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  • कैश नहीं कूपन! M. K. Stalin का बड़ा ऐलान, महिलाओं को ₹8000 तक की खरीदारी की सुविधा

    कैश नहीं कूपन! M. K. Stalin का बड़ा ऐलान, महिलाओं को ₹8000 तक की खरीदारी की सुविधा


    नई दिल्ली। तमिलनाडु में चुनावी सरगर्मी के बीच सत्ताधारी दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने महिलाओं को साधने के लिए बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने अपने घोषणापत्र में महिलाओं को ₹8,000 के कूपन देने की योजना पेश की है। इस घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और इसे महिला वोटरों को आकर्षित करने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है।

    सरकार ने साफ किया है कि इस योजना के तहत महिलाओं को कैश राशि नहीं दी जाएगी, बल्कि कूपन दिए जाएंगे। इन कूपन का इस्तेमाल महिलाएं अपनी ज़रूरत के घरेलू सामान खरीदने में कर सकेंगी। इसमें वाशिंग मशीन, फ्रिज, टीवी, मिक्सी जैसे रोजमर्रा के उपयोगी उपकरण शामिल हो सकते हैं। सरकार का तर्क है कि इससे महिलाओं को अपनी ज़रूरत और पसंद के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलेगी, साथ ही पैसे का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होगा।

    मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने इस फैसले के पीछे की सोच स्पष्ट करते हुए कहा कि अगर सीधे कैश दिया जाता है, तो वह रोजमर्रा के खर्चों में खत्म हो सकता है। लेकिन कूपन सिस्टम से महिलाएं घर के लिए टिकाऊ और उपयोगी चीजें खरीद सकेंगी। इस तरह यह योजना केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि घरेलू जीवन स्तर सुधारने की दिशा में भी एक प्रयास है।

    राज्य में 23 अप्रैल को होने वाले चुनाव से पहले इस घोषणा को एक चुनावी कदम माना जा रहा है। सभी राजनीतिक दल जहां अपने-अपने वादों के माध्यम से लोकसभा को लुभाने में लगे हैं, वहीं द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का यह फैसला जरूरी पर महिला लोकसभा पर केंद्रित है। राजनीतिक विश्लेषकों का रुझान है कि यह योजना चुनावी समीकरण बदल सकती है और इसका असर वोटिंग नतीजों पर भी देखने को मिल सकता है।

    पार्टी की वरिष्ठ नेता कनिमोझी करुणानिधि ने बताया कि इस घोषणापत्र को तैयार करने से पहले राज्यभर में लोगों से सुझाव लिए गए थे। उनका कहना है कि यह योजना जनता की संस्थाओं और अनुभवों पर आधारित है, न कि केवल राजनीतिक वादों पर। इस पहल से महिलाओं को घरेलू निकायों में अधिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे महिलाओं की खरीदारी क्षमता जितनी और वे अपने परिवार की संपत्तियों को बेहतर तरीके से पूरा कर पाएंगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह योजना चुनावी मैदान में कितना असर पड़ेगा।

  • बिहार में सियासी भूचाल: Nitish Kumar ने MLC पद से दिया इस्तीफा, नए CM पर सस्पेंस

    बिहार में सियासी भूचाल: Nitish Kumar ने MLC पद से दिया इस्तीफा, नए CM पर सस्पेंस


    नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद यानी एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया। सोमवार की सुबह उन्होंने निर्वाची विधान परिषद के उपाध्यक्ष अवधेश नारायण सिंह को निर्वासित कर दिया, जिसके बाद विपक्ष की गैलरियों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। असल में, हाल ही में, उन्हें 14 दिनों के भीतर संवैधानिक संविधान के तहत चुने जाने के लिए कहा गया था। ऐसे में उनके इस कदम को प्रभावी तो माना ही जा रहा है, लेकिन इसके पीछे बड़े राजनीतिक बदलावों के संकेत भी नजर आ रहे हैं।

    इस बंदी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री भी क्या छोड़ेंगे। बहुमत के अनुसार, मुख्यमंत्री को विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य होना जरूरी है। ऐसे में समाजवादी समाजवादी बनने के बाद उनका सीएम पद बनना मुश्किल हो जाता है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, वह 30 अप्रैल तक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो बिहार में एक बार फिर से सत्ता परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

    इधर, इस घटना के बीच राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है, क्योंकि नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर कोई स्पष्टता सामने नहीं आई है। कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन अभी तक कोई भी आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। पार्टी और सहयोगी शास्त्र के बीच मठ जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़ा रिवर्सफर देखने को मिल सकता है।

    इस बीच एक और बड़ी घटना सामने आई है। बांकीपुर सीट से विधायक रहे नितिन नबीन ने भी अपना पद छोड़ दिया है, क्योंकि वे भी राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। उनकी बर्खास्तगी के बाद यह सीट खाली हो गई और यहां नए अभ्यर्थियों की चर्चा तेजी से हुई। इस सीट के लिए संजय मयूख का नाम सबसे पहले बताया जा रहा है, हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    राजनीतिक सिद्धांतों का मानना ​​है कि नीतीश कुमार का यह कदम सिर्फ संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक बड़े राजनीतिक बदलाव की भी भूमिका हो सकती है। बिहार में गठबंधन की राजनीति और आगामी गठबंधन को देखते हुए इस फैसले से कई नए समीकरण पैदा हो सकते हैं। देखें, पूरे राज्य की नजर इस पर टिकी है कि अगले मुख्यमंत्री की बात कौन होगी और सत्ता की कमान उनके हाथों में होगी।

  • उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल: मायावती का बयान, बंटवारे की बात से बढ़ी गर्मी

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल: मायावती का बयान, बंटवारे की बात से बढ़ी गर्मी


    नई दिल्ली उत्तर प्रदेश की नागरिकता में इन दिनों हलचल तेज है। अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे के पहले चरण के उद्घाटन के बाद शुरू हुई राजनीतिक बयानबाजी अब राज्य के गरीबों तक पहुंच गई है। इसी के बीच मुस्लिम समाज के प्रमुखों में से एक ने बड़ा प्रतिबंध लगा दिया।

    सत्ता में आने पर पश्चिमी यूपी अलग राज्य बनाने की बात

    बसपा ने साफ कहा कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आ गई तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर दावा किया कि एयरपोर्ट की योजना और शुरुआती काम उनके कार्यकाल में ही शुरू हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय केंद्र में रही कांग्रेस और राज्य की समाजवादी पार्टी सरकार ने इस परियोजना में देरी की।

    हाई कोर्ट बेंच की मांग भी दोगुनी

    पश्चिमी यूपी में अलग हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर भी बैस्ट ने अपना बयान जारी किया। उनका कहना है कि इस क्षेत्र के लोगों को न्याय मिलना आसान होगा और व्यवस्था व्यवस्था बेहतर होगी।

    सबसे पहले भी उठी थी कारोबार की मांग

    यह पहला मौका नहीं है जब यूपी के रिश्तों की बात सामने आई हो। वर्ष 2011 में मायावती सरकार ने राज्य को चार विचारधाराओं में ग्लासगो का प्रस्ताव पास कर केंद्र को भेजा था, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।

    बीजेपी और एसपी के बीच बयानबाजी तेज

    इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच भी जंग तेज हो गई है। दोनों दल एक-दूसरे पर विकास और को-सेल को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

    क्या असर होगा

    यदि उत्तर प्रदेश का बंटवारा होता है, तो इसमें आधारभूत संरचना, विकास की परिभाषा और राजनीतिक पहलू शामिल हैं। हालाँकि, किसी भी नए राज्य के गठन के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी है, इसलिए यह प्रक्रिया आसान नहीं है।

  • पीएम मोदी की पहल से उत्साहित किसान, ‘मन की बात’ में मिला मछली पालन को बढ़ावा

    पीएम मोदी की पहल से उत्साहित किसान, ‘मन की बात’ में मिला मछली पालन को बढ़ावा


    नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम मन की में मछली पालन का जिक्र होने की बात के बाद कर्नाटक के बेलगावी जिले के किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। कार्यक्रम में एक स्थानीय किसान के उद्यम के संचालक ने ग्रामीण उद्यमों को नई पहचान दी है।

    छोटे किसानों को मिली राष्ट्रीय पहचान

    बेलगावी तालुक के बोडाक्यतनट्टी गांव के युवा किसान राजेश लिंग हुद्दार ने इस उल्लेख को अपने लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि उनके काम को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलना न सिर्फ उनके लिए है, बल्कि स्टार्स के छोटे किसानों के लिए भी प्रेरणा है।

    मछली पालन को बढ़ावा

    हुद्दार पिछले तीन वर्षों से मछली पालन का काम कर रहे हैं। उनका मानना ​​है कि प्रधानमंत्री इस क्षेत्र का जिक्र करने से मछली पालन को एक मुर्गी और मछली के रूप में पहचानते हैं। इस क्षेत्र में इस क्षेत्र में उत्साह का स्तर ऊंचा है।

    आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने माध्यम से मत्स्य पालन में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का अहम संदेश दिया। उन्होंने किसानों को आत्मनिर्भर बनने और आय के नए स्रोत तलाशने के लिए प्रेरित किया।

    युवाओं के लिए नये अवसर

    हुद्दार का कहना है कि इस तरह के निर्देशक गांव के युवाओं को भी मछली पालन की ओर आकर्षित कर सकते हैं। सरकारी मान्यता और बचपन जागरूकता के साथ यह क्षेत्र रोजगार का बड़ा साधन बन सकता है।

    स्थानीय समुदाय में गौरव का राक्षस

    ‘मन की बात’ में हुद्दार का जिक्र होने के बाद पूरे इलाके में घमंड का माहौल है। स्थानीय लोग इसे अपने क्षेत्र की उपलब्धि मान रहे हैं और इसे खेती के पारंपरिक विकास के साथ नए विचारों के रूप में शामिल करते हुए देख रहे हैं।

  • जलवायु परिवर्तन से मुकाबला: लद्दाख में समग्र और साइंटिफिक मॉडल लागू

    जलवायु परिवर्तन से मुकाबला: लद्दाख में समग्र और साइंटिफिक मॉडल लागू


    नई दिल्ली। देश में बढ़ते जलवायु संकट के बीच लद्दाख ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है। यहां पारंपरिक उपायों से आगे बढ़ते हुए एक समग्र और वैज्ञानिक मॉडल लागू किया गया है, जिसमें भूजल नियंत्रण, ग्लेशियर निगरानी, जल संरक्षण, टिकाऊ पर्यटन और जैविक खेती को एक साथ जोड़ा गया है। यह पहल केवल पर्यावरण बचाने तक सीमित नहीं, बल्कि जल, जमीन और आजीविका के बीच संतुलन बनाने की दीर्घकालिक योजना भी है।

    भूजल दोहन पर सख्ती, संकटग्रस्त क्षेत्रों में रोक

    लद्दाख प्रशासन ने जल संकट की जड़ पर प्रहार करते हुए लेह जिले के अर्ध-संकटग्रस्त क्षेत्रों में भूजल दोहन पर कड़ा नियंत्रण लागू किया है। 23 दिसंबर 2024 के आदेश के तहत इन इलाकों में नए बोरवेल खोदने पर प्रभावी रोक लगा दी गई है। यह कदम भूजल स्तर को गिरने से बचाने और जल संसाधनों के संरक्षण के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
    लद्दाख प्रशासन ने जल संकट की जड़ पर प्रहार करते हुए लेह जिले के अर्ध-संकटग्रस्त क्षेत्रों में भूजल दोहन पर कड़ा नियंत्रण लागू किया है। 23 दिसंबर 2024 के आदेश के तहत इन इलाकों में नए बोरवेल खोदने पर प्रभावी रोक लगा दी गई है। यह कदम भूजल स्तर को गिरने से बचाने और जल संसाधनों के संरक्षण के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

    ग्लेशियरों की सैटेलाइट निगरानी से बढ़ी सुरक्षा

    जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा असर हिमालयी ग्लेशियरों पर पड़ रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए इसरो की मदद से ‘जियो-स्पेशियल लद्दाख’ परियोजना शुरू की गई है। इस परियोजना के तहत रिमोट सेंसिंग तकनीक से ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की निगरानी की जा रही है। इससे ग्लेशियरों के पिघलने, झीलों के फैलाव और संभावित खतरों का समय रहते आकलन किया जा सकता है।

    ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी झील फटने के खतरे को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों को इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर, लेह से जोड़ने की योजना बनाई गई है। इस प्रस्ताव को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजा गया है, ताकि समय रहते चेतावनी जारी की जा सके।

    जल संरक्षण ढांचे का बड़े स्तर पर विस्तार

    जल संरक्षण के लिए लद्दाख में व्यापक स्तर पर संरचनाएं विकसित की गई हैं। मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत 800 से अधिक जल संचयन संरचनाएं बनाई गई हैं। इसके अलावा वाटरशेड मैनेजमेंट कार्यक्रम के तहत जल टैंक, तालाब, नहरें और चेक डैम तैयार किए गए हैं।

    लेह शहर में ‘टी-ट्रेंच’ परियोजना को फिर से शुरू किया गया है, जिससे भूजल रिचार्ज बढ़ाने और प्राकृतिक जल स्रोतों को संरक्षित करने में मदद मिलेगी। इन प्रयासों का मकसद वर्षा जल को संचित करना और सूखे जैसी परिस्थितियों से निपटना है।

    टिकाऊ पर्यटन की दिशा में नई पहल

    पर्यटन से बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लद्दाख प्रशासन ने नई नीतियां लागू की हैं। 2024 की सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नीति के तहत होटल और गेस्ट हाउस में विकेंद्रीकृत एसटीपी लगाने को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही 2025 के लिए नई प्रोत्साहन योजना भी तैयार की जा रही है, जिससे पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।

  • ‘जिंदा भंडारा’: जीते-जी कर दी अपनी तेरहवीं, 1900 लोगों को दिया भोज-वजह भावुक कर देगी

    ‘जिंदा भंडारा’: जीते-जी कर दी अपनी तेरहवीं, 1900 लोगों को दिया भोज-वजह भावुक कर देगी


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से एक बेहद भावुक और सोचने पर मजबूर कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां लक्ष्मणपुर गांव के 65 वर्षीय राकेश यादव ने जीते-जी अपनी ही तेरहवीं करने का फैसला लिया है। उन्होंने सोमवार को 1900 लोगों के लिए भंडारे का आयोजन किया है और गांव-गांव जाकर लोगों को न्योता भी दिया है। इस अनोखे फैसले के पीछे छिपी वजह किसी का भी दिल पिघला सकती है।

    अकेलेपन ने लिया बड़ा फैसला

    राकेश यादव तीन भाइयों में सबसे बड़े हैं, लेकिन आज उनके साथ कोई नहीं है। उनके एक भाई चंद्रपाल यादव की बीमारी से मौत हो चुकी है, जबकि दूसरे भाई नरेश यादव की हत्या कर दी गई थी। तीनों भाइयों की शादी नहीं हुई थी। परिवार में लगातार हुए इन दुखद घटनाओं ने राकेश को पूरी तरह अकेला कर दिया।

    उनकी एक बहन है, लेकिन वह अपने परिवार में व्यस्त हैं। ऐसे में राकेश को यह डर सताने लगा कि उनके निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार या तेरहवीं करने वाला कोई नहीं होगा। यही चिंता उनके इस फैसले की सबसे बड़ी वजह बनी।

    ‘मरने के बाद कौन करेगा संस्कार?’

    राकेश यादव का कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें किसी पर भरोसा नहीं है। रिश्तेदार हैं, लेकिन उन्हें यकीन नहीं कि वे उनके जाने के बाद उनकी तेरहवीं या अंतिम संस्कार करेंगे। यही सोचकर उन्होंने जीते-जी यह आयोजन करने का निर्णय लिया, ताकि उनके जीवन में एक बार उनके नाम का भोज हो और गांव के लोग उसमें शामिल हों।

    1900 लोगों को न्योता, खुद के लिए आखिरी भोज

    राकेश ने करीब 1900 लोगों को इस भंडारे में आमंत्रित किया है। खास बात यह है कि यह आयोजन सिर्फ भोज तक सीमित रहेगा, इसमें पिंडदान जैसे धार्मिक कर्मकांड नहीं किए जाएंगे। गांव में इस खबर के बाद चर्चा का माहौल है। कोई इसे उनकी मजबूरी बता रहा है तो कोई इसे उनके गहरे अकेलेपन का दर्द।

    मेहनत की कमाई से कर रहे आयोजन

    राकेश यादव फिलहाल एक साधारण मड़ैया में रहते हैं और उन्हें वृद्धावस्था पेंशन मिलती है। उन्होंने सालों की मेहनत-मजदूरी से जो पैसा जोड़ा, उसी से इस भंडारे का आयोजन कर रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने अपना पैतृक घर भी एक रिश्तेदार को दान कर दिया है।

    समाज के लिए एक सवाल

    यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि समाज के सामने एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है कि आखिर क्यों एक इंसान को अपने जीते-जी अपनी तेरहवीं करनी पड़ रही है। यह कहानी अकेलेपन, असुरक्षा और रिश्तों में घटते भरोसे की सच्चाई को उजागर करती है।

  • स्कूलों, HC, सरकारी दफ्तरों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाला गिरफ्तार… 1100 ईमेल भेजे, फैलाई दशहत

    स्कूलों, HC, सरकारी दफ्तरों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाला गिरफ्तार… 1100 ईमेल भेजे, फैलाई दशहत


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) समेत देश के कई राज्यों में स्कूलों (Schools), हाईकोर्ट (High Court) और सरकारी दफ्तरों (Government offices.) में बम की धमकी (Bomb threat) देकर दहशत फैलाने वाला शातिर श्रीनिवास लुईस (47) मैसूर से पकड़ा गया। आरोपी ने धमकी के 1,100 से ज्यादा ई-मेल किए थे। दिल्ली पुलिस ने उसे कर्नाटक पुलिस के सहयोग से दबोचा। ट्रांजिट रिमांड पर पुलिस उसे दिल्ली लेकर आ रही है। उसके पास से एक लैपटॉप और कई सिम कार्ड जब्त किए गए हैं।

    दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, श्रीनिवास को बृहस्पतिवार को मैसूर के वृंदावन लेआउट में मकान से दबोचा गया। वह पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग जगहों से धमकी भरे ईमेल और मैसेज भेजता था। दिल्ली हाईकोर्ट के जज को भी धमकी भरा ई-मेल भेजा गया था। उनकी शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने बताया, कई हफ्तों तक चली तकनीकी पड़ताल के बाद संदिग्ध की पहचान हो पाई। आरोपी ने धमकी भरे मैसेज भेजने की बात कबूली है।


    पोस्टग्रेजुएट, लेकिन बेरोजगार है आरोपी

    बंगलूरू का रहने वाला श्रीनिवास पोस्टग्रेजुएट है। फिलहाल बेरोजगार है और अपनी मां के साथ रहता है। उसकी मां रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी हैं।
    शुरुआती जांच से लगता है कि वह शायद मानसिक तनाव से जूझ रहा था। अधिकारियों ने कहा कि उसने जान-बूझकर अदालतों और स्कूलों, कॉलेजों को निशाना बनाया, ताकि ज्यादा दहशत फैलाई जा सके।
    श्रीनिवास की इन झूठी धमकियों की वजह से सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने पड़े, कई जगहों से लोगों को बाहर निकालना पड़ा और कई संस्थानों का कामकाज भी ठप हो गया।

  • पहाड़ों पर भारी बर्फबारी… जम्मू-कश्मीर में दो हाईवे बंद, मैदानी इलाकों में आंधी-बारिश का अलर्ट

    पहाड़ों पर भारी बर्फबारी… जम्मू-कश्मीर में दो हाईवे बंद, मैदानी इलाकों में आंधी-बारिश का अलर्ट


    नई दिल्ली।
    उत्तरी ईरान और उससे सटे कैस्पियन सागर (Caspian Sea) के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत (North-West India.) में मौसम के मिजाज में बदलाव आया है। जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी और घाटी व मैदानी इलाकों में बारिश हुई है। पंजाब और हरियाणा समेत मैदानी राज्यों में तेज हवा और गरज-चमक के साथ छिटपुठ बारिश दर्ज की गई है। संभावना है कि आने वाले हफ्ते में मौसम का मिजाज ऐसा ही बना रहेगा। हिमाचल प्रदेश के शिमला, कुल्लू और मंडी में सोमवार को आंधी का येलो अलर्ट जारी किया गया है।

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी राजस्थान और उसके आसपास के क्षेत्रों में निचले क्षोभमंडलीय स्तर पर तेज चक्रवाती हवाएं चल रही हैं। उत्तर-पश्चिमी राजस्थान से लेकर उत्तरी मध्य प्रदेश तक निचले क्षोभमंडलीय स्तर पर एक कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। 2 अप्रैल को उत्तर-पश्चिम भारत में एक नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है। मौसम संबंधी इन प्रणालियों के प्रभाव से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित, बाल्टिस्तान, मुजफ्फरबाद में रविवार को हल्की बारिश हुई। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, पूर्वी व पश्चिमी राजस्थान में हल्की बारिश हुई और कुछ स्थानों पर ओले गिरे।


    हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कैसा रहेगा मौसम?

    आईएमडी के अनुसार, 30 मार्च और 2-3 अप्रैल को गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और बर्फबारी होने और 30-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 4 अप्रैल को भी यही स्थिति रहेगी। उत्तराखंड में 30 मार्च को ओलावृष्टि की भी संभावना है। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में 30-31 मार्च के दौरान छिटपुट से मध्यम वर्षा के साथ गरज, बिजली चमकने और 30-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। वहीं, पूर्वोत्तर भारत और इससे सटे पूर्वी भारत में इस सप्ताह छिटपुट से लेकर व्यापक वर्षा के साथ गरज, चमक और तेज हवा चलने की संभावना है। पूर्वोत्तर भारत में 30 मार्च से 1 अप्रैल के दौरान छिटपुट भारी वर्षा भी हो सकती है। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में इस सप्ताह छिटपुट वर्षा के साथ गरज, बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की संभावना है।

    हिमाचल प्रदेश: रोहतांग में बर्फबारी
    हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रा समेत ऊंचाई वाले अन्य क्षेत्रों में रविवार को बर्फबारी हुई। कुल्लू और लाहौल-स्पीति जिले में रविवार सुबह से दोपहर तक ऊंची चोटियों पर हिमपात हुआ। रोहतांग दर्रा में 20, कोकसर में 3, शिकुंला में 15, कुंजुम पास में 15 और बारालाचा में 20 सेंटीमीटर तक बर्फबारी हुई। हिमपात के कारण शिंकुला टॉप से वाहनों की आवाजाही बंद रही। पर्यटन नगरी मनाली से दोपहर तक अटल टनल रोहतांग की तरफ वाहनों की आवाजाही बाधित रही। शिमला, धर्मशाला समेत मध्यम और निचले क्षेत्रों में बारिश हुई। इससे हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर ठंड बढ़ गई है।


    श्रीनगर-लेह और बांदीपोरा-गुरेज हाईवे बंद

    जम्मू-कश्मीर में रविवार सुबह मैदानी इलाकों में बारिश तो पहाड़ों पर बर्फबारी हुई। बर्फबारी से श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग और बांदीपोरा-गुरेज मार्ग बंद हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार 31 मार्च तक हल्की बारिश और बर्फबारी के आसार बने हुए हैं। वहीं कुछ इलाकों में हिमस्खलन और भूस्खलन की भी आशंका जताई जा रही है।


    पंजाब-हरियाणा में भी गिरा पारा

    पंजाब और हरियाणा में रविवार को हल्की बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग ने बताया कि दोनों राज्यों की साझा राजधानी चंडीगढ़ में हल्की बारिश हुई, जिससे वहां तापमान में गिरावट आई। हालांकि, बारिश के इस दौर ने क्षेत्र के किसानों में चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि उन्हें डर है कि तेज हवाओं के साथ बारिश होने पर खड़ी गेहूं की फसल को नुकसान पहुंच सकता है।

  • Chardham Yatra : वाहनों के लिए आज से बनेंगे ग्रीन कार्ड…. 19 अप्रैल को खुलेंगे मंदिरों के पट

    Chardham Yatra : वाहनों के लिए आज से बनेंगे ग्रीन कार्ड…. 19 अप्रैल को खुलेंगे मंदिरों के पट


    देहरादून।
    चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) पर जाने वाले वाहनों के लिए ग्रीन कार्ड (Green Card.) सोमवार से बनने शुरू हो जाएंगे। हरिद्वार (Haridwar) के रोशनाबाद स्थित आरटीओ कार्यालय (RTO office) में परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा इसका शुभारंभ करेंगे। परिवहन विभाग ने चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) के लिए वाहनों को ग्रीन कार्ड जारी करने को लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं। यात्रा पर जाने वाले वाहनों की सुविधा के लिए विभाग ने शुरुआती चरण में तीन जगह ग्रीन कार्ड केंद्र बनाए हैं। इसके तहत हरिद्वार के रोशनाबाद में आरटीओ कार्यालय, ऋषिकेश और नारसन बॉर्डर पर ग्रीन कार्ड बनवाने की सुविधा दी जा रही है।

    वाहन के फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा, परमिट और संबंधित चालक के दस्तावेजों की गहन जांच करने के बाद ही ग्रीन कार्ड जारी किए जाएंगे। कॉमर्शियल वाहन बिना ग्रीन कार्ड के यात्रा मार्ग पर नहीं पाएंगे। मालूम हो कि चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। इस बार 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।


    केदारनाथ में खराब मौसम के बीच बर्फ हटाना चुनौती

    बाबा केदारनाथ के दर्शनों के लिए आगामी 22 अप्रैल से शुरू होने जा रही यात्रा को देखते हुए शासन-प्रशासन तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। केदारनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखते हुए लोक निर्माण विभाग और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के कर्मचारी पैदल मार्ग से बर्फ हटाने में लगे हुए हैं।


    चारधाम और पर्यटन सीजन में बढ़ेगी दून में गैस की मांग

    दून में पहले से जारी गैस संकट आने वाले दिनों में और गहरा सकता है। चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन में रसोई गैस की खपत में भारी इजाफा होने की उम्मीद है। गर्मी शुरू होते ही उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटक स्थलों जैसे मसूरी, ऋषिकेश, सहस्रधारा और चकराता में पर्यटकों की आमद बढ़ गई है। इन क्षेत्रों के होटलों, होम-स्टे और ढाबों में व्यावसायिक गैस सिलेंडरों के साथ-साथ घरेलू गैस की मांग भी बढ़ी है।

    ऋषिकेश और चकराता जैसे क्षेत्रों में यात्रियों के पड़ाव के कारण गैस की खपत सामान्य दिनों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है।विभाग और गैस एजेंसियों के लिए आने वाले दो महीने आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखने के लिहाज से बड़ी चुनौती साबित होंगे।


    यात्रा से बढ़ेगा दबाव

    चारधाम यात्रा के मुख्य पड़ाव के रूप में ऋषिकेश और देहरादून से होकर ही हजारों यात्री पहाड़ की ओर रुख करते हैं। यात्रा मार्ग पर स्थित ढाबों और लंगर व्यवस्था के कारण सिलेंडरों की मांग में अचानक तेजी आएगी। यदि वर्तमान बैकलॉग समय पर खत्म नहीं हुआ तो यात्रा सीजन के दौरान आम उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

  • गुजरात का माधवपुर मेला, पूर्व और पश्चिम की संस्कृतियों का संगम: प्रधानमंत्री मोदी की अपील..

    गुजरात का माधवपुर मेला, पूर्व और पश्चिम की संस्कृतियों का संगम: प्रधानमंत्री मोदी की अपील..


    नई दिल्ली:प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के पोरबंदर में आयोजित माधवपुर मेले के लिए सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह मेला केवल एक उत्सव नहीं बल्कि भारत की विविध संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक है। माधवपुर मेला पूर्व और पश्चिम की सांस्कृतिक धरोहरों को एक साथ लाता है और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को जीवंत करता है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, गुजरात के पोरबंदर में चल रहे माधवपुर मेले के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। यह जीवंत उत्सव हमारी गौरवशाली संस्कृति को उजागर करता है और गुजरात और पूर्वोत्तर के बीच शाश्वत सांस्कृतिक बंधन को और मजबूत बनाता है। यह मेला विविध परंपराओं को एक साथ लाता है, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की सच्ची भावना को दर्शाता है। मैं सभी से आग्रह करता हूं कि इस मेले में पधारें।

    इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने 27 मार्च 2022 के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें उन्होंने माधवपुर मेले का महत्व और इसकी सांस्कृतिक भूमिका पर प्रकाश डाला था। उन्होंने कहा कि इस मेले के जरिए भारत की विविधता और सांस्कृतिक एकता को सीधे तौर पर महसूस किया जा सकता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में बताया कि माधवपुर मेला पोरबंदर के माधवपुर गांव में समुद्र के किनारे लगता है, लेकिन इसका संबंध भारत के पूर्वी छोर से भी जुड़ा है। इसका कारण एक पौराणिक कथा है। कहा जाता है कि हजारों वर्ष पहले भगवान श्री कृष्ण का विवाह नार्थ ईस्ट की राजकुमारी रुक्मणि से हुआ था और यह विवाह पोरबंदर के माधवपुर में संपन्न हुआ। यही कारण है कि आज भी माधवपुर मेला वहां मनाया जाता है और यह पूर्व और पश्चिम के सांस्कृतिक बंधन का प्रतीक बन गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि समय के साथ इस मेले में नई चीजें भी जुड़ रही हैं। खासतौर पर कन्या पक्ष और नार्थ ईस्ट से आने वाले कलाकार अब मेले की शोभा बढ़ाते हैं। एक सप्ताह तक चलने वाले इस मेले में नार्थ ईस्ट के आर्टिस्ट, हेंडीक्राफ्ट से जुड़े कलाकार और सांस्कृतिक कलाकार शामिल होते हैं। यह मेले की रौनक को चार चांद लगाते हैं और भारत के पूरब और पश्चिम की संस्कृतियों का अद्भुत मेल प्रस्तुत करते हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से आग्रह किया कि वे इस मेले के बारे में पढ़ें, जानें और भारत की सांस्कृतिक विविधता का अनुभव करें। उनका कहना था कि इस तरह के उत्सव न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हैं बल्कि समाज में एकता और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करते हैं।

    बता दें कि भगवान कृष्ण और रुक्मिणी जी के विवाह की स्मृति में आयोजित माधवपुर मेले का उद्घाटन 27 मार्च को हुआ था और यह पांच दिन तक चलता है। यह मेला गुजरात और नार्थ ईस्ट के बीच शाश्वत सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक बनकर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का सजीव उदाहरण प्रस्तुत करता है।