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  • मल्लिकार्जुन खरगे ने क्या कह दिया कि तिलमिला उठी भाजपा? EC और पुलिस दोनों में शिकायत

    मल्लिकार्जुन खरगे ने क्या कह दिया कि तिलमिला उठी भाजपा? EC और पुलिस दोनों में शिकायत

    नई दिल्‍ली। केंद्र और चुनावी राज्य असम की सत्ताधारी पार्टी भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) ने मंगलवार को असम में एक चुनावी रैली के दौरान “हेट स्पीच” देने के आरोप में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ चुनाव आयोग और स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
    पार्टी के अनुसार, खरगे ने ऐसी टिप्पणियां की हैं जो हिंदू मान्यताओं का अपमान करने वाली हैं और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरनाक हैं। असम BJP के प्रवक्ता प्रांजल कलिता ने एक बयान में कहा कि जहां कांग्रेस नेता बार-बार संविधान का पालन करने का दावा करते हैं, वहीं उनके काम “संवैधानिक स्वतंत्रता और सभी धर्मों के प्रति सम्मान की मूल भावना के बिल्कुल विपरीत होते हैं।”

    उन्होंने बताया कि एक शिकायत गुवाहाटी के वशिष्ठ पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई है, और दूसरी शिकायत चुनाव आयोग में दी गई है। कलिता ने कहा कि “खरगे की ओर से RSS-BJP पर प्रतिबंध लगाने की हालिया मांग न केवल राजनीतिक असहिष्णुता को दर्शाती है, बल्कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की बौद्धिक दिवालियापन को भी उजागर करती है।”

    उन्होंने आगे कहा, “असम प्रदेश भारतीय जनता पार्टी 6 अप्रैल को श्रीभूमि जिले के नीलाबाजार में एक चुनावी रैली के दौरान की गई बेहद आपत्तिजनक और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों की कड़ी निंदा करती है। ये टिप्पणियां हिंदू मान्यताओं और परंपराओं का सीधा अपमान थीं।”
    खरगे ने क्या कहा था?

    कलिता ने कहा कि ऐसे बयान न केवल निंदनीय हैं, बल्कि “सामाजिक सौहार्द के लिए खतरनाक भी हैं।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस जानबूझकर “सनातन संस्कृति को कमजोर करने” की कोशिश कर रही है, जबकि “अन्य धर्मों को श्रेष्ठ दिखाने” का प्रयास कर रही है। ऐसा वह केवल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए कर रही है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह के विभाजनकारी रवैये को असम की जनता और पूरे देश ने पहले ही खारिज कर दिया है। बता दें कि खरगे ने चुनाव प्रचार के अंतिम दिन श्रीभूमि जिले के नीलमबाजार में एक रैली के दौरान भाजपा और आरएसएस की विचारधारा को “जहरीला” बताया था और उनकी तुलना “जहरीले सांप” से की थी। इसके अलावा खरगे ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को “अत्यधिक भ्रष्ट और अहंकारी” बताया।

    भाजपा बोली- बयान भड़काऊ और विभाजनकारी

    कलिता ने कहा, “इस भड़काऊ और विभाजनकारी बयानबाजी का गंभीर संज्ञान लेते हुए, असम BJP ने गुवाहाटी के वशिष्ठ पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक FIR दर्ज कराई है और असम राज्य चुनाव आयोग के समक्ष भी एक शिकायत प्रस्तुत की है।” उन्होंने बताया कि सत्ताधारी पार्टी ने चुनावी अभियान के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ और सामाजिक रूप से अशांति फैलाने वाले बयान देने के लिए खड़गे के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की है। असम विधानसभा की 126 सीटों के लिए चुनाव 9 अप्रैल को होंगे और वोटों की गिनती 4 मई को होगी।
    खरगे से माफी की मांग

    दूसरी तरफ, भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में खरगे से माफी की मांग करते हुए उनके बयान को “अशोभनीय और आपत्तिजनक” बताया। पार्टी ने खरगे के गुजरात के लोगों के अनपढ़ वाले बयान पर तीखा हमला बोलकर घेरा।

    प्रसाद ने कहा कि किसी राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष द्वारा पूरे राज्य को “अनपढ़” कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सवाल किया कि क्या महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, विक्रम साराभाई और मोरारजी देसाई जैसे महान व्यक्तित्व भी अनपढ़ थे। उन्होंने कहा कि गुजरात देश की महान भूमि है, जिसने कई महापुरुषों को जन्म दिया और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

    प्रसाद ने कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और नेता प्रियंका गांधी वाड्रा से इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख बताने की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपने अध्यक्ष के बयान से खुद को अलग करना चाहिए और माफी मांगनी चाहिए। प्रसाद ने खरगे के एक अन्य बयान का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इस तरह की भाषा देश में सांप्रदायिक तनाव पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान अल्पसंख्यक समाज को भड़काने और धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने वाले हैं।

  • ईरान युद्ध के बीच दिल्ली के पास आ रहा ढाका; बांग्लादेशी मंत्री संग डोभाल की डिनर डिप्लोमेसी

    ईरान युद्ध के बीच दिल्ली के पास आ रहा ढाका; बांग्लादेशी मंत्री संग डोभाल की डिनर डिप्लोमेसी

    नई दिल्‍ली। मिडिल ईस्ट में तनाव जारी है। इजरायल और अमरिका की ओर से ईरान पर ताबड़तोड़ हमले जारी है। इस बीच बांग्लादेश के विदेश मंत्री भारत पहुंच चुके हैं। भारत-बांग्लादेश संबंधों में नई शुरुआत और आपसी विश्वास बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ढाका के विदेश मंत्री डॉ खलीलुर रहमान से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात डिनर टेबल पर होगी।
    इस दौरान दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती प्रदान करने, हाल के दिनों में उत्पन्न तनाव को दूर करने और साझा हितों पर आधारित स्थिर तथा दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यह मुलाकात प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी सरकार द्वारा दोनों देशों के बीच ‘नए रिश्ते’ की नींव रखने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इस उच्चस्तरीय बैठक में सीमा प्रबंधन, व्यापार, सुरक्षा सहयोग और जल संसाधनों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।

    मोहम्मद यूनुस के अंतरिम सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रह चुके अनुभवी राजनयिक खलीलुर रहमान फरवरी में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की भारी जीत के बाद भारत आने वाले पहले वरिष्ठ मंत्री हैं। उनके साथ प्रधानमंत्री तारिक रहमान के करीबी सलाहकार हुमायून कबीर भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, हाल के वर्षों में बांग्लादेश के साथ संबंधों को मजबूत करने में एनएसए डोभाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। दोनों नेताओं की यह मुलाकात पिछले कुछ समय में उत्पन्न तनाव को दूर कर संबंधों को फिर से पटरी पर लाने का अवसर होगी।
    इनसे भी मिलेंगे बांग्लादेशी मंत्री

    बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि विदेश मंत्री रहमान अपनी भारतीय समकक्षों, जिनमें एनएसए अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर शामिल हैं, से मुलाकातों के दौरान ‘गरिमा, आपसी विश्वास, सम्मान और साझा हितों पर आधारित द्विपक्षीय संबंधों की स्थिरता तथा निरंतर विकास’ पर जोर देंगे।

    बयान में उम्मीद जताई गई है कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच सहयोग को अधिक फलदायी और टिकाऊ बनाने के लिए मजबूत आधार तैयार करेगी।

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, रहमान बुधवार को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी से भी मुलाकात करेंगे।

    पुरी के साथ बैठक खासतौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि ढाका ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से उत्पन्न ऊर्जा संकट से निपटने के लिए अतिरिक्त ईंधन, खासकर डीजल की आपूर्ति की मांग की है।
    इन मुद्दों पर चर्चा संभव

    सूत्रों का कहना है कि चर्चा के प्रमुख मुद्दों में भारतीय वीजा प्रतिबंधों में ढील (खासकर पर्यटकों और व्यापारियों के लिए), 2025 में संबंधों में आई गिरावट के बाद बंद किए गए भारतीय भूमि और समुद्री बंदरगाहों तक पहुंच बहाल करना, दिसंबर में समाप्त हो रही गंगा जल संधि के नवीनीकरण में तेजी लाना और सीमा पर बांग्लादेशी नागरिकों पर भारतीय सीमा सुरक्षा बलों द्वारा गोलीबारी शामिल हैं। वहीं, भारतीय पक्ष का कहना है कि सीमा रक्षक तस्करों और आपराधिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि बांग्लादेशी पक्ष घातक बल के बजाय ऐसे व्यक्तियों की गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की वकालत करता है।

    बता दें कि रहमान की यात्रा से पहले भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने सोमवार को ढाका में प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की और द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की। उच्चायोग ने सोशल मीडिया पर बताया कि बैठक में दोनों देशों की राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप जन-केंद्रित सहयोग पर जोर दिया गया। वर्मा ने कहा कि भारत बांग्लादेश सरकार और लोगों के साथ ‘पारस्परिक हित और लाभ पर आधारित सकारात्मक, रचनात्मक तथा दूरदर्शी दृष्टिकोण’ अपनाते हुए काम करने का इरादा रखता है।
  • कोलकाता एयरपोर्ट पर इंडिगो विमान से टकराया कैटरिंग ट्रक, उड़ान से पहले हादसा; जांच शुरू

    कोलकाता एयरपोर्ट पर इंडिगो विमान से टकराया कैटरिंग ट्रक, उड़ान से पहले हादसा; जांच शुरू


    कोलकाता। इंडिगो के एक पार्क किए गए विमान को नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर मंगलवार को हादसे का सामना करना पड़ा, जब एक कैटरिंग ट्रक विमान के इंजन से टकरा गया। टक्कर से विमान को मामूली नुकसान पहुंचा, हालांकि घटना के समय विमान खाली खड़ा था।

    बे नंबर 51 पर हुआ हादसा

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, एयरपोर्ट के बे नंबर 51 पर खड़ा विमान उस समय ऑपरेशन में नहीं था। इसी दौरान कैटरिंग वाहन स्टार्ट करते वक्त अचानक आगे बढ़ गया और सीधे इंजन से जा टकराया। घटना के बाद एयरपोर्ट अधिकारियों ने तुरंत स्थिति संभाल ली।

    कोई हताहत नहीं

    हादसे में किसी यात्री या स्टाफ के घायल होने की सूचना नहीं है। एयरपोर्ट अथॉरिटी और संबंधित एजेंसियों ने मौके का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है।

    इंडिगो का बयान

    इंडिगो ने कहा कि 7 अप्रैल को एप्रन पर चल रहा थर्ड-पार्टी मानव रहित वाहन खड़े विमान से टकरा गया। विमान को फिलहाल ग्राउंड कर दिया गया है और विस्तृत जांच व मरम्मत के बाद ही दोबारा उड़ान की अनुमति दी जाएगी।

    यह विमान कोलकाता से गुवाहाटी जाने वाली फ्लाइट 6E 6663 के रूप में संचालित होने वाला था। एयरलाइन ने यात्रियों की सुविधा के लिए वैकल्पिक विमान की व्यवस्था कर दी है।

  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में किया महत्वपूर्ण योगदान।

    प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में किया महत्वपूर्ण योगदान।


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के 11 साल पूरे होने के अवसर पर इस योजना को देश की युवा और नारी शक्ति के लिए क्रांतिकारी बताया है। 8 अप्रैल 2015 को शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य देश के बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मुद्रा योजना ने न केवल नए उद्यमियों को सशक्त किया है, बल्कि स्थानीय रोजगार सृजन और आर्थिक समावेशन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

    प्रधानमंत्री ने बताया कि मुद्रा योजना की सफलता का रहस्य इसकी सुलभता और वित्तीय समावेशन में निहित है। बिना गिरवी के ऋण उपलब्ध कराकर इसने अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता कम की है और जमीनी स्तर पर ऋण अनुशासन को मजबूत किया है। योजना के माध्यम से पहली बार उद्यमिता की ओर बढ़ने वाले लोग, विशेषकर महिलाएं और वंचित समुदाय, अब अपने छोटे व्यवसाय शुरू कर रहे हैं। इससे सूक्ष्म व्यवसायों का विकास हुआ है और धीरे-धीरे ये अनौपचारिक उद्यम भारत की औपचारिक आर्थिक संरचना का हिस्सा बन रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि मुद्रा योजना ने युवा शक्ति और नारी शक्ति पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। यह योजना अवसर सुलभ करने, नई पहलों को प्रोत्साहित करने और हर सपने को साकार करने के लिए समर्थन देने वाली आर्थिक सोच की मिसाल है। बीते 11 वर्षों में इस योजना ने करोड़ों युवाओं को उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाया है और देश में रोजगार सृजन की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    मुद्रा योजना के अंतर्गत अब तक कुल 52.37 करोड़ खाते खोले गए हैं और लगभग 33.65 लाख करोड़ रुपये का बिना गारंटी का लोन प्रदान किया गया है। लाभार्थियों में करीब 70 प्रतिशत महिलाएं हैं, जबकि कुल लाभार्थियों में 50 प्रतिशत एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लोग शामिल हैं। यह आंकड़े इस योजना की व्यापक पहुंच और समाज के हर वर्ग में आर्थिक सशक्तिकरण की सफलता को दर्शाते हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मुद्रा योजना ने बेरोजगार युवाओं को जॉब सीकर्स की भूमिका से जॉब क्रिएटर्स की दिशा में आगे बढ़ाया है। छोटे ऋण और स्थानीय विचारों के जरिए युवा उद्यमियों ने अपने व्यवसाय शुरू किए हैं और आर्थिक परिवर्तन की नींव मजबूत की है। इससे छोटे उद्यमों का विकास हुआ है, स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं और देश की अर्थव्यवस्था की जमीनी संरचना मजबूत हुई है।

    मुद्रा योजना ने महिलाओं और वंचित वर्गों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। इससे न केवल आर्थिक रूप से उनका सशक्तिकरण हुआ है, बल्कि समाज में उनके महत्व और नेतृत्व की भावना भी बढ़ी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि योजना ने चुपचाप भारत की अर्थव्यवस्था की नींव को नया आकार दिया है और स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है।

  • बिहार मॉडल पर काम; बंगाल में 15 दिनों तक क्या-क्या करेंगे अमित शाह?

    बिहार मॉडल पर काम; बंगाल में 15 दिनों तक क्या-क्या करेंगे अमित शाह?

    कोलकाता पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज होने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के रणनीतिकार अमित शाह ने पिछले सप्ताह भवानीपुर में एक बड़ी चुनावी रैली के दौरान घोषणा की कि वे आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान लगातार 15 दिनों तक बंगाल में ही प्रवास करेंगे।
    वहीं, शुभेंदु अधिकारी की नामांकन रैली के दौरान शाह ने हुंकार भरते हुए कहा कि भाजपा इस बार 294 सीटों वाली विधानसभा में 175 से अधिक सीटें जीतकर एक ऐतिहासिक बदलाव लाएगी।

    अमित शाह का यह ऐलान भवानीपुर की धरती से आया, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का अपना निर्वाचन क्षेत्र है। भाजपा ने यहां ममता बनर्जी के कट्टर प्रतिद्वंद्वी शुभेंदु अधिकारी को मैदान में उतारा है। शाह ने इस मुकाबले को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, “अगर भवानीपुर की जनता भाजपा को यहां जीत दिलाती है, तो बंगाल में सत्ता परिवर्तन अपने आप हो जाएगा। यह ममता दीदी की विदाई का सबसे छोटा रास्ता (शॉर्टकट) होगा।”

    गौरतलब है कि शुभेंदु अधिकारी ने पिछले चुनाव में नंदीग्राम से ममता बनर्जी को पराजित किया था। इस बार भाजपा ने उन्हें नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों ही हाई-प्रोफाइल सीटों से मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
    कैसा होगा अमित शाह का 15 दिनों का कैंप प्लान?

    सूत्रों के अनुसार, अमित शाह का यह 15 दिवसीय प्रवास केवल रैलियों तक सीमित नहीं रहेगा। वे माइक्रो-मैनेजमेंट के तहत राज्य के अलग-अलग हिस्सों में रातें बिताएंगे और वॉर रूम से चुनावी कमान संभालेंगे। अमित शाह सिलीगुड़ी और बालुरघाट जैसे क्षेत्रों में रुकेंगे, जहां 2019 के बाद से भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा है। वे हुगली, खड़गपुर और दुर्गापुर जैसे इलाकों में भी डेरा डालेंगे। यहां मुख्य ध्यान उन 40 सीटों पर होगा जहां 2021 के चुनाव में भाजपा 5% से भी कम अंतर से हार गई थी।
    देर रात तक बैठकें

    शाह की रणनीति का मुख्य हिस्सा रात 2 बजे तक चलने वाली संगठनात्मक बैठकें होंगी। इनमें वे बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेंगे, नाराज नेताओं को मनाएंगे और टिकट वितरण से उपजे असंतोष को दूर करेंगे।
    MP, महाराष्ट्र और बिहार का फॉर्मूला

    अमित शाह की यह कार्यशैली नई नहीं है। इससे पहले उन्होंने मध्य प्रदेश (2023), महाराष्ट्र (2024) और बिहार (2025) के विधानसभा चुनावों में भी इसी तरह का गहन प्रवास किया था।

    बिहार में भाजपा के ऐतिहासिक प्रदर्शन और पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाने की सफलता के पीछे शाह की क्लस्टर रणनीति को ही श्रेय दिया जाता है। बंगाल में भी वे राज्य को विभिन्न सांगठनिक क्लस्टरों में बांटकर खुद निगरानी करेंगे।

    2021 के चुनावों में भाजपा ने 3 से सीधे 77 सीटों पर छलांग लगाई थी और उसका वोट शेयर करीब 38% तक पहुंच गया था। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने वापसी की और भाजपा की सीटों की संख्या 18 से घटकर 12 रह गई। अब अमित शाह का पूरा जोर उन सीटों पर है जिन्हें भाजपा जीतते-जीतते हार गई थी। जलपाईगुड़ी, राजगंज और मेखलीगंज जैसे क्षेत्रों में शाह खुद रणनीति बनाएंगे ताकि पिछली गलतियों को न दोहराया जाए।

  • उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों का दलित वोट पर विशेष फोकस।

    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों का दलित वोट पर विशेष फोकस।


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने दलित वोट बैंक को साधने के लिए पूरी तैयारी शुरू कर दी है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस सभी अपने-अपने स्तर पर दलित वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रहे हैं। अंबेडकर जयंती के मौके पर यह प्रतिस्पर्धा और भी स्पष्ट रूप से देखने को मिल रही है।

    भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद से ही दलित वोटों को सहेजने की कवायद शुरू कर दी थी। संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने दलित पेशेवरों के बीच जाकर उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को समझने का प्रयास किया, कई संगोष्ठियों का आयोजन किया और 45 जिलों में सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा की।

    इसी प्रक्रिया के तहत सरकार ने अंबेडकर मूर्ति विकास योजना की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के साथ-साथ संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले और महर्षि वाल्मीकि जैसी महान विभूतियों की मूर्तियों का सौंदर्यीकरण और संरक्षण किया जाएगा। आगामी 14 अप्रैल को हर विधानसभा क्षेत्र में इस योजना को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधि जनता को जानकारी देंगे। भाजपा का कहना है कि उसकी सरकार ने दलित उत्थान के लिए लगातार काम किया है, जबकि सपा सरकारों में दलितों का उत्पीड़न हुआ।

    समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में मिले उत्साह को आधार बनाकर दलित वर्ग पर विशेष ध्यान देना शुरू किया है। पार्टी ने बसपा से आए नेताओं की मदद से दलित समाज में पैठ बनाने का काम तेज कर दिया है। कांशीराम जयंती और अंबेडकर जयंती मनाने की परंपरा को सपा ने फिर से शुरू किया है। पार्टी का कहना है कि भाजपा की दलित नीति केवल चुनावी प्रतीकात्मक राजनीति है और वास्तविक लाभ नहीं पहुंचाती।

    कांग्रेस भी उत्तर प्रदेश में दलित वोटों को साधने के लिए प्रयासरत है। पार्टी ने पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को बुलाया और कई कार्यक्रम आयोजित किए। कांग्रेस का दावा है कि उसने सरकारों के दौरान दलितों के लिए प्रभावी योजनाएं और कानून बनाए हैं, जबकि भाजपा केवल चुनावी हथकंडे अपनाती है।

    बहुजन समाज पार्टी अपने पारंपरिक जाटव वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। पार्टी लगातार प्रमोशन, आरक्षण और गेस्ट हाउस कांड जैसे मुद्दों को उठाकर सपा को आगाह कर रही है। मायावती दलित राजनीति में प्रमुख चेहरा मानी जाती हैं और ब्राह्मण-दलित समीकरण को साधने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन बदलते राजनीतिक परिदृश्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध और पूर्वांचल क्षेत्रों में दलित वोट कई सीटों पर जीत और हार तय करने वाला है। इसी कारण सभी दल इस वर्ग पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। 2027 का विधानसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक के इर्द-गिर्द घूमता दिखाई दे रहा है, और यह चुनावी रणनीतियों के केंद्र में है।

  • अब सिर्फ CJI ही सुनेंगे अर्जेंट केस सुप्रीम कोर्ट का बड़ा नियम बदलाव

    अब सिर्फ CJI ही सुनेंगे अर्जेंट केस सुप्रीम कोर्ट का बड़ा नियम बदलाव


    नई दिल्ली । देश की न्यायिक व्यवस्था में एक अहम बदलाव करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अत्यावश्यक मामलों की सुनवाई को लेकर नया नियम लागू किया है इस नए निर्देश के मुताबिक अब ऐसे मामले जिनमें तुरंत सुनवाई जरूरी हो और जिन्हें नियमित सूचीबद्ध प्रक्रिया का इंतजार नहीं कराया जा सकता उनका उल्लेख केवल भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी CJI के समक्ष ही किया जाएगा

    इस फैसले के बाद अब किसी भी अन्य जज या पीठ के सामने ऐसे मामलों को पेश करने की अनुमति नहीं होगी भले ही मुख्य न्यायाधीश किसी संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे हों यह बदलाव 6 अप्रैल को जारी एक आधिकारिक परिपत्र के माध्यम से लागू किया गया है

    पहले की व्यवस्था में यह प्रावधान था कि यदि मुख्य न्यायाधीश उपलब्ध नहीं हैं या किसी अन्य महत्वपूर्ण पीठ में व्यस्त हैं तो अत्यावश्यक मामलों को उच्चतम न्यायालय के सबसे वरिष्ठ जज के सामने उल्लेख किया जा सकता था इससे मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने की कोशिश की जाती थी लेकिन अब इस प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया गया है

    नए नियम के तहत अदालत संख्या 1 यानी मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट में ही ऐसे मामलों का उल्लेख किया जाएगा और किसी अन्य पीठ के समक्ष इसे प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं होगी इस कदम को न्यायिक प्रक्रिया में एकरूपता और स्पष्टता लाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है

    इस बीच भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हाल ही में न्यायिक ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया उन्होंने विभिन्न राज्यों में न्यायिक परिसरों के शिलान्यास के दौरान कहा कि देशभर में न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करना अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है

    उन्होंने यह भी कहा कि संविधान निर्माताओं ने न्याय तक आसान पहुंच को बेहद महत्वपूर्ण माना था और इसी सोच के तहत हर राज्य में उच्च न्यायालय की स्थापना को संवैधानिक जिम्मेदारी बनाया गया उनका मानना है कि न्याय व्यवस्था को मजबूत करना केवल कानूनी जरूरत नहीं बल्कि लोकतंत्र के प्रति एक गंभीर प्रतिबद्धता भी है सुप्रीम कोर्ट का यह नया नियम न्यायिक कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव माना जा रहा है अब देखना यह होगा कि इससे अत्यावश्यक मामलों के निपटारे की प्रक्रिया कितनी प्रभावी और तेज हो पाती है

  • 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य की शपथ लेंगे नीतीश कुमार…. बिहार में नई सरकार गठन की कवायद तेज

    10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य की शपथ लेंगे नीतीश कुमार…. बिहार में नई सरकार गठन की कवायद तेज


    पटना।
    बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। जदयू के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री तीन दिवसीय दौरे पर 9 अप्रैल की दोपहर दिल्ली रवाना होंगे। शुक्रवार को शपथ लेने के बाद शनिवार 11 अप्रैल को पटना वापस आएंगे। दिल्ली में प्रधानमंत्री और गृहमंत्री (Prime Minister and Home Minister) से भी उनकी मुलाकात हो सकती है।

    नीतीश कुमार के पटना वापसी के साथ ही बिहार में भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की कवायद तेज हो जाएगी। इसके बाद किसी भी दिन नीतीश मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ सकते हैं। एनडीए के दलों में यह आपसी साझेदारी बन चुकी है कि अगला मुख्यमंत्री भाजपा का होगा। सरकार में जदयू की मौजूदगी भी दमदार रहेगी तथा इस पार्टी से राज्य को उप मुख्यमंत्री मिलेगा। यह दोनों बातें पहली बार होगी।

    नीतीश कुमार बतौर राज्यसभा सदस्य शपथ लेकर पटना वापसी पर किसी दिन एनडीए विधानमंडल दल की बैठक बुला सकते हैं और इस बैठक में वह सीएम पद छोड़ने की जानकारी आधिकारिक तौर पर विधायकों को देंगे। फिर राज्यपाल को इस्तीफा सौंपेंगे। नई सरकार के गठन को पहले एनडीए के सभी घटक दलों के विधायक दल की अलग-अलग बैठकों में नेता चुने जाएंगे।

    फिर एनडीए विधानमंडल दल के नेता की घोषणा संयुक्त बैठक में होगी। नए नेता सरकार गठन का प्रस्ताव राज्यपाल को सौंपेंगे। एनडीए के दलों में हो रही चर्चा के मुताबिक 15 अप्रैल के बाद ही नई सरकार अस्तित्व में आएगी। पद छोड़ने के पहले सीएम की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक होने के भी आसार हैं, जिसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।


    कौन बनेगा बिहार का सीएम?

    अब भले ही बिहार में नई सरकार बनने का प्रोग्राम सेट हो गया हो लेकर राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा इसपर अभी सस्पेंस बरकरार है। सीएम की रेस में सम्राट चौधरी का नाम अभी सबसे आगे चल रहा है। मौजूदा डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने हाल ही में यह कर सम्राट चौधरी की राह और भी आसान कर दी थी कि वो सीएम की रेस में नहीं हैं बल्कि वो सेवक की रेस में हैं। हालांकि, बिहार के नए मुख्यमंत्री को लेकर अभी बीजेपी ने चुप्पी साध रखी है। पार्टी नेता लगातार यह कह रहे हैं कि एनडीए की बैठक में बिहार के नए सीएम का नाम तय किया जाएगा। इधऱ डिप्टी सीएम की रेस में नीतीश कुमार के बेटे निशांत का नाम है। हालांकि, सीएम और डिप्टी सीएम के नामों को लेकर यह सिर्फ कयासबाजी है अभी इसपर आधिकारिक तौर से कुछ भी साफ नहीं किया गया है।

  • असम-केरल चुनाव में मुस्लिम वोटर निर्णायक, अजमल और मुस्लिम लीग के सामने सियासी परीक्षा

    असम-केरल चुनाव में मुस्लिम वोटर निर्णायक, अजमल और मुस्लिम लीग के सामने सियासी परीक्षा

    नई दिल्ली। असम, केरल और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान थम चुका है और अब 9 अप्रैल को मतदान होना है। इन चुनावों में जहां असम में कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला है, वहीं केरल में लेफ्ट के नेतृत्व वाले एलडीएफ और कांग्रेस के यूडीएफ के बीच टक्कर है। दोनों ही राज्यों में मुस्लिम वोटर अहम भूमिका निभाते हैं, जिससे मुस्लिम आधारित राजनीतिक दलों की भी बड़ी परीक्षा मानी जा रही है।

    देश में मुस्लिम आबादी भले ही 14-15 फीसदी के बीच हो, लेकिन केरल में यह करीब 27 फीसदी और असम में 34-35 फीसदी तक है। ऐसे में इन राज्यों की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव काफी ज्यादा है और यही वजह है कि इस वोट बैंक पर सभी दलों की नजर है।

    केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के लिए यह चुनाव बेहद अहम है। केरल में मुस्लिम लीग कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है, जबकि असम में AIUDF और कांग्रेस अलग-अलग मैदान में हैं।

    असम में बदरुद्दीन अजमल की चुनौती
    असम की 126 सीटों पर 722 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, जिसमें बदरुद्दीन अजमल की पार्टी 27 सीटों पर किस्मत आजमा रही है। पार्टी का फोकस निचले असम के उन इलाकों पर है, जो बांग्लादेश सीमा से जुड़े हैं और जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं।

    इस क्षेत्र की करीब 50 सीटों पर मुकाबला दिलचस्प है। 2021 में एनडीए ने 23 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस और एआईयूडीएफ गठबंधन को 27 सीटें मिली थीं। इस बार दोनों अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे अजमल को बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस से भी सीधी टक्कर मिल रही है।

    धुबरी, बारपेटा और गोलपाड़ा जैसे इलाकों में मुस्लिम वोटरों की संख्या अधिक है। पिछली बार एआईयूडीएफ ने 16 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार समीकरण बदले हुए हैं। मुस्लिम वोटों को साधने के लिए अजमल ने असदुद्दीन ओवैसी को भी चुनाव प्रचार में उतारा है।

    अजमल ने 2005 में एआईयूडीएफ की स्थापना की थी और मुस्लिम अल्पसंख्यकों, खासकर असमिया और बंगाली मूल के मुसलमानों के अधिकारों की राजनीति की। 2006 में पार्टी को 10 सीटें, 2011 में 18, 2016 में 13 और 2021 में 16 सीटें मिली थीं। हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव में अजमल को अपनी सीट गंवानी पड़ी, जिससे उनकी सियासी स्थिति कमजोर हुई है।

    मुस्लिम वोटर किसके साथ?
    असम में करीब 34 फीसदी मुस्लिम आबादी है, जो पहले 32 सीटों पर निर्णायक थी, लेकिन परिसीमन के बाद अब यह प्रभाव करीब 22 सीटों तक सीमित हो गया है। कांग्रेस और एआईयूडीएफ दोनों ही इस वोट बैंक को अपने पक्ष में करने की कोशिश में हैं।

    2021 में दोनों दल साथ थे, लेकिन इस बार अलग-अलग मैदान में हैं। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि मुस्लिम वोटर किसे प्राथमिकता देंगे, खासकर तब जब हालिया चुनावों में अजमल के प्रति समर्थन में कमी देखी गई है।

    केरल में मुस्लिम लीग की स्थिति
    केरल में मुस्लिम आबादी करीब 27 फीसदी है और यहां मुस्लिम समुदाय सामाजिक और आर्थिक रूप से प्रभावशाली माना जाता है। मलप्पुरम, कोझिकोड और कन्नूर जैसे जिलों में इनका असर ज्यादा है।

    राज्य की राजनीति में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की मजबूत पकड़ रही है। यह पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है और 140 में से 26 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। बाकी सीटों पर सहयोगी दलों को समर्थन दिया गया है।

    मलप्पुरम, कोझिकोड और कासरगोड जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में मुस्लिम लीग पारंपरिक रूप से मजबूत रही है। 1962 से अब तक पार्टी का हर लोकसभा में प्रतिनिधित्व रहा है और विधानसभा में भी इसकी निरंतर मौजूदगी बनी रही है।

    केरल में 140 सीटों में से 32 मुस्लिम विधायक हैं, जिनमें से 15 मुस्लिम लीग से आते हैं। राज्य की करीब 43 सीटों पर मुस्लिम मतदाता चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।

    पिछले कई दशकों से मुस्लिम लीग ने अपने वोट बैंक को संगठित रखा है और कांग्रेस के साथ गठबंधन के कारण वोटों का बिखराव भी नहीं होता। इस बार भी यूडीएफ और एलडीएफ के बीच मुकाबले में यूडीएफ का पलड़ा कुछ भारी माना जा रहा है, जो मुस्लिम लीग के लिए अनुकूल स्थिति बनाता है।

  • तमिलनाडु चुनाव में PM मोदी का प्रचार जोरों पर, राहुल गांधी नदारद, DMK-कांग्रेस गठबंधन पर सवाल

    तमिलनाडु चुनाव में PM मोदी का प्रचार जोरों पर, राहुल गांधी नदारद, DMK-कांग्रेस गठबंधन पर सवाल

    नई दिल्ली। तमिलनाडु में चुनावी प्रचार तेज हो गया है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार राज्य के दौरे कर भाजपा और एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन में जनता से संपर्क कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अभी तक राज्य में चुनाव प्रचार से दूरी बनाए हुए हैं।

    मोदी का सक्रिय अभियान
    पिछले दो महीनों में मोदी ने तीन बार तमिलनाडु का दौरा किया और 15 अप्रैल को फिर से राज्य का दौरा कर नागरकोइल में विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। उनका प्रचार अभियान भाजपा और उसके सहयोगी दलों के लिए माहौल बनाने पर केंद्रित है।

    राहुल गांधी की अनुपस्थिति और DMK के साथ दूरी
    राहुल गांधी ने अब तक तमिलनाडु में प्रचार अभियान नहीं चलाया। राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस और DMK गठबंधन में चल रहे मनमुटाव से जोड़ रहे हैं। 2021 में राहुल गांधी चुनाव से पहले ही राज्य में तीन दिवसीय दौरे पर थे, लेकिन इस बार उनकी गैरमौजूदगी ने सवाल खड़े कर दिए हैं।

    पुडुचेरी में संकेत मिले दूरियों के
    हाल ही में पुडुचेरी में प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन का नाम तक नहीं लिया। वहीं स्टालिन भी उसी दिन वहां मौजूद थे, लेकिन दोनों नेताओं के कार्यक्रम अलग समय पर निर्धारित किए गए थे। राजनीतिक जानकार इसे सीट बंटवारे और गठबंधन खींचतान का परिणाम मान रहे हैं।

    पार्टियों की सफाई और आगे की योजना
    DMK के संगठनात्मक सचिव आर.एस. भारती ने कहा कि दोनों पार्टियों ने अपने प्रचार कार्यक्रम पहले से तय कर लिए थे और आखिरी समय में संयुक्त रैली संभव नहीं थी। उन्होंने आश्वस्त किया कि दोनों नेता जल्द ही एक साथ प्रचार करेंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि राहुल गांधी तमिलनाडु का दौरा 10 अप्रैल के बाद कर सकते हैं, जब पहले चरण का मतदान संपन्न हो जाएगा।DMK के संगठनात्मक सचिव आर.एस. भारती ने कहा कि दोनों पार्टियों ने अपने प्रचार कार्यक्रम पहले से तय कर लिए थे और आखिरी समय में संयुक्त रैली संभव नहीं थी। उन्होंने आश्वस्त किया कि दोनों नेता जल्द ही एक साथ प्रचार करेंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि राहुल गांधी तमिलनाडु का दौरा 10 अप्रैल के बाद कर सकते हैं, जब पहले चरण का मतदान संपन्न हो जाएगा।