Category: National

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन के लाठीचार्ज के बाद केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मिलने पहुंचे CJP प्रतिनिधि, समाधान की उम्मीदें बढ़ीं

    जंतर-मंतर प्रदर्शन के लाठीचार्ज के बाद केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मिलने पहुंचे CJP प्रतिनिधि, समाधान की उम्मीदें बढ़ीं


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के तीन छात्रों ने सोमवार को अपना अनशन समाप्त कर दिया। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया, जब संसद मार्च को लेकर राजधानी में प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। छात्रों ने स्पष्ट किया कि भूख हड़ताल समाप्त होने का अर्थ आंदोलन का अंत नहीं है, बल्कि यह संघर्ष के अगले चरण की शुरुआत है।

    जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से विभिन्न मांगों को लेकर छात्र और सामाजिक संगठन प्रदर्शन कर रहे थे। इसी क्रम में AISA से जुड़े तीन छात्र लगातार भूख हड़ताल पर थे। सोमवार को सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र संगठनों और विभिन्न जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया। इस दौरान आंदोलन से जुड़े कई लोगों ने छात्रों के लंबे संघर्ष और धैर्य की सराहना की।

    प्रदर्शन स्थल पर दिनभर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रही। संसद मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच तनाव की स्थिति भी देखने को मिली। प्रशासन ने हालात को नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ने की बात कहते रहे।

    अनशन समाप्त करने के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि आंदोलन अब नए स्वरूप में जारी रहेगा। उनका कहना था कि पिछले 23 दिनों के संघर्ष ने विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक समूहों और विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका दावा है कि इस आंदोलन ने शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय बनाया है।

    आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल पर रहना केवल व्यक्तिगत संकल्प का नहीं, बल्कि सामूहिक उद्देश्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान देशभर से छात्रों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों का समर्थन मिला, जिससे उनकी मांगों को और मजबूती मिली।

    अनशन समाप्त होने के अवसर पर कई सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी प्रदर्शन स्थल का दौरा किया। उन्होंने छात्रों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखने के अधिकार का समर्थन किया। साथ ही आंदोलन को शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

    छात्र नेताओं ने कहा कि आने वाले दिनों में आंदोलन को विभिन्न कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। उनका उद्देश्य अधिक से अधिक छात्रों और युवाओं को अपनी मांगों से जोड़ना तथा संबंधित मुद्दों पर व्यापक संवाद स्थापित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन भविष्य की रणनीति पर विचार कर जल्द ही अगले चरण की घोषणा करेगा।

    जंतर-मंतर पर समाप्त हुई यह भूख हड़ताल भले ही अपने निर्धारित स्वरूप में खत्म हो गई हो, लेकिन आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर अभियान जारी रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में राजधानी में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज होने की संभावना बनी हुई है।

  • संसद मार्च के बीच AISA के तीन छात्रों ने समाप्त किया अनशन, संघर्ष जारी रखने का किया एलान, जंतर-मंतर पर बदली आंदोलन की दिशा

    संसद मार्च के बीच AISA के तीन छात्रों ने समाप्त किया अनशन, संघर्ष जारी रखने का किया एलान, जंतर-मंतर पर बदली आंदोलन की दिशा

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के तीन छात्रों ने सोमवार को अपना अनशन समाप्त कर दिया। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया, जब संसद मार्च को लेकर राजधानी में प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। छात्रों ने स्पष्ट किया कि भूख हड़ताल समाप्त होने का अर्थ आंदोलन का अंत नहीं है, बल्कि यह संघर्ष के अगले चरण की शुरुआत है।

    जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से विभिन्न मांगों को लेकर छात्र और सामाजिक संगठन प्रदर्शन कर रहे थे। इसी क्रम में AISA से जुड़े तीन छात्र लगातार भूख हड़ताल पर थे। सोमवार को सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र संगठनों और विभिन्न जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया। इस दौरान आंदोलन से जुड़े कई लोगों ने छात्रों के लंबे संघर्ष और धैर्य की सराहना की।

    प्रदर्शन स्थल पर दिनभर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रही। संसद मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच तनाव की स्थिति भी देखने को मिली। प्रशासन ने हालात को नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ने की बात कहते रहे।

    अनशन समाप्त करने के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि आंदोलन अब नए स्वरूप में जारी रहेगा। उनका कहना था कि पिछले 23 दिनों के संघर्ष ने विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक समूहों और विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका दावा है कि इस आंदोलन ने शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय बनाया है।

    आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल पर रहना केवल व्यक्तिगत संकल्प का नहीं, बल्कि सामूहिक उद्देश्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान देशभर से छात्रों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों का समर्थन मिला, जिससे उनकी मांगों को और मजबूती मिली।

    अनशन समाप्त होने के अवसर पर कई सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी प्रदर्शन स्थल का दौरा किया। उन्होंने छात्रों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखने के अधिकार का समर्थन किया। साथ ही आंदोलन को शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

    छात्र नेताओं ने कहा कि आने वाले दिनों में आंदोलन को विभिन्न कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। उनका उद्देश्य अधिक से अधिक छात्रों और युवाओं को अपनी मांगों से जोड़ना तथा संबंधित मुद्दों पर व्यापक संवाद स्थापित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन भविष्य की रणनीति पर विचार कर जल्द ही अगले चरण की घोषणा करेगा।

    जंतर-मंतर पर समाप्त हुई यह भूख हड़ताल भले ही अपने निर्धारित स्वरूप में खत्म हो गई हो, लेकिन आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर अभियान जारी रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में राजधानी में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज होने की संभावना बनी हुई है।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन को तुषार गांधी का समर्थन, बोले- आंदोलन अब नई पीढ़ी का बन चुका है, परिवार के सदस्य भी मार्च में हुए शामिल

    जंतर-मंतर प्रदर्शन को तुषार गांधी का समर्थन, बोले- आंदोलन अब नई पीढ़ी का बन चुका है, परिवार के सदस्य भी मार्च में हुए शामिल


    नई दिल्ली ।
    राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी CJP के प्रदर्शन को सोमवार को महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी का समर्थन मिला। उन्होंने आंदोलन के समर्थन में सार्वजनिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अभियान अब केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश की नई पीढ़ी भी इससे जुड़ रही है। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि उनकी बेटी कस्तूरी और दामाद हर्ष भी संसद तक प्रस्तावित मार्च में शामिल होकर इस आंदोलन का हिस्सा बने हैं।

    तुषार गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। उनके अनुसार यह अब केवल सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक या CJP तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में युवा इसमें भागीदारी कर रहे हैं। उन्होंने इसे नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी का उदाहरण बताते हुए कहा कि आंदोलन का स्वरूप लगातार व्यापक होता जा रहा है।

    उन्होंने अपने परिवार की भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि उनकी बेटी कस्तूरी और दामाद हर्ष संसद मार्च में शामिल हुए। उनके अनुसार दोनों ने परिवार का प्रतिनिधित्व करते हुए शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध में भाग लिया। तुषार गांधी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग का हिस्सा बताया और कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी किसी भी जन आंदोलन को व्यापक स्वरूप देती है।

    तुषार गांधी ने अपने वक्तव्य में केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन के प्रति संवेदनशील रुख अपनाने के बजाय उसे नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का उल्लेख किया और कहा कि उस समय भी नेतृत्व की गिरफ्तारी के बावजूद जनभागीदारी के कारण आंदोलन जारी रहा था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और असहमति व्यक्त करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।

    अपने वक्तव्य में तुषार गांधी ने अभिनेता आमिर खान और फिल्म निर्देशक राजकुमार हिरानी की फिल्म “3 इडियट्स” का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें फिल्म पसंद आई थी, लेकिन उन्हें यह अच्छा नहीं लगा कि सोनम वांगचुक के संदर्भ में “इडियट” शब्द का उपयोग किया गया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माताओं द्वारा यह स्पष्ट किया जाना उचित था कि फिल्म सीधे तौर पर सोनम वांगचुक के जीवन पर आधारित नहीं थी।

    दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन को लेकर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। समर्थक इसे लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का माध्यम बता रहे हैं, जबकि राजनीतिक स्तर पर भी इसे लेकर अलग-अलग मत व्यक्त किए जा रहे हैं। तुषार गांधी के समर्थन और उनके परिवार की भागीदारी ने इस आंदोलन को लेकर चर्चा को और तेज कर दिया है।

    फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और इससे जुड़े घटनाक्रमों पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया पर राजनीतिक तथा सामाजिक स्तर पर बहस जारी रहने की संभावना है।

  • संसद मार्च के दौरान प्रदर्शन पर बवाल, लाठीचार्ज के बाद सरकार पर बरसे शशि थरूर, विपक्ष ने संसद में चर्चा की उठाई मांग

    संसद मार्च के दौरान प्रदर्शन पर बवाल, लाठीचार्ज के बाद सरकार पर बरसे शशि थरूर, विपक्ष ने संसद में चर्चा की उठाई मांग


    नई दिल्ली ।
    संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राजधानी में हुए प्रदर्शन और उसके दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान हुई झड़प और पुलिस द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किए जाने के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखे सवाल उठाए। इस घटनाक्रम को लेकर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

    प्रदर्शनकारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज तथा आंसू गैस का इस्तेमाल किया। घटना के बाद कई प्रदर्शनकारी मौके से हट गए, जबकि पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया।

    कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन करने वालों की बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार के पास पर्याप्त बहुमत है तो फिर चर्चा से परहेज क्यों किया जा रहा है। थरूर ने कहा कि संसद का उद्देश्य जनहित के मुद्दों पर विचार-विमर्श करना है और लोकतांत्रिक संस्थाओं का महत्व संवाद से ही मजबूत होता है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालने की आवश्यकता पर बल दिया।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस घटनाक्रम पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को अधिक संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। उनका कहना था कि यदि परीक्षा व्यवस्था और उससे जुड़े मामलों में लगातार विवाद सामने आ रहे हैं तो सरकार को इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए इस पूरे मामले पर जवाबदेही तय करने की मांग की।

    इधर, संसद के मानसून सत्र के दौरान भी विपक्ष ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। विपक्षी दलों ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा संबंधी विवादों और युवाओं से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि ऐसे विषय सीधे लाखों छात्रों और उनके भविष्य से जुड़े हैं, इसलिए सरकार को इन पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

    इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। मुलाकात को लेकर विभिन्न तरह की राजनीतिक चर्चाएं शुरू हुईं, हालांकि आधिकारिक तौर पर बैठक के एजेंडे या किसी संभावित निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई। वहीं, प्रदर्शन से जुड़े कुछ प्रमुख प्रतिनिधियों ने अपने आंदोलन की आगामी रणनीति पर भी विचार किया। आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की, जबकि पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी अपनी ओर से आंदोलन को लेकर आगे की रूपरेखा साझा की और सरकार के सामने रखी गई मांगों का उल्लेख किया।

    संसद सत्र के साथ ही यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन गया है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस पर तीखी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष सरकार से इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत जवाब और संबंधित मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

  • सिर्फ कुछ सेंटीमीटर ऊंची यह पहाड़ी बनी दुनिया भर में चर्चा का विषय बिना ट्रेनिंग हर कोई बन जाता है पर्वतारोही

    सिर्फ कुछ सेंटीमीटर ऊंची यह पहाड़ी बनी दुनिया भर में चर्चा का विषय बिना ट्रेनिंग हर कोई बन जाता है पर्वतारोही


    नई दिल्ली। दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वतों का नाम आते ही लोगों के मन में माउंट एवरेस्ट हिमालय और कंचनजंगा जैसी विशाल चोटियों की तस्वीर उभर आती है। इन पर्वतों पर चढ़ना साहस धैर्य और कठिन प्रशिक्षण की मांग करता है। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसी जगह भी चर्चा में है जिसे दुनिया की सबसे छोटी पहाड़ी कहा जा रहा है। यह जगह अपने आकार से ज्यादा अपने अनोखे दावे और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की वजह से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।

    सोशल मीडिया पर इसे माउंट पॉल्ट्री के नाम से प्रचारित किया जा रहा है। दावा किया जाता है कि इसकी ऊंचाई केवल कुछ सेंटीमीटर है और कई पोस्ट में इसे लगभग सात सेंटीमीटर ऊंचा बताया गया है। यही वजह है कि यहां पहुंचने वाले लोग मजाकिया अंदाज में खुद को दुनिया की सबसे छोटी पहाड़ी का विजेता बताते हुए फोटो और वीडियो साझा करते हैं। हालांकि इस दावे की किसी आधिकारिक भूगोल या वैज्ञानिक संस्था द्वारा पुष्टि नहीं की गई है और इसे अधिकतर इंटरनेट पर वायरल सामग्री के रूप में ही देखा जाता है।

    इस कथित पहाड़ी की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां किसी विशेष प्रशिक्षण या पर्वतारोहण उपकरण की जरूरत नहीं पड़ती। जहां बड़े पर्वतों पर चढ़ने में कई दिन लग जाते हैं वहीं इस छोटे प्राकृतिक उभार को बच्चे बुजुर्ग और यहां तक कि पालतू जानवर भी कुछ ही कदमों में पार कर लेते हैं। यही सरलता इसे लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनाती है और परिवारों के लिए यह एक मनोरंजक अनुभव बन जाता है।

    पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में क्वर्की टूरिज्म यानी अनोखी और अलग तरह की जगहों पर घूमने का चलन तेजी से बढ़ा है। लोग अब केवल प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं रहना चाहते बल्कि ऐसी जगहों की तलाश करते हैं जिनकी कहानी रोचक हो और जिसे सोशल मीडिया पर साझा किया जा सके। माउंट पॉल्ट्री भी इसी वजह से चर्चा में आया है। यहां आने वाले पर्यटक कुछ सेकंड की चढ़ाई को भी खास उपलब्धि की तरह पेश करते हैं और मजेदार कैप्शन के साथ अपनी तस्वीरें साझा करते हैं।

    हालांकि भूगोल के विशेषज्ञ किसी स्थान को पहाड़ या पर्वत मानने के लिए उसकी ऊंचाई प्राकृतिक संरचना और भौगोलिक विशेषताओं का अध्ययन करते हैं। ऐसे में इतनी कम ऊंचाई वाले प्राकृतिक उभार को अधिकतर विशेषज्ञ पहाड़ी की बजाय छोटा टीला या प्राकृतिक उभार मानते हैं। इसलिए माउंट पॉल्ट्री को दुनिया की सबसे छोटी पहाड़ी कहना एक लोकप्रिय दावा जरूर है लेकिन इसे स्थापित भौगोलिक तथ्य नहीं माना जाता।

    फिर भी इस अनोखी जगह ने यह साबित कर दिया है कि किसी स्थान की लोकप्रियता केवल उसके आकार से तय नहीं होती। जहां एक ओर दुनिया की ऊंची चोटियां साहस और रोमांच का प्रतीक हैं वहीं दूसरी ओर इस तरह की छोटी और अनोखी जगहें लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने का काम करती हैं। यही कारण है कि इंटरनेट पर माउंट पॉल्ट्री लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे देखने तथा अपनी यादगार तस्वीरें लेने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

  • मानसून सत्र से पहले स्पीकर का बड़ा फैसला टीएमसी के बागी सांसद अब अलग बैठेंगे कई दिग्गज नेताओं की सीट भी बदली

    मानसून सत्र से पहले स्पीकर का बड़ा फैसला टीएमसी के बागी सांसद अब अलग बैठेंगे कई दिग्गज नेताओं की सीट भी बदली


    नई दिल्ली। लोकसभा के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले संसद की बैठने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 बागी सांसदों को सदन में अलग बैठने की अनुमति देते हुए उनके लिए नई सीटें आवंटित कर दी हैं। इस फैसले का असर केवल इन सांसदों तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे सीटिंग प्लान में बदलाव करना पड़ा जिसके चलते कुल 39 सांसदों की सीटें बदल दी गईं। नई व्यवस्था सोमवार से शुरू होने वाले मानसून सत्र से लागू होगी और सभी सांसद अपने नए डिवीजन नंबर तथा नई सीटों के साथ सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे।

    लोकसभा सचिवालय के अनुसार टीएमसी से अलग हुए सांसदों को एक साथ बैठाने के लिए सदन की पूरी बैठने की व्यवस्था में बदलाव करना आवश्यक था। इसी कारण कई अन्य सांसदों की सीटें भी बदलनी पड़ीं। संसद में सीटों का निर्धारण डिवीजन नंबर के आधार पर किया जाता है और यही नंबर किसी सांसद की पहचान तथा उसकी निर्धारित सीट तय करता है। संसदीय कार्यवाही के दौरान मतदान दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अन्य आधिकारिक प्रक्रियाओं में भी इसी डिवीजन नंबर का उपयोग किया जाता है।

    इस फेरबदल का असर कई प्रमुख नेताओं पर भी पड़ा है। लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी की सीट बदल दी गई है। इसके अलावा वाईएसआर कांग्रेस के पी वी मिधुन रेड्डी और शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल को भी नई सीटें आवंटित की गई हैं। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय की सीट भी बदलकर 354 कर दी गई है जबकि पहले उनका सीट नंबर 280 था। इन बदलावों के साथ संसद की नई बैठक व्यवस्था मानसून सत्र में पहली बार देखने को मिलेगी।

    लोकसभा अध्यक्ष द्वारा शनिवार को दो महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। पहला फैसला शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को स्वीकार करने से जुड़ा था। दूसरा फैसला टीएमसी के 20 बागी सांसदों को सदन में अलग बैठने की अनुमति देने का था। जानकारी के अनुसार ये सभी सांसद अब नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई से जुड़े हुए हैं और इसी आधार पर उन्होंने अलग बैठने की मांग की थी।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव केवल बैठने की व्यवस्था तक सीमित नहीं है बल्कि इसका राजनीतिक संदेश भी काफी महत्वपूर्ण है। संसद में किसी समूह को अलग सीटें मिलना उसकी अलग पहचान को भी दर्शाता है। ऐसे में इस फैसले को पश्चिम बंगाल की राजनीति और विपक्ष की रणनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। मानसून सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है जबकि विपक्ष भी विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। ऐसे समय में सीटिंग प्लान में यह बदलाव राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है।

    नई व्यवस्था लागू होने के बाद सांसद अपने नए डिवीजन नंबर के अनुसार सदन में बैठेंगे और संसदीय कार्यवाही में भाग लेंगे। माना जा रहा है कि मानसून सत्र के दौरान इस फैसले पर राजनीतिक बहस भी देखने को मिल सकती है क्योंकि विपक्ष पहले ही कई मुद्दों पर सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी कर चुका है।

  • INSAT ने दिखाया मानसून का दम भारत के दो तिहाई हिस्से पर बादलों का कब्जा तेज बारिश और तूफान के संकेत

    INSAT ने दिखाया मानसून का दम भारत के दो तिहाई हिस्से पर बादलों का कब्जा तेज बारिश और तूफान के संकेत


    नई दिल्ली। देशभर में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। इसरो के मौसम उपग्रह INSAT 3DR से मिली ताजा तस्वीरों ने साफ संकेत दिए हैं कि भारत का लगभग दो तिहाई हिस्सा घने मानसूनी बादलों से ढक चुका है। जम्मू कश्मीर से लेकर गंगा के मैदानी इलाकों बिहार पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों तक बादलों का घना फैलाव दिखाई दे रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्थिति आने वाले दिनों में कई राज्यों में तेज बारिश आंधी और कहीं कहीं अत्यधिक वर्षा का कारण बन सकती है।

    19 जुलाई को जारी सैटेलाइट इमेज के विश्लेषण के अनुसार देश के करीब 60 से 70 प्रतिशत भूभाग पर बादलों का प्रभाव देखा गया। सबसे घने बादल पंजाब उत्तर प्रदेश बिहार और पश्चिम बंगाल के ऊपर मौजूद हैं जबकि पूर्वोत्तर के लगभग सभी राज्य बादलों की मोटी परत से ढके हुए हैं। दक्षिण भारत में भी अरब सागर से आने वाली नम हवाओं के कारण लंबी बादल पट्टियां सक्रिय दिखाई दे रही हैं। हालांकि पश्चिमी राजस्थान और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में अपेक्षाकृत साफ मौसम बना हुआ है।

    INSAT 3DR भारत का अत्याधुनिक मौसम निगरानी उपग्रह है जो पृथ्वी से लगभग 36 हजार किलोमीटर ऊपर भू स्थिर कक्षा में रहकर लगातार मौसम पर नजर रखता है। यह हर आधे घंटे में नई तस्वीरें भेजता है जिनका उपयोग भारतीय मौसम विभाग मौसम का पूर्वानुमान तैयार करने के लिए करता है। उपग्रह के विजिबल और थर्मल इंफ्रारेड सेंसर बादलों की मोटाई ऊंचाई और तापमान का विश्लेषण करते हैं जिससे यह पता लगाया जाता है कि किस क्षेत्र में सामान्य बादल हैं और कहां खतरनाक तूफानी बादल विकसित हो रहे हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार क्लाउड टॉप ब्राइटनेस टेम्परेचर यानी बादलों की ऊपरी सतह का तापमान मौसम का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक होता है। जितना अधिक ठंडा बादल का ऊपरी हिस्सा होगा उतना ही ऊंचा और शक्तिशाली वह बादल माना जाता है। माइनस 40 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान वाले बादल तेज बारिश और गरज चमक वाले तूफान का संकेत देते हैं जबकि माइनस 70 डिग्री सेल्सियस या उससे कम तापमान वाले बादल बेहद खतरनाक मौसम प्रणाली का हिस्सा माने जाते हैं। ताजा तस्वीरों में जम्मू कश्मीर के ऊपर माइनस 80 डिग्री सेल्सियस तक ठंडे बादल दर्ज किए गए हैं जबकि उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड और पूर्वोत्तर में भी अत्यधिक सक्रिय बादल मौजूद हैं।

    हालांकि मौसम विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि हर जगह बादल होने का मतलब भारी बारिश नहीं होता। हल्के मानसूनी बादल केवल सामान्य वर्षा या बूंदाबांदी करा सकते हैं जबकि अत्यधिक बारिश केवल उन क्षेत्रों में होती है जहां गहरे और ऊंचे तूफानी बादल विकसित होते हैं। फिलहाल उत्तरी भारत में सक्रिय मानसून ट्रफ और अरब सागर से आने वाली नमी भरी हवाओं के कारण जम्मू कश्मीर हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड पंजाब हरियाणा दिल्ली उत्तर प्रदेश बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और मैदानी क्षेत्रों में जलभराव तथा नदियों के जलस्तर बढ़ने का खतरा भी बना रहेगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कभी लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति बनती है तो कभी बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश हो जाती है। ऐसे समय में INSAT 3DR जैसे आधुनिक मौसम उपग्रह मौसम की सटीक निगरानी और समय रहते चेतावनी जारी करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के ताजा मौसम बुलेटिन पर नजर रखें और भारी बारिश वाले इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचें।

  • जबलपुर में स्कूल-कॉलेजों के बाहर छात्राओं से छेड़छाड़ के मामलों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, एसपी से मांगी रिपोर्ट

    जबलपुर में स्कूल-कॉलेजों के बाहर छात्राओं से छेड़छाड़ के मामलों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, एसपी से मांगी रिपोर्ट


    जबलपुर।
    शहर के स्कूलों और कॉलेजों के बाहर छात्राओं से छेड़छाड़ और उत्पीड़न की लगातार मिल रही शिकायतों को लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने गंभीर रुख अपनाया है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जबलपुर पुलिस अधीक्षक से मामले की जांच कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

    छात्राओं को बनाया जा रहा निशाना

    जानकारी के अनुसार, कई शिक्षण संस्थानों के बाहर छुट्टी के समय असामाजिक तत्व और मनचले छात्राओं का पीछा करते हैं, उन पर फब्तियां कसते हैं, मोबाइल नंबर मांगते हैं और उनकी बिना अनुमति तस्वीरें भी खींचते हैं। इन घटनाओं से छात्राएं मानसिक रूप से परेशान हो रही हैं और खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

    बताया जा रहा है कि लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के कारण कुछ छात्राओं ने स्कूल-कॉलेज जाना भी छोड़ दिया है। वहीं, विरोध करने पर अभिभावकों को भी धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।

    मानवाधिकार आयोग ने लिया स्वत: संज्ञान

    मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के क्षेत्रीय कार्यालय प्रभारी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, आयोग की मुख्य पीठ भोपाल में अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह की एकल पीठ ने मामले को प्रथम दृष्टया मानवाधिकार हनन का मामला माना है।

    आयोग ने जबलपुर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें तथा दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें।

    सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    लगातार सामने आ रही घटनाओं ने स्कूल और कॉलेज परिसरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित पुलिस गश्त, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और मनचलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • पन्ना की एनएमडीसी खदान में मिला 13.16 कैरेट का दुर्लभ हीरा, कीमत करीब एक करोड़ रुपये आंकी गई

    पन्ना की एनएमडीसी खदान में मिला 13.16 कैरेट का दुर्लभ हीरा, कीमत करीब एक करोड़ रुपये आंकी गई


    पन्ना।
    मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की रत्नगर्भा धरती ने एक बार फिर अपनी समृद्ध खनिज संपदा का प्रमाण दिया है। मझगवां स्थित एनएमडीसी लिमिटेड की हीरा खदान से 13.16 कैरेट का उच्च गुणवत्ता वाला प्राकृतिक जेम श्रेणी का हीरा मिला है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार इसकी कीमत करीब एक करोड़ रुपये हो सकती है, हालांकि इसका वास्तविक मूल्य आगामी खुली नीलामी में तय होगा।

    यह वर्ष 2024 में खदान का संचालन दोबारा शुरू होने के बाद अब तक का सबसे बड़ा हीरा माना जा रहा है। इससे पहले मार्च 2024 में इसी परियोजना से 10.04 कैरेट का हीरा मिला था, लेकिन 13.16 कैरेट का यह नया रत्न उस रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ गया है।

    नीलामी में तय होगी वास्तविक कीमत

    एनएमडीसी अधिकारियों के अनुसार हीरे की अंतिम कीमत उसकी गुणवत्ता, चमक, शुद्धता और नीलामी के दौरान मिलने वाली बोली पर निर्भर करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च गुणवत्ता के कारण इस हीरे को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अच्छी मांग मिल सकती है।

    एशिया की प्रमुख यंत्रीकृत हीरा खदान

    पन्ना की मझगवां हीरा खदान भारत ही नहीं, बल्कि एशिया की एकमात्र संगठित और पूर्णतः यंत्रीकृत हीरा खदानों में शामिल है। यह खदान वर्षों से कई दुर्लभ और बहुमूल्य हीरे देने के लिए जानी जाती रही है और देश के हीरा उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

    एनएमडीसी में खुशी का माहौल

    इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के बाद पन्ना स्थित माइनिंग प्रोजेक्ट से लेकर हैदराबाद स्थित एनएमडीसी मुख्यालय तक उत्साह का माहौल है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की खोज से खदान की संभावनाओं को नया बल मिला है और भविष्य में भी उच्च गुणवत्ता वाले हीरे मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

  • री-नीट में समान अंक के बावजूद अलग मिली AIR, जानिए कैसे एनटीए के टाई-ब्रेकिंग नियम ने तय की आर्यन और पांशुल की रैंक

    री-नीट में समान अंक के बावजूद अलग मिली AIR, जानिए कैसे एनटीए के टाई-ब्रेकिंग नियम ने तय की आर्यन और पांशुल की रैंक

    नई दिल्ली । री-नीट परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल चर्चा का केंद्र बन गए हैं। दोनों अभ्यर्थियों ने 720 में से 715 अंक हासिल किए, लेकिन इसके बावजूद मेरिट सूची में आर्यन गुप्ता को ऑल इंडिया रैंक-1 और पांशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 प्रदान की गई। समान अंक होने के बावजूद अलग-अलग रैंक मिलने से अभ्यर्थियों और अभिभावकों के बीच यह सवाल उठने लगा कि आखिर ऐसी स्थिति में रैंक किस आधार पर तय की जाती है।

    दरअसल, मेडिकल प्रवेश परीक्षा में केवल कुल अंक ही अंतिम रैंक का आधार नहीं होते। जब दो या अधिक अभ्यर्थियों के कुल अंक समान होते हैं, तब एनटीए की निर्धारित टाई-ब्रेकिंग प्रक्रिया लागू की जाती है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य समान अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों के बीच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से मेरिट तय करना होता है। इसी नियम के कारण समान अंक होने के बावजूद दोनों अभ्यर्थियों की ऑल इंडिया रैंक अलग-अलग निर्धारित की गई।

    टाई-ब्रेकिंग प्रक्रिया के पहले चरण में अभ्यर्थियों के बायोलॉजी विषय के अंक देखे जाते हैं। इसमें बॉटनी और जूलॉजी दोनों के संयुक्त प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाता है। जिस उम्मीदवार के बायोलॉजी में अधिक अंक होते हैं, उसे बेहतर रैंक दी जाती है। यदि इस स्तर पर भी दोनों के अंक समान हों, तो अगले चरण में केमिस्ट्री के अंकों की तुलना की जाती है। यदि केमिस्ट्री में भी बराबरी बनी रहती है, तब फिजिक्स के अंकों के आधार पर रैंक तय की जाती है।

    यदि तीनों प्रमुख विषयों में भी दोनों अभ्यर्थियों का प्रदर्शन समान हो, तो आगे उत्तर देने के पैटर्न का विश्लेषण किया जाता है। इसमें सही और गलत उत्तरों के अनुपात को देखा जाता है। जिस अभ्यर्थी ने अपेक्षाकृत कम गलत उत्तर दिए होते हैं या जिसका गलत उत्तरों का अनुपात बेहतर होता है, उसे मेरिट सूची में प्राथमिकता दी जाती है। यह व्यवस्था परीक्षा की गुणवत्ता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।

    इसके बाद भी यदि बराबरी बनी रहती है, तो अंतिम निर्णय एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति की निगरानी में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि किसी भी उम्मीदवार के साथ अन्याय न हो और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे। यही कारण है कि समान अंक प्राप्त करने वाले सभी उम्मीदवारों की रैंक हमेशा एक जैसी नहीं होती।

    आर्यन गुप्ता और पांशुल बंसल के मामले में भी यही प्रक्रिया लागू की गई। दोनों के कुल अंक 715 रहे, लेकिन विषयवार प्रदर्शन और टाई-ब्रेकिंग के शुरुआती चरणों में आर्यन गुप्ता का प्रदर्शन बेहतर पाया गया। इसी आधार पर उन्हें ऑल इंडिया रैंक-1 और पांशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 प्रदान की गई। यह निर्णय निर्धारित नियमों के अनुसार लिया गया और मेरिट सूची उसी आधार पर तैयार की गई।

    गौरतलब है कि पहले समान अंक की स्थिति में अभ्यर्थियों की आयु को भी रैंक निर्धारण का आधार बनाया जाता था। अधिक आयु वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाती थी। हालांकि बाद में इस नियम को लेकर विवाद सामने आने के बाद इसे समाप्त कर दिया गया। वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह विषयवार प्रदर्शन और निर्धारित टाई-ब्रेकिंग प्रक्रिया पर आधारित है, जिससे मेरिट सूची अधिक पारदर्शी और समान अवसर के सिद्धांत के अनुरूप तैयार की जा सके।