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  • शेयर बाजार में भारी नुकसान के बाद परिवार खत्म करने का आरोप, शिक्षक दंपति और दो मासूम बच्चों की मौत से दहला महाराष्ट्र

    शेयर बाजार में भारी नुकसान के बाद परिवार खत्म करने का आरोप, शिक्षक दंपति और दो मासूम बच्चों की मौत से दहला महाराष्ट्र

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत का मामला सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल है। प्रारंभिक जांच में आर्थिक दबाव और निवेश में हुए कथित नुकसान को घटना से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच सभी पहलुओं से की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा।

    घटना बार्शी तहसील के एक गांव की बताई जा रही है, जहां एक स्कूल प्रधानाध्यापक, उनकी पत्नी और दो बच्चों के शव उनके घर से बरामद किए गए। मृतकों में दंपति के साथ उनके दोनों नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं। एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत की खबर सामने आते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग सक्रिय हो गया।

    जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह जब नियमित रूप से दूध पहुंचाने वाला व्यक्ति घर पहुंचा तो काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला। स्थिति असामान्य लगने पर उसने आसपास के लोगों को सूचना दी। पड़ोसियों ने भी कई बार संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से घर का दरवाजा खोला गया, जहां परिवार के चारों सदस्य मृत अवस्था में पाए गए।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने पूरे घर का निरीक्षण किया और घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए। जांच के दौरान पुलिस को एक विस्तृत हस्तलिखित नोट भी मिला है, जिसकी सामग्री का परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यह दस्तावेज मामले की पृष्ठभूमि और परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि परिवार का मुखिया शेयर बाजार में निवेश से जुड़ा हुआ था और हाल के समय में उसे भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा था। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव का घटना से कोई संबंध था। हालांकि अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों का सत्यापन किया जाएगा।

    पुलिस ने चारों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मेडिकल रिपोर्ट और फोरेंसिक विश्लेषण के आधार पर मौत के वास्तविक कारणों का निर्धारण किया जाएगा। साथ ही परिवार के परिचितों, रिश्तेदारों और आसपास के लोगों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि घटना से पहले की परिस्थितियों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

    इस घटना ने एक बार फिर आर्थिक दबाव, निवेश संबंधी जोखिमों और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चर्चा को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि वित्तीय चुनौतियों के दौरान समय पर परामर्श, पारिवारिक सहयोग और पेशेवर सहायता बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी भी प्रकार के आर्थिक संकट का समाधान संवाद और उचित सलाह के माध्यम से तलाशा जाना चाहिए।

    फिलहाल पुलिस मामले की हर संभावित दिशा में जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और बरामद दस्तावेजों के अध्ययन के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।

  • फ्लाइट के बाथरूम में रची गई सोना तस्करी की हाईटेक साजिश नाकाम, स्पीकर बॉक्स से निकला 2.8 किलो विदेशी सोना

    फ्लाइट के बाथरूम में रची गई सोना तस्करी की हाईटेक साजिश नाकाम, स्पीकर बॉक्स से निकला 2.8 किलो विदेशी सोना

    नई दिल्ली । देश में सोना तस्करी के नए-नए तरीकों के बीच अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया। कस्टम विभाग ने दुबई से अहमदाबाद पहुंची एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान के टॉयलेट में छिपाकर रखा गया बड़ी मात्रा में विदेशी सोना बरामद किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि तस्करों ने विमान के बाथरूम में लगे साउंड सिस्टम का इस्तेमाल सोने को छिपाने के लिए किया था।

    कस्टम अधिकारियों को विमान में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद विस्तृत तलाशी अभियान चलाया गया। जांच के दौरान विमान के केबिन और विभिन्न तकनीकी हिस्सों की बारीकी से पड़ताल की गई। जब टीम विमान के टॉयलेट तक पहुंची तो वहां एक असामान्य स्थिति दिखाई दी। अधिकारियों ने तकनीकी विशेषज्ञों और विमान इंजीनियरों की सहायता से टॉयलेट में लगे जनरल अनाउंसमेंट सिस्टम के स्पीकर बॉक्स की जांच की।

    स्पीकर यूनिट को खोलने पर उसके भीतर दो विशेष पैकेट मिले, जिन्हें काले रंग की इलेक्ट्रिकल टेप से मजबूती से लपेटा गया था। पैकेटों को बाहर निकालकर खोला गया तो उनके अंदर 24 विदेशी सोने के बिस्किट बरामद हुए। बरामद सोने का कुल वजन लगभग 2.8 किलोग्राम बताया गया है, जबकि इसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 4.26 करोड़ रुपये आंकी गई है।

    जांच एजेंसियों का मानना है कि तस्करों ने सोने को विमान के टॉयलेट में छिपाकर रखने की सुनियोजित रणनीति अपनाई थी। आशंका है कि विमान के अहमदाबाद पहुंचने के बाद कोई स्थानीय संपर्क, ग्राउंड स्टाफ का सदस्य अथवा कोई अन्य व्यक्ति इसे निकालकर आगे पहुंचाने वाला था। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के कारण यह पूरी योजना सफल नहीं हो सकी और सोना बरामद कर लिया गया।

    अधिकारियों के अनुसार तलाशी के दौरान विमान में मौजूद किसी भी यात्री या कर्मचारी ने बरामद सोने पर अपना दावा नहीं किया। इससे यह संकेत मिलता है कि तस्करी में शामिल व्यक्ति ने पकड़े जाने के डर से सोने को वहीं छोड़ दिया होगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

    कस्टम विभाग अब उड़ान से जुड़े दस्तावेजों, यात्री विवरण, क्रू रिकॉर्ड और विमान की गतिविधियों की जांच कर रहा है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि सोना विमान के भीतर किसने रखा और इसके पीछे कौन-सा तस्करी नेटवर्क सक्रिय था। जांच एजेंसियां संभावित सहयोगियों और संपर्क सूत्रों की भी पहचान करने में जुटी हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय तस्करी गिरोह लगातार नए और तकनीकी रूप से जटिल तरीके अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। विमान के टॉयलेट में लगे स्पीकर सिस्टम का उपयोग कर सोना छिपाने की यह घटना सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी मानी जा रही है। फिलहाल बरामद सोने को कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त कर लिया गया है और संबंधित प्रावधानों के अंतर्गत आगे की कार्रवाई जारी है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर इस पूरे नेटवर्क से जुड़े नए खुलासे सामने आ सकते हैं।

  • अदिति यादव पर अभद्र टिप्पणी मामले में सख्त हुए सीएम योगी, बोले- बेटी का अपमान किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं

    अदिति यादव पर अभद्र टिप्पणी मामले में सख्त हुए सीएम योगी, बोले- बेटी का अपमान किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं

    नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पुत्री अदिति यादव के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा कि किसी भी बेटी के सम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता और ऐसी टिप्पणियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें जैसे ही इस मामले की जानकारी मिली, उन्होंने पुलिस अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करने और प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बेटियों के प्रति सम्मान भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा किसी भी परिस्थिति में अपमानजनक भाषा को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि समाज में बेटियों और महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अपनी भाषा और व्यवहार में विशेष संयम बरतना चाहिए, क्योंकि उनके शब्दों का व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है।

    इस दौरान उन्होंने राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों को भी मर्यादित भाषा के उपयोग की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी व्यक्ति, परिवार, महिला, बुजुर्ग या सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक शिष्टाचार के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत हमलों में बदलने की प्रवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन व्यक्तिगत जीवन और परिवार के सदस्यों को विवादों में घसीटना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने सभी दलों से अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को जिम्मेदार आचरण के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।

    मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर व्यापक चर्चा देखने को मिली। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और समर्थकों ने महिलाओं के सम्मान और सोशल मीडिया पर बढ़ती अभद्र भाषा के उपयोग को लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं। कई लोगों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जवाबदेही और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों के विस्तार के साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियों और व्यक्तिगत हमलों के मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई ऐसे मामलों पर नियंत्रण स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को महिलाओं के सम्मान, सार्वजनिक संवाद की मर्यादा और सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग से जुड़े व्यापक मुद्दों के संदर्भ में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी रहेगी।

  • TMC में बड़ा सियासी संकट, 19 सांसद अलग गुट बनाने की तैयारी में, NDA के साथ जाने के संकेत

    TMC में बड़ा सियासी संकट, 19 सांसद अलग गुट बनाने की तैयारी में, NDA के साथ जाने के संकेत


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर अंदरूनी कलह अब संसद तक पहुंचती नजर आ रही है। पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 19 सांसदों के एक अलग गुट बनाने के दावे ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। यह बागी समूह सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अलग गुट के रूप में मान्यता देने की मांग कर सकता है और साथ ही सदन में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ बैठने की अनुमति भी चाहता है।

    सूत्रों और बागी गुट के नेताओं के अनुसार, सांसद खुद को “असली टीएमसी” के रूप में मान्यता देने की मांग करेंगे। इस समूह की ओर से वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार को नेता और शताब्दी रॉय को उपनेता के रूप में प्रस्तावित किए जाने की बात भी सामने आई है। साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि उनके पास 19 सांसदों का समर्थन है और अन्य सांसदों के लिए भी दरवाजे खुले हैं।

    बताया जा रहा है कि इस घटनाक्रम के बाद NDA की संसदीय ताकत बढ़ सकती है, जिससे संसद में विपक्षी समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष और आगे चलकर चुनाव आयोग (EC) की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

    बागी गुट के नेताओं ने आरोप लगाया है कि पार्टी में आंतरिक असंतोष की वजह नेतृत्व शैली और संगठनात्मक फैसले हैं। उनका कहना है कि पहले जब तक ममता बनर्जी का सीधा नियंत्रण था, स्थिति स्थिर थी, लेकिन अब संगठन में बदलाव के बाद असंतोष बढ़ा है। कुछ नेताओं ने यहां तक दावा किया है कि पार्टी अब “कॉरपोरेट ढांचे” की तरह काम कर रही है, जहां जमीनी नेताओं की अनदेखी हो रही है।

    बागी सांसदों का यह भी तर्क है कि वे जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं और अपने क्षेत्रों के विकास कार्यों के लिए केंद्र सरकार के साथ बेहतर समन्वय आवश्यक है। इसी वजह से वे NDA के साथ जुड़कर काम करने की बात कर रहे हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि पहले लोकसभा अध्यक्ष से मान्यता लेने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी और उसके बाद चुनाव आयोग का रुख किया जाएगा।

    इसी बीच, पार्टी के भीतर अन्य स्तरों पर भी असंतोष के संकेत सामने आए हैं। वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी और बैठक से दूरी बनाए जाने की खबरों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। कुछ नेताओं ने संगठनात्मक फैसलों और रणनीतिक प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं, जिससे TMC के भीतर गुटबाजी की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजरें लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय और चुनाव आयोग की संभावित भूमिका पर टिकी हुई हैं, जो आगे की राजनीतिक दिशा तय कर सकते हैं।

  • तेजी से आगे बढ़ रहा मानसून…. 25 राज्यों में 18 जून तक आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट

    तेजी से आगे बढ़ रहा मानसून…. 25 राज्यों में 18 जून तक आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट


    नई दिल्ली।
    तेजी से आगे बढ़ रहे दक्षिण्-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) और उत्तरी सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से मौसम (Weather:) में व्यापक बदलाव आया है। पिछले 24 घंटों के दौरान जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) से तटीय कर्नाटक तक गरज और चमक के साथ बारिश हुई है। साथ ही, अलग-अलग क्षेत्रों में 50-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान ने भी कहर बरपाया है। बिहार में बिजली गिरने से 10 लोगों की जान चली गई है, पंजाब में भी वर्षा जनित घटनाओं में 3 लोगों की जान चली गई है। मौसम में यह बदलाव कम से कम 18 जून तक जारी रहने की प्रबल संभावना है।

    भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर, हापुड़, बिजनौर, शामली, मुरादाबाद, संभल, हाथरस और मथुरा में आंधी-तूफान और गरज के साथ बारिश हुई। हरियाणा के गोहाना, सोनीपत और रोहतक समेत कई जिलों में भी ऐसा ही हाल रहा। राजस्थान के डीग, भरतपुर, बयाना और धौलपुर में भी तेज हवाएं चलीं और छिटपुट बारिश दर्ज की गई। बिहार में बारिश के दौरान बिजली गिरने से खगड़िया में पांच लोगों की मौत हो गई और 7 लोग झुलस गए, जबकि भागलपुर, मधेपुरा, सहरसा और भोजपुर जिलों में भी वज्रपात से एक-एक लोगों की जान चली गई।

    जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, चंडीगढ़, पंजाब और छत्तीसगढ़ में भी व्यापक वर्षा हुई। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, झारखंड, ओडिशा और तटीय कर्नाटक में भारी बारिश दर्ज की गई। हिमाचल प्रदेश में रोहतांग सहित ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई। कुल्लू और लाहौल घाटी में झमाझम बारिश दर्ज की गई। केरल में कुछ जगहों पर 12-20 सेमी तक वर्षा रिकॉर्ड की गई। असम, बंगाल, त्रिपुरा और तमिलनाडु में कुछ जगहों पर 7-11 सेमी वर्षा हुई। मध्य प्रदेश, कोंकण, महाराष्ट्र और गुजरात में कुछ जगहों पर 40-60 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं। उधर, विदर्भ में कई जगहों पर लू जैसी स्थिति रही और रातें गर्म रहीं।


    18 तक उत्तर-पश्चिम में बदला रहेगा मौसम

    मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम भारत में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में 18 जून तक अलग-अलग स्थानों पर गरज और चमक के साथ बारिश होने और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान जताया है। इस दौरान कुछ जगहों पर बिजली भी गिर सकती है। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, झारखंड, बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और पूर्वोत्तर भारत के असम समेत सभी राज्यों में भी अगले तीन से चार दिनों तक 40-50 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने और मूसलाधार बारिश होने की संभावना जताई है।


    बदरीनाथ हाईवे पांच घंटे बंद रहा

    उत्तराखंड में बदरीनाथ हाईवे पर भनेरपाणी में पहाड़ी से भूस्खलन होने पर करीब पांच घंटे तक वाहनों की आवाजाही ठप रही। इस दौरान हाईवे के दोनों ओर करीब 2,000 तीर्थयात्री फंसे रहे। बाद में कार्यदायी संस्था एनएचआईडीसीएल की जेसीबी ने मलबे का निस्तारण किया। इसके बाद शुक्रवार सुबह आठ बजे वाहनों की आवाजाही सुचारु हो पाई। भनेरपाणी में थोड़ी बारिश होने पर भी मलबा और पत्थर हाईवे पर गिर रहे हैं।


    पूर्वी उत्तर प्रदेश की दहलीज पर मानसून

    दक्षिण-पश्चिम मानसून पूर्वी-उत्तरी उत्तर प्रदेश की सीमा के करीब पहुंच गया है। आईएमडी के अनुसार, शुक्रवार को मानसून प. बंगाल और बिहार के कुछ और भागों एवं ओडिसा व झारखंड के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ गया है। अगले 2-3 दिनों में मानसून के मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बाकी हिस्सों, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और हिस्सों और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में और आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं। इस तरह, तीन दिन की देरी से केरल पहुंचा मानसून 9 दिनों के भीतर ही 19 राज्यों तक पहुंच गया है।


    अल नीनो का साया

    मौसम विभाग के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में इस समय अल नीनो की स्थितियां सक्रिय हैं। मौसम विभाग ने कहा कि समुद्र की सतह के बढ़ते तापमान का असर अब हमारे वायुमंडल पर भी दिखने लगा है। महासागर और वायुमंडल की यह साझा प्रणाली अब पूरी तरह से अल नीनो के लक्षणों को दर्शा रही है। आने वाले महीनों में अल नीनो का प्रभाव और अधिक गहराने की आशंका है। आमतौर पर अल नीनो के सक्रिय होने से भारत में कम बारिश या सूखे जैसे हालात पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है। भारत में इससे पहले आखिरी बार अल नीनो की स्थितियां साल 2023 में देखी गई थीं।

  • LS में ताकत बढ़ाने की तैयारी में NDA…. टारगेट- दो तिहाई बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचना

    LS में ताकत बढ़ाने की तैयारी में NDA…. टारगेट- दो तिहाई बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचना


    नई दिल्ली।
    केंद्र की सत्ता पर काबिज एनडीए (NDA) गठबंधन लोकसभा (Lok Sabha) में अपना कुनबा और ताकत बढ़ाने की तैयारी में है। टीएमसी (TMC) के बागी गुट द्वारा 19 सांसदों के समर्थन का दावा किए जाने के बाद, अब विपक्षी खेमे की एक और बड़ी पार्टी में फूट की खबरें सामने आ रही हैं। सूत्रों की मानें तो अगला नंबर उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना यूबीटी (Shiv Sena – UBT)) का हो सकता है। बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए लोकसभा (Lok Sabha) में दो-तिहाई बहुमत (Two-thirds majority) के आंकड़े के करीब पहुंचने के लिए विपक्ष के कई सांसदों को अपने पाले में लाने की जुगत में लगा हुआ है।


    शिवसेना (UBT) के 6 सांसद कर सकते हैं पाला-बदल

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एनडीए की एकतरफा जीत के बाद से ही उद्धव गुट में बगावत की अटकलें चल रही थीं, लेकिन अब इन चर्चाओं ने काफी जोर पकड़ लिया है। लोकसभा में फिलहाल उद्धव ठाकरे की पार्टी के कुल 9 सांसद हैं। दल-बदल कानून के तहत सदस्यता जाने से बचने के लिए इनमें से कम से कम 6 सांसदों को एक साथ पार्टी छोड़नी होगी और किसी अन्य दल में विलय करना होगा। माना जा रहा है कि इन बागी सांसदों के लिए सबसे मुफीद विकल्प महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना ही होगी।


    मुंबई तक सिमट रहा उद्धव ठाकरे का प्रभाव?

    एकनाथ शिंदे अपनी मजबूत जमीनी पकड़ और आसानी से लोगों के बीच उपलब्ध रहने की छवि के कारण राज्य के बड़े हिस्से में अपने विरोधी गुट को कमजोर करने में सफल रहे हैं। शिंदे ने ठाकरे गुट के कई प्रभावशाली नेताओं को अपने पाले में कर लिया है, जिसके चलते माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे का प्रभाव अब मुख्य रूप से केवल मुंबई तक ही सीमित रह गया है।


    लोकसभा में 360 का आंकड़ा छूने पर NDA की नजर

    संसद में अपने गठबंधन का संख्याबल बढ़ाने की बीजेपी की इस सियासी कवायद के पीछे सबसे बड़ा लक्ष्य दो-तिहाई बहुमत हासिल करना है। फिलहाल लोकसभा में 540 सांसद मौजूद हैं और तीन सीटें खाली हैं। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की नजर किसी भी तरह सदन में दो-तिहाई यानी 360 सांसदों का जादुई आंकड़ा हासिल करने पर है।


    टीएमसी में भी हलचल

    इस मुहिम को तब बल मिला, जब हाल ही में टीएमसी के बागी गुट ने दावा किया कि उनके पास 19 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जो एनडीए सरकार को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। सूत्रों का कहना है कि संसद में संख्याबल बढ़ाने की बीजेपी की यह पूरी मुहिम अंततः इस बात पर भी निर्भर करेगी कि मौजूदा लोकसभा में 360 के जादुई आंकड़े को पार करने का उनका यह मास्टरप्लान जमीनी स्तर पर कितना व्यावहारिक साबित होता है।

  • टीएमसी की अंदरूनी कलह पर सियासी संग्राम, कीर्ति आजाद और निशिकांत दुबे के बीच सोशल मीडिया पर तीखी नोकझोंक के बाद दिखी पारिवारिक गर्माहट

    टीएमसी की अंदरूनी कलह पर सियासी संग्राम, कीर्ति आजाद और निशिकांत दुबे के बीच सोशल मीडिया पर तीखी नोकझोंक के बाद दिखी पारिवारिक गर्माहट

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी हलचल और तृणमूल कांग्रेस के भीतर सामने आ रहे असंतोष के बीच एक दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब तृणमूल कांग्रेस सांसद कीर्ति आजाद और भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे सोशल मीडिया मंच पर आमने-सामने आ गए। हालांकि आरोप-प्रत्यारोप से शुरू हुई यह बहस अंततः राजनीतिक मतभेदों से आगे बढ़कर पुराने व्यक्तिगत और पारिवारिक संबंधों की चर्चा तक पहुंच गई।

    पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब तृणमूल कांग्रेस में कथित असंतोष और दल छोड़ने की चर्चाओं को लेकर कीर्ति आजाद ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों में सेंध लगाने की कोशिशें की जा रही हैं और इसे एक सुनियोजित राजनीतिक अभियान का हिस्सा बताया। इस दौरान उन्होंने कुछ भाजपा नेताओं के नामों का उल्लेख करते हुए पार्टी के खिलाफ तीखे सवाल उठाए।

    कीर्ति आजाद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है और यदि किसी को प्रेस वार्ता करनी है तो उसके लिए उनके आवास का उपयोग भी किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने अपने और कीर्ति आजाद के पुराने राजनीतिक तथा पारिवारिक संबंधों का भी जिक्र किया।

    निशिकांत दुबे ने याद दिलाया कि दोनों नेता लंबे समय तक एक ही राजनीतिक दल में साथ सांसद रह चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कीर्ति आजाद के पिता उनके लिए एक अभिभावक समान थे और उनके परिवार के साथ पुराने संबंध रहे हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कीर्ति आजाद का पैतृक गांव उनके संसदीय क्षेत्र में आता है और वहां के लोगों से उनका वर्षों पुराना जुड़ाव है।

    इस जवाब के बाद राजनीतिक बहस का स्वर कुछ नरम पड़ता दिखाई दिया। कीर्ति आजाद ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके और निशिकांत दुबे के बीच कोई व्यक्तिगत संघर्ष नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें व्यक्तिगत रिश्तों पर हावी नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विचारों में असहमति हो सकती है, लेकिन मनभेद की स्थिति नहीं बननी चाहिए।

    कीर्ति आजाद ने अपने आरोपों को दोहराते हुए कहा कि वे केवल राजनीतिक घटनाक्रमों और दल-बदल से जुड़ी गतिविधियों पर सवाल उठा रहे थे। उनके अनुसार, जिन घटनाओं का वे उल्लेख कर रहे हैं, वे सार्वजनिक रूप से दिखाई दे रही हैं और उन्हें अलग से प्रमाणित करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि इसके साथ उन्होंने व्यक्तिगत रिश्तों का सम्मान बनाए रखने की बात भी कही।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति की उस परंपरा को भी दर्शाता है, जहां तीखे राजनीतिक मतभेदों के बावजूद कई नेताओं के बीच व्यक्तिगत संबंध और आपसी सम्मान कायम रहता है। सोशल मीडिया के दौर में जहां राजनीतिक बहसें अक्सर कटुता का रूप ले लेती हैं, वहीं इस मामले में अंततः संवाद का स्वर अपेक्षाकृत संयमित दिखाई दिया।

    तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी राजनीतिक गतिविधियों और कथित असंतोष को लेकर चर्चाएं अभी भी जारी हैं। ऐसे में कीर्ति आजाद और निशिकांत दुबे के बीच हुई यह बहस केवल दो नेताओं के बीच की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि मौजूदा राजनीतिक माहौल की झलक भी मानी जा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है, लेकिन फिलहाल दोनों नेताओं ने यह संकेत दिया है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत सम्मान और संवाद की परंपरा कायम रहनी चाहिए।

  • पीओजेके में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर चिंता गहराई, मानवाधिकार और नागरिक सुरक्षा पर फिर छिड़ी बहस

    पीओजेके में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर चिंता गहराई, मानवाधिकार और नागरिक सुरक्षा पर फिर छिड़ी बहस

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में हाल के दिनों में सामने आई हिंसक घटनाओं और विरोध प्रदर्शनों के बाद वहां की स्थिति को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। जम्मू-कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक वर्गों ने इन घटनाओं को गंभीर मानते हुए नागरिकों की सुरक्षा, मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक अधिकारों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया है। क्षेत्र में हुई जनहानि और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने की खबरों ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

    श्रीनगर में राजनीतिक विश्लेषकों और जनप्रतिनिधियों ने पीओजेके की मौजूदा परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वहां लंबे समय से स्थानीय लोगों को विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि क्षेत्र में आम नागरिकों की आवाज को पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा और कई बार लोगों की मांगों तथा समस्याओं को बलपूर्वक दबाने के आरोप सामने आते रहे हैं।

    विश्लेषकों के अनुसार हालिया विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से नागरिक सुविधाओं, आर्थिक राहत और बुनियादी अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर किए जा रहे थे। लेकिन प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और टकराव ने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्था और नागरिक अधिकारों को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।

    कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पीओजेके का मुद्दा केवल राजनीतिक दृष्टिकोण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मानवीय पहलू भी बेहद महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि किसी भी क्षेत्र में नागरिकों को अपनी बात रखने, शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने और सुरक्षित वातावरण में जीवन जीने का अधिकार होना चाहिए। यदि इन मूलभूत अधिकारों पर प्रभाव पड़ता है तो उसका व्यापक सामाजिक असर दिखाई देता है।

    इस पूरे मामले पर जम्मू-कश्मीर के कुछ राजनीतिक नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि किसी भी परिस्थिति में निहत्थे नागरिकों के खिलाफ हिंसा स्वीकार्य नहीं हो सकती। उन्होंने क्षेत्र में शांति, संवाद और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही यह भी कहा गया कि मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया जाना चाहिए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पीओजेके की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत है। वहां के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हालात को लेकर समय-समय पर विभिन्न रिपोर्टें और प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। हालिया घटनाओं ने एक बार फिर इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों की समस्याओं और उनकी सुरक्षा को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार किसी भी क्षेत्र में स्थिरता और विकास तभी संभव है जब नागरिकों को न्यायपूर्ण वातावरण, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सुरक्षा का भरोसा मिले। इसलिए मौजूदा परिस्थितियों में सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता शांति बहाली, संवाद को बढ़ावा देने और प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मानी जा रही है।

    पीओजेके में हुई हालिया घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि क्षेत्र से जुड़े मानवीय और प्रशासनिक मुद्दे अभी भी गंभीर बने हुए हैं। आने वाले समय में वहां की परिस्थितियों और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं पर व्यापक नजर बनी रहने की संभावना है, क्योंकि यह मुद्दा क्षेत्रीय स्थिरता और नागरिक अधिकारों दोनों से जुड़ा हुआ है।

  • वैश्विक नेताओं की शुभकामनाओं पर पीएम मोदी का आभार, भारत-मालदीव समेत कई देशों के साथ संबंध मजबूत करने की दोहराई प्रतिबद्धता

    वैश्विक नेताओं की शुभकामनाओं पर पीएम मोदी का आभार, भारत-मालदीव समेत कई देशों के साथ संबंध मजबूत करने की दोहराई प्रतिबद्धता

    नई दिल्ली । भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें मिल रही शुभकामनाओं का सिलसिला लगातार जारी है। विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों, प्रधानमंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उन्हें बधाई संदेश भेजे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इन संदेशों का जवाब देते हुए वैश्विक साझेदारी, आपसी सहयोग और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया है।

    प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद का धन्यवाद करते हुए कहा कि भारत और मालदीव के बीच संबंध केवल कूटनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, समृद्धि और सतत विकास को लेकर साझा दृष्टिकोण भी मौजूद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत भविष्य में भी दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

    भारत और मालदीव के संबंध पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्रीय रणनीतिक महत्व के कारण लगातार चर्चा में रहे हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी दोनों देशों के बीच सहयोग और विश्वास को आगे बढ़ाने के संकेत के रूप में देखी जा रही है। हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और विकास को लेकर भारत की नीति में मालदीव महत्वपूर्ण भागीदार माना जाता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर क्रिश्चन स्टॉकर की शुभकामनाओं का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने हाल में हुई मुलाकातों और संवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और ऑस्ट्रिया के बीच सहयोग के नए अवसरों पर मिलकर काम करने की दिशा में दोनों देश आगे बढ़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करने की संभावनाएं मौजूद हैं।

    फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब को धन्यवाद देते हुए प्रधानमंत्री ने हालिया कूटनीतिक संपर्कों और रायसीना डायलॉग में उनकी भागीदारी को याद किया। उन्होंने कहा कि भारत और फिनलैंड के बीच सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए दोनों देश प्रतिबद्ध हैं। प्रौद्योगिकी, नवाचार और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भी प्रधानमंत्री मोदी को बधाई देते हुए दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को मजबूत बनाने की इच्छा व्यक्त की। विशेष रूप से मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में जारी प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने भविष्य में संबंधों के और विस्तार की उम्मीद जताई। इसे भारत और न्यूजीलैंड के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने प्रधानमंत्री मोदी की उपलब्धि को भारतीय लोकतंत्र में जनता के विश्वास का प्रतीक बताया। उन्होंने भारत के साथ साझेदारी को और मजबूत करने की इच्छा व्यक्त की। वहीं जापान के पूर्व प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने भी प्रधानमंत्री मोदी को लंबे और सफल कार्यकाल के लिए बधाई देते हुए भविष्य में फिर मुलाकात की उम्मीद जताई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक नेताओं की ओर से मिल रही ये शुभकामनाएं केवल व्यक्तिगत सम्मान का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव को भी दर्शाती हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए जवाबों में भी यही संदेश दिखाई देता है कि भारत आने वाले समय में अपने रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक साझेदारों के साथ सहयोग को और गहरा करने की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ता रहेगा।

  • रूस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारत का संदेश, विदेश सचिव विक्रम मिस्री बोले- भरोसा और आपसी समझ ही भारत-रूस संबंधों की सबसे बड़ी ताकत

    रूस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारत का संदेश, विदेश सचिव विक्रम मिस्री बोले- भरोसा और आपसी समझ ही भारत-रूस संबंधों की सबसे बड़ी ताकत


    नई दिल्ली ।
    भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा देते हुए विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने रूसी फेडरेशन के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस अवसर पर उन्होंने रूस को राष्ट्रीय दिवस की शुभकामनाएं देते हुए दोनों देशों के बीच विकसित हुए मजबूत और भरोसेमंद संबंधों को वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में स्थिरता का महत्वपूर्ण आधार बताया।

    समारोह को संबोधित करते हुए विदेश सचिव ने कहा कि भारत और रूस के संबंध केवल कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक ऐसी साझेदारी है जिसने समय की हर परीक्षा में अपनी मजबूती साबित की है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच स्थापित विश्वास और परस्पर सम्मान ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को निरंतर विस्तार देने में अहम भूमिका निभाई है।

    उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी और अधिक सुदृढ़ हुई है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच नियमित संवाद तथा उच्च स्तरीय यात्राओं ने संबंधों को नई दिशा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि एक-दूसरे की प्राथमिकताओं, हितों और संवेदनशीलताओं को समझने की क्षमता ही इस संबंध की सबसे बड़ी विशेषता है।

    विदेश सचिव ने वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चुनौतियों और तनावों के बीच भारत और रूस के संबंध संतुलन और सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश केवल अपने राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता में भी सकारात्मक योगदान दे रहे हैं।

    उन्होंने पिछले वर्ष आयोजित भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। इस दौरान कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझौतों और सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए। शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, समुद्री सहयोग, आर्कटिक क्षेत्र, कौशल विकास और अकादमिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को नई गति मिली है।

    आर्थिक संबंधों पर चर्चा करते हुए विदेश सचिव ने कहा कि भारत और रूस के बीच व्यापारिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। लगातार दो वित्तीय वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार 60 अरब डॉलर से अधिक रहा है, जो दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की बढ़ती गहराई को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के नेताओं ने वर्ष 2030 तक व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है और इस दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि रक्षा सहयोग भारत-रूस संबंधों का महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है। इसके अलावा नागरिक परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग निरंतर आगे बढ़ रहा है। नई तकनीकों, नवाचार और औद्योगिक विकास के क्षेत्रों में भी सहयोग की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।

    विक्रम मिस्री ने कौशल आधारित मानव संसाधन सहयोग को भविष्य की बड़ी संभावनाओं वाला क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि भारत का विशाल पेशेवर और प्रशिक्षित कार्यबल रूस की बढ़ती कौशल आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके साथ ही दोनों देश नए कनेक्टिविटी और परिवहन नेटवर्क विकसित करने की दिशा में भी कार्य कर रहे हैं, जिससे व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को और गति मिलेगी।

    उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पारंपरिक सहयोग के क्षेत्रों को और मजबूत करने तथा नए अवसरों की तलाश के माध्यम से भारत और रूस की साझेदारी आने वाले वर्षों में और अधिक व्यापक तथा प्रभावशाली बनेगी।