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  • चंद्रबाबू नायडू के जन्मदिन पर दिल्ली से आया 'स्पेशल विश', पीएम मोदी ने आंध्र के विकास मॉडल को सराहा; राजनीतिक गलियारों में शुरू हुई बड़ी चर्चा!

    चंद्रबाबू नायडू के जन्मदिन पर दिल्ली से आया 'स्पेशल विश', पीएम मोदी ने आंध्र के विकास मॉडल को सराहा; राजनीतिक गलियारों में शुरू हुई बड़ी चर्चा!


    नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के जन्मदिन के अवसर पर देश के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व से लेकर विभिन्न राज्यों के प्रमुखों तक ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस अवसर ने एक बार फिर उनके लंबे राजनीतिक अनुभव, प्रशासनिक दक्षता और विकास केंद्रित नीतियों को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। जन्मदिन के इस मौके पर भेजे गए संदेशों में उनके स्वस्थ और दीर्घ जीवन की कामना के साथ उनके कार्यकाल में हुए विकास कार्यों की सराहना प्रमुख रूप से देखने को मिली। राजनीतिक हलकों में इसे उनके प्रभाव और स्वीकार्यता का संकेत माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में नायडू के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में आंध्र प्रदेश ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है और इसमें मुख्यमंत्री की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इस संदेश को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय और विकास की साझी सोच को दर्शाता है।

    इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने भी मुख्यमंत्री नायडू को बधाई दी और उनके नेतृत्व को दूरदर्शी बताया। उन्होंने राज्य में चल रही प्रमुख परियोजनाओं, विशेषकर राजधानी निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़े प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में निवेश बढ़ाने और रोजगार सृजन की दिशा में सरकार सक्रिय रूप से काम कर रही है। उनके अनुसार राज्य की नीतियां युवाओं के लिए नए अवसर तैयार कर रही हैं और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से शासन को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।

    इसके अलावा विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय नेतृत्व से जुड़े वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी नायडू को शुभकामनाएं दीं। इन संदेशों में उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु जीवन की कामना के साथ उनके प्रशासनिक अनुभव की प्रशंसा की गई। कई नेताओं ने उन्हें एक अनुभवी और दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि उनके निर्णयों ने आंध्र प्रदेश के विकास पथ को नई दिशा दी है।

    चंद्रबाबू नायडू को भारतीय राजनीति में एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है जिन्होंने तकनीकी विकास और आधुनिक प्रशासनिक ढांचे को प्राथमिकता दी। उनके नेतृत्व में राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई और शहरी विकास को नई गति मिली। उन्होंने निवेश आकर्षित करने के लिए नीतिगत सुधारों पर जोर दिया और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दी। उनकी कार्यशैली को अक्सर एक कॉर्पोरेट दृष्टिकोण से जोड़कर देखा जाता है जिसमें दक्षता और परिणामों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

    उनका राजनीतिक जीवन भी लंबे अनुभव और कई महत्वपूर्ण चरणों से गुजरते हुए आगे बढ़ा है। शुरुआती दौर में सक्रिय राजनीति में प्रवेश करने के बाद उन्होंने संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में नेतृत्व संभाला। समय के साथ उन्होंने न केवल पार्टी को मजबूत किया बल्कि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में भी कई सुधार लागू किए। उनके कार्यकाल को अक्सर विकास, तकनीकी उन्नति और निवेश आधारित नीतियों के लिए जाना जाता है।

    वर्तमान जन्मदिन पर मिले व्यापक शुभकामनाओं ने उनके राजनीतिक कद और राष्ट्रीय स्तर पर उनकी स्वीकार्यता को फिर से उजागर किया है। विभिन्न नेताओं के संदेशों में उनके योगदान और नेतृत्व शैली की सराहना के साथ राज्य के भविष्य को लेकर सकारात्मक अपेक्षाएं भी व्यक्त की गई हैं।

  • हम एक ठो गलती काम किए… बंगाल में पीएम मोदी को 10 रुपये की झालमुड़ी खिलाने वाले को किस बात का मलाल है?

    हम एक ठो गलती काम किए… बंगाल में पीएम मोदी को 10 रुपये की झालमुड़ी खिलाने वाले को किस बात का मलाल है?

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल के झारग्राम शहर में झालमुड़ी की दुकान लगाने वाले विक्रम ने सपने भी नहीं सोचा था कि एक दिन देश के प्रधानमंत्री उसके पास 10 रुपये की झालमुड़ी खाने आएंगे. अब वह काफी खुश हैं. पीएम ने उनसे 10 मिनट तक बातचीत की. वीडियो टीवी चैनलों पर छाया हुआ है. सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा है.
    आम ग्राहकों की तरह दुकानदार विक्रम ने पीएम से यह भी पूछा कि आप प्याज तो खाते हैं न? हालांकि उसे अब एक बात का मलाल है.

    पीएम के जाने के बाद मीडिया ने उसे घेर लिया. विक्रम ने बताया कि पीएम जब आए थे तब क्या-क्या बातचीत हुई. झालमुड़ी वाले ने बताया कि पीएम ने कहा झालमुड़ी बनाओ. मैं पैसे नहीं मांग रहा था, लेकिन वह बोले कि नहीं-नहीं कितना हुआ? फिर पैसा हम रख लिए. मेरी मम्मी और पापा का नाम पूछे. पूछे कि कहां के रहने वाले हैं. मैंने कहा कि मैं बिहार का हूं. बोले- बिहार में कहां? मैंने बताया कि गया का हूं. मैंने बताया कि गरीबी के कारण 9वीं तक ही पढ़ पाया. पीएम ने पूछा कि कितने का रोजगार कर लेते हो. दुकानदार विक्रम साव ने बताया हजार-1200 रुपये का.
    झालमुड़ी वाले को मलाल किस बात का है?

    हां, विक्रम ने बताया कि पीएम ने कुछ भी राजनीतिक बातचीत नहीं की.

    आगे उन्होंने अफसोस या कहिए इस बात का मलाल जाहिर किया कि वह यही गलती कर गए कि कोई सिग्नेचर (पीएम का) नहीं लिए. विक्रम बोले, ‘हम एक ठो यही गलती काम किए. कोई सिग्नेचर-उग्नेचर नहीं लिए.’

    आगे आप वीडियो में देखिए कि पीएम कैसे झालमुड़ी की दुकान पर आते हैं, ऑर्डर करते हैं, प्याज के लिए दुकानदार पूछता है, पीएम 10 रुपये देते हैं और बाद में दुकानदार की तारीफ करने के साथ ही महिलाओं के साथ झालमुड़ी बांटकर खाते हैं.

    विक्रम के पिता का नाम उत्तम और माता का नाम सुनीता देवी है. उन्होंने कहा कि अब प्रधानमंत्री मेरी दुकान में आए, मसाला-मुड़ी खाए, यही बड़ी बात है.

    हां, वीडियो के आखिर में देखिए. पीएम बगल में खड़ी एक महिला को झालमुड़ी खिलाने के लिए हाथ पर रखते हैं. वह प्रणाम की मुद्रा में झालमुड़ी लेती हैं और कहती हैं कि प्रसाद है सर. इसके बाद वह झालमुड़ी को अपने सिर पर चढ़ा लेती हैं. इसी तरह आसपास खड़ी महिलाएं पीएम के हाथों झालमुड़ी खाकर काफी खुश दिखीं.
  • चारधाम यात्रा प्रारंभ…. गैर-सनातनियों के लिए तीन धामों में शर्तें व नियम लागू, एक धाम में सबका स्वागत

    चारधाम यात्रा प्रारंभ…. गैर-सनातनियों के लिए तीन धामों में शर्तें व नियम लागू, एक धाम में सबका स्वागत


    देहरादून।
    अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) के शुभ अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम (Gangotri and Yamunotri shrines) के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड (Uttarakhand) की चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) शुरू हो गई है। पहली पूजा प्रधानमंत्री मोदी के नाम से की गई। इस बार सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। साथ ही मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन और कैमरों पर प्रतिबंध लगाया गया है। महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में तीन धामों में गैर-सनातनियों के प्रवेश के लिए विशेष शर्तें एवं नियम लागू हैं जबकि एक धाम में सभी का स्वागत किया जाएगा। यात्रा के लिए अब तक लाखों श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।


    चारधाम यात्रा शुरू

    अक्षय तृतीया के मौके पर रविवार को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दरवाजे भक्तों के लिए फिर से खुल गए। इसके साथ ही उत्तराखंड में चारधाम यात्रा शुरू हो गई।


    पहली पूजा प्रधानमंत्री मोदी के नाम

    उत्तरकाशी जिले में मौजूद गंगोत्री और यमुनोत्री दोनों धामों में पहली पूजा प्रधानमंत्री मोदी के नाम से की गई। गंगोत्री के कपाट खुलने के समय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी वहां मौजूद रहे जहां उन्होंने यात्रा की सफलता और देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।


    गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर के खुले कपाट

    धार्मिक विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गंगोत्री मंदिर के कपाट अपराह्न करीब 12:15 बजे और यमुनोत्री मंदिर के कपाट 12:35 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। CM धामी ने कहा कि उत्तराखंड के चारधाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।


    यहां गैर सनातनियों को देना होगा हलफनामा

    इस साल 3 धामों में गैर सनातनियों के प्रवेश को लेकर अलग-अलग शर्तें हैं। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने दोनों मंदिर परिसरों में प्रवेश के लिए सनातन धर्म के प्रति आस्था का हलफनामा अनिवार्य किया है।

    गंगोत्री मंदिर समिति ने पंचगव्य के बाद एंट्री
    वहीं गंगोत्री मंदिर समिति ने पंचगव्य (गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी) ग्रहण करने के बाद ही धाम में एंट्री की अनुमति देने की घोषणा की है।


    यमुनोत्री धाम में सबका स्वागत

    दूसरी ओर यमुनोत्री मंदिर समिति ने अलग रुख अपनाते हुए बिना जाति-धर्म पूछे श्रद्धाभाव से आने वाले सभी श्रद्धालुओं के स्वागत का निर्णय लिया है।

    मोबाइल फोन और कैमरे पूरी तरह बैन
    इस बार चारों धामों के मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन और कैमरों के इस्तेमाल पर पूरी तरह बैन लगाया गया है। पिछले साल चारधाम यात्रा में 51 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे। वहीं इस साल अब तक करीब 19 लाख श्रद्धालु ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।


    कब खुलेंगे केदारनाथ और बदरीनाथ मंदिर के कपाट?

    उत्तराखंड के चारधामों में शामिल अन्य दो धाम-रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल को जबकि चमोली जिले के बदरीनाथ मंदिर के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे। बता दें कि ये चारों धाम सर्दियों में भारी बर्फबारी और भीषण ठंड के कारण हर साल अक्टूबर-नवंबर में बंद कर दिए जाते हैं। ये धाम अप्रैल-मई में दोबारा खोले जाते हैं।

  • महिला आरक्षण पर राजनीति…. कांग्रेस बोली- LS की वर्तमान संख्या के आधार पर तुरंत इसे लागू करे सरकार

    महिला आरक्षण पर राजनीति…. कांग्रेस बोली- LS की वर्तमान संख्या के आधार पर तुरंत इसे लागू करे सरकार


    नई दिल्ली।
    कांग्रेस (Congress) ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) पर महिलाओं के लिए आरक्षण के मुद्दे पर घड़ियाली आंसू बहाने का आरोप लगाया और मांग की कि लोकसभा की वर्तमान संख्या में आरक्षण को तत्काल लागू किया जाए। विपक्षी दल ने यह भी दावा किया कि 17 अप्रैल को लोकसभा (Lok Sabha) में जो विधेयक पारित नहीं सका वह महिला आरक्षण विधेयक नहीं बल्कि परिसीमन विधेयक था। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत (Supriya Shrinet) ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक संसद द्वारा 21 सितंबर, 2023 को सर्वसम्मति से पारित किया गया था और अब यह संविधान का हिस्सा है। उन्होंने यहां प्रेसवार्ता में कहा, ”महिलाओं के लिए आरक्षण विधेयक पराजित नहीं हुआ, बल्कि परिसीमन विधेयक पराजित हुआ है, जिसे आप (सरकार) देश पर थोपना चाहते थे।”

    श्रीनेत ने कहा, ”प्रधानमंत्री मोदी घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं और महिला आरक्षण विधेयक की आड़ में छिप रहे हैं।” श्रीनेत ने एक कार्टून प्रदर्शित किया, जिसमें प्रधानमंत्री के पास 543 आमों से भरी टोकरी दिखाई गई है, लेकिन वह महिलाओं को 33 प्रतिशत हिस्सा देने से इनकार कर रहे हैं और उनसे कह रहे हैं कि वह उन्हें उनका हिस्सा तभी दे सकते हैं जब वह आमों की संख्या बढ़ाकर 850 कर दें, जो विपक्ष उन्हें करने नहीं दे रहा है। संसद में संविधान संशोधन विधेयक के खारिज होने पर प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन पर कांग्रेस नेता ने अपनी पार्टी के रुख को दोहराते हुए कहा कि अगर मोदी वाकई गंभीर हैं, तो उन्हें लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में महिलाओं के लिए तत्काल आरक्षण प्रदान करना चाहिए। सरकार पर हमला करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “आपने इस पर एक शर्त लगा दी है। उस शर्त को हटाइए। आप ही महिला आरक्षण में बाधा डाल रहे हैं, आप पुरुषों को खुश रखना चाहते हैं और उनकी सीटें कम नहीं करना चाहते।”

    मोदी द्वारा महिलाओं से माफी मांगने का जिक्र करते हुए श्रीनेत ने कहा कि प्रधानमंत्री सही थे क्योंकि उन्हें मणिपुर में दंगों के दौरान दो महिलाओं के साथ जो हुआ, हाथरस और उन्नाव में जो हुआ, महिला ओलंपिक खिलाड़ियों के साथ जो हुआ और बिलकीस बानो मामले में दोषियों को जिस तरह सम्मानित किया गया, उसके लिए देश की महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा, ”आप (प्रधानमंत्री) सही थे। महिलाएं अपने अपमान को नहीं भूलतीं। आपसे बेहतर यह बात और कौन जान सकता है?”

    श्रीनेत ने कहा कि 240 सांसदों में से केवल 31 महिलाएं हैं, जो मात्र 12 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि देशभर के 1,654 विधायकों में से केवल 164 महिलाएं हैं, जो 10 प्रतिशत से भी कम है। कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा के 21 मुख्यमंत्रियों में से केवल एक महिला है। श्रीनेत ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने मूल रूप से 1989 में दिवंगत राजीव गांधी के नेतृत्व में महिला आरक्षण पेश किया था, जिसका अटल बिहारी वाजपेयी, एल के आडवाणी, जसवंत सिंह और राम जेठमलानी जैसे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने विरोध किया था। परिसीमन के मुद्दे पर, कांग्रेस प्रवक्ता ने लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत आनुपातिक वृद्धि के प्रधानमंत्री के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि मसौदा विधेयक में इसका कहीं भी उल्लेख नहीं है।

  • देश में LPG की खपत में गिरावट, मार्च में 13 प्रतिशत घटकर 24 लाख टन पहुंची

    देश में LPG की खपत में गिरावट, मार्च में 13 प्रतिशत घटकर 24 लाख टन पहुंची


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया संकट (West Asia Crisis) के चलते आपूर्ति शृंखला (Supply) में आई रुकावटों के चलते भारत (India) में एलपीजी (LPG) की खपत मार्च में तेजी से घटी। इस दौरान एलपीजी की खपत करीब 13% घटकर 23.79 लाख टन रह गई, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने यह 27.29 लाख टन थी।

    पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के अनुसार, मार्च में घरेलू एलपीजी आपूर्ति 8.1 फीसदी घटकर 22.19 लाख टन रह गई, जबकि गैर-घरेलू उपभोक्ताओं को दी जाने वाली आपूर्ति में लगभग 48 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई। थोक एलपीजी बिक्री 75% कम हुई। इस बीच, 39,000 से अधिक पीएनजी उपभोक्ताओं ने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर किए हैं।


    मार्च में स्थिर ही विमानन ईंधन की खपत

    विमानन ईंधन की खपत मार्च में लगभग स्थिर रही और यह करीब 8.07 लाख टन दर्ज की गई, जो पिछले साल के लगभग बराबर है। दूसरी ओर, पेट्रोल और डीजल की मांग मजबूत रही। मार्च में पेट्रोल की खपत 7.6 फीसदी बढ़कर 37.8 लाख टन हो गई, जबकि डीजल की खपत 8.1 फीसदी बढ़कर 87.27 लाख टन हो गई।

    भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60 फीसदी आयात के जरिए पूरा करता है, जिसका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। सैन्य तनाव के कारण इस अहम समुद्री मार्ग में बाधा आई, जिससे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से आपूर्ति प्रभावित हुई। स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए होटल, उद्योग और अन्य वाणिज्यिक क्षेत्रों के लिए एलपीजी आपूर्ति में कटौती की।

  • बंगाल में रैलियों के बीच देसी अंदाज में दिखे PM मोदी…. स्ट्रीट फूड झालमुड़ी का लुत्फ उठाया

    बंगाल में रैलियों के बीच देसी अंदाज में दिखे PM मोदी…. स्ट्रीट फूड झालमुड़ी का लुत्फ उठाया


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में चुनावी रैलियों (Election Rallies) के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का देसी अंदाज देखने को मिला. पीएम मोदी ने रविवार को झाड़ग्राम में अपना काफिला रुकवाया और वहां के मशहूर स्ट्रीट फूड ‘झालमुड़ी’ (Famous street food ‘Jhalmuri’) का लुत्फ उठाया.

    जब पीएम मोदी का काफिला झाड़ग्राम की एक छोटी सी दुकान के पास रुका और खुद प्रधानमंत्री गाड़ी से उतरकर झालमुड़ी के स्टाल की ओर बढ़े, तो वहां मौजूद लोगों ने उन्हें घेर लिया.

    प्रधानमंत्री ने इस पल की तस्वीरें और वीडियो अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर भी शेयर किए. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘रविवार की व्यस्तता के बीच पश्चिम बंगाल में चार जनसभाओं के दौरान, मैंने झाड़ग्राम में कुछ स्वादिष्ट मसालेदार झालमुड़ी का स्वाद चखा.’


    पीएम मोदी और दुकानदार के बीच हुई बातचीत

    पीएम मोदी- भाई, हमें अपना झालमुड़ी खिलाओ. कितने का होता है आपका झालमुड़ी
    दुकानदार- आप कितने का खाएंगे?
    पीएम मोदी- अच्छे वाला कितने का होता है?
    दुकानदार- 10 या 20 रुपए.
    पीएम मोदी- हां जो भी है बना दो.
    दुकानदार- झाल थोड़ा खाएंगे आप?
    पीएम मोदी- हां खाएंगे बिल्कुल खाएंगे. कितना, 10 रुपए देना है, नहीं भाई ऐसा नहीं.
    दुकानदार- प्याज खाते हैं सर आप?
    पीएम मोदी- हां प्याज खाते हैं, बस दिमाग नहीं खाते.
    दुकानदार- आपसे मिलकर हमें बहुत खुशी हुई।

    प्रधानमंत्री ने अपनी जेब से पैसे निकाले और दुकानदार को दिए तो दुकानदार हिचक रहा था. लेकिन पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि वो पैसे ले. इसके बाद पीएम मोदी ने वहां मौजूद लोगों के साथ मिलकर झालमुड़ी खाई।


    नमक नहीं खाते प्रधानमंत्री

    दुकानदार ने जब पूछा कि क्या वो झालमुड़ी में सबकुछ डालें, तो पीएम मोदी ने अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए जवाब दिया, ‘निमक (नमक) को छोड़कर सब कुछ.’ उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य कारणों से वो नमक नहीं खा रहे हैं।

    बता दें कि पीएम मोदी ने आज बंगाल के पुरुलिया, मेदिनीपुर और बांकुड़ा में विशाल जनसभा को संबोधित किया. इस दौरान उन्हें टीएमसी पर जमकर निशाना साधा और दावा किया कि इस बार बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने जा रही है।

  • नारी शक्ति के मुद्दे पर घिरी राजनीति, सम्राट चौधरी बोले विपक्ष नहीं चाहता आम महिलाओं को मिले हक

    नारी शक्ति के मुद्दे पर घिरी राजनीति, सम्राट चौधरी बोले विपक्ष नहीं चाहता आम महिलाओं को मिले हक


    नई दिल्ली। महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के पारित न होने के बाद देश की राजनीति में आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यह नारी शक्ति के सम्मान के खिलाफ है और लोकतांत्रिक मूल्यों को आघात पहुंचाने वाला कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की सोच सीमित है और वह समाज के गरीब और वंचित वर्ग की महिलाओं को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहता।

    पटना में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक अवसर था जब देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को एक नई दिशा दी जा सकती थी, लेकिन विपक्षी दलों ने इसका विरोध कर अपनी मानसिकता स्पष्ट कर दी। उन्होंने कहा कि कुछ दलों की सोच केवल अपने परिवार तक सीमित है और वे आम परिवारों की महिलाओं को अवसर देने के पक्ष में नहीं हैं।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि यह विधेयक पारित हो जाता तो बिहार जैसे राज्य में बड़ी संख्या में महिलाएं विधानसभा और संसद में पहुंच सकती थीं। वर्तमान स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि महिलाओं की भागीदारी अभी भी अपेक्षाकृत कम है, जबकि संभावनाएं कहीं अधिक हैं। उनके अनुसार यह विधेयक महिलाओं को समान अवसर देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता था।

    उन्होंने केंद्र और राज्य स्तर पर महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि पंचायत और नगर निकाय चुनावों में महिलाओं को आरक्षण देने से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। बड़ी संख्या में महिलाएं निर्वाचित होकर नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं, जो समाज में बदलाव का संकेत है।

    सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि प्रस्तावित विधेयक के माध्यम से संसद में महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती थी और नीति निर्माण में उनकी भूमिका मजबूत होती। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे इस परिवर्तन को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं और उनके विरोध का जवाब जनता समय आने पर देगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के अधिकारों और समान अवसर के मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर देखने की आवश्यकता है। यह केवल एक विधेयक का विषय नहीं बल्कि समाज में समानता और न्याय स्थापित करने का प्रश्न है।

    इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है और विभिन्न दलों के बीच इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। महिला आरक्षण को लेकर देशभर में चर्चा जारी है और यह मुद्दा आने वाले समय में भी राजनीतिक विमर्श का केंद्र बना रह सकता है।

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    संक्षिप्त विवरण
    महिला आरक्षण विधेयक पर सियासी विवाद गहरा गया है। सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

  • बंगाल चुनाव में सख्ती की नई परिभाषा 100 मीटर के दायरे में सिर्फ वोटर को एंट्री EC का बड़ा फैसला

    बंगाल चुनाव में सख्ती की नई परिभाषा 100 मीटर के दायरे में सिर्फ वोटर को एंट्री EC का बड़ा फैसला


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में आगामी चुनाव को लेकर सुरक्षा और स्थिति सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने कड़े कदम उठाए हैं। यह नियम विशेष रूप से 152 क्षेत्रों में लागू होता है, जहां 23 अप्रैल को मतदान होना है। इस चरण का मुख्य उद्देश्य किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि या अवैध प्रवेश को भी शामिल करना है। अधिकारियों के अनुसार इस समूह के बाहरी बूथ स्तर के अधिकारी और अन्य सरकारी कर्मचारी शामिल होंगे जो कंपनियों के दस्तावेजों की प्राथमिक जांच करेंगे।

    इसके अलावा मतदान केंद्रों में प्रवेश से पहले दो अलग-अलग जगहों पर पहचान सत्यापन की व्यवस्था की गई है, यानी कि लेक में दो अलग-अलग स्थानों पर अपने दस्तावेज की पुष्टि करानी होगी, इसके बाद ही उन्हें वोट की मंजूरी पर वोट दिया जाएगा, इस बहुसांस्कृतिक जांच प्रणाली का उद्देश्य फर्जी मतदान पूरी तरह से तरह की पुष्टि करना है, ताकि केवल वास्तविक सामग्री ही अपने अधिकार का उद्देश्य कर सके। अभिलेख वितरण को लेकर भी आयोग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं।

    अगर किसी मतदाता सूची में मौजूद अधिकारी सूची में नाम और फोटो का मिलान करके उसकी पहचान सुनिश्चित की जाएगी और सही पाए जाने पर उसे वोट की अनुमति दी जाएगी।इस बीच पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने अधिकारियों के खिलाफ स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मतदान के दिन किसी भी प्रकार की अनियमितता को लेकर उन्हें चेतावनी दी गई है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरा सी भी आपत्ति सामने आ सकती है, संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें निलंबन तक शामिल हो सकता है।

    सभी जिला अधिकारियों के माध्यम से ऑनलाइन बैठकों की तैयारी में रहने के निर्देश दिए गए हैं और किसी भी भव्य घटना की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।कुल नवीनतम इलेक्ट्रॉनिक्स आयोग इस रणनीति में इस बात पर जोर दिया गया है कि वह पश्चिम बंगाल में चुनाव में पूरी तरह से स्वतंत्र पद और पद के पदों के लिए अधिकार प्राप्त करने की कोशिश कर रही है।

  • न पढ़ाई न कमाई न दवाई की टिप्पणी से गरमाई सियासत, झारग्राम रैली ने बढ़ाया राजनीतिक तापमान

    न पढ़ाई न कमाई न दवाई की टिप्पणी से गरमाई सियासत, झारग्राम रैली ने बढ़ाया राजनीतिक तापमान

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के झारग्राम में आयोजित एक जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की मौजूदा स्थिति पर तीखा प्रहार करते हुए आगामी चुनावों को राज्य की पहचान और विकास से जोड़ दिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यह चुनाव केवल राजनीतिक परिवर्तन का अवसर नहीं बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक संतुलन को सुरक्षित रखने का निर्णायक क्षण है। उनके अनुसार राज्य की पहचान पर संकट गहराता जा रहा है और इसे बचाने के लिए जनता को जागरूक होकर निर्णय लेना होगा।

    प्रधानमंत्री ने राज्य में लंबे समय से चली आ रही शासन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीते वर्षों में आम जनता को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा है। उन्होंने विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सिंचाई जैसी आवश्यक सेवाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि विकास के वादों के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहे हैं, जिससे लोगों में निराशा बढ़ी है।

    उन्होंने आरोप लगाया कि शासन की प्राथमिकताएं आम नागरिकों की जरूरतों से भटक गई हैं। उनके अनुसार राज्य में ऐसी परिस्थितियां बन रही हैं जहां स्थानीय लोगों की अपेक्षाओं और अधिकारों को पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सामाजिक संतुलन और क्षेत्रीय अस्मिता के लिए चुनौती बनती जा रही है और इसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।

    प्रधानमंत्री ने बिजली आपूर्ति और बुनियादी सेवाओं की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई इलाकों में बिजली की अनियमितता लोगों के जीवन को प्रभावित कर रही है, जबकि आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने इसे आम जनता के लिए कठिन स्थिति बताते हुए कहा कि विकास का लाभ हर वर्ग तक समान रूप से पहुंचना चाहिए और इसके लिए पारदर्शी व्यवस्था जरूरी है।

    अपने संबोधन में उन्होंने भविष्य की योजनाओं का उल्लेख करते हुए भरोसा दिलाया कि यदि राज्य में नई सरकार बनती है तो बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में व्यापक सुधार किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि लोगों को राहत देने और जीवन स्तर सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऊर्जा क्षेत्र में सुधार के जरिए आम नागरिकों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करने का प्रयास किया जाएगा।

    महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के प्रयासों को पर्याप्त समर्थन नहीं मिला है। उन्होंने इसे समाज के विकास के लिए आवश्यक बताते हुए कहा कि महिलाओं को समान अवसर मिलना चाहिए और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना हर स्तर पर जरूरी है।

    सभा में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति के बीच दिया गया यह संबोधन राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा करने वाला माना जा रहा है। राजनीतिक माहौल में तेजी से बदलाव के संकेत मिल रहे हैं और यह भाषण आने वाले चुनावी परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है।

  • मुख्यमंत्री की पूजा के साथ शुरू हुई पवित्र यात्रा भक्तिमय माहौल से गूंजा उत्तराखंड..

    मुख्यमंत्री की पूजा के साथ शुरू हुई पवित्र यात्रा भक्तिमय माहौल से गूंजा उत्तराखंड..


    नई दिल्ली। उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित चार धाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ रविवार को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हो गया। इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंगोत्री धाम में विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की और यात्रा की औपचारिक शुरुआत का संदेश दिया। मंदिरों को भव्य रूप से फूलों से सजाया गया और पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण देखने को मिला। जैसे ही कपाट खुले, देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने दर्शन के लिए उमड़कर अपनी आस्था प्रकट की।

    यात्रा के पहले दिन ही तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली, जिसे देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और प्रबंधन के इंतजाम किए थे। पूरे आयोजन के दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्रों जैसे ढोल दमाऊ और रानसिंघा की गूंज ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ साथ सांस्कृतिक परंपराओं का भी सुंदर समावेश देखने को मिला, जिससे यह आयोजन और अधिक भव्य और जीवंत बन गया।

    इसी क्रम में केदारनाथ धाम की यात्रा की शुरुआत भी ओंकारेश्वर मंदिर से भगवान केदारनाथ की डोली को रवाना करने के साथ हुई। पंचमुखी प्रतिमा को वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति संगीत के बीच एक भव्य शोभायात्रा के रूप में ले जाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पुजारी और साधु संत शामिल हुए जिन्होंने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस धार्मिक आयोजन में भाग लिया। मंदिर परिसर को सजाने के लिए बड़ी मात्रा में फूलों का उपयोग किया गया जिससे वातावरण अत्यंत पवित्र और आकर्षक बन गया।

    डोली यात्रा के दौरान पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ औपचारिकता का भी विशेष ध्यान रखा गया। यात्रा मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने स्वागत किया और भंडारे का आयोजन कर सेवा भाव का प्रदर्शन किया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार डोली यात्रा विभिन्न पड़ावों से होते हुए आगे बढ़ेगी और तय समय पर केदारनाथ धाम पहुंचेगी जहां विधिवत पूजा के बाद मंदिर के कपाट खोले जाएंगे।

    चार धाम यात्रा के अंतर्गत आने वाले केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के कपाट भी निर्धारित तिथियों पर खोले जाएंगे, जिसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्रशासन और संबंधित विभागों ने यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए हैं ताकि यात्रा सुचारु रूप से संचालित हो सके। चिकित्सा, परिवहन और आवास की व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है।

    चार धाम यात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत गहरा है और हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा में भाग लेते हैं। यह यात्रा न केवल आस्था का प्रतीक है बल्कि हिमालयी क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखने का माध्यम है। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि देखने को मिल रही है।