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  • सड़क पार करते समय मोबाइल देखना पड़ा भारी, विजयवाड़ा में बस की टक्कर से व्यक्ति की मौत, चालक हिरासत में

    सड़क पार करते समय मोबाइल देखना पड़ा भारी, विजयवाड़ा में बस की टक्कर से व्यक्ति की मौत, चालक हिरासत में

    नई दिल्ली । आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में सड़क सुरक्षा से जुड़ा एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जिसने एक बार फिर सड़क पर लापरवाही के गंभीर परिणामों की ओर ध्यान आकर्षित किया है। व्यस्त ट्रैफिक जंक्शन पर सड़क पार कर रहे एक व्यक्ति की बस की चपेट में आने से मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे के समय वह अपने मोबाइल फोन में व्यस्त था, जिसके कारण उसे पीछे से आ रहे वाहन का अंदाजा नहीं हो सका। घटना का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जिसकी जांच पुलिस कर रही है।

    बताया गया कि व्यक्ति हाथ में थैला लिए सड़क पार कर रहा था। इसी दौरान उसने अपनी जेब से मोबाइल फोन निकाला और उसमें देखने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उसका पूरा ध्यान मोबाइल पर था, जिससे वह आसपास के ट्रैफिक पर नजर नहीं रख सका। कुछ ही क्षण बाद पीछे से आ रही बस ने उसे टक्कर मार दी। हादसा इतना गंभीर था कि व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद पीछे से आ रही दूसरी बस ने सड़क पर पड़े व्यक्ति को बचाते हुए अपना रास्ता बदला, जिससे एक और बड़ी दुर्घटना टल गई।

    घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। बस चालक को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की जा रही है। साथ ही दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    प्रारंभिक जांच में यह संभावना जताई जा रही है कि मोबाइल फोन के उपयोग के कारण व्यक्ति का ध्यान सड़क और ट्रैफिक से हट गया था। हालांकि पुलिस का कहना है कि दुर्घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। वहीं बस चालक की भूमिका की भी विस्तार से जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दुर्घटना में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं।

    इस घटना ने सड़क सुरक्षा नियमों के पालन की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क पार करते समय मोबाइल फोन का उपयोग, तेज आवाज में हेडफोन लगाना या ट्रैफिक पर ध्यान न देना गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है। पैदल यात्रियों को हमेशा निर्धारित स्थान से सड़क पार करनी चाहिए और दोनों ओर से आने वाले वाहनों की स्थिति सुनिश्चित करने के बाद ही आगे बढ़ना चाहिए।

    शहरी क्षेत्रों में बढ़ते यातायात के बीच सड़क सुरक्षा केवल वाहन चालकों की ही नहीं, बल्कि पैदल यात्रियों की भी समान जिम्मेदारी है। सतर्कता, ट्रैफिक नियमों का पालन और मोबाइल जैसी चीजों से ध्यान हटाकर सड़क पर पूरी एकाग्रता बनाए रखना ऐसे हादसों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पुलिस ने भी नागरिकों से अपील की है कि सड़क पर चलते या पार करते समय पूरी सावधानी बरतें और किसी भी प्रकार के ध्यान भटकाने वाले व्यवहार से बचें, ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी बच्चों पर पड़ सकती है भारी, देखभाल न होने पर संपत्ति वापस लेने का अधिकार बरकरार: हाई कोर्ट

    बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी बच्चों पर पड़ सकती है भारी, देखभाल न होने पर संपत्ति वापस लेने का अधिकार बरकरार: हाई कोर्ट


    नई दिल्ली ।
    बुजुर्ग माता-पिता के अधिकारों को मजबूत करने वाले एक महत्वपूर्ण फैसले में हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि माता-पिता ने अपनी संपत्ति इस शर्त पर बच्चों को हस्तांतरित की है कि वे उनकी देखभाल करेंगे, लेकिन बाद में बच्चे इस जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं करते, तो माता-पिता को वह संपत्ति वापस लेने का कानूनी अधिकार है। अदालत ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना कानून का उद्देश्य है और इस अधिकार का लाभ केवल आर्थिक रूप से कमजोर माता-पिता तक सीमित नहीं है।

    यह मामला मुंबई के लोअर परेल स्थित एक फ्लैट से जुड़ा था, जहां एक बुजुर्ग दंपति और उनका बेटा एक ही घर में रहते थे। पिता ने कई वर्ष पहले अपनी कमाई से फ्लैट खरीदा था और बाद में विश्वास के आधार पर उसे उपहार स्वरूप अपने बेटे के नाम कर दिया। उपहार के साथ यह शर्त भी तय की गई थी कि बेटा अपने माता-पिता को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा तथा उनके बुढ़ापे में उनकी उचित देखभाल करेगा।

    समय बीतने के साथ परिवार के संबंधों में तनाव बढ़ता गया। माता-पिता का आरोप था कि बेटे का व्यवहार बदल गया और उन्हें अपेक्षित सम्मान तथा देखभाल नहीं मिली। हालात इतने खराब हो गए कि उन्हें अपना ही घर छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए कानून के तहत संबंधित न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया और अपनी संपत्ति वापस दिलाने की मांग की।

    मामले की सुनवाई के बाद न्यायाधिकरण ने बेटे और उसके परिवार को निर्धारित अवधि के भीतर फ्लैट खाली कर उसका कब्जा माता-पिता को सौंपने का निर्देश दिया। बेटे ने इस आदेश को चुनौती देते हुए अदालत में कहा कि उसके पिता आर्थिक रूप से सक्षम हैं, उनका अपना व्यवसाय है और उनके पास अन्य संपत्तियां भी हैं। इसलिए उन्हें इस कानून के तहत राहत नहीं मिलनी चाहिए।

    हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के संरक्षण से जुड़े कानून की धारा 23 स्पष्ट रूप से यह व्यवस्था करती है कि यदि संपत्ति का हस्तांतरण देखभाल और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसी शर्तों के साथ किया गया हो और प्राप्तकर्ता उन शर्तों का पालन न करे, तो संबंधित न्यायाधिकरण उस उपहार को निरस्त घोषित कर सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अधिकार का संबंध माता-पिता की आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि उनके साथ किए गए वादे और उसकी पूर्ति से है।

    अदालत ने माना कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्मान, देखभाल और सुरक्षित जीवन भी उनकी मूल आवश्यकताओं का हिस्सा हैं। यदि परिवार का कोई सदस्य संपत्ति प्राप्त करने के बाद अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटता है, तो कानून ऐसे बुजुर्गों को प्रभावी कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन अनेक वरिष्ठ नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है, जिन्होंने विश्वास के आधार पर अपनी संपत्ति बच्चों के नाम कर दी, लेकिन बाद में उपेक्षा या दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। इससे यह संदेश भी जाता है कि संपत्ति का हस्तांतरण केवल अधिकार नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी साथ लेकर आता है। यदि उस जिम्मेदारी का पालन नहीं किया जाता, तो कानून बुजुर्ग माता-पिता को न्याय दिलाने के लिए उनके पक्ष में खड़ा है।

  • सीमावर्ती जिलों के पुलिस प्रमुखों के साथ अमित शाह की अहम बैठक आज, अवैध घुसपैठ और सीमा सुरक्षा पर तैयार होगी नई रणनीति

    सीमावर्ती जिलों के पुलिस प्रमुखों के साथ अमित शाह की अहम बैठक आज, अवैध घुसपैठ और सीमा सुरक्षा पर तैयार होगी नई रणनीति


    नई दिल्ली ।
    देश की सीमा सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने तथा अवैध घुसपैठ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने व्यापक रणनीति पर काम तेज कर दिया है। इसी क्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह गुरुवार को नई दिल्ली में सीमावर्ती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधीक्षकों और सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की भागीदारी प्रस्तावित है। सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिहाज से इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बैठक में अवैध घुसपैठ, अवैध आप्रवासन, सीमा प्रबंधन, ड्रोन गतिविधियों से उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियां, मादक पदार्थों की तस्करी तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। अधिकारियों से जमीनी स्तर की स्थिति, स्थानीय चुनौतियों और अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी भी ली जाएगी, ताकि आगे की रणनीति को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

    इस सम्मेलन में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल तथा पूर्वोत्तर राज्यों सहित सभी प्रमुख सीमावर्ती क्षेत्रों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इन क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों, सीमा पार गतिविधियों और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। साथ ही विभिन्न राज्यों के अनुभवों के आधार पर साझा रणनीति तैयार करने पर भी विचार होगा।

    बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय सीमा क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना भी है। सीमाओं पर निगरानी मजबूत करने के लिए ड्रोन और अन्य तकनीकी संसाधनों के उपयोग पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने, सीमा पर बाड़ लगाने के कार्य की प्रगति तथा निगरानी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।

    केंद्र सरकार पहले भी सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करती रही है। हाल के महीनों में वरिष्ठ स्तर पर कई दौरे और समीक्षा बैठकें आयोजित की गई हैं, जिनमें स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को सीमावर्ती क्षेत्रों की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखने तथा संदिग्ध मामलों में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

    बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने, सूचना साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करने तथा कानून के दायरे में रहकर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जाएगा। अधिकारियों से यह भी अपेक्षा की जाएगी कि वे स्थानीय स्तर पर सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का नियमित आकलन करें और आवश्यकतानुसार समय पर रिपोर्ट उपलब्ध कराएं।

    सरकार का मानना है कि सीमा सुरक्षा केवल सीमाओं की निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तस्करी, अवैध प्रवेश, संगठित अपराध और अन्य सुरक्षा चुनौतियों से समन्वित तरीके से निपटना भी शामिल है। ऐसे में इस उच्चस्तरीय बैठक से निकलने वाले निर्णय आने वाले समय में सीमा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने तथा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

  • हर दिन की बचत ने पूरा किया सपना, 10-10 रुपये के सिक्कों से बाइक खरीदने वाले परिवार की कहानी बनी मिसाल

    हर दिन की बचत ने पूरा किया सपना, 10-10 रुपये के सिक्कों से बाइक खरीदने वाले परिवार की कहानी बनी मिसाल

    नई दिल्ली । छोटी-छोटी बचत किस तरह बड़े सपनों को साकार कर सकती है, इसका प्रेरक उदाहरण तेलंगाना से सामने आया है। यहां एक परिवार ने कई वर्षों तक 10-10 रुपये के सिक्के जमा किए और आखिरकार उन्हीं सिक्कों के जरिए अपनी पसंद की नई मोटरसाइकिल खरीद ली। इस अनोखे भुगतान का वीडियो सामने आने के बाद यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई।

    यादाद्रि भुवनगिरि जिले के वेलिमिनेडु गांव के निवासी कोंडे रघुपति ने अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ मिलकर वर्ष 2017 से नियमित रूप से 10 रुपये के सिक्के बचाने शुरू किए थे। परिवार का उद्देश्य एक दिन अपनी मेहनत की बचत से नई बाइक खरीदना था। वर्षों तक लगातार जमा किए गए सिक्कों की बदौलत उन्होंने लगभग 1.10 लाख रुपये की राशि तैयार कर ली और उसी से नई हीरो स्प्लेंडर प्लस मोटरसाइकिल खरीदने का फैसला किया।

    जब रघुपति सिक्कों से भरे कई बैग लेकर मोटरसाइकिल शोरूम पहुंचे तो वहां मौजूद कर्मचारी पहले कुछ हैरान रह गए। इतनी बड़ी रकम पूरी तरह सिक्कों में मिलने की उम्मीद किसी को नहीं थी। हालांकि रघुपति ने पहले ही शोरूम प्रबंधन को अपनी योजना की जानकारी दे दी थी। उनकी लगन और वर्षों की मेहनत को देखते हुए शोरूम संचालक ने भुगतान स्वीकार करने का निर्णय लिया।

    इसके बाद शोरूम में सिक्कों की गिनती का लंबा सिलसिला शुरू हुआ। कर्मचारियों ने सभी सिक्कों को फर्श पर फैलाकर उनकी गिनती और सत्यापन किया। करीब पांच कर्मचारियों ने लगभग चार घंटे तक लगातार मेहनत कर पूरी राशि की जांच की। गिनती पूरी होने के बाद भुगतान स्वीकार किया गया और खरीद प्रक्रिया पूरी कर रघुपति को उनकी नई मोटरसाइकिल सौंप दी गई।

    रघुपति का कहना है कि उन्होंने कभी 10 रुपये के सिक्कों को लेकर फैली अफवाहों पर ध्यान नहीं दिया। कई बार लोगों के बीच यह भ्रम फैलाया जाता रहा कि ऐसे सिक्के स्वीकार नहीं किए जाते, लेकिन उन्हें भरोसा था कि यह पूरी तरह वैध मुद्रा है और एक दिन उनकी बचत उनके सपने को पूरा करेगी। इसी विश्वास के साथ परिवार ने कई वर्षों तक नियमित बचत जारी रखी।

    यह घटना केवल एक बाइक खरीदने की कहानी नहीं बल्कि अनुशासित बचत और धैर्य का संदेश भी देती है। आर्थिक विशेषज्ञ भी लंबे समय से छोटी-छोटी नियमित बचत को भविष्य की बड़ी जरूरतों को पूरा करने का प्रभावी तरीका मानते रहे हैं। रघुपति के परिवार ने इसी सिद्धांत को व्यवहार में उतारकर दिखाया कि सीमित आय के बावजूद नियमित बचत से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

    इस अनोखी खरीदारी का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग परिवार की मेहनत, धैर्य और वित्तीय अनुशासन की जमकर सराहना कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे बचत की आदत अपनाने की प्रेरणा बताया है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि निरंतर प्रयास और छोटी-छोटी बचत समय के साथ बड़ी उपलब्धि का आधार बन सकती है।

  • एचआईवी का नया हॉटस्पॉट बनता पंजाब! युवाओं में बढ़ रहे संक्रमण ने बढ़ाई चिंता जीएमसी जम्मू की लैब पर बढ़ा दबाव

    एचआईवी का नया हॉटस्पॉट बनता पंजाब! युवाओं में बढ़ रहे संक्रमण ने बढ़ाई चिंता जीएमसी जम्मू की लैब पर बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली । पंजाब में एचआईवी संक्रमण के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि राज्य को संक्रमण के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में गिना जाने लगा है। बीते पांच महीनों के आंकड़े बताते हैं कि पंजाब के आठ जिलों से हर महीने करीब 2500 एचआईवी जांच के नमूने राजकीय मेडिकल कॉलेज जीएमसी जम्मू की अत्याधुनिक वायरोलॉजी लैब भेजे जा रहे हैं। यहां जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट संबंधित जिलों को भेजी जाती है। लगातार बढ़ती जांच और सामने आ रहे मामलों ने संकेत दिया है कि संक्रमण की चुनौती अब पहले से कहीं अधिक गंभीर होती जा रही है।

    जीएमसी जम्मू की माइक्रोबायोलॉजी लैब को इस वर्ष फरवरी में नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज की मान्यता मिलने के बाद इसकी जांच क्षमता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कार्य करने वाली यह प्रदेश की पहली एनएबीएल मान्यता प्राप्त वायरोलॉजी लैब है। इसी वजह से पंजाब के होशियारपुर पठानकोट जालंधर रोपड़ मोगा बटाला नवांशहर और कपूरथला जैसे जिलों के एचआईवी जांच नमूनों की जिम्मेदारी भी इसी लैब को सौंपी गई है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जांच रिपोर्टों में सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि संक्रमण के मामलों में बड़ी संख्या 25 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की है। इसके अलावा महिलाओं और बच्चों में भी संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नशीले पदार्थों का इंजेक्शन के माध्यम से सेवन संक्रमण फैलने का एक प्रमुख कारण बनकर उभरा है। इसके साथ ही असुरक्षित यौन संबंध और समय पर जांच नहीं कराना भी संक्रमण बढ़ने की अहम वजह मानी जा रही है।

    अधिकारियों का कहना है कि जीएमसी जम्मू में केवल सैंपलों की जांच की जाती है जबकि संक्रमित मरीजों का उपचार पंजाब में ही किया जाता है। जांच के बाद रिपोर्ट संबंधित स्वास्थ्य विभाग को भेज दी जाती है ताकि समय पर इलाज शुरू किया जा सके और संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके।

    एनएबीएल मान्यता मिलने के बाद जीएमसी जम्मू की जांच क्षमता में भी बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां प्रतिदिन लगभग 90 नमूनों की जांच हो पाती थी वहीं अब आधुनिक तकनीक और नई सुविधाओं की मदद से 24 घंटे में 1200 से अधिक नमूनों की जांच संभव हो गई है। इससे न केवल जम्मू कश्मीर बल्कि दूसरे राज्यों के सैंपलों की भी तेजी से जांच की जा रही है। भविष्य में नई मशीनों के जुड़ने के बाद यह क्षमता और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एचआईवी जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए समय पर जांच जागरूकता और सुरक्षित व्यवहार सबसे प्रभावी उपाय हैं। साथ ही नशे की रोकथाम नियमित स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है। यदि संक्रमण की बढ़ती रफ्तार को समय रहते नहीं रोका गया तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। इसलिए सरकार स्वास्थ्य विभाग और समाज सभी को मिलकर जागरूकता अभियान तेज करने और जोखिम वाले समूहों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर विशेष ध्यान देना होगा।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस…. आरोपियों ने उगले राज…. पूछताछ में बताया हेराफेरी का तरीका

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस…. आरोपियों ने उगले राज…. पूछताछ में बताया हेराफेरी का तरीका


    लखनऊ/अयोध्या।
    राम मंदिर चढ़ावा चोरी (Ram Mandir Offering Theft) मामले में रिमांड पर लिए गए तीनों आरोपियों ने पूछताछ में खुलासा किया कि चोरी के रुपये वह अपने करीबियों और रिश्तेदारों को भेजते थे और फिर उनसे अपने खातों में रकम ट्रांसफर करवाते थे, ताकि रकम का स्रोत छिपा रहे और शक न हो। बैंक डिटेल से इसकी पुष्टि भी हुई है। पूछताछ में तीनों आरोपियों अनुकल्प मिश्रा (Anukalp Mishra), लवकुश मिश्रा (Lav-Kush Mishra) और करुणेश पांडेय (Karunesh Pandey) ने कई और राज उगले हैं। बृहस्पतिवार को रकम, जेवर की बरामदगी हो सकती है।

    कोर्ट की अनुमति के बाद पुलिस ने बुधवार सुबह करीब सात बजे जिला जेल से आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर लिया। आरोपियों ने चोरी स्वीकारते हुए बताया कि टिन्नू व गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव की मिलीभगत होने से रकम पार करने में दिक्कत नहीं होती थी। आरोपियों ने बताया है कि नकदी व जेवर छिपाकर रखे हैं।

    पुलिस तीनों आरोपियों को 14 कोसी परिक्रमा मार्ग स्थित उसी बाग में लेकर गई जहां चोरी की रकम का बंटवारा किया जाता था। इस स्थान का खुलासा पहले रिमांड पर रहे आरोपी अविनाश शुक्ला ने किया था। तीनों आरोपियों से मौके पर ले जाकर इसका सत्यापन कराया गया। पुलिस ने आरोपियों के बयानों का मिलान भी किया।

    फर्जी रसीदें छपवाई थीं
    आरोपियों ने एक दान राशि संबंधी पर्ची बरामद कराई है। आरोपियों ने बताया कि जब दान लेकर पर्ची दी जाती थी, तो उन्होंने फर्जी रसीदें छपवाई थीं। लोगों से चंदे के नाम पर रकम लेकर फर्जी रसीदें पकड़ा देते थे और रकम अपनी जेब में रख लेते थे।

  • Report: दुनिया की 99% आबादी ले रही है प्रदूषित हवा में सांस…. WHO ने चेताया

    Report: दुनिया की 99% आबादी ले रही है प्रदूषित हवा में सांस…. WHO ने चेताया


    न्यूयार्क।
    विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) (World Health Organization – WHO) की वर्ल्ड हेल्थ स्टेटिस्टिक्स 2026 रिपोर्ट (World Health Statistics 2026 Report) हैरान करने वाली है। इसके मुताबिक, दुनिया की 99 प्रतिशत आबादी अब भी सुरक्षित सीमा से अधिक प्रदूषित हवा में सांस ले रही है। वर्ष 2021 में 66 लाख मौतें घरेलू और बाहरी वायु प्रदूषण से जुड़ी थीं।

    भारत जैसे देशों के लिए यह सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत समेत दुनिया के कई देशों के लिए वर्ष 2030 तक हर व्यक्ति को बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं (यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज) उपलब्ध कराने का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होता जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की रफ्तार पिछले कुछ वर्षों में काफी धीमी पड़ गई है।


    रिपोर्ट में किया गया क्या दावा?

    रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2015 से 2023 के बीच दुनिया का यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (यूएचसी) सर्विस कवरेज इंडेक्स केवल 68 से बढ़कर 71 तक पहुंचा। यह 2000 से 2015 के मुकाबले करीब एक-तिहाई गति से हुई प्रगति है। अगर यही रफ्तार जारी रही तो 2030 तक यह सूचकांक केवल 74 तक ही पहुंच पाएगा, जिससे सभी लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का वैश्विक लक्ष्य अधूरा रह सकता है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र, जिसमें भारत भी शामिल है, ने स्वास्थ्य सेवाओं के कवरेज में अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर सुधार दर्ज किया है। 2015 के बाद इस क्षेत्र के यूएचसी इंडेक्स में 7 अंकों की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन 2030 का लक्ष्य हासिल करने के लिए यह गति भी पर्याप्त नहीं मानी जा रही।


    स्वास्थ्य खर्च से 1.6 अरब लोग गरीबी की चपेट में

    रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की करीब एक-चौथाई आबादी इलाज पर अपनी जेब से खर्च करने के कारण आर्थिक बोझ झेल रही है। वर्ष 2022 तक लगभग 1.6 अरब लोग स्वास्थ्य खर्च की वजह से गरीबी में जी रहे थे या गरीबी की ओर धकेले गए।

    कई देशों में खसरे के संक्रमण का खतरा
    डब्ल्यूएचओ ने बच्चों के नियमित टीकाकरण की रफ्तार को लेकर भी चेतावनी दी है। कई प्रमुख टीकों का कवरेज अभी भी 90 प्रतिशत के वैश्विक लक्ष्य से नीचे है। खासकर खसरे (मीजल्स) की दूसरी डोज का कवरेज 2024 में केवल 76 प्रतिशत रहा, जिससे कई देशों में संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है।

    सरकारों को स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ाना होगा निवेश
    डब्ल्यूएचओ का कहना है कि अगर 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करना है तो सरकारों को स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाना होगा। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना होगा, टीकाकरण का दायरा बढ़ाना होगा और लोगों का इलाज पर होने वाला निजी खर्च कम करना होगा।

  • TMC के पार्टी फंड में 440 करोड़ पर ED की बड़ी कार्रवाई! हेलीकॉप्टर और चार्टर विमान खरीद में गड़बड़ी का दावा

    TMC के पार्टी फंड में 440 करोड़ पर ED की बड़ी कार्रवाई! हेलीकॉप्टर और चार्टर विमान खरीद में गड़बड़ी का दावा


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई ने हलचल मचा दी है। प्रवर्तन निदेशालय ने तृणमूल कांग्रेस के पार्टी फंड से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन में बड़ी अनियमितताओं का दावा करते हुए पार्टी के तीन बैंक खातों में जमा 440.42 करोड़ रुपए को फ्रीज करने का आदेश दिया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि पार्टी के आधिकारिक खाते से करोड़ों रुपए एक चार्टर विमान कंपनी को ट्रांसफर किए गए जिनका इस्तेमाल हेलीकॉप्टर और लग्जरी विमान खरीदने में किया गया। इसके बाद उन्हीं विमानों और हेलीकॉप्टरों को पार्टी की ओर से किराए पर लिया गया और इसके लिए अलग से भुगतान भी किया गया। ईडी को आशंका है कि इस पूरी प्रक्रिया के जरिए पार्टी फंड के दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया गया।

    मामले की जांच के दौरान ईडी ने कोलकाता और आसपास के पांच अलग अलग ठिकानों पर छापेमारी की। इनमें चार्टर विमान कंपनी के कार्यालय उसके मालिक का आवास न्यू टाउन स्थित एक परिसर एक ट्रस्ट का दफ्तर और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट का कार्यालय शामिल है। कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने कई अहम दस्तावेज डिजिटल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं जिनकी जांच की जा रही है।

    जांच एजेंसी के अनुसार वर्ष 2023 से 2026 के बीच तृणमूल कांग्रेस के बैंक खातों से केयरवेल एविएशन नामक चार्टर विमान कंपनी के खाते में करीब 160 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। इसके बाद इस कंपनी ने करीब 82.96 करोड़ रुपए एक अन्य नई कंपनी को भेजे। ईडी का दावा है कि करीब 112 करोड़ रुपए की राशि का उपयोग एक एम्ब्रेयर लेगेसी जेट 600 विमान और एक अगस्ता वेस्टलैंड 109 एसपी हेलीकॉप्टर खरीदने में किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि हेलीकॉप्टर की खरीद के लिए वर्ष 2023 में केमैन आइलैंड्स की एक विदेशी कंपनी से कर्ज भी लिया गया था।

    सूत्रों के मुताबिक यह चार्टर कंपनी तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की हवाई यात्रा की व्यवस्था करती थी। जांच एजेंसी फिलहाल यह पता लगाने में जुटी है कि विमान और हेलीकॉप्टर खरीद में इस्तेमाल हुई राशि का वास्तविक स्रोत क्या था और इन संसाधनों का उपयोग किन परिस्थितियों में किया गया। इसी वजह से पूरे लेनदेन की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है।

    इस मामले की शुरुआत भी बेहद दिलचस्प तरीके से हुई। जून महीने में पार्टी के एक विधायक ने साइबर धोखाधड़ी से जुड़े संदिग्ध बैंक खातों की शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष ने भी आंतरिक विवाद का हवाला देते हुए पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज करने की मांग की। स्थानीय पुलिस की प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपए के संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आने के बाद मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका के आधार पर मामला ईडी के पास पहुंचा।

    दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने ईडी की पूरी कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताते हुए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि जांच एजेंसी विपक्षी दलों को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। फिलहाल ईडी 150 करोड़ रुपए से अधिक के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और उससे जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

  • E20 विवाद के बीच नितिन गडकरी का जवाब, बताई एथनॉल कारोबार में अपनी हिस्सेदारी

    E20 विवाद के बीच नितिन गडकरी का जवाब, बताई एथनॉल कारोबार में अपनी हिस्सेदारी


    नई दिल्ली। E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि एथनॉल उत्पादन में उनकी हिस्सेदारी बेहद मामूली है और इससे उन्हें कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि एथनॉल प्रोडक्शन में उनकी हिस्सेदारी केवल 0.07 प्रतिशत है।

    गडकरी ने कहा, “एथनॉल पॉलिसी से मुझे कोई फायदा नहीं मिल रहा है। इतनी छोटी हिस्सेदारी के आधार पर किसी बड़े आर्थिक लाभ की बात करना सही नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह आरोप पूरी तरह निराधार है कि एथनॉल नीति उनके निजी हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

    किसानों को फायदा पहुंचाने का दावा
    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह केवल एथनॉल ही नहीं, बल्कि वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल के समर्थक रहे हैं। उन्होंने कहा कि एथनॉल के बढ़ते उपयोग से किसानों को आर्थिक लाभ मिल सकता है। गडकरी ने स्पष्ट किया कि एथनॉल नीति किसी एक व्यक्ति का फैसला नहीं था। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पेट्रोलियम मंत्रालय, केंद्रीय मंत्रिमंडल और वैज्ञानिक शोध की प्रक्रिया के बाद लिया गया है।

    परिवार की कंपनियों पर भी दी सफाई
    गडकरी ने उन आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी, जिनमें कहा जा रहा था कि उनके परिवार से जुड़ी कंपनियां एथनॉल उत्पादन में शामिल हैं और इसी वजह से वह E20 पेट्रोल को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के सदस्यों की चीनी मिलें जरूर हैं, लेकिन उनकी कंपनियां एथनॉल उत्पादन पर निर्भर नहीं हैं।

    मक्के से एथनॉल उत्पादन से किसानों को लाभ का दावा
    गडकरी ने कहा कि देश में एथनॉल की उपलब्धता बढ़ी है और मक्के से एथनॉल बनाने के फैसले का फायदा किसानों को मिला है। उन्होंने दावा किया कि इस कदम से उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को करीब 45,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई है।

    उन्होंने बताया कि मक्के से एथनॉल उत्पादन का फैसला लेने से पहले मक्के की बाजार कीमत करीब 1,200 रुपये प्रति क्विंटल थी, जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,800 रुपये प्रति क्विंटल था। इसके बाद मक्के की कीमत बढ़कर करीब 2,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई।

    E20 पेट्रोल पर दिया था चैलेंज
    इससे पहले गडकरी ने E20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा था कि इसके कारण किसी वाहन में खराबी आने का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा था कि अगर किसी कार में E20 पेट्रोल से समस्या आई है तो उसका उदाहरण बताया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिक एथनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है और इसके पीछे एक अभियान चलाया जा रहा है।

    ISMA ने भी दावों को बताया गलत
    भारतीय चीनी एवं जैव ऊर्जा विनिर्माता संघ (ISMA) ने भी E20 पेट्रोल को लेकर किए जा रहे कुछ दावों को गलत और भ्रामक बताया है। संगठन ने कहा कि E20 से गाड़ियों को नुकसान, बीमा अमान्य होने या ईंधन में सीधे गन्ने का रस मिलाने जैसे दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, भारत का एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम वैज्ञानिक परीक्षणों, निगरानी और विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसमें पेट्रोलियम कंपनियों, वाहन निर्माताओं और ईंधन जांच एजेंसियों की भूमिका शामिल है।

  • मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत नाबालिग की शादी की दलील इलाहाबाद HC ने की रद्द, कहा- कानून सबसे ऊपर

    मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत नाबालिग की शादी की दलील इलाहाबाद HC ने की रद्द, कहा- कानून सबसे ऊपर


    नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिगों के विवाह से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ की व्यवस्थाएं बाल विवाह निषेध अधिनियम (PCMA) और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम जैसे केंद्रीय कानूनों से ऊपर नहीं हो सकतीं। अदालत ने कहा कि देश में विवाह की न्यूनतम आयु से संबंधित कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं, चाहे उनका धर्म कोई भी हो।

    जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में भले ही यौवन (प्यूबर्टी) को विवाह योग्य आयु माना गया हो, लेकिन यह प्रावधान बाल विवाह निषेध अधिनियम और पॉक्सो कानून के प्रभाव को समाप्त नहीं कर सकता। अदालत ने यह भी कहा कि पॉक्सो अधिनियम बच्चों के साथ यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी में रखता है और किसी भी व्यक्तिगत कानून के आधार पर इससे छूट नहीं दी जा सकती।

    बुलंदशहर की घटना से जुड़ा मामला
    यह टिप्पणी अदालत ने रूबी और अन्य 18 लोगों की उस याचिका को खारिज करते हुए की, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की थी। मामला उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का है, जहां 16 वर्षीय मुस्लिम किशोरी का बाल विवाह रुकवाने पहुंची पुलिस और चाइल्डलाइन की रेस्क्यू टीम पर हमला करने तथा सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप याचिकाकर्ताओं पर है।

    याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी थी कि शरिया कानून के अनुसार लड़की के यौवन प्राप्त करने के बाद, जिसे सामान्यतः 15 वर्ष माना जाता है, उसका विवाह कराया जा सकता है। उनका कहना था कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 उनके व्यक्तिगत कानून पर लागू नहीं होता।

    हाईकोर्ट ने दलील को किया खारिज
    अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि यदि 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति के विवाह को वैध माना जाए, तो वैवाहिक संबंधों के चलते पॉक्सो अधिनियम का सीधा उल्लंघन होगा। इसलिए किसी भी व्यक्तिगत कानून के आधार पर बाल विवाह को वैध नहीं ठहराया जा सकता।

    खंडपीठ ने माना कि इस विषय पर विभिन्न उच्च न्यायालयों के अलग-अलग दृष्टिकोण रहे हैं, लेकिन उसने केरल हाईकोर्ट के उस मत से सहमति जताई, जिसमें कहा गया है कि कोई भी पर्सनल लॉ बाल विवाह पर लगे कानूनी प्रतिबंध को समाप्त नहीं कर सकता।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी किया उल्लेख
    हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2025 के एक आदेश का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक, 2021 संसद में लंबित रहने के दौरान इस विषय पर कुछ कानूनी प्रश्न उठे थे। हालांकि, 17वीं लोकसभा के भंग होने के साथ ही यह विधेयक स्वतः समाप्त हो गया और इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है।

    एफआईआर रद्द करने से किया इनकार
    अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि मामले में नाबालिग के परिजनों और अन्य लोगों द्वारा कानून का उल्लंघन किया गया है। साथ ही पुलिस और चाइल्डलाइन की टीम की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि सरकारी अधिकारियों के कार्य में बाधा डालने, उनके साथ अभद्रता और हमला करने के आरोपों की विस्तृत जांच आवश्यक है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने 1 जुलाई को दिए अपने आदेश में एफआईआर रद्द करने से इनकार करते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।