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  • सबरीमाला केस में SC को अहम टिप्पणी, पूछा- भक्त के छूने से अपवित्र कैसे हो सकते हैं देवता या मूर्ति,,,

    सबरीमाला केस में SC को अहम टिप्पणी, पूछा- भक्त के छूने से अपवित्र कैसे हो सकते हैं देवता या मूर्ति,,,


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की संविधान पीठ ने मंगलवार को सबरीमाला मामले (Sabarimala case) में सुनवाई की। पीठ ने सवाल किया कि कोई भक्त जो मंदिर में मौजूदा देवता को अपना मूल रचियता मानता है, उसके स्पर्श मात्र से मूर्ति या देवता अपवित्र कैसे हो सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant) की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय पीठ ने ये सवाल सबरीमाला मंदिर के मुख्य तांत्री (पुजारी) की दलीलों को सुनने के बाद किया।


    पुजारी की दलील

    पुजारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी गिरि ने छठे दिन की बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि अनुच्छेद 25 के तहत किसी श्रद्धालु का पूजा स्थल में प्रवेश करने का अधिकार, उस देवता की विशेषताओं के अनुरूप होना चाहिए। कहा कि जब कोई भक्त पूजा के लिए मंदिर जाता है, तो वह देवता की विशेषताओं के उलट नहीं हो सकता। अदालत ने सवाल किया कि मंदिर में यदि किसी भक्त को सिर्फ उसके जन्म, वंश या किसी अन्य स्थिति के आधार पर मूर्ति स्पर्श से रोका जाए, तो क्या संविधान मूकदर्शक बना रहेगा?

    पीठ सबरीमाला सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई कर रही है। सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी ने ही 2018 के उस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार अर्जी दी है, जिसमें महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी गई।


    ‘भक्त के लिए संविधान को ही आगे आना होगा’

    सबरीमाला मंदिर से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए नौ जजों की संविधान पीठ में शामिल जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह ने मुख्य पुजारी से पूछा कि जब किसी भक्त को सिर्फ उसके जन्म, वंश के आधार पर देवता को छूने से रोका जाए, तो क्या तब संविधान दखल दे सकता है? उन्होंने पूछा कि श्रद्धालु की सहायता के लिए कौन आगे आएगा, जिसे देवी-देवता को स्पर्श करने की अनुमति नहीं है। इस स्थिति में अदालत की क्या भूमिका होगी? इसके बार उन्होंने स्वयं इन प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि यह कार्य संविधान को ही करना होगा।


    रीति-रिवाज की प्रकृति धर्म का एक अभिन्न अंग

    सुनवाई के दौरान सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि ने पीठ से कहा कि किसी भी मंदिर में होने वाले समारोह और रीति-रिवाज की प्रकृति धर्म का एक अभिन्न अंग है। इसलिए यह एक धार्मिक प्रथा है। ऐसी प्रथा को जारी रखना, जो कि एक जरूरी धार्मिक प्रथा है, पूजा के अधिकार का ही हिस्सा होगा। अधिवक्ता ने कहा कि अनुच्छेद- 25 के तहत पूजा का अधिकार केवल वही व्यक्ति मांग सकता है, जिसका उस देवता में विश्वास हो, जिसमें देवता की विशिष्ट विशेषताएं भी शामिल हों।

    उन्होंने कहा कोई भी व्यक्ति जो मंदिर की मूर्ति में विश्वास रखता है और देवता को अपना ईश्वर मानता है, वह मंदिर की मूल विशेषताओं के विपरीत कोई कार्य नहीं करेगा, क्योंकि ऐसी प्रथा को उसके धर्म की प्रथा का हिस्सा नहीं माना जा सकता। अधिवक्ता गिरी ने कहा कि अनुच्छेद 25(1) के तहत मेरा अधिकार जहां तक पूजा स्थल में प्रवेश का अधिकार शामिल है, उसे मंदिरों द्वारा की जाने वाली प्रथाओं- देवता की विशेषताओं के अनुरूप ही होना होगा।


    ‘रचयिता और उसकी रचना के बीच फर्क नहीं’

    अधिवक्ता गिरि के तर्क पर जस्टिस अमनुल्लाह ने सवाल किया कि जब मैं किसी मंदिर में जाता हूं, तो मेरा मूल विश्वास यह होता है कि वह भगवान हैं, वह मेरे रचयिता हैं। उन्होंने ही मुझे बनाया है। है ना? मैं वहां सौ फीसदी विश्वास के साथ जाता हूं और पूरी तरह समर्पित होता हूं। मेरे दिल में जरा भी अशुद्धि नहीं होती और वहां, मुझसे कहा जाता है कि विभिन्न वजहों से मुझे हमेशा के लिए देवता को छूने की इजाजत नहीं है।


    धार्मिक प्रथाएं पूरी तरह से न्यायिक समीक्षा से बाहर?

    संविधान पीठ ने कहा कि यह बात स्वीकार करना मुश्किल है कि धार्मिक प्रथाएं पूरी तरह से न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर हैं। पीठ ने सवाल किया कि सामाजिक सुधार के नाम पर ऐसी प्रथाओं पर रोक लगाने वाले कानूनों की जांच और कौन करेगा? सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि ‘हम धार्मिक मामलों में न्यायिक समीक्षा की सीमाओं से अवगत है और इसके लिए विस्तृत दलीलों की कोई आवश्यकता नहीं है।

  • चारधाम यात्राः इंतजार की घड़ियां खत्म…. भक्तों के लिए खुले केदारनाथ धाम के पट

    चारधाम यात्राः इंतजार की घड़ियां खत्म…. भक्तों के लिए खुले केदारनाथ धाम के पट


    देहरादून।
    इंतजार की घड़ियां अब खत्म हो चुकी है। आज 22 अप्रैल 2026 को सुबह केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) के कपाट खोल दिए गए हैं। भगवान शिव (Lord Shiva.) के भक्तों के लिए आज का दिन बेहद ही खास है। मंदिर के द्वार खुलने से पहले ही धाम में भक्ति का माहौल बन गया। वहीं बीती शाम ही यहां पर ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर से बाबा केदार की चल विग्रह डोली पहुंचीं। बता दें कि ये परंपरा सदियों से चली आ रही है। हर साल 6 महीने के लिए बाबा केदार की इस डोली को ठंडी के दिनों में केदारनाथ धाम से ऊखीमठ ले जाया जाता है। मौसम सही होते ही इस डोली को वापस केदारनाथ लाया जाता है।

    आज सुबह से ही केदारनाथ में हर हर महादेव के जयकारों से साथ हजारों भक्त पहुंचते रहें। बता दें कि ये सिर्फ एक मंदिर या ज्योतिर्लिंग नहीं है बल्कि आस्था और विश्वास का अटूट केंद्र है। इसी वजह से केदारनाथ मंदिर का कपाट खुलना भक्तों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। आइए जानते हैं कि इस मंदिर से जुड़ी जानकारियां-


    इतने बजे खुले केदारनाथ मंदिर के कपाट

    आज सुबह 8 बजे शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रों और पूरे विधि-विधान के साथ बाबा केदारनाथ मंदिर के कपाट खोल दिए गए हैं। कपाट खुलने के खास मौके पर मंदिर को कई क्विंटल फूलों से बहुत ही सुंदर तरीके से सजाया गया जिससे इसकी भव्यता देखते ही बन रही है। कपाट खुलने के साथ ही मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं।


    भोग 25 अप्रैल से शुरू

    केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने के पहले दिन मंदिर में खास पूजा और आरती की गई। वहीं परंपरा के अनुसार नियमित भोग और पूरी तरह से तय दिनचर्या वाली पूजा 25 अप्रैल से शुरू होगी। यानी शुरुआती कुछ दिनों में यहां विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। इसके बाद रोज की पूजा सामान्य तरीके से होती है।


    केदारनाथ से पहले किनके दर्शन करना जरूरी?

    मान्यता है कि केदारनाथ जाने से पहले भगवान भैरवनाथ के दर्शन करना जरूरी है। भैरवनाथ मंदिर केदारनाथ धाम के पास ही ऊंचाई पर स्थित है। कहा जाता है कि जब सर्दियों में केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं तब भैरवनाथ ही पूरे धाम की रक्षा करते हैं। उन्हें यहां का क्षेत्रपाल भी कहा जाता है। ऐसे में लोग केदारनाथ के दर्शन करने से पहले भैरवनाथ मंदिर में ही मत्था टेकते हैं। ऐसा माना जाता है कि भैरवनाथ के दर्शन के बिना केदारनाथ यात्रा अधूरी है। लोगों का मानना है कि भैरवनाथ मंदिर में दर्शन करने से केदारनाथ यात्रा सफल और सुरक्षित होती है।

    केदारनाथ मंदिर को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां पर मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। ऐसे में यहां दर्शन करना बहुत ही शुभ माना जाता है। कपाट खुलते ही देश-विदेश से तमाम श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।


    कब खुलेंगे बद्रीनाथ के कपाट

    केदारनाथ के बाद अब सबकी नजरें भगवान विष्णु के पवित्र धाम बद्रीनाथ पर हैं। बद्रीनाथ धाम के कपाट कल यानी 23 अप्रैल 2026 को खुलेंगे। कपाट के खुलने का समय सुबह 6:15 बजे है। बता दें कि ये चारधाम यात्रा का सबसे अहम पड़ाव है। बद्रीनाथ को धरती का बैकुंठ यानी भगवान विष्णु का निवास स्थान कहा जाता है।

  • MP समेत पूरा उत्तर-पश्चिम भारत इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में… इन राज्यों में हीटवेव का अलर्ट

    MP समेत पूरा उत्तर-पश्चिम भारत इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में… इन राज्यों में हीटवेव का अलर्ट


    भोपाल।
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 22 अप्रैल को देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज अलग-अलग रहेगा। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत (North-west and central India.) में भीषण गर्मी और लू (Extreme heat and heat wave.) का असर जारी रहेगा। पूर्वोत्तर, दक्षिण और कुछ पश्चिमी हिस्सों में बारिश व आंधी-तूफान की गतिविधियां देखने को मिलेंगी। पहले बात उत्तर-पश्चिम भारत की करें तो राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में गर्मी का प्रकोप बना रहेगा। इन इलाकों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तक जा सकता है और लू चलने की संभावना है।

    IMD के अनुसार, खासतौर पर पश्चिमी राजस्थान (Western Rajasthan.) और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में आज भी हीटवेव की स्थिति बनी रह सकती है। लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 24 घंटों के दौरान भी लगभग पूरे उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी पड़ने और लू चलने का अनुमान है। राजधानी लखनऊ में दिन का तापमान लगभग 42 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है, जबकि रात का तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रहने का अनुमान है।


    मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ में गर्मी, कुछ इलाकों में बारिश

    मध्य भारत यानी मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh), छत्तीसगढ़ और विदर्भ क्षेत्र में भी मौसम काफी गर्म रहेगा। यहां तापमान में और बढ़ोतरी के संकेत हैं। कई जगहों पर लू जैसी स्थिति बन सकती है। कुछ इलाकों में हल्की बारिश या बादल छाने से थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन यह राहत अस्थायी होगी और कुल मिलाकर गर्मी का असर बना रहेगा। वहीं, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मौसम का मिजाज थोड़ा अलग रहेगा। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों (जैसे- असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश) में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। इससे तापमान में कुछ गिरावट आ सकती है और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि आंधी-तूफान और बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा।


    असम में भारी बारिश जारी रहने की संभावना

    अधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, असम में भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने भूस्खलन प्रभावित पहाड़ी क्षेत्रों के निवासियों को सतर्क रहने और जान-माल की हानि से बचने के लिए सावधानियां बरतने के लिए कहा है। इसमें कहा गया कि आने वाले दिनों में छिटपुट बारिश और आंधी चलने की संभावना है। सभी एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया गया है। वहीं, दक्षिण भारत और तटीय इलाकों की बात करें तो केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में गर्म और उमस भरा मौसम रहेगा। इसके साथ ही कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। महाराष्ट्र और पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों में भी 22 अप्रैल को हल्की बारिश और आंधी की संभावना है, जिससे अस्थायी राहत मिलेगी लेकिन उमस बनी रहेगी।

  • छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में भर्ती का बड़ा अवसर डेटा एंट्री ऑपरेटर के 38 पदों पर आवेदन शुरू, 12 मई तक मौका

    छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में भर्ती का बड़ा अवसर डेटा एंट्री ऑपरेटर के 38 पदों पर आवेदन शुरू, 12 मई तक मौका


    नई दिल्ली। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट, बिलासपुर ने डेटा एंट्री ऑपरेटर के पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 38 पदों को भरा जाएगा, जिसमें विभिन्न श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण के अनुसार अवसर निर्धारित किए गए हैं। इस घोषणा के बाद राज्यभर में योग्य अभ्यर्थियों के बीच आवेदन को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है।

    इस भर्ती में कुल 38 पद शामिल हैं, जिनमें अनारक्षित वर्ग के लिए 19 पद, अनुसूचित जाति के लिए 7 पद, अनुसूचित जनजाति के लिए 7 पद और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 5 पद निर्धारित किए गए हैं। यह भर्ती विशेष रूप से महिला उम्मीदवारों के लिए भी एक अच्छा अवसर मानी जा रही है, क्योंकि इससे उन्हें न्यायिक क्षेत्र में रोजगार का अवसर प्राप्त होगा।

    ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 20 अप्रैल से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 12 मई तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम समय सीमा शाम 5 बजे तय की गई है। इसके साथ ही जिन उम्मीदवारों से आवेदन भरते समय कोई गलती हो जाती है, उनके लिए सुधार का अवसर भी प्रदान किया गया है, जो 13 मई से 15 मई तक उपलब्ध रहेगा। इस व्यवस्था से अभ्यर्थियों को अपने आवेदन को सही करने का अतिरिक्त समय मिलेगा।

    इस पद के लिए शैक्षणिक योग्यता के रूप में उम्मीदवार के पास कंप्यूटर साइंस या संबंधित विषय में न्यूनतम द्वितीय श्रेणी के साथ स्नातक डिग्री होना आवश्यक है। इसके अलावा पीजीडीसीए या डीओई से ओ लेवल कोर्स करने वाले उम्मीदवार भी पात्र होंगे। साथ ही ऑपरेटिंग सिस्टम और ऑफिस एप्लिकेशन का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य है। हिंदी और अंग्रेजी टाइपिंग में दक्ष उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी।

    आयु सीमा के अनुसार आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 30 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 1 जनवरी के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी, जिससे अधिक से अधिक अभ्यर्थी इस अवसर का लाभ उठा सकें।

    चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी, जिसमें लिखित परीक्षा, कौशल परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन शामिल हैं। इन सभी चरणों में प्रदर्शन के आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को आकर्षक वेतनमान प्रदान किया जाएगा, जो लगभग ₹25,300 से ₹80,500 प्रतिमाह तक रहेगा। यह वेतन इस पद को और अधिक आकर्षक बनाता है।

    लिखित परीक्षा के आयोजन की संभावित तिथि 28 जून निर्धारित की गई है, जो सुबह 10 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक आयोजित होने की संभावना है। परीक्षा का आयोजन बिलासपुर और रायपुर में किया जा सकता है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों के उम्मीदवारों को सुविधा मिल सके।

    आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से की जा रही है। उम्मीदवारों को आवेदन करने के लिए संबंधित पोर्टल पर जाकर पहले रजिस्ट्रेशन करना होगा, फिर लॉगिन करके आवेदन फॉर्म भरना होगा। सभी आवश्यक दस्तावेज सही प्रारूप में अपलोड करने के बाद फॉर्म को ध्यानपूर्वक जांचकर सबमिट करना होगा। अंत में आवेदन पत्र की एक प्रति भविष्य के उपयोग के लिए सुरक्षित रखना जरूरी है।

  • NCP प्रमुख शरद पवार की तबीयत पर अपडेट, डॉक्टरों की निगरानी में हालत स्थिर..

    NCP प्रमुख शरद पवार की तबीयत पर अपडेट, डॉक्टरों की निगरानी में हालत स्थिर..


    नई दिल्ली
    /मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख और वरिष्ठ नेता शरद पवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच और मेडिकल फॉलो-अप के लिए अस्पताल में लाया गया है। डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है और उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
    अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार यह भर्ती किसी आपात स्थिति के कारण नहीं है बल्कि यह उनके नियमित स्वास्थ्य परीक्षण का हिस्सा है। उनकी उम्र को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर इस तरह की जांच की जाती है ताकि स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा सके।

    पिछले कुछ समय से शरद पवार के स्वास्थ्य को लेकर हल्की चिंताएं सामने आती रही हैं। इससे पहले भी वे अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं और कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उनका इलाज हुआ था। इनमें सांस लेने में हल्की परेशानी और शरीर में कमजोरी जैसी स्थितियां शामिल रही हैं।

    डॉक्टरों की सलाह के अनुसार उन्हें आराम करने और अपनी दिनचर्या में संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता बताई गई है ताकि किसी भी प्रकार का अतिरिक्त दबाव उनकी सेहत पर न पड़े। इसके बावजूद वे राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय बने हुए हैं और लगातार विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखते हैं।

    हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति भी चर्चा में रही थी, जहां उनकी शारीरिक स्थिति को लेकर लोगों की नजरें उन पर टिकी थीं। इसके बाद से ही उनकी सेहत को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई थी।

    इस बीच उनके समर्थकों और राजनीतिक सहयोगियों ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार उनकी स्थिति नियंत्रण में है और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं।

  • खड़गे के बयान से सियासी भूचाल मोदी को बताया ‘आतंकवादी’ भाजपा ने EC से की सख्त कार्रवाई की मांग

    खड़गे के बयान से सियासी भूचाल मोदी को बताया ‘आतंकवादी’ भाजपा ने EC से की सख्त कार्रवाई की मांग


    नई दिल्ली। तमिलनाडु में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान ने देश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ में तीखी टिप्पणी करते हुए एक शब्द का प्रयोग किया, जिसे लेकर राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया है। इस बयान के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है और मामला अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है।

    भाजपा नेताओं ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि देश के प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद के लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग न केवल आपत्तिजनक है बल्कि यह राजनीतिक संस्कृति को भी नुकसान पहुंचाता है। भाजपा का कहना है कि चुनावी माहौल में इस तरह की टिप्पणियां जनता को गुमराह करने और माहौल को बिगाड़ने का काम करती हैं।

    इस मामले को लेकर भाजपा ने औपचारिक रूप से चुनाव आयोग से शिकायत दर्ज कराते हुए मांग की है कि इस बयान का संज्ञान लिया जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए। पार्टी नेताओं का आरोप है कि विपक्ष चुनावी हार के डर से इस तरह की भाषा का सहारा ले रहा है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर इस तरह की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती।

    इस विवाद में भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह बयान किसी भावनात्मक प्रतिक्रिया का परिणाम नहीं बल्कि सोच समझकर दिया गया राजनीतिक संदेश है। उनके अनुसार विपक्ष लगातार प्रधानमंत्री और सरकार पर व्यक्तिगत हमले कर रहा है जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

    वहीं भाजपा के एक अन्य नेता प्रदीप भंडारी ने भी इस बयान की आलोचना करते हुए कहा कि यह बयान देश की जनता और लोकतंत्र दोनों का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार चुनावी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहा है।

    विवाद बढ़ने के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनके शब्दों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। उनके अनुसार उनका आशय किसी व्यक्ति विशेष पर हमला करना नहीं था बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों और विपक्ष के प्रति कथित दबाव की राजनीति को उजागर करना था। उन्होंने कहा कि सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्षी दलों को दबाने का प्रयास कर रही है और यही बात उन्होंने अपने बयान में कही थी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे जैसे चुनाव नजदीक आते हैं वैसे वैसे राजनीतिक बयानबाजी और तेज होती जाती है। उनका कहना है कि इस तरह के विवाद अक्सर चुनावी माहौल को प्रभावित करते हैं और कई बार वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाकर व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप को बढ़ावा देते हैं।

    इस पूरे विवाद ने चुनावी चर्चा का केंद्र बदल दिया है और अब राजनीतिक दल एक दूसरे पर आरोप लगाने में जुट गए हैं। फिलहाल यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

  • खरगे के बयान से गरमाई सियासत, पीएम मोदी पर टिप्पणी के बाद दी सफाई, बीजेपी ने घेरा

    खरगे के बयान से गरमाई सियासत, पीएम मोदी पर टिप्पणी के बाद दी सफाई, बीजेपी ने घेरा


    नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के एक बयान ने मंगलवार को राजनीतिक माहौल को गरमा दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर विवादित टिप्पणी की, जिसके बाद तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

    दरअसल, चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खरगे ने AIADMK और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन पर हमला बोलते हुए पीएम मोदी को ‘आतंकवादी’ कह दिया। इस बयान के सामने आते ही बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताई और कांग्रेस पर प्रधानमंत्री का अपमान करने का आरोप लगाया।

    खरगे ने अपने बयान में कहा कि AIADMK, जो अन्नादुरई की विचारधारा का दावा करती है, वह मोदी के साथ कैसे जा सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी समानता और न्याय में विश्वास नहीं करती और इस तरह का गठबंधन लोकतंत्र को कमजोर करता है। साथ ही उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की तारीफ करते हुए उन्हें बीजेपी के खिलाफ मजबूती से खड़े होने वाला नेता बताया।

    बयान पर सफाई
    विवाद बढ़ने के बाद खरगे ने अपनी टिप्पणी पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया है। उनके मुताबिक, उन्होंने पीएम मोदी को ‘आतंकवादी’ नहीं कहा, बल्कि यह कहना चाहा कि वे राजनीतिक दलों और लोगों को डराने का काम करते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ED, IT और CBI जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।

    बीजेपी का पलटवार
    बीजेपी ने इस बयान को लेकर कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस लगातार प्रधानमंत्री का अपमान करती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक पीएम मोदी के खिलाफ कई बार आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया जा चुका है और इसके लिए कांग्रेस को माफी मांगनी चाहिए।
  • गूगल पर ‘near me’ सर्च का बढ़ता ट्रेंड होटल, रेस्टोरेंट और अस्पताल सबसे ज्यादा खोजी जाने वाली कैटेगरी

    गूगल पर ‘near me’ सर्च का बढ़ता ट्रेंड होटल, रेस्टोरेंट और अस्पताल सबसे ज्यादा खोजी जाने वाली कैटेगरी

     
    नई दिल्ली: डिजिटल युग में लोगों की जरूरतें अब तेजी से ऑनलाइन सर्च पर निर्भर होती जा रही हैं। जब भी किसी को अपने आसपास किसी सुविधा की जरूरत होती है तो वह तुरंत मोबाइल या कंप्यूटर पर गूगल खोलकर ‘near me’ लिख देता है और नजदीकी विकल्पों की तलाश शुरू कर देता है। यह ट्रेंड अब आम जीवन का हिस्सा बन चुका है और लगातार तेजी से बढ़ रहा है।

    ताजा पैटर्न के अनुसार लोग सबसे ज्यादा अपने आसपास रेस्टोरेंट, होटल, अस्पताल और कैफे जैसी सेवाओं की खोज करते हैं। ‘restaurants near me’ और ‘hotel near me’ जैसी क्वेरीज सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली सर्च में शामिल हैं। इसके अलावा स्कूल, जिम, सलून, स्पा और एटीएम जैसी सुविधाओं की खोज भी लगातार बढ़ रही है। यह दर्शाता है कि लोग अब अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से निर्भर हो रहे हैं।

    स्वास्थ्य से जुड़ी सर्च भी इस ट्रेंड का अहम हिस्सा बन चुकी है। लोग अचानक बीमारी या इमरजेंसी स्थिति में ‘hospital near me’ या ‘clinic near me’ जैसे कीवर्ड का इस्तेमाल करते हैं ताकि तुरंत नजदीकी इलाज की सुविधा मिल सके। इसके अलावा दवा की दुकान और मेडिकल टेस्ट से जुड़ी खोजों में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है, जिससे यह साफ होता है कि स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता पहले से ज्यादा बढ़ी है।

    इसके साथ ही ट्रैवल और लाइफस्टाइल से जुड़े विकल्प भी ‘near me’ सर्च में शामिल हैं। लोग अपने आसपास मॉल, पार्क, पेट्रोल पंप, स्विमिंग पूल और रिजॉर्ट जैसी जगहों की भी खोज करते हैं। होटल और रेस्टोरेंट की मांग हमेशा टॉप पर रहती है क्योंकि बाहर खाने और घूमने की आदतें तेजी से बढ़ी हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह ट्रेंड स्थानीय व्यवसायों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण बन गया है। छोटे और बड़े व्यापार अब सीधे ऑनलाइन सर्च के जरिए ग्राहकों तक पहुंच पा रहे हैं। इससे न केवल ग्राहकों को सुविधा मिलती है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी डिजिटल मजबूती मिल रही है।

     ‘near me’ सर्च अब केवल एक तकनीकी सुविधा नहीं बल्कि आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है। लोग समय बचाने और तुरंत समाधान पाने के लिए इस सुविधा पर निर्भर हो रहे हैं और आने वाले समय में इस ट्रेंड के और भी तेजी से बढ़ने की संभावना है।

  • लिकर लॉकडाउन से कारोबार को बड़ा झटका, 1400 करोड़ तक नुकसान का अनुमान, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बढ़े

    लिकर लॉकडाउन से कारोबार को बड़ा झटका, 1400 करोड़ तक नुकसान का अनुमान, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बढ़े

    नई दिल्ली।  पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के चलते लागू की गई शराबबंदी ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान लगाए गए इस प्रतिबंध को लेकर सत्ताधारी दल और चुनावी व्यवस्था से जुड़े निर्णयों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। इस फैसले ने न केवल राजनीतिक बहस को तेज किया है बल्कि राज्य के कारोबारी वर्ग पर भी इसका सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    निर्णय के अनुसार राज्य में शराब की बिक्री और परोसने पर 20 अप्रैल से लेकर 29 अप्रैल तक अलग-अलग चरणों में प्रतिबंध लागू किया गया है। इस अवधि में कुल मिलाकर लगभग साढ़े नौ दिन तक शराब की बिक्री पर रोक रहेगी। मतदान के चरणों और मतगणना के आसपास के समय को देखते हुए यह प्रतिबंध लागू किया गया है, हालांकि बीच में कुछ दिनों के लिए सीमित राहत भी दी गई है।

    इस फैसले का असर राज्य के व्यापारिक ढांचे पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है। अनुमान के अनुसार इस अवधि में सरकार को लगभग 1400 करोड़ रुपये तक के राजस्व नुकसान की संभावना है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा राज्य की राजधानी और आसपास के क्षेत्रों से आने वाला बताया जा रहा है। पूरे राज्य में हजारों की संख्या में शराब की दुकानें और बार संचालित होते हैं, जिनका दैनिक कारोबार करोड़ों रुपये में होता है। ऐसे में लंबे समय तक पाबंदी से कारोबार ठप होने की स्थिति बन गई है।

    इस निर्णय का असर केवल शराब उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। खासकर वे व्यवसाय जो बार और खाद्य सेवाओं पर निर्भर हैं, उन्हें ग्राहकों की कमी और बिक्री में गिरावट का सामना करना पड़ सकता है।

    शराब कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले से ही स्टॉक और बिक्री को लेकर कई तरह की पाबंदियां लागू थीं और अब लंबे समय की बंदी से उनका व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा। उनका यह भी कहना है कि अलग-अलग चरणों में लागू नियमों के कारण स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।

    वहीं इस पूरे मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सत्ताधारी दल के नेताओं का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया के नाम पर ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं जो आम जनता और छोटे कारोबारियों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। उनका कहना है कि यह निर्णय राजनीतिक रूप से प्रभावित प्रतीत होते हैं और इसका असर चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है।

    दूसरी ओर विपक्षी दलों का कहना है कि यह प्रतिबंध निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके।

     पश्चिम बंगाल में लागू यह शराबबंदी अब केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं रह गई है बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। इससे जहां एक ओर राज्य का राजस्व प्रभावित होने की आशंका है, वहीं दूसरी ओर चुनावी माहौल और भी अधिक गर्म हो गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और अधिक तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती नई दिल्ली।

  • चेन्नई में खड़गे के बयान से सियासी तूफान प्रधानमंत्री पर टिप्पणी और गठबंधन राजनीति को लेकर बढ़ा विवाद

    चेन्नई में खड़गे के बयान से सियासी तूफान प्रधानमंत्री पर टिप्पणी और गठबंधन राजनीति को लेकर बढ़ा विवाद


    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दिए गए बयान ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने संबोधन में भाजपा और उसके सहयोगी दलों पर तीखे आरोप लगाए, लेकिन उनके एक बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में खासा विवाद खड़ा हो गया है। बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है।

    प्रेस वार्ता के दौरान खड़गे ने तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति और गठबंधन समीकरणों पर टिप्पणी करते हुए नरेंद्र मोदी और भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां सामाजिक समानता और न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ जा रही हैं। इसी दौरान उनके एक बयान को लेकर विवाद गहरा गया जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री के संदर्भ में आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग किया, जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।

    खड़गे ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार विपक्षी दलों को कमजोर करने और राजनीतिक लाभ के लिए सरकारी तंत्र का उपयोग कर रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया पर इसका असर पड़ सकता है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने चाहिए। उनके अनुसार, लोकतंत्र की मजबूती के लिए संस्थाओं की स्वतंत्रता बेहद जरूरी है और किसी भी तरह का राजनीतिक दबाव इस व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है।

    इसके साथ ही उन्होंने दक्षिण भारत की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस का गठबंधन डीएमके के साथ आगे भी जारी रहेगा और यह गठबंधन राज्य में विकास और कल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करने के लिए काम करेगा। उन्होंने शिक्षा स्वास्थ्य और सामाजिक समानता जैसे मुद्दों को गठबंधन की प्राथमिक प्राथमिकताओं में शामिल बताया।

    इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। भाजपा नेताओं ने खड़गे के बयान की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया है। वहीं एनडीए गठबंधन के सहयोगी दलों ने भी इस बयान को अनुचित करार दिया है। दूसरी ओर कांग्रेस के कुछ नेताओं ने खड़गे के बयान का समर्थन करते हुए इसे राजनीतिक असहमति का हिस्सा बताया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल के बीच इस तरह के बयान राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकते हैं। उनका कहना है कि विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच जारी आरोप प्रत्यारोप की यह श्रृंखला आने वाले समय में और तेज हो सकती है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि इस तरह के विवादों से मुद्दों पर आधारित राजनीति की जगह व्यक्तिगत आरोपों की राजनीति को बढ़ावा मिलता है।

    इसी बीच खड़गे ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को निष्पक्ष रहकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि संस्थाएं दबाव में काम करेंगी तो इसका असर चुनावी प्रक्रिया और जनता के विश्वास पर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सभी संस्थाओं को स्वतंत्र और निष्पक्ष रहना जरूरी है।