Category: Madhya Pradesh

  • एमपी में ब्यारमा नदी से 33 गांवों तक पानी पहुंचेगा, मुख्यमंत्री ने 600 करोड़ की धुनय धाम परियोजना की दी मंजूरी

    एमपी में ब्यारमा नदी से 33 गांवों तक पानी पहुंचेगा, मुख्यमंत्री ने 600 करोड़ की धुनय धाम परियोजना की दी मंजूरी


    दमोह । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को दमोह जिले के नोहटा में ‘नोहलेश्वर महोत्सव 2026’ और किसान सम्मेलन में पहुंचे। उन्होंने जिले के विकास के लिए कई बड़े ऐलान किए और करोड़ों रुपए की परियोजनाओं की आधारशिला रखी।

    ब्यारमा नदी से 33 गांवों तक पहुंचेगा पानी

    सीएम ने घोषणा की कि दमोह के 33 गांवों के किसानों के लिए ब्यारमा नदी से पानी पहुंचाने हेतु 600 करोड़ रुपए की धुनय धाम सिंचाई परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना से हजारों किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा और क्षेत्र में कृषि गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।

    मानस भवन अब ‘गीता भवन’ बनेगा


    मुख्यमंत्री ने दमोह के मानस भवन को गीता भवन के रूप में विकसित करने की भी घोषणा की। इसके कायाकल्प और निर्माण कार्यों के लिए 2 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई है। सरकार की योजना है कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में ऐसे गीता भवन बनाए जाएं, जो सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र होंगे।
    नोहलेश्वर महोत्सव में सांस्कृतिक रंग
    नोहटा में मुख्यमंत्री का स्वागत जल संसाधन मंत्री धर्मेंद्र सिंह और पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने किया। सम्मेलन में हजारों किसान और ग्रामीण मौजूद थे। मुख्यमंत्री के संबोधन से पहले मशहूर गायिका शहनाज अख्तर ने भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया।

    पर्यटन और अन्य घोषणाएं

    मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने दमोह के राजनगर, सीतानगर और सत्धरू डैम में पर्यटन विकास के लिए भी मंजूरी दी। उन्होंने लाडली बहनों को 1500 रुपए देने की योजना का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर तीखे आरोप लगाए। सीएम ने कहा कि कांग्रेस सरकार के पास पैसे नहीं होने का बहाना बनाती है और साधु-संतों पर गोलियां चलाने जैसे आरोपों को भी उन्होंने विपक्ष पर लगाए।

    बता दें कि‍ नोहटा से मुख्यमंत्री छतरपुर के लिए रवाना होंगे, जहां वे बागेश्वर धाम में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम और कन्या विवाह महोत्सव में भाग लेंगे। यह दौरा दमोह और आसपास के ग्रामीण इलाकों में विकास और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है।

  • जनगणना 2027 से तय होगी विकास की नई दिशा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    जनगणना 2027 से तय होगी विकास की नई दिशा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव


    भोपाल । भोपाल में आयोजित जनगणना 2027 के प्रथम चरण के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति तय करने का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं, संसाधनों का वितरण और नीतिगत निर्णय जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होते हैं, इसलिए यह अभियान प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर राष्ट्र के भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाला कार्य है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला देश है और ऐसे में जनगणना का महत्व राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा डिजिटल जनगणना कराने के ऐतिहासिक निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक के उपयोग से आंकड़ों की सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। सम्मेलन में मुख्य सचिव अनुराग जैन, रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि जनगणना के दौरान गांवों, मजरों टोलों और यहां तक कि बेचिराग गांवों का भी समुचित आंकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल जैसी आधारभूत संरचनाओं की योजना जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही बनती है। इसलिए कलेक्टर और कमिश्नर समय सीमा में इस कार्य को पूर्ण करें और इसे उच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाने पर भी जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि जनगणना प्रशासन की दक्षता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता की परीक्षा है। मैदानी अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की सफलता के केंद्र में हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, दलहन तिलहन उत्पादन वृद्धि और नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य करने के प्रयासों पर बल दिया। साथ ही खनिज, पंजीयन और आबकारी से जुड़े राजस्व लक्ष्यों को समय पर प्राप्त करने के निर्देश भी दिए।

    मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि चुनाव और जनगणना प्रशासनिक दृष्टि से सबसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में हैं। इस बार तकनीक और जीआईएस प्रणाली के उपयोग से आंकड़े शीघ्र उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में लगभग 1 लाख 27 हजार मजरे टोले हैं, जिनका सटीक विवरण भविष्य की योजना निर्माण में सहायक होगा। उन्होंने प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत रखने और आमजन में जनगणना के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

    जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना संवैधानिक दायित्व होने के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार स्तंभ है। विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर होता है। इस बार पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना होगी और नागरिकों को स्व गणना का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा, जिससे वे मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा जनगणना कार्य को उच्च प्राथमिकता देने की सराहना की।

    जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित होगी। प्रथम चरण में 1 मई से 30 मई 2027 तक मकान सूचीकरण किया जाएगा, जिसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएं और परिसंपत्तियों का विवरण एकत्रित होगा। द्वितीय चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना होगी, जिसमें आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, दिव्यांगता, मातृभाषा, साक्षरता, शैक्षणिक योग्यता, आर्थिक गतिविधि, प्रवास और प्रजननता से संबंधित जानकारी संकलित की जाएगी।

     भोपाल में आयोजित जनगणना 2027 के प्रथम चरण के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति तय करने का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं, संसाधनों का वितरण और नीतिगत निर्णय जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होते हैं, इसलिए यह अभियान प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर राष्ट्र के भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाला कार्य है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला देश है और ऐसे में जनगणना का महत्व राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा डिजिटल जनगणना कराने के ऐतिहासिक निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक के उपयोग से आंकड़ों की सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। सम्मेलन में मुख्य सचिव अनुराग जैन, रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि जनगणना के दौरान गांवों, मजरों टोलों और यहां तक कि बेचिराग गांवों का भी समुचित आंकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल जैसी आधारभूत संरचनाओं की योजना जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही बनती है। इसलिए कलेक्टर और कमिश्नर समय सीमा में इस कार्य को पूर्ण करें और इसे उच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाने पर भी जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि जनगणना प्रशासन की दक्षता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता की परीक्षा है। मैदानी अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की सफलता के केंद्र में हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, दलहन तिलहन उत्पादन वृद्धि और नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य करने के प्रयासों पर बल दिया। साथ ही खनिज, पंजीयन और आबकारी से जुड़े राजस्व लक्ष्यों को समय पर प्राप्त करने के निर्देश भी दिए।

    मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि चुनाव और जनगणना प्रशासनिक दृष्टि से सबसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में हैं। इस बार तकनीक और जीआईएस प्रणाली के उपयोग से आंकड़े शीघ्र उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में लगभग 1 लाख 27 हजार मजरे टोले हैं, जिनका सटीक विवरण भविष्य की योजना निर्माण में सहायक होगा। उन्होंने प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत रखने और आमजन में जनगणना के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

    जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना संवैधानिक दायित्व होने के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार स्तंभ है। विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर होता है। इस बार पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना होगी और नागरिकों को स्व गणना का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा, जिससे वे मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा जनगणना कार्य को उच्च प्राथमिकता देने की सराहना की।

    जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित होगी। प्रथम चरण में 1 मई से 30 मई 2027 तक मकान सूचीकरण किया जाएगा, जिसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएं और परिसंपत्तियों का विवरण एकत्रित होगा। द्वितीय चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना होगी, जिसमें आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, दिव्यांगता, मातृभाषा, साक्षरता, शैक्षणिक योग्यता, आर्थिक गतिविधि, प्रवास और प्रजननता से संबंधित जानकारी संकलित की जाएगी।

  • मुरैना में 12 राउंड फायरिंग से दहला केन्थरी, पुलिस की सुस्ती पर उठे सवाल

    मुरैना में 12 राउंड फायरिंग से दहला केन्थरी, पुलिस की सुस्ती पर उठे सवाल


    मुरैना । मुरैना जिले के चंबल अंचल में कानून व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सराय छोला थाना क्षेत्र के केन्थरी गांव में गुरुवार शाम बदमाशों ने ससुर और दामाद को घेरकर उन पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। हैरानी की बात यह है कि पीड़ित पक्ष ने वारदात से एक दिन पहले ही थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए जान का खतरा बताया था लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नतीजागांव गोलियों की आवाज से दहल उठा और दो लोग खून से लथपथ हो गए।

    घटना गुरुवार शाम करीब पांच बजे की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक 24 वर्षीय देवेंद्र गुर्जर और उनके 50 वर्षीय ससुर औतार गुर्जर को सुनियोजित तरीके से घेरकर करीब 12 राउंड फायरिंग की गई। चश्मदीदों के अनुसार अचानक चली गोलियों से इलाके में अफरा तफरी मच गई। देवेंद्र की जांघ को चीरती हुई गोली निकल गई जबकि औतार गुर्जर के पैर के आर पार गोली लगने से वे गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को तत्काल प्राथमिक उपचार के बाद ग्वालियर रेफर किया गया है जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस ने मौके से पांच खाली खोखे बरामद किए हैं।

    इस खूनी वारदात की जड़ें एक दिन पहले हुई मारपीट में बताई जा रही हैं। बुधवार को नेशनल हाईवे 44 पर आरोपी गीताराम गिर्राज और छोटू गुर्जर ने देवेंद्र के साथ मारपीट की थी। आरोप है कि शिकायत करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। देवेंद्र ने सराय छोला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई लेकिन परिजनों का कहना है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। यदि आरोपियों की समय पर गिरफ्तारी होती तो शायद यह जानलेवा हमला टल सकता था।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने सक्रियता दिखाई है। सीएसपी दीपाली चन्दौरिया के अनुसार घायलों के बयान दर्ज करने के लिए टीम ग्वालियर भेजी गई है। उन्होंने माना कि पुरानी रंजिश और मारपीट की घटना के चलते ही फायरिंग हुई। हालांकि पुलिस का यह कहना कि वे आरोपियों को पकड़ने जाने ही वाले थे लेकिन उससे पहले वारदात हो गईपीड़ित परिवार को स्वीकार्य नहीं है। ग्रामीणों में भी पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर आक्रोश देखा जा रहा है।

    घटनाक्रम पर नजर डालें तो बुधवार को मारपीट और धमकी उसी रात एफआईआर लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं; और गुरुवार शाम खुलेआम घेराबंदी कर 12 राउंड फायरिंगयह सिलसिला पुलिस की सुस्ती पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। फिलहाल आरोपी फरार हैं और उनकी तलाश में दबिश दी जा रही है। चंबल क्षेत्र में आपराधिक घटनाओं की पुनरावृत्ति ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या समय पर की गई पुलिस कार्रवाई ऐसी वारदातों को रोक सकती है। केन्थरी गांव की यह घटना न केवल दो जिंदगियों को खतरे में डाल गई बल्कि कानून व्यवस्था की हकीकत भी उजागर कर गई।

  • Holi Special Train: जबलपुर से अयोध्या, दिल्ली, मथुरा, प्रयागराज और वाराणसी के लिए दौड़ेंगी स्पेशल ट्रेनें, यात्रियों को बड़ी राहत

    Holi Special Train: जबलपुर से अयोध्या, दिल्ली, मथुरा, प्रयागराज और वाराणसी के लिए दौड़ेंगी स्पेशल ट्रेनें, यात्रियों को बड़ी राहत


    जबलपुर। रंगों के महापर्व होली पर घर लौटने और धार्मिक स्थलों पर रंगोत्सव मनाने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। पश्चिम मध्य रेल ने जबलपुर से दो प्रमुख दिशाओंअयोध्या और दिल्लीके लिए विशेष ट्रेनों के संचालन का निर्णय लिया है। ये दोनों स्पेशल ट्रेनें 2 से 11 मार्च के बीच सप्ताह में एक दिन संचालित होंगी और दो-दो फेरे लगाएंगी। इनके लिए आरक्षण भी शुरू कर दिया गया है, जिससे यात्रियों को कन्फर्म सीट मिलने की संभावना बढ़ गई है।

    पहली स्पेशल ट्रेन जबलपुर-अयोध्या धाम के बीच चलेगी। ट्रेन क्रमांक 01705 तीन और 10 मार्च को शाम 7.40 बजे जबलपुर जंक्शन से रवाना होगी। यह सिहोरा रोड, कटनी जंक्शन, मैहर, सतना, मानिकपुर, मिर्जापुर और जौनपुर जैसे प्रमुख स्टेशनों पर ठहरते हुए मध्यरात्रि 2.15 बजे प्रयागराज छिवकी, सुबह 7.05 बजे वाराणसी और सुबह 11.25 बजे अयोध्या धाम पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन क्रमांक 01706 चार और 11 मार्च को दोपहर 1.30 बजे अयोध्या धाम से चलकर अगले दिन सुबह 6.45 बजे जबलपुर पहुंचेगी। इस ट्रेन में दो सेकेंड एसी, पांच थर्ड एसी, आठ स्लीपर और दो एसएलआरडी कोच रहेंगे।

    दूसरी स्पेशल ट्रेन जबलपुर से हजरत निजामुद्दीन दिल्ली के लिए चलाई जाएगी। ट्रेन क्रमांक 01701 दो और नौ मार्च को रात 8.20 बजे जबलपुर से रवाना होगी। यह कटनी मुड़वारा, दमोह, सागर, झांसी, ग्वालियर, आगरा, मथुरा और कोशी कला होते हुए दिल्ली पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन क्रमांक 01702 तीन और 10 मार्च को अपराह्न 3.45 बजे निजामुद्दीन से चलकर अगले दिन सुबह 9.30 बजे जबलपुर पहुंचेगी। 24 कोच वाली इस ट्रेन में चार जनरल, नौ स्लीपर, छह थर्ड एसी, दो सेकेंड एसी और एक फर्स्ट एसी कोच शामिल होगा।

    होली के दौरान मथुरा और काशी जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी यह ट्रेनें बड़ी सुविधा साबित होंगी। नियमित ट्रेनों में सीटों की कमी के कारण यात्रियों को काफी परेशानी होती है, ऐसे में इन स्पेशल ट्रेनों से भीड़ का दबाव कम होगा। अयोध्या स्पेशल ट्रेन के मिर्जापुर ठहराव से विंध्याचल धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को भी लाभ मिलेगा।

    इसके अलावा रीवा-भोपाल-दानापुर रूट पर भी विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। रानी कमलापति से रीवा और दानापुर के लिए सुपरफास्ट एवं स्पेशल ट्रेनों की तिथियां घोषित कर दी गई हैं, जिससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश-बिहार के बीच यात्रा करने वालों को अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे।

    रेल प्रशासन का मानना है कि इन स्पेशल ट्रेनों से न केवल त्योहार के दौरान घर लौटने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। होली के रंगों के बीच सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। यात्रियों से समय पर आरक्षण कराने और निर्धारित समय-सारिणी की जानकारी प्राप्त करने की अपील की गई है।

  • भिंड: मजदूरी का पैसा मांगने पर दबंगों ने की मारपीट, कट्टा लहराया और दो बार फायर किया व्यक्ति घायल, आरोपियों पर FIR दर्ज

    भिंड: मजदूरी का पैसा मांगने पर दबंगों ने की मारपीट, कट्टा लहराया और दो बार फायर किया व्यक्ति घायल, आरोपियों पर FIR दर्ज


    भिंड । मध्य प्रदेश जिले के देहात थाना क्षेत्र के टीकरी गांव में मजदूरी का बकाया पैसा लेने गए एक मजदूर से दबंगों द्वारा मारपीट और पिस्तौल के साथ दहशत फैलाने की सनसनीखेज घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार मजदूर अनूप रैयपुरिया और उनके छोटे भाई बॉबी ने लगभग एक माह पहले विकास चौरसिया के यहाँ कलर-पुट्टी का काम किया था जिसकी मजदूरी 5 400 रुपये तय थी लेकिन वह मजदूरी नहीं दी गई। पैसे की मांग को लेकर विवाद बढ़ गया जिसके बाद मामला हाथापाई और कट्टे की फायरिंग तक पहुँच गया।

    घटना के मुताबिक विकास चौरसिया अपने साथी बेतू जाटव सहित दो अन्य लोगों के साथ अनूप के घर पहुँचे और बॉबी से विवाद करने लगे। घर के बाहर बैठे बॉबी से पहले मारपीट शुरू हुई और जब अनूप ने बचाव के लिए बीच में आकर रोकने की कोशिश की तो आरोपियों ने उस पर भी हमला कर दिया। इस दौरान मारपीट से युवक गंभीर रूप से घायल हो गया और आसपास का माहौल tense हो गया।

    घायल युवक के बचाव के लिए गांव के अन्य लोग मौके पर इकट्ठा हुए इसी बीच बेतू जाटव ने अपनी जेब से कट्टा निकालकर लहराना शुरू कर दिया और वहां खड़े लोगों में दहशत फैलाने की कोशिश की। आरोप है कि उसने पहले कारतूस जारी करने का प्रयास किया लेकिन गोली मिस हो गई। भय फैलाने के लिए उसने दो बार फायर करने की कोशिश की लेकिन दोनों बार कारतूस चूक गया जिससे आसपास अफरा-तफरी मच गई। लोग डर के मारे इधर-उधर भागने लगे और आरोपी भी मौके का फायदा उठाकर भाग निकले।

    पुलिस को सूचना मिलने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पीड़ित अनूप रैयपुरिया की शिकायत पर चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है जिसमें दो नामजद और दो अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने बताया कि मामला मारपीट और कट्टा लहराकर दहशत फैलाने का है तथा प्राथमिकी दर्ज कर जांच जारी है और आरोपियों की पतासाजी की जा रही है।

    स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि टीकरी गांव में इस तरह का हिंसा-उत्पीड़क व्यवहार कानून और व्यवस्था के लिए चुनौती है तथा ऐसे मामलों से ग्रामीणों में भय की स्थिति बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि मजदूरी के लिये जबरदस्ती पैसा मांगने पर इस तरह की हिंसा निंदनीय है और ऐसी घटनाएँ सामाजिक व्यवहार और ग्रामीण सुरक्षा के दृष्टिकोण से गंभीर चिंता का विषय हैं।

    घायल मजदूर को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल ले जाया गया है जहाँ उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। पुलिस ने बताया कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है तथा जल्द ही आरोपियों को पकड़ने की कोशिश जारी है।

    इस घटना के वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस की सक्रियता बढ़ गई है और अधिकारी इसे गंभीरता से ले रहे हैं। वहीं ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई हो ताकि भविष्य में इस तरह की हिंसा और दबंगई रोकने में मदद मिले।

    कुल मिलाकर इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि मजदूरी विवाद जैसे मामूली मामलों में हिंसा की उग्र स्थिति कैसे उत्पन्न हो जाती है और ग्रामीण क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था तथा सामाजिक सद्भावना को बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

  • भिंड के दबोह क्षेत्र में संगठित अवैध शराब नेटवर्क: ‘कंजर व्हिस्की’ 30 रुपए में, महिलाओं के भरोसे चलता कारोबार

    भिंड के दबोह क्षेत्र में संगठित अवैध शराब नेटवर्क: ‘कंजर व्हिस्की’ 30 रुपए में, महिलाओं के भरोसे चलता कारोबार


    भिंड । मध्य प्रदेश शहर से लगभग 85 किमी दूर दबोह क्षेत्र में स्थित कंजर डेरा आज एक संगठित और बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध शराब नेटवर्क के रूप में चर्चा में है, जहां कच्ची शराब खुलेआम बिना किसी रोक टोक के बिक रही है। स्थानीय लोगों और जांचकर्ताओं के अनुसार यहाँ का यह नेटवर्क इतना व्यवस्थित है कि खरीदारों को कहीं भटकना नहीं पड़ता, बल्कि एक तय शुदा प्रक्रिया के मुताबिक शराब आसानी से उपलब्ध कराई जाती है।

    कंजर डेरे में शराब को स्थानीय लोग कंजर व्हिस्की के नाम से जानते हैं, जिसका एक एक पॉलिथीन पाउच महज 30 रुपए में बिकता है। इस कच्ची शराब की बिक्री एक अनूठे तरीके से होती है प्रत्येक घर के बाहर एक चारपाई रखी होती है जिस पर एक थैला होता है जिसमें आठ से दस पाउच शराब रखे रहते हैं। ग्राहक उस थैले को पहचानकर थैलों में से पाउच लेते हैं और पैसे वहीं रख देते हैं। इस तरीके से शराब विक्रेताओं और ग्राहकों के बीच न्यूनतम संपर्क होता है और बिक्री आसान एवं तेजी से होती है।

    डेरे के गिरोह में शामिल महिलाओं की भूमिका प्रमुख रूप से सामने आती है। कई महिलाओं ने रिपोर्टरों से बातचीत में स्वीकार किया कि यही उनकी आमदनी का साधन है और इसी से परिवार का भरण पोषण होता है। पुरुष इस दौरान डेरे से बाहर रहते हैं और शराब के निर्माण तथा आपूर्ति से जुड़े कामों में लगे रहते हैं। गलियों के बीच सात पक्के मकानों के नेटवर्क में सप्ताह के हर दिन के लिए अलग अलग घर शराब की बिक्री का काम संभालता है, जिससे किसी प्रकार की आपसी प्रतिस्पर्धा और टकराव नहीं होता।

    स्थानीय ग्राहकों के अलावा, यह अवैध शराब नेटवर्क कुछ शराब ठेकेदारों तक भी कच्ची शराब की आपूर्ति करता है, जो इसे पाउचों और बोतलों में पैक कर आसपास के गांवों और इलाकों में बेचते हैं। इससे व्यापारियों को दो से चार गुना तक मुनाफा होता है, और यह नेटवर्क और भी अधिक फैलता जा रहा है।

    रेहकोला माता मंदिर के निकट स्थित इस डेरे में रहने वाले कुछ परिवारों का कहना है कि वे शराब को या तो स्वयं बनाते हैं या बाहर से लाते हैं, हालांकि उसके स्रोत स्पष्ट रूप से बताने से इनकार कर देते हैं। पुरुष शराब बनाने के लिए आसपास के बीहड़ों में जाते हैं, जहाँ गड्ढों में स्टॉक छिपाया जाता है और ज़रूरत के समय उसे लाकर बेचा जाता है।

    यह अवैध शराब कारोबार स्थानीय आबकारी कानूनों और प्रतिबंधों के खिलाफ चल रहा है, जिससे सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि कई लोग इस कच्ची शराब को सरकारी या कानूनी समझकर भी पी लेते हैं, जबकि गांवों के कुछ लोगों को डर होता है कि यदि वे प्रशासन को सूचना देंगे तो उन्हें प्रतिकूल परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

    विशेष रूप से यह नेटवर्क स्थानीय आबकारी अधिकारियों या पुलिस की निगरानी को चुनौती देता प्रतीत होता है, क्योंकि यह व्यापार बिना किसी तत्काल कार्रवाई के चलता दिखाई दे रहा है। वहीं, आबकारी विभाग और पुलिस को ऐसी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि अवैध शराब के कारण होने वाले स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभावों से लोगों को बचाया जा सके।

  • पंधाना से लाड़ली बहना की 33वीं किश्त जारी, सीएम डॉ मोहन यादव करेंगे सिंगल क्लिक ट्रांसफर, उद्योगों की मांग भी उठेगी

    पंधाना से लाड़ली बहना की 33वीं किश्त जारी, सीएम डॉ मोहन यादव करेंगे सिंगल क्लिक ट्रांसफर, उद्योगों की मांग भी उठेगी


    मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना की 33वीं किश्त 14 फरवरी को पंधाना से जारी की जाएगी। राज्य स्तरीय इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सिंगल क्लिक के माध्यम से प्रदेश की लाखों हितग्राही महिलाओं के खातों में राशि अंतरित करेंगे। कार्यक्रम को लेकर खंडवा जिले में प्रशासनिक तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं और आयोजन को भव्य बनाने के लिए पंचायत स्तर तक जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं।

    पंधाना में अनाज मंडी के सामने विशाल मंच और पंडाल तैयार किया जा रहा है। कार्यक्रम स्थल पर टेंट, बैठक व्यवस्था, पेयजल, सुरक्षा और यातायात नियंत्रण सहित सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक स्वयं तैयारियों की मॉनिटरिंग कर चुके हैं। गुरुवार को क्षेत्रीय विधायक छाया मोरे और दीक्षा भगोरे ने भी स्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद पंधाना और छैगांवमाखन जनपद कार्यालय में सरपंचों और सचिवों की बैठक लेकर भीड़ प्रबंधन और परिवहन व्यवस्था पर चर्चा की गई।

    ब्लॉक स्तर पर प्रत्येक ग्राम पंचायत को लगभग 50 लोगों को कार्यक्रम स्थल तक लाने का लक्ष्य दिया गया है। अनुमान है कि इसके लिए हर पंचायत को करीब पांच वाहनों की व्यवस्था करनी होगी। बोर्ड परीक्षाओं के कारण इस बार स्कूल बसों की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाएगी, इसलिए पंचायतों को निजी वाहनों या ट्रेवल्स के माध्यम से लोगों को लाने और वापस भेजने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि परिवहन पर होने वाला खर्च पांचवें या पंद्रहवें वित्त आयोग की राशि से वहन किया जा सकता है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर एजेंसियों से समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि समय पर वाहन उपलब्ध हो सकें। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं और टेंट व अन्य व्यवस्थाएं मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग के माध्यम से की जा रही हैं।

    विधायक छाया मोरे ने कहा कि यह कार्यक्रम क्षेत्र के लिए गौरव का अवसर है। उन्होंने संकेत दिया कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में क्षेत्र में नए उद्योग स्थापित करने की मांग भी रखी जाएगी ताकि युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके। उनके अनुसार लाड़ली बहना योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त किया है और अब क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देने की आवश्यकता है।

    लाड़ली बहना योजना राज्य सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक है, जिसके माध्यम से हर महीने महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। 33वीं किश्त का पंधाना से जारी होना न केवल प्रशासनिक बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सुरक्षा, यातायात और भीड़ नियंत्रण के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि आयोजन सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जाएगा।

  • 30 फीट गहरे तालाब में गिरी तेज रफ्तार कार, 3 बारातियों की मौत और 7 घायल

    30 फीट गहरे तालाब में गिरी तेज रफ्तार कार, 3 बारातियों की मौत और 7 घायल


    विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में गुरुवार देर रात बारातियों से भरी तेज रफ्तार टवेरा कार अनियंत्रित होकर 30 फीट गहरे सूखे तालाब में जा गिरी। हादसे में 3 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 7 अन्य लाेग घायल हो गए, घायलाें में दाे की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना कोतवाली थाना क्षेत्र की है।


    जानकारी के अनुसार गैरतगंज के जाफरखेड़ी निवासी दशरथ सिंह के यहां बारात आ रही थी। टवेरा कार में कुल 10 लोग सवार थे। देर रात अंधेरा होने और तेज रफ्तार के कारण ड्राइवर वाहन से नियंत्रण खो बैठा। देखते ही देखते कार सड़क से फिसलकर करीब 30 फीट नीचे सूखे तालाब में जा गिरी। हादसे में 35 वर्षीय राजेश लोधी, 30 वर्षीय सोनू लोधी (ड्राइवर) और 35 वर्षीय चंद्रशेखर की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वहीं घायलों में अशोक लोधी (25) का बायां हाथ फ्रैक्चर हुआ है। 14 वर्षीय राज बोधी के पेट में गंभीर चोट आई है। बृजेश लोधी (27) और सुदीप लोधी (20) के सीने में गंभीर चोटें हैं। 45 वर्षीय भावसिंह लोधी और 10 वर्षीय ऋतुराज लोधी की हालत नाजुक बताई जा रही है। प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को विदिशा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। इनमें से एक घायल को देर रात गंभीर हालत में भोपाल रेफर करना पड़ा।

    ग्रामीणों ने दिखाई मानवता
    हादसा शादी वाले घर से करीब एक किलोमीटर दूर हुआ। तेज धमाके की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे। कार में फंसे घायलों को बाहर निकालकर निजी वाहनों से जिला अस्पताल पहुंचाया। कई घायल खून से लथपथ थे—किसी के माथे से तो किसी के हाथ से लगातार खून बह रहा था।

    कलेक्टर पहुंचे अस्पताल
    घटना की सूचना मिलते ही कलेक्टर अंशुल गुप्ता जिला अस्पताल पहुंचे और घायलों का हालचाल जाना। उन्होंने घटनास्थल का भी निरीक्षण किया। एडीएम, तहसीलदार, सीएसपी, कोतवाली और सिविल लाइन थाना प्रभारी सहित अन्य अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। सिविल सर्जन डॉ. अनूप वर्मा के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उपचार शुरू किया। डॉ. वर्मा ने बताया कि दो घायलों की हालत गंभीर है और उन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है, जबकि अन्य घायलों का इलाज जिला अस्पताल में जारी है और वे फिलहाल खतरे से बाहर हैं।
  • हाइवा ने बाइक सवार दो युवकों को कुचला, गुस्साए ग्रामीणों ने चालक को पीटा, पुलिस पर किया पथराव

    हाइवा ने बाइक सवार दो युवकों को कुचला, गुस्साए ग्रामीणों ने चालक को पीटा, पुलिस पर किया पथराव

    कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी जिले के स्लीमनाबाद थाना क्षेत्र में गुरुवार रात बंधी रेलवे फाटक के पास एक तेज रफ्तार हाइवा ने बाइक सवार दो युवकों को कुचल दिया, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने हाइवा चालक की पिटाई की और मौके पर पहुंची पुलिस टीम पर भी हमला कर दिया।

    जानकारी के अनुसार, गुरुवार की रात करीब 7 बजे बंधी स्टेशन के पास रेलवे फाटक की ओर से बाइक से आ रहे आ रहे राजेंद्र कोल (30) और राजा भैया कोल (30) को बेकाबू हाइवा ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। दोनों युवक धरवारा गांव के रहने वाले थे। हादसे की खबर मिलते ही मृतकों के परिजन और सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर उतर आए।

    घटना के बाद गुस्सा इतना ज्यादा था कि जब डायल 112 वाहन मौके पर पहुंचा, तो भीड़ ने उस पर पथराव शुरू कर दिया। इस हमले में वाहन में सवार दो पुलिसकर्मी और पायलट को चोट आईं। पुलिसकर्मियों को जान बचाकर वहां से भागना पड़ा। इसके बाद आक्रोशित भीड़ ने पकड़े गए हाइवा चालक के साथ भी मारपीट की।

    तनावपूर्ण स्थिति की सूचना मिलते ही एसडीओपी आकांक्षा चतुर्वेदी, स्लीमनाबाद थाना प्रभारी सुदेश सुमन और माधवनगर थाना प्रभारी संजय दुबे भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को काफी देर तक समझाया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया, तब कहीं जाकर मामला शांत हुआ। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

    एसडीओपी आकांक्षा चतुर्वेदी ने बताया कि हाइवा को जब्त कर लिया गया है और चालक को हिरासत में ले लिया गया है। भीड़ के हमले में दो पुलिसकर्मियों और वाहन पायलट को चोट आई हैं, हालांकि अब स्थिति नियंत्रण में है। एहतियात के तौर पर गांव में देर रात तक पुलिस बल तैनात रखा गया है।

  • उज्जैन में महाशिवरात्रि से आरंभ होगा विक्रमोत्सव

    उज्जैन में महाशिवरात्रि से आरंभ होगा विक्रमोत्सव

    उज्जैन। विक्रमोत्सव 2026 का शुभारंभ उज्जैन में महाशिवरात्रि पर्व से होगा। यह महोत्सव देश-दुनिया में आयोजित होने वाला सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का अनूठा उत्सव होगा। महाशिवरात्रि पर प्रसिद्ध संगीतकार प्रीतम की प्रस्तुति शिवोऽहम से होगी। विक्रमोत्सव में इस वर्ष सबसे महत्वपूर्ण और देश का सबसे बड़ा सम्मान ‘सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान’ आकर्षण का केंद्र होगा। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक एवं मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी ने बताया कि विक्रमोत्सव की शुरूआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 2006 में की गयी थी। आज यह महोत्सव अंतरराष्ट्रीय स्तर का हो चला है। इस आयोजन में अब तक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकारों की प्रस्तुतियां हो चुकी है। इस वर्ष टॉप रेंकिंग कलाकार प्रीतम 15 फरवरी को अपनी प्रस्तुति के लिए आ रहे हैं। इसी प्रकार हिंदू नववर्ष चैत्र प्रतिपदा 19 मार्च को विशाल मिश्रा अपने बैंड के साथ प्रस्तुति देने आएंगे।

    श्री तिवारी ने बताया कि महोत्सव में 41 से अधिक बहुआयामी गतिविधियां शिवरात्रि मेलों का समारंभ, महाकाल वन मेला, कृषि मेला, कलश यात्रा, विक्रम व्यापार मेला, संगीत, नृत्य, वादन, शिवपुराण, अनादि पर्व, विक्रम नाट्य समोराह, पुतुल समारोह, संगीत का उद्भव और विकास पर केंद्रित अनहद वैचारिक समागम, चित्र प्रदर्शनियां, संगोष्ठी, विक्रमादित्य का न्याय समागम, भारतीय इतिहास समागम, राष्ट्रीय विज्ञान समागम, वेद अंताक्षरी, कोटि सूर्योपासना, शिल्प कला कार्यशाला, प्रकाशन लोकार्पण, पौराणिक फिल्मों का अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, बोलियों एवं हिन्दी रचनाओं का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर मातृशक्ति कवयित्री सम्मेलन, ड्रोन शो आदि शामिल है।

    यह महत्वपूर्ण गतिविधियां सम्पन्न होंगी आयोजन के दौरान

    * महाशिवरात्रि पर प्रदेश के 60 से अधिक प्रमुख शिव मंदिरों में मेलो का आयोजन होगा,जिसमें मंदिरों की साजसज्जा, साफ-सफाई एवं सांस्कृतिक गतिविधियां प्रमुख हैं।

    * विक्रमोत्सव अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ परिसर एवं कालिदास संस्कृत अकादमी परिसर में पौराणिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, जनजातीय विषयों पर 7 विभिन्न प्रदर्शनियां लगेंगी। जिसमें सम्राट विक्रमादित्य और अयोध्या, आर्ष भारत, महाभारतकालीन अस्त्र-शस्त्र, चक्रव्यूह, पताकाएं, शंख, 84 महादेव, जनजातीय देवलोक, श्रीकृष्ण प्रभात एवं रागमाला प्रमुख है। इन प्रदर्शनियों को महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा तैयार किया गया है।

    * राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रेष्ठ प्रदर्शन कर चुकी नाट्य प्रस्तुतियों पर केन्द्रित दस दिवसीय विक्रम नाट्य समारोह में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा तैयार की गई प्रस्तुतियों जटायुवध, चारूदत्तम, भरतवाक्य, जाति जीवन, अभिज्ञान शाकुन्तलम् और चतुर्भाणी शामिल है। अंधायुग, भूमि सूर्य वीरगाथा, आदि-अनंत, अभंग नाद, सौगंधिकाहरणं का भी मंचन होगा।