Category: Madhya Pradesh

  • भिंड में चंबल नदी किनारे ऊंट सफारी की शुरुआत सस्ती कीमतों में ऐतिहासिक व प्राकृतिक स्थल होंगे दिखाए

    भिंड में चंबल नदी किनारे ऊंट सफारी की शुरुआत सस्ती कीमतों में ऐतिहासिक व प्राकृतिक स्थल होंगे दिखाए


    भिंड । भिंड जिले के अटेर में वन विभाग ने चंबल नदी के किनारे ऊंट सफारी की शुरुआत की है। इस सफारी के जरिए पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक स्थलों की सैर कर सकेंगे। सफारी का ट्रैक करीब 10 किमी लंबा है और इसमें अटेर किला चामुंडा देवी मंदिर और वन्य जीवों को दिखाया जा रहा है। इस सफारी के लिए पर्यटकों को 200 रुपये और 500 रुपये के टिकट मिल रहे हैं और यह सफारी सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगी।

    वन विभाग ने सफारी के संचालन के लिए एक विस्तृत योजना बनाई है। पर्यटक अटेर स्थित वन विभाग कार्यालय से आफलाइन टिकट प्राप्त कर सकते हैं। चंबल क्षेत्र प्राकृतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है और यह इको-टूरिज्म गतिविधियां क्षेत्र की जैव विविधता और पर्यावरणीय संरक्षण में योगदान करेंगी। इस पहल के तहत वन विभाग स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजन के अवसर भी पैदा कर रहा है जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

    वन विभाग की रेंजर कृतिका शुक्ला ने बताया कि सफारी में स्थानीय व्यंजन पेश करने की योजना भी बनाई जा रही है। इसके जरिए स्थानीय समुदाय को आर्थिक लाभ मिलेगा। वर्तमान में 11 ऊंटों का उपयोग सफारी में किया जा रहा है और जैसे-जैसे सफारी की लोकप्रियता बढ़ेगी इस में और भी ऊंटों को शामिल किया जाएगा।

    सुरक्षा और पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए वन विभाग ने सफारी के मार्ग को विशेष रूप से तैयार किया है। सफारी में आने वाले पर्यटकों को चंबल क्षेत्र के इतिहास और वन्य जीवन के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा विभाग उत्तराखंड के ऋषिकेश की तर्ज पर यहां कैंपिंग की सुविधा भी शुरू करने की योजना बना रहा है। इससे पर्यटकों को एक अलग अनुभव मिलेगा जो स्थानीय पर्यटन को और आकर्षक बना देगा।

    यह सफारी क्षेत्र में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और कारीगरी को भी प्रदर्शित करने का एक अवसर है। इसे वन्य जीवों की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है जो आने वाले समय में स्थानीय वन्य जीवन और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में मदद करेगा।

  • दतिया में खूनी 'इश्क' का अंत मंदिर से लौट रही युवती के सीने में मारी गोली फिर शादीशुदा प्रेमी ने खुद को उड़ाया

    दतिया में खूनी 'इश्क' का अंत मंदिर से लौट रही युवती के सीने में मारी गोली फिर शादीशुदा प्रेमी ने खुद को उड़ाया


    दतिया । दतिया मध्य प्रदेश के दतिया जिले में प्रेम प्रसंग के चलते एक सनसनीखेज वारदात ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। गोंदन थाना क्षेत्र के कमलापुरी गांव के पास एक सिरफिरे युवक ने बीए की छात्रा पर जानलेवा हमला करने के बाद अपनी जीवनलीला भी समाप्त कर ली। यह घटना उस वक्त हुई जब युवती मंदिर में पूजा-अर्चना कर अपने घर लौट रही थी।

    वारदात का क्रम पहले रास्ता रोका फिर दागी गोली

    प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़िता शाहपुर स्थित हनुमान मंदिर से दर्शन कर लौट रही थी। रास्ते में आरोपी मानवेंद्र यादव 25 वर्ष ने उसका रास्ता रोका। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक दोनों के बीच कुछ कहासुनी हुई और देखते ही देखते मानवेंद्र ने अवैध कट्टे से युवती के सीने पर गोली चला दी। युवती को लहूलुहान हालत में सड़क पर गिरता देख आरोपी ने जरा भी देरी नहीं की और उसी हथियार से खुद के सिर में गोली मारकर मौके पर ही दम तोड़ दिया।

    चमत्कार हार्ट के पास से गुजरी गोली बची जान

    गोली चलने की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तत्काल पुलिस को सूचना दी। युवती को पहले इंदरगढ़ अस्पताल ले जाया गया जहां से उसे गंभीर हालत में दतिया जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। मेडिकल जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया गोली युवती के दिल हार्ट के बिल्कुल पास से होकर शरीर के आर-पार निकल गई। इसी मामूली अंतर की वजह से युवती की जान बच गई हालांकि उसकी हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।

    3 साल का प्रेम प्रसंग और आरोपी का डबल लाइफ

    पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह मामला एक तरफा जुनून या उलझे हुए प्रेम प्रसंग का नजर आ रहा है। आरोपी मानवेंद्र पहले से शादीशुदा था और एक बच्चे का पिता भी था। बताया जा रहा है कि आरोपी और युवती के बीच पिछले 2-3 वर्षों से संबंध थे। दोनों के गांव की दूरी महज 3 किलोमीटर है। पुलिस अब इस बिंदु पर जांच कर रही है कि आखिर ऐसा क्या हुआ जिसने मानवेंद्र को इस खौफनाक कदम की ओर धकेल दिया।

    पुलिस की कार्रवाई

    गोंदन थाना प्रभारी प्रदीप शर्मा ने बताया कि पुलिस ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है। आरोपी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। अस्पताल में भर्ती युवती के बयान और मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स के आधार पर पुलिस आगे की कड़ियां जोड़ रही है। स्थान कमलापुरी गांव के पास दतिया म.प्र. मुख्य पात्र मानवेंद्र यादव मृत और 20 वर्षीय युवती घायल । हथियार अवैध कट्टा। वजह संदिग्ध प्रेम प्रसंग और आपसी विवाद।

  • महाकाल मंदिर उज्जैन अब भक्तों को नहीं होगी नकद की चिंतादान से लेकर प्रसाद तक सब कुछ हुआ कैशलेस

    महाकाल मंदिर उज्जैन अब भक्तों को नहीं होगी नकद की चिंतादान से लेकर प्रसाद तक सब कुछ हुआ कैशलेस


    उज्जैन । उज्जैन विश्व के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में शुमार भगवान महाकालेश्वर के मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रबंध समिति ने एक बड़ी सुविधा शुरू की है। अब देश-विदेश से आने वाले भक्तों को मंदिर में दान देने या अन्य सेवाओं के लिए नकद रखने की अनिवार्यता नहीं होगी। मंदिर समिति ने पूरे परिसर को कैशलेस ट्रांजेक्शन से जोड़ते हुए जगह-जगह क्यूआर कोड और बारकोड लगा दिए हैं।

    इन सेवाओं में मिलेगी कैशलेस सुविधा

    मंदिर प्रशासन का लक्ष्य है कि श्रद्धालु बिना किसी आर्थिक उलझन के बाबा के दर्शन कर सकें। वर्तमान में निम्नलिखित सेवाओं में ई-वॉलेट और डिजिटल भुगतान का लाभ मिल रहा है भस्म आरती बुकिंग ऑनलाइन पोर्टल पर ई-वॉलेट के जरिए बुकिंग पहले से जारी है। शीघ्र दर्शन टिकट सशुल्क दर्शन के लिए काउंटर पर डिजिटल पेमेंट की सुविधा। दान काउंटर मंदिर के विभिन्न दान काउंटरों पर बारकोड के माध्यम से सीधा भुगतान। लड्डू प्रसाद अब महाकाल का सुप्रसिद्ध लड्डू प्रसाद भी ऑनलाइन पेमेंट के जरिए लिया जा सकेगा। धर्मशाला एवं अन्न क्षेत्र महाकालेश्वर और हरसिद्धि धर्मशाला में रुकने का शुल्क और अन्न क्षेत्र का सहयोग भी कैशलेस किया गया है।

    नेटवर्क की चिंता नहीं नकद भुगतान भी रहेगा जारी

    डिजिटल सुविधाओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ मंदिर समिति ने व्यवहारिकता का भी ध्यान रखा है। अक्सर मंदिर परिसर में भीड़ और तकनीकी कारणों से नेटवर्क की समस्या आ जाती है। इसे देखते हुए समिति ने स्पष्ट किया है कि नकद भुगतान की सुविधा भी अनिवार्य रूप से बनी रहेगी। यदि ई-पेमेंट में कोई तकनीकी खामी आती हैतो दर्शनार्थी पुराने तरीके से भी भुगतान कर सकेंगे ताकि उनकी व्यवस्था प्रभावित न हो।

    मंदिर परिसर में हर जगह उपलब्ध हैं बारकोड

    भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर के प्रमुख स्थानोंविश्राम धाम और कार्यालयों के बाहर बारकोड लगाए गए हैं। श्रद्धालु अपने मोबाइल से किसी भी यूपीआई ऐप जैसे PhonePeGoogle PayPaytm के माध्यम से सुरक्षित रूप से दान राशि जमा कर सकते हैं। इसकी रसीद भी डिजिटल या भौतिक रूप से प्राप्त करने की व्यवस्था की जा रही है।

    प्रशासक का विजन सुलभ और पारदर्शी व्यवस्था

    मंदिर समिति के अनुसारइस कदम से न केवल भक्तों को सुविधा होगीबल्कि मंदिर के कोष और लेखा-जोखा में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। डिजिटल लेन-देन से रिकॉर्ड रखने में आसानी होती है और सुरक्षा की दृष्टि से भी यह बेहतर है। सुविधा दानप्रसादऔर बुकिंग के लिए कैशलेस व्यवस्था। माध्यम बारकोडक्यूआर कोड और ई-वॉलेट। विकल्प डिजिटल के साथ नकद भुगतान की सुविधा भी बरकरार। स्थान महाकालेश्वर मंदिरउज्जैन।

  • जबलपुर के डॉक्टरों का चमत्कार 22 साल की महिला के पेट से निकाला 22 किलो का ट्यूमरनया जीवन दान

    जबलपुर के डॉक्टरों का चमत्कार 22 साल की महिला के पेट से निकाला 22 किलो का ट्यूमरनया जीवन दान



    जबलपुर । जबलपुर संस्कारधानी के चिकित्सा इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। यहाँ के सुखसागर मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने अपनी निपुणता का परिचय देते हुए एक 22 वर्षीय युवती को नया जीवन प्रदान किया है। युवती के पेट में पिछले काफी समय से एक विशालकाय गांठ पल रही थीजिसे एक बेहद चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन के बाद सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया गया।

    22 किलो का विशालकाय ट्यूमर देख कर डॉक्टर भी रह गए हैरान
    मरीज जब अस्पताल पहुँचीतो उसका पेट काफी फूल चुका था और उसे सांस लेने व चलने-फिरने में गंभीर समस्या हो रही थी। जांच के बाद पता चला कि उसके पेट में इंट्रा-एब्डॉमिनल पेल्विक ट्यूमर है। इस ट्यूमर का आकार और वजन इतना अधिक था कि इसने शरीर के अन्य अंगों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था। ऑपरेशन के बाद जब ट्यूमर का वजन किया गयातो वह लगभग 22 किलो निकला। युवती की उम्र और ट्यूमर के वजन का यह दुर्लभ संयोग चिकित्सा क्षेत्र में एक रिकॉर्ड माना जा रहा है।

    आयुष्मान भारत योजना बनी मददगार

    इस मामले की सबसे सुखद बात यह रही कि गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली इस युवती को इलाज के लिए एक रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ा। आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना AB-PMJAY के तहत यह पूरी सर्जरीदवाइयाँ और अस्पताल का खर्च पूरी तरह निःशुल्क रहा। इस योजना ने एक बार फिर साबित किया कि यह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

    अनुभवी टीम का समन्वय और सफलता

    यह सर्जरी बेहद जोखिम भरी थीक्योंकि इतने बड़े ट्यूमर को निकालते समय रक्तस्राव और अंगों की क्षति का खतरा बना रहता है। अस्पताल की अनुभवी सर्जिकल टीमएनेस्थीसिया विशेषज्ञों और ओटी स्टाफ के बेहतर तालमेल और तकनीकी दक्षता के कारण यह ऑपरेशन सफल रहा। सर्जरी के बाद मरीज को आईसीयू में विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया हैजहाँ उसकी स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है।

    संस्थान का संकल्प सुलभ और गुणवत्तापूर्ण इलाज

    सुखसागर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने इस सफलता पर डॉक्टरों की टीम को बधाई दी है। संस्थान ने दोहराया कि उनका मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग को आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों के माध्यम से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। इस सफल ऑपरेशन ने न केवल अस्पताल का मान बढ़ाया हैबल्कि जबलपुर को चिकित्सा हब के रूप में भी मजबूती दी है मरीज 22 वर्षीय युवती। ट्यूमर का वजन लगभग 22 किलोग्राम। अस्पताल सुखसागर मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटलजबलपुर। योजना आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज। र्जरी का प्रकार दुर्लभ इंट्रा-एब्डॉमिनल पेल्विक ट्यूमर।

  • MP में आयकर विभाग का बड़ा धमाका जबलपुर और कटनी में माइनिंग कारोबारियों और BJP नेता के ठिकानों पर रेड

    MP में आयकर विभाग का बड़ा धमाका जबलपुर और कटनी में माइनिंग कारोबारियों और BJP नेता के ठिकानों पर रेड


    जबलपुर ।  मध्य प्रदेश के जबलपुर/कटनी में भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति के खिलाफ जांच एजेंसियों ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार तड़के आयकर विभाग की टीमों ने जबलपुर और कटनी में एक साथ दबिश देकर खनन कारोबारियों और रसूखदार नेताओं के होश उड़ा दिए। यह पूरी कार्रवाई आय से अधिक संपत्तिटैक्स चोरी और संदिग्ध लेन-देन की शिकायतों के आधार पर की गई है।

    स्वच्छता अभियान का स्टिकर लगा कर पहुँची टीम
    इस छापेमारी में सबसे चौंकाने वाली बात आयकर विभाग की रणनीति रही। विभाग के अधिकारी किसी सरकारी गाड़ी के बजाय ऐसी कारों में पहुँचे जिन पर स्वच्छता जागरूकता अभियान 2025 के पोस्टर लगे थे। जबलपुर के सिविल लाइन स्थित खनन कारोबारी राजीव चड्ढा के घर जब ये गाड़ियां रुकींतो सुरक्षाकर्मियों को लगा कि नगर निगम की टीम किसी सर्वे के लिए आई है। लेकिन जैसे ही अधिकारियों ने अपना परिचय दियाहड़कंप मच गया।

    BJP नेता और माइनिंग किंग रडार पर

    छापेमारी का मुख्य केंद्र कटनी और जबलपुर रहे। कटनी में जिला पंचायत उपाध्यक्ष और भाजपा के कद्दावर नेता अशोक विश्वकर्मा के ठिकानों पर आयकर विभाग ने घेराबंदी की है। अशोक विश्वकर्मा की फर्म वीएमसी विश्वकर्मा माइंस  के नाम से संचालित होती है। अधिकारियों ने अशोक विश्वकर्मा के निवास के साथ-साथ उनके तीन भाइयों शंकर लाल विश्वकर्मा व अन्य के ठिकानों पर भी एक साथ छापा मारा। ग्राम टिकरिया और सिघनपुरी स्थित खदानों पर भी टीम की मौजूदगी रही। वहींजबलपुर के रसल चौक और सिविल लाइन इलाके में बड़े खनन कारोबारी राजीव चड्ढा और नितिन शर्मा के घर और दफ्तरों को खंगाला जा रहा है। चड्ढा माइन्स के ऑफिस से भारी मात्रा में दस्तावेज जब्त किए गए हैं।

    25 सदस्यों की टीम और भारी पुलिस बल

    सूत्रों के अनुसारइस पूरी कार्रवाई में भोपालइंदौर और जबलपुर के लगभग 25 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। टीम में महिला अधिकारियों को भी शामिल किया गया है ताकि घरों की सघन तलाशी ली जा सके। खबर लिखे जाने तकअधिकारियों ने डिजिटल सबूतबैंक लॉकर के कागजात और संदिग्ध निवेश से जुड़े दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया है।

    करोड़ों की टैक्स चोरी का अनुमान

    आयकर विभाग को लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि खनन के कारोबार में बड़े पैमाने पर कैश का लेन-देन हो रहा है और वास्तविक आय को छुपाया जा रहा है। जांच टीम का मानना है कि इस छापेमारी के अंत तक करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी और बेनामी संपत्तियों का खुलासा हो सकता है। फिलहालकिसी भी अधिकारी ने आधिकारिक बयान जारी नहीं किया हैक्योंकि सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है। मध्य प्रदेश में चुनाव के बाद आर्थिक अनियमितताओं पर यह अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाहियों में से एक मानी जा रही है।
    भाजपा नेता के घर हुई इस रेड ने सियासी गलियारों में भी चर्चा तेज कर दी है। अब देखना यह है कि जांच के बाद क्या बड़े खुलासे होते हैं। लोकेशन जबलपुर सिविल लाइनरसल चौक और कटनी जलपा वार्डटिकरिया। निशाने पर राजीव चड्ढानितिन शर्मा और भाजपा नेता अशोक विश्वकर्मा। वजह आय से अधिक संपत्तिटैक्स चोरी और अवैध माइनिंग लेन-देन। विभाग आयकर विभाग भोपाल और इंदौर की संयुक्त टीम।

  • ग्वालियर में अपात्र लोगों को पुलिस सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब..

    ग्वालियर में अपात्र लोगों को पुलिस सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब..


    ग्वालियर/मध्यप्रदेश के ग्वालियर में अपात्र और निजी व्यक्तियों को दी जा रही पुलिस सुरक्षा का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट के संज्ञान में आया है। इस मुद्दे को गंभीर जनहित से जुड़ा मानते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है और चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि पुलिस बल का इस तरह दुरुपयोग स्वीकार्य नहीं है।यह मामला याचिकाकर्ता नवल किशोर शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका के माध्यम से उठाया गया है। याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के बावजूद निजी व्यक्तियों को दी जा रही पुलिस सुरक्षा की कोई प्रभावी समीक्षा नहीं की गई। इसके कारण आज भी कई ऐसे लोग पुलिस सुरक्षा का लाभ उठा रहे हैं, जो इसके पात्र नहीं हैं।

    याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता डीपी सिंह ने अदालत को बताया कि ग्वालियर में पुलिस बल की पहले से ही भारी कमी है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी निजी व्यक्तियों की सुरक्षा में तैनात किए गए हैं। इससे न केवल आम जनता की सुरक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि सरकारी खजाने पर भी लाखों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।वकील ने अदालत के सामने उदाहरण पेश करते हुए बताया कि विनय सिंह नामक व्यक्ति को दी गई पुलिस सुरक्षा के दौरान ही उनके खिलाफ वसूली सहित पांच आपराधिक मामले दर्ज हुए। यह साफ तौर पर पुलिस सुरक्षा के दुरुपयोग और सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब सुरक्षा पाने वाले ही अपराधों में लिप्त हों, तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है।

    हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि पूर्व आदेश के बाद सूचना के अधिकार RTI के तहत जो जानकारी सामने आई, वह और भी चिंताजनक है। RTI से खुलासा हुआ कि 19 व्यक्तियों की सुरक्षा में 33 पुलिसकर्मी तैनात थे, जबकि इनमें से अधिकांश व्यक्ति सुरक्षा के पात्र ही नहीं थे। यह स्थिति तब है जब शहर में आम नागरिकों को पर्याप्त पुलिस सहायता नहीं मिल पा रही है।इससे पहले भी हाईकोर्ट इस तरह के मामलों में सख्त रुख अपना चुका है। दिलीप शर्मा और संजय शर्मा को दी गई पुलिस सुरक्षा के मामले में कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए दोनों भाइयों से सुरक्षा पर हुए खर्च की वसूली के आदेश दिए थे। उस समय कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि किसी भी तुच्छ या अपात्र व्यक्ति को सरकारी खर्च पर पुलिस सुरक्षा नहीं दी जा सकती।

    न्यायालय ने अपने पुराने आदेशों में यह भी कहा था कि पुलिस सुरक्षा देने के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और ठोस नियम बनाए जाने चाहिए। कोर्ट का मानना है कि सुरक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था का इस्तेमाल केवल वास्तविक और प्रमाणित खतरे वाले मामलों में ही होना चाहिए, न कि प्रभाव या रसूख के आधार पर।हाईकोर्ट ने यह सुझाव भी दिया था कि जिन मामलों में व्यापारिक प्रतिस्पर्धा या निजी कारणों से खतरे की आशंका हो, और संबंधित परिवार के पास लाइसेंसी हथियार उपलब्ध हों, वहां निजी सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था एक बेहतर विकल्प हो सकती है। कोर्ट के अनुसार, निजी सुरक्षा गार्ड कई बार पुलिसकर्मियों की तुलना में ज्यादा सजग और प्रभावी साबित हो सकते हैं, जबकि पुलिस बल को कानून-व्यवस्था के मूल कामों में लगाया जाना चाहिए।

    ताजा सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि अब तक पूर्व आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया और अपात्र लोगों को दी जा रही सुरक्षा पर क्या कार्रवाई की गई है। नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है।यह मामला न केवल ग्वालियर बल्कि पूरे प्रदेश में पुलिस सुरक्षा के दुरुपयोग और जवाबदेही से जुड़ा एक अहम उदाहरण बनता जा रहा है। आने वाले समय में राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और कोर्ट का अगला रुख इस व्यवस्था की दिशा तय करेगा।

  • MP: जबलपुर और कटनी में कई ठिकानों पर आयकर विभाग की रेड…

    MP: जबलपुर और कटनी में कई ठिकानों पर आयकर विभाग की रेड…


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश ( Madhya Pradesh) के कटनी (Katni) में आय से अधिक संपत्ति के मामले में आयकर विभाग (Income Tax Department) की टीम ने बुधवार सुबह बड़ी छापामार कार्रवाई (Guerrilla Action) की। भोपाल,जबलपुर,कटनी के आयकर विभाग के अधिकारियों ने मारा छापा मारा है। लगभग 25 सदस्यों ने छापामार कार्रवाई की। इस कार्रवाई में महिलाएं भी शामिल थीं। जबलपुर में सिविल लाइन स्थित खनन कारोबारी राजीव चड्ढा (Mining businessman Rajiv Chadha) और नितिन शर्मा के घर आयकर विभाग की टीम अचानक से पहुंची और सर्चिग शुरू कर दी।

    इसके साथ ही कटनी में जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं भाजपा नेता अशोक विश्वकर्मा (BJP leader Ashok Vishwakarma) तथा उनके तीन भाईयों के ठिकानों पर भी एक साथ छापे मारे गए। तीनों ही स्थानों पर इंदौर और भोपाल से आई आयकर विभाग की टीमें कार्रवाई कर रही हैं। जानकारी के अनुसार आय से अधिक संपत्ति टैक्स चोरी और अवैध लेनदेन की शिकायतें मिलने के बाद यह कार्यवाही हुई है। फिलहाल अभी टीम को क्या मिला है इसकी जानकारी सामने नही आई है,कार्रवाई पूरी होते ही आयकर टीम बताएगी।

    जबलपुर जिले में सिविल लाइन रसल चौक स्थित खनन कारोबारियों पर राजीव चड्ढा ओर नितिन शर्मा के घर आयकर की टीम ने छापा मारा है। चड्डा माइन्स के ऑफिस राजीव चड्ढा के बाद नितिन शर्मा के घर से भी टीम को कई दस्तावेज मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि इस जांच में बड़ी टैक्स चोरी का खुलासा हो सकता है।

    आयकर विभाग की टीम ‘स्वच्छता जागरूकता अभियान 2025’ का पोस्टर लगी हुई कार से सिविल लाइन स्थित कारोबारी के घर पहुंची थी, कारोबारी के चौकीदार को पहले लगा कि नगर निगम की टीम किसी सर्वे के लिए आई है, लेकिन कुछ ही देर में स्पष्ट हो गया कि यह आयकर विभाग की छापामार कार्रवाई के लिए आई है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति, टैक्स चोरी और अवैध लेन-देन से जुड़े मामलों को लेकर की जा रही है। सर्चिग के दौरान क्या-क्या सामने आता है, इसको लेकर फिलहाल आयकर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

    मिली जानकारी के अनुसार खनन कारोबारी राजीव चड्डा और उनके कुछ साथियों के खिलाफ आयकर विभाग को शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर जबलपुर, कटनी में एक साथ कार्रवाई की गई है। आयकर विभाग की टीमें फिलहाल कारोबारियों के घर और कार्यालयों में दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।

    कटनी जिले के जिला पंचायत उपाध्यक्ष और भाजपा के कद्दावर नेता अशोक विश्वकर्मा के भाई शंकर लाल विश्वकर्मा के यहां तड़के 4 बजे से आयकर विभाग की टीम ने अशोक विश्वकर्मा के निवास, फर्म और बॉक्साइट माइनिंग से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर एक साथ छापा मारा है। विश्वकर्मा माइनिंग कारोबारी हैं और उनकी फर्म वीएमसी विश्वकर्मा माइंस के नाम से संचालित है। विश्वकर्मा और उनके अन्य तीन भाइयों के जलपा वार्ड स्थित घर फर्म ग्राम टिकरिया और सिघनपुरी में खदान है। यह कार्यवाही भी आय से अधिक संपत्ति के मामले में आयकर विभाग की ओर घर और ऑफिस में दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

  • MP: ग्वालियर में अपात्र लोगों को मिल रही पुलिस सुरक्षा… HC ने शासन को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

    MP: ग्वालियर में अपात्र लोगों को मिल रही पुलिस सुरक्षा… HC ने शासन को नोटिस जारी कर मांगा जवाब


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) में अपात्र लोगों (Ineligible People) को दी जा रही पुलिस सुरक्षा (Police Protection) का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट (High Court) के संज्ञान में आया है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि निजी व्यक्तियों को दी जाने वाली पुलिस सुरक्षा की समीक्षा के लिए पूर्व में कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश का पालन नहीं किया गया। इसके चलते कई अपात्र लोग आज भी पुलिस सुरक्षा में घूम रहे हैं, जबकि उनके साथ तैनात पुलिसकर्मियों के अनैतिक गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप भी सामने आए हैं।

    मामले को जनहित से जुड़ा मानते हुए हाईकोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी किया है और चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता नवल किशोर शर्मा की ओर से पैरवी कर रहे वकील डीपी सिंह ने बताया कि पुलिस बल की कमी के बावजूद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी निजी व्यक्तियों की सुरक्षा में लगाए गए हैं। इन पर लाखों रुपए का सरकारी खर्च हो रहा है, जबकि संबंधित व्यक्ति सुरक्षा के पात्र नहीं हैं।

    उन्होंने विनय सिंह को दी गई पुलिस सुरक्षा का उदाहरण देते हुए बताया कि सुरक्षा के दौरान ही उनके खिलाफ वसूली सहित पांच आपराधिक प्रकरण दर्ज हुए, जो सुरक्षा के दुरुपयोग को दर्शाता है।

    हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के बाद सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी में सामने आया कि 19 व्यक्तियों की सुरक्षा में 33 पुलिसकर्मी तैनात थे, जिनमें से अधिकांश अपात्र पाए गए। इससे पहले भी हाईकोर्ट दिलीप शर्मा और संजय शर्मा को दी गई सुरक्षा के मामले में कड़ी टिप्पणी कर चुका है। कोर्ट ने दोनों भाइयों से सुरक्षा पर हुए खर्च की वसूली के आदेश दिए थे और स्पष्ट कहा था कि किसी तुच्छ या अपात्र व्यक्ति को पुलिस सुरक्षा नहीं दी जानी चाहिए।

    न्यायालय ने यह भी कहा था कि पुलिस सुरक्षा देने के लिए स्पष्ट और ठोस नियम बनाए जाने चाहिए। कोर्ट ने सुझाव दिया था कि यदि किसी परिवार के पास लाइसेंसी हथियार हैं और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा के कारण जान का खतरा है, तो ऐसे मामलों में निजी सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था की जा सकती है, जो पुलिसकर्मियों की तुलना में अधिक सजग और प्रभावी हो सकते हैं।

  • मेसी इवेंट विवाद में नया मोड़; पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास का इस्तीफा मुख्यमंत्री को भेजा पत्र

    मेसी इवेंट विवाद में नया मोड़; पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास का इस्तीफा मुख्यमंत्री को भेजा पत्र


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल सरकार में खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने हाल ही में कोलकाता में हुए लियोनेल मेसी के GOAT टूर कार्यक्रम से जुड़ी घटनाओं को लेकर इस्तीफा दे दिया। मेसी के कार्यक्रम में कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में हुई अराजकता और तोड़फोड़ के बाद बिस्वास पर भारी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इस मुद्दे पर तनाव बढ़ने के बाद बिस्वास ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने खुद को खेल मंत्रालय की जिम्मेदारियों से मुक्त करने का अनुरोध किया।

    बिस्वास ने पत्र में कहा कि वे मेसी इवेंट की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इस्तीफा दे रहे हैं। उनका यह कदम इस विवाद की गंभीरता को दर्शाता है और टीएमसी तृणमूल कांग्रेस पार्टी के लिए महत्वपूर्ण संदेश भेजता है खासकर आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिस्वास के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है और अब खुद इस मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने का निर्णय लिया है।

    इस विवाद के बाद राज्य सरकार ने इस घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच दल SIT का गठन किया है। SIT में चार वरिष्ठ आईपीएस अफसरों को शामिल किया गया है। मुख्य सचिव मनोज पंत ने बताया कि एसआईटी की जांच में कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में बिधाननगर के पुलिस उपायुक्त अनीश सरकार को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही बंगाल के खेल सचिव राजेश कुमार सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और सॉल्ट लेक स्टेडियम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डी के नंदन की सेवाएं वापस ले ली गई हैं।

    इस घटना के बाद टीएमसी सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार के विवाद या आलोचना से बचने के लिए पूरी तरह से पारदर्शी जांच करेगी। इस मामले में बिस्वास का इस्तीफा और जांच के आदेश इस बात का संकेत हैं कि ममता बनर्जी की सरकार आगामी चुनावों से पहले किसी भी तरह की अनावश्यक नकारात्मकता से बचना चाहती है। यह पूरा विवाद राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला सकता है जो आने वाले समय में चुनावी रणनीतियों पर भी असर डाल सकता है।

  • मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा कदम अस्थाई पदों को स्थाई में बदलने डूब प्रभावितों के लिए विशेष पैकेज की मंजूरी

    मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा कदम अस्थाई पदों को स्थाई में बदलने डूब प्रभावितों के लिए विशेष पैकेज की मंजूरी


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार की घोषणा की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में अस्थाई पदों को स्थाई में बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस कदम से राज्य के कर्मचारियों को स्थिर रोजगार मिलने की संभावना है जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।
    कैबिनेट ने अस्थाई पदों को स्थाई में बदलने के लिए सेवा भर्ती नियम में आवश्यक संशोधन करने को मंजूरी दी है। इस फैसले से न केवल कर्मचारियों की स्थिरता बढ़ेगी बल्कि विभागों में कामकाजी वातावरण भी सुधरेगा। यह निर्णय उन अस्थाई कर्मचारियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो वर्षों से अस्थायी पदों पर कार्यरत थे और स्थायिता का इंतजार कर रहे थे।
    इसके अलावा मध्य प्रदेश सरकार ने डूब प्रभावितों के लिए एक बड़ा राहत पैकेज भी मंजूर किया है। अपर नर्मदा परियोजना राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजना के तहत प्रभावित 13 873 परिवारों को 1 782 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज मिलेगा। इसके अलावा एससी और एसटी समुदाय के 50 000 परिवारों को अतिरिक्त राशि दी जाएगी। प्रत्येक प्रभावित परिवार को 12.50 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। इन परियोजनाओं से 71 000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी और 125 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा।
    कैबिनेट ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2025-26 के लिए 693 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत 3810 कार्यों को पूरा किया जाएगा। इसके अलावा भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के मेंटिनेंस के लिए 90 करोड़ 67 लाख रुपये के बजट को भी स्वीकृति दी गई है। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत राज्य सरकार ने 2026-27 से 2030-31 तक के लिए 905 करोड़ 25 लाख रुपये को मंजूरी दी है। यह योजना राज्य में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने में मदद करेगी।
    आखिरकार वन विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए 48 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत किया गया है जो पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की देखभाल के लिए महत्वपूर्ण कदम होगा। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए इन फैसलों से राज्य के विकास को नया मोड़ मिलेगा और साथ ही सामाजिक और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। यह कदम राज्य के नागरिकों की भलाई के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।