Category: National

  • पश्चिम एशिया संकट के बीच LPG-PNG और पेट्रोलियम उत्पादों की समीक्षा, PM मोदी ने ली CCS की बैठक

    पश्चिम एशिया संकट के बीच LPG-PNG और पेट्रोलियम उत्पादों की समीक्षा, PM मोदी ने ली CCS की बैठक


    नई दिल्ली।
    ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-US War) के बीच बुधवार शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के नेतृत्व में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) (Cabinet Committee on Security – CCS) की बैठक हुई। इस बैठक में एलपीजी, पीएनजी, पेट्रोलियम उत्पादों पर जानकारी दी गई। पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव से नागरिकों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई यह दूसरी ऐसी बैठक थी, जिसमें ईरान युद्ध के बीच देश में उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की गई।

    पेट्रोलियम उत्पादों, विशेष रूप से एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित करने और बिजली की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में अपडेट दिया गया। LPG की खरीद के लिए स्रोतों में विविधता लाई जा रही है, जिसके तहत विभिन्न देशों से नई आपूर्ति शुरू की गई है।

    पीएमओ के बयान के अनुसार, बैठक में बताया गया कि पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शनों का विस्तार करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। गर्मियों के चरम महीनों के दौरान बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय किए गए हैं। जैसे कि 7-8 GW क्षमता वाले गैस-आधारित बिजली संयंत्रों को ‘गैस पूलिंग मैकेनिज्म’ से छूट देना, और थर्मल पावर स्टेशनों पर अधिक कोयला पहुंचाने के लिए ‘रेक’ (मालगाड़ियों) की संख्या बढ़ाना आदि। यह भी बताया गया कि लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) भी विभिन्न देशों से मंगाई जा रही है। सचिव ने आगे बताया कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, और इसकी जमाखोरी तथा कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए ‘एंटी-डायवर्जन’ (गलत इस्तेमाल रोकने वाले) उपायों को नियमित रूप से लागू किया जा रहा है।


    ‘छापेमारी और सख्त कार्रवाई करके रोकें कालाबाजारी’

    इसके अलावा, बैठक में कृषि, नागरिक उड्डयन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे विभिन्न अन्य क्षेत्रों में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए प्रस्तावित उपायों पर भी चर्चा की गई। उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। जैसे कि मांग को पूरा करने के लिए यूरिया का उत्पादन बनाए रखना, और डीएपी उर्वरकों की आपूर्ति के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करना। राज्य सरकारों से अनुरोध किया गया है कि वे निगरानी, ​​छापेमारी और सख्त कार्रवाई के माध्यम से उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और गलत इस्तेमाल पर अंकुश लगाएं।


    बुनियादी जरूरतों की उपलब्धता का लिया जायजा

    प्रधानमंत्री मोदी ने आम आदमी की बुनियादी जरूरतों की उपलब्धता का जायजा लिया। उन्होंने देश में उर्वरकों की उपलब्धता और खरीफ तथा रबी मौसमों में इनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के प्रभाव से नागरिकों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री ने गलत सूचना और अफवाहों को रोकने के लिए जनता तक सही जानकारी का सुचारू प्रवाह सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे मौजूदा वैश्विक स्थिति से प्रभावित नागरिकों और विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं को कम करने के लिए हर संभव उपाय करें।


    पिछली बैठक में क्या हुआ था

    एक हफ्ते पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रस्तावित राहत उपायों की समीक्षा के लिए सीसीएस की एक बैठक की अध्यक्षता की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, कैबिनेट सचिव ने वैश्विक स्थिति और भारत सरकार के सभी संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा अब तक उठाए गए तथा राहत उपायों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दी थी। कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली,निर्यातक, शिपिंग, व्यापार, वित्त, आपूर्ति श्रृंखला और सभी प्रभावित क्षेत्रों जैसे क्षेत्रों में इसके अपेक्षित प्रभाव और उससे निपटने के लिए उठाए गए उपायों पर चर्चा की गई थी।

  • निचली अदालत से मिली राहत, अब दिल्ली हाई कोर्ट में 29 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई; ED की याचिका पर अरविंद केजरीवाल की बढ़ीं मुश्किलें

    निचली अदालत से मिली राहत, अब दिल्ली हाई कोर्ट में 29 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई; ED की याचिका पर अरविंद केजरीवाल की बढ़ीं मुश्किलें


    नई दिल्ली।  दिल्ली की शराब नीति से जुड़े मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस याचिका पर जारी हुआ है, जिसमें निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई है।

    निचली अदालत ने क्यों किया था बरी?
    27 फरवरी को निचली अदालत ने केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि जांच एजेंसी यह साबित नहीं कर पाई कि समन की अवहेलना जानबूझकर की गई थी। दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने केजरीवाल से जवाब मांगा है। कोर्ट ने ED की याचिका पर सुनवाई करते हुए अगली तारीख 29 अप्रैल तय की है। कोर्ट ने कहा कि “प्रतिवादी को पहले से सूचना थी, फिर भी वे पेश नहीं हुए।”

    ED का क्या है आरोप?
    प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन का पालन नहीं किया जांच में शामिल होने से बचने के लिए बहाने बनाए मामले के अन्य आरोपियों से उनका संपर्क था ED का दावा है कि शराब नीति बनाते समय अनियमितताएं हुईं और इससे कुछ लोगों को फायदा पहुंचा।

    केजरीवाल की मौजूदा स्थिति
    अरविंद केजरीवाल इस समय मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में अंतरिम जमानत पर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के कुछ कानूनी पहलुओं को बड़ी बेंच के पास भेजा है, जिस पर अभी सुनवाई जारी है। अब सभी की नजर 29 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी है। यहीं तय होगा कि निचली अदालत का फैसला बरकरार रहेगा या मामले में नया मोड़ आएगा। दिल्ली शराब नीति मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। निचली अदालत से मिली राहत के बाद अब हाई कोर्ट में सुनवाई से इस केस की दिशा तय होगी।

  • एम्स दिल्ली भर्ती 2026: जल्द करें आवेदन, युवाओं के लिए कैरियर का बड़ा मौका

    एम्स दिल्ली भर्ती 2026: जल्द करें आवेदन, युवाओं के लिए कैरियर का बड़ा मौका


    नई दिल्ली। मेडिकल और रिसर्च क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए बड़ी खबर है। देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली ने दो महत्वपूर्ण पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। उम्मीदवारों के लिए यह सुनहरा मौका है कि वे 8 अप्रैल 2026 से पहले आवेदन करके अपने सपनों को साकार कर सकें।

    भर्ती के पद और पात्रता:
    एम्स दिल्ली ने जिन दो पदों के लिए आवेदन मांगे हैं, वे हैं:

    प्रोजेक्ट रिसर्च साइंटिस्ट-I (नॉन-मेडिकल)
    प्रोजेक्ट टेक्निकल सपोर्ट-III

    उम्मीदवारों के पास मान्यता प्राप्त संस्थान या यूनिवर्सिटी से जीवन विज्ञान या जैव चिकित्सा विज्ञान में पोस्ट-ग्रेजुएशन डिग्री या जीवन विज्ञान में ग्रेजुएशन डिग्री के साथ 3 साल का अनुभव होना चाहिए। इसके साथ-साथ अन्य पात्रता और अनुभव की शर्तें भी पूरी करनी होंगी।

    आयु सीमा और छूट:
    उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 35 साल तय की गई है, जिसकी गणना 8 अप्रैल 2026 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु में छूट दी जाएगी।

    चयन प्रक्रिया और वेतन:
    उम्मीदवारों का चयन शॉर्टलिस्टिंग, इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के आधार पर किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों की मासिक सैलरी 28,000 से 56,000 रुपए के बीच होगी। इसके अलावा, उम्मीदवारों को अन्य लाभ और भत्ते भी मिलेंगे।

    आवेदन प्रक्रिया:
    आवेदन ऑनलाइन और ईमेल के माध्यम से किया जाएगा। इच्छुक उम्मीदवार सबसे पहले एम्स दिल्ली की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। होमपेज पर संबंधित पद के लिए जारी नोटिफिकेशन लिंक पर क्लिक करें और नोटिफिकेशन में दिए गए QR कोड को स्कैन करके अपना बायोडेटा तय समय सीमा के भीतर सबमिट करें।

    एम्स दिल्ली में प्रोजेक्ट रिसर्च साइंटिस्ट और टेक्निकल सपोर्ट पदों पर भर्ती का अवसर युवाओं के लिए करियर निर्माण का बेहतरीन मौका है। योग्य उम्मीदवार 8 अप्रैल 2026 से पहले ऑनलाइन आवेदन करके इस सुनहरे अवसर का लाभ उठा सकते हैं।

  • UPI ट्रांजैक्शन फेल होने की समस्या फैल रही, बैंक तत्पर हैं समाधान के लिए

    UPI ट्रांजैक्शन फेल होने की समस्या फैल रही, बैंक तत्पर हैं समाधान के लिए

    नई दिल्ली। देशभर में बुधवार को डिजिटल भुगतान सेवाओं में बाधा उत्पन्न हुई, जिससे कई यूजर्स यूपीआई के माध्यम से ट्रांजैक्शन पूरा नहीं कर पाए। डाउनडिटेक्टर के आंकड़ों के अनुसार दिन भर में शिकायतों में तेजी से वृद्धि हुई, जो व्यापक तकनीकी समस्या का संकेत देती है।

    सबसे ज्यादा प्रभावित बैंक और शहर

    सबसे ज्यादा समस्या भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में देखी गई, जहां 500 से अधिक आउटेज रिपोर्ट दर्ज की गई। यूको बैंक में करीब 40 शिकायतें सामने आईं। यह समस्या किसी एक शहर तक सीमित नहीं थी-नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, जयपुर और पुणे सहित कई शहरों से ट्रांजैक्शन फेल होने और पेमेंट एरर की रिपोर्ट मिली। एसबीआई के मामलों में कोलकाता, गुवाहाटी और चेन्नई से भी शिकायतें आईं।

    यूजर्स की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पर हलचल

    कई यूजर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने अनुभव साझा किए। कुछ ने फेल ट्रांजैक्शन को लेकर नाराजगी जताई, जबकि कई ने यह समझने में कठिनाई जताई कि समस्या उनके बैंक में है या उनके फोन में। कई मामलों में ट्रांजैक्शन बीच में अटक गए और कुछ यूजर्स ने बताया कि उनके यूपीआई ऐप्स ठीक से लोड ही नहीं हो रहे थे।

    बैंकों का समाधान और सलाह

    एसबीआई ने सोशल मीडिया पर बताया कि निर्धारित मेंटेनेंस का समय बढ़ाकर 1 अप्रैल दोपहर 12:30 बजे तक कर दिया गया है। इस दौरान यूपीआई, आईएमपीएस, योनो, इंटरनेट बैंकिंग, एनईएफटी और आरटीजीएस जैसी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। बैंक ने ग्राहकों को सलाह दी कि वे यूपीआई लाइट, ईरुपी (सीबीडीसी) ऐप और एटीएम सेवाओं का इस्तेमाल करें। एसबीआई ने कहा,

    “हमें हुई असुविधा के लिए खेद है और आपके सहयोग के लिए धन्यवाद।

    बाजार पर असर और शेयर प्रदर्शन

    उपभोक्ता असुविधा के बीच भी, बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में तेजी रही। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई के शेयरों में 3.94 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, और एनएसई पर बैंक के शेयर 1,018 रुपए पर बंद हुए। हालांकि पिछले एक महीने में इसके शेयर 14 प्रतिशत से अधिक गिर चुके हैं।

  • बड़े पद पर सादगी की मिसाल बिहार के अफसरों की संपत्ति ने सबको किया हैरान

    बड़े पद पर सादगी की मिसाल बिहार के अफसरों की संपत्ति ने सबको किया हैरान


    नई दिल्ली । बिहार में प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में उठाए गए एक कदम ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राज्य के कई वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों द्वारा अपनी संपत्ति सार्वजनिक करने के बाद जो तस्वीर सामने आई है वह चौंकाने वाली भी है और कहीं न कहीं सादगी की मिसाल भी पेश करती है। ऊंचे पदों पर बैठे इन अधिकारियों के पास न तो भारी भरकम संपत्ति है और न ही आलीशान जीवनशैली के संकेत हर जगह नजर आते हैं।

    बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के मामले में यह सामने आया कि उनकी पत्नी के पास उनसे अधिक संपत्ति है। उनके पास नकद राशि मात्र 15400 रुपये है जबकि बैंक खातों में सीमित जमा और थोड़े से निवेश हैं। उनके पास एक पुरानी कार और बहुत कम मात्रा में सोना है। इससे यह साफ होता है कि उच्च पद पर होने के बावजूद उनकी जीवनशैली बेहद साधारण है।

    वहीं बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार का मामला भी चर्चा में है क्योंकि उनके पास नकद राशि बिल्कुल नहीं है। हालांकि उनके बैंक खातों में अच्छी खासी रकम जमा है और आभूषण के रूप में भी निवेश है। यह दर्शाता है कि आज के दौर में कई अधिकारी नकद रखने की बजाय डिजिटल और सुरक्षित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    कई अधिकारियों की संपत्ति में और भी दिलचस्प पहलू सामने आए हैं। जैसे अरविंद कुमार चौधरी के पास खुद की कोई कार नहीं है जबकि नर्मदेश्वर लाल के पास न तो जमीन है और न ही वाहन। यह ऐसे उदाहरण हैं जो आम धारणा को चुनौती देते हैं कि बड़े पदों पर बैठे लोगों के पास अपार संपत्ति होती ही है।

    इसी तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सचिव कुमार अनुपम के पास मात्र 5000 रुपये नकद हैं जबकि उनकी कुल बचत बैंक और अन्य योजनाओं में जमा है। यह भी एक संकेत है कि अब वित्तीय प्रबंधन का तरीका बदल रहा है और लोग नकद की बजाय निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    कुछ अधिकारियों ने निवेश के अलग अलग तरीके अपनाए हैं। धर्मेंद्र सिंह के पास जहां बैंक बैलेंस और बॉन्ड निवेश है वहीं उनके पास दो गाय और दो बछड़े भी हैं जो पारंपरिक और ग्रामीण निवेश का उदाहरण पेश करते हैं। वहीं कुंदन कृष्णन ने शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश कर आधुनिक वित्तीय योजना को अपनाया है।

    इस पूरी सूची में एक बात साफ तौर पर उभरकर सामने आती है कि बिहार के कई अधिकारी सादगी भरा जीवन जी रहे हैं और अपनी आय को सोच समझकर अलग अलग क्षेत्रों में निवेश कर रहे हैं। कहीं परंपरागत साधन हैं तो कहीं आधुनिक वित्तीय उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    यह खुलासा न सिर्फ पारदर्शिता को बढ़ावा देता है बल्कि आम लोगों के बीच यह संदेश भी देता है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी सादगी और संतुलित जीवनशैली को अपनाते हैं। यह तस्वीर उस सोच को बदलने का काम करती है जिसमें अक्सर यह मान लिया जाता है कि ऊंचे पद का मतलब अत्यधिक संपत्ति और विलासिता ही होता है।

  • जैन मुनि के कथित वीडियो से विवाद, महिलाओं ने पुलिस से की कार्रवाई की मांग

    जैन मुनि के कथित वीडियो से विवाद, महिलाओं ने पुलिस से की कार्रवाई की मांग


    अहमदाबाद। गुजरात के सूरत में जैन समुदाय से जुड़ा एक विवाद सामने आया है, जिसने स्थानीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित वीडियो को लेकर महिलाओं के एक समूह ने पुलिस में शिकायत दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं संबंधित जैन मुनि ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए इसे साजिश करार दिया है।
    जानकारी के मुताबिक, वायरल वीडियो में जैन मुनि के वेश में एक व्यक्ति नजर आ रहा है। कुछ महिलाओं का आरोप है कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति चंद्र सागर मुनि हैं। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले को गंभीर बताते हुए महिलाओं के समूह ने पुलिस से जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

    रविवार को महिलाओं ने अनुपम सिंह गहलोत, पुलिस आयुक्त सूरत, को लिखित शिकायत सौंपते हुए कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो इससे जैन समाज की छवि प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस तरह के आरोप पहले भी चर्चा में रहे हैं, इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
    मुनि ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

    दूसरी ओर, चंद्र सागर मुनि ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि कुछ लोग जानबूझकर उनकी छवि खराब करने के लिए अफवाहें फैला रहे हैं। उन्होंने इसे उनके खिलाफ रची गई साजिश बताया।

    वीडियो जारी कर दी सफाई

    मुनि ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि बिना सच्चाई जाने आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि आरोप लगाने वाले लोग उनसे मिले भी हैं या नहीं। साथ ही उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से उनके खिलाफ गलत जानकारी फैलाई जा रही है।

    फिलहाल पुलिस की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन शिकायत मिलने के बाद जांच की संभावना जताई जा रही है।

  • किचन से बेडरूम तक पहुंचा जंग का असर, कंडोम सप्लाई पर मंडराया संकट

    किचन से बेडरूम तक पहुंचा जंग का असर, कंडोम सप्लाई पर मंडराया संकट


    नई दिल्ली। ईरान में जारी युद्ध का असर अब रोजमर्रा की जरूरतों से आगे बढ़कर बेडरूम तक पहुंचता दिख रहा है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण एलपीजी और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई प्रभावित हुई है, वहीं पेट्रोकेमिकल्स और लुब्रिकेंट्स की कमी ने कंडोम उद्योग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। इसका असर करीब 860 मिलियन डॉलर के भारतीय कंडोम उद्योग पर भी पड़ रहा है, जो हर साल 400 करोड़ से अधिक यूनिट का उत्पादन करता है।
    रॉ मटीरियल महंगा होने से निर्माण लागत बढ़ रही है। सरकारी कंपनी HLL Lifecare Limited, जो सालाना लगभग 221 करोड़ कंडोम बनाती है, भी इस संकट की जद में है। इसके अलावा Mankind Pharma Limited और Cupid Limited जैसी कंपनियां भी सप्लाई चेन में बाधा से जूझ रही हैं।
    कच्चे माल की कमी से बढ़ी परेशानी
    कंडोम निर्माण मुख्य रूप से सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया पर निर्भर करता है।
    सिलिकॉन ऑयल एक अहम लुब्रिकेट है, जिसकी मिडिल ईस्ट में कमी देखी जा रही है।
    अमोनिया कच्चे लेटेक्स को स्थिर रखने में जरूरी है और इसके दाम 40–50% तक बढ़ने की आशंका है।
    पैकेजिंग सामग्री की बढ़ती कीमतों ने संकट और गहरा दिया है।
    उत्पादन पर असर की आशंका
    कर्नाटक ड्रग्स और फार्मास्यूटिकल्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के जतिश एन सेठ के मुताबिक, पेट्रोकेमिकल आधारित हर उत्पाद प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने संसाधनों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए सुरक्षित रखना शुरू कर दिया है। 11 मार्च की अंतर-मंत्रालयीय बैठक में पेट्रोकेमिकल यूनिट्स के आवंटन में कटौती की संभावना जताई गई, जिससे कंडोम उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

    सप्लाई और लॉजिस्टिक्स की दिक्कतें
    उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पीवीसी फॉइल, एल्युमिनियम फॉइल और अन्य पैकेजिंग सामग्री की कमी से ऑर्डर पूरे करना मुश्किल हो रहा है।

    लॉजिस्टिक्स में देरी और लागत बढ़ने से बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया दोनों के महंगे होने से उत्पादन और प्रभावित हो सकता है।

    फैमिली प्लानिंग पर भी असर की चिंता
    विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट केवल उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा। भारत में कंडोम कम मार्जिन पर बनाए जाते हैं, ताकि बड़ी आबादी को कम कीमत पर उपलब्ध हो सकें। कीमत बढ़ाने पर बिक्री घटने का जोखिम है। लंबे समय में इससे फैमिली प्लानिंग कार्यक्रमों पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • PNG Connections: Delhi में PNG कनेक्शन को बढ़ावा, सरकार का बड़ा प्लान; 4 लाख नए कनेक्शन लगाने के निर्देश

    PNG Connections: Delhi में PNG कनेक्शन को बढ़ावा, सरकार का बड़ा प्लान; 4 लाख नए कनेक्शन लगाने के निर्देश


    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में साफ और सस्ते ईंधन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। Rekha Gupta सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शहर में 4 लाख नए PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन (PNG Connections) लगाए जाएं। इस फैसले का मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों को गैस सिलेंडर की जगह पाइप गैस से जोड़ना है, जिससे पर्यावरण को भी फायदा होगा और लोगों को सुविधा भी मिलेगी।

    सरकार का मानना है कि PNG न सिर्फ सुरक्षित है बल्कि यह लगातार उपलब्ध रहने वाला ईंधन भी है। इससे गैस खत्म होने की चिंता नहीं रहती और घरों में कनेक्शन सीधे पाइपलाइन के जरिए मिलता है। इसी वजह से सरकार अब तेजी से इसका विस्तार करना चाहती है।

    PNG Connections बढ़ाने पर जोर
    सरकार ने संबंधित विभागों और एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तय समय सीमा के अंदर बड़े स्तर पर नए कनेक्शन दिए जाएं। इसके लिए पाइपलाइन नेटवर्क को भी तेजी से बढ़ाया जाएगा। पहले से जिन इलाकों में सुविधा उपलब्ध है, वहां अधिक से अधिक घरों को जोड़ने की कोशिश की जाएगी।

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    20 Mar 2026
    बताया जा रहा है कि इस योजना के जरिए दिल्ली में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही गैस सिलेंडर पर निर्भरता भी धीरे-धीरे कम होगी, जिससे सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें भी घटेंगी।

    लोगों को मिलेगा फायदा
    PNG कनेक्शन मिलने से लोगों को कई तरह के फायदे होंगे। सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह एलपीजी सिलेंडर की तुलना में ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। इसके अलावा इसमें गैस खत्म होने या सिलेंडर बुकिंग जैसी परेशानी नहीं होती।

    सरकार का यह कदम दिल्ली को “ग्रीन सिटी” बनाने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है। पहले भी सरकार स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला चुकी है और अब PNG कनेक्शन विस्तार उसी दिशा में एक और बड़ा कदम है।

  • जनगणना 2027: आज से शुरू होगा पहला चरण….पहली बार पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल

    जनगणना 2027: आज से शुरू होगा पहला चरण….पहली बार पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल


    नई दिल्ली।
    भारत (India) की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना (Census-2027) का पहला चरण (First Phase) आज यानी एक अप्रैल 2027 से शुरू हो रहा है। यह दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा जनगणना अभियान होगा, जो पहली बार पूरी तरह से डिजिटल माध्यमों (Digital-Process) से संचालित किया जाएगा। इस बार नागरिकों के लिए ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ (Self-Enumeration) यानी स्व-गणना भरने का विकल्प भी उपलब्ध होगा। नागरिक डिजिटल माध्यम से खुद अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।

    दो चरणों में होगी जनगणना
    पहले चरण में भवन सूचीकरण और आवास जनगणना: यह चरण अप्रैल से सितंबर 2026 तक छह महीने की अवधि में संपन्न होगा। इसमें घरों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और घरेलू संपत्तियों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। भवन सूचीकरण कार्य के 30 दिनों की अवधि से ठीक पहले 15 दिनों के लिए स्व-गणना का विकल्प भी उपलब्ध होगा।

    दूसरे चरण में जनसंख्या गणना: यह चरण फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रत्येक व्यक्ति से जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, शिक्षा, प्रवासन, प्रजनन क्षमता आदि से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। इस चरण में जातियों की गणना भी की जाएगी, जैसा कि सीसीपीए द्वारा निर्णय लिया गया है। जनसंख्या गणना की सटीक तारीखें और इस चरण में शामिल किए जाने वाले प्रश्न जल्द ही अधिसूचित किए जाएंगे।


    जनगणना में डिजिटल क्रांति

    जनगणना 2027 के लिए केंद्र सरकार ने 11,718.24 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी है। इस बार जनगणना के लिए कागजी फॉर्मों का उपयोग नहीं किया जाएगा। इसके बजाय, गणनाकर्ता स्मार्ट फोन पर मोबाइल ऐप के माध्यम से सीधे डेटा एकत्र और जमा करेंगे। इसके अतिरिक्त, दोनों चरणों में सेल्फ-एन्यूमरेशन के लिए एक ऑनलाइन सुविधा भी उपलब्ध होगी। मोबाइल ऐप और स्व-गणना पोर्टल हिंदी और अंग्रेजी सहित 16 भाषाओं में उपलब्ध होंगे।


    विभिन्न राज्यों के लिए अनुसूची

    देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए भवन सूचीकरण और आवास जनगणना की अलग-अलग तारीखें तय की गई हैं। उदाहरण के लिए, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दिल्ली, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम में 16 अप्रैल से 15 मई तक भवन सूचीकरण और आवास जनगणना होगी, जिसमें एक अप्रैल से 15 अप्रैल तक सेल्फ-एन्यूमरेशन की अवधि शामिल होगी। वहीं, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में 1 मई से 30 मई तक भवन सूचीकरण जनगणना शुरू होगी, जिसमें 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक सेल्फ-एन्यूमरेशन की अवधि होगी।


    इन राज्यों में अलग है संदर्भ तिथि

    जनगणना 2027 के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च, 2027 की आधी रात 00:00 बजे है। हालांकि, जम्मू और कश्मीर के बर्फीले गैर-सिंक्रोनस क्षेत्रों और उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश राज्यों के लिए यह संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर, 2026 की आधी रात 00:00 बजे होगी। इस डिजिटल जनगणना से डेटा संग्रह की प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और कुशल होने की उम्मीद है, जो भविष्य की नीतियों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगी।

  • देश में तेजी से बढ़ रही पाचन संबंधी बीमारियां… आंत के कैंसर को लेकर जागरूक नहीं भारतीय

    देश में तेजी से बढ़ रही पाचन संबंधी बीमारियां… आंत के कैंसर को लेकर जागरूक नहीं भारतीय


    नई दिल्ली।
    देश में पाचन संबंधी बीमारियां (Digestive diseases) तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन लोग गंभीर बीमारियों को लेकर अब भी जागरूकता नहीं हैं। हाल ही में हुए एक राष्ट्रीय सर्वे परसेप्शन ऑडिट (National Survey Perception Audit) में पता चला कि दिल्ली (Delhi) के 80% लोग नहीं जानते कि मल में खून आना कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal cancer) (आंत का कैंसर) का शुरुआती संकेत हो सकता है।

    मर्क स्पेशियलिटीज प्राइवेट लिमिटेड ने यह सर्वे 14 बड़े भारतीय शहरों में किया। इसमें 25 से 65 वर्ष के 10 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। सर्वे के नतीजे दिल्ली में एक कार्यक्रम में साझा किए गए। दिल्ली से जुड़े आंकड़े काफी चिंताजनक हैं। दिल्ली से 679 प्रतिभागी शामिल हुए, जिसमें 341 पुरुष और 337 महिलाएं रहीं। डॉक्टर के पास न जाने के पीछे समय की कमी, डर, झिझक और बीमारी को गंभीरता से न लेना है।


    सर्वे में शामिल शहर

    सर्वे कोलकाता, अहमदाबाद, बेंगलुरु, चंडीगढ़, चेन्नई, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, कोच्चि, लखनऊ, मुबंई, पुणे और दिल्ली के लोगों पर किया गया। 20 दिन तक ईमेल, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के जरिये से सर्वे किया गया।


    सर्वे का परिणाम

    – करीब 89.5 फीसदी लोग मल त्याग में बदलाव होने पर डॉक्टर के पास जाने के बजाय खुद दवा लेने या खान-पान बदलने का रास्ता अपनाते हैं।
    – 86 फीसदी लोग नियमित रूप से बाहर या पैकेज्ड भोजन करते हैं, जो पाचन समस्याओं को बढ़ा सकता है।
    – 80% फीसदी से ज्यादा लोग मल में खून आने को चेतावनी नहीं मानते।
    – 65 फीसदी से अधिक लोगों ने अनियमित मल त्याग की समस्या बताई। 35.5% लोग नियमित व्यायाम करते हैं।


    डॉक्टर की सलाह

    – बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली, फाइबर युक्त आहार, नियमित व्यायाम और तंबाकू से दूरी जरूरी।

    डॉक्टरों ने दी चेतावनी
    ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मनीष सिंघल के अनुसार, यह कैंसर बड़ी आंत या मलाशय में छोटे पॉलिप्स के रूप में शुरू होता है। मल में खून आना, अचानक वजन कम होना, पेट दर्द और थकान मुख्य लक्षण हैं, जिन्हें अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। डॉ. शेफाली सरदाना ने दिल्ली के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि लोग अक्सर डॉक्टरी सलाह के बजाय खुद दवा लेने की गलती करते हैं, जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और सही आदतों से इस कैंसर के जोखिम कम कर सकते हैं।