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  • ईरान युद्ध का असर… ATF के दामों में 115% से ज्यादा की वृद्धि… महंगा हो सकता है हवाई सफर

    ईरान युद्ध का असर… ATF के दामों में 115% से ज्यादा की वृद्धि… महंगा हो सकता है हवाई सफर


    नई दिल्ली।
    ईरान-इजराल-अमेरिका युद्ध (Iran-Israel-America War) का असर हवाई उड़ानों (Air flights) पर तो दिख ही रहा है अब यात्रियों की जेब पर भी पड़ सकता है। पश्चिम एशिया संकट (West Asia crisis.) के बीच भारत में एविएशन टरबाइन फ्यूल (Aviation Turbine Fuel- ATF) की कीमतों में 115% से ज्यादा की बड़ी बढ़ोतरी कर दी गई है। नई दिल्ली में अब ATF की कीमत 1 अप्रैल यानी आज से बढ़कर लगभग 2.07 लाख रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है, जबकि पिछले महीने यह करीब 96,638 रुपये प्रति किलोलीटर थी। इस तेजी का असर आज एविएशन इंडस्ट्री से जुड़ीं कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिल सकता है। आज इंडिगो, स्पाइसजेट जैसी कंपनियों के शेयरों में बड़ी हलचल रहने के आसार हैं।


    क्यों बढ़े एटीएफ के दाम

    एटीएफ के रेट्स में इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह ईरान-अमेरिका-इजराइल के बीच जारी युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार में आई उथल-पुथल है, जिससे ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। आज भी क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हैं। ब्लूमबर्ग के मुाबिक ब्रेंट क्रूड की कीमत सुबह साढ़े सात बजे के करीब 105.68 डॉलर प्रति बैरल थी और WTI की 102.82 डॉलर पर थी।


    बड़े शहरों में नई कीमतें

    देश के अन्य बड़े शहरों में भी ATF की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है। कोलकाता में एटीएफ की कीमत अब करीब 2.05 लाख रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है, जो मार्च में लगभग 99,587 रुपये थी। चेन्नई में यह बढ़कर करीब 2.14 लाख रुपये प्रति किलोलीटर पहुंच गई है, जबकि पहले यह करीब 1 रुपये लाख थी।

    वहीं, मुंबई की बात करें तो यहां ATF की कीमत करीब 1.94 लाख रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है, जो पिछले महीने लगभग ₹90,451 थी और बड़े शहरों में यह सबसे कम है।


    एयरलाइन कंपनियों पर असर

    इस भारी बढ़ोतरी का सीधा असर एयरलाइन कंपनियों पर पड़ेगा। ईंधन खर्च बढ़ने से उनकी लागत बढ़ेगी, जिसके कारण शेयर बाजार में एयरलाइन कंपनियों के स्टॉक्स पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।


    यात्रियों की जेब पर पड़ेगा बोझ

    ATF की कीमत बढ़ने का असर आम लोगों पर भी साफ दिखाई देगा। एयरलाइंस अपनी बढ़ी हुई लागत को संतुलित करने के लिए हवाई किराए में बढ़ोतरी कर सकती हैं, जिससे यात्रियों को ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ सकता है।

  • महंगाई की मार… आज से बुखार से लेकर शुगर-BP तक…900 से अधिक जरूरी दवाओं के दाम बढ़े

    महंगाई की मार… आज से बुखार से लेकर शुगर-BP तक…900 से अधिक जरूरी दवाओं के दाम बढ़े


    नई दिल्ली।
    आवश्यक दवाओं की कीमतों (Essential Medicines Prices.) में आज से वृद्धि लागू होने जा रही है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) (National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA)) के आदेश के तहत 900 से अधिक दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य में संशोधन किया जाएगा। बुखार, दर्द, संक्रमण, एनीमिया और पोषण संबंधी आवश्यकताओं में उपयोग होने वाली दवाएं शामिल हैं। जीएसटी कटौती के बाद एक अप्रैल से मरीजों व तीमारदारों को 10 फीसदी और मंहगी दरों पर दवा खरीदनी होगी। 60 फीसदी फार्मा कंपनियों ने जनवरी में ही नई मैन्युफैक्चरिंग पर रेट बढ़ा दिए थे। बाजार में जनवरी 2026 से आने वाले दवाओं के नए बैच पर नई एमआरपी पड़ी है।

    थोक से लेकर रिटेल दवा मार्केट में आज बुधवार से दवा खरीदना मंहगा हो जाएगा। नियमित रूप से हम जिन दवाओं का इस्तेमाल करते हैं उसकी कीमतों में 10 से 12 फीसदी इजाफा होगा। थोक दवा दुकानदारों की मानें तो यह मुनाफा फार्मा कंपनियां सालाना अपने नियमों के तहत कर रही हैं। ईरान, इराक व अमेरिका के युद्ध से इन रेटों का कोई लेना देना नहीं है। थोक दवा फफाला मार्केट में दवाओं के नए स्टॉक भी आ रहे हैं, जिसमें नई एमआरपी पड़ी है।


    मार्केट में 80 फीसदी नया स्टॉक

    जिस दवा पर एमआरपी 80 रुपये थी उसकी 90 से 95 रुपये हो गई है। जिसकी कीमत 100 रुपये थी वह 110 से 115 रुपये हो गया है। थोक दवा कारोबारी भी नई एमआरपी के हिसाब से ही दवाओं की सेल कर रहे हैं। जो पुराना स्टॉक है उसकी एमआरपी कम करके दे रहे हैं। लेकिन बाजार में 80 फीसदी नया स्टॉक आ चुका है। फरवरी व मार्च से फार्मा कंपनियां नए स्टॉक को निकालने लगती हैं। दवा बाजार में कुल 900 से अधिक दवाओं की कीमतों में इजाफा होने वाला है।


    नए स्टॉक के अनुसार होगी बिक्री

    थोक दवा कारोबारी राजीव सिंह ने बताया कि युद्ध के कारण दवाओं के दाम नहीं बढ़े हैं। दवा कंपनियां रुटीन में अप्रैल से जो रेट बढ़ाती हैं उसी के दाम बढ़ेंगे। अप्रैल से अधिकांश दवाओं पर नई एमआरपी आती है। वहीं दूसरे थोक कारोबारी सुनील राणा का कहना है कि कुछ दवा कंपनियों ने पहले ही एमआरपी बढ़ा दी है और नया स्टॉक बाजार में आ गया है। नए स्टॉक के अनुसार ही बिक्री की जा रही है। कई फार्मा कंपनियों का नया स्टॉक अप्रैल के पहले सप्ताह में आ जाएगा।


    महंगी होने वाली दवाएं

    – पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स, विटामिन और मिनरल सप्लीमेंट्स, एनीमिया की दवाएं, दर्द निवारक दवाएं, शुगर, ब्लडप्रेशर, लिवर, पेट, त्वचा संबंधित।

  • कुवैत से 20 भारतीयों के शव लेकर केरल पहुंचा विमान, अलग-अलग घटनाओं में हुई इनकी मौत

    कुवैत से 20 भारतीयों के शव लेकर केरल पहुंचा विमान, अलग-अलग घटनाओं में हुई इनकी मौत


    कोचीन।
    कुवैत (Kuwait) में अलग-अलग घटनाओं में जान गंवाने वाले 20 भारतीय नागरिकों (20 Indian citizens) के पार्थिव शरीर बुधवार को केरल (Kerala) के कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Cochin International Airport) पहुंचे.

    अधिकारियों के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के कारण इन शवों की स्वदेश वापसी में देरी हुई थी. इन मृतकों में तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के मुथुकुलाथुर निवासी 37 वर्षीय संतनसेल्वम कृष्णन भी शामिल हैं, जिनकी मौत कुवैत में एक पानी के डीसैलिनेशन प्लांट पर हुए ड्रोन हमले में हो गई थी. बाकी 19 भारतीय नागरिकों की मौत अलग-अलग हादसों और प्राकृतिक कारणों से हुई थी, लेकिन खाड़ी देशों पर ईरान के ताबड़तोड़ हमलों के चलते उनके पार्थिव शरीर भारत लाने में डेरी हुई.

    इस बीच, विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दूसरे महीने में प्रवेश करने के साथ ही अब तक कुल 8 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि एक व्यक्ति अभी भी लापता है. खाड़ी मामलों को देखने वाले विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव असीम महाजन ने बताया कि कुवैत स्थित भारतीय मिशन स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि मृतकों के पार्थिव शरीर जल्द से जल्द उनके परिजनों तक पहुंचाए जा सकें.

    असीम महाजन ने कहा, ‘हाल ही में एक भारतीय नागरिक की हमले में मौत हो गई, जो बेहद दुखद है. हम शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं. भारतीय दूतावास परिवार के संपर्क में है और हर संभव मदद सुनिश्चित कर रहा है।

    कुवैत में भारतीय दूतावास ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया है. दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि डीसैलिनेशन सुविधा पर हुए हमले में भारतीय नागरिक की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त की जाती है और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर हर संभव सहायता दी जा रही है.

    उधर, कुवैत के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि रविवार शाम हुए हमले में एक प्रमुख पावर और वाटर डीसैलिनेशन प्लांट को भारी नुकसान पहुंचा, जिसमें एक भारतीय कर्मचारी की जान चली गई. अधिकारियों ने इस हमले के पीछे ईरान की कार्रवाई होने की आशंका जताई है.

    गौरतलब है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर आम नागरिकों पर भी पड़ रहा है. भारतीय नागरिकों की मौत और लापता होने की घटनाओं ने भारत सरकार की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद देने की कोशिश कर रहे हैं.

  • बिहार: नालंदा के शीतला माता मंदिर में हुई भगदड़ हादसे में 9 की मौत, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल

    बिहार: नालंदा के शीतला माता मंदिर में हुई भगदड़ हादसे में 9 की मौत, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल


    नालंदा । बिहार के नालंदा जिले में मंगलवार सुबह शीतला माता मंदिर में भगदड़ मचने से बड़ा हादसा हो गया। इस घटना में 9 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 8 महिलाएं शामिल हैं। महिलाओं की मौके पर ही भीड़ में दबने से मौत हो गई, जबकि एक पुरुष ने अस्पताल में दम तोड़ा।

    चैत्र के आखिरी मंगलवार पर उमड़ी भारी भीड़

    चैत्र महीने के आखिरी मंगलवार के अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे। मंदिर परिसर में मेला भी लगा हुआ था, जिससे भीड़ और अधिक बढ़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। दर्शन की जल्दी में लोगों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जिससे अफरातफरी मच गई और कई लोग भीड़ में दब गए। हादसे में कई लोग घायल भी हुए हैं।

    सुरक्षा इंतजामों की भारी कमी

    हादसे के समय मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था न के बराबर थी। बताया गया कि लगभग 25 हजार श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद वहां पुलिस की पर्याप्त तैनाती नहीं थी। इसी दिन नालंदा यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति के दौरे को लेकर 8 जिलों के करीब 2500 जवान तैनात किए गए थे, जबकि मंदिर परिसर में सुरक्षा के इंतजाम बेहद कमजोर रहे।

    हादसे के बाद प्रशासनिक कार्रवाई

    घटना के बाद मंदिर और मेले को बंद करा दिया गया है। पटना कमिश्नर को बिहार शरीफ भेजा गया है और मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को जांच के निर्देश दिए हैं। दीपनगर थाने के SHO राजमणि को निलंबित कर दिया गया है।

    मुआवजे की घोषणा
    राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 6 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं केंद्र सरकार ने भी 2 लाख रुपए के मुआवजे का ऐलान किया है।

    DGP ने मानी व्यवस्था में कमी

    नालंदा पहुंचे DGP विनय कुमार ने स्वीकार किया कि मंदिर परिसर में कई कमियां थीं। उन्होंने कहा कि वहां पुलिस बल की तैनाती जरूरी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। भीड़ अधिक होने, मंदिर परिसर छोटा होने और लोगों में पहले दर्शन करने की होड़ के कारण हालात बिगड़ गए। लोग कतार में लगने के बजाय आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिससे भगदड़ मच गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताई पूरी घटना
    महिला श्रद्धालुओं के अनुसार, चैत्र के आखिरी मंगलवार के कारण भीड़ काफी अधिक थी। मंदिर का गर्भगृह छोटा होने के चलते लोग जल्दी दर्शन के लिए एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश कर रहे थे। एक अन्य श्रद्धालु ने बताया कि मंदिर में सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं था। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए न तो पुलिस मौजूद थी और न ही कोई उचित व्यवस्था की गई थी। इसी दौरान एक महिला को चक्कर आया और वह गिर पड़ी, जिसके बाद भगदड़ की स्थिति बन गई।

    हादसे के पीछे तीन बड़ी लापरवाहियां

    1. प्रबंधन की तैयारी नहीं
    हर साल इस दिन भारी भीड़ उमड़ती है, इसके बावजूद मंदिर प्रबंधन ने भीड़ नियंत्रण के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए। बैरिकेडिंग तक नहीं की गई थी।

    2. पीछे के रास्ते से दर्शन

    कुछ लोगों को पैसे लेकर पीछे के दरवाजे से दर्शन कराए जा रहे थे, जिससे अव्यवस्था और नाराजगी बढ़ी।

    3. पुलिस-प्रशासन की गैरमौजूदगी

    करीब 25 हजार श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद पुलिस या प्रशासन की पर्याप्त मौजूदगी नहीं थी। मेले की पूर्व जानकारी के बावजूद कोई मजिस्ट्रेट तैनात नहीं किया गया था।

  • Punjab & Sind Bank में 1000 LBO पदों पर बंपर भर्ती, आज से आवेदन शुरू

    Punjab & Sind Bank में 1000 LBO पदों पर बंपर भर्ती, आज से आवेदन शुरू


    नई दिल्ली बैंकिंग क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए शानदार खबर है। Punjab & Sind Bank (पीएसबी) ने लोकल बैंक ऑफिसर (LBO) के 1000 पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। यह भर्ती जूनियर मैनेजमेंट ग्रेड स्केल-I (JMGS-I) के तहत की जा रही है, जिससे उम्मीदवारों को बैंकिंग सेक्टर में स्थिर और आकर्षक करियर का मौका मिलेगा।

    आवेदन प्रक्रिया शुरू, जानें आखिरी तारीख

    इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 31 मार्च से शुरू हो चुकी है। इच्छुक उम्मीदवार 20 अप्रैल तक आवेदन कर सकते हैं। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय रहते अपना फॉर्म भर लें।

    योग्यता और अनुभव जरूरी

    आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही उम्मीदवार के पास अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक या क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक में अधिकारी के रूप में कम से कम 18 महीने का अनुभव होना चाहिए।

    आयु सीमा और छूट

    इस भर्ती के लिए न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम आयु 30 वर्ष तय की गई है। आयु की गणना 1 मार्च के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी।

    चयन प्रक्रिया कैसे होगी?

    उम्मीदवारों का चयन कई चरणों में किया जाएगा, जिसमें लिखित परीक्षा, स्क्रीनिंग, पर्सनल इंटरव्यू, लोकल लैंग्वेज प्रोफिशिएंसी टेस्ट, मेरिट लिस्ट और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शामिल हैं। सभी चरणों में सफल होने वाले उम्मीदवारों को ही अंतिम रूप से नियुक्त किया जाएगा।

    सैलरी और सुविधाएं

    चयनित उम्मीदवारों को 48,480 रुपये से 85,920 रुपये प्रति माह तक वेतन मिलेगा। इसके अलावा अन्य भत्ते और सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी, जिससे यह नौकरी और भी आकर्षक बन जाती है।

    आवेदन शुल्क


    जनरल/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस: ₹850
    एससी/एसटी/पीडब्ल्यूबीडी: ₹100
    ऐसे करें आवेदन

    आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले Punjab & Sind Bank की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
    होमपेज पर दिए गए भर्ती लिंक पर क्लिक करें और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करें। इसके बाद लॉगिन कर आवेदन फॉर्म में सभी जरूरी जानकारी भरें। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें और ऑनलाइन शुल्क का भुगतान करें। अंत में फॉर्म सबमिट कर उसका प्रिंटआउट भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें।

    सुनहरा अवसर न गंवाएं

    यह भर्ती उन युवाओं के लिए बेहतरीन मौका है जो बैंकिंग सेक्टर में आगे बढ़ना चाहते हैं। बड़ी संख्या में पद, अच्छा वेतन और सरकारी नौकरी की सुरक्षा इसे बेहद खास बनाते हैं।

  • भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय बैठक, आपसी संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर हुई चर्चा

    भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय बैठक, आपसी संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर हुई चर्चा


    नई दिल्ली  भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 30 मार्च, 2026 को रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रे रुडेंको के साथ विदेश कार्यालय परामर्श (एफओसी) किया। विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ रणनीतिक साझेदारी, आपसी हितों और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।

    विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, बातचीत के दौरान, दोनों पक्षों ने आपसी संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर अपने विचार भी साझा किए।

    दोनों पक्षों ने दिसंबर 2025 में नई दिल्ली में हुए 23वें सालाना समिट में लिए गए फैसलों को लागू करने में हुई प्रक्रिया की समीक्षा की। दिसंबर की इस यात्रा के दौरान, रुडेंको ने भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर से भी मुलाकात की। एफओसी का आखिरी राउंड मार्च 2025 में मॉस्को में हुआ था।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा, “भारत-रूस विदेश कार्यालय परामर्श सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसकी सह-अध्यक्षता विदेश सचिव विक्रम मिसरी और रूस के उप विदेश मंत्री एंड्रे रुडेन्को ने की।”

    उन्होंने कहा, “दोनों पक्षों ने विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के पूरे स्पेक्ट्रम की समीक्षा की और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर आपसी दृष्टिकोण साझा किए।”

    इसके अलावा, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के मई में भारत आने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, लावरोव 14-15 मई को ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली आ सकते हैं।

    इससे पहले 17 मार्च को, भारत और रूस ने नई दिल्ली में 7वां संयुक्त राष्ट्र परामर्श आयोजित किया, जिसमें चर्चा का मुख्य केंद्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एजेंडे से जुड़े मुद्दे थे। विशेष रूप से आतंकवाद-रोधी उपाय, शांति स्थापना, यूएनएससी सुधार और अन्य विषय।

    जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी प्राथमिकताओं का आदान-प्रदान किया। चर्चा का मुख्य केंद्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एजेंडे से जुड़े मुद्दे थे, विशेष रूप से आतंकवाद-रोधी उपाय, शांति स्थापना, यूएनएससी सुधार और अन्य विषय।”

    इससे पहले 11 मार्च को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ टेलीफोन पर बातचीत की और पश्चिम एशिया संघर्ष तथा द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार पर चर्चा की

  • संसद में गूंजा ‘पैटरनिटी लीव’ का मुद्दा, राघव चड्ढा ने उठाई अहम मांग

    संसद में गूंजा ‘पैटरनिटी लीव’ का मुद्दा, राघव चड्ढा ने उठाई अहम मांग


    नई दिल्ली देश में पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों को लेकर एक अहम बहस तेज होती नजर आ रही है। Raghav Chadha ने राज्यसभा में ‘पितृत्व अवकाश’ (Paternity Leave) को कानूनी अधिकार बनाने की जोरदार मांग उठाई। उन्होंने कहा कि भारत में बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी केवल मां तक सीमित कर देना एक बड़ी सामाजिक और कानूनी कमी है, जिसे अब बदलने की जरूरत है।

    “केयरगिविंग सिर्फ मां की नहीं”

    संसद में बोलते हुए Raghav Chadha ने कहा कि बच्चे के जन्म पर बधाई तो माता-पिता दोनों को मिलती है, लेकिन देखभाल की पूरी जिम्मेदारी मां पर डाल दी जाती है। उन्होंने इसे “समाज की विफलता” करार देते हुए कहा कि यह सोच अब बदलनी चाहिए।
    उनका कहना था कि मौजूदा व्यवस्था केवल मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) को महत्व देती है, जबकि पिता की भूमिका को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

    पितृत्व अवकाश को मिले कानूनी मान्यता

    राघव चड्ढा ने मांग की कि पितृत्व अवकाश को एक कानूनी अधिकार बनाया जाए, ताकि पिता को अपने परिवार और नौकरी के बीच चुनाव न करना पड़े। उन्होंने कहा कि बच्चे के जन्म के बाद मां को शारीरिक और मानसिक रूप से काफी सहारे की जरूरत होती है, जिसमें पिता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।

    मां के साथ-साथ पत्नी की देखभाल भी जरूरी

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पिता की जिम्मेदारी केवल बच्चे तक सीमित नहीं है, बल्कि पत्नी की देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है। गर्भावस्था और डिलीवरी के बाद महिला को भावनात्मक और शारीरिक सहयोग की जरूरत होती है, और ऐसे समय में पति की मौजूदगी “लक्जरी नहीं, बल्कि आवश्यकता” है।

    निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को नहीं मिलती सुविधा

    राघव चड्ढा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि फिलहाल भारत में केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को ही 15 दिन का पितृत्व अवकाश मिलता है। जबकि देश की करीब 90 प्रतिशत कार्यबल निजी क्षेत्र में काम करती है, जहां इस तरह की कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है। इसका मतलब है कि ज्यादातर पिता इस सुविधा से वंचित रह जाते हैं।

    दुनिया के कई देशों में बेहतर व्यवस्था

    उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि Sweden, Iceland और Japan जैसे देशों में पितृत्व अवकाश 90 दिनों से लेकर 52 हफ्तों तक कानूनी रूप से सुनिश्चित किया गया है। यह दर्शाता है कि विकसित देशों में माता-पिता दोनों की भूमिका को बराबरी से महत्व दिया जाता है।

    बदलते समाज के साथ कानून भी बदले

    राघव चड्ढा ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि कानून समाज का आईना होता है और इसमें यह साफ दिखना चाहिए कि बच्चे की परवरिश केवल मां की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि माता और पिता दोनों की साझा जिम्मेदारी है।

  • सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत की बड़ी छलांग, पीएम मोदी ने बताई मजबूत होती भूमिका

    सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत की बड़ी छलांग, पीएम मोदी ने बताई मजबूत होती भूमिका

    नई दिल्ली भारत ने वैश्विक टेक्नोलॉजी दुनिया में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। Sanand में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने केयन्स सेमीकॉन की आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (OSAT) सुविधा का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत अब तेजी से एक भरोसेमंद सेमीकंडक्टर सप्लायर के रूप में उभर रहा है और वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है।

    ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ बना गेमचेंजर

    प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि को India Semiconductor Mission की सफलता से जोड़ते हुए कहा कि 2021 में शुरू किया गया यह मिशन केवल एक नीति नहीं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास और तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। इस मिशन के तहत देश के छह राज्यों में करीब 1.60 लाख करोड़ रुपये के 10 बड़े प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम चल रहा है, जो आने वाले समय में भारत को चिप निर्माण का बड़ा हब बना सकते हैं।

    तेजी से विकसित हो रहा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम

    पीएम मोदी ने हाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया कि 28 फरवरी को Micron Technology के प्लांट में उत्पादन शुरू हुआ और अब 31 मार्च को Kaynes Technology के सेमीकंडक्टर प्लांट ने भी काम शुरू कर दिया है। उन्होंने इसे संयोग नहीं, बल्कि भारत के तेजी से विकसित होते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का प्रमाण बताया।

    ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की बढ़ती भूमिका

    प्रधानमंत्री ने कहा कि अब भारत की अपनी कंपनियां भी सेमीकंडक्टर निर्माण में आगे आ रही हैं और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं। Kaynes Technology का यह कदम भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ को मिल रही मजबूती

    पीएम मोदी ने इस मौके पर कहा कि आज का दौर केवल आर्थिक प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकों को दिशा देने का समय है। भारत अब सिर्फ बदलाव को देख नहीं रहा, बल्कि उसका नेतृत्व करने के लिए आगे बढ़ रहा है। ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ का विजन अब जमीन पर उतरता दिखाई दे रहा है।

    भविष्य की टेक्नोलॉजी में भारत की बड़ी भूमिका

    प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत की कई कंपनियां अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को और मजबूत करेंगी। इस दशक में उठाए गए कदम आने वाले दशकों में भारत को टेक्नोलॉजी लीडर बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

  • सरकारी यूनिवर्सिटी में 64 पदों पर भर्ती, प्रोफेसर समेत कई पद खाली

    सरकारी यूनिवर्सिटी में 64 पदों पर भर्ती, प्रोफेसर समेत कई पद खाली


    नई दिल्ली सरकारी विश्वविद्यालय में करियर बनाने का सपना देख रहे उम्मीदवारों के लिए शानदार अवसर आया है। Sri Dev Suman Uttarakhand University (एसडीएसयूवी) ने प्रोफेसर सहित विभिन्न शैक्षणिक पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। इस भर्ती के तहत कुल 64 पदों को भरा जाएगा, जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक अभ्यर्थी 10 अप्रैल शाम 5 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    किन पदों पर होगी भर्ती?

    इस भर्ती अभियान के तहत अलग-अलग पदों पर वैकेंसी निकाली गई है। इसमें असिस्टेंट प्रोफेसर के 41 पद, असिस्टेंट लाइब्रेरियन का 1 पद, एसोसिएट प्रोफेसर के 11 पद और प्रोफेसर के 11 पद शामिल हैं। यह भर्ती उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने वालों के लिए एक बेहतरीन मौका है।

    आवेदन प्रक्रिया और जरूरी तारीखें

    ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 10 अप्रैल निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे तय समय से पहले अपना आवेदन पूरा कर लें। खास बात यह है कि ऑनलाइन आवेदन के बाद उम्मीदवारों को अपने फॉर्म की हार्ड कॉपी भी 24 अप्रैल शाम 5 बजे तक विश्वविद्यालय के पते पर भेजनी होगी।

    योग्यता और अनुभव

    इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन, एमफिल या पीएचडी की डिग्री होना जरूरी है। इसके अलावा पद के अनुसार निर्धारित अनुभव और अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करना भी अनिवार्य है।

    चयन प्रक्रिया कैसी होगी?

    उम्मीदवारों का चयन कई चरणों में किया जाएगा। इसमें सबसे पहले स्क्रीनिंग और शॉर्टलिस्टिंग होगी, जिसके बाद पर्सनल इंटरव्यू लिया जाएगा। अंतिम चरण में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद ही चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी।

    सैलरी और आवेदन शुल्क

    चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार 57,700 रुपये से लेकर 2,18,200 रुपये तक का मासिक वेतन मिलेगा।
    वहीं आवेदन शुल्क की बात करें तो:

    प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए:
    जनरल/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस: ₹2000
    एससी/एसटी: ₹1000
    असिस्टेंट प्रोफेसर और असिस्टेंट लाइब्रेरियन पद के लिए:
    जनरल/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस: ₹1000
    एससी/एसटी: ₹500

    ऐसे करें आवेदन

    आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले Sri Dev Suman Uttarakhand University की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
    होमपेज पर दिए गए भर्ती लिंक पर क्लिक कर रजिस्ट्रेशन करें और लॉगिन करें। इसके बाद आवेदन फॉर्म में सभी जरूरी जानकारी भरें और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। आवेदन शुल्क का भुगतान करने के बाद फॉर्म सबमिट करें और उसका प्रिंटआउट निकाल लें।

    ऑनलाइन आवेदन पूरा करने के बाद उम्मीदवारों को अपने आवेदन की हार्ड कॉपी 24 अप्रैल शाम 5 बजे तक रजिस्ट्रार, श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, बादशाहीथौल, टिहरी गढ़वाल-249199 पते पर भेजना अनिवार्य है।

    करियर बनाने का सुनहरा मौका

    यह भर्ती उन उम्मीदवारों के लिए खास अवसर है जो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में स्थायी और प्रतिष्ठित नौकरी की तलाश में हैं। अच्छी सैलरी, सम्मानजनक पद और सरकारी सुविधाएं इसे और आकर्षक बनाती हैं।

  • बिहार हादसे पर देश के शीर्ष नेताओं का दुख, नालंदा भगदड़ ने झकझोरा

    बिहार हादसे पर देश के शीर्ष नेताओं का दुख, नालंदा भगदड़ ने झकझोरा


    नई दिल्ली Nalanda जिले के दीपनगर थाना क्षेत्र स्थित शीतला माता मंदिर में मंगलवार को हुए दर्दनाक भगदड़ हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया। पूजा-अर्चना के दौरान अचानक भीड़ बेकाबू हो गई, जिससे मची भगदड़ में 8 श्रद्धालुओं की जान चली गई, जबकि 8 से 10 लोग घायल हो गए। इस घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और मातम का माहौल है।

    राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति ने जताया गहरा शोक

    इस दुखद घटना पर Droupadi Murmu ने गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नालंदा में मंदिर भगदड़ में श्रद्धालुओं की मौत का समाचार अत्यंत दुखद है और शोक संतप्त परिवारों के प्रति उनकी संवेदनाएं हैं। साथ ही उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। वहीं, C. P. Radhakrishnan ने भी हादसे पर दुख जताते हुए इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की।

    🇮🇳 प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की मदद की घोषणा

    इससे पहले Narendra Modi ने भी हादसे पर गहरा दुख जताया और मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये तथा घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
    वहीं, Nitish Kumar ने मृतकों के परिवारों को 6 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया।

    कैसे हुआ हादसा?

    जानकारी के अनुसार, मंदिर में पूजा के दौरान अचानक अत्यधिक भीड़ जमा हो गई। भीड़ नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण स्थिति तेजी से बिगड़ गई और भगदड़ मच गई। लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरते चले गए, जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ।

    राहत और बचाव कार्य जारी

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में लाने और पीड़ितों की हर संभव मदद करने में जुटा है।

    लापरवाही पर कार्रवाई

    हादसे के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कर्तव्यहीनता के आरोप में दीपनगर थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया है। मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है ताकि घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो सके।

    सबक और सतर्कता की जरूरत

    यह हादसा एक बार फिर भीड़ प्रबंधन की कमजोरियों को उजागर करता है। धार्मिक आयोजनों में भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम बेहद जरूरी हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।