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  • शरद पवार की शिंदे से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल, महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज

    शरद पवार की शिंदे से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल, महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज


    मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा परिसर में मंगलवार को हुई एक मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से विधान भवन में मुलाकात की। औपचारिक तौर पर इसे शिष्टाचार भेंट माना जा रहा है, लेकिन इसके समय और परिस्थितियों को देखते हुए इसे राजनीतिक नजरिए से भी अहम माना जा रहा है।

    शरद पवार महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद के मुद्दे पर महाराष्ट्र एकीकरण समिति की बैठक में शामिल होने के लिए विधान भवन पहुंचे थे। बैठक के बाद वे सीधे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय पहुंचे। इस दौरान उनके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता जयंत पाटील, जितेंद्र आव्हाड और शशिकांत शिंदे भी मौजूद थे।

    उस समय एकनाथ शिंदे कैबिनेट बैठक में व्यस्त थे, लेकिन पवार के पहुंचने की जानकारी मिलते ही उन्होंने बैठक बीच में रोककर उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच करीब 15 मिनट तक बातचीत हुई। राजनीतिक हलकों में इसे शिंदे की ओर से शरद पवार के प्रति सम्मान और संवाद की पहल के रूप में देखा जा रहा है।

    मुलाकात के बाद शिंदे दोबारा कैबिनेट बैठक में लौट गए, जबकि शरद पवार कुछ देर तक उनके कार्यालय में रुककर अपने विधायकों के साथ चर्चा करते रहे।

    हाल के दिनों में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुए थे। इसके बाद यह अटकलें भी लगाई जा रही थीं कि शिंदे की नजर अब शरद पवार गुट के जनप्रतिनिधियों पर भी हो सकती है। ऐसे माहौल में पवार का स्वयं शिंदे के कार्यालय पहुंचना कई राजनीतिक संदेशों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात से शरद पवार ने अपने विधायकों और नेताओं को यह संकेत देने की कोशिश की कि पार्टी नेतृत्व हर राजनीतिक गतिविधि पर नजर बनाए हुए है। इससे संभावित टूट-फूट की अटकलों के बीच पार्टी कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों का मनोबल बनाए रखने का प्रयास भी माना जा रहा है।

    इस मुलाकात को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए भी एक अप्रत्यक्ष राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। फडणवीस के बजाय सीधे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात कर पवार ने यह संकेत दिया कि वे सत्ता पक्ष के सभी प्रमुख नेताओं के साथ संवाद बनाए रखने की क्षमता रखते हैं। राजनीतिक मामलों में बातचीत के रास्ते खुले रखने की रणनीति शरद पवार की पहचान मानी जाती है।

    हालांकि, इस 15 मिनट की बातचीत में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसका खुलासा अब तक किसी भी पक्ष ने नहीं किया है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को आगामी राजनीतिक समीकरणों और रणनीतियों से जोड़कर देख रहे हैं। आने वाले दिनों में ही इस मुलाकात के वास्तविक राजनीतिक मायने स्पष्ट हो सकेंगे।

  • राजस्थान: सरकारी नौकरी के लिए आयुषी ने रची साजिश, भाई को जमीन का दिया लालच, बोलीं- बस..मां को मरवा दे

    राजस्थान: सरकारी नौकरी के लिए आयुषी ने रची साजिश, भाई को जमीन का दिया लालच, बोलीं- बस..मां को मरवा दे


    जयपुर । राजस्थान में जयपुर के एयरपोर्ट कॉलोनी में ढाई साल पहले कोर्ट में एलडीसी विजय वशिष्ठ उर्फ विजय शर्मा ने घर बनाया था जिसमें पत्नी निरज शर्मा, बेटी आयुषी शर्मा और मानसिक रूप से कमज़ोर बेटे के साथ रहता था. एक साल पहले विजय शर्मा की मौत हो जाती है. तब बेटी आयुषी शर्मा ने 12 th पास किया था. जब पिता की जगह अनुकंपा पर नौकरी करने की बारी आई तो बेटी ने कहा कि मुझे नौकरी दे दो. मां तैयार भी हो गई. लेकिन निरज शर्मा का भाई और आयुषी का मामा भी अपने जीजा जी के साथ लोअर कोर्ट में एलडीसी था उसने बहन को कहा कि तुम भी पढ़ी लिखी हो. तुम्हारी जिंदगी पड़ी है और 16 साल का बेटा मानसिक दिव्यांग है उसकी देख भाल कौन करेगा. बेटी को पढ़ा लिखा कर लायक बना देंगे. मां ने दिव्यांग बेटे के खातिर पति की जगह नौकरी कर ली.

    चचेरे भाई के साथ रहने लगी आयुषी
    इससे नाराज होकर 24 साल की बेटी आयुषी पिता के कल्याण कॉलोनी स्थित पुराने घर में जाकर रहने लगी और अपने ताऊ मोहन स्वरूप शर्मा के बेटे बलराम के साथ एलएलबी में एडमिशन ले लिया. दोनों चचेरे भाई बहन साथ रहने लगे. उसी दौरान आयुषी ने कहा कि मुझे अपनी मां को मारना है. अगर तुम मेरी मदद करोगे तो आगरा रोड की पांच करोड़ की पांच बीघा जमीन और भरतपुर के पांच करोड़ की चार बीघा जमीन तुझे दे दूंगी. मुझे मां के मरने के बाद नौकरी मिल जाएगी और जयपुर का दोनों घर मेरे पास हैं. डील तय होने के बाद दोनों ने निरज शर्मा के जेठ और बलराम के पिता मोहन को यह बात बताई.

    मां को घर से बाहर लाने के लिए टोटके
    आयुषी ने प्लान बनाया कि मां को गाड़ी से कुचलकर मार देंगे और हादसे का रूप दे देंगे. इसके बाद निरज शर्मा के जेठ मोहन शर्मा ने भरतपुर में हेमंत शर्मा से संपर्क साधा. एक महीने पहले हेमंत ने थार गाड़ी से निरज को घर के बाहर कुचलने की कोशिश की मगर निरज बच गई. मगर उसे शक हो गया था. उसने यह बात अपने भाई को बताई और घर से निकलना बंद कर दिया. उसके बाद मां को घर से निकालने के लिए आयुषी ने नए नए टोना टोटके के तरीके अपनाना शुरू किया. निंबू – मिर्चा और लाल रंग फेंकना शुरू कर दिया. निरज समझ गई थी खतरा है तो उसने पूरे घर में जाली लगाकर बाहर चार सीसीटीवी कैमरे लगा दिए थे.

    सुपारी किलर को दिए 7 लाख
    आयुषी को मां को मारने की जल्दी थी उसने फिर से अपने ताऊ को कहा प्लान बनाओ. ताउ मोहन शर्मा ने भरतपुर के रूपावास के हेमंत शर्मा से संपर्क किया. हेमंत ने उनको प्लान दिया और उसके बदले 7 लाख रूपए मांगे. फिर हेमंत ने हरियाणा नंबर का स्कॉर्पियो भरतपुर से 35 हजार में किराए पर ली और निरजा को कुचलने के लिए आकाश शर्मा और अरविंद शर्मा को हायर किया. निरज के रैकी के लिए रोहित और मोहित को हायर किया गया.

    मामा से रोते हुए बोली- मां मर गई है
    4 जुलाई को जब निरज अपने बेटे को लेकर फिजियोथैरेपिस्ट के यहां गई थी तो बेटी ने उसे जरूरी काम से घर आने के लिए कहा. निरज जब घर लौट रही थी तो 60 फीट पर रोड पर मोटरसाइकिल पर बैठे मोहित और रोहित ने इंतज़ार कर रहे स्कॉर्पियो में बैठे आकाश को इशारा किया. आकाश ने गाड़ी को सौ से ज्यादा की स्पीड से किनारे चल रही निरजा को टक्कर मारी जिससे वो 100 मीटर उछल कर गिरी और मौत हो गई. मां के मरने के बाद बेटी ने मामा को रोते हुए फोन किया कि मां का एक्सीडेंट हो गया और वो मर गई. ताउ तुरंत घर पहुंचा और शव को लेकर गांव रूपावास चले गए. मगर मामा को भांजी के हाव भाव को देखकर शक हुआ तो पुलिस से केवल इतना ही कहा कि एक्सीडेंट की जांच कर लो.

    पुलिस ने जब सीसीटीवी को खंगालना शुरू किया तो देखा निरज शर्मा तो सड़क पर बिल्कुल हीं किनारे चल रही थी और 60 फीट की चौड़ी सड़क पूरी खाली थी. पुलिस को शक गहराया तो आसपास के दूसरे सीसीटीवी खँगालना शुरू किया तो देख कि कुछ दूरी पर स्कॉर्पियो काफी पहले से खड़ी थी. दो लड़के दो सड़कों पर खड़े थे.

    …रुके भी नहीं पास में मौजूद लड़के?
    हादसे के बाद दोनों लड़के निरजा के शव को देखे बिना सीधे निकल जाते हैं और आगे जाकर एक मोटरसाइकिल सवार के साथ बैठकर निकल जाते है. पुलिस सीसीटीवी तलाशती आगे बढ़ी तो क्षतिग्रस्त स्कॉर्पियो मिला. जब स्कॉर्पियो के मालिक को पकड़ा तो उसने हेमंत शर्मा को किराये पर देना बताया. फिर हेमंत शर्मा को पकड़ा तो उसने आयुषी के ताउ मोहन शर्मा का नाम बताया. इस बीच चचेरा भाई बलराम भाग गया. पुलिस जब गांव रूपावास पहुंची तो कानून के छात्र आयुषी ने पुलिस को धमकाना शुरू कर दिया. फिर पुलिस ने भरतपुर के सेवर थाने के पुलिसकर्मियों और गांव वालों की मदद से आयुषी को उसके ताई के साथ थाने तक ये कहकर लाए कि बयान लेकर छोड़ देंगे. फिर ताई को घर भेजकर सीधे जयपुर लेकर आए जहाँ आरोपियों के सामने देख आयुषी ने सब क़ुबूल कर लिया.आयुषी को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है . पुलिस को उल्टे सीधे जवाब देती है. आजतक के कैमरे पर हमने उससे बहुत पूछना चाहा लेकिन बेहद शातिर आयुषी ने कुछ नहीं बोला.

  • बोरियों में भरकर लाया ₹10 के सिक्के, ₹1.10 लाख की बाइक खरीदने पहुंचे ग्राहक ने शोरूम कर्मचारियों को कर दिया हैरान

    बोरियों में भरकर लाया ₹10 के सिक्के, ₹1.10 लाख की बाइक खरीदने पहुंचे ग्राहक ने शोरूम कर्मचारियों को कर दिया हैरान

    नई दिल्ली । तेलंगाना के यादाद्री-भुवनगिरी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यहां एक व्यक्ति ने नई मोटरसाइकिल खरीदने के लिए पूरे ₹1.10 लाख का भुगतान केवल ₹10 के सिक्कों में किया। बड़ी मात्रा में सिक्कों से भरी बोरियां लेकर जब वह शोरूम पहुंचा तो वहां मौजूद कर्मचारी कुछ देर के लिए हैरान रह गए। बाद में सिक्कों की गिनती शुरू हुई, जिसमें कर्मचारियों को कई घंटे तक मेहनत करनी पड़ी।

    यह मामला चित्याला मंडल के वेलिमिनेंदु गांव के निवासी कोंडे रघुपति से जुड़ा है। उन्होंने नई मोटरसाइकिल खरीदने का फैसला किया और स्थानीय शोरूम पहुंचकर स्प्लेंडर प्लस मॉडल का चयन किया। वाहन की ऑन-रोड कीमत लगभग ₹1.10 लाख थी। आमतौर पर इतनी बड़ी राशि का भुगतान ऑनलाइन ट्रांसफर, बैंक चेक या बड़े मूल्य के नोटों के माध्यम से किया जाता है, लेकिन रघुपति अपने साथ केवल ₹10 के सिक्के लेकर पहुंचे।

    बताया गया कि सिक्के अलग-अलग बोरियों और थैलों में भरकर शोरूम लाए गए थे। जब भुगतान का समय आया तो शोरूम कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इतनी बड़ी मात्रा में सिक्कों की गिनती करना थी। कर्मचारियों ने सिक्कों को अलग-अलग ढेरों में बांटकर उनकी गड्डियां बनाईं और एक-एक करके पूरी राशि का मिलान किया। इस प्रक्रिया में काफी समय लगा और कर्मचारियों को लंबे समय तक लगातार गिनती करनी पड़ी।

    सिक्कों की संख्या अधिक होने के कारण शोरूम का सामान्य कामकाज भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ। हालांकि सभी सिक्के वैध पाए गए और पूरी राशि सही निकलने के बाद शोरूम प्रबंधन ने भुगतान स्वीकार कर लिया। इसके बाद आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ग्राहक को उनकी पसंद की नई बाइक सौंप दी गई।

    घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है। वीडियो में शोरूम कर्मचारी फर्श और टेबल पर बैठकर सिक्कों की गिनती करते दिखाई दे रहे हैं। बड़ी संख्या में रखे गए सिक्कों को व्यवस्थित तरीके से गिनने का दृश्य लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया और कई लोगों ने इस अनोखे भुगतान पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं।

    भारतीय मुद्रा प्रणाली के अनुसार सिक्के भी वैध मुद्रा हैं और निर्धारित नियमों के तहत उनका उपयोग भुगतान के लिए किया जा सकता है। हालांकि इतनी बड़ी राशि का भुगतान केवल सिक्कों में किया जाना बेहद दुर्लभ माना जाता है। यही कारण है कि यह घटना स्थानीय स्तर से निकलकर सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा का विषय बन गई।

    इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि वैध मुद्रा चाहे नोटों के रूप में हो या सिक्कों के रूप में, उसे स्वीकार किया जा सकता है। हालांकि व्यावहारिक तौर पर इतनी बड़ी मात्रा में सिक्कों का लेन-देन समय और श्रम दोनों की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण साबित होता है। फिलहाल तेलंगाना की यह अनोखी खरीदारी लोगों के बीच उत्सुकता और चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • E20 पेट्रोल पर सियासी बहस तेज, अरविंद केजरीवाल ने 29 ऑटो कंपनियों से मांगा जवाब, माइलेज और इंजन सुरक्षा पर उठाए सवाल

    E20 पेट्रोल पर सियासी बहस तेज, अरविंद केजरीवाल ने 29 ऑटो कंपनियों से मांगा जवाब, माइलेज और इंजन सुरक्षा पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । एथनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल को लेकर देश में नई बहस शुरू हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों को पत्र लिखकर E20 ईंधन के उपयोग से वाहनों के माइलेज, इंजन की कार्यक्षमता और उपभोक्ताओं को दी जा रही तकनीकी जानकारी पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कंपनियों से इन मुद्दों पर स्पष्ट और सार्वजनिक जवाब देने की मांग की है।

    केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने विभिन्न वाहन निर्माताओं को अलग-अलग पत्र भेजे हैं। उनके अनुसार कुछ प्रमुख ऑटो कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हाल ही में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में कहा था कि वर्ष 2023 से पहले निर्मित वाहनों में भी E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से इंजन को कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा और माइलेज में केवल तीन से पांच प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि यदि कंपनियों का यही आधिकारिक रुख है तो इसे स्पष्ट रूप से उपभोक्ताओं के सामने भी रखा जाना चाहिए।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कई कंपनियों के वाहन उपयोग पुस्तिका में E10 से अधिक एथनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर अलग प्रकार की सावधानियों का उल्लेख किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि तकनीकी दस्तावेजों में अलग निर्देश दिए गए हैं तो सार्वजनिक मंचों पर कंपनियों के प्रतिनिधि अलग संदेश क्यों दे रहे हैं। उनका कहना है कि इस विषय पर उपभोक्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति नहीं रहनी चाहिए और कंपनियों को तथ्यात्मक जानकारी साझा करनी चाहिए।

    केजरीवाल ने यह भी कहा कि वह अगले दिन दिल्ली के विभिन्न पेट्रोल पंपों और सर्विस सेंटरों का दौरा करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि वहां उपलब्ध ईंधन और उससे संबंधित जानकारी का जायजा लिया जाएगा। उनका कहना है कि यदि वाहन मालिकों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक या तकनीकी प्रभाव पड़ने की संभावना है तो उसके बारे में पहले से स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।

    दूसरी ओर केंद्र सरकार एथनॉल मिश्रित ईंधन कार्यक्रम को ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानती है। सरकार का कहना है कि भारत अपनी पेट्रोलियम जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और एथनॉल मिश्रण बढ़ाने से कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही जैव ईंधन के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और घरेलू कृषि क्षेत्र को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध कराने का भी लक्ष्य रखा गया है।

    ऊर्जा और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि E20 ईंधन की सफलता काफी हद तक वाहन तकनीक, निर्माता कंपनियों के दिशा-निर्देश और उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराई जाने वाली जानकारी पर निर्भर करेगी। नई तकनीक के अनुरूप तैयार वाहनों और पुराने मॉडलों की आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं। ऐसे में वाहन मालिकों को अपने वाहन निर्माता की आधिकारिक सलाह का पालन करना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या से बचा जा सके।

    E20 पेट्रोल को लेकर शुरू हुई यह बहस अब केवल तकनीकी विषय तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह सार्वजनिक नीति, उपभोक्ता हित और ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ गई है। आने वाले दिनों में ऑटो कंपनियों की प्रतिक्रिया और सरकार की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण इस पूरे मुद्दे की दिशा तय कर सकते हैं। फिलहाल वाहन मालिकों की नजर इस बात पर बनी हुई है कि E20 ईंधन के व्यापक उपयोग से उनके वाहनों के प्रदर्शन, माइलेज और रखरखाव पर वास्तविक प्रभाव कितना पड़ता है।

  • मुंबई एयरपोर्ट पर टला बड़ा विमान हादसा, एक ही रनवे पर आमने-सामने आए एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के विमान

    मुंबई एयरपोर्ट पर टला बड़ा विमान हादसा, एक ही रनवे पर आमने-सामने आए एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के विमान

    नई दिल्ली । मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक बड़ा विमान हादसा उस समय टल गया, जब एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के दो विमान एक ही रनवे पर आमने-सामने आ गए। घटना के दौरान कुछ समय के लिए हवाई अड्डे पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई, लेकिन एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) की त्वरित कार्रवाई और दोनों विमानों के पायलटों की सतर्कता के कारण संभावित टक्कर टाल दी गई। इस घटना में किसी यात्री या चालक दल के सदस्य को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और सभी सुरक्षित रहे।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना मंगलवार देर रात लगभग 10 बजे की है। सिलीगुड़ी से मुंबई पहुंची एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान AIX 1547 लैंडिंग के बाद निर्धारित समय पर रनवे खाली नहीं कर सकी थी। इसी दौरान मुंबई से दिल्ली के लिए रवाना होने वाली एयर इंडिया की उड़ान AI 816 उसी रनवे से टेकऑफ की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में थी। कुछ ही क्षणों में दोनों विमान एक ही रनवे पर आमने-सामने की स्थिति में आ गए, जिससे संभावित दुर्घटना का खतरा उत्पन्न हो गया।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने तत्काल हस्तक्षेप किया और टेकऑफ की अनुमति वापस लेते हुए एयर इंडिया के विमान को तुरंत रोकने का निर्देश दिया। पायलटों ने बिना किसी देरी के एटीसी के निर्देशों का पालन किया, जिसके बाद विमान को सुरक्षित रूप से रनवे से हटाकर बे में ले जाया गया। समय रहते उठाए गए इस कदम ने संभावित बड़ी दुर्घटना को टाल दिया।

    घटना के बाद संबंधित विमान के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत आवश्यक तकनीकी और परिचालन संबंधी जांच शुरू करने की तैयारी की गई है। विमान के सिस्टम, रनवे संचालन और पूरी घटनाक्रम की समीक्षा की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ऐसी स्थिति कैसे बनी और भविष्य में इसे रोकने के लिए किन सुधारात्मक कदमों की आवश्यकता है।

    एयर इंडिया ने घटना के बाद जारी बयान में कहा कि यात्रियों की सुरक्षा कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। एयरलाइन ने बताया कि प्रभावित यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई और सभी आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरी घटना की आंतरिक समीक्षा की जाएगी और संबंधित अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग किया जाएगा।

    विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, हवाई अड्डों पर रनवे संचालन अत्यंत संवेदनशील प्रक्रिया होती है, जहां प्रत्येक विमान की आवाजाही एयर ट्रैफिक कंट्रोल की निगरानी में होती है। किसी भी संभावित जोखिम की स्थिति में एटीसी के त्वरित निर्देश और पायलटों की समय पर प्रतिक्रिया बड़े हादसों को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाती है। यही कारण है कि इस घटना में भी सतर्कता के चलते किसी प्रकार की जनहानि या विमान को नुकसान नहीं हुआ।

    फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि रनवे पर दोनों विमान एक साथ कैसे पहुंचे और क्या परिचालन प्रक्रिया में किसी स्तर पर चूक हुई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधार लागू किए जाएंगे।

  • ईडी की बड़ी कार्रवाई, पीएमएलए के तहत टीएमसी के 440 करोड़ रुपये के बैंक फंड पर रोक, वित्तीय लेन-देन की जांच तेज

    ईडी की बड़ी कार्रवाई, पीएमएलए के तहत टीएमसी के 440 करोड़ रुपये के बैंक फंड पर रोक, वित्तीय लेन-देन की जांच तेज

    नई दिल्ली । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चल रही जांच के दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़े तीन बैंक खातों में जमा लगभग 440.42 करोड़ रुपये की राशि के लेन-देन पर रोक लगाने की कार्रवाई की है। एजेंसी का कहना है कि यह कदम कथित वित्तीय अनियमितताओं और धन के प्रवाह की जांच के तहत उठाया गया है। समाचार लिखे जाने तक इस कार्रवाई पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

    ईडी के अनुसार, यह कार्रवाई पीएमएलए की धारा 17(1-ए) के तहत की गई है। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान मिले प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर संबंधित बैंक खातों में मौजूद राशि के लेन-देन को फिलहाल प्रतिबंधित किया गया है ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में वित्तीय दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और विभिन्न कंपनियों के बीच हुए लेन-देन की विस्तृत जांच जारी है।

    जांच के क्रम में ईडी ने कोलकाता स्थित कई परिसरों पर तलाशी अभियान भी चलाया। इनमें केयरवेल समूह से जुड़े कार्यालय भी शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी के बैंक खातों से लगभग 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उससे संबंधित एक अन्य कंपनी को स्थानांतरित किए गए। एजेंसी इन लेन-देन की प्रकृति, उद्देश्य और वैधानिक प्रक्रिया की जांच कर रही है।

    ईडी के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित कंपनी ने लगभग 82.96 करोड़ रुपये एक नवगठित कंपनी को हस्तांतरित किए। एजेंसी का दावा है कि इस नई कंपनी के खातों में बड़ी मात्रा में धनराशि पहुंची, जिसके उपयोग की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर धन के पूरे प्रवाह को समझने का प्रयास किया जा रहा है।

    प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि जांच के दौरान प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब 112 करोड़ रुपये का उपयोग एक बिजनेस जेट और एक हेलीकॉप्टर की खरीद में किया गया। एजेंसी का दावा है कि बाद में इन विमानन परिसंपत्तियों का उपयोग किराये की सेवाओं के माध्यम से किया गया। हालांकि इन आरोपों की न्यायिक स्तर पर अभी पुष्टि होना बाकी है और मामले की जांच जारी है।

    कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पीएमएलए के तहत की जाने वाली ऐसी कार्रवाई जांच के प्रारंभिक चरण का हिस्सा होती है और इसका उद्देश्य संदिग्ध वित्तीय संपत्तियों तथा लेन-देन को सुरक्षित रखना होता है। अंतिम निष्कर्ष अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों, जांच रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होता है। इसलिए किसी भी पक्ष की कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायालय के अंतिम निर्णय के आधार पर ही माना जाएगा।

    यह मामला एक बार फिर राजनीतिक दलों की वित्तीय पारदर्शिता और चुनावी वित्तपोषण से जुड़े मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में ईडी की जांच, संबंधित पक्षों के जवाब और न्यायिक प्रक्रिया इस मामले की आगे की दिशा तय करेंगे। फिलहाल एजेंसी वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और संबंधित संस्थाओं की भूमिका की विस्तृत जांच में जुटी हुई है, जबकि सभी आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

  • भारी बारिश से महाराष्ट्र-गुजरात में बढ़ी चुनौती, अमित शाह ने दोनों मुख्यमंत्रियों से की बात, केंद्र ने हरसंभव सहायता का दिया भरोसा

    भारी बारिश से महाराष्ट्र-गुजरात में बढ़ी चुनौती, अमित शाह ने दोनों मुख्यमंत्रियों से की बात, केंद्र ने हरसंभव सहायता का दिया भरोसा

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र और गुजरात में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जनजीवन पर पड़े व्यापक असर के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दोनों राज्यों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से अलग-अलग फोन पर बातचीत कर मौजूदा हालात की जानकारी ली और राहत एवं बचाव कार्यों के लिए केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। इस पहल को दोनों राज्यों में मौसम से उत्पन्न चुनौतियों के बीच केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

    महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने से सड़क यातायात धीमा पड़ गया, जबकि उपनगरीय लोकल ट्रेन सेवाएं भी प्रभावित रहीं। कार्यालय जाने वाले लोगों को लंबी देरी और असुविधा का सामना करना पड़ा। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण शहर के कई निचले क्षेत्रों में पानी भरने की समस्या बनी हुई है।

    मुंबई को पेयजल उपलब्ध कराने वाले प्रमुख जलाशयों में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। भारी वर्षा के चलते तुलसी झील अपने अधिकतम स्तर तक पहुंचकर ओवरफ्लो होने लगी है। मौसम विभाग ने आने वाले समय में भी मुंबई और उसके आसपास के क्षेत्रों में रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने की संभावना जताई है, जिससे प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ हालात पर नजर बनाए हुए है।

    दूसरी ओर गुजरात के दक्षिणी हिस्सों में भी भारी बारिश ने व्यापक प्रभाव डाला है। विशेष रूप से सूरत जिला सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा, जहां कई स्थानों पर अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव हो गया और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर राहत अभियान चलाया गया। प्रशासन ने हजारों लोगों को सुरक्षित आश्रयों में पहुंचाकर राहत कार्य तेज किए हैं।

    भारी वर्षा के कारण दक्षिण गुजरात के कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ। एहतियात के तौर पर कई स्थानों पर स्कूल और कॉलेज बंद रखने का निर्णय लिया गया। लगातार बारिश के चलते स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन दल और अन्य एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। प्रभावित इलाकों में आवश्यक सेवाएं बनाए रखने और लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने के प्रयास भी जारी हैं।

    मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का असर रेल और सड़क परिवहन पर भी दिखाई दिया। जलभराव और अन्य बाधाओं के कारण गुजरात जाने वाली कई लंबी दूरी की रेल सेवाएं प्रभावित हुईं। वहीं मुंबई-पुणे मार्ग पर पहले हुए भूस्खलन के कारण यातायात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सका। प्रशासन लगातार मार्गों की निगरानी कर रहा है ताकि परिवहन व्यवस्था को जल्द से जल्द सुचारु बनाया जा सके।

    केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोनों राज्यों में राहत और बचाव कार्यों के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दोनों मुख्यमंत्रियों से की गई बातचीत में प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति, राहत अभियानों की प्रगति और भविष्य की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। लगातार बदलते मौसम को देखते हुए प्रशासन लोगों से सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील कर रहा है।Aksharam Media and

  • शबरी एक्सप्रेस में पत्नी के सामने पति और कथित प्रेमिका ने खाया जहरीला पदार्थ, सिकंदराबाद पहुंचते ही दोनों अस्पताल में भर्ती

    शबरी एक्सप्रेस में पत्नी के सामने पति और कथित प्रेमिका ने खाया जहरीला पदार्थ, सिकंदराबाद पहुंचते ही दोनों अस्पताल में भर्ती

    नई दिल्ली । शबरी एक्सप्रेस में यात्रा के दौरान एक व्यक्ति और उसकी कथित प्रेमिका द्वारा जहरीला पदार्थ खाए जाने की घटना से यात्रियों में अफरातफरी मच गई। घटना तेलंगाना के सिकंदराबाद के बाहरी क्षेत्र में चेर्लापल्ली रेलवे स्टेशन के पास सामने आई। सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस और संबंधित अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों को अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है। प्रारंभिक जांच में पुलिस पारिवारिक विवाद और व्यक्तिगत संबंधों से जुड़े तनाव को घटना का संभावित कारण मानकर सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

    पुलिस के अनुसार, घायल व्यक्ति की पहचान आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के छपरा गांव निवासी सिरिश के रूप में हुई है। जांच के दौरान सामने आया कि उसका उसी गांव की एक विवाहित महिला नीलावेनी के साथ कथित तौर पर विवाहेतर संबंध था। बताया जा रहा है कि सिरिश अपनी पत्नी सुलोचना को छोड़कर नीलावेनी के साथ कोयंबटूर में रह रहा था। बाद में पत्नी को उनके ठिकाने की जानकारी मिलने पर वह कोयंबटूर पहुंची और दोनों को वापस गांव चलने के लिए राजी किया।

    इसके बाद तीनों शबरी एक्सप्रेस से श्रीकाकुलम लौट रहे थे। यात्रा के दौरान जब ट्रेन सिकंदराबाद की ओर बढ़ रही थी, तभी सिरिश और नीलावेनी ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया। कुछ ही देर में दोनों की तबीयत बिगड़ने लगी और वे कोच के भीतर बेहोश होकर गिर पड़े। यह देखकर अन्य यात्रियों ने तुरंत रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों को सूचना दी, जिसके बाद तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई।

    सूचना मिलने पर रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को प्राथमिक सहायता देने के बाद हैदराबाद स्थित गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के अनुसार दोनों का इलाज जारी है और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अस्पताल प्रशासन आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया के तहत दोनों की निगरानी कर रहा है, जबकि पुलिस मेडिकल रिपोर्ट का भी इंतजार कर रही है।

    घटना के बाद सिकंदराबाद जीआरपी ने मामला दर्ज कर लिया है। जांच अधिकारी दोनों के परिजनों, प्रत्यक्षदर्शियों और ट्रेन में मौजूद यात्रियों से जानकारी जुटा रहे हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि जहरीला पदार्थ ट्रेन में कैसे लाया गया और उसे किन परिस्थितियों में सेवन किया गया। पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों और बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।

    अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज होने के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी। रेलवे पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दोनों घायलों का उपचार जारी है और पुलिस अस्पताल प्रशासन के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है।

  • शोपियां में सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी, लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर जाकिर गनी मारा गया, चार दिन बाद मिला शव

    शोपियां में सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी, लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर जाकिर गनी मारा गया, चार दिन बाद मिला शव


    नई दिल्ली
    । जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में सुरक्षा बलों को आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त अभियान में लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर जाकिर गनी को मार गिराया गया। मुठभेड़ के कुछ दिनों बाद चलाए गए व्यापक तलाशी अभियान के दौरान उसका शव बरामद किया गया। सुरक्षा बलों ने घटनास्थल से हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए हैं। इस कार्रवाई को दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, शोपियां के सैदपोरा क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों को आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस, राष्ट्रीय राइफल्स और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की संयुक्त टीम ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया। घने बागानों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच आधुनिक निगरानी उपकरणों की सहायता से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी गई।

    अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने दो आतंकवादियों की मौजूदगी का पता लगाया। इसके बाद पूरे क्षेत्र को घेरकर तलाशी और सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया। इसी दौरान गोलीबारी हुई, जिसका सुरक्षा बलों ने जवाब दिया। बाद में इलाके की विस्तृत तलाशी के दौरान एक शव बरामद हुआ, जिसकी पहचान लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जाकिर गनी के रूप में की गई। घटनास्थल से हथियार और अन्य सैन्य सामग्री भी बरामद होने की पुष्टि हुई।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, जाकिर गनी लंबे समय से दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ा हुआ था और वह कई आतंकी अभियानों में शामिल माना जाता था। उसकी मौजूदगी को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही थीं। संयुक्त अभियान के जरिए उसे निष्क्रिय करना आतंकवाद विरोधी प्रयासों की एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।

    शोपियां जिला लंबे समय से आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों के कारण संवेदनशील क्षेत्र रहा है। दक्षिण कश्मीर का यह इलाका अपने घने बागानों, जंगलों और दुर्गम भूभाग के कारण आतंकवादियों के लिए छिपने और एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का मार्ग माना जाता रहा है। यही वजह है कि सुरक्षा बल यहां लगातार तलाशी अभियान और निगरानी अभियान चलाते रहते हैं।

    पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों को सीमित करने के लिए सुरक्षा बलों ने कई बड़े अभियान चलाए हैं। इन अभियानों के दौरान अनेक वांछित आतंकवादी मारे गए या गिरफ्तार किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार दबाव बनाए रखने से स्थानीय आतंकी नेटवर्क कमजोर हुआ है और उनकी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा रहा है।

    अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में अभी भी तलाशी अभियान जारी है ताकि किसी भी संभावित खतरे को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। सुरक्षा बल आसपास के इलाकों में भी सतर्कता बनाए हुए हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। स्थानीय लोगों से भी सहयोग की अपील की गई है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंच सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभियान आतंकवादी संगठनों की नेतृत्व क्षमता और परिचालन ढांचे को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लगातार खुफिया समन्वय, आधुनिक तकनीक और संयुक्त सुरक्षा अभियानों के जरिए जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि क्षेत्र में शांति और सामान्य स्थिति बनाए रखने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे।

  • पति के दबाव में मायके की संपत्ति मांगना भी माना जाएगा दहेज की मांग, कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्पष्ट की कानून की अहम व्याख्या

    पति के दबाव में मायके की संपत्ति मांगना भी माना जाएगा दहेज की मांग, कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्पष्ट की कानून की अहम व्याख्या

    नई दिल्ली । दहेज से जुड़े मामलों की कानूनी व्याख्या को और स्पष्ट करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि किसी महिला का अपनी पैतृक संपत्ति में हिस्सा मांगना उसका वैधानिक अधिकार है, लेकिन यदि यह मांग पति या ससुराल पक्ष के दबाव, उत्पीड़न या मजबूरी के कारण की जाती है तो इसे दहेज की मांग माना जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में भारतीय दंड संहिता की दहेज हत्या से संबंधित प्रावधान लागू हो सकते हैं।

    यह फैसला वर्ष 2014 में हुई एक महिला और उसकी नाबालिग बेटी की मौत से जुड़े मामले में सुनाया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए पाया कि महिला अपने वैवाहिक जीवन के दौरान लगातार मानसिक दबाव और आर्थिक उत्पीड़न का सामना कर रही थी। जांच और गवाहों के आधार पर यह भी सामने आया कि महिला पर मायके से धन और पैतृक संपत्ति में हिस्से की राशि लाने का लगातार दबाव बनाया जा रहा था।

    अदालत ने कहा कि महिला को अपने पैतृक अधिकार का दावा करने से कोई नहीं रोक सकता, क्योंकि यह उसका कानूनी अधिकार है। हालांकि यदि पति इस अधिकार का इस्तेमाल अपने आर्थिक लाभ के लिए करवाने का दबाव बनाता है और महिला को मजबूर करता है कि वह मायके से संपत्ति या धन लेकर आए, तो ऐसी स्थिति सामान्य संपत्ति विवाद नहीं रह जाती, बल्कि दहेज की मांग की श्रेणी में आती है। अदालत ने माना कि कानून की व्यापक भावना भी इसी सिद्धांत का समर्थन करती है।

    सुनवाई के दौरान पति ने तर्क दिया कि उसकी पत्नी केवल अपने वैधानिक हिस्से की मांग कर रही थी, इसलिए इसे दहेज की मांग नहीं कहा जा सकता। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ कि महिला के भाई ने पहले ही पैतृक संपत्ति का एक हिस्सा बेचकर उसे धनराशि दी थी, लेकिन इसके बावजूद पति लगातार शेष संपत्ति से भी पैसा लाने के लिए दबाव बना रहा था। अदालत ने माना कि यही दबाव महिला की मानसिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव डालने वाला महत्वपूर्ण कारण बना।

    मामले में प्राथमिकी दर्ज होने में हुई देरी को लेकर भी पति की ओर से सवाल उठाए गए। अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि किसी परिवार में अचानक हुई दुखद मृत्यु के बाद परिजन स्वाभाविक रूप से मानसिक आघात की स्थिति में होते हैं। ऐसे समय कानूनी सलाह लेकर शिकायत दर्ज कराना असामान्य नहीं माना जा सकता। केवल देरी के आधार पर शिकायत की विश्वसनीयता पर संदेह नहीं किया जा सकता।

    साक्ष्यों की समीक्षा के बाद अदालत ने पाया कि सास-ससुर के विरुद्ध पर्याप्त और ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं थे। गवाहों के बयानों में भी उनकी प्रत्यक्ष भूमिका सिद्ध नहीं हो सकी। इसी आधार पर उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। वहीं पति के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए उसकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा गया।

    हालांकि अदालत ने सजा के प्रश्न पर विचार करते हुए आजीवन कारावास को संशोधित कर दस वर्ष के कठोर कारावास में बदल दिया। अदालत ने कहा कि दहेज हत्या के मामलों में आजीवन कारावास का प्रावधान अत्यंत गंभीर और दुर्लभ परिस्थितियों में लागू किया जाना चाहिए। इस निर्णय के साथ अदालत ने यह भी स्पष्ट संदेश दिया कि महिलाओं के पैतृक संपत्ति संबंधी अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन यदि उन अधिकारों का उपयोग ससुराल पक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए दबाव बनाकर कराता है, तो कानून उसे दहेज की मांग के रूप में देखेगा और उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।