Category: National

  • गर्भवती IPS अधिकारियों के प्रशिक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई, 1993 के नियम की वैधता और समानता के अधिकार पर उठे बड़े सवाल

    गर्भवती IPS अधिकारियों के प्रशिक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई, 1993 के नियम की वैधता और समानता के अधिकार पर उठे बड़े सवाल

    नई दिल्ली । गर्भवती महिला आईपीएस अधिकारियों के प्रशिक्षण से जुड़े तीन दशक पुराने नियम की वैधता अब सुप्रीम कोर्ट की कसौटी पर है। वर्ष 1993 में जारी गृह मंत्रालय के कार्यालय ज्ञापन को चुनौती देने वाली याचिका पर शीर्ष अदालत सुनवाई कर रही है। इस मामले ने महिला अधिकारियों के अधिकार, सेवा नियमों में समानता और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुरूप प्रशासनिक नीतियों की आवश्यकता पर नई बहस छेड़ दी है।

    याचिका मध्य प्रदेश कैडर की वर्ष 2023 बैच की आईपीएस अधिकारी उर्वशी सेंगर ने दायर की है। उनका कहना है कि केवल गर्भावस्था के आधार पर प्रशिक्षण रोकना वर्तमान समय की चिकित्सा समझ और संवैधानिक समानता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। उनका तर्क है कि प्रत्येक अधिकारी की शारीरिक स्थिति और मेडिकल फिटनेस का अलग-अलग आकलन किया जाना चाहिए, न कि सभी मामलों में एक समान प्रतिबंध लागू किया जाए।

    उर्वशी सेंगर ने नवंबर 2023 में अपने प्रशिक्षण का पहला चरण पूरा किया था। दूसरे चरण के प्रशिक्षण के दौरान वह गर्भवती हुईं और इसकी जानकारी संबंधित पुलिस अकादमी को दी। इसके बाद उन्हें प्रशिक्षण बीच में ही रोकने तथा प्रसव के एक वर्ष बाद अगली बैच के साथ दोबारा प्रशिक्षण पूरा करने का निर्देश दिया गया। बच्चे के जन्म के बाद उन्होंने मेडिकल फिटनेस के आधार पर प्रशिक्षण में दोबारा शामिल होने की अनुमति मांगी, लेकिन वर्ष 1993 के नियम का हवाला देते हुए उनकी मांग स्वीकार नहीं की गई।

    इसके बाद उन्होंने केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल का रुख किया। ट्रिब्यूनल ने अंतरिम आदेश में आवश्यक चिकित्सकीय औपचारिकताएं पूरी करने की शर्त पर उन्हें प्रशिक्षण में शामिल होने की अनुमति दी थी। हालांकि बाद में संबंधित पुलिस अकादमी ने इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश पर रोक लगाते हुए कहा कि संबंधित नियम महिला अधिकारी और उसके होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया था।

    अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पहुंच गया है, जहां अदालत को यह तय करना है कि क्या केवल गर्भावस्था किसी महिला अधिकारी को प्रशिक्षण से बाहर रखने का पर्याप्त आधार हो सकती है। याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रशिक्षण के दूसरे चरण में मुख्य रूप से कक्षा आधारित अध्ययन, अकादमिक मॉड्यूल और संस्थागत गतिविधियां शामिल होती हैं, जिनमें अत्यधिक शारीरिक श्रम की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे में बिना व्यक्तिगत मेडिकल मूल्यांकन के प्रशिक्षण से वंचित करना उचित नहीं माना जा सकता।

    याचिका में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी उठाया गया है कि वर्ष 2004 में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने महिला आईएएस अधिकारियों के लिए पुराने नियमों में संशोधन किया था। संशोधित व्यवस्था के तहत महिला आईएएस प्रोबेशनरों को उनकी व्यक्तिगत मेडिकल फिटनेस के आधार पर प्रशिक्षण पूरा करने की अनुमति दी जाती है। ऐसे में आईपीएस अधिकारियों के लिए अब भी 1993 के पुराने प्रावधान लागू रखना समानता के सिद्धांत के विपरीत बताया गया है।

    वर्ष 1993 के कार्यालय ज्ञापन के अनुसार यदि कोई महिला आईपीएस प्रोबेशनर प्रशिक्षण के दौरान गर्भवती हो जाती है तो उसका प्रशिक्षण तत्काल रोक दिया जाता है और प्रसव के एक वर्ष बाद ही उसे दोबारा प्रशिक्षण पूरा करने की अनुमति मिलती है। इस अवधि को असाधारण अवकाश माना जाता है, हालांकि इससे उसकी वरिष्ठता प्रभावित नहीं होती।

    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में महिला आईपीएस अधिकारियों के प्रशिक्षण, सेवा नियमों और मातृत्व से जुड़े प्रशासनिक प्रावधानों की दिशा भी तय कर सकता है। अदालत का फैसला यह स्पष्ट करेगा कि वर्तमान परिस्थितियों में पुराने सेवा नियमों को आधुनिक चिकित्सा मानकों और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप किस प्रकार देखा जाना चाहिए।

  • बद्रीनाथ चढ़ावा अनियमितता प्रकरण ने पकड़ी रफ्तार, निलंबन के बाद प्रमोद नौटियाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज, शासन ने शुरू की बहुस्तरीय जांच

    बद्रीनाथ चढ़ावा अनियमितता प्रकरण ने पकड़ी रफ्तार, निलंबन के बाद प्रमोद नौटियाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज, शासन ने शुरू की बहुस्तरीय जांच

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में जांच का दायरा और व्यापक हो गया है। विभागीय कार्रवाई के तहत पहले निलंबित किए गए श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल के खिलाफ अब पुलिस ने भी मुकदमा दर्ज कर लिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है, जिससे पूरे घटनाक्रम की गहन पड़ताल की जा सके।

    बीकेटीसी की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर बद्रीनाथ थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत मंदिर अधिकारी की लिखित तहरीर पर दर्ज हुई, जिसके बाद मामला विभागीय जांच से आगे बढ़कर आपराधिक जांच के दायरे में पहुंच गया है। पुलिस अब उपलब्ध दस्तावेजों, रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

    जानकारी के अनुसार, मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़ी कथित अनियमितताओं की सूचना मिलने के बाद मंदिर समिति ने प्रारंभिक स्तर पर जांच शुरू की थी। शुरुआती जांच में प्रथम दृष्टया यह सामने आया कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना मंदिर की धनराशि के साथ कथित अनधिकृत हस्तक्षेप हुआ। इसी आधार पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने गढ़वाल आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को पूरे घटनाक्रम की तथ्यात्मक जांच कर 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है। जांच के दौरान मंदिर की वित्तीय व्यवस्था, चढ़ावे की गिनती, धनराशि के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था सहित सभी प्रक्रियाओं की विस्तार से समीक्षा की जाएगी।

    बताया गया है कि प्रारंभिक जांच के दौरान सोशल मीडिया पर सामने आए दावों को भी संज्ञान में लिया गया था। इसके बाद संबंधित दस्तावेजों और उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण किया गया। जांच में प्रथम दृष्टया कुछ ऐसी परिस्थितियां सामने आने का उल्लेख किया गया, जिनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई आवश्यक समझी गई। इसी प्रक्रिया के तहत पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।

    बीकेटीसी का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। समिति का मानना है कि यदि संबंधित कर्मचारी को पद पर बनाए रखा जाता तो जांच प्रभावित होने की आशंका बनी रहती। इसी कारण पहले प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए निलंबन किया गया और बाद में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पुलिस में मामला दर्ज कराया गया।

    अब पुलिस जांच और उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यदि जांच के दौरान अतिरिक्त तथ्य या अन्य संबंधित पहलू सामने आते हैं तो उनके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। फिलहाल प्रशासन और मंदिर समिति दोनों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोष तय किए जाएंगे और जांच पूरी होने के बाद नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

  • राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में जांच तेज, तीन आरोपी 40 घंटे की पुलिस रिमांड पर, मास्टरमाइंड की भूमिका पर फोकस

    राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में जांच तेज, तीन आरोपी 40 घंटे की पुलिस रिमांड पर, मास्टरमाइंड की भूमिका पर फोकस

    नई दिल्ली । राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। मामले की जांच कर रही पुलिस टीम ने तीन आरोपियों को न्यायिक हिरासत से रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस पूछताछ से कथित गबन के तरीके, धन के प्रवाह और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। मामले को लेकर सुरक्षा और जांच एजेंसियां लगातार साक्ष्य जुटाने में लगी हुई हैं।

    स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच में अविनाश शुक्ला को इस कथित गबन प्रकरण की मुख्य कड़ी माना गया है। जांच रिपोर्ट में उनके खिलाफ उपलब्ध प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर उन्हें प्रमुख आरोपी के रूप में चिन्हित किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज, बैंक खातों के विवरण, बरामदगी से जुड़े रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों का विश्लेषण करने के बाद जांच टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची कि मामले की परतें खोलने में अविनाश शुक्ला की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अन्य संदिग्धों की पहचान भी संभव हो सकी।

    जांच के अगले चरण में पुलिस ने लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडेय को रिमांड पर लिया है। तीनों आरोपियों से लगातार करीब 40 घंटे तक पूछताछ की जाएगी। पुलिस को उम्मीद है कि आमने-सामने की पूछताछ और पहले दर्ज किए गए बयानों के मिलान से मामले की कई अहम कड़ियां स्पष्ट होंगी। अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान धन के कथित गबन, उसके उपयोग और संभावित सहयोगियों से जुड़े पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    जांच के दायरे को व्यापक बनाते हुए पुलिस ने कुछ अन्य लोगों से भी पूछताछ शुरू की है। आरोपी अनुकल्प मिश्रा के एक रिश्तेदार से जानकारी जुटाई जा रही है। इसके अलावा एक सर्राफा कारोबारी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है। निर्माण सामग्री के कारोबार से जुड़े कुछ लोगों से भी जानकारी एकत्र की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित रूप से गबन की गई धनराशि का उपयोग किन-किन कार्यों में किया गया और उसका आर्थिक लेनदेन किस प्रकार हुआ।

    जांच अधिकारियों का कहना है कि अब तक मिले साक्ष्यों और आरोपियों के बयानों में कुछ ऐसे बिंदु सामने आए हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। इसी कारण पुलिस ने अदालत से रिमांड लेकर विस्तृत पूछताछ की अनुमति प्राप्त की है। जांच एजेंसियां डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेजों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का भी मिलान कर रही हैं ताकि पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

    राम मंदिर से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल मामले पर देशभर की नजर बनी हुई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। पूछताछ पूरी होने के बाद यदि नए तथ्य सामने आते हैं तो उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस का मुख्य उद्देश्य कथित गबन की पूरी श्रृंखला, उससे जुड़े सभी लोगों की भूमिका और धन के अंतिम उपयोग तक पहुंचना है, ताकि मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच सुनिश्चित की जा सके।

  • एनसीआर मास्टर प्लान 2041 को मिली नई रफ्तार, हाथरस में विकसित होगा आधुनिक अर्बन सेंटर, उद्योग, आवास और रोजगार के खुलेंगे नए अवसर

    एनसीआर मास्टर प्लान 2041 को मिली नई रफ्तार, हाथरस में विकसित होगा आधुनिक अर्बन सेंटर, उद्योग, आवास और रोजगार के खुलेंगे नए अवसर

    नई दिल्ली । दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ती आबादी और तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश में एक नई आधुनिक टाउनशिप विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मास्टर प्लान 2041 के तहत हाथरस के आसपास एक हाईटेक अर्बन सेंटर बसाया जाएगा, जिसे भविष्य के सैटेलाइट शहर के रूप में विकसित करने की योजना है। इस परियोजना का उद्देश्य एनसीआर के बड़े शहरों पर बढ़ते दबाव को कम करना और आसपास के जिलों में संतुलित विकास को बढ़ावा देना है।

    यह नई टाउनशिप आगरा और अलीगढ़ के बीच रणनीतिक स्थान पर विकसित होगी, जिससे दोनों शहरों के साथ-साथ नोएडा, ग्रेटर नोएडा और दिल्ली तक बेहतर संपर्क स्थापित होगा। प्रस्तावित अर्बन सेंटर के लिए हजारों एकड़ भूमि चिन्हित की गई है और इसे चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में बड़े क्षेत्रफल में आधुनिक आवासीय और औद्योगिक ढांचा तैयार करने की योजना बनाई गई है।

    परियोजना के लिए विस्तृत मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है, जिसमें क्षेत्र की भविष्य की आबादी, औद्योगिक आवश्यकताओं, परिवहन व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं का व्यापक अध्ययन शामिल होगा। आधुनिक जीआईएस आधारित योजना के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शहर का विस्तार व्यवस्थित, टिकाऊ और दीर्घकालिक जरूरतों के अनुरूप हो।

    प्रस्तावित शहर को चार प्रमुख हिस्सों में विकसित करने की योजना है। इसमें औद्योगिक क्षेत्र, आवासीय क्षेत्र, वाणिज्यिक केंद्र और हरित क्षेत्र शामिल होंगे। औद्योगिक जोन में विनिर्माण इकाइयों और नए निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा, जबकि आवासीय क्षेत्र में आधुनिक कॉलोनियां, किफायती आवास, विद्यालय, अस्पताल और सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। वाणिज्यिक क्षेत्र में व्यापारिक प्रतिष्ठान, होटल, कार्यालय और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं स्थापित होंगी। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त क्षेत्र हरित पट्टी और पार्कों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा।

    इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी उत्कृष्ट कनेक्टिविटी होगी। यमुना एक्सप्रेसवे के माध्यम से यह क्षेत्र नोएडा, ग्रेटर नोएडा और दिल्ली से सीधे जुड़ सकेगा। साथ ही जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक तेज पहुंच उपलब्ध होने से उद्योगों, व्यापार और निर्यात गतिविधियों को बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। भविष्य में प्रस्तावित अन्य परिवहन परियोजनाओं का लाभ भी इस क्षेत्र को मिल सकता है।

    रेल संपर्क के लिहाज से भी हाथरस महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रमुख रेल मार्गों से जुड़े होने के कारण यहां माल परिवहन और यात्री आवागमन दोनों को सुविधा मिलेगी। समर्पित माल गलियारों के नेटवर्क का लाभ मिलने से औद्योगिक इकाइयों के लिए देश के विभिन्न हिस्सों और बंदरगाहों तक सामान पहुंचाना अधिक आसान और तेज हो सकेगा। इससे क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    हाथरस पहले से ही हींग, कांच के मोती, कपड़ा, गुलाल और अन्य पारंपरिक उद्योगों के लिए जाना जाता है। नई परियोजना के तहत इन स्थानीय उत्पादों को आधुनिक पैकेजिंग, अनुसंधान और निर्यात सुविधाओं से जोड़ने की योजना है। साथ ही डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, रेडीमेड परिधान, मशीन टूल्स, इलेक्ट्रिकल उपकरण और मेडिकल उपकरण जैसे क्षेत्रों में नए निवेश आकर्षित करने की भी तैयारी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह अर्बन सेंटर केवल एक नई टाउनशिप नहीं होगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में औद्योगिक, आवासीय और आर्थिक विकास का नया केंद्र बन सकता है। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और एनसीआर के आसपास संतुलित शहरी विकास को गति मिलने की संभावना है।

  • बारुईपुर रेप-मर्डर केस में बड़ा घटनाक्रम, मुख्य आरोपी पुलिस एनकाउंटर में ढेर; पीड़िता को न्याय दिलाने की कार्रवाई तेज

    बारुईपुर रेप-मर्डर केस में बड़ा घटनाक्रम, मुख्य आरोपी पुलिस एनकाउंटर में ढेर; पीड़िता को न्याय दिलाने की कार्रवाई तेज

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में 12 वर्षीय बच्ची से कथित रेप और हत्या के मामले में मंगलवार देर रात बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब इस मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल प्रवास मंडल पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। पुलिस के अनुसार आरोपी को घटना से जुड़े तथ्यों की पुष्टि और क्राइम सीन रीक्रिएशन के लिए ले जाया जा रहा था। इसी दौरान उसने कथित रूप से पुलिसकर्मियों से हथियार छीनकर भागने की कोशिश की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें आरोपी घायल हो गया। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    यह मामला उस समय सामने आया था जब बारुईपुर क्षेत्र से लापता हुई 12 वर्षीय बच्ची का शव एक तालाब से बोरी में बंद बरामद हुआ। प्रारंभिक जानकारी के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया और स्थानीय लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी तथा कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। घटना के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए विशेष टीम का गठन किया और विभिन्न तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई।

    जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल टावर लोकेशन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपियों की पहचान की। इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। शुरुआती स्तर पर दर्ज मामले में बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यौन अपराध से संबंधित गंभीर धाराएं भी जोड़ी गईं। इसके बाद जांच को और व्यापक रूप दिया गया ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्यों का स्पष्ट रूप से पता लगाया जा सके।

    घटना ने पूरे क्षेत्र में गहरी चिंता और नाराजगी पैदा कर दी है। स्थानीय नागरिकों ने दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने की मांग उठाई। प्रशासन ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की नियमित निगरानी शुरू की है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को कानून से बचने नहीं दिया जाएगा।

    इस बीच राजनीतिक स्तर पर भी मामले को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद कई नेताओं ने घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना है कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले ऐसे अपराधों के मामलों में त्वरित जांच और सख्त सजा ही समाज में कानून के प्रति विश्वास मजबूत कर सकती है। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग लगातार उठ रही है।

    राज्य सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि इस मामले में अभियोजन पक्ष को पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के तहत आरोपियों के खिलाफ कठोरतम दंड सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार जांच अभी जारी है और सभी आवश्यक वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों को एकत्र कर न्यायालय में मजबूत केस प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था तथा संवेदनशील मामलों में त्वरित न्याय की आवश्यकता पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।

  • दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर लगातार हादसों से बढ़ी चिंता, दौसा में दो साल में 61 मौतों के बाद खुद निरीक्षण करेंगे नितिन गडकरी

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर लगातार हादसों से बढ़ी चिंता, दौसा में दो साल में 61 मौतों के बाद खुद निरीक्षण करेंगे नितिन गडकरी

    नई दिल्ली । दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के राजस्थान स्थित दौसा खंड पर लगातार बढ़ते सड़क हादसों ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल के वर्षों में इस हिस्से पर दुर्घटनाओं और मौतों की बढ़ती संख्या के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी स्वयं मौके का निरीक्षण करने जा रहे हैं। इस दौरे का उद्देश्य एक्सप्रेसवे पर मौजूद संभावित तकनीकी और यातायात संबंधी कमियों का आकलन करना तथा भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए आवश्यक सुधारों की दिशा तय करना है।

    दौसा जिले की सीमा में आने वाले एक्सप्रेसवे पर वर्ष 2025 में 33 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं, जिनमें 35 लोगों की जान गई। वहीं वर्ष 2026 में जून तक 24 हादसों में 26 लोगों की मौत हो चुकी है। इस तरह दो वर्षों से भी कम समय में इस मार्ग पर 61 लोगों की जान जा चुकी है। लगातार सामने आ रहे इन आंकड़ों ने सड़क सुरक्षा और एक्सप्रेसवे के संचालन को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    हाल ही में इसी मार्ग पर हुई एक भीषण बस दुर्घटना ने पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले कि मार्ग पर दिशा-सूचक संकेत स्पष्ट नहीं होने के कारण आगे चल रहे वाहन के चालक को सही निकास बिंदु समझने में परेशानी हुई। इसके बाद वाहन की गति अचानक कम होने से पीछे आ रही तेज रफ्तार बस उससे टकरा गई। इस दुर्घटना में कई लोगों की जान चली गई, जबकि अनेक यात्री गंभीर रूप से घायल हुए।

    प्रारंभिक स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में लगे दिशा-सूचक बोर्ड तेज गति से चल रहे वाहनों के चालकों के लिए पर्याप्त स्पष्ट नहीं हैं। कई स्थानों पर टर्न से पहले लगाए गए संकेत छोटे दिखाई देते हैं, जिससे चालक समय रहते सही लेन नहीं चुन पाते। कुछ मामलों में वाहन आगे निकलने के बाद अचानक गति कम कर देते हैं या वापस मुड़ने की कोशिश करते हैं, जिससे पीछे आ रहे वाहनों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक एक्सप्रेसवे पर केवल चौड़ी सड़क बनाना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले साइनेज, पर्याप्त दूरी पर चेतावनी संकेत, स्पष्ट लेन मार्गदर्शन और सुरक्षित निकास व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। यदि संकेत समय पर और स्पष्ट दिखाई दें तो चालक पहले ही आवश्यक निर्णय ले सकते हैं और दुर्घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है।

    केंद्रीय मंत्री के निरीक्षण के दौरान सड़क की डिजाइन, साइनेज, लेन प्रबंधन, निकास बिंदुओं और अन्य सुरक्षा उपायों की विस्तृत समीक्षा किए जाने की संभावना है। इसके आधार पर आवश्यक सुधार कार्यों की रूपरेखा तैयार की जा सकती है ताकि भविष्य में दुर्घटनाओं की संख्या कम हो और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है और इस पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन आवाजाही करते हैं। ऐसे में सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत बनाना समय की आवश्यकता माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर इंजीनियरिंग, स्पष्ट संकेतक, नियमित सुरक्षा ऑडिट और यातायात नियमों का सख्ती से पालन ही इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय हो सकता है। गडकरी के इस निरीक्षण से एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • चंपत राय ने राम भक्तों के नाम लिखी चिट्ठी, जानिए अपने ऊपर लगे आरोपों पर क्‍या कहा?

    चंपत राय ने राम भक्तों के नाम लिखी चिट्ठी, जानिए अपने ऊपर लगे आरोपों पर क्‍या कहा?


    लखनऊ । ऐसा लग रहा था कि ट्रस्ट की मीटिंग में चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद अयोध्या का माहौल शांत पड़ जाएगा, माहौल थोड़ा शांत होता दिख भी रहा था तभी चंपत राय ने अचानक पूरे माहौल को गर्मा दिया.

    SIT की शुरुआती रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के एक दिन बाद चंपत राय का एक सोशल मीडिया पोस्ट सामने आया, जिसमें उनकी अब तक की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया थी. इस ट्वीट में राम भक्तों के नाम उनकी एक चिट्ठी थी. उस चिट्ठी में उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को मनगढ़ंत करार दिया और कहा कि जल्द ही वो अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का क्रमवार ढंग से जवाब देंगे. उन्होंने अपने 41 वर्षों के प्रचारक जीवन और 1991 से अयोध्या राम मंदिर से जुड़े होने का जिक्र किया.

    चंपत राय से जुड़ी दूसरी खबर उनके एक्स पोस्ट के बाद तुरंत ही सामने आ गई. एसआईटी के सामने जो उन्होंने अपना लिखित बयान दिया था. इसका एक हिस्सा लीक हो गया और इस लीक पेपर में चंपत राय ने सीधे-सीधे दान पात्रों में रकम की गिनती और बैंक में जमा होने के जिम्मेदारियों से अपने को अलग कर दिया.

    उन्होंने कहा कि बैंक के साथ जो एमओयू साइन हुआ है. उसमें उनका साइन ही नहीं है. बैंक के अधिकारियों के साथ मिलकर कैसे नोट गिनने की प्रक्रिया में फेरबदल किया. कैसे उसकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं है और वह इस पूरे प्रॉसेस का हिस्सा भी नहीं थे.

    उन्होंने इशारों में चढ़ावा चोरी और दान पत्र की गड़बड़ियों को अनिल मिश्रा के मत्थे डाल दिया है क्योंकि बैंक के साथ हुए एमओयू के सिग्नेटरी अनिल मिश्रा ही है और चंपत राय को इसकी जानकारी भी नहीं थी. चंपत राय ने अब नए सिरे से पूरे माहौल को गरमा दिया है अब आरोप और प्रत्यारोपों का नया दौर शुरू हो गया है जिससे ट्रस्ट के भीतर नए सिरे से कलह शुरू हो सकता है. पूरे मामले में अब अनिल मिश्रा फंसते हुए दिखाई दे रहे हैं क्योंकि एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में भी अनिल मिश्रा पर गंभीर सवाल खड़े हैं और अब उनको नोटिस भेज कर उसे पूछताछ की तैयारी हो रही है.

    उधर, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने मीडिया से बातचीत में चंपत राय को निष्कलंक लेकिन जिद्दी बताते हुए यह माना कि उनके स्तर से लापरवाही जैसी गलतियां हुई है, लेकिन वह दोषी नहीं हो सकते उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है. एक तरफ ट्रस्ट की बैठक में अब तक के मंदिर के लिए किए गए चंपत राय के काम को सभी ने खुलकर सराहा दूसरी तरफ SIT की शुरुआती रिपोर्ट में क्लीन चिट मिल जाने पर चंपत राय ने इस पूरे मुद्दे पर अपना लंबा मौन तोड़ दिया है.

    जिस तरीके से ट्रस्ट ने चंपत राय का बचाव किया है और SIT में क्लीनचिट मिलती दिखाई दे रही है. उससे साफ है कि अब चंपत राय भी खुलकर सामने आएंगे. अब बस इंतजार एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट का है. इससे पहले ट्रस्ट की बैठक को लेकर कई मतभेद उभरे थे मसलन ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास नाराज थे, अब तक उन्हें ट्रस्ट के लोग पूछते तक नहीं थे लेकिन जब चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफा की बात आई तो उन्हें मनाकर बैठक में लाना पड़ा.

    राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक के पहले छोटी छावनी में हाई वोल्टेज ड्रामा चला था. अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को मनाने पहुंचे बड़े पदाधिकारी, घंटों मंथन हुआ तब महंत नृत्य गोपाल दास आने को तैयार हए थे. यही नहीं बाहर से आने वाले ट्रस्ट के कई साधु संतों को भी मुश्किल से इस मीटिंग के लिए तैयार किया गया. बैठक से पहले महंत नृत्य गोपाल दास की ओर से एक पत्र भी जारी किया गया, जिसमें उन्होंने दान चोरी की घटना पर गहरा आघात व्यक्त किया और कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा है कि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होगी.

    बैठक में ट्रस्ट सदस्य और निर्मोही अखाड़े के महंत महंत दिनेंद्र दास की मौजूदगी को लेकर भी दिनभर सस्पेंस बना रहा, लेकिन वे बैठक में शामिल हुए. SIT रिपोर्ट सामने आने के बाद अब ट्रस्ट से जुड़े लोग थोड़े निश्चित हो गए हैं क्योंकि चंपत राय को लगभग क्लीन चिट मिल चुकी है और ट्रस्ट ने चढ़ावे में उपहार स्वरूप मिले सभी आभूषण और कीमती उपहार का पूरा रिकॉर्ड भी जारी कर दिया है, जिसके बाद उपहार वाले चढ़ावों के चोरी की चर्चा बंद हो चुकी है हालांकि अनिल मिश्रा सवालों के घेरे में हैं जांच के बाद उन पर गाज गिर सकती है.

    नए तरीके से ट्रस्ट में होने वाले बदलाव की रूपरेखा तैयार हो चुकी है जल्द ही ट्रस्ट को नया सीईओ मिलने वाला है जिसके लिए तीन लोगों की एक कमेटी बना दी गई है और 22 को होने वाली अगली मीटिंग में ट्रस्ट के पुनर्गठन और नए सीईओ के नाम के ऐलान की उम्मीद है. चंपत राय को लगभग क्लीन चिट मिल जाना और उपहार की पूरी सूची और प्रदर्शनी के साथ सामने आने के बाद ट्रस्ट को थोड़ी राहत मिली है नए कार्यकारी महासचिव कृष्ण मोहन की नियुक्ति ने भी थोड़ा माहौल को ठंडा किया है लेकिन अभी जांच में और खुलासे होने बाकी हैं.

    अनिल मिश्रा को नोटिस भेजा जा चुका है अब जल्द ही SIT उनसे पूछताछ करेगी. उधर अयोध्या पुलिस लगातार आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ में जुटी है. उम्मीद है इसमें बचे हुए खुलासे और होंगे.

  • उत्तराखंड में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित, 32 सड़कें बंद, नदियां उफान पर

    उत्तराखंड में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित, 32 सड़कें बंद, नदियां उफान पर


    नई दिल्ली। उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। प्रदेश के कई हिस्सों में भूस्खलन की घटनाओं के कारण पहाड़ों से चट्टानें और मलबा सड़क पर आ गया है, जिससे आवागमन बाधित हो गया है। वहीं, लगातार बारिश से अलकनंदा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है और वे उफान पर बह रही हैं।

    राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, भूस्खलन और मलबा आने की वजह से प्रदेश में फिलहाल 32 सड़कें बंद हैं। प्रशासन ने बताया कि प्रभावित मार्गों से चट्टानें और मलबा हटाने का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है, ताकि जल्द से जल्द यातायात बहाल किया जा सके। इसके लिए संबंधित विभागों की टीमें लगातार मौके पर जुटी हुई हैं।

    मंगलवार को राज्य के कई इलाकों में भारी वर्षा दर्ज की गई। मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के मुताबिक सबसे अधिक 107 मिमी बारिश पंतनगर में रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा चोरगलिया में 79.5 मिमी, रुद्रपुर में 43.5 मिमी, यमकेश्वर में 38 मिमी और किच्छा में 32.5 मिमी वर्षा हुई। खानपुर में 27 मिमी, जबकि देहरादून और लक्सर में 19-19 मिमी बारिश दर्ज की गई। अन्य क्षेत्रों में हाथीबड़कला में 15 मिमी, पिथौरागढ़ में 8.9 मिमी और लोहाघाट में 8 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।

    मौसम विज्ञान केंद्र ने बुधवार को भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। साथ ही देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों के कुछ इलाकों में भारी बारिश का अनुमान व्यक्त किया गया है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है।

  • पंजाब कांग्रेस में बढ़ी सियासी खींचतान: भूपेश बघेल की बैठकों से दूर रहा चन्नी खेमा, संगठन में मतभेद हुए उजागर

    पंजाब कांग्रेस में बढ़ी सियासी खींचतान: भूपेश बघेल की बैठकों से दूर रहा चन्नी खेमा, संगठन में मतभेद हुए उजागर


    नई दिल्ली। पंजाब में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर जारी गुटबाजी अब खुलकर सामने आने लगी है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के नेतृत्व को लेकर असहमति जताई है। इसी बीच पार्टी के पंजाब प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल संगठनात्मक हालात संभालने के लिए चंडीगढ़ पहुंचे, लेकिन उनकी अब तक चन्नी गुट के नेताओं से मुलाकात नहीं हो सकी है।

    मंगलवार को भूपेश बघेल ने पंजाब कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और विभिन्न समितियों के पदाधिकारियों के साथ बैठकें कीं, हालांकि चन्नी समर्थक नेताओं ने इन बैठकों से दूरी बनाए रखी। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए चन्नी का समर्थन कर रहे नेताओं की बघेल से मुलाकात नहीं होने के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

    इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी अगले एक-दो दिनों में भूपेश बघेल से मुलाकात करेंगे। उन्होंने बताया कि बघेल अधिकांश समितियों के अध्यक्षों से चर्चा कर चुके हैं और अब केवल चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष चरणजीत सिंह चन्नी तथा कोर कमेटी के प्रमुख सुखजिंदर सिंह रंधावा से बैठक बाकी है।

    राजा वडिंग के अनुसार, चन्नी ने पहले ही बघेल को सूचित कर दिया था कि वे एक-दो दिन के लिए शहर से बाहर रहेंगे। हालांकि चन्नी के करीबी नेताओं ने भी अब तक बघेल से मुलाकात नहीं की है। चन्नी के निकट माने जाने वाले भारत भूषण आशु भी बैठकों से दूर रहे।

    गौरतलब है कि भूपेश बघेल 6 जुलाई को पंजाब के पांच दिवसीय दौरे पर चंडीगढ़ पहुंचे थे। एयरपोर्ट पर उनका स्वागत प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने किया। चंडीगढ़ पहुंचने के बाद बघेल ने सबसे पहले प्रताप सिंह बाजवा के साथ बंद कमरे में बैठक की।

    मंगलवार सुबह बघेल ने पंजाब कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजकुमार वेरका के साथ नाश्ते पर मुलाकात की। इसके बाद वेरका सीधे पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से मिलने पहुंचे। इसे कांग्रेस नेतृत्व की ओर से असंतुष्ट नेताओं के साथ संवाद बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

    उधर, प्रताप सिंह बाजवा ने भरोसा जताया कि पार्टी के भीतर मौजूद सभी मतभेद जल्द दूर कर लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता को अपनी शिकायतों के बावजूद पार्टी की मर्यादा नहीं लांघनी चाहिए। बाजवा ने दावा किया कि पंजाब की जनता बदलाव चाहती है और कांग्रेस उसके लिए सबसे मजबूत विकल्प है। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ती है तो जनता का विश्वास जरूर मिलेगा। मुख्यमंत्री पद को लेकर उन्होंने कहा कि इस पर फैसला चुनाव परिणाम आने और सरकार बनने की स्थिति में किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि महत्वाकांक्षा रखना गलत नहीं है, लेकिन ऐसे कदमों से बचना चाहिए जो पार्टी के लिए अनावश्यक विवाद का कारण बनें।

  • 'बाबरी पर आंसू बहाने वालों को अयोध्या पर बोलने का अधिकार नहीं', प्रतापगढ़ में विपक्ष पर योगी का तीखा हमला, आस्था और वक्फ को लेकर साधा निशाना

    'बाबरी पर आंसू बहाने वालों को अयोध्या पर बोलने का अधिकार नहीं', प्रतापगढ़ में विपक्ष पर योगी का तीखा हमला, आस्था और वक्फ को लेकर साधा निशाना

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में आयोजित एक जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए अयोध्या, राम मंदिर और वक्फ कानून जैसे मुद्दों पर विपक्ष के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल पहले भगवान श्रीराम के अस्तित्व और अयोध्या से जुड़े मुद्दों पर अलग रुख अपनाते रहे, वे अब हिंदुओं की आस्था का हवाला देकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता ऐसे दोहरे रवैये को भलीभांति समझती है और समय आने पर उसका जवाब भी देती है।

    उन्होंने राम मंदिर से जुड़े दान विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि इस विषय को विपक्ष ने वास्तविक तथ्यों से अधिक राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री के अनुसार अयोध्या का वर्तमान स्वरूप धार्मिक, सांस्कृतिक और आधारभूत विकास का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने कहा कि शहर में आधुनिक सुविधाओं, बेहतर संपर्क व्यवस्था और तीर्थ विकास के लिए व्यापक स्तर पर कार्य हुआ है, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को लाभ मिल रहा है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दलों के पास जनता के सामने रखने के लिए विकास का कोई सकारात्मक एजेंडा नहीं बचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष समाज को जातीय आधार पर विभाजित करने और धार्मिक भावनाओं से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक रूप देने की कोशिश करता रहा है। उनके अनुसार लोकतांत्रिक राजनीति का आधार विकास, सुशासन और जनहित होना चाहिए, न कि समाज में विभाजन पैदा करना।

    अयोध्या और राम मंदिर के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग पहले इन विषयों पर अलग दृष्टिकोण रखते थे, वे अब स्वयं को आस्था का समर्थक बताने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी धार्मिक आस्था व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन राजनीतिक दलों को अपने पुराने रुख और वर्तमान बयानों के बीच की विसंगतियों का भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता इतिहास और वर्तमान दोनों को याद रखती है।

    अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने वक्फ कानून का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून के समान अनुपालन को सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि किसी भी विषय पर सुधारात्मक कदम उठाए जाने पर विपक्ष अनावश्यक विरोध करता है, जबकि सुधारों का उद्देश्य आम लोगों के हितों की रक्षा करना होता है। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि राज्य सरकार विकास, कानून-व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को समान प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे राजनीतिक बयानों के बजाय सरकार के कार्यों और विकास योजनाओं के आधार पर निर्णय लें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तर प्रदेश में विकास, निवेश, धार्मिक पर्यटन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में चल रहे प्रयास आने वाले समय में राज्य की प्रगति को नई गति देंगे और जनता का विश्वास इसी प्रकार बना रहेगा।