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  • पेट्रोल गैस और खाद की सप्लाई पर गुजरात सरकार सख्त सीएम भूपेंद्र पटेल ने की समीक्षा..

    पेट्रोल गैस और खाद की सप्लाई पर गुजरात सरकार सख्त सीएम भूपेंद्र पटेल ने की समीक्षा..


    नई दिल्ली: 
    Bhupendra Patel की अध्यक्षता में Gandhinagar में एक अहम हाई लेवल मीटिंग आयोजित की गई जिसमें राज्य में पेट्रोल डीजल गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता और सप्लाई सिस्टम की विस्तृत समीक्षा की गई यह बैठक मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बुलाई गई थी

    यह बैठक Narendra Modi द्वारा सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों के साथ की गई वीडियो कॉन्फ्रेंस के बाद आयोजित की गई जिसमें उन्होंने पेट्रोल डीजल गैस फर्टिलाइजर और खाद्य सामग्री की आपूर्ति को लेकर जरूरी दिशा निर्देश दिए थे

    बैठक में स्पष्ट किया गया कि गुजरात में फिलहाल पेट्रोल डीजल गैस और खाद समेत सभी जरूरी वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता है और सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि भविष्य में भी सप्लाई में किसी तरह की कमी न आए इसके लिए सभी विभागों को अलर्ट मोड पर रहने और बेहतर तालमेल के साथ काम करने के निर्देश दिए गए

    इस दौरान राज्य में पीएनजी कनेक्शन को तेजी से बढ़ाने पर भी जोर दिया गया मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की गाइडलाइंस को जल्द लागू करने और खासकर रिहायशी इलाकों शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए

    मीटिंग में जानकारी दी गई कि गुजरात देश में सबसे अधिक लगभग 23 प्रतिशत पीएनजी कनेक्शन वाला राज्य है वहीं देश के करीब 12 प्रतिशत सीएनजी फिलिंग स्टेशन भी यहीं संचालित हैं पिछले 10 दिनों में राज्य में 12 हजार से ज्यादा नए पीएनजी कनेक्शन और 300 से अधिक कमर्शियल कनेक्शन दिए गए हैं जो तेजी से बढ़ती मांग को दर्शाता है

    राज्य में एलपीजी सप्लाई को लेकर भी सरकार सतर्क है करीब 1.28 करोड़ घरेलू एलपीजी कनेक्शन धारकों को नियमित गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तेल और गैस कंपनियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है साथ ही उपभोक्ताओं की समस्याओं के समाधान के लिए हेल्पलाइन भी शुरू की गई है जिसमें अब तक 10 हजार शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है

    मुख्यमंत्री ने जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी है ताकि लोगों में किसी भी तरह की कमी का डर न फैले

    इसके अलावा फर्टिलाइजर की उपलब्धता पर भी संतोष जताया गया और कृषि विभाग को खरीफ सीजन के लिए पूरी तैयारी रखने को कहा गया पोर्ट्स पर कार्गो मैनेजमेंट को बेहतर बनाने और सप्लाई चेन में किसी भी रुकावट को रोकने के निर्देश भी दिए गए

    सरकार ने कर्मचारियों को समय पर वेतन देने पर भी जोर दिया ताकि वैश्विक हालात के बीच आर्थिक दबाव कम किया जा सके साथ ही राज्य और जिला स्तर पर कोऑर्डिनेशन कमेटी बनाने का फैसला लिया गया ताकि सप्लाई चेन मजबूत बनी रहे

  • निरहुआ बोले नीतीश का राज्यसभा जाना गर्व की बात पवन सिंह और खेसारी पर भी रखी खुलकर राय

    निरहुआ बोले नीतीश का राज्यसभा जाना गर्व की बात पवन सिंह और खेसारी पर भी रखी खुलकर राय

    नई दिल्ली: भोजपुरी स्टार से नेता बने दिनेश लाल यादव निरहुआ ने बिहार की राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले को पूरी तरह सही और सकारात्मक कदम बताया है निरहुआ ने कहा कि नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के रूप में बिहार को मजबूत दिशा दी है और अब वे जिस भी मंच पर रहेंगे वहां से राज्य के विकास के लिए काम करते रहेंगे

    निरहुआ ने इस फैसले को बिहार के लिए गर्व की बात बताते हुए कहा कि यह राजनीतिक दृष्टि से एक संतुलित और दूरदर्शी निर्णय है उन्होंने कहा कि अनुभव और नेतृत्व क्षमता का लाभ राज्य को आगे भी मिलता रहेगा

    निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चाओं पर निरहुआ ने संयमित प्रतिक्रिया दी उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिए जाते हैं और इस पर अभी अटकलें लगाना ठीक नहीं है उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन और गठबंधन के वरिष्ठ नेता मिलकर ही ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं

    वहीं भोजपुरी अभिनेता खेसारी लाल यादव के राजनीति को लेकर दिए गए बयान पर निरहुआ ने कड़ा रुख अपनाया उन्होंने कहा कि राजनीति ईमानदारी और जिम्मेदारी का क्षेत्र है और इसमें बेवजह आरोप लगाने वालों के लिए कोई जगह नहीं है उनके इस बयान को भोजपुरी इंडस्ट्री और राजनीति के बीच चल रही बहस से जोड़कर देखा जा रहा है

    समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के पेट्रोल डीजल को लेकर दिए गए बयान पर भी निरहुआ ने प्रतिक्रिया दी उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान नेताओं की सोच को दर्शाते हैं और ऐसे समय में देश को एकजुट रखने की जरूरत होती है न कि भ्रम फैलाने की

    भोजपुरी सिनेमा के कलाकारों के बीच विवाद को लेकर भी उन्होंने स्थिति साफ की निरहुआ ने कहा कि पवन सिंह और खेसारी लाल यादव के बीच किसी तरह का कोई विवाद नहीं है सभी कलाकार एक परिवार की तरह हैं और समाज के विकास के लिए काम करते हैं

    पवन सिंह को राज्यसभा न भेजे जाने के सवाल पर निरहुआ ने कहा कि भाजपा में जिम्मेदारियां समय और परिस्थिति के अनुसार दी जाती हैं उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में पवन सिंह को भी बड़ी जिम्मेदारी जरूर मिलेगी

    आगामी चुनावों में अपनी भूमिका को लेकर निरहुआ ने कहा कि वे एक कार्यकर्ता के रूप में पार्टी के लिए काम करते रहेंगे उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार ही उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और जहां भी पार्टी को उनकी जरूरत होगी वे वहां मौजूद रहेंगे

    निरहुआ ने अंत में कहा कि वे राजनीति में किसी पद या प्रतिष्ठा के लिए नहीं बल्कि विचारधारा के लिए आए हैं और एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में पार्टी के साथ खड़े रहेंगे उनका यह बयान साफ तौर पर दिखाता है कि वे पार्टी लाइन पर मजबूती से कायम हैं और नेतृत्व के फैसलों का समर्थन करते हैं

  • हवाई चप्पल से आसमान तक भारत की उड़ान मोदी युग में 90 नए एयरपोर्ट से बदली तस्वीर

    हवाई चप्पल से आसमान तक भारत की उड़ान मोदी युग में 90 नए एयरपोर्ट से बदली तस्वीर


    नई दिल्ली: पिछले एक दशक में भारत ने विकास के कई आयाम छुए हैं लेकिन हवाई कनेक्टिविटी के क्षेत्र में जो बदलाव देखने को मिला है वह सबसे उल्लेखनीय माना जा रहा है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास का अहम आधार बनाया और इसका परिणाम आज साफ नजर आता है। जहां वर्ष 2014 में देश में केवल 74 ऑपरेशनल एयरपोर्ट थे वहीं वर्ष 2026 तक यह संख्या बढ़कर 160 से अधिक हो गई है। यह सिर्फ आंकड़ों का बदलाव नहीं बल्कि आम नागरिक के जीवन में आए बड़े परिवर्तन की कहानी है।

    हाल ही में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन इस बदलाव का प्रतीक बनकर सामने आया है। यह एयरपोर्ट न केवल दिल्ली एनसीआर का दूसरा अंतरराष्ट्रीय हब है बल्कि उत्तर भारत के आर्थिक विकास का नया केंद्र भी बनने जा रहा है। शुरुआती चरण में इसकी क्षमता 1.2 करोड़ यात्रियों की है जिसे भविष्य में 7 करोड़ तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

    इस परिवर्तन के पीछे सबसे बड़ी भूमिका उड़ान योजना की रही है जिसने छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों को पहली बार हवाई नक्शे पर जगह दिलाई। पहले जहां हवाई यात्रा केवल संपन्न वर्ग तक सीमित थी वहीं अब आम नागरिक भी कम कीमत में फ्लाइट का लाभ उठा रहा है। इस योजना के तहत लाखों लोगों ने पहली बार हवाई यात्रा का अनुभव किया है जिससे यात्रा संस्कृति में भी बड़ा बदलाव आया है।

    सरकार ने ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नीति के तहत कई नए एयरपोर्ट को मंजूरी दी और पुराने बंद पड़े एयरपोर्ट को भी दोबारा चालू किया। सिक्किम का पाक्योंग एयरपोर्ट से लेकर गोवा का मोपा एयरपोर्ट और अब जेवर एयरपोर्ट तक यह विस्तार एक सुनियोजित रणनीति का परिणाम है। इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय ने इस विकास को गति दी है।

    एयरपोर्ट केवल यात्रा का माध्यम नहीं बल्कि आर्थिक गतिविधियों के बड़े केंद्र भी बनते हैं। जहां भी नया एयरपोर्ट बना वहां रोजगार के अवसर बढ़े पर्यटन को बढ़ावा मिला और स्थानीय व्यापार को नई ऊर्जा मिली। जेवर एयरपोर्ट जैसे प्रोजेक्ट से आसपास के शहरों जैसे आगरा मेरठ अलीगढ़ और मथुरा को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे कृषि उत्पाद और उद्योगों को भी वैश्विक बाजार तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।

    भविष्य की बात करें तो सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक 350 से 400 एयरपोर्ट तैयार करने का है। इसके तहत हेलिपोर्ट और वॉटर एयरोड्रोम को भी बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि देश का कोई भी क्षेत्र कनेक्टिविटी से वंचित न रहे। यह पूरी रणनीति विकसित भारत के विजन का हिस्सा है जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास की रीढ़ माना गया है।

    स्पष्ट है कि भारत की यह एयरपोर्ट क्रांति केवल संख्या बढ़ाने की कहानी नहीं बल्कि एक ऐसे बदलाव की मिसाल है जिसने आम आदमी को आसमान से जोड़ा है और देश की अर्थव्यवस्था को नई उड़ान दी है।

  • बंगाल चुनाव 2026: अमित शाह ने ममता सरकार की 15 सालों की राजनीति पर हमला बोला, अराजकता और घुसपैठ का मुद्दा उठाया

    बंगाल चुनाव 2026: अमित शाह ने ममता सरकार की 15 सालों की राजनीति पर हमला बोला, अराजकता और घुसपैठ का मुद्दा उठाया


    नई दिल्ली/कोलकाता: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की ममता सरकार के खिलाफ 14 आरोपों वाली चार्जशीट जारी करते हुए चुनावी मोर्चे पर जोरदार हमला बोला। शाह ने कहा कि यह चार्जशीट किसी पार्टी की नहीं, बल्कि जनता के मुद्दों की है। उन्होंने साफ किया कि अब बंगाल की जनता तय करेगी कि वे भय को चुनेंगे या भरोसे को। अमित शाह ने ममता राज में भय, भ्रष्टाचार और भेदभाव की राजनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राजनीति अब खत्म होने वाली है।

    अमित शाह ने ममता बनर्जी पर विक्टिम कार्ड की राजनीति करने का आरोप लगाया। शाह के अनुसार कभी उनका पैर टूट जाता है, कभी सिर पर पट्टी, कभी बीमार पड़ना और कभी चुनाव आयोग के सामने बेबसी का नाटक करना यह सब उनकी राजनीति का हिस्सा है। शाह ने कहा कि बंगाल के लोग अब इस राजनीति को भलीभांति समझ चुके हैं और इसका अंत होगा।

    उन्होंने आगामी बंगाल चुनाव को ‘भय से मुक्ति का चुनाव’ बताया। शाह ने कहा कि माइनॉरिटी होने के डर से लोग अपने अधिकारों से वंचित न रहें, इस दिशा में बीजेपी जनता की आवाज को मुखर बना रही है। उन्होंने यह भी कहा कि टीएमसी की अराजकता, आर्थिक बदहाली और प्रशासनिक विफलताओं को बीजेपी जनता तक पहुंचा रही है।

    बीजेपी की रणनीति पर चर्चा करते हुए अमित शाह ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता लगातार जनता तक संदेश पहुंचा रहे हैं और बंगाल में लगातार बढ़त बना रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे देश की सुरक्षा बंगाल के चुनाव से जुड़ी है और देश में एक ऐसा राज्य है जिससे घुसपैठ का रास्ता खुलता है।

    शाह ने जोर देकर कहा कि अब जनता की आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा और बीजेपी ने तय किया है कि चुनाव में जनता के मुद्दों को प्रमुखता मिलेगी। उन्होंने ममता सरकार के 15 साल के शासनकाल में हुए भ्रष्टाचार, अराजकता और भेदभाव के मामलों को सबके सामने लाने का दावा किया।

    इस चार्जशीट और अमित शाह के बयान से स्पष्ट है कि बीजेपी बंगाल चुनाव 2026 में पूरी ताकत से जनता तक पहुंचना चाहती है और इस चुनाव को राज्य में भय और भरोसे के बीच निर्णायक मुकाबला बनाने की रणनीति अपना रही है।

  • राज्यसभा चुनाव में बगावत या साजिश रेणु बाला ने दी सफाई कहा मेरे खिलाफ चलाया गया अभियान

    राज्यसभा चुनाव में बगावत या साजिश रेणु बाला ने दी सफाई कहा मेरे खिलाफ चलाया गया अभियान


    नई दिल्ली । हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर उठे क्रॉस वोटिंग के विवाद ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है और इसी कड़ी में कांग्रेस विधायक रेणु बाला ने कारण बताओ नोटिस का जवाब देते हुए अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने पार्टी के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया और कांग्रेस उम्मीदवार करमवीर सिंह बौध के पक्ष में ही मतदान किया। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने अपना बैलट पेपर पार्टी के वरिष्ठ नेता भूपिंदर सिंह हूडा को दिखाया था जो अधिकृत एजेंट के तौर पर इसे देखने के हकदार थे।

    रेणु बाला ने अपने जवाब में यह भी आरोप लगाया कि उनके खिलाफ सुनियोजित तरीके से अभियान चलाया गया और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि जो आरोप लगाए गए हैं वे पूरी तरह निराधार हैं और सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। इस पूरे मामले ने कांग्रेस के अंदरूनी मतभेदों को उजागर कर दिया है जहां एक ओर पार्टी अनुशासन की बात कर रही है वहीं दूसरी ओर विधायक खुद को निर्दोष साबित करने में जुटे हैं।

    दरअसल 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान हरियाणा कांग्रेस के पांच विधायकों पर क्रॉस वोटिंग के आरोप लगे थे जिसके बाद पार्टी ने 20 मार्च को इन सभी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। पार्टी का आरोप था कि इन विधायकों ने जानबूझकर आधिकारिक उम्मीदवार को हराने की कोशिश की जो अनुशासनहीनता के साथ साथ पार्टी विरोधी गतिविधि की श्रेणी में आता है। नोटिस में सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया था।

    अब तक तीन विधायक अपने जवाब दे चुके हैं जिनमें रेणु बाला के अलावा शैली चौधरी और जरनैल सिंह शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार इन सभी ने लगभग एक जैसी सफाई दी है और कहा है कि उन्होंने पार्टी उम्मीदवार को ही वोट दिया और अपना बैलट अधिकृत एजेंट को दिखाया था। इसके बावजूद उनके खिलाफ आरोप लगाए जाना राजनीतिक साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है। वहीं दो अन्य विधायक मोहम्मद इलियास और मोहम्मद इजरायल ने अभी तक अपना जवाब नहीं दिया है जिससे इस मामले को लेकर सस्पेंस बना हुआ है।

    इधर मोहम्मद इजरायल ने अपने क्षेत्र में एक कार्यक्रम के दौरान दिए बयान में संकेत दिए कि उनके फैसले को जनता के नजरिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी निर्णय उन्होंने लिया वह क्षेत्र के विकास और लोगों के सम्मान के लिए था और उसमें उनका कोई निजी स्वार्थ नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में चुनाव लड़ने और किस पार्टी से लड़ने का फैसला जनता ही करेगी। उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में अलग अलग नजरिए से देखा जा रहा है।

    गौरतलब है कि राज्यसभा चुनाव में खुली मतदान प्रणाली लागू होती है जिसमें विधायकों को वोट डालने के बाद पार्टी के अधिकृत एजेंट को अपना बैलट पेपर दिखाना होता है। हालांकि क्रॉस वोटिंग करने पर उनकी सदस्यता तो समाप्त नहीं होती लेकिन पार्टी अपने स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई जरूर कर सकती है। ऐसे में यह मामला केवल एक चुनावी विवाद नहीं बल्कि कांग्रेस के अंदर अनुशासन और एकजुटता की बड़ी परीक्षा बन गया है। आने वाले दिनों में पार्टी इस पर क्या कदम उठाती है इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • नक्सल-मुक्त भारत पर लोकसभा में अहम चर्चा, केंद्र सरकार 31 मार्च 2026 तक लक्ष्य पूरा करने को प्रतिबद्ध

    नक्सल-मुक्त भारत पर लोकसभा में अहम चर्चा, केंद्र सरकार 31 मार्च 2026 तक लक्ष्य पूरा करने को प्रतिबद्ध


    नई दिल्ली:लोकसभा में 30 मार्च को नक्सल-मुक्त भारत के लक्ष्य को लेकर अहम चर्चा होने जा रही है। केंद्र सरकार के अनुसार, मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करना प्राथमिकता है। लोकसभा की कार्यसूची के मुताबिक, शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे नियम 193 के तहत अल्पकालिक चर्चा शुरू करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई मौकों पर यह दोहराया है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य केंद्र सरकार का सर्वोच्च काम है। इस चर्चा में सुरक्षा अभियानों, रणनीति और माओवादी नेताओं के पुनर्वास नीतियों पर विस्तार से बात होगी।

    बीते एक साल में कई शीर्ष माओवादी नेताओं ने हथियार डालकर मुख्यधारा में वापसी की है। हाल ही में ओडिशा में वांछित माओवादी नेता सुक्कू ने चार अन्य माओवादियों के साथ 25 मार्च को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। एडीजी (एंटी नक्सल ऑपरेशंस) संजीव पांडा के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी नेताओं पर कुल 66 लाख रुपये का इनाम था। साथ ही पांच हथियार भी बरामद किए गए, जिनमें एक एके-47, एक इंसास राइफल और एक सिंगल शॉट गन शामिल हैं।

    कंधमाल जिले में अब माओवादियों की संख्या सिंगल डिजिट में रह गई है। एडीजी संजीव पांडा ने बताया कि अब केवल 8–9 माओवादी बचे हैं और आने वाले दिनों में अभियान को और तेज किया जाएगा। उन्होंने शेष माओवादियों से अपील की है कि वे आत्मसमर्पण करें और सरकार की सभी आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीतियों का लाभ उठाएं।

    इस चर्चा के माध्यम से लोकसभा में नक्सलवाद को समाप्त करने के केंद्र सरकार के व्यापक प्रयासों और रणनीति को साझा किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीतियों के संयोजन से न केवल हिंसा कम होगी, बल्कि मुख्यधारा में शामिल माओवादी नेताओं के लिए नए अवसर भी खुलेंगे। इस तरह, नक्सल-मुक्त भारत का सपना मार्च 2026 तक हकीकत बन सकता है

  • भ्रष्टाचार का खेल दिव्यांग से भी नहीं छोड़ा 65 हजार लेकर बना दिया गार्ड और अधिकारी बने दर्शक

    भ्रष्टाचार का खेल दिव्यांग से भी नहीं छोड़ा 65 हजार लेकर बना दिया गार्ड और अधिकारी बने दर्शक

    नई दिल्ली । बिहार के मुजफ्फरपुर नगर निगम में सामने आया ताजा मामला सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करता है जहां नौकरी देने के नाम पर न सिर्फ भारी भरकम अवैध वसूली की गई बल्कि एक दिव्यांग व्यक्ति तक को नहीं बख्शा गया। आउटसोर्सिंग एजेंसी मेसर्स गोस्वामी सिक्यूरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर आरोप है कि उसने गार्ड और सफाईकर्मी की नौकरी दिलाने के बदले लोगों से मोटी रकम वसूली और नियमों को खुली चुनौती देते हुए 65 हजार रुपये लेकर एक दिव्यांग व्यक्ति को गार्ड की नौकरी पर लगा दिया जबकि उसकी शारीरिक स्थिति इस काम के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं थी।

    स्थिति और भी चिंताजनक इसलिए हो जाती है क्योंकि इस पूरे मामले के दौरान नगर निगम के अधिकारी सब कुछ देखते रहे लेकिन किसी ने भी हस्तक्षेप करने या कार्रवाई करने की जरूरत नहीं समझी। यह केवल एक व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता का उदाहरण है जहां गरीब और जरूरतमंद लोगों को रोजगार के नाम पर ठगा जा रहा है। एजेंसी ने कर्मचारियों से न केवल नौकरी के लिए पैसे लिए बल्कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया और विरोध करने पर धमकाकर चुप रहने के लिए मजबूर किया।

    वेतन और अन्य सुविधाओं के मामले में भी भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। कर्मचारियों को उनके ईपीएफ और अन्य कटौतियों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई जिससे उनके भविष्य की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इतना ही नहीं हर गार्ड से एक सेट वर्दी के नाम पर 5600 रुपये वसूले गए जबकि बाजार में इसकी वास्तविक कीमत दो से ढाई हजार रुपये के बीच होती है। यह सीधे तौर पर कर्मचारियों के शोषण और धोखाधड़ी का मामला है।

    इस एजेंसी का विवादों से पुराना नाता भी रहा है। लगभग नौ साल पहले भी नगर निगम में ईपीएफ और ईएसआईसी घोटाले में इसका नाम सामने आया था जब कर्मचारियों के खाते में जमा की जाने वाली राशि का भुगतान नहीं किया गया था। इसके अलावा वर्ष 2014 में सारण जिले में इस एजेंसी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इन तथ्यों को छिपाकर एजेंसी ने लाइसेंस हासिल किया था जिसे बाद में नवंबर 2025 में गृह विभाग द्वारा निरस्त कर दिया गया।

    अब जब यह मामला सामने आया है तो नगर निगम प्रशासन ने जांच और कार्रवाई की बात जरूर कही है लेकिन सवाल यह है कि जब इतनी बड़ी अनियमितताएं लंबे समय से चल रही थीं तब तक जिम्मेदार अधिकारी चुप क्यों बैठे रहे। क्या यह लापरवाही थी या फिर मिलीभगत इसका जवाब मिलना अभी बाकी है। फिलहाल दो आउटसोर्सिंग एजेंसियों पर वित्तीय अनियमितताओं के चलते कार्रवाई की तलवार लटक रही है और उनसे वेतन भुगतान में देरी सहित अन्य मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

    यह घटना केवल एक शहर या एक एजेंसी तक सीमित नहीं है बल्कि यह देशभर में फैल रही उस व्यवस्था की तस्वीर है जहां आउटसोर्सिंग के नाम पर पारदर्शिता की कमी और जवाबदेही का अभाव आम लोगों के शोषण का कारण बन रहा है। जरूरत इस बात की है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई हो ताकि भविष्य में कोई भी एजेंसी गरीब और मजबूर लोगों के अधिकारों का इस तरह दुरुपयोग करने की हिम्मत न कर सके।

  • 1988 का खौफनाक हत्याकांड खत्म, 12 दोषियों को अदालत ने सुनाई उम्रकैद

    1988 का खौफनाक हत्याकांड खत्म, 12 दोषियों को अदालत ने सुनाई उम्रकैद


    नई दिल्ली:बिहार के बेगूसराय जिले में 1988 में हुए तिहरे हत्याकांड का 38 साल बाद न्याय हुआ है। डंडारी थाना क्षेत्र के प्रतारपुर गांव में 10 अगस्त 1988 की सुबह हथियारबंद हमलावरों ने महावीर यादव, राम पदारथ यादव और निरंजन यादव की बेरहमी से हत्या कर दी थी। हमलावरों ने केवल गोलियों की बारिश नहीं की, बल्कि पीड़ित परिवार के घर को आग के हवाले कर दिया। इस नरसंहार में दो महिलाएं भी गंभीर रूप से घायल हुई थीं।

    38 वर्षों तक चले मुकदमे में 26 नामजद आरोपियों में से 12 की मृत्यु हो गई, और केवल 14 आरोपी जीवित बचे। सालों तक लंबित इस मामले में पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए लड़ाई जारी रखी। महावीर यादव के बेटे सुरेंद्र यादव ने अपने पिता और परिवार के अन्य सदस्यों की हत्या के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

    अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-3, बृजेश कुमार सिंह की अदालत ने आखिरकार दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया। 14 आरोपियों में से 12 को साक्ष्यों के आधार पर दोषी पाया गया, जबकि 2 को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। अभियोजन पक्ष ने 12 गवाहों को पेश किया, जिनकी गवाही ने न्याय सुनिश्चित करने में मुख्य भूमिका निभाई।

    सजा की घोषणा में लाल बहादुर यादव, विनय यादव, गणेश यादव, जनार्दन यादव और कलमी यादव को धारा 302 के तहत उम्रकैद और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। वहीं रामदेव यादव और ध्यानी यादव को 7 साल के सश्रम कारावास की सजा मिली। गरीब दास यादव, अंगद यादव, जोगी यादव, रामचंद्र यादव और रफू यादव को डेढ़ साल की कैद और जुर्माने की सजा दी गई।

    इस फैसले को लेकर इलाके में राहत और न्याय मिलने की भावना है। सरकारी वकील ने इस मुकदमे को महाभारत से कम नहीं बताया, जबकि न्यायपालिका ने ‘देर है पर अंधेर नहीं’ का सजीव उदाहरण पेश किया। यह केस अपने जटिलता और लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण 10 अलग-अलग अदालतों से गुजरा।

    स्थानीय लोग और परिवार के सदस्य 38 साल बाद न्याय मिलने को ऐतिहासिक और संतोषजनक मान रहे हैं। इस फैसले ने पीड़ित परिवार की लंबी प्रतीक्षा को समाप्त किया और भविष्य में इस प्रकार के जघन्य अपराधों में न्याय सुनिश्चित करने का मार्ग स्पष्ट किया।

  • पीएम मोदी ने जेवर एयरपोर्ट का किया उद्घाटन, सपा पर बोला हमला, कहा- नोएडा को लूट का माध्यम बना दिया था

    पीएम मोदी ने जेवर एयरपोर्ट का किया उद्घाटन, सपा पर बोला हमला, कहा- नोएडा को लूट का माध्यम बना दिया था


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले सपा सरकार में नोएडा को लूट का माध्यम बना दिया गया था लेकिन अब भाजपा शासन में यही नोएडा उत्तर प्रदेश के विकास का मजबूत आधार बन रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जेवर एयरपोर्ट से हर दो मिनट में एक विमान उड़ान भरेगा। प्रधानमंत्री ने युवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि देश के नौजवान समझते हैं कि इस तरह की परियोजनाएं उनके भविष्य को नई दिशा और अवसर देने वाली हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा।

    पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज विकसित यूपी विकसित भारत अभियान के तहत एक नए दौर की शुरुआत हो रही है। उन्होंने वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए कहा कि इस समय दुनिया के कई हिस्सों में संकट की स्थिति बनी हुई है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते कई देशों में खाद्य सामग्री ईंधन और अन्य जरूरी संसाधनों की कमी देखने को मिल रही है। ऐसे समय में भारत भी मजबूती से इन चुनौतियों का सामना कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल भवन का निरीक्षण भी किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।

    एयरपोर्ट से बढ़ती है तरक्की

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसी भी देश में एयरपोर्ट केवल सुविधा नहीं बल्कि विकास को गति देने का माध्यम होते हैं। उन्होंने बताया कि साल 2014 से पहले देश में केवल 74 एयरपोर्ट थे जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 160 से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि अब हवाई कनेक्टिविटी सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही बल्कि छोटे शहरों और कस्बों तक भी तेजी से पहुंच रही है।

  • सिर्फ मेरा धर्म ही सत्य कहना अस्वीकार्य हाई कोर्ट ने धार्मिक टिप्पणी पर दी कड़ी चेतावनी

    सिर्फ मेरा धर्म ही सत्य कहना अस्वीकार्य हाई कोर्ट ने धार्मिक टिप्पणी पर दी कड़ी चेतावनी


    इलाहाबाद । इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि भारत जैसे बहुधार्मिक और सेक्युलर देश में कोई भी व्यक्ति यह दावा नहीं कर सकता कि केवल उसका ही धर्म सत्य है और बाकी सभी गलत हैं अदालत ने यह टिप्पणी एक पादरी द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए की जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को निरस्त करने की मांग की थी

    मामला उत्तर प्रदेश के मऊ जिले से जुड़ा है जहां वर्ष 2023 में पादरी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी आरोप था कि वह प्रार्थना सभाओं के दौरान यह कहते थे कि संसार में केवल एक ही धर्म सत्य है और वह ईसाई धर्म है साथ ही उन पर यह भी आरोप लगाए गए कि वे अन्य धर्मों को नीचा दिखाते हैं जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं

    न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि भारत का संविधान सभी धर्मों को समान सम्मान देने की बात करता है और यही इसकी मूल भावना है ऐसे में किसी एक धर्म को सर्वोच्च या एकमात्र सत्य बताना न केवल सामाजिक सद्भाव के खिलाफ है बल्कि कानून की दृष्टि में भी आपत्तिजनक हो सकता है अदालत ने यह भी कहा कि विविधता में एकता भारत की पहचान है और इसे बनाए रखना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है

    अदालत ने विशेष रूप से आईपीसी की धारा 295ए का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी धर्म या उसके अनुयायियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का प्रयास करता है तो यह दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है पादरी के कथित बयान इस दायरे में आते हैं या नहीं इसका निर्णय निचली अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा

    पादरी की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को बेवजह परेशान किया जा रहा है और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं उन्होंने कहा कि जांच के दौरान भी धर्मांतरण जैसे आरोप साबित नहीं हुए हैं और बिना निष्पक्ष जांच के ही चार्जशीट दाखिल कर दी गई है इसलिए मामला रद्द किया जाना चाहिए

    वहीं सरकारी पक्ष ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामला बनता है और इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता अदालत ने भी इस तर्क से सहमति जताते हुए कहा कि समन जारी करने या संज्ञान लेने के लिए प्रारंभिक साक्ष्य पर्याप्त होते हैं जिनका मूल्यांकन मजिस्ट्रेट द्वारा किया जा सकता है

    अंततः अदालत ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए याचिका में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता और इसे खारिज किया जाता है इस फैसले के साथ ही अदालत ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि धार्मिक सहिष्णुता और आपसी सम्मान भारतीय समाज की आधारशिला है और इसे किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं होने दिया जा सकता