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  • बागपत में नम आंखों से अंतिम विदाई, गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुआ अनुराग धनखड़ का अंतिम संस्कार

    बागपत में नम आंखों से अंतिम विदाई, गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुआ अनुराग धनखड़ का अंतिम संस्कार


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में बुधवार को त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग धनखड़ का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सुबह उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। श्मशान घाट पर पुलिस जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और इसके बाद उनके बेटे अभिषेक ने मुखाग्नि देकर पिता को अंतिम विदाई दी।

    मंगलवार देर रात जब अनुराग धनखड़ का पार्थिव शरीर उनके पैतृक निवास बड़ौत पहुंचा, तो वहां का माहौल बेहद भावुक हो गया। उनकी मां बेटे के पार्थिव शरीर को देखकर बिलख पड़ीं। उन्होंने गाल सहलाकर आखिरी बार बेटे को दुलार किया और बार-बार “मेरे बच्चे” कहकर रोती रहीं। पत्नी कल्पना भी पार्थिव शरीर से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़ीं। बेटे अभिषेक ने मां को संभालने की कोशिश की, लेकिन खुद भी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और पिता के शव से लिपटकर रो पड़े।

    अनुराग धनखड़ का पार्थिव शरीर त्रिपुरा से एयर एंबुलेंस के जरिए दिल्ली लाया गया था। वहां से सड़क मार्ग से बागपत के बड़ौत स्थित उनके घर पहुंचाया गया। अंतिम यात्रा में स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोग शामिल हुए।

    इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार में स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री असीम अरुण ने भी परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अनुराग धनखड़ एक समर्पित और कुशल पुलिस अधिकारी थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी मृत्यु के कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

    पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष वेदपाल सहित कई स्थानीय लोगों ने भी इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। उनका कहना है कि इतने वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई, इसका निष्पक्ष और विस्तृत खुलासा होना चाहिए।

    गौरतलब है कि अनुराग धनखड़ का शव 20 जुलाई को त्रिपुरा पुलिस मुख्यालय में मिला था। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताया है, हालांकि पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच अभी जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही उनकी मौत के कारणों पर अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका

    लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव उस समय बढ़ गया, जब भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस प्रदेश कार्यालय का घेराव करने के लिए निकले। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। कई कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे।

    स्थिति को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया और काफी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचने से रोक दिया। मौके पर कुछ समय तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा, हालांकि बाद में स्थिति नियंत्रण में आ गई।

    दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश कार्यालय के बाहर भी सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई थी। कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता लाठी लेकर परिसर में तैनात नजर आईं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता शांतिप्रिय है, लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए और उनके पोस्टरों पर जूते-चप्पल भी बरसाए। दोनों दलों के समर्थकों के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही।

    यह प्रदर्शन 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन की प्रतिक्रिया के रूप में आयोजित किया गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यालय के घेराव का ऐलान किया गया था। विपक्ष के उस प्रदर्शन में राहुल गांधी, अखिलेश यादव सहित कई नेताओं ने हिस्सा लिया था, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।

    पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग, अतिरिक्त पुलिस बल और निगरानी की व्यवस्था की। अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

  • इंग्लैंड दौरे के बाद आध्यात्मिक यात्रा पर विराट, अनुष्का संग प्रेमानंद महाराज के दर्शन

    इंग्लैंड दौरे के बाद आध्यात्मिक यात्रा पर विराट, अनुष्का संग प्रेमानंद महाराज के दर्शन


    उत्तर प्रदेश । भारतीय क्रिकेट स्टार Virat Kohli और अभिनेत्री Anushka Sharma बुधवार तड़के वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने Premanand Maharaj के नए आश्रम यमुना विहार कुंज में दर्शन कर आशीर्वाद लिया। दोनों सुबह करीब चार बजे आश्रम पहुंचे और सादगी के साथ नंगे पैर भीतर गए। लगातार बारिश के कारण रास्ते में कीचड़ था, ऐसे में विराट पूरे रास्ते अनुष्का का हाथ थामे चलते दिखाई दिए।

    आश्रम पहुंचने पर प्रेमानंद महाराज के शिष्यों ने दोनों का स्वागत किया। विराट और अनुष्का करीब एक घंटे तक आश्रम में रहे। बाहर निकलते समय विराट के माथे पर चंदन का तिलक था और उनके हाथ में प्रसाद भी दिखाई दिया। इसके बाद दोनों कार से लगभग 15 किलोमीटर दूर महाराज के गुरु हित गोविंद शरण महाराज के आश्रम पहुंचे और वहां भी दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    आश्रम के बाहर दोनों को देखने के लिए श्रद्धालुओं और प्रशंसकों की भीड़ उमड़ पड़ी। विराट और अनुष्का ने चेहरे पर मास्क पहन रखा था तथा हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन किया। सुरक्षा व्यवस्था के चलते किसी को उनके पास जाने की अनुमति नहीं दी गई।

    यह पहली बार नहीं है जब यह दंपती वृंदावन पहुंचा हो। दोनों अब तक आठ बार प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर चुके हैं। इस वर्ष यह उनकी चौथी यात्रा है। इससे पहले आईपीएल जीतने के बाद 2 जून को भी दोनों आश्रम पहुंचे थे, जहां उन्होंने करीब दो घंटे तक समय बिताया था।

    विराट कोहली हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज खेलने के बाद भारत लौटे हैं। तीन मैचों की सीरीज में उन्होंने 144 रन बनाए, जिसमें निर्णायक मुकाबले में 74 रन की महत्वपूर्ण पारी भी शामिल रही। क्रिकेट व्यस्तताओं के बीच उनकी यह आध्यात्मिक यात्रा चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • उत्तर प्रदेश में मानसून का प्रकोप, उफान पर नदियां, पेड़ गिरने से युवक की मौत

    उत्तर प्रदेश में मानसून का प्रकोप, उफान पर नदियां, पेड़ गिरने से युवक की मौत


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पिछले दस दिनों से जारी बारिश के कारण प्रदेश की कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं। लखीमपुर खीरी में शारदा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे तटीय गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। खेत, सड़कें और निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं। कई स्थानों पर मगरमच्छ आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचते दिखाई दिए, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है।

    सोनभद्र जिले में घाघरा नदी के तेज बहाव ने जिला जेल को जोड़ने वाली सड़क का बड़ा हिस्सा बहा दिया, जिससे आवागमन बाधित हो गया। वहीं गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और चेतावनी स्तर के पार पहुंचने के बाद प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। जिले की सभी बाढ़ चौकियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    वाराणसी में गंगा का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है। पिछले एक सप्ताह में नदी करीब 10 फीट ऊपर आ चुकी है। अस्सी घाट से नमो घाट तक करीब 50 छोटे-बड़े मंदिर जलमग्न हो गए हैं। घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने की अपील की गई है।

    मौसम का असर राजधानी लखनऊ, नोएडा, कानपुर, आगरा और अन्य शहरों में भी देखने को मिल रहा है। बुधवार सुबह से कई स्थानों पर रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जबकि पूरे प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने 10 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है।

    बारिश के बीच हादसों का सिलसिला भी जारी है। उन्नाव में तेज हवा के दौरान चलती बाइक पर अचानक पेड़ गिर गया, जिससे युवक की गर्दन टूट गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना लगातार खराब मौसम के बीच सावधानी बरतने की जरूरत को भी रेखांकित करती है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में व्यापक बारिश हुई। अब मानसूनी ट्रफ दक्षिण की ओर खिसक रही है, जिससे अगले एक-दो दिनों में कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश जारी रह सकती है। इसके बाद बारिश में कुछ कमी आने की संभावना है, लेकिन 26 जुलाई से मानसून फिर सक्रिय होकर प्रदेश में तेज बारिश का नया दौर शुरू कर सकता है।

  • संसद की मर्यादा पर जेपी नड्डा का विपक्ष पर निशाना, कहा- लोकतांत्रिक परंपराओं का हो रहा उल्लंघन, चर्चा से नहीं भाग रही सरकार

    संसद की मर्यादा पर जेपी नड्डा का विपक्ष पर निशाना, कहा- लोकतांत्रिक परंपराओं का हो रहा उल्लंघन, चर्चा से नहीं भाग रही सरकार

    नई दिल्ली । राज्यसभा में बुधवार को विपक्ष के हंगामे और नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दे पर जारी गतिरोध के बीच नेता सदन जेपी नड्डा ने विपक्ष के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संसद लोकतांत्रिक संवाद का सर्वोच्च मंच है, लेकिन जिस तरह से सदन की कार्यवाही बाधित की जा रही है, उससे संसदीय मर्यादाओं और लोकतांत्रिक परंपराओं को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने दोहराया कि सरकार हर महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।

    सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि नीट परीक्षा और कथित प्रश्नपत्र लीक सहित सभी संबंधित मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराने में उसे कोई आपत्ति नहीं है। उनका कहना था कि सरकार पारदर्शी तरीके से काम करने में विश्वास रखती है और हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए सदन का सुचारु रूप से चलना भी आवश्यक है।

    इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष से हंगामे के बजाय चर्चा में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार मानसून सत्र की शुरुआत से ही इस विषय पर चर्चा के पक्ष में रही है। चर्चा किस नियम और प्रक्रिया के तहत होगी, इस पर सभी दलों के साथ सहमति बनाई जा सकती है, लेकिन पहले सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से चलनी चाहिए।

    सरकार का कहना है कि युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से सरकार अपनी ओर से उठाए गए कदमों और निर्णयों की जानकारी सदन के माध्यम से देश के सामने रखना चाहती है। इसके लिए सभी दलों का सहयोग आवश्यक बताया गया।

    जेपी नड्डा ने अपने संबोधन में विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह सार्थक चर्चा से बचने का प्रयास कर रहा है और लगातार नारेबाजी के माध्यम से सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है। उन्होंने कहा कि संसद में बहस, तर्क और संवाद लोकतंत्र की मूल भावना हैं। यदि चर्चा की बजाय व्यवधान को प्राथमिकता दी जाएगी तो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर प्रभावी विमर्श संभव नहीं हो पाएगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की साझा जिम्मेदारी है। किसी भी विषय पर मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उसका समाधान संसदीय प्रक्रिया और संवाद के माध्यम से ही निकाला जाना चाहिए। उनका मानना था कि जनता की अपेक्षा भी यही है कि संसद में मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो और समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जाए।

    संसद के मानसून सत्र के दौरान नीट परीक्षा और कथित प्रश्नपत्र लीक का मुद्दा प्रमुख राजनीतिक विषय बना हुआ है। विपक्ष इस मामले पर तत्काल चर्चा और सरकार से जवाब की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह सभी नियमों और संसदीय प्रक्रियाओं के तहत विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।

    फिलहाल दोनों पक्षों के बीच चर्चा की प्रक्रिया और सदन की कार्यवाही को लेकर गतिरोध बना हुआ है। हालांकि सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह संवाद और बहस के माध्यम से सभी मुद्दों पर अपनी बात रखने तथा विपक्ष के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • संसद परिसर में विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेता काले वस्त्रों में पहुंचे, छात्रों के मुद्दों पर सरकार को घेरा

    संसद परिसर में विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेता काले वस्त्रों में पहुंचे, छात्रों के मुद्दों पर सरकार को घेरा

    नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र के दौरान छात्रों के विरोध प्रदर्शन और विपक्षी नेताओं के साथ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसद काले कपड़े पहनकर संसद परिसर पहुंचे और केंद्र सरकार तथा दिल्ली पुलिस के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया। विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों और जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है तथा सरकार को टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। इस प्रदर्शन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने इस विरोध को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया।

    विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में एकजुट होकर छात्रों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की। उनका कहना था कि देशभर के छात्र अपनी विभिन्न मांगों और समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी चिंताओं का समाधान निकालने के बजाय प्रशासनिक स्तर पर सख्ती दिखाई जा रही है। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति असंवेदनशील रवैया बताते हुए सरकार से तत्काल बातचीत शुरू करने की मांग की।

    प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि छात्र अपने भविष्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं की मेहनत, शिक्षा और भविष्य किसी भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि छात्रों की बात को लगातार नजरअंदाज किया जाएगा तो इससे शिक्षा व्यवस्था के प्रति उनका विश्वास कमजोर हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और सरकार को इस अधिकार का सम्मान करना चाहिए।

    कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने भी छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया, जिससे यह संदेश जाता है कि सरकार असहमति की आवाज सुनने के बजाय उसे दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं की समस्याओं का समाधान संवाद और संवेदनशीलता से किया जाना चाहिए, न कि कठोर कार्रवाई से। इसी विरोध को दर्ज कराने के लिए कांग्रेस सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे।

    कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद के. सुरेश ने कहा कि काले वस्त्र पहनकर किया गया प्रदर्शन केवल छात्रों के समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्षी नेताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के विरोध का भी प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसदों के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। इसी कारण कांग्रेस ने इस विरोध को प्रतीकात्मक रूप से ‘काला दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया।

    कांग्रेस महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी तय करते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता होना चाहिए और शिक्षा से जुड़े गंभीर सवालों पर स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए राजनीतिक जवाबदेही की आवश्यकता पर बल दिया।

    इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों ने भी कांग्रेस का समर्थन किया। तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना सरकार का दायित्व है और उनकी मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाना चाहिए। संसद परिसर में हुए इस विरोध प्रदर्शन के बाद छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस विषय पर संसद के भीतर और बाहर व्यापक चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ी सख्ती, अश्लील सामग्री और कानून उल्लंघन के आरोप में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म ब्लॉक

    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ी सख्ती, अश्लील सामग्री और कानून उल्लंघन के आरोप में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म ब्लॉक

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने अश्लील सामग्री के प्रसारण और डिजिटल कानूनों के उल्लंघन के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए पिछले दो वर्षों में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म की भारत में सार्वजनिक पहुंच बंद कर दी है। सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई डिजिटल माध्यमों पर गैरकानूनी सामग्री के प्रसार को रोकने और इंटरनेट को अधिक सुरक्षित एवं जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से की गई है।

    लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई उन ओटीटी प्लेटफॉर्म और इंटरमीडियरी के खिलाफ की गई, जिन पर अश्लील सामग्री प्रसारित करने और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम सहित अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप थे। सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में उपलब्ध कानूनी अधिकारों का उपयोग करते हुए संबंधित प्लेटफॉर्म की भारत में सार्वजनिक पहुंच को प्रतिबंधित किया गया।

    सरकार के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री को लेकर यदि किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है तो उसका परीक्षण किया जाता है। जांच में कानून का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित इंटरमीडियरी या प्लेटफॉर्म को गैरकानूनी सामग्री हटाने अथवा उस तक पहुंच रोकने के निर्देश जारी किए जाते हैं। आवश्यकता पड़ने पर सार्वजनिक पहुंच को भी प्रतिबंधित किया जा सकता है।

    केंद्र सरकार ने कहा कि उसकी डिजिटल नीति का मुख्य उद्देश्य ऐसा इंटरनेट वातावरण तैयार करना है, जो सभी उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदार हो। विशेष रूप से बच्चों और किशोरों को हानिकारक ऑनलाइन सामग्री से बचाने को सरकार प्राथमिकता दे रही है। इसी दिशा में डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

    सरकार ने यह भी बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एवं डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 डिजिटल प्लेटफॉर्म के संचालन के लिए व्यापक कानूनी ढांचा उपलब्ध कराते हैं। इन नियमों के तहत सभी इंटरमीडियरी के लिए ड्यू डिलिजेंस का पालन करना अनिवार्य है, ताकि ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग कानून और सामाजिक जिम्मेदारी के अनुरूप हो सके।

    नियमों के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपने उपयोगकर्ताओं को स्पष्ट रूप से यह बताना होता है कि वे ऐसी किसी भी सामग्री को अपलोड, प्रकाशित, साझा या प्रसारित न करें, जो बच्चों के लिए हानिकारक हो, अश्लील हो या देश के किसी भी लागू कानून का उल्लंघन करती हो। यदि प्लेटफॉर्म इन दायित्वों का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मनोरंजन और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ कंटेंट मॉडरेशन की चुनौती भी बढ़ी है। ऐसे में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी जवाबदेही के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य वैध डिजिटल सेवाओं को बाधित करना नहीं, बल्कि कानून का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

    सरकार ने दोहराया कि भविष्य में भी यदि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गैरकानूनी या अश्लील सामग्री प्रसारित किए जाने की शिकायत सामने आती है और जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत आवश्यक कार्रवाई जारी रहेगी। इसके माध्यम से सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में प्रयास लगातार जारी रहेंगे।

  • हाई-टेंशन लाइन की चपेट में आया जगन्नाथ रथ, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल और जांच के आदेश

    हाई-टेंशन लाइन की चपेट में आया जगन्नाथ रथ, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल और जांच के आदेश

    नई दिल्ली । झारखंड के खूंटी जिले में लापरवाही और व्यवस्थागत खामियों के चलते एक भीषण दुर्घटना में दो निर्दोष स्कूली छात्रों की जान चली गई, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। यह हृदयविदारक घटना तोरपा थाना क्षेत्र स्थित श्री हरि प्लस टू विद्यालय परिसर के समीप घटी। लंच ब्रेक के दौरान जब छात्र विद्यालय परिसर के आसपास मौजूद थे, तभी पास में खड़े भगवान जगन्नाथ के रथ को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसी दौरान लोहे के कलपुर्जों और लकड़ी से निर्मित यह भारी रथ ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाई-टेंशन विद्युत लाइन के सीधे संपर्क में आ गया। क्षण भर में ही पूरे रथ में अत्यधिक उच्च क्षमता का करंट दौड़ गया, जिसकी चपेट में आकर वहां मौजूद बच्चे बुरी तरह प्रभावित हो गए।

    घटना के घटित होते ही घटनास्थल पर अफ़रा-तफ़री और चीख-पुकार मच गई। विद्युत आघात के कारण अचेत हुए और झुलसे हुए सभी बच्चों को तत्काल स्थानीय प्रशासन एवं विद्यालय प्रबंधन की सहायता से खूंटी के सदर अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के चिकित्सा प्रभारियों के अनुसार, जांच के दौरान दो छात्रों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि छह घायलों का आपातकालीन चिकित्सा कक्ष में गहन उपचार जारी है। घायलों में से एक छात्र की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बताई जा रही है। हादसे की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और अस्पताल परिसर में पीड़ित परिवारों के रुदन से माहौल गमगीन हो गया। परिजनों का आरोप है कि स्कूली बच्चों से भारी-भरकम रथ ढकेलवाने का कार्य लिया जाना अत्यंत लापरवाही भरा कदम था।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें जांच में जुट गई हैं। खूंटी के उपायुक्त ने इस दुर्घटना को अत्यंत पीड़ादायक करार देते हुए संपूर्ण घटनाक्रम की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि हाई-टेंशन लाइन के नीचे रथ संचालन और बच्चों की भागीदारी के बिंदुओं पर विस्तृत पड़ताल की जा रही है, तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। राज्य के मुख्यमंत्री ने भी इस दुखद हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं और घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

  • ब्रिटेन के शेल्टर होम में गधों को पहनाए जा रहे हैं विशेष पायजामे और लेगिंग्स..

    ब्रिटेन के शेल्टर होम में गधों को पहनाए जा रहे हैं विशेष पायजामे और लेगिंग्स..

    नई दिल्ली । भीषण गर्मी के दौर में जहां मानव जीवन प्रभावित हो रहा है, वहीं बेजुबान जानवरों के सामने भी स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। ब्रिटेन में तापमान में लगातार हो रही वृद्धि के कारण काटने वाले जहरीले कीड़ों की तादाद में भारी उछाल दर्ज किया गया है। इन मक्खियों और कीड़ों के लगातार हमलों के कारण जानवरों की त्वचा पर दर्दनाक घाव, जलन और खुजली की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इस विकट स्थिति से रेस्क्यू किए गए गधों को बचाने के लिए ब्रिटेन के डेवोन स्थित द डॉन्की सैंक्चुअरी ने एक बेहद व्यावहारिक और अनोखा तरीका अपनाया है। संस्था ने कीड़ों के सीधे संपर्क को रोकने के लिए लगभग चालीस गधों को विशेष रूप से तैयार किए गए ढीले पायजामे, लेगिंग्स और कॉटन के वस्त्र पहनाना शुरू किया है। पहली नज़र में यह पहल भले ही कौतूहल पैदा करती हो, लेकिन इसके पीछे की वैज्ञानिक सोच और संवेदनशीलता की व्यापक स्तर पर सराहना हो रही है।

    इस अनूठे सुरक्षा उपाय के विकास की प्रक्रिया बेहद योजनाबद्ध रही है। शुरुआत में संस्था के विशेषज्ञों ने जानवरों के पैरों की सुरक्षा के लिए पारंपरिक मोजे पहनाने का प्रयास किया था, लेकिन खेतों में निरंतर विचरण के कारण मोजे बार-बार फिसल कर निकल जाते थे। इसके बाद कर्मचारियों ने बड़े आकार के पायजामे, मैटरनिटी ट्राउज़र और लेगिंग्स का उपयोग कर नए सिरे से परीक्षण किया। कपड़े का आवरण इतना आरामदायक और ढीला रखा गया है कि जानवरों को चलने-फिरने, घास चरने और दैनिक गतिविधियों में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। ये वस्त्र कीड़ों के डंक और गधों की संवेद्य त्वचा के बीच एक अभेद्य भौतिक अवरोधक का कार्य करते हैं। रासायनिक कीटनाशक स्प्रे के बार-बार छिड़काव की तुलना में यह उपाय अधिक दीर्घकालिक और सुरक्षित सिद्ध हो रहा है।

    संस्था द्वारा गधों के शारीरिक नाप और आवश्यकताओं के अनुसार विशेष रूप से तैयार किए गए इन परिधानों को ‘डॉन-गेरी’ नाम दिया गया है, जो ‘डॉन्की’ और ‘डंगरी’ शब्दों का एक रचनात्मक संयोजन है। यह प्रयोग केवल जानवरों के स्वास्थ्य संरक्षण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सकारात्मक संदेश दिया है। कपड़ों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए संस्था ने पुराने और अप्रयुक्त सूती कपड़ों के दान की अपील की है। इस अभियान में स्कॉटलैंड स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट एंड्रयूज की री-यूज शॉप ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई है। छात्रों और स्थानीय नागरिकों द्वारा दान किए गए वस्त्रों को पुनर्चक्रित कर बेजुबान जानवरों के लिए सुरक्षात्मक पोशाक में परिवर्तित किया जा रहा है।

    वर्ष 1969 में स्थापित द डॉन्की सैंक्चुअरी वैश्विक स्तर पर उपेक्षित और प्रताड़ित जानवरों के कल्याण के लिए समर्पित एक प्रमुख वैश्विक संगठन के रूप में कार्य कर रहा है। संस्था का मानना है कि जानवरों की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए हमेशा अत्यधिक जटिल या खर्चीली तकनीकों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि थोड़ी सी संवेदनशीलता और नवोन्मेषी सोच से बड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान खोजा जा सकता है। भीषण गर्मी के इस मौसम में बेजुबान गधों को कीड़ों के जानलेवा संक्रमण और असहनीय दर्द से मुक्त रखने वाली यह मानवीय पहल वर्तमान में वैश्विक स्तर पर पशु कल्याण के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट और अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरी है।

  • छात्रों के मुद्दे पर सियासी संग्राम राहुल गांधी की रिहाई के बाद सरकार पर बड़ा हमला शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज

    छात्रों के मुद्दे पर सियासी संग्राम राहुल गांधी की रिहाई के बाद सरकार पर बड़ा हमला शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज


    नई दिल्ली । देश की राजधानी दिल्ली में छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर मंगलवार को राजनीतिक माहौल बेहद गरम रहा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी प्रियंका गांधी सहित कई सांसदों और नेताओं को हिरासत में लिया। कुछ घंटों बाद सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया और संसद में इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने की मांग दोहराई।

    रिहाई के बाद राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने सुबह लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर छात्रों के साथ हुई घटना पर संसद में चर्चा कराने का अनुरोध किया था। उनके अनुसार अध्यक्ष ने कहा कि इसके लिए सरकार की सहमति आवश्यक होगी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार इस विषय पर बहस कराने में रुचि नहीं रखती इसलिए विपक्ष ने लोकतांत्रिक तरीके से प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।

    राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा संसद मार्च के दौरान छात्रों के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार करने वालों पर कार्रवाई तथा छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेना शामिल है। उन्होंने कहा कि पूरा विपक्ष चाहता है कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो ताकि छात्रों की चिंताओं का समाधान निकल सके।

    दूसरी ओर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने रिहाई के बाद कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं को सुनने के बजाय उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। प्रियंका गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए संसद में कानून लाने की आवश्यकता बताई।

    वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राहुल गांधी छात्रों का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं और छात्रों के हित में लगातार काम कर रही है और केवल राजनीतिक बयानबाजी से समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

    भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन को अनुचित बताते हुए राहुल गांधी के आचरण की आलोचना की और कहा कि विरोध प्रदर्शन की भी एक मर्यादा होती है। भाजपा का कहना है कि संसद के भीतर सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए सरकार तैयार है लेकिन अराजकता फैलाने की राजनीति उचित नहीं है।

    दिनभर चले इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी प्रियंका गांधी और अन्य हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा कर दिया। इसके बावजूद छात्रों के मुद्दे को लेकर राजनीतिक टकराव फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। विपक्ष लगातार संसद में चर्चा और सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है जबकि सरकार अपने रुख पर कायम है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है।