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  • नीट परीक्षा की साख पर सवाल: 5 मेडिकल छात्र समेत 24 आरोपी पकड़े गए, 30 लाख में होता था सौदा

    नीट परीक्षा की साख पर सवाल: 5 मेडिकल छात्र समेत 24 आरोपी पकड़े गए, 30 लाख में होता था सौदा


    नई दिल्ली ।देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। बिहार के लखीसराय में आयोजित री-एग्जाम के दौरान एक बड़े सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने इस मामले में 24 लोगों को गिरफ्तार किया है जिनमें 5 मेडिकल छात्र और बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़ी कंपनी के 14 कर्मचारी शामिल हैं। इस खुलासे ने परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार आरोपियों ने असली अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर्स को परीक्षा में बैठाने की सुनियोजित साजिश रची थी। इसके लिए परीक्षा केंद्रों पर मौजूद बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था में ही सेंध लगाई गई। जांच में सामने आया है कि फर्जी परीक्षार्थियों को प्रवेश दिलाने के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम से जुड़े कुछ कर्मचारियों की कथित मिलीभगत भी थी।

    पुलिस के मुताबिक लखीसराय के तीन अलग-अलग परीक्षा केंद्रों से कुल सात सॉल्वर पकड़े गए। इनके अलावा बायोमेट्रिक कंपनी के 14 कर्मचारी और अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया गया। शुरुआती जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि असली उम्मीदवारों की जगह परीक्षा दिलाने के लिए 30 लाख रुपए तक का सौदा किया जाता था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह नेटवर्क कितने बड़े स्तर पर काम कर रहा था।

    पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब हाजीपुर निवासी और पीएमसीएच के छात्र मयंक कश्यप की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। जांच में पता चला कि वह कथित तौर पर बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी के रूप में परीक्षा केंद्र में प्रवेश कर गया था। इसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया और एक-एक कर पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगीं।

    जांच एजेंसियों के अनुसार पावापुरी मेडिकल कॉलेज राजगीर का छात्र रविशंकर इस नेटवर्क के संचालन में अहम भूमिका निभा रहा था। वहीं इस पूरे रैकेट का कथित मास्टरमाइंड अर्पित राज बताया जा रहा है जो गया मेडिकल कॉलेज का छात्र है। चौंकाने वाली बात यह है कि अर्पित राज का नाम वर्ष 2024 के चर्चित NEET पेपर लीक मामले में भी सामने आ चुका है। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि परीक्षा माफिया लगातार नए तरीकों से सिस्टम को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं।

    पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारियों को आशंका है कि यह गिरोह केवल बिहार तक सीमित नहीं है बल्कि इसके तार कई अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।

    NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में बार-बार सामने आ रहे फर्जीवाड़े के मामलों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। लाखों छात्र वर्षों की मेहनत और तैयारी के बाद परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में सॉल्वर गैंग और पेपर लीक जैसी घटनाएं न केवल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती हैं बल्कि ईमानदारी से तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य पर भी सवाल खड़े करती हैं। अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की कार्रवाई और उन कदमों पर टिकी है जो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जाएंगे।

  • महाराष्ट्र MLC चुनाव में महायुति की प्रचंड जीत: 17 में से 16 सीटों पर कब्जा, नासिक में बागी ने पलटा खेल

    महाराष्ट्र MLC चुनाव में महायुति की प्रचंड जीत: 17 में से 16 सीटों पर कब्जा, नासिक में बागी ने पलटा खेल


    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर राज्य की राजनीति में महायुति की मजबूत पकड़ को साबित कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सत्तारूढ़ गठबंधन महायुति ने 17 में से 16 सीटों पर जीत दर्ज कर विपक्ष को करारा झटका दिया है। चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में महायुति की संगठनात्मक ताकत और राजनीतिक प्रभाव अभी भी मजबूत बना हुआ है।

    18 जून को हुए मतदान के बाद सोमवार को घोषित परिणामों में भाजपा सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरी। पार्टी ने कुल 9 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं शिवसेना और एनसीपी के उम्मीदवारों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन किया। इससे पहले छह सीटों पर महायुति के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे, जिससे गठबंधन की स्थिति और मजबूत दिखाई दी।

    हालांकि इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा नासिक सीट की रही। यहां भाजपा के बागी नेता गोकुल गिट्टे ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हुए शिवसेना उम्मीदवार नरेंद्र दराडे को पराजित कर दिया। गिट्टे को भाजपा से टिकट नहीं मिला था, जिसके बाद उन्होंने बगावती तेवर अपनाते हुए निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला किया। उनकी जीत को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। यह परिणाम दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर बागी नेताओं की ताकत कई बार गठबंधन की रणनीति पर भारी पड़ सकती है।

    चुनाव परिणामों में नांदेड़ सीट से भाजपा के अमरनाथ राजुरकर ने जीत दर्ज की। नागपुर उपचुनाव में भाजपा के डॉ. राजीव पोतदार विजयी रहे। भंडारा-गोंदिया से अविनाश ब्राह्मणकर, छत्रपति संभाजीनगर-जालना से सुहास शिरसाट, जलगांव से नंदकिशोर महाजन, सांगली-सतारा से धैर्यशील कदम, सोलापुर से राजेंद्र राउत, धाराशिव-लातूर-बीड से बसवराज पाटिल और अमरावती से प्रवीण पोटे ने जीत हासिल की।

    वहीं परभणी-हिंगोली सीट पर शिवसेना के सईद खान ने विजय हासिल कर महायुति की सफलता में योगदान दिया। इन नतीजों ने विपक्षी दलों कांग्रेस, शिवसेना उद्धव गुट और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरद पवार गुट के लिए चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि कई महत्वपूर्ण सीटों पर उनके उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा।

    चुनाव से पहले ही छह सीटों पर महायुति के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए थे। इनमें वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरौली, यवतमाल, रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग, ठाणे-पालघर और अहिल्यानगर जैसी महत्वपूर्ण सीटें शामिल हैं। विपक्ष इन सीटों पर प्रभावी चुनौती खड़ी नहीं कर पाया था।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधान परिषद चुनाव के परिणाम आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों के लिए भी संकेत दे सकते हैं। हालांकि नासिक में बागी उम्मीदवार की जीत ने यह भी दिखाया है कि टिकट वितरण और स्थानीय असंतोष भविष्य में गठबंधन दलों के लिए चुनौती बन सकता है।

    कुल मिलाकर महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में महायुति ने अपनी राजनीतिक ताकत का प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। लेकिन नासिक का परिणाम यह भी याद दिलाता है कि राजनीति में कभी-कभी एक बागी उम्मीदवार भी बड़े समीकरण बदलने की क्षमता रखता है।

  • जल संकट से हाहाकार: सूखे तालाबों में गड्ढे खोद रहे लोग, प्रशासन ने जारी किया सख्त फरमान

    जल संकट से हाहाकार: सूखे तालाबों में गड्ढे खोद रहे लोग, प्रशासन ने जारी किया सख्त फरमान


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के बीड जिले में भीषण जल संकट ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जून का आधा महीना गुजर जाने के बावजूद क्षेत्र में मानसून की पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। लगातार सूखे हालातों के कारण जिले के जल स्रोत तेजी से खत्म हो रहे हैं और कई गांवों में पेयजल संकट गंभीर रूप ले चुका है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि प्रशासन को पानी की चोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने पड़े हैं। अब यदि कोई व्यक्ति अवैध रूप से पानी निकालता या चोरी करता पाया गया तो उसके खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज की जाएगी।

    जिले की जल स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार बीड जिले के 173 छोटे-बड़े जलाशयों और बांधों में अब केवल 16.11 प्रतिशत पानी शेष बचा है। इनमें से 81 जलाशय पूरी तरह सूख चुके हैं जबकि 79 जलाशय डेड स्टोरेज की स्थिति में पहुंच गए हैं। डेड स्टोरेज का अर्थ है कि वहां मौजूद पानी उपयोग योग्य नहीं रह गया है। केवल 13 जलाशयों में ही सीमित मात्रा में पानी बचा है जो आने वाले दिनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए नाकाफी माना जा रहा है।

    जल संकट का असर आम जनजीवन पर साफ दिखाई देने लगा है। कई गांवों में लोग पीने के पानी के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो इस संकट की भयावह तस्वीर पेश कर रहे हैं। इन वीडियो में ग्रामीण सूखे तालाबों के बीच गड्ढे खोदकर पानी निकालने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष की स्थिति बन गई है।

    बढ़ते संकट को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिलाधिकारी विवेक जॉनसन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पानी की चोरी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जल संरक्षण विभाग के साथ हुई बैठक में निर्णय लिया गया है कि अवैध रूप से पानी निकालने की शिकायत मिलने पर संबंधित स्थान का बिजली कनेक्शन तुरंत काट दिया जाएगा। साथ ही दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की जाएगी।

    लोगों को राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी शुरू कर दी हैं। वर्तमान में 12 गांवों और 14 बस्तियों में 19 टैंकरों के माध्यम से पेयजल पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा 109 गांवों में स्थित 221 निजी कुओं को अधिग्रहित कर जल आपूर्ति के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन लगातार जल स्रोतों की निगरानी कर रहा है और संकटग्रस्त क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर पानी उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में जल संरक्षण और पानी के जिम्मेदार उपयोग की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। बीड जिले का यह संकट देश के अन्य सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी एक चेतावनी है कि जल संसाधनों का संरक्षण समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।

  • करोड़ों राशन कार्ड धारकों को राहत: लंबी लाइन और राशन की किल्लत से मिलेगा छुटकारा

    करोड़ों राशन कार्ड धारकों को राहत: लंबी लाइन और राशन की किल्लत से मिलेगा छुटकारा


    नई दिल्ली ।देश के करोड़ों राशन कार्ड धारकों के लिए केंद्र सरकार ने राहत भरा बड़ा फैसला लिया है। वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के तहत राशन वितरण व्यवस्था को और अधिक लचीला तथा सुविधाजनक बनाया गया है। अब लाभार्थियों को अपने हिस्से का राशन लेने के लिए केवल एक निर्धारित दुकान पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वे अपनी सुविधा और जरूरत के अनुसार अलग-अलग उचित मूल्य दुकानों से गेहूं और चावल प्राप्त कर सकेंगे।

    केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने इस नई व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया कि राशन कार्ड धारकों को अब एक ही दुकान से पूरा राशन लेने की अनिवार्यता नहीं होगी। यदि किसी दुकान पर भीड़ अधिक है या अनाज का स्टॉक उपलब्ध नहीं है तो लाभार्थी दूसरी सरकारी राशन दुकान से अपना हिस्सा प्राप्त कर सकेंगे। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।

    नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ उन लोगों को मिलेगा जो अक्सर तकनीकी समस्याओं और लंबी कतारों की वजह से परेशान रहते हैं। कई बार राशन लेने पहुंचे लोगों को मशीन में अंगूठे के सत्यापन में दिक्कत आती है या फिर दुकान पर अनाज खत्म हो जाने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। अब ऐसी परिस्थितियों में वे किसी दूसरी दुकान का विकल्प चुन सकेंगे और अपना राशन आसानी से प्राप्त कर पाएंगे।

    सरकार के इस फैसले से राशन वितरण प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी। यदि किसी दुकान पर सेवाएं संतोषजनक नहीं हैं तो लाभार्थी दूसरी दुकान से राशन लेना पसंद कर सकते हैं। इससे उचित मूल्य दुकानों की जवाबदेही भी बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा मिलने की संभावना मजबूत होगी।

    वन नेशन वन राशन कार्ड योजना पहले ही देशभर में लाखों प्रवासी मजदूरों और उनके परिवारों के लिए मददगार साबित हो चुकी है। इस योजना के तहत लाभार्थी आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन के माध्यम से देश के किसी भी राज्य या जिले में राशन प्राप्त कर सकते हैं। अब नई सुविधा जुड़ने से योजना और अधिक उपयोगी हो जाएगी। प्रवासी श्रमिकों को अपने गृह जिले या गांव की राशन दुकान से जुड़े रहने की आवश्यकता नहीं होगी और वे जहां काम कर रहे हैं वहीं आसानी से खाद्यान्न प्राप्त कर सकेंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था बैंकिंग क्षेत्र के एटीएम मॉडल की तरह काम करेगी जहां ग्राहक अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी मशीन से पैसा निकाल सकता है। उसी तरह अब राशन कार्ड धारक भी अपनी जरूरत के अनुसार किसी भी पात्र सरकारी दुकान से खाद्यान्न प्राप्त कर सकेंगे।

    सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र व्यक्ति राशन से वंचित न रहे और उसे समय पर खाद्यान्न उपलब्ध हो सके। नई व्यवस्था लागू होने के बाद राशन वितरण प्रणाली अधिक सरल, पारदर्शी और उपभोक्ता अनुकूल बनने की उम्मीद है। इससे करोड़ों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की प्रभावशीलता भी बढ़ेगी।

  • हाई-स्पीड का खौफनाक अंत: BMW के परखच्चे उड़े, दो दोस्तों की मौके पर मौत

    हाई-स्पीड का खौफनाक अंत: BMW के परखच्चे उड़े, दो दोस्तों की मौके पर मौत


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के ठाणे जिले में रविवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने खुशियों को मातम में बदल दिया। जन्मदिन का जश्न मनाकर लौट रहे तीन दोस्तों की तेज रफ्तार BMW कार मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसा इतना भीषण था कि लग्जरी कार के परखच्चे उड़ गए, इंजन वाहन से अलग होकर करीब 30 मीटर दूर जा गिरा और दो युवाओं की मौके पर ही मौत हो गई। तीसरा युवक गंभीर रूप से घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    जानकारी के अनुसार यह हादसा बदलापुर के पास निर्माणाधीन मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर तड़के करीब तीन बजे हुआ। बताया जा रहा है कि तीनों युवक-युवती जन्मदिन की पार्टी मनाने के बाद BMW कार से वापस लौट रहे थे। कार टिटवाला से बदलापुर की ओर जा रही थी। इसी दौरान एरंजाड क्षेत्र के पास चालक का वाहन से नियंत्रण हट गया और तेज रफ्तार कार सीधे डिवाइडर से टकरा गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों और प्रारंभिक जांच के अनुसार कार की रफ्तार 250 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक थी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वाहन कई बार पलटा और करीब 200 मीटर तक घिसटता और उछलता चला गया। इसके बाद क्षतिग्रस्त कार डिवाइडर के दूसरी ओर जाकर रुकी। दुर्घटना की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कार का इंजन मुख्य ढांचे से अलग होकर काफी दूर जा गिरा।

    हादसे में बदलापुर निवासी 26 वर्षीय योगेश नेगी और बांद्रा निवासी 24 वर्षीय रेबेका जैकब की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वहीं कार चला रहा युवक अंगद गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार जारी है। उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार हादसा इतना भयावह था कि सड़क पर दूर-दूर तक वाहन के पुर्जे और अन्य मलबा बिखर गया। पुलिस और राहत दल को मौके पर पहुंचकर लंबे समय तक बचाव और साक्ष्य जुटाने का काम करना पड़ा। दुर्घटना के कारण एक्सप्रेसवे के इस हिस्से पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।

    पुलिस को घटनास्थल से करीब नौ हजार रुपए का एक बिल भी मिला है, जिसे जन्मदिन समारोह से जुड़ा माना जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि दुर्घटना के समय चालक वाहन को किस परिस्थिति में चला रहा था। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो भी पुलिस के जांच के दायरे में है, जिसमें कथित रूप से BMW को अत्यधिक तेज गति से दौड़ते हुए देखा जा सकता है।

    पुलिस का प्रारंभिक अनुमान है कि तेज रफ्तार के कारण चालक अचानक सामने आए किसी अवरोधक या डिवाइडर से बचने की कोशिश में नियंत्रण खो बैठा होगा, जिससे यह हादसा हुआ। हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।

    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार के खतरों को उजागर करता है। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि आधुनिक और शक्तिशाली वाहनों की क्षमता चाहे जितनी हो, सार्वजनिक सड़कों पर निर्धारित गति सीमा का पालन ही सुरक्षित यात्रा की सबसे बड़ी गारंटी है। कुछ सेकंड का रोमांच कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल सकता है।

  • राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे की चोरी का विवाद गहराया, चंपत राय पर उठे सवाल, जांच से तय होगा आगे का रास्ता

    राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे की चोरी का विवाद गहराया, चंपत राय पर उठे सवाल, जांच से तय होगा आगे का रास्ता


    लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी और चोरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस विवाद के केंद्र में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय आ गए हैं, जिनकी भूमिका को लेकर अब कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।

    राम मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले चंपत राय लंबे समय से ट्रस्ट के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते रहे हैं। समर्थक उन्हें अनुशासित और समर्पित कार्यकर्ता मानते हैं, वहीं आलोचक उन पर निर्णयों में एकतरफा रवैया अपनाने के आरोप लगाते रहे हैं।

    ट्रस्ट में बढ़ता असंतोष और पुराने विवाद

    सूत्रों और चर्चा के अनुसार, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई पुराने संत और महंत ट्रस्ट के गठन से ही कुछ फैसलों से असंतुष्ट रहे हैं। उनका आरोप रहा है कि आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले कई प्रमुख संतों और संस्थाओं को निर्णय प्रक्रिया से दूर रखा गया।

    ट्रस्ट में अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और अन्य पदों की मौजूदगी के बावजूद, लंबे समय से यह धारणा रही है कि प्रशासनिक और संगठनात्मक निर्णयों में चंपत राय की भूमिका प्रमुख रही है। इसी कारण कुछ सदस्यों के बीच असंतोष की स्थिति भी बनी रही।

    चढ़ावे की चोरी का मामला और बढ़ता विवाद

    हाल ही में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले के बाद चंपत राय पर भी राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ पूर्व जुड़े लोगों और संतों ने सार्वजनिक रूप से आलोचना भी की है, जबकि कुछ ने जांच की मांग की है।

    हालांकि, चंपत राय को लेकर उनके समर्थक यह भी मानते हैं कि उनका सार्वजनिक जीवन पारदर्शिता और सादगी से जुड़ा रहा है और उन पर सीधे तौर पर किसी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप साबित नहीं हुआ है।

    सरकार और ट्रस्ट की प्रतिक्रिया

    इस पूरे मामले पर सरकार और ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों ने संयमित प्रतिक्रिया दी है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने ट्रस्ट के कार्यों में कुछ व्यवस्थागत कमियों की बात स्वीकार की है, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर किसी भी तरह के गंभीर आरोपों से इनकार किया है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हालिया घटनाक्रमों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के चरित्र पर बिना ठोस आधार के टिप्पणी नहीं होनी चाहिए।

    आगे क्या होगा?

    सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच जारी है और यदि आवश्यकता पड़ी तो ट्रस्ट के ढांचे में बदलाव या पुनर्गठन पर भी विचार किया जा सकता है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही संबंधित व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट होगी। फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और आगे की स्थिति जांच रिपोर्ट और आधिकारिक निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

  • नीट परीक्षा व्यवस्था के बीच पीएम मोदी का संवेदनशील कदम एयरपोर्ट पर रोका काफिला

    नीट परीक्षा व्यवस्था के बीच पीएम मोदी का संवेदनशील कदम एयरपोर्ट पर रोका काफिला


    नई दिल्ली । NEET री एग्जाम के पहले सरकार पूरी ताकत झोंक रही है. बार बार पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की घटनाओं के बाद इस परीक्षा को सुचारू और पारदर्शी तरीके से कराना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. इस बार देश भर में लाखों छात्र छात्राएं शामिल हो रहे हैं. सरकार का प्रयास है कि किसी भी छात्र को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े.

    इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया जिसने सभी का ध्यान खींचा है. प्रधानमंत्री दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे थे. यहां से उन्हें अपने आवास के लिए रवाना होना था. लेकिन उन्होंने तत्काल प्रोटोकॉल से ऊपर उठकर छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता दी.

    अगर पीएम का काफिला उस समय एयरपोर्ट से निकलता तो राजधानी की कई सड़कों पर यातायात रोकना पड़ता. उसी समय हजारों छात्र नीट परीक्षा केंद्रों की ओर जा रहे थे. इससे छात्रों को देरी और परेशानी का सामना करना पड़ सकता था.

    ऐसे में प्रधानमंत्री ने निर्णय लिया कि वे एयरपोर्ट पर ही रुकेंगे. उन्होंने अपने काफिले को वहीं रोक दिया. बताया जा रहा है कि वे तब तक एयरपोर्ट पर रहे जब तक परीक्षा शुरू नहीं हुई. इसके बाद ही वे अपने आवास के लिए रवाना हुए.

    देश भर में इस बार नीट परीक्षा का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा किया जा रहा है. परीक्षा में कुल 22.79 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं. यह परीक्षा देश के साथ साथ विदेशों के कुछ केंद्रों पर भी आयोजित की गई है. कुल 551 शहरों और 14 विदेश शहरों में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. लगभग 5000 से अधिक परीक्षा केंद्रों पर यह परीक्षा संपन्न हो रही है.

    परीक्षा को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं. हर केंद्र पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और जैमर का उपयोग किया जा रहा है. आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो सके.

    इस पूरे आयोजन में दो लाख से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है. सैकड़ों सिटी कोऑर्डिनेटर और हजारों ऑब्जर्वर भी तैनात किए गए हैं जो परीक्षा की निगरानी कर रहे हैं. प्रशासन का लक्ष्य है कि परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो.

    छात्रों के लिए यह परीक्षा बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि सीमित सीटों के कारण प्रतिस्पर्धा काफी कठिन है. ऐसे में सरकार और प्रशासन दोनों का प्रयास है कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए. प्रधानमंत्री का यह निर्णय भी इसी दिशा में एक संवेदनशील कदम के रूप में देखा जा रहा है.

  • फिट इंडिया अभियान का हिस्सा संडे ऑन साइकिल, अक्षय कुमार के साथ मांडविया ने बताए अनुभव

    फिट इंडिया अभियान का हिस्सा संडे ऑन साइकिल, अक्षय कुमार के साथ मांडविया ने बताए अनुभव


    नई दिल्ली । केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने संडे ऑन साइकिल कार्यक्रम को लेकर अपनी प्रेरणा साझा करते हुए बताया कि इस पहल की नींव उनके स्कूल जीवन के दो शिक्षकों से मिली सीख पर आधारित है। उन्होंने कहा कि बचपन में दो शिक्षक रोजाना कई किलोमीटर साइकिल चलाकर स्कूल आते थे, और उनकी यही अनुशासन भरी दिनचर्या आज भी उन्हें प्रेरित करती है।

    मांडविया ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक 19 सेकंड का वीडियो साझा किया, जिसमें वह अभिनेता अक्षय कुमार के साथ बातचीत करते नजर आए। इस दौरान उन्होंने अपने शिक्षकों का जिक्र करते हुए बताया कि उनमें से एक शिक्षक अब 92 वर्ष के हैं और दूसरे 94 वर्ष के, लेकिन उनकी जीवनशैली आज भी प्रेरणादायक है।

    उन्होंने कहा कि इन्हीं अनुभवों से प्रेरित होकर उन्होंने संडे ऑन साइकिल जैसी पहल को आगे बढ़ाया, जिसका उद्देश्य लोगों में फिटनेस के प्रति जागरूकता फैलाना और साइकिलिंग को जीवनशैली का हिस्सा बनाना है। यह अभियान न केवल स्वास्थ्य सुधार पर केंद्रित है, बल्कि मोटापे की समस्या से निपटने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है।

    मांडविया और अक्षय कुमार दोनों ही रविवार को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां फिटनेस और योग को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

    गौरतलब है कि संडे ऑन साइकिल अभियान की शुरुआत दिसंबर 2024 में फिट इंडिया मूवमेंट के तहत की गई थी, जिसका उद्देश्य हर रविवार देशभर में लोगों को एक साथ जोड़कर फिटनेस के प्रति प्रेरित करना है।

  • छत्तीसगढ़ के गौरेला में सनसनीखेज वारदात, छात्रा से दुष्कर्म के बाद आरोपी फरार

    छत्तीसगढ़ के गौरेला में सनसनीखेज वारदात, छात्रा से दुष्कर्म के बाद आरोपी फरार


    गौरेला । छत्तीसगढ़ के गौरेला जिले से एक गंभीर आपराधिक मामला सामने आया है, जहां स्कूल से घर लौट रही एक छात्रा के साथ दुष्कर्म की घटना होने का आरोप है। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है, जबकि आरोपी वारदात के बाद से फरार बताया जा रहा है।

    पुलिस के अनुसार, पीड़िता ने गौरेला थाने में पहुंचकर घटना की शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर तत्काल मामला पंजीबद्ध कर लिया गया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अविनाश मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पीड़िता जब स्कूल से घर लौट रही थी, तभी रास्ते में आरोपी ने उसे रोका और उसके साथ कथित रूप से जबरन दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी और आरोपी की तलाश में टीमों को लगाया गया है। बताया जा रहा है कि आरोपी स्थानीय निवासी है और घटना के बाद से फरार चल रहा है।

    पुलिस ने संभावित ठिकानों पर दबिश देना शुरू कर दिया है और मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और मामले की गहन जांच जारी है।

  • भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा, INS दूनागिरी और INS अग्रय से बढ़ी मारक क्षमता

    भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा, INS दूनागिरी और INS अग्रय से बढ़ी मारक क्षमता


    नई दिल्ली । भारतीय नौसेना की ताकत को एक नई दिशा देने के लिए दो अत्याधुनिक युद्धपोतों को औपचारिक रूप से बेड़े में शामिल किया गया है। इनमें स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS Dunagiri और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट INS Agray शामिल हैं। इन दोनों प्लेटफॉर्म्स के शामिल होने से भारतीय नौसेना की सतह, वायु और जल के भीतर युद्ध क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को देखते हुए भारतीय नौसेना लगातार स्वदेशी तकनीक पर आधारित युद्धपोतों को शामिल कर रही है। आज के दौर में छोटे और सस्ते ड्रोन भी बड़े सैन्य प्लेटफॉर्म्स को चुनौती दे सकते हैं, ऐसे में उन्नत स्टेल्थ तकनीक और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

    INS Dunagiri प्रोजेक्ट 17ए के तहत विकसित एक अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट है, जो दुश्मन के रडार से बचकर लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम है। इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, बराक-8 एयर डिफेंस सिस्टम, आधुनिक सोनार, मल्टी-फंक्शन रडार और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं। यह युद्धपोत सतह, हवा और पानी के भीतर मौजूद सभी प्रकार के खतरों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम है।

    इस युद्धपोत की सबसे बड़ी विशेषता इसका कम रडार क्रॉस-सेक्शन है, जिससे इसे दुश्मन के लिए ट्रैक करना बेहद कठिन हो जाता है। इसके सेंसर और हथियार प्रणालियां रियल टाइम डेटा के आधार पर तेजी से निर्णय लेने में सक्षम हैं, जिससे प्रतिक्रिया समय काफी कम हो जाता है।

    दूसरी ओर, INS Agray विशेष रूप से समुद्र की सतह के नीचे छिपे खतरों, यानी पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे “गांडीव” जैसे प्रतीकात्मक नाम से जोड़कर इसकी सटीक मारक क्षमता को दर्शाया गया है। यह जहाज स्वदेशी सोनार सिस्टम, हल्के टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और एडवांस डिकॉय सिस्टम से लैस है।

    यह छोटा आकार होने के बावजूद बेहद घातक प्लेटफॉर्म माना जा रहा है, जो तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों पर सटीक निगरानी और हमला करने में सक्षम है। इसकी गति लगभग 25 नॉट तक है और यह हजारों किलोमीटर तक ऑपरेशन कर सकता है।

    दोनों युद्धपोतों में लगभग 75 प्रतिशत तक स्वदेशी उपकरणों का उपयोग किया गया है, जो भारत की आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इन प्लेटफॉर्म्स का डिजाइन नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया है।

    कुल मिलाकर, INS Dunagiri और INS Agray का शामिल होना भारतीय नौसेना की समुद्री शक्ति को नई ऊंचाई देता है और भारत की रणनीतिक रक्षा क्षमता को और अधिक मजबूत बनाता है।