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  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का प्रेरक जीवन सफर: आदिवासी गांव से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की अद्भुत कहानी

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का प्रेरक जीवन सफर: आदिवासी गांव से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की अद्भुत कहानी

    नई दिल्ली । देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 20 जून को अपना 68वां जन्मदिन मनाने जा रही हैं। उनका जीवन संघर्ष, आत्मविश्वास, धैर्य और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा का प्रतीक माना जाता है। ओडिशा के एक छोटे से आदिवासी गांव से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने का उनका सफर भारतीय लोकतंत्र की शक्ति और अवसरों की व्यापकता को दर्शाता है। आज वह न केवल आदिवासी समाज बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में देखी जाती हैं।

    द्रौपदी मुर्मु का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव में एक संथाल आदिवासी परिवार में हुआ था। सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ीं मुर्मु ने शुरुआती शिक्षा गांव में ही प्राप्त की। उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए उन्होंने अनेक सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना किया। वह अपने गांव से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली पहली छात्राओं में शामिल रहीं। उन्होंने भुवनेश्वर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान से राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

    शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन की ओर कदम बढ़ाया। उनका राजनीतिक सफर स्थानीय निकाय स्तर से शुरू हुआ। वर्ष 1997 में उन्होंने नगर पंचायत पार्षद के रूप में राजनीति में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने लगातार जनसेवा के माध्यम से अपनी पहचान मजबूत की। ओडिशा विधानसभा में विधायक के रूप में चुने जाने के बाद उन्होंने राज्य सरकार में विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी संभाली और प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया।

    राजनीतिक उपलब्धियों के साथ-साथ उनका निजी जीवन अत्यंत कठिन परिस्थितियों से गुजरा। कुछ वर्षों के भीतर उन्होंने अपने दोनों बेटों, मां, भाई और पति को खो दिया। लगातार मिले इन व्यक्तिगत आघातों ने उनके जीवन को गहराई से प्रभावित किया। इन परिस्थितियों में सामान्य व्यक्ति टूट सकता था, लेकिन उन्होंने आध्यात्म और आत्मबल के सहारे खुद को संभाला। कठिन समय में उन्होंने मानसिक मजबूती बनाए रखी और समाज सेवा के अपने संकल्प को कमजोर नहीं होने दिया।

    उनकी सार्वजनिक जीवन में सक्रियता और संगठनात्मक क्षमता ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। भाजपा संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने के बाद उन्हें वर्ष 2015 में झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया। इस पद पर पहुंचने वाली वह देश की पहली आदिवासी महिला बनीं। राज्यपाल के रूप में उनके कार्यकाल को संवैधानिक मर्यादा, संतुलित प्रशासन और जनसरोकारों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण के लिए याद किया जाता है।

    इसके बाद वर्ष 2022 में उन्होंने भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में नया अध्याय लिखा, जब उन्हें देश का राष्ट्रपति चुना गया। वह भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति और देश की सबसे युवा राष्ट्रपतियों में से एक बनीं। उनके निर्वाचन को सामाजिक समावेशन, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और वंचित वर्गों की बढ़ती भागीदारी का महत्वपूर्ण प्रतीक माना गया।

    राष्ट्रपति के रूप में द्रौपदी मुर्मु लगातार भारतीय संस्कृति, आदिवासी विरासत, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने पर जोर देती रही हैं। उन्होंने राष्ट्रपति भवन को आम जनता, विशेषकर युवाओं और दिव्यांगजनों के लिए अधिक सुलभ बनाने की दिशा में भी कई पहल की हैं। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि कठिन से कठिन परिस्थितियां भी दृढ़ इच्छाशक्ति, सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास के सामने टिक नहीं सकतीं। यही कारण है कि आज द्रौपदी मुर्मु करोड़ों भारतीयों के लिए संघर्ष से सफलता तक की जीवंत प्रेरणा बन चुकी हैं।

  • राष्ट्रीय कार्यसमिति में शामिल होने के महज 7 दिन बाद ज्योतिप्रिय मलिक का इस्तीफा, TMC के भीतर बढ़ीं राजनीतिक अटकलें

    राष्ट्रीय कार्यसमिति में शामिल होने के महज 7 दिन बाद ज्योतिप्रिय मलिक का इस्तीफा, TMC के भीतर बढ़ीं राजनीतिक अटकलें


    नई दिल्ली ।
    पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय नई हलचल पैदा हो गई जब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने का फैसला कर लिया। यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्हें हाल ही में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति में शामिल किया गया था। राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी मिलने के कुछ ही दिनों बाद संगठनात्मक पदों से दूरी बनाने के उनके फैसले ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

    ज्योतिप्रिय मलिक ने अपने इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य संबंधी कारणों को मुख्य वजह बताया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं और चिकित्सकों ने उन्हें सक्रिय राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में पार्टी संगठन की जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करना उनके लिए संभव नहीं रह गया है।

    मलिक ने बताया कि वे लंबे समय से मधुमेह की बीमारी से जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण उनकी किडनी भी प्रभावित हुई है, जिसके चलते नियमित चिकित्सा निगरानी और उपचार की आवश्यकता बनी हुई है। इसी कारण उन्होंने संगठनात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त होने का निर्णय लिया ताकि स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान दिया जा सके। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका पार्टी से वैचारिक संबंध और निष्ठा पहले की तरह बनी रहेगी।

    पश्चिम बंगाल की राजनीति में ज्योतिप्रिय मलिक का लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है। उन्होंने विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर सक्रिय रहने वाले नेताओं में उनकी पहचान रही है। लंबे समय तक विधायक रहने के साथ-साथ उन्होंने राज्य सरकार में महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारियां भी संभाली थीं।

    पिछले कुछ वर्षों में उनका नाम उस समय व्यापक चर्चा में आया था जब राशन वितरण से जुड़े कथित घोटाले की जांच के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्होंने लंबा समय हिरासत और न्यायिक प्रक्रिया के बीच बिताया। बाद में उन्हें जमानत मिली और वे सक्रिय राजनीति में लौटे। हालांकि जमानत मिलने के बाद उन्हें सरकार में कोई नई प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई थी।

    हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें राजनीतिक झटका भी लगा, जब उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताते हुए राष्ट्रीय कार्यसमिति में स्थान दिया था। यही कारण है कि कार्यसमिति में शामिल होने के कुछ दिनों के भीतर उनका इस्तीफा राजनीतिक विश्लेषकों के लिए चर्चा का विषय बन गया है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मलिक का इस्तीफा फिलहाल स्वास्थ्य कारणों से जुड़ा निर्णय बताया जा रहा है, लेकिन इसका संगठनात्मक और राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिल सकता है। तृणमूल कांग्रेस के लिए यह एक ऐसे नेता का संगठनात्मक स्तर पर पीछे हटना है, जिसने लंबे समय तक पार्टी के विस्तार और चुनावी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई है।

    फिलहाल पार्टी की ओर से इस इस्तीफे को व्यक्तिगत और स्वास्थ्य संबंधी निर्णय के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि ज्योतिप्रिय मलिक संगठनात्मक राजनीति से कितनी दूरी बनाए रखते हैं और भविष्य में उनकी राजनीतिक भूमिका किस दिशा में आगे बढ़ती है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उनके इस कदम पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • विधान परिषद चुनाव में NDA को झटका, कांग्रेस की रणनीति सफल; BJP ने बनाई जांच कमेटी, प्रदेश नेतृत्व दिल्ली तलब

    विधान परिषद चुनाव में NDA को झटका, कांग्रेस की रणनीति सफल; BJP ने बनाई जांच कमेटी, प्रदेश नेतृत्व दिल्ली तलब


    नई दिल्ली ।
    कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। चुनाव के दौरान कथित क्रॉस वोटिंग की घटनाओं ने भारतीय जनता पार्टी के भीतर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं। पार्टी नेतृत्व ने इस मामले को संगठनात्मक अनुशासन और राजनीतिक विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा मानते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद भाजपा ने स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी लाइन से हटकर मतदान करने वाले नेताओं और विधायकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

    कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए अपने सभी उम्मीदवारों को जीत दिलाने में सफलता हासिल की। वहीं भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दल जनता दल (सेक्युलर) को अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके। चुनावी गणित के आधार पर जिस प्रकार के परिणामों की संभावना जताई जा रही थी, उससे अलग तस्वीर सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में क्रॉस वोटिंग की चर्चा तेज हो गई।

    चुनाव परिणामों के विश्लेषण के दौरान यह बात सामने आई कि कुछ विधायकों ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के बजाय अन्य दलों के उम्मीदवारों को समर्थन दिया हो सकता है। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए भाजपा नेतृत्व ने पूरे मामले की आंतरिक जांच कराने का निर्णय लिया है। पार्टी का मानना है कि यदि संगठन के भीतर अनुशासनहीनता या राजनीतिक विश्वासघात की कोई घटना हुई है, तो उसकी पूरी सच्चाई सामने आना आवश्यक है।

    भाजपा द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति को पूरे घटनाक्रम की विस्तार से समीक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। समिति चुनावी मतदान के पैटर्न, विधायकों की भूमिका और संभावित क्रॉस वोटिंग से जुड़े सभी तथ्यों का अध्ययन करेगी। जांच टीम को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं ताकि आवश्यक कार्रवाई पर निर्णय लिया जा सके।

    इस घटनाक्रम के बाद भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने राज्य इकाई से विस्तृत जानकारी मांगी है। इसी क्रम में प्रदेश नेतृत्व और वरिष्ठ पदाधिकारियों को राष्ट्रीय राजधानी बुलाया गया है, जहां चुनावी परिणामों और संगठनात्मक स्थिति पर व्यापक चर्चा की जाएगी। माना जा रहा है कि बैठक में भविष्य की रणनीति और अनुशासनात्मक कदमों पर भी विचार किया जाएगा।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि क्रॉस वोटिंग जैसी घटनाएं केवल चुनावी हार-जीत तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि संगठन की आंतरिक एकजुटता और नेतृत्व की पकड़ को भी प्रभावित करती हैं। ऐसे मामलों में राजनीतिक दल आमतौर पर कड़ा रुख अपनाते हैं ताकि भविष्य में इस प्रकार की परिस्थितियों को रोका जा सके। भाजपा भी इसी दिशा में सक्रिय दिखाई दे रही है।

    प्रदेश भाजपा नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि पार्टी अनुशासन सर्वोपरि है और किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता को स्वीकार नहीं किया जाएगा। पार्टी नेताओं का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी विधायक या पदाधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसके खिलाफ संगठनात्मक नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब केवल चुनावी परिणामों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राज्य की राजनीति और भाजपा संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन गया है। आने वाले दिनों में जांच समिति की रिपोर्ट और पार्टी नेतृत्व के फैसलों पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी रहेगी।

  • अहमदाबाद विमान हादसे पर नया मोड़: पायलट की गलती नहीं, 4 सेकेंड में आई विद्युत विफलता बनी वजह? पायलट संगठन का बड़ा दावा

    अहमदाबाद विमान हादसे पर नया मोड़: पायलट की गलती नहीं, 4 सेकेंड में आई विद्युत विफलता बनी वजह? पायलट संगठन का बड़ा दावा

    नई दिल्ली । अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। दुर्घटना के कारणों पर चल रही जांच के बीच पायलटों के एक प्रमुख संगठन ने आधिकारिक अंतरिम निष्कर्षों पर सवाल उठाते हुए नई तकनीकी जानकारी सामने रखी है। संगठन का दावा है कि उपलब्ध सिम्युलेटर परीक्षण और तकनीकी विश्लेषण इस संभावना की ओर संकेत करते हैं कि दुर्घटना की मुख्य वजह किसी पायलट की जानबूझकर की गई कार्रवाई नहीं, बल्कि विमान में उत्पन्न हुई गंभीर विद्युत प्रणाली की विफलता हो सकती है।

    विमान दुर्घटना के बाद जारी अंतरिम जांच निष्कर्षों में यह संकेत दिया गया था कि इंजन को मिलने वाली ईंधन आपूर्ति बंद होने के कारण विमान की शक्ति प्रणाली प्रभावित हुई और कुछ ही सेकेंड के भीतर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। हालांकि अब पायलट संगठन ने इस निष्कर्ष को चुनौती देते हुए कहा है कि उनके द्वारा कराए गए विस्तृत सिम्युलेटर परीक्षण आधिकारिक घटनाक्रम से मेल नहीं खाते।

    संगठन के अनुसार, दुर्घटना से पहले विमान के वजन, मौसम की स्थिति और अन्य परिचालन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सिम्युलेटर पर कई परीक्षण किए गए। इन परीक्षणों में यह पाया गया कि यदि ईंधन आपूर्ति को मैन्युअल रूप से बंद किया जाए तो बैकअप पावर सिस्टम को सक्रिय होने में आधिकारिक दावे की तुलना में काफी अधिक समय लगता है। संगठन का कहना है कि यह अंतर जांच की दिशा और निष्कर्षों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

    तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी विमान में विद्युत प्रणाली की व्यापक विफलता अनेक अन्य प्रणालियों को भी प्रभावित कर सकती है। यदि उड़ान के महत्वपूर्ण चरण में अचानक बिजली आपूर्ति बाधित हो जाए तो इंजन नियंत्रण, संचार प्रणाली और अन्य सुरक्षा तंत्रों पर इसका असर पड़ सकता है। पायलट संगठन इसी संभावना की ओर संकेत करते हुए कह रहा है कि दुर्घटना की जड़ में कोई बड़ी तकनीकी खराबी हो सकती है, जिसकी गहन जांच आवश्यक है।

    दुर्घटना से जुड़े कुछ विवरणों का हवाला देते हुए संगठन ने यह भी दावा किया कि विमान में उड़ान के अंतिम क्षणों से पहले विद्युत असामान्यताओं के संकेत देखे गए थे। उनके अनुसार, उपलब्ध जानकारी इस बात की ओर इशारा करती है कि विमान में अचानक और व्यापक स्तर पर तकनीकी गड़बड़ी उत्पन्न हुई हो सकती है। यही कारण है कि संगठन ने जांच एजेंसियों से सभी तकनीकी पहलुओं की दोबारा निष्पक्ष समीक्षा करने की मांग की है।

    विमानन क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि किसी भी बड़ी दुर्घटना की जांच में जल्दबाजी से निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होता। आधुनिक विमानों में हजारों तकनीकी पैरामीटर रिकॉर्ड होते हैं और अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए उड़ान डेटा, कॉकपिट रिकॉर्डिंग, रखरखाव इतिहास और तकनीकी परीक्षणों का व्यापक अध्ययन किया जाता है। इसलिए किसी भी वैकल्पिक तकनीकी संभावना को पूरी तरह खारिज करने से पहले उसका परीक्षण आवश्यक माना जाता है।

    इस बीच पायलट संगठन ने संबंधित तकनीकी आंकड़े और परीक्षण परिणाम विमान निर्माता तथा विमानन अधिकारियों को सौंपने का दावा किया है। साथ ही संगठन ने मांग की है कि दुर्घटना की अंतिम रिपोर्ट जारी करने से पहले सभी उपलब्ध साक्ष्यों और विशेषज्ञों की राय का स्वतंत्र मूल्यांकन कराया जाए। उनका कहना है कि पारदर्शी जांच न केवल दुर्घटना के वास्तविक कारणों को सामने लाने के लिए आवश्यक है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण होगी।

    अहमदाबाद विमान हादसे ने देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र को गहराई से प्रभावित किया था। अब जांच के इस नए मोड़ ने तकनीकी विशेषज्ञों, विमानन समुदाय और आम लोगों के बीच दुर्घटना के वास्तविक कारणों को लेकर नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अंतिम निष्कर्ष आने तक इस मामले पर सभी की निगाहें बनी रहेंगी।

  • NEET-UG री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम को बड़ा झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 दिन के प्रतिबंध को दी वैधता; परीक्षा की शुचिता पर सख्त रुख

    NEET-UG री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम को बड़ा झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 दिन के प्रतिबंध को दी वैधता; परीक्षा की शुचिता पर सख्त रुख

    नई दिल्ली । देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET-UG 2026 री-एग्जाम से पहले दिल्ली हाईकोर्ट के एक अहम फैसले ने परीक्षा सुरक्षा को लेकर सरकार की रणनीति को कानूनी मजबूती प्रदान कर दी है। अदालत ने केंद्र सरकार द्वारा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर लगाए गए पांच दिनों के अस्थायी प्रतिबंध को उचित और आवश्यक बताते हुए उसे चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले को परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सार्वजनिक हित और परीक्षा की पवित्रता को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। न्यायालय के अनुसार, यदि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से परीक्षा संबंधी गोपनीय सूचनाओं के प्रसार, पेपर लीक या संगठित नकल की आशंका हो, तो संबंधित एजेंसियों को समय रहते प्रभावी कदम उठाने का अधिकार है। कोर्ट ने माना कि सरकार द्वारा लिया गया निर्णय एक निवारक कार्रवाई थी, जिसका उद्देश्य संभावित अनियमितताओं को रोकना था।

    सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग के कई मामले सामने आए हैं। सरकार का पक्ष था कि कुछ संगठित समूह परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे थे। ऐसे में परीक्षा से ठीक पहले सीमित अवधि के लिए प्रतिबंध लगाना आवश्यक समझा गया ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को रोका जा सके।

    अदालत ने यह भी माना कि संबंधित आदेश विधिक प्रक्रिया के तहत जारी किया गया था और इसमें निर्धारित प्रावधानों का पालन किया गया। न्यायालय ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन जब मामला लाखों छात्रों के भविष्य और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा की विश्वसनीयता से जुड़ा हो, तब नियामक संस्थाओं को आवश्यक कदम उठाने का अधिकार प्राप्त है।

    सुनवाई के दौरान प्लेटफॉर्म की ओर से यह तर्क दिया गया कि पूरे मंच को ब्लॉक करना अत्यधिक कठोर कदम है और केवल संदिग्ध खातों या समूहों पर कार्रवाई की जानी चाहिए थी। हालांकि अदालत इस तर्क से सहमत नहीं हुई। न्यायालय ने कहा कि यदि संबंधित एजेंसियों को व्यापक स्तर पर दुरुपयोग की आशंका दिखाई देती है, तो परिस्थितियों के अनुरूप व्यापक कदम भी उठाए जा सकते हैं। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि प्रतिबंध स्थायी नहीं बल्कि सीमित अवधि के लिए लगाया गया है।

    कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है। हाल के वर्षों में डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग ने परीक्षा संचालन को जहां अधिक सुविधाजनक बनाया है, वहीं साइबर दुरुपयोग और सूचना लीक जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं। ऐसे में प्रशासन और न्यायपालिका दोनों परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने पर विशेष जोर दे रहे हैं।

    इस निर्णय के बाद अब NEET-UG री-एग्जाम की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक एजेंसियां और अधिक सतर्क नजर आ रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और तकनीकी नियंत्रण के जरिए परीक्षा को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए गए हैं। अदालत के फैसले ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि छात्रों के हित और परीक्षा की शुचिता से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

  • कैमरे के सामने छलक पड़े बाघा के आंसू: मां की याद में भावुक हुए तन्मय वेकारिया, शूटिंग बीच में रोकनी पड़ी

    कैमरे के सामने छलक पड़े बाघा के आंसू: मां की याद में भावुक हुए तन्मय वेकारिया, शूटिंग बीच में रोकनी पड़ी


    नई दिल्ली ।
    छोटे पर्दे के सबसे लोकप्रिय और लंबे समय से प्रसारित हो रहे कॉमेडी शो के सेट पर हाल ही में एक ऐसा भावुक क्षण देखने को मिला, जिसने कलाकारों और तकनीकी टीम के सदस्यों को भी भावुक कर दिया। दर्शकों को वर्षों से हंसाने वाले अभिनेता तन्मय वेकारिया, जो अपने चर्चित किरदार ‘बाघा’ के लिए जाने जाते हैं, शूटिंग के दौरान अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख सके और कैमरे के सामने ही रो पड़े। इस अप्रत्याशित घटना के बाद कुछ समय के लिए शूटिंग रोकनी पड़ी।

    बताया जा रहा है कि एक भावनात्मक दृश्य की शूटिंग चल रही थी, जिसमें उनके किरदार से जुड़ा महत्वपूर्ण सीन फिल्माया जा रहा था। जैसे ही कैमरा चालू हुआ और कलाकारों ने अपने संवादों की तैयारी शुरू की, तन्मय वेकारिया अचानक भावुक हो गए। उनकी आंखों से आंसू बहने लगे और वह खुद को संभाल नहीं सके। सेट पर मौजूद कलाकार और क्रू सदस्य पहले तो स्थिति को समझ नहीं पाए, लेकिन जल्द ही स्पष्ट हो गया कि वह अपनी निजी भावनाओं से गुजर रहे हैं।

    उनकी हालत देखकर पूरी यूनिट चिंतित हो गई। शूटिंग को तत्काल रोक दिया गया ताकि अभिनेता को समय और मानसिक सहारा मिल सके। इस दौरान शो से जुड़े वरिष्ठ सदस्यों ने उन्हें संभालने का प्रयास किया और उन्हें भावनात्मक समर्थन दिया। माहौल कुछ समय के लिए पूरी तरह शांत और गंभीर हो गया।

    कुछ देर बाद जब तन्मय वेकारिया सामान्य हुए तो उन्होंने अपनी मां से जुड़ी कई यादों को साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके अभिनय सफर में उनकी मां का योगदान और समर्थन बेहद महत्वपूर्ण रहा है। जब भी उन्हें दर्शकों की सराहना मिलती थी, उनकी मां सबसे अधिक खुश होती थीं। उनकी सफलता और लोकप्रियता को देखकर उनकी मां गर्व महसूस करती थीं और यही बातें उस समय उन्हें बार-बार याद आ रही थीं।

    अभिनेता ने बताया कि परिवार का भावनात्मक साथ किसी भी कलाकार के लिए सबसे बड़ी ताकत होता है। उन्होंने अपनी मां के साथ बिताए गए कई यादगार पलों को याद किया और कहा कि जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। यही वजह रही कि शूटिंग के दौरान अचानक भावनाएं उमड़ पड़ीं और वह खुद को संभाल नहीं पाए।

    यह घटना दर्शाती है कि कलाकार चाहे कितने भी लोकप्रिय क्यों न हों, वे भी सामान्य इंसानों की तरह भावनाओं और यादों से जुड़े रहते हैं। कैमरे के सामने हमेशा मुस्कुराते रहने वाले कलाकारों के जीवन में भी ऐसे क्षण आते हैं, जब निजी भावनाएं पेशेवर जिम्मेदारियों पर भारी पड़ जाती हैं। सेट पर मौजूद लोगों ने भी इस संवेदनशील पल को पूरी समझदारी और संवेदनशीलता के साथ संभाला।

    वर्षों से दर्शकों का मनोरंजन कर रहा यह शो आज भी भारतीय टेलीविजन का एक प्रमुख नाम बना हुआ है। शो के विभिन्न किरदारों ने दर्शकों के दिलों में विशेष स्थान बनाया है और तन्मय वेकारिया का किरदार भी उनमें से एक है। उनकी सरल अभिनय शैली और हास्य प्रस्तुति ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई है।

    हालिया घटना ने उनके व्यक्तित्व का एक भावनात्मक पक्ष सामने लाया है। यह केवल एक कलाकार के आंसुओं की कहानी नहीं, बल्कि उन यादों और रिश्तों की झलक है जो जीवन भर इंसान के साथ बने रहते हैं। दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान लाने वाले अभिनेता का यह भावुक रूप लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ने का काम कर रहा है।

  • दिल्ली में बड़ा खुलासा बच्चे खरीद-बिक्री रैकेट का पर्दाफाश, 5 नवजात बरामद, अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े तार

    दिल्ली में बड़ा खुलासा बच्चे खरीद-बिक्री रैकेट का पर्दाफाश, 5 नवजात बरामद, अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े तार

    नई द‍िल्‍ली । देश की राजधानी दिल्ली में एक सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ है, जहां पुलिस ने नवजात बच्चों की तस्करी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में अस्पताल की संचालिका सहित कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पुलिस ने पांच नवजात शिशुओं को सुरक्षित बरामद कर आश्रय गृह भेज दिया है। यह गिरोह पिछले लंबे समय से कई राज्यों में सक्रिय था और अब तक करीब 30 बच्चों की खरीद-फरोख्त कर चुका है।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करता था। आरोपी राजस्थान और गुजरात के गरीब परिवारों को लालच देकर उनसे नवजात बच्चों को मात्र 10 से 15 हजार रुपये में खरीद लेते थे। इसके बाद इन्हीं बच्चों को बेऔलाद दंपतियों को 5 से 10 लाख रुपये तक में बेच दिया जाता था। इस पूरे रैकेट में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात तक के नेटवर्क जुड़े हुए थे।

    मामले का खुलासा तब हुआ जब जून के पहले सप्ताह में दिल्ली के पहाड़गंज इलाके से पुलिस को सूचना मिली कि एक महिला अलग-अलग बच्चों के साथ संदिग्ध रूप से घूम रही है। पुलिस ने एक नकली ग्राहक बनाकर महिला से संपर्क किया। सौदा तय होने और 20 हजार रुपये की टोकन मनी दिए जाने के बाद जब आरोपियों ने नवजात को सौंपा, तभी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ज्योति उर्फ कमलेश को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसी दिन उसकी साथी शालू और ललित को भी हिरासत में ले लिया गया।

    पूछताछ के दौरान इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलती गईं और जांच बेगमपुर स्थित एक निजी अस्पताल तक पहुंची। पुलिस ने छापा मारकर अस्पताल की संचालिका डॉ. विवेकी को भी गिरफ्तार किया, जो इस गिरोह की कथित मास्टरमाइंड बताई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया कि इस रैकेट में लैब टेक्निशियन और वाहन चालक की भूमिका भी अहम थी, जो बच्चों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने और दस्तावेज तैयार करने में मदद करते थे।

    गिरोह का संचालन कई स्तरों पर किया जाता था। राजस्थान और गुजरात से बच्चों की व्यवस्था साएबा भाई घमर उर्फ कालिया करता था, जिन्हें कार चालक विपिन दिल्ली तक पहुंचाता था। इसके बाद अस्पताल में ही फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार किए जाते थे ताकि बच्चों को कानूनी रूप से गोद लेने जैसा दिखाया जा सके। इस नेटवर्क में लड़कियों की कीमत 4 से 5 लाख रुपये और लड़कों की कीमत 8 से 10 लाख रुपये तक तय थी।

    पुलिस ने आगे की कार्रवाई में ग्वालियर और पानीपत से भी कई खरीदारों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने लाखों रुपये देकर नवजात खरीदे थे। जांच में यह भी सामने आया है कि बरामद पांच बच्चों में से चार आदिवासी समुदाय से हैं, जबकि एक बच्चा दिल्ली का बताया जा रहा है। सभी बच्चों की उम्र 27 दिन से लेकर चार महीने के बीच है।

    फिलहाल पुलिस बच्चों के जैविक माता-पिता की पहचान में जुटी है और पुष्टि के बाद उन्हें उनके असली परिवारों को सौंपा जाएगा। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि कैसे संगठित अपराध गरीब और असहाय वर्ग को निशाना बनाकर मानव तस्करी जैसे जघन्य अपराध को अंजाम देते हैं।

  • NEET-UG री-एग्जाम के लिए NTA का सख्त एक्शन प्लान, बायोमेट्रिक जांच, ड्रेस कोड और सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य

    NEET-UG री-एग्जाम के लिए NTA का सख्त एक्शन प्लान, बायोमेट्रिक जांच, ड्रेस कोड और सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) 2026 की पुनर्परीक्षा को लेकर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। परीक्षा की पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस बार कई प्रक्रियाओं को और अधिक सख्त बनाया गया है। एजेंसी ने उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचने, निर्धारित नियमों का पालन करने और सुरक्षा जांच में पूर्ण सहयोग करने की सलाह दी है।

    पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है और इसके लिए देशभर के परीक्षा केंद्रों पर विशेष प्रबंध किए गए हैं। एजेंसी के अनुसार प्रत्येक अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पहले अनिवार्य सुरक्षा जांच और बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना होगा। यह व्यवस्था परीक्षा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े की संभावना को रोकने के उद्देश्य से लागू की गई है।

    एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया परीक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी, लेकिन यदि किसी तकनीकी समस्या, मशीन में खराबी, नेटवर्क संबंधी दिक्कत या शारीरिक कारणों से किसी अभ्यर्थी का बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा नहीं हो पाता है तो उसे परीक्षा देने से नहीं रोका जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित उम्मीदवार को निर्धारित घोषणा पत्र भरना होगा और बाद में प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

    परीक्षा संचालन से जुड़े अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान किसी अभ्यर्थी को अनावश्यक परेशानी न हो। एजेंसी का मानना है कि सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ताकि योग्य उम्मीदवार किसी तकनीकी कारण से परीक्षा से वंचित न रह जाएं।

    ड्रेस कोड को लेकर भी विस्तृत सलाह जारी की गई है। अभ्यर्थियों को हल्के और आरामदायक कपड़े पहनकर परीक्षा केंद्र पहुंचने की सलाह दी गई है। गर्मी और मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसे वस्त्र पहनने को कहा गया है जिनकी जांच आसानी से की जा सके। यदि कोई उम्मीदवार पूर्ण बाजू वाले कपड़े या अतिरिक्त परिधान पहनता है, तो उसे समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचना होगा ताकि सुरक्षा जांच प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके।

    धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का सम्मान करते हुए कुछ विशेष वस्त्रों और प्रतीकों को अनुमति दी गई है। हालांकि ऐसे अभ्यर्थियों को अतिरिक्त सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ सकता है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि सभी व्यवस्थाएं सुरक्षा मानकों के अनुरूप लागू की जाएंगी और किसी भी उम्मीदवार के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।

    परीक्षा केंद्र में ले जाने वाली वस्तुओं को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उम्मीदवार केवल पारदर्शी पानी की बोतल और निर्धारित प्रारूप में रखे प्रवेश पत्र को ही अपने साथ ले जा सकेंगे। मोबाइल फोन, स्मार्ट घड़ी, ब्लूटूथ डिवाइस, ईयरफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। इसके अलावा धातु से बनी भारी वस्तुएं, बड़े आभूषण और अन्य संदिग्ध सामग्री भी केंद्र में ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

    फुटवियर को लेकर भी विशेष सलाह दी गई है। अभ्यर्थियों को साधारण चप्पल या कम ऊंचाई वाले फुटवियर पहनने की सलाह दी गई है। ऊंची एड़ी वाले जूते या जटिल डिजाइन वाले फुटवियर की अतिरिक्त जांच की जा सकती है, जिससे प्रवेश प्रक्रिया में समय अधिक लग सकता है।

    परीक्षा निर्धारित समयानुसार दोपहर 2 बजे शुरू होकर शाम 5 बजकर 15 मिनट तक चलेगी। विशेष श्रेणी के पात्र अभ्यर्थियों को नियमानुसार अतिरिक्त समय भी उपलब्ध कराया जाएगा। एजेंसी ने सभी उम्मीदवारों से अपील की है कि वे अंतिम समय की जल्दबाजी से बचें और परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से पहले पहुंचकर सभी औपचारिकताएं पूरी कर लें।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया घटनाक्रमों और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर बढ़ी संवेदनशीलता के बीच यह व्यवस्था परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। सख्त सुरक्षा, तकनीकी निगरानी और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के माध्यम से परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

  • राज्यसभा चुनाव में NDA का दबदबा, 27 में 19 सीटें जीतकर ऊपरी सदन में बढ़ाई ताकत; INDIA गठबंधन को बड़ा राजनीतिक झटका

    राज्यसभा चुनाव में NDA का दबदबा, 27 में 19 सीटें जीतकर ऊपरी सदन में बढ़ाई ताकत; INDIA गठबंधन को बड़ा राजनीतिक झटका


    नई दिल्ली ।
    10 राज्यों की 27 राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों ने देश की संसदीय राजनीति में नया समीकरण खड़ा कर दिया है। चुनाव परिणामों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए 19 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि विपक्षी INDIA गठबंधन को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। इन नतीजों ने संसद के उच्च सदन में सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति को और अधिक मजबूत कर दिया है।

    राज्यसभा चुनाव के परिणामों को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इनके जरिए आगामी विधायी और राजनीतिक रणनीतियों की दिशा तय होने की संभावना है। चुनाव परिणामों के बाद 245 सदस्यीय राज्यसभा में NDA की संख्या बढ़कर 152 तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा गठबंधन को पहले की तुलना में अधिक प्रभावशाली स्थिति प्रदान करता है और महत्वपूर्ण विधेयकों पर उसकी रणनीतिक क्षमता को मजबूत बनाता है।

    विपक्षी INDIA गठबंधन को इस चुनाव में केवल पांच सीटों पर सफलता मिली। चुनाव से पहले विपक्ष को कुछ राज्यों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन अंतिम परिणाम उसके पक्ष में नहीं रहे। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम विपक्षी एकजुटता और चुनावी प्रबंधन के लिए एक चुनौती के रूप में देखा जाएगा।

    चुनाव के सबसे चर्चित परिणामों में झारखंड का नाम प्रमुखता से सामने आया। यहां राज्यसभा की दोनों सीटों पर मुकाबला राजनीतिक हलकों में विशेष चर्चा का विषय बना रहा। एक सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की, जबकि दूसरी सीट पर NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार ने विपक्षी खेमे को बड़ा झटका देते हुए विजय हासिल की। इस परिणाम ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दिया है और विपक्षी दलों के भीतर भी रणनीतिक समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है।

    झारखंड का परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विधानसभा में संख्याबल को देखते हुए विपक्षी गठबंधन को बेहतर स्थिति में माना जा रहा था। इसके बावजूद चुनावी गणित और समर्थन जुटाने की रणनीति ने अंतिम परिणाम को प्रभावित किया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस जीत ने यह संकेत दिया है कि राज्यसभा चुनावों में केवल संख्याबल ही नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रबंधन भी निर्णायक भूमिका निभाता है।

    मध्य प्रदेश में भी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला। यहां संभावित मुकाबले की चर्चा के बीच विपक्षी उम्मीदवार की उम्मीदवारी निरस्त हो जाने के बाद एक सीट पर सत्तारूढ़ दल को निर्विरोध लाभ मिला। इससे NDA के कुल प्रदर्शन को अतिरिक्त मजबूती मिली और राज्यसभा में उसकी संख्या बढ़ाने में सहायता मिली।

    चुनाव परिणामों के बाद अब राजनीतिक चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि उच्च सदन में सत्तारूढ़ गठबंधन की बढ़ती ताकत का असर आगामी संसदीय सत्रों पर किस प्रकार पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि NDA को कुछ क्षेत्रीय और तटस्थ दलों का समर्थन मिलता रहा तो कई महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत प्रस्तावों को पारित कराने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान हो सकती है।

    राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आगामी राष्ट्रीय राजनीति के संकेत भी देता है। राज्यसभा में मजबूत स्थिति किसी भी सरकार के लिए विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में हालिया परिणामों को सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए रणनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है।

    विश्लेषकों का मानना है कि इन नतीजों के बाद विपक्षी दलों को अपने संगठनात्मक ढांचे, समन्वय और चुनावी रणनीति पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है। वहीं NDA के लिए यह परिणाम राजनीतिक आत्मविश्वास बढ़ाने वाला साबित हुआ है, जिसने उच्च सदन में उसकी स्थिति को पहले से अधिक मजबूत कर दिया है।

  • एक्सेंचर के कमजोर आउटलुक से आईटी सेक्टर में मची भारी बिकवाली, निफ्टी आईटी 6 प्रतिशत से अधिक टूटा, इंफोसिस-टीसीएस समेत दिग्गज शेयरों में बड़ी गिरा

    एक्सेंचर के कमजोर आउटलुक से आईटी सेक्टर में मची भारी बिकवाली, निफ्टी आईटी 6 प्रतिशत से अधिक टूटा, इंफोसिस-टीसीएस समेत दिग्गज शेयरों में बड़ी गिरा


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र से आई कमजोर संकेतों ने भारतीय शेयर बाजार के आईटी सेक्टर को बड़ा झटका दिया है। दुनिया की प्रमुख टेक्नोलॉजी और कंसल्टिंग कंपनियों में शामिल एक्सेंचर द्वारा अपने वित्त वर्ष 2026 के राजस्व वृद्धि अनुमान में कटौती किए जाने के बाद भारतीय आईटी शेयरों में व्यापक बिकवाली देखने को मिली। इसके परिणामस्वरूप निफ्टी आईटी इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 6 प्रतिशत से अधिक टूट गया और पूरे बाजार में नकारात्मक माहौल बन गया।

    शुक्रवार के कारोबार में आईटी सेक्टर सबसे अधिक दबाव में रहा। निवेशकों ने वैश्विक तकनीकी खर्च में संभावित सुस्ती और कॉरपोरेट ग्राहकों द्वारा खर्च कम किए जाने की आशंकाओं के चलते आईटी शेयरों से दूरी बनानी शुरू कर दी। इसका सीधा असर भारतीय टेक कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया, जिनमें दिनभर भारी उतार-चढ़ाव और गिरावट दर्ज की गई।

    बाजार खुलने के कुछ ही समय बाद निफ्टी आईटी इंडेक्स 1,800 अंकों से अधिक फिसलकर अपने दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार देखने को मिला, लेकिन इंडेक्स फिर भी भारी नुकसान के साथ कारोबार करता रहा। यह गिरावट इस बात का संकेत मानी जा रही है कि वैश्विक मांग को लेकर निवेशकों की चिंता अभी समाप्त नहीं हुई है।

    आईटी कंपनियों में सबसे अधिक दबाव इंफोसिस के शेयरों पर दिखाई दिया, जिनमें तेज गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक जैसे बड़े नाम भी बिकवाली की चपेट में रहे। मिडकैप आईटी कंपनियां भी इस दबाव से अछूती नहीं रहीं। पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, एलटीआईमाइंडट्री, कोफोर्ज, केपीआईटी टेक्नोलॉजीज, टाटा एल्क्सी और एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज जैसे शेयरों में भी उल्लेखनीय कमजोरी देखने को मिली।

    विश्लेषकों का मानना है कि इस गिरावट की प्रमुख वजह एक्सेंचर का संशोधित आउटलुक है। कंपनी ने तीसरी तिमाही में मजबूत राजस्व दर्ज किया, लेकिन ग्राहकों के खर्च को लेकर बनी अनिश्चितता और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के प्रभाव को देखते हुए पूरे वर्ष के लिए विकास अनुमान कम कर दिया। इसके अलावा कंपनी की नई बुकिंग्स में भी पिछले वर्ष की तुलना में कमी दर्ज की गई, जिसने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया।

    भारतीय आईटी कंपनियों की अमेरिकी डिपॉजिटरी रसीदों में भी कमजोरी देखने को मिली, जिससे घरेलू बाजार में नकारात्मक धारणा और मजबूत हुई। विदेशी बाजारों में आई इस गिरावट का असर भारतीय निवेशकों की रणनीति पर भी पड़ा और उन्होंने आईटी शेयरों में मुनाफावसूली तथा बिकवाली को प्राथमिकता दी।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में आईटी क्षेत्र को लेकर सतर्क दृष्टिकोण बनाए रखना आवश्यक है। हालांकि हालिया गिरावट के बाद कई कंपनियों के मूल्यांकन आकर्षक स्तरों पर पहुंचने लगे हैं, लेकिन यदि आने वाली तिमाहियों में आय वृद्धि के अनुमान और कमजोर होते हैं तो इस सेक्टर पर दबाव लंबे समय तक बना रह सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय आईटी कंपनियों का मूल्यांकन अभी भी कई वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में ऊंचा माना जाता है। ऐसे में निवेशक भविष्य की आय, ऑर्डर बुक और वैश्विक मांग के संकेतों पर विशेष नजर बनाए हुए हैं। आगामी तिमाहियों के कारोबारी प्रदर्शन और प्रबंधन की टिप्पणियां इस क्षेत्र की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    आईटी सेक्टर में आई इस बड़ी गिरावट का असर व्यापक बाजार पर भी दिखाई दिया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में रहे तथा निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कमजोर होती नजर आई। ऐसे माहौल में बाजार की निगाहें अब वैश्विक आर्थिक संकेतकों, ब्याज दरों की दिशा और तकनीकी सेवाओं की मांग में संभावित सुधार पर टिकी हुई हैं।