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  • FSSAI की बड़ी कार्रवाई… डाबर के कई उत्पादों की बिक्री पर 100% प्योर वाले दावों के साथ रोक

    FSSAI की बड़ी कार्रवाई… डाबर के कई उत्पादों की बिक्री पर 100% प्योर वाले दावों के साथ रोक


    नई दिल्ली।
    भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (Food Safety and Standards Authority of India- FSSAI) ने डाबर इंडिया लिमिटेड (Dabur India Limited) के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. FSSAI ने डाबर के कई प्रोडक्ट्स पर ‘100 प्रतिशत’ वाले भ्रामक दावों (Misleading claims) के साथ बिक्री करने पर रोक लगा दी है.

    FSSAI ने जांच में पाया कि वेबसाइट पर प्रोडक्ट्स के लिए ‘100% नेचुरल’, ‘100% प्योर’, ‘100% प्योरिटी गारंटेड’, ‘100% ऑर्गेनिक’ और ‘100% टेंडर कोकोनट वॉटर’ जैसे दावों का खुलकर इस्तेमाल किया जा रहा था।

    ऑथोरिटी ने बताया कि इस तरह के दावे फूड सिक्योरिटी लॉ का उल्लंघन करते हैं. ऐसे दावे ‘खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन और दावे) विनियम, 2018’ के खिलाफ हैं. ये दावे अस्पष्ट और असत्यापित हैं, जो सीधे तौर पर ग्राहकों को गुमराह करते हैं।
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    किन प्रोडक्ट्स पर लगा ये बैन?

    FSSAI ने सोशल मीडिया पर बताया कि ‘100 प्रतिशत’ वाले भ्रामक दावों के साथ बिक्री करने वाले इस रोक के दायरे में डाबर का शहद, गाय का घी, सेब का सिरका, वर्जिन कोकोनट ऑयल, तिल का तेल, नारियल पानी और नारियल दूध जैसे प्रोडक्ट्स शामिल हैं. इसके अलावा, ‘डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर’ और ‘डाबर ऑर्गेनिक हनी’ पर बिना वैध अनुमति के ‘जैविक भारत’ लोगो लगाया गया था।

    वहीं ‘डाबर होममेड कोकोनट मिल्क’ पर ‘100% शुद्धता’ का दावा किया गया था, जो कंपाउंड फूड्स के लिए नियम के मुताबिक पूरी तरह बैन है.


    15 दिनों के भीतर मांगी रिपोर्ट

    FSSAI ने बताया कि उसने डाबर को पहले भी नोटिस जारी कर इन भ्रामक दावों को हटाने का निर्देश दिया था. लेकिन कंपनी की ओर से कोई ठोस सुधार नहीं किया गया. अब FSSAI ने डाबर इंडिया को इन सभी प्रोडक्ट्स की बिक्री तुरंत रोकने के आदेश दिए हैं. साथ ही, कंपनी को 15 दिनों के भीतर अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) सौंपने को कहा है।

    बता दें कि FSSAI फूड सिक्योरिटी को लेकर काफी सख्ती बरत रहा है. ऐसे में कई बड़ी कंपनियां उसके रडार पर हैं।

  • जनगणना 2027 का दूसरा चरण 17 अगस्त से….. जाति के साथ देनी होगी ये जानकारियां

    जनगणना 2027 का दूसरा चरण 17 अगस्त से….. जाति के साथ देनी होगी ये जानकारियां


    नई दिल्ली।
    साल 2027 की जनगणना (Census) का दूसरा चरण (Second phase) 17 अगस्त (August 17) से शुरू होगा। इस जनगणना (Census) में 1931 के बाद पहली बार लोगों की जाति भी दर्ज की जाएगी। इसके अलावा, इसकी भी संभावना है कि लोगों के माता-पिता की जन्म तिथि (Parents’ date of birth) और जन्म स्थान की जानकारी भी दर्ज की जाए। जनगणना के दौरान जिन लोगों के पास पासपोर्ट होगा, उनका पासपोर्ट नंबर भी लिया जा सकता है। आधार नंबर केवल स्वेच्छा से दिया जा जा सकेगा।


    कहां और कब से शुरू होगा दूसरा चरण?

    गृह मंत्रालय ने सोमवार को एक अधिसूचना जारी की। इसमें मंत्रालय ने बताया कि लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले इलाके में जनगणना का दूसरा चरण 1 सितंबर से 30 सितंबर तक चलेगा। इससे पहले 17 अगस्त से 30 अगस्त तक लोग खुद भी अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकेंगे। इसका मतलब है कि जनगणना के दूसरे चरण की प्रश्नावली भी जल्द जारी की जाएगी।


    जाति कैसे दर्ज की जाएगी?

    सूत्रों के अनुसार, जाति वही दर्ज की जाएगी जो व्यक्ति खुद बताएगा। अनुसूचित जाति (एसटी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए सूची (ड्रॉप-डाउन मेन्यू) होगी, जबकि ‘जाति’ वाला अलग कॉलम केवल उन लोगों के लिए होगा जो एससी या एसटी श्रेणी में नहीं आते।


    क्या जाति का प्रमाण पत्र दिखाना होगा?

    ड्रॉप-डाउन मेन्यू में केवल उसी राज्य की एससी और एसटी की सूची दिखाई जाएगी, जहां व्यक्ति को जनगणना हो रही होगी। व्यक्ति अपनी जाति का जो नाम बताएगा, उसे उसी तरह लिखा जाएगा। अपनी एससी, एसटी या अन्य जाति साबित करने के लिए किसी भी तरह का दस्तावेज या जाति प्रमाण पत्र दिखाने की जरूरत नहीं होगी।


    45 हजार जातियों का डाटा कैसे संभाला जाएगा?

    एक अधिकारी ने बताया कि 2011 की सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना में लोगों ने खुद अपनी जाति बताई थी। इससे 45 हजार से अधिक अलग-अलग जातियों के नाम सामने आए थे। इतने बड़े आंकड़ों का सही उपयोग करना मुश्किल हो गया था। लेकिन इस बार डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से इन आंकड़ों को व्यवस्थित करना और अलग-अलग श्रेणियों में बांटना आसान होगा।


    माता-पिता के जन्म की जानकारी क्यों ली जाएगी?

    दूसरे चरण में पहली बार लोगों के माता-पिता की जन्म तिथि और जन्म स्थान की जानकारी भी ली जाएगी। ये दोनों बातें नागरिकता तय करने में अहम मानी जाती हैं। 2011 की जनगणना के साथ राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) का काम भी किया गया था। इसे 2021 की जनगणना के साथ फिर से किया जाना था, लेकिन बाद में इसे टाल दिया गया। अब इसे 2027 की जनगणना से अलग कर दिया गया है। वर्ष 2010 में एनपीआर के दौरान लोगों से उनकी राष्ट्रीयता के बारे में भी जानकारी ली गई थी। लेकिन यह भी साफ कहा गया था कि इससे किसी को नागरिकता का अधिकार नहीं मिलेगा।


    क्या कोई दस्तावेज देना होगा?

    सूत्रों के अनुसार, लोगों से उनके माता-पिता की जन्म तिथि या जन्म स्थान का कोई प्रमाण नहीं मांगा जाएगा। जो जानकारी व्यक्ति को जितनी सही पता होगी, उसी के आधार पर दर्ज की जाएगी। अगर किसी को अपने माता-पिता की पूरी जन्म तिथि नहीं पता है और केवल जन्म का साल पता है, तो उस साल की 1 जनवरी को जन्म तिथि मानकर दर्ज किया जाएगा।

  • Gen-Z से संवाद बढ़ाएगा RSS, 100 से ज्यादा शहरों के युवाओं से बात करेंगे मोहन भागवत

    Gen-Z से संवाद बढ़ाएगा RSS, 100 से ज्यादा शहरों के युवाओं से बात करेंगे मोहन भागवत


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने देश की नई पीढ़ी, खासकर Gen-Z और Gen Alpha से संवाद बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। संघ प्रमुख मोहन भागवत 6 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देश के 100 से अधिक शहरों के हजारों विद्यार्थियों से संवाद करेंगे। इस कार्यक्रम में 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 2,000 से अधिक छात्रों के शामिल होने की संभावना है।

    यह संवाद ‘इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइटेड नेशन्स’ (IIMUN) की 15वीं वर्षगांठ पर आयोजित वार्षिक चैंपियनशिप कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन अवसर पर होगा। कार्यक्रम का आयोजन मुंबई के अंबानी सेंटर में किया जाएगा, जबकि विभिन्न शहरों के छात्र ऑनलाइन माध्यम से इसमें जुड़ेंगे।

    युवाओं से जुड़ने पर रहेगा जोर
    आरएसएस के अनुसार, वर्ष 2011 में स्थापित IIMUN का संचालन युवा स्वयं करते हैं और संगठन का दावा है कि अब तक इससे 7.5 करोड़ से अधिक युवा जुड़ चुके हैं। सम्मेलन का उद्देश्य नई पीढ़ी के विचारों, आकांक्षाओं और चुनौतियों पर खुला संवाद स्थापित करना है।

    Gen-Z और Gen Alpha पर विशेष फोकस
    कार्यक्रम में मुख्य रूप से दो पीढ़ियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। Gen-Z में 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवा शामिल हैं, जबकि Gen Alpha में 2010 से 2024 के बीच जन्मे बच्चों को माना जाता है।

    संवाद को बताया था बदलाव का माध्यम
    हाल के दिनों में मोहन भागवत ने कहा था कि समाज और समय के साथ बदलाव स्वाभाविक है तथा युवाओं से निरंतर संवाद के जरिए ही चुनौतियों का बेहतर समाधान निकाला जा सकता है। उनके अनुसार, अनुभव सबसे बड़ा शिक्षक होता है और नई पीढ़ी के विचारों को समझना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा था कि बच्चों और युवाओं के मन की बात सुनकर ही उनके साथ प्रभावी संवाद स्थापित किया जा सकता है। यह कार्यक्रम युवाओं के साथ विचार-विमर्श और सामाजिक विषयों पर संवाद की इसी पहल का हिस्सा माना जा रहा है।

  • बांकीपुर में बीजेपी का गढ़ कैसे टूटा? प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत के पीछे रहे ये 5 बड़े फैक्टर

    बांकीपुर में बीजेपी का गढ़ कैसे टूटा? प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत के पीछे रहे ये 5 बड़े फैक्टर


    पटना । बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात के विधानसभा उपचुनावों के नतीजों में सबसे ज्यादा चर्चा बांकीपुर सीट की रही, जहां जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19 हजार से अधिक वोटों से पराजित कर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की उम्मीदवार रेखा गुप्ता तीसरे स्थान पर रहीं।

    यह हार बीजेपी के लिए इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि बांकीपुर सीट 1995 से पार्टी के कब्जे में थी। यह सीट हाल ही में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन ने इसी सीट पर करीब 52 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी, लेकिन महज आठ महीने बाद पार्टी को यहां हार का सामना करना पड़ा।

    1. सम्राट चौधरी के नेतृत्व की पहली परीक्षा
    बिहार के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बीजेपी की पहली चुनावी परीक्षा थी। चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने मुकाबले को सीधे अपने और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बीच की लड़ाई के रूप में पेश किया। जीत के बाद भी उन्होंने कहा कि बांकीपुर की जनता ने बीजेपी नेतृत्व को स्पष्ट संदेश दिया है कि बिहार को बेहतर नेतृत्व की जरूरत है।

    2. लंबे समय से सत्ता विरोधी माहौल
    करीब तीन दशक से यह सीट नितिन नवीन और उनके परिवार के पास रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार एक ही परिवार के प्रतिनिधित्व के कारण क्षेत्र में सत्ता विरोधी भावना (एंटी-इनकंबेंसी) मजबूत हो चुकी थी। स्थानीय विकास और बदलाव के मुद्दे पर प्रशांत किशोर ने इसका लाभ उठाया।

    3. स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित प्रचार
    प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार में बड़े राजनीतिक वादों के बजाय स्थानीय विकास को प्राथमिकता दी। उन्होंने जनता से कहा कि विधायक बनने के बाद क्षेत्र रातों-रात नहीं बदलेगा, लेकिन कुछ महीनों में बदलाव दिखाई देगा। यह व्यावहारिक संदेश मतदाताओं को प्रभावित करता नजर आया।

    4. राजद के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध
    विश्लेषकों के अनुसार मुस्लिम-यादव (एम-वाई) वोट बैंक का एक हिस्सा इस बार राजद के बजाय जन सुराज के साथ गया। बीजेपी को हराने की रणनीति के तहत कई मतदाताओं ने प्रशांत किशोर को मजबूत विकल्प माना। इसका असर यह रहा कि राजद तीसरे स्थान पर खिसक गया और उसकी जमानत तक जब्त हो गई।

    5. सवर्ण वोटों का झुकाव
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी के पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक, खासकर ब्राह्मण और कायस्थ समुदाय के एक हिस्से ने इस बार प्रशांत किशोर का समर्थन किया। बांकीपुर में इन समुदायों का प्रभाव निर्णायक माना जाता है और वोटों का यह बदलाव चुनाव परिणाम पर भारी पड़ा।

    बीजेपी के लिए बड़ा संदेश
    बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम सिर्फ एक सीट की हार-जीत नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार की राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत माना जा रहा है। वहीं, जन सुराज पार्टी के लिए यह पहली चुनावी जीत भविष्य की राजनीति में उसकी बढ़ती भूमिका का संकेत मानी जा रही है।

  • Update: तीन राज्यों के उपचुनाव परिणाम : दतिया में Congress, गुजरात में BJP, बांकीपुर में प्रशांत किशोर जीते

    Update: तीन राज्यों के उपचुनाव परिणाम : दतिया में Congress, गुजरात में BJP, बांकीपुर में प्रशांत किशोर जीते

    नई दिल्ली। बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के परिणाम आ गए हैं। मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि गुजरात की मंजलपुर सीट भाजपा के खाते में गई। वहीं बिहार की बांकीपुर सीट से जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने जीत दर्ज की है।

    बांकीपुर से प्रशांत किशोर जीते
    बिहार के बांकीपुर में नितिन नवीन की सीट पर प्रशांत किशोर जीत गए हैं। जन सुराज पार्टी के फाउंडर प्रशांत किशोर 19,324 वोटों से जीते हैं। प्रशांत को 64,151 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार को 44,827 वोट मिले हैं। बांकीपुर सीट भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन का गढ़ मानी जाती है। उनके राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी, जिसके चलते उपचुनाव कराया गया।

    जीत के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि उनके विधायक बनने से बांकीपुर रातोंरात नहीं बदलेगा, लेकिन अगले दो-तीन महीनों में लोग सकारात्मक बदलाव जरूर महसूस करेंगे। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से बिहार के लिए बेहतर मुख्यमंत्री चुनने की भी अपील की।

    दतिया में कांग्रेस की लगातार दूसरी जीत
    मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,056 वोटों से हराकर जीत दर्ज की। भाजपा ने इस सीट पर पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। दिलचस्प बात यह रही कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा के मतदान केंद्र बूथ नंबर-121 पर भी कांग्रेस को बढ़त मिली। यहां कांग्रेस को 291 और भाजपा को 264 वोट मिले। जीत के बाद घनश्याम सिंह ने कहा कि यह जनादेश देशभर में संदेश देगा और जनता बदलाव चाहती है।

    गुजरात के मंजलपुर में भाजपा की जीत
    गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार सतेन्द्रभाई (सतीश) पटेल ने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को 30,630 वोटों के अंतर से हराया। जीत के बाद सतीश पटेल ने मतदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि जनता ने उन पर भी वैसा ही भरोसा जताया है जैसा पहले उनके नेतृत्व पर जताया था। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार भिखाभाई रबारी ने हार स्वीकार करते हुए मतदान के अंतिम चरण में भय का माहौल बनाए जाने का आरोप लगाया।

    30 जुलाई को हुआ था मतदान
    तीनों विधानसभा सीटों पर 30 जुलाई को मतदान हुआ था। गुजरात की मंजलपुर सीट पर 37.05 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। तीनों राज्यों के उपचुनावों के नतीजों को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

  • तीन राज्यों के उपचुनाव: दतिया में कांग्रेस, गुजरात में भाजपा की जीत, बांकीपुर में प्रशांत किशोर की बड़ी बढ़त

    तीन राज्यों के उपचुनाव: दतिया में कांग्रेस, गुजरात में भाजपा की जीत, बांकीपुर में प्रशांत किशोर की बड़ी बढ़त

    नई दिल्ली। बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजे सामने आ गए हैं। मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि गुजरात की मंजलपुर सीट भाजपा के खाते में गई। वहीं बिहार की बांकीपुर सीट पर मतगणना के दौरान जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर निर्णायक बढ़त बनाए हुए हैं।

    बांकीपुर में प्रशांत किशोर आगे
    बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर 27वें राउंड की मतगणना तक जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार प्रशांत किशोर को 59,213 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार को 39,794 वोट प्राप्त हुए। इस तरह प्रशांत किशोर 19,419 वोटों से आगे चल रहे हैं। बांकीपुर सीट भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन का गढ़ मानी जाती है। उनके राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी, जिसके चलते उपचुनाव कराया गया।

    बढ़त के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि उनके विधायक बनने से बांकीपुर रातोंरात नहीं बदलेगा, लेकिन अगले दो-तीन महीनों में लोग सकारात्मक बदलाव जरूर महसूस करेंगे। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से बिहार के लिए बेहतर मुख्यमंत्री चुनने की भी अपील की।

    दतिया में कांग्रेस की लगातार दूसरी जीत

    मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,056 वोटों से हराकर जीत दर्ज की। भाजपा ने इस सीट पर पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। दिलचस्प बात यह रही कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा के मतदान केंद्र बूथ नंबर-121 पर भी कांग्रेस को बढ़त मिली। यहां कांग्रेस को 291 और भाजपा को 264 वोट मिले। जीत के बाद घनश्याम सिंह ने कहा कि यह जनादेश देशभर में संदेश देगा और जनता बदलाव चाहती है।

    गुजरात के मंजलपुर में भाजपा की बड़ी जीत
    गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार सतेन्द्रभाई (सतीश) पटेल ने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को 30,630 वोटों के अंतर से हराया। जीत के बाद सतीश पटेल ने मतदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि जनता ने उन पर भी वैसा ही भरोसा जताया है जैसा पहले उनके नेतृत्व पर जताया था। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार भिखाभाई रबारी ने हार स्वीकार करते हुए मतदान के अंतिम चरण में भय का माहौल बनाए जाने का आरोप लगाया।

    30 जुलाई को हुआ था मतदा
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    तीनों विधानसभा सीटों पर 30 जुलाई को मतदान हुआ था। गुजरात की मंजलपुर सीट पर 37.05 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। तीनों राज्यों के उपचुनावों के नतीजों को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

  • PM केयर्स फंड पर उठे सवालों के बीच CJP का पलटवार, RTI शिकायतों को बताया राजनीतिक एजेंडा

    PM केयर्स फंड पर उठे सवालों के बीच CJP का पलटवार, RTI शिकायतों को बताया राजनीतिक एजेंडा


    नई दिल्ली । कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) की फंडिंग और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके के परिवार की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग को लेकर दायर शिकायतों के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पार्टी ने इन शिकायतों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए तीखा पलटवार किया है। पार्टी की प्रवक्ता वैष्णवी गौर ने कहा कि यदि पारदर्शिता और जवाबदेही की बात की जा रही है तो केवल एक संगठन या व्यक्ति को निशाना बनाने के बजाय सभी मामलों की समान रूप से जांच होनी चाहिए। उन्होंने इस दौरान पीएम केयर्स फंड का भी उल्लेख किया और उस पर जांच की मांग उठाते हुए तंज भरी टिप्पणी की कि “पीएम माफ कर देंगे, चिंता मत करो।”

    पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सूरत निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने 1 अगस्त को भारत निर्वाचन आयोग, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) और महाराष्ट्र सरकार सहित कई सरकारी संस्थाओं को शिकायत भेजी। शिकायत में उन्होंने CJP की फंडिंग के स्रोत, पार्टी की कानूनी स्थिति और संस्थापक अभिजीत दिपके के पिता भगवानराव दिपके की आर्थिक स्थिति की जांच कराने की मांग की। शिकायत में यह भी कहा गया कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

    अमित तिवारी ने अपनी शिकायत में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल द्वारा घोषित एक करोड़ रुपये के लीगल डिफेंस फंड का भी उल्लेख किया। उन्होंने मांग की कि इस फंड पर लागू कर नियमों की समीक्षा की जाए और आवश्यकता होने पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाए जाने के पहलू की भी जांच की जाए। शिकायत में विभिन्न सरकारी एजेंसियों से पूरे मामले की विस्तृत पड़ताल करने का अनुरोध किया गया है।

    इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए CJP की प्रवक्ता वैष्णवी गौर ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी निजी व्यक्ति की शिक्षा, पारिवारिक खर्च या व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति को राजनीतिक विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है। उनके अनुसार इस तरह की शिकायतें तथ्यों से अधिक राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित दिखाई देती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना ही उद्देश्य है तो सभी संस्थाओं और फंडों पर समान मानदंड लागू होने चाहिए।

    पार्टी ने अपने आधिकारिक रुख में कहा कि उसकी फंडिंग और कानूनी स्थिति को लेकर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं और उन्हें राजनीतिक एजेंडे के तहत उछाला जा रहा है। CJP का कहना है कि वह कानून के दायरे में काम कर रही है और यदि किसी सक्षम एजेंसी द्वारा कोई वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाती है तो पार्टी पूरा सहयोग करेगी। साथ ही पार्टी ने आरोप लगाया कि चुनिंदा संगठनों और व्यक्तियों को निशाना बनाकर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।

    फिलहाल इस पूरे मामले में भारत निर्वाचन आयोग, सीबीआईसी, महाराष्ट्र सरकार या अन्य संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिकायतों पर जांच शुरू हुई है या नहीं, इस संबंध में भी अभी तक कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में अब निगाहें संबंधित एजेंसियों के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि मामले में किसी प्रकार की जांच शुरू होती है तो उसके निष्कर्षों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह विवाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के रूप में चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • जनता दर्शन में सख्त दिखे सीएम योगी, बोले- जनसमस्याओं के समाधान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

    जनता दर्शन में सख्त दिखे सीएम योगी, बोले- जनसमस्याओं के समाधान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

    लखनऊ। सावन के पहले सोमवार को धार्मिक कार्यक्रमों और विधानसभा के मानसून सत्र की व्यस्तताओं के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन में लोगों की समस्याएं सुनीं। विभिन्न जिलों से पहुंचे लोगों से उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनके प्रार्थना पत्र संबंधित अधिकारियों को सौंपे और समयबद्ध एवं प्रभावी निस्तारण के निर्देश दिए।

    पुलिस मामलों पर दिखाई सख्ती

    जनता दर्शन के दौरान पुलिस से जुड़ी कई शिकायतें सामने आने पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने मुकदमों में दबाव बनाने और आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी जैसी शिकायतों पर नाराजगी जताते हुए शासन स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन जिलों से इस तरह की शिकायतें लगातार आ रही हैं, वहां संबंधित पुलिस अधीक्षकों की जवाबदेही तय की जाए।

    पीड़ितों के साथ संवेदनशील व्यवहार के निर्देश

    सीएम योगी ने अधिकारियों से कहा कि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। प्रत्येक पीड़ित की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए तथा समयबद्ध तरीके से समाधान सुनिश्चित किया जाए।

    राजस्व और पुलिस मामलों पर विशेष फोकस
    मुख्यमंत्री ने राजस्व और पुलिस से जुड़े मामलों को प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पारिवारिक विवादों में पहले आपसी संवाद और समझौते का प्रयास किया जाए, उसके बाद आवश्यकता होने पर विधिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनसमस्याओं का समाधान पारदर्शिता, संवेदनशीलता और गुणवत्ता के साथ किया जाए, ताकि लोगों को संतोषजनक न्याय और राहत मिल सके।

  • ग्यूपी में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा में हलचल, सर्वे रिपोर्ट से कई विधायकों की बढ़ी चिंता

    ग्यूपी में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा में हलचल, सर्वे रिपोर्ट से कई विधायकों की बढ़ी चिंता

    मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आंतरिक सर्वे ने मुरादाबाद मंडल के कई विधायकों की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी के लिए कराए गए सर्वे में कई क्षेत्रों में विधायकों के प्रति जनता की नाराजगी सामने आने की चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक, एंटी इनकंबेंसी से बचने के लिए सर्वे एजेंसी ने करीब 35 प्रतिशत विधायकों के टिकट बदलने का सुझाव दिया है।

    तीन सर्वे पूरे, चौथा अगस्त-सितंबर में संभव
    भाजपा प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया के तहत अब तक तीन चरणों में सर्वे करा चुकी है। बताया जा रहा है कि तीनों सर्वे में कई क्षेत्रों में विधायकों के प्रति असंतोष एक समान रूप से सामने आया है। अगस्त-सितंबर में चौथे चरण का सर्वे भी कराए जाने की संभावना है, जिसके बाद पार्टी आगे की रणनीति तय कर सकती है।

    मुरादाबाद मंडल में बढ़ी बेचैनी
    मुरादाबाद मंडल को समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है। यहां की 27 विधानसभा सीटों में से फिलहाल भाजपा के पास 12 सीटें हैं, जबकि 14 सीटों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है। रामपुर की स्वार सीट भाजपा के सहयोगी दल अपना दल (एस) के खाते में है।

    मंडल के 12 भाजपा विधायकों में से 10 लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। केवल रामवीर सिंह (कुंदरकी) और आकाश सक्सेना (रामपुर) उपचुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं।

    35% टिकट बदलने की चर्चा
    पार्टी सूत्रों के अनुसार, सर्वे एजेंसी ने जिन क्षेत्रों में जन असंतोष अधिक पाया है, वहां नए उम्मीदवार उतारने की सिफारिश की है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि किन विधायकों के नाम इस सूची में हैं, लेकिन यह चर्चा तेज है कि मुरादाबाद मंडल के कुछ विधायक भी इस दायरे में आ सकते हैं। इससे संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच हलचल बढ़ गई है।

    भाजपा का आधिकारिक रुख
    भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर ने कहा कि पार्टी समय-समय पर सर्वे कराती रहती है। फिलहाल विधानसभा चुनाव के लिए टिकट आवेदन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है और पार्टी का मुख्य फोकस एमएलसी चुनाव पर है।

    मंडल के लगातार दूसरी बार चुने गए भाजपा विधायक

    बलदेव सिंह औलख (बिलासपुर)
    राजबाला (मिलक)
    गुलाब देवी (चंदौसी)
    रितेश गुप्ता (मुरादाबाद नगर)
    राजीव तरारा (मंडी धनौरा)
    महेंद्र खड़गवंशी (हसनपुर)
    सुचि चौधरी (बिजनौर)
    सुशांत सिंह (बढ़ापुर)
    अशोक राणा (धामपुर)
    ओम कुमार (नहटौर)

    मंडल में भाजपा की स्थिति

    जिला भाजपा विधायक
    बिजनौर 4
    रामपुर 3
    मुरादाबाद 2
    अमरोहा 2
    संभल 1

    हालांकि टिकटों को लेकर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है, लेकिन आंतरिक सर्वे की चर्चाओं ने चुनाव से करीब एक साल पहले ही भाजपा के भीतर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर विधान परिषद में बवाल, सपा का हंगामा, केशव मौर्य ने किया पलटवार

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर विधान परिषद में बवाल, सपा का हंगामा, केशव मौर्य ने किया पलटवार

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के मानसून सत्र के पहले दिन श्रीराम मंदिर के दानपात्र से कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। समाजवादी पार्टी ने नियम-105 के तहत कार्यस्थगन प्रस्ताव लाकर मामले पर चर्चा की मांग की। जैसे ही नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य जवाब देने के लिए खड़े हुए, सपा सदस्य वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। लगातार हंगामे के चलते सभापति ने सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

    कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। शोर-शराबे के बीच केशव प्रसाद मौर्य ने अपना पक्ष रखा। दोपहर 1:52 बजे सभापति ने कार्यस्थगन प्रस्ताव अस्वीकार करते हुए मामले को अग्रिम कार्रवाई के लिए सरकार को भेजने की घोषणा की। इसके बाद विपक्षी सदस्य अपनी सीटों पर लौटे और सदन की कार्यवाही सामान्य हो सकी।

    केशव मौर्य का विपक्ष पर पलटवार
    नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए एक रुपये का भी योगदान नहीं दिया, वे अब चढ़ावे की चोरी पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बाबरी मस्जिद के नाम पर जुटाए गए चंदे का हिसाब भी सार्वजनिक होना चाहिए। उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर मंदिरों के प्रति नकारात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि भविष्य में जनता इसका जवाब देगी।

    सपा ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
    समाजवादी पार्टी ने अपने कार्यस्थगन प्रस्ताव में आरोप लगाया कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के दानपात्र से हुई कथित चोरी वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है। विपक्ष का कहना था कि पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं रही और केवल निचले स्तर के लोगों पर कार्रवाई की गई। विपक्ष के नेता लाल बिहारी यादव और सदस्य किरण पाल कश्यप ने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़ी दान सामग्री की चोरी गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावी कार्रवाई न होने से लोगों में नाराजगी है।

    अन्य मुद्दे भी उठे
    सदन में सदस्य राज बहादुर सिंह चंदेल ने शिक्षकों, कर्मचारियों और सेवानिवृत्त शिक्षकों को निशुल्क एवं कैशलेस चिकित्सा योजना में शामिल करने की मांग उठाई। इस पर नेता सदन ने कहा कि सरकार इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करेगी। राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर हुए इस विवाद ने मानसून सत्र के पहले ही दिन सदन का माहौल गर्मा दिया और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली।