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  • सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर सफदरजंग अस्पताल में हाई-ड्रामा, पत्नी गीतांजलि का आरोप- 'अस्पताल को जेल बना दिया गया'

    सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर सफदरजंग अस्पताल में हाई-ड्रामा, पत्नी गीतांजलि का आरोप- 'अस्पताल को जेल बना दिया गया'


    नई दिल्ली ।
    लद्दाख के सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से जुड़े घटनाक्रम ने राजधानी में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बढ़ा दी है। धरना स्थल से अस्पताल ले जाए जाने के बाद उनके स्वास्थ्य और आंदोलन, दोनों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वांगचुक के परिवार का कहना है कि उन्होंने किसी भी प्रकार का तरल पदार्थ लेने से इनकार किया है, जिसके चलते उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ी है। वहीं अस्पताल में उनकी देखभाल और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इस पूरे मामले पर परिवार, समर्थकों और प्रशासन के अलग-अलग दावे सामने आने से विवाद और गहरा गया है।

    वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने अस्पताल प्रशासन को लिखे पत्र में आग्रह किया है कि उनकी लिखित अनुमति के बिना सोनम वांगचुक को मुंह से या नसों के माध्यम से किसी भी प्रकार का तरल पदार्थ या दवा न दी जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल परिसर में अत्यधिक सुरक्षा व्यवस्था के कारण सामान्य मुलाकात और संवाद प्रभावित हो रहा है। परिवार का कहना है कि उन्हें स्वास्थ्य संबंधी सभी जानकारियां और मेडिकल रिपोर्ट नियमित रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि उपचार की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। उन्होंने स्वास्थ्य से जुड़े कुछ आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठाते हुए स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है।

    दूसरी ओर, वांगचुक के कानूनी प्रतिनिधियों ने दावा किया है कि उन्हें अपने मुवक्किल से मिलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इस मामले में कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है और आवश्यकता पड़ने पर अदालत का रुख किया जाएगा। परिवार का यह भी कहना है कि धरना स्थल से अस्पताल ले जाने की कार्रवाई और उसके बाद की परिस्थितियों की न्यायिक समीक्षा होनी चाहिए। हालांकि प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।

    इस बीच, वांगचुक की अनुपस्थिति में आंदोलन को जारी रखने की तैयारी भी तेज हो गई है। परिवार और समर्थकों ने पहले से प्रस्तावित कार्यक्रमों को जारी रखने का संकेत दिया है। जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित संसद मार्च में अब गीतांजलि आंगमो नेतृत्व की भूमिका निभा सकती हैं। वहीं आंदोलन स्थल पर मौजूद अन्य समर्थकों ने भी प्रदर्शन जारी रखने का निर्णय लिया है। एक प्रदर्शनकारी द्वारा भूख हड़ताल शुरू किए जाने के बाद वहां तनाव की स्थिति भी देखने को मिली, जबकि प्रदर्शन के दौरान हुई एक अलग घटना में पुलिस ने एक महिला को हिरासत में लिया। समर्थकों ने सभी प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखने की अपील की है।

    स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए राजधानी के कई इलाकों, विशेषकर अस्पताल और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस और प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी कर रहे हैं। वहीं इस पूरे घटनाक्रम पर विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य संबंधी आधिकारिक जानकारी, प्रशासनिक कार्रवाई और संभावित कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में अदालत, प्रशासन और आंदोलन से जुड़े पक्षों के अगले कदम इस मामले की दिशा तय कर सकते हैं।

  • सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी से बदला आतंकियों का गेमप्लान, कश्मीर में दबाव बढ़ने के बाद गुजरात और राजस्थान के आर्थिक प्रतिष्ठान निशाने पर

    सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी से बदला आतंकियों का गेमप्लान, कश्मीर में दबाव बढ़ने के बाद गुजरात और राजस्थान के आर्थिक प्रतिष्ठान निशाने पर

    नई दिल्ली । भारत की आंतरिक सुरक्षा के सामने आतंकवाद का स्वरूप लगातार बदलता नजर आ रहा है। लंबे समय तक जम्मू-कश्मीर तक सीमित रहने वाली आतंकी गतिविधियों के बाद अब सुरक्षा एजेंसियां पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों पर भी विशेष नजर बनाए हुए हैं। हाल के दिनों में एक संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का खुलासा होने के बाद सुरक्षा तंत्र ने सीमावर्ती और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्यों में सतर्कता बढ़ा दी है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आतंकवादी संगठन केवल पारंपरिक संवेदनशील क्षेत्रों तक सीमित रहने के बजाय देश के आर्थिक और औद्योगिक ढांचे को नुकसान पहुंचाने की मंशा से नई रणनीतियों पर काम कर सकते हैं। इसी कारण महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है।

    सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, गुजरात और राजस्थान की भौगोलिक स्थिति उन्हें रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। दोनों राज्यों की सीमाएं पाकिस्तान से जुड़ी होने के कारण यहां लगातार निगरानी रखी जाती है। इसके अलावा इन राज्यों में देश के कई बड़े औद्योगिक केंद्र, ऊर्जा परियोजनाएं, परिवहन नेटवर्क और बंदरगाह स्थित हैं। यदि ऐसे किसी महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बनाने का प्रयास होता है, तो उसका असर केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला और निवेश के माहौल पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां इन क्षेत्रों को विशेष सुरक्षा दायरे में रखकर लगातार निगरानी कर रही हैं।

    विश्लेषकों का कहना है कि आतंकवादी संगठनों की रणनीति समय के साथ बदली है। पहले जहां उनका मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में अस्थिरता पैदा करना और सुरक्षा बलों को चुनौती देना होता था, वहीं अब देश के महत्वपूर्ण आर्थिक और औद्योगिक ढांचों को संभावित लक्ष्य के रूप में देखा जा सकता है। पश्चिमी भारत के बड़े बंदरगाह, पेट्रोलियम रिफाइनरी, ऊर्जा परियोजनाएं और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम हैं। ऐसे में इन परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है। इसी दिशा में तटीय निगरानी, संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और तकनीकी निगरानी तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

    इतिहास भी इस बात का संकेत देता है कि देश के आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व वाले शहरों को पहले भी आतंकवादी निशाना बनाने का प्रयास कर चुके हैं। अतीत में बड़े आतंकी हमलों के बाद तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को काफी मजबूत किया गया था। वर्तमान समय में सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नई चुनौती डिजिटल माध्यमों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग भी है। जांच एजेंसियां इस संभावना पर भी नजर रख रही हैं कि संदिग्ध नेटवर्क सामान्य उपयोग की वस्तुओं का अलग-अलग स्थानों से संग्रह कर कानून प्रवर्तन एजेंसियों की नजर से बचने का प्रयास कर सकते हैं। इसलिए साइबर निगरानी, वित्तीय लेनदेन की जांच और तकनीकी खुफिया तंत्र को भी लगातार सशक्त बनाया जा रहा है।

    उभरते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ काम कर रही हैं। सीमावर्ती और तटीय क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई गई है, जबकि महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों, ऊर्जा केंद्रों, बंदरगाहों और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। विभिन्न राज्यों की पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों और खुफिया संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय के जरिए संभावित खतरों की समय रहते पहचान करने और उन्हें विफल करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी खुफिया तंत्र और नागरिकों की सतर्कता के संयुक्त प्रयास से ही बदलती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।

  • अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे अभिजीत दीपके लेकिन माइग्रेन की परेशानी ने बढ़ाई मुश्किलें आंदोलन पर टिकी सबकी नजर

    अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे अभिजीत दीपके लेकिन माइग्रेन की परेशानी ने बढ़ाई मुश्किलें आंदोलन पर टिकी सबकी नजर


    नई दिल्ली । सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से हटाए जाने के बाद शुरू हुआ नया घटनाक्रम अब अभिजीत दीपके के अनिश्चितकालीन अनशन तक पहुंच गया है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और आंदोलन के समर्थन का प्रतीक बताया है लेकिन इस फैसले के साथ ही उनके स्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ी वजह यह है कि खुद दीपके पहले कई बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुके हैं कि उन्हें माइग्रेन की समस्या है और लंबे समय तक खाली पेट रहने पर उनकी तबीयत बिगड़ सकती है।

    दरअसल पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर यह सवाल लगातार उठ रहा था कि जब सोनम वांगचुक लंबे समय से अनशन पर बैठे हैं तब आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके खुद अनशन क्यों नहीं कर रहे। इस सवाल का जवाब देते हुए दीपके ने पहले कहा था कि आंदोलन की पूरी रणनीति और प्रबंधन की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है इसलिए उनका सक्रिय रहना जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि सोनम वांगचुक ने स्वयं उन्हें अनशन पर बैठने से मना किया था ताकि आंदोलन का संचालन प्रभावित न हो।

    इसके अलावा अभिजीत दीपके ने अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या का भी खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि उन्हें माइग्रेन की शिकायत है और यदि समय पर भोजन नहीं मिलता तो तेज सिरदर्द शुरू हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा था कि परिवार के लोग हमेशा उन्हें समय पर खाना खाने की सलाह देते हैं क्योंकि अधिक देर तक भूखे रहने से उनकी परेशानी बढ़ जाती है। चिकित्सकीय दृष्टि से भी माइग्रेन के मरीजों के लिए लंबे समय तक खाली पेट रहना जोखिम भरा माना जाता है क्योंकि इससे सिरदर्द का तीव्र दौरा पड़ सकता है और शारीरिक कमजोरी भी बढ़ सकती है।

    ऐसे में अब जब अभिजीत दीपके ने खुद अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है तो उनके सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ उन्हें अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा तो दूसरी ओर आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी भी निभानी होगी। किसी भी बड़े आंदोलन में नेतृत्व की भूमिका केवल मंच तक सीमित नहीं होती बल्कि रणनीति बनाना कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखना प्रशासन के साथ संवाद करना और हर स्थिति पर नजर रखना भी उतना ही जरूरी होता है। यह सब कार्य लगातार ऊर्जा और मानसिक एकाग्रता की मांग करते हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अनशन लंबा खिंचता है तो अभिजीत दीपके के स्वास्थ्य पर इसका असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में आंदोलन की गति और नेतृत्व दोनों प्रभावित होने की आशंका रहेगी। दूसरी ओर उनके समर्थक इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया साहसिक कदम बता रहे हैं और आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं।

    फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि अभिजीत दीपके अपनी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद इस अनिश्चितकालीन अनशन को कितने समय तक जारी रख पाते हैं। आने वाले दिनों में उनका स्वास्थ्य और आंदोलन दोनों ही चर्चा का प्रमुख विषय बने रह सकते हैं।

    English Tags:
    Abhijeet Deepke, Sonam Wangchuk, Hunger Strike, Migraine, Protest Movement

  • खराब मौसम ने अमरनाथ यात्रा पर लगाया ब्रेक…. भारी बारिश-भूस्खलन का अलर्ट

    खराब मौसम ने अमरनाथ यात्रा पर लगाया ब्रेक…. भारी बारिश-भूस्खलन का अलर्ट


    जम्मू।
    अगर आप 19 जुलाई को अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) पर निकलने वाले थे, तो यह खबर आपके लिए है. खराब मौसम (Bad Weather) के पूर्वानुमान को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) को फिलहाल रोक दिया है. पहलगाम (Pahalgam) और बालटाल (Baltal), दोनों रास्तों से किसी भी श्रद्धालु को आगे जाने की अनुमति नहीं होगी. जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप में श्रद्धालुओं को रोक दिया गया है. खराब मौसम ने इस बार अमरनाथ यात्रा की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।

    प्रशासन ने 19 जुलाई 2026 से यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला लिया है. यह रोक यात्रा के दोनों प्रमुख मार्गों पहलगाम और बालटाल पर लागू रहेगी. प्रशासन के मुताबिक, मौसम विभाग ने अगले कुछ समय के लिए खराब मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है. पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश, फिसलन और भूस्खलन जैसी स्थितियों की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्राथमिकता है, इसलिए जोखिम उठाने की बजाय यात्रा को फिलहाल रोकना जरूरी समझा गया।

    इस फैसले के बाद जम्मू स्थित भगवती नगर यात्री निवास बेस कैंप में मौजूद श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई. उन्हें बेस कैंप में ही रुकने और प्रशासन के अगले निर्देश का इंतजार करने को कहा गया है।

    हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अमरनाथ पहुंचते हैं. लेकिन ऊंचाई वाले इस इलाके में मौसम कुछ ही घंटों में बदल जाता है. ऐसे में प्रशासन समय-समय पर मौसम और रास्तों की स्थिति की समीक्षा करता है. अगर हालात अनुकूल नहीं होते, तो यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया जाता है।

    अधिकारियों ने कहा है कि जैसे ही मौसम साफ होगा, उसी हिसाब से फैसला लिया जाएगा. तब तक श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें. यानी फिलहाल बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए निकले श्रद्धालुओं को थोड़ा इंतजार करना होगा. मौसम की मार थमेगी, रास्ते सुरक्षित होंगे, तभी यात्रा दोबारा आगे बढ़ेगी।


    राजौरी में बारिश ने बिगाड़े हालात

    जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में लगातार हो रही भारी बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं. तेज बारिश के चलते जिले के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं. नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं, जबकि कई निचले इलाकों में पानी भरने से जनजीवन प्रभावित हुआ है. जिला प्रशासन ने लोगों से बिना जरूरत यात्रा न करने, नदियों और नालों से दूर रहने तथा बाढ़ संभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है. प्रशासन का कहना है कि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और हालात पर नजर रखी जा रही है।


    उत्तराखंड में भी बारिश की वजह से यात्रा पर असर

    लगातार हो रही बारिश का असर उत्तराखंड की तीर्थ यात्राओं पर भी पड़ा है. रुद्रप्रयाग जिले में गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर शुक्रवार को पहाड़ी से बोल्डर और मलबा गिरने के कारण रास्ता कुछ समय के लिए बंद हो गया था. हालांकि राहत एवं बचाव दलों ने मलबा हटाकर पैदल मार्ग फिर से खोल दिया, लेकिन सुरक्षा कारणों से घोड़ा-खच्चर और डोली सेवा फिलहाल स्थगित रखी गई है. प्रशासन लगातार मार्ग की निगरानी कर रहा है।

    वहीं, पिथौरागढ़ जिले में कैलाश-मानसरोवर यात्रा भी प्रभावित हुई है. गरबाधार क्षेत्र में भूस्खलन के कारण गुंजी मार्ग बंद हो गया. इसके चलते 50 श्रद्धालुओं वाले चौथे जत्थे को धारचूला बेस कैंप पर ही रोक दिया गया. प्रशासन का कहना है कि रास्ता सेफ होने के बाद ही यात्रियों को आगे भेजा जाएगा।

    राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं. जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों (DEOC) को 24 घंटे एक्टिव रखने, राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखने और भूस्खलन संभावित मार्गों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं. साथ ही चारधाम यात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करें. भारी बारिश के दौरान नदियों, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें।

  • मॉनसून सत्र में अहम बिल पास कराने की तैयारी….बहुमत के लिए विपक्षी दलों से दोस्ती बढ़ा रही सरकार!

    मॉनसून सत्र में अहम बिल पास कराने की तैयारी….बहुमत के लिए विपक्षी दलों से दोस्ती बढ़ा रही सरकार!


    नई दिल्ली।
    संसद (Parliament) के मॉनसून सत्र (Monsoon Session) के पहले सरकार ने विपक्षी खेमे के कई दलों के साथ दोस्ती बढ़ा दी है। सत्र के दौरान संविधान संशोधन (Constitutional Amendment) समेत विभिन्न विधेयकों पर समर्थन की संभावना वाले इन दलों के खिलाफ भाजपा या उसके किसी घटक दल की तरफ से न तो कोई आरोप लगाया जाएगा और न ही कोई विवादित बयान दिए जाएंगे। एनडीए के सभी दलों के नेताओं को कहा गया है कि वे कांग्रेस और सपा के अलावा विपक्ष के अन्य सभी दलों के खिलाफ बयानबाजी से परहेज करें।

    सरकार को इस सत्र में महिला आरक्षण और उससे जुड़ा परिमीमन संबंधी संविधान संशोधन विधेयक लाना है। इसके लिए दो तिहाई सांसदों का समर्थन जरूरी है। सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा जुटा लिया है। इसके लिए उसके नेताओं ने विपक्ष के द्रमुक और एनसीपी (एसपी) जैसे दलों के नेताओं से जरूरी आश्वासन भी लिया है। सरकार ने अपने घटक दलों के सभी प्रमुख नेताओं, जिनमें केंद्रीय मंत्री भी शामिल हैं, उन्हें निर्देश दिए हैं। उन्हें कहा है कि द्रमुक और एनसीपी (एसपी) को लेकर भी कोई बयान न दें। महिला आरक्षण विधेयक पर कांग्रेस की तरह सपा से सरकार को ज्यादा उम्मीद नहीं है। सपा को लेकर सरकार के प्रबंधक अलग रणनीति को अंजाम दे सकते हैं।

    सोमवार से शुरू होने जा रहे मॉनसून सत्र के हंगामेदार होने के आसार हैं। जहां एक ओर सरकार पूर्व सत्र में पारित न हो पाए परिसीमन संबंधित संविधान संशोधन विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, वहीं विपक्ष पेपर लीक समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। कुछ विपक्षी दलों में टूट के कारण बने नए राजनीतिक समीकरणों के बीच संसद का नया सत्र शुरू होने जा रहा है।


    सर्वदलीय बैठक आज, तृणमूल बागी गुट को न्योता

    संसद के मॉनसून सत्र से पहले सरकार ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस बैठक में शामिल होने के लिए तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट को भी न्योता दिया है। सुदीप बंदोपाध्याय को लिखे पत्र में रिजिजू ने माना कि तृणमूल के बागी 20 सांसदों के इस समूह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से एनसीपीआई के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया है।


    खरगे ने सिब्बल को विपक्ष की बैठक में आमंत्रित किया

    निर्दलीय राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने शनिवार को नई दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। खरगे ने सिब्बल को सोमवार को होने वाली संसद के विपक्षी नेताओं की रणनीति बैठक में शामिल होने का न्योता दिया है।

  • NCP सांसद सुप्रिया सुले वॉयस रेस्ट पर… दो सप्ताह तक न कुछ बोलेंगी, न बैठकों में जाएंगी

    NCP सांसद सुप्रिया सुले वॉयस रेस्ट पर… दो सप्ताह तक न कुछ बोलेंगी, न बैठकों में जाएंगी


    मुम्बई।
    सोमवार से संसद (Parliament) के मॉनसून सत्र (Monsoon Session) की शुरुआत होने वाली है। इससे ठीक पहले महाराष्ट्र (Maharashtra) से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (Nationalist Congress Party- NCP) के मुखिया शरद पवार (Sharad Pawar) की बेटी और बारामती से सांसद सुप्रिया सुले (Supriya Sule) ने पूरी तरह से मीडिया से दूरी बना ली है। इस दौरान ना तो वह किसी चैनल से बात करेंगी और ना ही किसी तरह का प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी। इस दौरान वह किसी रैली को भी संबोधित नहीं करेंगी। आपको बता दें कि सुप्रिया ने खुद इसकी जानकारी दी है।

    सुप्रिया सुले के मुताबिक, डॉक्टरों की सलाह पर उन्होंने पूरी तरह से वॉयस रेस्ट यानी कि आवाज को आराम देने का फैसला किया है। पिछले कुछ दिनों से कई राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में रहीं सुप्रिया सुले अगले एक से दो सप्ताह तक न तो कोई भाषण देंगी और न ही मीडिया से मुखातिब होंगी।

    शनिवार को सुप्रिया सुले ने खुद इस बात की जानकारी दी कि वे गले की समस्या से जूझ रही हैं। उन्होंने बताया, “मैंने अपने गले और आवाज की समस्या को लेकर डॉ. मिलिंद कीर्तने से मुलाकात की। उन्होंने मेरे गले में हल्की सूजन पाई है और मुझे पूरी तरह से वॉयस रेस्ट की सलाह दी है।”

    सुले ने आगे बताया कि उन्हें अगले एक-दो सप्ताह तक भाषणों, साक्षात्कारों और लंबे समय तक बोलने से बचने के लिए कहा गया है। वे इस दौरान वॉयस थेरेपी से गुजरेंगी। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया और समर्थकों से सहयोग की अपील की है।


    INDIA गठबंधन की बैठक से भी दूरी

    इस स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण सुप्रिया सुले सोमवार सुबह होने वाली विपक्षी इंडिया (INDIA) गठबंधन की अहम बैठक में भी शामिल नहीं हो सकेंगी। इस बैठक में विपक्षी दल संसद सत्र के दौरान सरकार को घेरने और महत्वपूर्ण विधेयकों पर अपनी साझा रणनीति तय करने वाले हैं।

    आपको बता दें कि सुप्रिया सुले का यह वॉयस रेस्ट ऐसे समय पर आया है जब वे राजनीतिक रूप से दो बेहद संवेदनशील मुद्दों को लेकर लगातार खबरों में बनी हुई हैं। सुप्रिया सुले ने हाल ही में महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावित परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) को लेकर एक बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी इस विधेयक का बारीकी से अध्ययन करेगी। साथ ही उन्होंने संकेत दिया था कि यदि यह विधेयक सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में एक समान 50 प्रतिशत की वृद्धि की गारंटी देता है तो उनकी पार्टी इसका समर्थन कर सकती है। उनके इस रुख के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई थी।


    NCP के दोनों गुटों के विलय की अटकलें

    इसके अलावा सुप्रिया सुले को लगातार उन अटकलों का भी सामना करना पड़ रहा है जिसमें दावा किया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP), शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (SP) और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाले राकांपा गुट के बीच विलय का समर्थन कर रही है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि यदि पवार परिवार का यह पुनर्मिलन होता है तो इस कुनबे को केंद्र सरकार में दो मंत्री पद दिए जा सकते हैं। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार की तरह ही ये खबरें भी फिलहाल पूरी तरह से कयासों पर आधारित हैं।

    इस मॉनसून सत्र में सरकार जिस सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील विधेयक को पेश करने की तैयारी में है वह है संविधान 131वां संशोधन विधेयक, 2026। यह विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से जोड़ता है।

  • हरिद्वार में पुलिस ने धार्मिक स्थलों से हटाए 94 लाउडस्पीकर, दोबारा उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

    हरिद्वार में पुलिस ने धार्मिक स्थलों से हटाए 94 लाउडस्पीकर, दोबारा उल्लंघन पर होगी कार्रवाई


    देहरादून। ध्वनि प्रदूषण को लेकर हरिद्वार पुलिस ने जिलेभर में विशेष अभियान चलाते हुए धार्मिक स्थलों से 94 लाउडस्पीकर हटाए हैं। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान ये लाउडस्पीकर निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज में संचालित पाए गए थे, जो ध्वनि प्रदूषण नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन था।

    पुलिस की टीमों ने अभियान के तहत हरिद्वार जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग थाना क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले धार्मिक स्थलों का निरीक्षण किया। जहां भी नियमों का उल्लंघन मिला, वहां कार्रवाई करते हुए लाउडस्पीकर हटाए गए। अभियान के दौरान शहरी क्षेत्रों से 31 लाउडस्पीकर और ग्रामीण इलाकों से 63 लाउडस्पीकर हटाए गए। इस तरह पूरे जिले में कुल 94 लाउडस्पीकरों पर कार्रवाई की गई।

    नियमों की जानकारी भी दी गई
    हरिद्वार पुलिस ने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लोगों को ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों के प्रति जागरूक करना भी है। इस दौरान धार्मिक स्थलों के प्रबंधन और संबंधित समितियों को नियमों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि बिना अनुमति लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जा सकता। वहीं, अनुमति मिलने के बाद भी निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन करना अनिवार्य है।

    उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई
    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि कोई व्यक्ति या संस्था बिना अनुमति लाउडस्पीकर चलाती है या तय मानकों से अधिक आवाज में इसका इस्तेमाल करती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    आगे भी जारी रहेगा अभियान
    दरअसल, ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार की ओर से समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। इन्हीं नियमों के तहत स्थानीय प्रशासन और पुलिस सार्वजनिक व धार्मिक स्थलों पर ध्वनि उपकरणों के इस्तेमाल की निगरानी करते हैं।

    हरिद्वार पुलिस के अनुसार, यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और जहां भी नियमों का उल्लंघन सामने आएगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी में बताया गया है कि कार्रवाई विभिन्न धार्मिक स्थलों पर नियमों के उल्लंघन के मामलों में की गई।

  • ट्रंप के चुनावी दावों पर व्हाइट हाउस में बढ़ी सियासी हलचल, पीटर नवारो बोले- अमेरिकी चुनावी व्यवस्था की कमजोरियां सामने आईं

    ट्रंप के चुनावी दावों पर व्हाइट हाउस में बढ़ी सियासी हलचल, पीटर नवारो बोले- अमेरिकी चुनावी व्यवस्था की कमजोरियां सामने आईं


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका में चुनावी सुरक्षा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चुनावी सुरक्षा से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने और वर्ष 2020 के चुनाव को लेकर गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद व्हाइट हाउस और अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। इस बीच राष्ट्रपति के काउंसलर पीटर नवारो ने ट्रंप के दावों का समर्थन करते हुए कहा कि यह मुद्दा किसी विदेशी देश से अधिक अमेरिकी चुनावी व्यवस्था की कमजोरियों और उसे सुरक्षित बनाने की आवश्यकता से जुड़ा है।

    पीटर नवारो ने कहा कि यदि ‘सेव अमेरिका एक्ट’ लागू होता है तो चुनाव प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बन सकती है। उनके अनुसार प्रस्तावित कानून में मतदाता पहचान पत्र, नागरिकता का प्रमाण और अनुपस्थित मतदान की प्रक्रिया को अधिक सख्त बनाने जैसे प्रावधान शामिल हैं। उनका कहना है कि ऐसे कदमों से चुनावी प्रणाली में जनता का विश्वास बढ़ेगा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता मजबूत होगी।

    नवारो ने यह भी कहा कि हाल में सार्वजनिक की गई जानकारी का उद्देश्य उन तथ्यों को सामने लाना था, जिन्हें पहले गोपनीय रखा गया था। उनके अनुसार अमेरिकी नागरिकों को चुनावी प्रणाली की कमजोरियों के बारे में जानकारी होना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी खामियों को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें। उन्होंने इसे चुनाव सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में दावा किया कि चुनावी सुरक्षा से जुड़े दस्तावेजों में चीन द्वारा अमेरिकी मतदाता डेटा तक कथित पहुंच और चुनावी व्यवस्था को प्रभावित करने के प्रयासों का उल्लेख है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं का व्यक्तिगत डेटा अवैध रूप से प्राप्त किया गया और संबंधित सूचनाएं समय रहते राष्ट्रपति तथा कांग्रेस के साथ साझा नहीं की गईं। ट्रंप ने कहा कि इन तथ्यों के सार्वजनिक होने के बाद चुनावी सुरक्षा कानूनों को और मजबूत करना आवश्यक हो गया है।

    दूसरी ओर, ट्रंप के इन दावों को लेकर डेमोक्रेटिक नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है और आरोपों पर सवाल उठाए हैं। अमेरिकी राजनीति में चुनावी सुरक्षा पहले से ही संवेदनशील मुद्दा रही है और वर्ष 2020 के चुनाव को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में हालिया बयानबाजी ने इस बहस को फिर से केंद्र में ला दिया है।

    नवारो ने कहा कि इस पूरे विवाद को केवल चीन के संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार मूल प्रश्न यह है कि अमेरिकी चुनावी व्यवस्था संभावित जोखिमों से खुद को किस हद तक सुरक्षित रख पाई। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव प्रणाली में किसी प्रकार की कमजोरी मौजूद है तो उसे दूर करना लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में चुनावी सुरक्षा, मतदाता पहचान और मतदान प्रक्रिया से जुड़े प्रस्तावित सुधार अमेरिकी राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल रह सकते हैं। वहीं ट्रंप के दावों और उन पर उठे सवालों को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर बहस जारी रहने की संभावना है। इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका में चुनावी पारदर्शिता, संस्थागत जवाबदेही और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर चर्चा को एक बार फिर तेज कर दिया है।

  • सीतापुर में रिश्तों का खौफनाक अंत, शराब के विवाद में 65 वर्षीय मां की हत्या, आरोपी बेटा गिरफ्तार

    सीतापुर में रिश्तों का खौफनाक अंत, शराब के विवाद में 65 वर्षीय मां की हत्या, आरोपी बेटा गिरफ्तार

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है। इमलिया सुल्तानपुर थाना क्षेत्र के बेनियापुर गांव में शराब पीने के लिए पैसे नहीं मिलने पर एक बेटे पर अपनी 65 वर्षीय मां की हत्या करने का आरोप लगा है। प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी ने पहले मां के साथ मारपीट की और फिर उनका सिर दीवार से टकरा दिया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और उनकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी पूरी रात घर में शव के पास बैठा रहा और सुबह स्वयं ग्राम प्रधान को फोन कर मां की मौत की सूचना दी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस के अनुसार मृतका की पहचान सावित्री देवी के रूप में हुई है, जो अपने बेटे त्रिभुवन के साथ रहती थीं। उनके पति का कई वर्ष पहले निधन हो चुका था। ग्रामीणों के मुताबिक त्रिभुवन लंबे समय से शराब का आदी था और इसी वजह से करीब दस वर्ष पहले उसकी पत्नी भी उसे छोड़कर चली गई थी। बताया जा रहा है कि घटना वाली रात वह नशे की हालत में घर पहुंचा और मां से शराब पीने के लिए पैसे मांगने लगा। सावित्री देवी द्वारा पैसे देने से इनकार किए जाने पर दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया, जो देखते ही देखते हिंसक रूप ले बैठा।

    आरोप है कि विवाद के दौरान त्रिभुवन ने अपनी मां के साथ बेरहमी से मारपीट की और उनका सिर दीवार से टकरा दिया। गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी ने किसी को सूचना नहीं दी और पूरी रात घर में ही मौजूद रहा। अगले दिन सुबह उसने गांव के प्रधान को फोन कर बताया कि उसकी मां की मौत हो गई है और अंतिम संस्कार कराने की बात कही।

    ग्राम प्रधान जब मौके पर पहुंचे तो उन्होंने सावित्री देवी का शव आंगन में पड़ा देखा। शव के सिर के पास खून के निशान थे, जिससे मामला संदिग्ध लगा। इसके बाद प्रधान ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और घर की दीवार पर भी खून के निशान पाए, जिससे यह आशंका और मजबूत हुई कि महिला का सिर दीवार से टकराया गया था।

    प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी शराब के नशे में अपनी मां के साथ मारपीट करता था। पुलिस को जानकारी मिली है कि घटना से दो दिन पहले भी उसने कथित रूप से सावित्री देवी के साथ हिंसा की थी। महिला के शरीर पर पुराने चोटों के निशान मिलने की बात भी सामने आई है, जिनकी पुष्टि पोस्टमार्टम और चिकित्सकीय जांच के आधार पर की जाएगी।

    पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आरोपी त्रिभुवन को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि होगी। साथ ही घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों, फोरेंसिक जांच और आरोपी से पूछताछ के आधार पर मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • राम मंदिर दान चोरी प्रकरण: टिन्नू यादव और मनीष से 39 घंटे की पुलिस रिमांड में होगी पूछताछ, खुलेंगे अहम राज

    राम मंदिर दान चोरी प्रकरण: टिन्नू यादव और मनीष से 39 घंटे की पुलिस रिमांड में होगी पूछताछ, खुलेंगे अहम राज


    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दान प्रबंधन से जुड़े कथित गबन मामले में पुलिस ने आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और उसके भतीजे मनीष यादव से पूछताछ शुरू कर दी है। विशेष न्यायाधीश (एंटी करप्शन) की अदालत द्वारा मंजूर 39 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड शनिवार सुबह से लागू हो गई, जिसके तहत दोनों आरोपी रविवार रात 11 बजे तक पुलिस हिरासत में रहेंगे।

    शनिवार सुबह पुलिस दोनों को जेल से अपनी अभिरक्षा में लेकर पुलिस लाइन पहुंची, जहां उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसके बाद दोनों से पूछताछ शुरू हुई। जांच अधिकारी इस दौरान मामले से जुड़े कई अहम पहलुओं और पहले गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारियों का मिलान कर रहे हैं।

    दो स्तर पर चल रही है जांच
    मामले की जांच दो अलग-अलग स्तरों पर जारी है। एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) पूरे प्रकरण की पड़ताल कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अयोध्या पुलिस आपराधिक पहलुओं की जांच में जुटी है।

    राज्य सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था, जिसमें लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ आईजी किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं। समिति को मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद दान की गणना के दौरान कथित गबन के आरोपों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

    एसआईटी ने 23 जून को प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच के लिए उसका कार्यकाल 15 जुलाई तक बढ़ाया गया। जांच के दौरान समिति ने केवल कथित दान गबन ही नहीं, बल्कि मंदिर की प्रशासनिक और व्यवस्थागत प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की।

    पुलिस जोड़ रही है सबूतों की कड़ियां
    अयोध्या पुलिस इससे पहले छह अन्य आरोपियों को भी पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ कर चुकी है। जांच के दौरान कई नए तथ्य सामने आने का दावा किया गया है और कथित रूप से नकदी, सोना, वाहन, निवेश से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। जांच के क्रम में कई बैंक खातों को भी फ्रीज किया गया है।

    अब पुलिस टिन्नू यादव और मनीष यादव से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ कर रही है, ताकि कथित धन के स्रोत, उसके उपयोग और पूरे मामले में अन्य लोगों की भूमिका को स्पष्ट किया जा सके। साथ ही जांच एजेंसी कथित गबन की कुल राशि और पूरे नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

    एसआईटी रिपोर्ट पर टिकी नजर
    सूत्रों के अनुसार, एसआईटी अपनी अंतरिम रिपोर्ट जल्द सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर सकती है। यह भी चर्चा है कि अंतिम रिपोर्ट तैयार है और कुछ बिंदुओं के सत्यापन के बाद उसे औपचारिक रूप से सरकार को सौंपा जाएगा। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट में कथित लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के सुझाव शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद हुई थीं गिरफ्तारियां
    एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर अयोध्या पुलिस ने 25 जून को रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय और रामाशंकर मिश्रा सहित आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। बाद में सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। फिलहाल मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों की रिपोर्ट तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।