लब पहुंचे, जहां दिनभर खेल प्रतियोगिताओं का सिलसिला चलता रहा। क्रिकेट और फुटबॉल मैचों में आईएएस अधिकारियों ने अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। मैदान पर अधिकारियों को खिलाड़ी की भूमिका में देखकर दर्शकों में भी खास उत्साह देखने को मिला। कई अधिकारी लंबे समय बाद खेल के मैदान में उतरने को लेकर काफी उत्साहित नजर आए।शाम के समय अरेरा क्लब में चारों हाउस के बीच कुकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में महिला और पुरुष आईएएस अधिकारियों के साथ उनके परिजनों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अलग-अलग टीमों ने अपने-अपने व्यंजन तैयार किए और उन्हें रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया। कुकिंग प्रतियोगिता के दौरान हंसी-मजाक और आपसी बातचीत से माहौल पूरी तरह पारिवारिक बन गया।
    प्रतिभागियों का कहना था कि सर्विस मीट के दौरान इस तरह की गतिविधियां उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारियों की व्यस्तता से कुछ समय के लिए दूर ले जाकर नई ऊर्जा देती हैं। आयोजकों के अनुसार, इस वर्ष सर्विस मीट में अधिकारियों के साथ उनके परिवारों की भागीदारी पहले की तुलना में अधिक रही है, जिससे आयोजन और भी जीवंत हो गया है।आईएएस सर्विस मीट के दूसरे दिन का समापन खेल, मनोरंजन और आपसी सौहार्द के माहौल में हुआ। अधिकारियों ने माना कि ऐसे आयोजन न सिर्फ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं, बल्कि आपसी संवाद और सहयोग को भी मजबूत बनाते हैं। सर्विस मीट के अगले और अंतिम दिन भी कई खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका सभी को बेसब्री से इंतजार रहा।
  • पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना: सीहोर के हर किसान के खेत तक पहुंचेगा पार्वती नदी का पानी20 गांव होंगे प्रभावित

    पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना: सीहोर के हर किसान के खेत तक पहुंचेगा पार्वती नदी का पानी20 गांव होंगे प्रभावित


    सीहोर । मध्य प्रदेश सीहोर जिले में पार्वती कालीसिंध चंबल लिंक परियोजना के तहत दो महत्वपूर्ण सिंचाई योजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना से श्यामपुर और सीहोर तहसील के 111 गांवों में किसानों को सिंचाई का सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावालगभग 20 गांव इस परियोजना क्षेत्र में प्रभावित होंगेजिनके लिए नियमानुसार पुनर्वास और मुआवजे की व्यवस्था की जाएगी।

    दिल्ली से आई टीम ने किया मृदा परीक्षण

    निर्माण कार्य की शुरुआत के लिए दिल्ली से एक विशेषज्ञ टीम सीहोर आई थीजिन्होंने मृदा के सेंपल लेकर परीक्षण किए हैं। इस परियोजना के पूर्ण होने से सीहोर विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक किसान के खेत तक पार्वती नदी का पानी पहुंचेगा। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होगीकिसानों की आय में सुधार होगा और क्षेत्र का समग्र आर्थिक विकास संभव होगा।

    दो बड़े बैराज का निर्माण
    इस परियोजना के तहत पार्वती नदी पर दो प्रमुख बैराज श्यामपुर बैराज और कराडिया बैराज का निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्तग्राम जेटला में एक बड़े बांध का निर्माण प्रस्तावित हैजो पार्वती नदी से पानी उठाकर भरेगा। इन संरचनाओं से लगभग 1 लाख 18 हजार 750 एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। यह सीहोर विधानसभा क्षेत्र की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना मानी जा रही है।

    जेठला वृहद माइक्रो सिंचाई परियोजना

    इस योजना के तहत श्यामपुर तहसील के 71 गांवों की लगभग 72,500 एकड़ भूमि को स्प्रिंकलर प्रणाली के माध्यम से सिंचित किया जाएगा। इस परियोजना की कुल लागत 1349.51 करोड़ रुपये हैऔर इसके तहत प्रत्येक हेक्टेयर भूमि के लिए अलग जल कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे। इससे किसानों को अपनी आवश्यकता अनुसार पानी की आपूर्ति हो सकेगीजिससे जल की बचत होगी और फसलों का उत्पादन बढ़ेगा।

    पार्वती उद्वहन सिंचाई कॉम्प्लेक्स

    पार्वती उद्वहन सिंचाई कॉम्प्लेक्स” योजना के तहत ग्राम करिया और श्यामपुर में दो वृहद बैराजों का निर्माण किया जाएगा। इन बैराजों से 40 गांवों की 46,250 एकड़ भूमि को स्प्रिंकलर प्रणाली से सिंचित किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत 1165.04 करोड़ रुपये है।

    किसे मिलेगा सिंचाई का पानी

    जेठला परियोजना के तहत 71 गांवों को सिंचाई का पानी मिलेगा, जिनमें दुर्गा, महुआखेडा, मगरदीखुर्द, चांदबड जांगीर, मानपुरा, बिसनखेडा, रावतखेडा, छतरपुरा, जेटला, पाटेर, अछारोही, सोकला, सीलखेडा, मुंगावली, जुगराजपुरा, बाजारगांव, बरखेडा हसन, पडालिया और कई अन्य गांव शामिल हैं। पार्वती उद्वहन परियोजना से 40 गांवों को सिंचाई का पानी मिलेगा, जिनमें पाटन, बरखेडा खरेट, चौकी, शाहजहापुर, भौज, बरखेडी, कतपोन, सोनकच्छ, सतपोन, जमुनियाखुर्द, बराडीकलां, सतोरनिया, तोरनिया, छापरी दोराहा, झागरिया, निवारिया, मिटटूखेडी, गुलखेडी, कादमपुर, मुख्तार नगर और अन्य गांव शामिल हैं।

    आर्थिक लाभ और जल प्रबंधन

    यह परियोजना किसानों के लिए एक बड़ी राहत होगीक्योंकि इससे जल संकट की समस्या को हल करने में मदद मिलेगी। इसके अलावाइससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होने के साथ-साथ जल की बचत भी संभव होगीजो क्षेत्रीय जल प्रबंधन में सुधार करेगा। पार्वती कालीसिंध चंबल लिंक परियोजना एक महत्वपूर्ण कदम हैजो मध्य प्रदेश के सीहोर और श्यामपुर क्षेत्र के किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी। इस परियोजना के तहत किसानों को सिंचाई के बेहतर साधन मिलेंगेजिससे उनकी कृषि आय में वृद्धि होगी और पूरे क्षेत्र का समग्र विकास होगा।

  • आईएएस सर्विस मीट का समापन: 18 किमी साइक्लोथॉन में अफसरों ने दिखाया जोश, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

    आईएएस सर्विस मीट का समापन: 18 किमी साइक्लोथॉन में अफसरों ने दिखाया जोश, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश


    भोपाल/राजधानी भोपाल में 19 दिसंबर से शुरू हुए तीन दिवसीय आईएएस सर्विस मीट का रविवार को समापन हो गया। आखिरी दिन की शुरुआत 18 किलोमीटर लंबी साइक्लोथॉन साइकिलिंग रैली से हुईजिसमें प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उनके परिजनों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यह आयोजन न सिर्फ फिटनेस को बढ़ावा देने वाला रहाबल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली का भी सशक्त संदेश देता नजर आया।

    साइक्लोथॉन की शुरुआत अरेरा क्लब से हुई। इसके बाद रैली सीएम हाउसवन विहार नेशनल पार्क और सैर सपाटा होते हुए वापस अरेरा क्लब पहुंचकर संपन्न हुई। हरे-भरे रास्तों से गुजरती यह साइकिल रैली सुबह के समय शहरवासियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी रही। आयोजकों के अनुसारइस इवेंट में कुल 40 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।इस साइक्लोथॉन की खास बात यह रही कि सबसे कम उम्र की प्रतिभागी 11 वर्षीय अरण्य चौहान रहीं। इतनी कम उम्र में उनका आत्मविश्वास और जोश सभी के लिए प्रेरणादायक बना। अफसरों ने भी माना कि बच्चों की भागीदारी से ऐसे आयोजनों को नई ऊर्जा और सकारात्मक संदेश मिलता है।

    प्रतियोगिता में पारीकी पांडला अक्षर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मात्र 38 मिनट में 18 किलोमीटर की दूरी तय कर पहला स्थान हासिल किया। यह समय इस वर्ष के आईएएस सर्विस मीट साइकिलिंग इवेंट का सर्वश्रेष्ठ समय भी रहा। उनकी जीत का जश्न साथियों और अन्य अधिकारियों ने अनोखे अंदाज में मनाया। सम्मान स्वरूप कई अफसरों ने मौके पर ही पुश-अप्स लगाकर विजेता का हौसला बढ़ायाजिससे माहौल और भी उत्साहपूर्ण हो गया।दूसरे स्थान पर एडिशनल कमिश्नर भोपाल शिवराज सिंह वर्मा और अभय सिंह संयुक्त रूप से रहे। दोनों ने 45 मिनट में रेस पूरी की। वहींतीसरा स्थान ईशान सुमन सिंह को मिलाजिन्होंने 47 मिनट में रेस पूरी कर अपनी फिटनेस का परिचय दिया।

    आयोजकों ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार प्रतिभागियों की संख्या और उत्साह दोनों में बढ़ोतरी देखने को मिली। खासतौर पर अधिकारियों के साथ उनके परिवारों की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। साइक्लोथॉन के बाद अरेरा क्लब में दिनभर खेलकूद और मनोरंजक गतिविधियों का सिलसिला चलता रहा।इनमें क्विजडम्ब कराडेटग ऑफ वॉरबैडमिंटनटेबल टेनिसपूलबिलियर्ड्सब्रिजऔर रैपिड चेस जैसी प्रतियोगिताएं शामिल रहीं।अधिकारियों और उनके परिजनों ने इन खेलों मेंउत्साह के साथ भाग लेकर आपसी सौहार्द और टीम भावना का परिचय दिया।

    शाम को अरेरा क्लब में भव्य क्लोजिंग सेरेमनी और प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन कार्यक्रम आयोजित किया गयाजिसमें विभिन्न हाउस और प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि सर्विस मीट के पहले दिन गीत-संगीत और नृत्य के माध्यम से आईएएस अधिकारियों और उनके परिजनों ने अपनी सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन किया था। वहींबोट क्लब में आयोजित रोइंग इवेंट के दौरान अधिकारियों ने हाथों से चप्पू चलाकर बड़े तालाब में जमकर मस्ती की।मुख्य सचिव अनुराग जैन भी सर्विस मीट की गतिविधियों में शामिल हुए और क्रिकेट सहित अन्य खेलों का आनंद लिया। कुल मिलाकरआईएएस सर्विस मीट का यह आयोजन फिटनेसमनोरंजन और आपसी मेलजोल का बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आयाजिसने प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया।

  • मऊगंज में आदिवासी युवक की संदिग्ध मौत एएसआई सहित चार पुलिसकर्मी गिरफ्तारमामले की जांच जारी

    मऊगंज में आदिवासी युवक की संदिग्ध मौत एएसआई सहित चार पुलिसकर्मी गिरफ्तारमामले की जांच जारी


    मऊगंज । मध्य प्रदेश मऊगंज थाना में एक आदिवासी युवक की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया हैजिसे लेकर पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच की गई और चार पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया है। युवक की मौत 16 फरवरी 2023 को थाने में हुई थीजिसके बाद स्थानीय लोगों और परिजनों ने इसे हत्या का मामला बताया था। घटना को लेकर मजिस्ट्रेटियल जांच का आदेश दिया गयाऔर पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए।

    घटना 16 फरवरी 2023 की हैजब मऊगंज जिले के घुरेहटा वार्ड 12 के निवासी आदिवासी युवक कैलाश कोल उम्र 29 वर्ष को चोरी के संदेह में ग्रामीणों ने बंधक बना लिया था। ग्रामीणों का आरोप था कि कैलाश ने चोरी की थीजिसके बाद उन्होंने उसे पुलिस को सौंप दिया। सूचना मिलने पर डायल-100 पुलिस टीम मौके पर पहुंची और युवक को थाने लेकर आई। थाने में युवक को मुंशी कक्ष में बैठाया गयाजबकि उस समय एएसआइ सूर्यबली सिंह थाने में ड्यूटी पर तैनात थे। बताया गया है कि युवक के शरीर पर पहले से ही गंभीर चोटों के निशान थेऔर थाने में पूछताछ के दौरान उसकी हालत बिगड़ी।

    कुछ ही देर में युवक की मौत हो गईजिसके बाद परिवार और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए और थाने में हंगामा मच गया। इस घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया।मजिस्ट्रेट जांच के दौरान थाने के सीसीटीवी फुटेज जब्त किए गए। इन फुटेज की समीक्षा में यह स्पष्ट हुआ कि युवक के साथ पुलिसकर्मियों ने दुर्व्यवहार किया था। एएसआइ सूर्यबली सिंह की भूमिका संदिग्ध पाई गईजिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अलावाविवेक गिरीवीरेंद्र उर्फ वीरू रजक और गणेश गिरी को भी आरोपी बनाया गया।मजिस्ट्रेट जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने इन सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304 हत्या 330 यातना 342 गिरफ्तारी के बाद अवैध तरीके से रखने 34 सामान्य उद्देश्य और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।
    सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गयाजहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। यह घटना जिले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाती है और आदिवासी समुदाय के प्रति पुलिस के व्यवहार को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए न्याय की मांग कर रहे हैं। इस घटना के बाद प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की पूरी निष्पक्षता से जांच की जाएगी और दोषियों को कड़ी सजा दिलवाने की कोशिश की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम से यह भी स्पष्ट होता है कि पुलिस की जवाबदेही को लेकर अब और अधिक सख्त कदम उठाने की जरूरत हैताकि ऐसे मामले भविष्य में न हों।

  • भोपाल में इन स्टेशनों के बीच मेट्रो का संचालन शुरू…. आज से लोग कर सकेंगे सफर

    भोपाल में इन स्टेशनों के बीच मेट्रो का संचालन शुरू…. आज से लोग कर सकेंगे सफर


    भोपाल।
    भोपाल (Bhopal) के लिए शनिवार का दिन बेहद खास रहा क्योंकि शहर को अपनी पहली मेट्रो रेल सेवा (Metro Rail service) की सौगात मिली। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल (Union Minister Manohar Lal), मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भोपाल मेट्रो का श्रीगणेश किया। इन नेताओं ने सुभाष नगर स्टेशन पर मेट्रो ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इसके बाद यह आधुनिक ट्रेन पटरी पर दौड़ पड़ी। भोपाल अब देश का 26वां शहर बन गया है जहां लोग मेट्रो का सफर कर सकेंगे।


    शुरुआत में इन स्टेशनों पर सुविधा

    फिलहाल भोपाल मेट्रो परियोजना की ऑरेंज लाइन के 7 किलोमीटर लंबे हिस्से पर ही आज से परिचालन शुरू किया गया है। इसे प्रायोरिटी कॉरिडोर कहा जा रहा है। इस रूट पर कुल 8 स्टेशन बनाए गए हैं जिनमें एम्स, अलकापुरी, डीआरएम कार्यालय, रानी कमलापति स्टेशन, एमपी नगर, बोर्ड ऑफिस, केंद्रीय विद्यालय और सुभाष नगर शामिल हैं।


    सुबह से रात आठ बजे तक सेवा

    मेट्रो ट्रेन सेवा का संचालन सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक होगा। इस सुविधा का सबसे ज्यादा लाभ रानी कमलापति स्टेशन से एम्स तक जाने वालों को होगा। यह पूरी सेवा अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है जो न केवल यात्रियों का समय बचाएगी बल्कि पलूशन कम करने में भी मददगार साबित होगी।


    आगे क्या प्लान?

    पूरी परियोजना पर अभी काफी काम होना है। यह दो मुख्य लाइनों की मेट्रो परियोजना होगी। पहली ‘ऑरेंज लाइन’ जो करीब 17 किलोमीटर लंबी बनाई जानी है। दूसरी ‘ब्लू लाइन’ जो लगभग 14 किलोमीटर लंबी होगी। बताया जाता है कि जब दोनों लाइनें पूरी तरह तैयार हो जाएंगी तो शहर के प्रमुख व्यापारिक और रिहायशी इलाके आपस में जुड़ जाएंगे। इससे सड़कों पर ट्रैफिक लोड कम होगा।


    10,033 करोड़ होंगे खर्च

    अधिकारियों ने बताया कि 30.8 किलोमीटर लंबी भोपाल मेट्रो रेल परियोजना के निर्माण पर अनुमानित लागत 10,033 करोड़ रुपये आएगी। इसके शुरुआती हिस्से यानी ‘प्राथमिकता कॉरिडोर’ पर ही 2,225 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस कॉरिडोर से हर दिन लगभग 3,000 यात्रियों के सफर करने की उम्मीद है। इस शुरुआती रूट से हर दिन करीब 3,000 लोग सफर करेंगे।

    इस मौके पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि मेट्रो नेटवर्क के मामले में भारत अभी दुनिया में तीसरे नंबर पर है। पहले स्थान पर चीन और दूसरे पर अमेरिका है। भारत में अभी कुल 1,083 किलोमीटर लंबा मेट्रो नेटवर्क है और जिस रफ्तार से काम चल रहा है। भारत जल्द ही अमेरिका को पीछे छोड़कर दूसरे स्थान पर आ जाएगा। भोपाल देश का 26वां शहर बन गया है, जहां मेट्रो सेवा शुरू हुई है।

  • MP: ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला में 15 गायों की की मौत, सैकड़ों बीमार

    MP: ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला में 15 गायों की की मौत, सैकड़ों बीमार


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की आदर्श गौशाला (Model cow shelter) मानी जाने वाली ग्वालियर (Gwalior) की मशहूर लाल टिपारा गौशाला (Lal Tipara Gaushala) से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। गौशाला में अचानक 15 गायों की मौत हो गई और सबसे शर्मनाक बात यह रही कि गौशाला का स्टाफ इन मौतों को छिपाने की कोशिश करता रहा। मरी हुई गायों के शरीर एक-दूसरे के ऊपर ऐसे फेंके गए थे जैसे वे कोई बेजान कूड़ा हों।

    नगर निगम इस गौशाला पर हर साल 25 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा करता है। इस गौशाला में 10 हजार से ज्यादा गायें रखी गई हैं। दावे यह भी हैं कि यहां डॉक्टर भी तैनात हैं, लेकिन बीमार गायों की मौत सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब मेडिकल ऑफिसर आशुतोष आर्या एक घायल गाय को ठीक करने के बाद वहां छोड़ने पहुंचे।

    उन्होंने बताया कि जिस गाय का उन्होंने 15 दिन तक अपने खर्चे पर इलाज किया था, उसे वहां मरते देखा और साथ ही टिनशेड में 15 अन्य गायों की लाशें भी ढेर की तरह पड़ी मिलीं। जब उन्होंने स्टाफ से पूछा, तो कोई सही जवाब नहीं मिला। यह भी कहा गया कि शायद गायें आपस में टकराकर मर गई होंगी। इस मामले में कलेक्टर से भी शिकायत की गई है।

    वहीं नगर निगम कमिश्नर संघ प्रिय का कहना है कि गौशाला में गायों के मरने की जानकारी मिली है। मामले की जांच कराई जाएगी। फिलहाल गौशाला के बीमार सेक्शन में 400 से 500 के करीब गायें भर्ती हैं, जिनमें से 60 की हालत बेहद नाजुक है। इनका इलाज किया जा रहा है। मामला बढ़ने पर ग्वालियर की कलेक्टर रुचिका चौहान ने खुद गौशाला का दौरा किया।

    कलेक्टर रुचिका चौहान ने गौशाला के रजिस्टर चेक किए। उन्होंने बीमार और मृत गायों के रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की। कलेक्टर ने इलाज के बाद स्वस्थ होकर छोड़ी गई गायों का रिकॉर्ड भी तलब किया। साथ ही मृत गायों के निपटान की व्यवस्था से संबंधित दस्तावेज देखे और अधिकारियों से जानकारी ली। इतनी रकम खर्च होने के बावजूद गायों की ऐसी हालत से इंतजामों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।