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  • नीट-यूजी के परीक्षा पैटर्न में बदलाव की तैयारी, कंप्यूटर आधारित परीक्षा और दो फेज मॉडल पर सरकार कर रही विचार

    नीट-यूजी के परीक्षा पैटर्न में बदलाव की तैयारी, कंप्यूटर आधारित परीक्षा और दो फेज मॉडल पर सरकार कर रही विचार

    नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG के स्वरूप में आने वाले समय में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में बताया है कि परीक्षा को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इनमें कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली और संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) की तर्ज पर दो चरणों में परीक्षा आयोजित करने का प्रस्ताव भी शामिल है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

    सरकार के अनुसार वर्तमान में NEET-UG पारंपरिक पेन और पेपर मोड में आयोजित की जाती है, लेकिन भविष्य में इसे कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी CBT मोड में कराने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही परीक्षा को दो चरणों में आयोजित करने के विकल्प का भी अध्ययन किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जा सकता है।

    हलफनामे में यह भी कहा गया है कि परीक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार का बदलाव व्यापक विचार-विमर्श और विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर ही लागू किया जाएगा। इस उद्देश्य से गठित टास्क फोर्स अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद संबंधित मंत्रालयों, परीक्षा एजेंसियों और अन्य हितधारकों से चर्चा की जाएगी। इसके बाद ही किसी नए प्रारूप पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

    सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी आश्वस्त किया है कि यदि परीक्षा पैटर्न में कोई बदलाव किया जाता है तो उसे अचानक लागू नहीं किया जाएगा। छात्रों को पर्याप्त समय पहले नई व्यवस्था की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि वे उसी के अनुरूप अपनी तैयारी कर सकें। इससे अभ्यर्थियों को नए प्रारूप को समझने और उसके अनुसार अभ्यास करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा।

    परीक्षा की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए भी कई उपायों पर विचार किया जा रहा है। इनमें बायोमेट्रिक सत्यापन, सुरक्षित प्रश्नपत्र वितरण प्रणाली, डिजिटल निगरानी और अन्य तकनीकी सुरक्षा उपाय शामिल हो सकते हैं। हाल के वर्षों में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे विभिन्न प्रश्नों और पारदर्शिता संबंधी चिंताओं को देखते हुए सरकार परीक्षा संचालन को अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में काम कर रही है।

    शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में कंप्यूटर आधारित परीक्षा और बहु-चरणीय प्रणाली लागू होती है तो इससे परीक्षा संचालन अधिक सुव्यवस्थित हो सकता है। हालांकि इसके लिए देशभर में तकनीकी ढांचे, परीक्षा केंद्रों की क्षमता और सभी अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा। फिलहाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी पहलुओं पर विचार करने और आवश्यक तैयारियां पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

  • कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके बोले, फिलहाल आंदोलन पर फोकस, जनता चाहेगी तो राजनीति पर करेंगे विचार

    कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके बोले, फिलहाल आंदोलन पर फोकस, जनता चाहेगी तो राजनीति पर करेंगे विचार

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपने आंदोलन के अगले चरण की तैयारियां शुरू कर दी हैं। उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ दो दिवसीय बैठक बुलाने का फैसला किया है, जिसमें आंदोलन की आगामी रणनीति, युवाओं तक पहुंच बढ़ाने और संगठन के भविष्य को लेकर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इस बीच राजनीति में उनके संभावित प्रवेश को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं, लेकिन दिपके ने फिलहाल चुनावी राजनीति से दूरी बनाए रखने की बात कही है।

    अभिजीत दिपके ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल के रूप में चुनावी मैदान में उतरना नहीं है। उनका कहना है कि उनकी प्राथमिकता एक ऐसे सामाजिक अभियान को मजबूत करना है, जो आम लोगों, विशेषकर युवाओं की आवाज को प्रभावी ढंग से सामने ला सके। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े निर्णय से पहले समाज की अपेक्षाओं और युवाओं की राय को समझना आवश्यक है।

    उन्होंने बताया कि आगामी बैठक में इस बात पर विशेष चर्चा होगी कि आज के युवा किन मुद्दों को सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं और उन विषयों पर किस प्रकार प्रभावी जनजागरूकता अभियान चलाया जा सकता है। उनके अनुसार, आंदोलन का उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना नहीं, बल्कि लोगों की समस्याओं को सामने लाकर समाधान की दिशा में सकारात्मक माहौल तैयार करना भी है।

    राजनीति में आने की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल के जवाब में दिपके ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में बड़ी संख्या में लोग उनसे चुनाव लड़ने की अपेक्षा जताते हैं और उन्हें व्यापक जनसमर्थन मिलता है, तो उस समय इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्णय का आधार व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि जनता की इच्छा और सामाजिक आवश्यकता होगी।

    दिपके का मानना है कि वर्तमान समय में बड़ी संख्या में युवाओं का भरोसा विभिन्न संस्थाओं और पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था पर पहले जैसा नहीं रहा है। उनका कहना है कि इस स्थिति में सबसे बड़ी जरूरत लोगों का विश्वास दोबारा मजबूत करने की है। उन्होंने जिम्मेदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही पर आधारित जनभागीदारी को लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक बताया।

    उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में संगठन की गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। बैठक में शामिल सदस्य आंदोलन के विस्तार, युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर अभियान चलाने की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेंगे। इसके साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों तक पहुंचने और संवाद स्थापित करने के लिए किन माध्यमों का उपयोग किया जाए।

    अभिजीत दिपके ने भरोसा जताया कि यदि उनका अभियान लगातार जनहित के मुद्दों को उठाता रहा और लोगों का समर्थन मिलता रहा, तो भविष्य में संगठन बड़े स्तर पर निर्णय लेने की स्थिति में पहुंच सकता है। उन्होंने दोहराया कि फिलहाल पूरा ध्यान सामाजिक जागरूकता, युवाओं की भागीदारी और जनसरोकारों से जुड़े विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने पर केंद्रित रहेगा।

  • पीएम मोदी का वीडियो हटने पर मेटा पर संसदीय समिति सख्त, मार्क जुकरबर्ग को तीन दिन में बिना शर्त माफी का अल्टीमेटम

    पीएम मोदी का वीडियो हटने पर मेटा पर संसदीय समिति सख्त, मार्क जुकरबर्ग को तीन दिन में बिना शर्त माफी का अल्टीमेटम

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो फेसबुक से कुछ समय के लिए हटाए जाने के मामले ने अब राजनीतिक और संसदीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। इस घटनाक्रम को लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से संबंधित संसदीय समिति ने मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। समिति ने कंपनी से तीन दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने और इस घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। समिति का कहना है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो कंपनी के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।

    समिति के अनुसार सोशल मीडिया मंचों की जिम्मेदारी है कि वे सार्वजनिक महत्व की सामग्री के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखें। प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद से जुड़े आधिकारिक या सार्वजनिक महत्व के वीडियो के अस्थायी रूप से हटने की घटना को गंभीरता से लिया गया है। इसी कारण कंपनी से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदमों का भी विवरण मांगा गया है।

    बताया गया है कि संसदीय समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि यह तकनीकी त्रुटि थी तो उसके कारणों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वहीं यदि किसी मानवीय निर्णय के कारण वीडियो हटाया गया था तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। समिति का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सामग्री के प्रबंधन में स्पष्ट मानकों और जवाबदेही का पालन आवश्यक है, ताकि उपयोगकर्ताओं का विश्वास बना रहे।

    हाल के वर्षों में सोशल मीडिया कंपनियों और भारतीय संस्थानों के बीच डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, सामग्री मॉडरेशन और सूचना प्रबंधन को लेकर कई बार चर्चा होती रही है। सरकार लगातार यह कहती रही है कि भारत में काम करने वाले सभी डिजिटल मंचों को देश के कानूनों और नियामकीय व्यवस्थाओं का पूरी तरह पालन करना चाहिए। इसी संदर्भ में यह मामला भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी भी सार्वजनिक महत्व की सामग्री को हटाने या सीमित करने से पहले निर्धारित प्रक्रियाओं और पारदर्शिता का पालन आवश्यक है। इससे गलतफहमियों की संभावना कम होती है और प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता भी बनी रहती है। डिजिटल मंचों की बढ़ती भूमिका को देखते हुए जवाबदेही और तकनीकी दक्षता दोनों को समान महत्व दिया जा रहा है।

    अब सभी की नजर मेटा की अगली प्रतिक्रिया पर है। यदि कंपनी निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रखती है और आवश्यक स्पष्टीकरण देती है तो मामले की दिशा अलग हो सकती है। वहीं यदि समिति को जवाब संतोषजनक नहीं लगता या निर्धारित समय में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती, तो संसदीय स्तर पर आगे की कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी, पारदर्शिता और नियामकीय अनुपालन को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • एंथ्रोपिक और एडब्ल्यूएस की बड़ी साझेदारी, भारत के एआई डाटा की सुरक्षा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी मजबूती

    एंथ्रोपिक और एडब्ल्यूएस की बड़ी साझेदारी, भारत के एआई डाटा की सुरक्षा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी मजबूती

    नई दिल्ली । कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात एआई क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एंथ्रोपिक ने भारत में अपने कारोबार का रणनीतिक विस्तार करते हुए एक बड़ी योजना की घोषणा की है। कंपनी के क्लाउड एआई मॉडल अब अमेजन बेडरॉक के भारतीय बुनियादी ढांचे के जरिए देश के भीतर ही संचालित होंगे। इस नई व्यवस्था से भारतीय उपयोगकर्ताओं और बड़े संगठनों का संवेदनशील एआई डाटा देश की सीमाओं के भीतर सुरक्षित रहेगा, जिससे डेटा रेजिडेंसी और कानूनी नियमों का पालन करना अत्यधिक सुगम हो जाएगा।

    स्थानीय स्तर पर डेटा प्रोसेसिंग होने का सबसे बड़ा लाभ बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, सरकारी एजेंसियों, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और अन्य विनियमित क्षेत्रों को प्राप्त होगा। इन क्षेत्रों में डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा सर्वोपरि होती है। अमेजन वेब सर्विसेज इंडिया के अनुसार, भारतीय सर्वरों पर क्लाउड मॉडलों की उपलब्धता से घरेलू एआई आधारित एप्लीकेशन तैयार करने वाले डेवलपर्स और कंपनियों को कम लेटेंसी और बेहतर प्रदर्शन का लाभ मिलेगा।

    एंथ्रोपिक के अधिकारियों का मानना है कि भारत क्लाउड एआई के लिए वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल है। स्थानीय एआई विशेषज्ञता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कंपनी अपने पार्टनर नेटवर्क के माध्यम से भारत में 5,000 से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षित करने जा रही है। इसके साथ ही कंपनी भारत में अपने कार्यबल का विस्तार करने और भारतीय भाषाओं के लिए अपने मॉडल के समर्थन को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

    साइबर सुरक्षा और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए एंथ्रोपिक ने डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया, एमओएसआईपी और ओपनजीटूपी जैसी संस्थाओं के साथ साझेदारी की है। एआई आधारित सुरक्षा परीक्षण के माध्यम से संगठन अपनी सॉफ्टवेयर कमजोरियों की पहचान कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त भारतीय भाषाओं में एआई के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए कंपनी ने कार्या के साथ भी सहयोग किया है, जिससे डिजिटल सेवाओं की पहुंच आम जनता तक आसान होगी।

  • काजोल के 52वें जन्मदिन पर जानिए करियर के अनसुने किस्से, नेगेटिव रोल से रचा इतिहास और बनीं करण की लकी चार्म

    काजोल के 52वें जन्मदिन पर जानिए करियर के अनसुने किस्से, नेगेटिव रोल से रचा इतिहास और बनीं करण की लकी चार्म

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन त्रिशूल के तहत बड़ी सफलता का दावा किया है। सरकार के अनुसार पिछले सात वर्षों में 36 देशों से कुल 274 वांछित अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। इन अपराधियों में आतंकवाद, संगठित अपराध, आर्थिक अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में वांछित आरोपी शामिल हैं। सरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीक, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत कानूनी व्यवस्था के कारण प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हुई है।

    गृह मंत्रालय के अनुसार विदेशों में अलग-अलग पहचान के साथ छिपे अपराधियों का पता लगाने के लिए सैटेलाइट इनपुट, डिजिटल फुटप्रिंट, प्रोफाइल ट्रैकिंग और जियो-लोकेशन जैसी तकनीकों का व्यापक उपयोग किया गया। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप विभिन्न देशों की एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर कई बड़े अपराधियों को भारत लाया गया। सरकार ने बताया कि वर्ष 2025 में सबसे अधिक 70 भगोड़ों का प्रत्यर्पण हुआ, जबकि वर्ष 2026 में जुलाई तक 45 अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है।

    सरकार ने यह भी जानकारी दी कि धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत भगोड़े अपराधियों से जुड़ी 17,874 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 18,762 करोड़ रुपये की राशि भी वापस लाई गई है। अधिकारियों के अनुसार आर्थिक अपराधों से अर्जित अवैध संपत्ति पर कार्रवाई को इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है ताकि अपराध से अर्जित लाभ को समाप्त किया जा सके और कानून का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो।

    इंटरपोल के सहयोग से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में भी उल्लेखनीय तेजी आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जा चुके हैं। पिछले तीन वर्षों में कुल 401 नोटिस जारी हुए हैं, जिनमें वित्तीय अपराध, आतंकवाद, संगठित अपराध, हत्या, मादक पदार्थों की तस्करी, यौन अपराध और साइबर अपराध जैसे मामले प्रमुख रहे। सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते सहयोग से भगोड़ों की तलाश और गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण मदद मिली है।

    जनवरी 2026 में खुफिया समन्वय को और मजबूत करने के उद्देश्य से एक विशेष समूह का गठन भी किया गया, जो विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने और प्राथमिकता वाले मामलों में कार्रवाई तेज करने का कार्य कर रहा है। सरकार के अनुसार जटिल मामलों में तकनीकी निगरानी और कूटनीतिक प्रयासों के संयोजन से प्रत्यर्पण प्रक्रिया को गति मिली है। इसी क्रम में कई चर्चित मामलों में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।

    सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों और संशोधित कानूनी प्रावधानों ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाया है। अब कुछ मामलों में आरोपी की अनुपस्थिति में भी मुकदमा चलाने की व्यवस्था उपलब्ध है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया बाधित नहीं होती। केंद्र का दावा है कि आधुनिक तकनीक, वैश्विक सहयोग, खुफिया समन्वय और सख्त कानूनी ढांचे के माध्यम से अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक मजबूत बनाया गया है तथा भविष्य में भी ऐसे अभियानों को प्राथमिकता के साथ जारी रखा जाएगा।

  • गूंगी गुड़िया' विवाद पर गरमाई महाराष्ट्र की राजनीति, सुनेत्रा पवार का पलटवार और कांग्रेस पर सत्तापक्ष का हमला

    गूंगी गुड़िया' विवाद पर गरमाई महाराष्ट्र की राजनीति, सुनेत्रा पवार का पलटवार और कांग्रेस पर सत्तापक्ष का हमला


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में कांग्रेस की एक टिप्पणी ने नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को लेकर कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया पर की गई ‘गूंगी गुड़िया’ टिप्पणी पर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए हैं। इस बयान के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है जबकि खुद सुनेत्रा पवार ने भी संयमित लेकिन सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उचित समय आने पर इसका करारा जवाब दिया जाएगा।

    पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। वीडियो में बीड़ जिले की कानून व्यवस्था से जुड़े सवाल पर पत्रकारों ने सुनेत्रा पवार से प्रतिक्रिया जाननी चाही लेकिन उनके स्थान पर मंत्री धनंजय मुंडे जवाब देते नजर आए। इस पर कांग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट करते हुए सवाल उठाया कि आखिर सुनेत्रा पवार कब तक गूंगी गुड़िया बनी रहेंगी। इस टिप्पणी के सामने आते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी केवल सुर्खियां बटोरने के लिए बेहद निचले स्तर की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति में इस तरह की व्यक्तिगत और अपमानजनक टिप्पणियों की कोई जगह नहीं है। उनके मुताबिक जनता ऐसे बयानों को पसंद नहीं करती और कांग्रेस केवल प्रचार पाने के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रही है।

    उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने भी इस पूरे विवाद पर पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राजनीति में हर आरोप का जवाब तुरंत देना जरूरी नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सही समय आने पर अपने काम और अपने जवाब से सभी सवालों का उत्तर देंगी। उनके इस बयान को सधे हुए राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी कांग्रेस की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि किसी महिला जनप्रतिनिधि के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल केवल एक नेता का नहीं बल्कि पूरे राज्य की महिलाओं का अपमान है। उन्होंने कांग्रेस से सार्वजनिक माफी मांगने की भी बात कही।

    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने भी कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। पार्टी प्रवक्ता उमेश पाटिल ने कहा कि कांग्रेस को याद रखना चाहिए कि कभी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी इसी तरह के तंज का सामना करना पड़ा था लेकिन उन्होंने अपने नेतृत्व और कार्यों से आलोचकों को जवाब दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस महिलाओं के सम्मान की बात करती है लेकिन व्यवहार में दोहरे मापदंड अपनाती है।

    वहीं मंत्री धनंजय मुंडे ने दावा किया कि कांग्रेस सुनेत्रा पवार के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव से घबराई हुई है और इसी वजह से इस तरह की टिप्पणियां कर रही है। दूसरी ओर महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि यह कोई असंसदीय शब्द नहीं है और उनका उद्देश्य केवल राजनीतिक सवाल उठाना था। एनसीपी शरद पवार गुट के नेता रोहित पवार ने भी कहा कि यह टिप्पणी केवल उस घटना के संदर्भ में की गई थी जहां पत्रकारों के सवालों का जवाब नहीं दिया गया।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है क्योंकि सत्तापक्ष इसे महिला सम्मान का मुद्दा बना रहा है जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक जवाबदेही से जोड़कर देख रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सुनेत्रा पवार अपने कहे अनुसार उचित समय पर किस तरह का राजनीतिक जवाब देती हैं।

  • ट्रेन में RAC टिकट पर सफर करने वाले यात्रियों को अब मिलेगा पूरा बेडरोल किट, रेलवे ने जारी किए निर्देश

    ट्रेन में RAC टिकट पर सफर करने वाले यात्रियों को अब मिलेगा पूरा बेडरोल किट, रेलवे ने जारी किए निर्देश


    प्रयागराज।
    एसी (AC) श्रेणी में आधी सीट यानी रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन (आरएसी) (Reservation Against Cancellation -RAC) टिकट पर सफर करने वाले यात्रियों को अब पूरा बेडरोल किट (Bedroll kit.) उपलब्ध कराया जाएगा। रेलवे बोर्ड (Railway Board) ने इस संबंध में चार अगस्त 2026 को एनसीआर समेत सभी जोनल रेलवे को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि एसी चेयर कार को छोड़कर अन्य सभी वातानुकूलित श्रेणियों में प्रत्येक आरएसी यात्री को अलग से संपूर्ण बेडरोल किट उपलब्ध कराई जाए। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा गया है।

    रेलवे बोर्ड को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई ट्रेनों में आरएसी यात्रियों को पूरा बेडरोल नहीं दिया जा रहा है या दो यात्रियों के बीच एक ही किट साझा कराई जा रही है। यात्रियों को अलग-अलग कंबल न मिलने पर वे परेशान होते थे। कभी कंबल तो कभी तकिया न मिलने की हेल्पलाइन नंबरों पर शिकायत की जा रही थी। लेकिन इसके बाद भी परेशानियां बंद नहीं हुईं।

    इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए बोर्ड ने दोबारा स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि प्रत्येक आरएसी सीट पर सफर करने वालों को अन्य यात्रियों की तरह अलग से चादर, कंबल और बेडरोल की पूरी सुविधा दी जाए। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस आदेश के बाद प्रयागराज होकर गुजरने वाली सभी संबंधित एसी ट्रेनों में भी आरएसी यात्रियों को पूरा बेडरोल उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इससे यात्रियों को यात्रा के दौरान बेहतर सुविधा मिलेगी और लंबे समय से चली आ रही शिकायतों पर भी रोक लगेगी।

    रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को निर्देश दिया है कि इस आदेश की जानकारी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों तक तत्काल पहुंचाई जाए तथा इसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही आईआरसीटीसी सहित संबंधित विभागों को भी इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश के लागू होने से देशभर में एसी कोचों में आरएसी टिकट पर यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को राहत मिलेगी। अब उन्हें बेडरोल के लिए शिकायत करने की आवश्यकता नहीं होगी और यात्रा के दौरान अन्य यात्रियों के समान सुविधाएं मिल सकेंगी।

    बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि एसी चेयर कार को छोड़कर सभी एसी श्रेणियों में यात्रा करने वाले प्रत्येक आरएसी यात्री को पूर्ण बेडरोल किट उपलब्ध कराई जाए। इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा और उन्हें अन्य वैध यात्रियों के समान सुविधा मिलेगी। इसमें परेशानी आने पर यात्री हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत भी दर्ज करवा सकते हैं। इसके लिए रेलवे की ओर से जानकारी साझा की जाएगी।

  • फ्री नहीं रहने वाला डिजिटल पेमेंट…. UPI से लेनदेन पर लगेगा शुल्क! संसद में आया बिल

    फ्री नहीं रहने वाला डिजिटल पेमेंट…. UPI से लेनदेन पर लगेगा शुल्क! संसद में आया बिल


    नई दिल्ली।
    मोदी सरकार (Modi Government) ने अपनी लोकप्रिय यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (Unified Payments Interface-UPI) सिस्टम पर व्यापारियों से शुल्क वसूलने की दिशा में एक और कदम बढ़ा दिया है। मंगलवार को संसद (Parliament) में भुगतान कानूनों में प्रस्तावित बदलाव पेश किए गए, जिससे यह संभावना और बढ़ गई है। हालांकि यह शुल्क व्यापारियों पर लगेगा, ग्राहकों पर नहीं, फिर भी यह बदलाव डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) को प्रभावित कर सकता है।

    जानकारी के मुताबिक नीति निर्माता दो बड़े विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। पहला विकल्प है कि एक निश्चित राशि से अधिक के लेनदेन पर MDR लगाया जाए। दूसरा विकल्प है कि व्यापारी के वार्षिक कारोबार के आधार पर शुल्क तय किया जाए। सूत्रों के अनुसार, एक प्रस्ताव के तहत केवल बड़े व्यापारियों से शुल्क लिया जाएगा, जबकि उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों के लिए UPI भुगतान मुफ्त रहेगा।


    कितना लग सकता है चार्ज

    सरकारी सूत्र के अनुसार, एक प्रस्ताव में 1.5 करोड़ रुपये से अधिक सालाना कारोबार वाले व्यापारियों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 0.3% से 0.5% MDR लगाने की बात कही गई है। जेफरीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन व्यापारियों की कुल लेनदेन संख्या का केवल 4% हैं, लेकिन कुल लेनदेन मूल्य का लगभग 67% इन्हीं से आता है।


    संशोधन विधेयक पेश

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन विधेयक पेश किया। उद्योग और नियामक सूत्रों के अनुसार, इस संशोधन से डिजिटल पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का कानूनी आधार बनेगा।

    हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि शुल्क कितना होगा और यह किन लेनदेन पर लागू होगा। सरकारी सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी। वित्त मंत्रालय, रिजर्व बैंक और राष्ट्रीय भुगतान निगम ने तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।


    UPI का बाजार में दबदबा

    UPI दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट नेटवर्कों में से एक है। जुलाई में इसके जरिए 23.6 अरब लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य 29.9 लाख करोड़ रुपये वॉलमार्ट की फोनपे और गूगल की गूगल पे इस सिस्टम पर हावी हैं।


    फ्री UPI पर क्यों लगने जा रहा लगाम

    रॉयटर्स के मुताबिक उद्योग के अधिकारियों का लंबे समय से कहना है कि डिजिटल पेमेंट में ग्रोथ को बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि UPI ट्रांजैक्शन पर पेमेंट कंपनियों को कोई शुल्क नहीं मिलता। इससे उनकी निवेश करने की क्षमता सीमित हो जाती है।


    MDR क्या होता है?

    MDR वह शुल्क है, जो व्यापारी बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को डिजिटल ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने के लिए देते हैं। भारत में क्रेडिट कार्ड पर आमतौर पर लगभग 1.5% MDR लगता है, जबकि डेबिट कार्ड पर 0.9% तक का शुल्क होता है, लेकिन UPI लेनदेन पर अभी व्यापारियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता।

  • एक्टर प्रदीप रावत का 74 की उम्र में निधन, अश्वत्थामा से 'गजनी' तक… संघर्षों से भरी रही जिंदगी

    एक्टर प्रदीप रावत का 74 की उम्र में निधन, अश्वत्थामा से 'गजनी' तक… संघर्षों से भरी रही जिंदगी


    मुम्बई।
    बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्मों ‘गजनी’ और ‘लगान’ (‘Ghajini’ and ‘Lagaan’) में अपने दमदार अभिनय से पहचान बनाने वाले दिग्गज एक्टर प्रदीप रावत (Veteran actor Pradeep Rawat) का 74 की उम्र में निधन हो गया है. उनके जाने की खबर से फिल्म इंडस्ट्री और फैंस दोनों गहरे सदमे में हैं. प्रदीप रावत के निधन के बाद सोशल मीडिया (Social Media) पर शोक की लहर दौड़ गई है. कई फिल्मी सितारों ने उन्हें भावुक अंदाज में श्रद्धांजलि दी है।


    ब्लड कैंसर से जूझ रहे थे

    प्रदीप रावत के बिजनेस मैनेजर सिद्धार्थ तिवारी (Siddharth Tiwari) ने उनके निधन की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि एक्टर पिछले पांच साल से ब्लड कैंसर से जूझ रहे थे. इलाज के बाद उनकी तबीयत में सुधार भी हुआ था, लेकिन कुछ महीने पहले कैंसर दोबारा लौट आया. पिछले दो महीनों से वह अस्पताल में भर्ती थे और बीते कुछ दिनों में उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई. आखिरकार मंगलवार शाम उन्होंने अंतिम सांस ली. परिवार के मुताबिक, उनका अंतिम संस्कार बुधवार को किए जाने की संभावना है।

    एक्टर सोनू सूद ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर प्रदीप रावत की ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर शेयर करते हुए लिखा- प्रदीप रावत भाई, आपकी कमी हमेशा महसूस होगी. इसके साथ उन्होंने टूटे दिल और हाथ जोड़ने वाली इमोजी भी लगाई.

    टीवी एक्टर आयुषपाल शर्मा ने भी इंस्टाग्राम स्टोरी पर प्रदीप रावत को याद करते हुए लिखा- यानी उन्होंने प्रदीप रावत को ‘गजनी’ के गजनी और ‘लगान’ के देवा के रूप में याद किया।


    विलेन के रोल से बनाई अलग पहचान

    प्रदीप रावत हिंदी ही नहीं, बल्कि तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में भी अपनी दमदार मौजूदगी के लिए जाने जाते थे. उन्होंने अपने करियर में कई यादगार निगेटिव किरदार निभाए और पर्दे पर अपनी अलग पहचान बनाई। आमिर खान की ‘गजनी’ में उनका किरदार आज भी दर्शकों को याद है. वहीं ‘लगान’ में भी उन्होंने अपने अभिनय से गहरी छाप छोड़ी थी।


    फैंस भी हुए भावुक

    प्रदीप रावत के निधन की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस लगातार उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं. कई लोग उनकी फिल्मों के यादगार सीन और डायलॉग शेयर कर रहे हैं और उन्हें भारतीय सिनेमा का बेहतरीन कलाकार बता रहे हैं. उनके जाने से फिल्म इंडस्ट्री ने एक ऐसा कलाकार खो दिया है, जिसकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और अभिनय को लंबे समय तक याद किया जाएगा।

    फिल्मों में कुछ विलेन ऐसे होते हैं, जिनका चेहरा और अंदाज सालों तक दर्शकों के दिलों-दिमाग में बस जाता है. प्रदीप रावत उन्हीं कलाकारों में से एक थे. उनके चेहरे का खौफ, भारी आवाज और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार विलेन्स में शामिल कर दिया। पांच साल तक ब्लड कैंसर से लड़ने के बाद उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. लेकिन उनका सफर सिर्फ एक सफल विलेन बनने की कहानी नहीं था, बल्कि संघर्ष, धैर्य और कभी हार न मानने वाले एक कलाकार की मिसाल भी था।


    जबलपुर से शुरू हुआ सपनों का सफर

    मध्य प्रदेश के जबलपुर में जन्मे प्रदीप रावत के लिए फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंचना बिल्कुल आसान नहीं था. मुंबई आने के बाद उन्हें लगातार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा. लंबे-चौड़े शरीर और तेज-तर्रार चेहरे की वजह से उन्हें अक्सर एक जैसे किरदार ऑफर होते थे, लेकिन बड़ा मौका मिलने का इंतजार लंबा था. इसी दौरान उनकी पर्सनैलिटी पर दिग्गज फिल्ममेकर बीआर चोपड़ा की नजर पड़ी और उनकी जिंदगी बदल गई।


    ‘महाभारत’ के अश्वत्थामा ने बदल दी किस्मत

    साल 1988 में बीआर चोपड़ा के ऐतिहासिक टीवी शो ‘महाभारत’ में प्रदीप रावत को अश्वत्थामा का किरदार मिला. यह उनका पहला बड़ा ब्रेक था. उस दौर में ‘महाभारत’ देश के लगभग हर घर में देखा जाता था और अश्वत्थामा के किरदार ने उन्हें पहचान दिला दी. यहीं से फिल्मों के दरवाजे खुलने लगे.


    फिल्मों में शुरुआत हुई, लेकिन पहचान नहीं मिली

    प्रदीप रावत ने फिल्मों में 1985 की ‘मेरी जंग’ से कदम रखा था. इसके बाद वह कोयला, बागी, मेजर साब, सरफरोश, अग्निपथ, लगान जैसी कई बड़ी फिल्मों में नजर आए. हालांकि, इन फिल्मों में उन्हें ज्यादातर छोटे या सहायक किरदार ही मिले. बड़े बैनर की फिल्मों का हिस्सा बनने के बावजूद उन्हें वह पहचान नहीं मिल रही थी, जिसके वह हकदार थे. कई बार ऐसा दौर भी आया जब करियर चलाने के लिए उन्हें छोटे रोल स्वीकार करने पड़े।


    ‘स्ये’ ने रातों-रात बना दिया साउथ का सबसे बड़ा विलेन

    साल 2004 में आई एस.एस. राजामौली की तेलुगु फिल्म ‘Sye’ प्रदीप रावत के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई. उन्होंने फिल्म में भिक्षु यादव का किरदार निभाया. उनकी खतरनाक मुस्कान, दमदार डायलॉग और रौबदार स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों को ऐसा प्रभावित किया कि आज भी भिक्षु यादव को तेलुगु सिनेमा के सबसे आइकॉनिक विलेन्स में गिना जाता है। फिल्म की सफलता के बाद प्रदीप रावत साउथ इंडस्ट्री के सबसे डिमांड वाले विलेन बन गए. इसके बाद उन्होंने भद्रा, अंदरीवाडु, छत्रपति, लक्ष्मी जैसी सुपरहिट फिल्मों में लगातार यादगार किरदार निभाए. ‘छत्रपति’ में उनका रास बिहारी वाला रोल आज भी फैंस का पसंदीदा माना जाता है।


    फिर आया ‘गजनी’… जिसने इतिहास बदल दिया

    साल 2005 में ए.आर. मुरुगदॉस की तमिल फिल्म ‘गजनी’ में प्रदीप रावत ने मुख्य विलेन का किरदार निभाया. फिल्म इतनी सफल रही कि बाद में इसका हिंदी रीमेक बना, जिसमें आमिर खान लीड रोल में नजर आए और प्रदीप रावत ने एक बार फिर गजनी का वही किरदार निभाया. दिलचस्प बात यह है कि फिल्म का नाम ही उनके किरदार ‘गजनी’ पर रखा गया था।

    साल 2008 में रिलीज हुई हिंदी ‘गजनी’ बॉलीवुड की पहली 100 करोड़ रुपये कमाने वाली फिल्म बनी. आमिर खान के ट्रांसफॉर्मेशन के साथ-साथ प्रदीप रावत के खूंखार विलेन को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया. आज भी ‘गजनी’ का जिक्र होते ही उनका चेहरा लोगों के सामने आ जाता है।


    विलेन ही नहीं, कॉमेडी में भी दिखाया दम

    ज्यादातर लोग उन्हें सिर्फ खतरनाक विलेन के रूप में याद करते हैं, लेकिन प्रदीप रावत ने कई फिल्मों में अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग भी दिखाई. ‘ओए’, ‘पूलारंगाडु’, ‘नेनु शैलजा’ और ‘सर्रैनोडु’ जैसी फिल्मों में उन्होंने साबित किया कि वह सिर्फ डराना ही नहीं, बल्कि दर्शकों को हंसाना भी जानते हैं।


    धीरे-धीरे पर्दे से दूर हो गए

    एक समय ऐसा था जब तेलुगु सिनेमा की बड़ी एक्शन फिल्मों में प्रदीप रावत लगभग तय माने जाते थे. लेकिन समय के साथ उन्होंने धीरे-धीरे हिंदी और दक्षिण भारतीय फिल्मों से दूरी बना ली. नए कलाकार आए, इंडस्ट्री बदली और प्रदीप रावत भी लाइमलाइट से दूर होते चले गए. फिर भी फैंस का मानना रहा कि उन्हें उनके टैलेंट के मुकाबले कभी वह सम्मान और बड़े किरदार नहीं मिले, जिसके वह हकदार थे।


    एक ऐसा विलेन… जिसे भुलाया नहीं जा सकेगा

    प्रदीप रावत ने कभी सुपरस्टार बनने का दावा नहीं किया, लेकिन उन्होंने यह जरूर साबित किया कि एक मजबूत कलाकार बिना हीरो बने भी इतिहास रच सकता है. अश्वत्थामा, भिक्षु यादव, गजनी और रास बिहारी जैसे किरदार सिर्फ फिल्मी रोल नहीं हैं, बल्कि भारतीय सिनेमा की यादगार विरासत का हिस्सा हैं। उनके निधन से परिवार गमगीन है. वो अपने पीछे पत्नी और दो बेटों को रोता-बिलखता छोड़ गए हैं. आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जब भी भारतीय सिनेमा के सबसे दमदार विलेन्स की बात होगी, प्रदीप रावत का नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा।

  • झारखंड : भूख हड़ताल के तीसरे दिन बिगड़ी देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत, बोले- युवाओं को न्याय मिलने तक रहेगा संघर्ष जारी

    झारखंड : भूख हड़ताल के तीसरे दिन बिगड़ी देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत, बोले- युवाओं को न्याय मिलने तक रहेगा संघर्ष जारी


    रांची। झारखंड में JPSC–JSSC भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के विरोध में चल रहा आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। मंगलवार को सत्याग्रह धरना 11वें दिन में पहुंच गया, जबकि अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का तीसरा दिन रहा। आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में युवा, अभिभावक और समर्थक पहुंचकर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में जुटे।

    आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि यह संघर्ष झारखंड के युवाओं के भविष्य और उनके अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संघर्ष और आंदोलन की राह पर चलते हुए वे युवाओं को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन जारी रखेंगे।

    भूख हड़ताल से बिगड़ी तबीयत
    लगातार तीन दिनों से अन्न और पानी का त्याग कर भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ गई है। बताया जा रहा है कि उनका ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर काफी कम हो गया है। इसके अलावा कमजोरी, शरीर में दर्द, थकान और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं भी बढ़ गई हैं। चिकित्सकों की सलाह पर उन्हें स्लाइन चढ़ाई गई है।

    ‘मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा’
    महतो ने कहा कि जब तक राज्य सरकार JPSC–JSSC भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं करती और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया लागू करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों बेरोजगार युवाओं और उनके परिवारों के भविष्य और सम्मान की लड़ाई है।

    श्रद्धांजलि मार्च भी निकाला
    4 अगस्त को पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की पुण्यतिथि के अवसर पर आंदोलनकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और JPSC-JSSC परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के विरोध में श्रद्धांजलि मार्च भी निकाला।

    युवाओं का बढ़ता समर्थन
    आंदोलन स्थल पर लगातार बढ़ रही युवाओं और अभिभावकों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग को लेकर राज्यभर में व्यापक असंतोष और चिंता बनी हुई है।

    JPSC जांच में 14 गिरफ्तार
    उधर, झारखंड CID ने JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान मंगलवार को तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है।