Category: National

  • तिरुवनंतपुरम में होटल की लिफ्ट में 15 मिनट तक फंसे शशि थरूर, हाइड्रोलिक स्प्रेडर से सुरक्षित निकाला बाहर

    तिरुवनंतपुरम में होटल की लिफ्ट में 15 मिनट तक फंसे शशि थरूर, हाइड्रोलिक स्प्रेडर से सुरक्षित निकाला बाहर


    तिरुवनंतपुरम। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद शशि थरूर शुक्रवार शाम केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित एक निजी होटल की लिफ्ट में करीब 15 मिनट तक फंस गए। वह यहां ‘रोटरी क्लब ऑफ त्रिवेंद्रम ईस्ट’ के स्थापना समारोह में शामिल होने पहुंचे थे।

    घटना की जानकारी मिलते ही होटल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर फायर एंड रेस्क्यू सर्विसेज की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और आधुनिक उपकरणों की मदद से शशि थरूर समेत लिफ्ट में मौजूद सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

    अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शाम 7:37 बजे सूचना मिली कि सांसद होटल की लिफ्ट में फंस गए हैं। इसके बाद रेस्क्यू टीम तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हुई। शुरुआती प्रयासों में होटल स्टाफ और अन्य लोगों ने लोहे की रॉड से लिफ्ट का दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। यहां तक कि लिफ्ट मैकेनिक भी तकनीकी खराबी दूर कर दरवाजा नहीं खोल सके।

    बताया गया कि तकनीकी खराबी के कारण लिफ्ट निर्धारित मंजिल तक नहीं पहुंच पाई, जिससे उसका ऑटोमैटिक डोर लॉक सक्रिय हो गया और अंदर मौजूद लोग बाहर नहीं निकल सके।

    हाइड्रोलिक स्प्रेडर से खोला गया दरवाजा
    मौके पर पहुंची फायर फोर्स की टीम ने आधुनिक हाइड्रोलिक स्प्रेडर का इस्तेमाल किया और कुछ ही मिनटों में शाम 7:51 बजे लिफ्ट के दरवाजे को खोल दिया। दरवाजा खुलते ही शशि थरूर मुस्कुराते हुए बाहर आए और राहत की सांस ली।

    बाहर निकलने के बाद उन्होंने रेस्क्यू टीम का आभार जताते हुए कहा, “आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद। वेल डन! आपने बेहतरीन काम किया है।” अधिकारियों द्वारा उनका हालचाल पूछे जाने पर थरूर ने बताया कि लिफ्ट में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं।

    रेस्क्यू अभियान के बाद शशि थरूर ने फायर विभाग के अधिकारियों की तत्परता और पेशेवर कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने टीम को चाय के लिए आमंत्रित भी किया, लेकिन अधिकारियों ने मुस्कुराते हुए हाथ मिलाकर उनका धन्यवाद किया और अपनी ड्यूटी पर लौट गए। बाद में थरूर ने त्वरित कार्रवाई के लिए अग्निशमन कर्मियों को सम्मानित भी किया।

  • शनिवार को कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, तेज हवाएं भी बढ़ाएंगी मुश्किलें

    शनिवार को कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, तेज हवाएं भी बढ़ाएंगी मुश्किलें


    नई दिल्ली।
    भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, 18 जुलाई (शनिवार) को देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून सक्रिय रहेगा। उत्तर, मध्य, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कई राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। वहीं, कई इलाकों में गरज-चमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है।

    उत्तर भारत में कैसा रहेगा मौसम?

    आईएमडी के अनुसार जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होगी, जबकि कुछ स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने के आसार हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है, जबकि पूर्वी राजस्थान में भी अच्छी बारिश की संभावना है। पश्चिमी राजस्थान में छिटपुट वर्षा का अनुमान है।

    मध्य और पूर्वी भारत में बारिश का दौर

    मध्य प्रदेश के कई जिलों में शनिवार को बारिश होने की संभावना है। छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने किसानों और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    पश्चिम और दक्षिण भारत में भी सक्रिय रहेगा मानसून

    गोवा, गुजरात के कुछ हिस्सों, मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। तटीय कर्नाटक, केरल और माहे में व्यापक वर्षा जारी रह सकती है। आंतरिक कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। तमिलनाडु और पुडुचेरी के कुछ क्षेत्रों में भी हल्की वर्षा हो सकती है। कई स्थानों पर 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

    पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश की आशंका

    अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ इलाकों में भारी वर्षा हो सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और तेज बहाव वाले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

    पंजाब में फिलहाल कमजोर पड़ा मानसून

    पंजाब और चंडीगढ़ में मानसून की गतिविधियां फिलहाल कमजोर पड़ गई हैं, जिससे गर्मी और उमस बढ़ गई है। मौसम विभाग ने फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, श्री मुक्तसर साहिब, मोगा, बठिंडा, बरनाला और मानसा के लिए गर्मी और उमस का येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं, पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, फतेहगढ़ साहिब, रूपनगर और मोहाली के कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

    मौसम विभाग के अनुसार, पंजाब में 19 जुलाई से मानसून फिर सक्रिय होने की संभावना है। 20 से 22 जुलाई के बीच राज्य के कई हिस्सों में अच्छी बारिश और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है। लोगों को स्थानीय मौसम चेतावनियों पर नजर रखने और खराब मौसम के दौरान आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

  • जब सड़कें और पुल बह गए तो हाथियों ने संभाली जिम्मेदारी, अरुणाचल के बाढ़ प्रभावित गांवों तक राहत पहुंचाने की बनी अनोखी जीवनरेखा

    जब सड़कें और पुल बह गए तो हाथियों ने संभाली जिम्मेदारी, अरुणाचल के बाढ़ प्रभावित गांवों तक राहत पहुंचाने की बनी अनोखी जीवनरेखा

    नई दिल्ली । अरुणाचल प्रदेश के लोअर सियांग जिले में आई भीषण बाढ़ ने जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। लगातार बारिश और फ्लैश फ्लड के कारण कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे एक दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से पूरी तरह टूट गया। ऐसे हालात में प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों ने राहत पहुंचाने के लिए ऐसा तरीका अपनाया है, जिसने संकट की घड़ी में मानव और प्रकृति के सहयोग की मिसाल पेश की है। दुर्गम इलाकों तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए हाथियों की मदद ली जा रही है।

    बाढ़ का सबसे अधिक असर नारी-कोयू विधानसभा क्षेत्र के कोयू सर्कल के गांवों पर पड़ा है। यहां सड़क संपर्क टूटने के कारण सामान्य वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है। कई गांवों तक न तो खाद्यान्न पहुंच पा रहा था और न ही दवाइयों तथा ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति संभव हो रही थी। ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों का संकट गहराने लगा।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने स्थानीय समुदाय के सहयोग से हाथियों के माध्यम से राहत सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था शुरू की। हाथियों की पीठ पर राशन, दवाइयां, ईंधन और अन्य जरूरी सामान लादकर उन रास्तों से भेजा जा रहा है, जहां वाहन तो दूर, कई स्थानों पर पैदल पहुंचना भी बेहद कठिन है। पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप चलने की उनकी क्षमता राहत कार्यों में बेहद उपयोगी साबित हो रही है।

    यह अभियान आसान नहीं है। हाथियों को तेज बहाव वाली नदियों, कीचड़ से भरे रास्तों, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी मार्गों और बड़े-बड़े पत्थरों के बीच कई किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है। इसके बावजूद राहत कार्य लगातार जारी है। प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी गांव में आवश्यक वस्तुओं की कमी न होने पाए और सभी प्रभावित परिवारों तक समय पर मदद पहुंच सके।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हाथियों की सहायता नहीं ली जाती तो कई गांवों तक राहत सामग्री पहुंचाना लगभग असंभव हो जाता। कई स्थानों पर सड़कें पूरी तरह बह चुकी हैं और अस्थायी रास्ते भी सुरक्षित नहीं हैं। ऐसे में हाथी ही एकमात्र भरोसेमंद माध्यम बनकर उभरे हैं, जिनकी मदद से लगातार राहत सामग्री गांवों तक पहुंच रही है। इससे सैकड़ों लोगों को भोजन, दवा और अन्य जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं।

    प्राकृतिक आपदाओं के दौरान वैकल्पिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग किस तरह राहत कार्यों को गति दे सकता है, इसका यह उदाहरण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय प्रशासन के साथ ग्रामीणों की भागीदारी और प्रशिक्षित हाथियों का सहयोग राहत अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना सकता है।

    अरुणाचल प्रदेश में राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी हैं और प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की मरम्मत की दिशा में भी काम शुरू किया गया है, ताकि जल्द से जल्द गांवों का संपर्क फिर से स्थापित हो सके। तब तक हाथियों के जरिए राहत सामग्री पहुंचाने का यह अभियान प्रभावित लोगों के लिए उम्मीद की सबसे मजबूत कड़ी बना हुआ है। यह पहल केवल राहत वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि कठिन समय में मानव, स्थानीय समुदाय और प्रकृति के बीच सहयोग की प्रेरक मिसाल भी प्रस्तुत करती है।

  • बदायूं में संदिग्ध बुखार का कहर: चार दिन में दो सगे भाइयों की मौत, गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात

    बदायूं में संदिग्ध बुखार का कहर: चार दिन में दो सगे भाइयों की मौत, गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात


    बदायूं। उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में संदिग्ध बुखार ने एक ही परिवार के दो युवकों की जान ले ली। दहगवां स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के नसीरपुर टप्पा मलसई गांव में चार दिनों के भीतर दो सगे भाइयों की मौत से पूरे गांव में भय का माहौल है। घटना की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और अधिकारियों के निर्देश पर मेडिकल टीम ने गांव पहुंचकर जांच और उपचार का अभियान शुरू कर दिया।

    तेज बुखार के बाद बिगड़ी हालत
    जानकारी के अनुसार, गांव निवासी होरीलाल के 20 वर्षीय बेटे मोरपाल और 18 वर्षीय बेटे ब्रजेश को करीब चार दिन पहले अचानक तेज बुखार आया था। परिजनों का कहना है कि दोनों को बुखार के साथ अत्यधिक कमजोरी और उल्टी की शिकायत भी थी।

    शुरुआत में स्थानीय स्तर पर इलाज कराया गया, लेकिन दोनों की तबीयत लगातार बिगड़ती गई और उपचार के बावजूद उनकी मौत हो गई। एक ही परिवार के दो जवान बेटों के निधन से घर में मातम पसरा है।

    गांव में मेडिकल कैंप, घर-घर सर्वे शुरू
    ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में कई अन्य लोग भी बुखार से पीड़ित हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने गांव में तत्काल मेडिकल कैंप लगाने और घर-घर सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं।

    दहगवां स्वास्थ्य केंद्र की टीम शुक्रवार सुबह से गांव में मौजूद है। स्वास्थ्यकर्मी बीमार लोगों की जांच, रक्त के नमूने लेने और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने में जुटे हैं।

    स्वास्थ्य विभाग ने जारी की सलाह
    स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अफवाहों से बचने और घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि बुखार या अन्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत सरकारी अस्पताल में चिकित्सकीय जांच कराएं और झोलाछाप या अप्रमाणित उपचार से बचें।

    इसके साथ ही लोगों को उबालकर पानी पीने, घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने तथा जलभराव नहीं होने देने की सलाह दी गई है, ताकि संक्रमण फैलने का खतरा कम किया जा सके। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और संक्रमण के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अंतरिम रिपोर्ट पेश करेगी SIT, सरकार से मांग सकती है और समय

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अंतरिम रिपोर्ट पेश करेगी SIT, सरकार से मांग सकती है और समय


    लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। सूत्रों के मुताबिक, शीर्ष अदालत के निर्देशों के तहत यह रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाएगी। साथ ही, जांच पूरी करने के लिए एसआईटी उत्तर प्रदेश सरकार से अतिरिक्त समय की मांग भी कर सकती है।

    जानकारी के अनुसार, जांच अभी कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर जारी है। एसआईटी चढ़ावा गणना प्रणाली, कथित वित्तीय अनियमितताओं, बैंकिंग लेनदेन, आरोपियों की भूमिका और संबंधित दस्तावेजों की विस्तार से जांच कर रही है। हाल में पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान हुई पूछताछ और बरामदगी से मिले नए सुरागों का भी सत्यापन किया जा रहा है। इन सभी बिंदुओं की जांच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट अदालत में पेश की जाएगी।

    23 जून को शासन को सौंपी गई थी प्रारंभिक रिपोर्ट


    एसआईटी ने 23 जून को राम मंदिर की व्यवस्थाओं और दानराशि प्रबंधन से संबंधित अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी। सूत्रों के अनुसार, इस रिपोर्ट में मंदिर की प्रशासनिक, वित्तीय और संचालन व्यवस्था से जुड़ी पांच प्रमुख खामियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में दानराशि की सुरक्षा, कर्मचारियों की नियुक्ति, खरीद प्रक्रिया, प्रसाद वितरण व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

    दानराशि की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल


    जांच में पाया गया कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई नकदी को मंदिर परिसर से बैंक तक पहुंचाने और गणना कक्ष में उसकी गिनती के दौरान पर्याप्त सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था नहीं थी। एसआईटी का मानना है कि इसी वजह से दानराशि प्रबंधन प्रणाली में कई स्तरों पर सुधार की आवश्यकता है।

    सोने-चांदी के आभूषणों का रिकॉर्ड भी अधूरा


    रिपोर्ट के अनुसार, श्रद्धालुओं की ओर से भेंट किए गए सोने और चांदी के आभूषणों का समुचित अभिलेखीकरण नहीं किया जा रहा था। जांच में ऐसे कई उदाहरण सामने आए, जहां मूल्यवान धातुओं के संग्रहण और रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।

    नियुक्तियों और खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल


    एसआईटी ने अपनी जांच में यह भी पाया कि कुछ पदों पर नियुक्तियां तय प्रक्रिया और योग्यता के बजाय सिफारिशों के आधार पर की गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हुई। इसके अलावा सामग्री खरीद की प्रक्रिया को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट में उल्लेख है कि कुछ मामलों में टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं थी और कुछ खरीद में कमीशनखोरी तथा निर्धारित नियमों के पालन में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।

    प्रसाद वितरण और सीता रसोई में भी मिलीं कमियां


    एसआईटी की जांच में प्रसाद वितरण व्यवस्था और सीता रसोई के संचालन में भी कई कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य सामग्री और अन्य सामानों की खरीद कई बार बाजार मूल्य से अधिक दरों पर की गई, जिससे वित्तीय अनुशासन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं।

    सुधारात्मक कदमों की सिफारिश


    सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में वित्तीय व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी बनाने, जवाबदेही तय करने और प्रशासनिक सुधार लागू करने की सिफारिश की है। राज्य सरकार रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है और इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
  • सीएम योगी का विपक्ष पर हमला, बोले- 'उन्हें जिन्ना पसंद, हमें गन्ना'; विकास परियोजनाओं की दी सौगात

    सीएम योगी का विपक्ष पर हमला, बोले- 'उन्हें जिन्ना पसंद, हमें गन्ना'; विकास परियोजनाओं की दी सौगात


    बिजनौर/शामली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को शामली और बिजनौर का दौरा कर कई विकास परियोजनाओं की सौगात दी। शामली में उन्होंने 617.70 करोड़ रुपये की लागत वाली 90 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया, जबकि बिजनौर में जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा राजनीतिक हमला बोला और प्रदेश सरकार की विकास योजनाओं का उल्लेख किया।

    ‘समाज को बांटने वालों से रहें सतर्क’
    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कुछ राजनीतिक दल जाति और वर्ग के आधार पर समाज को बांटने का प्रयास करते हैं। उन्होंने लोगों से ऐसे तत्वों से सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता समाज को जोड़ना, सामाजिक समरसता को मजबूत करना और सभी वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।

    बिजनौर-चांदपुर के लिए करीब 1000 करोड़ की परियोजनाएं
    सीएम योगी ने कहा कि महात्मा विदुर की धरती बिजनौर लगातार विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि बिजनौर और चांदपुर विधानसभा क्षेत्रों के लिए करीब 1000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया जा रहा है।

    विस्थापित परिवारों का भी किया जिक्र
    मुख्यमंत्री ने अपने पिछले दौरे को याद करते हुए कहा कि पड़ापुर क्षेत्र में पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए करीब 3000 विस्थापित लोगों को जमीन के पट्टे दिए गए थे। उन्होंने कहा कि वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे इन परिवारों को सरकार ने अधिकार दिलाने का काम किया है।

    2017 से पहले की कानून-व्यवस्था पर साधा निशाना
    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले बिजनौर में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी और अपराधियों व माफिया का प्रभाव था। उन्होंने दावा किया कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के चलते अब जिले में कानून का राज स्थापित हुआ है और विकास कार्यों को गति मिली है।

    इसी दौरान उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “कुछ लोग ऐसा बिजनौर चाहते थे, जहां गुंडों और माफियाओं का कब्जा हो। वे समाज को बांटने की राजनीति करते हैं। उन्हें जिन्ना पसंद है, लेकिन हमें गन्ना पसंद है। हमारी सरकार की प्राथमिकता गन्ना किसानों का हित और गन्ने का बेहतर मूल्य सुनिश्चित करना है।”

    गंगा एक्सप्रेसवे हरिद्वार तक बढ़ाने की घोषणा
    मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने घोषणा की कि गंगा एक्सप्रेसवे का विस्तार हरिद्वार तक किया जाएगा, जिससे बिजनौर सहित आसपास के क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क का लाभ मिलेगा।

    बिजनौर में बनेगा नर्सिंग कॉलेज
    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के बाद अब बिजनौर में नर्सिंग कॉलेज का निर्माण भी तेजी से कराया जा रहा है। इससे जिले की बेटियों को नर्सिंग की पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा और स्थानीय स्तर पर शिक्षा के साथ रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे।

  • 20 दिन की भूख हड़ताल के बीच सोनम वांगचुक का भावुक संदेश, बोले- ‘20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा, फिर जरूरत पड़ी तो भूत बनकर भी लौटूंगा’

    20 दिन की भूख हड़ताल के बीच सोनम वांगचुक का भावुक संदेश, बोले- ‘20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा, फिर जरूरत पड़ी तो भूत बनकर भी लौटूंगा’

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के समर्थन में पिछले 20 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। वीडियो में उन्होंने 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च का उल्लेख करते हुए हल्के-फुल्के और मजाकिया अंदाज में कहा कि वह किसी भी हालत में उस दिन तक जीवित रहने की कोशिश करेंगे और यदि मार्च सफल नहीं हुआ तो “भूत बनकर” लोगों के बीच वापस आएंगे। उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है।

    सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में शामिल हैं। यह प्रदर्शन शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है। आंदोलन में शामिल विभिन्न संगठनों और समर्थकों के बीच वांगचुक की मौजूदगी लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उनसे मुलाकात कर आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है।

    वायरल वीडियो में वांगचुक ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि वह 20 जुलाई तक स्वस्थ रहकर प्रस्तावित संसद मार्च में शामिल हो सकें। उन्होंने आगे मुस्कुराते हुए कहा कि यदि किसी कारण से यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो वह “भूत बनकर” वापस आएंगे। उनका यह बयान गंभीर घोषणा के बजाय एक हल्का-फुल्का और प्रतीकात्मक संदेश माना जा रहा है, जिसे वहां मौजूद लोगों ने भी मुस्कुराते हुए सुना।

    लंबे समय से जारी भूख हड़ताल का असर उनके स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पिछले 20 दिनों में उनका वजन लगभग नौ किलोग्राम तक कम हो चुका है। बीते 24 घंटों में भी वजन में गिरावट दर्ज की गई है। चिकित्सकों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है और समय-समय पर आवश्यक जांच की जा रही है। डॉक्टरों ने लंबे समय तक भोजन न लेने के कारण शरीर पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल जारी रहने पर शरीर में ऊर्जा की कमी, कमजोरी, डिहाइड्रेशन और अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि उपलब्ध चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार वांगचुक के शरीर में पानी का स्तर फिलहाल नियंत्रित है, लेकिन हल्के डिहाइड्रेशन के संकेत भी सामने आए हैं। चिकित्सक लगातार उनकी स्थिति का आकलन कर रहे हैं और आवश्यक चिकित्सकीय सलाह दे रहे हैं।

    इस बीच 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च को लेकर आंदोलनकारी अपनी तैयारियां जारी रखे हुए हैं। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। आंदोलन के कारण जंतर-मंतर पर लगातार समर्थकों की आवाजाही बनी हुई है और विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि भी समय-समय पर वहां पहुंच रहे हैं।

    सोनम वांगचुक का ताजा वीडियो ऐसे समय सामने आया है जब उनके स्वास्थ्य और आंदोलन, दोनों पर लोगों की नजर बनी हुई है। उनका संदेश समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। वहीं, चिकित्सकीय निगरानी के बीच उनकी सेहत पर भी लगातार ध्यान दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में आंदोलन और प्रस्तावित संसद मार्च की दिशा पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

  • शहर के कमिश्नर तो हम ही हैं' कहकर बनाई वायरल रील पड़ी भारी, नागपुर पुलिस ने तीन युवकों को किया गिरफ्तार, माफी के बाद भी नहीं हटी कार्रवाई

    शहर के कमिश्नर तो हम ही हैं' कहकर बनाई वायरल रील पड़ी भारी, नागपुर पुलिस ने तीन युवकों को किया गिरफ्तार, माफी के बाद भी नहीं हटी कार्रवाई


    नई दिल्ली ।
    महाराष्ट्र के नागपुर में सोशल मीडिया पर फिल्मी डायलॉग के साथ बनाई गई एक रील तीन युवकों के लिए कानूनी परेशानी का कारण बन गई। पुलिस को चुनौती देने वाले अंदाज में तैयार किया गया यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए तीनों आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद आरोपियों ने सार्वजनिक रूप से कान पकड़कर माफी भी मांगी, लेकिन पुलिस ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया अपने निर्धारित नियमों के अनुसार जारी रहेगी।

    पुलिस के अनुसार यह मामला सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो से जुड़ा है, जिसमें तीन युवक फिल्मी डायलॉग बोलते हुए स्वयं को शहर का वास्तविक “कमिश्नर” बताते दिखाई दे रहे थे। वीडियो में प्रयुक्त संवाद को पुलिस ने कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की छवि को प्रभावित करने वाला माना। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि यह सामग्री सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच चुकी थी और इसे व्यापक रूप से साझा भी किया गया था।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वायरल वीडियो पिछले कुछ समय से विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहा था। वीडियो में शामिल तीनों युवकों की पहचान शाहिद अब्जल शकील खान, मोहम्मद साहिल मोहम्मद शकील शेख और रिजवान मोहम्मद अजीज के रूप में की गई। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों और उपलब्ध तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपियों का पता लगाकर उन्हें हिरासत में लिया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से ऐसी सामग्री तैयार करना, जो कानून व्यवस्था या सरकारी संस्थाओं की प्रतिष्ठा को प्रभावित करे, गंभीर विषय है। अधिकारियों के अनुसार इस प्रकार के वीडियो कुछ लोगों को व्यवस्था के प्रति गलत संदेश दे सकते हैं और कानून का सम्मान कम करने वाली मानसिकता को बढ़ावा दे सकते हैं। इसी कारण मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई।

    पुलिस उपनिरीक्षक की शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल सामग्री, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

    कार्रवाई के बाद तीनों आरोपियों का एक और वीडियो सामने आया, जिसमें वे कान पकड़कर माफी मांगते दिखाई दिए। उन्होंने अपने व्यवहार पर खेद जताया और भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न करने की बात कही। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल माफी मांगने से दर्ज आपराधिक मामला स्वतः समाप्त नहीं हो जाता। कानून के अनुसार जांच और न्यायिक प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत आगे बढ़ेगी।

    यह घटना सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले लोगों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मंचों पर मनोरंजन या लोकप्रियता के उद्देश्य से बनाई जाने वाली सामग्री भी कानूनी दायरे में आती है। यदि किसी पोस्ट, वीडियो या रील से सार्वजनिक व्यवस्था, सरकारी संस्थाओं की प्रतिष्ठा या सामाजिक शांति प्रभावित होने की आशंका हो, तो संबंधित एजेंसियां कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर सामग्री साझा करते समय जिम्मेदारी और कानूनी सीमाओं का ध्यान रखना आवश्यक है।

  • कोलकाता एयरपोर्ट परिसर की मस्जिद में जुमे की नमाज पर रोक से बढ़ा विवाद, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, प्रशासन और धार्मिक संगठनों के बीच बढ़ी तनातनी

    कोलकाता एयरपोर्ट परिसर की मस्जिद में जुमे की नमाज पर रोक से बढ़ा विवाद, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, प्रशासन और धार्मिक संगठनों के बीच बढ़ी तनातनी

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एयरपोर्ट परिसर स्थित गौरीपुर मस्जिद को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रशासन ने मस्जिद में जुमे की नमाज पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिसके बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई है। एहतियात के तौर पर बड़ी संख्या में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है तथा पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है।

    प्रशासन के अनुसार, एयरपोर्ट परिसर में स्थित इस मस्जिद के आसपास अगले कुछ दिनों तक निर्माण और सुरक्षा संबंधी कार्य किए जाने हैं। अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद दो रनवे के बीच स्थित होने के कारण यहां लोगों की आवाजाही से सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा हो सकता है। इसी वजह से सीमित अवधि के लिए नमाज के लिए लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला पूरी तरह सुरक्षा और संचालन संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    मस्जिद को स्थानांतरित किए जाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि मस्जिद प्रबंधन के कुछ सदस्य इस विषय पर प्रशासन के साथ बातचीत के पक्ष में हैं और किसी सहमति वाले समाधान की संभावना तलाश रहे हैं। हालांकि, दूसरे पक्ष ने इस प्रस्ताव का विरोध जताया है और मस्जिद को उसके वर्तमान स्थान पर बनाए रखने की मांग की है। इसी मतभेद के कारण विवाद और अधिक बढ़ गया है।

    इस बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद से जुड़े नेता सिद्दिकुल्लाह चौधरी ने पहले मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने की बात कही थी। उन्होंने यह भी कहा कि जब इस विषय पर प्रशासन के साथ बातचीत जारी है, तब नमाज पर रोक लगाने की आवश्यकता नहीं थी। बाद में उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात के लिए जाने की जानकारी दी। उनके बयान के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सख्त कर दी तथा पूरे इलाके में निगरानी बढ़ा दी।

    स्थानीय पुलिस ने मस्जिद से जुड़े धार्मिक प्रतिनिधियों को सूचित किया कि क्षेत्र में भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 लागू है और फिलहाल मस्जिद में सामूहिक नमाज की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बाद कुछ स्थानीय धार्मिक प्रतिनिधियों ने वैकल्पिक स्थान पर नमाज अदा करने की बात कही। इसके बावजूद प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पूरी तरह सतर्क बना हुआ है।

    एयरपोर्ट परिसर की ओर जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों, गलियों और प्रवेश बिंदुओं पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों के अलावा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान भी लगातार निगरानी कर रहे हैं। आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो और एयरपोर्ट का संचालन सामान्य रूप से जारी रह सके।

    फिलहाल प्रशासन का कहना है कि उसकी प्राथमिकता सार्वजनिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और एयरपोर्ट संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा को रोकना है। दूसरी ओर, मस्जिद से जुड़े पक्षों और प्रशासन के बीच बातचीत की संभावनाएं भी बनी हुई हैं। ऐसे में सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संवाद के जरिए इस विवाद का शांतिपूर्ण और सर्वसम्मत समाधान किस प्रकार निकाला जाता है।

  • दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई रफ्तार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 45 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का किया शुभारंभ

    दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई रफ्तार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 45 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का किया शुभारंभ

    नई दिल्ली ।राजधानी दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सरकार ने 45 नए आयुष्मान जन आरोग्य मंदिरों को जनता के लिए समर्पित किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शकूरपुर से इन स्वास्थ्य केंद्रों का शुभारंभ करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को उसके घर और कॉलोनी के नजदीक बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। नए केंद्रों के शुरू होने से राजधानी में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और क्षमता दोनों में विस्तार होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को केवल बड़े अस्पतालों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्थानीय स्तर तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। इसी सोच के तहत आयुष्मान जन आरोग्य मंदिरों का लगातार विस्तार किया जा रहा है, ताकि लोगों को छोटी बीमारियों और नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। उन्होंने विश्वास जताया कि इन केंद्रों के माध्यम से समय पर उपचार और बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    सरकार के अनुसार, राजधानी में वर्तमान समय में 415 से अधिक आयुष्मान जन आरोग्य मंदिर संचालित हो रहे हैं। आने वाले समय में इनकी संख्या बढ़ाकर 1,100 से अधिक करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस योजना के विस्तार के साथ दिल्ली के अधिक से अधिक क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं का मजबूत नेटवर्क विकसित करने की तैयारी की जा रही है।

    इन स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी सेवाओं के साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल, टीकाकरण, आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता तथा लगभग 80 प्रकार की निशुल्क जांच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा सामान्य बीमारियों का उपचार, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए आवश्यक परामर्श भी दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होने से बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव भी कम होगा।

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर केवल उपचार केंद्र नहीं होंगे, बल्कि बीमारी की रोकथाम, स्वास्थ्य जागरूकता और शुरुआती स्तर पर रोगों की पहचान के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बताया कि इन केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को समय पर चिकित्सा सलाह और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे गंभीर बीमारियों की संभावना को शुरुआती स्तर पर ही कम किया जा सके।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक स्थापित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बड़ी संख्या में अर्बन सब हेल्थ सेंटर और अर्बन प्राइमरी हेल्थ सेंटर शामिल हैं। इन केंद्रों का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को प्रत्येक मोहल्ले और कॉलोनी तक पहुंचाना है, ताकि लोगों को रोजमर्रा की स्वास्थ्य जरूरतों के लिए दूरस्थ अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े। इससे बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।

    सरकार का कहना है कि दिल्ली में आधुनिक, समावेशी और नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने के लिए लगातार बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का नेटवर्क इसी व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ और भरोसेमंद बनाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इन केंद्रों का विस्तार राजधानी की प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती देगा और लोगों को उनके घर के आसपास ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।