Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल में भव्य ध्वज महोत्सव: श्रद्धालुओं ने किया अभिषेक और ध्वज वरघोड़ा में भक्ति का झूमता उत्सव

    भोपाल में भव्य ध्वज महोत्सव: श्रद्धालुओं ने किया अभिषेक और ध्वज वरघोड़ा में भक्ति का झूमता उत्सव


    भोपाल। भोपाल के एयरपोर्ट रोड स्थित श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ श्वेतांबर जैन मंदिर में शनिवार को ध्वजा महोत्सव का आयोजन भव्य रूप से हुआ। मंदिर परिसर में धार्मिक उल्लास और भक्ति का माहौल नजर आया।

    मंदिर समिति के अध्यक्ष आई.एल. मेहता ने बताया कि आचार्य मुक्ति सागर सूरीश्वर महाराज और आचार्य अचल मुक्ति सागर महाराज के सानिध्य में मूलनायक शंखेश्वर पार्श्वनाथ जिन प्रतिमाओं का विधिपूर्वक अभिषेक और पूजन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर नमोकार मंत्र का सामूहिक जाप किया और धार्मिक लाभ प्राप्त किया।

    पूजन के बाद भव्य ध्वज वरघोड़ा निकाला गया। इस दौरान श्रद्धालु प्रभु भक्ति में झूमते और नृत्य करते हुए आगे बढ़े, जिससे पूरे इलाके में धार्मिक उत्साह और सांस्कृतिक उल्लास का माहौल बन गया।

    कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिसमें भक्तिमय गीत और जैन धर्म से जुड़ी कथाएं प्रस्तुत की गईं। मंदिर समिति ने पूरे आयोजन को आकर्षक साज-सज्जा और सुरक्षा इंतजाम के साथ संपन्न कराया।

    इस अवसर पर चेंबर ऑफ कॉमर्स के महामंत्री ललित तातेड, श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ के अध्यक्ष राजेश तातेड, श्री आदिनाथ संघ तुलसी नगर के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र कोठारी, महिला मंडल की शिल्पा कोठारी सहित समाज के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।

    महोत्सव में शामिल श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे आयोजन धर्म, संस्कृति और भक्ति को जीवंत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और यह नए युवाओं को धार्मिक मूल्यों और सामाजिक एकता से जोड़ते हैं।

  • मध्य प्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना में बड़ा ड्रॉप आउट, केवल 20% बेटियां ही बन पाएंगी लखपति

    मध्य प्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना में बड़ा ड्रॉप आउट, केवल 20% बेटियां ही बन पाएंगी लखपति


    भोपाल । मध्य प्रदेश में बेटियों के सशक्तिकरण और लिंगानुपात सुधारने के उद्देश्य से वर्ष 2007 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा शुरू की गई लाड़ली लक्ष्मी योजना अब गंभीर समीक्षा के दौर में है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि योजना में शामिल बेटियों का सफर आधे रास्ते में ही रुक जाता है।

    कक्षा 5वीं उत्तीर्ण करने के बाद लगभग 52% बेटियां पढ़ाई छोड़ देती हैं। कक्षा 6वीं में छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाली कुल 13 67 897 बालिकाओं में से कक्षा 9वीं तक पहुंचने पर संख्या घटकर 7 06 123 रह जाती है। यानी करीब 48% बेटियां मध्य विद्यालय में ही सिस्टम से बाहर हो जाती हैं। यह गिरावट हायर सेकेंडरी में और तेज हो जाती है। कक्षा 11वीं में केवल 2 72 443 और 12वीं में 1 56 378 बेटियां ही छात्रवृत्ति की पात्र बचती हैं।

    स्नातक स्तर तक पहुंचने वाली बेटियों की संख्या और भी कम है। कुल पंजीकृत लाड़लियों में से केवल 22 022 छात्राएं कॉलेज तक पहुंच पाई हैं और यही वो संख्या है जिन्हें योजना के तहत निर्धारित 1 लाख 43 हजार रुपए की पूरी राशि मिलने की संभावना है। यानी लगभग 80% बेटियां लखपति बनने की दौड़ में पीछे रह जाती हैं।

    पढ़ाई छोड़ने का मुख्य कारण योजना की पात्रता नियमों में बताया गया है। विभाग के अनुसार केवल वही बालिकाएं छात्रवृत्ति की पात्र होती हैं जो कक्षा 5वीं पास कर कक्षा 6वीं में प्रवेश लेती हैं और अन्य सभी शर्तें पूरी करती हैं। वर्तमान स्थिति के अनुसार दिसंबर 2025 तक योजना के तहत कुल 813.20 करोड़ रुपए वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा उन लाड़लियों का डेटा भी विभाग एकत्रित कर रहा है जिन्हें पंजीकरण के बावजूद छात्रवृत्ति नहीं मिली।

    योजना के तहत आर्थिक सहायता इस प्रकार दी जाती है: कक्षा 6वीं में प्रवेश पर 2 000 रुपए कक्षा 9वीं में 4 000 रुपए कक्षा 11वीं में 6 000 रुपए कक्षा 12वीं में 6 000 रुपए और ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन/व्यावसायिक पाठ्यक्रम में प्रवेश पर 25 000 रुपए। इसके अलावा बालिका की उम्र 21 वर्ष पूरी होने 12वीं उत्तीर्ण करने और निर्धारित आयु में विवाह होने पर 1 लाख रुपए की अंतिम किश्त सरकार द्वारा दी जाती है।

    योजना के इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि शुरुआती उत्साह के बावजूद बेटियों का लखपति बनने का सपना आधे रास्ते में ही टूट रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि dropout रोकने के लिए स्कूल स्तर पर निरंतर निगरानी परिवारों को जागरूक करना और समय पर छात्रवृत्ति वितरण जरूरी है ताकि लाड़लियों का शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जा सके।

  • MP में स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के संकेत: स्टाइपेंड को लेकर जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन तेज, जस्टिस मार्च

    MP में स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के संकेत: स्टाइपेंड को लेकर जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन तेज, जस्टिस मार्च


    भोपाल ।मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका के बीच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन तेज हो गया है। स्टाइपेंड में बढ़ोतरी और लंबित भुगतान को लेकर नाराज रेजिडेंट डॉक्टरों ने विरोध का नया चरण शुरू कर दिया है। प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर काली पट्टी बांधकर ड्यूटी कर रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस आंदोलन का नेतृत्व Junior Doctors Association जूडा कर रही है जिसने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो सोमवार से नॉन इमरजेंसी सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा।

    आंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र प्रदेश की राजधानी Bhopal सहित अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेज बन गए हैं। जूडा के पदाधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार के 7 जून 2021 के आदेश के अनुसार 1 अप्रैल 2025 से CPE के आधार पर स्टाइपेंड में बढ़ोतरी लागू होनी थी और साथ ही लंबित एरियर का भुगतान भी किया जाना था। लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। डॉक्टरों का आरोप है कि बार बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद भुगतान और संशोधन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है।

    जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि स्टाइपेंड में देरी केवल आर्थिक समस्या नहीं है बल्कि इसका असर उनके मानसिक और पेशेवर मनोबल पर भी पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेजों में लंबे समय तक ड्यूटी करने और मरीजों की जिम्मेदारी संभालने के बावजूद उन्हें अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। इसी वजह से अब उन्होंने चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति अपनाई है।

    जूडा के अनुसार विरोध की शुरुआत काली पट्टी बांधकर काम करने से की गई है ताकि मरीजों की सेवा भी जारी रहे और सरकार तक उनकी आवाज भी पहुंचे। इसके बाद रविवार को डॉक्टर जस्टिस मार्च निकालेंगे जिसमें बड़ी संख्या में रेजिडेंट डॉक्टर शांतिपूर्ण तरीके से शामिल होंगे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे। इस मार्च का उद्देश्य शासन और प्रशासन को यह संदेश देना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और अब इस पर तुरंत निर्णय लिया जाना चाहिए।

    डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इसके बाद भी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो सोमवार से नॉन इमरजेंसी सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा। इसमें ओपीडी रूटीन चेकअप और सामान्य चिकित्सा सेवाएं शामिल होंगी। हालांकि जूडा ने भरोसा दिलाया है कि इमरजेंसी सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी ताकि गंभीर मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो।

    गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में भी जूनियर डॉक्टर इसी मुद्दे को लेकर विरोध जता चुके हैं लेकिन स्टाइपेंड संशोधन का मामला अब भी अटका हुआ है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल एजुकेशन विभाग की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है।

  • पुलिया से 20 फीट नीचे गिरी गर्भवती महिला, अस्पताल पहुंचते ही दिया बच्ची को जन्म; हादसे के बाद भी मां-बेटी सुरक्षित

    पुलिया से 20 फीट नीचे गिरी गर्भवती महिला, अस्पताल पहुंचते ही दिया बच्ची को जन्म; हादसे के बाद भी मां-बेटी सुरक्षित


    खरगोन । मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक गंभीर सड़क हादसे के बाद भी मां और नवजात की जान सुरक्षित बच गई। जिले के भगवानपुरा क्षेत्र में स्थित सिरवेल के पास शुक्रवार को एक पुलिया पर बड़ा हादसा हो गया। एक अज्ञात बाइक की टक्कर के बाद बाइक सवार दंपती पुलिया से करीब 20 फीट नीचे जा गिरे। हादसे में गर्भवती महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, लेकिन अस्पताल पहुंचते ही उसने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।

    मिली जानकारी के अनुसार दंपती बाइक से अस्पताल की ओर जा रहे थे। बताया जा रहा है कि महिला गर्भवती थी और उसकी तबीयत ठीक नहीं लग रही थी, इसलिए परिवार के सदस्य उसे अस्पताल लेकर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में सिरवेल के पास बनी पुलिया पर सामने से आ रही एक तेज रफ्तार बाइक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक का संतुलन बिगड़ गया और दंपती सीधे पुलिया से नीचे जा गिरे।

    करीब 20 फीट नीचे गिरने के कारण दोनों को चोटें आईं, वहीं गर्भवती महिला की हालत को लेकर आसपास मौजूद लोगों में चिंता बढ़ गई। हादसे की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और घायल दंपती की मदद की। स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए महिला को उठाकर तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।

    अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने महिला का प्राथमिक उपचार शुरू किया। इसी दौरान महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने तुरंत जरूरी इंतजाम किए और कुछ ही देर में महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। यह खबर सुनते ही वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली, क्योंकि हादसे की गंभीरता को देखते हुए सभी को मां और बच्चे की सुरक्षा को लेकर चिंता थी।

    डॉक्टरों के अनुसार हादसे के बावजूद मां और नवजात दोनों सुरक्षित हैं। फिलहाल महिला का अस्पताल में उपचार चल रहा है और डॉक्टर उसकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। परिवार के सदस्यों ने भी राहत जताई है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी मां और बच्ची दोनों स्वस्थ हैं।

    इस घटना के बाद पूरा मामला इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोग इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं कि इतनी ऊंचाई से गिरने के बावजूद महिला ने सुरक्षित बच्ची को जन्म दिया। वहीं पुलिस अज्ञात बाइक चालक की तलाश में जुटी हुई है और मामले की जांच की जा रही है।

  • ईरान-इजराइल युद्ध का असर रसोई तक: LPG सिलेंडर 60 रुपये महंगा, कमर्शियल गैस में भी बड़ी बढ़ोतरी

    ईरान-इजराइल युद्ध का असर रसोई तक: LPG सिलेंडर 60 रुपये महंगा, कमर्शियल गैस में भी बड़ी बढ़ोतरी


    जबलपुर । मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और Iran–Israel conflict का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय हालात और कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव के बीच देश में रसोई गैस के दामों में बढ़ोतरी कर दी गई है। तेल कंपनियों ने घरेलू Liquefied Petroleum Gas (LPG) cylinder की कीमतों में 60 रुपये का इजाफा किया है, जबकि कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 115 रुपये तक बढ़ा दिए गए हैं। नई कीमतें तुरंत प्रभाव से लागू कर दी गई हैं और तेल कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपडेट कर दी गई हैं।

    इस बढ़ोतरी के बाद आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है। खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी बड़ी चिंता बन सकती है, क्योंकि रसोई गैस पहले ही घरेलू बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से घरों का मासिक खर्च बढ़ना तय है।

    मध्यप्रदेश की बात करें तो यहां गैस सिलेंडर की कीमतें देश के कई बड़े शहरों से ज्यादा हो गई हैं। प्रदेश के शहरों में घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद अब इसकी कीमत करीब 920 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 114 रुपये का इजाफा हुआ है, जिसके बाद इसकी कीमत 2100 रुपये से भी ज्यादा हो गई है।

    दिलचस्प बात यह है कि कई मामलों में मध्यप्रदेश के उपभोक्ताओं को देश के बड़े महानगरों से भी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। उदाहरण के तौर पर New Delhi और Mumbai जैसे महानगरों की तुलना में मध्यप्रदेश के कई शहरों में गैस सिलेंडर महंगा मिल रहा है। परिवहन लागत और टैक्स संरचना के कारण अक्सर राज्यों में गैस के दामों में अंतर देखने को मिलता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो आने वाले समय में ईंधन और ऊर्जा से जुड़ी अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं। इसका असर परिवहन, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी देखने को मिल सकता है।

    कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने का असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों पर भी पड़ने की संभावना है। इससे खाने पीने की चीजों की कीमतों में भी धीरे धीरे बढ़ोतरी हो सकती है। यानी गैस सिलेंडर की कीमतों में हुई यह बढ़ोतरी सिर्फ घर की रसोई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बाजार में भी महंगाई का दबाव बढ़ा सकती है।

    फिलहाल नई दरें लागू हो चुकी हैं और उपभोक्ताओं को अब बढ़ी हुई कीमतों पर ही गैस सिलेंडर खरीदना होगा। ऐसे में मिडिल ईस्ट की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है, क्योंकि वहां के हालात का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।

  • एक महीने के लिए एकांतवास में जाएंगे बागेश्वर बाबा

    एक महीने के लिए एकांतवास में जाएंगे बागेश्वर बाबा


    छतरपुर। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक महीने के लिए सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह दूर रहने वाले हैं। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर ने खुद बताया है कि वे गुरु आज्ञा से देवभूमि उत्तराखंड में स्थित बद्रीनाथ की पहाड़ियों में एक महीने का एकांतवास करेंगे, जहां वे तप और साधना में लीन रहेंगे।
    इस दौरान वे मोबाइल फोन, टीवी, इंटरव्यू, कथा और अपने प्रसिद्ध दिव्य दरबार से भी पूरी तरह दूर रहेंगे। यानी पूरे महीने तक वे किसी भी तरह के सार्वजनिक कार्यक्रम या संपर्क में नहीं रहेंगे।

    गुरु आज्ञा से करेंगे साधना

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि उन्हें गुरु की आज्ञा मिली है, इसलिए वे बद्रीनाथ की बर्फीली पहाड़ियों में तपस्या करने जा रहे हैं। उनके मुताबिक जिस मुकाम पर वे आज खड़े हैं, वहां खुद को साधना और आत्मसंयम बनाए रखना बेहद जरूरी है।

    मोबाइल, टीवी और कथा से रहेंगे दूर

    बागेश्वर बाबा ने कहा कि मई महीने में वे पूरी तरह एकांत में रहेंगे। इस दौरान वे मोबाइल फोन, टीवी, इंटरव्यू, कथा कार्यक्रम और लोगों से मुलाकात—सब कुछ त्याग देंगे, ताकि पूरी तरह भक्ति और साधना पर ध्यान दे सकें।

    साधना के बाद लौटेंगे नई ऊर्जा के साथ

    उन्होंने कहा कि यह साधना उनके लिए आत्ममंथन और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने का समय होगा। एक महीने बाद जब वे लौटेंगे तो नई ऊर्जा, नए विचार और नई तैयारी के साथ समाज और सनातन के लिए फिर से काम शुरू करेंगे।

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जो कुछ अब तक हासिल किया है, उसे बनाए रखने और सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए साधना जरूरी है, इसलिए वे कुछ समय के लिए दुनिया से दूर रहकर तप करना चाहते हैं।

  • मध्य प्रदेश की जेलें ओवरलोड: 30,764 की क्षमता के मुकाबले 42,119 कैदी, आधे से ज्यादा अंडर ट्रायल

    मध्य प्रदेश की जेलें ओवरलोड: 30,764 की क्षमता के मुकाबले 42,119 कैदी, आधे से ज्यादा अंडर ट्रायल

    भोपाल। मध्य प्रदेश की जेलें हाल ही में कैदियों की बढ़ती संख्या के दबाव में हैं। विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी सामने आई कि प्रदेश की 133 जेलों में कुल 30,764 कैदियों की क्षमता होने के बावजूद वर्तमान में 42,119 कैदी बंद हैं। इसका मतलब है कि करीब 12 हजार कैदी अतिरिक्त हैं और जेलें अपनी क्षमता से लगभग 35 प्रतिशत अधिक लदी हुई हैं।

    जेलों में भीड़ का आंकड़ा
    बड़ी जेलों में भीड़ सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है। रीवा सेंट्रल जेल की क्षमता केवल 886 है, लेकिन यहां 2,282 कैदी बंद हैं, यानी 1,396 कैदी अतिरिक्त हैं। इंदौर सेंट्रल जेल में 1,280 की क्षमता के मुकाबले 2,191 कैदी हैं, जबकि भोपाल सेंट्रल जेल में 2,641 की क्षमता के लिए 3,454 कैदी बंद हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि मध्य प्रदेश की जेलों में भीड़ का स्तर खतरनाक सीमा पर है।

    अंडर ट्रायल कैदियों की संख्या
    प्रदेश की जेलों में बंद लगभग आधे कैदी अंडर ट्रायल हैं, यानी उन्हें अभी तक अदालत से सजा नहीं मिली। कुल 42,119 कैदियों में से 22,261 विचाराधीन हैं, यानी 52.85 प्रतिशत। इन अंडर ट्रायल कैदियों में 21,410 पुरुष और 851 महिला शामिल हैं। जिला जेलों में यह संख्या और भी अधिक है, जहां 10,002 पुरुष और 516 महिला कैदी विचाराधीन हैं। इन आंकड़ों से यह साफ है कि मध्य प्रदेश की जेल प्रणाली पर अत्यधिक दबाव है और ओवरलोडिंग की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है।

  • रिश्तों का 'कसाई': पार्टी के बहाने बेटे को हटाया, फिर दादी से दरिंदगी कर दांतों से काट डाला चेहरा

    रिश्तों का 'कसाई': पार्टी के बहाने बेटे को हटाया, फिर दादी से दरिंदगी कर दांतों से काट डाला चेहरा


    राजगढ़। मर्यादा, ममता और रिश्तों के कत्ल की एक ऐसी वीभत्स कहानी राजगढ़ के भोजपुर इलाके से सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। ग्राम घाटाखेड़ी में एक कलयुगी पोते ने अपनी ही बुजुर्ग दादी को हवस का शिकार बनाया और विरोध करने पर उनके चेहरे को दांतों से नोचकर मौत के घाट उतार दिया। यह वारदात केवल एक अपराध नहीं, बल्कि हैवानियत की वो पराकाष्ठा है जिसे सुनकर पत्थर दिल भी पसीज जाए।

    घटना की पटकथा 3 मार्च 2026 की रात को लिखी गई, जब आरोपी रामनिवास भील ने एक सुनियोजित साजिश रची। उसने अपनी बुजुर्ग दादी पर लंबे समय से गंदी नजर रखी हुई थी। उस रात उसने एक मुर्गा खरीदा और ‘मुर्गा पार्टी’ का लालच देकर बुजुर्ग के बेटे (अपने चाचा) को खेत पर बुला लिया। जब बेटा पार्टी में मशगूल हो गया, तो रामनिवास चुपके से वहां से निकला और उस टापरी (झोपड़ी) पर जा पहुँचा जहाँ बुजुर्ग महिला अकेली थी।

    खौफनाक मंजर तब शुरू हुआ जब आरोपी ने आवाज देकर अपनी दादी को बाहर बुलाया और जबरन खींचकर गेहूं के खेत में ले गया। वहां उसने बुजुर्ग महिला के साथ दुष्कर्म (Rape) किया। जब बेबस दादी ने अपनी अस्मत बचाने के लिए शोर मचाया और विरोध किया, तो रामनिवास के भीतर का शैतान जाग उठा। उसने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए अपने दांतों से महिला की नाक और मुंह को बुरी तरह काट लिया। तड़पती हुई बुजुर्ग को लहूलुहान हालत में छोड़कर आरोपी नग्न अवस्था में ही वहां से भाग निकला। अगली सुबह जब बेटा खेत पर पहुँचा, तो माँ को मरणासन्न स्थिति में पाया, जिन्होंने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

    पुलिस के लिए यह ‘अंधा कत्ल’ एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक केएल बंजारे और भोजपुर थाना प्रभारी संगीता शर्मा की टीम ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए महज 24 घंटे में इस हैवान को बेनकाब कर दिया। घटनास्थल के पास झाड़ियों में छिपा आरोपी का मोबाइल फोन और खून से सनी शर्ट उसके खिलाफ सबसे बड़े गवाह बने। ग्रामीणों ने भी पुष्टि की कि घटना की रात रामनिवास को बिना कपड़ों के भागते देखा गया था, जिसके शरीर पर खून के निशान थे।

    पूछताछ में जब आरोपी ने अपना जुर्म कबूला, तो पुलिसकर्मी भी दंग रह गए। आरोपी ने बताया कि उसने योजना के तहत ही बेटे को पार्टी में फंसाया था ताकि वह अपनी दरिंदगी को अंजाम दे सके। फिलहाल, पुलिस ने आरोपी रामनिवास को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है और उसके खिलाफ हत्या व बलात्कार की संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है।

  • तपने लगा मध्‍य प्रदेश, इंदौर में पारा 36 डिग्री पार, भोपाल-ग्वालियर में 35 डिग्री से ज्यादा

    तपने लगा मध्‍य प्रदेश, इंदौर में पारा 36 डिग्री पार, भोपाल-ग्वालियर में 35 डिग्री से ज्यादा



    भोपाल। मध्य प्रदेश में मार्च की शुरुआत से ही गर्मी का असर तेज होता दिखाई दे रहा है। आमतौर पर प्रदेश में 15 मार्च के बाद तापमान तेजी से बढ़ता है, लेकिन इस बार ट्रेंड बदल गया है और महीने के शुरुआती दिनों में ही पारा चढ़ने लगा है। सागर और ग्वालियर-चंबल संभाग के बाद अब इंदौर और उज्जैन क्षेत्र में भी गर्मी का प्रभाव बढ़ गया है।

    इंदौर में अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। वहीं भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। शुक्रवार को नर्मदापुरम प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 38.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा धार, दमोह, सागर, शाजापुर, गुना, छतरपुर, रतलाम और टीकमगढ़ में भी तापमान 36 डिग्री या उससे अधिक रहा। रात का तापमान भी 18 डिग्री से ऊपर बना हुआ है।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के पूर्वी हिस्से से एक टर्फ गुजर रही है और साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी सक्रिय है, लेकिन इसका प्रदेश के मौसम पर ज्यादा असर नहीं पड़ रहा है। आसमान साफ होने के कारण सूरज की तेज किरणें सीधे जमीन पर पड़ रही हैं, जिससे गर्मी का असर बढ़ गया है।

    मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले दो दिनों में प्रदेश के अधिकतम तापमान में करीब 4 डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में संभावना है कि मार्च के पहले पखवाड़े में ही कई शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए। विशेषज्ञों के मुताबिक इस साल अप्रैल और मई में हीट वेव यानी लू चलने की संभावना है, जो करीब 15 से 20 दिनों तक रह सकती है। हालांकि मार्च में फिलहाल लू चलने का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

    तेज धूप को देखते हुए विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि दोपहर के समय करीब तीन घंटे तक धूप से बचकर छांव में रहने की कोशिश करें।

  • यूपीएससी 2025 में मप्र के दो युवा टॉप 10 में, भोपाल के ईशान ने 5वीं और धार के पक्षल को मिली 8वीं रैंक

    यूपीएससी 2025 में मप्र के दो युवा टॉप 10 में, भोपाल के ईशान ने 5वीं और धार के पक्षल को मिली 8वीं रैंक


    भोपाल।
    संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में मध्य प्रदेश के दो युवाओं ने परचम लहराते हुए टॉप 10 में जगह बनाई है। भोपाल के ईशान भटनागर ने ऑल इंडिया 5वीं और धार जिले के पक्षल सेक्रेटरी ने 8वीं रैंक हासिल कर अपने क्षेत्र का नाम पूरे देश में रोशन किया है।

    यूपीएससी द्वारा शुक्रवार को सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी किया। इसमें 958 अभ्यर्थियों ने अलग-अलग सेवाओं के लिए क्वालिफाई किया। टॉप 5 रैंक भोपाल के ईशान भटनागर को मिली, जबकि धार जिले के पक्षल सेक्रेटरी ने 8वीं रैंक हासिल की।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यूपीएससी में सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि भोपाल के ईशान भटनागर और धार के पक्षल जैन का टॉप-10 में आना प्रदेश के युवाओं की प्रतिभा का प्रमाण है। उन्होंने सभी सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    सिविल सेवा परीक्षा में टॉप-5 रैंक हासिल करने वाले भोपाल के ईशान भटनागर अभी नागपुर में इंडियन रेवेन्यू सर्विस (आईआरएस) की ट्रेनिंग ले रहे हैं। ईशान के पिता मध्य प्रदेश सरकार में प्रिंसिपल एडवाइजर के तौर पर काम कर चुके हैं। अभी रिटायर हो चुके हैं। उनकी मां इंग्लिश की प्रोफेसर हैं।

    वहीं, धार जिले के छोटे कस्बे बाग के लिए गर्व की बात है कि यहां के होनहार युवा पक्षाल सेक्रेटरी ने यूपीएससी की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 8 हासिल कर क्षेत्र का नाम पूरे देश में रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार सहित पूरे नगर में खुशी और गर्व का माहौल है। लोगों ने मिठाइयां बांटकर और आतिशबाजी कर खुशियां मनाईं।

    पक्षाल का कहना है कि माता-पिता का आशीर्वाद और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रही। उनके पिता निलेश जैन कपड़ा व्यवसायी हैं, जबकि माता दीप्ति जैन गृहिणी हैं। परिवार के अनुसार प्रक्षाल बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे हैं और उन्होंने कड़ी मेहनत व लगन से यह मुकाम हासिल किया।

    पक्षाल ने बताया कि उन्होंने प्रारंभिक पढ़ाई बाग के महेश मेमोरियल स्कूल में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए वे इंदौर चले गए और बाद में उन्होंने आईआईटी कानपुर से फाइनेंस में पढ़ाई की। आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र में जाने के बजाय देश सेवा का रास्ता चुना और सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी। वे वर्ष 2022-23 के आसपास दिल्ली चले गए और वहीं रहकर यूपीएससी की तैयारी की।

    उनकी छोटी बहन क्रिया जैन ने बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया। कई बार ऐसा समय भी आया जब वे रोजाना केवल 3 से 4 घंटे ही सोते थे और दिनभर लाइब्रेरी में पढ़ाई करते थे। पहले प्रयास में उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) मिलने की संभावना थी लेकिन उनका लक्ष्य आईएएस बनना था, इसलिए उन्होंने तैयारी जारी रखी। दूसरे प्रयास में वे प्रीलिम्स में ही रह गए लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने शानदार सफलता हासिल करते हुए ऑल इंडिया रैंक 8 प्राप्त की।


    अशोकनगर के चितवन जैन को ऑल इंडिया रैंक-17

    अशोकनगर के चितवन जैन ने 17वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने बताया कि यह उनका तीसरा प्रयास था। चितवन के अनुसार, उन्होंने पढ़ाई को लेकर ज्यादा दबाव नहीं लिया और जरूरत के अनुसार रोज पढ़ाई की। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार के सहयोग को दिया।


    खंडवा की रूपल जायसवाल को ऑल इंडिया रैंक-43

    खंडवा की रूपल जायसवाल ने 43वीं रैंक हासिल की है। खास बात यह है कि पिछले प्रयास में उन्हें 512वीं रैंक मिली थी, लेकिन उन्होंने उस रैंक पर सेवा जॉइन नहीं की और दोबारा तैयारी की। इस बार टॉप-50 में जगह बनाकर उन्होंने बड़ी सफलता हासिल की। सफलता के बाद घर के बाहर लोगों ने आतिशबाजी कर जश्न मनाया।


    मऊगंज की समीक्षा द्विवेदी को ऑल इंडिया रैंक-56

    मऊगंज की समीक्षा द्विवेदी ने 56वीं रैंक हासिल कर टॉप-100 में जगह बनाई। उन्होंने तीसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की। समीक्षा का कहना है कि अगर लक्ष्य तय हो और लगातार मेहनत की जाए तो सफलता जरूर मिलती है। उन्होंने युवाओं से अपने लक्ष्य से पीछे न हटने की अपील की।


    नरसिंहपुर की दीक्षा पाटकर को ऑल इंडिया रैंक-88

    नरसिंहपुर जिले के करकबेल गांव की दीक्षा पाटकर ने 88वीं रैंक हासिल की। वह हेमराज पाटकर और अर्चना पाटकर की बेटी हैं। उनकी इस उपलब्धि से पूरे गांव में खुशी का माहौल है।


    ग्वालियर की सृष्टि गोयल को ऑल इंडिया रैंक-160

    ग्वालियर के मुरार क्षेत्र की सृष्टि गोयल ने 160वीं रैंक हासिल की। यह उनका पांचवां प्रयास था। उनके पिता सुनील गोयल का सोने-चांदी का व्यवसाय है। सृष्टि ने बताया कि वह पहले आईआईटी में नहीं जा सकीं। सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। प्लान की गई स्ट्रेटेजी आपको सफलता दिलाएगी। सोशल मीडिया जैसी ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूर रहना जरूरी है।


    गुना की देवांगी मीणा को ऑल इंडिया रैंक-236

    गुना जिले के कुंभराज की देवांगी मीणा ने 236वीं रैंक हासिल की। पिछले साल उन्हें 764वीं रैंक मिली थी। वह आईआरएस में चयनित हुई थीं। उनके पिता नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड में कार्यरत हैं।


    नरसिंहपुर की पूजा सोनी को ऑल इंडिया रैंक-249

    नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा में पदस्थ सब-डिविजनल रेवेन्यू ऑफिसर पूजा सोनी ने 249वीं रैंक हासिल की है। रेवेन्यू ऑफिसर की कामयाबी के लिए परिवार और रिश्तेदारों में खुशी की लहर है। हर कोई पूजा सोनी को बधाई भेज रहा है।


    सतना की भूमिका जैन को ऑल इंडिया रैंक-331

    सतना की भूमिका जैन ने 331वीं रैंक हासिल कर आईआरएस सेवा के लिए चयन प्राप्त किया है। वह कृष्णानगर के कपड़ा व्यवसायी मनोज जैन की बेटी हैं। भूमिका ने बताया कि यह उनका तीसरा अटेम्प्ट था। उन्होंने तीन साल दिल्ली में रहकर तैयारी करने में बहुत मेहनत की। भूमिका ने बताया कि अपने पहले अटेम्प्ट में बेसिक समझ हासिल करने के लिए सिर्फ़ कोचिंग ली। उसके बाद, उन्होंने पूरी तरह से सेल्फ-स्टडी पर भरोसा किया। दस किताबों के बजाय एक किताब को कॉन्सन्ट्रेशन के साथ पढ़ना ज्यादा फायदेमंद है।