Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल में न्यू ईयर 2026: जानें शहर के खास सेलिब्रेशन स्पॉट्स और योजनाएं

    भोपाल में न्यू ईयर 2026: जानें शहर के खास सेलिब्रेशन स्पॉट्स और योजनाएं


    भोपाल।नए साल 2026 के आगमन में अब कुछ ही घंटे शेष हैं और भोपाल शहर में जश्न की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। राजधानी के होटल, रिसॉर्ट, कैफे और ओपन-एयर वेन्यू न्यू ईयर ईव को यादगार बनाने के लिए पूरी तरह सज चुके हैं। जो लोग अभी तक तय नहीं कर पाए हैं कि 31 दिसंबर की रात कहां सेलिब्रेशन करेंगे, उनके लिए शहर में कई विकल्प मौजूद हैं।इस बार न्यू ईयर सेलिब्रेशन का फोकस केवल युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार और बच्चों के लिए भी खास व्यवस्थाएं की गई हैं। कई होटल और क्लब्स में थीम आधारित पार्टियों का आयोजन किया जा रहा है। यहाँ देर रात तकDJ म्यूजिक, डांस फ्लोर और रंगीन लाइटिंग का आनंद लिया जा सकेगा। आयोजकों के अनुसार, अनलिमिटेड डिनर और ड्रिंक्स के पैकेज लोगों को संपूर्ण मनोरंजन का अनुभव देंगे।

    जो लोग शांत और खुले माहौल में नया साल मनाना चाहते हैं, उनके लिए शहर के बाहरी इलाकों में स्थित रिसॉर्ट्स सबसे आकर्षक विकल्प बनकर सामने आए हैं। यहाँ बोनफायर, ओपन-एयर म्यूजिक और नेचर लाइटिंग के बीच सेलिब्रेशन किया जाएगा। ये वेन्यू विशेष रूप से उन लोगों को पसंद हैं, जो शहर की भीड़-भाड़ से दूर सुकून भरा जश्न मनाना चाहते हैं।परिवार के साथ आने वालों के लिए कई स्थानों पर किड्स जोन, बच्चों के खेल, मैजिक शो और अलग फूड काउंटर की व्यवस्था की गई है। इससे माता-पिता आराम से और सुरक्षित माहौल में सेलिब्रेशन का आनंद ले सकेंगे। आयोजकों ने सुरक्षा और सुविधा दोनों पर विशेष ध्यान दिया है।

    पर्यटन से जुड़े प्रतिष्ठानों और शहर के प्रमुख होटलों में भी न्यू ईयर ईव को लेकर खास कार्यक्रम रखे गए हैं। यहां ठीक रात 12 बजे काउंटडाउन के साथ नए साल का स्वागत किया जाएगा। कुछ जगहों पर पारंपरिक संगीत और आधुनिक बीट्स का संयोजन देखने को मिलेगा, ताकि हर वर्ग के लोग इस उत्सव का आनंद उठा सकें।शहर के कई रूफटॉप कैफे और रेस्टोरेंट भी न्यू ईयर नाइट पर खास मेन्यू और लाइव म्यूजिक के साथ लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। यहां सीमित संख्या में एंट्री रखी गई है, जिससे भीड़ नियंत्रण और बेहतर अनुभव सुनिश्चित किया जा सके।

    सुरक्षा को लेकर प्रशासन और पुलिस विभाग ने भी तैयारी पूरी कर ली है। प्रमुख इलाकों में अतिरिक्त पुलिस तैनात की गई है और ट्रैफिक को सुचारु रूप से चलाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। नागरिकों से अपील की गई है कि वे जिम्मेदारी के साथ जश्न मनाएं और नियमों का पालन करें।कुल मिलाकर, भोपाल में न्यू ईयर 2026 का स्वागत संगीत, रोशनी और उत्साह के साथ होने जा रहा है। चाहे दोस्तों के साथ पार्टी करनी हो या परिवार संग शांत और सुरक्षित माहौल में जश्न मनाना हो, शहर हर प्रकार के सेलिब्रेशन के लिए तैयार है।

  • जबलपुर में पकड़े गए बांग्लादेशी अवैध प्रवासी, सजा पूरी होने पर देश वापसी..

    जबलपुर में पकड़े गए बांग्लादेशी अवैध प्रवासी, सजा पूरी होने पर देश वापसी..


    जबलपुर।बांग्लादेश से अवैध रूप से मध्यप्रदेश पहुंचे मीनारा बेगम और मोहम्मद मोसूर को दो साल की जेल की सजा पूरी होने के बाद जबलपुर से उनके देश भेज दिया गया। दोनों आरोपी 2023 में गुजरात के मार्ग से भारत में प्रवेश कर चुके थे और जबलपुर में छिपकर भीख मांगकर जीवन यापन कर रहे थे।पुलिस ने बताया कि दोनों संदिग्ध गतिविधियों के कारण निगरानी में आए और पूछताछ में अपनी पहचान साबित नहीं कर सके। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वे अवैध बांग्लादेशी नागरिक हैं। गोरखपुर थाना पुलिस ने दोनों को विदेशी अधिनियम की धारा 14ए के तहत गिरफ्तार किया और न्यायालय में पेश किया।

    सुनवाई के दौरान निचली अदालत ने प्रारंभ में दोनों को चार-चार साल की जेल की सजा सुनाई थी। इसके बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील की। सरकारी वकील की पैरवी के बाद सजा घटाकर दो साल कर दी गई। दिसंबर 2025 में दोनों आरोपी अपनी सजा पूरी कर चुके थे। मीनारा बेगम को महिला सुधार केंद्र और मोहम्मद मोसूर को सिविल लाइन थाने में अस्थायी रूप से रखा गया।सजा पूरी होने के बाद केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से डिपोर्टेशन की कार्रवाई की गई। दोनों को सड़क मार्ग से पश्चिम बंगाल के मालदा जिले होते हुए बांग्लादेश सीमा तक पहुंचाया गया। लगभग 1200 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर उन्हें बीएसएफ की मदद से बांग्लादेश सरकार को सौंपा गया।

    एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि दोनों आरोपी अवैध रूप से भारत में प्रवेश किए थे और उनके पास कोई वैध पहचान या निवास दस्तावेज नहीं थे। पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि बेहतर जीवन की तलाश में वे भारत आए थे। पुलिस ने यह स्पष्ट किया कि प्रदेश में अवैध घुसपैठ पर सतर्कता जारी है और सजा पूरी होने के बाद आरोपियों की वतन वापसी सुनिश्चित की जाती है।जबलपुर पुलिस ने बताया कि मीनारा और मोसूर गोरखपुर मैदान में रात बिताते और दिन में भीख मांगते थे। सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने उन्हें पकड़ा। इससे पहले भी जबलपुर और प्रदेश के अन्य जिलों में कई अवैध बांग्लादेशी नागरिक पकड़े जा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि सीमापार से बेहतर जीवन या रोजगार की तलाश में लोग प्रवेश करते हैं, लेकिन कानून की निगरानी सख्त है।

    यह मामला राज्य और केंद्र सरकार की अवैध घुसपैठ रोकने की नीति का उदाहरण है। पुलिस लगातार निगरानी, गिरफ्तारी और डिपोर्टेशन सुनिश्चित कर रही है। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी ऐसी अवैध गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और राज्य की सुरक्षा तथा सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता जारी रहेगी।इस घटना से यह संदेश भी जाता है कि अवैध प्रवेश करने वालों को कानून के तहत सजा दी जाएगी और उनके देश वापसी की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही यह प्रदेश में कानून और सामाजिक सुरक्षा बनाए रखने में प्रशासन की सतर्कता और सक्रियता को भी उजागर करता है।

  • नए साल 2026 से पहले ग्वालियर अलर्ट मोड पर: 2 हजार पुलिसकर्मी, 40 चेकिंग पॉइंट्स, ड्रिंक एंड ड्राइव पर सख्ती

    नए साल 2026 से पहले ग्वालियर अलर्ट मोड पर: 2 हजार पुलिसकर्मी, 40 चेकिंग पॉइंट्स, ड्रिंक एंड ड्राइव पर सख्ती


    ग्वालियर। नए साल 2026 के स्वागत को लेकर ग्वालियर शहर में जश्न की तैयारियों के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह कसी गई है। पुलिस प्रशासन ने 31 दिसंबर और 1 जनवरी को शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा प्लान लागू किया है। इस दौरान शहर भर में 2 हजार से अधिक पुलिस जवान और अधिकारी तैनात रहेंगे। प्रमुख सड़कों तिराहों और चौराहों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा, ताकि नए साल का जश्न सुरक्षित और अनुशासित माहौल में मनाया जा सके।पुलिस ने शहर में कुल 40 चेकिंग पॉइंट बनाए हैं। इनमें से 35 स्थान विशेष रूप से ड्रिंक एंड ड्राइव के मामलों पर नजर रखने के लिए चुने गए हैं। इन पॉइंट्स पर पुलिसकर्मी ब्रीथ एनालाइजर के साथ तैनात रहेंगे और वाहन चालकों की जांच करेंगे। शराब पीकर वाहन चलाते पाए जाने पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 10 हजार रुपये तक का जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    निगरानी की शुरुआत 30 दिसंबर से हो चुकी है। पुलिस ने ओवरस्पीडिंग, गलत दिशा में वाहन चलाना, स्टंटबाजी और सार्वजनिक स्थानों पर हंगामा करने वालों पर विशेष नजर रखी है। अधिकारियों का कहना है कि 31 दिसंबर की रात और 1 जनवरी को भीड़ बढ़ने की संभावना रहती है इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को अतिरिक्त रूप से मजबूत किया गया है।एसएसपी ग्वालियर धर्मवीर सिंह ने होटल, रेस्टोरेंट, बार और रिसॉर्ट संचालकों के साथ बैठक कर स्पष्ट किया है कि नए साल के कार्यक्रम पूरी तरह नियमों के अनुसार ही आयोजित किए जाएं। डीजे और साउंड सिस्टम की आवाज तय मानकों के भीतर रखनी होगी, ताकि आसपास के इलाकों में शांति भंग न हो। किसी भी तरह की अव्यवस्था या नियम उल्लंघन पाए जाने पर आयोजकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए साल के नाम पर हुड़दंग मारपीट या कानून तोड़ने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे मामलों में आरोपियों को हिरासत में लिया जाएगा और उनकी नई साल की रात हवालात में भी गुजर सकती है। आपात स्थितियों से निपटने के लिए डायल-112 की टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह सख्ती लोगों के उत्सव में बाधा डालने के लिए नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। प्रशासन चाहता है कि शहरवासी नए साल का स्वागत शांति जिम्मेदारी और उत्साह के साथ करें।

    सुरक्षा की इस तैयारियों में पैदल और वाहन निगरानी, चेकिंग पॉइंट्स पर ब्रीथ एनालाइजर कंट्रोल रूम से निगरानी और आपातकालीन टीमों की तैनाती शामिल है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें, शराब पीकर वाहन न चलाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।इस व्यापक योजना से ग्वालियर पुलिस का उद्देश्य है कि शहरवासी अपने परिवार और दोस्तों के साथ सुरक्षित तरीके से नए साल का जश्न मनाएं और किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

  • इंदौर में दूषित पानी से मौतों का संकट: 8 की आशंका, 111 मरीज अस्पतालों में भर्ती..

    इंदौर में दूषित पानी से मौतों का संकट: 8 की आशंका, 111 मरीज अस्पतालों में भर्ती..


    इंदौर। देश के स्वच्छ शहरों की सूची में शीर्ष पर रहने वाले इंदौर में अचानक दूषित पानी से फैलने वाली बीमारी ने शहर में गंभीर संकट पैदा कर दिया है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित जल पीने से अब तक 8 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है, जबकि राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर 3 मौतों की पुष्टि की है। इस घटना के बाद इलाके में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है। वर्तमान में 111 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनका इलाज जारी है।

    घटना तब उजागर हुई जब बीते एक सप्ताह से इलाके में उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायतें लगातार बढ़ने लगीं। सोमवार रात स्थिति गंभीर हो गई और बड़ी संख्या में लोग निजी और सरकारी अस्पतालों में भर्ती हुए। मंगलवार को दिनभर मौतों की सूचनाएं मिलती रहीं, और देर रात तक कुल 8 मौतों की जानकारी सामने आई। प्रशासन ने बताया कि मौतों का कारण डायरिया और जलजनित संक्रमण है।स्वास्थ्य विभाग की जानकारी के अनुसार अब तक क्षेत्र के 2700 से अधिक घरों का सर्वे किया जा चुका है और लगभग 12,000 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई है। मौके पर 1,100 से अधिक लोगों को प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि गंभीर स्थिति वाले मरीजों को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल भेजा गया। कई अस्पतालों में विशेष वार्ड और अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की गई है जबकि कुछ मरीजों को आईसीयू में रखा गया।

    जांच के दौरान भागीरथपुरा इलाके में एक चौंकाने वाली वजह सामने आई। चौकी से सटे शौचालय के नीचे से गुजर रही मुख्य जल आपूर्ति लाइन में लीकेज पाया गया, जिससे गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल गया। माना जा रहा है कि इसी कारण संक्रमण बड़े पैमाने पर फैला। मरम्मत के लिए संबंधित संरचना को तोड़कर लाइन की तत्काल मरम्मत कराई गई। इसके अलावा नर्मदा जल आपूर्ति लाइन से भी बदबूदार पानी आने की शिकायतें मिली हैं।प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इलाके में डॉक्टरों की टीमें, पैरामेडिकल स्टाफ और आशा कार्यकर्ताओं को तैनात किया है। लोगों को उबला हुआ पानी पीने, बाहर का भोजन न करने और लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की सलाह दी जा रही है। राहत के तौर पर टैंकरों से साफ पानी की आपूर्ति की जा रही है और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं।

    इस गंभीर मामले के बाद नगर निगम और जल आपूर्ति से जुड़े अधिकारियों पर निलंबन और सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाई की गई है। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। सरकार ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने और सभी मरीजों का इलाज सरकारी खर्च पर कराने की घोषणा की है।यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है बल्कि स्वच्छता के राष्ट्रीय मॉडल माने जाने वाले शहर की बुनियादी सुविधाओं पर भी सवाल खड़े करती है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी होंगी।

  • जनजातीय छात्रावासों में सुरक्षा सख्ती: अधीक्षक अब बच्चों के साथ रात बिताएंगे, नियम उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई

    जनजातीय छात्रावासों में सुरक्षा सख्ती: अधीक्षक अब बच्चों के साथ रात बिताएंगे, नियम उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई


    भोपाल। प्रदेश के जनजातीय छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों, खासकर छात्राओं की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। अब छात्रावासों में अधीक्षक का रातभर परिसर में रहना अनिवार्य होगा। नियमों का पालन न करने वाले अधीक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें पद से हटाया जा सकता है।सरकार ने यह निर्णय छात्रावासों में लगातार मिल रही शिकायतों और सुरक्षा से जुड़े मामलों को ध्यान में रखते हुए लिया है। वर्तमान में कई अधीक्षक मूल रूप से शिक्षक हैं, जो न तो नियमित रूप से पढ़ा रहे हैं और न ही छात्रावासों में पर्याप्त समय दे रहे हैं। बच्चों के हित में उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए नई अधीक्षक कैडर प्रणाली लागू करने की तैयारी की जा रही है। योजना के तहत अगले कुछ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूर्णकालिक अधीक्षकों की नियुक्ति की जाएगी, जबकि मौजूदा शिक्षक अधीक्षक अपने मूल शिक्षण कार्य में लौटेंगे।
    छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सरकार ने तय किया है कि प्रत्येक छात्रावास में अधीक्षक के लिए आवासीय व्यवस्था होगी। अधीक्षक को बच्चों के साथ ही परिसर में रुकना होगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही संभाग स्तर पर विशेष निगरानी टीमें बनाई जाएंगी, जो छात्रावासों का औचक निरीक्षण करेंगी और व्यवस्थाओं की रिपोर्ट तैयार करेंगी।तकनीकी निगरानी को भी मजबूत किया जाएगा। प्रदेश के लगभग 2500 जनजातीय छात्रावासों में सीसीटीवी कैमरे और बायोमेट्रिक/थंब इम्प्रेशन सिस्टम लगवाए जाएंगे। इससे यह रिकॉर्ड रखा जा सकेगा कि कौन व्यक्ति कब छात्रावास में आया और कब गया। इसके अलावा, भोजन की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए रोजाना परोसी जाने वाली थाली की तस्वीर भेजना भी अनिवार्य किया जाएगा।
    इस बीच, भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर की जमीन को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया कि इसका अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर ही लिया जाएगा। लंबे समय से लंबित कचरा निष्पादन की प्रक्रिया को पूरा करना सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि आगामी शिक्षा सत्र से पहले किसी भी छात्रावास में बिना पुलिस सत्यापन के कोई कर्मचारी नियुक्त नहीं होगा। सुरक्षा गार्ड से लेकर अन्य स्टाफ की पृष्ठभूमि जांच अनिवार्य होगी।
    इसके अलावा, जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रत्येक विकासखंड में आधुनिक सुविधाओं वाले स्कूल, छात्रावास और सांस्कृतिक केंद्र विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित आवास और सांस्कृतिक गतिविधियों के अवसर प्रदान करना है।सुरक्षा, अनुशासन और शिक्षा के इस सुधार से यह उम्मीद जताई जा रही है कि प्रदेश के छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा और उनकी पढ़ाई पर भी ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इस कदम से छात्राओं और छात्रों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना न्यूनतम होगी।

  • MP: सतना में 26 साल पुराना कर्ज उतारने के लिए सफाईकर्मी के घर पहुंचे DSP

    MP: सतना में 26 साल पुराना कर्ज उतारने के लिए सफाईकर्मी के घर पहुंचे DSP


    सतना।
    पद और प्रतिष्ठा मिल जाए, लेकिन इंसान को अपना अतीत और किसी का उपकार कभी नहीं भूलना चाहिए। मध्य प्रदेश पुलिस (Madhya Pradesh Police) के चर्चित और संवेदनशील अधिकारी DSP संतोष पटेल ने इस बात को साबित कर दिखाया है। वे अपने ऊपर चढ़े हुए 26 साल पुराने एक कर्ज (A 26-year-old Debt) को उतारने के लिए सतना (Santa) की तंग गलियों में मौजूद एक झुग्गी बस्ती (Slum) में पहुंचे। यह कर्ज पैसों का नहीं था, बल्कि खून का था। जिस सफाईकर्मी संतु मास्टर ने बचपन में अपना खून देकर संतोष पटेल की जान बचाई थी, वे उसी से मिलने के लिए शहर में आए थे। हालांकि यहां पहुंचकर उन्हें पता चला कि संतु अब दुनिया में नहीं रहे, जिसके बाद वे उनके परिवार का पता लगाकर उनसे मिलने के लिए यहां आ गए। यहां संतु मास्टर की बेटियों से मिलकर वह भावुक हो गए और इस दौरान उन्होंने उनकी बड़ी बेटी के चरण स्पर्श कर परिवार की जिम्मेदारी उठाने का संकल्प लिया।

    यहां पहुंचकर DSP संतोष पटेल ने एकबार फिर अपने बचपन का वो डरावना मंजर याद किया, जब उनकी जान पर बन आई थी। बात साल 1999 की है, जब वे महज 8-9 साल के थे। एक गंभीर बीमारी ने उन्हें जकड़ लिया था। शरीर का खून पानी बनकर मवाद में बदल गया था। इस दौरान उनके पिता और दादा ने 6 महीने झाड़-फूंक में गंवा दिए। हालत बिगड़ने पर उन्हें पन्ना जिला अस्पताल और फिर सतना के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि तत्काल ऑपरेशन करना होगा, और खून की सख्त जरूरत है।


    खून देने से पहले पिता को लगाई थी फटकार

    DSP ने बताया कि उस दौर में रक्तदान को लेकर कई भ्रांतियां थीं और कोई डोनर नहीं मिल रहा था। लेकिन इसी बीच अस्पताल में एक अजीब संयोग बना। संतोष के पिता ने गलती से पान-सुपारी खाकर अस्पताल परिसर में थूक दिया। वहां सफाई कर रहे संतु ने उन्हें देखा और दौड़कर आया। इसके बाद उसने पिता को डांटा-फटकारा और चला गया। हालांकि इसी दौरान जब बेटे की हालत की वजह से संतोष के पिता जब वहां पर निराश बैठे हुए थे, तो उसी सफाईकर्मी संतु ने उनके कंधे पर हाथ रखकर कहा था, ‘आप हताश मत हो, आपका बेटा जिंदा रहेगा।’

    इसी बीच जब संतु मास्टर को पता चला कि बच्चे को खून की जरूरत है, तो उसने बिना किसी स्वार्थ के अपना ब्लड डोनेट किया था। उसी खून से ऑपरेशन सफल रहा और आज संतोष पटेल जिंदा हैं और पुलिस अधिकारी है।

    ‘अधिकारी नहीं, बेटा बनकर आया हूं’
    DSP बनने के बाद संतोष पटेल सतना के उसी अस्पताल पहुंचे। वे संतु मास्टर को गले लगाना चाहते थे, लेकिन वहां पता चला कि उनका निधन हो चुका है और पत्नी भी नहीं रहीं। अस्पताल की एक बुजुर्ग महिला कर्मचारी ने बताया कि संतु की दो बेटियां झुग्गी बस्ती में रहती हैं। इसके बाद DSP उनका पता लेकर तुरंत यहां पहुंचे। वर्दी पहने एक बड़े अफसर को अपनी झोपड़ी में देख बेटियां सहम गईं, लेकिन जब DSP ने झुककर उनके पैर छुए, तो सबकी आंखें नम हो गईं।


    DSP बोले- मैं करूंगा कन्यादान

    DSP ने संतु की बेटियों से कहा,मैं संतु मास्टर का मुंह नहीं देख पाया, इसका अफसोस जीवन भर रहेगा, लेकिन मेरी रगों में भी उनका खून दौड़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि वे लोग अकेले नहीं हैं। DSP ने संकल्प लिया कि वे संतु मास्टर की छोटी बेटी की शादी धूमधाम से कराएंगे। उन्होंने कहा, ‘अगर समय और संयोग रहा, तो मैं खुद भाई और पिता का फर्ज निभाते हुए कन्यादान भी करूंगा’।

  • MP: जबलपुर में चाय की गुमटी में घुसी बेकाबू SUV… BJP युवा मोर्चा के पूर्व उपाध्यक्ष समेत दो की मौत

    MP: जबलपुर में चाय की गुमटी में घुसी बेकाबू SUV… BJP युवा मोर्चा के पूर्व उपाध्यक्ष समेत दो की मौत


    जबलपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के जबलपुर जिले (Jabalpur district) में तेज रफ्तार एसयूवी इनोवा कार (SUV Innova Car) ने चाय की गुमटी पर खड़े चार लोगों को रौंद दिया। इस हादसे में भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व उपाध्यक्ष समेत 2 युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे में दो अन्य लोगों को मामूली चोट आई हैं।

    बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार एसयूवी जबलपुर से अमरकंटक की तरफ जा रही थी। इसी दौरान सदाफल से कुंडम तरफ आ रहे बाइक सवारों को बचाने के चक्कर में कार चालक ने सड़क किनारे स्थित चाय की टपरी में कार घुसा दी। जानकारी अनुसार कार की रफ्तार इतनी तेज थी कि उसने पहले सड़क किनारे खड़े 3 से 4 वाहनों को टक्कर मारी फिर जाकर सीधे गुमटी में घुस गई। इस हादसे में कार भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

    इस हादसे में आकाश विश्वकमां, दीपक महोबिया, दीपक चक्रवर्ती व शरद इसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को 108 एम्बुलेंस से इलाज के लिए कुंडम अस्पताल पहुंचाया गया। जहां आकाश विश्वकर्मा व दीपक महोबिया की मौत हो गई।


    ग्रामीणों ने जबलपुर-अमरकंटक रोड की जाम

    एक्सीडेंट के बाद चारों तरफ अफरातफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने दोनों युवकों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने दोनों युवकों को मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद नाराज ग्रामीणों ने जबलपुर अमरकंटक रोड पर चक्काजाम कर दिया। हंगामा होने की सूचना पर पहुंचे अधिकारियों की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ।


    प्रदर्शन के बीच ग्रामीणों ने क्या मांग की?

    घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने कुंडम बायपास पर चकाजाम कर प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि सदाफल क्रॉसिंग और कॉलेज व सिलोंड़ी रोड क्रॉसिंग के पास से वाहन तेज रफ्तार से भागते हैं, जिससे आए दिन हादसे होते है। ग्रामीणों का कहना था कि इस मार्ग पर ब्रेकर बनाने व स्टॉपर रखे जाने की मांग की गई, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिए जाने से लोग हादसे का शिकार हो रहे है।


    क्या बोले अधिकारी?

    जबलपुर एडिशनल एसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि कार नंबर के आधार पर वाहन मालिक व चालक के संबंध में जानकारी जुटाई गई। कार सवार डिंडौरी के रहने वाले हैं जो किसी काम से जबलपुर आए थे और वापस लौट रहे थे। घायलों में दीपक और शरद निजी अस्पताल में इलाज जारी है। पुलिस ने मौके से चालक को हिरासत में लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

  • सेवा के नाम रहा विश्वास सारंग का जन्मदिन, वर्चुअल आयोजन के साथ गरीबों को कंबल-भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं

    सेवा के नाम रहा विश्वास सारंग का जन्मदिन, वर्चुअल आयोजन के साथ गरीबों को कंबल-भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं


    भोपाल। मध्य प्रदेश के सहकारिता खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने इस वर्ष अपने जन्मदिन को पारंपरिक समारोहों से अलग हटकर सेवा और सामाजिक सरोकारों के साथ मनाया। उन्होंने व्यक्तिगत मिलन या भव्य आयोजन से दूरी बनाते हुए जन्मदिन को वर्चुअल माध्यम से मनाने का निर्णय लिया जिससे अधिक से अधिक लोग सेवा कार्यों से जुड़ सकें।मंत्री के इस आह्वान पर प्रदेशभर में उनके समर्थक कार्यकर्ता और शुभचिंतक सामाजिक सेवा गतिविधियों में सक्रिय नजर आए। विभिन्न जिलों और बस्तियों में गरीब बेसहारा और जरूरतमंद लोगों को कंबल गर्म कपड़े और भोजन वितरित किया गया। ठंड के मौसम को देखते हुए यह पहल खास तौर पर जरूरतमंदों के लिए राहत लेकर आई।

    सेवा कार्य केवल भोजन और वस्त्र वितरण तक सीमित नहीं रहा। कई स्थानों पर निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर रक्तदान कार्यक्रम और जागरूकता अभियान भी आयोजित किए गए जिससे आम लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिला। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए बड़ी संख्या में पौधारोपण किया गया।शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान देते हुए नरेला विधानसभा क्षेत्र सहित अन्य इलाकों में विद्यार्थियों को किताबें और स्टेशनरी वितरित की गईं। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराकर शिक्षा को प्रोत्साहित किया गया।

    जन्मदिन के अवसर पर मंत्री विश्वास सारंग ने मथुरा में संतजनों को भोजन कराया और गिरिराज धाम में दर्शन-पूजन कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान उन्होंने सामाजिक एकता सेवा और संवेदनशीलता को जीवन का महत्वपूर्ण मूल्य बताया।सोशल मीडिया पर भी इस अनूठे जन्मदिन की झलक देखने को मिली। ट्विटर एक्स पर HBDVishvasSarang हैशटैग लंबे समय तक ट्रेंड करता रहा। मंत्री ने जनता के प्रति आभार जताते हुए कहा कि जनता का विश्वास और आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने यह भी कहा कि जन्मदिन जैसे व्यक्तिगत अवसरों को समाज सेवा से जोड़ना हर सार्वजनिक प्रतिनिधि का दायित्व होना चाहिए।

    सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रयास समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और नेतृत्व की सही परिभाषा प्रस्तुत करते हैं। वर्चुअल माध्यम से जन्मदिन मनाने का यह प्रयोग दिखाता है कि व्यक्तिगत उत्सव से अधिक समाज के प्रति जिम्मेदारी अहम है।कुल मिलाकर विश्वास सारंग का जन्मदिन केवल एक व्यक्तिगत अवसर न होकर सेवा सहयोग और सामाजिक चेतना का प्रतीक बनकर सामने आया जिसने जनसेवा के नए मानक स्थापित किए।

  • MP: अशोकनगर में कुख्यात सट्टा किंग के 3 मंजिला होटल पर चला प्रशासन का बुलडोजर

    MP: अशोकनगर में कुख्यात सट्टा किंग के 3 मंजिला होटल पर चला प्रशासन का बुलडोजर

    अशोकनगर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के अशोकनगर (Ashoknagar) में प्रशासन ने होटल आजाद पैलेस (Hotel Azad Palace) पर बुलडोजर (Bulldozer) चला दिया। बिना अनुमति निर्माण और नियमों के उल्लंघन के कारण तीन मंजिला होटल के अगले और पिछले हिस्से को जमींदोज कर दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स मौजूद रही। मौके पर ड्रोन भी तैनात किए गए थे। यह होटल आजाद खान नाम के शख्स का बताया जाता है। आजाद खान जेल में बंद है। इससे पहले उसके फार्म हाउस पर भी कार्रवाई की जा चुकी है।


    क्या आरोप?

    आजाद खान पर ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क चलाने का आरोप है। उसका नाम कई आपराधिक मामलों में भी सामने आया है। ये सारे प्रकरण जांच की केंद्र और न्यायिक दायरे में हैं। प्रशासन की मुख्य कार्रवाई उसके तीन मंजिला होटल आजाद पैलेस पर हुई। नगर पालिका की टीम ने पुलिस के साथ मिलकर होटल के अवैध हिस्सों को जमींदोज कर दिया। इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए होटल के आसपास की दुकानों को बंद करा दिया गया था।


    क्या बोला प्रशासन?

    एसडीएम सुब्रत त्रिपाठी ने कहा- होटल आजाद पैलेस, आजाद खान और शाहिद खान का है जिन पर 5 लाख रुपये बकाया भी है। यह होटल नगर निगम की मंजूरी के बिना अवैध रूप से चलाया जा रहा था। नगर निगम ने उन्हें तीन नोटिस जारी किए थे। अब होटल के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई की जा रही है। आरोपियों का कोलुआ में एक और फार्महाउस भी था, जिसे बिना इजाजत के बनाया गया था।


    100 पुलिसकर्मी रहे तैनात, ड्रोन से निगरानी

    साथ ही आसपास बैरिकेडिंग कर दी गई थी। मौके पर लगभग 100 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। ड्रोन और वीडियो कैमरों की निगरानी में जेसीबी ने होटल के अगले और पिछले हिस्सों को जमींदोज कर दिया।


    वित्तीय गड़बड़ी का भी आरोप

    बताया जाता है कि आजाद खान की भूमिका कथित सट्टा नेटवर्क तब उजागर हुई थी जब गुना और अशोकनगर पुलिस ने कुछ सटोरियों के बैंक ट्रांजैक्शन की जांच की। जांच में सामने आया कि आरोपी सट्टा के साथ ही एक कोऑपरेटिव सोसाइटी की आड़ में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितताएं भी कर रहा था। आरोपी आजाद खान की मुश्किलें तब बढ़ गईं जब देहात थाना क्षेत्र में दो भाइयों की आत्महत्या के मामले में उस पर उकसाने का आरोप लगा।


    आलीशान फार्म हाउस पर भी हो चुका है ऐक्शन

    इसके बाद पुलिस ने आजाद खान को गिरफ्तार कर के उसे जेल भेज दिया। आजाद खान की गिरफ्तारी के समय वह घायल अवस्था में लंगड़ाते हुए देखा गया था। इससे पहले प्रशासन ने कोलुआ गांव के पास स्थित उसके दो मंजिला आलीशान फार्म हाउस पर भी कार्रवाई की थी। प्रशासन का कहना था कि वह बिना मंजूरी के सड़क के बहुत करीब बना था। अब सारे आरोप न्यायिक कार्यवाही और जांच के दायरे में बताए जाते हैं।


    भाई पर भी आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप

    इतना ही नहीं, आजाद खान के भाई राशिद खान उर्फ चिन्ना पर भी आरोप है कि उसने आत्महत्या करने वाले भाइयों के परिवार को धमकाया और राजीनामे का दबाव बनाया। मौजूदा वक्त में सरकार ने आजाद खान की केबीएन साख सहकारी संस्था के सभी लेनदेन पर रोक लगा दी है। मंत्री विश्वास सारंग ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई ने शहर में खलबली मचा दी है।

  • MP: नर्मदा तट पर पेशाब… भड़के IAS अफसर ने युवक को जड़े थप्पड़, जमीन में गाड़ने की दी धमकी

    MP: नर्मदा तट पर पेशाब… भड़के IAS अफसर ने युवक को जड़े थप्पड़, जमीन में गाड़ने की दी धमकी


    नरसिंहपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के नरसिंहपुर जिले (Narsinghpur district) में नर्मदा नदी (Narmada River) पर बने एक घाट से कुछ दूरी पर एक युवक को पेशाब करता देख एक IAS अधिकारी का पारा इतना चढ़ गया कि उन्होंने उसे दो थप्पड़ रसीद कर दिए। इतना ही नहीं उनकी देखादेखी उनके गार्ड ने भी युवक को एक चांटा जड़ दिया। हाथ उठाने वाले अधिकारी की पहचान गजेंद्र नागेश (Gajendra Nagesh) के रूप में हुई है, और इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हो गया है, जिसमें नागेश उस युवक को गालियां देते और थप्पड़ मारते नजर आ रहे हैं।

    घटना के वक्त वहां मौजूद लोगों ने बताया कि युवक घाट के पीछे पेशाब करने के लिए गया था, तभी वहां आरोपी अधिकारी आ पहुंचे और उसे समझाने की बजाय उस पर हाथ उठाया शुरू कर दिया। एक रिपोर्ट के अनुसार अधिकारी ने जिस युवक को सरेआम थप्पड़ मारे उसकी पहचान बृजेश नौरिया के रूप में हुई है, जो कि घाट के पास एक जनरल स्टोर्स चलाता है।


    अधिकारी ने कहा- इधर आ लौंडे

    घटना का जो वीडियो सामने आया है, उसमें वह अधिकारी कहते दिखाई दे रहे हैं, ‘नर्मदाजी के घाट क्या पेशाब करने के लिए हैं। इधर आओ लौंडे।’ इसी बीच वहां खड़ा एक बुजुर्ग पुजारी अपनी परेशानी बताते हुए IAS अधिकारी से कहता है, ‘क्या करें सर, कहां जाएं, कोई व्यवस्था नहीं है।’ तब वह अधिकारी कहते हैं, ‘तो कहीं दूर जाकर करोगे या नर्मदा के घाट पर ही करोगे।’


    ‘हटवाओ इसकी दुकान, फिंकवाओ इसके यहां से’

    इसके बाद अधिकारी उस युवक के पास जाते हैं और कहते हैं, ‘साले वहां पेशाब करने गया था’, इतना कहते ही वे उस पर हाथ उठा देते हैं, और इसके बाद उसका नाम पूछते हुए एकबार फिर उसे जोरदार थप्पड़ मार देते हैं और कहते हैं साले वहां पेशाब करने गया था, इसके बाद वह अपने साथ आए अमले से कहते हैं हटवाओ इसकी दुकान कहां है, फिंकवाओ इसको यहां से, क्या नाम है इसका, ये मुझे दिखना नहीं चाहिए एक महीने तक।’ इसके बाद जब वहां खड़े बुजुर्ग उस अधिकारी को समझाने की कोशिश करते हैं, तो अधिकारी गुस्से में उनसे कहता है, ‘मैं तुम्हें रेत में गड़वा दूंगा, जितना ऊपर दिख रहे हो ना, उतना ही अंदर करवा दूंगा।’

    प्राप्त जानकारी के अनुसार यह घटना शहर के बरमान रेत घाट पर शनिवार को हुई थी, और इसका वीडियो सोमवार को वायरल हो गया। जिसके बाद लोगों में गुस्सा भी फैल गया और वे उस अधिकारी पर युवक का अपमान, पद का दुरुपयोग और दुर्व्यवहार करने जैसे आरोप लगाने लगे।

    उधर अधिकारी ने जिस बुजुर्ग पुजारी को जमीन में गाड़ने की धमकी दी, उनकी पहचान कैलाश चंद्र मिश्रा के रूप में हुई है, जिन्होंने वहां सार्वजनिक शौचालय नहीं होने को लेकर शिकायत की तो अधिकारी ने उन्हें भी डपट दिया था। इसके बाद मिश्रा ने यह भी दावा किया कि उसे वहां सजा भी दी गई और बतौर सजा उठक-बैठक लगाने के लिए मजबूर भी किया गया।

    इस घटना को लेकर जिले के पुजारियों और ब्राह्मण समुदाय के लोगों में भारी नाराजगी है और इसे लेकर उन्होंने जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को एक लिखित शिकायत भी कर दी है। वहीं इलाके के एक पुलिस अधिकारी ने भी इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि ब्राह्मण समुदाय के 25-30 लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल आया था और उन्होंने IAS अधिकारी के संबंध एक ज्ञापन भी सौंपा है। उधर IAS अधिकारी ने अपने किए का बचाव करते हुए कहा कि उनका इरादा सिर्फ नदी की पवित्रता की रक्षा करना था।