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  • परिसीमन बिल पर सरकार को एक विपक्षी दल का मिल सकता है साथ, द्रमुक का बदल रहा मूड

    परिसीमन बिल पर सरकार को एक विपक्षी दल का मिल सकता है साथ, द्रमुक का बदल रहा मूड


    नई दिल्ली।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) में बदली राजनीतिक परिस्थितियों के बाद केंद्र के परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) पर द्रमुक के रुख में भी बदलाव दिख रहा है। राज्य में चुनाव से पहले इस बिल का खुला विरोध कर रही द्रमुक अब कह रही है कि विधेयक के प्रावधानों को देखने के बाद इसके समर्थन करने या नहीं करने का फैसला लिया जाएगा।

    सूत्रों का कहना है उसके इस रुख का मतलब है कि यदि बिल में यह प्रावधान होता है कि राज्यों में विधानसभा की मौजूदा सीटों की संख्या में समान रूप से 50% की वृद्धि होगी तो द्रमुक समर्थन देने के लिए तैयार हो सकती है। अप्रैल में जो बिल सरकार ने पेश किया था, तब ऐसी बात कही गई थी लेकिन यह विधेयक में नहीं थी। वह विधेयक पारित नहीं हो पाया था।


    पहले विरोध में थी DMK

    सरकार पिछले सत्र में जब यह बिल लाई थी तो द्रमुक ने इसका खुलकर विरोध किया था और इसे तमिलनाडु के हितों के खिलाफ बताया था। तब विधेयक के प्रावधानों की बात पर कोई चर्चा नहीं हुई थी। सूत्रों का कहना है कि द्रमुक के दबाव में ही तब इंडिया गठबंधन ने इस विधेयक का विरोध किया था। तब सरकार को भी ऐसी उम्मीद नहीं थी कि स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने वाली कांग्रेस इस विधेयक का विरोध करेगी। द्रमुक के वरिष्ठ नेता त्रिरुचि शिवा ने कहा कि जो रुख पहले था, वह अब नहीं है। अब हम कह रहे हैं कि पहले विधेयक का प्रारूप सामने हो, उसके बाद निर्णय करेंगे।

    द्रमुक के लोकसभा में 22 सदस्य हैं जो सरकार को दो तिहाई बहुमत से इस विधेयक को पारित कराने में अहम साबित हो सकते हैं। इस बिल को पारित करने के लिए सरकार को लोकसभा में 360 सांसदों का समर्थन चाहिए। अभी तक एनडीए के पास 326 तक की संख्या हुई है। बता दें कि इससे पूर्व कांग्रेस के टीवीके सरकार को समर्थन देने के मुद्दे पर नाराज द्रमुक इंडिया गठबंधन से अलग हो चुका है। ऐसे में सत्ता पक्ष की उम्मीदें उससे बढ़ी हैं।


    विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव नहीं

    संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बुधवार रात कहा कि महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को लेकर 16 से 18 अगस्त के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार मौजूदा मॉनसून सत्र में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने की नए सिरे से कोशिश कर रही है। इस विधेयक का मकसद 2029 में लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करना है।

    कुछ राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि स्वतंत्रता दिवस के बाद संसद का विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण संशोधन विधेयक फिर से पेश किए जा सकते हैं। इस बारे में पूछे जाने पर रीजीजू ने विशेष सत्र के किसी भी प्रस्ताव से इनकार किया।

  • JPPSC-JSSC विवाद पर झारखंड सरकार का वार्ता प्रस्ताव, छात्रों ने सार्वजनिक बातचीत की मांग रखकर आंदोलन जारी रखा

    JPPSC-JSSC विवाद पर झारखंड सरकार का वार्ता प्रस्ताव, छात्रों ने सार्वजनिक बातचीत की मांग रखकर आंदोलन जारी रखा

    नई दिल्ली । झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर जारी छात्र आंदोलन आठवें दिन भी जारी रहा। राजधानी रांची में आंदोलनरत छात्र झारखंड लोक सेवा आयोग (JPPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से जुड़ी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने छात्रों को बातचीत का प्रस्ताव दिया है, जिससे पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है।

    बुधवार को रांची के धरना स्थल पर प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और प्रदर्शनकारी छात्रों से सरकार की ओर से वार्ता का संदेश दिया। अधिकारियों ने छात्रों से पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बनाकर सरकार के साथ बातचीत करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से सर्किट हाउस में वार्ता का प्रस्ताव भेजा गया, ताकि छात्रों की मांगों पर चर्चा कर समाधान का रास्ता निकाला जा सके।

    हालांकि प्रदर्शनकारी छात्रों ने बंद कमरे में बातचीत करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में उनकी बात सुनना चाहती है तो बातचीत सार्वजनिक रूप से और मीडिया की मौजूदगी में होनी चाहिए। छात्रों ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं धरना स्थल पर आकर उनसे संवाद करें, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे और जनता भी बातचीत को देख सके।

    धरना स्थल पर प्रशासन और छात्रों के बीच लगातार संवाद की कोशिशें जारी रहीं। प्रशासन प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से वार्ता शुरू कराने का प्रयास करता रहा, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम रहे। छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर ठोस और स्पष्ट निर्णय के बिना आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। उनका उद्देश्य केवल निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    इस आंदोलन ने राज्य की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। विपक्षी दलों ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन जताया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में विपक्षी प्रतिनिधियों ने आंदोलन स्थल पहुंचकर छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों पर चर्चा की। इसके अलावा कई सामाजिक और साहित्यिक हस्तियां भी आंदोलन को समर्थन देने के लिए धरना स्थल पहुंचीं और छात्रों का मनोबल बढ़ाया।

    झारखंड में चल रहे इस आंदोलन को राज्य के युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता से जुड़े बड़े मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजर सरकार और छात्रों के बीच संभावित वार्ता पर टिकी हुई है। यदि दोनों पक्ष सहमति के साथ किसी समाधान पर पहुंचते हैं तो लंबे समय से जारी गतिरोध समाप्त हो सकता है। फिलहाल प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की संभावनाएं बनी हुई हैं, जबकि छात्र अपनी मांगों पर अडिग हैं और आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।

  • राहुल गांधी के साथ सामने आए प्रदर्शनकारी छात्र, लाठीचार्ज, पैलेट गन और अभद्र व्यवहार के लगाए आरोप

    राहुल गांधी के साथ सामने आए प्रदर्शनकारी छात्र, लाठीचार्ज, पैलेट गन और अभद्र व्यवहार के लगाए आरोप


    नई दिल्ली ।
    कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े छात्र-छात्राओं के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में अपनी बात रखते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने वाले युवाओं के साथ कथित रूप से बल प्रयोग किया गया और उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया गया। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और छात्रों के साथ हुई कथित घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद छात्र-छात्राओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए पुलिस कार्रवाई को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। एक छात्रा ने दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने के बावजूद उन्हें देशद्रोही कहा गया। उनका आरोप था कि प्रदर्शन के दौरान बिना किसी उकसावे के बल प्रयोग किया गया और उन्हें शारीरिक चोटें भी आईं। छात्रा ने कहा कि वे केवल अपनी मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से रखना चाहते थे।

    राहुल गांधी ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों ने कोई गैरकानूनी कार्य नहीं किया और वे केवल शिक्षा व्यवस्था तथा युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को उठा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल युवाओं पर दबाव बनाने और उन्हें माफी मांगने के लिए मजबूर करने जैसी घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि देश को ऐसी शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है जिसमें परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष हो और युवाओं का भविष्य सुरक्षित रहे।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी अपनी आपबीती सुनाई। एक छात्रा ने दावा किया कि प्रदर्शन के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर लगातार आपत्तिजनक टिप्पणियों और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि उन्होंने इस संबंध में शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सोशल मीडिया पर महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल पर भी चिंता व्यक्त की।

    एक अन्य छात्रा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें चोट लगी। वहीं एक अन्य प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि हिरासत के दौरान उनके नाम और पहचान के आधार पर अलग व्यवहार किया गया। इन सभी आरोपों के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।

    जंतर-मंतर प्रदर्शन और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया है, जबकि इस पूरे मामले पर आगे संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई और आधिकारिक पक्ष का भी इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

  • निलंबन के बाद धरने पर बैठे सपा विधायक सचिन यादव, वही पोस्टर दिखाकर बोले- सरकार चर्चा से भाग रही है

    निलंबन के बाद धरने पर बैठे सपा विधायक सचिन यादव, वही पोस्टर दिखाकर बोले- सरकार चर्चा से भाग रही है

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र से निलंबित किए गए समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक सचिन यादव बुधवार को विधानसभा परिसर में चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के पास धरने पर बैठ गए। इस दौरान उनके हाथ में वही पोस्टर था, जिसे सदन के भीतर दिखाने पर उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई थी।

    धरने के दौरान सचिन यादव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है और जनता इस पर सरकार से जवाब चाहती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले कहा था कि “दूध का दूध और पानी का पानी” हो जाएगा, लेकिन अब तक आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनके अनुसार विपक्ष इस मुद्दे पर सदन में चर्चा चाहता है, जबकि सरकार इससे बच रही है।

    सचिन यादव के पास मौजूद पोस्टर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर के साथ उनके पुराने बयान का उल्लेख करते हुए सवाल किया गया था कि मामले में कार्रवाई का क्या हुआ।

    पोस्टर दिखाने पर हुआ था निलंबन
    मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सपा विधायक राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण पर चर्चा कराने की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। दोपहर बाद जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना वक्तव्य दे रहे थे, तभी सचिन यादव ने मुख्यमंत्री की तस्वीर वाला पोस्टर सदन में लहराया।

    इस पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कड़ी आपत्ति जताई और पहले चेतावनी दी। पोस्टर हटाने से इनकार करने पर सचिन यादव को सदन से निलंबित कर दिया गया। इसके बाद सदन में हंगामा बढ़ गया और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

    बुधवार को भी नहीं चल सकी कार्यवाही
    बुधवार को भी विधानसभा में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच गतिरोध बना रहा। हंगामे के कारण कार्यवाही पहले आधे घंटे के लिए और बाद में दोपहर एक बजे तक स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष लगातार राम मंदिर चढ़ावा मामले पर चर्चा की मांग करता रहा, जबकि सदन की कार्यवाही बाधित होती रही।

  • उर्स-ए-रजवी: बरेली जंक्शन पर 25 ट्रेनों का अतिरिक्त ठहराव, यात्रियों की सुविधा के लिए छह स्पेशल ट्रेनें भी चलेंगी

    उर्स-ए-रजवी: बरेली जंक्शन पर 25 ट्रेनों का अतिरिक्त ठहराव, यात्रियों की सुविधा के लिए छह स्पेशल ट्रेनें भी चलेंगी


    बरेली।
    आला हजरत के उर्स-ए-रजवी के मद्देनजर रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। 6 से 8 अगस्त तक बरेली जंक्शन पर 25 ट्रेनों को अतिरिक्त ठहराव दिया जाएगा। इनमें छह ऐसी सुपरफास्ट ट्रेनें भी शामिल हैं, जिनका नियमित रूप से यहां ठहराव नहीं होता। इसके अलावा आठ अगस्त को तीन जोड़ी विशेष अनारक्षित ट्रेनों का संचालन भी किया जाएगा।

    सीनियर डीसीएम महेश यादव ने बताया कि उर्स के दौरान 20 ट्रेनों के ठहराव की अवधि बढ़ाई गई है, ताकि यात्रियों को चढ़ने और उतरने में सुविधा मिल सके। वहीं, बरेली-सहारनपुर, इज्जतनगर-लालकुआं और बरेली सिटी-पीलीभीत रूट पर तीन जोड़ी विशेष अनारक्षित ट्रेनें चलाई जाएंगी।

    इन ट्रेनों को मिलेगा अतिरिक्त ठहराव
    अस्थायी रूप से जिन प्रमुख ट्रेनों का बरेली जंक्शन पर ठहराव रहेगा, उनमें गंगा-सतलुज एक्सप्रेस, अर्चना एक्सप्रेस, जम्मूतवी-कानपुर सेंट्रल सुपरफास्ट, जननायक एक्सप्रेस, चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस, काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस, जनसेवा एक्सप्रेस, योग नगरी ऋषिकेश-प्रयागराज संगम एक्सप्रेस, शहीद एक्सप्रेस, सरयू-यमुना एक्सप्रेस, अकाल तख्त एक्सप्रेस, कोलकाता-नांगल डैम एक्सप्रेस और जलियांवाला बाग एक्सप्रेस शामिल हैं।

    इसके अलावा जनसाधारण एक्सप्रेस, बेगमपुरा एक्सप्रेस और सप्तक्रांति एक्सप्रेस की दोनों दिशाओं की सेवाओं को भी बरेली जंक्शन पर अतिरिक्त अस्थायी ठहराव दिया गया है। रेलवे ने बताया कि 8 अगस्त को बरेली-मुरादाबाद पैसेंजर (64177) अपने निर्धारित समय दोपहर 2:40 बजे के बजाय 3:45 बजे रवाना होगी।

    दिल्ली कैंट पर चार ट्रेनों का ठहराव रहेगा निरस्त
    उधर, दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म संख्या 2 और 3 के उन्नयन कार्य के चलते 13 अक्तूबर तक चार ट्रेनों का वहां ठहराव अस्थायी रूप से रद्द कर दिया गया है। इनमें जैसलमेर-काठगोदाम एक्सप्रेस, साबरमती-वाराणसी सुपरफास्ट, उदयपुर सिटी-नई दिल्ली एक्सप्रेस और बीकानेर-हावड़ा साप्ताहिक एक्सप्रेस शामिल हैं। यात्रियों से यात्रा से पहले ट्रेन की अद्यतन स्थिति की जानकारी लेने की अपील की गई है।

  • UP : बारिश बनी आफत: फिरोजाबाद में भरभराकर गिरा मकान, परिवार ने भागकर बचाई जान

    UP : बारिश बनी आफत: फिरोजाबाद में भरभराकर गिरा मकान, परिवार ने भागकर बचाई जान

    फिरोजाबाद। लगातार हो रही बारिश ने फिरोजाबाद में एक परिवार का आशियाना छीन लिया। थाना बसई मोहम्मदपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत सोफीपुर में बुधवार सुबह बारिश के चलते एक मकान अचानक भरभराकर ढह गया। गनीमत रही कि परिवार के सभी सदस्य समय रहते घर से बाहर निकल आए, जिससे बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, मकान गिरने से लाखों रुपये का घरेलू सामान मलबे में दबकर नष्ट हो गया।

    पीड़ित राजन सिंह ने बताया कि पिछले कई दिनों से हो रही बारिश के कारण मकान में सीलन आ गई थी और उसकी हालत काफी जर्जर हो चुकी थी। बुधवार सुबह अचानक दीवार और छत एक साथ गिर गईं, जिससे वर्षों की मेहनत से बसाया गया घर मलबे में तब्दील हो गया।

    घटना की सूचना तत्काल स्थानीय प्रशासन को दी गई, लेकिन पीड़ित परिवार का आरोप है कि काफी समय बीतने के बाद भी कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इसे लेकर ग्रामीणों में भी नाराजगी देखी गई।

    आर्थिक रूप से कमजोर राजन सिंह के सामने अब परिवार और छोटे बच्चों के लिए रहने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। उनका कहना है कि वे अपने दम पर दोबारा मकान बनाने की स्थिति में नहीं हैं। पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और तहसील अधिकारियों से आर्थिक सहायता, तत्काल राहत और सरकारी आवास योजना के तहत मदद उपलब्ध कराने की मांग की है।

  • यूपी विधानसभा में भावुक हुए सतीश महाना, बोले- राजनीति अंतिम पड़ाव पर, तय करूंगा इस कुर्सी के योग्य हूं या नहीं

    यूपी विधानसभा में भावुक हुए सतीश महाना, बोले- राजनीति अंतिम पड़ाव पर, तय करूंगा इस कुर्सी के योग्य हूं या नहीं

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना सदन में भावुक हो गए। मंगलवार को हुई तीखी नोकझोंक और हंगामे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक जीवन अंतिम चरण में है और अब उन्हें गंभीरता से विचार करना होगा कि वे विधानसभा अध्यक्ष के पद के योग्य हैं या नहीं।

    सतीश महाना ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों से उन्होंने सदन को संवाद, मर्यादा और लोकतांत्रिक परंपराओं के साथ चलाने का प्रयास किया, लेकिन हाल की घटनाओं ने उन्हें आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया है। उन्होंने कहा कि पहली बार ऐसा लगा कि या तो उनके प्रयासों में कहीं कमी रह गई या फिर डॉ. भीमराव आंबेडकर की वह बात सही साबित हो रही है कि कमी संविधान में नहीं, बल्कि उसे संचालित करने वालों में होती है। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीरता से विचार करेंगे और यह तय करेंगे कि उनकी भूमिका और कार्यशैली उचित रही या नहीं।

    बिना चर्चा के पारित हुए कई विधेयक
    सदन में लगातार हंगामे के बीच कई महत्वपूर्ण विधेयक बिना विस्तृत चर्चा के पारित हो गए। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सभापति ने स्वीकार कर लिया।

    केशव मौर्य ने साधा विपक्ष पर निशाना
    उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी पर लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी बात रखने का अवसर तक नहीं दिया, जिससे स्पष्ट है कि उसका उद्देश्य केवल सदन की कार्यवाही बाधित करना था। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय विपक्ष ने हंगामे का रास्ता चुना। साथ ही उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

    हंगामे के बीच सपा विधायक निलंबित
    मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वक्तव्य के दौरान विपक्ष के हंगामे के बीच समाजवादी पार्टी के विधायक सचिन यादव को निलंबित कर दिया गया। इसके बाद वह विधानसभा परिसर में चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के सामने धरने पर बैठ गए। बाद में अन्य विपक्षी विधायक भी उनके समर्थन में पहुंचे। विपक्ष का आरोप था कि वह राम मंदिर चढ़ावा मामले पर चर्चा कराना चाहता था, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर सदन में बहस से बच रही है।

  • तमिलनाडु एक्सप्रेस में ट्रॉली बैग से मिले मानव अंग, आगरा कैंट स्टेशन पर मचा हड़कंप, जांच शुरू

    तमिलनाडु एक्सप्रेस में ट्रॉली बैग से मिले मानव अंग, आगरा कैंट स्टेशन पर मचा हड़कंप, जांच शुरू

    आगरा। चेन्नई से नई दिल्ली जा रही तमिलनाडु एक्सप्रेस की जनरल बोगी में एक ट्रॉली बैग से मानव अंग मिलने के बाद आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर सनसनी फैल गई। बैग से तेज बदबू और तरल पदार्थ निकलने की सूचना मिलने पर जीआरपी और आरपीएफ ने कार्रवाई करते हुए उसे कब्जे में लिया। पुलिस फिलहाल हत्या, शव को ठिकाने लगाने और मानव अंगों की तस्करी समेत सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है।

    जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 5:30 बजे ट्रेन के आगरा कैंट स्टेशन पहुंचने पर प्लेटफॉर्म नंबर-3 पर जीआरपी और आरपीएफ की टीम ने संदिग्ध ट्रॉली बैग बरामद किया। बैग खोलने पर उसमें मानव अंग मिले, जिन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

    जीआरपी के सीओ राजेश दीक्षित ने बताया कि चेन्नई से चलकर नई दिल्ली जा रही तमिलनाडु एक्सप्रेस में सफर कर रहे एक यात्री ने रेलवे हेल्पलाइन 139 पर सूचना दी थी कि जनरल कोच में रखे एक ट्रॉली बैग से बदबू आ रही है और उसमें से लिक्विड रिस रहा है। सूचना मिलने के बाद रास्ते में ट्रेन की जांच कराने का प्रयास किया गया, लेकिन ट्रेन ग्वालियर स्टेशन से आगे निकल चुकी थी।

    आगरा कैंट स्टेशन पर ट्रेन पहुंचते ही पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल ने बैग को कब्जे में लेकर जांच की। अधिकारियों के अनुसार बैग में मिले मानव अंग काफी सड़ चुके थे और उनका रंग काला पड़ गया था, जिससे तेज दुर्गंध फैल रही थी।

    प्रारंभिक जांच में बैग पर चेन्नई का रैपर मिला है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि बैग वहीं से ट्रेन में रखा गया था। पुलिस अब मृतक की पहचान करने के साथ-साथ यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मामला हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने का है या मानव अंगों की तस्करी से जुड़ा हुआ है।

    मामले की जांच को आगे बढ़ाने के लिए जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त टीम को चेन्नई भेजने की तैयारी की जा रही है। पुलिस ने कहा है कि सभी संभावित एंगल पर जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

  • UP विधानसभा सत्र: विपक्ष पर बरसे CM योगी, बोले- इनका आचरण शर्मनाक, ये लोकतंत्र विरोधी हैं

    UP विधानसभा सत्र: विपक्ष पर बरसे CM योगी, बोले- इनका आचरण शर्मनाक, ये लोकतंत्र विरोधी हैं


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र के दौरान लगातार दूसरे दिन हुए हंगामे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि विपक्ष का व्यवहार लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है और उसका आचरण बेहद शर्मनाक है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही बाधित कर विपक्ष ने प्रदेश के युवाओं, किसानों, महिलाओं और गरीबों के हितों की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि सरकार 59 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट लेकर आई थी, जिसमें जनकल्याण और विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल थीं, लेकिन हंगामे के कारण इन विषयों पर सार्थक चर्चा नहीं हो सकी।

    जनकल्याण योजनाओं पर चर्चा नहीं हो सकी
    सीएम योगी ने कहा कि सरकार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, रसोइयों, ग्राम चौकीदारों समेत विभिन्न वर्गों के मानदेय में वृद्धि और महिला, दिव्यांग तथा वृद्धावस्था पेंशन से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा करना चाहती थी। उनका कहना था कि विपक्ष के विरोध के कारण इन मुद्दों पर सदन में विचार-विमर्श नहीं हो सका। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि विधानसभा ने अनुपूरक बजट को पारित कर दिया है और इससे जुड़ी योजनाओं पर जल्द अमल शुरू किया जाएगा।

    राम मंदिर चढ़ावा मामले पर भी साधा निशाना
    मुख्यमंत्री ने मंगलवार को दिए अपने बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि राम मंदिर चढ़ावा मामले की एसआईटी जांच में किसी भी साधु-संत की संलिप्तता सामने नहीं आई है। इसके बावजूद विपक्ष तथ्यों को तोड़-मरोड़कर अयोध्या, सनातन परंपरा और राम मंदिर की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई और अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें छह आरोपी चढ़ावे की धनराशि के कथित दुरुपयोग से जुड़े पाए गए हैं।

    विपक्ष पर लगाया भ्रम फैलाने का आरोप
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन में अध्यक्ष पीठ का भी अनादर किया गया और प्लेकार्ड लहराकर कार्यवाही बाधित करने की कोशिश की गई। उनके अनुसार विपक्ष का उद्देश्य केवल भ्रम फैलाना और उत्तर प्रदेश की सकारात्मक छवि को नुकसान पहुंचाना है। उन्होंने विपक्ष के इस रवैये को लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया।

  • राम मंदिर ट्रस्ट से पुलिस कार्रवाई तक कई मुद्दों पर सरकार घिरी, संसद में चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन

    राम मंदिर ट्रस्ट से पुलिस कार्रवाई तक कई मुद्दों पर सरकार घिरी, संसद में चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन

    नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को भी राजनीतिक माहौल गर्म रहा। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के बीच विपक्षी दलों ने कई मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को घेरा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में उपस्थित होकर जवाब देने की मांग की। विपक्ष का कहना है कि जिन विषयों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उन पर संसद में खुली और विस्तृत चर्चा कराई जानी चाहिए ताकि सभी पक्षों के सामने स्थिति स्पष्ट हो सके।

    राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष किसी भी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उनका आरोप था कि सरकार चर्चा से बच रही है, जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद ही वह सर्वोच्च मंच है जहां सरकार को विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को सदन में आकर अपना पक्ष रखना चाहिए ताकि उठाए गए मुद्दों पर सार्थक बहस हो सके।

    विपक्ष की ओर से राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ मामलों को भी उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उनका विरोध किसी धार्मिक आस्था या भगवान राम के प्रति नहीं है, बल्कि मंदिर निर्माण के लिए मिले दान और उससे जुड़े विभिन्न मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग है। उनका कहना था कि यदि किसी भी प्रकार के सवाल उठते हैं तो उनका उत्तर सार्वजनिक रूप से दिया जाना चाहिए, जिससे किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न रहे।

    संसद परिसर में कांग्रेस सांसदों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। पार्टी नेताओं ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपनी बात रखने और सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग दोहराई। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जनता और विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का स्पष्ट उत्तर दे। उन्होंने कथित पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करने तथा निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि विपक्ष का विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक दायरे में है। उन्होंने कहा कि जिन घटनाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सके। विपक्षी दलों का कहना है कि संसद में चर्चा के माध्यम से ही लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास और अधिक मजबूत किया जा सकता है।

    वहीं सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों पर अलग-अलग स्तर पर जवाब दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। मानसून सत्र के दौरान विभिन्न राजनीतिक और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार तीखी नोकझोंक देखने को मिल रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी इन विषयों को लेकर संसद में बहस और विरोध का सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे में दोनों पक्षों की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है।