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  • गोरखपुर में कूड़े से बना ईको पार्क, यूपी में कचरा प्रबंधन बना आत्मनिर्भरता की मिसाल

    गोरखपुर में कूड़े से बना ईको पार्क, यूपी में कचरा प्रबंधन बना आत्मनिर्भरता की मिसाल


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने गृह जनपद गोरखपुर को एक नई विकास पहचान देते हुए एक ऐसे मॉडल का लोकार्पण किया है, जिसने कचरा प्रबंधन और शहरी सौंदर्यीकरण की दिशा में नया मानक स्थापित किया है। गोरखपुर में तैयार किया गया भव्य ईको पार्क अब उस सोच का प्रतीक बन चुका है, जिसमें कूड़े और मलबे जैसी समस्या को अवसर में बदलकर एक उपयोगी और सुंदर संरचना का निर्माण किया गया है। इस परियोजना के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और सही योजना से किसी भी गंभीर समस्या का स्थायी समाधान संभव है।

    यह स्थान कभी शहर के सबसे बड़े कचरा डंपिंग ग्राउंड के रूप में जाना जाता था, जहां वर्षों से जमा कूड़े और गंदगी ने आसपास के वातावरण को प्रभावित कर रखा था। दुर्गंध और प्रदूषण के कारण स्थानीय लोगों को लंबे समय तक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन सरकार की पहल और वैज्ञानिक तकनीक के उपयोग से इस पूरे क्षेत्र को पूरी तरह बदल दिया गया। अब यही स्थान एक सुंदर ईको पार्क के रूप में विकसित हो चुका है, जो न केवल पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण है बल्कि शहरी विकास की नई दिशा भी दिखाता है।

    इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां मौजूद कचरे और मलबे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण कर उसका पुनः उपयोग किया गया। हजारों टन कचरे को प्रोसेस कर न केवल जमीन को सुरक्षित बनाया गया, बल्कि उसी सामग्री का उपयोग पार्क की संरचना, रास्तों और ऊंचे हिस्सों के निर्माण में किया गया। यह प्रक्रिया ‘कूड़े से कंचन’ की अवधारणा को वास्तविकता में बदलने का उदाहरण बन गई है, जिससे यह साबित होता है कि कचरा भी सही तकनीक के माध्यम से मूल्यवान संसाधन बन सकता है।

    ईको पार्क के भीतर हरियाली और पर्यावरण संतुलन पर विशेष ध्यान दिया गया है। यहां लगाए गए हजारों पेड़-पौधे अब न केवल वातावरण को शुद्ध कर रहे हैं बल्कि शहर के तापमान और प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पार्क में बच्चों के लिए मनोरंजन क्षेत्र, वॉकिंग ट्रैक और बैठने की आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिनमें कई संरचनाएं पुनर्चक्रित सामग्री से तैयार की गई हैं। इससे यह संदेश भी मिलता है कि संसाधनों का पुनः उपयोग कर सुंदर और उपयोगी संरचनाएं बनाई जा सकती हैं।

    मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को गोरखपुर के विकास की नई पहचान बताते हुए कहा कि यह मॉडल अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो तो न केवल शहरी समस्याओं का समाधान संभव है, बल्कि उन्हें विकास के अवसर में भी बदला जा सकता है। यह परियोजना इस बात का प्रमाण है कि सही सोच और तकनीक के साथ किसी भी शहर की तस्वीर और तकदीर दोनों बदली जा सकती हैं।

    स्थानीय लोगों के लिए यह ईको पार्क किसी नए जीवन की शुरुआत जैसा है। जहां पहले कूड़े का ढेर और गंदगी का वातावरण था, वहां अब लोग सुबह की सैर, योग और परिवार के साथ समय बिताने के लिए आते हैं। इस परिवर्तन ने न केवल आसपास के क्षेत्र की सुंदरता बढ़ाई है बल्कि लोगों के जीवन स्तर और संपत्ति मूल्य में भी सकारात्मक बदलाव लाया है।

    गोरखपुर का यह ईको पार्क अब सिर्फ एक विकास परियोजना नहीं बल्कि एक प्रेरणादायक मॉडल बन चुका है, जो यह दिखाता है कि यदि इच्छाशक्ति और सही दृष्टिकोण हो तो सबसे बड़ी समस्याओं को भी सफलता की कहानी में बदला जा सकता है।

  • West Bengal Elections 2026 के बीच सियासी वार-पलटवार तेज, पीएम मोदी ने TMC को घेरा

    West Bengal Elections 2026 के बीच सियासी वार-पलटवार तेज, पीएम मोदी ने TMC को घेरा


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण की वोटिंग के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नादिया जिले में जनसभा को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला।

    ‘झालमुड़ी’ बयान से सियासत गरम
    रैली के दौरान पीएम मोदी ने कहा, “झालमुड़ी मैंने खाई, लेकिन मिर्ची तृणमूल कांग्रेस (TMC) वालों को लगी है। उनके इस बयान के बाद चुनावी माहौल और ज्यादा गरमा गया है।

    ‘4 मई को बंगाल में खिलेगा कमल’
    पीएम मोदी ने दावा किया कि 4 मई को पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत तय है।
    उन्होंने कहा कि उस दिन पूरे राज्य में जीत का जश्न मनाया जाएगा और मिठाइयों के साथ झालमुड़ी भी बांटी जाएगी।

    ‘50 साल में सबसे कम हिंसा वाला चुनाव’
    प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पिछले 50 वर्षों में पहला चुनाव है, जिसमें हिंसा सबसे कम देखने को मिली है। उन्होंने Election Commission of India की तारीफ करते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है।

    अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना
    पीएम मोदी ने सरकारी कर्मचारियों और चुनाव ड्यूटी में लगे अधिकारियों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि अब तक मिले आंकड़ों के अनुसार, इस बार मतदाताओं की भागीदारी भी रिकॉर्ड स्तर पर है। पश्चिम बंगाल में मतदान के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पीएम मोदी के बयान ने चुनावी माहौल को और गर्मा दिया है। अब सभी की नजरें आने वाले नतीजों पर टिकी हैं, जो राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे।

  • बढ़ती गर्मी और हीटवेव के कारण बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे अधिक खतरा है..

    बढ़ती गर्मी और हीटवेव के कारण बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे अधिक खतरा है..


    नई दिल्ली । देश के कई हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और हीटवेव की स्थिति लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। ऐसे मौसम में सबसे अधिक जोखिम बच्चों और बुजुर्गों को होता है, क्योंकि उनका शरीर तापमान को सामान्य रूप से नियंत्रित करने में सक्षम नहीं होता। इसके कारण वे जल्दी डिहाइड्रेशन और लू जैसी समस्याओं की चपेट में आ सकते हैं, जो कई बार गंभीर स्थिति भी पैदा कर सकती हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों का शरीर पूरी तरह विकसित नहीं होता और उनकी पसीने की ग्रंथियां भी कम सक्रिय होती हैं, जिससे शरीर से गर्मी बाहर निकलने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। दूसरी ओर, बुजुर्गों में उम्र बढ़ने के साथ शरीर की सहनशीलता कम हो जाती है और कई बार स्वास्थ्य समस्याओं या दवाइयों के प्रभाव के कारण भी शरीर तापमान को संतुलित नहीं कर पाता। यही कारण है कि ये दोनों वर्ग गर्मी के मौसम में अधिक संवेदनशील माने जाते हैं।

    लू लगने की स्थिति में कई शुरुआती संकेत दिखाई देते हैं, जैसे तेज सिरदर्द, चक्कर आना, अत्यधिक पसीना आना, कमजोरी महसूस होना और मतली जैसी समस्या। यदि इन लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है, इसलिए समय पर सावधानी और इलाज बेहद जरूरी है।

    इस मौसम में सबसे महत्वपूर्ण उपाय पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थों का सेवन है। बच्चों और बुजुर्गों को नियमित अंतराल पर पानी पिलाना चाहिए ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। इसके अलावा नींबू पानी, छाछ और ओआरएस जैसे पेय भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं।

    धूप से बचाव भी उतना ही जरूरी है। बाहर निकलते समय हल्के और सूती कपड़े पहनने चाहिए, सिर को ढकना चाहिए और आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा पहनना चाहिए। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि दोपहर के समय, जब धूप सबसे तेज होती है, बच्चों और बुजुर्गों को घर के अंदर ही रखा जाए।

    खानपान पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। भारी, तैलीय और मसालेदार भोजन से बचना चाहिए और हल्का, पौष्टिक तथा आसानी से पचने वाला भोजन लेना चाहिए। ताजे फल, सब्जियां और दही शरीर को ठंडक देने में मदद करते हैं। साथ ही, अत्यधिक कैफीन और शराब जैसे पेय पदार्थों से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है, क्योंकि ये शरीर को और अधिक डिहाइड्रेट कर सकते हैं।

    घर के वातावरण को ठंडा रखना भी महत्वपूर्ण है। पंखे, कूलर या एसी का उपयोग करके कमरे का तापमान नियंत्रित किया जा सकता है। बच्चों और बुजुर्गों की नियमित निगरानी आवश्यक है ताकि किसी भी असामान्य स्थिति में तुरंत कदम उठाया जा सके। यदि किसी को लू लगने का संदेह हो तो उसे तुरंत ठंडी जगह पर ले जाकर शरीर को ठंडा करना चाहिए और चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

  • पश्चिम बंगाल चुनाव: पीएम मोदी ने टीएमसी पर साधा निशाना, विकास और सुशासन पर उठाए सवाल

    पश्चिम बंगाल चुनाव: पीएम मोदी ने टीएमसी पर साधा निशाना, विकास और सुशासन पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच राज्य का राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है, जहां मतदान के साथ-साथ चुनावी सभाओं में नेताओं के तीखे बयान चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। इसी क्रम में कृष्णानगर में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जोरदार हमला बोला। अपने भाषण में उन्होंने राजनीतिक व्यंग्य, विकास के मुद्दों और जनता के मूड को मिलाकर कई अहम बातें कहीं, जिससे सभा में मौजूद लोगों में उत्साह देखा गया।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि उन्होंने हाल ही में झालमुड़ी का स्वाद लिया है, लेकिन उसकी ‘झाल’ यानी तीखापन तृणमूल कांग्रेस को महसूस हो रहा है। उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया और लोगों के बीच यह चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने कहा कि इस बार राज्य में बदलाव की लहर साफ दिखाई दे रही है और जनता बड़ी संख्या में मतदान कर रही है, जो लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है।

    अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने दावा किया कि पिछले कई वर्षों की तुलना में इस बार चुनावी माहौल अधिक शांतिपूर्ण रहा है और हिंसा की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासन और चुनावी व्यवस्था की सराहना की और कहा कि यह लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता का भरोसा लगातार बढ़ रहा है और लोग खुलकर अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने राज्य के विकास को लेकर भी कई सवाल उठाए और कहा कि पिछले वर्षों में रोजगार, उद्योग और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई वादों के बावजूद औद्योगिक विकास प्रभावित हुआ है और इसका सीधा असर युवाओं और कामकाजी वर्ग पर पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में कई उद्योग और रोजगार के अवसर कमजोर हुए हैं, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ा है।

    अपने संबोधन में उन्होंने विभिन्न वर्गों जैसे किसान, मजदूर, युवा, शिक्षक, दुकानदार और अन्य नागरिकों का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी लोग बेहतर शासन और सुरक्षित वातावरण की उम्मीद में मतदान कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस बार जनता परिवर्तन के मूड में है और चुनाव परिणाम राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय लिखेंगे।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता हर वर्ग को साथ लेकर विकास करना है और वे ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में सुशासन और विकास को लेकर एक नई शुरुआत की जरूरत है, जिसे जनता इस चुनाव में अवसर दे सकती है।

    अपने भाषण के अंत में उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने मताधिकार का उपयोग सोच-समझकर करें और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि अधिक मतदान यह दर्शाता है कि जनता बदलाव चाहती है और यह बदलाव आने वाले समय में राज्य की दिशा तय करेगा।

  • रिजल्ट का इंतजार खत्म: 12वीं के नतीजे आज, जानें कब, कहां और कैसे देखें स्कोर

    रिजल्ट का इंतजार खत्म: 12वीं के नतीजे आज, जानें कब, कहां और कैसे देखें स्कोर


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के लाखों छात्रों के लिए बड़ी खबर है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) आज यानी 23 अप्रैल 2026 को कक्षा 12वीं का रिजल्ट जारी करने जा रहा है। रिजल्ट शाम 4 बजे घोषित किया जाएगा, जिसके बाद छात्र-छात्राएं अपने अंक ऑनलाइन देख सकेंगे।

    इन वेबसाइट्स पर चेक करें रिजल्ट
    रिजल्ट जारी होते ही छात्र नीचे दी गई आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर अपना स्कोरकार्ड देख सकते हैं, upmsp.edu.in
    upresults.nic.in रिजल्ट देखने के लिए छात्रों को अपना रोल नंबर दर्ज करना होगा।

    परीक्षा का शेड्यूल
    यूपी बोर्ड की 12वीं की परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च 2026 के बीच आयोजित की गई थीं। परीक्षा खत्म होने के बाद से ही छात्र रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

    इस बार मार्कशीट में बदलाव
    इस साल बोर्ड ने मार्कशीट को और सुरक्षित और आधुनिक बनाया है। मार्कशीट A-4 साइज में होगी और उसमें एक खास मोनोग्राम दिया जाएगा, जो धूप में लाल रंग का दिखाई देगा और छांव में रंग बदल देगा। इससे मार्कशीट की असली पहचान करना आसान होगा और किसी भी तरह की छेड़छाड़ रोकी जा सकेगी।

    जल्दी रिजल्ट देखने के आसान तरीके
    रिजल्ट जारी होते ही वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक आ सकता है, जिससे साइट धीमी या बंद हो सकती है। ऐसे में छात्र ये उपाय अपना सकते हैं: एक से ज्यादा डिवाइस पर वेबसाइट खोलकर रखें रिजल्ट लिंक एक्टिव होते ही तुरंत रोल नंबर डालें अलग-अलग वेबसाइट्स पर भी कोशिश करते रहें

    छात्रों के लिए जरूरी क्या
    रिजल्ट देखने के बाद छात्र अपनी मार्कशीट की सभी जानकारी ध्यान से जांच लें। अगर कोई गलती मिलती है, तो तुरंत अपने स्कूल या बोर्ड से संपर्क करें। UP Board Result 2026 आज जारी होने जा रहा है, जिससे लाखों छात्रों का इंतजार खत्म होगा। छात्र तैयार रहें और बताए गए तरीकों से आसानी से अपना रिजल्ट चेक करें।

  • कमल हासन और श्रुति हासन ने साथ डाला वोट, लोकतंत्र के पर्व में सितारों की चमक..

    कमल हासन और श्रुति हासन ने साथ डाला वोट, लोकतंत्र के पर्व में सितारों की चमक..


    नई दिल्ली । तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए राज्यभर में मतदान का माहौल बेहद उत्साहपूर्ण रहा, जहां आम नागरिकों के साथ-साथ फिल्मी जगत की कई बड़ी हस्तियों ने भी लोकतंत्र के इस पर्व में अपनी भागीदारी दर्ज कराई। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लोगों की लंबी कतारें देखने को मिलीं और हर वर्ग के मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग करने के लिए उत्साहित नजर आए। चेन्नई सहित राज्य के कई हिस्सों में मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण तरीके से वोटिंग प्रक्रिया जारी रही, जिससे लोकतंत्र की मजबूती का संदेश भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

    इस दौरान सबसे अधिक ध्यान खींचने वाली उपस्थिति अभिनेता और राज्यसभा सांसद कमल हासन तथा उनकी बेटी अभिनेत्री श्रुति हासन की रही। दोनों चेन्नई के एक मतदान केंद्र पर एक साथ पहुंचे और सुबह ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया। पिता और पुत्री की यह जोड़ी मतदान केंद्र पर आकर्षण का केंद्र बनी रही, जहां बड़ी संख्या में लोग उन्हें देखने के लिए इकट्ठा हो गए। मतदान के बाद श्रुति हासन ने लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करते हुए संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने सभी से अपने अधिकार का प्रयोग करने की अपील की। उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया और कई युवाओं ने भी मतदान को लेकर उत्साह दिखाया।

    कमल हासन, जो लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं, इस चुनाव में भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनकर लोगों को जागरूक करते नजर आए। उन्होंने मतदान को हर नागरिक का महत्वपूर्ण अधिकार बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से वोट डालने की अपील की। मतदान केंद्र पर उनकी उपस्थिति के दौरान माहौल काफी उत्साहित रहा और समर्थकों की भीड़ ने उन्हें देखने के लिए काफी देर तक इंतजार किया।

    इसी बीच तमिल फिल्म इंडस्ट्री के कई अन्य प्रसिद्ध कलाकारों ने भी अपने-अपने मतदान केंद्रों पर पहुंचकर वोट डाला। अभिनेता रजनीकांत ने चेन्नई के एक मतदान केंद्र पर पहुंचकर शांतिपूर्वक मतदान किया और लोगों से अपील की कि वे लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए अधिक से अधिक संख्या में वोट करें। उनके आने से वहां भी भारी भीड़ इकट्ठा हो गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को सक्रिय रहना पड़ा। अभिनेता धनुष ने भी मतदान केंद्र पहुंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया और युवाओं को मतदान के लिए प्रेरित किया।

    इसके अलावा अभिनेता अजित कुमार भी मतदान केंद्र पर सफेद पारंपरिक पोशाक में नजर आए। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से वोट डालने के बाद अपने फैंस का अभिवादन किया और वहां से रवाना हुए। उनकी मौजूदगी से भी मतदान केंद्र पर उत्साह का माहौल बन गया। इसी तरह अन्य फिल्मी हस्तियों ने भी अलग-अलग केंद्रों पर जाकर मतदान किया और लोगों को अपने अधिकार के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।

    पूरे राज्य में मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। हर मतदान केंद्र पर पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात था ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो। सुबह से शाम तक चली इस प्रक्रिया में राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। अब सभी की निगाहें आगामी परिणामों पर टिकी हैं, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।

  • संसद में विवाद के बाद जनरल नरवणे की नई किताब लॉन्च, फिर सेना पर फोकस

    संसद में विवाद के बाद जनरल नरवणे की नई किताब लॉन्च, फिर सेना पर फोकस

    नई दिल्ली। जनरल एम.एम. नरवणे एक बार फिर अपनी नई किताब को लेकर चर्चा में हैं। संसद में उनकी पिछली किताब को लेकर हुए विवाद के बाद अब उन्होंने नई नॉन-फिक्शन पुस्तक ‘The Curious and the Classified: Unearthing Military Myths and Mysteries’ लॉन्च की है, जिसका फोकस भी सेना से जुड़े विषयों पर ही है।

    क्या है नई किताब में खास?
    प्रकाशक रूपा पब्लिकेशंस के मुताबिक, इस किताब में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़े कई रोचक किस्से, रहस्य और परंपराओं को सामने लाया गया है।
    यह किताब सैन्य इतिहास और उससे जुड़े मिथकों की गहराई से पड़ताल करती है, साथ ही सैनिकों की जिज्ञासा और साहस की कहानियों को उजागर करती है।

    शशि थरूर से क्या है कनेक्शन?
    इस किताब की प्रेरणा का एक दिलचस्प पहलू भी सामने आया है। जनरल नरवणे ने बताया कि उन्हें यह किताब लिखने का विचार शशि थरूर की किताब ‘A Wonderland of Words’ पढ़ने के बाद आया।
    उन्होंने प्रस्तावना में भी इसका जिक्र किया है कि कैसे थरूर की लेखनी ने उन्हें नई किताब लिखने के लिए प्रेरित किया।

    पहले भी हो चुका है विवाद
    इससे पहले जनरल नरवणे की संस्मरण आधारित किताब ‘Four Stars of Destiny’ को लेकर संसद में बड़ा विवाद हुआ था।

    राहुल गांधी ने संसद में इस अप्रकाशित किताब के कुछ हिस्सों का जिक्र किया था

    इसके बाद स्पीकर ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया

    पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने स्पष्ट किया था कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है और उसके अधिकार उनके पास हैं

    क्यों चर्चा में है नई किताब?
    नई किताब भले ही संस्मरण नहीं है, लेकिन सैन्य विषयों पर आधारित होने के कारण यह फिर से चर्चा में है। खासकर उस विवाद के बाद, जिसमें सेना से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गए थे।

    जनरल नरवणे की नई किताब सैन्य दुनिया के अनछुए पहलुओं को सामने लाने की कोशिश करती है। साथ ही, थरूर से मिला प्रेरणा का कनेक्शन इसे और दिलचस्प बनाता है। अब देखना होगा कि यह किताब पाठकों के बीच कितना प्रभाव छोड़ती है।

  • ‘वैदिक स्कूल या यातना गृह?’ 11 साल के छात्र की मौत ने खड़े किए सवाल, शरीर पर 45 चोटों के निशान

    ‘वैदिक स्कूल या यातना गृह?’ 11 साल के छात्र की मौत ने खड़े किए सवाल, शरीर पर 45 चोटों के निशान


    कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां 11 वर्षीय छात्र दिव्यांश की संदिग्ध हालात में मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। परिवार ने इसे सीधा हत्या का मामला बताते हुए स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

    7 दिन पहले छोड़ा था स्कूल, अब मिला शव

    परिजनों के मुताबिक, दिव्यांश को महज एक सप्ताह पहले लखनऊ के आलमनगर स्थित रामानुज भागवत वेद विद्यापीठ गुरुकुल में पढ़ाई के लिए छोड़ा गया था। लेकिन कुछ ही दिनों बाद स्कूल संचालक बच्चे का शव कार से उसके घर लेकर पहुंचा, जिससे पूरे परिवार में कोहराम मच गया।

    शरीर पर 40-45 चोटों के निशान

    परिवार का आरोप है कि बच्चे के हाथ-पैर बांधे गए थे और बेरहमी से पिटाई की गई।

    शरीर पर 40 से 45 चोटों के निशान मिले
    सिगरेट से दागने के भी आरोप
    गंभीर शारीरिक यातना की आशंका

    इन हालातों ने “वैदिक शिक्षा” के नाम पर चल रहे संस्थान की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    हत्या और साक्ष्य मिटाने का केस

    पिता नरेंद्र द्विवेदी की शिकायत पर पुलिस ने स्कूल संचालक कन्हैया लाल मिश्रा और चालक के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।

    सवालों के घेरे में गुरुकुल व्यवस्था

    यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि शिक्षा संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता भी खड़ी करती है। जिस स्थान को शिक्षा और संस्कार का केंद्र माना जाता है, वहां इस तरह की क्रूरता ने सिस्टम पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

    आगे क्या?

    अब सबकी नजर पुलिस जांच पर टिकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच से ही स्पष्ट हो पाएगा कि दिव्यांश की मौत किन परिस्थितियों में हुई और दोषियों को कब तक सजा मिलती है।

    कानपुर की यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है—बच्चों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की असफलता मानी जाएगी।

  • PM मोदी अगले माह जाएंगे एक सप्ताह के विदेश दौरे पर…. इन देशों की करेंगे यात्रा

    PM मोदी अगले माह जाएंगे एक सप्ताह के विदेश दौरे पर…. इन देशों की करेंगे यात्रा


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अगले महीने यानी मई (May) के मध्य में यूरोप की एक सप्ताह की महत्वपूर्ण यात्रा पर जाने वाले हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य यूरोपीय संघ (European Union-EU) के साथ व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को और अधिक मजबूत करना तथा महाद्वीप के साथ भारत की बढ़ती भागीदारी को नई दिशा देना है। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ताबड़तोड़ विदेश दौरा करेंगे। वे नॉर्वे, नीदरलैंड और इटली जाएंगे।


    नॉर्वे का दौरा: तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन और EFTA पर जोर

    WION की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का एक प्रमुख पड़ाव नॉर्वे की राजधानी ओस्लो होगा, जहां वे तीसरे ‘भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ में भाग लेंगे। इस सम्मेलन में स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के नेता भी शामिल होंगे। इससे पहले यह सम्मेलन 2018 में स्टॉकहोम और 2022 में कोपेनहेगन में आयोजित हो चुका है।

    नॉर्वे ‘यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ’ (EFTA) का एक महत्वपूर्ण सदस्य है। अक्टूबर 2025 में लागू हुए ‘भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते’ के बाद इस दौरे की अहमियत काफी बढ़ गई है।


    भारत को क्या मिलेगा?

    इस समझौते के तहत EFTA देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा किया है, जिससे देश में लगभग 10 लाख नए रोजगार पैदा होने का लक्ष्य है। साथ ही, इससे कपड़ा, चमड़ा और खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजार खुलेंगे।

    ओस्लो में होने वाली द्विपक्षीय वार्ताओं में हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी), जलवायु परिवर्तन, ‘ब्लू इकॉनमी’, इनोवेशन, डिजिटलीकरण और आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग पर विस्तार से चर्चा होगी।


    नीदरलैंड दौरा: कृषि और तकनीक पर फोकस

    ओस्लो के बाद प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड जाएंगे। यहां उनकी पिछली यात्रा 2017 में हुई थी। द हेग (नीदरलैंड) जल प्रबंधन, कृषि, तकनीक और आतंकवाद विरोधी प्रयासों में भारत का एक प्रमुख भागीदार रहा है। पिछले साल कुछ कारणों से टल गए कार्यक्रमों और बैठकों की तारीखों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत किया जा सके।


    इटली और वेटिकन सिटी: पहली द्विपक्षीय यात्रा

    प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम में इटली भी शामिल है। यह उनकी इटली की पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। हालांकि वे 2021 में G20 शिखर सम्मेलन और 2024 में G7 आउटरीच के लिए रोम जा चुके हैं। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ उनकी चर्चा का मुख्य केंद्र रक्षा, ऊर्जा और निवेश से जुड़े मुद्दे होंगे।


    पोप से मुलाकात संभव

    इस बात की भी प्रबल संभावना है कि पीएम मोदी वेटिकन सिटी का दौरा करें और ईसाई धर्मगुरु पोप से मुलाकात करें।


    ऐतिहासिक भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन

    मई का यह यूरोप दौरा 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुए 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के ठीक बाद हो रहा है। उस सम्मेलन की सह-अध्यक्षता पीएम मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने की थी।

    उसमें ‘भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA)’ पर बातचीत पूरी होने की ऐतिहासिक घोषणा की गई थी। साथ ही, एक नई ‘सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी’ और ‘टुवर्ड्स 2030’ संयुक्त रणनीतिक एजेंडा भी तय किया गया था।


    मई यात्रा का लक्ष्य

    इस दौरे से FTA को तेजी से लागू करने, सप्लाई चेन को विविधतापूर्ण बनाने और स्वच्छ तकनीक (क्लीन टेक) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी।


    आगामी कार्यक्रम: फ्रांस में G7 सम्मेलन

    यूरोप के साथ इस सघन कूटनीति के क्रम में, प्रधानमंत्री मोदी जून के महीने में फ्रांस भी जाएंगे, जहां वे G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। भारत को 2019 से लगातार इस प्रभावशाली समूह के आउटरीच कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता रहा है, जो वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते कद को दर्शाता है।

  • सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित कर रहे आतंकी, 57 के 200 से ज्यादा नाम, गृह मंत्रालय ने सूची की जारी

    सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित कर रहे आतंकी, 57 के 200 से ज्यादा नाम, गृह मंत्रालय ने सूची की जारी


    नई दिल्ली । पाकिस्तान से जुड़े कई खतरनाक आतंकियों ने सुरक्षा और जांच एजेंसियों को भ्रमित करने के लिए अपनी पहचान बदलने का तरीका अपना लिया है। इन आतंकियों के एक-दो नहीं, बल्कि कई-कई नाम दर्ज हैं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत तैयार सूची में 57 आतंकियों के करीब 200 अलग-अलग नाम शामिल किए गए हैं।

    अलग-अलग नामों से छिपा रहे असली पहचान
    गृह मंत्रालय की सूची में शामिल आतंकियों ने पहचान छिपाने के लिए कई नाम अपनाए हैं। मुंबई हमलों का आरोपी और भारत का मोस्ट वांटेड आतंकी दाऊद इब्राहिम सबसे आगे है, जिसके 22 नाम दर्ज हैं। वहीं लश्कर-ए-ताइबा के प्रमुख हाफिज सईद के 9 और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े मोहीउद्दीन औरंगजेब आलमगीर के 11 नाम बताए गए हैं।

    मसूद अजहर समेत कई बड़े नाम शामिल
    सूची में मौलाना मसूद अजहर का नाम प्रमुख रूप से दर्ज है, जिसे कई अन्य नामों से भी जाना जाता है। इसी तरह रियाज इस्माइल शाहबंदर, इब्राहिम मेनन और सैयद मोहम्मद युसूफ शाह जैसे आतंकियों ने भी अलग-अलग नाम रखे हुए हैं। कुछ आतंकियों के नामों की संख्या 5 से 9 तक है, जिससे उनकी गतिविधियों को ट्रैक करना और कठिन हो जाता है।

    दाऊद इब्राहिम के नामों की लंबी सूची
    दाऊद इब्राहिम के सबसे अधिक 22 नाम सामने आए हैं। इनमें दाऊद इब्राहिम कासकर, दाऊद हसन शेख कासकर, दाऊद भाई, इकबाल सेठ, बड़ा पटेल सहित कई अन्य नाम शामिल हैं। इतने ज्यादा नामों का इस्तेमाल कर वह लंबे समय से एजेंसियों को चकमा देता रहा है।

    लश्कर और जैश के आतंकियों ने भी बदली पहचान
    लश्कर-ए-ताइबा प्रमुख हाफिज सईद ने भी अपनी पहचान छिपाने के लिए 9 अलग-अलग नाम अपनाए हैं। वहीं जकी उर रहमान लख्वी और जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य मोहीउद्दीन औरंगजेब आलमगीर ने भी कई उपनाम रखे हुए हैं। एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार, ये आतंकी अलग-अलग नामों के जरिए अपनी गतिविधियों को अंजाम देते रहे हैं।